Full Interview : UNPLUGGED "BATKAHI" with Chitralekha ji | Radhe Radhe
जय श्री राम जी ये जो एक नया नारा कई. लोगों को ये लगता है कि ये सनातनी नहीं है. कट्टरवादी नारा है आप इत्तेफाक रखती हैं. लोग कट्टरवादी बना देते हैं अगर कोई आज. उनके नाम से मर्यादा भंग को यह कहता है कि. मैं जय श्री राम का नारा इसलिए लगा रहा. हूं ताकि मैं अहिंसा को बढ़ावा दे सकूं वो. गलत है सो क्या एक शादीशुदा महिला के लिए. ये जरूरी है कि वो सिंदूर लगाए दिखाकर. मंगल सूत्र पहने या वो शादी वाली चूड़ियां.
दिखाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है लेकिन. कुछ चीजें जो परंपरागत है उनको अगर हम. निभा भी लेते तो उसमें कोई परेशानी नहीं. है तिलक क्यों लगाते हैं चंदन लगाने से. हमारी जो अकाल मृत्यु मतलब कभी भी कुछ. एक्सीडेंटली हो जाना वो नष्ट होता है कटर. हिंदू की परिभाषा क्या है कुछ लोग कट्टर. हिंदू के नाम पर हिंसा कर रहे हैं मंदिर. जाने की जरूरत क्या यह सवाल अगर कोई आपसे. पूछे तो कैसे आप उसे बताओगी मंदिर भी वो. जगह है जहां 100% कंफर्म है कि.
आपको भगवान तो मिलेंगे ही मिलेंगे बुद्ध. जी सनातन का हिस्सा है बुद्ध बिल्कुल. सनातन का हिसा शादी करने के तीन फायदे तीन. नुकसान के. है बड़ा कठिन क्वेश्चन. है क्या नॉनवेज खाने से धर्म भ्रष्ट होता. है या जो सनातनी है उसमें कुछ गलत होता है. या फिर यह एक सिर्फ भोजन का जरिया है और. इसको इससे अधिक नहीं देखा जाना चाहिए. नॉनवेज खाने से सिर्फ धर्म भ्रष्ट नहीं. होता बल्कि आपकी मानवता भ्रष्ट होती आप.
जानते भगवान राम का जन्म कब हुआ था चैत्र. का महीना नवमी तिथि थी मध्यान का समय था. दोपहरी का समय था पावन काल लोक विश्राम. मतलब मानते ना दोपहर का समय थोड़ा विश्राम. का समय होता है तो राम जी ने मध्यान का. समय चुना क्योंकि राम जी खुद मध्यस्थ. [संगीत]. हैं अगर तुम ना करोगी तो कृपा कौन करेगा. अगर तुम ना सुनोग तो मेरी कौन सुनेगा.
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए कि जुबां पर. राधा राधा नाम हो जाए नमस्कार पॉडकास्ट के. नए इंटरव्यू में आपका स्वागत है और आपके. साथ मैं हूं शुभंकर मिश्रा आज मेरी मेहमान. जो हैं वो खास हैं खास इस लिहाज से हैं. क्योंकि 7 साल की उम्र में इन्होंने कथा. शुरू कर दी थी. और वो उम्र जब. लोग दुनिया भर की चीजें ट्राई करते हैं तब. वो दुनिया को सही मार्ग पर लाने काम करती. हैं जिस जगह पर हम बैठे हैं ये गौ सेवा. धाम है जहां पर सैकड़ों की संख्या में गाय.
हैं जो चोटिल हैं तमाम जानवर हैं तमाम पशु. पक्षी हैं जिनका वह उपचार करती हैं आसान. शब्दों में कहे तो अपनी कम उम्र में तमाम. नेक काम वो करती हैं हमें लगा कि उनका. परिचय आपसे कराएं कुछ सवाल जो हमारे जहन. में है वह पूछे और उनके दिल की बात भी. जाने राधे राधे चित्रलेखा जी राधे राधे. आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे गौ सेवा. धाम परिवार में जी पहला सवाल जो मेरे जहन. में आता है वो यही आता है जैसे कि आपके. बारे में हमने पढ़ा जाना कि 7 साल की उम्र. से आपने ने शुरुआत की थी जी तो ये एक छोटी.
