Jigna Vora Exposed Dark Secrets of Journalism & Dawood Ibrahim| Scoop| Pragya Thakur| Shubhankar
मुंबई अंडरवर्ड के शिकंजे में कैसे चली? हाजी मस्तान, करीम लाला, फिर धीरे-धीरे. दाऊद का आना हुआ।. ऑल एवरीबॉडी स्टार्टेड विद स्मगलिंग ओनली।. फिर धीरे-धीरे एक ट्रांजिशन आया, एक्सट्रॉशन होने लगा। फिर क्रिकेट की. बैटिंग में होने लगा। दाऊद सबको दुबई में. जाके हाजिरी लगानी पड़ती थी। चाहे वो. बॉलीवुड के एक्टर, एक्ट्रेसेस हो या. क्रिकेटर्स हो। हाजी मस्तान, दाऊद. इब्राहिम, अबू सले, छोटा राजन, छोटा शकील.
इनमें अगर ब्रूटिटी के हिसाब से आपको रेड. कर. हाजी मस्तान को क्यों थोड़ा अलग दिखाते. हैं? थोड़ा रॉबिन दिखाते हैं।. सुल्तान मिर्जा का नाम ही काफी है। सामने. वाले की जमानत हो जाएगी।. मुझे नहीं लगता मेरा जहां तक का. एक्सपीरियंस है।. गरीब बच्चे की मां को पैसे दे दे रहा है।. पैसे कहां से आए हैं? इंडिया में बहुत सारे गैंगस्टर्स हुए, बट. दाऊद इब्राहिम को लेकर ये बॉलीवुड का. ऑब्सेशन क्यों रहा? क्योंकि एक सब कुछ एक. मसाला मूवी में होना चाहिए। वह दाऊद की. लाइफ में वह सब कुछ था। बॉलीवुड में. कास्टिंग के लिए अंडरवर्ड की हेल्प ली.
जाती थी। फोन कर कराते थे डॉन से।. तो इज इट ट्रू कि दाऊद के लोग मुंबई पुलिस. में या बाकी जगह शामिल थे? यह बहुत कंट्रोवर्शियल क्वेश्चन है।. आप किससे टच में रहे गैंगस्टर से? दाऊद का भाई तभी आया था। इकबाल कासकर अबू. सलीम को कवर किया।. डॉन अबू सलीम। [संगीत]. डॉन अबू सलीम गैंगस्टर अबू सलीम।. कौन लोग थे जिन्होंने फैला रखा है कि अबू. सलीम पर बहुत सारी लड़कियों का क्रश था।. खुद ही ने शायद ऐसा मार्केटिंग किया है. अब।. आप लोगों को भी क्रश रिश्ता छोटा राजन. दाऊद का रिश्ता क्या रहा है? एक बार ये. पूरा हमें नेटवर्क समझा।. दादा. दाऊद।.
छोटा राजन छोटा शकील, अनीस इब्राहिम और. अबू साले. दाऊद वास कम्युनल. टू सम एक्सटेंट यस।. बट उसकी टीम में जब आप नाम ले रहे हो तो. सारे लोग मिल रहे हैं मुझे।. बाबरी मस्जिद के पहले की बात है।. दाऊद ने कभी इंडिया आने की कोशिश की फिर? दाऊद इब्राहिम ने एक बार फिर भारत को. लौटने की इच्छा जताई। वो टाइम पे उसको आना. था। ही वास रेडी टू फेस द ट्रायल।. मैं तो खुद वापस आना चाहता था। छोटा राजन. कैसे आप जानते थे? मुझे फोन किया। ऑफिस में किया था फोन. [संगीत] और वो मेरे ट्रायल में आया है।. बाया डोलास या माणिया सुरवे शूट आउट एट. वडाला शूट आउट एट लोखंडवाला ये सब सही.
सीरीज है।. शूट आउट एट वडाला की तो मैंने रिसर्च की. है।. 261 में हालांकि मीडिया के रोल को बहुत. क्वेश्चन किया जाता है।. मुंबई के साथ होटल के अंदर आतंकवादी घुस. चुके हैं।. मीडिया ने इंफॉर्मेशन लीक कर दी। बहुत. सारी आतंकवादियों को हेल्प मिल रही थी। आप. मानते हो कि मीडिया का फौल्ट था? हां थी।. जिन कैदियों को आप कवर करते थे एक रोज आप. उनका हिस्सा बन जाते थे।. इट वास वेरी टफ जेल में वही कैदियों को. मिलना जिसकी मैं ब्रेकिंग स्टोरी कर चुकी. हूं या फिर मेरी स्टोरीज की वजह से वो लोग. अरेस्ट हुए हैं।.
कौन-कौन से लोग थे उस वक्त आपके साथ जेल. में जो नोन फसेस में से. प्रज्ञा ठाकुर सिंह साध्वी जी थे। फिर एक. मटका क्वीन थी।. जिन्होंने आपका जीना दुश्वार कर रखा था।. [हंसी]. जेल में सबके साथ बराबर ट्रीटमेंट होता है. या डिपेंड करता है गवर्नमेंट की लाइकिंग. डिसलाइक पे? तो मुझे गर्म पानी चाहिए था नहाने के लिए।. उसके लिए मुझे से आर्डर लेना पड़ा था और. वो भी एक टंबलर ही पानी मिलता था मुझे।. सबसे डरावना अनुभव क्या था जेल में? जब फर्स्ट [संगीत] डे एंटर होते हैं जेल. में तुम्हारा चेकिंग होता है पूरे कपड़े. निकाल के। मुझे याद है आज भी वो दिन। आई. वास हैविंग प्रीियर्ड्स। तो मेरे को ब्लड.
भी निकल रहा था और मुझे उठाया बिठाया जा. रहा था। वो बहुत ह्यूमिलेटिंग था। आज भी. मैं कांप जाती हूं वो जिससे मेरे रोंगटे. खड़े हो जाते हैं।. आपको जेल में क्यों भेजा गया? ओ भाई मुझे भी ये आंसर चाहिए।. महिला जेल में क्या-क्या परेशानियां होती. है? प्रोस्टट्यूशन की ऑफर दी गई थी। किसी भी. टीवी चैनल, किसी भी प्रेम के अखबार ने कभी. आपको दोबारा अप्रोच नहीं किया? नहीं, किसी ने नहीं. कि आके हमारे लिए काम कर लो।. नहीं।. सिर्फ बिग बॉस जैसे शोज़ बुला देते हैं।. कंट्रोवर्शियल कैरेक्टर चाहिए?
किस्मत भी अजीब-अजीब तरह की खेल खेलती है।. वो शख्स जो कभी किसी पर कहानियां लिखती थी. कि रोज कहानी बन गई। वो जो क्राइम की. दुनिया में कैदियों को कवर करती थी एक रोज. खुद कैदी बन गई। उसी कहानी पर एक वेब. सीरीज ही बनी लेकिन फिर भी उस कहानी में. बहुत कुछ है जो आपको जानना चाहिए। जगना. बोरा कैसी हैं आप? एकदम बढ़िया। हाउ आर यू? आई एम वेरी गुड। और एक पत्रकार होने के.
नाते एक पत्रकार का इंटरव्यू लेना हमेशा. दिलचस्प रहता है।. यस।. क्योंकि बहुत सारी बातें आपको पता होती. है।. पता होती है। सही बात है।. बट जब भी मैं आपकी कहानी सुनता हूं, मुझे. लगता है ये कैसा खेल था? कि जो जिन कैदियों को आप कवर करते थे एक. रोज आप उनका हिस्सा बन जाते हो। हाउ. ब्रूटल लाइफ इज या ऐसे ब्लेसिंग गाइस. देखते हो जब पीछे मुड़ के आप देखते हो।. आज मैं उसको इट वास वेरी टफ बेसिकली नो. डाउट अबाउट इट।.
जेल में वही कैदियों को मिलना. जिसकी मैं स्टोरी ब्रेकिंग स्टोरी कर चुकी. हूं या फिर मेरी स्टोरीज की वजह से वो लोग. अरेस्ट हुए वैसे भी लोग थे वहां पे तो इट. वाज़ रियली वेरी टफ इनिशियली बहुत मुझे वो. मैं डरी हुई सी आज वो चीज को 14 साल हो गए. तो मैं मानती हूं आज जैसे आपने बोला मुझे. लगता है यस इट इज़ ब्लेसिंग इन डिसेंस. आज ऐसा लगता है मुझे क्योंकि बहुत कुछ.
सिखा दिया। बहुत कुछ चाहिए। 14 साल ने. सिखा दिया। बहुत कुछ आज भी सीख रही हूं।. नो डाउट अबाउट इट। बट या जर्नी काफी लोगों. को लगता है बहुत एडवेंचरस जर्नी है। बट. मैंने गुजारी है तो आई नो हाउ आउट ऑफ इट. वाज़। आपके बहुत सारे साथी उस दौर के जेल. के अब धीरे-धीरे छूट कर बाहर आ रहे हैं।. सही बात है या पूरी तरह से क्लीन चिट पा. रहे हैं।. सही बात है। मुझे समझ में आ रहा है आप. किसके बारे में बोल रहे हो। अरे अपनी-अपनी.
किस्मत है।. कौन-कौन से लोग थे उस वक्त आपके साथ जेल. में जो नोन फसेस में से है।. जैसे अभी आपने बोला प्रज्ञा ठाकुर सिंह. साध्वी जी थे। फिर एक मटका क्वीन थी जो. जिसका नाम जया छेड़ा है. जिन्होंने आपका जीना दुश्वार कर रखा था।. सॉर्ट ऑफ यस बहुत ही आज भी मुझे सच में. उससे डर लगता है। मैं झूठ नहीं बोलती हूं।. फिर पिक पॉकेटर्स लोग थे। फिर बहुत सारे. जो छोटे-मोटे केसेस होते हैं। उसमें मेड्स.
थी जो चोरी करती है घर में। फिर चीटिंग. वाली औरतें थी। वो टाइम पर लिमोजनी का. बहुत फेमस चीटिंग का केस हुआ था मुंबई. में। वो लेडी थी। शी मस्ट हैव डन। वो टाइम. पे कुछ 700 करोड़ का चीटिंग केस था।. बाप रे. वो थी उसकी मां थी। वो लोग के अगेंस्ट. बहुत सारे पूरे इंडिया में केसेस थे। तो. वो लोग जेल यात्रा पे निकले थे। ऐसा हम. लोग बोलते थे। तो हां काफी लोग थे।.
दोस्त बनाए थे जेल में? नहीं। जेल की दोस्ती कभी बाहर नहीं लेके. आनी चाहिए। नहीं दोस्त तो कोई नहीं बना. है। बट. एक एनक्लोज्ड जगह होती है। हम 100 औरतें. थी अराउंड 100 डिपेंडिंग।. द बेस्ट पार्ट था कि वो लोग कोई जज नहीं. करते एक दूसरे को।. किसी भी चीज के लिए।. नहीं, किसी भी चीज के लिए नहीं। और मेरा. तो बहुत हाई प्रोफाइल केस था। एमसीयूसी.
में थी।. तो एक वो दर्जा दिया गया था मुझे तो हाई. प्रोफाइल. आरोपी का. तो हां ऐसा था. जेल में सबके साथ बराबर ट्रीटमेंट होता है. या डिपेंड करता है गवर्नमेंट की लाइकिंग. डिसलाइकिंग पे. नहीं मोस्टली तो सबके साथ एक जैसा ही. व्यवहार होता है और जो भी आपको चाहिए मतलब. लाइक फूड चाहिए.
तो आपको कोर्ट के ऑर्डर्स लाने पड़ते थे।. मुझे गर्म पानी चाहिए था नहाने के लिए। तो. उसके लिए मुझे कोर्ट में ऑर्डर कोर्ट से. ऑर्डर लेना पड़ा था और वह भी एक टंबलर ही. पानी मिलता था मुझे गर्म नहाने के लिए। वो. आई थिंक आफ्टर 25 डेज ऑफ़ माय अरेस्ट एंड. गोइंग टू जेल। मुझे कोर्ट से ऑर्डर मिला।. दिसंबर का महीना था। हालांकि दिल्ली जैसी. सर्दियां तो यहां पे नहीं होती है बट फिर. भी तो हर एक चीज के लिए आपको कोर्ट से.
ऑर्डर ही लेना पड़ता है। सो मोस्टली तो. इक्वलिटी ही होती है।. मैंने कई सारे जेलर के इंटरव्यूज किए। वो. कहते हैं अगर अच्छा पैसा हो सारा जुगाड़. हो जाता है। बड़ी सारी कहानियां सुनी है।. दिल्ली के जेलर साहब की एक सीरीज भी आई थी. अभी भी आई. और उन्होंने खूब कहानियां सुनाई मैं लेकिन. उधर नहीं जाऊंगा मैं। मैंने प्रज्ञा ठाकुर. का नाम शुरू में लिया।. प्रज्ञा ठाकुर जब अभी पूरी तरह बरी हुई तो. उन्होंने बहुत सारे एलगेशन लगाए कि मुझे. बहुत यात्राएं दी गई और उनके चाहने वाले. अब ये कहते हैं कि बहुत प्रताड़ित किया. गया मारा गया पीटा गया टॉर्चर किया गया.
हमने उनके मुंह से सुना है बहुत लंबे समय. तक वो एक्यूज रहीं अब उन्हें लोग विक्टिम. के तौर पर देखते हैं सच था उनको इतना. टॉर्चर किया गया था उस दौर में. वो टाइम पे मैंने मालेगांव केस कवर किया. था तो हां मैंने ये स्टोरीज की थी क्योंकि. उसने कोर्ट में एप्लीकेशन करते थे वो कि. मुझे मुझे बहुत मारा गया और मैंने देखा भी. था कोर्ट में जब उसको लेके आते थे शी वाज़. नॉट एबल टू वॉक उनकी बैक के लिए भी सपोर्ट. जब मैं जेल में थी तभी भी मैंने देखा कि. उनके लिए बैक का उनको पकड़ के ही चलना.
