How Did Babloo Srivastava Kidnap Gautam Adani? ft. IPS Rajesh Pandey | Dawood | Lawrence| Underworld
गौतम अडानी को कैसे किडनैप कर सकता है? आपने किडनैप कर लिया था।. गौतम अडानी का अपना।. गौतम अडानी का किडनैप।. गौतम अडानी कुछ किडनैप। भाई ये बात है 98. की। ना आप गौतम अडानी को जानते होंगे ना. हम जानते होंगे। पोर्ट के ऑपरेशन के लिए. सब लोग दाऊद को पैसा देते थे। अडानी दाऊद. को पैसा देते थे। 1 जनवरी को सुबह गए. वहां। पूछा गौतम कहां है? सेठ कहां है? तो. उन्होंने बताया कि यह करणावती क्लब में. देखो साले कितने शार्प है कि अभी यह वहां.
से कागज पत्र दुरुस्त करने के लिए ऑफिस ही. पहुंचेगा तो हो सकता है रास्ते में कहीं. मिल जाए और बिल्कुल एक्सजेक्टली वही हुआ. थोड़ी देर में पिस्तल लगा के इन्होंने बता. दिया कि शांत होके सर नीचे करके बैठ जाओ. ले गए फ्लैट में जहां पहले से तय था और. गुजरात के अंदर से अड़ाने के लिए. लेकिन अपहरण का मुकदमा लड़ने के अदालत. नहीं गए गए ही नहीं. और 2018 तक तो बहुत बड़े आदमी हो चुके कौन. आदमी बबलू श्रीवास्तव जिसके बारे में देश. नहीं जानता लेकिन वो हिंदुस्तान से लेकर. पाकिस्तान, अमेरिका, ट्विन टावर, गौतम.
अडानी हर जगह मौजूद है। दिनांक 23 जून. 2021 की सुबह काफी सईद के घर पर बम. विस्फोट हुआ। पाकिस्तानी गृह मंत्री राणा. सनाउल्लाह और पंजाब काउंटर टेररिज्म. डिपार्टमेंट के आईजी इमरान महमूद ने एक. प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस हमले का. मास्टरमाइंड बबलू श्रीवास्तव को बताया।. इसने जो काम शुरू किया था, वह दाऊद के. गैंग कंपनी में ही था। कहते हैं अपहरण. जितनी सफाई से इसने किए हैं, जितने बड़े. अपहरण इसने किए हैं, शायद ही किसी ने किए. हो। तो पुरंदर में जो अननोन गन मैन दिखा. ये सब इन्हीं के आदमी हैं। अच्छा हमको लगा. देशभक्त लोग होते हैं। ये सब तो अंडरवर्ड.
के सब वंडर वर्ल्ड के हैं साहब। लेकिन. इनके पास क्या ऑप्शन है? ये अपनी खबरें भी. छपवाते रहते हैं कि ऐसा ना हो कि हम काम. भी कर रहे हैं। कोई जाने भी नहीं। हमारा. आपका पॉडकास्ट हो सकता है बबलू रास्ता भी. देखे और कराची में बैठ के दाऊद भी देखे।. देख ही रहे हैं। बाल ठाकरे ने मुंबई. अंडरवर को बदल दिया था। मुंबई आपके नाम से. कांपती है। कांपना चाहिए। शेर को डरे नहीं. तो क्या चूहा को डरे? इसीलिए अरुण गावली को उन्होंने खड़ा किया. कि उनके पास अगर दाऊद है तो हमारे पास भी. अरुण गावली और गावली ने ही वो हसीना पारकर.
का हस्बैंड उसको मार डाला।. आप तो एसटीएफ कर रहे हैं। बृजेश सिंह का. हाथ था वहां पे। हॉस्पिटल का कार्ड ने. पूरा दाऊद के लिए। हां दाऊद के लिए। एक. एफआईआर में कोई एक्यूज़्ड है। दाऊद और. बृजेश सिंह। इसमें शंका किस बात की है? हाजी मस्तान, करीम लाला, वर्दराजजन और. दाऊद इनकी प्रवृत्ति में अंतर क्या था? दाऊद क्रूर बहुत था।. इतना खून बहाओ कि आंसुओं का दरिया भी उसके. निशान ना मिटा सके।. कितने बॉलीवुड के लोगों के ऊपर बम फुटवाए.
गए। सिर्फ इसलिए कि तुम्हारी फिल्म रिलीज. हुई है। तुमने दिया क्यों नहीं? दो. करोड़ों।. मुंबई में बम धमाका हुआ था बाबरी गिरने के. बाद। उसने अंडर वर्ल्ड में भी हिंदू. मुसलमान कह दिया।. वो पहली घटना थी। वो ट्रिगर पॉइंट था।. बताया यह गया कि जब यह बात हो रही थी तो. उसी समय इसके फोन पर तमाम मुबारकबाद के. फोन आने लगे दाऊद को। लेकिन वो हां हूं ही. कर रहा था। शुक्रिया कर रहा था कि किसी को. क्लियर नहीं हो रहा था। तो इनके मन में. तभी डाउट हो गया।. गुलशन कुमार हत्याकांड का बदला हिंदू डॉन. लोगों ने ले लिया था। अबू सलीम की टीम से।.
गोली मारी किसने थी? गुलशन कुमार जी को।. इन लोगों का ये कहना है कि विक्रम वाहिनी. ने मारी थी। बबलू ये जिद्द करता रहा कि. इसको जिंदा हमें दो। हमें चीजें पूछनी है।. लेकिन मिर्जा दिलशाद बेग ने कहा कि भाई. इसके पास बहुत सी जानकारी है। इसे जिंदा. नहीं देंगे। दो टुकड़े नेपाल में मिले और. दो टुकड़े हिंदुस्तान में मिले और सर का. हिस्सा केले के पत्ते में लपेट के रक्षा. सूत्र बांध दिया था। जो. मिलशाद बेग कौन है? सांसद हुआ. नेपाल के।. नेपाल। देश भर में जहां कहीं बड़ी और नई. गाड़ियां चोरी होती थी, वो सब मिर्जा.
दिलशाद बेग के कैंपस में जाकर खड़ी हो. जाती एक थ्योरी आती है कि शिव प्रकाश. शुक्ला में कल्याण सिंह वाली जो थ्योरी दी. गई थी वो फर्जी थ्योरी थी वो यूपी एसटीएफ. ने इसलिए फैलाई थी ताकि पब्लिक में कोई. सिंपैथी ना हो और श्री शिव प्रकाश शुक्ला. को ठोकने का क्लियर मौका मिले. अजय राज शर्मा साहब मुख्यमंत्री जी ने. उनसे कहा कि अब तो हद हो गई इसने मेरे भी. मारने की सुपारी ले ली है ये कल्याण सिंह. की जुबान का सोर्स है. और कल्याण सिंह ने भी कहीं बताया नहीं कि. क्यों धमकी कहां से आई तो हो सकता है. कल्याण जी ने भी थोड़ा. अब हो सकता है.
एनकाउंटर सही होता है या गलत होता है? ये एनकाउंटर तो सही ही होता है। गलत क्यों. होता है? हर बार पुलिस वाले को छू के एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट का धंधा कैसे चलता है? प्रदीप शर्मा के नाम 101 एनकाउंटर।. भोसले के नाम 85 एनकाउंटर।. जब इस अंडरवर्ड में दोनों का झगड़ा शुरू. हुआ। चार पांच पुलिस अफसर थे। सालस्कर थे. उसमें आंध्रे थे उसमें। प्रदीप शर्मा थे. उसमें। ये सब जेल गए। हुआ यूं. बबलू के गुरु जी थे। लक्ष्मी नारायण।.
लक्ष्मी नारायण ने ही किडनैपिंग शुरू. कराई। किडनैपिंग का गुरु माना जाता है।. जैसे चार्ल्स शुभराज के साथ वो तिहाड़ में. था तो चार्ल्स शुभराज भी उसकी बातें सुनके. उसे गुरु कहता था। अखबार में हीरो का. विज्ञापन देकर ये लोग किडनैप करते थे।. हां अरे ये तो बड़ा गजब है। अबू सलेम पंचर. बनाने वाला था।. इसकी पंचर वाली दुकान आज भी है। आजमगढ़. में आफताब अंसारी का बनारस के फिरौती का. पैसा 91 के हाई जैकर तक पहुंच गया था. अमेरिका में।. जब मनी ट्रेल हुई है इसकी। यह सब पार्थो. राय, बर्मन जितनी किडनैपिंग का पैसा है, यह सब दाऊद ने दे दिया था और उसी पैसे से.
कैसे अलग है लॉरेंस दाऊद से? लॉरेंस ने हर घटना में नया आदमी इस्तेमाल. किया जिसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं।. उसका फायदा ये होता है पुलिस अगर पकड़ेगी. भी तो ऊपर की ट्रेल नहीं मिलेगी। मतलब हम. ये मान ले कि अतीक अहमद और अशरफ अहमद की. जो हत्या हुई इलाहाबाद में. उसके असली कातिल कभी नहीं पता चलेगी। सबसे. खतरनाक अपराधी जितने आपको अब तक दिखाई. पड़े। आपको कौन सा लगा? मुख्तार ही था।. कान खोल कर तुम लोग. मुख्तार ने जिस तरह के अपराध किए हैं जैसे. बहुत बड़ी किडनैपिंग की आगरा जेल में रेड. हुई थी तो इसकी बुलेट प्रूफ जैकेट्स जेल.
में इसके बैरेक के भीतर इसकी मिली थी. कृष्णा ने काट लिया चुटिया काट लिया. लॉरेंस बिश्नोई 10 साल बाद कहां देख रहे. हैं आप. जैसे बाकी लोगों का है हो सकता है 10 साल. बाद आप उसको विधानसभा में देखें लोकसभा. में देखें. मारा जाए. एक पुलिस अफसर ने जिस डॉन के खिलाफ अदालत. में खड़े होकर गवाही दी उसी डॉन ने बरसों.
बाद उस पुलिस अफसर को अपनी पूरी कहानी. सौंप दी। और शायद यही वजह है कि आज यह. पडकास्ट बड़ा खास होने वाला है। आप खुद. सोचिए बनारस के अपहरण की फिरौती का पैसा. घूमते-घूमते अकाउंट के जरिए उन लोगों तक. पहुंच जाए जिन्होंने अमेरिका के ट्विन. टावर गिराए। ये कड़ी किसने पकड़ी थी? पाकिस्तान का गृह मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस. करके कहे कि हमारे मुल्क में जो धमाके हो. रहे हैं वो भारत की जेल में बंद एक कैदी.
करवा रहा है। तो उन दावों में कितना सच. होगा? देश के सबसे अमीर आदमी का अपहरण हो. जाए और वह अपना मुकदमा लड़ने अदालत ही ना. पहुंचे। 14 देशों की पुलिस भी एक ऐसी औरत. को ढूंढ रही है जिसकी शक्ल तक किसी ने. नहीं देखी है। अब आपको समझ में आ गया होगा. कुल मिलाकर कहानी जो है वो बड़ी रोचक रहने. वाली है। हमारे साथ शख्स जो हैं वो भी. बड़े रोचक हैं क्योंकि यूपी एसटीएफ के. फाउंडिंग मेंबर यह रहे हैं। वो अफसर. जिन्होंने श्री प्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर. किया था। चार बार राष्ट्रपति के वीरता पदक.
से सम्मानित और अब एक ऐसी किताब लेकर आए. हैं जिसका हर पन्ना. किसी फिल्म से ज्यादा फिल्मी है। किताब जो. है वो हमारे सामने है। नाम है अंतहीन और. किताब लिखने वाले राजेश पांडे जी भी हमारे. साथ हैं।. बहुत धन्यवाद। बहुत धन्यवाद शुभांकर भाई।. बहुत धन्यवाद।. 2.0. 2.0. पहली किताब तो आपकी एकदम छा गई दुनिया भर. में। नहीं बिल्कुल ठीक कह रहे हैं और पहली. बार तब भी मैं पहली बार आपके ही पॉडकास्ट. में आया था उस किताब के आने के बाद.
हम. और तब मैंने जिक्र किया तब मैं इसको लिखना. मैंने उसका स्ट्रक्चर बनाना शुरू किया था. और आज भी इस किताब के साथ मैं पहले. पॉडकास्ट में आपके सामने बैठा हूं।. बट कमाल की कहानी है सर। 90 के दशक में. बबलू श्रीवास्तव केस में आपने सीबीआई. कोर्ट में गवाही दी थी और बाद में वही. बबलू से मिलकर कहानियां वेरीफाई होती हैं।. कहानियां आगे निकलती हैं। मतलब गजब. क्रोनोलॉजी है। एक अपराधी से रिश्ता होता.
है हमको लग रहा है पुलिस वालों का।. नहीं रिश्ता देखिए अपराधी से कोई रिश्ता. नहीं। हमें तो अपराध के नियंत्रण में, अपराध को खोलने में, अपराध के बारे में. पता करने में, किसी से भी सहयोग लेना सभी. पुलिस वालों को लेना भी चाहिए, लेते भी. हैं। और इसी कड़ी में बबलू श्रीवास्तव की. इस गैंग के साथ कोलकाता में एक एनकाउंटर. हुआ था। फिर वहीं से नैनी जेल में बैठ के. एक बड़े व्यापारी की किडनैपिंग का प्लान.
हुआ था। था एसडी पुवानी थेक के. उसमें सीबीआई इंक्वायरी हुई मैं. बतौर गवाह उसमें मैं और तमाम और पुलिस. अफसर. उसमें मौजूद रहे. फिर उसके बादक इंक्वायरी की कोलकाता जो. एनकाउंटर हुआ था जिसमें चार लोग बबलू. श्रीवास्तव के मारे गए थे. उसकी भी गवाहीक कोर्ट में हुई वो भी उसके. खिलाफ हम लोगों ने पूरी गवाही दी फिर हुआ. कुछ ऐसा कि जब मैं आईजी बरेली था डीआईजी.
बरेली फिर आईजी बरेली रहा। उसी समय कोरोना. आ गया हम. और यह बबलू श्रीवास्तव बरेली सेंट्रल जेल. में अपनी सजा काट रहा है। उसको आजीवन. कारावास या कई मुकदमों में कई सजाएं हुई. हैं।. कोरोना जब अपने सबसे बुरे दौर में था तो. जेल भी प्रभावित हुई। आदेश हुए कि भाई जेल. में देखिए ओवर क्राउडेड जेल्स थी। कोरोना. से वहां भी मौतें हो रही हैं।. जेल में तमाम इनमेट्स के.
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हमारे और बाकी लोग. और जगह-जगह जहां पर दिक्कतें थी वहां जाते. थे। बहुत मेहनत की थी उस समय पूरे सरकारी. तंत्र ने। मैं और हमारे सीएमओ थे डॉक्टर. शुक्ला। हम लोग पड़ोसी भी थे। जब यह आदेश. हुआ कि एक बार आप लोग जेल में भी विजिट. करके देख लें। वहां बहुत से लोगों की कई. जेलों में तमाम लोगों की कोरोना से मृत्यु. के भी समाचार मिले थे। तो हम लोग बरेली. सेंट्रल जेल गए। हम दोनों लोग हम और हमारे. सीएमओ साहब बरेली के.
वहां जो जेल सुपरिडेंट थे मिस्टर सागर थे. और उनसे पूछा गया। उन्होंने कहा साहब. हमारे यहां भी संक्रमण है और काफी हम. लोगों ने कोशिश की लेकिनकि सभी जगह यह कहर. बरपा हुआ है तो अभी जेल की तरफ लोगों का. ध्यान नहीं गया है। खैर उन्होंने एक लिस्ट. भी बनाई थी हम लोगों ने एक-एक करके सीएमओ. साहब मिले सबसे और उस समय एक किट दी जा. रही थी सरकार की तरफ से कोरोना किट करके. थी। उसमें कुछ दवाइयां होती थी। कैसे-कैसे.
खाना. आपको बबलू मिल गया था हमारी।. यही हमको बबलू मिल गया। लेकिन हमारे. दर्शकों को थोड़ा कॉन्टेक्स्ट के लिए जरा. समझाइए कि कौन है यह बबलू श्रीवास्तव? क्योंकि जब हम आपकी किताब पढ़ रहे थे. जी. तो उस किताब में दावा है कि बनारस से. कोयला कारोबारी आनंद प्रकाश अग्रवाल के. अपहरण में भी जिक्र आता है।. आता है।. पाकिस्तान से इल्जाम आता है 2021 में. हाफिज सईद के घर के बाहर धमाका होता है।. तो पाकिस्तान के गृह मंत्री प्रेस. कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि बबलू. श्रीवास्तव जो है वो जेल से करवा दिया।. जी। गौतम अडानी जो भारत के सबसे बड़े.
बिजनेसमैन आज के दौर में हैं। 1 जनवरी. 1998 को उनका अपहरण हो जाता है। उस मामले. में वो एफआईआर तक बाद में नहीं लिखवाते. हैं। जाते नहीं आगे। जी. उसमें बबलू श्रीवास्तव का नाम आता है।. अर्चना शर्मा अगेन एक मोहब्बत की कहानी. निकल कर आती है।. तो ये कौन आदमी है बबलू श्रीवास्तव जिसके. बारे में देश नहीं जानता लेकिन वो. हिंदुस्तान से लेकर पाकिस्तान अमेरिका. ट्विन टावर गौतम अडानी हर जगह मौजूद है।. देखिए बबलू श्रीवास्तव को कोई नहीं जानता. ऐसा नहीं है। बबलू श्रीवास्तव को जानते.
हैं।. क्राइम की दुनिया के लोग जानते हैं।. क्राइम की दुनिया के लोग. थोड़ा आम दुनिया के लोग बात कर रहे हैं।. जैसे भारत में लोग जानते हैं दाऊद. इब्राहिम को। लॉस ब्नोई को. श्री प्रकाश को आपके अतीक अहमद को मुख्तार. अंसारी को. उस लेवल पे कद का नाम में बबलू थोड़ा पीछे. रहे. हां बबलू असल में अंडरवर्ड से जुड़ा रहा. देखिए पहले मूल रूप से ये इसने जो काम. शुरू किया था वो दाऊद के गैंग डी कंपनी. में ही था. हम. रहने वाला ये लखनऊ का ही है. और कहते हैं बताते हैं कि अपहरण जितने. जितनी सफाई से इसने किए हैं जितने बड़े.
अपहरण इसने किए हैं शायद ही किसी ने किए. हो. शुरुआत में लखनऊ में एक सबसे बड़े उस समय. जो पहला अपहरण जिस सेंसेशनल हुआ था लखनऊ. में वो माता बदल पंसारी का हुआ था वह इसने. अपहरण किया था इनके गुरु और इसका एक साथी. राजू भटनागर वो भी बड़ा भारी क्रिमिनल था. बाद में एक एनकाउंटर में मारा गया और इसका. एक गुरु भी था वो लखनऊ का ही रहने वाला था. इन लोगों ने अपहरण का कारोबार जो पहले.
चंबल की घाटियों में डकैतों के साम्राज्य. जब चला करते थे एक के बाद एक नाम चला करते. थे तो वो लोग पकड़ करते थे उसको तब. किडनैपी अपहरणकर्ता अपति ये शब्द नहीं थे. वो पकड़ कहते थे कि साहब उठा ले किसी बड़े. किसान को उससे पैसा वसूल लिया और कुछ-कुछ. तो ऐसा हुआ किसी को उठा ले आए और फिर वो. ना उसने पैसा दिया ना उसने छोड़ा वो बाद. में जैसे निर्भय गुर्जर के साथ वो श्याम. करके दिल्ली से किडनैप करके या पकड़ करके.
उठाया गया था और फिर उसके बाद उसे छुड़ाने. वाला कोई आया नहीं फिर उसी गैंग में वो वो. भी शामिल हो गया। आज की तारीख में वह भी. थोड़ा बहुत काम वही चंबल की उसमें रिमाइंस. में वो करता है। चंबल घाटी में करता है।. तो बबलू श्रीवास्तव. बेसिकली ये अंडरवर में इसकी पहचान तब से. बनी जब ये इसने दाऊद के लिए काम करना शुरू. किया। दाऊद एक मामले में इससे इतना. इंप्रेस हुआ। दाऊद के किसी आदमी को इसने. नेपाल बुलवा के किडनैप कर लिया। कोठारी.
नाम के किसी व्यक्ति का कुछ ₹ करोड़ बाकी. था। उसने इससे संपर्क किया कि साहब एक. करोड़ हम आपको देंगे। ₹ करोड़ हमारा पैसा. वापस करा दीजिए। उस समय दाऊद इब्राहिम ने. संपर्क किया था इसे मिर्जा दिल दिलशाद बेग. के माध्यम से। यह अपना बेस ज्यादातर नेपाल. में ही बनाकर रखता था। फिर. इसने कहा कि नहीं बिना पैसे हम नहीं. छोड़ेंगे। दाऊद की बात नहीं मानी। पैसा. लिया। फिर मिर् दिलशाद बेग से दाऊद ने कहा. कि आप इनको लेके हमारे पास आइए और आदमी.
जोरदार लगता है। फिर वहां गया और वहां पर. इन्होंने उसको रहने की जगह दी और फिर पूरा. का पूरा सिस्टम यह उठा के दुबई चला गया।. फिर यह और लाइमलाइट में आया जब यह. चंद्रास्वामी के आश्रम में गया।. चंद्रास्वामी की उस समय तूती बोलती थी।. कहा यह जाता है कि नरसिम्हा राव जी जब. प्रधानमंत्री बने उसमें चंद्रास्वामी का. बड़ा भारी हाथ था। हम. चंद्रास्वामी क्योंकि स्मार्ट था, अंग्रेजी बोलता था और अह लखनऊ का पढ़ा.
लिखा था।. अह अच्छे स्कूल में पढ़ा लिखा था। लखनऊ. छात्र संघ की राजनीति में बड़ा एक्टिव था।. तो यह वहां चंद्रास्वामी के यहां रहने. लगा। बड़ी-बड़ी डील जो है चंद्रास्वामी की. वो कराने लगा। कहा यह भी जाता है कि अदनान. खगोशी से जो जी डील हुई थी तो उसकी बात को. समझने के लिए चंद्रास्वामी ने इसको अपने. यहां रखा था। और तमाम वहां कहते थे. बड़े-बड़े अधिकारी आया करते थे। टॉप. पॉलिटिशियन वहां मैंने सबका नाम भी इस. किताब में लिखा है। कौन-कौन वहां आया करता.
था। फिर धीरे-धीरे अदाब शुरू हुई इनकी। जब. ये 12 मार्च 1993 का मुंबई का ब्लास्ट. हुआ।. जिसमें बहुत से लोग मारे गए। तो उस समय एक. एक गुट था इसका दाऊद का। जैसे वो डी कंपनी. कहता था। हम. अपने को कंपनी का सीईओ कहता था कि सब. मालिक हम हैं। मैनेजर हमारा छोटा राजन है।. तो जो नॉन मुस्लिम एलिमेंट था उसमें वो सब. छोटा राजन के साथ एक-एक करके जुड़ता गया।. छोटा राजन हुआ। पीपी पांडे जिसको बंटी.
पांडे कहते हैं वो हुआ। सुभाष. ठाकुर हुआ और बबलू श्रीवास्तव हुआ। ये सब. एकजुट होने लगे उसके मुंबई ब्लास्ट के बाद. कि साहब ये क्योंकि वो कहा गया कि साहब. हमने बाबरी ढांचे के गिरने का बदला लिया. है और ऐसीऐसी जगह हो जिसमें 257 लोग शायद. मारे गए थे जहां तक अगर मैं करेक्ट हूं तो. 257 लोग उसमें मारे गए थे निरीह लोग मारे. गए थे.