बच्ची चित्रलेखा कैसे देवी चित्रलेखा बन. गई हम चाहते हैं सबसे पहले तो आप यह बताइए. हमारे दर्शको. को देखिए बिना भगवत कृपा के तो दुनिया में. कोई चीज हो ही नहीं सकती और. अध्यात्म स्पेशली अध्यात्म एक ऐसा रास्ता. है कि जहां आपको भगवान की कृपा होना बहुत. जरूरी है और मुझे लगता है कि किसी चीज को. हुआ है भगवत कार्य के लिए हुआ है यह कई.
लोगों को थोड़ा सा बाद में जाकर रिलाइज. होता है लेकिन मैं अपने आप को बहुत लकी. मानती हूं कि मुझे वह कम एज में एहसास हो. गया और उसमें एक बहुत बड़ा योगदान मेरे. परिवार का रहा और थोड़ा सा वातावरण का रहा. क्योंकि मेरा जन्म ब्रज में हुआ है तो. मुझे लगता है ब्रज में बच्चे को कहना नहीं. पड़ता कि तुझे राधे राधे बोलना बिहारी लाल. की जय यहां बच्चा बच्चा राधे राधे कह के. ही जन्म लेता है तो मुझे लगता माहौल का. ब्रजभूमि का और मेरे गुरु तो बचपन से मुझे.
मिल गए थे 4 साल की ऐज में और कुछ कहते. मैंने ऐसा सुना है कि पूर्व जन्म का. प्रारब्ध होता है तो वो थोड़ा सा निकल के. आया और कुछ थोड़ा सा इस जन्म में मुझे. माहौल मिला तो दोनों मिलकर के यह रास्ता. शुरू हु देखिए आप श्याम जी के यहां से हम. राम जी के यहां से हैं बिल्कुल मैं. वृंदावन जब पहली बार गया तो मुझसे किसी ने. कहा कि चश्मा उतार लीजिएगा जी हमारे यहां. के बंदर बड़े बदमाश है तो मैंने एक पुजारी. थे उनसे मैंने कहा मैंने कहा यार ये तो. बड़े बदमाश हैं जी आपका चश्मा लेकर चले.
आते हैं ऊपर फिर आप फ्रूटी दीजिए या कुछ. खिलाइए वापस कर देते हैं हमारे अयोध्या. में आते हैं सिर्फ प्रसाद लेते हैं. उन्होंने बड़ी खूबसूरत बात कही जो मैं. आपसे भी साझा करूंगा दर्शकों से भी कहा. देखिए जैसे आपके राम जी वैसे आपके वहां के. बंदर जैसे हमारे श्याम. जी ये बात बिल्कुल सत्य कही उन्होंने. क्योंकि जिसकी आप सेवा करते हैं ना जिनकी. आप पूजा करते हो उनके थोड़े-थोड़े गुण आप. में आने लगते हैं तो हमारे ठाकुर जी तो. एकदम नटखट थे उन्होंने वानरों को बंदरों. को ऐसा ही बना बना दिया कि वो भी आज नटखट.
है और आपने बहुत अच्छी बात कही और आपको. शायद पता होगा ये जो राम और श्याम वाली जो. लड़ाई है ना ये बहुत दिनों से चलती आई. प्रेम की इसमें कोई ईर्षा भाव नहीं है. जेलेसी नहीं पर राम जी वाले कहेंगे हम. अयोध्या वाले हैं तो वृंदावन वाले अपने. भाव में रहते हम भी अपने ठसक से हैं हम. श्याम राधा रानी वाले हैं तो एक बहुत. सुंदर बात कहते हैं मैं कथा में भी बोलती. हूं कि राम कृष्ण दो एक है अंतर नहीं. निमेशे नयन गंभीर है और इनके चपल विशेष.