पड़ता था वो विदाउट सपोर्ट नहीं चल पाती. थी बैक में और सब डैमेज बहुत हुआ था लेग्स. में और सब कुछ ये एज अ स्टोरी भी मैंने की. है. मतलब महिलाओं को वैसे ही पीटते हैं जैसे. पुरुषों को प्रताड़ित करते हैं जेल के. अंदर. जेल के अंदर नहीं ड्यूरिंग पुलिस कस्टडी. कस्टडी. जब इन्वेस्टिगेशन होता है तभी जेल के अंदर. भी मारते हैं क्योंकि उनको सबको कंट्रोल. में रखना पड़ता है तो मारते तो हैं मैंने. खुद भी देखा है अपने आंख से और बाद में एक.
फेमस अभी केस भी हुआ जिसमें सभी पुलिस. कास्टेबल लेडीज कस्टोडियल डेथ का तो प्रूफ. तो है ही मारने का. आप क्राइम रिपोर्टर क्यों बने थे आमतौर पर. लड़कियां जो होती हैं वो एंटरटेनमेंट में. जाती. या न्यूज़ पढ़ने आती हैं। न्यू पॉलिटिकल. में भी रहती हैं। क्राइम रिपोर्टर महिलाएं. कम होती हैं। आज के दौर में भी काफी कम. है।. कम है। सही बात है। अ मैं एजुकेशन व. एलएलबी हूं। लॉ किया है मैंने। तो वो बेस.
पे मुझे फर्स्ट कोर्ट भी दी गई। और कोर्ट. में जाते-जाते बहुत थिन लाइन होती है. क्योंकि सब अक्यूज़्ड आरोपी लोग आते हैं. वहीं पे। तो धीरे-धीरे आरोपी से बात होने. लगी। ह्यूमन इंटरेस्ट स्टोरी आरोपी के घर. वालों की करने लगी और फिर वो सेशंस कोर्ट. कर यहां पे है कालाघोड़ा में बॉम्बे में. तो वहां से फिर कब क्राइम ब्रांच क्राफर्ड. मार्केट चली गई कोर्ट करने स्टोरी करते-कर. करतेकरते वो बहुत थिन लाइन थी। मैं हर एक.
स्टोरी डॉक्यूमेंट के बेस पे करती थी. क्योंकि कोर्ट रिपोर्टर है। तो काफी आरोपी. के कन्फेशंस निकालती थी। फिर वो आरोपी से. बात करते-कर करते करते क्राइम रिपोर्टर बन. गई। शुरू मजबूरी में किया फिर मजा आने. लगा।. नशा है हु बेटर देन यू नॉट टू अंडरस्टैंड. दिस? बट घरवाले कभी परेशान नहीं किए कि यार. क्राइम है दिन भर तुम गुंडों मवालियों और. उस दौर में तो आतंकवादी थे वो टेररिस्ट. थे।. टेररिस्ट थे।. हां उनसे उठना बैठना उनको डिब्ब उनसे उनको.
गिफ्ट देना।. नहीं घर वालों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया।. वो टाइम पे भी। बच्चा छोटा था। चार-प साल. का था। फोर फाइव इयर्स ओल्ड सन था। तो बट. घर पर रूल था एक कि 10:00 बजे घर पर आ. जाना है। तो आई यूज्ड टू सी टू इट कि मैं. पौ:45 बजे घर पे आ जाऊं। वरना मेरे नाना. जी 10 में 10 10 और 10 हो जाती थी तो घर. लॉक कर देते थे। इतना स्ट्रिक्ट में मैं. पढ़ी हूं। बड़ी हुई हूं।. तो आप आपने टीवी में भी काम किया?
नहीं।. कभी नहीं काम किया? नहीं। प्रिंट. प्रिंट में ही काम किया आपने। उस दौर के. जर्नलिज्म में जब आपने सब शुरुआत की. क्राइम की तो एक वुमेन के लिए क्या. चैलेंजेस थे? बहुत सारे चैलेंजेस थे। पहले तो टू डील. विद. आदमियों की इनसिक्योरिटी से डील करना सबसे. बड़ा चैलेंज था। क्योंकि जो रिपोर्टर मेन. जो रिपोर्टर्स हुआ करते थे मेल रिपोर्टर्स. उनको ज्यादा इनसिक्योरिटी होने लगती थी कि. जिगना स्टोरीज करके चली गई हमारे नाक के. नीचे से और वही चक्कर में मैंने बहुत.
दुश्मनी मोड़ ले ली। बहुत दुश्मनी ले ली. मैंने। एक वो चैलेंज सबसे बड़ा चैलेंज था. वो क्योंकि उनको एक्सेप्ट नहीं करना था कि. एक लड़की औरत लड़की तो नहीं थी मैं 32. इयर्स की थी तो कैसे हमारे नाक नीचे से. स्टोरी लेके जाने फिर कैरेक्टर कैरेक्टर. अससिनेशन से लड़ना पड़ता था अगेन एंड अगेन. आपको प्रूफ करना पड़ता था कि भ हमारा. कैरेक्टर क्लीन है बट फिर भी कैरेक्टर का.
बहुत असेस ह्यूमिलेशन होता था एंड अप. फ्रंट बोला जाता था कि ये सोके स्टोरी. लेती है, करती है। सो ये एक चैलेंज बहुत. थी।. उस स्कूप में भी दिखाने की कोशिश की गई है. कि. पुलिस वाले के साथ भी इन्वॉल्वड है।. जो. बहुत ईजी है।. एडिटर है उसके साथ भी इन्वॉल्वड है।. सबके साथ इन्वॉल्व है। और कुछ काम धंधा है. ही नहीं ना। सबके साथ इनवॉल्व ही हो जाओ. आप। बहुत इजी है ये सब। बोलना बहुत इजी. है। तो चैलेंज वो थी। फिर सब जगह जाने का.
डर भी हुआ करता था। सभी टेरर अटैक मैंने. कवर किया है। 261 कवर किया है। तीन दिन तक. घर पर नहीं गई थी मैं। फिर अभी जो जुलाई. ब्लास्ट हुआ था ट्रेन ब्लास्ट वो टाइम पे. वो कवर किया है। तो वह चैलेंजेस तो बहुत. थे। बहुत आते थे चैलेंज इन्वेस्टिगेटिंग. में आप चाहे वह अंडरवर के से के लोगों से. बात करो। कहीं-कहीं फील्ड वर्क में. कैसी-कसी जगह पर मैं फील्ड वर्क पे गई हूं. ना। आई कैन नॉट टेल यू। बहुत स्ट्रगल किया.
मैंने।. क्या यह इजी होता है? महिला जर्नलिस्ट पे. या महिला जो काम करती हैं कि अगर वह राइज. कर रही हैं तो उन पर टैग लगा दो कि यह तो. अपने बॉस के साथ सो रही होगी या जिनसे. स्टोरी ले रही है वहां सो रही होगी, फेवर. मिल रहा है वहां सो रही होगी। या आसान. होता बहुत आसान होता है। सब लोग यही सोचते. हैं। एक मेल रिपोर्टर या मेल एडिटर सोचता. है तब तलक तो ठीक है। मेरे साथ तो ऐसा भी. हुआ है कि फीमेल रिपोर्टर और फीमेल एडिटर.
ये मेरे पे टैग लगाया है। यह हुआ है मेरे. साथ। तो मैं सोचती हूं आज मैं सोचती हूं. शायद वो लोग वही तरीके से ऊपर पहुंचे. होंगे। इसलिए उनको सब वैसे ही दिखते हैं।. शायद हो सकता है ऐसा।. तो सबसे आपको क्या लगता तो सबसे आपकी. बेस्ट रिपोर्टिंग कौन सी थी अपने दौर में. जो आपने क्राइम की की? मेरी एक टेबल में काम करती थी मैं। मुंबई. का बहुत फेमस टेबल था वो टाइम का।. हम्म।. तभी मैंने स्टोरी की थी टेररिस्ट के फोटोस.
छापे थे मैंने कि उन्होंने रेकी की है। तो. वो स्टोरी मेरी बेस्ट स्टोरी। मुझे ऐसा. लगता है क्योंकि नेक्स्ट डे. लॉ एंड कम लॉ एंड ऑर्डर के कमिश्नर थे के. एल मिस्टर के एल प्रसाद। उन्होंने मैंने. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरा पेपर उठा के. बोला कि ये लड़की ने सब सही लिखा है।. वास माय बेस्ट स्टोरी आई थिंक. इंटरेस्टिंग। मुंबई 1970 के बाद सडनली.
अंडरवर्ड की तरफ बढ़ जाती है। आपने क्यों. कवर किया है तो मैं आपसे मुंबई अंडरवर्ड. दाऊद, अबू सलीम, छोटा राजन इनको बहुत. गहराई से समझता हूं क्योंकि आपने इनको. पढ़ा भी होगा। इनके बारे में भी पढ़ा. होगा। आई एम श्योर उस दौर में जो एडिटर्स. होंगे आपने भी क्यूरोसिटी से उनसे सवाल. पूछे होंगे और फिर आपने कुछ एक्सपीरियंस. भी किया होगा। मुंबई अंडरवर के शिकंजे में. कैसे चली गई? 70 80 से ही धीरे-धीरे पहले इनिशियली. स्मगलिंग हुआ करती थी।. हाजी मस्तान. हाजी मस्तान करीम लाला वो लोग से स्टार्ट.
हुआ 60 70ज में फिर धीरे-धीरे दाऊद का आया. आना हुआ।. लेट अर्ली 80ज में हाउ ही बिकम स्मगलिंग. ऑल एवरीबडी स्टार्टेड विद स्मगलिंग ओनली. इनिशियली जो हम मूवीस में देखते हैं गोल्ड. की स्मगलिंग होती थी एक टाइम पे एक टाइम. पे इलेक्ट्रॉनिक्स की वो सब स्मगलिंग होती. थी फिर धीरे-धीरे एक ट्रांजिशन आया. एक्सट्रॉशन होने लगा वो स्मगलिंग का छोड़.
के फिर बैटिंग क्रिकेट की बैटिंग में होने. लगा वह एक दौर आया 80 का जब क्रिकेट. बैटिंग दाऊद ही यूज़्ड टू मेनली यू नो गेट. इंटू क्रिकेट बैटिंग एंड वह सब सबको दुबई. में जाके हाजिरी लगानी पड़ती थी। चाहे वो. बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेसेस हो या. क्रिकेटर्स हो। वो एक दौर आया 80ज का। 90ज. में हफ्ता वसूली का दौर आया। फिर आपस में. गैंग इंटरनल गैंग राइवलरी होने लगी। आपस.
में वर्चस्व किसका बॉम्बे पे राज कौन. करेगा? वो एक फेज आया। तो हर एक 10 10-10. साल के एक-एक फेज आते थे। फिर एक्सट्रॉशन. जैसे मैंने बोला बिल्डर लॉबी से. एक्सट्रोशन चालू हुआ 90ज में बॉलीवुड. प्रोड्यूसर्स से एक्सट्रॉशन चालू हुआ और. आपस में इंटरनल राइवलरी तो थी जैसे पहले. छोटा राजन और दाऊद एक साथ काम करते थे।. फिर जब बॉम्ब ब्लास्ट हुए फर्स्ट सीरियल. ब्लास्ट उसके बाद दोनों का अलग-अलग दोनों.
हो गए। तो उन उनकी आपस की जो रिाइवलरी थी. वो एक बॉम्बे में कि वो बहुत हुआ करती थी।. उसके होते हुए एनकाउंटर्स होने लगे। वो एक. फज़ आया फिर 90ज में एनकाउंटर्स का. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आने लगे प्रदीप शर्मा. जो बाद में खुद सारे झेल गए।. दे हां दया नायक वो सब आने प्रफुल भूसले. वो सब आने लगे। फिर एक ट्रांजिशन ऐसा आया. कि एक अंडरवर का फिर फेक करेंसी का केस.
ड्रग्स के केस सब में अंडर आर्म्स का केस. में आने लगे। अंडरवर आर्म्स में भी घुसने. लगी थी। फिर एक फज़ आया 200 का जहां पे. टेररिज्म टूक ओवर फ्रॉम अंडरवर और अंडरवर. का सब सोफिस्टिकेशन हो गया पूरा यू नो कि. धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो लोग फेक जैसे दाऊद. वो फेक करेंसी में आगे बढ़ गया। ड्रग का. आर्म्स का डीलिंग में चलने लगा वो ऐसे. आज जिस मुंबई में हम बैठे हैं यहां पर अभी. भी डी गैंग या अंडरवर एक्टिव है या खत्म.
हो चुका है पूरी तरह. आई थिंक अभी तो नहीं है खत्म हो चुका है. पूरी तरह खत्म हो चुका है. पूरी तरह खत्म हो गया. कोई भी ऐसा अंडरवर्ड का गैंग या गैंगस्टर. अभी यहां बड़ा नहीं बचा. अभी तो नहीं बचा. मोस्ट ऑफ देम गॉट एलिमिनेटेड एनकाउंटर्स. में मारे गए फिर सब आधे लोग तो बाहर ही है. इंडिया के बाहर है मोस्टली ऑफ डी गैंग तो. पूरी बाहर ही है इंडिया से।. इंडिया में बहुत सारे गैंगस्टर्स हुए। बट. दाऊद इब्राहिम को लेकर यह बॉलीवुड का. ऑब्सेशन क्यों रहा?