तो मतलब ये कह सकते हैं कि जो बंबई में बम. धमाका हुआ था बाबरी गिरने के बाद उसने. अंडरवर में भी हिंदू मुसलमान कह दिया उसी. के बाद से शुरू हुआ। वो पहली घटना थी। वो. ट्रिगर पॉइंट था। मैंने इसमें जिक्र किया. है कि उस समय ये लोग दुबई में थे।. हम. और वहां पर एक मॉडर्न गेस्ट हाउस करके है. रोहित शेट्टी का। इनका गैंग मेंबर था।. इनका सारे पैसों का सब हिसाब किताब वही. रखता था शेट्टी। शरद शेट्टी नाम था शायद. उसका। तो वहां वो बैठे हुए थे। टीवी देख. रहे थे। ये सारे पूरा गैंग वहां बैठा हुआ.
था। तो जैसे ही मुंबई बम ब्लास्ट की बात. होने लगी। तो बताया ये गया कि जब यह बात. हो रही थी तो उसी समय इसके फोन पर तमाम. मुबारकबाद के फोन आने लगे दाऊद को लेकिन. वो हां हूं ही कर रहा था शुक्रिया कर रहा. था हां कर रहा था इस तरह की बातें वो कर. रहा था कि किसी को क्लियर नहीं हो रहा था. तो जैसे ही उसकी बात दो चार लोगों से हो. के खत्म हुई तो इन लोगों ने भी ये सब. बराबर के ही थे सब साथ में ही काम करते थे. जैसा दाऊद का दिमाग चलता था वैसे ही छोटा.
राजन का बबलू श्रीवास्तव का सुभाष ठाकुर. का ये सब अह सौत्या का छोटा शकील का सब तो. यह बिल्कुल एक ही थे। सब एक थैली के. चट्टे-बट्टे थे। तो इन्होंने अंदाज लगाया. कि आज तो ना तो इसका मैरिज एनिवर्सरी है. ना इसके बेटों की बर्थडे है ना इसका. बर्थडे है। तो यह विश कौन कर रहा है? यह. शुक्रिया किसको कह रहा है? तो छोटा राजन. ने उससे पूछा कि भाई आज तो ऐसा कुछ है. नहीं। ये कौन तुमको बधाई दे रहा है। तो. उसने कहा कुछ नहीं कुछ नहीं। एक डील फाइनल. हुई। तो बोले डील भी कौन सी ऐसी अकेले कर.
ली तुमने भाई कि हमें पता नहीं है। तो वो. किसी तरह से उस बात को वो टाल गया और फिर. थोड़ी देर बाद ही एक घंटे बाद ही दूरदर्शन. ही उस समय चला करता था। दूरदर्शन पे ये. समाचार आने लगा कि दाऊद इब्राहिम का इन. धमाकों में हाथ है। तो वहां ये सब बैठे. हुए थे। हेजिटेट होने लगे कि किसकी साले. की हिम्मत पड़ गई? कैसे यह कह रहा है? आपका नाम कैसे आया भाई? जैसे ग्रुप में जो. बॉस होता है उसको तेल पानी लगाने के लिए. लोग अरे किसकी हिम्मत पड़ी भी मैं गिरा.
दूंगा मार दूंगा इस तरह की बातें वहां तो. उसने कहा नहीं नहीं ये हमारा काम नहीं है. हमसे इसका कोई लेना देना नहीं है ये टाइगर. मेमन ने कराया है तो उन्होंने कहा फिर. इनको मना करो क्यों तुम्हारा नाम इसमें. टीवी में आ रहा है तो इसने कहा कि नहीं. नहीं अभी कुछ छेड़ो नहीं इस समय ज्यादा. लोग मारे गए हैं और एजेंसी सब इसमें लगी. हुई है इस तरह करके तो इनके मन में तभी. डाउट हो. कि हो ना हो यह जो ब्लास्ट हुआ है यह इसी. ने कराया है दाऊद ने ही कराया है क्योंकि.
देखिए जो इसकी हिस्ट्री थी जैसे अंडरवर. में पैसे की कमी नहीं थी और उस जमाने में. 60 और 70 के दशक में जब हाजी मस्तान. अंडरवर के मालिक हुआ करते थे. तो वो साउथ इंडियन थे आंध्र प्रदेश का था. उसके बाद वर्दा भाई आए व वरद राजजन. मुदलियार वो भी साउथ के थे तो और उस समय. ये शिव शिवसेना उभार थे। बाल साहब ठाकरे. साहब भी उनकी राजनीति बिल्कुल शुरू हुई. थी।. तो आज की तरह ऐसा नहीं था कि लोग भाग के.
बेंगलुरु जा रहे हैं नौकरी के लिए। उस. जमाने में मुंबई की बॉलीवुड की चमकदमक. बहुत पैसा ये बड़ा आकर्षित करता था और. साउथ के लोग नजदीक होने की वजह से बहुत. बड़ी संख्या में वहां रहते थे। और ये लोग. क्योंकि वहां अंडरवर्ड के गुरु थे तो अपने. लोगों को किसी को कंपनी में किसी को. फैक्ट्री में किसी को तो पूरा साउथ इंडियन. का वर्चस्व हो गया। उससे वहां का जो लोकल. आदमी था मराठा उसको यह लगता था कि साहब यह. बताइए बाहर से आके हम पर रूल कर रहे हैं।.
तो शिवसेना ने एक बड़ा भद्दा सा. नारा दिया उस समय साउथ इंडियंस के लिए कि. वो आप नेट पे देखेंगे सब जगह है। बहुत. अच्छा तो नहीं सुनने में लगता है कि लुंगी. उठाओ पुंगी बजाओ। ये नारा ऑफिशियली आपको. मिल जाएगा। नेट पे मिल जाएगा। पुराने. साहित्य में भी सब में मिल जाएगा। तो इन. मराठाओं ने सब ये खड़े हो गए और साउथ. इंडियंस के खिलाफ एक मूवमेंट चला। जैसे. कभी उत्तर भारतीयों के खिलाफ एक मूवमेंट. चला था। उस समय दक्षिण भारतीयों के खिलाफ.
एक मूवमेंट चला। दाऊद उस समय इसकोकि. महाराष्ट्र का रहने वाला था। मुंबई का. रहने वाला था। तो इसने उसमें लीड ली।. छोटे-मोटे ये कहते हैं कि ये फ्रॉड का काम. करता था। सोना दुगना करना और इस तरह के. छोटे-छोटे जो पॉकेटमारी टाइप के जैसे छोटा. राजन तो बताते हैं कि वो टिकट ब्लैक करता. था. मुंबई के किसी पर्टिकुलर इलाके में जहां. सिनेमा हॉल वैसे ये भी बहुत पीटी क्रिमिनल.
था। लेकिन जब देखा कि यहां पे जो. बड़े-बड़े. लोग थे बड़े-बड़े जो बदमाश थे जिन्होंने. हफ्ता वसूली का इन सब का काम शुरू किया. था। इनके खिलाफ एक मूवमेंट चल रहा है। तो. बाल ठाकरे साहब क्योंकि उन्होंने ये मराठी. अस्मिता निकाला था।. और दाऊद भी मराठी अस्मिता के नाम पर ही. शुरू हुआ।. नाम पर शुरू हुआ।. कभी इनका आपस में कोई बॉन्ड रहा? कोई ऐसी. घटना आती है कभी पुराने किस्सों में कि. नहीं इनका नीचे काम किया उसने? नहीं ऐसा नहीं है कहीं नहीं है। देखिए. इनका बॉन्ड एज सच कोई नहीं था।.
दो अलग लोग. दो अलग-अलग लोग और एक. उसी टॉपिक पे चल रहे थे। आगे. चल रहे थे आगे। उन्होंने कहा साहब ये बाहर. का आदमी आके यहां साउथ का आदमी हमारे. लोगों पे सब ज्यादती कर रहा है। लोगों को. निकाल रहा है। मैनेजेरियल पोस्ट सारे साउथ. इंडियंस के पास चली गई थी। जो जितने. छोटे-मोटे वहां प्राइवेट इंडस्ट्रियल. सेंटर वो पहले भी रहा था। लेकिन बॉलीवुड. की चमक दमक से सभी उस समय 60 और 70 के दशक. में आकर्षित होकर वहां आए थे। तो जब ये. शिकायत हुई तो उन्होंने कहा कि नहीं साहब. ये मराठों का देश है। मराठा मानुष है यहां. पर। ये हम यहां.
ये सब भी मराठी छोटा राजन, छोटा शकील. ये सब मराठी सब यहीं के रहने वाले थे। मूल. रूप से दाऊद के साथ इसीलिए देखिए दाऊद ने. बहुत चालाकी की थी और अंत तक वो उसी दिमाग. से दिमाग का ही खाता रहा कि साहब उसने यह. नहीं कहा कि साहब जैसे ये साउथ इंडियंस को. भगाने के लिए नारा है तो ये भाग जाए यहां. पे। तो हम सिर्फ मुस्लिम्स को नहीं. रखेंगे। आप देखिए इनकी अंडरवर्ड की. हिस्ट्री। इसमें बहुत से लोग जो उसके नीचे. थे सबको अलग-अलग काम है। नई बिल्डिंग अगर. बन रही है तो उसका पैसा कौन वसूलेगा? होटल.
अगर कोई चल रहा है उसका पैसा कौन वसूलेगा? कौन सी पिक्चर उसका मुहूर्त होने वाला है. उसके पहले का पैसा कौन वसूलेगा? सबके पास. अलग-अलग जैसे होटल के चेंज का काम सब छोटा. राजन के पास था। बबलू श्रीवास्तव के पास. जो जो यह काम मुझसे कराता था बबलू. श्रीवास्तव। हालांकि जितना कन्वर्सेशन. मुझसे जेल में उससे हुई क्योंकि उस समय. कहीं किसी के पास कोई काम नहीं था और. कर्फ्यू जैसा लगा हुआ था कोरोना के टाइम. में और जो हम लोगों का आवास है उसके पास.
ही सेंट्रल जेल है तो मैं अक्सर जाया करता. था खाली समय था तो उससे मैंने तमाम उन. चीजों पर जिसके बारे में बहुत क्लेरिटी. नहीं थी कि जैसे मिर्जा दिलशाद बेग की. हत्या कैसे हुई किसने कराई क्यों कराई. क्यों ये चंद्रास्वामी के यहां गया था. जो ये अपराध की तमाम ढेर सारी घटनाएं. जिनकी जिनके उनके लिटरेचर में जैसे जब मैं. एटीएस में था तो बहुत सी चीजें आई थी। एक. चीज उसमें देखिए आई थी कि गुलशन कुमार की.
हत्या हुई। दाऊद मना करता था कि हमने. हत्या नहीं की।. मैं आऊंगा सर उस टॉपिक पे आऊंगा सर. धीरे-धीरे. तो उसमें हां उसमें उसमें भी यह बात आई थी. कि उसके जो असलहे बरामद हुए थे उसमें मेड. इन भमौर लिखा हुआ था। तो ये भम्मौर कौन सी. मैं आजमगढ़ में सीओ सिटी रहा था। मुझे पता. था कि बमोर वहां एक ऐसी जगह जहां पे कट्टे. जो है वह बहुतायत में बनते हैं। बढ़िया. किस्म के बनते हैं। तब पता किया तो दिल्ली. पुलिस वहां मुंबई की पुलिस वहां आई भी थी।. बहुत बड़ी संख्या में आई थी और फिर. अल्टीमेटली वो आदमी मिल गया जो कट्टा यहां.
से ले गया था जिससे हत्या हुई थी गुलशन. कुमार की। तो बहुत ढेर सारी जो जिनकी. सूचना नहीं थी किसी के पास हम लोगों के. पास। क्योंकि मैं एसटीएफ में बहुत लंबे. समय रहा। 4 साल करीब एसटीएफ में रहा। दो. बार में मिला के करीब 7 साल रहा। एटीएस का. फाउंडर मैं चार साल उसमें रहा। तो इस. दरमियान जो सूचनाएं ढेर सारी इकट्ठा हुई. थी लेकिन कंफ्यूजन था कि ये क्यों ऐसा कहा. जाता है? बहुत ढेर सारी इस पे किताबें भी. हैं। तो वो कंफ्यूजन सब दूर की. और एक बड़ा अजीब सवाल हम पूछेंगे।.
हां जी बताएं।. ये राजन और शकील के आगे छोटा क्यों लगा. था? छोटा शकील छोटा राजन क्यों? हां।. बड़े राजन क्यों नहीं? बड़े ऐसा है कि. शकील क्यों नहीं? छोटा शकील को तो ये बताते हैं। एक तो. दुबला पतला था। अच्छा शकील इज अ वेरी कॉमन. नेम बहुत इनके साथ जो और भी शकील काम करने. वाले थे ये छोटा कद का भी था और दुबला. पतला था तो इसको छोटा वाला शकील जैसे तीन. शकील हैं या चार शकील हैं या तो आप उनके. नाम से कि बांद्रा वाला बताइए शकील इनका.
बताइए वैसे तो बहुत नाम के आगे तकस लोगों. का लगा रहता है जिससे उसकी आइडेंटिटी होती. है कहां का है तो शकील नाम के बहुत थे और. राजन इज़ अ वेरी कॉमन नेम तो एक बड़ा राजन. भी था वहां पर जो बाद में लुप्तप्राय हो. गया खत्म हो गया और छोटा राजन एक बार. इसीलिए छोटा राजन इसको ऑफिशियली तो कहते. हैं इसका जो डी कंपनी में पॉपुलर नेम था. वो नाना था. इसको नाना कहते थे मैंने किताब में उसका. जिक्र किया है तो वही है वो छोटा शकील के.
नाम से मशहूर हुआ बाकी शकील सब अपने-अपने. काम में चले गए खत्म हो गए या मारे गए तो. एक छोटा शकील हो गया आसपास जितने लोग थे. जी. या तो मारे गए. मारे गए. या जेल में गए. गए. भाई से लेकर सब. सब. दाऊद काहे नहीं पकड़ा गया. देखिए इस जो मैं आपको बता रहा था जिस घटना. से अंडरवर का ध्रुवीकरण शुरू हुआ वो घटना. मुंबई की ब्लास्ट थी 12 मार्च 93 की मैंने.
आपको यह भी बताया कि कैसे लोग उसको बधाई. दे रहे थे और इसी बात पर बाकी जो नॉन. मुस्लिम एलिमेंट था अंडरवर का डी कंपनी. उसको शंका हो गई। उसके कुछ ही दिन बाद. यह पाकिस्तान चला गया दाऊद और किसी भी नॉन. मुस्लिम को नहीं ले गया। छोटा शकील को ले. गया, खुद गया। चार पांच और लोग थे वो ले. गया। कहते यह हैं कि आईएसआई ने कहा कि. मुंबई पुलिस भारत सरकार के माध्यम से दुबई.
पर यह प्रभाव यह दबाव डाल रही है कि तुमको. यहां दे दिया जाए या अरेस्ट कर लिया जाए।. क्योंकि उनके पास जो विवेचना की लीड है कि. यह दाऊद का कराया हुआ है। तो तुमको हम. प्लेन भेज रहे हैं फला जगह से फला जगह तो. पाकिस्तान एयरलाइंस की प्लेन से ये लोग सब. गए थे। अचानक एक दिन ये सब उड़ गए और सब. पाकिस्तान पहुंच गए।. तो आज दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान का दामाद. बनकर बादशाह बनकर बैठा है या आईएसआई के.
कैदी बनकर? है वो आईएसआई के कैद में। आज की तारीख में. वह कतई नहीं कहीं जा सकता है। आईएसआई उसका. जब तक वह इसको यह भ्रम है आईएसआई को कि. नहीं इसका नेटवर्क अभी भी देश में मौजूद. है तब तक वो उसका इस्तेमाल करना चाहेगी।. जैसे 95 के बाद से यह नेटवर्क धीरे-धीरे. धीरे-धीरे ध्वस्त होना शुरू हुआ। दोनों का. छोटा राजन का भी जब 93 में इनका झगड़ा हुआ. तो आपस में एक दूसरे की मुखबिरी करने लगे।. पुलिस को जैसे कांग्रेस का शासनकाल जब हुआ.
तो उसमें छोटा रजन के आदमियों की मुखबरी. की इनके लोगों ने क्योंकि वो एक दूसरे को. मारना चाहती थी। इतना आपस में जैसे वो. कहते हैं ना कि. इतना दुराव हो गया था। इतनी दुश्मनी हो गई. थी दोनों में और जैसे ही 95 में बीजेपी. शिवसेना की सरकार आई तो दाऊद के आदमियों. की मुखबिरी पुलिस को और चार पांच पुलिस. अफसर थे. हम. जो जिनके हिस्से में इसी पीरियड में आप. समझिए 93 94 से लेके 98 तक 100-100. एनकाउंटर हुए एनकाउंटर.
जिनके ऊपर सारी फिल्में बनी है. जिनके ऊपर सारी फिल्में बनी है।. अब तक 56 से लेकर. अब तक 56 से लेके ये सब और इसमें कुछ तो. हैं जैसे. बार-बार जेल भी गए हैं. जो बार-बार जेल भी गए हैं। यह चार पांच. लोग हैं। सालस्कर थे उसमें आंध्रे थे. उसमें। हां प्रदीप शर्मा थे उसमें। ये सब. जेल गए। लेकिन यह वही पीरियड है कि जब एक. आदमी के हिस्से में 60 एनकाउंटर आए। हुआ. यूं कि जैसे ही सरकार बदली वैसे ही तड़ात. मुखबिरी क्योंकि एक दूसरे के खून के. प्यासे थे। छोटा राजन का ग्रुप भी और दाऊद.
का ग्रुप भी। तो छोटा राजन के लोगों ने. दाऊद के। अब चूंकि एक ही थे तो घर का भेदी. जैसे होता है ना। हम किसी ग्रुप में काम. कर रहे हैं। हम तो सबको जानते हैं ना कौन. क्या काम कर रहा है। किसके लिए काम कर रहा. है। तो पुलिस की तो बल्लेबले हो गई। उसे. फौरन ये सूचना मिल मिलने लगी देखिए ये फला. जगह है। पांच मुकदमे हैं। ये फला जगह है।. तो उस पीरियड में एक अकेले पीरियड में 300. एनकाउंटर हुए मुंबई में और ये सब एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट।. इन पुलिस वालों में भी कंपटीशन था।. इन लोगों में आपस में कंपटीशन था। कौन. ज्यादा मार दे। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट शब्द.
जो है वो हमारी पुलिसिंग में उसी पीरियड. के बाद आया। उसके पहले कहीं एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट का जिक्र नहीं है।. मुंबई के उस पीरियड में जिसमें इन दोनों. के बीच झगड़ा हुआ और यह एक दूसरे की. मुखबिरी करने लगे, तो कुछ तो पुलिस से. मरवा दिया। जो उनको लगा कि नहीं पुलिस. इसको नहीं मारेगी। अब इसने पुलिस को सेट. कर लिया है। उसको अपने लोगों से मरवा. लिया। बहुत ही खराब पीरियड था। वैसे भी 90. का दशक में पिछली किताब में भी मैं बता. चुका हूं कि 90 का दशक वो पुलिस को बैकफुट.
पर रखा था पूरे देश में।. पंजाब हो, मुंबई. कहीं भी आप देख लीजिए। हां, चाहे यूपी हो, बिहार हो, पंजाब हो, सबसे खराब पीरियड था. 90 का दशक। अगर आप पुलिसिंग के नजरिए से. देखें सुधार हुआ और फिर उसके बाद 2005 के. बाद से पुलिस ने चढ़ाई शुरू की।. तो ये आपस में जो मारकाट हुई, उसी में इन. पुलिस वालों का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का. नाम इनको मिला। अब तो आपको गली मोहल्ले.
में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मिल जाएंगे।. जिसने भी कुछ किया है तो अखबार लिखता है. साहब फला जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम. से लेकिन इसके पहले जब इन लोगों ने 95 94. 95 में शुरू हुआ शुरू किया उसके पहले कहीं. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का. तो दाऊद को अब क्यों पाल रही है पाकिस्तान. देखिए जब वहां से धीरे-धीरे खत्म होना. शुरू हुआ तो मैंने इसमें जिक्र किया है कि. इन्होंने पूरा का पूरा सिस्टम अपना नेपाल. में शिफ्ट किया। उस समय नेपाल में भी बड़ा.
जिसको कहते हैं कि बड़ी अंतरकलह चल रही. थी। जो रूलिंग पार्टी थी उसमें और. मधेशियों में आपको ध्यान हो ये वो पीरियड. है 2005 के बाद का जिसमें जगह-जगह वहां. कुकर बम फटते थे और सरकारी संपत्ति को. बहुत नुकसान हुआ था और एक. कोबरा करके एक ऑर्गेनाइजेशन बनवाई थी. आईएसआई ने. वहां एक लोकल. क्रिमिनल था उसके जरिए उसका मैं नाम मिस.
कर रहा हूं। किताब में है उसका नाम मैं. बताऊंगा आपको। तो वो जो है. वो ब्लैक कोबरा करके ऑर्गेनाइजेशन जो. मदेशियों को. परवेज टांडा. परवेज टांडा ये है पेज 243 पे। परवेज. टांडा जो है वो पहले इसको आईएसआई का काम. दिया। फिर उसके बाद एक ऑर्गेनाइजेशन बनवाई. जो ढूंढ-ढूंढ के मदेशिया वो होते हैं जो. भारतीय मूल के हैं लेकिन नेपाली नागरिक.
हैं।. अपनी सीमा के भारतनेपाल सीमा के तराई. क्षेत्र में नेपाल की तरफ यह संपन्न हो गए. हैं। और व्यापार का बड़ा हिस्सा इनके पास. हो गया है। और मूल जो नेपाली लोग थे जो. वहां पे लेफ्टिस्ट ऑर्गेनाइजेशन कुछ थे वो. इनका विरोध करते थे। फिर यह एक बहुत जैसे. वो कहते हैं खून खराबे वाली स्थिति शुरू. हुई कि इन मधेशियों के खिलाफ यह परवेज. टांडा को लगाया गया। इसने वो एक कोबरा नाम.
की ऑर्गेनाइजेशन किंग कोबरा मैं क्या बता. रहा था आपको उस नाम की ऑर्गेनाइजेशन में।. उन्होंने बहुत मध्यियों को मारा। थोड़ा. बहुत नहीं तराई कोबरा हम. और जो वहां का रूलिंग. जो समाज था या रूलिंग पार्टी थी वहां पे. ये इनको मधेशियों के खिलाफ इन्होंने एक वो. बना रखा था और इसीलिए मधेशियों ने भी इनके. खिलाफ दोनों तरफ से तमाम उस समय मर्डर हुए. थे। तो इसका फायदा उठा के आईएसआई ने जितने.
भी. जैसे जामिन शाह मारा गया जामिन शाह नेपाल. का मीडिया टकून कहते थे उसको पहला. अपलिंकिंग सिस्टम सेटेलाइट से डायरेक्ट. अपलिंकिंग का सिस्टम वो जामिन शाह ने ही. क्रिएट किया था उसका विरोध किया था चाइना. ने पाकिस्तान ने और हिंदुस्तान ने। जैसे. ही इसका यह चैनल शुरू हुआ हिंदुस्तान ने. अपने यहां उसको बैन कर दिया। वो यहां नहीं. चल रहा था। तब ये आईएसआई के संपर्क में आए.