वाह दोनों में डिफरेंस यही है कि राम जी. की आंखों में बहुत गंभीरता है वहीं अगर. कृष्ण को देखेंगे तो उनकी आंखें बड़ी चंचल. है अब यहां अब वहां और वो उनके भक्तों में. भी कहीं ना कहीं देखने को मिलता है राम जी. के भक्त थोड़े गंभीर होते कृष्ण वाले. थोड़े चंचल होते हैं और शायद यही वजह है. कि यूथ क्या कृष्ण जी की भक्ति की तरफ. बड़ा आकर्षित है क्योंकि वृंदावन आप. जाएंगे तो आपको फॉरेनर्स बहुत नजर आते हैं. या आप खुद मैं आपको जब मैं देख रहा हूं तो. मेरे जहन में यही सवाल आ रहा था कि बचपन.
को हम कहते हैं कि शरारत का वक्त होता है. जवानी जो होती है करियर में फोकस सेंसिबल. होने के लिए होती है फिर बुढ़ापा आता है. जहां पर हम ये मानते हैं कि अब जीवन जो है. वो ईश्वर को समर्पित हो जाएगा लेकिन आप का. बचपन से ही जो समर्पण है तो ये कृष्ण जी. का आकर्षण है बड़े बूढ़ों का प्यार है या. जो आप पुनर्जन्म वाली बात करती हैं ये. आकर्षण तो बिल्कुल है कृष्ण का नाम ही. कृष्ण इसलिए पढ़ा क्योंकि कर्ष इति कृष्ण. जो आकर्षित करना जानता वो कृष्ण.
एक बात जो आपने कही मुझे लगता है कि सब. लोगों का यह एक फिलॉसफी लोगों ने बना ली. है एक धारणा बना ली है कि बचपन खेलकूद. पढ़ाई फिर बुढ़ापा मतलब भजन ईश्वर को. समर्पित लेकिन यह हमारा कोई भी शास्त्र इस. बात की सहमति नहीं देता उसको अग्री नहीं. करता हमारे शास्त्र कहते बचपन जो है वह. भक्ति का भजन का अध्यात्म के लिए समर्पित. होने का सबसे बेस्ट आप आपका जीवन का टाइम.
होता है क्योंकि उस समय आप बहुत कुछ सीख. सकते हैं जो आप सिखाया जाता है वह आपके. जहन में पूरे जीवन के लिए वह बंध जाता है. आप सोच कि बुढ़ापे में जाकर भजन करेंगे. जिसने बचपन में भजन नहीं किया होगा ना वह. बुढ़ापे में नहीं कर सकता क्योंकि उस समय. हम जैसे किसी भगवान के पास जाते हैं तो हम. ताजा फूल लेकर के जाते ताजा फ्रेश फल लेकर. के जाते हैं तो मुझे लगता बचपन जो है वह. फ्रेश फ. फूल है यह भगवान को देना इससे भगवान भी.
बहुत खुश होते हैं कि इसने अपने बचपन को. भगवान में लगा दिया तो यह कांसेप्ट जो. लोगों ने बना रखा है यह एकदम गलत है अगर. आप चाहते हैं कि आप थोड़ा सा अध्यात्म के. प्रति रुचि बनाए तो बच्चों को बचपन से ही. भजन में लगाए साथ-साथ में सब काम हो सकता. पढ़ाई भी हो सकती है कमाई भी हो सकती है. लेकिन भजन बचपन से अध्यात्म होना चाहिए एक. सवाल मेरे जहन में आया और यह सवाल तमाम. लोगों के मन में भी होगा आपने कहा कि बचपन.
जो होता है वो भक्त कच्चा घड़ा एक तरीके. से होता है जिसे आप ईश्वर प समर्पित करते. हैं एक आम इंसान जो रोज दफ्तर जाता है जी. नौकरी करता है बाल बच्चे हैं या उनके. बच्चों को लेकर जो सनातनी है ध धर्म से. सनातनी है उसे क्या करना चाहिए अपने धर्म. को लेकर बेसिक चीज जो हर आदमी को करना. चाहिए क्योंकि ये सवाल सबके जहन में आता. हैसे कई लोग कहते हैं नहा धो के स्नान. करके कम से कम एक जल चढ़ा दीजिए सूर्यदेव. को कुछ लोग हैं कहते हैं हनुमान चालीसा. पढ़ दीजिए कृष्ण जी की पूजा कर ली तो एक. बेसिक चीज क्या होती है जो हर आदमी को.
