Unplugged ft. Akshat Gupta | Mahabharat | Ramayana | Love Story | Spirituality | Bhagwat Geeta
भगवान शब्द भगवान ही क्यों होना चाहिए? व्हाई भगवान? ओम. क्योंकि भ से भूमि, ग से गगन।. रामायण में सबसे गलत समझी हुई कहानी क्या. है? बहुत सारी है जैसे लक्ष्मण रेखा असल में. रामायण में नहीं लिखी हुई।. इतनी सारी रामायण कैसे है? कि एक ऐसा भी वर्जन है जिसमें रावण और. सीता को पिता पुत्री बताया गया।. हनुमान जी चिरंजीवी कैसे बने? राम जाते समय उनको ये वरदान देके गए. प्यारी सी कहानी है कि. रामायण एक कौन सी कहानी है जो आपको लगता. है सबसे कम पॉपुलर है बट बड़ा इंपॉर्टेंट.
चैप्टर है. महिलाओं की एक ऐसा रामायण सुनाता हूं जो. ना आपने ना आपके दर्शकों ने कभी नहीं सुना. होगा मैंने नाम दिया उसको सीतायन एक शब्द. आया अरब कंट्रीज से वो शब्द है औरत औरत. शब्द का कोई दूसरा मतलब नहीं होता है. सिवाय एकलौते. मतलब का और वो है वाइना. महाभारत में मेरा एक बड़ा फेवरेट कैरेक्टर. है कर्ण का कर्ण के साथ गलत हुआ कर्ण ने. गलत किया. ये कृष्ण जी ने धोखे से क्यों मारा उसकी. कहानी. दुर्योधन को स्वर कैसे मिल गया? मारा तो उसे भी छल से गया था।. एक तो छल से मारा गया था। दूसरा एक तो. उसको उसका पूरा शरीर वज्र का नहीं बन पाया.
था। उस पे भी छल हुआ।. अगर आपको महाभारत में अपना एक हीरो चुनना. हो जिसके दृष्टिकोण से आप महाभारत. देखेंगे।. वेदव्यास. क्या किरदार रहे होंगे जिन्होंने महाभारत. पूरा देखा और जो चिरंजीवियों में भी एक. है। अभी तक है।. शकुनी के नाम का मंदिर भी है।. हैं। शकुनी के नाम का है रावण के नाम का. है।. रावण का तो ये ग्रेटर नोएडा है। हमारे. पड़ोस में ही है। लंका जो थी उसके प्रमाण. क्यों नहीं है? और श्रीलंका में लोग रावण. को क्यों नहीं पूजते? ग्रंथों के हिसाब से. यह श्रीलंका वाली लंका नहीं है। लंका अलग. थी।. महाभारत में सबसे बड़ा दोषी किसे मानते. हैं? एक आध किसी किरदार को छोड़ के सबको।. गांधारी की तरफ खड़े होकर देखेंगे तो उनके.
हिसाब से तो कृष्ण भी गलत थे। गांधारी ने. कृष्ण को श्राप दे दिया था आखरी में।. मेरे परिवार की भांति यधुवंश का भी विनाश. हो जाए।. कि तुम्हारा भी कुबा फलेगा फूलेगा नहीं।. नागा साधुओं को लेकर सबसे बड़ा मिथ क्या. है? तो एक तो यह है कि नागा साधुओं को आप. अगोरियों से कंफ्यूज ना करें। एक सबसे. बड़ा मिथ यह है कि नागासाधु मतलब नंगा।. ऐसा नहीं है।. महाभारत में किसके साथ ज्यादा गलत हुआ? अश्वत्थामा या कर्ण? कर्ण।. लोग अपने बच्चों का नाम विभीषण क्यों नहीं. रखते? क्योंकि विभीषण तो भगवान राम के साथ. ही थे। बाकी सब बदनाम नहीं हुए। विभीषण.
क्यों बदनाम हो गए? विभीषण को हम लोग क्यों ट्रोल करते? वो तो. हमारे साइड है।. भगवान शिव से एक सवाल पूछने का मौका मिले।. मेरे को अपने पास कब बुला रहे हैं? मेरा. हो गया है।. रामायण में कोई एक किरदार जिससे मिलना और. कुछ पूछना हो क्या पूछेंगे।. जामवंत से मिलना चाहता हूं।. जामवंत से क्यों? माना गया है कि वो. हनुमान से कहीं ज्यादा बलशाली थे जब वो. अपनी जवानी की अवस्था में थे। सीता जी का. त्याग या द्रोपदी का गुस्सा।. द्रोपदी का गुस्सा।. अगर फेयर वॉर होती, तो क्या कौरव से पांडव. जीत पाते? अगर फेयर वॉर होता तो वॉर फेयर नहीं होता।. क्या यह नाइंसाफी नहीं थी कि आपने दो. लोगों की कहानी को दर्द बनाकर बेच दिया?
हमारी पत्नी को हमारे एक दोस्त से प्रेम. हो गया।. हर कहानी के दो पहलू होते हैं।. मैं तो चाहता हूं कि यहां एक और कुर्सी. लगे।. के कोई दीवाना कहता है, कोई ऑथर समझता है. मगर अंदर के टूटे आशिक को बस एक शायर. समझता है।. अक्षत गुप्ता जी बहुत-बहुत स्वागत है।.
प्रणाम।. और ये मुस्कुराहट कह रही है कि सही नफ्ज़. पकड़ लिया।. नहीं नहीं आप बिल्कुल सही नफ्ज़ पकड़ी है. आपने। कि कोई दीवाना कहता है, कोई ऑथर. समझता है। लोग कहते हैं जब दिल टूटता है. तो आदमी अध्यात्म की तरफ चला आता है और. उसमें रम जाता है। कुमार विश्वास भैया को. भी हमारा प्रणाम।. भैया नमस्ते।. सही कहानी है ये? बिल्कुल सही कहानी है। और कौन ऐसा है अगर. अगर जिसने ब्रह्मचर्य ना अपना लिया हो वो. यह नहीं कह सकता कि वो कभी दीवाना नहीं.
हुआ होगा। दीवानगी अलग-अलग चीजों पर होती. है। शुभांकर भाई कभी किसी महिला के प्रति. होती है। अगर आप पुरुष हैं तो वैसे पुरुष. होकर पुरुष के प्रति भी हो सकती है। उसमें. कोई दिक्कत नहीं है। कभी अपने काम के. प्रति कभी माता-पिता के प्रति देश के. प्रति तो दीवानगी किसी और चीज की हो सकती. है। किसी और को हो सकती है। और दीवानगी की. जो परिभाषा है वो समय-समय पे एक ही जीवन. में बदलती भी है। लेकिन कोई यह नहीं कह. सकता कि मैं दीवाना कभी नहीं हुआ।. पॉलिटिशियन दीवाना है वोट के लिए। आप.
इंकार नहीं कर सकते।. मैंने एक कंपोजर है मेरे बहुत फेवरेट. मिथुन।. मिथुन।. तो मिथुन का मैंने पॉडकास्ट किया था।. जी।. और मिथुन और हमारी चर्चा में एक चर्चा आई. कि इस देश में लोग दर्द को ग्रहण अच्छा. करते हैं।. जी।. फिर मुझे याद आने लगे अक्षत गुप्ता के वो. वीडियोस जिसमें वह अपनी पत्नी का जिक्र. करते हैं। एक्स वाइफ जिसमें वह अपने बेटे. का जिक्र करते हैं और सारा देश उनके लिए. बुरा फील करता है कि यार बड़ा गलत हो गया।.
एक गलती तो अभी तक चल ही रही है। मैं अभी. भी 11 साल से ऊपर हो गया अपने बेटे से. मिलने का, उसको छूने का। उसका उसकी पसंद. और नापसंद जानने का अभी भी इंतजार कर रहा. हूं। तो गलत तो हो रहा है और दो तरीके के. डिवोर्सेज होते हैं। एक दो समझदार लोगों. के बीच में और एक दो बेवकूफों के बीच में।. समझदारों के बीच में जो डिवोर्स होता है. वो उदाहरण के तौर पे रितिक साहब और सुजन. मैम जैसा होता है कि ठीक है हम लोगों की.
दो लोगों की साथ में नहीं पट रही है।. लेकिन साथ में नहीं पट रही है लेकिन उसके. बाद भी हम लोग एक ही ट्रेन के पटरी है. जिसके बीच में दो तीन एक आध बच्चा है। तो. हमारी नहीं पटरी है लेकिन वो पटरी पटरी ही. रहे ताकि उस बच्चे का जीवन सुचारू रूप से. चले। वो एक ऐसे ऐसी तकलीफ में ना घुस जाए. जो उसको जीवन भर आपके और मेरे मरने के बाद. भी जीनी पड़े कि मेरे को वो नॉर्मल बचपन. नहीं मिला।. पूरी कोशिश की गई थी कि ऐसा ना हो। पर.
लेकिन आपकी कहानी शिखर धवन वाली है।. जी है।. शिखर धवन आयशा मुखर्जी वाली।. हां मेरी थोड़ी दिनेश कार्तिक वाली भी है।. हां. मतलब यह बड़ा हैरान दिनेश कार्तिक की लव. स्टोरी का आपने जिक्र कर दिया। बिल्कुल. सही बात है। वही कहानी है। दिनेश. मैं दिनेश कार्तिक के डिवोर्स की बात कर. रहा हूं।. मैं समझ गया। दिनेश कार्तिक की पत्नी मैंl. में मैच देखने आती है। मुरली विजय से. मुलाकात होती है। मुरली विजय प्रेगनेंसी. के टाइम में प्यार हो जाता है और आज भी. दुनिया में फ्रेंडशिप डे पर दोस्ती पर दगा. की सबसे मशहूर कहानी है।.
जी।. दो साल पहले आपने सुनाई थी। हम चाहते हैं. थोड़ा सा जिक्र करके निकल जाइए। कैसे दगा. हुई थी? ताली दोनों हाथ से बजती है। गलती दोनों की. होती है।. बिल्कुल जाहिर सी बात है। रिश्ता एक इंसान. की वजह से नहीं टूटता।. तो मैं ज्यादा घुल मिल गया था अपने काम के. प्रति। बैलेंस बिगड़ता है। उस समय दीवानगी. काम की थी। पांच रेस्टोरेंट थे और बनाने. थे।. लव मैरिज करने के बाद।. जी।. आप भटक गए थे काम के टुवर्ड्स।. जी।. फिर देखिए सबको सबकी अपनी-अपनी जरूरतें.
होती है। कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनको बहुत. सारा पैसा चाहिए। एक्चुअली जिसके पास जो. नहीं होता है ना उसको वही चाहिए होता है।. बिल्कुल सही बात है ना? सहमत हूं मैं।. हां। तो जिसके पास पैसा नहीं होता है उसके. घर के लोग जो उस पे आश्रित होते हैं वो. बोलते हैं कि नकारा है। ये कुछ किया नहीं।. हमको अभाव है चीजों का।. एक समय में वो भी गुजारा। तो मैं मेरा. एकदम एक सूत्री कार्यक्रम बन गया कि मैं. इतना पैसा कमाऊंगा कि कभी किसी चीज की कमी. ना पड़े। मैं उसमें इतना घुला, इतना रमा.
ऊपर से होटल रेस्टोरेंट का काम था। तो. हमारा लौटने का समय ही 1 2:00 बजे रात का. नॉर्मल है और मैं अपनी अपने अपने परिवार. का पहला जनरेशन नहीं हूं। होटल इंडस्ट्री. तीसरा हूं। तो हमारे घर में बहुत नॉर्मल. है कि 1 2:00 बजे आ रहे हैं फिर खाना खा. रहे हैं। फिर सो रहे हैं 11 12:00 बजे. दोपहर में उठ रहे हैं क्योंकि मालूम है कि. फिर 2:00 बजेगा।. उस चक्कर में घर से मेरा ध्यान बहुत. ज्यादा छूट गया। तो जब पैसे की कमी खत्म. हुई तब जरूरतें सामने वाले पक्ष की बदली.
की। वक्त चाहिए, घूमने जाना है, समय. चाहिए, प्यार चाहिए। मेरे पास नहीं था।. मैं अपनी चीजों में उलझा हुआ था। और जरूरी. नहीं है ना कि आपको प्यास लगे तो बिसलरी. या किसी मिनरल वाटर बतल का ही पानी. पिएंगे। जब प्यास बहुत ज्यादा लगती है तो. आप नल से भी पीते हैं, स्टील के ग्लास में. भी पीते हैं, घड़े से भी पीते हैं। कहीं. से बहुत ज्यादा प्यास लगे तो ऐसे उठा के. भी पीते हैं। है ना? फिर वो कुआं हो, नदी. हो, तालाब हो, कुछ भी हो। क्योंकि उस समय. सबसे जरूरी हो जाता है प्यास।.
तो बस मैं उसको समय पर समझ नहीं पाया। तो. दूरी होते कोई भी अकेला नहीं रहना चाहता।. इंसान प्यार का भूखा होता है।. कोई अकेला नहीं रहना चाहता। तो अकेलेपन को. भरने के लिए जो सबसे करीबी साथ मिला दो. लोग साथ हो लिए। बट मेरे मन में जब ये. कहानी मैं सुन रहा था तो कई बार मुझे. ख्याल आया कि क्या ये नाइंसाफी नहीं थी कि. आपने दो लोगों की कहानी को दर्द बनाकर बेच. दिया। उसे. क्योंकि वर्जन एक तरफ़ा था।. हो सकता है सच हो। पर हर कहानी के दो पहलू.
होते हैं।. मैं तो चाहता हूं कि यहां एक और कुर्सी. लगे।. सामने एक नहीं उस एक कुर्सी पे दो लोग. बैठे हैं।. देखिए अब आपकी शादी हो गई है। नई वाली. भाभी हमारी है।. नहीं नहीं उसमें कोई दिक्कत नहीं है। और. एक शब्द आपने. अब आप एक नई बिटिया के बाप भी बन चुके. हैं।. जी ये पहली बार आपके ही पडकास्ट में बोला. है।. जी आपको उसके लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।. धन्यवाद।. तो अब आपकी कमिटमेंट चेंज हो चुकी है। तो. नई कुर्सी को लेकर जो ये ब्लश मारा है. आपने ये ब्लश मत। नहीं नहीं ब्लश ब्लश. खुशी वाला नहीं है। हर चीज को गुस्से से.
और भवे तान के बोलना जरूरी नहीं होता। तो. मैं बोल रहा हूं कि मैं तो मैं तो सभी से. बोलता हूं कि एक बार आमने सामने तो बैठा. हो बट दो लोगों के मैं ये समझना चाहता हूं. मैं कि जैसे हर इंसान इस देश में हर इंसान. एक दौर में दर्द से गुजरा है।. हम. अधिकतर लोगों के रिश्ते टूटे हैं। अधिकतर. लोगों के रिश्ते टूटे हैं। और ये मैं. सिर्फ समझना चाहता हूं क्योंकि जो कहानी. बहुत चर्चित हो गई उसको लेकर ही संवाद. होता है।. करेक्ट. और आपकी कहानी बड़ी चर्चित रही। जी. तो मेरे मन में कई बार यह आया कि जब वो. औरत इस कहानी को सुनती होगी मैं कल्पना. करने की कोशिश कर रहा था वो कैसे रिएक्ट.
करती होगी उसका भी एक सच होगा. एक मैं सॉरी बीच में बोल रहा हूं आपने भी. एक शब्द का इस्तेमाल किया कि आपने इस. कहानी को बहुत बेचा विश्वास मानिए इस. कहानी से मैंने कभी एक रुपए भी कमाया नहीं. मैंने कोई ऑटोबायोग्राफी बायोग्राफी लिखी. नाम कमा लिया सर नाम चेहरा चल गया नाम चल. गया. नाम मेरी कहानी और मेरी काबिलियत पे चला. है. ना कि इस बात पे कि मैं मैं अपना दर्द बेच. रहा हूं देखिए दर्द सबको है। अभी जब कैमरा. बंद था तो आपने भी अपना दर्द मेरे से. ज्यादा. सही बात है। है ना? वो अपनी-अपनी चॉइस होती है कि आप अपना.
दर्द कैमरे के सामने बोलना चाहते हैं या. नहीं।. और ज्यादातर लोग अपना दर्द कैमरे के सामने. नहीं बोलते हैं। Instagram हो, Facebook. हो, कोई भी सोशल मीडिया हो उसमें आपको सब. हंसते हुए चेहरे दिखे क्योंकि लोगों को ये. अच्छा लगता है कि जो मुझे ना पसंद करते. हैं उनको ये दिखे कि मैं कितना खुश हूं।. ओके। मगर. आप विश्वास मानिए मैं आप चाहेंगे तो आफ्टर. दी कैमरा मैं आपको नाम दे दूंगा कि कितने. ऐसे लोग हैं जिन्होंने मुझसे पर्सनली. मिलके और मैं स्टेज पे खड़ा हूं और माइक. लेके कई कई 100 लोगों के सामने बुलाया कि.
आपकी उस कहानी के कारण हम डिप्रेशन में. जाने से बच गए।. व्हिच इज ट्रू। ये मैं आपकी कहानी मोटिवेट. भी कर रही थी। मैं कह रहा हूं।. और मुझसे ज्यादातर लोगों ने जिन्होंने. लाइफ में मूव ऑन करने की कहानियां बताई।. को ये कहा कि जब आप अपने दर्द का इजहार कर. देते हैं तो वो दर्द आपके दिमाग से थोड़ा. कम हो जाता है। हल्का मन हल्का आता है।. मेरा सीधा-सीधा ये बोलना मानना है और मैं. ये करता भी हूं। कई बार इसीलिए पॉडकास्ट. में मेरे आंख से आंसू बिछलका है। अब वो. कोई बोल सकता है देखो बेचारा बन रहा है।. तो किसी की सोच मैं बदलने नहीं आया हूं।. बात ये है ना कि अगर आप और अभी मैं अभी आप.
बोल रहे थे कि आप मंदमंद मुस्कुरा रहे. हैं। है ना? मुस्काना हंसना खुश होना ये. मेरा मेरे चेहरे का एक्सप्रेशन है। मेरा. भाव है। है ना? मेरी एक फीलिंग है। वैसे. ही दुख, तकलीफ और रोना भी मेरा ही. एक्सप्रेशन है। तो जब मैं हंसी कैमरे के. सामने कर रहा हूं या अच्छी चीजें सोशल. मीडिया में डाल रहा हूं तो मेरे को इस बात. से शर्म नहीं आती कि मैं अपनी तकलीफ भी. उतनी स्वच्छता से डाल दूं। जैसे अभी एक. डेढ़ हफ्ते पहले मैं मुंबई के घर में एक. दिन मुझे इतना ज्यादा अकेला लग रहा था कि.
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं कहां. जाऊं, किससे बात करूं? क्यों अकेलापन? होता है। सबके साथ होता. है। मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मैं. इंस्टा लाइव चला गया था। मेरे 1.6 मिलियन. फॉलोवर्स हैं। मैं Instagram चालू किया।. मैं बोला मेरा कोई एजेंडा नहीं भाई आने. का। मेरे को ना बहुत अकेला लग रहा था।. मेरे को ऐसा लग रहा था मैं कहीं कुछ कर. नहीं लूं अपने आपको। तो मैं सोचा कि इतने. सारे लोग प्यार करते हैं। तो थोड़ी देर. बाद करूंगा कुछ मैसेज पढूंगा ना तो अच्छा. लगेगा। मैं 20-25 मिनट बात किया। वो मेरे. Instagram पे पड़ा हुआ है। मेरी टीम बोली. हटा दो। एक तो तुमको करना नहीं चाहिए था।.
कर दिया तो हटा दो। बोला क्यों हटा दो? मैं ही हूं अकेला जो रो रहा है। मैं ही. हूं जिसका ब्रेकअप हुआ है। मेरा बच्चा. अकेला बच्चा है जो जिसको माता-पिता दोनों. का सुख नहीं मिला। अनगिनत लोग हैं। उनको. लगता है चलो मेरी बात सुन के ना शुभांकर. भाई अनगिनत लोगों को लगता है कि चलो हम. अकेले नहीं है। अतुल सुभाष को जो लगा बोर. में वो करके मर गया। वो सब कुछ मैंने. किया। अतुल सुभाष और मेरी कहानी में जो एक. सबसे बड़ा फर्क है वो यह है कि उसने. सुसाइड अटेम्प्ट किया और वो चला गया।. मैंने सुसाइड अटेम्प्ट किया और मैं बच.
गया।. लेकिन मैं बहुत सारे अतुल सुभाष बनाने से. बचा ले रहा हूं। यह मेरे को पता है। बहुत. सारे लोग क्योंकि उनको लगता है कि अरे यार. ये ऐसी चीज नहीं है जो एक एक लाइन है ना. शुभांकर भाई जो लोग अपने आप को बोलते हैं. ये सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? जो. लोग मेरे को जानते सुनते हैं ना उनको. मालूम है कि हम अकेले नहीं है। ये सब. हमारे साथ अकेला नहीं हुआ। इसके साथ भी. हुआ। यह मरी हालत से निकल के यहां तक. पहुंचा है। अगर अगर हम डिप्रेशन से. निकलेंगे, अगर हम अपनी परेशानी को मुंह से. बोलेंगे और अगर हम सुसाइड के ख्याल से बच.
के आगे निकल जाएंगे तो शायद इतने गर्त में. जाने के बाद भी रॉक बॉटम टच करने के बाद. भी हमारी लाइफ ऐसी हो सकती है जैसी इसकी. हो गई है। समय निकालना पड़ेगा। यह थॉट है।. मैंने कुछ चंद लाइनें लिखी थी डिप्रेशन. में कि वो दीवार पर सीलन पड़ती है ना ऐसे. लाइन हो जाता है। उसके बाद आप उसको किसी. भी रंग से पोतते रहिए। आप ब्लैक कलर. करेंगे ना तो वो रस्टेड ब्राउन कलर हो. जाएगा पर वो दिखेगा जरूर। शुभांकर भाई. दीवार के अंदर जब सीलन दिखती है ना तो वो. आखिरी स्टेज ऑफ कैंसर है उस वॉल के लिए।. कई साल पहले से दीवार के बाहर से पानी.
छीटना शुरू हुआ होगा। धीरे-धीरे बाहर की. परत को तोड़ते हुए अंदर घुसा होगा। फिर. सीमेंट को तोड़ते हुए ईंट के बीच से होते. हुए अंदर का प्लास्टर तोड़ा होगा। तब आपको. दिख रहा है कई साल बाद कि ओ मेरी दीवार. में शीलन आ गई। वो उठते समय अकेले जूझ. चुका है ना तब उसके चेहरे पर दिख रहा है. कि उसको क्या हुआ है। वो है आपके अंदर की. दीवार। तो मेरी लाइनें थी कि. दीवार पे जब सीलन दिखती है तब मालूम पड़ता. है कि कतरा कतरा कर पानी रिस रहा था अंदर. ही अंदर धीरे-धीरे कहीं। दीवार पे जब सीलन.
दिखती है तब मालूम पड़ता है कि कतरा कतरा. कर पानी रिस रहा था अंदर ही अंदर. धीरे-धीरे कहीं मुझे शक है कि ऐसा सिर्फ. दीवारों के साथ होता है। मैंने देखी है वो. शक्लें जो कतरा कर रह जाती हैं। आंखों से. रिसती नहीं अंदर ही अंदर टूटती हैं।. दीवारों की तरह ही घुटते घुटते एक रोज वो. भी ढह जाएंगी। मैं बस यही कोशिश कर रहा. हूं। कफ जैसा होता है डिप्रेशन।. ठंड आती है, कफ होता है।. जी।. कफ होता है तो सबसे पहले घर में माएं और.
जब बढ़ जाता है तो क्लीनिक पर डॉक्टर. बोलते हैं बेटा जितनी बार कफ आए थूको।. निगलो मत थूको।. आप एक बार जाकर थूकेंगे खूब सारा कफ. निकलेगा। पर आप आपको लगता है कि अब नहीं. निकलेगा। पांच मिनट बाद कफ फिर आता ना।. आपको अपने सोफे से, बिस्तर से, टेबल से. उठकर फिर बाथरूम जाना पड़ता है। बेसिन के. सामने जाना पड़ता है। फिर से थूकना पड़ता. है। कई दिन आप आप थूकते रहते हैं तब जाके. वो कफ खत्म होता है। डिप्रेशन ऐसे ही है।. एक बार दो बार बोल के वो बात खत्म नहीं.
होती। सुनने वाले को ऐसा लग सकता है कि. हां सुन लिया ना भाई। हां भाई बहुत दुख. है। लेकिन कितनी बार बोलेगा? 100 बार. बोलूंगा। जब तक मेरा दर्द नहीं खत्म होगा. तब तक बोलूंगा। जब तक पूरा कफ नहीं. निकलेगा तब तक बोलूंगा। मैं सबको बोलता. हूं कि अगर आपको डिप्रेशन फील हो रहा है. तो उस कफ को निकालने के लिए एक बेसिन. ढूंढिए।. फिर लोग बोलते हैं कि अरे लेकिन एक हमारे. लोग दो चार पांच बार सुनते हैं फिर बोलते. हैं हो गया ना कितनी बार बोलोगे। आपके घर. में अगर दो बाथरूम चार बाथरूम है। एक. बाथरूम का बेसिन चोक हो जाएगा। बाहर पानी.
आने लगेगा तो थूकना छोड़ देंगे। कमोड. ओवरफ्लो कर देगा तो पॉट सुसु जाना छोड़. देंगे। नहीं ना? आप दूसरे बाथरूम में. जाएंगे। एक आदमी नहीं सुनना चाह रहा है।. एक इंसान का जी भर गया आपका दुख सुन के।. नया बेसिन ढूंढिए, नया कांड ढूंढिए। और. अगर आप डिप्रेशन में नहीं है, विश्वास. मानिए आपके आसपास इतने लोग हैं जो सिर्फ. यह चाहते हैं कि आप उनकी बात सुन लें। मदद. तो कोई किसी की नहीं कर सकता। मैं तो 100. बार बोल चुका हूं। कौन चला गया मेरी एक्स. वाइफ और मेरे बेटे के पास जाकर बोलने कि.
सुनो यार बड़ी तकलीफ में है। हो गया ना 10. साल। चलो मान लेते हैं अक्षत गुप्ता की. गलती हो गई। उसके बच्चे से तो मिलने दो।. कोई नहीं कहना। मेरे को मेरा दुख खुद ही. झेलना है।. लेकिन अगर आपके आसपास कोई डिप्रेशन और अगर. आप नहीं है तो आपके आसपास होंगे ही होंगे।. आपके माता-पिता में कोई हो सकता है। आपके. भाई में हो सकता है। आपकी दोस्तों में कोई. भी हो सकता है। कुछ नहीं कर सकते ना। उसके. लिए कम से कम बेसिन बन जाइए।. ठीक है। आपका वर्जन जो है मैं इससे पूरी. तरह इत्तेफाक रखता हूं। बस इतना ही है।.
मैं इत्तेफाक रखता हूं। लेकिन मुझे महेश. भट्ट साहब याद आई। महेश भट्ट साहब ने एक. फिल्म बनाई थी वो लम्हे।. जी। और मुझे बड़ी पसंद वो फिल्म आई थी और. उस फिल्म का जब प्रीमियर हो रहा था तो उस. प्रीमियर पर एक बहुत अच्छा डायलॉग आया था. कि उस औरत की बर्बादी ने मुझे आबाद किया।. जी. ये भट्ट साहब के स्टेटमेंट थे. और मोहित सूरी ने कहा कि मैंने फिल्म वो. इसलिए बनाई क्योंकि सारी दुनिया की तरह. मैं भी सोच रहा था कि भट्ट साहब ने. इस्तेमाल किया उनका।. ये मोहित सूरी के स्टेटमेंट है। वो लम्हे. फिल्म को लेकर जिसमें कंगना एक्टिंग की और.
बड़े खूबसूरत गाने कि तू जो नहीं है तो. कुछ भी नहीं है।. तो मोहित ने कहा जब प्रवीण बाबी की डेथ. होती है तो भट्ट साहब उन गिनेचुने लोगों. में थे जो अंतिम संस्कार में गए थे। जब सब. कुछ हो गया तो वो उस लिमिटेड लोगों में थे. जो अकेले वहां बैठे थे और फिर भट्ट साहब. ने कहा कि उस औरत की बर्बादी ने मुझे आबाद. किया। हमारा रिश्ता था वो डिप्रेस थी।. मैंने हमारी जिंदगी पर एक फिल्म बना दी।. सारांश फिल्म हिट गई। परवीन और डिप्रेशन.
