How a Tea Seller Built a 1000 Crore Company ? | FT. Vikram Tea Founder Mr. Ramesh Bhai C. Patel
यह प्रधानमंत्री मोदी से बड़े चाय वाले. हैं।. मोदी जी कई बार कहते हैं कि गुजरात के. लोगों के खून में धंधा है।. वो तो है ये। गुजराती लोग मीठा खाते मीठा. बोलते हैं। और मीठा खा के हर एक को पटा. लेते हैं।. जो आदमी ₹600 महीना कमा रहा था वो हजारों. करोड़ रुपए का कंपनी कैसे खड़ा कर गया? तो. बिना पढ़े लिखे। यह कॉन्फिडेंस कैसे आता? आदमी को खाना कब अच्छा लगता है? जब उसको. भूख लगती है तब।. एक पिक्चर आई थी धड़कन। तो उसमें सुनील. शेट्टी बड़ा गरीब रहता है। बाद में वो. अमीर बन जाता है। एक बड़ा फेमस सीन वायरल.
होता है कि मेरे पास ₹50 थे। अब मैंने. ₹500 करोड़ कमा लिए।. अच्छा।. आप साइकिल पर चलते थे। तो ये ₹50 से कैसे. 1000 करोड़ कमा लेते हैं? वो नहीं पता आप. ही बता दो।. मैं जो भी काम करता हूं विश्वास के साथ. काम करता हूं।. 80 टन आप प्रोडक्शन चाय का कर रहे हो। कई. लोग ऐसे अभी भी मिले मुझे जिन्हें विक्रम. टी का नाम नहीं पता। तो ये कहां-कहां आप. इसको बेच रहे हो? सबसे ज्यादा महाराष्ट्र. [संगीत] है। अभी तो हम महाराष्ट्र में ठीक. है। गुजरात है, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू कश्मीर अभी चालू किया है। उत्तर. प्रदेश में हमने काम चालू किया है।. आपका 50 साल से ऊपर का तजुर्बा है। कोई भी. धंधा करना है उसे क्या सलाह दो। तीन चीजें.
करो। ये तीन चीजें मत करो। धंधे में. ज्यादा सफल कौन होता है? वो जो ज्यादा. पढ़ा लिखा है, ज्यादा समझदार है, जिसको. ज्यादा जानकारी है या ज्यादा मेहनती है।. टाइम टाइम पे चेंज होता है।. कहीं पर अपमानित महसूस हुए थे? बिल्कुल बिल्कुल। बहुत जगह गांव के अंदर. फंक्शन रहता था। मैरिज सिस्टम रहती थी। तो. हमको थोड़ा पीछे करते थे। ये सब जो देखे. वाले बचपने में और जो बचपने में जो देखे. वाले हैं ना पूरी जिंदगी याद रहते हैं और. वो मन में अगर अटक गया ना तो फिर पूरी. लाइफ बदल देते हैं। पैसा क्या बदल देता. है? पैसा हर चीज बदल देता है। पैसा आदमी को.
जमीन से ऊपर तक उठा देते हैं।. भारत के किस राज्य में धंधा करना सबसे. आसान है या सबसे मुश्किल है? इस सफर में. कोई गलती भी हुई है आपसे? ज्यादा पैसा कमाने के लाजत में मत जाइए।. सिर्फ क्वालिटी के ऊपर ध्यान दीजिए।. क्या हमको किसी ने बताया कि आपके एम्प्लई. भी ऐसे मतलब दोस्ती यारी वाले ज्यादा थे? जालना से पाचोड़ करके गांव छोटा सा। वहीं. एक आदमी बकरियां चलाने वाला। वो भी कुछ. बीड़ी वगैरह बेचता था। उसके होशियारी देख. लिया मैंने। मैंने उसको खड़ा कर दिया कि. भाई तू एक धंधा कर और वो आज जबरदस्त बन. गया। जिसको कोई जानते नहीं थे वो गांव में. आज उसको यशवंत सेठ बोला जाता है। [हंसी].
आपने 50 साल पहले धंधा शुरू किया था। तब. धंधा शुरू करना ज्यादा आसान था या आज के. दौर में बिजनेस शुरू करना ज्यादा आसान है।. आज के दौर में आसान है।. आज ईजी है। लोन लेके धंधा शुरू करना ठीक. होता है या पूंजी लगा के धंधा शुरू करना. ठीक है। कोई गरीब परिवार का लड़का हो।. मध्यम वर्गीय परिवार का लड़का हो। धंधा. शुरू करें। उतने पैसे नहीं है। मां-बाप. उतना पैसा नहीं छोड़ के। किस बिज़नेस में. वह अपनी रुचि दिखाए जहां पर रिस्क थोड़ा कम. हो।. कौन से एरिया में रहता है, कौन से मार्केट. उसको मिल सकता है वो सब उसको स्टडी करना. पड़ेगा। बिज़नेस के अंदर मेहनत ईमानदारी.
बहुत जरूरी है।. आज के पॉडकास्ट में हमारे मेहमान की कहानी. है मिट्टी से उठकर आसमान छूने वाले एक ऐसे. इंसान की जिसकी जेब में पैसे नहीं थे।. लेकिन इरादों में तूफान था। गुजरात के. बोजासन की धूल भरी गलियों में जन्माए गरीब. किसान का बेटा जिसके घर में बस इतना था कि. बहनों की शादी हो जाए पर उसकी पढ़ाई उसके. सपने उसका भविष्य किसी ने नहीं सोचा मगर.
किस्मत भी उन्हीं के आगे झुकती है जो हार. मानना नहीं जानते। आज हमारे मेहमान हैं. भाई श्री रमेश भाई पटेल। दसवीं तक पढ़ा यह. लड़का नौकरी की तलाश में जब घर से निकला. तो बिलासपुर के एक छोटे से चाय के ठेले पर. काम करने लगा। उबलती हुई केतली की भाप के. बीच उसने एक अनजानी कला सीखी टी. ब्लेंडिंग। उसे खुद भी नहीं पता था कि यही. हुनर उसे एक दिन ₹00 करोड़ तक ले जाएगा।. फिर किस्मत ने उसे जलना पहुंचा दिया। एक.
ऐसी जगह जहां वो किसी को नहीं जानता। कुछ. ₹100 भूखी रातें रेलवे स्टेशन की ठंडी. फर्श और यही उसका पहला संघर्ष था।. धीरे-धीरे एक छोटा सा कमरा मिला और फिर. शुरू हुआ असली सफर। एक किराए की साइकिल और. थैले में थोड़ा सा चाय पाउडर। ना पहचान ना. सपोर्ट ना पैसे सिर्फ हिम्मत और चाय. मिलाने का जा वो रोज साइकिल पर शहर भर के. चाय स्टॉल्स पर जाता चाय बेचता लोगों को. स्वाद समझ में आया और धीरे-धीरे वो भरोसा.
कमाता गया 5 साल तक उसने यही दिनचर्या. निभाई सुबह से रात तक पसीना मेहनत और. उम्मीद सब कुछ पटरी पर आने लगा था फिर एक. रोज अचानक एक आग ने उससे गोदाम को निगल. लिया लाखों का माल जल गया लोग बोले अब. खत्म हो गया अब ये लड़का खड़ा नहीं हो. पाएगा. लेकिन वो आग माल को जला सकती थी उसके. हौसलों की नहीं। भाई श्री ने फिर से शून्य. से शुरुआत की। वही ईमानदारी, वही लगन और. वही सीख गिरकर उठना जीत है। धीरे-धीरे वो. छोटा सा चाय का व्यापार विक्रम टी बन गया।.
आज एक सम्मानित और देश भर में पहचाना जाने. वाला ब्रांड और वह गरीब किसान का बेटा आज. भाई श्री ग्रुप का चेयरमैन है। टी. एजुकेशन, फाइनेंसियल एडवाइज़री, रियलस्टेट. और आईपीजी जैसे बिजनेस में फैला हुआ 2000. करोड़ का साम्राज्य। भाई श्री कहानी सिर्फ. बिजनेस की नहीं है। यह कहानी है असंभव को. हराने की, राख से फिर जन्म लेने की और. बार-बार गिर कर भी खड़े होने की। यह कहानी. साबित करती है कि बड़ी शुरुआत नहीं बड़ा.
इरादा चाहिए। इस इरादे ने एक साइकिल वाले. लड़के को देश का बड़ा उद्यमी बनाया है। यह. है सचमुच एक कड़क कहानी एक ऐसे आदमी की. जिसने जिंदगी में कभी भी मुश्किलों के. सामने घुटने नहीं टेंके और हमें उम्मीद है. कि इस पॉडकास्ट से आम लोग भी बहुत कुछ सीख. पाएंगे। मेरे साथ आज विक्रम टी के मालिक. मिस्टर रमेश भाई पटेल हैं जिन्हें हम. भाईश्री कहते हैं और भाईश्री के बारे में. एक खास बात हम आपको बता दें कि ये. प्रधानमंत्री मोदी से बड़े चाय वाले. [हंसी].
50 साल का तजुर्बा है ये सही कह रहा हूं. ना मैं. जी हां जी हां. बिल्कुल. 1975. जी 1975. जिस दौर में मोदी जी चाय बेच रहे थे. जी हां. उसी दौर के आसपास आपने भी चाय बेच. चाय का काम चालू किया है. उन्होंने चाय बेच बेच प्रधानमंत्री कुर्सी. अपना बना ली लेकिन चाय के धंधे में आप. मोदी जी को पिछाड़ दिए।. वो राजकरण में है।. तो ये गुजराती चाय वालों में कुछ खास होता. है क्या? नहीं ऐसा कुछ नहीं है। ऐसा कुछ नहीं है।. गुजराती चाय में ऐसा कोई खास बात नहीं है।.
नहीं नहीं. नहीं जैसे मोदी जी कई बार कहते हैं कि. गुजरात के लोगों के खून में धंधा है।. वो तो है ही है। गुजराती लोगों के खून में. बिजनेस है। वो बात तो पक्का है।. तो इसका क्या मतलब होता है? जैसे धंधा तो. यूपी में भी लोग करते हैं। बिहार में करते. हैं, महाराष्ट्र में करते हैं, देश भर में. करते हैं।. गुजराती क्या अलग होता है? देखो ज्यादा. करके मैं मानता हूं बिजनेस के अंदर. ईमानदारी सख्त मेहनत सख्त मेहनत ये दो मेन. चीज है और गुजराती लोग मीठा खाते हैं मीठा.
बोलते हैं स्वीट खाते हैं मीठा बोलते हैं. हम मीठा खा के हर एक को पटा लेते हैं. तो मीठा बोलने से धंधा बढ़ जाता है. जी हां बिल्कुल मीठा खाने से मीठा बोलने. से ही धंधा बढ़ता है कड़ू बोलने धंधा नहीं. मैं बढ़ता कभी. बट जितनी मेरी उम्र नहीं है उससे बड़ा. धंधे का एक्सपीरियंस आपका है।. जी हां. 50 साल का आपका एक्सपीरियंस हो गया। 50. साल आपके धंधे के पूरे हो गए।. 50 साल तो मेरा खुद का बिजनेस का हो गया।. हां।. उसके पहले भी मैं चाय कंपनी में था ना।.
हां।. तो मेरे मेरी ऐज आज 76 है। मैं कम से कम. नहीं बोलो तो भी 12 15 साल का था। तब से. चाय कम चाय के बारे में हूं। चाय के साथ. हूं। मैं जब पढ़ता था तब भी चाय की मेरे. रिश्तेदारों की चाय की दुकान थी गांव में।. ये गुजराती आदमी का चाय से क्या कनेक्शन. है? ऐसा कुछ नहीं। ज्यादा जाकर के गुजराती लोग. चाय में है मैं मानता हूं।. हां।. क्योंकि कोलकाता के अंदर जो जितनी. बड़ी-बड़ी कंपनियां थी वो सब गुजराती पटेल. थे।. हम.
सब गुजराती पटेल थे। और मेरा ख्याल तब तक. आज भी हम देखते आ रहे हैं चाय और तंबाकू. ये दो बिजनेस के अंदर सिर्फ गुजराती. गुजराती है। बड़े प्लेयर हैं। अभी बाकी. काफी लोग आ गए। ऐसी बात नहीं है। अभी तो. सभी आ गए लेकिन चाय के अंदर और तंबाकू के. अंदर सिर्फ गुजराती लोग हैं।. अब तो जैसे गुजराती समाज जो है वो अच्छा. खासा पैसा कमा चुका है। जब आपने धंधा शुरू. किया था।. जी हां।. कितना पैसा था आपके पास? मेरे पास तो उस समय मैं जॉब करके आया था।.
₹1250 था।. ₹150 उस दौर का कितना हुआ आज के हिसाब से. लगभग. उस समय वो आज के हिसाब से मैं उस समय मैं. जब जॉब करता था तब मेरे को ₹600 पर मंथ. पगार था।. हम. समझिए कितना होता है।. 12 महीने का मेरे को ₹7200 मिलता था।. हम. उसमें मेरे को पूरे साल को ₹7,200 मिलता. था।. और अभी धंधा कितना बड़ा हो गया? बिनेस अभी आज की तारीख में तो मैं डेली कम. से कम 70-80 टन प्रोडक्शन करता हूं। 70-80. टन चाय का.
चाय का प्रोडक्शन करता हूं। प्रोडक्शन. करके डिस्पैच करता हूं। आज दिन भर में. प्रोडक्शन किया दूसरे दिन पूरा डिस्पैच हो. जाता है।. तो धंधा हजारों करोड़ का हो गया।. अब वो आप लगा लीजिए साफ। मैं तो ज्यादा. पढ़ा लिखा नहीं हूं। मेरे को ये सब नहीं. आता है। आप लगा लीजिए।. तो जैसे कहते हैं ना कि पढ़ा लिखा आजकल. दौर में कहते हैं कि अगर आपको धंधा करना. है तो पहले आप जाओ एमबीए करो, धंधा समझो, बड़ी-बड़ी कंपनियों में स्ट्रेटजी करो।. मेरे को ये जानना है कि जो आदमी ₹600. महीना कमा रहा था वो हजारों करोड़ रुपए का. कंपनी कैसे खड़ा कर गया? देखो बिना पढ़े.
लिखे. आदमी को खाना कब अच्छा लगता है? जब भूख लगती है. जब उसको भूख लगती है तब मेरे को भूख थी।. मेरे को भूख थी तो मेरे को बिजनेस का आप. जैसे-जैसे काम करते गया सीखते गया मैं।. मैं जब नौकरी किए कर रहा था तभी मैंने. पूरा सीख लिया था।. हम. जब नौकरी करता था तब मैं परचेजिंग का भी. सीख लिया। माल कैसे बेचता हूं वो भी सीख. लिया। मेरे में मिट्टी में बेच सकता हूं।. इतनी मेरे में ताकत है। आज भी ताकत है. मेरे पास। मैं जमीन पे लात मार के पानी.