अपने धर्म के लिए कम से कम इतना तो करना. चाहिए हमें लगता है आप बताएंगे तो शायद. लोग उसका पालन करेंगे देखिए हम जिस युग. में जी रहे हैं ना इसको कलयुग बोलते हैं. जी कलयुग में मुझे ऐसा लगता है चाहे वो. कोई भी एज ग्रुप के लोग हो यहां आज के. टाइम के हिसाब से डिस्ट्रक्शन बहुत सारे. हैं उसके लिए अगर हम रामचरित मानस भागवत. गीता अगर इन सबका एक एग्जांपल लेते हैं. तोय यह सब एक ही बात कहती है कि मैं लोगों.
से अगर कहूं कि आप एक घंटा सुबह मेडिटेशन. करिए ध्यान करिए तो लोग मेरी बातें सुनना. बंद कर दें क्योंकि एक घंटा ध्यान किसके. बस की बात है मैं कहूं बहुत सारा डोनेशन. दीजिए तो भी लोगों के पास होते हुए भी मन. नहीं है इसके लिए बहुत सिंपल सी बात है. कलयुग केवल नाम अधारा सुमेर सुमेर नर उतर. ही पारा यह इसलिए भी कारगर होता है जैसा. आपने कहा कि जॉब जा रहे हैं पढ़ाई कर रहे. हैं अब उनको क्या करना चाहिए उनको बस अपनी. लाइफ स्टाइल में भगवान के नाम को ऐड करना.
है कैसे जैसे आप स्कूल जा रहे अगर आप. कॉलेज लाइफ के बच्चे हैं स्टूडेंट लाइफ. में आप जब अपनी बस में बैठकर स्कूल जा रहे. हैं वो जो बीच का टाइम है उस टाइम में. आपको अपने भीतर अपने मन में दिखाने की. जरूरत नहीं लेकिन आपके मन में जो भी आपको. राम जी पसंद है तो राम जी का नाम लीजिए. अगर आपको कृष्ण पसंद है आप कृष्ण कृष्ण. बोलिए इवन आप ड्राइविंग कर रहे हैं तो भी. आप भजन क्या है भक्ति केवल एक जगह बैठ कर.
के कुछ करने का नाम नहीं है भक्ति मतलब आप. जानते हो कि मेरा भगवान से रिश्ता है और. रिश्ता है जहां रिश्ता होता है वहां याद. होती है अगर मेरा आपसे रिश्ता होगा तो. कहीं ना कहीं कोई समय आएगा मैं आपको याद. करूंगी आप मुझे याद करोगे लेकिन दुख में. सुमिरन सब करें सुख में करे ना कोई अगर. सुख में कर लेते तो शायद दुख ही नहीं आता. दुख आता ही नहीं ये लोगों की गलत फहमी है. मैं हमेशा कहती हूं भगवान कोई दुख दूर. करने का कोई मशीन थोड़ी है. अगर आप भगवान के पास सिर्फ इसलिए जा रहे.
हो कि वह आपके दुख संकट दूर कर देगा और. आपको सुख सुख दे देगा तो आप बहुत गलत. रास्ते पर हो भगवान से प्रेम करने का मतलब. है कि आप जाही विधि राखे राम ताही विधि. रहिए वहां शर्त नहीं होनी चाहिए कंडीशन. आते ही भक्ति जो होती है वह मिक्स हो जाती. है फिर वह प्योर भक्ति नहीं बचती आप ये. मानती है जैसे बड़ी फेमस फिल्म थी अमिताभ. बच्चन साहब की दीवार उसमें एक सीन था कि. वो जो तुम्हारे सीढ़ियों पर कभी नहीं आया.