और कहा कि साहब पाकिस्तान गवर्नमेंट से. हमारे ये काम करा दीजिए। जामिन शाह और जिस. दिन जामिन शाह को मारा गया था. हम. उस दिन. नेपाली डेलीगेशन चाइना में था। इसी. अपलिंकिंग को फैसिलिटेट करने के लिए। तो. पूरे सिस्टम को आईएसआई ने अपने कब्जे में. कर लिया थ्रू दाऊद इब्राहिम। क्योंकि ये. लोग वहां काम करते थे। जब ये सब एक थे।. बबलू और जितना पूरा गैंग है सब एक थे। तो.
ये सबसे बड़ी इनकी आरामगाह नेपाल ही थी।. दुबई में भी वहां का कानून बीच में इतना. सख्त हो गया कि इनको दिक्कत होती थी. सर्वाइव करने में। यह नेपाल आ जाते थे। तो. उन कांटेक्ट्स का इस्तेमाल करके धीरे-धीरे. धीरेधी करके वहां के जितने बड़े इस तरह के. एलिमेंट थे उनको आईएसआई ने कब्जे में कर. लिया। उनको. हिंदुस्तान से वहां काठमांडू ले जाना, काठमांडू से कराची पहुंचाना कराची से. परवेश टाडा ही ये करता था। उनको जब वापस आ.
जाए तो उनको कैसे पार करा के हिंदुस्तान. में भेजना है। ये बहुत डिटेल और इस पर जब. वहां पे कई एक म जैसे जामिन शाह को मारा. हम वैसे ही इन्होंने अह परवेज टांडा को. मारा। फिर अह उसको मारा। अह उसका क्या नाम. था? वहां का नेशनल वो नेपाल का नेशनल. सेक्रेटरी था वो। इलेक्शन के अह बीच में. उसको मारा। 10 12 बड़ी हत्याएं हुई वहां. पर। और सब आईएसआई के ऑपरेटर थे। जिन्होंने.
शुरुआत की थी नकली नोट खपाने से लेकर। फिर. आर्म्स और एमुनेशन सब वो हिंदुस्तान भेज. रहे थे। थ्रू दाऊद। तो जब वह वहां पर. सिचुएशन खराब हुई मुंबई में तो इन्होंने. बेस अपना नेपाल में शिफ्ट किया। फिर नेपाल. में जब ज्यादा हो गया तब फिर ये जो सारे. इकट्ठा हुए थे जिसमें छोटा राजन था, बबलू. श्रीवास्तव था और बाकी जितने नाम मैंने. आपको बताए ये इकट्ठा हुए।. दोबारा साथ आए कभी? हां दोबारा साथ आए। भाई सबकी ऐसी तैसी 95.
में इसको सिंगापुर एयरपोर्ट पर इंटरपोल से. गिरफ्तार करा दिया। उसके बाद फिर एक-एक. छोटा राजन भी जेल में ही है। इसको 2015. में कहीं इंटरपोल से गिरफ्तार कराया। बाली. में गिरफ्तार कराया था। ऐसे ही सुभाष. ठाकुर को वहां ताइवान में गिरफ्तार कराया।. ये अपने सारे आईएसआई अपने सब उसका अकेले. दाऊद के बस का नहीं है कि वो इंटरपोल से. संपर्क करके और इन लोगों को अरेस्ट करा.
दे। आईएसआई ये कराती रही इनको सबको और फिर. इन्होंने भी वही किया कि इनके आदमियों को. एक-एक करके मारते रहे। और फिर ये सब. इकट्ठा हो के ये सारे बड़े ऑपरेटर्स जो. आईएसआई के नेपाल में थे ये सब इन लोगों ने. मरवाए एक-एक करके मरवाए और उसमें ज्यादातर. लोग जो पकड़े गए या उस समय नेपाल और दुबई. की जेलों में हैं वो बबलू श्रीवास्तव के. हैं। इसलिए ये बात. आईएसआई के नेपाल में किससे मरवाया? आईएसआई ने नहीं मरवाया। आईएसआई तो वहां. आईएसआई ने एक्सपेंड कर दिया नेपाल.
अपना एक्सपेंड कर दिया। फिर ये इकट्ठा. हुए। दाऊद के अगेंस्ट वाले सब जितने हैं।. इन्होंने. इन्होंने फिर एक-एक करके वहां वो. खुद मारा या नेपाल गवर्नमेंट से मरवाया।. नहीं नहीं इनके लड़के जा के मारे। भाई जो. वहां अरेस्ट हुए हैं देखिए मैंने उनका नाम. सबका लिखा है जो अभी भी वहां की जेलों में. हैं अगर आप उनको देखेंगे उनका नाम देखिए. वो सब यही लोग हैं जैसे मैंने ये लिखा है. ये पेज नंबर 255 पे कि जामिन शाह की हत्या. में मौके पर पकड़ा गया मनजीत सिंह भाटिया.
लखनऊ का रहने वाला है। यूनुस अंसारी की. हत्या का प्रयास यह. यूनुस अंसारी वहां एक मंत्री का बेटा था. जिसको जब यह बड़े वाले मारे गए जामीन शाह. ये सब मारे गए तो नकली नोट का काम उसको. दिया वो नेपाल में काठमांडू एयरपोर्ट पे. इंडियन एजेंसीज ने लोकल पुलिस को टिप ऑफ. देके इसको यूनुस अंसारी को वहां पकड़ा था. कम से कम ₹ करोड़ नेट पे होगा यह ₹4 करोड़.
फेक इंडियन करेंसी एफआई किसी के साथ ही. पकड़ा गया था और अभी तक किताब लिखने तक यह. जेल में था। अब का पता नहीं तो इसको इन. लोगों ने जेल में मरवाने की कोशिश की कि. यह जेल में भी रह के यह ऑपरेशन कर रहा है।. यही लड़का वहां पर काली जैकेट पहन के गया।. उस समय जेल में जब इसको मारने की कोशिश. हुई थी, उस समय वो चाल शोभराज भी नेपाल की. उसी जेल में था। हम. ये वहां गए।. चार बार, पांच बार गया और उसने देखा कि. कहां-कहां चेकिंग होती है। तो वहां जो जेल.
में चेक होता था, वह कमर के ऊपर तक चेक. करते थे, नीचे नहीं करते थे। तो यह लड़का. जो पकड़ा गया जिसका मैंने बताया अ. जगजीत सिंह यह भी लखनऊ का रहने वाला है।. मौके पर पकड़ा गया था। तो इसने. जांघ यहां इस पे पिंडलियों पे एक होस्टर. लगाया। इसमें पिस्टल रखी क्योंकि चार बार. जाने के बाद उन्होंने देखा कि घुटनों के. नीचे वह जो उनका हैंड हेल्ड मेटल डिटक्टर. है वह घुटनों के नीचे नहीं वो चेक कर रहे.
हैं। तो चुपचाप चला गया। फिर जहां मुलाकात. की जाती है जो एरिया होता है वहां इसने. जूते का फीता बांधने के बहाने होलस्टर से. वो पिस्तल निकाल के और अपनी काले रंग की. जैकेट में डाल ली। फिर वो अपनी मुलाकात के. समय में वह मुलाकातियों का जो स्थान होता. है जो कैदियों की और उनके परिजनों से. मुलाकात कराई जाती है। वहां यूनुस अंसारी. आ गया। नजदीक जाके इसने तीन राउंड फायर. किया। एक राउंड उसके कंधे पर लगी। बाकी दो.
मिस हो गई। जेल के भीतर और फिर उसके बाद. भागना तो बिल्कुल नामुमकिन है। गार्ड्स ने. वहां इसको पकड़ लिया। आज भी वहां की जेलों. में है। मैंने. सारे लड़के जो हिंदू लड़के हैं दाऊद के. लिए क्यों काम करते रहे? नहीं यह दाऊद के लिए कहां काम? यूनुस. अंसारी दाऊद के लिए काम कर रहा था। उनको. मारना था। चुन चुन के मारा। उनको मारा चुन. के।. ओके।. हां।. लेकिन जैसे मैं पढ़ रहा था दाऊद के लिए।. दाऊद का फाइनेंस मैनेजर शरद शेट्टी।. शरद शेट्टी था। देखिए शरद तो मुसलमान के. नाम पर अलग हो गया था।. देखिए लेकिन फाइनेंस पैसा ऐसी चीज है ना.
जो किसी को किसी से अलग नहीं होने देती।. शरद शेट्टी कौन था? शरद शेट्टी इनका फाइनेंस है।. और दाऊद को कैसे मिला शरद शेट्टी? और सर. ये मूल रूप से तो हिंदुस्तान का ही रहने. वाला था। मुंबई आया कारोबार के सिलसिले. में. वही 90 के दशक में. 90 के दशक में ये सब 90 के दशक में हुआ।. मुंबई आया कारोबार में तेज था। इसकी. फाइनेंसिंग का काम बहुत अच्छा था। वहां. लोकल पैसा इकट्ठा करके उसकी सब हिसाब. किताब रखना शरद शेट्टी के पास हुआ। फिर. दुबई चला गया। दुबई में ये सब हिसाब किताब. उनका उसको तो इन लोगों ने ऐसे मरवाया था।.
वहां इंडिया हाउस है। इंडिया हाउस से ये. शाम को निकल रहा था। वो था और उसका एक गनर. था बहुत पुराना नेपाली गनर था कोई इन. दोनों को 20ों गोली मारी इन लोगों ने. इंडिया क्लब के ठीक सामने. किसने मरवाई थी. ये ये छोटा राजन ने मरवाई थी क्योंकि शरद. शेट्टी ने ही छोटा राजन की लोकेशन जब ये. वहां मारा गया था बैंकॉक में गोली पड़ी थी. जिसमें वो वर्मा जो इसका था वो और उसकी.
पत्नी मारे गए थे और यह कूद गया था. गोलियां इसको भी लगी थी लेकिन यह अस्पताल. की छत से बगल वाली छत पे कूद गया था। चोट. लग गई थी। महीनों अस्पताल में रहा। फिर. अस्पताल से भाग गया था। तो शरद शेट्टी ने. ही इसकी लोकेशन बताई थी। भाई ओरिजिनली तो. सब एक ही थे ना ये. ये अलग-अलग तो थे नहीं। सब एक ही थे।. तो शरद शेट्टी के पीछे ये तब से पड़ा रहा।. और फिर इंडिया क्लब के ठीक बाहर इसको. मारा। भागने लगे और फिर मौके पर पकड़े गए।.
और ये जो बबलू श्रीवास्तव है. जी। यह लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाला. लड़का यह दाऊद के पास कब गया था और यह फिर. देश का सबसे बड़ा किडनैपिंग किंग दाऊद ने. बनवाया या अलग से बनाया? दाऊद ने बनवाया।. देखिए वैसे तो ये शुरू में इनका जब इसने. यहां शुरू किया था दिमागी आदमी था। राजू. भटनागर का साथ मिल गया तो ये. अपने दिमाग से शुरू में छोटी-मोटी. किडनैपिंग यहां की।. फिर ये नेपाल चला गया। नेपाल में मैंने वो. इंसिडेंट बताया था कि उस इंसिडेंट के बाद. इसको दाऊद इब्राहिम ने दुबई बुलवा लिया।.
फिर यह बड़े लोगों से वसूली करने के लिए. बहुत बड़ी-बड़ी किडनैपिंग इसने मुंबई में. की है। एलडी व्यास की किडनैपिंग की है और. सब मैंने एक-एक किडनैपिंग की भी. गौतम बडा की अडानी की भी किडनैपिंग इसने. की है। अरे एक आदमी की थोड़ी की है इसने।. मतलब किडनैपिंग्स का तो इसने. इसका इसको तो आज भी सब मानते हैं कि इससे. ज्यादा बड़ा किडनैपिंग का बादशाह कोई नहीं. है। आज की भी तारीख में. भारत में.
भारत में तो. किसके साथ में किडनैप किया इसने. हैं मैं आपको बता रहा हूं इसमें मैंने. दिया था कितने इतने लोगों की जगदीश मोती. रमानी की किडनैपिंग की इसने गौतम अडानी की. किडनैपिंग के बाद उसके बाद पुणे में सागर. लटका के एक बहुत बड़े व्यापारी थे उनकी. किडनैपिंग की बल्कि उनको मार भी दिया पता. लग सतीश शेट्टी की किडनैपिंग की इसने. मुंबई में और. किडनैपिंग का तो इसने ने जितनी ताबड़तोड़. गौतम मडनी की मैंने एक एलडी व्यास बहुत.
बड़े लक्ष्मीकांत दिनेश व्यास हुआ करते. थे। मुंबई के बड़े जमीनों के कारोबारी थे।. ये इनकी किडनैपिंग की।. तो ये सब लोगों को. सर पब्लिक के मन में सवाल आएगा सर कि एक. आदमी जो नैनी जेल में बंद है।. हां।. वो पूरे देश में किडनैपिंग काम कैसे चला. रहा है? ऐसे लॉरेंस का भी चलता है। जेल. में बंद है।. भाई तब भी मरवा रहा है।. ऐसा है भाई तब भी ये सवाल उठता था। आज भी. ये सवाल उठता है।. तो पुलिस वाले बेईमान होते हैं कि नेता.
बेईमान होते हैं कि दोनों बेईमानी मिलके. करते हैं।. जब दोनों मिल जाए जब दोनों मिल जाए तो. बेईमानी अपने चरम पर होती है।. तो इसमें तो फिर पुलिस बेईमान होगी ना।. बिना पुलिस की बीमारी के नैनी जेल में. कैसे संभव है कि एक आदमी अपहरण करवा रहा. है।. देखिए नैनी जेल में जब इनकी किडनैपिंग. एसडी पूनवानी की किडनैपिंग कोलकाता में. हुई. हम. तो फिर इस पूरे मामले को उसी गंभीरता से. देखा गया कि सब जेल के भीतर से कैसे कोई. कर रहा है क्योंकि हम लोगों ने जो रिकॉर्ड. की थी इनकी कन्वर्सेशन वो सीबीआई कोलकाता.
ऑपरेशन में वो सीबीआई को दी गई और सीबीआई. से इसकी इन्वेस्टिगेशन कराई गई कि कैसे. जेल के भीतर ये फोन का इस्तेमाल कर रहा. है। उसी के बाद से उत्तर प्रदेश की जेलों. में जैमर लगाए गए। उसी घटना के बाद से. सीबीआई ने इसको इन्वेस्टिगेट किया था और. उसमें बहुत ढेर सारे लोग जेल भी गए। वहां. के जेल के जो अधिकारी थे और उनके खिलाफ. चार्जशीट भी लगी।. हम. जिनजिन लोगों ने अलऊ कराया था वहां पे या. जिन-जिन का सीबीआई इन्वेस्टिगेशन में नाम. आया उन सबके खिलाफ चार्जशीट गई। सस्पेंड.
किए गए वो. हम. और उसके जेल के बड़े पदाधिकारी सस्पेंड. हुए थे इस मामले में। बबलू को भी दाऊद. इब्राहिम ने सिंगापुर से गिरफ्तार करवाया. था।. हां, बबलू को उसने. क्योंकि उनके फाइनेंससेस को उठा रहा था।. ये. उनके फाइनेंससेस को उठा रहा था। एक-एक. करके ऐसे लोग देखिए जब अदावट हुई तो कोई. बहुत फर्क नहीं पड़ा दाऊद के ऊपर। तो इन. लोगों ने बैठ के कहा कि जब तक उसको पैसा. यहां से मिलता रहेगा उस पे क्या फर्क. पड़ेगा? देने वाले दे रहे हैं। तो. इन्होंने टारगेट किया कि कौन-कौन क्योंकि. पैसा वसूल के देने वाले यही लोग थे। छोटा. राजन और बबलू श्रीवास्तव और जो ये पूरा.
गैंग था यही लोग पैसा पहले वसूल के और. उसको बॉस को दे दिया करते थे दाऊद को तो. इनको पता था कि कौन-कौन खासकर जो जितने. ऑपरेशंस ये सी शोर पे करते हैं जहां पे. इनका वो है बंदरगाह हैं. वहां जो जोज लोग पैसा दिया करते थे उनको. सबको टारगेट किया इन्होंने. पहले फोन से समझाया जैसे फजलुर रहमान ने. गौतम अडनी को फोन किया कई बार कि उसको. पैसा देना बंद कर तो वह जो है देशद्रोही. है और देश के खिलाफ इस तरह की बात की.
होगी। अच्छा यह व्यवसाई थे। इनको लगा कि. भाई हमारा माल वहां से दुबई से चलता है।. यहां तक आता है। अगर यह साथ नहीं देगा तो. यह चल ही नहीं पाएगा 20 जगह। भाई दाऊद ने. एक कस्टम अफसर को 1977 बैच का एक. कस्टम अफसर था एलडी अरोरा।. और आज की तारीख में कस्टम की हिस्ट्री में. सबसे बड़ी रिकवरी उसने की थी। वो दाऊद का. माल था जो ये एलएसडी और उसकी गोलियां उस.
समय बहुत चलती थी नशे की। उससे बड़ी. रिकवरी आज तक नहीं हुई है। तो एलडी अरोरा. ने इनकम टैक्स वो कस्टम्स का कमिश्नर था।. मुंबई में पोस्टेड था। तो उसको सबका. घाईघाई पता था कि कहां-कहां कैसे ये ऑपरेट. करते हैं। कौन-कौन इनको पैसा देता है अपना. ऑपरेशन चलाने के लिए। फिर बबलू से कह के. बबलू ने उनसे बात की चंद्रास्वामी से इसको. रातोंरात वहां से हटवा दिया और इलाहाबाद. पोस्ट करा दिया। लेकिन बहुत ईमानदार और. बहुत जिसको कहते हैं कि बड़ा अच्छा.
अधिकारी माना जाता था कस्टम्स में।. तो वहां के जो लोकल लोग थे जो उस चेन में. थे जैसे इनकी टीम रही होगी चार से 10 लोग. रहे होंगे उसमें जिनसे ये काम कराते थे।. तो जो टीम के लोग थे वो उनका काम नहीं. रुका क्योंकि यहां फोन से ये उनसे संपर्क. करते थे कि सर बताइए कैसे है तो यह फोन से. बताया करता था और उस बड़े बरामदगी के बाद. भी बड़ी बरामदगी दाऊद दाऊद को चोट लगने.
लगी तो दाऊद ने बबलू से कहा कि यह अगर. कहीं भी इसको देश के कोने में कहीं भी हम. ट्रांसफर करा देंगे ये फोन से हमको तंग. करता रहेगा क्योंकि पूरा डिपार्टमेंट इसको. मानता बहुत है और इसकी की इतनी अच्छी पकड़. है कि यह सूचना उनको दे देगा और हम बर्बाद. हो जाएंगे। तो इसको मरवा दो। तो इलाहाबाद. में जब वो मॉर्निंग वॉक करके जा रहे. थेरोरा तो उन पर भी 20सों गोलियां मारी।. सैनी था और बबलू श्रीवास्तव था और इसके.
साथ एक वो सिख लड़का था। मोना सिख लड़का. था। हैप्पी। इन तीनों ने मिलके उसे वहां. गोली मार दी। इसके मरने बाद मरने के बाद. देश भर के कस्टम ऑफिस बंद हो गए। सब. स्ट्राइक पर चले गए। इसका इतना नाम था. एलेरोरा का। मैं जब बरेली में बरेली के. रहने वाले थे। जब मैं बरेली में पोस्टेड. था तो मैं इनके परिजनों से मिलने गया था।. एक दिन वो लोग आए बताया क्योंकि ये बबलू.
श्रीवास्तव पर मैंने उस समय एसटीएफ में भी. और एटीएस में भी अह गैंग सबको असाइन किए. जाते हैं उन पे काम करने के लिए। तो बबलू. श्रीवास्तव गेम पर बहुत काम किया था. मैंने। तो. तब सरकार ने ये इसकी इन्वेस्टिगेशन सीबीआई. को दी थी और सीबीआई ने इसमें खूब ठोक बचा. के अच्छी इन्वेस्टिगेशन की थी और उसी में. एलडी अरोरा में ही ये सिंगापुर से. एक्सडीट हो के हिंदुस्तान लाया गया था और.
जब हम लोगों का कोलकाता ऑपरेशन हुआ था. जिसने काम किया दाऊद से फंसाया. हां. दाऊद नहीं भाई जब वो दिक्कत ये हुई नहीं. कि 93 से पहले सब सब एक ही थे। एक ही थैली. के चट्टे बट्टे थे। जब कम्युनल लाइन पे. डिवीजन हुआ तब एक दूसरे के दुश्मन. तो फिर जितने ये हिंदू डॉन है. हां. चाहे लॉरेंस की बात कर लें या आपके बबलू. की बात कर लें बबलू श्रीवास्तव छोटा राजन. हम. ये अपने आप को देशभक्त क्यों कहते हैं? दिक्कत ये है इनके पास कोई ऑप्शन नहीं है।. इन सबको सजा हो चुकी है।.
छोटा राजन को भी सजा हो चुकी है। सुभाष. ठाकुर को भी सजा हो चुकी है। बबलू. श्रीवास्तव को भी सजा हो चुकी है। ये सब. जितने यहां पकड़े गए सबके खिलाफ 20 50. देखिए मूल रूप से तो अपराधी हैं। ये आप. कैसे भी अपने आप को देशभक्त कहें लेकिन है. तो अपराधी है। सबको सजा हो गई है।. अच्छा नेटवर्क के जानने वाले यहां. हिंदुस्तान में यही लोग हैं जो इस पूरे. नेटवर्क को ऑपरेट करते थे। तो तो इनको यह. लगा कि अच्छा इन्हें सुविधाएं भी चाहिए. जेल में। हम.
जैसे भाई हमको अपना खाना लाने की इजाजत. हो।. हमको फोन चलाने की इजाजत हो। इजाजत का. मतलब नंबर दो कोई हमें मना ना करे। हम. चाहे फोन तो और सब फोन चला रहे हैं भीतर।. आप भी जानते हो और हम भी जानते हैं। तो इस. तरह की छोटी-छोटी गर्मियों के दिन में. कूलर रखवा लेंगे।. सब जेल अधिकारियों. की मिलीभगत से ही होता होगा और नहीं है।. लेकिन यह अपने काम कराने या अपनी सूचना. देने के बदले में तो ये साहब फलाना गलत कर.
रहा है। इसकी ये लोकेशन है। फोन अगर साथ. में रहेगा तो ये सब कहां इनके कांटेक्ट. नहीं है। पाकिस्तान में इनके कांटेक्ट. हैं। नेपाल में इनके कांटेक्ट हैं। दुबई. में इनके क्योंकि पूरा जब ये एक थे तो ये. सब जगह ऑपरेट करते थे।. तो यह. पुलिस की जो हमारी इंटर नेशनल एजेंसीज हैं. उनमें किसी को जरूरत पड़ती है। जैसे अभी. आपने कहा कि वहां के गृह मंत्री ने प्रेस. कॉन्फ्रेंस की और बाकायदे नाम बताया.
कि ये ये लोग हैं जो आईबी के लोग हैं और. ये लोग हमारे यहां ये जो अज्ञात हमलावरों. की हत्याएं हैं वो कर रहे हैं। बाकायदे. गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में है।. नेट पे उन्होंने जो जितने नाम प्रेस को. बताए थे नेट पे उपलब्ध है सब वो।. तो यार यह भारत के जो अंडरवर वर्ल्ड के. लोग थे जो इस समय जेलों में हैं वह. पाकिस्तान अज्ञात बनकर जाते हैं। जो हां. धुरंधर में. धरंधर में जो देखना है यह देखिए धुर यह. हमने किताब 12 फरवरी को हिंदी युग्म.