निकाल सकता हूं। इतनी मैं ताकत रखता हूं।. मेरे हर काम में मैं इतना विश्वास रखता. हूं। मैं जो भी काम करता हूं विश्वास के. साथ काम करता हूं। आधी लड़ाई तो विश्वास. की होती है जो विश्वास कह रहा था मैं. पूरा ट्रस्ट कि आपको यकीन हो गया कि हो. जाएगा तो हो जाता है फिर. जो सोचा वो काम होना ही होना है मेरी. डिक्शनरी के अंदर इंपॉसिबल शब्द है ही. नहीं. तो ये थोड़ा समझाओ मेरे दर्शकों को भी. मुझे भी जैसे आपने कहा ना कि.
मिट्टी पे मार के गड्ढा कर सकता हूं पानी. निकाल सकता हूं ये भावनात्मक तौर पर आप जो. कह रहे हो कि उदाहरण के तौर पर कि. पहाड़ तोड़ सकते हैं जिसको हम कहते उदाहरण. देते हैं. ये कॉन्फिडेंस कैसे आता है. फिर देखो देखो मैं जहां भी काम करता था. बिलासपुर के अंदर मैं काम करता था बराबर. हम. तो एक तो मेरा मेन सेलिंग माल बेचने का तो. वहीं से मोटरसाइकिल पर 160 किलो चाय लोड. करके 50-50 100-100 किलोमीटर तक जाने का.
बीच में जितने भी गांव आता था हर गांव में. जाने का जहां होटल है किराना दुकान है. वहीं माल देने का उनके साथ परिचय अलग-अलग. जाति के लोगों से मेरी मुलाकात होती थी. सबके अलग-अलग विचार मेरे को सुनने को. मिलता था। इन सबके विचारों सुनके उनसे. मिलजुल के मैं सब कुछ सीखा हूं। मेरे से. बहुत लोग होशियार है। हम. मेरे को जरूरत है सीखने की। तो मैं उनसे. सीखा हूं और वो सब सीख के मैं आज इतना. मेरे पर मैं विश्वास करता हूं कि मैं कुछ. भी काम करूं उन्हें मैं सक्सेसफुल हो. जाऊं। कोई भी काम तो धंधे में ज्यादा सफल.
कौन होता है? वो जो ज्यादा पढ़ा लिखा है, जो ज्यादा समझदार है, जिसको ज्यादा. जानकारी है या ज्यादा मेहनती है या ईमान. आपका सवाल बराबर है। लेकिन टाइम टाइम पे. चेंज होता है। जब मैंने काम शुरू किया ना. उस समय कुछ पढ़ाई नहीं था।. हां।. अभी काफी टाइम चेंज हो गया है। अभी पढ़े. लिखे लोगों की जरूरत है।. हम. क्योंकि कहीं भी बड़े ऑफिस में चले जाइए।. किसी भी बड़े सेल्समैन से बात करिए तो वही. लैंग्वेज में बात करना पड़ेगा जो मेरे को.
लैंग्वेज में नहीं आता है। आज के टाइम में. जैसे अभी मेरे बाद मेरा सन बॉयज भाई काम. पे आ गए. हम. बराबर तो उन्होंने उनके हिसाब से काम चालू. किया बड़े-बड़े सब सेल्समैन ये थे। अभी. उनके बाद शुभम जब आएगा और अलग लेवल का काम. करेगा वो एकदम अलग लेवल का काम करेगा।. मैंने हर एक कस्टमर को पर्सनल जाके मिला।. हम ठीक है।. भाेश भाई ने थोड़े बहुत मिले बाकी फोन से. बातचीत किया शुभम जब आएगा तो पर्सनल.
मिलेगा भी Google डायरेक्ट ऑनलाइन ही. बातचीत करते रहेंगे मैसेज पे चलेंगे बात. भी नहीं करेंगे. सिर्फ मैसेज पे काम करेंगे वो लोग. तो टाइम टाइम पे चेंज होता है. 50 साल पहले चाय का धंधा क्यों किया आपने? कोई और धंधा क्यों नहीं किया? [हंसी]. क्योंकि मैं जब पढ़ता था तो मेरे जो गांव. में पढ़ाई करता था मैं मेरे फूफा जी के. गांव में रहता था।. हम. तो उनका चाय पत्ती की दुकान थी। खुली चाय. पत्ती लूज हम.
पहले गुजरात के अंदर खुली चाय पत्ती चलती. थी। पैकेट का जमाना ही नहीं था। कोई. ब्रांड था ही नहीं। कोई भी दुकान घर कोई. भी कस्टमर आता था। 250 ग्र. चाय दो। आधा. किलो चाय दो। 1 किलो चाय दो। चाय पत्ती का. नाम भी नहीं था। वो चाय दो। ये इतने रुपए. वाली। यह चाय दो इतने रुपए वाली। यह चाहे. ये सब यह चलता था। तो जब स्कूल छूटती थी. तो दुकान पे बैठते थे। सीख लिया हमने. थोड़ा-थोड़ा और फिर.
66 67 में 10वीं पास किया. दूसरे दिन नौकरी पे लग गए। वो भी चाय की. कंपनी में रिश्तेदारों की कंपनी में। वही. तो दुकान खोलना, साफ सफाई करना पूरा. बिलासपुर में चाय बेचना।. बाद में आजू-बाजू गांव-गांव को चाय बेचना।. बाद में. शुक्रवार नाइट को जाना शनिवार रविवार को. परचेजिंग करना शनिवार को दिन भर शनिवार को.
ट्रांसपोर्ट डिस्पैच करना रविवार को वापस. आना फिर वापस मार्केटिंग करना तो चाय. खरीदी भी सीख लिया बेचना भी सीख लिया और. थोड़ा बहुत तो पहले से मालूम था ना और एक. मैं बता पहले सबसे भूख भूख लगी थी बहुत. सामान्य परिवार से थे बहुत सामान्य परिवार. से था किसान किसान में क्या. भूख किस चीज़ की? नाम की, पैसे की, आर्थिक. स्थिति बदलने की किस चीज़ की भूख थी? भूख अह देखते थे। बाकी लोगों का परिवार.
देखते थे। अपने से बहुत कुछ अच्छा दिखता. था। तो अपने परिवार को आगे बढ़ाना था।. अपने जो परिवार था अपना जो रहन रहने की जो. परिस्थिति थी उसको कुछ चेंज करना था।. क्या. किसान के घर में क्या रहता था? होता है ना. कोई घटनाएं छू जाती है।. घटना ऐसी देखो. किसान के परिवार में मैं हूं। कभी-कभी.
माताजी भी खेत में जाते थे। घास काट के ला. लेके आते थे। मैं भी जाता था छुट्टियों. में। घास काट के मैं. भैंस रखते थे। दो-दो तीन-तीन भैंस रखते. थे। उसका दूध निकालते थे माता जी। दूध. अमूल डेरी में देते थे। उसका पैसा आता था।. उससे सब्जी भाजी लेते थे। खाने का सामान. आता था। बाकी खाने के लिए चावल खेती करते. थे। बाजरी की खेती करते थे। बाजी का रोटला.
और खिचड़ी और दूध का दूध का दही मक्खन घी. बनाते। छास छास की कढ़ी करते थे। यह हमारा. जीवन था मेरा।. सब्जी तो हफ्ते में एक बार शनिवार के दिन. जब पिताजी उपवास करते थे शनिवार का तब. सब्जी बनती थी। चावल और दाल. हफ्ते में एक बार पिताजी जब उपवास करते तब. बनता था।. रोटी पटली फल का जो बोलते हैं ना आप ऐसी.
रोटी हफ्ते में एक बार शनिवार के दिन जब. पिताजी बाकी रोज का नियम था बाजीगर का. रोटला खिचड़ी और कढ़ी ये रोज का नियम था. लेकिन जैसे देखते थे हम दूसरे के घरों में. क्या है दूसरे के रहने क्या है तो कुछ. चेंजिंग करने का मन में ये था कुछ तो चेंज. करना है. कहीं पर अपमानित महसूस हुए थे अपमानित. जैसे होता है ना कि लोग उपेक्षा कर देते. हैं। अपमान कर देते हैं। छोटा दिखा देते.
हैं।. बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बहुत जगह बहुत. जगह. तो कुछ ऐसा है जो कभी याद रह गया कि. जी हां बहुत जगह पे काफी जगहों पे जैसे. गांव के अंदर कहीं. फंक्शन रहता था। मैरिज सिस्टम रहती थी। तो. हमको थोड़ा पीछे करते थे। साइड में करते. थे।. हम. जो पंकज बैठती थी।. वहीं हमको बाजू में करते थे। ये सब देखे. वाले हैं बचपने में और जो बचपने में जो. देखे वाले हैं ना पूरी जिंदगी याद रहते.
हैं।. सही बात है। और वो मन में अगर अटक गया ना. तो फिर पूरी लाइफ बदल देते हैं। तो ये सब. अटके वाला था मन में।. अच्छा मैं कई बार कहता हूं कि जीवन में. अपमानित होना भी जरूरी है। आदमी को लक्ष्य. स्पष्ट दिखता है। ऊर्जा बढ़ जाती है।. बराबर है। अपमानित होने से कुछ सीखने को. मिलता है। लाइफ में अपमानित जो आदमी कोई. होता है ना तो उसको बहुत कुछ सीखने को. मिलता है।. क्या बदलता है अपमान? अपमान से जो है अपमान से अब तो को जो मन.
में जो अपमान हो गया अपना बराबर उसका बदला. लेने की इच्छा नहीं रहती अपनी।. लेकिन कुछ बन के बताना है।. हम. कुछ जीवन में कुछ बनके बताना यह अपने मन. की इच्छा रहती है।. सही बात है।. अगर जीवन में सफल होना है तो कहीं ना कहीं. अपमानित होना चाहिए।. कम उम्र में पड़ेगा। ये भी जरूरी होता है।. चाहे परिवार में चाहे पैसों के लिए. दूसरों की नजर से अब तो नीचा दिखेंगे अपन. तभी अपन कुछ आगे बढ़ पाएंगे।.
तो जैसे ये तो पहली पीढ़ी कहानी हो गई। जो. पहली पीढ़ी में निकलता है उसका संघर्ष अलग. होता है।. उसे अपमानित होना पड़ता है। उसे भूख से. समझौता करना पड़ता है। परिवार समझौता करना. पड़ता है। बच्चे टाइम नहीं दे सकते।. अब सब हो गया है।. जी हां।. तो अब जो नई पीढ़ी है उसको कैसे समझाते. होगे आप कि अब तुम्हारा संघर्ष कैसे. बढ़ेगा? क्योंकि ना ये अपमानित हुए ना. इनको पैसों का दिक्कत है।. मैं आपको पहले ही बताया कि जैसे-जैसे भी. टाइम बदलते हैं. ऐसे अपने विचार भी बदलना पड़ेगा।. हम. अभी मेरी नई पीढ़ी के साथ मैंने भाेश भाई.
के साथ काम किया। मैं बहुत कुछ इतना. कॉम्प्रोमाइज नहीं करना पड़ा। हम. आज भाेश भाई मेरी बात मैं कुछ भी बोलता. हूं मानते हैं। भाेश भाई मिस मेरी बहू हम. जिसको मैं बेटा करके बुलाता हूं।. हम. वो मैं कोई भी बात उन्होंने में रजत करते. हैं। लेकिन मैं बोलो ना वो बात मान लेते. हैं।. हम. चाहे उनको पसंद आया नहीं आया तो भी मेरी. बात मानते हैं। फिर बाद में मैं सोचता. हूं। फिर उनकी बात में एक्सेप्ट भी होता. हूं। उनकी बातों में एक्सेप्ट भी होता. हूं। ऐसी बात नहीं है। लेकिन पहले तो मैं.
मेरा ही ये करता हूं भाई ऐसा करो आप लेकिन. बाद में सोचते हां बेटा बराबर है आपने. बोला ये बराबर किया. तो नई पीढ़ी भी जो है जमाने के हिसाब से. बदलती है और वो हिसाब से मेरे को भी बदलना. पड़ेगा उनके साथ बदला. तभी मैं काम कर कर पाऊंगा. ठीक है आपने जैसे कहा कि शुरू में जब शादी. ब्याह होता था पीछे बिठाते थे. हां यानी कि अपनी कीमत ही नहीं होती थी. अब पैसा आ गया रुतबा आ गया समाज में नाम. हो गया देश दुनिया जान रहा है. जी हां. पैसा क्या बदल देता है.
पैसा हर चीज बदल देता है। पैसा आदमी को. जमीन से ऊपर तक उठा देते हैं। लेकिन मैं. थोड़ा अलग सोच रहा हूं। पैसे के साथ-साथ. में कुछ अच्छा काम जो पैसा. अपन ने मेहनत करके प्राप्त किया है उसको. अगर अच्छे काम में वापपे ना तो उससे भी. ज्यादा इज्जत मिलती है हम. और मेरे को भी जो आज मान सम्मान मिला है. जो मैंने दो मेहनत करके दो पैसा कमाया है.
उसमें से एक पैसे मैंने अच्छे काम में. वापरा है करके मेरे को ज्यादा मान सम्मान. मिला है पैसे से बाद में मिला मैंने जो. कुछ अच्छे काम किया। समाज के लिए उपयोगी. काम किया।. समाज को लोगों को जो जरूरत है वह काम. किया। तो उसी मेरे को आज सबसे ज्यादा. रिस्पेक्ट मिल रहा है।. आपको समय मिलता है पिक्चर-विक्चर देखने का. टीवी? मैं पिक्चर तो नहीं देखता। मैं टीवी देखता. रहता हूं। सुबहेरे बैठता हूं। टीवी चाय. पीते-पीते मैं न्यूज़ वगैरह देखता हूं।. कभी कोई सीरियल देख लेता हूं।.
एक पिक्चर आई थी धड़कन बहुत पहले आई थी।. जी हां।. तो उसमें सुनील शेट्टी बड़ा गरीब रहता है।. हां। बाद में वो अमीर बन जाता है।. वो तो बहुत से. उसका एक बड़ा फेमस सीन वायरल होता है कि. मेरे पास ₹50 थे।. अब मैंने ₹00 करोड़ कमा लिए।. अच्छा. और लोग कहते हैं भाई क्या फार्मूला है कि. इसने ₹50 से ₹00 करोड़ कमा लिया। आपने तो. हजारों करोड़ कमाया है। सुनील शेट्टी ने. बताया नहीं। लेकिन जो लोग मोबाइल पे नई. पीढ़ी लेके बैठे रहते हैं। जजी वाले बाकी. सब के यार फार्मूला क्या है?