जी एक परसेप्शन हम सबके दिमाग में रता है. हम सब परेशान होते हैं घर में तबीयत खराब. हुई तो हम भगवान के पास चले गए हे भगवान. ऐसा ऐसा ऐसा भगवान एग्जाम आ रहा है पास. करा दो तो हम ऐसा ऐसा ऐसा ज्यादातर लोग. मन्नत मांगते हैं या जो भी करते हैं पूजा. पाठ वो परेशानी में या लालच में करते हैं. आपको लगता है ऐसा सच है ये और यह बचपन से. नीव का असर होना चाहिए कैसे मतलब एक. मां-बाप को लेके ये सच तो है आज के टाइम. में भक्ति यही हो रही है लेकिन यह गलत है. यह सही नहीं है क्योंकि अगर आपके काम बन.
रहे होंगे तो तो आप उनकी आरती उतारो ग. जैसे आपके काम में कोई बाधा आई और मैं तो. हमेशा कहती हूं भारत में 33 कोटि देवी. देवता माने जाते अच्छा यह काम नहीं बना. रहा शिफ्ट हो जाओ शंकर जी नहीं तो दुर्गा. जी दुर्गा जी नहीं तो लेकिन यह जो भक्ति. के जो पद्धति है व गलत है अभी हम ब्रजभूमि. वृंदावन में बैठे हैं वृंदावन की भूमि ने. सारे दुनिया को प्रेम करना सिखाया गोपियों. ने कृष्ण से कोई शर्त नहीं रखी राधा रानी.
ने कृष्ण से कोई शर्त नहीं रखी कि हम. जितना प्रेम करते हैं आप उतना दीजिए तो ही. हम प्रेम करेंगे इसका मतलब है भक्ति में. यह कंडीशन यह मन्नत यह यह सब चीज बिल्कुल. भी मायने नहीं रखती आप उनके प्रति समर्पित. हो अर्जुन ने कभी कृष्ण से संग मांगा आप. साथ मांग सकते हो मान लीजिए आप बहुत. परेशान है आप भगवान से यह कहिए कि भगवान. मुझे बल दो मेरी पावर मेरी थ बनिए आप.
लेकिन यह मत मांगिए कि इसको खत्म करिए तो. मैं आपका भजन करूंगा दो माला कर ली अब. इसके बाद दो करोड़ दे दो ये वाली जो भक्ति. का कांसेप्ट है ये एकदम गलत है और इस परे. आजकल ज्यादातर लोग चल रहे हैं इसलिए उनका. विश्वास जल्दी टूट जाता है क्यों बार-बार. विश्वास हटता है क्योंकि वहां उनको कुछ. चाहिए वो मिल गया तो ठीक मैगी बना रखा दो. मिनट में इंस्टेंट चाहिए उल के निकल के आ. हर चीज तुरंत चाहिए पेशेंस नहीं है भक्ति. में पेशेंस का होना धैर्य का होना बहुत. जरूरी अच्छा देखिए आप सात साल से कथा कर.
रहे हैं और क्योंकि कृष्ण जी को लेकर आपने. कहा कि यहां से प्यार जो है वो दुनिया भर. में गया और ये बिल्कुल सच बात है लेकिन. दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक. जिनके मन में बहुत सारे सवाल होते हैं एक. जो ईश्वर को लेकर सारी धारणाएं जानते हैं. और समझते हैं मेरा सवाल कुछ कुछ आपसे मुझे. लगता है आप अगर समझाएंगे तो लोगों को. क्लेरिटी थोड़ी ज्यादा मिलेगी कृष्ण भक्ति. पर कई बार कुछ लोग जो हैं वो संदेह करना. शुरू कर देते हैं जैसे तो हमें लगा कुछ. कुछ सवाल हम पूछते हैं राधा जी कौन.
हम चाहते हैं कि आप थोड़ा समझाएंगे तो. कृष्ण भक्ति और राधा जी को लेकर तो हमारे. दर्शक जो उसका आनंद भी लेंगे समझेंगे भी. और मुझे लगता है जब आप लॉजिक दे देते हैं. तो शायद उसको वोह विस्तार से आगे उन बातों. को बढ़ाते भी. रहेंगे एक बहुत ही सुंदर अष्टक है युगला. अष्टक उसमें लिखा है कृष्ण चित्ते स्थिता. राधा राधा चित्ते स्थि हरि जीवने निधन. नित्यम राधा कृष्ण गतिर ममा कृष्ण के च. में श्री राधा रानी बैठी राधा के चित्त.