पब्लिकेशन को सबमिट कर दी थी छपने के लिए. और धुरंधर उसके बाद आई तो मैंने हर उस. आदमी का इसमें नाम लिखा है जो कि यहां से. जो लोग पाकिस्तानियों को पैसा देके. पाकिस्तान की हालत तो बहुत अच्छी नहीं है।. वहां जो इन लोगों के साथ के थे उन्हें. पैसा चाहिए।. चार लोग अभी इनके जो दुबई से पैसा वहां. ट्रांसफर करते थे वो दुबई के उनका नाम. लिखा है मैंने. तो धुरंधर में जो अननोन गन मैन दिखा रहे.
थे. जी वो ये सब इन्हीं के आदमी. कौन बताइए हमको थोड़ा किताब से तो. किसमें. धुरंधर में जो अननोन गनमैन दिखा रहे थे जो. पाकिस्तान में जाके लोगों को मार रहे थे. आतंकवादियों को या जिनको जिनको मारा था ना. ये मैं आपको बताता हूं. अच्छा हमको लगा ये देशभक्त लोग होते थे ये. सब तो अंडरवर्ड के. सब अंडरवर के हैं साहब लेकिन इनके पास. क्या ऑप्शन है अगर ये एजेंसी की मदद ना. करें, मना कर दें। तो जेलों में जो हो. सकता है उससे भी ज्यादा प्रताड़ना इनकी. होगी। तो इसलिए यह जो है.
देखिए यह कहते हैं. दिनांक 23 जून 2021 की सुबह 119 पर लाहौर. के जौहर टाउन में लश्कर तैबा के सरगना. हाफिज सईद के घर पर बम विस्फोट हुआ। उसका. इन्होंने वो लिखा है कि पाकिस्तानी गृह. मंत्री राणा सनाउल्लाह और पंजाब काउंटर. टेररिज्म डिपार्टमेंट के आईजी इमरान महमूद. ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस हमले का. मास्टरमाइंड बबलू श्रीवास्तव को बताया। यह. नेट पर है। फिर उसके बाद 5 नवंबर 2023 को.
पाक अधिकृत कश्मीर के नियंत्रण रेखा के. पास एक सिरकटी लाश मिली। जिसकी पहचान. ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद के रूप. में हुई। वह आईएसआई पोषित आतंकवादी था।. जिसे 2018 में सुजमा आर्मी कैंप पर हमले. का सह मास्टरमाइंड माना गया था। इस तरह से. सूची इसकी बहुत लंबी है इसमें। कराची के. मौलाना रहीमुल्ला तारीख जिन्हें 12 नवंबर. 2023 को कराची के औरंगी टाउन में अज्ञात.
हमलावरों ने गोली मार दी।. इसमें जो लोग हैं अभी बंद वहां पर. दुबई की जेलों में वह सब इसी के आदमी उस. लिस्ट में उन्होंने जो राणा साहब थे जो. गृह मंत्री थे उन्होंने. अब जैसे अ. शरीफ उर्फ छोटा दाऊद सगीर अहमद रियाज भटकल. अनवर खान ये सब पाकिस्तान में मारे गए और. अज्ञात व्यक्तियों ने मारा इसे जिसको.
अच्छा इन लोगों को यह है कि यह अदालत में. जाते हैं या जेल में लोग इनसे मिलाई करने. जाते हैं। तो यह अपनी खबरें भी छपवाते. रहते हैं कि ऐसा ना हो कि हम काम भी कर. रहे हैं। कोई जाने भी ना ये सब मीडिया में. अपनी-अपनी. हमारा आपका पॉडकास्ट हो सकता है बबलू. श्रीवास्तव भी देखे और कराची में बैठ के. दाऊद भी देखे।. हां बिल्कुल देखे। देख ही रहे हैं। क्यों. नहीं देखेंगे? देखेंगे और ये ओपन सीक्रेट है। कहीं ऐसा. नहीं है कि इसमें किसी को कोई कंफ्यूजन. है।. वो तो वहां ये कहते हैं साहब कि. हिंदुस्तान के.
की आईबी कराती है। वहां तो हर चीज में. आईबी का नाम लिया जाता है। आप जितना भी. वहां कुछ भी होता है तो सिलेंडर भी अगर. उनके यहां घर में फट जाए तो वो आईबी का ही. नाम लेते हैं। इन सभी हत्याओं के बारे में. भी उन्होंने कहा ऐसा लेकिन भारत सरकार ने. इसका पुरजोर खंडन किया है कि नहीं साहब. हमसे कोई मतलब नहीं है। हम क्यों कराएंगे? तो बबलू श्रीवास्तव का नाम फिर क्यों लिया. पाकिस्तान? बबलू देखिए बबलू की अधावड़. दाऊद से है।. ये जितने मारे गए हैं ये कहीं ना कहीं.
दाऊद इब्राहिम के कृपा पात्र रहे हैं। इन. लोगों को जो जो जानकारी है कि साहब ये. दाऊद से इनका यह कहना था बबलू का भी यह. कहना था और बाकी भी लोगों का कहना है कि. हम जब तक दाऊद को बर्बाद नहीं कर देंगे. खत्म नहीं कर देंगे। इसका यह भी मानना है. कि अब उसका नेटवर्क मुंबई से खत्म हो गया।. नेपाल से खत्म हो गया। अब झूठ सच करके वह. बरगला रहा है। बोले आईएसआई ऐसे लोगों को. मरवा देती है जो उनके काम के नहीं रह जाते.
और या तो आईएसआई किसी दिन मरवा ही देगी. इनको या फिर इन्हें पिंजरे से आजाद कर. देगी फिर कोई भी ठीक कर. धुरंधर वाली बात कर दी आपने।. धुरंधर में था ना कि जो मजा तड़पा कर. जिंदा रखने में है वो मारने में कहां है? मारने में कहां है? तो ये ये इनकी. भारत सरकार क्या. दाऊद को मार नहीं पाई या मारना चाहती नहीं. या मौका नहीं मिला. नहीं भारत सरकार देखिए ऐसा ना सरकार को.
बीच में नहीं लाना चाहिए. मतलब सरकार मतलब मैं भारत की इंटेलिजेंस. हां देखिए ऐसा है. इंडियन इंटेलिजेंस. दो अटेम्प्ट इन लोगों ने. दो लोगों. इन्होंने दाऊद को मारने का अटेम्प्ट किया. इस पूरे ग्रुप ने इसी में इनको यह शंका हो. गई कि मिर् दिलशाद पहली बार जब इन्होंने. मारने की कोशिश की तो उसकी की बेटी की डेथ. हुई थी दाऊद के और तब यह पता था कि उसको. सुपुर्द खाक करने फला कब्रिस्तान में उसके. घर के पास ही कहीं था। वहां आएगा जरूर। यह.
सब यहां से भागे जिसमें यह बंटी पांडे था।. ये सब लोग थे। ये भागे वहां पर रैकी की।. AK-47 एक कंबल के नीचे छिपा के ले गए और. बिल्कुल सेट था कि आएगा यहां पे यहीं मार. लेंगे उसे। लेकिन वो घर से निकला ही नहीं।. तो यह ढूंढा गया कि आखिर ये सूचना कैसे. मिल गई।. तो पता लगा किक क्योंकि नेपाल से इन लोगों. ने उसका फर्जी पासपोर्ट बनवाया था इन. तीनों चारों का श्रीलंका से नेपाल और. नेपाल से फिर वो गए थे पाकिस्तान तो मिल.
दिलशाद बेग ने ये सूचना उसको लीक की होगी. क्योंकि इतनी स्पेसिफिक सूचना कि तुम यहां. सुपुरदे खाक करने आओगे मारे जाओगे ये तो. कोई आपस का ही आदमी बता सकता है वो फेल हो. गया दोबारा फिर इन्होंने कोशिश की. लेकिन वो भी फेल हो गया फिर उसके बाद तो. खैर वो क्लिप्टन रोड में जहां वो वो रहता. है वो तो बिल्कुल एकदम फोर्टेस बना रखा है. वहां वहां की आर्मी ने और उसने तो वहां तो. दिक्कत तो है. बट हमारे इतने सारे रॉ के लोग पाकिस्तान. जैसे पाकिस्तान दावा करता है कि.
वहां एक्टिव भी हैं और क्योंकि डोबाल साहब. खुद बताएं कि हम भी वहां रहे. हां हां. होंगे जरूर होंगे कभी और होना भी चाहिए. को मारने के लिए. कोशिश की होगी हो सकता है ये जो दो बार. अटेम्प्ट हुआ है इसमें एजेंसीज ने मदद की. हो हम तो ना कह सकते हैं ना हम इसके लिए. अधिकृत हैं और ना हमें हमें तो वह बात पता. है जो यह जो हमारे मुलजिमान जब उनसे. इंटेरोगेट हुआ था तो उनसे जो बात पता है. वह हम बता रहे हैं।. ठीक बात. बाल ठाकरे ने मुंबई अंडरवर को बदल दिया. था।.
बदल दिया 100% बदल दिया। इन्होंने उस समय. जब ये साउथ इंडियंस वहां रूल कर रहे थे. और हाजी मस्तान से और. हाजी मस्तान स्मगलिंग करीम लाला पठान गैंग. वर्धराजजन दक्षिण नेटवर्क. हां ये सब ये सब दक्षिण भारतीय थे तो. इन्होंने कहा कि साहब यह हमारे लोगों पे. जाति कर रहे हैं। हमारे लोगों को मार रहे. हैं। पैसे की वसूली कर रहे हैं। हफ्ता. वसूली कर रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं होगा।. फिर उन्होंने वही नारा दिया और जैसे ही. नारा दिया उस पे ये जो पठान गैंग था ये.
इसके ऊपर ये लोग हावी हो गए दाऊद के लोग. और फिर आपस में झगड़ा शुरू हुआ और आपको. ध्यान हो कि इसीलिए अरुण गावली को. उन्होंने खड़ा किया. हम. बालासाब ठाकरे साहब ने कि उनके पास अगर. दाऊद है तो हमारे पास भी अरुण गावली है।. बाकायदे मंच पे कहा था उन्होंने और गावली. उनका आदमी माना जाता है और गावली ने ही वो. पारकर जो इसका बहनोई था दाऊद का हसीना.
उसकी हसीना पारकर का हस्बैंड उसको मार. डाला था और फिर उसका बदला लेने के लिए. उसके मुलजिम दो जे हॉस्पिटल में थे वहां. पे इन लोगों ने जाके उनको मारने के लिए एक. को मार पाए एक भाग गया लेकिन उसमें दो. पुलिस वालों की भी मौत हो गई. यूपी से जो गए थे. हां जो यूपी से गए थे. विधायक जी. विधायक जी बृजेश थे उसमें जे हॉस्पिटल में. लिखा पढ़ी में को एक्यूज़्ड है वो. दाऊद के. साथ वो लोग वो को एक्यूज़्ड है ये सब लोग.
गए थे वहां पे मारा लेकिन पुलिस वाले मर. गए तो फिर पुलिस वालों ने वहां पर ठोकना. शुरू किया इनको और इस बात का उसने अफसोस. भी किया कि यार क्यों इसने अच्छा वो काम. दिया गया था छोटा राजन को. आप तो एसटीएफ पे रहे बृजेश सिंह का हाथ था. वहां पे. किस में. वो जे जे हॉस्पिटल कांड ने पूरा. नहीं हमारे एसटीएफ में आने के पहले का. लेकिन लिखा पढ़ी में है वो आप तो एफआईआर. में हां हां बिलकुल बिलकुल बिलकुल बिलकुल. 100सदी. दाऊद के लिए. हां दाऊद के लिए एक एफआईआर में को.
एक्यूज़्ड है दाऊद और बृजेश सिंह इसमें. शंका किस बात की है. कमाल की दुनिया है. दुनिया है है तो है. कमाल है कमाल में कोई कमी नहीं. एक देश का गद्दार है एक विधायक बन गए. फिर ये सर्वाइव कैसे कर गए? अब यह बहुत दिनों तक यह वहां रहे. भुवनेश्वर में नाम बदल कर था कि मर गए. शायद।. हां बीच में कई बार हल्ला हुआ। इन्हीं के. लोग हल्ला मचाते रहे। मर गया मर गया मर.
गया।. लेकिन ये जो मुख्तार अंसारी जो मरा जो मर. चुका है। ये बराबर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस. में कहता था कि वो बिल्कुल नहीं मरा है वो. बिल्कुल जिंदा है। बराबर और जिस समय यह. हल्ला हुआ था कि मर गया है मर गया। उस समय. जब गाजीपुर में उस पर अटैक हुआ था तो. इन्हीं लोगों को नामजद कराया था। अरे. बृजेश सिंह के ऊपर से पिक्चर आई है वो. रक्तांचल. हां रक्तांचल आई है।. अभी हमने उसका पॉडकास्ट भी किया है।. हम. जो उसके एक्टर है।. कौन था उसमें ऐसा? क्रांति झा जो. अच्छा क्रांति झा है। हां.
जो उसमें बृजेश सिंह का किरदार निभाए हैं।. हम. अब है तो बस दुनिया एक जगह से शुरू होती. फिर लौट के वहीं पर आ जाती है।. और उसमें बिल्कुल इमेज वाइट वाश कर दी गई. है।. हालांकि शुरुआत में एक मुख्तार ने सर गलत. किया था बृजेश सिंह के साथ। हां शुरुआत. देखिए ये बृजेश सिंह जिन परिस्थितियों में. ये शायद बहुत पढ़े लिखे व्यक्ति थे. बहुत पढ़े बीएससी के आदमी थे. लेकिन परिवार में अगर हत्या होगी तो फिर. तो आदमी निकलेगा ही नहीं जैसे इसमें एक. जिक्र और किया है मैंने बृजभूषण शरण सिंह. का. राजू भटनागर और ये.
बबलू श्रीवास्तव ये अपने असलहे उनके यहां. रखते थे और फिर राजू श्रीवास्तव जब यह जेल. चला गया कुछ दिन के लिए किसी मामले में. बबलू श्रीवास्तव तो सारे असलहे उनके के. यहां से लेकर राजू भटनागर चला गया। तो आप. उस समय की परिस्थिति देखिए। देखिए है कोई. नेता ऐसा जो कि कैमरे पे आके कहे कि हां. मैंने गोली मारी।. है कोई. बृजभूषण. बृजभूषण की बात कह रहा हूं मैंने। इसमें. लिखा है। तो उस समय जो उनके साथ उनका भाई.
मारा गया था और वो सामंतवादी प्रवृत्तियों. से लड़ रहे थे। वहां लोकल जो सामंतवाद आप. तो वहीं उसी जिले के रहने वाले हैं। अब. मैं वहां एसपी पोस्ट रहा हूं। जब मैं पूछ. रहा हूं तो मैंने नहीं सुना कि इतने स्कूल. इस आदमी ने वहां खुलवाए हैं। शिक्षा जो. वहां बिल्कुल. जिसको जिसका कोई मतलब नहीं था उस गोंडा. में वहां हमारे ख्याल से 30-40 स्कूल. खुलवाए हैं। और आसपास के जिलों को म मिला. दिया जाए तो 52 55 और फिर भी आप उनसे.
पूछिए तो बाकी नेताओं की तरह नहीं है कि. नहीं साहब अभी तो सब गलत लगा दिया गया था. हमारे ऊपर। वह कहते हैं कि हां हमने मारा. था। है कोई ऐसा माई लाल कहने वाला कैमरे. पर. तो जो परिस्थिति उस समय उसके साथ थी. परिस्थिति का पैदा किया हुआ जो व्यक्ति था. तो उसने तमाम लोगों से सहयोग मांगा होगा. तो बृजेश सिंह को भी अपनी स्थिति का मानते. हैं. नहीं शुरुआत में तो वो परिस्थिति उसके साथ. थी ब्रिज. शुरू मजबूरी के बाद में मजा आने लगा. हां फिर मजा आने लगा शुरू में मजबूरी थी. बाद में मजा आने लगा.
ये हुआ था. कमाल है. सरकार में तय होता है ना सर कौन बचेगा कौन. जाएगा. कौन जाएगा कौन बचेगा मैंने आपको बताया ना. कि 95 में जैसे ही महाराष्ट्र में बीजेपी. शिवसेना की सरकार आई वैसे ही दाऊद के लोग. मतलब लगातार अच्छा उस समय तक 93 वाली घटना. हो चुकी थी 9495 में एकदम इन लोगों में. लकीर खींच गई थी और इसी बीच सरकार बदल गई. 300 एनकाउंटर.
हम. हां इसी बीच में. जैसे यूपी में मुख्तार और ये लोग बचे रहे. हां बचे रहे. पिछली सरकारों में. और जब सरकार आई तो सब मिट्टी में गए सब. मिट्टी में मिला दिए गए. और उससे पहले ये बृजेश सिंह और बाकी जितने. थे. हां. ये सब गायब थे।. हां सब गायब थे। तो आप वही समझिए ना ये. क्रोनोलॉजी तो मैंने ये बहुत स्पष्ट है. कोई ये ये सब लिखा पढ़ी मैं कि जैसे ही. वहां. खुला खेल फर्रुखाबाद. खुला खेल फर्रूखाबादी. अच्छा दाऊद इब्राहिम की अगर तुलना करें. पुराने मुंबई के डॉन से तो हाजी मस्तान.
करीम लाला वर्दराजजन और दाऊद इनकी. प्रवृत्ति में अंतर क्या था? देखिए. प्रवृत्ति में जैसे वर्दराजजन मुदलियार के. लिए यह कहते लोग कहते थे कि यह अपनी. पंचायत बाहर सड़क के किनारे किसी जगह पर. लगाता था। लोग जाते थे और जो शिकायत करता. है उसकी मदद के लिए इन्हें जो करना पड़ता. था वो करते थे। हाजी मस्तान भी मूल रूप से. स्मगलिंग का काम करता रहा। और फिर जो. रास्ते में आया फिर वो टिका नहीं। दाऊद.
क्रूर बहुत था।. छोटामोटा गिरकट चोरकट टाइप का आदमी शुरू. किया उसने उससे क्राइम शुरू किया इसी बीच. में शिवसेना की एक कॉल आ गई कि इन लोगों. को भगाइए दक्षिण वालों को और अचानक वो ही. रोज़ टू ए प्रोमिनेंस इन अंडरवर जब वो ऊंचा. तो वो क्रूर बहुत था।. कितने. बॉलीवुड के लोगों के ऊपर बम फेंकवाए गए।. कितनों पर गोलियां चलवाई गई। सिर्फ इसलिए. कि तुम्हारी फिल्म रिलीज हुई है। तुमने. दिया क्यों नहीं ₹ करोड़?
ऐसा किसी और ने नहीं किया था. और इतना पैसा इतना पैसा कि फिर लगता था ना. उसको तो लगने लगा कि हम मेरे सामने सब. बौने हैं कोई है ही नहीं है. ये हुआ था. इतना क्रूर था वो कि अपनी सुप्रीमेसी के. लिए भाई ये सब टर्म किस अह गैंग के लिए. कंपनी का इस्तेमाल किया गया है सेवा दाऊद. गैंग के लिए वो कहता था कि हमारी कंपनी है.
और हमारा मैनेजर है छोटा राजन. ना तो हाजी मस्तान के गैंग के लिए कंपनी. कहा गया हाजी मस्तान कंपनी कहा गया कभी. नहीं कहा गया ना वर्धराजजन मुदलियार के. लिए कहा गया. इनके पहले जितने थे किसी ने ये उसने शुरू. किया कि वो अच्छा फिर वही हिसाब से कि भाई. इसमें मराठी भी हो लोकल भी हो हिंदू भी हो. मुस्लिम भी हो ताकि ये और जब यह बात खुली. कि साहब दिल्ली के बम ब्लास्ट में इसका भी.
हाथ हाथ था। टाइगर मेमन का जो कहा गया है. वह कहा ही गया है।. इसका भी हाथ था। तो फिर असलियत सामने आ. गई।. और धमाके अगले दिन फिर ये भाग गया. पाकिस्तान।. फिर उसके बाद भाग गया पाकिस्तान।. और यहीं से शायद राजन को सबूत मिला कि. हां वहीं से नहीं इन लोगों को शक तो उसी. दिन हो गया।. जिस दिन टीवी पे आ रहा था। ये लोग बैठे. हुए थे उसको लोग मुबारकबाद दे रहे थे। भाई. ये सब भी तो घाट घाट का पानी पिए हुए हैं।. इनको शक उसी समय हो गया और कह भी दिया. छोटा राजन ने। मतलब किताब में कॉन्टेक्स्ट. है कि छोटा राजन ने कहीं कहा था कि दाऊद.
पाकिस्तान नहीं जा सकता।. हां कहीं और चला जाएगा।. कहीं और चला जाएगा पाकिस्तान नहीं। मैं तो. ये मान रहा था कि ये भी देशभक्त आदमी है।. ये भी देशभक्त आदमी है। हम लोगों को साथ. लेके चल रहा है। हम लोग तो हिंदू हैं।. हम. हमारे ऊपर ब्लाइंड फेथ करता है। हमसे कभी. हिसाब किताब नहीं लेता। हमने जो दे दिया. वो दे दिया। ऐसा वो नहीं कर सकता। वो. पाकिस्तान नहीं जा सकता।. कपास और और जब वह गया और जब वह गया उसी. दिन से इन लोगों का सबका पासपोर्ट जमा कर. लिया था और जब ये गए हैं तो इनको ऐसा लग.
रहा था कि अभी यहीं मरवा देगा लोगों से।. छोटा राजन के पांच आदमियों को जिन लोगों. ने सहायता की थी वहां. उसमें जे हॉस्पिटल में जिसमें दो सिपाही. मर गए थे। हम. तो इसका यह कहना था कि ये छोटा राजन के. आदमी थे। जल्दबाजी में छोटा शकील और. सौत्या ने इनसे यह काम करा लिया तो उसको. बुलवाया कि हम इनकी पार्टी कराएंगे और फिर. कहा इनको नेपाल ले जाओ.
और मैंने नाम दिए हैं इसमें हम. कि वो उनमें से उनको नेपाल में रुकवाया और. जहां रुकवाया था वहीं सौत्या ने सबका नाम. पूछ के और यह पूछ के कि तुम्हारे बास कौन. है? जिन लोगों ने कहा कि हमारा वास तो भाई. देखो छोटा राजन ही है। उन्हें गोली मार. दी। उसके बाद यह छोटा राजन ढूंढता रहा कि. लौंडे. ये जो कहानी है काठमांडू में पांच हत्या. करके कैसे बनवाई? हां वीडियो कैसेट बनवाई और फिर छोटा राजन. को भेजी गई। तो उस दिन से तो कंफर्म हो.
गया और जो आखिरी कील थी वो गुलशन कुमार के. मर्डर पे. ठुक गई।. लेकिन उसके पहले भी इसी जो वीडियो में. चेहरा नहीं था। लेकिन कहते हैं कि राजन ने. शायद आवाज पहचान ली। आवाज पहचान ली थी कि. सौत्या की आवाज है।. ये भी आपको सब सारी जगह. कौन था? वही इसका जो आप शुरू में पूछ रहे थे कि. हिंदू लोग थे ये उसके साथ कैसे थे? शरद शेट्टी और सौत्या कैसे उनके साथ थे? तो ये उनके वही पर्सनल टाइप के लोग थे।. ये अलग नहीं हुआ।. हां। ये अलग नहीं हुआ। इससे जो डेयरिंग.