में चली गई।. मैं बड़ा स्टार बन गया। मिलने के पहले वो. सुपरस्टार थी।. मुझे जो आप बात कह रहे हैं मैं उससे पूरी. तरह इत्तेफाक रखता हूं। इस दौर से हम सब. गुजरे और कह देने से दिल हल्का होता है।. मेरा सवाल सिर्फ इसलिए था कि. कभी आपने सोचा कि ये जब बातें जाती होंगी. क्योंकि आप एक शायर भी हैं, ऑथर भी हैं।. आप सोचते भी हैं, गहन चिंतक भी हैं। उस. कहानी को दूसरे वर्जन में लिखना हो तो. कैसे लिखेंगे आप? दूसरे वर्जन में. क्योंकि ये कभी आया नहीं। मैं चाहता हूं.
आज आप एक ऑथर के तौर पर कल्पना कीजिए कि. ये कहानी आपने कही। किसी ने कहा नहीं होगा. इंटरनेट की दुनिया बहुत छोटी है। आप कितना. भी बचेंगे सामने तो इंसान आ ही जाता है।. आंख नाक भी कर भी इंसान देख ही लेता होगा।. देख ही लेता होगा।. देख ही लेता होगा और ये कहानी उन्होंने भी. सुनी होगी।. बच्चे को तो पता ही होगी भले बात नहीं. करवा रहे हैं।. हां।. वो भी जानता होगा कि पापा मेरे मिस करते. हैं। इस कहानी का अदर वे वर्जन कैसे आप कर. रहे होंगे? मतलब सामने वाले की तरफ से देखिए इसमें. पहले सबसे पहले तो यह बात है कि. यह सिर्फ सामने वाले का वर्जन नहीं है ना.
ये मेरा भी पूरा जीवन हिला. है ना और वो जीवन मैंने नहीं हिलाया मैंने. नहीं बोला था कि मुझे छोड़ के चला जाया. जाए है ना तो सामने अभी आज की डेट में मैं. कहीं पहुंच गया हूं मैं बोल पा रहा हूं. लोग सुन रहे हैं तो यह बोलना बड़ा आसान है. आपके लिए नहीं किसी के लिए भी कि देखो ये. अपनी बात रख रहा है आप इंदौर जाइए कभी और. इंदौर दौर में 2014 के समय अक्षत गुप्ता. के बारे में पूछिए। उस समय हर न्यूज़पेपर. के फ्रंट पेज में मेरे को घरेलू प्रताड़ना.
करने वाले शख्स के तौर पे फ्रंट पेज पे. मेरा और मेरे माता-पिता की तस्वीरें छपती. थी।. ये इस लेवल पे गया था ये।. जी हां।. वो परिवार वहां का पुराना परिवार है। वो. ज्यादा रसूखदार थे। थे ज्यादा लोग जानते. थे। हम बाहर से आए हुए थे। हम अंबिकापुर. नाम के गांव से छत्तीसगढ़ से आके वहां बसे. थे। हमारा कोई पुराना वहां रूट्स नहीं था।. गुंडई, मारपीट, पुलिस, कोर्ट कचहरी.
और इस तरीके के टोंट कि बताओ कितना बड़ा. फेलियर है ये आदमी कि अपने रेस्टोरेंट्स. नहीं चला पाया, अपना रिश्ता नहीं चला पाया. और सुसाइड करने गया। उसमें भी फेल हो गया।. यह बैठ के सुने मैं मेरे माता-पिता पुलिस. थाने के बाहर बेंच में बैठ के इंतजार कर. रहे थे कि हमको अंदर बुलाया जाएगा बेइज्जत. करने के लिए क्योंकि महिलाएं तो हमेशा सही. होती है ना अभी वो इंदौर में अभी जो हुआ. है कांड वो तो सबको पता है लेकिन महिलाएं. हमेशा सही होती है ना तो ये सब जो झेला है.
वो वो मैं और मेरे माता-पिता. बच्चे से जिसकी दूरी कर दी गई वो मैं और. मेरे माता-पिता और उस समय इंदौर में हम. लोगों की जो दुर्गति करने की कोशिश की गई. आप समझिए कि इस चीज पे कोई कसर नहीं छोड़ी. गई थी कि हम बर्बाद ना हो हम मर जाएं. कि जब वो सुसाइड करने के बाद मैं थाने में. बैठा था ना यहां सलाइन वाला वो लगा हुआ था. तब यह बात बोली गई थी कि इतना बड़ा फेलियर. है कि सुसाइड करने गया उसमें भी फेल हो.
गया और जब यह सुन के मेरे माता-पिता रोने. लग गए थे मैं उनका बड़ा बेटा हूं 33 साल. की उम्र थी उस समय. जब उन्होंने देखा कि ये लोग रो रहे हैं तो. बोले कि बट कोई बात नहीं रोने की क्या बात. है? ट्राई एंड ट्राई एंड ट्राई बट डोंट. क्राई। हम और आइडियाज देंगे। इस बार फेल. नहीं होंगे। फिर से कोशिश करो।. किसने कहा था ये? छह सात लोग वहीं खड़े हो के बात कर रहे. थे। वो जो इससे स्कूल कॉलेज में नहीं होता. था कि एक ग्रुप में लोग खड़े हो के बात कर. रहे हैं। आपको टों्ट कर रहे हैं। लेकिन आप. बोलेंगे ऐसे कैसे बोले? बोले आप तेरे को. थोड़ी ना बोला आपस में बात कर रहे हैं। ये.
सब नीचता देखा हूं मैं।. अच्छा मेरे एक सवाल. और उसके बाद भी मैं अभी भी कड़वाहट में. नहीं बोल रहा हूं। मैं ऐसेसे करके नहीं. बोल रहा हूं। यह कर लूंगा, वह कर लूंगा।. मैं क्यों नहीं बोलूं अपना दुखों? मेरा भी. जीवन था। मेरे माता-पिता का भी जीवन था जो. बर्बाद हुआ। आज तक मैं कहीं एक ये बात. नहीं बोला। मैं बोल रहा हूं। मैं तो अपने. साथ जो सुसाइड करने की कोशिश किया ही पांच. दिन अस्पताल में पड़ा था। मालूम नहीं था. जिंदा बचूंगा कि मर जाऊंगा। जब सुसाइड से. बच गया तो सरकार ने केस किया था। सुसाइड.
करना एक क्राइम है। वो केस लड़ा हूं। उस. पे माफी मांगा हूं। उस पे हरजाना भुगता. हूं। मेरे फादर को फुल बॉडी पैरालिटिक. अटैक आ गया। मेरी माता का मेरी मां का. बाईपास सर्जरी हो गया। मेरा एक ही छोटा. भाई है। वो कमर्शियल पायलट था फिलीपींस. में। वो नौकरी छोड़छाड़ के इस परिवार को. संभालने आया। मैं वो दिन देखा हूं कि मेरे. घर का बिजली काटने आए थे। चार महीने से. मेरे घर का बिजली बिल मैं पे नहीं कर पाया. था और वो आए थे। वो पहचानते थे। उनको. मालूम था ठीक-ठाक लोग हैं। बोले अक्षय जी. ₹3500 दे दीजिए। 15 दिन का टाइम दे देंगे।.
मैं और मेरे पिता खड़े होकर ₹300 दे नहीं. पाए थे साहब। घर की बिजली कट गई थी।. उसके बाद अगर आज मेरे को बिजली मिली है. बोलने के लिए तो अगर कोई भी यह बोलेगा कि. तुम बोल क्यों रहे हो? तो जिन्होंने किया. है ना उनको मालूम है कि अभी भी ये जो कर. रहा है ना हमारे साथ कुछ नहीं कर रहा है।. उसकी जगह इसकी जगह कोई और होता और आज जहां. मैं बैठा हूं और जो मैं करने की का मादा. रखता हूं वो मैं पता नहीं क्या करूं।. सर अब एक सवाल सर एक एक आशिक या एक समाज.
के तौर पर मेरे मन में आता है कि दो लोग. एक दूसरे से मोहब्बत करते हैं। दो लोग. मोहब्बत में साथ रहते हैं। एक दूसरे को. अपनी दुनिया बना लेते हैं फिर जब वो. बिछड़ते हैं तो वो एक दूसरे के दुश्मन. क्यों बन जाते हैं? एक दूसरे से अनजान. क्यों बन जाते हैं? एक दूसरे की जिंदगी. बर्बाद क्यों करने लग जाते हैं? एक दूसरे. से नफरत क्यों करने लगते हैं? वो सारी. दुनिया से बाकी जुड़े रहते हैं। बस वही दो. लोग आपस में नहीं होते हैं जिन्होंने कभी. एक साथ रहकर साथ जीने मरने की कसमें खाई. थी। दोनों इसी दुनिया में जी रहे हैं।.
दोनों जुड़े हुए हैं। दोनों के जीवन पर. असर है और ये आपकी कहानी नहीं सब की कहानी. है। कई बार मुझे लगता है कि मोहब्बत करना. क्यों जरूरी है? क्योंकि मोहब्बत में आप. बिछड़ कर उसी शख्स से अनजान हो जाते हो. जिस जो आपका सबसे करीबी होता है।. सच।. क्यों? इसके लिए भी आपको एक चेयर लगाना पड़ेगा।. क्योंकि विश्वास मानिए कि मुझे कोई नफरत. नहीं है। मुझे मैं भूल जाऊंगा। वो जो. बोलते हैं ना फॉरगिव एंड फॉरगेट मैं कर. लूंगा। हम. लेकिन. वो महिला और वो मित्र मेरा मेरा मेरा. पास्ट हो सकता है। मैं उनको जाने दे सकता.
हूं। मेरा बेटा जीवित है ना वो सांस ले. रहा है ना उसका प्रेजेंट है ना वो जो. हैंपर हो रहा है। और हैंपर मैं इसलिए नहीं. बोल रहा हूं कि मेरे टच में नहीं है। मेरे. होने से मैं कुछ मैं जो कर सकता हूं वो. करूंगा। जो कर पाता करता लेकिन जो समझा. दिया गया ना उस बच्चे को वो जीवन भर उसके. केस केस में जिएगा कि मेरे पिता ऐसे थे जो. कि सच नहीं है। मैं मैं अपने पास्ट को माफ. कर सकता हूं। मैं अपने पास्ट को भूल सकता. हूं। मैं अपने प्रेजेंट को कैसे भूल जाऊं।.
मेरे को पता है ना वो कैसा दिखता है। आप. आप अभी पिता नहीं है ना। मैं मतलब यह नहीं. कह रहा हूं कि आप नहीं समझ पाएंगे। लेकिन. जिस पे बीतती है ना उसी को समझ में आता।. आपको एक छोटा सा पिन भी चुभेगा और सबको. पिन चुभा होगा, कांटा चुभा होगा। लेकिन जब. आपको चुभेगा ना तो आपके आसपास वाले कितने. भी गरीब हो, आपके माता-पिता भी क्यों ना. हो, आपसे प्यार करने वाली महिला क्यों ना. हो, वो सिर्फ यह बोल पाएगी और कोशिश कर. पाएंगे ये सब यह समझने में कि आपको जो पिन. चुका दर्द कैसा हो रहा है। पूरी कोशिश कर.
पाएंगे। उस पिन के चुभने का जो दर्द है ना. वो सिर्फ और सिर्फ आप ही को एहसास हो।. ट्रू।. बाकी सब कोशिश कर पाएंगे। बाकी सब उसका. हिस्सा होते हैं।. तो उसके लिए आपको चेयर लगाना पड़ेगा. क्योंकि मेरे को नफरत नहीं है।. नफरत जेनुइनली नहीं है। इनफैक्ट अगर सामने. का भी चेयर लगेगा और मुझसे बोला जाएगा कि. एक शब्द अगर कुछ कहना चाहते हो तो क्या. कहोगे तो मैं बोलूंगा थैंक यू। और वो. कटाक्ष नहीं होगा।. प्यार कभी भी किसी को भी हो सकता है। उस. समय बहुत गुस्सा था कि मेरे साथ ऐसा क्यों.
हुआ? पर अब मैं देखता हूं तो मेरे को लगता. है कि बहुत अच्छा कि आप चली गई मेरे जीवन. से। नहीं तो मैं पांच की जगह 15. रेस्टोरेंट चलाता होता। मैं कभी मुंबई. नहीं आता। मैं कभी लेखन नहीं करता। मैं. कभी शुभांग मिश्रा के साथ नहीं बैठा होगा।. होता इस विषय में बात नहीं चलती होती। तो. जो होता है अच्छे के लिए होता है। मैं कभी. उस शख्स से नहीं मिलता जिसने मेरे को. डिप्रेशन से निकाला। मेरा जीवन सवारा बिना. शादी और बिना किसी कमिटमेंट के मुंबई में. 4 साल मेरा पूरा खर्च उठाई। अब वो पन्नों. पर मेरी धर्मपत्नी है। आज भी मेरी सबसे.
अच्छी दोस्त हैं। मुझसे साढ़ साल छोटी हैं।. और मैं बहुत बेशर्मी और बेबाकी से बार-बार. ये कहता हूं कि मैं दोनों हाथ से उनका. दोनों पांव छूता हूं। जब भी मेरे लाइफ में. कोई भी अचीवमेंट होता है। तो. मुझ पे जो एलगेशंस उस समय लगाए गए थे कि. आए दिन रात को मारता था। शराब पी के आता. था।. दहेज मांगता था। लव मैरिज थी। 8 साल तक. दहेज नहीं मांग रहा था यह।. और 8 तक 8 साल तक मैं मार रहा था और मैं. दहेज मांग रहा था और आप 8 साल तक मार खा.
रही थी और आपने कुछ भी नहीं दिया मेरे को. सोचिए. और मैं वही शख्स हूं कि मैं मेरा इतना. हृदय परिवर्तन हो गया कि मैं अब की अपनी. संग समकक्ष का पांव छूता हूं। नहीं साहब. मैं उस समय भी वही था। मैं आज भी वही हूं।. जो जिस लायक होगा ना उसको वहीं रखा जाएगा।. यह लायक है कि मैं इनका पांव छू तो मैं. छूता हूं।. और वो वो उस लायक होती बन पाती तो मैं छू. लेता।.
पर उनसे भी कभी पांव छुआया नहीं। हमारे घर. में वो रिवाज ही नहीं है। हमारे फादर शुरू. से किए हुए हैं कि ठीक है करवा चौथ और ये. और वो पांव नहीं छूना है। हमारे घर की. महिलाएं पत्नियां भी पांव नहीं छूती हैं।. ये रिवाज है मेरे घर का।. ये नफरत को गुस्से को ताकत कैसे बनाते. हैं? एक कहावत है ग्रेटेस्ट रिवेंज इज मैसिव. सक्सेस।. और यह मेरा मूल मंत्र भी है। हेट्रेट जो. है ना शुभांकर भाई वो एकदम.
सच है यह। द ग्रेटेस्ट रिवेंज इज मैसिव. सक्सेस। बड़ा आसान है। गोली मार देना. चाकू मार देना सुपारी देख के मरवा देना।. बड़ा आसान है। अभी इंदौर की तो बात है जो. हुआ है अभी।. मेघालय में. हां। वो ₹500 दे के भेज दिया गया था तीन. लोगों को।. यह यह कोई आपको असल में किसी को तकलीफ. देनी है तो आप अपने ऊपर काम कीजिए। अपने. ऊपर मेहनत कीजिए। उस लायक बन जाइए कि. जितने लोग आपको छोड़ के गए ना वो मन. मसूसे। उनको हो तकलीफ कि अरे यार हमने.
सोचा था खत्म हो गया ये आदमी। मालूम होता. इतना आगे जाएगा तो बना के चलते इस और रोज. मरेंगे।. नफरत जो है ना सच है नफरत जो है. नहीं मैंने खुद यह महसूस किया जो आप कह. रहे हैं. कि कदम कदम पे मैंने देखा है महसूस किया. है तो मैं इसलिए हंस रहा हूं कि. आते हैं शुभांग भाई वापस आते हैं लोग तेरे. को मैं याद तो हूं ना भूला तो नहीं ना भाई. और मन में आता है कि नहीं भाई कुछ नहीं. भूला जो जो किए हो तुम लोग सब याद है सफेद. है हेट्रेड जो है ना.
नफरत जो है ना वो वो बिल्कुल झक सफेद है. प्योर वाइट. अच्छा इस पे कोई मिलावट नहीं हो सकती. मुझसे से किसी ने बड़ी खूबसूरत बात कही कि. सफल व्यक्ति कहीं ना कहीं जीवन में. अपमानित हुए हैं।. या तो गरीबी में अपमानित हुए हैं, मोहब्बत. में अपमानित हुए हैं। समाज ने अपमानित. किया है, सहयोगियों ने अपमानित किया है, परिवार ने अपमानित किया है या कुछ अभाव रह. गया है जिसका अपमान उसे है और उसी के चलते. उन्होंने उस गुस्से को ताकत बनाकर दुनिया.
को दिखा दिया है कि हम ये हैं। आपने अभी. जितनी चीजों पे अपमानित किया है जुड़ा ना. परिवार शब्द हटा दीजिए मेरे मेरे जीवन से. कि परिवार. परिवार में रिश्तेदार का जिक्र कर रहा हूं. मैं परिवार मतलब रिश्तेदार. हां वो किया है किया तो आपने जितनी चीजें. बोली है ना मैं उन सब जगह अपमानित हुआ सब. जगह. रोया हूं तकलीफ पाया हूं आज भी रोना आता. है कि यार इतने बुरे व्यक्ति तो नहीं थे. लेकिन फिर बल मिलता है कि अभी और बताऊंगा. और मेहनत करूंगा और आगे जाऊंगा। आम पर.
समाज में धारणा है मर्द रोते नहीं है। आप. खुलकर इज़हार कर रहे हो कि मैं कमजोर हो. गया हूं। आप दूसरी बार शादीशुदा हो। फिर. भी आपने कहा मैं अकेलापन फील कर रहा था और. मैंने जाकर कहा कि आज मैं अकेला फील कर. रहा हूं। कुछ कर बैठूंगा इससे बेहतर है आप. लोगों से बात करो।. जी।. ये कमजोरी है या दूसरों को ताकत देने की. कोशिश। अपने आप को जीवित रखने का प्रयास. और यह बताने की कोशिश कि कोई कितना भी. बड़ा सेलिब्रिटी हो, कितना भी फेमस हो, कितने भी उसके फॉलोअर्स हो, अंतिम में वो. इंसान ही है। उसको भी हर वो एहसास होता.
है। हम बाहर से क्या लगता है? मैं मैं तो. 33 साल 34 इयर्स की ऐज में पहली बार. बॉम्बे आया था। उसके पहले तो मालूम ही. नहीं था कि कुछ लिख सकते हैं। मालूम ही. नहीं था कि बतिया सकते हैं। लोग सुनेंगे।. नहीं मालूम था। कभी मौका नहीं मिला। तब तक. जब मुंबई या किसी भी मतलब सिर्फ मैं फिल्म. फिल्मी सेलिब्रिटीज की नहीं। मैं बात कर. रहा हूं पॉलिटिशियंस की। मैं बात कर रहा. हूं क्रिकेटर्स की, मैं बात कर रहा हूं. रिपोर्टर्स की। ऐसा लगता था ना कि मतलब यह. जैसा फिल्मों में नहीं दिखा देते हैं। कि.
इधर बोला इसका क्या हुआ? हां इधर फोन दो।. हां ये रुमाल दो। है ना? ऐसा लगता था कि. जब वो बिस्तर में जाते होंगे ना तो उनका. जूता भी कोई उतार के रख देता होगा। और. सुबह उठते होंगे ना तो वो ओम शांति ओम में. नहीं वो पैर शाहरुख खान नीचे करते हैं तो. वो एक चप्पल लेकर पहन। मेरे जैसे एक आम. आदमी को लगता है कि हम लोगों का जीवन ऐसा. ही होता है। सच में कि लाओ लश्कर चल रहा. है। बिल्कुल अंतराज चल रहा है। हमको यह. नहीं समझ में आता है कि दीपिका पादुकोण. जैसी महिला भी डिप्रेशन में जाती है।.
सब लोग अपने अपना-अपना बैगेज ले चल रहे. हैं। एक बड़ी अच्छी कहावत है कि जस्ट. बिकॉज़ आई कैन कैरी इट वेल डजंट मीन दैट इट. इज नॉट हैवी।. मैं मुस्कुरा के ले लेता हूं। इसका यह. मतलब नहीं है कि मेरे को चोट नहीं लग रही. है। मेरे को दर्द नहीं हो रहा है। मेरे को. तकलीफ नहीं हो रही। ये अब वजनी ही नहीं. है। मेरा पास्ट का बैगेज। लेकिन साथ में. एक ये भी कहावत है। आपने सुना होगा।. थोड़ा रट्ट लैंग्वेज में है। गुस्से से और. हक से बोला जाता है कि गड़े मुर्दे कंधे पे. लेकर नहीं चलना चाहिए। बसते हैं साले। सही.
बात है।. है ना? तो ये जो ये जो कहावत है कि गड़े. मुर्दे कंधे पे लेकर नहीं चलना चाहिए। ये. कहावत क्यों है? ये कहावत इसलिए है. क्योंकि एक शरीर को आप अपने कंधे पर. रखेंगे तो आपके नाक के सबसे पास रहेगा। वो. गड़ा हुआ मुर्दा आपने निकाला है। उसको अपने. कंधे पर डाला है। एक तो बदबू आती रहेगी।. इसीलिए बाजते हैं। और दूसरा आप सोचिए कि. आपके प्रोग्रेस का स्पीड कितना स्लो हो. जाएगा। आप एक व्यक्ति दो लोगों का बाहर. लेके चल रहे हैं। लेकिन उसको फर्क नहीं. पड़ रहा ना। वो तो है ही नहीं। आप अकेले.
हैं। मैं यही बोल रहा हूं ना कि मेरे लिए. ये दोनों तो मर चुके हैं।. मैं इनको माफ इसलिए नहीं कर पाता हूं या. मैं वहां फंसा इसलिए हूं। मेरे को पसंद. थोड़ी ना है। शौक थोड़ी ना फंसे रहने का।. लेकिन मेरा बच्चा है ना हर दिन उसका एक. दिन निकल रहा है। मैं आज उसको भारत के. किसी भी बेस्ट ऑफ द बेस्ट कॉलेज में या वो. जो चाहे दिला सकता हूं। मेरे से तुमको. इतनी की इतनी नफरत है कि तुम अपने बच्चे. का नुकसान कर रहे हो।. जो मेरा भी बच्चा है। यह प्रेजेंट की. तकलीफ है भाई। पास्ट की तकलीफ को तो छोड़.
दीजिए। मैं हर दिन प्रेजेंट में जो जी रहा. हूं उसका क्या करूं? आप दे दीजिए जवाब। या यह सही होगा एक बाप. के तौर पर कि हां तो 10 साल पहले मेरा. बच्चा था। छोड़ो हटाओ अपना देख ले तो मैं. सही हो जाऊंगा।. बताइए. अपनी मोहब्बत के आप ही दुश्मन बन गए। सभी. बनते हैं।. वही कि. पेड़ों का ख्याल बहुत था। तो ज्यादा पानी. डालते चले गए।. हां कि मेरा वो पेड़ इसलिए मर गया क्योंकि.
मैंने पानी ज्यादा दे दिया।. इंसान ज्यादा मोहब्बत करता है तो अपनी. मोहब्बत का दुश्मन बन जाता है। मैंने इस. पे लिखा था कि मोहब्बत चाय की तरह होती. है।. चीनी कम रखो लोग पी लेते हैं। ज्यादा बढ़ा. दो। तो एक गुड भी कहते बहुत मीठी है। रख. दो। नहीं चाहिए। ज्यादा नहीं चाहिए।. इसी पे एक और बात यह भी है कि रिश्तों में. बहुत ज्यादा मिठास नहीं होना चाहिए। नहीं. तो चींटियां लग जाती है।. 19-20 का फर्क होल जाता है। जब फर्क 10 20. का हो जाता है. जी. तो रिश्ता टूट जाता है।. खैरात में मिली किसी भी चीज कीमत नहीं.
लगती।. सच है।. कितनी भी कीमती हो।. हां।. बहुत मोहब्बत आप कर बैठे हैं। सामने वाले. को उतना नहीं चाहिए। तो आप अपनी मोहब्बत. के दुश्मन बन जाए। नहीं ये वो वाली बात है. ना भाई आप सोचिए ना कि पृथ्वी में समंदर. का पानी जितना है वो किसी और प्लनेट में. उतारा जा सकता है ना आप एक लोटा लेके आ. जाएंगे तो उसमें लोटा जब भर जाएगा तो उसके. बाद तो पानी बाहर ही बहेगा तो जो पानी. बाहर बह रहा है वो तो वेस्ट ही है अब आप. डालते रहिए लोटे में पानी लोटे का पेट भर.
गया है लोटा भर गया है लेकिन आप समंदर हैं. आपको देना ज्यादा है उसको लेना ही नहीं है. उससे ज्यादा आप कई ऐसे एम्प्लाइज से मिले. होंगे खास करके नीचे तबके में ऐसा ज्यादा. होता है कि अगर किसी की तनख्वाह एक्स व जी. अमाउंट है और आपको लगा यार बहुत बढ़िया. काम कर रहा है और आपने सडनली उसकी तनख्वाह. डबल कर दी। आप देखिए दो महीने बाद से वो. 15 दिन छुट्टी करने लग जाएगा।. हां हमारे यहां ही है।. है ना? वो 15 दिन छुट्टी करेगा। पता है. क्यों? क्योंकि उसको दुगना चाहिए ही नहीं. ना। उसको आप जितना दे रहे थे उसको उतना ही.
चाहिए था। लेकिन आपने बोला बढ़िया बंदा. इसको डबल देंगे। हम. उसने आपका नुकसान करना शुरू कर दिया कि. मैं 15 दिन आऊंगा क्योंकि उसको 30 दिन में. आप जितना दे रहे थे अब उसको 15 दिन में. मिल जा रहा है।. इंटरेस्टिंग यहां से ये अध्यात्म का सफर. कैसे शुरू हुआ? ये दिल टूटने के बाद. आध्यात्मिक हुए आप या मम्मी ब्राह्मण थी. इसलिए आध्यात्मिक बचपन से थोड़ा बहुत था।. थोड़ा बहुत था।. हां लेकिन वो थोड़ा बहुत था ना ये जो आप. रामायण महाभारत सब कंठस्थ किए बैठे आज हैं. और YouTube पे पूरा भरे पड़े हैं। हमको ये. कई बार मैं आपकी पर्सनालिटी समझने में.
थोड़ा कंफ्यूज हो रहा था। मुझे लगा इनकी. पर्सनालिटी थोड़ा हमारे एंकर टाइप की है।. जैसे एंकर्स के बारे में एक बड़ी फेमस बात. होती है कि हर विषय के ज्ञानी होते हैं. ये।. हमारी बिरादरी में कहते हैं कि इनको हर. विषय ज्ञान है।. ये ये हंसते-हंसते मेरे को कटाक्ष मार रहे. हैं।. नहीं नहीं मैं अरे मैं खुद एंकर हूं। अपने. आप पे भी तो कटाक्ष कर रहा हूं।. तो जब मैं आपकी प्रोफाइल पे वीडियोस चेक. कर रहा था। मुझे लगा हर विषय पे यहां पर. जानकारी चल रही है। फिर जब मैंने शुरुआत. से पकड़ना शुरू की भाई जड़ कहां पर है? तो. जड़ में तो आशिक निकला मुझे।. जी। तो मैंने कहा एक आशिक दिल टूटा.