ऐसा लगता है कि इंडिया में गैंगस्टर्स को. बहुत बड़ा करके दिखाया गया।. दाऊद के ऊपर लार्जर देन लाइफ अनगिनत. फिल्में, अनगिनत वेब सीरीज। इवन स्कूप में. एक डायलॉग है कि तुम लोग को दाऊद पर फिल्म. बनाने से फुर्सत मिले तब ना।. तो ये दाऊद इब्राहिम डिस्पाइट नोइंग कि. उसने बॉम्ब ब्लास्ट करवाए। डिस्पाइट नोइंग. कि उसका प्रोफाइल क्या है? कितने लोग मरे? इतना दाऊद इब्राहिम को लार्जर दन लाइफ. क्यों बना दिया? बॉलीवुड ऑल थैंक्स टू बॉलीवुड। मुझे ऐसा. लगता है क्योंकि एक सब कुछ एक मसाला मूवी. में होना चाहिए। वो दाऊद की लाइफ में वो.
सब कुछ था। कैसे वो एक कास्टेबल का पुलिस. वाले का लड़का होके रेबेलियन रिबेलियन किड. होके कैसे वो आगे बढ़ा। उस पूरा एक आप. देखोगे ना तो पूरा मसाला लड़कियों का वो. एक था उसकी हीरोइन से लाइकिंग उसकी लव. स्टोरी सब एक मसाला पॉट बॉयलर जैसा ही था. तो शायद हर एक पिक्चर बनने लगी सत्य बनी. पहले रामगोपाल वर्मा की वो अंडरवर्ड की थी.
उसके पहले आप अमिताभ की सब मूवीस देखो वो. हाजी मस्तान करीम लाला पे बनी सब आई थिंक. क्राइम पे स्टोरी स्टोरीज अंडरवर एक लोगों. को एक बहुत एक एक बोलते हैं ना क्यूरोसिटी. है उसके पीछे कि उनके उनको जानने की बहुत. जिज्ञासा होती है कि हमें पता होना हमें. जानना है ये ऐसा कैसे बन गया. मैं अभी मोहित सूरी का पॉडकास्ट कर रहा था. तो उन्होंने कहा गन और गर्ल.
गर्ल. हो तो ये हिट पिक्चर होती है. बोला तो सही मैंने वही तो कि मसाला मूवी. है मैं एक बुक की रिसर्च कर रही थी तभी एक. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को मिलने गई। मैंने. उनको पूछा सेम कि क्यों ऐसा है सर? लड़कियां क्यों व्हाई डू गर्ल्स गेट. इनवॉल्वड विद अंडरवर गाय? तो उन्होंने. बोला कि जिगना ये 70ज 80ज से आया कि गली. के गुंडे होते हैं ना वो लड़कियां पटाने. लगे और लड़कियां भी पटने लगी क्योंकि उनको.
अच्छा लगने लगा कि मेरा बॉयफ्रेंड गुंडा. है। उसको सिक्योरिटी फील होती थी।. वही धीरे धीरे धीरे देखो आप वही चीजें आगे. बढ़ने लगी कि नहीं मेरा बॉयफ्रेंड गुंडा. है तो बाकी कोई मुझे मस्ती नहीं करेगा. मेरी. हम. तो वो एक फज़ आया फिर वही सब एक बॉलीवुड. में कास्टिंग के लिए अंडरवर की हेल्प ली. जाती थी फोन कर कराते थे डॉन से मूवी में. कास्ट करने के लिए वो एक दौर आया.
उन्होंने पैसा बनाया और उसके सहारे लिंक. बना लिए क्योंकि मैंने देखे बहुत सारे. सारे बॉलीवुड के एक्टर्स जो दुबई में जाकर. दाऊद साहब दाऊद साहब करते थे।. वो तो एक प्रूव्ड है। सब जगह आ चुका है।. वो तो बातें कितनी 80ज की है। आज हम लोग. 2025 में कितने साल पुरानी बात है ये सब।. दाऊद जिंदा हो गया या मर गया? वो तो मुझे नहीं मालूम। आप. गवर्नमेंट को आप इतने गवर्नमेंट के. पॉडकास्ट करते हो। उनको पूछो।. गवर्नमेंट एक बार आया था कि यार 2611 जब. अलादीन को मारा था अमेरिका ने तो हमारे.
यहां लोग एक्साइटेड हो गए थे। हम भी. मारेंगे। तो जो चांसेस थे वो भी खत्म हो. गए।. इनको. हां नहीं हमारे यहां फिर दाऊद को मारने का. प्लान बन रहा था।. इनफैक्ट आपकी वेब सीरीज में भी दिखाया गया. कि एक दो बार कोशिश की थी. कोशिश की. रॉ ने आईबी ने लेकिन फिर मुंबई पुलिस ने. ही आपस में करा दिया तो इज इट ट्रू कि. दाऊद के लोग मुंबई पुलिस में या बाकी जगह. शामिल थे।. ऐसा रिकॉर्ड पे तो है।. आप किससे टच में रहे गैंगस्टर से? मैं किसी के टच में नहीं रही।. किसी को कवर किया? कवर तो बहुत किया।. किसे किसे कवर किया?
छोटा राजन की गैंग को कवर किया। दाऊद की. गैंग को कवर किया, छोटा शकील को कवर किया।. क्योंकि मैं कोर्ट में सब केसेस आए थे ना. तो मैं दाऊद का भाई तभी आया था। इकबाल. कास्कर डिपोर्ट किया गया था दुबई से। उसको. मैंने कवर किया। यहां पे कवर करना बहुत. इंपॉर्टेंट है। कवर मतलब जो स्टोरी. स्टोरी करने आप गए थे।. हां। तो वो किया। अबू सालेम को कवर किया।. हैंडसम गैंगस्टर।. यस मोस्ट हैंडसम गैंगस्टर।. आप लोग को भी क्रश था आप लोग के टाइम पे.
लोग।. नहीं बाबा जरा भी क्रश था। फिर कौन लोग थे. जिन्होंने फैला रखा है कि अबू सलीम पर. बहुत सारी लड़कियों का क्रश था।. वो खुद ही ने शायद ऐसा मार्केटिंग किया है. अपना। उसका लॉयर ही बोलता था।. इतना भी सुंदर नहीं था वो।. लोगों को वो टाइम पे जैसे मैंने बोला ना. लड़कियों को एक क्रेज था कि उनको. प्रोटेक्शन लगता था और बाकी सब गैंगस्टर्स. को तो देखे नहीं किसी ने। तो यही आया. एक्स्ट्रा एडिट होके आया था बॉम्बे। तो. सबको लगा ये तो बड़ा हैंडसम है। उसके पास. साथ-साथ वो गैंगस्टर मूवी आई थी। हम ये.
इसकी कंगना वाली. कंगना इमरान और शाइनी. हां हां उस. उसप उस पे बोला जाता है वो अबू सलेम पे थी. बट मुझे लगता नहीं वो टाइम पे रिलीज हुई।. अच्छा वो मोनिका बेदी वाला कैरेक्टर और. उधर. इंटरेस्टिंग तो दाऊद का जो आप कवर करने आए. तो आप एज अ क्राइम जर्नलिस्ट क्या-क्या. क्यूरोसिटी वाले क्वेश्चंस आपने बहुत से. सवाल लिए थे इनिशियल डेज में क्योंकि उस. टाइम तो वो क्राइम पीक पे था बहुत पीक. क्या-क्या आपके आपकी क्यूरोसिटी क्या थी.
जानने की. सब कुछ जैसे सर हर कोई रिपोर्टर को जानना. होता है हम लोग भी बोलते हैं ना यू शुड. हैव अ नोस फॉर द न्यूज़. हम. तो वो एक हुआ करता था कि ये चीज क्यों हो. रही है क्या रीजन है और सीधा आज भी मैं. सीधा सोच ही नहीं सकती हूं। मैं टेढ़ा ही. सोचती हूं। नीचे मतलब आउट ऑफ बॉक्स ही मैं. सोचती हूं। पहले से पता नहीं मेरा नेचर. ऐसा है क्या है क्या मालूम। एक इंसिडेंट. होता है तो उसके सीधा दिख देख ही नहीं. पाते हम लोग। वो यू आल्सो विल एग्री टू. मी। हम लोग उसको पीछे से ही देखते हैं।.
हां मतलब जो दिख रहा है उसके अलावा चार. सारी चीज़ सोचते हैं।. हां वो हम लोग वही सोचते थे। तो वही एक. क्यूरोसिटी हुआ करती थी। जैसे सालेम आया. तभी उसको वो सोचते थे कि भ क्योंकि लोगों. को जानना आज भी देखो लोगों को जानना होता. है सालेम की लव स्टोरी के बारे में। आज भी. मैं जाती हूं तो लोग मुझे पूछते अरे तूने. तो साले को देखा है ना कैसा दिखता था वो. क्या बातें करता था वो और वो सच में उसका. किसके साथ अफेयर था क्या-क्या था आज भी. लोगों को इतना ही इंटरेस्टिंग लगता है पता.
नहीं. इसलिए क्योंकि वो शायद वो पार्ट ऐसा है जो. अनसुना अनसुलझा या. क्योंकि वो फियर फैक्टर पे खेलते थे वो. लोग वो फोन करते थे एक्सटॉशन के लिए तभी. तो बहुत 90ज में आया हर किसी को को फोन. आते थे। मुझे याद है मेरी शादी के टाइम पे. इतना लो प्रोफाइल रहते थे। बीच वो टाइम. हुआ था। वो ऐसा टाइम था के अगर तुम लोग. बड़ी सा शादी करोगे तो अंडरवर्ड तुमको. वसूली के लिए फोन करेगा। ये मेरी शादी के.
टाइम पे यह सच में ये माहौल था।. आप लोगों ने बचाया फिर अपने आपको। हमारी. तो बहुत सिंपल शादी हुई थी। बट वो एक दौर. आया था ये चीज का।. तो ये कैसे पॉसिबल हो गया? वही मैं जानना. चाह रहा हूं। क्या उसमें पॉलिटिशियन में. इन्वॉल्व थे? पुलिस इन्वॉल्व थी? कैसे. बढ़ता चला गया? बिकॉज़ यह बढ़ा फिर इसको. घटाना शुरू हुआ? ये बहुत कंट्रोवर्शियल क्वेश्चन है। मुझे. नहीं पता क्योंकि वो टाइम पे मैं. रिपोर्टिंग में नहीं थी।. बट आपने पूछा तो होगा ना अपने सीनियर से।.
नहीं।. ऐसा एक्सपीरियंस अगर आपको समझाना हो।. ना, आई डोंट थिंक सो आई मस्ट हैव आस्क्ड. अबाउट हिम ऑल दिस थिंग्स।. ओके। जब आप क्राइम रिपोर्टिंग कर रहे थे. और आप के ऊपर एक आरोप लगा। का मकोका लगा. आप पर कि आपने एक साथी जर्नलिस्ट की. इंफॉर्मेशन दी जिसे छोटा राजन ने शूट कर. दिया। फर्स्ट ऑफ ऑल छोटा राजन और दाऊद के. बारे में बताओ फिर हम इधर आएंगे। छोटा. राजन दाऊद का रिश्ता क्या रहा है? पहले तो फ्रेंड्स रहे एक साथ काम किया है. उन दोनों ने।. बॉम्बे में. बॉम्बे और दुबई में भी।.
ओके।. फिर पहले दाऊद गया फिर छोटा राजन गया।. एक बार ये पूरा मैं नेटवर्क समझा। छोटा. राजन छोटा शकील. नहीं दाऊद। दाऊद. छोटा राजन छोटा शकील अनीस इब्राहिम अबू. सालेम. अबू स ये एक ही टीम के लोग थे. ये पहले एक ही टीम के लोग थे. और ये दो-दो में छोटा-छोटा क्यों आ रहा है. ये. छोटा शकील वो तो अभी पता नहीं पहले से ही. आ रहा है छोटा शकील और छोटा राजन बड़ा राजन. था पहले वो तिलक नगर एरिया में बड़ा राजन. था और फिर ये छोटा राजन हुआ.
दे वर टू राजन. टू राजन इसके लिए ओके. तो ये उसके बाद का है तो इसको छोटा राजन. बोला जाता है. ठीक है और हर एक का अपना-अपना एरिया था।. जैसे डोंगरी साइड और टाउन साइड मोहम्मद. अली रोड साइड वो साइड दाऊद का एरिया था।. यहां पे तिलक नगर छोटा राजन का एरिया था।. फिर छोटा राजन के गैंग्स में भी गैंग में. भी भरत नेपाली था। रवि पुजारी था। संतोष. शेट्टी था। वो सब अलग-अलग थे। और एक ही.
साथ सब पहले एक ही था। जो जो भी हुआ ना. डिफरेंसेस और जो भी उनकी राइवलरी हुई वो. आफ्टर 92 बम ब्लास्ट हुई।. यानी जो आपकी अगली किताब है उसमें इसका भी. हिंट मिल सकता है हमें। शाहबानो केस. शाहबानों केस के बाद अयोध्या फैजाबाद. दरवाजा खोलना फिर बाबरी मस्जिद तक गिरना. और फिर यह होना।. ये सारे लिंक्ड आपस में है। तो इसके पहले. डी कंपनी कैसे ऑर्गेनाइज थी और इसके बाद. क्या हुआ? फिर पहले तो दाऊद दुबई में गया. भाग गया था और फिर वहां पे वो अपना.