तो ये ₹50 से कैसे करोड़ कमा लेते हैं? वो. नहीं बताया। आप ही बता दो। [हंसी]. देखो ये तो वे क्या है कि. काम करते गए काम करते गए बराबर मैंने तो. एक वृक्ष लगाया बराबर मैंने वृक्ष लगा के. उसको पानी डाल के उसको संभाला बड़ा किया. मैंने जहां तक हो उसकी बड़ा किया बाद में. उसके अंदर भाेश भाई ने आने के बाद उसमें. खत डाला उसकी दवाई वगैरह डाला और वुक्स.
किया ये जो भी बड़ा काम जो भी हुआ है. मैंने सिर्फ पेड़ लगाया है। बाकी पूरा काम. भावेश भाई ने किया है। हां, हम दोनों मेरे. को साथ लिए साथ में और मैं उनको पूरापू. सहयोग दिया। भावेश भाई बोलते मेरे को ये. बिजनेस करना है। करो. ₹1 करोड़ लॉस गया। मैंने उनको यह नहीं. बोला क्यों लॉस गया? मैं जानता हूं बिजनेस. किया है करके लॉस गया ना। ये बिजनेस. करते-करते सीखेगा।.
लेकिन वही बिजनेस में उन्होंने कई करोड़. रुपए कमा के दिए मेरे को। तो मैं इनको खुल. छोड़ने वाला हूं। आप काम करिए। काम करेंगे. तो सीखेंगे ना। इनको मैं कभी भी बंद के. नहीं रखा मैंने. कि भाई इतना ही काम करना। ऐसा ही करना है।. इनको नहीं देना बाल इनको दे पैसे डूब. जाएंगे। ऐसा नहीं मैं कभी नहीं बोला हूं।. तुम काम करते जाओ। रिस्क तो लेना ही. पड़ेगा। बिजनेस के अंदर लाइफ के अंदर आगे. बढ़ना है तो आपको रिस्क तो लेना ही. पड़ेगा। आप रिस्क लेंगे तभी आगे बढ़ेंगे।.
बड़े सपने देखो। बड़े सपने देखो और सपना. सच करने की पूरी कोशिश करो आप। आप जरूर. आगे बढ़ेंगे।. तो जैसे मान लो कोई नया बच्चा है भाई जो. आपको सुन रहा है।. जी हां।. उसको धंधा करना है।. जी हां।. आपका 50 साल से ऊपर का तजुर्बा है।. जी हां।. उसे कोई भी धंधा करना है उसे क्या सलाह. दोगे? कि ये तीन चीजें करो। ये तीन चीजें. मत करो।. बिल्कुल।. क्या बताओगे आप? मैं उनको बोलूंगा भैया आप सबसे पहले तो जो. भी काम करते हैं ना उसके बारे में पूरा.
स्टडी करिए। उसके ऊपर पूरा विश्वास करिए. कि मैं जो काम कर रहा हूं बिल्कुल सही काम. है। अच्छा काम है और पूरा आज के टाइम में. सिस्टम से काम कराइए। मैंने जो काम किया. मेहनत से किया। लेकिन मैं मेरे बच्चों को. ये बोलता हूं कि आप सिस्टम से काम करिए और. ये सिस्टम से काम कर करके एक एक बिज़नेस. नहीं अनेक बिज़नेस कर रहे हैं लोग। तो आने. वाले जो जो कुछ नए लोग जो है उनको यही. बोलूंगा भाई बड़े सपने देखो सपना सिद्ध. करने का सोचो और जो भी काम करते हैं ना पर.
उसके ऊपर विश्वास करो और बहुत मेहनत करो. कड़ी मेहनत करो. कड़ी मेहनत करो आप बिल्कुल सब भरोगे जो भी. बिजनेस करेंगे वो अब जैसे आपने बताया कि. आप 60 70 टन. 80 टन. 80 टन प्रोडक्शन कर रहे हो. जी हां. रोज. रोज. 80 टन आप प्रोडक्शन चाय का कर रहे हो. जी हां. लेकिन हिंदी पट्टी में कई लोग ऐसे अभी भी. मिले मुझे जिन्हें विक्रम विक्रम टी का. नाम नहीं पता। तो एक हमें ये बताओ कि. विक्रम टी 80 टन अगर प्रोडक्शन जो कि बहुत. ज्यादा होता है।. तो ये कहां-कहां आप इसको बेच रहे हो?
कहां-कहां जा रही है? क्योंकि 80 टन बहुत. बड़ा नंबर है।. 80 टन अभी जो प्रोडक्ट 80 टन का प्रोडक्शन. जो हो गया है ना तो भारत के अंदर 22 स्टेट. के अंदर मेरी चाय जाती है।. ओके।. सबसे ज्यादा महाराष्ट्र है। गुजरात है।. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना बराबर जम्मू. कश्मीर अभी चालू किया है। उत्तर प्रदेश. में हमने काम चालू किया है। बढ़िया. ऐसे अभी सभी जगहों पे पूरे अभी नेशनल. ब्रांड हो गया है मेरा हम. अभी आज की तारीख में मेरी जो कंपनी है.
तो सर्वे होता है ना बड़ी-बड़ी कंपनी का और. हमारे मेरी हमारी ये सोच है भाेश भाई की. ये सोच है कि कंपनी को चौथे नंबर पे लेके. जाना. ओके. कंपनी को चौथे नंबर पे लेके जाना है ये. भाेश भाई की सोच है. बाकी चार कौन-कौन सी कंपनी और आगे है. इसमें भी. हमारे इससे आगे तो इंटरनेशनल कंपनियां है. तो जैसे जैसे ये कंपनियां हैं। इनके पास. अरबों करोड़ का. व्यापार है।. व्यापार है।. जी हां।. भरोसा है।. एक बहुत बड़ी लेगसी है।. हां।. इनके मुकाबले तो आप काफी नई कंपनी है। 50.
साल के बाद भी. मैं हमारी कंपनी एक यंग कंपनी बोला. जाएंगे।. हम. सब कम से कम वर्षों में हमने ये आए वाले. हम लोग। बहुत कम सालों के अंदर हम इतना. डेवलप किए वाला है। बाकी जितनी भी. कंपनियां सब 100-100 साल पुरानी कंपनी है।. ये वो कंपनियां हैं जिनको हम टीवी पर दिन. भर देखते हैं। जिनके लेगसी हम सुनते रहते. हैं।. इनसे कैसे मुकाबला करेगी विक्रम टी? बिल्कुल कर सकते हैं साहब। क्वालिटी के. जोर पे हम. क्वालिटी के जोर पे हम यह मुकाबला कर सकते.
हैं। हम भी अभी फुल टीवी ऐड पे आ रहे हैं।. हम. हम भी जो ऐड करते हैं और क्वालिटी और हर. जगह पे हमने डीलर फिक्स करना उनसे काम करा. के लेना।. मार्केटिंग मैनेजर रखा हमने वो जो काम करा. के लेते हैं। हम पूरे पूरे भारत में जितने. भी डीलर हैं उनसे डायरेक्ट बात नहीं कर. सकते। भी. हम. हम हमारे जो मेन जो है सब जो है उनसे बात. करते वो पूरा मार्केट में बातचीत करके. हमको रिपोर्टिंग करते पूरा रिपोर्टिंग आता. पूरा रिपोर्टिंग WhatsApp पे कंप्यूटर पे.
लैपटॉप पे पूरा रिपोर्ट आ जाता है वो भी. पढ़ने से. धंधा होता है धंधे में सबसे बड़ी चीज. भरोसा होता है. विश्वास. कि मैं मेरे पापा Tata की गाड़ी खरीदते थे. तो मैं भी Tata ही खरीद के लेके आया. क्योंकि मेरे को लगता है ये अच्छी है या. कोई सामान वो लेते थे उसी का मैं भी ले. चला गया हमें लगता है यही सही है उसमें से. भरोसा उठा के जैसे मेरे घर में चाय की बात. करो तो मेरे घर में कभी ताज आती थी।. ज्यादातर टाटा की चाय आती है या और वाग. बकरी वकरी आई उसको मैंने उतना नहीं लिया।. बट सारी कंपनियां ही हैं। अब इनकी जगह मैं.
एक नई कंपनी जो मेरे लिए यूपी में नहीं. है।. जी हां।. ये भरोसा कैसे लाऊं कि मैं जाऊं। भाई मैं. मेरी क्वालिटी के ऊपर मैं एक तो सबसे पहले. विश्वास करता हूं। और फिर मैं ऐसे आदमी. लगा के ऐसे सेल्समैन लगा के प्रत्येक. दुकानद दुकान पे जाके उनसे समझा के कोशिश. करके हमारे चाय का ब्रांड हम चालू करने की. कोशिश करते हैं और दुकानदार को भी गारंटी. देते हैं कि भ कोई भी कस्टमर चाय वापस. लाया तो वो आपसे वापस लेते हैं पूरी. गारंटी के साथ तो बराबर माल बिकता है।. अच्छी चाय क्या होती है? अच्छी चाय बोलो.
जिसके अंदर अच्छी सुगंध आना, अच्छा टेस्ट. आना, अच्छा कलर आना।. बिल्कुल जिस अच्छी फ्लेवर. जैसे मैं गया हूं चाय के फैक्ट्री में. बागानों में गया हूं मैं बागान भी देखे. फैक्ट्री में बनता भी देखा मैंने।. अच्छी चाय कैसे पहचाने? अच्छी चाय जो पहचानना ना. वो तो ज्यादा करके देखने से तो ज्यादा. पहचान नहीं होते कभी भी।. जब तक चाय बनाएंगे नहीं। जब तक उसका टेस्ट. करेंगे नहीं तब तक अच्छी चाय क्या है. मालूम नहीं पड़ेगा आपको। आपके कब चाय पीते. हैं दिन भर में?
मैं सुबहरे एक चाय पीता हूं। बाद में 11. 12:00 बजे एक वक्त पीता हूं। हम. शाम को 4:00 बजे पीता हूं। दिन में तीन. चार कप चाय पीता हूं मैं।. आपको पढ़ते-पढ़ते आज हमने पढ़ा कि चाय को. हिंदी में क्या कहते हैं? आप जानते हैं? चाय को. हिंदी में क्या कहते हैं? चाय को हिंदी में चाय बोलते हैं।. नहीं हमारे यहां पे आज हमारी रिसर्च टीम. ने हमको बताया कि उसको बड़ा लंबा चौड़ा. उसके बारे में कहानी है। चाय को हिंदी. शुद्ध हिंदी में कहते हैं दुग्ध जल. मिश्रित शर्करा युक्त पर्वतीय बूटी।. नहीं मेरे को मालूम नहीं था अच्छे से।.
[हंसी]. हमने कहा भाई साहब थोड़ा सा दिमाग कम है।. अच्छा आपको क्या लगता है? हिंदुस्तान में. सबसे ज्यादा क्या पियाता है? चाय, पानी, दारू या खून? [हंसी]. देखो ऐसे तो पानी ज्यादा पिया जाता है. लेकिन जहां ठंड ज्यादा है वहीं पे दारू भी. पीते हैं। बाकी चाय के शरीर का कोई पी. नहीं है। चाय यानी चाय। चाय एक ऐसी चीज है. हम. हर जगह चाय जलती है। अच्छे प्रसंग में भी. चाय जलती है। बुरे प्रसंग में भी चाय जलती.
है।. मयत पे भी चाय. चाय जलती है। [हंसी]. घर पे रिश्ते के लिए आए कोई भी तो भी चाय।. बात नहीं पटी तो भी जाते-जाते चाय पिलाते. हैं उनको।. नाराज भी चाय भाई साहब चाय तक नहीं पूछी. इन्होंने हमसे।. चाय से दोस्ती भी बनती है। चाय से दोस्ती. टूटती भी है।. हम चाय से लोग प्रधानमंत्री बनते हैं। चाय. से लोग करोड़पति उद्योगपति बनते हैं।. [हंसी]. चाय कमाल की चीज है। लेकिन ओशो ने कहा था. कि जब हम यहां से मर के जाएंगे ऊपर तो. भगवान सबसे पहले यही पूछेंगे चाय चाय.
पिएंगे आप? [हंसी]. और ना यकीन हो तो जब मर के आना तो पूछ. लेना ऊपर देख लेना तो चाय इश्क है सर. जी चाय चाय. जिनको चाय से इश्क है किसी ने बड़ा अच्छा. कहा था कि चाय पीने वाले लोगों से इश्क. करो वो बड़े वफादार होते हैं. जी हां. वो गर्मियों में भी पसीने में चाय ही पीते. हैं. चाय पीते हैं. जब लोग कोल्ड ड्रिंक मांग रहे होते हैं. राइट राइट. लेकिन चाय जैसे क्या आपने क्या परिभाषा. निकाला सर कि अच्छी चाय जैसे हम भारत भर. में घूम रहे हैं. जी हां. तो मान लीजिए कहीं जा रहे हैं ढाबा है. ठेला है होटल है कैसे पता करें कि अच्छी.
चाय यहां मिल है. अभी तो जब तक पिएंगे नहीं तब तक कैसे. मालूम पड़ेगा. एक बार कोई भी होटल पे अपन जाते आज बहुत. सी होटल ऐसे हैं भ हम जालना में रहते हैं. जालना में बहुत सी जगह होटल ऐसी है जहां. हम घड़ी-घड़ी चाय पीने के लिए जाते हैं. डेली जाते हैं चाय पीने के लिए क्योंकि. देख लिया भ यहां पे चाय अच्छी बनती है. अच्छी चाय बनती है।. हालांकि इस पे हमने एक चीज निकाला था. हां. कि यहां चाय अच्छी अच्छी कहां बनती है वो. तो हम नहीं बता सकते. अच्छा. लेकिन कहां चाय नहीं पीनी वो हम बता सकते.
अच्छा हर वो दुकान जहां ₹20 से महंगी चाय. मिल रही हो और ₹100 सस्ती कॉफी। इसका मतलब. वहां अच्छी ना चाय मिलेगी ना कॉफी।. राइट? आप देख लेना।. अच्छी चाय वही मिलेगी जहां ₹20 के नीचे. होगी।. होटल में भी अच्छी चाय का चलन करना अपने. हाथ में है।. सर, बड़े होटलों में चाय कभी अच्छी मिलती. ही नहीं।. मिलती नहीं है। जो चाय टपरी पे सुकून. मिलता है बड़े होटल।. वो जो उबाल के आपको देता है और आप पीते. हो, कहते हो वाह! आप पी के दो घूंट रख देते हो।.