अध्यात्म की तरफ गया तो ये थोड़ा मुझे. समझाइए ना जड़ तो मैंने पकड़ी है जो आशिक. वाली पकड़ ली मैंने अब जड़ से जब ऊपर पेड़. निकल रहा है तो ये कैसे बढ़ना शुरू हुआ. तो. आपके पास सुधांशु त्रिवेदी जी आए हुए हैं. हां. उनकी कथनी है जो मेरे को बहुत प्रभावित की. थी मैंने पहले भी उनका नाम लेकर कोट किया. उन्होंने बोला था कि इंफिनिटी पहुंचने के. लिए अध्यात्म पहुंचने के लिए मोक्ष. पहुंचने के लिए पांच स्टेजेस होते पहला. स्टेज होता है कि आप घर बार से रिश्ता.
नाता आपका टूटने लग जाता है। दूसरा फिर आप. कपड़े लत्ते ब्रांडवंड यह वो नहीं जो है. पहन लेते हैं। आप आपका मुंह उन चीजों से. घटने लग जाता है। तीसरा फिर आप खाने में. चॉइससेस बंद कर देते हैं कि जो रख दोगे खा. लेंगे यार चलेगा। और फिर वही लोग फिर. भिक्षु बन जाते हैं। तो घर में जो भिक्षाम. दही में जो मिल गया चल जाता है। चौथा होता. है कि आप देह के कपड़े भी छोड़ देते हैं।. और पांचवा होता है कि आप अपना प्राण भी. छोड़ देते हैं कि मेरे को इस दुनिया से. कुछ चाहिए ही नहीं। जब एक्सचेंज.
खत्म होता है ना कि मैं तुमको यह दे रहा. हूं तुमसे मेरे को क्या मिलेगा।. जिसके ज़हन में जैसे-जैसे वह चीज़ें खत्म. होती जाती है, वैसे-वैसे उसको संसार से. कुछ चाहिए नहीं होता है। इसीलिए आप देखिए. जो ऋषि मुनि अगोरी नागा साधु हैं ये इतने. उखड़े से चिड़े से क्यों रहते हैं ज्यादातर. क्योंकि उनको आपको ल्यर नहीं करना है ना।. उनको आपसे कुछ चाहिए ही नहीं। फिर आपको. लोपचो क्यों करेंगे? जब आप जाते हैं आप हम. जाते हैं लोल्लोपो करते हुए। हमको उनसे. कुछ चाहिए ना। वो है.
क्योंकि उनको आपसे कुछ नहीं चाहिए। तो यह. पांच स्टेज जो होते हैं मुझे ऐसा लगता है. जब मैंने सुना तो मैं अपने आप से हर कोई. जब सुनता है तो अपने आप से कनेक्ट करने की. कोशिश करता है ना कि यार यह जो बोल रहे. हैं मेरे से कितना जुड़ रहा है। मुझे लगा. जब मैंने सुसाइड अटेम्प्ट की कोशिश की थी. तब गलती से ये चारों पांचों स्टेजेस मेरे. से एक साथ हो गया कि मेरे को संसार से कुछ. नहीं चाहिए था। मैं हार मान गया था। मेरे. को लगा इस जीवन में इस दुनिया में कुछ. अपने लिए बचा नहीं था।. घर लौटते परिंदों से हो गई हमारी जिंदगी।. ना किसी से आगे निकलने की होड़ है ना किसी. के पीछे छूट जाने का।.
एकदम सही बात है। किसी से कुछ चाहिए ही. नहीं था। जब मैं वापस बच गया और मैं एकदम. से मन भंग हो गया था कि अगली कार कौन सी. लेनी है नहीं चाहिए अब और बड़ा घर बनाना. है नहीं करना है छठवां रेस्टोरेंट खोलना. है नहीं करना है बोले अरे तो सही ये सब. नहीं करना है तो करना क्या है बोले पता. नहीं क्या करना है तो मैं उस डिप्रेशन से. लड़ते लड़ते लिखना शुरू किया पहली बार और. द हिडन हिंदू जो मेरी पहली कहानी है वो. मैं लिखना चाह मैं उसको एंडोर्स नहीं कर. रहा हूं इन जनरल बोल रहा हूं वो मेरे जीवन.
की पहली लिखी हुई कहानी उसके पहले मैंने. कभी कोई कहानी नहीं।. क्या उस किताब में क्या लिखा था आपने? कहानी है एक अघोरी की जो पकड़ में आया और. उसके इंटेरोगेशन में जब उसको नारकोटिस्ट. इंजेक्शन और हिप्नोटाइज कर देते हैं। उसको. झूठ बोलने का मार्जिन नहीं है। तो जब वो. कहना चालू करता है तो वो कहता है कि मेरा. नाम ओम शास्त्री है। मेरी. मैं मतलब अमर हूं। इमोर्टल हूं। चिरंजीवी. हूं। और मैं चारों युग से जीवित हूं। पकड़. में आया हूं अब कलयुग में 2021 में। और. मैं चारों युग जी चुका हूं बिना मरे। मैं.
रामायण का हिस्सा भी था, महाभारत का भी, राम से भी मिला हूं, कृष्ण से भी। लेकिन. आई एम नन ऑफ दोस सेवन इमोर्टल्स। मैं उन. सात चिरंजीवियों में से कोई नहीं हूं। मैं. वो आठवां चिरंजीविय हूं जो अभी तक छुपा. हुआ था इतिहास के पन्नों में जिसके बारे. में आपने ना कभी सुना ना देखा ना जाना। अब. मैं बाहर आया हूं क्योंकि मैं ढूंढ रहा. हूं उन सात चिरंजीवियों को। जिनके बारे. में आप और मैं थोड़ा-थोड़ा जानते हैं।. हनुमान, परशुरा, अश्वत्थामा, वेदव्यास, कृपाचार्य, राजा बलि और रावण का भाई. विभीषण। तो मैं इन सात लोगों को ढूंढ रहा. हूं। अब वो प्रॉब्लम ये है कि नारको.
इंजेक्शन और हिप्नोटिज्म के बाद वो झूठ. नहीं बोल सकता। जो वो बोल रहा है वो. मेडिकल साइंस के हिसाब से 2021 में सच. नहीं हो सकता कि तुम कैसे हो जीवित। तो. वहां से मेरी कहानी शुरू होती है। अब वो. उसको. ब्यूटीफुल थॉट ये थॉट मतलब दिल टूटने पर. लोग अक्षरेश की कहानियां लिखते हैं। आपने. तो एकदम सीधे बड़ी गहराई में अध्यात्म की. कहानी लिख दी।. उसका कारण भी मेरा बेटा ही है। उसको. मार्वल की फिल्में बहुत अच्छी लगती थी।. ओके। सुपर हीरो, इमोर्टल्स, थॉर, आयरन मैन। तो मुझे चाहिए था कि ये.
हमारे कल्चर के बारे में, हमारे एंशिएंट. हिंदू स्क्रिप्चर्स के बारे में सीखें।. लेकिन बच्चों को याद करा पाना बड़ा कठिन. है। तो जब उनको मेरे पास से ले जाया गया. था। मुझे ऐसा लगा था कि दो चार छ महीने. में समझा-बुझा के मैं वापस ले आऊंगा। तो. उस समय मैं यह कहानी लिखनी शुरू किया था. कि छ महीने बाद जब मेरे मेरा बेटा वापस. आया तो मैं बोलूं कि वो टाइम के. कंपार्टमेंट्स में जो आपके साथ बिताने. वाला समय था वो आपके बिना भी आप ही का समय. था। वो मैं आपके साथ होके आपके लिए ये एक. कहानी लिख रहा था। तो आज जो देश में सबसे.
बड़ी किताब बनने को है अराउंड 1 मिलियन. कॉपीज अब होने वाला है सिर्फ द हिडन हिंदू. का वो मैं सिर्फ एक बच्चे के लिए लिख रहा. था। लेकिन वो दो चार छ महीने में आए नहीं।. छ महीने का एक साल हुआ, दो साल हुआ, होते. छ साल हो गया। मेरे को द हिडन हिंदू लिखते. लिखते छ साल हो गए। तब जाके वो रिलीज हुई. 2021 में और अब बहुत सारे बच्चे पढ़ रहे. हैं। उनको सात चिरंजीवीों का नाम याद है।. दशावतार का नाम याद है। चार युगों का. डिफरेंस पता है। चार युग कितने-कितने समय. के ये पता है और बहुत सारी चीजें तो वो.
होते-होते हो गया। मैं अपनी किताब प्रमोट. करने पहली दूसरी बार इधर-उधर पडकास्ट पे. गया था। टीम ने सेट कर दिया कि पडकास्ट. करो तो बुक के बारे में बात कर लेना।. 2022 तो आपका ही दौर था।. बोलते हैं लोग।. उसे मैं दौर कहूंगा। समय तो अभी भी है. लेकिन वो दौर था जब आप बाउंड्री लाइन को. हर बॉल मार रहे थे।. पड़ रही थी।. हां।. मारना और पढ़ने में फर्क है।. तो. ठीक है। ये भी समय कालचक्र है। मैं कई बार. सर मैं आपको टोक रहा हूं। जैसे मैं अपनी. लाइफ में जब सबकी लाइफ में उतार-चढ़ाव आते.
हैं तो बहुत टाइम से मैं सोच रहा था कि. क्या है जीवन? मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये सारी चीजें. क्यों होती हैं? इतनी सारी घटनाएं होती. हैं। कभी आप खुश होते हो जो पाते हो छूट. जाता है। कभी कुछ मिल जाता है। कभी क्या. होता है। सो अल्टीमेटली आई डिस्कवर्ड वन. थिंग दैट जीवन जो है वो एक सड़क पर यात्रा. है जिसकी शुरुआत बर्थ से होती है और एंड. डेथ पे होता है।. करेक्ट। और उस रास्ते पर आपको चलते रहना. है।. और उस रास्ते पर ऊपर वाले ने आपके लिए. बहुत सारे गिफ्ट रखे हैं। आगे आगे आगे आगे.
आगे। कुछ हर्डल्स भी हैं, कुछ गिफ्ट भी. हैं। तो जब आप आगे चलते हो तो जो साथ चल. रहा है उसको ले चलते रहो। जो रुकना चाहता. है उसके अच्छे समय को याद करके थैंक यू. बोलो। गजेस छोड़ो और आगे बढ़ो। क्योंकि. अगर आप आगे नहीं बढ़ोगे तो आपको ये एहसास. नहीं होगा कि वो जो आगे भगवान ने आपके लिए. रखा था वो छूट जाएगा। और ये आप ही की. यात्रा है। इस कहानी के हीरो सिर्फ आप हैं. और आप आगे बढ़ते जाएंगे। आपको कुछ मिलता. जाएगा। आपका ब्रेकअप हुआ तो देखिए भगवान. ने आगे आपके लिए एक ऐसी पत्नी रखी थी.
जिसके आप पैर छू रहे हैं।. बिल्कुल।. एक बेटी रखी थी. जी।. जो आपके जीवन को कंप्लीट कर गई। बेटा पहले. था जीवन कंप्लीट कर गई।. नया करियर रखा।. एक नया करियर रखा था। एक ऑथर के तौर पर।. मेरा ब्रेकअप ना हुआ होता तो आज मैं भी इस. कुर्सी पे नहीं बैठा होता। सो मुझे एहसास. होता है कि यही यात्रा है, यही जीवन है और. जैसे एक फिल्म होती है, उसमें अलग-अलग. पड़ाव होते हैं। ऐसे भगवान की डिज़ हर. इंसान की अलग-अलग फिल्म है। तो जब कुछ गलत. हो रहा है तो उसको लेकर रोओ मत।. ये सोचो कि तुम्हारी फिल्म का एक सैड सीन. है। अब इस सैड सीन से तुम आगे बढ़ोगे तो. एक रोमांटिक सीन भी आएगा। एक और अच्छा सीन.
आएगा। गाने भी होंगे, फिर से बजेंगे।. पिक्चर अभी बाकी है मेरे।. पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। लेकिन आप. लोगों ने सुना कि ब्रेकअप सिर्फ मेरा नहीं. हुआ है। इनका भी हुआ है।. सबका होता है। किसका नहीं हुआ है। आई मीन. वही बात है ना कि पीपल आर नॉट वोकल अबाउट. इट।. जैसे आप आपने ये किताब लिख दी। हमने अलग. लिखा था। हमने लिखा था कि सच कहता हूं कि. ना होकर भी हर रोज तुम मुझे याद आओगे।. सच कहता हूं कि ना होकर भी हर रोज तुम. मुझे याद आओगे। किसी से कह तो ना पाऊंगा. पर अक्सर रातों में मेरी आंखों से नींद.
में छलक जाओगे। ओ हो. के ना होने पर भी याद रखेगी दुनिया यह. मेरी कहानी जिसमें होके किसी गैर के तुम. दिल में हमेशा मेरे जिंदा रह जाओगे. और जिस्म तुम्हारा भले किसी और का हो. जाएगा पर मेरी जान बदनाम तो तुम मेरे. प्यार में ही कहलाओगे. ओ हो. हक दिखाकर हर बात मना लेने की जिद में. वास्ता दुनिया का देकर मुझसे जिस्म तो. जुदा कर दोगे तुम पर जरा यह बताओ तुम्हारी. रूह पर जो हमने अपनी खुशबू बिखेरी है उस. खुशबू को कैसे मिटा पाओगे तुम.
हरिहर साहब की एक पुरानी गजल है। उसकी चार. लाइन है कि आप हमारे साथ नहीं चलिए कोई. बात नहीं। आप किसी के हो जाए आपके बस की. बात नहीं।. बट हमने एक और लिखा था जो आप पर सूट करती. है।. अच्छा सुनाइए।. और ये आप सुना सकते हैं अगली बार कि जो तू. नहीं तो चल तू ना ही सही।. जो तू नहीं तो चल तू ना ही सही। वैसे भी. शायद तेरी मौजूदगी मेरी जिंदगी से ज्यादा. मेरे किस्से कहानियों में अच्छी लगती है।.
मोहब्बत का एक अपना भी वर्जन होता है ना. जिसको हमने खूबसूरत बना के रखा है।. करेक्ट।. उस गंदगी को हटा के उसकी खूबसूरती को. जिंदा रख के हमने अपने शब्दों में जिंदा. रखा।. हां अगर सब कुछ खराब ही होता तो 8 साल. थोड़ी ना निकले होते।. कुछ अच्छा भी तो रहा होगा।. हां जानी भाई ने कहा था मेरे हिस्से की. मोहब्बत बचा के रखना। हम किसी भी उम्र में. मिल सकते हैं ज्यादा।. बहुत बढ़िया।. तो ये आपकी पहली किताब आपकी हिडन हिंदू आ. गई। जी तो ये बहुत. इसके बहुत सारे पॉडकास्ट हमने मिलियंस. मिलियंस में पूरे इंटरनेट पे देख रखे हैं।.
जी वो कारण वही था मैं मैं ये सब बात करने. गया नहीं था। वो जो आपने बोला था बेचा वो. यहां लगा है मेरे को थोड़ा जोर से लेकिन. असल में मैं पॉडकास्ट में गया था किताबें. बेचने. हम. लेकिन जब बात हुई कौन हो? कहां से आए हो? बैकग्राउंड क्या है? लिखना कैसे शुरू हुआ? तो लिखना कैसे शुरू हुआ? के जवाब में. मैंने एक बार ये बता दिया।. नहीं मैंने यह सवाल इसलिए पूछा क्योंकि इस. कहानी को हमेशा इसी तरह से लोगों ने पूछा।. जब मैं सुन रहा था तो.
कई बार मुझे लगता है इस दुनिया में सबके. अपने सही गलत होते हैं।. सबके अपने सही गलत है। इस दुनिया में सही. गलत का कोई पैमाना नहीं है। हमारी परवरिश. हमारी आपबीती और हमारी सोच हमारा नजरिया. तय करता है कि क्या सही है, क्या गलत है।. मेरा सही आपका गलत, आपका सही मेरा गलत।. तो जब मैं यहां इस कुर्सी पर बैठता हूं, तो मैं हमेशा उधर वाले की आवाज होता हूं।. मेरी हमेशा कोशिश होती है। तो मैंने उसके. दूसरे सिक्के को समझने की कोशिश में किया।. ये कहानी शुरू की कि क्या एक नजरिया और हो. सकता है? आप अगर ध्यान देंगे तो वो दूसरे. का सिक्का जो आप देखने की बात कर रहे हैं.
मैं सबसे पहले यही बोला ना कि गलती दोनों. तरफ से होती है।. साथ में मैंने यह भी बोला कि मेरी कहां पे. गलती हुई? हां।. है ना? तो हुई गलती. और मैंने मिथुन से कहा था कि आपने दर्द. अच्छा बेचा तो मिथुन ने कहा बेचा नहीं। इस. देश में लोग दर्द अच्छा ग्रहण करते हैं।. ग्रहण करते हैं।. तो मुझे लगा कि जो आपने भी कहानियां. सुनाई। लोगों ने ग्रहण बहुत अच्छा किया।. मैंने यह मेरा लिखा हुआ है कि मैंने पूछा. दर्द से तू क्यों लौट आया? मुस्कुरा के. उसने कहा तेरी तरह मुझे किसी ने नहीं. अपनाया। सो मैं वापस चला गया।. ओके। तो ये आपकी पहली किताब थी। तो अब तक.
आपने कितनी किताबें लिखी? क्या-क्या लिखा. है आपने? नंबर ऑफ बुक्स पांच हैं लेकिन टाइटल्स दो. हैं क्योंकि द हिडन हिंदू तीन।. तीन पार्ट में थी।. और उसके बाद मेरी किताब आई द नागा. वारियर्स। वो दो पार्ट्स में है।. ओके।. अब मेरी जो अगली किताब आ रही है उसका नाम. है द अदर इंडियन। वो पॉलिटिकल साइंस. फिक्शन है। वो सितंबर के आसपास पिग्विन के. द्वारा रिलीज होगी। ये पहले की भी पूरी. किताब है। पिगमन के पास है। हिंदी में. प्रभात के पास है द हिडन हिंदू और मंजुल. के पास है द नारा वारियर्स।. ओके। इसके अलावा कुछ और गाने शेरो शायरेश. कुछ और भी लिखा आपने?
जी जी मैं ये सब करता रहता हूं। अभी एक. फिल्म आई थी बहुत अच्छी नहीं चली। केसरी. वीर नाम था। सुनील शेट्टी साहब थे। विवेक. ओबॉय थे। सूरज पंचोली थे। उसमें एक गाना. है देशभक्ति पे। वो गाना मेरा लिखा हुआ. है। उसकी काफी तारीफ हुई। सुनील शेट्टी. साहब के कुछ उसमें डायलॉग्स हैं। तू शांति. है। तू शांति है, तू युद्ध है, तू. नरसिम्हा है, तू बुद्ध है। तू नमन है, तू. प्रहार है, तू जीवन है, तू अंतिम संस्कार. है। तू ढाल है, तू तीर की नोक है, तू. ब्रह्मांड है, तू तीनों लोक है। तू शोर.
है, तू मौन है। उनको दिखा तेरे दोनों रूप।. उनको चुनना है कि तू कौन है। तो ये उस. फिल्म में जो ये लाइनें हैं वो मेरी लिखी. हुई है। सीएनएन के लिए मैंने एक गाना लिखा. था प्राण प्रतिष्ठा के दिन के लिए 22. जनवरी के लिए वो सीएनए 18 के पूरे चैनल्स. में बहुत दिन तक रोज बजा था। और कई गाने. लिखा हुआ हूं। नौ फिल्में हैं मेरे पास।. अलग-अलग बड़े नॉन प्रोडक्शन हाउसेस के साथ. जो कि डॉक्यूमेंट्री डॉक्यूमेंट्री नहीं. है। सब कमर्शियल फिल्म्स हैं। और लगभग छह.
और किताबों के लिए मैं अलग-अलग पब्लिकेशंस. के साथ साइन हूं। इसके अलावा देश भर में. मैं टॉक शोज़ करता हूं। जहां बुला लिया. जाता हूं स्कूल्स के लिए, यूनिवर्सिटीज के. लिए, कॉलेजेस के लिए, प्रिंसिपल्स के लिए, डॉक्टर्स के लिए, बैंक्स के लिए, कॉर्पोरेट्स के लिए सब जगह।. मैंने जब हमने शुरुआत की थी इस पॉडकास्ट. की तो आपने कहा कि मेरी कहानी दिनेश. कार्तिक के जैसी भी है। अब मुझे लगता है. कि आपकी कहानी में एक नीलेश मिश्रा भी है।. हां, वो मुझे बेहद पसंद है। मैं मिलना. चाहता हूं उनसे। अभी तक हुई नहीं मुलाकात।. बड़ी सिमिलर कहानी है। लेकिन आपकी नीलेश.
मिश्रा जी की।. मेरे को उनकी कहानी नहीं पता है। सॉरी।. यही कहानी ऐसी कहानी उनकी भी जिंदगी है।. हूबहू तभी शायद उन्होंने लिख दिया था कि. मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी ना समझ. समझ लाया गम. तो ये गम ही सही. ये इतने अध्यात्म का सर पढ़ाई कैसे हुई. क्योंकि आई एम श्योर ये अर्ली लाइफ जो रही. होगी उसमें इतना इन डेप्थ तो नहीं पढ़ा. होगा आपने. इन डेप्थ तो अभी भी नहीं पढ़ा है मैं बहुत. सारी चीजों का की एनालॉजी अपने मन से जो. मेरे को समझ में आती है मैं वो बोलता हूं. और कोशिश करता हूं कि यंग जनरेशन जो है.
उनसे कनेक्ट कर पाऊं तो चीजों को. सिंपलीफाई करना बहुत कठिन काम हो जाता है. कई बार।. जैसे अभी मेरे को कई लोगों ने ट्रोल किया. था एक बात पे वो अपनी जगह गलत नहीं है। पर. मेरा जो थॉट प्रोसेस था या जो एजेंडा था. वो ये था कि जैसे मैं मैंने बोला था कि. रावण के बारे में मैंने बोला था कि रावण. की मां का नाम कैकसी था जो कि राक्षसी थी।. रावण के पिता का नाम विषव था जो कि. ब्रह्मा के परपोते थे।. हां।. पोते थे।. तीसरी चौथी पीढ़ी तीसरी पीढ़ी पोते थे।.
चौथी पीढ़ी रावण खुद थे।. तो मेरे को मैं यह समझाने की कोशिश कर रहा. था कि राक्षस का रहा और भगवान का वन. क्योंकि ब्रह्मा जी की लीनिएज और इधर. राक्षस की लीनेज तो उसने अपने तामसिक. तत्वों को ज्यादा हवा दी तो राक्षस का रा. आगे आ गया और भगवान का वन पीछे छूट गया तो. उसका नाम रावण हो गया। आईडिया ये था कि. जितने लोगों को ये बात ना पता हो उनको यह. याद हो जाए। याद रखने के लिए आसान है कि. राक्षस का वन भगवान का। जैसे एक वर्ड है.
विबगोर। यह कोई वर्ड थोड़ी ना है। आपको. रेनबो के कलर्स याद करने का तरीका है कि. वी फॉर वायलेट या आई फॉर इंडिगो. बी फॉर ब्लू। तो वैसे मैंने जैसे बच्चों. को और आसान शब्दों में कि देखो ऐसे-से याद. रख लेना। तो मैंने वैसा बना दिया था। तो. उसको कुछ लोगों ने पकड़ के कि ये महोदय आए. हैं और ये ज्ञान परोस रहे हैं। पता नहीं. कहां पढ़ रहे हैं। पता नहीं कहां से सीख. रहे हैं। क्योंकि रावण नहीं है। वह रावण. है। वर्ण है। हां, सच है। रावण है। लेकिन.
आईडिया यह नहीं है कि मैं किसी लिखी चीज. को गलत बोल दूं या। आप बेसिकली क्या चाहते. हैं जब किसी को कुछ बोलते हैं या समझाते. हैं तो कि उसको याद रहे।. याद रहे।. है ना? उसको ये याद हो कि रावण ब्राह्मण. कैसे था और राक्षस राज रावण भी था। तो अगर. वो राक्षस था तो ब्राह्मण कैसे था? ब्राह्मण था तो राक्षस कैसे था? उसका जवाब. समझाने के तौर पर दिया तो उसका कुछ और हो. गया। भगवान का फुल फॉर्म मैं बोलता हूं।. उसमें भी कुछ लोगों को आपत्ति हो जाती है. कि हम लोगों को बोला जाता है ना कि बड़े.
इलॉजिकल लोग हो तुम लोग हिंदू। दूसरे. समुदाय के कई लोग ऐसा बोल देते हैं कि कुछ. भी करते रहते हो। पत्थर पे दूध चढ़ाते. रहते हो। कोई क्या लॉजिक है? तुम लोग इतने. कंफ्यूज लोग हो। एक गीता पढ़ रहा है, एक. रामायण पढ़ रहा है, कोई महाभारत पढ़ रहा. है, कोई गरुड़ पुराण पढ़ रहा है, कोई शिव. पुराण पढ़ रहा है। एक एक लाइन में पढ़ भी. नहीं रहे हो तुम लोग।. तो मैं मेरा मानना है कि अगली बार अगर. आपको कोई ऐसा कुछ बोले तो आप दो बातें. जरूर बोलिए कि देखो यार आप सबके पास एक-एक. किताब है। है ना? हमारे पास पूरी. लाइब्रेरी है। लाइब्रेरी विद्वानों के.
यहां होती है। अनपढ़ों के यहां नहीं होती।. अनपढ़ों के यहां आपको दो चार मैगजीन. वैगजीन मिल जाएगा। है ना? लाइब्रेरी उसके. घर में मिलेगी जो विद्वान होगा जिसको. जिसको समझ होगी। जो पढ़ना जानता होगा वही. किताबें जमा करेगा। दूसरी बात यह है कि. जहां तक बात है हमारे इलॉजिकल होने का कि. पेड़ में सूतली बांधते रहते हो यह करते हम. इतने लॉजिकल लोग हैं शुभांकर भाई कि. जिस पहले व्यक्ति ने शब्द बनाया होगा ना. भगवान उसने भी सोचा होगा कि भगवान शब्द. भगवान ही क्यों होना चाहिए हगवान लगवान.
नगवान सगवान कुछ भी हो सकता था व्हाई भ ग. वान क्योंकि भ से भूमि ग से गगन व से वायु. व में आ की मात्रा अग्नि और न से नीर मतलब. पानी तो जो भी शक्ति इन पांचों तत्वों को. अपने वश में करना जाना है वो है मेरा मेरा. भगवान तो हम इतने लॉजिकल लोग हैं कि हम एक. शब्द बनाते हैं तो उसके पीछे भी हम उसका. सोच के चलते हैं कि भगवान ही क्यों. तो लेकिन है कभी दूसरों को ऐसा लगता है तो. उस पे फिर जवाब कई बार देना पड़ता है तो. देते हैं तो ये सब करते-करते थोड़ा सीखते.
समझते. दूसरों दूसरे विद्वानों को सुन के कभी कभी. मां ने कुछ बता दिया कभी अब मैं उस लाइन. में बात करता हूं तो अब मैं कहीं जाता हूं. तो वहां के लोग भी मेरे को बता बताने लग. जाते हैं हमारे साइड का ये है ऐसीऐसी सी. कहानी है जो जो अच्छी लगती है मैं ले आता. हूं वो मैं मेरे को सुन के जो अच्छा लगता. है मैं सब तक पहुंचा देता हूं सीधा सा. मतलब पोस्टमैन का काम कर रहा हूं और कुछ. नहीं अभी मैं दुर्गापुर गया था दुर्गापुर. में उतरे तो आदत भी हो गई कि बताओ इस. एरिया का क्या है भाई कुछ इंटरेस्टिंग बात.
बताओ तो बोले कि सर ये दो नद के बीच में. बना है और दुर्गापुर विश्व का पहला वो. कस्बा था जहां नवदुर्गा की पूजा हुई थी. पहली बार बंगाल में मतलब पहली बार बोले. हां सर पहली बार जो नवरात्रि की पूजा हुई. थी नौ दिन वो दुर्गापुर में हुई थी और दो. नद के बीच में मैं बोले नद क्या होता है. बोले सर जैसे नदी होती है वैसे नद होता है. मैंने बोला यार बचपन से 40 साल के हो गए. कभी सुने ही नद नद क्या होता है. सही बात है हमने भी नहीं सुना था. है ना तो मैं बोला कभी सुना नहीं तो वो.