में श्री कृष्ण श्याम सुंदर विराजमान है. दुनिया एक सबसे बड़ी गलती जो आजकल लोग. करते हैं वह समझते हैं कि राधा एक औरत थी. कृष्ण एक पुरुष था दोनों में प्रेम हुआ. कृष्ण ने धोखा दिया और धोखा देकर चला य. इससे ज्यादा लोग कृष्ण और राधा के प्रेम. को नहीं जानते बल्कि हमारा वृंदावन का. प्रेम कहता है वृंदावन की पद्धति कहती है. कि राधा कृष्ण में कोई भी अंतर नहीं है.
राधा कृष्ण दोनों एक ही आत्मा है क्योंकि. वह ईश्वर है वह सर्व समर्थ है उसके लिए यह. जरूरी नहीं कि एक ही शेप वह ले सकता वह. हजारों शेप ले सकता है तो जब उस ईश्वर को. लगा कि प्रेम की कोई एक आकृति होनी चाहिए. प्रेम का कोई शेप होना चाहिए जिससे लोग. उदाहरण दे सके कि यह प्रेम है तो उसी. ईश्वर ने राधा का रूप धारण कर लिया राधा. कोई फीमेल बॉडी नहीं है कोई एक गोपी नहीं. है कि औरत नहीं है वो प्रेम का एक आकार है.
और यही कारण है कि जब भी प्रेम की बात आती. है तो कृष्ण और राधा की बातें आती है और. उस प्रेम में एक सबसे बड़ी जो क्वालिटी थी. जो मैंने अभी कहा जो लोग भगवान से इच्छाएं. रखते आशा रखते उस प्रेम में एक जीरो परट. भी कोई इच्छा नहीं थी यहां तक की भी इच्छा. नहीं थी कि मैं तुमसे प्रेम करूं तो तुम. भी करो यह भी नहीं था वहां राधा का मैं जो. है वो चुका है लेकिन यह जो राधा कृष्ण का.
प्रेम है ना ये बहुत बड़ी चीज है इसको. समझने में हर एक व्यक्ति को स्टेप बाय. स्टेप चढ़ना पड़ता है हमने कभी कुछ पढ़ा. नहीं हमने भगवत गीता पढ़ी नहीं हमने. शास्त्र पढ़े और हमको लगता हम राधा कृष्ण. के प्रेम को समझ पाएंगे वो समझना आसान. नहीं है तो मुझे जो लगता है लोगों को अगर. कोई कंफ्यूजन भी है तो उनको थोड़ा सा. ग्रंथ पढ़ना चाहिए और दूसरा इस बात को. समझना होगा कि वह एक ही आत्मा ने दो आकार. धारण किए एक कृष्ण बना और एक राधा बनी ठीक. है कृष्ण जी की पत्नी रुक्मिणी जी थी.
कृष्ण जी की कितनी शादियां हुई थी भागवत. के अनुसार 16108 विवाह कृष्ण के हुए हैं. तो ये विवाह मतलब कैसा विवाह था अगर आप. थोड़ा बताएंगे इसको हमें देखिए इसमें दो. चीज शास्त्र कहता है जो वेदों की 16000. श्रुति थी उन्होंने एक स्त्री रूप धारण. किया और कृष्ण ने उन सब सबके साथ विवाह. किया आठ मुख्य रानी जो थी जिसमें से. रुक्मिणी लक्ष्मी जी का अवतार है सत्य. बाबा जी धरती का भूमि का अवतार है पार्वती.