साम्राज्य उसने बड़ा किया वो इनिशियली सब. क्रिकेट की वो जो शारजा में मैचेस हुआ. करती थी वो वहां देखने जाता था और वहां से. सब उसकी वो सब चालू स्मगलिंग ये वो सब से. स्टार्ट हुआ फिर 9293 जब बॉम्ब ब्लास्ट. हुए वहां से उसको टेररिस्ट का लेबल लगाया. दाऊद वास कम्युनल. टू सम एक्सटेंड यस बट उसकी टीम में जो आप. नाम ले रहे हो तो सारे लोग मिल रहे हैं. मुझे।. वो पहले हुआ ब्लम बाबरी मस्जिद के पहले की.
बात है।. ओके।. उसके बाद तो सिर्फ वही उसको दाऊद को. मुस्लिम. गैंगस्टर माना जाता था और इसको हिंदू. गैंगस्टर माना जाता था। उसको लेबल ही वो. लोग ऐसे करते थे। छोटा राजन। हम लोग जब. स्टोरी लिखते थे तभी सेल्फ प्रोक्लेम्ड. हिंदू गैंगस्टर ऐसा लिखते थे। छोटा राजन. कॉमा सेल्फ प्रोक्लेम्ड हिंदू। हां. क्योंकि छोटा राजन ने अपनी मार्केटिंग. वैसे की. मार्केटिंग वैसे की और मैं हिंदू गैंगस्टर. हूं. और ये साइड पे हो गए दाऊद छोटा शकील दाऊद.
से क्लोज हो गया अनीस इब्राहिम दाऊद का. भाई है वो सब पूरे उनके जो नूर कर नूरा. करके वो सब उसके भाई वो सब सब पाकिस्तान. में थे वो लोग दुबई दुबई से पाकिस्तान चले. गए ब्लास्ट के बाद क्योंकि तभी तो फिर तो. टेररिस्ट का ले टेररिस्ट माना गया. इसलिए मैंने एक सीरीज देखी अविनाश तिवारी. शायद जी पे कोई आई थी उसमें था कि ऐसा. दिखाया गया कि नहीं नहीं दाऊद बड़ा अच्छा. आदमी था। गुंडा बवाल ही था। वो बवाल करता. था। स्मगलिंग स्मगलिंग बट वो टेररिस्ट. नहीं था। उसको टेररिस्ट बना दिया गया। फिर.
वो भागा और उसके ऊपर लेबल लगा दिए गए। ऐसा. वैसा ये वो ये वो बड़े सारे वेब सीरीज में. अलग-अलग इमेज क्लीनिंग की कोशिश की गई है।. बट आई एम श्योर दाऊद तो आपने खूब पढ़ा भी. होगा, खुद सुना भी होगा, खूब रिसर्च भी की. होगी। दाऊद ने ही बम ब्लास्ट करवाए थे. बॉम्बे में।. हां, क्योंकि सब रिकॉर्ड है। एंड और वो. केस खत्म होके सब 100 पीपल हैव बीन. कन्विक्टेड। मोस्ट ऑफ देम आर दाऊद के ही. आसपास के लोग हैं।. दाऊद दाऊद ने कभी इंडिया आने की कोशिश की? फिर.
वो टाइम पे उसको आना था। ऐसा बोला जाता. है। हालांकि जो मेरे एक्स बॉस है उनकी बुक. में भी लिखा गया है।. ज़दी साहब. ज़दी साहब की बुक में लिखा गया है। ज़दी. साहब ने बोला भी है कि एक टाइम ऐसा था कि. जब उसको आना था बॉम्बे कि ही वाज़ रेडी टू. फेस द ट्रायल। बट सम हाउ इट डिड नॉट. मटेरियलाइज।. छोटा राजन और अबू सलेम आ गए। इनको दाऊद ने. फंसाया था. ना। अबू सलेम को एक्स्ट्राट किया गया। वो. तो अभी की बात है। 2004 पांच की पांच या छ.
की बात है। और ये तो 2016 में आया इफ आई. एम नॉट रोंग छोटा राजन तो. तो अबू सालिम को तो एक्स्ट्राट इंडियन. गवर्नमेंट ने किया है। पकड़ा था उसको. पोर्चुगल में।. तो वो तो किसी इनफेशन ली ना कहीं ना कहीं।. तो वो तो एक शूट आउट भी आपके यहां पर हुआ. था। कई सारे फिल्म बनी है। हां हां शूट. आउट एट वडाला शूट लोखंड वाला. वो सब भी तो आता है कि दाऊद ने ही लीक. करवा दिया हां वो सब आपस में ही राइवलरी. के चक्कर में ही वो लोग आपस में ही लड़ते. रहे जे हत्याकांड हुआ था जेज शूट आउट हुआ.
था वो भी बहुत इंटरेस्टिंग उस पे भी. पिक्चर बनी गई. सी हमारा हमारे जर्नलिस्ट की भाषा के साथ. हम एक शूट आउट है कह रहे हैं बड़ा. इंटरेस्टिंग हो गया. बट दैट्स हाउ राजीव सरसा वीडियो नहीं कि. जर्नलिस्ट हैव बिकम व्चयर्स. हमें लगता है ये बहुत बड़ा इवेंट क्योंकि. अपने लिए तो वही अपनी बैड ब्रटर है ना।. वही अपनी बैड ब्रटर है। अपने को उसी में. से तो. एक घटना बड़ी घटना हम कह रहे हैं। मतलब. हमारा थॉट प्रोसेस ही वैसा हो गया है।. हम लोग सोचते ही वैसे हैं।. सही बात है।.
जैसे डॉक्टर और उनके लिए. ऑपरेशन करना बहुत. हां इट्स अ केस।. इट्स अ रूटीन फॉर देम। हमका हमारा कोई. एक्सपायर होता है तो हमें दर्द होता है।. डॉक्टर को नहीं होता है। सो वैसे हमें तो. अपना इवेंट 261 मैंने जैसे बोला तो हमको. तो तीन दिन घर पे ही नहीं जाने दिया था।. घरवाले स्ट्रेस में थे।. आप खुद भी नहीं जाना चाहोगे आप।. तो मिस हो जाएगी तो स्टोरी. क्योंकि वो इतना फिर. एडिटर बांबू लगाएगा।. इतना बड़ा इवेंट है फिर. इवेंट नहीं इंसिडेंट। इंसिडेंट इतना बड़ा. मतलब इवेंट वही जो कह रहा हूं कि ना हमारी.
हमारी शैली भी उसमें खराब हो गई कि हम. उसको इवेंट कह देते हैं या इतना बड़ा. तो उसमें तीन दिन तक नहीं गए थे घर पे सब. लोग मैं अपनी बात नहीं कर रही हूं और उसके. बाद इन्वेस्टिगेशन ये स्टोरी मिस नहीं. होनी चाहिए तो कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लगता. है मीडिया हम लोग ही माफिया बन गए. कि हम लोग में मतलब वो फीलिंग्स ही नहीं. रही मुझे ऐसा लगता है कि हर एक चीज हम लोग. एक स्टोरी कीज नजरिए से ही देखते हैं. क्योंकि जब मेरे पे बीती तब मुझे यह.
रियलाइज हुआ जेल में बैठ के मैंने सोचा कि. यार मैं खुद ही तो स्टोरी बन गई ना. 2611 में हालांकि मीडिया के रोल को बहुत. क्वेश्चन किया जाता है। एक कई सारी बाद. में वेब सीरीज फिल्मों में दिखाया गया कि. मीडिया ने इंफॉर्मेशन लीक कर दी बहुत सारी. आतंकवादियों को हेल्प मिल रही थी। इज इट. ट्रू? हां क्योंकि हम लोग लाइव रिपोर्टिंग कर. रहे थे। जो टीवी वाले तो लाइव रिपोर्टिंग. कर रहे थे और वो लोग पाकिस्तान में बैठ के. जिन्होंने करवाया वो देख रहे थे टीवी तो. उनको पता चल रहा था कि हैं वहां पे.
ट्राइडेंट में क्या हो रहा है ये ताज में. क्या हो रहा है तो उनको लाइव इंफॉर्मेशन. मिल रही थी. मतलब. वो तो सेम चीज इवन कारगिल में भी की बोला. जाता है. बहुत बहुत एक एक बड़ी फेमस जर्नलिस्ट उनको. लेके बड़े क्वेश्चन होते हैं।. कारगिल का भी बोला जाता है।. हां. कि उसमें भी बहुत नुकसान हुआ। हालांकि. वहां एक जर्नलिस्ट का नाम लेके कहा है कि. फलानी जर्नलिस्ट ने दिखा दिया था बहुत कुछ. और उनके बारे में बहुत सारी बातें चलती. हैं।. तो आप आपने तो रिपोर्टिंग की थी 2611 में।. आप आप मानते हो कि मीडिया का फौल्ट था?
बाप रे अभी इसका जवाब दूंगी तो मीडिया तो. मेरे पीछे ही पड़ गई।. मीडिया ऑलरेडी आपके पीछे पड़ गया। आपको. जितना नुकसान करना था वो कर चुकी है।. डैमेज है ऑलरेडी।. इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती वो आपको।. वो तो कुछ नहीं। नहीं वो मीडिया अपने देश. में मीडिया नहीं हर एक जगह पे मीडिया. पुलिस ये सब प्रेस मैं बोलती हूं मेरे. मेरे लाइफ में अभी सिर्फ 26 अल्फाबेट नहीं. है 25 अल्फाबेट है मैंने पी निकाल दिया है. क्योंकि वही भगवान है मुझे ऐसा लगता है कि.
प्रेस हो पुलिस हो ये सब भगवान. फिर मैं रिपीट कर रहा हूं 26 कह रहा है. मीडिया गलती थी. आतंकवादियों को उससे हेल्प मिली. क्योंकि आप लाइव रिपोर्टिंग में थे।. मैं नहीं थी।. मतलब आप टीवी वाले थे। हां थी। गलती हुई. थी।. मैंने आप आपके स्कूप में एक जगह देखा कि. आपको रियलाइज हो रहा था कि दिन भर आप. बड़े-बड़े लोग उठ बैठ रहे थे। आपको लगा कि. सबसे ताकतवर हम ही हैं।. यस। ये सब मीडिया वाले को लगता है कि.
अपुनिज भगवान हैं।. हां। और फिर भगवान ने एहसास करा दिया। को. एोगेंस आ जाती है क्योंकि सब लोग स्पीड. डायल पे होते हैं। तो अपने को लगता है कि. भाई अपने तो दुनिया मुट्ठी में है। मेरी. मुट्ठी में है।. किसी को बोले काम हो जाएगा। पुलिस वाला. काम करवा देगा। लोग डरते हैं।. हां लोग डरते हैं। अरे यार इससे दूर रहो।. इसके तो बहुत बड़े सोर्सेस हैं। मुझे और. लेकिन सोर्सेस भी बहुत मुझे नहीं लगता कोई. किसी को विदाउट मैं हर टाइम बोलती हूं. देयर आर नो फ्री लंचेस इन वर्ल्ड।.
सोर्सेस भी कुछ नहीं मदद करते। क्या किया? कौन आया मेरे को मदद करने? कोई नहीं आया।. आपको जेल में क्यों भेजा गया? ओ भाई मुझे भी यह आंसर चाहिए। अगर आपको. कहीं से आंसर मिलता है तो प्लीज बता देना।. 14 साल से मैं भी ढूंढ रही हूं। मुझे नहीं. पता है क्यों भेजा।. बट क्यों? मतलब मैं. सच में नहीं पता शुभांकर। सच में मैं सब. जगह बोलती हूं कि मुझे नहीं पता है।. स्कूप जो दिखाया गया है स्कूप सीरीज में. कितना सच है उसमें?
स्कूप का सिर्फ प्लॉट ही लिया गया है।. इट्स मस्ट बी जस्ट हार्डली 5% सच है।. इट्स नॉट क्योंकि काफी कैरेक्टर्स फिक्शनल. है उसमें काफी और वो लोग बोलते भी है कि. हम लोग ने सिनेमैटिक लिवरेज लिया है तो हम. लोग ने अपने हिसाब से बनाने की कोशिश की. है।. जैसे आपका कैरेक्टर दिखाया गया है कि उसे. पता तक नहीं होता है कि वो जेल जा सकती. है। एक पुलिस वाले के साथ संवाद होता है. जिसमें वो कहता है कि अभी ये स्टोरी बड़ी. है। हो सकता है कल को यह वाली स्टोरी बड़ी.
हो जाए।. ऐसा तो नहीं हुआ था रियल में।. आपको लगा था कि आप जेल जाओगे जब ये मर्डर. केस हुआ था? नहीं मर्डर केस होने के बाद. तीन-चार महीने बाद रमर्स होना चालू हो गए. थे कि कोई फीमेल जर्नलिस्ट इनवॉल्वड है।. कोई फीमेल जर्नलिस्ट इनवॉल्वड है। तो हम. लोग आपस में सोचते रहते थे कि कौन हो सकता. है। वो अगस्त की बात है। अगस्त गया, सप्टेंबर में आया, अक्टूबर गया। जैसे-जैसे.
दिन निकलते गए बहुत क्लेरिटी आने वो रमर्स. में फिर नाम आने लगा कि अरे नहीं जिगना वो. रहा इनवॉल्वड है लेकिन अपने को तो और. एोगेंस इतनी थी ना ओवर कॉन्फिडेंस था कि. जब कुछ किया ही नहीं तो डरने का क्यों. आपने कोशिश नहीं की थी जब पुलिस वालों से. बात करने की या बाकी लोगों से पूछने की कि. आउट ऑफ क्यूरोसिटी किस कौन सी फीमेल. जर्नलिस्ट है. बात की लेकिन कोई पूछ बोलने को रेडी नहीं. था पुलिस वाले भी सोर्सेस जो मेरे थे वो.