मुस्कुराए बोले कि नहीं सर मतलब इस देश का. बच्चा-बच्चा नद जानता है मैं बोला कैसे उन. बच्चों में हम नहीं रहे. नहीं तो उन्होंने एक बात बोली और मैं सोच. में पड़ गया बोले सर ब्रह्मपुत्र तो सुना. ही है सबने. वो ब्रह्मपुत्री नहीं है ना वो. ब्रह्मपुत्र है वो मेल रिवर है हां. वो मेल रिवर है वो गंगा जमुना सरस्वती. गोदावरी नर्मदा नहीं है वो मेल रिवर है और. दुर्गापुर जिस दो नद के बीच में बना है. उसका नाम है दामोदर नद और अजय नद तो.
ब्रह्मपुत्र इज नॉट ओनली वन मेल रिवर देयर. आर मोर मेल रिवर्स. इंटरेस्टिंग वेरी इंटरेस्टिंग सो वी. हिंदूस हैव मेड सच अ ब्यूटीफुल बैलेंस. इंटू एवरीथिंग. एंड दैट नीड्स टू बी टॉट ब्यूटीफुल। तो. मैं ऐसी चीजें बताता हूं।. चलो मुझे एक सवाल आता है। भारत के पांच. सबसे मिस्टीरियस या सबसे अंडररेटेड मंदिर. कौन से हैं? आपके हिसाब से। जी कहानी बड़ी. इंटरेस्टिंग है। जानना चाहिए। बट उतने.
पॉपुलर नहीं है जैसे बड़े मंदिर हैं। या. आपको भारत के पांच सबसे रोचक अंडररेटेड. मंदिर कौन से लगे? अंडर रेटेड बोलना सही. नहीं है क्योंकि जितनी भी चीजें रोचक है. ना उस पे अब नेट पे बहुत सारी बात हो जाती. है।. हां बट एक होता है ना कि बच्चे-बच्चे के. जबान पर एक होता है कि लिमिटेड लोगों को. पता है. कम लोगों को पता है।. जैसे मैं दव गया मैं इसे भी टोक दे रहा. हूं आपको। मैं मैं दव गया था।. तो दीव एक आइलैंड है सोमनाथ के आगे। मैं. 2019 में पहली बार वहां पर गया और मुझे. बताया गया कि यहां पर एक जगह है. जहां पर पांच पांडव आए थे.
अपने दौर में और समुद्र किनारे पूजा की. ठीक।. और वहां आप जाएंगे तो पांच शिवलिंग है जो. अलग-अलग कद के बने हैं।. ओके।. समुद्र की लहरें आती हैं।. अभिषेक करती हैं और लौट जाती है।. ठीक।. और वो इतना खूबसूरत नजारा है कि उसे देखकर. मैं हैरान था कि यार ये उस दौर में. स्थापित किए गए शिवलिंग।. और वो शिवलिंग आज भी है। लेकिन वहां तब. भीड़ नहीं थी। कोई जानता नहीं था। कोविड. के दौर में मैं वहां घूमने गया था। सोमनाथ. मेरे एक दोस्त उन्होंने कहा चलो द घूम के.
आते हैं। अच्छा है आइलैंड है। मैं गया. वहां पर। मुझे भी मंदिरों की तलाश होती है. कि भाई यहां और क्या है? किला दिखाया. पोर्तुगीज़ सी कहानियां सुनाई कि पोर्तुगीज़. यहां कैसे आए थे। ये उनका चर्च था ये था. और ये मंदिर दिखा। मैंने एक वीडियो बना के. डाल दिया। इंटरनेट पर वो बहुत वायरल हुआ।. उस दौर में बहुत वायरल हुआ कि पांच समुद्र. पर आती हैं, लहरें आती है, अभिषेक करती. हैं, लौट जाती हैं। मैं दो-तीन बार गया।. हर बार थोड़ी भीड़ बढ़ रही इस बार मैं जब. गया तो मैंने देखा कि वहां पर एक भव्य. मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।.
ओके।. बहुत सुंदर मंदिर और दव को अब सरकार डेवलप. कर रही है।. बट अभी भी वो अंडर रेटेड है। अभी भी उतने. लोग वहां नहीं जाते। कुछ लोगों ने जाना. जैसे भालका तीर्थ है।. जहां भगवान श्री कृष्ण को तीर लगा था।. सोमनाथ लोग जाते हैं। उतने लोग वहां नहीं. जाते। लोग जाते हैं तो कुछ मंदिर बहुत. पॉपुलर हैं। उज्जैन का महाकाल, वैष्णो. देवी मंदिर, केदारनाथ मंदिर, अयोध्या का. मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर। वो मंदिर. जहां थोड़े कम लोग जाते हैं उनको मैंनेटेड. कह रहा हूं। पांच कौन से ऐसे हैं? अ एक छोटा सा मंदिर है लमगांव में। लमगांव.
है अंबिकापुर के पास। अंबिकापुर है. डिस्ट्रिक्ट सरगुजा छत्तीसगढ़ में। मेरा. जन्म वहां हुआ है। तो बचपन से हम उसे एक. मंदिर की कहानी सुनते हुए बड़े हुए हैं।. जाकर देखे भी हैं। तो छोटी सी कहानी है कि. एक किसान को सपने में हनुमान जी आ रहे थे।. बोल रहे थे मैं इस पेड़ के अंदर फंसा हुआ. हूं किसी श्राप तले निकालो मेरे को। एक. बार सपना आया ध्यान नहीं दिया। दूसरी बार. सब तो जब दो-तीन बार आ गया और वो सपने में. उसके घर से जंगल के बीच के उस पेड़ तक का. रास्ता दिखाते थे। यह वाला पेड़ है। इधर.
से काटना। इसके नीचे से काट रहा तो चोट. लगेगी। इसके ऊपर काटना। उसके नीचे फंसा. हुआ हूं। वो तीसरे चौथे दिन गया वो. कुल्हाड़ी खरीदने तो दुकान वाला बोला तुम. किसान हो तुम कुल्हाड़ी क्यों चाहिए दो? तो बोला अरे यार भोले लोग होते हैं बता. देते हैं जैसा होता है। बोले अरे मेरे पास. ऐसा सपना आ रहा है मेरे पेड़ काटना है। तो. वो हंसा बोला अच्छा वो थोड़ा आसपास हवा. फैल गई। 8-10 लोग गए उसको गलत साबित करने. के लिए। कि चल हम भी देखें कितने हनुमान. जी निकलते हैं तेरे। वो पेड़ काटा जहां से. उसको बताया गया था सपने में वहीं से काटा।.
उसके अंदर सच में हनुमान जी की मूर्ति. फंसी हुई थी पेड़ के अंदर बीच में. वहां पर फिर एक मंदिर बनाया गया उस मूर्ति. का हाइट बढ़ता है शुभांग में अभी तक बढ़. रहा है तो उसके कुछ साल मतलब बहुत. थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है लेकिन कुछ साल में. उसके छत तोड़ के नया छत बनाना पड़ता है और. ऊपर क्योंकि मूर्ति और बड़ी हो रही है। एक. ये कमाल का है। अभी रिसेंटली मैं गुवाहाटी. गया था।. गुवाहाटी में ज्यादातर लोग कामाख्या देवी. की बात करते हैं।.
वहां पर मैं एक कमाल के शख्स से मिला।. उनका नाम पार्थोदा है। वहां के कमिश्नर. है। एसटीएफ चीफ है। पार्थ आई लव यू टू।. तो उनके बोलने पे उन्होंने बोला तो तेरे. को दो चार मैं अच्छे मंदिर घुमाता हूं।. तेरे को मजा आएगा। ठीक? तो कामाख्या देवी. के बाद मैं गया उमंद मंदिर। उमानंद मंदिर. ब्रह्मपुत्र के नदी के बीच में एक आइलैंड. बना हुआ है। नेचुरल आइलैंड बना हुआ है। उस. पहाड़ी के ऊपर है। आपको नाव से जाना पड़ता. है। कहानी यह है कि कामाख्या देव मतलब.
पार्वती जी वहां आई। फिर वहां से एक सुरंग. है अंदर। कामाख्या मंदिर से एक सुरंग है. जो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे अंदर से उस. आइलैंड में पहुंचती है। उमा मतलब पार्वती।. उस सुरंग से गई थी इस पहाड़ पर इस आइलैंड. पर शिव से मिलने और वहां दोनों एक दूसरे. से मिलकर आनंदित हुए थे तो तो उस मंदिर का. नाम है उमानंद मंदिर. बहुत सुंदर मंदिर बहुत शांति वाला मंदिर. मजा आया फिर उन्होंने बोला कि अक्षत जाने.
के पहले एयरपोर्ट के रास्ते में ना. नवोग्रह पड़ेगा देख लेना तो एक होता है ना. कि भाई देख लिया अभी दो-तीन मंदिर अब अगली. बार के लिए भी तो कुछ छोड़े बोले हां और. बहुत है लेकिन एक बार नवोगृह देख लेना ठीक. शुभांकर भाई मैं आज तक ऐसा मंदिर नहीं. देखा था। उसका गर्भ ग्रह ना हमारे इस हॉल. से भी बड़ा है और वो गर्भ ग्रह है। इस हॉल. से बड़ा गर्भ ग्रह आमतौर पर गर्भ ग्रह. हमको कैसा दिखता है? छोटा सा एक शिवलिंग. है, एक मूर्ति है। हज गर्भगृह है। उसमें.
नौ शिवलिंग है। और हर शिवलिंग प्रतीक है. एक ग्रह का। जब आप उसके वहां पर टोकनी में. जो प्रसाद और कपड़ा और फूल मिलता है वो आप. लेने जाएंगे तो आपको एक प्लास्टिक में नौ. अलग-अलग रंग के कपड़े मिलेंगे और तेल का. एक बोतल मिलेगा। सब में तेल चढ़ाना होता. है। हर शिवलिंग के साथ एक पुरोहित बैठे. हुए हैं। आपको आपके पंडित ने जिस भी ग्रह. शांति की पूजा कराने बोली है आप वहां. जाइए। आप उसके पास लाइन में लगिए। फिर. आपका नंबर आएगा। फिर वो पंडित जी पूजा. कराएंगे और सारे ग्रहों के ऊपर आपको एक-एक.
कपड़ा चढ़ाना है। थोड़ा-थोड़ा तिल डालना।. नौ अलग-अलग शिवलिंग और आप उसके बीच में चल. रहे हैं। सब तरफ चल रहे हैं और अजीब सा. सुख था वहां जाके। पचपनी में एक मंदिर है. मध्य प्रदेश। मैं उसका नाम भूल रहा हूं।. वो लेकिन है शिव जी का मंदिर। खूब सारी. सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। बहुत पहले गया. था इसलिए ध्यान नहीं है। बहुत सारी. सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। और फिर एक बड़ा. ऐसा डीप सा गुफा आता है जिसके अंदर एक भी. लाइट नहीं है। आपको टटोल टटोल के चलना.
पड़ता है। चीजें पकड़ पकड़। इतना अंधेरा. है और उसका पूरा फर्श पत्थर है मतलब. नेचुरल पत्थर है जैसा गुफा का होता है और. वो पूरा गीला है ऑल टाइम वो भीगा रहता है. आप मोजा पहने तो अब पूरा भीग जाएगा और बीच. में एक छोटा सा कुंड बना है और उसकी पूरी. छत से लगातार पानी बहुत ठंडा पानी रिस रहा. है सब तरफ बूंदबूंद टपक टपक टपक बीच में. जो कुंड है उसमें भी गिर रहा है तो आपको. पानी की आवाज लगातार आती रहेगी और आप फिर. अंदर तक जाएंगे वहां एक दो दिया जल रहा है. एक पंडित जी बैठे हुए हैं मैं जब पहली बार.
गया ना शुरू में घुसते समय बहुत ही मतलब. घबराहट सी हुई मंदिर है घबराहट क्यों हो. रही है पर हुई और फिर जब मैं अंदर गया और. वो सब करने के बाद हम वापस नीचे तक उतर के. आए तब मेरे को लगा मेरे मन में आया कि. शायद इस इस जगह में मैं अगली बार कभी नहीं. आ पाऊंगा जीवन में कभी नहीं आ पाऊंगा तो. सब मोजावजा पहन रहे थे और काफी सीढ़ियां. थी मैं बोला आप लोग कीजिए मेरी समकक्ष भी. थी बोला आप लोग कीजिए मैं एक बार और होके. आता हूं अब मैं कोई दुबला पतला आदमी नहीं. हूं कि फिर से सीढ़ी चढ़ने का मन किया तो.
चलेगा. क्या हो गया अभी तो आई बोला नहीं मेरे को. कुछ छूट गया है कुछ कुछ अटक गया है जाना. पड़ा मैं वापस गया मैं वहां कम से कम 15. मिनट खड़ा रहा वापस नहीं गया मैं मंदिर तक. पर गुफा के अंदर एक कोने में मैं बस खड़ा. रहा अजीब सा सुख मिला चार हो गया और ऐसे. तो और हैं एक मैं ऐड कर देता हूं प्लीज. वैष्णो देवी जो लोग जाते हैं. वैष्णो देवी के बगल में एक स्थान है. शिवखोड़ी. ओके. आप गए कभी. नहीं आप जाइएगा जब मैं पहली बार वहां गया.
था। तो यह वो स्थान है जहां पर भस्मासुर. राक्षस भगवान शिव के जब पीछे पड़ा था तो. भगवान वहां गए थे।. ये स्थान इतना दिव्य है कि इसमें दीवाल. में त्रिशूल से कटे हुए निशान आपको. दिखेंगे।. ओ. सीधा रास्ता नहीं है। अब तो सरकार ने बना. दिया है दूसरी तरफ से घुमा के।. बट जो पहले रास्ता था वो ऐसे पतलापतला. रास्ता था। ऐसे पहाड़ के साथ रस्सी पकड़. कर चढ़ रहे हैं। लेट के जाएंगे ऊपर. जाएंगे। और जब आप अंदर पहुंचते हैं, एक.
स्थान है जहां पहाड़ से दूध गिर रहा है।. दूध गिर रहा है।. ओके।. एक जगह है जहां से सीधे कहते हैं स्वर्ग. का रास्ता है। रोशनी आती है।. हम. आगे से उसी में एक गुफा है जो कहते हैं. सीधे अमरनाथ को चली जाती है।. एक बाबा वहां से गए भी हैं अमरनाथ।. अच्छा।. मतलब उसी गुफा के अंदर अंदर अंदर अंदर. अंदर आप चले जाएंगे तो आप सीधे अमरनाथ. पहुंच जाएंगे। क्या बात है।. उस जगह पर आपको सारे देवी देवताओं के. निशान मिल जाएंगे।. उसकी मान्यता यह है कि भगवान शिव यहां आकर.
रुके थे। विष्णु जी आए और विष्णु जी ने जब. बाहर भस्मासुर को खत्म करवाया। उसके बाद. भगवान शिव को मनाने के लिए सारे देवी. देवता उसी रास्ते से ऊपर से आए थे।. और आपको वहां सारे निशान मिले। आपको वहां. गंगा जी मिल जाएंगी। आपको वहां धरती माता. भी थोड़े से मिल जाएंगी।. मतलब वहां जल एलिमेंट्स. हां। और उस पहाड़ में सिर्फ वही दूध गिर. रहा है जहां गंगा जी का वो है वो है मतलब. इतनी विचित्र जगह वो है. कि जब मैं. नाम बताया. शिवखोड़ी. शिवखोड़ी.
ठीक है. बड़ी विचित्र जगह मतलब मैं पहली बार जब. गया था अब तो उसका काफी नवीनीकरण हो गया. है क्योंकि उसमें जाने के लिए रास्ता. अच्छा बना दिया गया है साइड से आपको एक. इजी रास्ता बना दिया गया है पहली बार जब. मैं और मेरा परिवार गए थे 2001 या दो के. आसपास तो वहां ऑक्सीजन की कमी बहुत थी. आपको रस्सियां पकड़ पकड़ के जानी पड़ती थी. नीचे आपको लेटना पड़ता था। कहीं रेंग कर. जाना है, कहीं खड़े होकर जाना है और जिस. तरह से आप जाते हो और अंदर जब दर्शन होता. है. और वो अंदर आप जाइएगा। मैं आपको इस ये.
सारे दर्शकों को भी सुझाव दूंगा मैं कि जब. कभी आप वैष्णो देवी जाएं तो वहां से शायद. 2 घंटे की दूरी पर है शिव खोड़ी वो स्थान. है।. अद्भुत स्थान है।. जरूर जाऊंगा।. मतलब और अब वहां जाइए और वहां पंडित जी से. बैठकर हर एक चीज के दर्शन कीजिए। हम्. कि आपको पार्वती माता के पांव भी नजर. आएंगे, दर्शन भी नजर आएंगे, आपको त्रिशूल. भी नजर आएगा, वह जाने का रास्ता भी नजर. आएगा। और वह जिन एक बाबा वहां से जो. अमरनाथ गए थे, उनके बारे में पूरी. जानकारियां मिलेंगी। और हर महाशिवरात्रि. को वहां पर एक भव्य कार्यक्रम होता है।. मुझे लगता है भारत के बहुत अंडररेटेड.
मंदिरों में से वो एक है। शिवखोड़ी।. जरूर जरूर।. इस पर मैं जाऊंगा।. बाद में एक वीडियो भी करूंगा मैं। अब मुझे. आज एहसास हुआ कि काफी ये दो मंदिर दो जहां. मैंने बताया आपको। एक सोमनाथ. हम. एक सोमनाथ जाएगा तो गंगेश्वर महादेव मंदिर. जरूर जाएगा।. गंगेश्वर. गंगेश्वर. बहुत ही खूबसूरत जगह है। अगर आप चाहेंगे. तो मैं आपको थोड़ा दिखा भी सकता हूं. क्योंकि हमारा ये वीडियो है तो कोई. कॉपीराइट का इशू भी नहीं है।. और आप आपकी गंगेश्वर महादेव में आपकी. आंखों को सुकून मिलेगा।. ओके।. मारती समंदर की लहरों के बीच में यहां पर. गंगेश्वर महादेव जो है बताया जाता है कि.
उन बड़ा था और अपनेप के हिसाब से बड़ी. खूबसूरत तस्वीर यहां पर ये हम आपको दिखा. रहे हैं। देखिए समंदर की लहरें यहां पर. आती है. और इन शिवलिंग से टकराने के बाद यहां से. वापस लौट जाती है। मानो ऐसा लग रहा हो कि. बार-बार भगवान भोलेनाथ को वो स्नान करा. रहे हैं।. इसी का तो अभी आप बताए थे ना पांच यहां।. ये तेज लहर आई और यहां पर लहर के उसके बाद. यहां से वापस लौट गई।. इट्स ब्यूटीफुल।. बहुत सुंदर।. तो ये ये तो एक है बट शिव खोड़ी की महिमा.
अलग है। शिवखोड़ी आपको एहसास अलग कराती. है। आपको रियलाइज होता है कि धरती पर. भगवान है।. ये मेरा प्रथम अनुभव जो था लोग वैष्णो. देवी के लिए वहां दर्शन जाते हैं। आप. वैष्णो देवी माता के दर्शन कीजिए। वहां से. लौटिए और एक दिन में जाके आप आसानी से लौट. के आ सकते हैं। जम्मू. जरूर।. कटरा। अब सर आते हैं रामायण पर। रामायण पर. आपने काफी कुछ लिखा। काफी सारे पडकास्ट. किए। कुछ सवाल थे हमारे थोड़े। रामायण में. सबसे गलत समझी हुई कहानी क्या है? जो मिथ.
के तौर पर पेश कर दी गई और लोग यकीन मानते. हैं।. बहुत सारी हैं। जैसे लक्ष्मण रेखा असल में. रामायण में नहीं लिखी हुई।. ओके।. ये लिखा ही नहीं है कि लक्ष्मण रेखा. लक्ष्मण जी ने बनाया था।. हम. ये बाद में जोड़ दिया गया था। और काफी. सारे अलग-अलग वर्जन है। तो किसी वर्जन में. एक तो साउथ का मैंने सुना है पढ़ा तो नहीं. है कि एक ऐसा भी वर्जन है जिसमें रावण और. सीता को पिता पुत्री बताया गया है।. लिखा हुआ है सच में कि बिटिया थी। तो हम.
तो जानकी जानते हैं ना। हम तो जनकपुत्री. सीता जानते हैं। तो एक वो भी एक वर्जन है. जिसमें मतलब इस तरीके से दिखाया गया है कि. ससुर और दामाद के बीच का झगड़ा था। बड़ा. अजीब सी बात है। तो वो जो हम हम जैसे जो. लोग हैं वो उसको मिथ्या मानेंगे। तो इस. तरीके की चीजें हैं। फिर. बट ये इतनी सारी रामायण कैसे है? इंडोनेशिया की अपनी अलग रामायण है। हमारी. अलग रामायण है। दुनिया में कई जगह अलग-अलग.
रामायण है। तो भगवान राम तो एक ही थे।. लीला तो एक ही समय हुई होगी। अलग-अलग काल. में अलग-अलग रामायण कैसे आ गए? सबके काल. भी अलग-अलग है।. आप देखिए ना शुभांकर भाई अभी भी कोई नया. कुछ कांड हो जाता है देश के किसी कोने. में।. तो उसका फाइनल रिपोर्ट तो कई हफ्तों. महीनों बाद निकलता है ना। उस बीच में. अलग-अलग इन्फ्लुएंसर्स, अलग-अलग न्यूज़. चैनल्स, अलग-अलग उस बारे में बताने वाले. कितनी अलग-अलग कहानियां सुना देते हैं।. अनगिनत कहानियां निकल जाती है ना। आप जो. सुनेंगे आप मानेंगे कि हां यार मैं इस पे. ट्रस्ट करता हूं तो यही सही होगा। फिर आप.
किसी और की सुनेंगे अच्छा वो गलत था ये. सही था। उस समय. इन मतलब इन्फ्लुएंसर्स नहीं होते थे या. सोशल मीडिया मतलब इंटरनेट नहीं होता था।. लेकिन उस समय सबसे पहले हम लोग हम लोग. मौखिक तौर पे कहानी सुनाने वाले लोग रहे. हैं ना। लेखन शैली तो बाद में आई है। तो. अलग-अलग तरीके से अलग-अलग लोगों ने कहानी. सुनाई। अपन एक दो एक्सपेरिमेंट भी करते. हैं ना कि एक लाइन में खड़ा करो एक दूसरे. के कान में एक वर्ड बोलो तो वो. पहुंचतेपहुंचते पहुंचतेपहुंचते आखिरी तक. कुछ और ही बन जाता है। तो उस तरीके से बनी. अलग-अलग चीजें।.
ओके। अ हनुमान जी के बारे में आपने कहा कि. वो चिरंजीवियों में से और हम सब जानते हैं. कि जीवित भगवान है वो।. जी।. भगवान में जीवित भगवान शायद वही इकलौते. हैं।. हां अमर अमर लोगों में उन. तो हनुमान जी चिरंजीवी कैसे बने? हनुमान जी को जब चेहरे पर जब उनको वज्र से. मारा गया था, इंद्र ने मारा था, जब वो. सूरज खाने जा रहे थे, उस समय उनको बहुत. सारे वरदान मिल गए थे। लेकिन साथ में एक. श्राप भी मिल गया था कि तुम भूल जाओगे कि. तुम्हारी क्षमता क्या है। जब तक वो वक्त. नहीं आएगा कि तुमको अपनी क्षमता का उपयोग.
करना है। तब तक के लिए तुम भूल जाओगे इस. चीज को। तो ज्यादातर लोगों का मानना है कि. राम जाते समय उनको ये वरदान देके गए थे।. प्यारी सी कहानी कि राम को जाना था वापस. और हनुमान जी तो राम से इतना प्रेम करते. हैं कि राम से राम के लिए राम से ही लड़. जाए। तो बोले नहीं या तो आप यहां मेरे साथ. रहेंगे या मैं आपके साथ ऊपर चलूंगा। मैं. नहीं छोड़ रहा आपको। तो फिर उन्होंने अपनी. अंगूठी सुना होगा आपने वो कहानी। अंगूठी. उतार के जमीन के क्रैक में डाल दी। बोले. कि अरे हनुमान मेरी अंगूठी ले आइए। और जब. वो सूक्ष्म रूप हो के अंगूठी ढूंढने अंदर.
गए। तब राम जी विष्णु रूप लेके वैुंठ धाम. वापस लौट गए। अब इधर हनुमान जी अंदर. जाते-जाते एक जगह पहुंचे जहां पर शेषनाग. बैठे हुए थे। तो शेषनाग उनको देखे और बोले. यहां क्या कर रहे हैं हनुमान आप? तो बोले. अरे वो मेरे राम की अंगूठी गिर गई।. ढूंढतेढूंढते आया हूं। तो शेषनाग हंसने लग. गए। तो बोले आप क्यों हंस रहे हैं? बोले. इसलिए हंस रहा हूं क्योंकि जितनी भी. पृथ्वी है जितनी भी दुनिया है उन सब में. राम आपको ऐसे ही बुद्धू बना के जाते हैं।. हर बार एक अंगूठी गिरती है। तो बोले ये.
कैसी बात है? बोले पीछे पलट के देखो। तो. हनुमान जब पीछे पलटे तो पीछे उसी तरीके की. अंगूठी का एक पूरा पहाड़ बना हुआ था। तो. ये मल्टीवरिवर्स समझते हैं ना आप कि बहुत. सारे वर्ल्ड्स चल रहे हैं। वो मेरे को. मेरे दिमाग में आता है कि मल्टीवरिवर्स. कोन जैसा है आइसक्रीम के कोन जैसा कि ऊपर. तो बहुत सारे हैं लेकिन वो नीचे पिघल के. एक ही जगह पहुंच रहा होगा।. तो हर बार एक हनुमान वहां पहुंचते हैं एक. अंगूठी ढूंढने जहां उनको बताया जाता है कि. जब तक आप अंदर आए तब तक वो निकल गए। तो उस. कहानी के हिसाब से राम जी जाते-जाते उनको.
यह बोले थे कि तुमको यहीं रहना पड़ेगा।. मैं तुमको अमरता का वरदान देता हूं. क्योंकि मेरा आखिरी रूप कल्कि जब आएगा तब. तक तुमको यहां रहना है। तुमको उनका साथ. देना है।. तो तब से वो यहां. अब कल्कि अवतार को लेकर बड़ी चर्चा चलती. है।. हां आजकल तो कुछ ज्यादा. हमने पिक्चर भी देख ली कल्कि बन गई।. जी. बना दी गई। बड़ी सारी धारणाएं हैं, बड़ी. सारी बातें हैं।. ये सच है या कहानी है. कि डाल दिया गया है कि चलो उम्मीद पे.
जिंदा रहो कि भगवान आएंगे।. ऐसे तो फिर आप किसी भी धर्म समुदाय की बात. करेंगे तो उम्मीदों पे ही सब कुछ कायम है।. बट फिर भी हमारे ही धर्म में क्योंकि बहुत. सारी चीजें प्रैक्टिकली भी रही हैं। जैसे. आपने भगवान का जिक्र किया कि नाम भी जो. रखा गया वो उसके पीछे एक लॉजिक था।. तो कल्कि कहानी के पीछे क्या लॉजिक था? और. ये कहानी कब प्रचलित हुई? कल्कि चाहे. कल्कि की बात करें चाहे दशावतार में किसी. भी रूप की बात करें आप देखिए जब मत्स. अवतार नहीं आए थे ना पहले अवतार तब भी भी. यहां के लोगों को पता था कि मत्स्य अवतार. आने वाले हैं कृष्ण के आने के पहले.
आकाशवाणी हुई थी है ना राम के आने के पहले. मालूम था कि रावण का वध करने राम आएंगे तो. ये सब ऐसा मेरा मानना है मैं किसी भी धर्म. ग्रंथ को कोट करके कुछ नहीं बोल रहा हूं. कि ये सब चीजें ना शुभांग भाई पहले हो. चुकी सब सब कुछ हो चुका है और यह बार-बार. होता है। फॉर एग्जांपल आप शतरंज खेलना. जानते ही हैं। शतरंज में जो ऊंट होता है, जो हाथी होता है, जो घोड़ा होता है जब.