जी का अवतार जामवली जी है तो आठ जो है यह. सब अलग-अलग देवी भगवान की पत्नी स्वरूप. में प्रकट हुई 16100 रानी जो लोग कृष्ण के. इस लीला पर उंगलियां भी उठाते हैं तो मैं. हमेशा कहती हूं देखो यह जो कहानी है य एक. राक्षस था नरकासुर उसने 16000 कन्याओ को. बंदी बनाया और सोचा इन सब के साथ ब्याह. करूंगा शादी करूं कृष्ण आए उन्होंने सबको. छुड़ाया कथा यह है जो ओरिजिनल है कि कृष्ण.
ने इन सब 16000 कन्याओं को कहा कि तुम अब. घर चली जाओ मैंने तुम्हारा मुक्त कराया अब. तुम घर जाओ लेकिन इन कन्याओं ने कृष्ण से. कहा कि यह समाज है इस समाज ने सीता मैया. को स्वीकार नहीं किया तो हम तो बहुत. साधारण नॉर्मल घर की लड़कियां हैं अब ना. हमारा मां है ना बाप है ना परिवार है कोई. हमें स्वीकार नहीं करेगा हम अनाथ है पर. हमने सुना है दुनिया में अगर कोई अनाथ हो. तो उसके नाथ जग थ आप हो आप हमें स्वीकार.
करो अब कृष्ण के मन में आया कि क्या करूं. इनको घर ले जाकर दासी बना दूं तो भी समाज. उंगली उठाएगा कि कृष्ण ने अबला नारियों का. फायदा उठाया कृष्ण ने कहा मैं तुमको इज्जत. दूंगा मैं तुमको अपना नाम दूंगा जहां. तुमको समाज स्वीकार नहीं कर रहा तुम गर्व. से कहोगी हम कौन है कृष्ण की पत्नी अब. द्वारिकाधीश की पत्नी है तो यहां कृष्ण एक. बहुत बड़े नारी पूजक के रूप में में माने. जाते हैं कि उन्होंने नारी का सम्मान करना.
विश्व को समझाया है ना कि कोई देखो शादी. आदमी क्यों करता है कुछ उसकी अपनी इच्छाएं. होती है उसको पूरी करने के लिए वो विवाह. करता है चाहे उसका साथ हो संग हो कुछ भी. ले लीजिए लेकिन कृष्ण ने यह शादियां अपनी. कोई इच्छा पूर्ति के लिए नहीं की है यहां. श्री कृष्ण ने उन कन्याओं को आश्रय दिया. है उनको सहारा श्री कृष्ण बने इसलिए ये. 16000 कन्या और शास्त्र की बात करें तो. कहते हैं कृष्ण जगत पति है तो मेरे आपके.
हम सब जो जीव है हम सबके पति पिता श्री. ठाकुर जी हैं तो 16000 नहीं भगवान की तो. करोड़ों पत्नियां हम सब अनगिन श्री ठाकुर. जी के ही है तो इस पर प्रश्न नहीं उठाना. चा आपने बीच में वुमेन एम पावर का जिक्र. किया और क्योंकि जो सवाल हम लाए थे उनसे. तर मेरे मन में सवाल आते आ रहे हैं क्या. आप यह मानती है कि हमारे जो आदिकाल में. परंपरा हमारी सनातन की रही है वहां पहले. से वुमेन एंपावरमेंट था मैं जब देखता हूं. अंजनी पुत्र हनुमान गरी. जी कौशल्या नंदन राम जी या जितने भी हमारे.
भगवान हैं मैं. ये यशोदा नंदन देवकी नंदन तो मुझे एहसास. होता है कि हर एक भगवान की पहचान जो है वो. उनकी माता से रही है और ये कितना खूबसूरत. है यहां तक कि हम राधा कृष्ण कहते हैं. पहले राधा जी का नाम लेते हैं सीताराम हम. कहते हैं तो यह आप कैसे देखती हैं क्योंकि. आजकल बड़ी चर्चाएं होती हैं सदन में. आरक्षण देने की बात चल रही 33 पर ये वो. लेकिन हमारी परंपरा में तो शायद ये हमेशा. से रहा है आदिकाल से हमेशा से रहा है और. यह हमें बड़ी इस बात का गर्व होना चाहिए.