दे वर नॉट रेडी टू डिस्क्लोज़. कि कौन है. आपकी बिरादरी के मीडिया फील्ड के लोगों ने. गद्दारी की थी आपके साथ. उन्होंने की सिर्फ उन्हीं लोगों ने की थी. गद्दारी पुलिस से आप क्या एक्सपेक्ट कर. सकते हो पुलिस तो अपना इन्वेस्टिगेशन कर. रही थी ठीक है मुझे किसी से कुछ गरज नहीं. है बट यस मीडिया में दे नेवर सपोर्टेड और. उनको पता था सच्चाई क्या है कि आई हैव नॉट. डन इट मीडिया ने जरा भी एक मिनट के लिए. नहीं सोचा वो तो स्टोरी ही चाहिए थी ना.
उनको को ब्रेकिंग वही टेबल जहां पे मैं. बहुत लॉयल रही जहां पे मैंने बहुत अच्छी. स्टोरी ब्रेकिंग स्टोरीज की वही टैब्लॉयड. ने मेरी स्टोरी की. आपके संस्था ने भी की. हां. आपके खिलाफ. हां. कोई नहीं आया था एडिटर जो स्कूप में बताया. गया है दैट इज अ फिक्शनल कैरेक्टर सॉरी टू. से. आपके एडिटर ने साथ दिया था आपका. नहीं जरा भी नहीं. उसमें तो दिखाया गया कि आपके एडिटर ने. आपके लिए स्टैंड लिया. नहीं. जीशान अय्यूब का जो किरदार उसका उसने बहुत.
अच्छी एक्टिंग की। नो डाउट अबाउट।. मैंने जीशान को फोन करे कहा। मैंने कहा. भाई यह एक आदर्श जर्नलिस्ट का किरदार था।. वो किरदार था। उसकी एक्टिंग बहुत अच्छी. थी। बट रियलिटी ऐसी नहीं थी।. आपके एडिटर ने क्या किया उसके बाद जब ये. खबर आई? कुछ नहीं किया। उन्होंने फर्स्ट डे वो लोग. सब कोर्ट में आए थे। उसके बाद सब बंद हो. गया। कोई नहीं।. उसमें दिखाया कि रिजाइन कर दिया आपके नाम. पर।. नहीं मुझे नहीं पता। मैं तो जेल में थी तो. मुझे नहीं पता उन्होंने रिजाइन किया या. उनको बोला गया रिजाइन करने को।.
अरे. मुझे नहीं पता मैं तो जेल में हूं।. तो ये मतलब ये क्राइम जो नया बच्चा देख. रहा होगा या नए बच्चियां देख रही होंगी जो. क्राइम जर्नलिस्ट या जर्नलिस्ट बन रहे. होंगे। ये कितना बड़ा सेटबैक उनके लिए है. कि आप जिस संस्थान के लिए प्राण दे देते. हो। आप जिस संस्थान के लिए आतंकवादियों तक. से कोशिश करते हो कि खबरें निकाल लें, इंटरव्यूज ले लें। जब आप पर कोई बात आती. है तो संस्थान आपके पीछे नहीं खड़ा है।. नहीं खड़ा रहता है। मेरा मेरा खुद का. एक्सपीरियंस है कि नहीं खड़ा रहता है।.
कोर्ट कचहरी के मामले में पैसे दिए थे. संस्थान ने? जरा भी नहीं। उल्टा अब तक मेरा पीएफ भी. नहीं दिया है।. अब क्या कोर्ट कचहरी की फीस की बात कर रहे. हो? कुछ नहीं।. पीएफ बाकी है मेरा।. इसे परेशान करता है? अभी नहीं करता। पहले करता था स्टार्टिंग. में। सबसे डरावना अनुभव क्या था जेल में? जेल में पूरा ही मैं 9 महीना रही हूं जेल. में। वो. पूरे 9 महीने मैं डर-डर के रही हूं।.
सहमीसहमी सी रही हूं। जब फर्स्ट डे एंटर. होते हैं जेल में तभी मैंने मेरी बुक में. लिखा है। तुम्हारा चेकिंग होता है पूरे. कपड़े निकाल के। तो वो बहुत ह्यूमिलेटिंग. था। बहुत ह्यूमिलेटिंग था।. सबके साथ होता है वो जो भी जेल जाता है।. हां जेल का मैन्युअल है। सबके साथ होता. है। मुझे बहुत ह्यूमिलिटिंग. नेकेड कर देते हैं।. हां पूरा और उठाते हैं बिठाते हैं और. सबके सामने या आप एक ही महिला. जैसे कमरे कमरे में दो कास्टेबल लेडी.
कांस्टेबल होती है।. बट लेडी कांस्टेबल सामने आपको नीड होना. पड़ता है।. हां तो दैट वाज़ वेरी ह्यूमिलेटिंग वेरी. ह्यूमिलेटिंग एंड उस दिन मैं मुझे मुझे. याद है आज भी वो दिन आई वास हैविंग. पीरियर्ड्स तो मेरे को ब्लड भी निकल रहा. था और मुझे उठाया बिठाया जा रहा था। एंड. वर्स्ट पार्ट यह था कि जब वो रूम से हम. बाहर मैं बाहर आई तो एक मेल कास्टेबल सब. नोट कर रहा था। मेरे पास क्या-क्या सामान. है। मेरी बैग में दो ड्रेस है। मेरे पास.
क्या-क्या है। दैट वाज़ मोर ह्यूमिलेटिंग।. एंड द वे आज भी मुझे उसका फेस याद है। द. वे ही वाज़ लुकिंग एट मी और सरकेस्टिकली वो. स्माइल कर रहा था। क्योंकि उसको तो पता है. ना अंदर मेरे साथ क्या हुआ।. वह बहुत हमिलेटिंग था। आज भी मैं कांप. जाती हूं वह जिससे मेरे रोंगटे खड़े हो. जाते हैं। आज भी. वो टाइम के बारे में सोच के. बहुत ह्यूमिलेटिंग था वो। फिर तो एक लेबल.
ही लग गया। आपको अक्यूज़ माना जाता है। वो. मैं जेल में जैसे ही एंटर हुई. तो कहीं किसी वरंडा में किसी औरत ने बोला. अरे नई आ गई। यू नो कोई जिग्ना नाम. से नहीं बोलता था।. फिर जैसे-जैसे उन्होंने को मेरा पता चला. तब जिग्ना से मैं दीदी हो गई। वो एक. ट्रांजिशन हुआ।. फिर अपना सर्वाइवल जेल में अपने आप को. कैसे सर्वाइव करना है। मेरा लॉयर था। उसने.
मुझे एक ही एडवाइस दी थी। तू किसी के. झमेले में पड़ना मत। एक जगह पर बैठी रहना।. और वो मैंने 9 महीना वही किया। मैं सिर्फ. हनुमान चालीसा बोलती थी। मतलब मैं सबको. बोलती हूं कि मैं नहीं तो दिन में 500 बार. हनुमान चालीसा बोलती थी। मेरे ब्लड में. हनुमान चालीसा है। अभी इतना मैंने हनुमान. चालीसा बोला है जेल में।. ये सर्वाइवल के लिए था।. ये सर्वाइवल के लिए था।.
कि आप. काफी औरतें थी जिनको जेल को जेल में रूल. करना था।. अपने को थोड़ी ना घर बसेरा करना था।. तो एक ही जगह पर एक ही कोना इतनी सी जगह. है वहां पर बैठे रहो। आई लॉस्ट 14 केजीस. इन न मंथ्स।. सो बहुत टफ था। हर एक मतलब टफ ये इसलिए.
ज्यादा था कि मुझे समझ में नहीं आ रहा था. कि मैं क्यों ये जगह पे हूं। मैंने क्या. कर दिया। नाम पहचान परिवार बच्चा. सब कुछ बच्चा जब जेल में मिलने आया फर्स्ट. टाइम क्रिसमस वेकेशन में वो आया था वो. हॉस्टल में पढ़ता था तो वो आके बोला मुझे. मुलाकात बोलते हैं जिसे तो मम्मा मुझे पता. है तू यह करेगी नहीं और मुझे पता है तूने. यह नहीं किया है उस दिन से मैंने जेल में. रोना बंद कर दिया कि अभी मुझे किसको जवाब.
देना है मेरे बूढ़े दादानाजी आते थे जेल. में मिलने 90 साल के. वही जो 10:00 बजे रात को. हां. वो आते थे मिलने फिर मैंने एक दिन उनको ना. बोला कि आप मत आओ. हम. इट्स वै हमिलेटिंग फॉर ऑल फुल फैमिली. एक बार कुछ नाना जी का आपने किस्सा भी. सुनाया था जेल आए थे और कोई पत्रकार शायद. वीडियो बना रहा था. हां. जेल नहीं वो पुलिस कस्टडी में तभी थे तो. क्राइम ब्रांच से मेन गेट में जाने को 500.
मीटर्स थोड़ा चलना पड़ता है ये बुड्ढा. इंसान है लकड़ी ले चल रहा है। और वो. रिपोर्टर बहुत फेमस टीवी न्यूज़ चैनल का. रिपोर्टर था। वो ऐसेसे नीचे नीचे बैठ के. कैमरा से उसका फोटो पूरा ले रहा है।. वीडियो ले रहा है। और मैं खिड़की के पे. बैठ के देख रही हूं। एंड आई फ्ट सो बैड।. आई. एक्सक्लूसिव दिखाना होगा उसे।. फुटेज जो मिल गई थी बहुत बड़ी।. क्या हुआ वो रिपोर्टर का बाद में? कर्मा.
ने किसी को नहीं छोड़ा है। शुभांकर किसी. को नहीं छोड़ा है। वो रिपोर्टर के साथ भी. बहुत बुरा हुआ।. ही इज़ नाउ नो मोर। सो आई डोंट वांट टू से. एनीथिंग अगेंस्ट हिम। जहां पे भी हो भगवान. उनकी आत्मा को शांति दे।. मेरे पुराने संस्थान के रिपोर्टर थे वो।. बट. कितने लोगों से शिकायतें आपको? मीडिया से? हां। क्योंकि मीडिया ट्रायल का पार्ट आप. भी रहोगे। आई एम श्योर रहोगे। शुरू में जब. स्टोरीज आप करते होगे तो. आई एग्री।.
आप भी लिखते होगे। बहुत सारी स्टोरीज. कितना तीखा लिख दे कि हमारी स्टोरी पढ़ी. जाए। कितने उसमें बातें ऐड कर दें। कितने. थोड़े से एंगल को बड़ा कर दें।. आई एग्री।. फिर जब. खुद पे भी. खुद पे जब स्टोरीज बनी और खुद पे चटकारे. ले लेकर अलग-अलग अखबारों में अलग-अलग तरह. से कहानियां पढ़ी।. शुभांकर मुझे अभी अखबार से डर लगता है।. मैं अखबार नहीं लेती।. वो 9 महीने मैंने जेल में गुजारे हैं।. अखबार आता था तो मैं शिवरिंग सी अभी भी. शिवर करती थी कि भाई आज क्या स्टोरी आएगी।.
कितना मसाला लिमिट के बाहर. क्या-क्या बनाया आपके नाम पर लोगों ने? बहुत सारी चीजें छापी. जो याद रह गया आपको कि ये पेनफुल एक होता. है ना बिलो द बेल्ट मार।. मैंने 36 कॉल छोटा राजन से 36 बार बात की।. हालांकि बात ये है कि वो चार्जशीट होने के. बाद ये स्टोरी आई। चार्टशीट में तो थे. नहीं 36 कॉल। अच्छा हुआ यह सब मेरे. बेनिफिट में गया ड्यूरिंग द कोर्स ऑफ. ट्रायल।.
फिर किसी ने लिखा के जिगना को एचआईवी है।. यह तक लिखा है। कैन यू बिलीव दिस? मेरे लड़के का नाम और फोटो छापा है। वो तो. माइनर था ना। अपने एथिक्स में शायद अपने. को सिखाया गया है। माइनर का नाम या फोटो. नहीं लिखते डालते। मेरे बच्चे का नाम और. फोटो दोनों डाला है।. कोई दोस्तों में था ऐसा या जिससे आपको. एक्सपेक्टेड नहीं था कि यार इसने भी कैसे. लिख दिया? देखा है ना वो YouTube रूटस.
हां हालांकि दोस्त बहुत कम थे मेरे।. फिर भी एक होता है ना कि यार इससे उम्मीद. नहीं होती है कुछ-कुछ लोगों से।. हां था ऐसे। दो-तीन रिपोर्टर्स ऐसे हैं।. जिससे उम्मीद नहीं की थी मैंने। फिर मैंने. सोचा छोड़ यार क्या ही कर सकते हैं। डैमेज. वाज़ ऑलरेडी डन। फिर वो गिले शके रख के कुछ. मतलब भी नहीं है।. एक ही रिपोर्टर था हु स्टुड मतलब स्टुड. बाय मी इन द सेंस कि मुझे उन वो बहुत. पुराने रिपोर्टर हैं और मुझे उतनी ही उनकी.
रिस्पेक्ट है के उन्होंने एटलीस्ट नहीं वह. हद तक गए।. बाकी तो ब्रॉडशीट में यहां तक लिख दिया कि. जिगना ओरा जिस दिन जजमेंट था लाइकली टू. गेट डेथ पेनल्टी।. और मेरी मॉम वह पेपर पढ़ते-पढ़ते उनको. अटैक आया है। यह सच बात है।. एथ 8th जून को 2015 को मेरे अगेंस्ट. चार्जेस फ्रेम किया गया। नाइंथ जून को.