शतरंज खेलतेखेलते वो खत्म हो जाता है।. मतलब हम. गोटी कट जाती है।. तो अपन गोटी को खिड़की के बाहर थोड़ी ना. फेंक देते हैं।. सही बात है।. अपन उसको साइड में रख देते हैं। फिर जब. क्यों रख देते हैं? क्योंकि जब पूरा गेम. खत्म होता है तो हम सारी गोटियों को उठा. के शतरंज के डब्बे के अंदर डाल के बंद कर. देते हैं। फिर शतरंज का डब्बा खोलते हैं. तो सब घोड़ा घोड़े की जगह ऊंट-वंट की जगह. हाथी हाथी की जगह फिर सेट होता है। चार. युग हैं। सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग।. कलयुग के बाद वापस सतयुग जाता है। है ना? तो ये अगर आप मेरे मेरी उंगली को देखें. सतयुग से त्रेता, त्रेता से द्वापर,
द्वापर से कलयुग, कलयुग के बाद वापस. सतयुग। तो यह जो शेप बना यह बना डमरू।. तो शिव जी क्या कर रहे हैं? डुग डुग डुग. डुग ही तो कर रहे हैं। अब इसी डमरू के के. शेप के ऊपर अगर आप जल्दी-जल्दी पेन चला. दें 100 बार जल्दी-जल्दी आपको पता नहीं. चलेगा कि उसका जो पॉइंटेड कॉर्नर था वो. सर्कुलर हो गया क्योंकि आप जल्दी-जल्दी. चला रहे हैं। यही तो है इंफिनिटी जिसका. एंड नहीं है कि कलयुग के बाद फिर सतयुग. आएगा। फिर वही सारी चीजें होंगी। फिर राम. आएंगे फिर कृष्ण आएंगे। अब यह जो डुगडुक.
करता हुआ डमरू था जिसको मैंने जल्दी-जल्दी. चला के इनफिनिटी का शेप बना दिया। उसी को. अगर आप मोड़ के खड़ा कर देंगे तो वो हो. जाएगा आर ग्लास जिसमें से रेत ऊपर से नीचे. गिर रही है। तो जब रेत ऊपर से गिरतेगिरते. रेत क्या है? वक्त है समय है। वो 1 मिनट. कभी-क मिनट अलग-अलग साइज का होता है।. लेकिन आर ग्लास का काम ये होता है कि इतने. समय में ये रेत नीचे पहुंच जाएगी। तो जब. एक बार पूरी रेत नीचे चली जाती है तो आप. क्या करते हैं? एग्जैक्टली। आप उसको पलट. देते हैं। तो जो नीचे था वो ऊपर आ जाता है.
और फिर वही. तो आप ये कह रहे हैं कि जैसे आज हम. पॉडकास्ट कर रहे हैं. जी। कभी किसी और सदी में हम फिर वैसे ही. बैठेंगे।. जी मैं एग्जैक्टली यही कह रहा हूं। हो. सकता है कि अगले बार शुभांकर मिश्रा. मैंऊंगा। अक्षत गुप्ता आप होंगे। भगवान ना. करे आपको झेलना पड़े जो मैं झेला हूं। मगर. मगर यूं ही. सबको अपना दुख ज्यादा लगता है।. हां सच है। बिल्कुल सच है।. इसीलिए मैं बोल रहा हूं मैं चाहता नहीं. हूं कि जो मेरे को दुख ज्यादा लग रहा है. वो आपके ऊपर गिरे। तो सब चीजें वापस. होंगी। फिर से राम आएंगे, फिर से कृष्ण. आएंगे। तो उस समय के जो लोग जो पोथी पुराण.
बज गए होंगे पिछले चार युग के वह इस युग. में बता देते हैं कि आगे यह होगा। जैसे. अभी मैंने शेषनाग का जिक्र किया था। तो. कलयुग के अंत में जब प्रलय आएगा शिव जी का. त्रिनेत्र खुलेगा सब कुछ भस्म हो जाएगा।. कुल मिला के प्रलय आएगा तो उसमें चंद. चीजें बच जाती है जिसमें एक नाग बच जाता. है। वो जो नाग जो शेष बच जाता है उसी को. शेषनाग बोलते हैं जिस पे विष्णु जी. विराजमान है। बाकी सारे नाग मर जाएंगे। एक. जो नाग बचेगा वो होगा शेषनाग। एक किस्सा.
आपने सुनाया था कि अभी गुजरात में एक नाग. मिला था 15 फीट का।. जी 15 मीटर का. 15 मीटर का 50 फीट का।. उसके अवशेष मिले थे।. ये सच है. ये दुनिया का सबसे बड़ा नाग भारत में. मिला।. जी। उसका नाम दिया गया वासुकी इंडिकस।. हमारे यहां के खोजकर्ताओं ने उसका नाम. दिया वासुकी इंडिकस। तो मैं बोलता हूं कि. अगली बार अगर कोई आपको बोले ना यू कम. फ्रॉम लैंड ऑफ़ स्नेक्स। तो बुरा मत मानिए।. टेक प्राइड इन इट। ऑफकोर्स आई कम फ्रॉम द. लैंड ऑफ स्नेक्स जहां वासुकी इंडिकस इज द.
लॉन्गेस्ट एवर फाउंड रिमेंस ऑफ अ स्नेक।. वासुकी कौन थे? किंग ऑफ स्नेक्स।. हम. किंग ऑफ स्नेक्स थे। कहां बैठते थे? शिवजी. के गले में। तो मैंने यूं ही कह दिया था. कि आप सोचिए कि 50 फुट के अगर वासुकी रहे. होंगे जो आज की डेट में सबसे बड़े हैं तो. 50 फुट की वासुकी का वजन भी उतना होता. होगा।. जहरीले और खतरनाक तो होंगे ही पर कितने. बड़े थे। तो उनका वजन भी होगा। तो सोचिए. उस कंधे का साइज क्या होता होगा.
जिस पर वो कुंडली मार के बैठ जाते होंगे. वो थे शिव और सोचिए कि नंदी कितने बड़े. साइज के होते होंगे जिस पे उस कुंडली मारे. हुए वासुकी को लेकर शिव बैठ के दौड़ लगा. लेते थे तो लोग बोलेंगे कुछ तो भी बोल रहा. है शेर शेर का पूर्वज अवशेष मिले ना सेबर. टूथ बोलते थे वो शेर से तीन गुना पांच. गुना बड़ा होता था उसका दांत इतना बड़ा. होता था हवा में बात नहीं हो रही है ना. साइंटिफिकली प्रूव्ड है कि भाई मिले. रिमेंस है ना हाथी हाथी के पीछे जो हाथी.
के जो पूर्वज थे वो महोमत थे और अभी के. हाथी से कई गुना बड़े होते थे तो अगर मैं. यह प्रूफ कर पा रहा हूं कि शेर के पीछे. सेवर टूथ होते थे और हाथी के पीछे मैम. होते थे तो उस सेवर टूथ का भी तो कोई. पूर्वज होगा। मैमथ का भी तो कोई पूर्वज. होगा। तो आप मेरे को कैसे झूठलाएंगे कि. महमत का पूर्वज शायद एरावत होता होगा जिस. पर इंद्र सवारी करते हैं। आप मेरे को कैसे. झुठलाएंगे कि सेवर टूथ का जो पूर्वज होता. होगा उस पर मेरी दुर्गा बैठती होगी। वो.
सेवर टूथ से भी बड़ा होता होगा। तो उसके. ऊपर अगर मेरी देवी बैठी है तो देवी का. साइज क्या होता होगा? तो ये तो मतलब साइंटिफिकली आधी चीजें. प्रूवन है। लेकिन सेबर टूथ एक दिन हवा से. तो उतर के नहीं आया होगा ना। सेबर टूथ भी. तो किसी का बच्चा होगा।. महमद भी तो किसी का बच्चा होगा।. ओके ग्रेट। रामायण एक कौन सी कहानी है जो. आपको लगता है सबसे कम पॉपुलर है? बट बड़ा. इंपॉर्टेंट चैप्टर है महिलाओं की।. मैं बता रहा हूं मैं क्या बोलने की कोशिश. कर रहा हूं। आप सब ने रामायण बहुत सारा.
सुना हुआ है। मैं ना आपको बहुत शॉर्ट में. पांच छ मिनट में एक ऐसा रामायण सुनाता. हूं।. हम. जो ना आपने ना आपके दर्शकों ने कभी नहीं. सुना होगा।. हम. मैंने नाम दिया उसको सीतायण।. ओके है ना. तो आप सोचिए बड़ा कहा गया ना कि अबला थी. और उनके साथ यह हो गया उनके साथ वो हो गया. उनको किडनैप करके ले गया मैं आपको एक नया. वर्जन दिखाता हूं आपको मजा आया प्रॉमिस यू. दैट और यह मैंने फिर कहीं पढ़ा नहीं है ये.
सब मैं मेरे दिमाग में जो बन जाता है वो. मैं आप तक पहुंचा देता हूं. तो कुछ ऐसा हुआ होगा कि जब रावण गया होगा. ब्रह्मा जी के पास वो वरदान मांगने कि ना. मेरे को यह मार पाए ना वो मार पाए ना. गंधर्व मार मार पाए ना देव मार पाए ना. राक्षस मार पाए ना जानवर मार पाए सब बोल. दिया तो ब्रह्मा जी ने बोला तुमने सब बोल. दिया मनुष्य नहीं बोला तो रावण ने बोला था. कि वो तुच्छ मानव मेरा क्या बिगाड़ लेंगे. कॉन्ट्रैक्ट में पहला क्लॉज़ आ गया बाबा कि. रावण को वो मार सकता है जो ऑर्डिनरी हो.
एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी होगा तो नहीं मार सकता. मानव को तुच्छ होना पड़ेगा तभी वो रावण को. मार पाएगा करेक्ट यही वरदान है तो अब. विष्णु जी को भेजने की तैयारी हुई होगी कि. राम बन के जाइए। जब विष्णु जी यहां आने. वाले होंगे क्योंकि भगवानों को मालूम है. आगे क्या होगा। उनको समझ में आया होगा बॉस. गड़बड़ हो गया। हम तो इतना अच्छा आदमी बना. के रेमंड्स दी कंप्लीट मैन भेज दिया हमने. रामचरित्रमानस संपूर्ण मानव कि वो जो अपने. पिता के वचन के लिए अपना राजपाट छोड़ रहा.
है। वो सात समंदर पार जाके दूसरे के राज्य. पर हमला करेगा। नहीं करेगा।. कैसे कराएं? सब गए होंगे लक्ष्मी जी के. पास। माथे गड़बड़ हो गया। क्या हो गया? ऐसा ऐसा हो गया। बहुत ही अच्छा आदमी हो. तो। बोले कोई बात नहीं। यह लिखा हुआ है. क्लॉज़ में कि जो मारेगा दैट पर्सन हैज़ टू. बी तुच्छ। तुच्छ कोई बुरा शब्द नहीं है और. ऑर्डिनरी।. लेकिन ये तो नहीं लिखा है ना कि उसके. आसपास जो लोग होंगे उनको ऑर्डिनरी वो तो. एक्स्ट्राऑर्डिनरी हो सकते हैं। बोले हां. हो सकते हैं। बोले मैं जाती हूं सीता बन.
के। बोले नहीं नहीं नहीं आप मत जाइएगा।. क्यों? क्योंकि रावण ने सारे नाइन. प्लांट्स को कंट्रोल कर रखा है। आप योनि. से पैदा होंगे। आपकी कुंडली बनेगा। वो जब. चाहेगा बदल के आपका दिमाग फैरा देगा। बोले. इतनी सी बात मैं योनि से पैदा ही नहीं. होंगे मैं धरती से निकलूूंगी कैसे बनेगी. कुंडली वो निकली जनक की धरती भी निकली. जानकी हो गई छ साल की उम्र में परशुराम. पहुंचे पिनाका धनुष 21 बार क्षत्रिय विहीन. करने के बाद जब उनको समझाया गया कि हो गया. प्रभु बखश दीजिए क्षत्रियों को मार चुके.
हैं आप जितना मारना था तो राजा जनक को. पिनाका धनुष देने आए शिव जी का धनुष अब आप. सोचिए कि. सीता ए के ए लक्ष्मी जी जिनको मालूम है कि. मैं लक्ष्मी हूं। राम को नहीं मालूम था कि. मैं विष्णु हूं बचपन में। इस चीज को समझने. की जरूरत है। आप देखिए कृष्ण के कितने. बालकांड हैं। राम का बालकांड कहां है? है ही नहीं। क्योंकि राम वाज़ एन ऑर्डिनरी. मैन सराउंडेड विद एक्स्ट्राऑर्डिनरी पीपल।. तो वो बोले अच्छा परशुराम आ गया। अच्छा ये.
वाला टाइम आ गया। एक हाथ से पिनाका धनुष. उठा दी। चलिए बोलिए अपना स्टेटमेंट बोलिए।. तो परशुराम ने बोला कि जो इस धनुष की. प्रत्यंचा चढ़ाएगा वह होगा। इसके लिए. सहीवर यह खास है। जानबूझ के छ साल की. लड़की जिसको मालूम है मैं लक्ष्मी हूं।. जैसे कृष्ण बालकांड कर रहे थे। उठाई. परशुराम के सामने कि मारो स्टेटमेंट।. स्वयंवर का टाइम आया। राम आए। राम ने. प्रत्यंचा चढ़ाते चढ़ाते तोड़ दिया। वो सब. चीजें हो गई। स्वयंवर हो गया। स्वयंवर के.
बाद वापस पहुंचे। दशरथ ने बोला भाई हमने. तो यह वचन ले लिया। गड़बड़ कर दिया। कैकई. को प्रॉमिस किया था जाओ वनवास तब राम जी. ने सीता जी को बोला था लिखित भी है शॉर्ट. भी है कि आप राजकुमारी है ये तो मेरा मेरे. ऊपर है वचन आप रहिए बढ़िया महल में मैं. आता हूं वनवास काट के बोली नहीं मैं साथ. चलूंगी लक्ष्मण की पत्नी नहीं गई ना. उर्मिला जब दो पुरुष गए थे तो दो महिलाएं. क्यों नहीं गई थी उर्मिला नहीं गई क्यों. नहीं गई उसकी अलकानी मैं उस पे नहीं जा.
रहा हूं लेकिन सीता गई. क्योंकि लक्ष्मी को मालूम था कि अगर मैं. इनके साथ जाऊंगी नहीं तो आगे की कहानी. कैसे बनेगी? रावण तक कैसे पहुंचेगा? यह. ऑर्डिनरी मैन गई। अब लोग बोलते हैं कि वो. स्वर्ण मृग के पीछे दौड़ा दी थी। वो सीता. जो छ साल की उम्र में पिनाका उठा रही है।. उसको यह नहीं मालूम हुआ कि स्वर्ण मृग. नहीं होता है। सोने का हिरण नहीं होता है।. उनको तो पता था कि सोने का हिरण नहीं. होता। उस ऑर्डिनरी आदमी को नहीं मालूम था. कि सोने का हिरण नहीं होता है। राम को तो.
पत्नी मुंह में थे। बोले मेरे को चाहिए तो. चाहिए। बोले अच्छा तुमने देखा। अच्छा तुम. वही चाहिए। तुम बोल रहे हो तो होगा जाता. हूं ढूंढने। वो चल दिए। तब लक्ष्मण जी ने. लक्ष्मण रेखा खींची थी क्योंकि मरीश. मरतेमरते वहां से राम की आवाज में लक्ष्मण. लक्ष्मण चिल्लाए थे। अब ऐसा नहीं होता कि. लक्ष्मण दौड़ गए थे। सीता के पास खड़े थे।. सीता ने बोला भाई तुम्हारा आवाज दे रहा. है। तुम जाते क्यों नहीं हो यहां से? तो. लक्ष्मण ने बोला नहीं भैया ने बोला आपकी. आपकी रक्षा के लिए खड़े रहना मैं नहीं. जाऊंगा। तो सीता ने उर्फ लक्ष्मी जी ने.
लक्ष्मण का तिरस्कार किया।. इंसल्ट किया कि डरपोक हो तुम। तुम जा नहीं. रहे हो अपने भाई की मदद। ऐसे तो बड़ी-बड़ी. बातें करते हो। तब लक्ष्मण गुस्से से. लक्ष्मण रेखा खींच के गए। अब नहीं. प्रॉब्लम। सीता बोले जाते-जाते लक्ष्मण. रेखा खींच दिया। रावण आया ब्राह्मण रूप. में। अब रावण उसको क्रॉस नहीं कर पा रहा. है। मैं इसको जैसे देखता हूं ना कि. लक्ष्मी जी सोचेगी कि सब मेरे को ही करना. पड़ता है। तू वही रुक तेरे से ना हो. पाएगा। मैं ही आती हूं उस तरफ।.
सीता उधर गई। अब वह सीता जो इतनी अबला थी. कि जिनको यह नहीं मालूम था कि मैं इसको. क्रॉस करूंगी तो वह ब्राह्मण रूप में रावण. आया हुआ है। उसको कैसे मालूम था कि जैसे. ही रावण हाथ लगाने लग गया तो सीता ने बोला. हाथ मत लगाना। तेरे पे पुराना श्राप है।. 1000 टुकड़े हो जाएंगे तेरे सर के बिना. परमिशन के महिला को हाथ लगा दिया तो इसलिए. बिना छुए रावण लेके गया।. कैसे? गई साथ में। क्यों गई? वो जाएंगी नहीं तो. राम वहां पहुंचेंगे कैसे? अब जाते-जाते.
उनको लगा अरे उन लोग मेरे को कैसे. ढूंढेंगे तो चीजें गिराना चालू की अंगूठी. गिरा रही है बिछिया गिरा रही है बिछिया और. पायल बंदर लोग उठा के लाए लक्ष्मण जी को. दिखाए बोले ये लक्ष्मण जी देखे रोने लग गए. बोले मेरी मां का है हम उस कल्चर से आते. हैं जहां भाभी का चेहरा नहीं देखा था. लक्ष्मण ने कभी चेहरा नहीं देखा था सीता. जी का उनके पैर बिछिया और पायल से पहचानते. थे तो वो देखे तो रोने लग गए मेरी भाभी. मां का मेरी भाभी आप सोचिए इस देश में. भाभी मां से भाभी जान कब हो गई.
कैसे हो गया यह कि अरे भाभी जान अरे. यह कब से हो गया आपका कल्चर भाभी तो मां. समान होती थी खैर इस पे तो मैं बहुत सारी. बात आपको बोल बता सकता हूं. इसमें से एक शब्द है जो अभी हम लोगों ने. भी एक दो बार बोला जो कि आपको जाहिर सी. बात है सबको सब कुछ नहीं पता होता मुझे भी. सब कुछ नहीं पता है लेकिन उस पे आएंगे अब. वहां से फिर वो वहां पहुंचे इनको ले आगे. अशोक वाटिका में रखा गया हनुमान पहुंचे थे. कि हे माते चलिए मैं आपको ले चलता हूं।.
सीता बोली मैं नहीं जाऊंगी। राम ही आएंगे. लेने क्योंकि अगर मैं आपके साथ चली. जाऊंगी। ऐसा बोला नहीं यही होगा कि. क्योंकि अगर मैं आपके साथ चली जाऊंगी तो. राम का यहां आने का प्रोग्राम कैंसिल हो. जाएगा। तो इस पूरा खेल करने का पर्पस ही. डिफिट हो जाएगा ना क्योंकि रावण से युद्ध. ही नहीं होगा। उसके बाद राम आए और रावण का. वध हुआ। अब अगर इस पूरी कहानी को आप. देखेंगे ना तो वो जो लाइन है ना यदा यदा. धर्मस ग्लानी भवती भारत अभ्युत्थान.
धर्मस्य तदात्मान सजाम्या उसमें आपको जो. विजुअल दिखता है वो दिखता है कि अर्जुन. खड़े हैं रथ पे और कृष्ण बैठे हैं सारथी. की जगह ये लाइन मेरी इस कहानी पे जोड़ के. देखिए आपको अर्जुन की जगह राम दिखेंगे और. कृष्ण की जगह सीता दिखेंगे. सीता ही कहानी लगती है मुझे ये सीता है. ब्यूटीफुल स्टोरी आई मीन इस वर्जन पे भी. बहुत खूबसूरत स्टोरी है. जी और यह कहीं पढ़ा नहीं हूं मैं। यह खुद. बनाया हूं। यह खुद ढूंढा हूं। मैं खुद. सोचा हूं। अब उसमें लोगों को आपत्ति हो.
सकती है। लेकिन मेरा इंटेंशन अच्छा है, बुरा नहीं है। खत्म हो गई बात। बट आपने उस. बीच में एक अच्छा टॉपिक छेड़ दिया कि. हमारे देश में भाभी मां थी। अब भाभी जान. हो गई।. कैसे हो गई? क्यों किया गया ये? भाभी मां समान होती है। आप लोग मजाक. उड़ाते हैं। अरे समान होती है।. ये सब बातें आती हैं।. आती है।. एक वक्त था शुभांकर भाई जब यहां पर. एक शब्द आया अरब कंट्रीज.
जो इतनी बोलचाल की भाषा में रम गया कि अभी. इस पॉडकास्ट में मेरे ख्याल से दो बार तो. आप बोल चुके हैं। वो शब्द है औरत. हम. दो बार निकला।. आपके हाथ में फोन है। आप चाहे तो अभी नहीं. तो बाद में Google कर लीजिएगा। जैसे एक. अंग्रेजी का शब्द है बार्क। बार्क का मतलब. भौकना भी होता है। अभी रिसेंटली मुझे किसी. ने गुस्से में बोल दिया था कि आई कैन ओनली. स्पीक व्हेन यू विल स्टॉप बार्किंग। बड़ा. हर्ट हो गया था।.
तो एक होता है भौकने वाला बार्क। दूसरा. होता है पेड़ का मेन तना उसको भी बार्क. कहते हैं। है ना? एक शब्द है दफे दफा। वो. दफा दो तीन तरीके से होता है। एक कितने. दफे दिल ने कहा दिल की सुनी कितने दफे? एक. दफा ताजेराते हिंद और एक होता है दफा हो. जाओ यहां से। उस एक दफा का तीन मतलब होता. है। औरत शब्द का कोई दूसरा मतलब नहीं होता. है सिवाय एक एकलौते मतलब का और वह है. वाइना।. महिला का गुप्तांग.
को औरत कहते हैं। और हम लोग इस शब्द को. यूज़ करते हैं। हमको मालूम ही नहीं है।. मैं सर्च करता हूं।. प्लीज कीजिए।. बाप रे ये तो बड़ी खतरनाक चीज आप बता रहे. हो।. जी।. तो आप जितने भी दर्शक आप लोग सुन रहे हैं. खास करके महिलाएं अगर आपके आसपास कोई. पुरुष यह शब्द का इस्तेमाल करें तो उनको. रोकिए उनको बोलिए कि हम ये नहीं सुनना. चाहते. बट इसमें डिक्शनरी में तो नारी स्त्री वो.
कह रहे हैं।. नहीं नहीं उसका लिटरल मीनिंग देखिए।. नग्नता. प्रॉपर आपको मिलेगा।. जननांग दोष और नग्नता. देख लीजिए।. अब आप सोचिए कि इस शब्द की वजह से आज भी. उस तरीके के देश. आप जो कह रहे थे औरत शब्द मूल रूप से अरबी. शब्द औरराह से आया है जिसका अर्थ है दोष. अपूर्ण पर अपूर्णता गुप्तांग यौनांग. जननांग.
इसमें से एक भी शब्द अच्छा तो नहीं है ना. फिर. तो जब अरब कंट्री से आपके मेरे पास ये. शब्द आ रहा था और आप देखिए कि आज भी. महिलाओं का उन देशों में क्या हालत है।. उनको सिर्फ एक ही काम किया। नहीं वो सिर्फ. प्रोडक्ट उनके इनकी सोच के हिसाब से उनका. काम सिर्फ बच्चे जनना है और कोई काम नहीं. है उनका। उनको पढ़ने की आजादी नहीं है।. उनको घूमने की आजादी नहीं है। उनको वो. अपना बुर्का नहीं हटा सकती। वो अकेले कई. देशों में बिना पुरुष के महिला अकेले बाहर. नहीं जा सकती। गाड़ी नहीं चला सकती। पता.
नहीं क्या-क्या। ये आप जिस शब्द का. इस्तेमाल करेंगे ना आपकी नजर आपका नजरिया. चीजों को लेके वैसा हो जाएगा। यू कांट. हेल्प इट। तो जब अरब कंट्रीज से औरत शब्द. आ रहा था उसी समय फ्रांस से आपके पास आया. मैडम।. मैडम का मतलब होता है वहां पर इज्जत देने. के लिए महिलाओं को बोला जाता है मेड. मोजेल।. यह शब्द है। मैडम उन महिलाओं के लिए बोला. जाता था जो अपने देह का व्यापार करती थी. अपना घर चलाने के लिए। प्रॉस्टिट्यूट्स. वो थी मैडम। आज की डेट में हमारे स्कूलों.
में बोला जाता है गुड मॉर्निंग मैडम। गुड. गुड आफ्टरनून मैडम। गुड इवनिंग मैडम। गुड. नाइट मैडम। हर कोई एक दूसरे को मैडम बोल. रहा है।. अधिकारियों को मैडम सर या मैडम बोल रहे. हैं ना। जब फ्रांस से यह मैडम शब्द आया. हमने अपना लिया। जब अरब से औरत शब्द आया. हमने अपना लिया। उस समय आपके देश में. हमारे देश में एक अनजान महिला को देवी जी. बोल के संबोधित किया जाता था। जो आज भी. बच्चन साहब के वीसी में बोलते हैं धन्य आप. देवी जी। वो शब्द छोड़ के हमने यह शब्द.
उठाया हुआ है। लेकिन आज की डेट में अगर. किसी मॉल में कोई महिला घूम रही है, एस्केलेटर पर उतरने का सोच रही है और. कंफ्यूज्ड है कि नीचे वाला फ्लोर घूमूं कि. इस फ्लोर पे एक राउंड और लूं और मेरे जैसा. आदमी कुर्ता पजामा पहन के आके पीछे से. बोलेगा ना एक्सक्यूज मी देवी जी। तो वो. महिला सबसे पहले पलट के बोलेगी गवार कहीं. के। देवी जी दिख रही हूं मैं तुमको। इज्जत. दे रहा हूं नहीं चाहिए।. तो ये तो हम लोग की कमी है ना। एक एक शब्द. है माइथोलॉजी।. माइथोलॉजी पर अलग से आ जाऊंगा। यह इसी पर.
मैं थोड़ा सा जुड़ रहा हूं। विश्वास मानिए. मेरे को मालूम है मैं बार करता किसी दिन. चला जाऊंगा इस दुनिया से। एंड इट इज ओके।. सभी को जाना है।. अगर इस देश में वापस सारे पुरुष मैडम और. औरत जैसे शब्द छोड़ के देवी जी का. इस्तेमाल करने लगे ना आपके देश में रेप घट. जाएगा। मैं बहुत जिम्मेदारी है। बहुत सोच. समझ के बोल रहा हूं।. क्यों ऐसा बोल रहा है? इसलिए बोल रहा हूं. क्योंकि आपके जुबान से जो निकलता है आप जब. किसी को मां बोलते हैं ना तो आपकी निगाह.
अपने आप ठीक हो जाती है। उस महिला को लेके. आप मां को अभी क्यों इतना नाटक हो गया था. जब एक स्टेटमेंट निकल गया था मां-बाप को. लेके आप किसी को मां का दर्जा दे देते हैं. आप मां की नजर से इसीलिए भाभी के साथ मां. लगता था कि उसको गलत निगाह से नहीं देख. सकते क्योंकि दो भाइयों में उम्र का तो. बहुत कम फासला हो सकता है. अब उस घर में आपके बड़े भाई की पत्नी है. जो रह रही है वो आपसे हो सकता है वो छोटे. भाई से दो-ती साल छोटी हो क्योंकि पति. पत्नी में पहले उम्र का फासला ज्यादा होता.