काम थे सौत्या से वो काम कराए जाते थे।. सौत्या को भी मारा इसने फिर छोटा राजा ने।. 5 अगस्त 1995 को दुबई में ठोक दिया।. दुबई में मार दिया।. और सोत्या मैनहोल में गिरे थे।. हां. सौत्या से जानकारी निकाली थी इन लोगों ने? हां निकाल ली थी सब सब जानकारी। देखिए ये. मैं कह तो रहा हूं ना कि अगर हम आप दोस्त. हैं।. हम. अगर हम आप दोस्त हैं, हम राज हैं, हम. प्याला हैं।. हम. आपकी कौन सी कमी हमसे छिपेगी और हमारी कौन.
सी कमी आपसे छिपेगी।. तो कुछ राज आप भी बता दो। जैसे आपने भी. खूब एनकाउंटर किया है।. जी। किया तो है।. नहीं नहीं हम यह बता रहे हैं कि एक दूसरे. के राज तो यह जानते ही थे।. हम जान गए। हां।. जैसे आपने भी एनकाउंटर किया यूपीएसटीएफ. में थे।. पहला तो ऑफिशियल बड़ा एनकाउंटर आप ही. लोगों ने किया।. जी बिल्कुल किया है।. एक थ्योरी आती है कि श्री प्रकाश शुक्ला. में कल्याण सिंह वाली जो थ्योरी दी गई थी।. मुख्यमंत्री को मारने वाला है। वो फर्जी. थ्योरी थी। वो यूपी एसटीएफ ने इसलिए फैलाई. थी ताकि पब्लिक में कोई सिंपैथी ना हो और. शिव प्रकाश शुक्ला को ठोकने का क्लियर.
मौका मिल जाए। नहीं नहीं नहीं देखिए आपके. लिए मैंने पिछली बार भी आपने पूछा था. स्वर्गीय अजय राज शर्मा साहब जो डीजी. सीआरपीएफ होके रिटायर हुए और हम लोगों के. एसटीएफ के फाउंडर मेंबर वह भी थे।. उन्होंने एक किताब लिखी बाइटिंग द बुलेट।. देखिए जो आप समझ रहे हैं जब तक यह किताब. नहीं आई थी। अजय राज शर्मा साहब जब तक. रिटायर नहीं हुए थे। उन्होंने कभी अपने. मुंह से नहीं कहा। कभी नहीं कहा। कि. एक्चुअली हुआ क्या था? क्यों बनी थी यह? लेकिन बाइटिंग द बुलेट में उन्होंने वह.
सारा सीक्वेंस लिखा है हम. कि सीतापुर में किसी उसमें तैनात थे. ट्रेनिंग स्कूल में कैसे मुख्यमंत्री जी. ने उन्हें बुलाया। किस बेचैनी में वो कमरे. में टहल रहे थे। क्या-क्या उनसे कहा और. कहा कि अच्छे लड़कों को एक इकट्ठा करके. सिर्फ यही काम करो और तब स्टेप बनाई गई।. आप बैटिंग मैं कहता हूं. श्री प्रकाश शुक्ला ने उत्पात मचा रखा है।. हत्या कर रखा था। हां लखनऊ में हजरतगंज. में गोली मारी चौराहा जाके मारा सब की औसत. बात है। मुख्यमंत्री वाली थ्योरी.
मुख्यमंत्री वाली ही थ्योरी के लिए मैं कह. रहा हूं कि अजय राज शर्मा साहब की किताब. बाइटिंग द बुलेट आप पढ़ें. जिसमें बकौल अजय राज शर्मा साहब. मुख्यमंत्री जी ने उनसे कहा कि अब तो हद. हो गई इसने मेरे भी मारने की सुपारी ले ली. है। उसमें वह यह भी लिखते हैं कि साहब इस. मेरी इतनी हिम्मत मुख्यमंत्री से पूछने की. नहीं हुई कि यह सुपारी ली किसने है? आप पढ़िए उसमें वही एक ऑफिशियल हल्ला तो.
बहुत दिन से था। उसका जो लोग मजाक भी. उड़ाते थे कि एसटीएफ वाले अपने से कर रहे. हैं ताकि जो है हाइप हो जाए ताकि ये जल्दी. हम ढूंढे और जल्दी इसको मार लें। तो ऐसा. नहीं था।. हम सब लोग भी यही जानते थे कि पता नहीं यह. बात कहां से आई है। हमें कोई इसका सोर्स. नहीं मिला था।. कल्याण सिंह किस जुबान से. यह कल्याण सिंह की जुबान का सोर्स है और. जो उन्होंने अपनी किताब में लिखा है आफ्टर. ही हट।. और कल्याण सिंह ने भी कहीं बताया नहीं कि. उन्हें धमकी कहां से आई? हां कहां से आई? उन्होंने भी.
आईबी ने दिया या किसने बताया उनको? ये कभी नहीं बताया।. तो हो सकता है कल्याण जी ने भी थोड़ा. अब हो सकता है देखिए पॉलिटिकल लोगों का ये. जो. हटाना हो तो. हमाराकि कोई पॉलिटिकल बेंड ऑफ़ माइंड है।. ठीक है। वो भी अपराधी था। उसमें कोई बहुत. बड़ी बात नहीं है। अपराधी अपराधी होता है।. चाहे मुख्तार हो चाहे जय प्रकाश. कोई भी हो. लेकिन एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का धंधा कैसे. चलता है? जैसे हम अभी पढ़ रहे थे. प्रदीप शर्मा के नाम 101 एनकाउंटर. एनकाउंटर हैं।. भोसले के नाम 85 एनकाउंटर. सर 101 एनकाउंटर एनकाउंटर में शतक लगा. दिया शर्मा जी।. अब आप सोचिए ना मैंने बताया ये शतक कैसे.
पूरे हुए और ये एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का. नाम आया कहां से? हम्।. जब इस अंडरल वर्ल्ड में दोनों का झगड़ा. शुरू हुआ तो यह शुरू तो हो गया अह 92 के. अह बाद 93 के बाद जो 92 में आपका वह ढांचा. गिराया गया और उसके बाद फिर जो जो बवाल. हुआ जैसे इन लोगों ने कराया वहां पे 12. मार्च 93 को तो 9495 में तो यह तय हो गया. कि ये दाऊद इब्राहिम के लोगों ने या जो भी. टाइगर मेमन के लोगों ने ये किया है। तो.
ध्रुवीकरण तो वहां नीचे शुरू हो गया था।. एक दूसरे को मारना शुरू कर दिया था। लेकिन. 95 में जैसे चेंज ऑफ़ गार्ड हुआ. पॉलिटिशियंस का वहां सरकार हुई तो फिर ये. सब आप अगर इनका डिटेल निकाल के देख लीजिए. तो सब ये 94 से 98 के बीच के एनकाउंटर. हैं।. अच्छा आपने किताब में नदीम श्रवण का भी. जिक्र किया गुलशन किया।. हमने समीर अंजान का एक इंटरव्यू किया था।. तो उन्होंने अभी हमसे बताया कि. बहुत बढ़िया आपका पॉडकास्ट था। मैंने देखा. अभी दोबारा भी किया मैंने। अच्छा.
तो उस दुबारे वाले में उन्होंने बताया कि. नदीम. को इसलिए शामिल कर लिया गया उस लिस्ट में. क्योंकि एक नाम चाहिए था दाऊद का नाम था. अबू सलीम का नाम था ये सब बाहर वाले नाम. थे एक नाम चाहिए था जो नैरेटिव बदल दे और. क्योंकि नदीम मुसलमान थे नदीम ओवरवोकल थे. इसलिए उनका नाम डाल दिया गया टिप्स के. मालिक का भी नाम डाला गया था जो बाद में. छूट गए तुरानी साहब नदीम भारत आकर क्योंकि. चार्ज फेस नहीं किए इसलिए वो उनके ऊपर ये.
आक्षेप लगा रहा। जबकि लंदन में उनके ऊपर. जो आरोप लगे थे वो सारे बेबुनियाद हो गए।. अब आपने किताब लिखी है उसमें गुलशन कुमार. हत्याकांड का जिक्र भी है।. कहीं दूर-दूर तक आप इस रिसर्च के दौरान. जिसे हम प्रथम दृष्ट्या कहते हैं।. आपको लगा कि नदीम का हाथ था गुलशन कुमार. हत्याकांड में? देखिए नदीम ही अकेले ऐसे थे जो उससे नाराज. थे।. कारण यह था कि एक तो पहले गुलशन कुमार. उनके उस. एल्बम को लेने को तैयार नहीं थे। उनका.
कहना था वॉइस ठीक नहीं है। ये मैंने लिखा. है इसमें।. हाय अजनबी।. हां हाय अजनबी। वॉइस ठीक नहीं है। यह. चलेगी नहीं। हम इसे नहीं लेंगे। खैर जोर. दबाव डाला गया तो उन्होंने रिकॉर्ड तो कर. लिया।. नदीम का आरोप यह था कि इन्होंने जानबूझ के. इसको उतना प्रचारित प्रसारित नहीं किया।. जितना सबका करते हैं और इसकी वजह से यह. कैसेट हमारा यह हमारा जो एल्बम है यह नहीं. चला। यह जानबूझ के इन्होंने ऐसा किया है.
और इनसे हमें ढाई करोड़ या ₹ करोड़ वापस. चाहिए। कुछ इस तरह की बात उस समय आई थी और. यह बात एक जगह नहीं ये 50 जगह है। एक दो. जगह नहीं है। 50ों जगह है यह बात कि नदीम. जो है उससे नाराज थे सिर्फ इसलिए गुलशन. कुमार से कि और इसीलिए नदीम ने गुलशन. कुमार ने सुरक्षा मांगी थी और कल्याण सिंह. जी ने उन्हें दो सिपाही दिए थे सुरक्षा के. लिए। कल्याण सिंह यूपी. हां भाई यहां यहां जो उनका कारोबार था.
यहां नोएडा में जहां पर ये था ना इनका जो. कैसेट की कंपनी थी नोएडा में थी वो तो. यहां आते जाते रहते थे तो इन्होंने फिर. मुख्यमंत्री जी से मिलकर कहा कि साहब ऐसे. ऐसे है और मुझे इस तरह की धमकी मिली है और. हमें सुरक्षा यहां नहीं देंगे कि तो वहां. तो हमें ज्यादा दिक्कत नहीं लेकिन यहां. हमारे ऊपर अटैक कर सकते हैं यह लोग तो. इनको सुरक्षा में दो सिपाही दिए गए और वह. सिपाही लेके वो मुंबई भी जाते थे और जहां. कहीं जाते थे अपने साथ सुरक्षा लेके और.
इसी घटना के बाद से वो सुरक्षा ले चलते. थे। उस दिन यह हुआ कि जब वो यहां से गए तो. वो सुरक्षाकर्मी उनके साथ नहीं गए।. उन्होंने मना कर दिया कि साहब प्रदेश के. बाहर हम नहीं जाएंगे।. और उसी बार अकेले वह नहीं गए हुए थे और. उसी बार उनकी हत्या हो गई। इसके लिए भी. तमाम उसमें डिटेल मैंने लिखा है।. किसके-किस के ऊपर इसका आरोप हुआ कि. किसने-किसने वो सुरक्षा देने से मना किया.
था। उस किताब में लिखा है मैंने सब. जो आरोप लगे थे सही गलत तो हम नहीं. सलीम ने कहा था इंडियन एक्सप्रेस के किसी. जर्नलिस्ट से कुछ बड़ा होने वाला है।. हां कुछ बड़ा होने वाला है।. बट फिर नदीम का जिक्र क्यों रहा? क्योंकि. जब मैं समीर जी से बात कर रहा था वो कहे. हम लोग तो उन्हें डैडी जी कहते थे। हम. तुम्हारे यहां सनम मूवी जो है वो भी आने. वाली थी। उल्टा नदीम को नुकसान हुआ कि. पूरा करियर डेंट हो गया, जोड़ी टूट गई।. नहीं नहीं भाई उसका कारण बताया तो मैंने. कि वो उसका ये कहना था कि ये जो एल्बम.
पहले तो ये शूट नहीं कर रहे थे कि साहब. आवाज ठीक नहीं है इसमें।. जब उन्होंने शूट किया तो जैसे बाकी टी. सीरीज में वो जिसको वो कहते हैं ना कि. हां उनका सिंगर्स का तो इशू चलता था।. अनुराधा पडवाल अलका याग्निक का भी बीच में. से था। कि हमारा वो इतना वो उसका प्रचार. प्रसार उतना हमारा नहीं कर रहे हैं और इस. वजह से यह डाउन हो गया। हमारे में कोई कमी. नहीं।. नदीम का कहां पर वो जिक्र आ रहा है कि. यहां से शक हो रहा है कि नदीम होंगे इसके. पीछे।. नहीं उसी से उन्हीं की नाराजगी थी। भाई जब.
जो आदमी मारा गया वो अपने मारे जाने के. पहले ये कह रहा है कि हमको ये धमका रहे. हैं और हमें ये मार डालेंगे। तो और किस पे. आप यकीन करेंगे? जो मारा गया वो मरने के पहले से ये कह रहा. है।. पैसों के लिए हुई थी ना अबू सलीम। हां हां. पैसे पैसे मांगे थे उन्होंने पैसे देने से. मना कर दिया था. और फिर शूटर आया उसने कहा बहुत कर ली पूजा. हां देखिए इसमें भी एक वो है एक इसमें पेच. ये था कि अबू सलेम का मारा जाना ये. टर्निंग पॉइंट था जो धर्म के आधार पे जो.
अबू सलीम का मारा जाना. अरे सॉरी गुलशन कुमार का मारा जाना ये. टर्निंग पॉइंट था जो इस पे इन दोनों. पक्षों के बीच तनाव का यह अल्टीमेट था. हुआ यह था कि उसमें जो तीन लोग पुलिस ने. पकड़े. हम. तो इन लोगों ने जो ये सब बाकी लोग थे जैसे. जिसमें छोटा राजन एंड कंपनी थी पूरी बबलू. श्रीवास्तव थी इन लोगों ने कहा नहीं साहब. ये पुलिस ने अपनी थ्योरी बनाई है. हम. हम इसका पता करेंगे किसने मारा है तो अबू.
सलेम का सबसे पक्का गुर्गा वो सबसे पक्का. आदमी था अरुण इसका बबलू श्रीवास्तव का. विक्रम वाही. विक्रम वाही यही लखनऊ का हजरतगंज का रहने. वाला. जिसकी लाश पर रक्षा. हां तो इन लोगों ने पता कर लिया उसने कहा. पुलिस अपना काम करती है भैया उसका काम है. वहां तो हम कहने जाएंगे नहीं लेकिन इसको. साले को हम छोड़ेंगे नहीं. हम हम इसने जो है. गोली मारी किसने थी गुलशन कुमार जी को. गुलशन कुमार को इन लोगों का यह कहना है कि.
विक्रम वाही ने मारी थी. विक्रम वाही. वाही ने मारी थी और बाकी तीन लोग जो उसमें. गए हैं ये साथ रहे होंगे या पुलिस ने जो. भी भाई पुलिस ने किया है तो कुछ ना कुछ तो. उसमें सब्सटेंसिव किया होगा ना उसमें कुछ. जिसको कहते हैं एविडेंस लगाए होंगे कुछ. उसमें चीजें रखी होंगी तभी तो किया होगा. इनका मानना था कि विक्रम भाई ने मारा है. तो दबाव बनाया गया कि विक्रम वाही को ले. आओ सब लोगों ने कहा कि ये तुम ही ला सकते. हो इसको ले आओ क्योंकि वो बहुत दिन तक.
उनके साथ रहा मिर्जा दिलशाद बेग के साथ तो. उनको भी इन्हीं लोगों ने मरवाया. हां तो उनसे कहा गया कि भाई आप जो है उसको. बुलवाइए पहले वो आ नहीं रहा था तो खैर. दिलशाद बेग ने उसको. घेरघार के कैसे भी नेपाल बुलवा लिया। बबलू. यह जिद्द करता रहा कि इसको जिंदा हमें दो।. हमें चीजें पूछनी है। हम. लेकिन मिर् दिलशाद बेग ने कहा कि भाई इसके. पास बहुत सी जानकारी है। इसे जिंदा नहीं. देंगे। कहीं किसी एजेंसी के हाथ पड़ गया. तो हम लोग सब मुसीबत में आ जाएंगे। उसने. कहा कोई मुसीबिंद मारना हमको भी है लेकिन.
हम जानना चाहते हैं। उसने कहा कि हमने सब. रिकॉर्ड कर लिया है। उसकी सारी बातें वो. हम तुमको भिजवा देंगे। उसके लोग लेके आए. और यही सोनौली बॉर्डर पे यहां पे इनके. बबलू के लोगों को देने से पहले उसे गोली. मार दी। उसके बाद उसके चार टुकड़े किए। दो. टुकड़े नेपाल में मिले।. विक्रमवाही के. विक्रमवाही के और दो टुकड़े इधर. हिंदुस्तान में मिले।. केले के पत्ते में लपेट कर. हां। और सर का हिस्सा केले के पत्ते में. लपेट के रक्षासूत्र बांध दिया था। जो लोग.
इनके साथ इनके यहां गए थे। यूके बंसल साहब. आईजी गोरखपुर थे उस समय। तो जब यह लाश. मिली उधर की इधर की तो उसको जोड़ा गया. जोड़ के एक फोटो तैयार की गई और तब तक. बबलू तो बबलू है इसने अपना किसी से कहलवा. दिया कि विक्रम भाई है. तो और कहां का है साहब लखनऊ का है. तो आप ये कह रहे हो कि गुलशन कुमार. हत्याकांड का बदला हिंदू डॉन लोगों ने ले. लिया था. अबू सलीम की टीम से.
हां अबू सलीम की टीम से. विक्रमवाही को मार के. टुकड़ों में काटकर. और फिर रक्षा. हां सिर वाले हिस्से को एक केले के पत्ते. में रक्षासूत्र में बांध के उसको छोड़ा. रक्षा सूत्र क्यों बांधे. वही कि तुमने इसको मारा है ये हिंदू है और. हम हम इसका बदला लेंगे. विक्रम वाहि भी तो हिंदू था. नहीं था लेकिन मरवाया तो उसने था ना या तो. अबू सलेम ने मरवाया था या दाऊद ने दाऊद. हमेशा कहता है कि हमने नहीं मरवाया. और अबू सलेम फिर उसके बाद से कहने लगा कि. साहब मेरा कोई लेना देना नहीं है। पैसों.
का झगड़ा हमारा जरूर था। मैंने दाऊद भाई. को बताया था। यह उनका काम है।. लेकिन लग ये रहा है क्योंकि यह शागिर्द. विक्रम भाई उसी का था और उसके पूरे जो. जितनी बातचीत की थी मिर्जा दिलशाद बेग के. लोगों ने उससे उसका कैसे उन लोगों ने. मिलशाद बेग कौन है? मिर्जा दिलशाद बेग ये एक सांसद हुआ करते. थे। नेपाल के इनको इनके घर के सामने फरीद. तनाशा और यही. ये जो बबलू श्रीवास्तव के साथ का वो सरदार. लड़का जिसका नाम मैंने अभी बताया है.
इन लोगों ने मारा था इसे गोली मार दी थी. इनका नेपाल में दबदबा था. दबदबा था साहब सांसद रहा है वहां पे और ये. उतना ही विश्वास पात्र दाऊद का था जितना. दाऊद के एंटी गैंग का था. क्योंकि मिर्जा दिलशाद बेग का नाम कई सारी. हिंदी फिल्मों में आता रहता है। आता रहता. है तो ये क्या करते थे हिंदुस्तान में. हथियार भेजते थे ये असल में नहीं देखिए ये. नोटोोरियस काहे हुआ देश भर में जहां कहीं. बड़ी और नई गाड़ियां चोरी होती थी वो सब.
मिर्जा दिलशाद बेग के कैंपस में जाकर खड़ी. हो जाती थी दिल्ली से उठी तो मुंबई से उठी. तो कोलकाता से उठी तो सेट रूट था उस समय. कोई एक्सप्रेसवे इस रूट पर नहीं था कि. वहां आपकी फोटो खींचे बहुत ज्यादा ज्यादा. से ज्यादा इसमें दो चार पुलिस की चौकियां. जो वो भी वेस्ट बंगाल और उसके बीच में. जहां कहीं नंबर वंबंबर नोट होते थे. तो वो सब गाड़ियां वहीं पहुंच जाती थी और. जिसकी गाड़ी उठी है उसको खबर हो जाती थी.
कि तुम्हारी गाड़ियां हैं तो वो जाके पैसा. देके वहां से छुड़ा के ले आता था और. मिर्जा दिलशाद बेग किसी की सुनता नहीं था. एक उसका जो उसके मारे जाने के पीछे एक. कारण और है मैंने किताब में उसका जिक्र. किया है। लखनऊ के एडीएम सिटी साहब थे।. उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए फिएट. गाड़ी खरीदी। नई ब्रांड न्यू गाड़ी जो. उनके घर के सामने खड़ी हुई थी। एक दिन. अचानक वो गाड़ी वहां से चोरी हो गई। सब.
आदमी दौड़ाए कि भाई यह नई गाड़ी और एडीएम. सिटी की गाड़ी तो बहुत वैसी बात थी। उस. समय जीपीएस यूपीएस का कोई मतलब दूर-दूर तक. का मतलब ही नहीं था। मोबाइल फोन भी नहीं. थे। तो साहब वो चोरी हो गई। फिर वही है. जैसे घूम टहल के खबर आती है कि दिलशाद बेग. के यहां है तो इन्होंने अपने आदमी यहां से. भेजे मुकदमा लिखाया था पुलिस की एक टीम. भेजी वहां अपने साथ के लोग जो गोरखपुर के. और वहां के होंगे उनसे बातचीत की तो उसने.
कहा साहब पैसा लगेगा इसका तो. साला हमसे भी पैसा लोगे तो. हां हमसे भी और पैसा दिया उन्होंने गाड़ी. ले आए. इस बात से बहुत आहत थे और उनके मन में. पुलिस के लिए हमेशा खराब खराब बात रहती. थी। पैसा दिया ले आया। अब नेपाल में यहां. की पुलिस क्या करे? अब था तो इस तरह का. आदमी था वो।. फिर इसका कनेक्शन कैसे उसके मारे आने में? किसके? नहीं ऐसा हुआ ना कि पुलिस इससे. एकदम त्राहिमाम त्राहिमाम हो चुकी थी। कि.
जिसकी देखो घर से गाड़ी गायब हो गई।. एक्सपर्ट वो हुआ करते थे। बस यहां से. निकली नहीं कि दिलशाद बेग के गैराज में. पहुंची। ओपन फील्ड में गैराज थी। उसमें. गाड़ियां लगी रहती थी। आपको जो लेना हो. उसमें से ले। पैसा दीजिए ले जाइए. तो यहां पर भी हैं. कितना पैसा अंदाजन. अंदाजन आधे से थोड़ा ज्यादा. अगर मान लिया आज की तारीख में. ₹ लाख गाड़ी. ₹ लाख की गाड़ी है तो आप ₹1 लाख में ₹1.
लाख में ले सकते हैं। इससे कम नहीं. और गाड़ियां सब नई गई हैं। दिल्ली से तो. इतनी गाड़ियां गई हैं कि बस यह तो जीपीएस. लगने के बाद थोड़ी सी राहत हुई और फिर. मिर् जशाद बेग के मरने के बाद वह जो उनका. वो फार्म हाउस था जहां वो गाड़ियां सब. खत्म हो गया डिस्ट्रॉय हो गया।. अब इतने रूट तक नहीं तो फिर यहां के. डीजीपी साहब ने एक सेल्स टैक्स कमिश्नर थे. जो. जिसकी वो बात बहुत मानता था और शायद उसके.