हेडलाइन थी कि इफ कन्विक्टेड जिगना लाइकली. टू गेट डेथ पेनल्टी।. और मॉम सच में मेरी मां वो पढ़ते-पढ़ते. मरी है।. न्यूज़पेपर. किसी जर्नलिस्ट ने अच्छा काम किया था उस. दौर में? नहीं।. कोई भी ऐसा नहीं था जिसको आप आज एकनॉलेज. करना चाहो कि यार जब सारी दुनिया मेरे. खिलाफ गंदा लिख रही थी।. नहीं किसी में नहीं।. कोई भी ऐसा नहीं था।. कोई भी नहीं था।.
छोटा राजन को कैसे आप जानते थे? कैसे आपने. उसको ट्रैक किया? छोटा राजन के बारे में. कुछ बताओ क्योंकि आपकी पूरी कहानी छोटा. राजन के इर्द-गिर्द है।. उससे का मैंने तो ट्रैक नहीं किया था उसको. और ना ही मेरा उससे कुछ लेना देना था।. मई. 18 या 19 को 2011 में एक इकबाल कास्कर. छोटा दाऊद के भाई के. वहां पे फायरिंग हुई थी.
और उसमें छोटा राजन ने वो फायरिंग क्लेम. की थी कि ये मैंने किया है। मुझे क्लेम. नहीं किया था। किसी और रिपोर्टर ने उस. चैनल को किया था उसने फोन करके तो तभी. मुझे उसका इंटरव्यू करना था। तो उसने. सबको वो फोन कर रहा था। ऐसा नहीं है। और. वो मेरे ट्रायल में आया है। मैं कुछ भी. अपने हिसाब से बोल ही नहीं रही हूं। अभी. जो रिकॉर्ड पे है मैं वही बात करती हूं. अभी क्योंकि मैं मेरे मानने ना मानने से. कुछ होने नहीं वाला है। तो उसने वैसे मुझे.
फोन किया। ऑफिस में किया था फोन। ऐसा भी. नहीं था कि मेरे मोबाइल पर पर्सनली मुझे. किया है। सबके सामने बात हुई। इट वाज़ माय. इंटरव्यू वाज़ परेनिंग टू दैट ओनली। वो. फायरी दैट्स इट बस वही एक फोन।. अच्छा छोटा राजन और लॉरेंस बिश्नोई में. बड़ी सिमिलरिटी लगती है मुझे। उस दौर में. सारे क्लेम छोटा राजन के होते थे। कहीं. कोई घटना हो आज के दौर में जैसे लॉरेंस का. नाम आता है कि कोई भी घटना हुई लॉरेंस की. जिम्मेदारी डाल दी गई। कोई भी घटना आज देश.
में हो रही है। ऐसे ही उस दौर में छोटा. राजन का था। अब जब आप बाहर निकल कर आए हो. और इस पूरे प्रोसेस को आपने अंदर से देखा. है। यह जिम्मेदारी ली जाती है या दिलवाई. जाती है।. पता नहीं मुझे फिलहाल तो लॉरेंस का मुझे. कुछ नहीं पता क्योंकि मैं आई एम टोटली. आउट। मैं अभी न्यूज़पेपर नहीं पढ़ती ना ही. न्यूज़ देखती हूं। आज मुझे लगता है तीन. साल से मैंने टीवी स्विच ऑन नहीं किया है. मेरे घर का।. जब से मेरा लड़का आउट ऑफ इंडिया गया है तब.
से वो देखता था। कुछ नहीं देखती। तो मैंने. सच में लॉरेंस बिश्नोई के बारे में कुछ. नहीं मैं तो कॉन्टेक्स्ट में डाला। जैसे. भी बहुत सारी घटनाएं होती है। लॉरेंस का. नाम आता है क्लेम में। उस दौर में छोटा. राजन का नाम था। इनफ करते हैं क्लेम. क्योंकि वो एज आई टोल्ड यू वो फियर फैक्टर. पे पूरा उनका धंधा ही फियर फैक्टर पे चलता. है। वो क्लेम करोगे तो बोलेंगे अरे देखो. वो दाऊद के घर पे फायरिंग कर सकता है तो. अपने पे भी कर सकता है। तो वो पूरा फियर. पे ही उनका बिज़नेस चलता था।.
93 के बाद दाऊद के जाने के बाद जैसे एक. हसीना पारकर फिल्म आई थी।. दाऊद का काम कौन संभाला था इंडिया में? उसकी बहन. यहां पर थी ना हसीना जैसे आपने बोला हसीना. पारकर. हमने तो फिल्मों के जरिए देखा जाना. हां तो वो संभालती थी कर देखती थी वो वो. सब वो भी रिकॉर्ड पे ही है तो मेरे मैं. अपना तो मैं अपना बारे में तो कुछ भी ना. बोलूं भाई विदाउट रिकॉर्ड तो मैं बोलूं ही. नहीं कुछ भी. ओके अभी. उसके बाद आपने फिर पुलिस वालों को देखा.
जितने हमारे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आए थे. फिर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी जेल में गए. कोई ऐसी कहानी है जो आपको लगता है वेब. सीरीज में नहीं गई आपको बतानी चाहिए।. सब कुछ आ गया है वेब सीरीज मुझे लगता नहीं. है कुछ भी बात. नहीं आपकी आपकी कहानी में. मेरी कहानी में मेरी कहानी में तो वेब. सीरीज में जो बताया गया वो हार्डली कुछ. है। उन लोग ने प्लॉट लिया इन्वेस्टिगेशन. क्या-क्या कहानी अच्छी थी जो आपको लगता है. बतानी चाहिए और. अच्छी नहीं बहुत इमोशंस वाली कहानी थी।.
जैसे जेल में बहुत ऐसे कैरेक्टर्स थे जो. मैंने बुक में लिखा है तो उस पे ज्यादा. फोकस कर सकते थे वो लोग। जेल में सिर्फ. साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और दूसरी एक. कैरेक्टर के बारे में रंभा वह दोनों के. बारे में ही दिखाया गया है। हालांकि बहुत. कॉमन. वुमन थी ऐसी जिसके बारे में वो बोल सकते. थे। फिर इन्वेस्टिगेशन पार्ट भी पूरा. फिक्शनल है मुझ मेरे हिसाब से।.
दैट्स इट।. ओके। अभी किस सब्जेक्ट पे आप काम कर रहे. हो? मैंने दूसरी बुक मेरी आ गई शाहबानो पे उस. पे मूवी बन रही है।. शाहबानो पे क्यों बनाया आपने? शी इस आल्सो स्ट्रोंगली शी वास आल्सो अ. स्ट्रांग लेडी बाय मी लाइक मी आई फील सो. आपने कवर किया था शाबानो या आपने सुन के. तो अभी तो छोटे बच्ची थी मैं 10 साल की. होंगी। ओके. 85 के अराउंड. हां आई एम 74 10 11 साल की. तो फिर शाबानो क्यों लिखा आपने? ट्रिपल.
तलाक के बेस पे. ट्रिपल कल तलाक जो अपना बिल आया है वो बिल. कहीं ना कहीं शाहबानो केस हैज़ बीन. इंस्ट्रूमेंटल. शाहबानो केस इंडिया में डिफाइनिंग मोमेंट. था. एकदम एकदम. पहली बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदला गया. बैलेंस करने के लिए अयोध्या के दरवाजे खोल. दिए गए उसका असर हुआ 93 बम ब्लास्ट में. बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ. आफ्टर में बहुत कुछ हुआ. आज राम मंदिर बना तो लोग मानते हैं कि उस. अगर वो ताले ना खुले होते तो शायद बात पता.
ही नहीं पता ही नहीं चलता किसी को।. हां मतलब लड़ाई बहुत लंबी हो जाती है। तो. शाबानो केस अपने आप में बहुत. बहुत लैंडमार्क जजमेंट था वो। बहुत. लैंडमार्क जजमेंट था मध्य प्रदेश हाई. कोर्ट का।. तो उस पे लिखी। फिर अभी मैं मेरी तीसरी. बुक लिख रही हूं। वो मेरी ही कुंडली, मेरी. पास्ट लाइफ, मेरी प्रेजेंट लाइफ और मेरी. नेक्स्ट लाइफ। क्योंकि अभी एस्ट्रोलॉजी और. वो सब करती हूं। तो वो हिसाब से डिकोडिंग. माय कुंडली उस पे लिख रही हूं मैं।. एस्ट्रोलॉजी पढ़ी आपने?
12 साल सर। वही ब्रेड एंड बटर रहा है। वही. करेक्ट।. एस्ट्रोलॉजी समझते हो भी आप? एकदम से।. क्या अपने बारे में क्या पढ़ा सीखा? क्या. जाना? अगर मैं आपसे पूछूं जो आपने 9 महीने. जेल में गुजारे।. हां।. क्योंकि जब बाहर निकली तब मुझे कोई आंसर्स. चाहिए था कि ये मेरे साथ क्यों हुआ? अगर. मैंने कुछ किया नहीं है तो मुझे क्यों ये. सब से गुजरना पड़ा? इसलिए मेरा स्ट्रगल. चालू हुआ कुंडली लेके सब जगह घूमने का। बट. कहीं से मुझे जवाब ही सेटिस्फेक्शन नहीं.
मिलता था। फिर मैंने खुद ही सीख लिया। आज. मैं मेरी कुंडली में वह सिचुएशन. कुंडली देख के पता चलता है कि यह चीज होने. वाली थी और इसका फायदा यह हुआ कि मैंने. किसी को भी ब्लेम करना छोड़ दिया। मैंने. सिर्फ अपनी डेस्टिनी से ब्लेम करती हूं कि. मैंने मेरे कर्मा में यह लिखा था। है मेरी. कुंडली में कि यह सिचुएशन आने वाली है।. लिखा है इफ पर्सन अच्छे से वह कुंडली. डिकोड कर पाए तो लिखा है.
तो मैंने फिर मेरे में एक्सेप्टेंस आ गई. कि हां यार ये तो मुझे भुगतना था यह जन्म. में। बाकी सब लोग तो निमित्त बने हैं। दे. वर जस्ट एन इंस्ट्रूमेंटल।. 9 महीना जेल में रहने से क्या सीखा आपने? बहुत कुछ सीखा।. क्या क्या. लोगों का नजरिया. अपनी तरफ सच्चाई ट्रुथ ऑफ लाइफ हर एक.
छोटी-छोटी चीज काेंस हम लोग नहाने जाते. हैं तो पानी चालू रहता है। पानी निकल रहा. है। मैं एक टमलर पानी से नहाती थी। तो वो. चीज पता चली। एक साबुन का क्याेंस होता. है? सोप का वो पता चला। खाना मुझे कितना. स्ट्रगल करना पड़ा था कोर्ट से ऑर्डर लेने. के लिए होम टिफिन का। लेकिन ऐसे नसीब थे. कि कोई था नहीं घर पे से घर मतलब जेल में.
मेरे लिए टिफिन लेके आने के लिए। फिर एक. कजिन बहुत उन्होंने वॉलंटियर किया कि मैं. जाके देके आता हूं। तो खाने की वैल्यू. सवेरे एक टाइम टिफिन मेरा घर से आता था।. शाम तक समर था तो खराब हो जाता था तो खाए. बगैर सोती थी तो मैंने सामने से कोर्ट में. अर्जी डाली कि अभी मुझे फोम फूड नहीं. चाहिए मैं जेल का ही खाना खा लूंगी. और बाकी जो कैदी थे उनके.
रियलिटी. उनसे बात करने से कि उनके क्या स्ट्रगल्स. हैं. कोई कहानी रह गई आपके दिल में दिल की. बहुत सारी कहानियां. किसी और की. हां एक औरत हुआ करती थी शी मस्ट बी दैट. टाइम 35 40 इयर्स ओल्ड वो अपनी सास को. मारने के मतलब इंजर्ड करने के आरोप में. अंदर आई थी और सब लोग उसको पागलपागल बोलते.
थे वो अकेली-अकेली एक जगह पर बैठ के बोला. करती थी तो एक दिन मेरे पास आई मैंने बोला. तू क्या बोल मतलब क्या बोलती रहती है तो. उसने बोला कि आपको लगता है मैं पागल हूं. लेकिन मैं पागल नहीं हूं। मैंने मेरी सास. को क्यों इतने साल से उसका हस्बैंड नहीं. था। मर गया था। उसने लड़का एडप्ट किया था।. तो वो बोलती थी कि मैं मेरी सास मुझे बांझ. बांझ बोलती थी और मेरे प्राइवेट पार्ट पे. रड डालती थी।.
तो मैं कितना सहन कितना टोलरेट करूंगी. मैं। तो मुझे उस दिन गुस्सा आया तो मैंने. पत्थर मार दिया उसको।. मतलब यह इट इज वेरी शेकी स्टोरी. कि लोग क्या-क्या चीज से गुजरते हैं हमें. कुछ नहीं पता होता है।. महिला जेल में क्या-क्या परेशानियां होती. है? परेशानियां तो हाइजीनिक को ले होती है।. फिर जनरली जो मैनुअल के हिसाब से जेल में.
चलता है वही रहता है और. जेल में रिफॉर्म्स इतने सारे हैं बट. एग्जीक्यूट नहीं होता है कुछ भी।. मुझे लगता है जेल इज नॉट मतलब रिहबिलेशन. नहीं होता है। रिक्रूटमेंट होता है।. मुझे खुद को कितनी ऑफर दी गई थी? प्रॉस्टिट्यूशन की ऑफर दी गई थी मुझे. जेल के अंदर।. जेल के अंदर एक कई दिन है। कि तू बाहर आके.