था. हम. इसलिए मां लगा दिया गया था कि गलत गलत. निगाह से नहीं देख सकते और नहीं देखा जाता. था। मैं ऐसा इसलिए बोल रहा हूं कि अगर ये. पूरा समाज और हमारा पूरा देश अनजान. महिलाओं को देवी बोलने लगेगा ना. तो आपको ट्रैफिक सिग्नल पे खड़ी हुई कोई. महिला जो आपको रोक के बोलेगी ना कि गलत जा. रहे हो। सिग्नल तोड़ रहे हो। उसमें आपको. सरस्वती दिखेगी। कुछ सिखा रही है ना? आपको. एयर होस्टेस के के ड्रेस में यहां के नीचे. कम कपड़े या कुछ और नहीं दिखेगा। वो आपको. खाना परोसेगी ना फ्लाइट के अंदर। आपको.
उसमें अन्नपूर्णा दिखेगी। छोटे से छोटा. कपड़ा पहन के पर्स लटका के कोई काम पर. जाती हुई महिला दिखेगी ना। आपको यह नहीं. दिखेगा पतली पतली खूबसूरत टांग है। आपको. दिखेगा कि लक्ष्मी है। घर पैसा कमा के. लाएगी ना। और उसके बावजूद अगर आपकी नजर. है। विश्वास मानिए यही सरस्वती, यही. अन्नपूर्णा और यही लक्ष्मी। आपको काली और. दुर्गा का रूप नहीं दिखा दिया रोड पे। तो. आप बात कीजिएगा। एक और शब्द है प्रिंसेस।. पापा की परी प्रिंसेस।. मैं ऐसा अपने टॉक शोज़ में करता हूं। आपके.
साथ भी करूंगा। बहुत लंबा तो नहीं कर ले. रहे हम लोग।. नहीं ठीक है।. मैं यही शब्द बोलूंगा प्रिंसेस। आप 5. सेकंड चार सेकंड के लिए आंख बंद कीजिएगा।. मेरे को बताइएगा कि आपको क्या दिखा।. प्रिंसेस. मैं आपको बताता हूं। मोटा-मोटा वैसे होगा।. एग्जैक्ट नहीं होगा। बेबी पिंक कलर का एक. लंबा सा फ्रिल वाला फ्रॉक पहनी हुई है। एक. खूबसूरत सी छुई हुई सी लड़की जो एक चैरियट. से एक रथ से उतरने की कोशिश कर रही है। पर. कोशिश कर रही उतर नहीं पा रही है। है ना? वो ऐसे एक टांग ऐसे करके अपना ड्रेस पकड़ी.
हुई है। दूसरा हाथ उसका ऐसा है। उसने. टियारा लगाया हुआ है। एक नौजवान बांका. खूबसूरत सा बंदा बैठा हुआ है। एक घुटने पे. लाल रंग का उसका यूनिफार्म है। यहां पे. रस्सी चल रही है। क्योंकि यूनिफार्म है।. रस्सी का कुछ रोल है और वह ऐसे हाथ बढ़ाया. हुआ है कि आओ यह रथ से जो तुम एक सीढ़ी. नहीं उतर पा रही हो ना क्योंकि इतनी नाजुक. हो तुम। मैं बैठा हूं ना तुम्हारी मदद. करने के लिए।. हमारा मानना है कि प्रिंसेस का हिंदी शब्द.
है राजकुमारी। आंख बंद कीजिए मैं. राजकुमारी बोलता हूं। पता नहीं क्यों आपको. झांसी की रानी दिखेगी। जबकि झांसी की रानी. बोलते थे। राजकुमारी तो हम बोलते भी नहीं. थे। आपको दिखेगा एक हाथ में तलवार, घोड़े. पर बैठी हुई है। हाथ में लगाम ली हुई।. शब्द का फर्क है। अगर आप अपने घर की. बच्चों को बोलते रहेंगे मेरी प्रिंसेस, मेरी प्रिंसेस तो उतनी ही नाजुक और उतना. ही अबला बनाएंगे आप उसको। फिर वो रोते हुए. ही घर आएगी कि मेरे को किसी ने छेड़ दिया।. बोलिए राजकुमारी हो तुम। मुंह तोड़ के.
आएगी। कोई बदतमीजी करेगा तो।. तो ये सब तो हमको करना। माइथोलॉजी आपने. हिंदू धर्म के अलावा किसी किसी धर्म के. साथ माइथोलॉजी शब्द सुना है? इस्लामिक माइथोलॉजी, क्रिश्चियन. माइथोलॉजी, सिख माइथोलॉजी, बुद्ध. माइथोलॉजी, जैन माइथ कुछ नहीं। अपने आप. चसपा हो गया हिंदू के साथ माइथोलॉजी कैसे? अगर आप यह अपने बच्चों को सिखा रहे हैं कि. बेटा हिंदू माइथोलॉजी है रामायण और. महाभारत। जब वो बड़ा होगा आप उसको कैसे. बोलेंगे? चलो अयोध्या प्राण प्रतिष्ठान.
हुआ है और मूर्ति के आगे माथा टेको। वो. बोलेगा बॉस पहले तुम लोग डिसाइड कर लो।. तुम लोग बड़े कंफ्यूज लोग हो।. हम. क्योंकि माइथोलॉजी शब्द आता है मिथ्या से।. मिथ्या, कल्पना, झूठ, फिक्शन। तो अगर आप. ही बोल रहे हैं कि रामायण, महाभारत मिथ्या. है तो माइथोलॉजी बोलिए। लेकिन अगर आप. बोलते हैं कि आपके राम और मेरे कृष्ण सच. में थे तो फिर वो सत्य हो गए ना।. हालांकि इस बीच मुझे लगता है काफी चीजें. बदली हैं। बीते कुछ सालों में कोशिश किया. जा रहा है इसलिए बदल।. काफी चीजें बदली है।. तो माइथोलॉजी बोलना छोड़ के सत्यलॉजी.
बोलना पड़ेगा ना? बिल्कुल सही बात है। सर रामायण के अलावा. महाभारत पर आपने बड़ी बातें की और महाभारत. में मेरा एक बड़ा फेवरेट कैरेक्टर है।. कर्ण का।. कर्ण का।. मैं बचपन में बड़ा नाराज होता था। मैं. बड़ा आक्रोशित हुआ हूं जब टीवी सीरियल. देखता था मैं चाहे महाभारत देखा या कर्ण. पर भी डीडी में एक शो बनाया गया था उसका. मुझे गाने की लिरिक्स भी याद है महारथी. कर्ण तो महानो से महान है. ओके. और बड़ा खूबसूरत सा बनाया गया था उस. एपिसोड को और मैं बहुत चाव से दिखा करता. था।.
अब मुझे कर्ण के कैरेक्टर को लेकर ओवरऑल. एक सवाल मेरे दिल में हमेशा से रहा कि. कर्ण. के साथ गलत हुआ या कर्ण ने गलत किया. क्या कर्ण महाभारत का एक बहुत बड़ा. अंडररेटेड हीरो था जिससे उसे क्रेडिट नहीं. मिला. और कर्ण के सर इतना गलत क्यों हुआ वो कहां. गलत था क्योंकि मैं अगर उसकी जगह अपनी. जीवन यात्रा को देखता जैसे उसने जिया तो. शायद मैं भी वही करता जो उसने किया. हम तो फिर वो गलत कैसे था?
इसका जवाब तो आप पहले खुद ही दे चुके हैं. इसी पडकास्ट में। आपने एक जगह कहा था कि. आपकी जगह पे आप सही हैं, मेरी जगह पे मैं. सही हूं। पूरा कॉन्फ्लिक्ट तो वहीं रहता. है ना. कि अगर मेरी नजर में आप गलत हैं और आपकी. नजर में मैं गलत हूं तो ही हम लड़ेंगे. भिड़ेंगे। तो कर्ण अपनी जगह तो सही थे।. लेकिन बाकियों की नजर जिस तरफ वो खड़े थे।. एक एक नजरिया यह होता है देखने का। मतलब. ये दोनों बातें विरोधाभासी है एक दूसरे. के। लेकिन यही सच है कि एक तरफ से आप.
देखेंगे तो भाई अंगराज का देश अंग देश का. राजा बनाने वाला दुर्योधन उनका जो सबसे. अच्छा मित्र था वो मित्रता निभाया और जीवन. भर उसके साथ दुनिया ने आपको नकार दिया. आपके अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया आपको. अपमानित किया आपको घृणा की नजर से देखा आप. शादी करने गए आपको कंपटीशन में हिस्सा तक. नहीं बनने दिया. आपकी जाति के ऊपर टिप्पणियां की गई आपको. लेकर उपहास किया गया मजाक उड़ाया गया उस. वक्त अगर किसी ने साथ दिया तो उसके सुखदख. में सही गलत में साथ देना ही तो मित्रता. है। ये भी तो धर्म ही है।.
बिल्कुल है धर्म। बिल्कुल है मित्र।. तो फिर उन्हें अधर्मी क्यों कहा गया? क्योंकि वो अधर्म की तरफ खड़े थे।. लेकिन मित्रता भी तो धर्म है।. मित्रता धर्म है ना। लेकिन ओवरऑल और मारा. तो उन्हें अधर्म से गया। मैं आज तक इस बात. को कभी एक्सेप्ट नहीं कर पाया कि जिस तरह. से भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण. धोखे से।. हां, धोखे से जो हत्या करवाई गई थी। मैं. उस चीज को लेकर मैं आज भी भगवान श्री. कृष्ण से मेरे सवाल उठते हैं कि ऐसा क्यों. किया गया? क्योंकि मैं वहां देखता हूं अगर. लड़ाई पौरुष की थी तो लड़ने दिया था। जो. जीता वही सिकंदर. जो जीता वो सिकंदर एक एक व्यक्ति पूरे.
जीवन भर संघर्ष करके आया है। पूरी जिंदगी. उसने तपस्या की है। आपने उसको अपमानित. किया। उस वक्त तो भगवान नहीं आए थे।. कई बार हमें कहते हैं ना जब हम रो रहे थे. हां या जब चीर हरण हुआ था तब आए तो उस समय. क्यों नहीं? उस समय भी आ सकते थे। उस समय क्यों नहीं. आए? और अगर नहीं आए और पौरुष की कहानी. होती तो सबसे महान अर्जुन क्यों? कर्ण को महान बन जाने देते।. एकलव्य की भी बारी आ सकती थी।. हां।. इसमें ये है कि तो सवाल एकदम करेक्ट है।. कुंती एक माता के तौर पर अपने पुत्रों से.
बाद में क्यों नहीं कह पाई? हम. बाद में तो कह सकती थी।. बाद में तो कहा था. कि नहीं युद्ध के समय कि आप वधवत करना आप. घायल कर देना।. हम. मैं कर्ण कर्ण को लेकर मैं बड़ा उपेक्षित. महसूस करता हूं और मुझे लगता है कि हर वो. दबे समाज के दबे हुए वर्ग की आवाज है. जिसके साथ उपेक्षा की गई है। वो दर्द जो. शुरुआत में आप बता रहे थे। वो दर्द मुझे. करण की कहानी में भी लगता है। सवाल एकदम. करेक्ट है। पर इसमें आपने जो भी बोला मैं. आपको एक दो दो एक नए पर्सपेक्टिव्स दिखाता. हूं। छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से। ये.
जो आपने बोला कि फिर कृष्ण ने धोखे से. क्यों मारा? ये कृष्ण जी ने धोखे से क्यों. मारा? उसकी कहानी मतलब कर्ण को धोखे से. क्यों मारा? उसकी कहानी जाती है रामायण. में। जहां से हम अभी हो के आ रहे हैं। तो. बाली और सुग्रीव दो भाई थे।. हां।. सुग्रीव का साथ दिया राम जी ने और बाली के. पास ये क्षमता थी कि वो जिससे लड़ेंगे. उनकी आधी शक्ति खींच लेंगे।. तो उन उनको हरा पाना इंपॉसिबल था।. बाली ने रावण को हराया था।.
हम. बाली ने. याद है मुझे. रावण को हरा दिया था और जाते-जाते राम को. बोले भी थे कि मेरे साथ मित्रता करते तो. रावण को आपके चरणों में लाकर फेंक देता. मैं। ये क्या कर दिया आपने? लेकिन. उन्होंने प्रॉमिस कर दिया था सुग्रीव को. कि मैं तुम्हारा साथ दूंगा। तो राम ने. धोखे से एक तीर चलाया था। बाली उस तीर से. मरे थे। तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम के साथ. एक यह लगा हुआ है कि बाली को गलत तरीके से. मारा। अब जब यह पूरा खत्म हो गया फिर अभी. हमने बात की कि कैसे हनुमान जी के लिए.
अंगूठी गिरा के राम विष्णु रूप में बैकुंठ. धाम पहुंचे। जब वो बैकुंठ धाम पहुंचे तो. उनके पास सूर्य और इंद्र आए गुस्से से।. बोले हम नहीं खेलेंगे ये फाउल है। तो बोले. अरे एक जीवन जी के अभी तक आ रहा है और. थोड़ा आराम तो करने दो। तुम लोग को क्या. हो गया? बोले नहीं आप वहां गए थे। आप लोग. ने हमारा गेम बिगाड़ आपने हमारा गेम. बिगाड़ दिया। बोले मैं समझा नहीं हूं। तब. उनको पता चला कि सूर्य के प्लेयर थे. सुग्रीव. और इंद्र के प्लेयर थे बाली और इंद्र का. जीतना जरूर कंफर्म था क्योंकि बाली हार. नहीं सकता था और सुग्रीव का हारना कंफर्म.
था जिसके कारण सूर्य हार जाते लेकिन भगवान. आके यही तो करते हैं ना टेबल स्टंट यह आए. और इन्होंने घुमा दिया। जिसका जीतना तय था. वो हार गया। जिसका हारना तय था वो जीत. गया। तब विष्णु जी को समझ में आया कि यार. वो रावण वाला बड़ा खेल करते-करते यहां इन. लोगों का गेम सही में बिगाड़ दिया। तो. अपने को जो लगता है ना अपन लाइफ में बहुत. कुछ कर रहे हैं। अपन किसी और के हाथ में. वीडियो गेम है।. हम. गेम अलग चल रहा है। हम बस मोहरे हैं।. तो विष्णु जी ने बोला कोई बात नहीं अगली. बार जाऊंगा तो इसको बैलेंस आउट कर दूंगा।.
अगली बार. गलत को गलत से सही कर देंगे। बैलेंस आउट. कर दूंगा। तुम्हारा जो गेम बिगाड़ा हूं वो. वन ऑल कर दूंगा। अभी वन जीरो हो गया ना. मेरी वजह से। इसको मैं वन ऑल कर दूंगा।. अगली बार वो कृष्ण बन के आए। इस बार बने. सूर्य पुत्र कर्ण और इंद्र पुत्र अर्जुन।. इस बार उन्होंने साथ दिया इंद्र पुत्र. अर्जुन का सूर्य पुत्र कर्ण के खिलाफ और. जैसे उस समय उनको धोखे से मारा गया था. वैसे इस बार दूसरी पार्टी को धोखे से मार. के ऊपर बैलेंस चल रहा है। ये एक अलग खेल.
है।. वो ठीक है ऊपर कहानी। बट ये मेरे को जैसे. क्योंकि हम हमारे धर्म में इजाजत है कि हम. अपने धर्म पर भी सवाल खड़े कर लें। जो. बाकी धर्मों में नहीं है और यही हमारे. धर्म को खूबसूरत है। अच्छा. तो मैं एक आस्तिक आदमी एक ब्राह्मण आदमी. जब दिनरा अपने धर्म का गुणगान कर रहा हूं. उस वक्त एक दो जगह मेरे सवाल आते हैं तो. मेरे को ये वाली कहानी वैसी लगती है जैसे. जैसे आज अमेरिका की कहानी है. कि जो अमेरिका के साथ खड़ा है. वो सही है. वो सही है. ऐसे ही वहां है कि अमेरिका ने चुन लिया.
सुग्रीव को तो सुग्रीव सही हो गए बाली की. भी कहानी होगी जो उतनी वायरल ही नहीं हुई. सच है ऐसे ही करण की कहानी है. वो कहावत है ना हिस्ट्री इस रिटन बाय. विक्टर्स. हां. अगर पांडव हार जाते और कौरव जीत जाते तो. आज आप और मैं कृष्ण जी की जगह शकुनी की. पूजा करते होते क्योंकि शकुनी उस साइड वही. काम कर रहे थे जो इधर कृष्ण कर रहे थे।. हिस्ट्री इज़ रिटन बाय विक्टर्स।. शकुनी रशिया बना दिए गए।.
इंटरेस्टिंग है।. इसके बहुत डीप हो गया है ये। नहीं यह बहुत. सिंपल है। इसके पीछे एक कहानी है।. अच्छा शकुनी कैरेक्टर भी इसलिए लोगों ने. ऐसा दिखाते भी हैं फिल्मों में कि एकदम. शातिर चालाक दूषित हो सकता है वो दिशा. शकुनी भी लगातार मुस्कुराते रहते थे।. हां तो इसके पीछे बड़ी प्यारी सी एक कहानी. है जो मैंने पहली बार सद्गुरु जी से सुनी. थी कि शकुनी जो थे एक तो गांधार नरिश थे. तो उनको एक बात का तो यह प्रॉब्लम था कि. अंधे से मेरी बहन की शादी करा दी गांधारी.
की। दूसरा जब शादी हो गई तो भीष्म पितामह. को पता चला कि गांधारी मांगलिक थी। यह बात. उनसे छुपाई गई थी। तो उस समय होता था कि. अतिथि जब आपके पास आता है तो आप जो होस्ट. हैं वो जो खिलाएंगे उसको ग्रहण करना. पड़ेगा। अच्छा खिलाएं, बुरा खिलाए, ज्यादा. खिलाए, कम खिलाएं। तो भीष्म पितामह ने. गुस्से से शकुनी के पूरे कु्बे को बुलाया।. पूरे गांधार कुबे को बुलाया। बोला आप. अतिथि बन के आइए। जैसे ही वो आया उनको जेल. में भर दिया सबको। गांधार नरेश सहित. जिसमें प्रिंस ऑफ गांधार शकुनी भी थे और.
उनको रोज एक मुट्ठी चावल देते थे सबके बीच. में खाने के लिए। एक मुट्ठी चावल से कैसे. खाएंगे इतने लोग? धीरे-धीरे वो पेरिश होने. लग गए। मरने लग गए। तो सब ने मिलकर डिसाइड. किया कि. हमारा अगला जो प्रिंस है उसको जिंदा रखने. के लिए एक मुट्ठी चावल इनको खाने दो। हम. लोग तो ऐसे भी मरेंगे मर जाते हैं। रोज. शकुनी के नजर के सामने एक-एक करके लोग. मरते चले गए। यह महाभारत शुरू होने के. पहले की बात है और शकुनी बैठ के देख रहा. था अपने सब रिश्तेदारों को मरते हुए आखिरी. में दो लोग बचे गांधार नरेश और शकुनी पिता.
पुत्र तब पिता ने बोला कि इधर आओ मेरे को. तुमको एक तोहफा देना है तो जब वो पास आए. अब ये मरने वाले हैं ना गांधार नरेश मरने. वाले हैं बूढ़े भी हैं और कुपोषित भी हैं।. पूरे शरीर की ताकत अपने पांव में लाके. उन्होंने शकुनी के घुटने पर लात मार दी और. शकुनी का घुटना टूट गया. चीखते हुए दर्द में बोला यह क्या किया? मैं आपका बेटा हूं। बोले तुम इतने बड़े. अयाश हो कि तुम जब यहां से बाहर निकलोगे. ना तो तुम भूल जाओगे कि तुम्हारे साथ यहां.
हम लोगों के साथ क्या हुआ था रोज। तुम फिर. लग जाओगे वही पासे खेलने में और जुएबाजी. में। इसलिए मैंने तुम्हारा टांग तोड़. दिया। हर कदम चलते समय याद रखना कि पूरे. गांधार के सब लोगों का इस कुरुवंश ने क्या. किया था। पहली बात। दूसरा अब मैं तुमको. तोहफा दे रहा हूं कि मेरे मरने के बाद. मेरी हड्डियों का पासा बनवाना। जो मांगोगे. आएगा। वह वही पासे थे जिसमें पांडव सब कुछ. हारे थे। तो अगर आप शकुन आप कर्ण की बात. कर रहे हैं। अगर आप शकुनी के पर्सेक्टिव. से महाभारत देखेंगे तो आपको यह भी लगेगा.
कि शकुनी भी अपनी जगह सही था क्योंकि उसका. एक ही एजेंडा था कि इस पूरे वंश को बर्बाद. कर दूंगा मैं। उसने किया।. तो आप जिस तरफ खड़े होंगे ना आपको वो सही. दिखेगा। आप जिसके खिलाफ खड़े होंगे वो. आपको बुरा दिखेगा। पूरे महाभारत की यही. खूबसूरती है। भीष्म पितामह को मारने वाले. जो थे मैं नाम भूल रहा हूं पर शिखंडी. शिखंडी. शिखंडी आप शिखंडी का बैक स्टोरी देखिए।. अंबा अंबिका अंबालिका पे जाती है वो कहानी. और आपको लगेगा कि शिखंडी ने ठीक किया कि.
भीष्म पितामह को मार दिया क्योंकि उसके. पिछले जन्म में इन्होंने गलत किया था।. द्रोणाचार्य को मारने वाली कहानी आप देखिए. तो आपको पता चलेगा कि द्रोपदी के भाई. द्रुपद ने जो किया वो ठीक किया क्योंकि. उसने अपने पिता को एक ही प्रॉमिस किया था. कि द्रोणाचार्य को मार दूंगा मैं तो वो भी. अपना धर्म और अपने पिता के प्रति जो राम. निभा रहे थे वही द्रुपद निभा रहा था कि. मेरे पिता के साथ गलत हुआ मैंने प्रॉमिस. किया मैं निपटा दूंगा मैंने. अश्वत्थामा की भी कहानी वैसी. अश्वत्थामा की कहानी अपनी जगह बिल्कुल सही. है वो एक अच्छे पुत्र थे वो एक अच्छे. मित्र थे वो एक अच्छे सेनापति थे वो कमाल.
के धनुर्धर थे किसी से कोई कमी नहीं थी. उसके के बाद वो तब तक ढंग से लड़ रहा था।. भले अधर्म की तरफ से लड़ रहा था। पर तब तक. ढंग से लड़ रहा था जब तक उसको यह नहीं पता. चला कि कैसे उसके पिता को धोखे से मारा. गया। अश्वत्थामा हतोहता। जब और जब ये ये. कमाल की कहानी है कि जब यह बात हुई कि. अश्वत्थामा हतो-हता द्रोणाचार्य तक बात. पहुंची तो द्रोणाचार्य बोले मानूंगा ही. नहीं मान ही नहीं सकता। वो मेरे पुत्र के. साथ-साथ मेरा शिष्य भी था। मर ही नहीं. सकता। हार ही नहीं सकता। सिर्फ एक व्यक्ति. बोलेगा तो मान लूंगा।. युधिष्ठिर क्योंकि युधिष्ठिर सत्य बोलते.
थे। युधिष्ठिर आपको मालूम है किसका रूप. है? यमराज का रूप है।. युधिष्ठिर यमराज के अवतार है। तो. युधिष्ठिर के पास पहुंचे। अब युधिष्ठिर. झूठ नहीं बोलते थे। तब कृष्ण ने वहां भी. छल किया। कृष्ण ने बोला कि ये तो इनको तो. झूठ बोलने सिखा नहीं सकते अभी। लेकिन एक. काम करना कि जब ये बोलेंगे ना जहां पे मैं. इशारा करूंगा सब लोग एक साथ शंखनाद कर. देना जीत का। द्रोणाचार्य पहुंचे। बोले हे. युधिष्ठिर ये लोग सब बोल रहे हैं. अश्वत्थामा।.
तुम बोलोगे तो मान लूंगा। तो युधिष्ठिर. बोले कि गुरु जी यह सत्य है कि अश्वत्थामा. मारा गया। ऐसे कर दिए। सब शंखनाद करने लग. गए। उसके बाद का जो स्टेटमेंट था वो ये था. मगर जो अश्वत्थामा मरा है वो आपका पुत्र. नहीं हाथी। वो द्रोणाचार्य के कान तक. पहुंचने नहीं दिए उस आधी बात को। इसीलिए. आज भी हम लोग बोलते हैं कि कोई कुछ भी. बोले आपके काम का स्टेटमेंट बट मगर लेकिन. पर किंतु परंतु उसके बाद का जो लाइन है ना.
वो तुम. सेकंड हाफ स्टेटमेंट ही तुम बहुत अच्छे. आदमी हो यार शुभांकर. लेकिन. लेकिन मैं तुमको काम पे नहीं रख पाऊंगा।. आपके काम का ये है कि तुम मेरे को काम. नहीं दे रहे हो। तुम्हारी कहानी बहुत. अच्छी है यार अक्षत फिल्म की पर हम नहीं. कर पाएंगे।. कितनी भी अच्छी हो आप नहीं कर रहे हो तो. तो वह पर के बाद का जो लाइन था ना उस समय. शंख बजा दिया गया था।. अब आप कुंती की बात की कि कुंती पहले तो. अश्वत्थामा में हम थोड़ा और बात करेंगे।. अश्वत्थामा मेरा बड़ा फैसनेटिंग कर मुझे. दो कैरेक्टर बड़े इंटरेस्टिंग लगते हैं।. एक कर्ण का एक अश्वत्थामा का।.
अब आप अश्वत्थामा की यहां पर बात कर रहे. थे। उसके बाद जिस तरीके से द्रोणाचार्य को. मारा गया कि उन्होंने अपने हथियार डाल दिए. और फिर उनका गला काट दिया गया। जब यह बात. अश्वत्थामा को पता चली तो जो गुरु सिखाया. था कि युद्ध में कभी धोखा नहीं करना जो कि. पिता भी था उसी को आपने धोखे से मार दिया. तो मेरा तो पूरा ब्रॉट अप ही हिला दिया ना. आपने मेरे तो पूरे बिलीव से हिला दिया. आपने तो फिर वो जो कहावत है कि चोर के घर. चोरी चोरी नहीं हेराफेरी है तो फिर बाद. में अश्वत्थामा ने क्या किया रात को जाके.
एक टेंट जलाया जिसमें उसका मानना था कि. पांचों पांडव सोए हुए हैं वो गलती से पांच. बच्चे थे उन्हीं के तो सूर्यास्त के बाद. युद्ध नहीं होता है वो वो रूल उसने तोड़ा. लेकिन रूल तोड़ने की शुरुआत किसने की? किसी भी कैरेक्टर को उठा लीजिए नेगेटिव. साइड।. फिर अश्वत्थामा को श्राप दे दिया गया।. फिर अश्वत्थामा को श्राप दे दिया गया।. दुर्योधन को स्वर्ग मिला सबसे पहले।. हां ये भी मैं एक बड़ा हैरान कर। दुर्योधन. को स्वर्ग कैसे मिल गया? दुर्योधन को स्वर्ग इसलिए मिला कि ये.
मारा।. मारा तो उसे भी छल से गया था।. एक तो छल से मारा गया था। दूसरा एक तो. उसको उसका पूरा शरीर वज्र का नहीं बन पाया. था। उस पे भी छल हुआ। हां वही उस उसी छल. था।. नहीं उसके बाद में भी बताया गया था ना. यहां मारो यहां मारो तो बाहर से हेल्प. किया गया था भीम को उनको स्वर्ग इसलिए. मिला क्योंकि वो जन्म लेने से ले मृत्यु. तक वो अडिक थे इस बात पे कि मैं मेरे को. जो चाहिए वही चाहिए। वो कभी बदले नहीं। आप. अर्जुन देखिए अर्जुन बदल जाते थे। जब वो. युद्ध में उतरे तो बोले मैं नहीं मरूंगा. रिश्तेदारों को तो फिर गीता सार देने आना.
पड़ा उनको समझाने के लिए। है ना? बार-बार. वो कभी यह कभी वो होता था सब में। सिवाय. इस एक दुर्योधन जो पलटता ही नहीं था ना. खाता ना भाई जो हम बोले वही सही मैं मेरे. को सिंहासन चाहिए और एक सुई के नोक बराबर. जमीन नहीं देना चाहता हूं मैं वो जन्म से. ले मृत्यु तक मैं पांडवों को हराऊंगा. मारूंगा और ये सिंहासन मेरा है उस एक चीज. पे अडीक रह के मर गया वो आदमी स्वर्ग. प्रदान हुआ उसको कि तुम सही साइड थे गलत. साइड थे लेकिन तुम एक साइड थे टिके हुए थे.