पीते ही नहीं है।. हां।. जैसे हमने नहीं पी है। [हंसी]. पीते ही नहीं है।. तो इसी पे हमने डिकोड किया था कि जहां ₹20. से महंगी चाय हो वहां मत पियो और जहां. ₹100 सस्ती कॉफी हो वहां मत पियो। ये. दोनों खराब होती है।. राइट राइट राइट राइट। [हंसी] सही बात है।. पहला स्टॉल कहां लगाया सर आपने? पहला. दुकान कहां से? पहली पूंजी कैसे जमा की? अह भाई मैं तो पूंजी का सवाल ही नहीं था. क्योंकि मैं जालना में रहता था। जालना के. नजदीक 150 कि.मी. जलगांव करके एक सिटी है।.
हम. वहीं पे चाय की बहुत बड़ा मार्केट है। तो. मैं रात की बस से जाता था अपना। उससे चाय. परचेस करता था। अर्ली इन द मॉर्निंग बस. में. लोड करके आ जाता था। वापस 10:00 बजे झालना. आता था। डिलीवरी वाले को ओपन करके ब्लेंड. करके अपना पैकिंग कर मार्केटिंग करता था. और ट्रस्ट था मेरे ऊपर तो मेरे को क्रेडिट. पे देते थे बेच के मैं वापस दूसरे जाता था. चार तीन-चार दिन के बाद हफ्ते में दो बार. ऐसा परचेस करने के लिए लाता था मैं.
धीरे-धीरे सेल बढ़ने लगा वो खुद अपने को. बेचने लगे. और सेल बढ़ने लगा फिर डायरेक्ट कोलकाता तो. कांटेक्ट था ही अपना लेकिन क्वांटिटी लगती. है अपने को फिर क्वांटिटी बढ़ने के बाद. कोलकाता से आने लगा फिर. तो जैसे उस दौर में भी पुराने लोग रहे. होंगे जो चाय का काम करते होंगे।. जी हां।. तो उनको कैसे आपने उनसे कैसे ओवरकम कर. लिया? उनसे कैसे आगे निकल गए? फिर. वो क्या नहीं किए या क्या आपने ऐसा किया. कि वो मार्केट से कमजोर पड़ गए और आप आगे.
बढ़ गए।. मैं आपको पहले बोला जैसे टाइम बदलता ऐसे. बदलना पड़ेगा। बराबर है ना? हम. पहले जब मैं पढ़ाई करता था उस समय खुली. चाय का चलन था। बराबर. हम. खुली चाय चलती थी। कोई नाम नहीं था। लेकिन. मैं देखा कि जब अपने को कुछ ना कुछ नाम. देना पड़ेगा हम. अपनी प्रोडक्ट का कुछ ना कुछ नाम देना. पड़ेगा जब तक नाम नहीं देंगे तब तक आपका. मार्केट में वैल्यू नहीं होंगे आपको कोई. पहचानेंगे इन्हें नहीं तो चाय दो ₹50 किलो.
वाली चाय दो 60 वाली चाय दो ऐसा चलता था. लेकिन नाम नहीं था मैं बोला नाम तो हो ना. फिर जब मैंने नाम रखा तब फिर आप सेल बढ़ने. लगा। फिर उसके पीछे बहुत मेहनत किया. ब्रांड बनाने के लिए। बहुत स्कीम रखा. मैंने। छोटी-मोटी स्कीम चलाया जो है मेरे. आईडिया में जो स्कीम आई वो स्कीम चलाया. मैंने। उसमें मार्केट में मैं एंटर हो. गया। बढ़ते गया मैं आगे।. हम्म।. तो अभी कितने फ्लेवर? कितने वैरायटी की.
चाय आपके पास है? अलग-अलग ब्रांड की चाय है मेरे पास।. बहुत चार 810 ब्रांड है मेरे पास।. फ्लेवर में बोला तो मैं एक इलायची चाय. बनाता हूं। इलायची. मसाला चाय बनाता हूं। मसाला के अंदर पूरा. गरम मसाला पूरा रहता है। इलायची प्योर. इलायची वापपरता हूं। एसेंस नहीं यूज़ किया. हूं अभी तक। प्योर इलायची की चाय बनाता. हूं मैं। चाय के अंदर इलायची मिक्स करता. हूं और मेरा अच्छा ब्रांड चलता है। टीवी. के ऊपर ऐड रेगुलर चलती है। इलायची चाय की.
चलती है। मेरी ऐड चलती है।. हम. मेरा बाकी रियल चाय जो है एक विक्रम. ब्रांड करके है मेरा विक्रम। हम. उसका ब्रांड बहुत बड़ा ब्रांड है मेरा. डस्ट में है सीटीसी में भी है विक्रम. सीटीसी है विक्रम डस्ट है विक्रम मसाला है. विक्रम इलायची है मेन विक्रम ब्रांड है. मेरा. तो जैसे डस्ट जब मैं चाय के वहां फैक्ट्री. में गया था. तो उन्होंने मुझे बताया कि जो मोटे दाने. वाली चाय होती है वो बढ़िया चाय होती है।. प्रीमियम चाय वो जो झर के आता है झरना.
टाइप का मसाला टाइप या उसको कह दो आप वो. सबसे डस्ट बेकार होती है। [हंसी] आप कह. रहे हो कि डस्ट वाली चाय बढ़िया होती है।. सबसे ज्यादा वही बेच रहे हो आप।. अलग अलग-अलग स्टेट में अलग-अलग टाइप की. चाय का चलन होने वाला है।. हम. जैसे आपका दिल्ली हो गया, यूपी हो गया, सिटीसी चलता है। गुजरात के अंदर दाना चलता. है। हमें महाराष्ट्र के अंदर डस्ट चाय का. चलन है।. बाकी. डस्ट चाय को तो मानते हैं रद्दी क्वालिटी. की।. नहीं नहीं कौन बोला कि जो डस्ट चाय तो. सबसे ऊंचे रेट में बिकने लगी आजकल। उसका. प्रोडक्शन बहुत कम है।.
वो तो बाकी चाय पत्ती से ₹-50 ज्यादा रेट. में बिकने लगी चाय।. कैसे मतलब जो बचा वो तो बचा कुचा माल होता. है ना।. नहीं नहीं कौन बोला ऐसा बचा कुचा चला गया? अरे नहीं नहीं चाय का एक जो ग्रेड बना. उसको अलग-अलग छलनी से अलग-अलग ग्रेड बनाया. जाता है।. हां अलग हल्का माल थोड़ी बनता वो. कोई ऐसा नहीं है। हल्का माल नहीं बनता। जो. सीटीसी में जो माल बनता है वही डस्टब माल. बनता है।. जो दाने में जो ग्रेट चाय बनी क्वालिटी.
वही चाय डस्ट में बनती है।. नंबर टू रिफाइंड हो चली गई। बढ़िया. नहीं जी नहीं नहीं नहीं आप आप फैक्ट्री. बराबर देखे नहीं है। आप चलिए मेरे साथ मैं. आपको बताता हूं।. ये तो गुजरात में फिर दाना क्यों बिकता. है? पहले से सिस्टम ही ऐसे है दानेदार चाय. बिकने का। दिल्ली में दानेदार चाय बिकती. है। यूपी में दानेदार बिकती है।. हां वही हमारे जैसे. एमपी एमपी छत्तीसगढ़ में डस्ट भी नहीं. दाना भी बीच का पीएफ ग्रेड बिकता है।. हम्म. चाय के अलग-अलग बहुत से ग्रेड है।. हम्म. वो अलग-अलग ग्रेड से चाय हर स्टेट में. अलग-अलग चल गया वाला।.
तो ग्रेड मतलब क्वालिटी वाइज होता होगा. ना? नहीं। ग्रेड बोलो तो उसकी साइज।. ओके।. साइज उसको ग्रेड बोलते हैं।. साइज के हिसाब से।. तो ये डस्ट वाली चाय में क्या खास होता. है? क्योंकि हम तो इसे बेकार मानते थे अब. तक।. नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं है।. हां तो वही से पूछ रहे क्या चाय में जो है. ना जल्दी आपको कलर वगैरह निकल जाता है और. होटल वाले जल्दी ज्यादा करके डस्ट चाय का. वापरते हैं. होटल्स में. और चाय का सबसे ज्यादा यूज़. होटल के अंदर ही होता है।. घर गत्तो ग्राहक पूरा महीने के अंदर.
250 ग्राम और 500 ग्राम चाय वापेंगे। जब. होटल के अंदर डेली 1 किलो 2 किलो चाय. वापते हैं हम. तो होटल में सबसे ज्यादा कंजू होती है चाय. आपकी कंपनी का नाम पहले असम टी था. जी हां तो असम टी विक्रम टी क्यों बन गई. आ टी कंपनी था लेकिन वो आसाम टी कंपनी. उसका. ट्रेडमार्क नहीं मिलता क्योंकि स्टेट के. नाम से हमको कुछ ये नहीं मिल सकता वो. हिसाब से फिर हमने विक्रम ब्रांड रखा हमने. मतलब विक्रम ही क्यों लिया आपने. उस समय टीवी के अंदर विक्रम और बेताब अब.
सीरियल आती थी।. हां विक्रम बेताल पीठ पलट करता था।. जी हां। बहुत बहुत फेमस हो गया था।. हां।. हर सैटरडे या संडे को शाम को 5:00 बजे. सीरियल आती थी।. हम. तो मैंने विक्रम नाम उठा लिया। मेरे को ये. नहीं मालूम था कि इतना बड़ा विक्रम ब्रांड. बन जाएगा। सोचा ही नहीं था मैंने कि भ एक. विक्रम नाम होना ना तो मेरे लड़के का नाम. है ना मेरे पोते का नाम है कि मेरे कोई. रिश्तेदार का नाम विक्रम तो है ही नहीं।. तो मैं एक विक्रम ले लिया। वो विक्रम. विक्रम विक्रम करके फेमस हो गया। तो बाद.
में जो बच्चे उनका नाम विक्रम क्यों नहीं. रखा किसी का? [हंसी]. बच्चे जब हुए तब भी इतना फेमस नहीं था. नाम।. तो इसमें दिक्कत नहीं आई कि पहले एक. ब्रांड बेचा था फिर दूसरा ब्रांड बेचा।. कुछ नहीं। उस समय कोई मार्केटिंग नहीं. करता था मैं। पहले तो मैं जब 1975 में. जालना में आया ना तो पहले तो 8 साल 10 साल. तक मैं खाली रिटर काउंटर ही किया।. हम. ओनली रिटर काउंटर। उसके बाद धीरे-धीरे. पैकिंग किया। हाथ का पैकिंग किया। बाद में. प्लास्टिक पैकिंग किया। फिर पॉलिस्टर. पैकिंग में भी आ गए। अभी फुल्ली ऑटोमेटिक.
में आ गया अभी तो. अभी दुबई तक पहुंच गए आप. जी हां अभी दुबई क्या अभी तो हमको पता है. ना आपको हमको हर पूरे दुनिया में चाय. फैलाना है. सोच बड़ी है सब मेरी बहुत बड़ी सोच है. छोटी सोच के आदमी नहीं हम लोग. तो दुबई के शेख आपकी चाय पिएंगे. जी हां बिल्कुल पिएंगे. बिल्कुल पिएंगे हमने तीन बार तो वही. एक्सिबिशन में हमने स्टॉल लगाया दुबई में. कहेंगे अल हबीबी हम तुम्हारा चाय पीते. [हंसी].
चाय कमाल की चीज वैसे है।. बिल्कुल।. 1975 में आपने धंधा शुरू किया था।. जी हां।. साइकिल से धंधा शुरू हुआ था।. जी हां। जी हां।. आज हजारों करोड़ों की कंपनी है।. जी हां।. किस-किस सेक्टर में आज काम कर रहे हैं? और. ये धंधा इतना बड़ा कैसे हो गया? मैं अभी साइकिल पे जब चलता था ना चाय का. काम शुरू किया था। धीरे धीरे धीरे धीरे. धीरे काम बढ़ते गया। अभी मैं चाय पत्ती के. साथ-साथ कंस्ट्रक्शन बहुत बड़ा काम है. मेरा। एजुकेशन में हम लोग का काम करते. हैं। पॉलिस्टर प्रिंटिंग का काम करते हैं.
हम लोग। कलरफ्लेक्स के नाम से करते हैं।. इसके अलावा जैसे हम लोग अभी हम लोग ने. एलपीजी पेट्रोल पंप बाय श्री ज्यादा गैस. वो नाम से हमने चालू किया है। अलग-अलग ऐसे. पैकेजिंग यूनिट हमने चालू किया है।. पॉलिस्टर का बताया आपको।. तो जैसे चाय का धंधा 22 स्टेट में है। यह. धंधे कितने स्टेट में है? वो तो अभी. पॉलेस्ट का तो काफी बड़ा काम है। अहमदाबाद. में जो हम जिसके साथ काम करते हैं वो. अहमदाबाद की 10वें नंबर कंपनी है। हम.
कलरफ्लेक्स बोल के जो है औरंगाबाद में. कंस्ट्रक्शन का काम है। पुणे में. कंस्ट्रक्शन का काम है। जालना में. कंस्ट्रक्शन का काम है। औरंगाबाद में. स्कूल है। पुणे में कॉलेज वगैरह है। हां. मेरा और एक सबसे बड़ा काम गुजरात में आनंद. में शेयर ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट कंपनी. जेके सिक्योरिटी कंपनी जो गुजरात के अंदर. उसके 15 16 ब्रांचेस है. बॉम्बे में है बिहार में दो जगह. मुजफ्फरपुर पटना में है.
महाराष्ट्र में है जालना औरंगाबाद बॉम्बे. ऐसा इसका भी बहुत बड़ा काम है. तो ये तो वो काम है जो जनता के साथ आप कर. रहे हो जिसमें आपका मुनाफा हो रहा है. जनता के मुनाफे के लिए आप क्या कर रहे. हैं? जनता के मुनाफा तो क्योंकि भगवान दिए हैं. तो कुछ देना भी जरूरी है।. जी हां, हम करते थे बहुत कुछ काम करते. हैं।. क्या जैसे. देखो हम जो एक तो सबसे पहले जालना में जो. रहते थे हम भाई पानी की बहुत तकलीफ थी।. महीने में एक बार पानी आता था।.
तो मैंने कुछ दोस्तों को इकट्ठा किए। ऊपर. एक ग्रुप बनाया।. गानेवाड़ी जल संरक्षण मंच जो एक तालाब का. नाम है गानेवाड़ी 12 किलोमीटर दूर जालना. से तो वहीं से पानी जालना सिटी में आता है. फिल्टर हो के घर-घर जाता है फिर उसमें 90. साल पहले वो तलाव बना था. लेकिन बरसात में आजू-बाजू खेतों में से. गाल आ जाती थी उसमें तो जो तलाव 25-25 फुट.