साथ पढ़े थे और जब वो जेल से वहां से जेल. तोड़ के भाग के आए थे चार्ल्स शुभराज के. साथ ये लोग तो शुरू में उन्हीं के यहां. रुके थे। लेकिन उनको अखबार से पता लग गया. कि ये लोग जेल ब्रेक करके भागे हैं। तब. उन्होंने इसको उनके यहां भेज दिया था।. हमारे यहां का एक और बड़ा आदमी था। मैंने. लिखा है उसमें। हम. गुंडा था उसके यहां भेज दिया था रहने के. लिए हम. तो उनसे कहा गया. कि भाई यह इसने आफत कर दी है इसका कुछ. इंतजाम करो और वही आदमी उसने बबलू से भी.
कहा बबलू पहले से भी तड़े हुए थे कि ये. सूचनाएं लीक करता है पाकिस्तान मतलब दाऊद. के भी उतने ही संपर्क में है. रिस्की हो गया है तब इन्होंने अर्चना. शर्मा को वहां भेजा बबलू श्रीवास्तव ने एक. बढ़िया महंगा सा फ्लैट दिलवाया और फिर. मिर् दिलशाद बेग वजह से वो फंसाने की. कोशिश करते हैं। वो कोशिश की। यह सारे लोग. वहां रहते थे। पीसीओ ताई था। इशारा यह था. कि जब ये भीतर आएगा तो वो नॉनवेज कुछ बहुत.
अच्छा बनाती थी या इसको ल्योर कर रही थी. कि तुम आ जाओ तुम्हें हम ये चीज खिलाएं।. तो दो एक बार तो आया नीचे से चला गया। जो. भी देखा सुना हो उसने। अगली बार वो आया. इसने सब वो बना रखा था और ऊपर खिड़की से. झांक के नीचे इशारा कर दिया फरीद तनाशा को. कि आ गया है ये फिर उसको पता नहीं क्या. हुआ उसने कहा कि अरे वो फला काम था भूल. गया हूं मैं वो खाना खाया नहीं वो फौरन. गाड़ी में बैठा और निकल गया यह जो उसको. मारने के लिए ऊपर चढ़े थे यह उसी गाड़ी के.
पीछे पीछे मोटरसाइकिल से गए और जब यह अपने. घर में घुस रहा था तभी इसे गोली मार दी. एनडीTV के मालिक प्रधानमंत्री मोदी के. तथाकथित दोस्त गौतम अडानी. जी. 1 जनवरी 1998. जी. बबलू श्रीवास्तव गैंग इनकम टैक्स ऑफिसर. बनकर किडनैप कर लेती है।. कर लिया.
अडानी को कैसे किडनैप कर सकता है? भाई यह. बात है 98 की। 1 जनवरी 98 को। ना आप गौतम. अडानी को जानते होंगे ना हम जानते होंगे।. कितनी आज किसी आज लोगों को पता नहीं होगा।. नहीं पता होगा।. अडानी किडनैपिंग हो गई।. नहीं लेकिन सारी इंफॉर्मेशन आपको मिल. जाएगी। अब तो देखिए ऐसा है इलेक्ट्रॉनिक. युग में आप इंफॉर्मेशन कोई सप्रेस कर ले. जाए, निकाल ले जाए, तोड़ दे, दबा दे यह. संभव नहीं है। लिखने से तो कोई नहीं मना. कर सकता ना। हुआ कुछ यूं कि यह गौतम अडानी.
साहब उस समय यह क्योंकि पोर्ट से ऑपरेट. करते थे। आज भी इनके इनका ऑपरेशन सब पोर्ट. से ही चलता है। तमाम आरोप भी लगते हैं।. पोर्ट से ये आया वो आया। तो पोर्ट के. ऑपरेशन के लिए सब लोग दाऊद को पैसा देते. थे। क्योंकि उसका पूरा नेटवर्क था मुंबई।. अडानी भी देते थे दाऊद को पैसा।. अडानी भी दाऊद को पैसा देते थे। मैंने. पूरी डिटेल इसमें लिखी है।. 90 के दशक।. 90 के दशक में। अडानी भी पैसा उनको देते. थे। इस बीच में इनका अलगाव हो गया। जब.
इनका अलगाव हो गया तो फजलुर रहमान एक. अपराधी था जो जिसका गुरु था जमील और वो. नेपाल में मारा गया था और तिहाड़ जेल में. ही फजलू की मुलाकात. बबलू श्रीवास्तव से हुई थी और यह उनका. शागिर्द हो गया था। फजलुर रहमान ने. टेलीफोन से कहा कि सेठ यह पैसा तुम जो दे. रहे हो हर महीने उनको पता था कितना अमाउंट. वो देते हैं यह मत दो क्योंकि वो लोग देश. के खिलाफ कर रहे हैं जो भी जिस तरह से भी.
वो कन्विंस करना चाहते थे फजलुर रहमान ने. कई बार फोन किया नहीं माने वो. हम. और इनको पता लग जाता था कि फला आदमी आया. था पैसा ले गया भाई एक ही थैली के चट्टे. बटे थे उनको तो पता लग ही जाएगा फिर मना. किया फिर बबलू ने कहा कि भाई मैं अब जैसे. आप कह रहे हैं बबलू श्रीवास्तव उतना इतना. बड़ा उसको अपराधी ज्यादा जानते हैं कि. कितना बड़ा अपराधी है। नहीं माने तो 1. जनवरी को सुबह ये. गए वहां पर तो पूछा सब अपने-अपने पास.
कार्ड रखे हुए थे इनकम टैक्स का कि गौतम. कहां है? सेठ कहां है? तो उन्होंने बताया. कि ये करुणावती क्लब गए हैं। पास में कोई. अहमदाबाद में होगा करुणावती क्लब।. तो उन्होंने कहा ठीक है सेठ से कह देना कल. 10:00 बजे ऑफिस आ जाएंगे कह के निकले फजलू. था चार पांच लोग थे उसमें नाम है सबके. क्योंकि मुकदमा लिखा गया था. तो रास्ते में उन्होंने कहा कि देखो यह. टेलीफोन कर दिए होंगे उसको कि इनकम टैक्स.
आएगा वो तुरंत ही निकलेगा कागज पत्र. दुरुस्त करने के लिए देखो साले कितने. शार्प थे कि अभी यह वहां से कागज पत्र. दुरुस्त करने के लिए ऑफिस ही पहुंचेगा और. 10:00 बजे आएगा भी तो हो सकता है रास्ते. में कहीं मिल है और बिल्कुल एग्जैक्टली. वही हुआ। यह लोग जब करणावती क्लब के पास. पहुंच ही रहे थे तब तक वह वहां से निकल. रहे थे। बस आगे करके हाथ में आई कार्ड. हिलाया उन्होंने गाड़ी में से हाथ लगा. इसने फट किनारे कर दिया। दो लोग थे। एक.
कोई पटेल था इनके साथ इनका कोई मित्र था।. हम. देखिए कहीं होगा नाम मैं भूल रहा हूं. उसका। उसमें दो लोग थे। शांति लाल पटेल. हम. उनके साथ शांति लाल पटेल थे। हो गया।. उन्होंने किनारे कर दिया। उन्होंने कहा कि. गाड़ी में बैठिए इनकम टैक्स ऑफिस चलना है. अब। तो उन्होंने कहा साहब कल तक का आपने. टाइम दिया था। और फिर व्यापारी आदमी तो हर. तरह की बात करता है ना कि भाई ऐसे कर लो. ले दे के कर लो। हर हर कोई ऐसे ही करता. है। जो भी बात हुई थोड़ी देर में पिस्तल. लगा के इन्होंने.
बता दिया कि शांत होके और. अंदर से अड़ाने के लिए. हां सर नीचे करके बैठ जाओ। आगे मत देखना।. ले गए फ्लैट में जहां पहले से तय था और. अर्चना शर्मा भी थी उसमें और फिर उसके बाद. तयत शुरू हुआ हम. इनसे इन्होंने. 5 करोड़ की 98 में 5 करोड़ की डिमांड की. थी या 15 करोड़ की डिमांड की थी तो उसने. कहा भाई देखो इतना पैसा तो हम बाजार से. नहीं उठा पाएंगे.
इसमें टाइम लगेगा हम बैंक से हमारे पास. फला बैंक से हम इतना पैसा दे सकते हैं बात. 5 करोड़ पे आके टिकी। उन्होंने कहा हम 5. करोड़ दे सकते हैं।. तो उन्होंने कहा भाई इसमें कोई बोली लेकिन. 5 करोड़ भी बात हमें किसी से बात करनी. पड़ेगी मार्केट में तभी ये 5 करोड़ मिल. पाएंगे।. तो उन्होंने कहा ठीक है तुम बात करो हम. स्पीकर फोन पर बात करो। अब उसने पता नहीं. क्या उसमें.
पहले से तय होगा क्या होगा। बहरहाल इसको. ₹1.5 करोड़ तो उन्होंने शुक्रवार की शाम. को दिलवा दिया। बाकी के लिए उसने कहा कि. साहब देखिए शनिवार इतवार. हां बैंक हॉलिडे रहता है। बैंकॉक के फला. फलाना बैंक में है। पैसा अब आपको सोमवार. को ही मिलेगा।. तो बबलू ने कहा कि नहीं नहीं हम खुलवा के. बैंक से देंगे। बताओ कहां-कहां तुम्हारा. है? उन्होंने कहा सब फला फला जगह है। बबलू. श्रीवास्तव ने ट्राई भी किया लेकिन वो. पैसा मिला नहीं।. उन्होंने कहा नहीं सब मंडे को ही मिलेगा।.
तो इन लोगों ने फिर कहा फोन करके फजलू था. उसके साथ मेलो कि तुम फोन से बात करो. मार्केट से उठाओ नहीं साला मारे जाओगे तो. उन्होंने कहा इतना पैसा कोई दे नहीं सकता. है मार्केट में इतना पैसा नहीं होगा और. कुछ भी हो संडे से पहले पुलिस भी आ जाएगी. हम. तो इन्होंने कहा तुमको कैसे पता तुम तो. हमारे यहां हो यहां पुलिस कभी नहीं आएगी. और एग्जैक्टली वही हुआ संडे के पहले पुलिस. ढूंढती हुई आ गई ये लोग उसको वहीं छोड़ के. भाग गए सर सरखेज थाना था। सरखेज थाने में.
ये मुकदमा लिखवाया। पहले ये मुकदमा नहीं. लिखवा रहे थे गौतम अडणी साहब। तो वो. फिर उनके मित्रों ने सब लोगों ने सलाह दी. कि बाद में दिक्कत हो सकती है तो इन्होंने. एक मुकदमा लिखवाया।. लेकिन अपरण का मुकदमा लड़ने कभी अदालत. नहीं गए।. कभी अदालत नहीं।. और इसीलिए बाद में ये दोनों पकड़े गए थे।. फजलुर रहमान पकड़ के लाया गया नेपाल से।. बबलू भी पकड़े गए थे।. हां। फजलुर रहमान नॉट बबलू। फजलुर रहमान. नेपाल से पकड़े गए। 98 में तो ये जेल में. ही था बबलू 95 में एक्सट हो के आ गया था.
ये तो 98 में 1 जनवरी 98 की बात है. उसके बाद 2 साल बाद या तीन साल बाद फजल. रहमान पकड़ के आ गया इनको बार-बार. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने समन भेजा ही. नेवर टर्नड अप. और 2018 में अदालत ने इन दोनों को बरी कर. दिया. दोनों को बरी कर दिया गए ही नहीं और 2018. तक तो बहुत बड़े आदमी हो चुके. डर के मारे या मामला क्या बढ़ाएं अब हमें. तो क्या बताएं व्यापारी सामान्य रूप से.
नहीं करता है कि साहब कहां हम बवाल करेंगे. हम व्यापारी आदमी. हालांकि बबलू के गुरु जी थे लक्ष्मी. नारायण. लक्ष्मी नारायण उन्होंने. लक्ष्मी नारायण ने ही किडनैपिंग शुरू कराई. और ये ज्ञान दिया था कि छोटे घर का बच्चा. उठाओगे शोर मचेगा और बड़ा सेट उठाओगे तो. इनकम टैक्स के डर से वो पुलिस के पास नहीं. जाएगा. नहीं जाएगा. लक्ष्मीारायण आज भी है और लक्ष्मी नारायण. किडनैपिंग का गुरु माना जाता है पूरे देश. के किडनैपर्स कम से कम हिंदी पट्टी के में. जितने किडनैपर्स वर्ष हुए हैं। जैसे. चार्ल्स शोभराज के साथ वो तिहाड़ में था.
तो चार शोभराज भी उसकी बातें सुन के उसे. गुरु कहता था कि गुरु मान गए तुमको हम. और यह ज्ञान उसने तब दिया था. राजू भटनागर को क्योंकि राजू भटनागर भी. उसका शिष्य था और बबलू श्रीवास्तव भी उसके. शिष्य थे हम. तो राजू भटनागर को उसने ज्ञान दिया था कि. उसने 5 करोड़ से शुरू किया 2 करोड़ से हम. और 25000 पे वह मान गया. 25,000 या 2 करोड़ से शुरू किया 25 500.
25000 में बात किया तो उसने कहा कि गुरु. जी देखिए इतने पे शुरू किया उन्होंने कहा. देखो तुम ये मध्यम वर्गीय परिवार का आदमी. एक तो तुम्हें 2 करोड़ कभी देगा नहीं पहला. और दूसरे यह सब काम मत किया करो जब भी. उठाओ तो इस इस तरह के आदमी को उठाओ यह. हमेशा इनकम टैक्स के डर के मारे कभी पुलिस. में नहीं जाएंगे और तुम्हारा पैसा जितना. है वह पूरा पैसा पेमेंट करेगा. यही हुआ भी. और यही हुआ भी. इसमें एक हुआ झांसी में इसने एक किडनैपिंग. की राजू भटनागर ने दो भाइयों का कोई झगड़ा.
था और उसमें एक भाई ने दूसरे भाई को उठाने. के लिए राजू भटनागर को पैसा दिया।. ₹3 करोड़।. ₹3 करोड़। ये उसके बच्चे को जब खींच. खिलाने लगे तो हल्ला मचाया बच्चे ने। बगल. में एक पड़ोसी थे। वो. उन्होंने दरवाजा खोला और बाहर देखा कि. राजू भटनागर. बच्चे को खींच रहा है। वो खड़े हो गए।. उन्होंने कहा ये तुमने हमारा भी नाम खराब. किया। स्कूल का नाम खराब किया और अपने.
पिता की बेइज्जती की। फट उसने लड़का वहीं. छोड़ा। गुरु जी के पैर छुए। यह पब्लिश्ड. वो है। गुरु जी के पैर छुए कि आइंदा से. ऐसी गलती नहीं करूंगा मैं। और बच्चे. उन्होंने कहा क्यों ले जा रहे थे इसको? को. तो उसने कहा हमको बगल वाले ने इनके भाई ने. दिया था पैसा. उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया उनके भाई के. खिलाफ और मुकदमा चला. पैसा लौटाया. हां पैसा लौटा ₹ करोड़. पूरा तीन 3 करोड़ नहीं लिया था उसने उस. काम के लिए लिया था सब पैसा लौटा.
एक ये भी था कि अखबार में हीरो का. विज्ञापन देकर ये लोग किडनैप करते थे. हां अरे ये तो बड़ा गजब है। ये पीपी पांडे. जो है. उत्तरांचल उत्तराखंड का रहने वाला है।. प्रकाश पांडे नाम है इसका और. इसको बंटी पांडे के नाम से भी जाना जाता. है।. तो इसने सबसे पहले अपने आप को इस्टैब्लिश. करने के लिए उस समय ईस्ट वेस्ट एयरज करके. एयरवेज करके हिंदुस्तान की पहली प्राइवेट.
एयरलाइन शुरू हुई थी। जिसको जिसके मालिक. थे थकीद्दीन वाहिद।. थकीउद्दीन वाहिद ने जब यह शुरू किया तो. सारे लोगों ने कहा कि यह दाऊद का पैसा. थकीउद्दीन वाहिद ने इस ईस्ट वेस्ट. एयरलाइंस में लगाया है। हम. थकीद्दीन वाहिद से इसने पैसा मांगने की. कोशिश की। छोटा राजन के छोटे गुरुों ने।. यह नया-नया अपने आप को साबित करने के लिए. छोटा राजन के पास आया था। पीपी पांडे तो.
उसने कहा इससे इतना पैसा वसूल लो या मार. दो। वो ये जानता था यह कभी कर नहीं पाएगा।. इसने क्या किया कि दो आदमी ये किए। एक. वर्मा जो उसके साथ था छोटा राजन के साथ. मौके पर मारा गया था. वो और उसकी पत्नी. तो ये दोनों गए तड़ लिए पहले कि कहां से. आता जाता है बड़ी भीड़भाड़ वाली जगह में. एक लाल मारुति से गए और वो उस समय कौन सी. महंगी गाड़ी थी बुलेट प्रूफ गाड़ी थी उसकी.
इसको पता था बुलेट प्रूफ है तो 30 किलो का. हथौड़ा ले गया था ये लोहे का जब उसमें. ट्रैफिक जाम में गाड़ी वो रुकी यह बोनट पे. चढ़ गया और बोनट पे उसी 30 किलो के हथौड़े. से मार के उसका शीशा तोड़ दिया और फिर. उसमें से पिस्तल डाल के इनको 10 गोलियां. मारी. और उतर के फिर चला गया। नाम हो गया साहब. पीपी पांडे। पीपी पांडे आजकल जेल में बंद. हैं।. उत्तराखंड उधम सिंह नगर जेल में है शायद. और यह जेल में प्रवचन करते हैं। गेरुआ.
वस्त्र पहन के प्रवचन करते हैं। हर चौथे. दिन ये सीजीएम के यहां दरखास्त देते हैं. कि फला जगह जो है फला जिले में हमको. प्रवचन करने जाना है। कृपया अनुमति दी. जाए। आप सर्च करिएगा और इसके अपराध से. पूरा. वो क्या बोलते हैं? उत्तराखंड एक जमाने. में थराया करता था।. इसने जब यह देखा उस समय कि कैसे करना है. तो एक पहले जो अखबारों में विज्ञापन.
निकलते थे वह पीओ बॉक्स के नाम से निकलते. थे। आजकल भी शादीवादी की तो अगर आपको. सूचना भेजनी है तो पीओ बॉक्स नंबर पांच. दैनिक जागरण या टाइम्स ऑफ इंडिया इसमें आप. चिट्ठी भेज दीजिए। तो एक इन्होंने मरकरी. बताया कि मरकरी प्रोडक्शन हाउस है।. हम. उसमें हीरो की जरूरत है हमें। उसमें जो. हीरो का किरदार है उसके लिए लड़कों की. जरूरत है। और फिर उन्होंने बताया कि आप जो. है उसमें फैमिली बैकग्राउंड का भी एक कॉलम.
उसने डाल दिया कि एक फैमिली बैकग्राउंड और. इनका जो है पहले हम इंटरव्यू लेंगे जो. सिलेक्ट होंगे उसके बाद फिर इनका स्क्रीन. टेस्ट कराएंगे। उसके बाद इस फिल्म में हम. इसे ले लेंगे। तो जितने वहां धन कुबेरों. के लड़के थे सब ने अप्लाई कर दिया। तो. उसमें से उन्होंने उन्होंने आदमी या फोटो. देख के नहीं छांटा। हम. उन्होंने देखा कि कौन व्यवसाई जैसे लिखा. किसी ने कि हमारी फला फैक्ट्री है या. हमारे यह ऐसे. खुद ही उन्होंने बता दिया कि मैं मुर्गा. हूं।. हां मैं मुर्गा हूं। मुझे हलाल करिए आप।.
तो वो उन लोगों को छांटा उन्होंने. 20 लोगों को उसमें होटल में बड़े होटल में. फाइव स्टार होटल में।. ताज होटल. ताज होटल में उनको एक कमरा तो इंटरव्यू के. लिए और एक कमरा लोगों को बिठाने के लिए. ताकि खाना पीना ताकि भरोसा रहे और हां. बॉलीवुड में तो आपको वैसे अच्छे सुंदर. देखने भालने वाले लोग मिल जाते हैं। दो. छांट के ले आए टाईवाई लगा के सबको ताकि यह. लगे कि ये डायरेक्टर है और सुंदर-सुंदर.
पर्सनालिटी के अच्छी टाइप बढ़िया लगा के. अच्छे अंग्रेजी बोलने वाले जो एक्स्ट्रा. होते हैं सब जगह मिल जाते हैं। वो दो-तीन. लोगों को बुलवा के उसमें स्थापित कर दिया. और 20ों लोगों का इंटरव्यू कराया और उससे. कह दिया था कि फैमिली बैकग्राउंड पूछना. इससे. तो उस. 20 में से कुछ को उन्होंने छांट लिया और. सबके परिवार वाले बड़ी-बड़ी लंबी-लंबी. गाड़ी लेके होटल के पास वेट कर रहे थे कि. बस लड़का हमारा आएगा हीरो हो जाएगा। उनको.
वहां से उतार के उन्होंने भाई आपका. स्क्रीन टेस्ट होगा। वहां से एक एसी गाड़ी. में बिठाया और वहां से लोखंड वाला ले गए. इतना दूर। अब ये दो घंटा हो गया, चार घंटा. हो गया तो कोई निकला ही नहीं। तो वह कहां. गए, कहां गए? तो ये सब पहले से देखे हुए. थे। जो एग्जिट होता है बाहर वाला वहां बस. लगवाए उसी पर ले चले गए कुछ पता ही नहीं. अभी लोग भागना शुरू किए वहां ले गए वहां. सबसे पहले उनका घड़ी जेवर फलाना ढिकाना जो. जितना पहनने थे सब उतरवा लिया लैंडलाइन. फोन का एक पहले वो चलता था डब्ल्यूएलएल.
कहीं और का हो जाए तो 500 मीटर पर आप उसका. वो हैंडसेट होता था उससे फोन से सबके घर. का नंबर पूछा बाप किस नंबर में मिलेगा. तुम्हारा बाप कि भाई ये हमारे उसमें है 2. घंटे के भीतर फला जगह इतना पैसा पहुंचा दो. नहीं मारा जाएगा। रात भर में उसमें 10ों. करोड़ रुपए इकट्ठा किए। रात में 12:00 बजे. उसी बस पे ले जाके कहीं जंगल में छोड़. दिए। तब वो सब वहां से अपने-अपने साधन से. फोन करके लौटे। बहुत इसकी चर्चा हुई थी।.
तो ये बंटी पांडे ने किया था।. क्या बढ़िया कमाल कहानी थी। मतलब फिल्म. वाली कहानी है।. हां।. ये लेडी डॉन अर्चना शर्मा. अर्चना शर्मा इंदौर की एक लड़की थी। पढ़ी. लिखी लड़की थी।. इंदौर की उज्जैन की? उज्जैन की। उज्जैन की। इसके फादर वहां. मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल थे।. आज लेडी डॉन बनी बैठी है।. हां आज लेडी डॉन बनी बैठी है। और लास्ट. इसकी कन्वर्सेशन हम लोगों ने सुनी थी जब. ये कोलकाता वाला एनकाउंटर हुआ था। ये और. मंगे एक फ्लैट में दो कमरों में रहते थे।.