अपनी बात पे ऐसे फोकस्ड थे तो आप 100 गलती. कीजिए आप एक सही काम कीजिए आपको कुंती के. बारे में कुछ कह रहे थे द्रोपदी के बारे. में।. ऐसे ही चलते फिरते किवदंतियां होती है ना. जो एक मुंह से दूसरे मुंह जाती है। उसमें. मैंने कहीं सुना था किसी पंडित जी से कि. ये जो एक कहावत है ना कि महिलाओं के पेट. में बात नहीं बचती। हम सब ने बोला है सुना. है हंसे हैं। कि अरे महिलाओं के पेट में. बात नहीं बचती।. ये किसी ने मुझे बोला था कि यह श्राप दिया. था युधिष्ठिर ने अपनी मां कुंती को।.
क्योंकि जब कर्ण का वध करके लोग लौटे और. यह बड़े खुश थे और कुंती रो रही थी तो यह. पांचों पांडव आए बोले कि हम मतलब सबसे. कठिन दिन था आज कि अगर कर्ण जिंदा रहता तो. हम कभी जीत ही नहीं सकते थे। आज कर्ण को. हमने मार दिया। आपको तो खुश होना चाहिए।. आपके पांचों बच्चे जिंदा है। आप रो क्यों. नहीं रही है? उस दिन कुंती रोते-रोते बताई. थी कि वो तुम सबसे बड़ा भाई था। तो पांच. नहीं छह थे। तब उस बात की ग्लानी में दुख. में युधिष्ठिर उन्हीं के जेष्ठ पुत्र ने.
कुंती को श्राप दिया था कि आज के बाद मैं. श्राप देता हूं कि महिलाओं के पेट में कोई. बात नहीं रहेगी।. आपके पास जो बात होगी वो बाहर आ ही जाएगी।. तो वो चल रहा है। कहानी है। क्यूट सी।. आपका हीरो कौन है? अगर आप को महाभारत में. अपना एक हीरो चुनना हो. तो कौन है जिसके दृष्टिकोण से आप महाभारत. देखिए. वेदव्यास. और मैं बहुत सोच समझ के बोल रहा हूं आपको. मैं बताऊं शुभांकर भाई एज एज एन ऑथर एज अ.
राइटर हम पन्नों पे जितना लिख देते हैं ना. उससे बहुत कुछ हम सोचे होते हैं जो हम. नहीं लिखते हैं कि मे बी दी ऑडियंस इज नॉट. रेडी फॉर इट या ये ओवर कॉम्प्लिकेट हो जाए. हमको तो समझ में आ रहा है लेकिन ये ओवर. कॉम्प्लिकेट हो जाए तो हम बहुत सारी चीज. सिंपलीफाई करके लिख देते हैं ताकि लोग समझ. पाए और और बहुत सारी चीज हम नहीं लिखते।. तो वो जो आपको पन्नों पे हमारा लिखा हुआ. मिलता है ना उसमें कम से कम 30-40% ऐसी. चीज होती है जो कभी बाहर नहीं आती।. मैं अगर कभी मिल पाऊंगा किसी भी किरदार से.
तो मैं कृष्ण से भी नहीं मैं वेदव्यास से. मिलना चाहूंगा कि गुरु जी वो जो नहीं लिखे. ना वो दे दीजिए। हम लिख देंगे उसको तो और. क्या किरदार रहे होंगे जिन्होंने महाभारत. पूरा देखा और जो चिरंजीवियों में भी एक है. वो अभी तक है सात चिरंजीवियों में. वेदव्यास का नाम है. उनके जीवन का मकसद क्या था कहानी लिखना. उसके बाद का मकसद क्या था. आप एक कोई भी फिल्म बनेगी बिना कहानी के. कहानी लिखना. कहानी तो लिख गई ना महाभारत. लेकिन उसके बाद उनके जीवन का जैसे. अश्वत्थामा श्राप पा गए समझ में आया.
हनुमान. तो अभी उनका क्या मकसद है उसके लिए पढ़े द. हिडन हिंदू क्योंकि मैंने सातों चिरंजीवी. को मैं वापस लाया हूं ना 2021 से 23 की. कहानी में।. शकुनी के नाम का मंदिर भी है।. शकुनी के नाम का है। रावण के नाम का है।. नहीं रावण का तो ये ग्रेटर नोएडा में. हमारे पड़ोस में ही है।. हां। यूपी यूपी में बिसरख हां. बिसरख में रावण का मंदिर।. यही जिनका जन्म शायद ग्रेटर नोएडा में लोग. कहते हैं हुआ था।. अच्छा. ये बड़ी चर्चित कहानी है।. ओके।. मैं गया नहीं हूं। देखने एक दिन जाऊंगा. देखने। कहां? ले चलिए।.
हां। बड़ा फेमस है। यहां पे लोग पसंद करते. हैं। हम. तो का सुना है मैंने पर मैं गया नहीं हूं. अभी. लंका जो थी उसके प्रमाण क्यों नहीं है और. श्रीलंका में लोग रावण को क्यों नहीं. पूछते. नहीं पर श्रीलंका में रावण दहन अभी भी. नहीं होता है तो श्रीलंका में रावण को. जानते भी तो नहीं लोग हां तो लेकिन अब हम. तो ये ऑफ कोर्स ये श्रीलंका वो लंका नहीं. है पर कहां है वो लंका है तो साउथ में ही. कहीं बट हम जो दिखाते हैं रामेश्वरम वाला.
आसपास गए क्योंकि पुल वहीं पर है तो. श्रीलंका तो वहीं पड़ती हां लेकिन ग्रंथों. के हिसाब से ये श्रीलंका वाली लंका नहीं. है। लंका अलग थी।. उसका कोई प्रमाण नहीं है। सोने की लंका. कहां थी? क्या थी? नहीं अभी तक तो नहीं।. और सोने की लंका जलेगी कैसे? वो तो. पिघलेगी ना।. हां।. तो पिघल गई होगी शायद।. सारा सामान ले चला गया।. कहानियों में देखिए आपको थोड़ा-थोड़ा. डिस्काउंट तो देना पड़ेगा सब जगह।. ठीक है। अ और कई सारी कहानियां और भी नागा.
साधुओं को लेकर भी हम बात कर लेते हैं।. अच्छा महाभारत में सबसे बड़ा दोषी किसे. मानते हैं आप? चलो मैं एक ये भी सवाल. इंटरेस्टिंग है। दोषी किसे मानते हैं? अलग-अलग नजरियों से अगर हम देखें. जी. किसे-कसे हम दोषी मान सकते हैं? चलो एक. नहीं महाभारत में हम किसे-क दोषी मान सकते. हैं? एक आध किसी किरदार को छोड़ के सबको. एक मैं बार-बार कहता हूं कि गांधी से हर. कोई प्यार नहीं करता है और हिटलर से हर. कोई नफरत नहीं करता। आपको हिटलर को चाहने. वाले आज भी मिलेंगे। गांधी से नफरत करने. वाले तो मिलेंगे ही मिलेंगे। तो आप देखिए. ना कि अगर आप गांधारी की तरफ खड़े होकर.
देखेंगे तो उनके हिसाब से तो कृष्ण भी गलत. थे। गांधारी ने कृष्ण को श्राप दे दिया था. आखिरी में. कि तुम्हारा भी कुबा फलेगा फूलेगा नहीं. तो एक नजरिए से तो कृष्ण भी गलत है. और इस वजह से उनके पैर में तीर लगा धोखे. से उनको भी मारा गया. उनको भी मारा गया उनका भी अंत हुआ. इसके पीछे भी बड़ी इंटरेस्टिंग कहानी है. कि वो जो तीर लगा था वो तीर जब वो आदिवासी. दौड़ता हुआ आया कि मैं मैं देखने कि मेरा. तीर कहां लगा और उनको उसको समझ में आया कि. मैंने कृष्ण को मार दिया तो वो मतलब.
परेशान होके कि मेरे को पाप लग गया मैंने. कृष्ण को मारा कर दिया। तो जाते-जाते. कृष्ण ने 126 साल की उम्र में उनसे कहा था. कि तुम पर पाप लग नहीं रहा है। यह मेरे. कर्म है जो मेरा पाप कट रहा है। यह वो तीर. है जो राम रूप में मैंने बाली पर चलाया. था। पिछले जन्म में तुम बाली थे। वो तीर. घूम के आकर मेरे को लगा।. तो ये मेरे मैंने जो दिया था वो मेरे पास. वापस आया। तो तुम इस ग्लानी में मत जीना. कि तुमसे एक पाप हो गया।. कर पाप यकीन आप करते हैं?
बहुत ज्यादा करता हूं।. जो आप समाज को देंगे वो लौट कर आएगा।. आएगा। क्यों नहीं आएगा? बिल्कुल आएगा। और उसको हर तरीके से सिर्फ. अच्छा अच्छा नहीं कई बार अच्छा करने के. चक्कर में बुरा भी हो जाता है। जैसे. नंबर पर यकीन करते हैं आप? बहुत ज्यादा समझता नहीं हूं पर. इंटरेस्टिंग बड़ा लगता है मेरे को।. जैसे अभी एक घटना हुई अहमदाबाद वाली. फ्लाइट जो लंदन जा रही थी।. उसमें एक घटना हुई जहां पर गुजरात के. पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी उनको लेकर. एक कोर्ट आया कि उनको 12 06 से बहुत प्यार.
था।. जी और 1206 उनकी गाड़ियों का नंबर था। कई. सारी कार उनकी थी जिसमें का भी नंबर था।. 1206 था। टू व्हीलर का नंबर था। और भी कई. घर में सामान जहां पर नंबर इस्तेमाल होता. था वहां वो 1206 इस्तेमाल करते थे। एक एक. ही स्पेसिफिक नंबर. जी।. 12:00 बजे वो फ्लाइट में चढ़ते हैं।. हम. चेक इन करते हैं और 126 तारीख को. ये. वो दुर्घटना होती है जिसमें उनकी मृत्यु. हो जाती है।.
करेक्ट।. यह महज एक कोइंसिडेंस है या इसके पीछे कोई. नंबर गेम के मायने हो सकते हैं? कोइंसिडेंस ही होना चाहिए क्योंकि नंबर. गेम के मायने होते तो इतने सारे लोगों का. एक साथ सबका एक नंबर तो नहीं हो सकता है।. पर मैं बार-बार नाइन की बात करता हूं. हिंदुत्व से जोड़ के और आप देखिए इत्तेफाक. है कि 1206 जो है उसका टोटल भी नाइन है।. वन टू और सिक्स।. मेरा मानना यह है कि हिंदू धर्म में हर हर.
शख्स. में नौ का बहुत ज्यादा महत्व है। हम. एक बच्चा पैदा होता है तो मां के कोख में. नौ महीने रहता है। कुछ कम भी रहते हैं।. मगर बोलने का जो लाइन है वो तो नौ महीना. ही है। पूर्ण वहां से जो नौ का फेर चालू. होता है। आप देखिए नौ ग्रह जो आपकी कुंडली. बनाता है वो नौ ग्रह है। तो नौ ही है ना. 10 और आठ तो नहीं है। फिर आप आगे बढ़िए।. अह नवदुर्गा नौ रथ नौ रस अह और आगे आएंगे. आप तो कुछ भी आप चाहे घर घर कोई नया घर.
बना के गृह प्रवेश करते हैं तो नौ ग्रह की. शांति करते हैं। तो नौ के फेर में हम सब. लोगों का जीवन हमेशा ही फंसा रहता है। ऐसा. मेरा मानना है। अब ये भी नौ ही हुआ। सिर्फ. बुरा बुरा नहीं। अच्छा भी सब नौ ही है। आप. देखिए वो हम जो माला जपते हैं उसमें 108. होता है। 108 बीट्स होते हैं।. आठ एक नौ. आठ एक नौ। अभी हम महाभारत की बात कर रहे. थे। 18 अध्याय. आठ नौ गीता में जो टोटल श्लोक है उसका. टोटल नौ है। आप चारों युगों का जितने.
जितने साल का इतने इतने लाख साल का जो युग. रहा है वो चारों युग अलग-अलग उस पूरे का. टोटल नौ है।. उन चारों को जोड़ेंगे तो फिर नौ है।. तो युग नौ में क्यों है? अभी आप हम आप और. मैं जब बात कर रहे थे कल्कि की तो दशावतार. में नौ आए हैं। एक बचा है। अब देखिए आपके. इर्द-गिर्द अब सारे नंबर्स हैं लेकिन नौ. थोड़ा अलग है।. आज तारीख 13 है। 136. हां लेकिन इसमें तो नहीं आएगा।.
नहीं आएगा।. एक और लेकिन नौ जो है ना वो सिर्फ ऐसे. आध्यात्म के लेवल पे नहीं। दूसरी तरफ भी. आप देखेंगे जैसे मैथमेटिकली भी देखेंगे तो. नाइन इकलौता ऐसा नंबर है जिसमें 9 * 1 = 9. से लेकर 9 10 90 तक सबका जो इक्वल्स टू है. वो नाइन है। 9 18 27. 36 आप जाते जाइए। उसका उधर का पूरा टोटल. नौ है। आप किसी भी शेप को जब हम. ज्योमेट्री पढ़ते थे जैसे सर्कल की बात. करेंगे। 90° नौ है। 90 का हाफ कर दीजिए 45.
नौ है। 90 का डबल कर दीजिए 180 और डबल कर. दीजिए 360 सबका टोटल नौ है। और ये सिर्फ. सर्कुलर नहीं है। सिलड्रिकल ट्रायंगुलर. रेक्टेंगल स्क्वायर सबका जो वो आता है ना. वो नाइन ही आता है।. तो नाइन इज़ समथिंग इज़।. सर नागा साधुओं पर भी आपने किताब लिखी।. जी।. भगवान शिव की सेना हम कहते हैं नागासा जी. को।.
जितना मैं थोड़ा बहुत मैंने पढ़ा हूं. शंकराचार्य जी ने फौज को बनाया था। पहले. मैं शंकराचार्य जी को समझ लेता हूं आपके. शब्दों में। बड़ा मेरे लिए बड़ा. इंटरेस्टिंग कैरेक्टर रहते हैं जिसके बारे. में उतनी बातें उतनी जानकारियां सोशल. मीडिया पर नहीं है।. नहीं है।. मौजूदा हमारे धर्म में शंकराचार्य जी की. क्या भूमिका है? शंकराचार्य जी ने क्या. किया जिसके लिए हमें उन्हें याद रखना. चाहिए।. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जोड़ने का. काम शंकराचार्य ने अकेले किया था। बहुत कम. उम्र में। 21 या 22 साल की उम्र में तो. उनका देहांत हो गया था। उतने कम समय में.
उस वक्त मैं 14वीं शताब्दी की बात कर रहा. हूं।. 30 साल में शायद देहांत होता हुआ था।. हां, मैं एग्जैक्ट नहीं बता पा रहा हूं. क्योंकि समय हो गया किताब लिखी और बहुत. सारा डाटा रहता है। एक आध नंबर्स का. हेरफेर हो सकता है।. कम उम्र में उनकी डेथ।. बहुत कम उम्र में उनकी डेथ हो गई थी और. उनका एक बहुत सुंदर शंकराचार्य का मंदिर. है कश्मीर में। अभी भी और एक बहुत बड़ा. मंदिर है कोचीन में शंकराचार्य का। आज आप. और मैं जो समझने की कोशिश कर रहे हैं चाहे. वो कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्में हो चाहे वो.
अभी पहलगाम में जो धर्म पूछ के मार दिया. गया हो यह सब उस व्यक्ति को इतने 100. सालों पहले समझ में आ गया था। उनका यह. लाइन मतलब उनको यह बात समझ में आ गई थी कि. आने वाले समय में सिर्फ शास्त्रार्थ से. काम नहीं होगा। दो लोग बहस करके रुकेंगे. नहीं। शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की. भी जरूरत पड़ेगी। तो उस समय उन्होंने यह. सेना तैयार की थी जो उन्होंने देखा कि. राजा जो हैं वो या चाहे कोई भी व्यक्ति वो. अपने अपने समाज के लिए या अपने जमीन के.
लिए या अपने राज्य के लिए अपनी महिलाओं के. लिए या अपने धन के लिए लड़ने को तैयार है।. धर्म के लिए लड़ने को कोई तैयार नहीं। तो. उन्होंने नागा साधुओं का सृजन किया था। यह. मान के कि यह धर्म की रक्षा के लिए सेना. है। 4 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड नागा साधु. आपके देश में अभी हैं। गवर्नमेंट. रजिस्टर्ड नागासाधु छोटे देशों की उतनी. बड़ी आर्मी नहीं होती जितने आपके धर्म की. आर्मी है।. बट अब वो क्या करते? मतलब आप तो लड़ाई. करते रही।. जब जरूरत पड़ती अभी मैं गुवाहाटी गया था।. फ्रंट लाइन में मेरे साथ एक नागा साधु.
बैठे थे और बकायदा फरसा लेके बैठे थे और. वहां इतने बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स बैठे. थे। फ्रंट लाइन पे उनको बैठाया गया था।. बकायदा मतलब एक्चुअल फरसा पकड़ के वो आदमी. बैठा था। तो वो आपके बीच में है और वो उस. दिन बड़ा उन्होंने विस्फोटक वहां पे वो. दिया इंटरव्यू न्यूज़ चैनल्स में जब उनसे. पूछा गया उन्होंने बोला कि स्कूलों में. हिंदू स्कूलों में शस्त्र बटने चाहिए और. आप ये स्पोर्ट्स आवर्स में जो फुटबॉल और. ये सब की ट्रेनिंग कराते हैं साथ में.
शस्त्र चलाने की ट्रेनिंग करानी चाहिए आप. लोगों को। जरूरत पड़ने वाली है आप लोगों. को बहुत जल्दी। और मैं पूरी पूरा इत्तेफाक. रखता हूं इस बात से क्योंकि यूएस में खुले. आम आराम से बंदूक नहीं मिलते हैं। ठीक है? वहां गलत तरीके से चला भी दिया जाता है।. लोग मर भी जाते हैं। लेकिन फिर आप माचिस. बनाना भी बंद कर दीजिए क्योंकि आग लग जाती. है। क्या-क्या बंद करेंगे आप और नहीं तो. फिर सब चीज चालू कीजिए। एक गांधी जी गांधी. जी ने हमको बताया सॉरी मैं थोड़ा विषयंतर. हो रहा हूं लेकिन जुड़ा हुआ है। गांधी जी. ने हमको बोला अहिंसा परमो धर्म। हमको.
टेक्स्ट बुक्स में पढ़ा दिया गया कि नॉन. वायलेंस के ताकत पर हमने. इंडिपेंडेंस पा लिया गलत है ये झूठ बात है. ये सरासर झूठ बात है ये आप. आप सोचिए शुभांकर जी कि जब जिस मोमेंट हम. दिल दिमाग में मान लें कि अहिंसा सही होगा. सब कि अहिंसा सही है और हिंसा गलत है. ये तो हमारे रणवीर हुड्डा ने भी कहा था. यहीं बैठे थे उन्होंने कहा था कि अहिं. अहिंसा से एक टॉफी नहीं मिलेगी तुम्हें. मांग के देख लो. अरे मैं बोल रहा हूं अगर आप अहिंसा को.
सत्य मानने लग जाएं तो आपको पता भी नहीं. चला कि सबकॉन्शियसली जी आपने अपने सारे. देवी देवताओं को नकार दिया। आप डिसाइड कर. लीजिए गांधी सही है कि देवी देवता सही है।. क्योंकि आपके तो हर देवी देवता के हाथ में. अस्त्र-शस्त्र है। आप क्या कहना चाह रहे. हैं कि आपके देवी देवता गलत हैं।. और कौन से दुनिया में कौन सा सिविलाइजेशन. हाथ जोड़ के जिंदा रहा है? कौन नहीं लड़ा है अपने अस्तित्व के लिए? क्या बेवकूफाना बात है यह? आप क्या बोल.
रहे हैं कि सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह. और बाकी लोगों ने कुछ नहीं किया। आप अकेले. कर रहे थे। चार लोग कमरे में बैठे और बोले. आज से आप देश के पिता हैं। देश का बाप. नहीं होता। देश की संताने होती हैं। और. किसी देश का बाप नहीं है। दे हमारे देश की. जो मां है जिसको हम भारत मां बोलते हैं वो. एक थॉट है। वो एक फेस नहीं है। आप एक जीते. जाते आदमी या महिला को एक देश का बाप और. मां बनाएंगे। आप क्या कहना चाहते हैं कि. जिस दिन गांधी मरे उस दिन पूरा देश अनाथ.
हो गया। ये बोल रहे हैं आप।. किस तरीके की सोच है और कहां ले जाना चाह. रहे हैं आप? कैसे हो सकता है ऐसे? और कब तक लूंगा मैं? कैसे पढ़ा दिया आपने नॉन वायलेंस? अगर अगर. आपने चार लोग कमरे में बैठे आपने बोला आज. से आप देश के पिता हैं। तो उनको अच्छा. लगा। बोला अच्छा मैं पिता हूं। तुम मेरे. छोटे भाई हो। तुम देश के चाचा हो।. बनाओ सुभाष चंद्र उसको बड़े बाबा।. फिर पिता है तो मां भी बनाओ, चाचा है तो.
चाची भी बनाओ। फिर पूरा कुबा तैयार करो ना. देश का। बाकी कहां है? मन से यूं ही. कहां कहां पे लिखा गया था ये कि ऐसा. करेंगे? कौन सा प्रस्ताव पारित हुआ? कहां. हुआ? कि फादर ऑफ द नेशन. नहीं हुआ ना? मैं मैं क्यों लूंगा इस बात. को? नहीं है मेरे दो बाप। एक ही हैं। श्री. अजय गुप्ता नाम है उनका। आई एम प्राउड ऑफ. हिम।. कैसी बात है यह? ठीक है। मतलब जो आप कह रहे हो वो भी.
प्रैक्टिकली सही है।. अगर आपको इतना मन है ना किसी एक आदमी को. इस बात का श्रेय देना ही पड़ेगा। नहीं. नहीं अक्षत एक का को तो देना पड़ेगा जिसके. कारण देश आजाद हुआ। हिटलर को दूंगा मैं।. और मैं लॉजिकली बात करके बोल रहा हूं कि. अगर आपको आपके देश की आजादी का किसी एक के. सर सेहरा बांधना है ना। हिटलर के सर सेहरा. बांधिए आप जाके।. वो वहां से लड़ रहा था पूरे विश्व के. खिलाफ। वो ब्रिटेन को वो इंग्लैंड को इतना. कमजोर कर दिया था कि तब उनको समझ में आया. कि अब दे भारत देश के ऊपर और लंबे समय तक.
हम इस पे राज नहीं कर पाएंगे क्योंकि हम. इतने कमजोर हो गए हैं। हमारा हमको पूरा. ध्यान हिटलर को हराने में लगाना पड़ रहा. है। इसलिए अब इसको इस देश को आजादी से रोक. नहीं पाएंगे हम। नहीं तो हमको क्या लगता. है कि अंग्रेज लोग यहां आए और एक गाल पे. थप्पड़ मारे। मैंने दूसरा बढ़ाया और वो. मारते मारते 200 साल तक फिर थक गए। फिर. उन्होंने आपस में बात किया। हमारा हाथ. दुखने लग गया यार। मारते मारते चलो अपने. गांव वापस चलते हैं। तो छोड़ गए हमको। यह. सब फालतू बातें हैं। पहली बात तो यह तरीका. ही गलत है कि आपने किसी एक आदमी को श्रेय.
दे दिया देश की आजादी का और देना है ना तो. फिर उस आदमी को दीजिए जिसके कारण सच में. ये लोग कमजोर हुए और आपको छोड़ के गए तो. फिर अगर आप उसको श्रेय देंगे तो फिर आप. नॉन वायलेंस में जाएंगे तो फिर मेरे देवी. देवता सही होते. कि अपना हक और अपनी आजादी आपको लड़ के मर. के और छीन के ही लेनी पड़ेगी और अगर सब. कुछ इतना अच्छा था तो पहलगाम में क्या हुआ. कश्मीर में क्या हुआ बंगाल में क्या हुआ? केरल में क्या हो रहा है? मैं बार-बार बोल. रहा हूं।. यहां भी शांति हमने लड़कर ही हासिल की।.
उन्होंने जो हमला किया अभी पहलगाम में जो. हुआ है ना वो चाहते हैं कि हिंदू पहलगाम. और कश्मीर ना आए। मैं बोल रहा हूं आप. जितने वो बकर्स वगैरह है ना स्पीती वैली. और लेह लद्दाख बाद में चले जाना यार। सब. अपना-अपना जत्था बनाए। कश्मीर ही जाओ. घूमने। जितने बड़े-बड़े ब्रांड्स हैं, कंपनीज जो रिवॉर्ड में वो इंडोनेशिया और. बैंकॉक और थाईलैंड भेजते हैं अपने डीलर्स. को। कश्मीर भेजो यार कश्मीर भेजो। हम भी. तो देखें कितने बार हम मरने को तैयार हैं।.
ये तो चाहते हैं कि हम डर से ना आए। अरे. भैया मैं हिंदू कश्मीर जाऊंगा मार देंगे।. आप तो वहां नहीं जाके आप जिता रहे हो। अभी. यह जो कपल इंदौर का सोनम कांड जो हुआ पहले. कश्मीरी तो जाने वाले थे। वो कैंसिल करके. गए थे वहां।. तो यह कोई स्यूशन थोड़ी ना है कि अरे. कश्मीर में हिंदू मार रहे हैं तो कश्मीर. नहीं जाएंगे। आपके घर में घुस के मारेंगे. तो घर छोड़ के भाग जाओगे क्या? ठीक बात. है। मैं जाऊंगा कश्मीर और मैं यह सब बोलता. हूं तो मेरे लोग मेरी टीम बोलते हैं कि. चुप रहा करो यार मत बोला करो। मैं तो.
कन्हैया कुमार तो कुछ नहीं बोला था जयपुर. में। टेलर था बेचारा।. उसने सिर्फ एक स्टेटस डाला था ना आई. सपोर्ट नपुर शर्मा। दो लोग घुसे उसका गला. अलग कर दिया उसके शरीर से।. बहुत दुर्भाग्यपूर्ण उस दौर में जितनी. घटना हुई थी।. मैं मैं उसके बाद से मेरे को यह नाम इसलिए. याद है मेरे को बहुत ज्यादा नाम याद रहते. नहीं शुभंकर भाई। मेरे को नाम इसलिए याद. है क्योंकि जिस दिन मेरे को ये मैं सुना. था ना ये घटना जब हुई थी ना उस दिन मेरे. को लगा था कि मैं बोलूंगा.
क्योंकि जो नहीं बोला पहलगाम में जितने. लोग गए थे. वो थोड़ी ना बोले थे।. सही बात है।. वो थोड़ी ना अक्षत गुप्ता जैसे कैमरा लगा. के बोल रहे थे। तो जिंदा है क्या? मर गए।. तो ये इस बात विषय पर तो हमने भी हम. इस बात की गारंटी थोड़ी ना है कि मैं चुप. रहूंगा तो मैं नहीं मरूंगा और मरना है तो. बोल के मरूंगा।. उमेश महाराज उनकी डेथ हुई थी। बहुत सारे. लोगों की डेथ हुई थी। हमने भी उससे बड़ी. आवाजें उठाई थी।. खैर सर अब नागा साधुओं पर थे हम सियासी. सॉरी सॉरी सॉरी किसी एक दिन और चर्चा. करेंगे आराम से। बैठ के नागा साधु सर।. 4 लाख से ज्यादा नागा साधु हैं आपके देश.
में जो जब जरूरत पड़ेगी तो आएंगे। पहले भी. आए हैं। बहुत सारे युद्ध लड़े हैं नागा. साधु पहले।. उसमें से एक पूरे युद्ध की तो चर्चा मैंने. अपनी पूरी किताब में की है। दो पार्ट में. है। उसका नाम द नागा वॉरियर्स है।. अंग्रेजी में दोनों पार्ट आ चुका है।. हिंदी में एक आ चुका है। दूसरा अब आ. जाएगा। इसी महीने के अंत तक रिलीज हो रहा. है। तो उसमें मैंने शिवजी के 19 अवतारों. की भी बहुत अच्छे से चर्चा की किताब में।. नागा साधु गोकुल में एक बार अहमद शाह. अब्दाली जो चोर था वो हमला किया था।.