गहरा था वह हार्डली 5 7 फुट रह सब गाल जमा. हो गए तो हमने दोस्तों ने मिलकर काम चालू. किया हमने गाल निकालना काम चालू किया. अब वो तो गाल निकालना चालू किया हिम्मत. किए. अच्छा काम पूरा गांव जुड़ गए तो गांव जुड़. गया तो हमको बहुत ये हुआ कि भ अच्छे काम. में तो बहुत बेनिफिट है तो और दुनिया भर. के पहचान सब मिनिस्टर आने लग गए कौन से.
मिनिस्टर नहीं आए वो हमको नहीं मालूम जो. हमको यानी के डायरेक्ट स्टेज में साथ में. बैठने लगे मिनिस्टर लोग. हम. अच्छे-अच्छे मिनिस्टर आने लग गए सब पूरे. हर एक पार्टी के लोग आने लग गए. तालाब का बहुत बड़ा काम किया जो लास्ट 13. 14 साल से काम चल रहा है तलाव का काम उसके. बाद गरीब बच्ची की शादी कराना अभी तक हमने. 2002 से चालू किया गरीब लड़कियों की शादी.
कराना. झालना एक ऐसा एरिया है कि जो खेड़ेपाड़े. में लोग गरीब है वहीं दहेज की सिस्टम बहुत. है। तो जिसको दो या तीन लड़की है उसको एक. लड़की की शादी करने के लिए पांच एकड़ जमीन. बेचना पड़ता है तो गिरवी रखना पड़ता है।. तो जिसका 15 एकड़ जमीन तीन लड़की की शादी. किया तो वो तो जीरो हो गया। फिर खाएगा. क्या? फिर हमने जब जालना में सामूहिक. मैरिज का पहले चालू किया तो मेरे को 6.
महीने तक गांव-गांव घूमना पड़ा। तब बड़ी. मुश्किल से हमको ₹5100 बना. लेकिन उनको हमने ऐसे भव्य सामूहिक मैरिज. गया और लड़की को पूरा घर बार दिया हमने. पूरा हर चीज दिया मंगलसूत्र से लेके हर. चीज उनके घर में अलमारी दिया पालंग दिया. गद्दा दिया उसको हर चीज दिया घर के पूरे. बर्तन दिया उसको उसको एक पैसे खर्चा दिया. ऐसा काम किया हमने तो लोगों को दिख के आया.
दूसरे साल हम ऐसा मैंने डिक्लेअ किया एक. महीने फुल हो गया। पहले साल छ महीना घूमना. पड़ा। दूसरे साल एक महीने में हो गया।. तीसरे साल जैसे हमने डिक्लेअ किया लाइन लग. गई। अभी हम लोग हमको पूछने को आते हैं। कब. है? कब लेकिन हमारा फिक्स है। अखा 30 के. दिन हमको शादी करने का एकांकी। अभी एकांकी. जगह 75 होने लगी।. 70 होने लगी। ऐसा होने लगा।. तो एक तो गरीब लड़कियां की शादी करते हैं।. दूसरा गरीब लड़के को एजुकेशन पढ़ाते हैं.
हम। देखिए भैया मैं एक स्कूल के अंदर. अध्यक्ष हूं। एक समाज का मैं अध्यक्ष हूं. गुजरात समाज का। उस स्कूल में मैं देखता. हूं फंक्शनों में कि स्कूल की लड़कियां. स्टेज पे आके बोलती है। तो कुछ-कुछ. लड़कियां मेरे को बहुत होशिया लगती है। उस. समय मैं जात नहीं देखता हूं। कलेक्टर बन. जाते हैं तब हमको हमारे पैसे कीमत समझते. हैं कि भाई हमने जो किया है वह सही किया. है। हमने जो कमाया है ना मेहनत करके सही.
कमाया हमने। ये हमारी पैसे कीमत लगती है. हमको। ऐसे गरीब लड़कियां को पढ़ाते हैं हम. लोग।. बहुत से ऐसे सामाजिक काम करते रहते हैं हम. लोग। जाड़ लगाना काम है समझो उसका वह भी. काम करते रहते हैं। फिर अभी बहुत सी जगह. पे नाले बंद हो गए वाले हैं। पोकलाइन लगा. के हम साफ सौफाई करा के देते हैं। ये सब. हम काम करते रहते हैं। ये हमारा सामाजिक. काम है। बाकी दूसरा कोई सामाजिक काम नहीं.
है। मेन हमारा काम है ये। सबको लेके सबके. साथ मिलके करते हैं। लेकिन काम सब मिलके. करते हैं। नाम मेरा करते हैं।. चुनाव लड़ने के बाद नहीं हुआ कभी आपका? आए. थे बहुत बड़ी राज करने वाली पार्टी आई थी. घर पे बैठ के रात को 2:00 बजे तक हम. आप पार्टी और दूर से नमस्कार. क्यों. इच्छा नहीं होती है. जाने की इच्छा नहीं होती. अच्छे लोग पॉलिटिक्स में तो अच्छा नहीं है. आना चाहिए लेकिन अभी पॉलिटिक्स जरा.
या धंधे वालों को दूर रहना चाहिए. ऐसा नहीं है गलत धंधा जो करता है वो डरते. हैं. हम. हम कोई डरते नहीं है लेकिन. हमको इस सामाजिक काम में ज्यादा इंटरेस्ट. है। राजकरण में इंटरेस्ट कम है।. ठीक है। इस सफर में कोई गलती भी हुई आपसे? 50 साल की लंबी यात्रा है।. देखो गलती बोलो तो होती रहती है गलती ऐसी. बात।. क्या कोई गलती है जो आप चाहेंगे कि आपने. पीढ़ी को बताएं। नए बच्चों को जो सुन रहे. हो आपको कि ये अवॉइड करो।.
देखो हम तो जब जरूरत थी माल बेचने की. बराबर है ना हम. तो ब्लाइंड ट्रस्ट करके हमने चाय बेचा है. हम. अंधा विश्वास करके चाय बेचे तो बहुत सी. जगह हम फंस भी गए वाले हैं बहुत सी जगह. फंस भी गए हैं। कभी ज्यादा कमाई करने के. लिए कुछ हल्का माल भी लेके हमने फंस गए. वाले हैं। तो ये सब चीजों को हम थोड़े. परेशान भी हुए हैं। लेकिन अभी हम हमारे. पीढ़ी को यह बोलते कि आप ज्यादा पैसा. कमाने के लालच में मत जाइए। सिर्फ.
क्वालिटी के ऊपर ध्यान दो। और जब से ये. दिमाग में बैठी बात तब से हमने क्वालिटी. के ऊपर ध्यान दिया तब से हम डे एंड डे. प्रगति के पथ पे चल रहे हैं हम लोग। पीछे. मोड़ने का काम ही नहीं है। बिल्कुल।. मतलब आप ये कह रहे हो कि छोटा कमाने का मत. सोचो। लंबा कमाने का सोचो।. बिल्कुल।. भरोसा रहेगा। भरोसा बरकरार रहा तो लंबा. जाओ।. विश्वास से विश्वास से जल्दी पैसा वाला. नहीं बनना है।. आराम से बनना है।. अच्छा यह जल्दी पैसा कमाने वाले और यह जो. आराम से कमाने वाले क्या फर्क होता है.
इनमें? जल्दी पैसा कमाने वाले जो कमा भी जरूर. लेंगे लेकिन वो टिका टिका टिका नहीं. सकेंगे. हम. और आराम से कमाने वाले जो है टिका के. रखेंगे।. ऐसे उदाहरण है आपके आमने सामने।. बहुत उदाहरण क्या है? बहुत सी कंपनी देखी. हमने किसका नाम नहीं देना हमको। अच्छा. नहीं लगता है। बहुत सी कमियां देखा हमने. जो जल्दी ऊपर भी आए इतनी जल्दी गिर गए. हैं। जैसे हमारे जान पहचान में एक लड़का. था एमबीए चाय वाला।. हां एमबीए चाय वाला. प्रफुल बहुत अच्छा तेज बढ़ रहा था। काफी.
नाम हुआ. फिर मार्केट में अभी थोड़ा सा उसका. डिस्टर्ब चल रहा है। तो आप अपने तजुर्ब से. क्या कहोगे? क्या गलत कर दिया होगा उसने? वो देखो जल्दी आगे बढ़ने के लिए उसने क्या. किया वो मेरे को मालूम नहीं है।. हम. मालूम भी हो तो मैं नहीं बताता उनको उनके. बारे में। हम. किसी के पर्सनल लाइफ में मेरे को नहीं. जाना है।. ठीक बात है। मैं एक तजुर्ब समझना चाह रहा. हूं कि ऐसे बहुत वो अकेला नहीं है। ऐसे. बहुत सारे स्टार्टअप है जो शुरू हुए अच्छा. लग रहे थे। कुछ चल गए कुछ रुक गए।. जी हां।. तो ये जो चल जाते हैं वो क्यों चल गए?
जो रुक गए वो क्यों रुक गए? क्योंकि. प्रचार प्रसार तो था। जब नाम बना था भरोसा. भी था।. तो तजुर्बा क्या? जब चल रहा है ना? चल रहा है ना? तब उन्होंने पूरा ध्यान भी. नहीं दिया वो क्वालिटी के ऊपर। एक. पॉलिस्टर कंपनी थी। बहुत बड़ा नाम था।. बहुत बड़ा नाम था। हम. फुल चला मार्केट में उसका ही नाम था। बाद. में वो क्वालिटी के ऊपर बिल्कुल ध्यान. नहीं दिया। जो फूड ग्रेड का जो मटेरियल. वहां पर है ना और दूसरा जो मटेरियल है उसे.
फर्क है। जैसे चेंज किया आप बैठ गया। पूरा. खत्म हो गया।. कई कंपनी Nokia गायब हो गई। कितनी बढ़िया. हम सबका पहला फोन Nokia का था। बहुत सी. कंपनी है हर एक का अलग-अलग. हां मतलब थिंकिंग है. तो इसमें यही रहता है कि आपको क्वालिटी. मेंटेन करना होता है और अपग्रेड करते रहो. बिल्कुल. समय के साथ. जी. ठीक बात है अ आप एक गर्व का मूल्य हमें. किसी ने बताया. आप अपने एंप्लई के साथ कैसे हो अपने.
एम्प्लई जो आपके साथ काम करते हैं. इनको कैसे-कैसे आप लेकर आए अपने साथ. देखो एक तो. क्योंकि हमें किसी ने बताया कि आपके. एम्प्लई भी ऐसे मतलब दोस्ती यारी वाले. ज्यादा थे. जी हां. देखो मैं एक तो एंप्लयर जो जितने भी है आप. चाहे एंप्लयर बोलो कि मैं उनको एक फैमिली. मेंबर के रूप में देखता हूं।. कितना बड़ा परिवार है भाई? बहुत बड़ा परिवार है।. फिर कितना अंदाजन. ऐसे तो मेरा मैंने मेरे साथ में जो ले. लेके चला हूं ना ऐसे 202 लोग साथ में चले.
मेरे साथ में। बराबर आज तो बहुत बड़ा. परिवार है। आज तो कंपनी के अंदर कम से कम. नहीं बोलो तो अभी 600 सेल्समैन है। 600. लेकिन जो मेरे साथ जुड़े वाले थे जितने भी. उनके बारे में हिस्ट्री आपको बताता हूं कि. मैं उनको मैं आगे बढ़ता हूं।. हम. मेरे साथ-साथ उनको भी मैंने आगे बढ़ाया।. हम मैं यह नहीं सोचा. कि मैं फलका खाऊं, पनीर की सब्जी खाऊं और. उन्होंने आलू की सब्जी खाना ऐसा नहीं सोचा.
कभी।. हम. मैं पनीर की सब्जी खाऊं वो भी पनीर की. सब्जी खाएगा। मैं जैसे रहता हूं ऐसा. उन्होंने भी रहना।. उनका अच्छा हित सोचा मैंने। मेरे साथ. जितने भी लोग जुड़े हैं. मैं मेरे साथ-साथ उन्होंने डायलॉग बना। वो. सोच रखा और उनको हमेशा बताता रहा मैं काम. कैसे करना हिम्मत देता रहा मैं कि भाई तुम. काम करो हम. आप मेहनत करेंगे आप बराबर सक्सेस होंगे. अच्छी क्वालिटी देना मेरा काम है मेहनत.
करना आपका काम है आपको कहीं प्रॉब्लम आप. मेरे को बोलिए मैं आपको आईडिया देता हूं. इस तरह का काम करिए आप बराबर सब के सब सफल. हो गए मेरे साथ जितने भी जुड़े वाले हैं. ना सब एक से एक हस्ती बने. सब पढ़े लिखे थे या कुछ उसमें वैसे भी थे. नहीं माफ करना ऐसे कुछ नहीं था। मेरे पास. तो ऐसे-से लोग थे कि जो मेहनत करने वाले. जैसे भाई एक दो एग्जांपल देता हूं आपको।. जालना से एक पाचोड़ करके गांव छोटा सा. हम.
वही रविवार का बाजार भरता है। मैं सुबहेरे. शनिवार रात को ट्रक में मैं चाय पत्ती. पैकिंग करके भेजता था। बाजार में मैं एक. खटिया लेता था। किराए की घर से शतरंज लेके. जाता था। बिछाता था। डिगार्ड करके भेजता. था एक-एक पूरी।. वही एक आदमी बकरियां चलाने वाला।. वह भी कुछ बीड़ी वगैरह बेचता था। उसके होश. देख लिया मैंने। मैंने उसको खड़ा कर दिया. बीड़ी वाले को। हां कि भाई तू ये धंधा कर.
और वो आज जबरदस्त बन गया।. वो यानी कि जिसको कोई जानते नहीं थे वो. गांव में आज उसको यशवंत सेठ बोला जाता है।. [हंसी]. एक ऐसे बहुत से हैं बहुत से हैं।. एक ईसापुर में एक. भिखू भाई करके हैं। मैं भिकू भाई बोलता. हूं। वो 5 किलो 10 किलो चाय हाथ मेरे.
दुकान पे आके लेके जाते थे। सिर पे रख के. अपना. बस में जाना बेचना अपना बहुत गरीब आदमी है. बहुत गरीब आदमी ईमानदारी बोलो तो कूट कूट. के भरे वाली ईमानदारी और मेहनत भी इतनी. बहुत मेहनत. आज महीने की नहीं बोलो तो 30 35 टन चाय. बेचता है वो 35 टन मेरी चाय बेचता है. महीने में. उसको आज गांव में भिकू सेठ बुलाते हैं. उनकी मिसेज अनपढ़.
उनको गांव गांव के अंदर सरपंच बनाया।. देखो अच्छी कंपनी में काम करने कितनी. इज्जत मिलती है। देख लीजिए आप।. उसको भखू सेठ बनाया। उसकी मिसेस को सरपंच. बनाया। वो समाज के बच्चों को पढ़ाते नहीं. है। बच्चे होशियार बच्चे होशियार। हम बोले. पढ़ाओ।. डॉक्टर बन गए बच्चे।. मैरिज भी डॉक्टर से हो गई।. अच्छी कंपनी से जुड़ने के बाद कितना फायदा.