मुझे मिलना।. मैं तुझे. अच्छा वही रैकेट भी चलते हैं अंदर। वही सब. आपस में क्योंकि सब वलनेरेबल होते हैं।. बहुत वीक स्टेट में होते हैं और सोसाइटी. का इतना प्रेशर है कि बाहर जाके काम. मिलेगा। मुझे आज तक नहीं मिला है काम।. एक लेबल लग गया है। रेड फ्लैग आता है एचआर. में क्रिमिनल बैकग्राउंड करके।. किसी भी टीवी चैनल, किसी भी प्रेम के. अखबार ने कभी आपको दोबारा अप्रोच नहीं. किया? नहीं, किसी ने नहीं।.
क्या हमारे लिए काम कर लो? नहीं। किसी ने नहीं। झूठ बोलने का सवाल ही. नहीं है। किसी ने अप्रोच नहीं किया। मैं. ऐसा नहीं अंगूर खट्टे वाली बात ही नहीं है. कि नहीं मुझे तो सब ने बुलाया। मुझे नहीं. करना है। नहीं ऐसा कुछ भी नहीं था। किसी. ने आज की तारीख में फॉरगेट अबाउट मीडिया. हाउस। नॉर्मल कॉर्पोरेट जॉब भी नहीं मिलता. है। मैं एलएलबी हूं, एमबीए हूं। बीबीएम. हूं फिर भी नहीं मिलता।. चलो बिग बॉस जैसे शोज़ बुला लेते हैं।. कंट्रोवर्शियल कैरेक्टर चाहिए। बट इट इज़. इट वाज़ गुड फॉर मी।.
कि मैंने मेरा जो स्टैंड था वह क्लियर. हुआ। लोगों को सच्चाई पता चली।. आई एम वेरी हैप्पी फॉर. बिग बॉस. या मैं मैं मुझे. मैं एटलीस्ट कुछ कंट्रोवर्शियल में नहीं. पढ़ी वहां पे।. मतलब आपकी कहानी दुनिया तक बिग बॉस के. जरिए आ गई।. आ गई. कि कौन है ये महिला जिसके साथ ये हुआ था।. जर्नलिस्ट ये थी वो था वो था।. स्कूप देखना कितने लोगों ने Netflix कितने. लोग? स्कूप इज फॉर क्लास। Netflix इट्स.
नॉट फॉर मास बिग बॉस मास के लिए हर कोई. देखता है।. स्कूल पे भी कहानी लोगों ने देखी थी।. व्यक्ति पे कम घुसते हैं। याद नहीं रहता।. तो ये मेरे लड़के का ही सजेशन था। मम्मा. बिग बॉस बिग बॉस की ऑफर आई है तो तुझे. जाना चाहिए।. बोला नहीं यार मुझे नहीं जाना। मैंने तो. कोई सीजन नहीं देखी है। बोलती नहीं पब्लिक. शुड नो हु रियल जिगना इज।. सबने वो किरदार देखा। बट किसी को पता नहीं. है कि जिग्ना उरा रो भी सकती है, जिग्ना. उरा खाना भी बना सकती है और जिग्ना.
फ्रेंडशिप भी कर सकती है।. प्रज्ञा ठाकुर बाद में कभी मिली? नहीं. क्योंकि उसमें दिखाया गया आपको धागा बांध. देती हैं। वो. नहीं खुद नहीं. कि जेल में आप सेफ हैं जब तक उनकी रडार. में है।. वैसा नहीं था एक्चुअली।. मतलब आप बता रहे हो कि उनकी खुद की पिटाई. हो रही थी। वो खुद नहीं खड़ी हो पा रही. थी।. नहीं वो जेल में नहीं हो।. मतलब पहले और जेल में भी उनको उतनी फ्रीडम. नहीं थी उस गवर्नमेंट में। हां ऑब्वियस. गवर्नमेंट की बात नहीं है जो मैनुअल के. हिसाब से होती है वही होता है बट मुझे. इसमें गवर्नमेंट का. उस उस वेब सीरीज में दिखाया गया कि उनका.
दबदबा था जेल के अंदर. वेब सीरीज है ना सच्चाई तो नहीं है ना. तो वैसा नहीं था जैसे दिखाया गया कि दबदबा. था कि दो लोग पैर दबा रहे हैं दो लोग पीछे. पीछे घूम रहे हैं. पीछे नहीं उनको सपोर्ट की जरूरत पड़ती थी. नहीं उसमें तो दिखाया गया पीछे. ऐसा कुछ भी नहीं. महिला बॉडीगार्ड की तरह दिखाया था. नहीं नहीं ऐसा कुछ बॉडीगार्ड का ही कुछ. ऐसा नहीं था. ऐसा कुछ भी नहीं था।. जेल से निकल के पहली चीज क्या की थी आपने? जेल से निकल के पहली चीज मैंने घर पे गए.
और. पाव भाजी खाई थी।. मीडिया कवरेज हुई थी जेल से छूटने की? हुई थी। बहुत हुई थी। दो दिन तक दे वे वर. नॉट एबल टू ट्रेस मी के मैं कहां हूं। तो. तीसरे दिन स्टोरी आई कि जिगना ओरा ने. सुसाइड कर लिया है ब्रेकिंग यह रूमर्स चले. मुझे बाहर निकालने के लिए घर से. मीडिया वालों को पता होता है किससे क्या. निकालना है. तो घर पे एसीपी आज भी मैं पुलिस को देख के.
डरती हूं आज भी उस दिन मैं इतना डर गई थी. कि घर पे पुलिस आ गई वो लोग चेक करने आए. थे कि भ मैं जिंदा हूं या मैंने सुसाइड कर. लिया क्योंकि मीडिया उनको फोन करके पूछ. रही थी जिगना वोरा ने सुसाइड किया गया. सुसाइड किया गया. क्या अंडरवर को बॉलीवुड या ओटीटी वेब. सीरीज वालों ने ओवर रोमांटिक या ओवर अच्छे. से दिखा दिया जो नहीं करना चाहिए था उनके. ब्रूटल पार्ट को हाईलाइट करने की जहां पर.
उनके रोमांटिक पार्ट या मैस्कुलिन पार्ट. को ही ज्यादा फोकस किया गया. यस. इसका क्या समाज पे असर पड़ा होगा आपकी नजर. में. एक. मतलब. आप जो कर रहे हो वो वो सही है।. ये एक ट्रेंड हुआ चालू कि अंडरवर में जाना. मतलब रिक्रूटमेंट हुआ तो ओ अपनी लाइफ बन. गई। लड़की भी मिल गई, पैसे भी मिल गए। सब.
कुछ सही चलने लगा।. तो एक एक्सेप्टेंस बढ़ गया।. हीरो बना दिया।. हीरो बनने से कि जो जस्टिफिकेशन कि आप जो. कर रहे हो उसको जस्टिफाई होने लगा वो चीज।. व्हिच इज वेरी सैड एक्चुअली आई फील सो. ओके कोई नई क्राइम रिपोर्टर अगर आपको सुन. रही हो क्या एडवाइस दोगे उसे आप. डोंट पुट योरसेल्फ इन ट्रबल फॉर द कंपनी.
व्हिच यू आर वर्किंग. कोई लॉयल्टी नहीं है. कंपनी साथ नहीं खड़ी होगी. नहीं खड़ी रहती. और कोई किसी का दोस्त नहीं है यहां पे. ये माया या माया डोलास या माणिया सुरवे. हां. ये भी उसी दौर में दाऊद के लोग थे। हां. ये इनकी जो वेब सीरीज आई है शूट आउट एट. वडाला शूट आउट एट लोखंड वाला. ये सब सही सीरीज है.
हां. एक्सक्ट्ली ऐसे. शूट आउट एट वडाला की तो मैंने रिसर्च की. है. तो हुसैन ज़दी की बुक में से बनी है वो तो. नॉनफिक्शन है तो या काफी हद तक सही है 80%. हुसैन ज़दी आपके संपादक थे. हां एडिटर थे. जब आप जेल गए थे. कैसा रिश्ता आपका उनसे? फिलहाल तो कोई रिश्ता नहीं है।.
बातचीत नहीं होती? नहीं जरा भी नहीं।. आपकी वेब सीरीज के को प्रोड्यूसर. अभी कुछ हां वेब सीरीज के को प्रोड्यूसर. थे वो। बट बात करने का कोई रीज़न ही नहीं. है क्योंकि मुझे ना ही कुछ वो लाइन में. आगे बढ़ना है। ना ही कुछ करना है। मैंने. अपना प्रोफेशन चेंज कर दिया। मैंने अपना. नजरिया चेंज कर दिया। मैंने अपने आपको. बहुत चेंज कर दिया। तो कुछ जरूरत ही नहीं. पड़ी।. पुराने कोई भी कॉन्टेक्स्ट को कनेक्ट करने. की।. आप मिस नहीं करते क्राइम रिपोर्टिंग को या.
टीवी या प्रिंट की दुनिया को वो न्यूज़ की. दुनिया जिसमें भागना, दौड़ना, फॉलो अप. करना, एक कहानी को सुनना, उसके पीछे ड्रैग. करना।. मैं मिस करती हूं।. आई शुड नॉट लाई। बट मुझे जाना भी नहीं है।. वो अलग बात है। कोई लेता नहीं है।. यह भी फैक्ट है। बट यस आई मिस इट।. व्हाट यू मिस मोस्ट अबाउट जर्नलिज्म? टू चीज द स्टोरी.
अनकवर द ट्रुथ।. एंड. कोई फास्ट लाइफ मैं मिस करती हूं।. मैं कई सारे गैंगस्टर्स के नाम लेने वाला. हूं। इनमें अगर ब्रूटलिटी के हिसाब से. आपको रेड करना हो।. हाजी मस्तान. नो नॉट ब्रूटल. मैं नाम लेता हूं। हाजी मस्तान दाऊद. इब्राहिम अबू सलेम छोटा राजन छोटा शकील।.
गैंगस्टर सभी ब्रूटल ही है शायद मेरे. हिसाब से। तो दैट्स व्हाई दे आर कॉल्ड. गैंगस्टर्स।. क्यों दुश्मनी. ये सब एक जैसे थे. सब एक जैसे थे. सब एक जैसे ही थे हाजी मस्तान का टाइम का. हम लोग बच्चे थे तो. अच्छा हाजी मस्तान को क्यों थोड़ा अलग. दिखाते हैं जैसे मैंने. रॉबिनहुड जैसा दिखा. हां हाजी मस्तान को थोड़ा रॉबिनहुड दिखाते. हैं वंस अपॉन अ टाइम मुंबई में अजय देवगन. ने एकदम वाइट कपड़े पहन एकदम उनकी इमेज भी. वाइट कर दी थी. हां बट आई डोंट थिंक सो इट मस्ट बी दैट वे.
मुझे नहीं लगता मेरा जहां तक का. एक्सपीरियंस है आप कैसे दो चीज जस्टिफाई. कर सकते हो मतलब वो जो कर रहा है वो सही. है।. मतलब उसप तो बिल्कुल क्लीन दिखा दिया था. कि बहुत अच्छा इंसान है. जो अपना स्मगलिंग कर रहा है लेकिन और. बिल्कुल नहीं मुंबई से बड़ा प्यार है।. कैसे स्मगलिंग भी कैसे जस्टिफाई कर सकते. हो आप? है तो इललीगल ना. गरीब बच्चे की मां को पैसे दे दे रहा है।. वो वीडियो दिखाया गया उसमें।. वो गरीब बच्चे की मां को पैसे दे रहा है।. वो पैसे कहां से आए हैं?
इल इ. इललीगल चीजों से।. इललीगल चीजों से ही आए हैं। तो वो. जस्टिफाई कैसे कर सकते हो? वो उसका गिल्ट. खुद का गिल्ट वो कम कर रहा है। यह सब चीज. करके. किसी हीरोइन को महंगे अमरूद खरीद के दे. दिया।. वो अपना गिल्ट कम करने की बात आ गई है तो. बट यू कैन नॉट जस्टिफाई द एक्ट। अब वो. एक्ट जस्टिफाई नहीं कर सकते।. स्पेशलिटी क्या बदलती है? आपने. एस्ट्रोलॉजी में कहा। चलो मैं इसको और इजी. करता हूं। 9 महीने आप जेल के अंदर रहे। 9.
महीने जेल में आप कह रहे हो कि आपने इतनी. बार हनुमान चालीसा पढ़ी कि हनुमान चालीसा. आपके रगों में घुस चुकी है। हनुमान चालीसा. ने आपके जीवन में क्या बदला? टोटली चेंज किया। टोटली. कैसे क्या किया? एक फाइटिंग स्पिरिट दिया मुझे। अपने आप पे. ट्रस्ट करना. मुझे सिखाया। मुझे प्रोटेक्ट किया।. मुझे रोज सवेरे खड़े होकर. अपनी लड़ाई लड़नी है। यह सिखाया।.
प्लस मेरा विश्वास भगवान पे बढ़ाया।. क्योंकि मैंने बहुत चमत्कार होते हुए देखे. हैं। बहुत जिन-जिन लोगों ने मुझे नहीं पता. है। बट जिनजिन लोगों ने मेरे साथ गलत किया. या बुरा किया लाइफ में मैं ये केस रिलेटेड. नहीं बोल रही हूं। जनरल लाइफ में एवरीबडी. हैज़ पेड द प्राइस।. मतलब भगवान है।. मेरी बिलीफ.