और वह इसको बताया करती वो बेसिकली इसको. रखने का मतलब यह था कि एसडी पूनवानी को जब. हम उठा के ले आएंगे तो वहां रख देंगे तो. फिर वो लेडी के साथ कोई वो वो नहीं करेगा. दो आदमी रहेंगे लेडी रहेगी सेट की ये. रहेगी जब तक कि हम लोगों को पैसा नहीं मिल. जाता. तो ये शुरू से लेडी डॉन टाइप थी या. ये ऐसा नहीं ये बेसिकली स्कूल कॉलेज में. गाती वाती बहुत अच्छा थे उसका नाम फिर. लोगों ने चढ़ा दिया कि तुम मुंबई जाओ तो. पहले एक बड़ी भारी म्यूजिक पार्टी थी.
बाबला म्यूजिक पार्टी एक जमाने में बाबला. बहुत तो यह बाबला म्यूजिक पार्टी इसने. मुंबई में ज्वाइन कर लिया। फिर वहां से यह. गई दुबई।. दुबई में इसका इसका और इसके पति का कुछ. झगड़ा हो गया।. हम. और उस झगड़े में इसने उसका पति का मुंबई. का कोई बड़ा मकान था। उसकी पावर ऑफ अटर्नी. अपने पास रख ली थी।. हम. फिर वहां इसकी मुलाकात वही इनका जो कैशवश. रखते थे उनसे हो गई। फिर उन्होंने कहा कि.
हम दिलवा देंगे।. गोगा. इरफान गोगा वो उससे मुलाकात हुई। उन्होंने. कहा हम दिलवा देंगे लेकिन हमारे लिए काम. करना पड़ेगा और भाई तुमसे बात करेंगे।. बबलू से इसकी बात करा दी। फिर ज्यादातर. किडनैपिंग्स में यही लड़की ल्योर करने का. काम करती थी।. हनी ट्रैप. हनी ट्रैप. बड़े कारोबारी को. बड़े फसाओ।. सब सब अरे भाई इसको जगदीश मोती रमानी की. तो वहां किडनैपिंग हुई थी अहमदाबाद में।. हम.
और उसको एक प्रोजेक्ट ये ले जाकर दिया. उसने और उनको एकदम पसंद आ गया। फिर. जगदीश मोती रहमानी से कहा कि मेरे यहां. आइए आज हम खाना बनाएंगे। जाती रही रोज. उनसे बात करती रही प्रोजेक्ट ले गई।. प्रोजेक्ट ऑलमोस्ट उन्होंने लटका झटका. देखा उन्होंने तो प्रोजेक्ट ऑलमोस्ट सेंशन. भी कर दिया कि हां ठीक है और फिर जब वह. जैसे ही उनको ओवरटेक करके एक स्कूटर से. रोकने की कोशिश की गई तो सम हाउ वो भाग गए.
लेकिन इन लड़कों ये किडनैपर्स का इनका. कपड़ा बैग ये सब वहां छूट गया. और ये. लड़के निकले लखनऊ के. फिर वहां एक केशव कुमार साहब बड़े अच्छे. अधिकारी थे। उस समय एसपी भुज थे वो।. इसका अडानी में भूमिका थी।. अडानी ऑपरेशन में इस लड़की की भूमिका थी।. हां हां अडानी ऑपरेशन में भी इसकी भूमिका. थी।. एलडी एक हां एलडी व्यास में. एलडी व्यास मोती रमान. मोतीमानी अडानी ऑपरेशन. अडानी ऑपरेशन. अरे इसमें भी थी जिसमें वो मार दिया है।.
लखटक. करके एक था वो बड़ा आदमी था। पेट्रोल पंप. पे उसको मार दिया था। और इसकी कोई फोटो. नहीं है? इसकी कोई फोटो नहीं है।. अभी भी नहीं है।. नहीं है। एक है फोटो ढूंढ-ढाड़ के उस समय. निकाली गई थी। लेकिन इसके बारे वांटेड थीक. वाले एनकाउंटर में।. ये जिंदा है मर गई अभी।. इसमें कंट्रोवर्सी है। जो वहां हम जब. गवाही देने जाते थे तो मैंने उससे हैप्पी. से कहा हरप्रीत हैप्पी क्या नाम है उसका? मंगे। मनजीत सिंह मंगे के खिलाफ क्योंकि.
उसके तमाम असलहे वहां मिले थे।. तो मंगे से मैंने उनके जज साहब के सामने. ही पूछा। तो मैंने कहा भाई उनको अर्चना. शर्मा को भी तो लाके हाजिर करो एक साथ हो. जाए नहीं मुझे बार-बार आना पड़ेगा तो उसने. कहा सर जरा इधर आइए कहा वो तो मर गई हमने. कहा क्यों मैंने इसमें लिखा डेट सहित लिखा. है कब उसने बताया था हमने कहा कैसे मर गई. बोले वो नेपाल में मार दिया उसको दिलशाद. बेग के लोगों ने मरवा दिया क्योंकि उसको. यह जानकारी हो गई थी दिलशाद बेग को कि. इसने ट्रैप हमारे ऊपर लगवाया था और इसी की.
वजह से मतलब दिलशाद बेग के लोगों ने कहा. इसकी वजह से ही हमारे मिर्जा दिलशाद बेग. मारे गए गए थे।. तो फिर यह क्या था? 14 दिसंबर 1998. 5:00 बजे के बाद जब मंगे ने फोन किया, कहा. सामान लेकर निकल जाओ एसटीएफ पीछे।. ये वही है वोक ऑपरेशन का जिसमें चार लोग. हमने बबलू श्रीवास्तव के हमारी टीम ने. मारे थे। ये उसी ऑपरेशन के दिन ये निकल गई. निकल गई वहां से। उसके बाद कभी नहीं दिखाई. पड़ी। और तब से उसका यह कहना था मांगे का. मनजीत सिंह मांगे का कि उसके बाद ये नेपाल.
गई थी और नेपाल में समहाऊ यह पता लग गया. उनके दिलशाद बेग के लोगों को कि ये लेकिन. सही बात तो यह है जो हमारी जानकारी में है. कि बबलू श्रीवास्तव के लोगों ने मरवा दी. और लाश भी नहीं मिली आज तक. मतलब मर चुकी है।. मर चुकी है।. नंदिनी बन के जी रही थी।. नंदिनी बन के जीने। बहुत नाम है इसके। इस. पे 10 मुकदमे हैं। मैंने सारे मुकदमों के. मनीषा इसका नाम है। नंदिनी इसका नाम. नंदिनी इसका नाम वहां था।. वाले में. कोलकाता वाले में मनीषा इसका नाम है। और.
पांच अलग-अलग नामों से ये दिल्ली में बंद. हुई है।. 14 रेड कॉर्नर नोटिस आज भी चालू है।. आज भी चालू हैं। रेड कॉर्नर 14 अब आप सोच. लीजिए किस महिला अपराधी के इतने रेड. कॉर्नर नोटिस होंगे।. और एक सीधी साधी लड़की. सीधी साधी लड़की।. पुलिस कांस्टेबल. बाप पुलिस में था। पुलिस कांस्टेबल की. लड़की थी। नाक में दम कर दिया लोगों को।. कमाल। कितने लोग हैं जो मजबूरी में शुरू. किया बाद में? मजा आ गया उनको।. हां।. सच में मर गई है क्या? 100% है।.
देखिए ऐसा है। इसमें कुछ लोगों ने इंटरनेट. पे ही ये कंफ्यूजन क्रिएट किया कि नहीं. साहब वो अमेरिका में किसी के साथ रह रही. है। तो मैंने कहा अब इन्हीं लोगों से पूछे. जिनके लिए काम कर रही थी।. तो मैंने कोलकाता की ही कोर्ट में मंजीत. सिंह मांगी से पूछा था। हम. कि तो उसने कहा साहब मर गई है वो. बबलू से नहीं पूछा आपने. नहीं बबलू से सिलसिले में बात हुई तो वह. तो मना कर देता है कि साहब वो तो बहुत. पहले मर गई थी और वो उसका यह कहना है कि. वो भुवनेश्वर में मरी थी.
मतलब है इन्हीं लोगों की जानकारी में और. जिंदा नहीं है जो मेरा अब तक जो मुझे. जानकारी है वो जिंदा नहीं है इनके लोगों. का ये कहना है और इतने कॉन्फिडेंस से यही. लोग कह सकते हैं जो मारे हो. बबलू श्रीवास्तव कैसे जिंदा बच गए इतने. एनकाउंटर इतने सारे अपहरण. अरे भाई 15 से 15 95 से 26 हो गई है तब से. तो जेल ही में है. जेल एक सेफ प्लेस होती है. बहुत सेफ लॉरेंस बिश्नोई का भी मैंने लिखा. है ये कैसे गद्दी खाली हुई तो फट से कूद. के बैठ गए वो भी जेल में ही है उसने तो.
कभी बेल अप्लाई भी नहीं की. इसने तो बड़ी कोशिश की बाहर निकलने के लिए. माफी के लिए क्या-क्या नहीं किया इसने. बबलू श्रीवास्तव ने नहीं हुआ वो तो उसने. कभी कोशिश ही नहीं की. लॉरेंस ने. डरते मार डाले जाएंगे।. हां. भाई जो बोए हैं वह काटेगा कौन? यह भी तो. देखिए हम. जिसका जिसका नुकसान किए हैं तो वो छोड़ेगा. क्या? और क्यों छोड़ेगा. बबलू क्यों नहीं छूटे. भाई? अरे इतने मुकदमे हो गए। भाई पहले तो.
इसने सब ये बरगला रखा था कि हम इलेक्शन. लड़ेंगे और फिर जीतेंगे। दो इलेक्शन भी. लड़ाई है।. एक एमपी का इलेक्शन लड़ा एक उसका लेकिन जब. कन्विक्शन हो गया तो वो भी काम सब खत्म हो. गया। दो देशभक्त हैं।. सब वो भी हैं छोटा राजन भी हैं और फतेहगढ़. जेल में वह सुभाष ठाकुर हैं और सब देशभक्त. हैं। आप काम बताइए इनको तो फौरन. तो इन लोग का नेटवर्क अब कैसे चलता है जब. लोग जेल में बंद पड़े हैं? भाई कह तो रहा हूं फोन इनके लिए बहुत.
आवश्यक है। उसके लिए ये कुछ भी करेंगे।. नेटवर्क चलाते रहेंगे।. तो इनके फॉलोअर्स बाहर क्यों घूम रहे हैं? फिर कैसे घूम रहे हैं? इसीलिए कि हमारा भैया ये काम करा दीजिए।. हमारा भैया वो काम करा दीजिए। उन्होंने. कहा अच्छा ठीक है उसको कह देता हम. नए लड़के ओवरटेक नहीं कर पाए. कर रहे हैं इसकी जो टीम में है वो नए. लड़के भी आ गए हैं भाई ये जो नेपाल में. ऑपरेशन किए और जितने लोग इसके मैंने नाम. बताया कौन-कौन बंद है इसके. अच्छा ये अंदर होंगे. ये सब नए. इनकी सेटिंग पुलिस वालों से होगी. तो नए लड़कों के कहते होंगे कि हम तुमको. बाहर प्रोटेक्शन दे रहे हैं. हां इनकी जेल में तो जेल के अधिकारियों से.
ही सेटिंग होगी ना. और फिर बाहर जिनसे ये बात इनके पास. बेसिकली एक मोबाइल हो और कुछ सुविधाएं हो. कि हम सोलिटरी कनफाइनमेंट में है तो आराम. से रह सके। यहां खाना पीना हमको अच्छा. मिलता रहे। बहुत तंग ना किया जाए। हमसे. फावड़ा कुदाल ना चलाई जाए। यही तो फेवर. वहां कर सकते हैं। जो बाकी जेलों में होता. है वही वहां भी हो रहा है। और उसके बदले. में इन लीव ऑफ़ दैट जो सूचना कही है इस समय. सब तैयार है।. तो जेल में इनको अंदर लोग क्यों नहीं. मरवाते? जैसे मुन्ना बजरंगी को मरवा दिए.
थे।. अब भाई ऐसा है ना कि अदावट तो इनकी किससे. है? दाऊद से है। असली अदावत दाऊद से है।. तो दाऊद ही मरवा सकता है किसी के इस्तेमाल. करके। तो उसने कई बार कोशिश भी की और बड़ी. सिंसियर कोशिश की इसको मरवाने की। तो जब. आप समझ रहे हैं ना कि वो सबको पता है कि. इसको मरवाएगा तो दाऊद ही मरवाएगा तो जेल. वाले क्यों मरवाना चाहेंगे या पुलिस क्यों. मरवाना चाहेगी? क्यों मरवाना चाहेगी? ठीक है। ये कोलकाता ऑपरेशन क्या था? कोलकाता ऑपरेशन वही था। बबलू श्रीवास्तव.
के लिए वहां गए थे। एचडी पुनवानी लिटन. होटल का मालिक था और इसने दुबई में एक वो. बेचा था। होटल अपना बेचा था। बड़ा होटल. बेचा था।. पैसा उसका आया हुआ था और वहां पर दुबई में. दाऊद के लोगों ने उस पैसा मांगा। उन्होंने. अपनी जान बचाने के लिए दे दिया।. 1520 करोड़ की. हां हां उसमें इन्होंने कहा कि तुमने मना. करने के बाद भी पैसा उनको क्यों दिया? फिर. ये सब कोलकाता पहुंच गए. और फिर कोलकाता पहुंच के आसपास हम लोगों.
को सूचना मिल गई। हम लोगों को सूचना यूं. मिली कि जो वहां गुजरात में एसपी भूत साहब. थे एसपी गांधीनगर थे केशव कुमार साहब अभी. भी होंगे सेवा में क्योंकि वो शायद उनकी. पहली या दूसरी पोस्टिंग थी।. वहां जब इनकी किडनैपिंग हुई ये गृह मंत्री. के बहुत करीबी थे। उनके गांधीनगर. कांस्टेंसी का सारा हिसाब किताब इलेक्शन. के समय वही देखते थे। मोती रहमानी साहब. जगदीश मोती रहमानी। तो वह जब वहां से नंबर.
वंबर लखनऊ के मिले तो उन्होंने अरुण कुमार. साहब को फोन करके बताया कि साहब यह बताइए. आप लोगों ने श्री प्रकाश को जो एनकाउंटर. किया है क्या उसकी फला तारीख को यहां. अहमदाबाद में भी कोई लोकेशन थी।. उनको यह डाउट हुआ कि हो सकता है ये लोग जो. लखनऊ के नंबर मिले हैं ये शायद श्री. प्रकाश गैंग से रिलेटेड हो।. तो उनको बताया गया कि नहीं नहीं ये नंबर. श्री प्रकाश उन दिनों में उधर नहीं था।. हमें उसकी पक्की लोकेशन पता है। वो उधर. अहमदाबाद नहीं गया था। तो यह हुआ कि नंबर.
चेक कर लो। अरे लखनऊ के नंबर तो है ही. हैं। पता कैसे लगे? तो वो नंबर जो है. मंजीत सिंह मंगे के भाई का निकला। छोटा. भाई उसका यहीं रहता है लखनऊ में। तो फिर. नंबर निकाला गया तो वो सारे नंबर कोलकाता. में एक्टिव थे। तो उनको बताया गया कि साहब. ये नंबर जो आप बता रहे हैं तो कोलकाता में. एक्टिव हैं।. हम. फिर ये हुआ कि इसको देखा जाए। फिर हम. लोगों की टीम गई। फिर बहुत डिटेल हिस्ट्री. है वो मैंने इसमें लिखी है उसकी। ये. चंद्रास्वामी बाबा जो थे. हां. इनका रसूख इतना बड़ा कैसे था कि. प्रधानमंत्री भी माथा टेक रहे हैं तिहाड़.
से भागी अपराधी. यही तो नहीं समझ में आ रहा है ना कि कहा. तो यह जाता है आप किसी पॉलिटिकल आदमी से. पूछिए मैं तो मेरी नहीं समझ है उतनी तो वो. बताएगा कि यह हमेशा कहा जाता रहा उस समय. कि नरसिम्हा राव साहब प्रधानमंत्री बने. केवल और केवल चंद्रास्वामी की कृपा से. उनके जादू टोने से बने कि कृपा से बने कि. क्या बने लेकिन इनका का नाम उन पे और वहां. सारे बड़े लोग. सुब्रमण्यम स्वामी साहब भी उस आश्रम में.
उनका आशीर्वाद लेने जाते थे और कौन नहीं. जाता था उस समय. सब जाते थे. अपराधी भी बबलू श्रीवास्तव भी जा रहे थे. बबलू श्रीवास्तव भी वहीं पहुंच रहे थे. बबलू श्रीवास्तव तो वो उसने हमने कहा कि. भाई चंद्रास्वामी तो उसने कहा साहब. चंद्रास्वामी के खिलाफ कोई बाबा या संत. कुछ कहता था तो उसको जाकर ठीक करने का काम. दिया गया था हमें ने तो चारछ 10 लौंडे. वहां भेज के वो कि आइंदा से उनके खिलाफ. कुछ बोला तो ठीक नहीं होगा। इस तरह का.
बाबा था वो चंद्रास्वामी।. इतना पावरफुल कैसे बन गया चंद्र स्वामी? अब यही है वो पावर कॉरिडोर में घुस गया।. कुछ बातें हो सकता है सही हो गई हो।. भाई अगर कोई ज्योतिषी ये प्रेडिक्शन कर. रहा है कि लोग जाते हैं कि साहब महिलाएं. कि साहब मेरा लड़का होगा कि लड़की होगी, बेटा होगा कि बेटी होगी। तो वह कह दे कि. हां बेटा होगा और उसको जब हुई तो बेटी हुई. तो उसने कहा कि साहब ये तो बेटी हुई तो.
अपना रजिस्टर निकाले कि देखो भाई हमने. बेटी ही लिखा था लेकिन बताया इसलिए नहीं. कि कहीं ऐसा ना हो कि तुम भ्रूण हत्या कर. दो ये कर दो वो कर दो तो 50% तो सही होगा. ही नहीं समझे. समझ गया मैं. तो वो जो कहता था उसका उल्टा लिख लेता था. और जब उल्टा होता तो कहता भाई यही था इस. वजह से नहीं बताया था मैंने उस पे शनि का. चक्कर था। राहु का चक्कर था। पैदा होते ही. यह हो जाता। इसलिए तो उनका भी धंधा चल रहा. है। तो ऐसे वह भी धंधा अपना चलाए होंगे।. उस समय. प्रधानमंत्री तक उनके चक्कर में आ गए।.
हां सब उनके चक्कर में आ गए। कमाल है।. चार्ल शुभराज जी के साथ भागा था। उनको भी. धोखा दिया था उसने ना। उनको भी लूट लिया. था चार्ल्स शुभराज ने।. हां। उनको भी लूट। अरे उसमें यही सब तो. थे। वो लेके पैसा सब भाग गया।. ₹15 लाख।. ₹15 लाख।. चोरों को चो चोरों को चोरी करके।. चोरी करके। अरे क्या वो उसकी हिस्ट्री आप. पढ़ेंगे साले ने गजब ही कर दिया मतलब सबको. हर हफ्ते जो है बड़ी पार्टी करता था किसी. का बता दिया मान लिया.
वो जो है सूरज प्रकाश वो उसके साथ जेल में. रह रहे हैं सेवा करते हैं हाथ पैर तो जिस. दिन खिलाने का मन हुआ तो उनका सूरज प्रकाश. का आज बर्थडे है तो वो फाइव स्टार होटल से. सब आ गया तो सब टूट पड़े उसी पर और यही. करते-करते एक दिन गया भीतर और सबको को. सूंघाया क्लोरोफॉर्म सब गिर गए चाबी. निकाला खोला गाड़ी फिट रखे हुए थे. उसकी अलग कहानी पूरी है.
अरे पूरी कहानी उस पे तो कई कई उपन्यास बन. जाए जो कहानी चार शोराज की. अभी भी जिंदा है. अभी भी जिंदा है छूट के गया. नेपाल से. नेपाल से नेपाल से भी छूटा हमारे यहां से. भी छूटा समझे ये मुकदमा तो चला था ना. भाग्य. जेल जेल ब्रेक का. ये अबू सलेम पंचर बनाने वाला था।. पंचर बनाता था।. पंचर पुत्र. हां पंचर. अबू सलेम. और बॉलीवुड. बॉलीवुड का अब खुद भी मतलब जैसे कहते हैं. ना कि खुद को भी उसको लगता था कि हम हीरो.
टाइप के हैं। वो शादी की है ना उससे. हीरोइन जो है. हां हीरोइन जो है उसी को साथ घूमता है। अब. वो भी क्या बताएं कैसे इसके चक्कर में पड़. गए। इसकी पंचर वाली दुकान आज भी है आजमगढ़. में. सच में पंचर. सच में पंचर पंचर की दुकान इनके फादर की. नेट पे चले जाइए सब पूरी हिस्ट्री इसकी. लिखी. मोनिका बेदी कहां इनके चक्कर में. अब वही तो है नहीं समझ में आ रहा है ना ये. कहां इसके चक्कर में चेहरे मोहरे पे चली. गई या कहीं ब्लैकमेल किया इसने कुछ ना कुछ.
तो हुआ होगा. अच्छा ये अंडरवर्ड में कि जो डॉन होते हैं. ये हीरोइन लोग कैसे पटा लेते हैं काम के. चक्कर में या ब्लैकमेल करके. ब्लैक एक काम करके देखिए दूसरा यह है।. दूसरा यह है कि. या पैसा देके? पैसा देके ही है। सब पैसे का खेल है। या. वह पटा लेते हैं या वह पट जाती हैं। अब सब. पैसे का खेल है। जिसके पास बहुत पैसा है. हम. और जिसे पैसे की जरूरत है। दोनों चीजें एक. जगह हो गई तो हो गया।. मुख्तार अंसारी का तो हमने बहुत जिक्र.
सुना। ये आफताब अंसारी कौन थे? आफताब अंसारी ये दाऊद का आदमी था।. और आफताब अंसारी वो अमेरिकन कल्चरल सेंटर. एक कोलकाता में है। उस पे इसने आतंकवादी. हमला किया था। चार गार्ड वहां मारे गए थे. और इसने बहुत बड़ी-बड़ी किडनैपिंग की।. लेकिन दाऊद के लिए जब दाऊद का सब जगह से. पैसा इन लोगों ने बंद करा दिया।. तो इसने बहुत बड़ी-बड़ी किडनैपिंग की। ये.
पार्थो राय बर्मन एक बहुत बड़े बिजनेसमैन. हमारे ख्याल से एक साइड बैटरी क्या किसी. बड़ी कंपनी के मालिक थे. हम. उनको किया था दसियों करोड़ लिया था इसने. गुजरात में तमाम किडनैपिंग की मैंने सारी. एक-एक जो किडनैपिंग की थी उसकी डिटेल. निकाली. फिर जब ये उसमें एफबीआई ने इसको वांटेड. किया अमेरिकन कल्चरल सेंटर पर हमले के लिए. तो फिर यह दुबई में पकड़ा गया दुबई से. एक्सटर्डिट होके आ गया है इसके खिलाफ जो. मुकदमे हैं वो सब ट्रायल में है। आपकी.
किताब में एक दावा है कि आफताब अंसारी का. बनारस के फिरौती का पैसा 91 के हाईजैकर तक. पहुंच गया था अमेरिका में। नहीं नहीं वो. हमारा दावा नहीं है वो वो एस्टैब्लिश्ड. फैक्ट है. हम. कि ये पैसा दाऊद ने दिया उन लोगों को जो. इसमें शामिल थे. हम्म. और जब मनी ट्रेल हुई है इसकी तो उस मनी. ट्रेल में वो वही पैसा निकला है अकेले एक. आदमी के किडनैपिंग का पैसा नहीं ये सब. पार्थो राय बर्मन जितनी किडनैपिंग का पैसा.