होता है देख लीजिए आप. हमारा उनका परिवार का. मतलब आप ये कह रहे हो आपसे जुड़ के मेरी. भी शादी हो जाएगी. [हंसी]. आप जुड़ जाइए अगर अनमैरिड हो तो. ऐसा नहीं एक इतना हमारे ऊपर विश्वास करते. हो कि वो हर काम जो करना है हमको पूछ के. करते हैं जैसे उनके बच्चों की भी शादी. करना है तो हमको को पूछ के करते हैं। वो. खुद मेहनत करते हैं। वो खुद पैसा कमाते.
हैं। लेकिन उनको हद जाना भी रहे तो हमको. पूछ के जाते हैं। हम बोलते हैं भ आप खुद. मेहनत किए। आपका खुद का पैसा है। आप जाइए. ना नहीं बोलते। ये पैसा हम मेहनत जरूर. किया है। ये पैसा जो भी आपका है। हम आपको. पूछे बिना वापरेंगे नहीं। इतना विश्वास. करते।. तो आपने क्या ज्यादा कमाया? प्यार ज्यादा. कमाया, सम्मान ज्यादा कमाया, पैसा ज्यादा. कमाया।. इज्जत इज्जत ज्यादा कमाया, इज्जत ज्यादा. कमाया। इज्जत पैसों से होती है या बिना. पैसे के भी होती है? देखो पैसे से भी होती है और रिलेशन के.
हिसाब से होती है। व्यवहार से होता है।. मान लो पैसा आज आपके पास ना रहे।. जी हां।. आपको लगता है इज्जत रहेगी? इतनी नहीं मिलेगी। जितना मिलना चाहिए इतना. नहीं मिलेगी।. पैसा फर्क डालता है।. पैसा काम करता है। नो डाउट प्रॉब्लम।. हमने किसी को आगे बढ़ाया तो वो हमारी. इज्जत करेगा। वो तो पक्का है. हम. लेकिन उसको हमने कैसे काम करके पैसा कमाया. और उसको भी कैसे पैसा बनाया वो भी सिखाया. हमने. कि भ तूने पैसा कमाया है ना उसमें कुछ. पैसे अच्छे काम है वहां पर.
हम. देख तेरा भी कितना बड़ा नाम होता है हम. आपने कहीं जहां कहा था कि चाय के बिनेस. में ज्यादा कुछ नहीं होता बस ब्लेंडिंग और. मार्केटिंग. जी हां और क्या है चाय के अंदर ब्लेंड मेन. जो है ब्लेंडिंग और मार्केटिंग है।. ब्लेंडिंग का तरीका मालूम होना। चाय की. परख मालूम होना। मेन तो चाय की परख मालूम. होना। चाय की परख. चाय तो सारी एक ही होती है।. नहीं नहीं माफ़ करना। कौन आदमी एक सर का.
थोड़ी रहता है। आदमी एक सर का थोड़ी रहता. है। एक दिल्ली का सीएम बनता है।. और एक झाड़ू मारता है। एक सर के नहीं रहता।. माफ़ करना। एक ही आदमी के दो आ एक ही नाम. के दो आदमी रहेंगे ना। हम्।. एक ऊपर बैठता है, एक नीचे बैठता है। माफ़. करना। एक सिर का नहीं रहता है। बहुत फर्क. रहता है। एक चाय बिकती है ₹800 किलो। एक. चाय बिकती है ₹80 किलो।. तो कैसे तय होता है ये पत्ती से? या ब्लेंडिंग से?
नहीं नहीं। उसके टेस्टिंग से उसमें बहुत. कुछ गुण रहता है चाय में।. बहुत कुछ ये रहता है।. क्या होता है ब्लेंडिंग? थोड़ा बताइए ना. हमें।. नहीं। ये सब चीजें पूछो। मतलब [हंसी]. ये धंधा खराब कर देगी। नहीं ऐसी बात नहीं. है लेकिन बहुत लंबी हिस्ट्री है उसकी।. ठीक है। 50 साल पहले जब आपने चाय का धंधा. शुरू किया तब कितनी तरह की चाय थी और इस. बीच में कितनी चाय बदली? 50 साल में. बहुत बहुत चेंजिंग हो गया। बहुत चेंज हो. गया। 50 साल पहले जब मैंने चाय काम किया. एक ही क्वालिटी में रखता था। फिर.
जैसे-जैसे डिमांड बढ़ने लगी। अलग-अलग. एरिया जाने लगे हम। हर एक अलग-अलग एरिया. में अलग-अलग टाइप की चाय चलती है। क्योंकि. समझो कि आज मैं एक्स व जेड में मैं जालना. में काम करता हूं। बराबर तो मेरे एरिया. में जो चाय चलती है वो हिसाब मैंने ब्लैंड. बनाया वो चाय चालू किया। उसके बाद मैं गया. समझोगे लातूर एरिया में। तो लातूर में कौन. सी चाय चलती थी? वो हिसाब से मेरे को फाइट. करना पड़ेगा ना।. हम. मैं उनको टेस्ट तो नहीं बदल सकता उनका।. लेकिन वो जो वापसते हैं उसमें ही उससे.
अच्छी क्वालिटी बना के मार्केटिंग कर सकता. ना। तो जैसे जो जो एरिया में जाता था मैं. वो हिसाब के हिसाब से मैं ब्रांड बनाता. था। वो हिसाब अलग-अलग ब्रांड बनाना चालू. किया मैंने।. तब भी इतनी चाय थी कि ये इलायची वाली चाय. फलानी वाली चाय चाय चाय. नहीं नहीं इलायची वाली चाय तो हार्डली. दो-ती साल में चालू हो गई। तीन चार साल. में. 50 साल पहले कितनी चाय थी? एक ही चाय थी।. एक ही चाय थी। मैं चालू किया। एक से चालू. किया था।. अब ज्यादा शुरू हो गई टोचलेबाजी।. बहुत बहुत हो गए।. ये वाली चाय वो वाली चाय वो वाली।. बहुत बहुत ब्रांड हो गए। बहुत ब्रांड हो. गए। अब मेरे कम देखे कितने ब्रांड है।.
अच्छा हमारे यहां एक सर धारणा है कि लोन. लेके धंधा शुरू करो।. जी. लोन लेके धंधा शुरू करना ठीक होता है।. जरूरत पड़ने से ले सकते हैं। क्या हरकत. है? बिल्कुल लोन लेके. या पूंजी लगा के धंधा शुरू करना ठीक होता. है।. ऐसा कुछ नहीं है। लोन लेके भी काम कर सकते. हैं। लोन लेके काम किया ना तो कुछ. जिम्मेदारी बढ़ती है अपनी। लोन लेके जब. काम किया ना तो जिम्मेदारी बढ़ती है। लोन. बैंक का लोन वापस फेरीने की जिम्मेदारी. बढ़ती है। काम में और ज्यादा पे आता है।.
फोकस. जी हां। बिलकुल।. पिताजी से पूंजी लिए तो थोड़ा सा लापरवाह. हो सकते हैं।. अब हम भाई हमको तो कुछ दिए नहीं थे।. पिताजी ने जब पिताजी के पास मांगे. हम. तो बोले भाई तेरे को बिज़नेस करना है तो. कर। मेरे को तेरी बहनों की शादी करना है।. नहीं दी हमको तो।. तो आपके जो बच्चे हैं या पोते पोतियां हैं. उनसे क्या कहोगे कि आपकी पूंजी जो बचाई है. आपने उससे धंधा शुरू करें या अपने नाम से. बैंक से लोन लेके शुरू करें धंधा। नहीं. नहीं अभी अब तो समझो कि भ बैंक से तो भाई.
देखो बड़ा काम करना हो तो लोन लेना ही. पड़ेगा. हम. बराबर है ना. अपनी पूंजी भी जो वो भी वापना पड़ेगा. लेकिन ख्याल करना पड़ेगा आवक क्या है जावक. क्या है. हम. और कभी भी अपनी कुछ ना कुछ. बचत सेव करना पड़ेगा लाइफ के लिए. हम. लाइफ के लिए कुछ ना कुछ बचत सेव करना. पड़ेगा उनको. ₹10 का आवक है और ₹1 खर्चा करेंगे वह नहीं. चलेगा।.
₹10 का आवक है। ₹1 सेब रखो आप। बाकी हिसाब. से जो है वो खर्चा करो बात अलग है।. ठीक है। अगर नई पीढ़ी में कोई सुन रहा हो. सर क्योंकि आपका चाय का धंधा है। ठीक है।. लेकिन आप तजुर्बा तो 50 साल का है।. जी हां।. 75 साल की उम्र है और 50 साल 60 साल. मेरी 76 की. 76 हो गया तो करीबन 60 साल तो आपका. तजुर्बा हो गया।. जी हां। 12थ के बाद से. बिल्कुल. तो अगर तजुर्ब बताना हो कोई कोई गरीब. परिवार का लड़का हो मध्यम वर्गीय परिवार.
का लड़का हो. जिसे धंधा शुरू करना उतने पैसे नहीं है. मां-बाप उतना पैसा नहीं छोड़ गए. ठीक है. हां. किस बिजनेस में वो अपनी रुचि दिखाए जहां. पर रिस्क थोड़ा कम हो. और धंधा मेहनत करें तो बढ़ सकता है।. जी हां बराबर है। देखो बिजनेस तो भ सामने. वालों को कौन से बिजनेस में इंटरेस्ट है. कौन से एरिया में रहता है।. कौन से मार्केट उसको मिल सकता है वो सब. उसको स्टडी करना पड़ेगा। बराबर और जो भी. बिजनेस करेगा कहीं भी बिजनेस करेगा तो. सख्त मेहनत करना पड़ेगा और कहीं भी जो काम.
करेगा सामने वाले से माल लाएगा तो विश्वास. के साथ उससे जो भी माल लाया उसको पेमेंट. विश्वास के रिटर्न किया तो सामने वाला भी. दूसरे भाई डबल माल देगा आगे चलके उसको लगे. इतना माल मिलेगा लगे इतना काम कर पाएंगे. लेकिन व्यवहार साफ होना ईमानदारी होना. खैर. बिजनेस के अंदर मेहमान मेहनत. ईमानदारी. बहुत जरूरी है।. भारत के किस राज्य में धंधा करना सबसे. आसान है या सबसे मुश्किल है?
नहीं ऐसा नहीं है। बहुत से स्टेट जो है. भारत के अंदर बहुत बड़ा मार्केट है। आपकी. जितनी ज्यादा पहुंच कर सकते हैं कर सकते. हो आप भारत के अंदर। बहुत बड़ा मार्केट. है।. नहीं जैसे आप आप 22 राज्य में हो।. जी हां।. तो राज्य में जाते होंगे अलग-अलग।. अभी तो हम महाराष्ट्र में किंग हैं।. हां। महाराष्ट्र के किंग है।. तो किस-किस राज्य में सबसे ज्यादा मुश्किल. होती है? कहां-कहां आसान होता है? जी हां, अभी बहुत से स्टेट ऐसे हैं. जो हमारी लैंग्वेज नहीं समझते हैं। हम. उनकी लैंग्वेज नहीं समझते। ऐसे स्टेट में.
एक तो काम करने तकलीफ होती है और जहां पर. बहुत ही हल्की चाय का चले हैं। वहीं पर. हमको प्रॉब्लम जाता है क्योंकि हम लोग. थोड़ा क्वालिटी के अंदर मानता ये. हम. मैं चाय की क्वालिटी में मानता हूं।. क्योंकि हल्की चाय में हमको इंटरेस्ट कम. है क्योंकि हम मेरा एक ऐसा बोल. हल्की चाय से मतलब आपका क्या है? कम दाम वाली।. अच्छा. उसमें क्वालिटी नहीं बनती है।. भारत में धंधा करना आसान है विदेश में? अभी तो भारत में अच्छा हमको लग रहा है हम. विदेश में जैसे अभी तो हम स्टार्ट किया.
है।. हम. आगेगे जैसे एक्सपीरियंस आएंगे तो बताएंगे. आपको।. अच्छा पारिवारिक जो बिजनेस होता है उसमें. धंधा कितना मुश्किल होता है? जैसे आपकी तीन पीढ़ी हो गई। जी हां।. एक आपकी सोच होगी, हम. एक आपके पुत्र की सोच होगी, एक नई पीढ़ी. की सोच होगी।. राइट? तो पारिवारिक धंधे में कहां पे मुश्किलें. आनी शुरू होती है? नहीं ऐसा नहीं पारिवारिक में जो देखो जैसे. जहां बर्तन वहां टकराते तो होंगे ही सोच. देखो मेरे भी मैं मेरे पारिवारिक की बात.
करता हूं।. ये आने वाली जो पीढ़ी है पारिवारिक जैसे. भाेश भाई है बराबर।. मैंने चाय का काम चालू किया। उन्होंने. संभाल लिया। लेकिन उनके साथ-साथ उन्होंने. भी अलग-अलग क्षेत्र में काम किया। भाई भाई. ने कंस्ट्रक्शन ने काम किया, एजुकेशन में. काम किया और भी बहुत क्षेत्र में काम किया. ना. अभी शुभम आ रहा वो भी अलग-अलग क्षेत्र में. काम करेगा. करेगा काम अलग-अलग क्षेत्र में काम करेगा. हम. तो कहीं विचारों क्लैश नहीं हुआ अब तक. विचारों क्लैश का सवाल ही नहीं आता. क्योंकि जो भी काम होता है ना पूरा परिवार. मिलके काम करता है ना मेरा.
हम. मेरा परिवार जो है मैं मेरे परिवार की बात. करता हूं मैंने तो काम किया लेकिन मैं मैं. अकेले काम कर मेरा इतना बड़ा अंपायर खड़ा. हुआ। मैं नहीं मानता इस चीज को। विक्रम. मैंने अकेले नहीं बनाया है। पूरा परिवार. परिवार के साथ-साथ मेरे जितने भी मेरे साथ. जुड़े वाले जितने भी मेरे से जुड़े वाले. एंप्लई नहीं बोलेंगे। फैमिली मेंबर्स. एंप्लई नहीं फैमिली मेंबर्स वो सब मिलके. काम में हमको विक्रम बनाया है। विक्रम. मैंने अकेले नहीं बनाया।.