क्योंकि उसका मानना यह था कि जहां मंदिर. है वहां बहुत खजाना है और जहां खजाना है. वहां हम चोरी करेंगे लूट मार मचाएंगे।. उनको यह नहीं मालूम था कि वहां पे नागा. साधुओं के छोटे से जत्थे का सम्मेलन चल. रहा था। तो उनको नहीं मालूम था कि सम्मेलन. चल रहा है और इन नागा साधुओं को ये नहीं. मालूम था कि हमला होने वाला है।. पढ़ा मैंने इसमें पैन बजा दी थी इन्होंने।. सारे मरे हमारे साइड के। लेकिन अहमद शाह. अब्दाली अंदर घुस के मंदिर को तोड़ नहीं.
पाया और मंदिर पे को लूट नहीं पाया। आज भी. जो पुराने मंदिर गोकुल में खड़े हैं वो उन. 100-150 नागा साधुओं के कारण खड़े हैं।. उनके पास हथियार नहीं था। वो ना मंदिरों. से निकाल निकाल के लाए सच में हथियार जो. अभी आपने आरआरआर फिल्म में देखा. क्लाइमेक्स में कि वो राम जी का धनुष और. तल यह उन्होंने उस समय 17 सेंचुरी में सच. में किया था कि अगर हनुमान जी का मंदिर है. तो एक एक नागा साधु गधा लेकर लड़ रहे हैं।. वो काली मां का मंदिर है तो एक नागा साधु. खड़क लेकर लड़ रहे हैं। जिसको जो मिला वो.
लेके मंदिरों से निकाल निकाल के लड़े थे।. और गोकुल आज जो खड़ा हुआ है वो नागा. साधुओं के कारण।. नागा साधुओं को लेकर सबसे बड़ा मिथ क्या. है? नागा साधुओं और अोरियों में थोड़ा फर्क. है। नागा साधु यह काला जादू, तंत्र मंत्र, श्मशान में बैठना यह सब कुछ नहीं करते। वो. साफ सुथरे जगह पर रहते हैं। पहाड़ों में. रहते हैं। जत्थे में रहते हैं। अखाड़े. बोलते हैं। अखाड़ों में रहते हैं। अघोरी. अलग है। लेकिन हम लोगों को अपने लोगों की. अपने पूर्वजों की इतनी कम समझ हो गई है कि.
हमको लगता है कि अघोरी नागा जो एक जैसे. दिखते हैं वो एक जैसे हैं। बिल्कुल एक. जैसे नहीं वो अलग-अलग है। तो सबसे एक तो. यह है कि नागा साधुओं को आप अघोरियों से. कंफ्यूज ना करें। दूसरा नागा साधु तीन चार. चीजें ले चलते हैं। एक एक कपड़ा या एक. सबसे बड़ा मिथि है कि नागासाधु मतलब नंगा. ऐसा नहीं है। कुछ संप्रदाय हैं जिसमें. नागासाधु बनने में आपको नग्न अवस्था में. रहना पड़ता है। लेकिन नागासाधु का मतलब. सिर्फ नग्न अवस्था में रहना नहीं होता। कई. ऐसे समुदाय जो बकायदा एक सिंगल कपड़ा.
पहनते हैं लेकिन पहनते हैं। सबके पास आपको. अस्त्र-शस्त्र मिलेगा। हम. उसको ले चलते हैं। उसके बराबर पूजा करते. हैं। वह सात घरों से रोज भिक्षा मांगते. हैं। अगर सात घरों के अंदर अंदर उनको खाना. मिला तो उस दिन खाते हैं। अगर नहीं मिला. तो भूखे सोते हैं। वो बहुत कठिन जीवन. व्यापन करते हैं। वो. बिस्तर में गद्दे में नहीं सोते हैं। जमीन. पर सोते हैं। इस तरीके का जीवन है।. शिव जी के भक्त होते हैं।. हां। अघोरियों में और नागा साधु में एक ये.
बड़ा फर्क है कि अघोरी जो हैं वो शिव को. प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ये सब. अपने-अपने तरीके और पद्धति से। नागा साधु. का मानना है कि हम हमको ऑलरेडी शिव. प्राप्त हैं। हम शिव की सेना हैं और ये. सोच के ही वो लड़ते हैं। शिवलिंग पर दूध. क्यों चढ़ाते हैं सर? हालांकि इस पे मैंने. भी वीडियो बनाया था बहुत पहले। काफी. चर्चित रहा था। लेकिन आपकी नजर में क्या. वजह है? देखिए पानी पहले पानी का बता देता हूं। वो. जो कहानी है ना कि कंठ में उन्होंने हलाहल.
रोक लिया था। तो उसके बाद उनको बहुत. ज्यादा उनके अंदर तप बहुत बढ़ गया था। तो. क्योंकि समंदर के किनारे थे तो सारे देवों. ने और सारे असुरों ने उनको ठंडा रखने के. लिए उनके ऊपर पानी डाला था। तो इसलिए हम. पानी चढ़ाते हैं। दूध दूध उनको एक तो पसंद. बहुत है। ऊपर से. एक मतलब स्पेसिफिकली कोई कहानी आप बता. दीजिए। मेरे को बहुत ज्यादा इस विषय में. ध्यान नहीं है। मैं इस पर वीडियो बना के. आपको भेजूंगा।. एक विस्तार से भेजूंगा। एक रैपिड फायर सर. हमने रखा है।.
जी।. और. इसमें हम देखते हैं कि आप आपकी चॉइस क्या. है? महाभारत में किसके साथ ज्यादा गलत. हुआ? अश्वत्थामा या कर्ण? कर्ण।. कर्ण।. क्यों? मैं जाना।. अश्वत्थामा के साथ आखरी आखरी में एक झटके. में दो चार चीजें हुई। कर्ण के साथ पूवन. उसके जन्म से लेकर उसके मृत्यु तक लगातार. गलत हो। इसलिए कर्ण. ओके कृपाचार्य द्रोणाचार्य में ज्यादा. न्याय गुरु कौन था? द्रोणाचार्य.
ओके लोग अपने बच्चों का नाम विभीषण क्यों. नहीं रखते? क्योंकि विभीषण तो भगवान राम. के साथ ही थे। बाकी सब बदनाम नहीं हुए।. विभीषण क्यों बदनाम हो गए? यह तो मैं लगातार मैं खुद बोलता हूं कि. उसको विभीषण को हम लोग क्यों ट्रोल करते? वह तो हमारे साइड। उनको तो लंका वाले. ट्रोल करे ना। हमारा साथ लेकिन वो घर का. लंका वाली बात है तो इसलिए विभीषण का नाम. रखने से लोग बचते हैं. कि हर घर के अपने सीक्रेट्स होते हैं. और विभीषण नाम के साथ ये जुड़ा हुआ है कि. वो घर के सीक्रेट्स बाहर ले जाए।. ओके अगर कोई एक किताब आपको रिकमेंड करनी.
हो सबको पढ़नी चाहिए।. कौन सी होगी? अपनी किताबों के अलावा या अपनी भी कर सकते. हैं।. कोई भी. बड़ी मेहनत करके लिखा हूं। द हिडन हिंदू. नागा वॉरियर्स ट्राई कीजिए। लेकिन उसके. अलावा अश्विन सांगि साहब बहुत कमाल के. लेखक हैं मेरे लिए। उनको जितना मिल सके. जितना ढूंढ पाए पढ़िए बहुत सारे बहुत सारे. ऑथर सच अगर भगवान शिव से एक सवाल पूछने का. मौका मिले. क्या पूछेंगे मेरे को अपने पास कब बुला. रहे हैं मेरा हो गया है रामायण में कोई एक. किरदार जिससे मिलना और कुछ पूछना हो क्या.
पूछेंगे. रामायण के जामवंत से मिलना चाहता हूं. जामवंत से क्यों. जामवंत के पास बहुत कहानियां है वो कृष्ण. से भी लड़ गए थे वो हनुमान जी से भी मिले. हैं वो राम जी का भी साथ दिए. माना गया है कि वो हनुमान से कहीं ज्यादा. बलशाली थे जब वो अपने अपनी जवानी की. अवस्था में थे तो तो वो दिखते भी बड़े ऐसे. मतलब बड़े मिस्टीरियस से हैं तो मैं जामन. से मिलना चाहूंगा. महाभारत में कोई कैरेक्टर जो आपको लगता है. उतनी चर्चा नहीं होती बट इससे मिलेंगे.
ज्यादा मजा आएगा. एक तो मैंने बोला ही मैं तो वेदव्यास से. मिलना चाहता हूं ये मैं बोल चुका हूं. हम. कि उनके बारे में कोई बात नहीं करता जिसने. सब कुछ देखा सब कुछ लिखा उसके बारे में तो. बात करो. हम. रामायण या महाभारत कहानी ज्यादा. इंटरेस्टिंग कहां पर है? इंटरेस्टिंग इंटरेस्ट की बात करेंगे तो. महाभारत किरदार ज्यादा है।. कॉम्प्लिकेशंस ज्यादा है।. हीरोज़ बहुत सारे हैं।. हां। और रामायण बहुत सीधी-सीधी कहानी है. क्योंकि वो एक और युग पुरानी कहानी।.
रामायण. सीखें क्या करना है? महाभारत सीखें क्या. नहीं करना है।. दोनों में दोनों चीजें हैं। दोनों में. दोनों चीज़ हैं।. महाभारत से क्या सीख सकते हैं? क्या करना. है? महाभारत से क्या सीखें? क्या करना है? हां। जैसे महाभारत से क्या ना सीखे तो. हमको समझ में आ गया। क्या सीखे करना है ये. हमको समझाइए।. अ बहुत सारी चीजें हैं पर मैं सोच रहा हूं. वो एक चीज बोलना है तो क्या अर्जुन को. लेंगे तो अपने लक्ष्य को कैसे साधना है वो. सीख सकते हैं।. दुर्योधन को लेंगे तो आप सीख सकते हैं कि.
जो लक्ष्य बना लिया उसको कैसे नहीं छोड़ना. है। चाहे कुछ भी हो जाए। पूरी दुनिया आपके. खिलाफ हो जाए। आप खड़े रहेंगे तो खड़े. रहेंगे। भीष्म पितामह से सीखना है तो प्रण. सीख लीजिए।. युधिष्ठिर से सीखना है तो सच बोलना सीख. लीजिए। नकुल सहदेव से सीखना है तो भाइयों. के प्रति उनका जो समर्पण था वो सीख लीजिए।. एक कैरेक्टर महाभारत का जिसे जिंदा करने. का मौका मिले तो आप जिंदा कर देंगे।. अरे बड़े कैरेक्टर है भाई अभिमन्यु. कैरेक्टर है। कर्ण का है। द्रोणाचार्य है।.
भीष्म पितामह है।. नहीं नहीं मैं ये सोच रहा हूं कि किसको. अगर वापस जीवित कर दिया जाए तो इंपैक्ट. चेंज हो जाएगा।. हां वही वही है। हां। वो सोचने की कोशिश. हो रही है।. दुर्योधन है। बड़े कैरेक्टर हैं जिसमें आप. किसी को जिंदा कर सकते हैं।. नहीं ये नहीं आ रहा है मेरे दिमाग में।. मैं अब उस नाम में फंस गया।. ओके।. अगर आपकी लाइफ पर एक फिल्म बने।. जी।. क्या नाम देंगे? मेरी लाइफ पे फिल्म है।. हम्म।.
नहीं ये भी नहीं बता पाऊंगा। ये तो जो. लिखेगा वो सोचेगा। क्या सोचा नहीं अपनी. कहानी लिखने को? मेरी समकक्ष ने एक बार बोला था कि हम. लोगों की लव स्टोरी पे एक फिल्म बनाइए. क्योंकि उन्होंने गजब का साथ दिया। आज के. समय में ऐसा साथ देने वाला जीवन साथी कम. लोगों को मिलता है।. तो मैंने उनसे कहा था कि अगर मैं ये फिल्म. लिखूंगा तो सुपर फ्लॉप हो जाएगी।. तो उन्होंने पूछा था क्यों? तो मैंने कहा. कि क्योंकि आपने मेरे लिए जो किया है वो. अगर मैं लिख के बाहर निकालूंगा तो लोग. बोलेंगे कि ये मनगढ़ंत कहानी बना रहा है।.
आज के समय में ऐसी महिलाएं नहीं होती है. और ऐसा साथ देने वाले साथी नहीं मिलते. हैं।. हम. तो इस बात पे वो फिल्म फ्लॉप हो जाएगी कि. अब ऐसी ऐसे साथी नहीं होते।. ओके। अहिल्या का उद्धार. जी. या शबरी का मिलन किस कहानी में करुणा. ज्यादा नजर आती है? शबरी के मिलन में। उनका इंतजार बड़ा लंबा. रहा था।. बहुत लंबा रहा था। और वो इंतजार करते-करते. इतनी भूली हो गई थी कि उनको ये नहीं समझ. में आ रहा था कि राम को झूठे बैर. खिलाड़ियों में क्या लेवल ऑफ प्यार है।.
खा लो अच्छा खाते रहो। वैसे गांव में ऐसी. महिलाएं मिल जाती हैं कई बार. पर वो एक आध खा के बस समझ लेती है ना वो. चावल का एक दाना दबा के आप समझ जाते हैं. पका है कि नहीं पका बेचारी सब खिला के. हां तो उनको लगा ये मीठा है ये वाला ये. वाला भी थोड़ा मीठा है. ये भी मीठा. ठीक है ये होता है ना आम या अमरूद थोड़ा. चीख लिए खाते जाओ. वैसा. वो कच्चा वाला नहीं खाने देंगे. ठीक लिए जो बोले ना ये यूपी का शब्द है. मुंबई साइड कम सुनने मिलता है अच्छा लगा. का. कुंभकरण की नींद या विभीषण की नीति रावण.
के अंत की शुरुआत किसने की. विभीषण की नीति ने कुंभकरण के मरने के बाद. भी रावण नहीं मरता अगर विभीषण राम की तरफ. नहीं होते। यह सब वो खास लोग हैं जो मैं. अभी आपको सीता एंड सुनाते सुनाते बोला था।. दी सराउंडिंग्स ऑफ एन ऑर्डिनरी मैन मेड. राम दी राम।. ओके। रावण ने मंदोदरी की बात मान ली होती. तो रामायण रुक जाती।. रुक जाती। क्योंकि बहुत बार उनको चेता. उसको चेतावनी दी गई थी कि वापस कर दो हम. लौट जाएंगे। दुर्योधन के पास अश्वत्थामा.
और कर्ण ना होते तो महाभारत ना होती. होती. ही होती अगर दुर्योधन की तरफ 99 भाई नहीं. होते एक तो इधर आ गए थे बचे 98 है ना उनको. मिला के खुद 99 दुर्योधन की तरफ बाकी 98. भाई भी नहीं होते. हम. वो अकेले भी खड़ा रहता तो लड़ता. हम. सीता जी का त्याग या द्रोपदी का गुस्सा. द्रोपदी का गुस्सा आज के समय में और आज के. संदर्भ में द्रोपदी का गुस्सा. ओके का कर्ण का दानवीर स्वभाव या भीम की.
शक्ति किसने युद्ध में जरा असर डाला. भीम की शक्ति ने कर्ण अगर दानवीर नहीं. होते तो फिर हारते नहीं. कर्ण अगर दानवीर नहीं होते तो. हारते इसलिए और गुस्सा आई थी वो जो. कवच और कुंडल. कुंडल दे दिया था उन्होंने मुझे लगा यार. एक आदमी को जीवन में कुछ नहीं मिला. हम. और जो एक चीज उसके पिता ने दे दी. वो भी उसने उतार के दे दिया. उसे भी उसको छल से ले लिया गया भावुक करके. आप भावुक आपने उसको युद्ध की नीतियां पढ़ा.
दी कि युद्ध की नीति में ऐसा ऐसा ऐसा होता. है और ऐसा-सा करोगे तो यही और फिर. परशुराम से भी तो श्राप मिला था ना कर्ण. को कि जब सबसे ज्यादा मेरी विद्या की. जरूरत पड़ेगी तो भूल जाओगे. वो भी वो भी गलत था वो उसके साथ. नहीं वो तो दोनों जगह दोनों लोग अपनी-अपनी. जगह सही है उस कहानी में कम से कम. हां बट अगर वो सीखने जाए बिच्छू काट लिया. वो मतलब आप ही सोचिए कि मेरे गुरु को. बिच्छू ना काटे इसलिए मैंने दर्द सह लिया. वो तो अच्छा अच्छा किया ना उन्होंने लेकिन.
वो पहुंचे तो वहां झूठ बोल के ही थे।. परशुराम जब भीष्म पितामह से युद्ध हार गए. थे। भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण ये. तीनों परशुराम के शिष्य रहे। है ना? तो जब. अंबा, अंबिका, अंबालिका वाली कहानी में जब. भीष्म पितामह से लड़ने पहुंचे परशुराम और. भीष्म पितामह जीत गए। तो वो ऐसा हो गया ना. कि गुरु गुड़ रह गए, चेला चीनी हो गया कि. हमको तुम हरा दिए हमसे सीख के। तो उस दिन. परशुराम ने यह प्रण ले लिया था कि अब किसी. क्षत्रिय को कभी नहीं सिखाऊंगा।. उसके बाद कर्ण आए।.
भीष्म पितामह के बाद द्रोणाचार्य को. सिखाया जो ब्राह्मण थे। उसके बाद कर्ण आए।. सूतपुत्र बन के आए। सीख लिया सब कुछ।. बिच्छू काटा हिले नहीं। जब वो खून. बहते-बहते पहुंचा और तब इनको समझ में आया. कि ब्राह्मण या कोई और सूतपुत्र कोई भी. होगा। ये इस तकलीफ को झेल ही नहीं सकता।. नहीं हो ना हो क्षत्रिय है तो और उस समय. तक कर्ण को मालूम था वह कौन है तो फिर. परशुराम ने बोला कि तुमने मेरी विद्या झूठ. बोल के ली है जब सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी. तो भूल जाओगे. तो फिर युद्ध में जो जिस दिन सबसे ज्यादा.
जरूरत थी कर्ण को उस दिन गो मंत्री आते. तो परशुराम के तीन शिष्य जिसमें भीष्म. पितामह. गुरु द्रोणाचार्य और कर्ण. इनमें सबसे बलशाली ताकतवर कौन है? भीष्म. पिता भीष्म पिताम. जिसको इस बात का वरदान हो कि इच्छा मृत्यु. मिलेगी मैं मरूंगा ही नहीं जब तक मैं ना. चाहूं उसको आप कैसे हराएंगे. बाकी लोग का तो कि को मृत्यु आना तय था ना. भीष्म पिता मृत्यु आना ही तय नहीं था मैं.
डिसाइड करूंगा मैं कब जाऊंगा आप अभी. पॉडकास्ट खत्म करके बोलेंगे अक्षत निकलो. यहां से तो मेरे को निकलना पड़ेगा. स्टूडियो आपका है मैं बैठ जा मैं जाऊंगा. ही नहीं यहां से कैसे निकाल डालेंगे मेरे. को और ये तीनों छल से मारे गए। तीनों छल. से मारे गए। अगर फेयर फेयर अगर फेयर वॉर. होती तो क्या कौरव से पांडव जीत पाते? अगर. फेयर वॉर होता तो वॉर फेयर नहीं होता।. नहीं जीत पाते। पांडव नहीं जीत पाते।. तो कहानी अलग होती। बिल्कुल अलग होती। फिर.
वही मैंने बोला ना फिर शकुन की शकुन की. पूजा होती।. बट ये बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है। अगर अगर यह. वॉर अलग तरीके से हुई होती. जी. तो हम एक अलग इतिहास पढ़ रहे होते।. हां. बिल्कुल अलग इतिहास पढ़ रहे होते।. भाई पाकिस्तान में दोनों वॉर वो लोग जीते. हैं ना उनके टेक्स्ट में।. हम सतयुग का शांति भरा जीवन कलयुग का. संघर्ष ज्यादा क्या सिखाता है? सिखाता तो संघर्ष ही है। हम. एक बड़ी अच्छी बात है कि एक एक सर्कल है.
जनरेशंस का।. जो अभाव देखता है वह मेहनत करता है। वह. मेहनत करके सुख सुविधा जुटाता है। उसका जो. बेटा होता है वो सुख सुविधा में पलता है. इसलिए कमजोर होता चला जाता है। जब वो काम. संभालता है तो उसको सब बना बना उसको. संघर्ष नहीं पता है। वो उसको गिराना शुरू. करता है। तीसरा जनरेशन जब तक उसके पास सब. कुछ आता है। वो फिर अभाव में होता है।. इसलिए उसको फिर संघर्ष करके सीखना होता.
है। तो यह सर्कल है। इसीलिए तीसरा जनरेशन. आतेआते बड़े-बड़े तुरमखान खत्म हो जाते. हैं।. आखिरी सवाल कैलाश पर्वत का रहस्य. जी. या द्वारिका गायब होना? कैलाश. ज्यादा रहस्य कौन है? कैलाश पर्वत का रहस्य बहुत ज्यादा है।. द्वारिका के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ. है। अब उसके अवशेष भी मिल रहे हैं। सबम. द्वारिका में तो आप आपको जो बताया गया है. उसका प्रमाण है। कैलाश पर्वत तक अभी तक. कोई पहुंच नहीं पाया। कमाल की जगह है। आज. तक उस उसका शिखर कोई छू नहीं पाया चढ़ के।. जबकि उससे ऊंचा है एवरेस्ट वो चढ़ा हुआ है।.
एक बड़ी अच्छी चीज है कि कैलाश पर्वत जो है. वो नॉर्थ पोल से 666. कि.मी. दूर है और साउथ पोल से 666. * बाय 2 कि.मी. दूर है। एग्जैक्टली डबल।. तो ये उसके बारे में जितनी अजीब सी. कहानियां हैं वो सिर्फ इत्तेफाक नहीं लगती. कि उसका प्लेसमेंट भी ऐसा है। उसको एक्सेस. मुंडी बोला गया है पूरे विश्व का कि वो. पूरा धुरी पे जो पूरा पृथ्वी घूम रहा है. वो इसलिए घूम रहा है क्योंकि कैलाश पर्वत.
का जो प्लेसमेंट है वो वहां है। उसको. बैलेंस रख रहा है। क्योंकि धरती आप देखिए. ना कि अगर उसका इतना ग्रेविटेशनल फोर्स. बढ़ जाए 1% बढ़ जाए तो सूरज की तरफ जाने. लग जाएगा और 01% घट जाए तो सोलर सिस्टम से. बाहर जाने लगेगा तो कितना एक्यूरेट है कि. वो बस वहीं पे इतने हजार साल से घूम रहा. है। उसका श्रेय कहीं ना कहीं हमारे पूर्वज. कैलाश पर्वत को भी देते हैं। तो बहुत ही. मिस्टीरियस है। वहां चढ़ने वालों के नाखून. और दाढ़ी तेजी से बढ़ने लग जाता है। यह सच.
है। क्यों होता है नहीं पता। माना गया कि. कैलाश पर्वत में ज्ञानगंज नाम का एक पूरा. शहर है। जैसे मार्वल फिल्म में वकांडा है. ना ब्लैक पैंथर का वैसा एक पूरा शहर है।. जहां पे सारे. सप्तऋषि सारे चिरंजीवी और हर वो हर वो. स्पीशीज जो यहां से विलुप्त हो जाती है. उसको वहां सहेज के रखा जाता है। क्योंकि. जब फिर से विश्व पृथ्वी शुरू होगी तो फिर. वही हाथी की जगह हाथी घोड़े की जगह घोड़े. और ऊंट की ऊंट जगह ऊंट को बैठना पड़ेगा।. तो सबको वहां सहेजा जा रहा है। वो विलुप्त.
शहर है और वो भगवानों का शहर है। नाम है. ज्ञानगंज। उसको शंगला भी कहते हैं। वो. आपको और मेरे को इस आंख से नहीं दिखता।. इसीलिए कैलाश पर्वत पे कोई पहुंच नहीं. पाता।. इंटरेस्टिंग स्टोरी। अब इस पे एक पडकास्ट. और करेंगे। लवली टॉकिंग टू यू सर। बहुत. सारे विषयों पर बड़ी देर तक हमने चर्चा. की।. जी।. कोशिश थी कि पहली बार आप मिले तो ज्यादा. समेटा जाए।. बिल्कुल।. अगली बार टुकड़ों-टुकड़ों में आपको. समेटेंगे।. एक आखरी में मुझे एक बात कहनी कि. मैं जानता हूं कि मैं अपने पास्ट के बारे.
में बहुत बार बात करता हूं क्योंकि वो. मेरा पास्ट है और अगर किसी को बदनाम. बेइज्जत करने का प्लान होता तो मैं फिर. उनका नाम उनके रहने की जगह ये सब बोल चुका. होता। तो मैं ये इसलिए नहीं बोलता हूं कि. कोई बदनाम हो जाए। मैं इसलिए बोलता हूं कि. मेरे पे जो बीती है उससे मैं अभी तक पूरी. तरीके से उभर नहीं पाया हूं। तो मैं अपनी. अपनी तकलीफ को सबके सामने रख देता हूं और. जितने अच्छे से अच्छी चीजें रखता हूं मैं. अपने बाकी दुख मैंने बताया ना मैं पडकास्ट.
में अभी थोड़े दिन पहले इंस्टा लाइव जाके. बोल रहा था मेरे को अच्छा नहीं लग रहा मैं. ऐसा ही हूं तो उसको कोई पर्सनली ले तो. स्वागत है. नहीं नहीं आपने अपनी कहानी को तभी विस्तार. में समझा देता कि आपकी कहानी का वो हिस्सा. जो आपके आपने आपकी और आपके परिवार ने सहा. उसके लिए मैं कैसे माफ कर दूंगा कैसे भूल. जाऊं वो एक कहावत है ना फॉरगिव एंड फॉरगेट. गेट फॉरगिव एंड फॉरगेट ये बोलने सुनने. लिखने पढ़ने में ही अच्छा लगता है। मेरे. को डायमेंशिया है कि मैं भूल जाऊंगा। नहीं. है मेरे को डायमेंशिया और अगर हर चीज भूल.
जाना है तो आप मेरे साथ जो अच्छा कर रहे. हैं मैं वो भी भूल जाऊंगा। चलेगा आपको. नहीं चलेगा। आप चाहते हैं कि मैं आप मेरे. साथ जो अच्छा कर रहे हैं वो मैं याद रखूं. और आप चाहते हैं कि आप मेरे साथ जो बुरा. कर रहे हैं वो मैं भूल जाऊं। ऐसा नहीं हो. सकता।. नहीं दूसरी चीज एक आपकी कहानी में जो वो. भी हिस्सा था कि वो सिर्फ आपका इतिहास. नहीं जिसे भुला दिया जाए। उस इतिहास के. साथ एक वर्तमान भी है।. बिल्कुल है।. तो वर्तमान आपको रह- रह कर याद दिलाएगा।. कितना भी आप भूलना चाहेंगे तो उसका जिक्र. हो जाएगा।. मेरा बेटा नहीं होता तो मेरे को कोई मतलब. नहीं होता कि वो कौन है, कहां है, अच्छे. हैं, बुरे हैं। मेरे को वो जोड़ के रखा है.
और मेरे को अभी भी उसकी तकलीफ है। रहेगी. तो मैं बोलूंगा।. ठीक है। मतलब इसी पे शायद लिखा था किसी ने. कि. वो जो नजरों से एक बार उतर गया। क्या फर्क. पड़ता है? किसके साथ किधर चला गया? हां। उतर गया। किसे फर्क पड़ता है? किधर. गया. वो जो नजरों से एक बार उतर गया. किसे फर्क पड़ता है किधर गया मस्त है ये. याद रखा जाएगा इसे. बहुत मजा आया आपके साथ शुभांकर भाई उम्मीद. करता हूं कि अगर आपके और हमारे दर्शकों को.
कोई अच्छा लगेगा तो हम और बार. अगली आपकी जब किताब आएगी तो अब आप किताब. लिखते रहिए हम आपको बुलाते रहेंगे।. डन डील है।. थैंक यू सर। लवली। हम्म।.