है ये सब दाऊद ने दे दिया था और उसी पैसे. से वही पैसा जो मनी ट्रेल में अकाउंट्स के. पैसे का जिक्र हुआ है आप नेट पे देख सब. आपको मिल जाएगा। अमेरिकन एजेंसीज की का यह. क्लेम है कि आफताब अंसारी उसी में. गिरफ्तार भी हुआ है। यह. ये जो अमेरिका में हमला हुआ था।. हां अमेरिका में नहीं जो अमेरिका में जिन. लोगों ने हमला किया था डोसा और कौन-कौन जो. लोग थे उस अकाउंट में जो पैसा गया था वो. इसने पैसा ट्रांसफर किया था मनी ट्रेल का. आप समझ रहे होंगे.
कि जब उन लोगों के अकाउंट. उनके पैसे की पूंछ पकड़ी गई।. सारी पर आई थी।. 11 सितंबर 2001 में।. बाप रे कहां-कहां से अमेरिकन सेंटर पर. हमला किसका बदला था? नहीं ये अमेरिकन सेंटर पे हमला तो वो वही. है ना कि अमेरिका के प्रति इनकी नाराजगी. थी। वो तो सारे जितने आउटफिट थे। भाई.
ट्विन टावर्स पे क्यों हमला किया. उन्होंने? ट्विन टावर्स पे तो यह नहीं कि. अमेरिका की बहुत थ्योरी आती है।. बहुत थ्योरी आती है। उसी तरह इसकी भी. थ्योरी. अंदर से भी थ्योरी आती है। बाहर से भी. बाहर से भी थ्योरी आती है। तो वही है कि. तो इसको ये काम दिया कि अमेरिकन सेंटर को. वहां टारगेट करो।. सॉफ्ट टेररिज्म किसे कहते हैं? सॉफ्ट टेररिज्म जो आपकी इकोनमी को. धीरे-धीरे एक तो टेररिज्म हुआ कि सामने से. आ रहे हैं, गोली मार रहे हैं, अपहरण कर. रहे हैं। दूसरा यह है इकोनमी को जो खराब. कर रही है चीज। हम. वह और जानबूझ के.
हम. कि फेक करेंसी नोट आपने इतना पंप अप कर. दिया हमारी इकॉनमी में. हम. कि बड़ी दिक्कत हुई और ये सब सरकारी मिंट. इनके जितने थे पाकिस्तान के वहां से ये कई. रूटों में अलग-अलग हुई। पहला नेपाल से फिर. उसके बाद बांग्लादेश से फिर नया रूट चला. थाईलैंड से. और पाकिस्तान. एयरलाइंस से उतरने वाले लोगों को काठमांडू. में पकड़ा गया था। था यूनुस अंसारी का. पूरा का पूरा जो.
जो यूनुस अंसारी का जितना रैकेट था वो. बरामदगी के बाद हुआ था. काठमांडू एयरपोर्ट पर तो जो इकॉनमी को. खराब कर रहे हैं फेक करेंसी नोटेड उसमें. पंप भाई उस जमाने में तो फेक करेंसी नोट. एटीएम में निकलने लगे और एक ब्रांच. सिद्धार्थ नगर की या बॉर्डर की नेपाल की. ऐसी थी जिसके करेंसी चेस्ट से 6 करोड़ फेक.
करेंसी के निकले थे। जिसको बाद में सीबीआई. ने भी इन्वेस्टिगेट किया। एनआईए ने भी. इन्वेस्टिगेट किया। क्योंकि सीबीआई तो. पहुंची अपना कि हां साहब ये पाकिस्तान से. आ रहा है और. कहां से छप रहा है? लेकिन उसकी इंक कहां. से आई? उसका पेपर कहां से आया? उसका. सिक्योरिटी थ्रेट कहां से आया? यह फिर बाद. में एनआईए ने इसको किया। देश भर के तमाम. फेक करेंसी नोट्स की जो रिकवरी हुई।. सब मिस्टर दाऊद। हां इन सबके पीछे दाऊद. दाऊद से लोग अभी डरते नहीं अब कोई नहीं.
डरता. तो उसकी प्रॉपर्टी क्यों नहीं खरीदते फिर. प्रॉपर्टी खरीद तो रहे हैं मुंबई में. खरीदी जा रही हैं नीलाम हो रही है लोग वो. उसमें. अब खुलकर हो रहा है. हां खुलकर हो रहा है अब कौन डरता है और. क्यों डरेगा. उसकी सारी प्रॉपर्टी मुंबई की जो हैं. वो नीलाम हुई और उसकी जगह दूसरी दूसरी. कंस्ट्रशंस बनाए जा रहे हैं। सरकार बनवा. रही है।. नीलाम हुई लोगों ने लिया। पहले तो कोई. हिम्मत नहीं करता था। अब लोग ले रहे हैं।. हम. अच्छे से ले रहे हैं।.
लॉरेंस बिश्नोई क्या नए जमाने का दाऊद. इब्राहिम है? देखिए ये कहा नहीं जा सकता अभी कुछ। अभी. तो जो उसके अह जो उसके ऊपर जो आरोप लगे. हैं जैसे जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल है।. हम्म. जिन लोगों ने जिगाना पिस्टल इस्तेमाल की. उनकी पूरी परसंपत्तियों की को अगर मिला. लीजिए तो वो भी उसके दाम से कम है।. दो जिगाना पिस्टल यहां हुई। संजीव जीवा को. यहीं अदालत के भीतर मार दिया गया। 9 एमएम.
की थी। वो जो वहां एक मुंबई में जिनके साथ. हुआ वो बाबा सिद्दीकी. बाबा सिद्दीकी तो अभी तक तो मैंने कहीं. नहीं पढ़ा कि उसमें असलहा कौन सा लेकिन वो. भी सेमी ऑटोमेटिक बड़ा था। किसी ने मुझे. ये बताया था कि वहां शायद ये ग्लॉक पिस्टल. इस्तेमाल हुई थी। हम. ऑस्ट्रियन पिस्टल है, बड़ी पिस्टल है और. महंगी पिस्टल है।. तो ऐसे लोगों के पास जो यह आ रही है और. घूम टहल के ये सब जो है इंडिकेटर्स वो.
लॉरेंस बिश्नोई पे जाते हैं।. तो कैसे अलग है लॉरेंस दाऊद से? नहीं दाऊद का तो एक जैसे इसने हर घटना में. फ्रेशर्स को इस्तेमाल किया। रिपीट नहीं. हुए।. किसने? अह लॉरेंस ने। लॉरेंस ने हर घटना में नया. आदमी इस्तेमाल किया। ऐसा आदमी इस्तेमाल. किया जिसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।. जो कोई पुराना सधा हुआ बदमाश नहीं है।. उसका क्या फायदा होता है? उसका फायदा यह होता है पुलिस अगर पकड़ेगी. भी तो ऊपर की ट्रेल नहीं मिलेगी।.
किसी ने किसी से. कॉन्ट्रैक्ट किया कि साहब इस आदमी को का. इंतजाम करना है। उसके बाद से वो फिर उस. आदमी से नहीं मिला। फिर उसमें मॉडस ऑपरेंट. क्या होगी? जैसे वो कॉर्पोरेट ऑफिस होता. है ना तो रेकी करने का अलग आदमी होगा।. असलाह देने का अलग आदमी होगा। आदमी छांटने. का अलग आदमी होगा।. हम. ऐसे होगा ताकि वो फिर आप प्रूव ना कर सके. उसको कोर्ट ऑफ लॉ में।.
अबू सलेम का यूज़ एंड थ्रो मॉडल. यूज़ एंड थ्रो मॉडल।. आदमी वहां से आजमगढ़ से अपना मेड इन भमौर. लेके आया।. हम. किया फेंक दिया और चला गया। उसी दिन का. रिजर्वेशन पहले से करा के रखा। इसका मतलब. हम ये मान ले कि अतीक अहमद और अशरफ अहमद. की जो हत्या हुई इलाहाबाद में. जी. उसके असली कातिल कभी नहीं पता चलेंगे।. अब ये तो कोई नहीं कह सकता कि कभी नहीं. पता लगेंगे लेकिन अभी तक नहीं पता लगे।. तो अभी नहीं पता लगे तो कब पता लगेंगे? ये तो देखिए समय के आदमी.
समय के गर्भ में जो है उसका कैसे. आदमी मूव ऑन कर जाता है।. हां।. क्योंकि जो लड़के मिले थे 15 अप्रैल 2023. को जब ये घटना हुई थी।. हां हुई थी। हम. वही कहानी कि उनका घर परिवार सब बेच दो. तभी इतना का पैसा नहीं निकलेगा. नहीं निकलेगा. नहीं निकलेगा तो फिर पता भी नहीं चलेगा. शायद अब. अनलेस एंड अंटिल कोई पुराना. हां अब यही है ना कि फिर कभी कोई दूसरी. घटना हो कोई मौके पर खैर मौके पे तो ये सब. भी पकड़े गए. लेकिन कभी हो सकता है खुले कि ये सब कहां.
से हुआ था. गुड्डू मुस्लिम मिल जाए तो पकड़ जाएगा. पकड़ जाएगा. गुड्डू मुस्लिम कहां है. अब ये तो देखिए एसटीएफ वाले इन्वेस्टिगेट. कर रहे हैं वही बता सकते हैं। हम लोग तो. कयास ही लगा सकते हैं।. दिशा पाटनी के साथ जो कांड हुआ था उसका भी. कोई कनेक्शन था आपका? नहीं दिशा पाटनी तो हमारे रिटायरमेंट के. दिशा पाटनी के पिता आपके डिप्टी. हां मेरे डिप्टी एसपी रहे। वो भी जब मैं. आईजी था तो वो डिप्टी एसपी थे पीलीभीत में. और हमारे यहां भी रहे। इसके पहले भी हमारे.
आरआई रहे वो एक हमारे यहां रिजर्व. इंस्पेक्टर होता है पुलिस लाइन में। हम. तो वह उससे प्रमोट होके और पीएसी में यह. लोग बहुत दिन रहते हैं। डिसिप्लिंड आदमी. थे. हम. और. जैसे कहते हैं कि वो अनुशासन पसंद आदमी. थे। अच्छी रेपुटेशन के अधिकारी थे। डिप्टी. एसपी हो के रिटायर हुए। जब मैं वहां था. बरेली में तभी हमारे साथ थे।. तो दिशा पाटनी घर के बाहर फायरिंग हुई।. उसमें भी जिगना और ब्लॉक मिली थी।. मिली थी।. और कुछ दिन बाद दोनों अपराधी का एनकाउंटर. हो गया।. एनकाउंटर हो गया मारे गए।. क्या क्रोनोलॉजी थी इसकी? अब देखिए जो.
इसकी क्रोनोलॉजी है वही बाकी सबकी भी है. जिस पे पॉइंटर यह जाता है कि यह लॉरेंस. बिश्नोई ने करा. फिर दिशा पार्टनी को टारगेट करेगा लॉरेंस. अब ये तो देखिए ऐसा है ना मैं तो वही कह. रहा हूं ना कि ये वही है जिस किसी को उसने. ये जो वो कहता है जो उसके बयान तमाम आते. हैं. कि साहब जिसके भी सलमान से कोई संबंध. होंगे हम उसे छोड़ेंगे नहीं. उसी लाइट में अखबारों में या जो मीडिया. में सोशल मीडिया में जो आया है वो इसी. लाइन पर आया है.
श्री प्रकाश शुक्ला के बारे में कोई बात. जो अब तक पिछली बार ना बताई हो आपने. क्योंकि श्री प्रकाश शुक्ला पर आपने पूरी. थीसिस कर रखी है. कर रखी है. कोई ऐसी बात जो रह गई हो लोग जानते हो. श्री प्रकाश शुक्ला के बारे में. नहीं सब चीजें तो मैंने किताब. जैसे एक तो ये था कि बॉटनी की पढ़ाई करने. वाला लड़का था. हम. नहीं बॉटनी ने बीएससी किया था उसने बॉटनी. वो बीएससी किया हुआ था पूरा नहीं पढ़ा था. लेकिन. बॉटनी में इलाहाबाद अच्छा. नहीं नहीं ये तो मैंने किया था. हम. आपने पढ़ाई की थी?
मैंने पढ़ाई की थी।. बॉटनी की पढ़ाई एमएससी किया था। फिर. बॉटनी करने वाले ने 47 वाले को हटाया था।. जी. सबसे खतरनाक अपराधी जितने आपको अब तक. दिखाई पड़े।. आपको कौन सा लगा? जितने अपराधियों को आपने. ये आपने पिछली बार भी पूछा था।. फिर भी पूछ रहा था। मैं इस बार. फिर मैं. और स्टडी आपने की है बहुत सारी बहुत सारे. अपराधियों को जिनको भी आपने मैं और इसको. 10 सवाल बड़ा कर देता हूं। जितने. अपराधियों के बारे में आपने अब तक रिसर्च. की, पढ़ाई की, डायरेक्ट डीलिंग की, आपके. सीनियर्स ने डील किया। उनमें सबसे शातिर,
सबसे. गढ़ कौन सा आपको लगा अपराधी? देखिए एक तो वो अपराधी हैं जो डोमेस्टिक. क्राइम करते हैं और एक जो होते हैं वो जो. आतंकवाद से संबंधित है। अपराधी जिसने. हत्या किया, ये किया वो किया। वो सबसे. शातिर तो हमारे ख्याल से जो क्रिमिनल. रिकॉर्ड भी बताता है अदरवाइज भी मुख्तार. ही था। मुख्तार ने जिस तरह के अपराध किए. हैं जैसे बहुत बड़ी किडनैपिंग की है। एक.
बीएचपी के बहुत बड़े नेता थे। उनकी. किडनैपिंग हुई और फिर उनकी लाश मिली। उस. जमाने की बहुत बड़ी किडनैपिंग थी। ये. कृष्णानंद राय. कृष्णानंद राय काट लिया। हां चुटिया काट. लिया। तो उससे ज्यादा शातिर अपराधी. क्रिमिनल रिकॉर्ड के हिसाब से हमने नहीं. देखा अभी तक क्योंकि हमने बहुत ही. कांस्टेंटली काम किया।. वो अपराधी थे या हिंदू मुसलमान वाले थे? नहीं वो अपराधी था। घोर अपराधी था।.
किस तरह के बताइए? पंजाब जेल चला गया।. यहां आगरा जेल में ये स्वर्गीय सुबेश. कुमार सिंह साहब की डेथ हो गई। हम. आगरा जेल में रेड हुई थी तो इसकी बुलेट. प्रूफ जैकेट्स जेल में इसके बैरेक के भीतर. इसकी मिली थी। अब आप सोच लीजिए किस तरह. सिस्टम को मैनपुलेट करता कितना बदमाश था।. मुन्ना बजरंगी कैसा आदमी था? मुन्ना बजरंगी भी तो साथ एक ही थैली के. चट्टे बट्टेट थे। उन्हीं का आदमी था ये।. कुछ लोग कहते हैं कि मुन्ना के आने के बाद. वो बड़ा बन गया और. हां क्योंकि वो एग्जीक्यूट बहुत प्रॉपर्ली. करता था। मुन्ना बजरंगी।.
ठीक है। एनकाउंटर सही होता है या गलत होता. है? देखिए एनकाउंटर तो सही ही होता है। गलत. क्यों होगा सर एनकाउंटर? एनकाउंटर तो सही. होता है। आरोप लगाने वाले तो देखिए हर. एनकाउंटर में दो एक को अपवाद छोड़ दीजिए।. हजारोंज़ एनकाउंटर में अब तो मजिस्ट्रेट. इंक्वायरी होनी मस्ट है।. तो सारे लोग तो नहीं बेईमान है ना।. लेकिन थ्योरी एक के आती है।. पुलिस भाग आई। उसने पुलिस पे हमला किया।. नहीं तो एक सिपाही के हाथ में छू की गोली. निकल गई।. और पुलिस ने ठोक दिया।.
भाई ऐसा है जब एक ही कहानी बदमाश भी तो एक. ही तरह के अपराध कर रहा है तो कहानी तो एक. ही बनेगी ना. तो हर बार पुलिस वाले को छू के क्यों. निकलती है. भाई ऐसा है ना कि चार गोली चली मरे भी तो. पुलिस वाले कितने उन पे तो किसी का ध्यान. नहीं गया. जाता है उनके लिए एसटीएफ के पांच लोग जब. यह ऑपरेशन करके आ रहे थे ददुआ वाला पांच. लोग मारे गए घात लगा के मारा तो पांच गोली. मारी और एसटीएफ ने तो जितना लॉस ऑफ लाइफ. क्राइम में किया है किसी ने नहीं किया. होगा लेकिन ठीक है वो हमारी ड्यूटी है हम. इसी के लिए पेड है.
नहीं उसके लिए सम्मान भी है।. हां सम्मान भी है।. सम्मान भी है। दुनिया सम्मान करती है। आज. पोस्ट रिटायरमेंट आप जहां जाते हैं आपको. सम्मान मिलता है।. बिल्कुल मिलता है। हम वही तो कह रहे हैं. कि हम हमने ये कभी नहीं कहा कि ये नहीं सब. यही पूछा जाता है। बहुत बलिदान दिया है. एसटीएफ में लोगों ने।. लेकिन जब कई बार वीडियोस आते हैं जैसे. यूपी पुलिस का एक वीडियो आया था जिसमें. पुलिस वाले मुंह से मुंह से ठाए-ठाए कर. रहे ठीक है। देखिए ऐसा है ना कि अब. ऑर्गेनाइजेशन है। हर तरह के लोग होते हैं।. यूपी में अपराध खत्म हुआ है या चेहरे बदले. हैं? नहीं अपराध बहुत कम हुआ है। आप सड़कों पे.
महसूस करिए। आप भी यूपी में ही रह रहे हैं. नोएडा में।. हम. आप भी कभी आतेआजाते महसूस करिए।. अतीक अहमद, मुख्तार जीवा मर गए हैं।. हम. लेकिन उधर वाले आरोप लगाते हैं कि अब धर्म. देख के. आरोप प्रत्यारोप की बात में देखिए. राजनैतिक बात से मेरा कोई लेना देना नहीं।. लेकिन आपको जमीन पर दिखेगा कि अपराध कम. हुए हैं।. चलिए एक छोटा सा हमने रैपिड फायर रखा आपके. लिए। दाऊद इब्राहिम या छोटा राजन किसका. दिमाग ज्यादा तेज था और कौन बड़ा अपराधी. था? बड़ा अपराधी तो दाऊद ही था और ती दिमाग भी.
बहुत तेज था।. ओके। सबसे ईमानदार पुलिस ऑफिसर जैसा आपने. काम किया।. ईमानदार पुलिस अफसर देखिए हाई रैंकिंग ऑफर. में सुलखान सिंह साहब को मैं सबसे ईमानदार. मानता हूं। जो रिटायर हुए थे. जो रिटायर हुए थे और उत्तर प्रदेश में. प्रकाश सिंह साहब का कभी कोई जवाब नहीं. रहा है और जिनके अंडर में मैंने सब. पुलिसिंग सीखी अरुण कुमार साहब उनको भी. मैं बहुत ईमानदार अधिकारियों की श्रेणी. में रखता हूं।. ओके बबलू श्रीवास्तव अपराधी देशभक्त या.
दोनों नहीं अपराधी तो है ही है वो। अब. देशभक्त मजबूरी में हो गया है। एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट शब्द गर्व या तकलीफ नहीं यह. देखिए किसी को अगर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. कहा जाता है तो ये उसके लिए तो गर्व की. बात हो सकती है। बशर्ते मतलब किस तरह से. एनकाउंटर किए गए हैं और क्यों किए गए हैं. समाज का इससे क्या भला हुआ है? तो अगर. ढूंढ-ढूंढ के उसने समाज की भलाई के लिए. ऐसा किया है तो ठीक है। अच्छा है।. गर्भमानित करने वाला शब्द है।. दाऊद इब्राहिम कभी इंडिया आ सकता है?
कभी नहीं आएगा। सवाल ही नहीं।. लॉरेंस बिश्नोई 10 साल बाद कहां देख रहे. हैं आप? अब तो जैसे बाकी लोगों का है हो सकता है. 10 साल बाद आप उसको विधानसभा में देखें. लोकसभा में देखें. मारा जाए।. भाई जितने बड़े-बड़े उस स्तर के जितने हैं. सब विधानसभा लोकसभा 90 के दशक के जितने. अपराधी थे वो सब राजनीतिक व्यक्ति हो गए. अल्टीमेटली।.
या तुम्हारा जय है विधानसभा लोकसभा में. पहुंचेगा और कौन सी जगह है कमाल है जो. आजकल फिल्मों में अंडरवर्डी कहानियां आती. है कितना सच कितना मसाला. ये तो मसाला है. 20% ही सच है 90% मसाला है. एक सलाह उस नौजवान लड़के को जिसके बंदर. भाई बनने की तमन्ना है. देखिए भाई का जो हश्र होता है वो पहले. ढूंढ लो पता कर लो. कि हश्र क्या होता है तब अब एक कदम आगे.
रखना।. नहीं लड़कों बहुत चिल्ल होती है ना कि. नहीं वही मैं कह रहा हूं ना कट्टा चाहिए।. उनका हश्र क्या होता है ये सब देख लो तब. आगे कदम रखना।. आपकी इसके बाद अगली किताब किस पर होगी और. ये किताब अंतहीन क्यों थी? अंतहीन ये है कि मैंने देखिए इसके टाइटल. में ही लिखा है कि अंडरवर जो सिर्फ रूप. बदलता है। कभी खत्म नहीं होगा। माफियोसिस. किसी देश में कहीं खत्म नहीं हुई।. रूप बदल लेती है। समय के काल के चक्र के.
हिसाब से समय बदल चेहरा बदलता रहती है।. अंडरवर्ड अंडरवर्ड रहेगा और यह एंडलेस. सिलसिला है। यह कभी बंद नहीं होगा।. चलिए आपको आपकी नई किताब के लिए. शुभकामनाएं। हमारी कोशिश थी किताब को लगभग. समेट लिया जाए।. नहीं नहीं पूरा आपने अच्छी तरह से पढ़ा है. इसलिए आपने समेटा है इसको।. और अगली किताब के लिए शुभकामनाएं। बहुत. किताब प्रसिद्ध हो।. और लोग पढ़ें। जिनको किताब पढ़नी है वो. कहां-कहां अवेलेबल है आप बता दीजिए तो वो. लोग ढूंढ. यह Amazon पे अवेलेबल है। हिंदी युग्म. पब्लिकेशन की है। अह बिल्कुल पढ़ें और.
खासकर हम तो यह कहते हैं कि जिनको. अंडरवर्ड को समझना हो। हमारे पुलिस वाले. जो हैं चाहे सिपाही हो चाहे जिस स्तर के. हो वो पढ़ेंगे तो थोड़ी सी इनसाइट उनको. मिलेगी कि कैसे चेंज हो रहा है अंडरवर्ड. और कैसे ऑपरेट करता था। कैसे जो इसके. प्लेयर्स हैं वो धीरे-धीरे करके खत्म हुए।. तो सबको एक जगह करके कुछ इस क्योंकि मैं. एटीएस में लंबे समय रहा कुछ उसकी बातें. हैं। कुछ पहले की हैं जो मैंने अपने.
अधिकारियों से उनसे पाई हैं। कुछ अभी जो. चल रहा है वो हैं। चलिए बहुत-बहुत. शुक्रिया सर आपका। धन्यवाद।.