इसीलिए उनको गुलाब देते हो सुबह-सुबह आप।. जी हां। देता हूं मैं।. गुलाब देने का क्या मतलब है? तो गुलाब तो. लोग प्रेम ऐसा है।. प्रेम में देते हैं।. मैं घर से जब निकलता हूं. आपके पोताप पोती की उम्र है गुलाब देने की. इधर-उधर। [हंसी]. वो भावना से मैं नहीं देता हूं। जब मैं घर. से निकलता हूं तो रास्ते में फूलों का. मार्केट भरता है बहुत बड़ा।. हम. गुलाब का फूल बिकता है। बहुत से फूल बिकता. है। तो मैं अपना ₹10 गुलाब का फूल है।. इतना सारे फूल आता है। मैं काउंटर पे रख. देता हूं। जो भी कस्टमर आता है उसको गुलाब.
का फूल देता हूं मैं।. क्या सोच इसके पीछे? बस एक खुशी होती है।. अपनी धर्मपत्नी को आखिरी बार गुलाब कब. दिया था? [हंसी]. पूरा बहुत पुराने विचार के हम लोग। हम. कहां देंगे गुलाब का फूल? बहुत पुराने. विचार के हम लोग हैं।. अभी आप कह रहे थे इतनी मेहनत उन्होंने. आपके लिए की।. सबको बनाया खिलाया।. सबको बढ़ाने के लिए उन्होंने मेहनत किया. है ना।. पुराने लोग प्रेम का इज़हार नहीं करते।. [हंसी]. अब आप पहले के जमाने कहां प्रेम करते थे? [हंसी]. अभी तो आप कह रहे थे जमाने के साथ बदल.
जाना चाहिए। मैं बदला हूं। अपडेट हो जाना. चाहिए। [हंसी] तो हम भी तो आप ही की पत्नी. के बारे में बात कर रहे हैं। हम कौन सी. मैं आज भी काउंटर के ऊपर. कोई भी कस्टमर आता है ना हम. तो पहले उनको सौंप खिलाता हूं।. हम. सौंप लाता हूं मैं घर में मिसेस उसको साफ. सफाई करके धूप देके भून के उसमें थोड़ा. नमक हल्दी डाल के देते हैं मेरे को। मैं. रखता हूं। उसमें थोड़ी शक्कर डालता हूं. क्योंकि 100 आज ₹500 किलो है। ₹400 किलो.
है।. उसमें शक्कर भी डालता हूं। मिक्स केले. खाते रहते हैं। खेड़े के लोग आते हैं।. बहुत अच्छा लगता है।. पत्नी से सब लेते ही रहते हैं।. देते नहीं।. साथ देते रहते हैं। वो साथ देते रहो। हमको. मतलब आगे बढ़ाने के लिए दे। मैं जितना सुन. पा रहा हूं कि हमारे हिंदुस्तान में बड़ी. अजीब चीज है ये कि हमारे हिंदुस्तान में. पत्नियां केवल सेवा करती रहती है।. नहीं माफ़ करना।. निरंतर करती रहती है।. हम तो साथ में लेके चलते हैं उनको। [हंसी]. फूल देने से प्रेम थोड़ी बढ़ता है।. क्या पता उनको अच्छा लगे।. एक कोशिश कीजिएगा। इस बार जाके कोशिश.
कीजिएगा।. कस्टमर चीज अलग है। पत्नी चीज अलग है।. कस्टमर से आपको धंधा मिलता है इसलिए।. जी हां। [हंसी]. वो भाग जाएगा। ये साथ रहेंगे तो नहीं इनको. ये तो घर की उम्र की थी।. बढ़ता है। [हंसी]. ठीक है। हम देंगे आज से घर वाले को भी. देंगे फूल।. हां। ये एक अच्छी परंपरा है। उनको भी. एहसास कराइए वो खास। आप कस्टमर को इसलिए. फूल देते हैं ना उसे अच्छा लगता है।. जी. ताकि वो बना रहे आपके साथ।. बिलकुल बिलकुल बिलकुल। तो जो आपके साथ. परमानेंटली बना हुआ है। [हंसी]. बहुत अच्छा आईडिया दिया आपने।.
इससे आपका जीवन और खुश रहेगा। [हंसी]. वो बोलेंगे आज क्या बात गुग्गुला को फूल. दिया तो क्या जवाब देना है? तो फिर ये पॉडकास्ट आएगा तो उनको दिखा. दीजिएगा। [हंसी]. क्योंकि नहीं देंगे आप तो इसके बाद डांट. जरूर पड़ जाएगी आपको।. ये हमने विषय उठा दिया इसलिए। जैसे चाय. वाले हैं आजकल वो कैफे में कन्वर्ट हो जा. रहे हैं कि वह अपना कैफे खोल लेते हैं कि. फलाने ब्रांड का कैफे है इसका है। कुछ ऐसा. नहीं सोचा आपने कभी कि. बिल्कुल सोचे ना हमने. हम. अलग-अलग टाइप की जो अलग-अलग सीजन की जो. चाय आती है सेकंड प्लस फर्स्ट प्लस.
अलग-अलग सीजन की जो चाय थी ऐसे सोचे हमने. नहीं जैसे आजकल ऑनलाइन की दुनिया आ गई है. तो ऑनलाइन की दुनिया में कई सारे कैफे बन. गए हैं. तो हमको फलाना ब्रांड पता होता हम वहां से. चाय मंगा लेते हैं. तो आने वाली पीढ़ी वही करने वाली है सब. शुभम जो है ना वही काम करने वाले हैं. हम. अगर मान लीजिए हम कुछ हाइपोथेटिकल सवाल भी. हमने रखे हैं आपके कि मान लीजिए धंधा आज. के टाइम में खराब हो जाए और फिर से शुरू. करना. तो आप फिर चाय ही शुरू करते या कुछ और. करेंगे. भाई ऐसा हम तो सोचे नहीं खराब हो जाएगा. ऐसा सोचा ही नहीं है हमने.
हम समझना चाह रहे हैं कि अगर आज से जीरो. से फिर शुरू करना होता. जी हां. आज से भाई शुरू करना होता. चाय क्या करेंगे. तो क्या करेंगे. चाय क्या करेंगे उस पूरा एक्सपीरियंस है. अपने को पूरा अनुभव है अपने को चाय के. बारे में. चाय. जी. चाय का धंधा प्रॉफिटेबल है. प्रॉफिटेबल हर एक हर एक बिज़नेस में है. नहीं किसी बिज़नेस में ज्यादा प्रॉफिट होता. है किसी में जैसे कंस्ट्रक्शन के बिज़नेस. में लोग कहते कि अभी तो हर एक बिज़नेस के. अंदर भरपूर कंपटीशन है।. हम. बहुत कंपटीशन है। बस अपना जैसे जितना. ज्यादा टर्नओवर करो ज्यादा मार्केट फैलाओ.
वो पैसे मिलता है। बाकी कोई बिजनेस के. अंदर बिजनेस ऐसा होगा। शुरुआत का 10 साल. मेहनत उसके बाद 10 साल खाना मिलता है।. उसके बाद जो है तो रोटी रोटी सब्जी मिलती. है। ये सिस्टम हो गया। चाहे कोई भी बिज़नेस. के अंदर. 10 साल मेहनत. 10 साल पहले मेहनत करो उसके बाद रोटी. सब्जी मिलती है. हम. अच्छा खाना मिलता है. और फिर. स्वीट के सहित उसके बाद रोटी सब्जी. चलाते रहो बस क्योंकि कंपटीशन बहुत हो गए.
करने वाले बहुत हो गए हर बिजनेस के अंदर. बहुत से लोग आ गए कोई भी बिज़नेस देखिए आप. चाहे पति अकेला नहीं देखता मैं कोई भी. बिज़नेस देखिए आप. हम. बहुत हो गया आपने अपने बेटे का हज़ दो 250. बार किया अभी लेकिन उनको लेके हमको एक खबर. पता लगी कि हाल फिलहाल में उन्होंने 10. दिनों की एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा पूरी. की थी और बड़ी टफ ट्रैकिंग में से माना. जाता है।. जी हां. तो ये क्या सोच इसके पीछे थी उनकी? देखो ऐसा है कि मेरे को 75 साल पूरा हो.
रहा था। कंपनी को 50 साल पूरा हो रहा था।. ये दोनों को खुश करने के लिए उनकी सोच थी।. दोनों को एक कहना बधाई देने के हिसाब से. समझो। हम दोनों को मेरी कंपनी को 50 साल. पूरा हो रहा था और मेरे को 75 साल हो रहा. था। तो हम दोनों को बधाई देने के लिए. उन्होंने कैंप किया वाला है। सही में बहुत. ही तकलीफ वाला कैंप था ये एवरेस्ट बेस. कैंप. हम. उन्होंने आखिरी दिन तक घर में किसी को.
बोले नहीं है। उन्होंने एक सूद लाए थे। वो. तीन-4 महीने से सूद पहन के घूम रहे थे। हम. बोले भी उनको सेट होता होगा तो घूमते. होंगे लेकिन कभी हमको बताया नहीं उनके. दोस्तों को भी नहीं बताया कि भ मैं. एवरेस्ट बेस कैंप जाने वाला हूं जब पूरी. तैयारी हो गई छ सात दिन पहले जब पूरी. तैयारी करने लगे क्या-क्या लेके जाना है. क्या-क्या नहीं लेके जाना है वहीं पर क्या. प्रॉब्लम है क्या नहीं तब हमको. थोड़ा-थोड़ा बोले कि भ हमको एवरेस्ट बेस. कैंप में जाना है लेकिन हमको यह नहीं.
मालूम था कि इतना कठिन. जगहों पे जा रहे हैं ये तो जाके आने के. बाद हमको बताया कि ऐसा-सा प्रॉब्लम है कि. स्वास्थ भी नहीं ले सकते थे अपन पानी नहीं. पी सकते थे इतनी कठिन. उन्होंने हमारे लिए हमारी कंपनी के लिए. किए काम किया है बहुत-बहुत भगवान को ऐसा. लड़का देना. ट्रैकिंग का शौक उनको था या कुछ यूनिक. करना था. कुछ यूनिक करना था कोई शौक नहीं है कुछ.
यूनिक करना था उनको. कुछ करके बताना था यूनिक एक करके बताना था. लाइफ के अंदर।. लाइफ कई तरह एक्सपीरियंस कराती है।. जी हां।. आई एम श्योर आपकी लाइफ में भी कई. उतार-चढ़ाव भी रहे होंगे।. जी हां।. कभी कोई कठिन एक्सपीरियंस रहा जैसे आपके. बेटे तो गए ऊपर वो कठिन एक्सपीरियंस था।. कोई ऐसा कठिन एक्सपीरियंस जिंदगी में आया. इस 50 साल के दौरान जिसमें आप परेशान हुए. हो।. क्या हुआ? देखो के. बहुत साल पहले की बात है। जब भाेश भाई भी.
नहीं जुड़े थे मेरे साथ।. सिटी के अंदर मैं गोडाउन बनाके रखा था।. मैं चाय का ही काम करता था। और भी जालना. में काफी कंपनी चाय का काम करती थी। लेकिन. थोड़ी मंदी का शुरुआत थी मार्केट में।. मेरे पास स्टॉक काफी था मेरे पास मंदी. ग्रेड का। मार्केट में दिवाली का पीरियड. था।. मार्केट में भी लोग चाय बेच रहे थे। तो. मैंने मार्केट में. हवा कर दिया। अभी मार्केट रेट कम होने.
वाला है। चाय खरीदी मत करिए। आज जो चाय. आपको ₹100 किलो चाय मिल रही है। मैं आपको. वो चाय 95 में दूंगा। 90 में दूंगा। आप. चाय खरीद तो किसको बेचने नहीं देना। ऐसा. मेरा प्लानिंग था। मेरा गोडाउन फुल ऊपर. गया था। मेरा एक भाई है। अपंग भाई है. दोनों पैरों से तो खेती करते रहते और. गौशाला चलाते रहते। एक उनको भी टाइम पास. होना और गायों की देखभाल करने का और कुछ.
फैक्ट्री पीछे जमीन है वो संभालते रहते. हैं वो खेती करते रहते हैं तो मैं और. हमारे भाई दो ही जन थे उस समय तो दिवाली. का दिन था तो मैं अपना मार्केट में. व्यापारी को मिलने को निकला था मेरा छोटा. वाला भाई गोडाउन खोल के अगरबत्ती वगैरह. करके बंद करके घर पे गए वो कैसे हुआ मालूम. नहीं मैं मार्केट में था। एक 11:00 बजे के. टाइम में फायर हो गया।.
फायर हो गया।. आग लग गई।. आग लग गई।. मेरे को मार्केट में बुलाने को आया। बोला. आपका घोड़ा में फायर हो गया। मैं गया तो. पूरा क्योंकि उसके अंदर. चाय की पेटियां आती थी उस समय लकड़ी की।. और प्लास्टिक बहुत था मेरे पास। मेरा रॉ. मटेरियल तो प्लास्टिक और चाय पत्ती है और. दूसरा कुछ तो है ही है। प्लास्टिक था तो. प्लास्टिक में जल्दी आग पकड़ लिया तो. जल्दी फायर हो गया। बहुत बढ़िया आग फायर.
हो गया। कैसे भी करके पानी मारने से आग तो. बुझ गए। वापस बुझ के फिर हमने बंद कर दिया. लकड़ी मार के जो जल गया दरवाजे बंद फिर. रात को वापस फायर हो गया। प्लास्टिक में. अंगा रह गए होंगे। वापस फायर वापस पानी. मार के बुझा दिया। देखो कुदरत का भी साथ. होना। कुदरत का भी साथ होना।. मंदी थी भयंकर. ऐसा हो गया तो.
दूसरी कंपनी खुश हो रही थी मार्केट में वो. तो हवा फैला दिया. आसाम चाय वाला गया विक्रम चाय वाला गया वो. अभी आता ही नहीं है. लेकिन अपने भी हित रहते हैं ना जो हमको. चाय सप्लाई करते जलगांव वाले कोलकाता वाले. जलगांव वाले में पांच ट्रक चाय भेज दिया. कोलकाता वाले ने 10 ट्रक चाय भेज दिया।. जिस दिन के भूख थी उससे बहुत ज्यादा माल. भेजा। अब माल आया सब पूरा और पहले साफ.
सफाई करना ये थे महीना भर लग गया वापस काम. चालू करने में। अब पेटियों में पानी मारा. था लेकिन पेट में चाय कुछ अच्छी बच्ची थी।. उसको खोलना उसको धूप में सुखाना अपना. अच्छी-अच्छी चाय निकालना, कचरा अलग. निकालना।. एक्सपोर्ट खुल गया। एक महीने के बाद भयंकर. तेजी आ गई।. 50-50 किलो चाय बढ़ गई। कुदरत का जब साथ.