10 गुना नहीं हजार गुना बढ़ा दी है। मैं. मानती हूं मेरे से जाने अनजाने में किसी. को मैंने दिल दुखाया होगा। तो मैंने भी. भुगता। हालांकि यह केस में नहीं इनवॉल्व. थी। पर कोई और चीज में मैंने कुछ किसी का. दिल दुखाया होगा। मैंने जेल में बैठ के. मेरे एक्स हस्बैंड से की माफी मांगी बैठ. के कि मैंने उसके बच्चे को उससे दूर किया. क्योंकि बच्चा मैं लेके आई थी। तो ये सब. रियलाइजेशन हुआ।.
आप किसी शादीशुदा मर्द से प्यार में पड़. गई थी। ऐसा मैंने कहीं पढ़ा था।. नहीं।. आप बाद में अफेयर में थी क्योंकि फिल्में. भी दिखाया गया है। एक किसी व्यक्ति से. अफेयर में आप थी जो बाद में साथ नहीं दिया. उन्होंने भी आपका।. तो वो फैक्ट है लाइफ का। क्या कर सकते. हैं? किसी को जबरदस्ती तो नहीं कर सकते ना. प्यार करना। इट्स ओके। नो प्रॉब्लम।. दिल टूटने का असर है अभी? बहुत है।. अभी भी. इसलिए मैं आपकी शायरी सुन के मुझे बहुत.
कनेक्ट होता है। सच में बहुत कनेक्ट होता. है। मैं स्टेटस रखती हूं आपकी शायरी।. है।. कितने साल का रिश्ता था? दो-ती साल। आज 14 साल हो गए।. टच में हो. नहीं. तो ये कैसे पॉसिबल है कि तीन साल का. रिश्ता 14 साल तक असर दर्द छोड़ जाता है. क्यों छोड़. शायद ये एक सिचुएशन आती है पहले प्यार. होता है फिर एक इश्क होती है और फिर. मोहब्बत होती है तो शायद ये एक मेरी जर्नी.
है. एंड ही वास नॉट अ हस्बैंड. नो. नॉट माय हस्बैंड. आई एम सिंगल आई एम नॉट. आई नो दैट. माय हस्बैंड आई लव लविंग हिम. और फिर शादी भी नहीं किया आपने? नहीं।. और वो शक शादीशुदा है।. शायद मुझे नहीं पता।. क्यों आगे नहीं बढ़ पाया? मतलब ये प्यार. में क्या ऐसा होता है कि इंसान को रोके. रहता है इतने सालों तक।.
वो प्यार ही होता है ना। अगर प्यार नहीं. होता. मतलब अगर आप आगे बढ़ जाते हो. तो वो प्यार कैसे हो सकता है? तो कैसे पता करें यह वाला प्यार था ये. वाला नहीं था। जैसे आपने हस्बैंड से शादी. की, बच्चा हुआ, खुश थे, एक टाइम पे खुश. रहोगे, फिर अलग हो गए।. नहीं, कभी खुश नहीं थी शादी में, अरेंज. मैरिज थी। एंड आई हैड अ वैरी बैड मैरिज, बहुत अब्यूजिंग मैरिज थी मेरी।. ओके।. सो आई वास नेवर हैप्पी।. तो पहली शादी का दुख था जो सेकंड वाले में. ज्यादा समर्पण हो गया।.
नहीं, आई डोंट थिंक सो।. उसको बहुत टाइम के बाद मुझे कोई मिला। तो. ऐसा तो नहीं था। बट आई डोंट नो व्हाई।. पीपल टेल मी कि वो बंदा तेरे साथ नहीं रहा. तेरे पूरे टाइम पे तुझे सब. इसके लिए तो छोड़ा उसने भी. हां. तो फिर तू क्यों उसको इतना प्यार करती है. मैंने अभी इसका जवाब शायद मेरे पास है. नहीं. और ना ही मुझे जवाब मिल पा रहा है शायद.
यही प्यार है. मैं उसकी मजबूरी समझती हूं ठीक है इट्स. ओके उसने जो किया वो टाइम पर उसके लिए वह. सही हुआ होगा।. कोई बात नहीं।. आपने अपने एक हस्बैंड से माफी मांगी बच्चा. अलग करने के लिए।. उसने माफी मांगी आपसे? नहीं।. इस बात का तो अफसोस होगा आपको।. नहीं। अभी वो यहां पे थे मेरे साथ। नाउ ही. सफरिंग फ्रॉम कैंसर। सो ही हैड आई टूक.
केयर फॉर. ऑफ़ हिम फॉर थ्री मंथ्स।. एंड वी आर इन अ वेरी कॉडियल रिलेशनशिप।. मैं बात करती हूं उनसे हर दो-तीन दिन में. आज सवेरे बात की है। शायद भगवान ने उनको. दे दिया. जो. गलत किया होगा मेरे साथ उसका अंजाम। ही इज़. फेसिंग इट नाउ। हम बहुत छोटे लोग होते. हैं।.
यू वी ह्यूमंस आर वेरी स्मॉल। अपने को. लगता है आप नीच भगवान है बट ऐसा नहीं होता. है। भगवान को मालूम है कभी किसको कैसे. सबक सिखाना है। वो सिखाता है। स्वर्ग नर्क. सब कुछ इधर ही है। ऊपर कुछ भी नहीं है। आप. किसी का बुरा करके कभी लाइफ में आगे नहीं. बढ़ सकते। कभी भी वो टेंपरेरी हैप्पीनेस. मिलती है। बट लॉन्ग रन यू कैन नेवर बी. हैप्पी।.
एोगेंस, ईगो यह चीज नीचे गिराती है, गिराती है, गिराती है। मैं खुद गिरी हूं।. मैं अपनी बात कर रही हूं। मैं किसी और की. बात ही नहीं कर रही हूं यहां पे। मैं बहुत. एोगेंट थी। ऐसे चल. सब गिर गया। अभी ऐसे ही बात करती हूं।. तो शायद मुझे मेबी भगवान ने मुझे चुना था।.
कुछ सिखाने के लिए और क्योंकि मैं पुलिस. गुंडे मवाली पावर वही सब समझती थी तो. भगवान ने मुझे वही तरीके से सिखाया. एंड आई एम वेरी थैंकफुल राइट नाउ कि आई एम. आउट ऑफ ऑल दैट थिंग्स आई एम लिविंग अ वेरी. सिंपल लाइफ. ना ही मेरे पास कार है कुछ भी है मैं. रिक्शा में जाती हूं मैं ola uber में. जाती हूं मैं अपने लोकल ट्रेन में जाती. हूं कुछ फर्क नहीं पड़ता है वही वहीं पे.
जाना है जहां पे जाना है। Ola भी वहीं पे. लेके जाती है। Mercedes भी वहीं पे लेके. जाती है। कुछ फर्क नहीं पड़ता।. सो बहुत सारी चीजें लाइफ की रियलिटी पता. चलने लगती है। और कुछ चीज का जो छोटी-छोटी. चीजों काेंस बढ़ जाता है।. छोटी-छोटी चीज में खुशी मिल जाती है।. बहुत कुछ खोया है लाइफ में।. बहुत कुछ सबसे ज्यादा मुझे अफसोस यह बात. का है कि मेरे लड़के का बचपन खो गया.
ये केस और ये सब झमेले में. शिकायत करता है कभी वो. शराबी नहीं शराबी नहीं बट मुझे वो चीज की. गिल्ट है कि मेरी वजह से उसका बचपन कहीं. पे छीन गया उसके साथ बच्चे खेलते नहीं थे. उनके पेरेंट्स ना बोलते थे कि इसकी मदर. अंडरवर्ड कहां है कुछ तो भी जेल में है. मर्डर में है इससे खेलो मत उसको कॉलेज में. बॉम्बे में एडमिशन नहीं मिल रहा था.
क्योंकि रोज पेपर में मेरे बारे में आता. था. उसको एडमिशन नहीं मिल रहा था. जॉब नहीं मिल रही थी. सो वो सब फेस किया है।. अब लाइफ यहां से क्या कहते है ना इंसान की. ख्वाहिश की कोई इंतहा नहीं होती। दो गज. जमीन चाहिए दो गज कफन के बाद भी।. बस बस सिंपल लाइफ चाहिए। कुछ शांति कुछ.
मगजमारी नहीं और बस जैसे चल रही है वैसे. ही बुक्स लिखना है। पर अब. अपनी पूरी जर्नी से कोई एक मैसेज दुनिया. को देना चाहो।. अपने एक्सपीरियंसेस से उतारचाव. सिर्फ अपने आप पर विश्वास रखना चाहिए और. किसी पर विश्वास ट्रस्ट मत करो।. अपनी चीजें किसी से अपनी बातें किसी से.
शेयर मत करो। कभी कैसे आपके अगेंस्ट यूज़. हो जाएगी। आपको पता नहीं चलेगा। मेरा. सिंपल एक पार्लर में कन्वर्सेशन था एक. रिपोर्टर के साथ और जब मैं अरेस्ट हुई वह. सब उसने लिखा. तो पता नहीं होता है कौन कैसे कब किस चीज. का इस्तेमाल कैसे करेगा जैसे मुझे मोमोज़. पसंद है या मेरा मेरा लड़का एक्स व जेड. स्कूल में पढ़ रहा है उसकी फीस इतनी है तो.
मेरे अरेस्ट होने के बाद वह लड़की ने सब. कुछ लिख लिया. कि जिगना को मोमोज पसंद है। जिगना का. लड़के की स्कूल की फी उतनी है। अरे भाई. जिगना ऐसे स्पा में मेंबर है। अरे मैं कमा. रही थी ना वो टाइम पे ₹1.5 लाख 1फ लाख पर. मंथ तो मैं साल के 40,000 मेरे स्पा के. लिए मैं यूज़ कर सकती हूं। ना ही मैं दारू. पीती हूं ना ही मैं सिगरेट पीती हूं। वो. लड़की तो 15,000 की उसका तो रिपोर्टिंग.
इंटर्न थी वो। तो वह तो स्लिमिंग के लिए आ. रही थी ना अपने आप को पतला करने के लिए।. वो उसको नहीं खुद को दिखाई दिया। जिगना के. लड़के की फीस साल की 2 लाख है।. तो क्या मुझे अंडरवर्ड स्पोंसर कर रहा था? उसका कहने का मतलब यह था।. वो सब छाप दिया। सो नेवर बिलीव एनीवन।. नेवर ट्रस्ट एनीवन। अपने आप को ही ट्रस्ट. करो। बाकी किसी को ट्रस्ट मत करो। एंड.
जस्ट स्टे इफ यू हैव डन समथिंग राइट इफ यू. आर ट्रुथफुल. देन जस्ट होल्ड ऑन इट्स मैटर ऑफ़ टाइम आज. 14 साल के बाद भी सच्चाई सामने आई है ना. बस सर सो इट्स जस्ट मैटर ऑफ टाइम. थैंक यू सो मच अंगना. थैंक यू. थैंक यू सो मच. कोशिश थी हमारी थोड़ा अंडरवर्ड थोड़ा आपकी. कहानी को समझे और बहुत सारे जो नए. जर्नलिस्ट हो उनको ये बताएं कि प्राण मत.
दो संस्था संस्था के लिए. जरा भी नहीं।. संपादक बदलेगा नौकरी चली जाएगी या तुम. फंसोगे संस्थान हाथ खड़ा कर लेगा।. सही बात है।. संस्थान की बदनामी तुम्हारे हिस्से आती. है। लेकिन तुम्हारी बदनामी संस्थान अपने. माथे पर नहीं लेगा।. कभी भी नहीं लेगा। जरा भी नहीं।. इसलिए जब कहीं जान लगाओ, प्राण लगाओ तो यह. समझो कि आखिर में तुम हो तुम्हारा परिवार. है।. सही बात है। इट्स अल्टीमेटली. यस। आई वुड स्टिल लाइक आई वुड लाइक टू से. दिस थिंग्स टू ऑल यंगस्टर्स। इट्स ऑल.
अबाउट योर फैमिली। आज मेरी फैमिली ऐसी. खड़ी थी मेरे साथ में अनबिलीवेबल था मेरे. लिए। यह आज तक मेरी फैमिली में से मुझे. किसी ने नहीं पूछा कि जिंदना रियलिटी क्या. है? क्या हुआ था उस टाइम पे? मेरे नाना जी. जब तक जिंदा थे बोलते थे ऊपर से भगवान आके. भी बोलेगा ना कि यह लड़की ने कुछ किया तो. भी मेरी लड़की मैं भगवान से लड़ जाऊंगा कि. मेरी लड़की यह कर ही नहीं सकती। फ्रेंड्स. अपनी जगह पर है। बॉयफ्रेंड अपनी जगह पे.
है। गर्लफ्रेंड अपनी जगह पर है। उन लोग के. पास चॉइस है टू वॉक ऑफ।. ट्रू. फैमिली के पास नहीं है।. कुछ भी कर रहे हैं पहले उनके बारे में सोच. लो।. पहले कुछ भी करो पहले उनके बारे में सोचो।. और अगर कुछ गलती हो जाती है और वो लोग कुछ. बोलते हैं तो अपने अच्छे के लिए बोलते. हैं।. ट्रू। और वह लोग ही फैमिली ही खड़ी रहेगी. आपके साथ। मेरा 90 साल के नाना जी आते थे. ना जेल में मिलने मुझे और मेरा 9 साल का.
लड़का साथ में लेके कोई फ्रेंड्स नहीं. आया। एक ही दोस्त आया था मिलने मुझे जेल. में। बाकी कोई नहीं आया। कहां गए सब? ये जीवन की सच्चाई है।. हार्ड ट्रुथ।. थैंक यू सो मच।. थैंक यू। थैंक यू।.