है ना फिर कोई किसकी ताकत नहीं अपने को. छीनने की।. सही बात है।. ये कुदरत का साथ. ऊपर वाला भी बहादुर का साथ देता है।. ईमानदार आदमी का।. क्यों? आपके कौन-कौन से शौक रह गए हैं अभी? मेरे को तो जो है ना दो अभी तो मैं सब. दोस्तों के साथ उठता बैठता हूं। डेली. सुबहेरे मेरे को एक घंटा. वॉकिंग करके फिर दोस्तों के साथ आधा घंटा. बैठता हूं मैं।. क्या अपनी दिनचर्या बताओ आप एक बार? मैं सुबहरे 4:30 बजे उठता हूं डेली।.
हम. एक भी दिन खाड़ा नहीं।. जब हम सोते हैं तो आप उठते हो।. हो सकता [हंसी] है. उठना अपना फ्रेश होना सेविंग करना ब्रश. करना फिर घर पे से 4 5:30 बजे में पांच कम. बाकी निकल जाने का 5 मिनट का अंतर है जहां. वाकिंग करने का 5:30 बजे वाकिंग चालू करता. हूं बराबर और करेक्ट. 5:45 बजे तक चलता रहता हूं मैं. हम. 2 घंटा लगभग.
5:00 बजे 5:30 चालू करता हूं 7:45 बजे. चलता हूं मतलब चलता रहता हूं मैं।. बीच मेंबीच में फिर बैठता हूं मैं। इसके. बाद फिर मैं दोस्तों के साथ बैठता हूं। 15. 20 दोस्त हैं हम लोग गप्पेसपे मारते हैं।. वो झाल में क्या हुआ क्या नहीं। सब ताजा. खबर लेते हैं। ताजा खबर देते हैं।. 75 साल के दोस्त भी चुगलियां करते हैं।. देखो जब पढ़ाई करते वहीं की दोस्त कंपनी. थी। अलग थी गांव में। अब यहां आए यहां की. दोस्त कंपनी अलग है। बराबर है। हफ्ते में. एक बार सब बैठ के साथ में चाय नाश्ता करते. हैं। होटलों में जाते हैं खाना खाते हैं।.
ये डेली का अपना लाइफ में और खूब खुश रहता. हूं। बहुत खुश रहता हूं। हम. बहुत खुश रहता हूं। परिवार के साथ रहता. हूं। दिन भर संडे को संडे को कुछ काम नहीं. करता मैं पूरा परिवार के साथ रहता हूं। और. गांव में रिलेशन जो मेंटेंस करना है मैं. आज करता हूं।. हम सबसे बड़ा गर्व का पल क्या रहा आपकी. जिंदगी का? सबसे बड़ा. गर्व का पल।. गर्व का. पल। जैसे होता है ना कि आप अपनी पीठ थपा. दो। बढ़िया किया मैंने।.
[हंसी]. भाई सबसे बड़ा तो जो है मेरे बच्चे तैयार. हो गए और बहुत बड़ा गर्व है मेरे लिए।. बहुत बड़ा गर्व है और. मेरे पोते तैयार हो गए। पोती तैयार हो गए।. मेरे बहू तैयार हो गए मेरे को साथ देने के. लिए। क्योंकि मैं पहले जब काम करता था तब. सोचता था. कि मैं इतना भागता हूं। इतना भागता हूं. लेकिन पीछे कौन? मैं सोचता था ऐसे भागता रहता था। भागता. रहता था। पीछे कौन?
लेकिन जब बच्चे तैयार हो गए तब मेरे को. बहुत गर्व लगा मेरे को। मेरा परिवार तैयार. हुआ तब मेरे को बहुत बड़ा गर्व लगा मेरे. को कि नहीं भ मैं जितना भागा हूं बहुत. अच्छा मैं अच्छा जितना भागता था मेरे. परिवार ने मेरे को संभाल लिया। मेरे लिए. बहुत बड़ा गर्व है।. हम. परिवार कितना जरूरी है? बहुत जरूरी है।. बहुत जरूरी है।. जैसे कई बार लोग कहते हैं कि पैसा पाने के. चक्कर में लोग परिवार भूल जाते हैं।. जी हां भूल जाते हैं। लेकिन मैं तो परिवार.
परिवार को संभाला। परिवार ने मेरे को. संभाला। खाली कुछ मन में कोई इच्छा प्रकट. मैं मन में करता हूं। मन के अंदर इच्छा. मेरे खुद प्रकट होती है। तो मेरा जो बच्चा. बच्चे की बहु मेरी काजल मेरे वो समझ जाते. हैं कि पापा की इच्छा है। बोलने की जरूरत. नहीं पड़ती।. हम. बोल के बताने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।. अच्छी बात है। खुशनसीब हैं आप।.
बहुत खुशनसीब है। बहुत किस्मत वाला हूं. मैं।. हम बहुत किस्मत वाला हूं मैं।. मैं बहुत बड़ा किस्मत लिखा गया आया हूं।. 75 साल आपकी उम्र। 76 साल आपकी उम्र है।. यस सर। 76. इसमें जो चेहरे पर मुस्कुराहट है या जो. जुबान में अभी भी ऊर्जा है, गर्मी इसके. पीछे क्या वजह है? मेरा परिवार. आदमी खुश. दोस्तों के साथ. हम. मेरे साथ जो काम करते हैं उनका प्रेम. भरपूर प्रेम। दोस्तों का प्रेम, गांव में. गांव वालों का प्रेम, चाहते चाहने वाले.
सभी का प्रेम। ये मेरी ऊर्जा है।. हमको अटल जी की बात याद आ गई। ना रिटायर्ड. हूं ना रिटायर्ड हूं।. बिल्कुल मैं रिटायर्ड नहीं हूं। मैं तो. अभी भी बोलता हूं आखिरी दम तक मैं काम. करूंगा।. तो अब तो जैसे लड़के बड़े हो गए। अब. रिटायरमेंट क्यों नहीं लेते आप कि आप. एंजॉय करो।. नहीं रिटायर रिटायरमेंट रिटायरमेंट तरीका. ही है ना। दिन भर काम बैठता हूं काउंटर के. ऊपर तीसरी पीढ़ी जब आती है काउंटर के ऊपर. वो पीढ़ी मेरे को देख के खुश होती है।. उससे अच्छा और क्या होना रिटायरमेंट?
मैं जो काउंटर पर बैठता हूं उनके दादा जी. को मैंने ग्राहक बनाया चाय देके उनके. बच्चे उनके बच्चे आ गए तीसरी पीढ़ी मेरे. सामने आ रही है. कितनी बड़ी खुशी है वो देखते हैं कि पहले. आप यहां खड़े-खड़े काम करते थे आज आप. कुर्सी में बैठे हैं हमको देख के उनको. खुशी होती है उनकी खुशी के लिए मैं काम. करता हूं वो रिटायरमेंट क्या है फिर धंधा. क्या है आपके लिए आज के दौर में. पैसा जुनून जिम्मेदारी विरासत.
धंधा में पैसा भी होना, जुनून भी होना हम. दोनों होना. पैसा भी आएगा, जुनून भी काम करने का बनेगा. और काम तो करना ही पड़ेगा। भाई. आखिरी दिन तक काम तो करना ही पड़ेगा।. जैसे समय बहुत तेजी से बदल रहा है। सारे. धंधे का स्टाइल बदल रहा है।. पहले हम टीवी करते थे। अब हम पॉडकास्ट कर. रहे हैं।. जी हां।. चाय का धंधा क्या लग रहा है? कैसे बदलेगा. आगे आने वाले समय में? देखो चाय का जो अभी. बिजनेस जो टाइप का चल रहा है.
बराबर अभी तक हमने खाली काउंटर पे बेचा. बाद में मार्केटिंग किया लेकिन अब जो है. तो. बड़े-बड़े ऑनलाइन बिजनेस चालू हो गया वो. बच्चे करने लग गए. Amazon पे बोलो ये Flipkart पे बोलो जो भी. बास्केट जो उस पे बोलो बड़े-बड़े मॉलों में. ये सब बच्चे करने लग गए पूरा काम. तो ये अच्छा है।. यस।.
बिल्कुल अच्छा है। बिल्कुल अच्छा है. क्योंकि बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा डिमांड. है उसकी।. बहुत ज्यादा डिमांड है।. जैसे हर इंसान अपने बारे में सोचता है कि. यहां से आगे क्या? जी हां।. आप भी सोचते होंगे।. बिल्कुल।. आप तो ज्यादा सोचते होंगे कि अब बच्चे. दिखाई पड़ते होंगे।. तो यहां से आगे क्या सोचा अभी आपने? यहां से आगे यही सोचा है कि हमारे जो. परिवार है, हमारे जो सभी जितने भी लोग हैं. सबने मेहनत करना, ईमानदारी से काम करना, आगे बढ़ना और देश की सेवा करना, जरूरतमंद.
को हेल्प करना, लक्ष्मी को पैक करके मत. रखो। घूमते घूम घूमने दो। अच्छे काम यूज़. करो।. पैसा सब पैसा बटोर के तजुरी में नहीं रखना. चाहिए।. नहीं।. क्यों? मैं नहीं मानता उसको। जरूरत है इतना रुको।. जितना जरूरत है इतना ज्यादा नहीं। उसको. अच्छे काम में भी थोड़ा वापरो ना। जहां से. प्राप्त किया है खेत के अंदर अगर अनाज. ज्यादा पकाना है लेना है गेहूं की खेती है.
गेहूं की खेती में ज्यादा गेहूं उपता तो. खत तो डालना पड़ेगा कि नहीं डालना पड़ेगा. आपको. तो जहां से अपन प्राप्त किया है वहीं कुछ. डालने में क्या जाता है आपको. कर्मभूमि जिसको कर्मभूमि बोलते हैं अपन. हम. जो जगह से अपन प्राप्त किया है वहीं देना. तो पड़ेगा ना तो देना क्या वही जमीन में. थोड़ी डालने का अच्छे काम में वापसना. पड़ेगा।. इस दुनिया में जो भी आया है. जी हां. एक रोज उसको जाना है।. हां जाना है।. रोज उसको जाना है। हमको भी जाना है। आपको.
भी जाना है। सबको जाना है।. जी हां।. मैंने भी एक डॉक्टर हैं बड़े सीनियर हार्ट. के। उनका इंटरव्यू किया था। तो उन्होंने. अपनी लेगसी के बारे में बताया।. अच्छा. कि मैं चाहता हूं कि मैं एक मंदिर बनवा. दूं ताकि मेरे जाने के बाद भी 500 साल तक. वो मंदिर रहे और लोग याद करते रहे।. कभी सोचते हो आप कि आपके जाने के बाद लोग. कैसे आपको याद रखें? नहीं नहीं। देखो याद कैसे करेंगे? अच्छे. काम किए आप तो याद करेंगे। ऐसे मंदिर. बनाने से के कोई स्टचू बनाने से कोई याद. नहीं करते।. फिर भी कोई विरासत जो होता नहीं कि ऐसा.
चाहता है कि ये हम छोड़ के जाए।. सबकी अलग-अलग सोच है। मेरी सोच ऐसी नहीं. है।. हम. सबकी अलग-अलग सोच है।. ओके। किस चीज का डर है आज के दौर में. आपको? मेरे को किसी चीज का डर नहीं है।. क्या परिभाषा है आपकी नजर में खुशी की आज? खुशी खाली पैसे से नहीं मिलती है। अच्छे. रिलेशन बनाओ। सबके साथ मिलजुल के रहो।. सबके साथ अच्छे रिलेशन बनाइए। आपको सबको. अपने विश्वास में लीजिए। सबके साथ ट्रस्ट.
रखिए आप। ट्रस्ट रखने में धोखा जरूर मिलता. है। कभी-कभी उस समय संभल जाना चाहिए।. मैंने भी कई जगह ट्रस्ट किया। धोखा भी. खाया होगा। लेकिन सब संभल गए हम लोग। वापस. थोड़ा ख्याल करना पड़ता है वो चीज से।. लेकिन हर एक के साथ अच्छे रिलेशन रखिए। हर. एक के साथ अच्छा व्यवहार करिए। साफ. ईमानदारी होना, साफ छवि होना आपकी. मार्केट के अंदर। आपकी गुडविल अच्छी होना. आपका.
वो अपना एक है। जैसे 76 साल आपकी उम्र है।. 50 साल आपने धंधा किया। हजारों करोड़ की. कंपनी बना ली। लेकिन इस धंधे से अलग अगर. जीवन में नए बच्चों को आपको अपनी उम्र के. तजुर्ब से सलाह देनी हो। जी हां. धंधे की बात नहीं कर रहा हूं मैं जीवन के. लिए बात कर रहा हूं. जी हां. उम्र के इस पड़ाव में आपको नए बच्चों को. सलाह देनी है. जी. क्या सलाह दोगे आप. भ अभी आने वाली जो पीढ़ी है उनको एक तो. सबसे बड़ा अच्छा एजुकेशन करना ही पड़ेगा. आने वाली पीढ़ी को एजुकेशन के बिना कुछ.
चलने वाला नहीं है पहले की पीढ़ी जो थी वो. बिना एजुकेशन का काम कर लिया अब वो पॉसिबल. नहीं है उनको अच्छा एजुकेशन करना पड़ेगा. और जो भी काम करना उसको पूरा स्टडी करना. पड़ेगा उनको पॉसिबल बोले तो जो आपको. विरासत में जो बिज़नेस मिला वो संभाले तो. बहुत अच्छा है। वो संभालते-सालते फिर. उसमें एक्सपीरियंस मिलने के बाद फिर दूसरा. बिजनेस करें तो बात अलग है।. और जीवन में सुखदख को लेकर कोई सलाह. सुख-दुख सपने परिवार इनको लेकर कोई नए.
बच्चों को सलाह. देखो परिवार को साथ जितना हिल जरूर समझ के. चलेंगे। परिवार को जितना समझ के चलेंगे. इतना सुखी होंगे।. परिवार में जितने रहेंगे सब अलग-अलग-अलग. सोच के सोच रहेंगे सबको हम. सबको समझना पड़ेगा अपने को सबको समझ के. चलेंगे गम खाना सीखेंगे थोड़ा भूलना. सीखेंगे. किसने अपने को अपने बारे में बोला उसको. भूल गए जो पहले जो होगा अपने को धोखा हो.
गया उसको भूल गए तो आदमी जरूर आगे बढ़ेंगे. और सबको लेके चले तो बिल्कुल आगे बढ़ेंगे. आपको आपकी कंपनी के लोगों को, आपके परिवार. को 50 साल पूरे होने पर हमारी तरफ से बहुत. हार्दिक शुभकामनाएं।. धन्यवाद। धन्यवाद।. और यूं ही आपके चेहरे की मुस्कुराहट बनी. रहे।. थैंक यू।. और यूं ही बेबाकी से आप बात करते रहे।. उम्मीद करेंगे कि फिर कुछ समय में हम और. आप मुलाकात करेंगे।. ओके।. प्रणाम।.
नहीं.