कि हम उस सनातन में रहते हैं जहां अ शिव. की एक रात आती है पर मां की नौ रात्रिया. आती है जी इस विश्व की जब शुरुआत हुई मनु. महाराज से तो मनु महाराज के बेटे दो थे. बेटियां तीन थी तो अगर रेशो देखा जाए तो. उस हिसाब से हमेशा हमारे धर्म में नारियों. की कन्याओं की संख्या ज्यादा रही है और इस. बात का प्रमाण है कि भारत सनातन जो है वह. नारी पूजक है यह अलग बात है कि हम अपनी.
नासमझी से अपनी गलतियों से हम समझते हैं. कि हमारा जो समाज है उसमें नारी का सम्मान. नहीं है नारी इस देश की विभूतियां है श्री. कृष्ण की बात करें तो कृष्ण ने भगवत गीता. में अर्जुन को स्पष्ट नारी के सात. विभूतियां बताई नारी के साथ लक्षण नारी. में क्षमा है क्षमा अगर कंपेयर किया जाए. तो पुरुष के कंपैरिजन में नारी थोड़ा. जल्दी क्षमा कर देती है कोई जि पसंद करती. हैं जिन्हें वो पसंद करती हैं तो ऐसी बहुत.
सहन शक्ति जो सहनशीलता होती है वो नारी. में अधिक होती है तो ये कुछ-कुछ चीजें हैं. जो नारी को एक बहुत ही अच्छा सजन भगवान का. बनाती है और हमारे वेद कह रहे हैं यह बात. कोई मेरी और आपकी नहीं यत्र नार्यस्तु. पूज्यंते रमंते तत्र देवता यानी उस समाज. में देवता रहते हैं जहां नारी का सम्मान. होता है नारी की पूजा होती है और मैं मजाक. मजाक में कभी एक बात कथा में भी बोल देती. हूं जो लोग कहते हैं कि नारी कमजोर है.
महिला कमजोर है अगर उसकी जिंदा दिली देखनी. हो तो उसकी शादी प जाके देखो क्योंकि. बिहाने के लिए लड़का 100 200 की बारात. लेके आता है और वो शेरनी अकेली बिना डरे. एक नए घर में नए परिवार में हिम्मत से. पहुंच जाती है क्योंकि उसे पता है मेरे. परिवार मेरे मां-बाप ने मुझे बचपन से ही. चीजों से लड़ना सुलझ समाधान सोल्यूशन सब. सिखाया हु जन्म देने वाला कमजोर का हो. सकता. है जो रचना कर रहा है मनुष्य की चाहे.
पुरुष चाहे स्त्री जी तो वो कैसे कमजोर हो. जाता वो कहां वो तो अपने आप में बिल्कुल. बिल्कुल वो अपने आप में ही पूर्ण है उसने. इस देखो भगवान ने ना सृष्टि और नेचर इसको. बहुत बैलेंस बनाया है हम बात जरूर कर रहे. हैं आपने नारी का पूछा इसलिए नारी और. पुरुष में कोई कंपैरिजन नहीं है आज के समय. मैंने कई बार देखा बहुत सारी नारियां. लड़कियां जो होती है वो मेमन एंपावरमेंट. के लिए लिए क्या बोलती है हम पुरुषों से. कम नहीं है आपसे कहा ही किसने कि आप.
पुरुषों से कम हो या अपने आप को कंपेयर. करो जी आपकी एक अलग स्टेज है आपका एक अलग. स्थान है पुरुष का एक अलग जो पुरुष कर. सकता है वो नारी नहीं जो नारी कर सकती है. वो पुरुष नहीं तो नेचर ने बहुत अच्छा ब. वमन इंपावर क्योंकि उसके बाद मैं आगे कुछ. क्वेश्चंस लाऊंगा एक लास्ट सवाल वमन एवर. पे अ मैंने कहीं पढ़ा आजकल नारियों को. लेकर एक वमन एंपावरमेंट प कई बार मजाक. मजाक में लोग कहते हैं कि जब एक पुरुष. कमाता है तो पूरे परिवार का ख्याल करता है. मां क्या करें पत्नी लेक लेकिन जब पत्नी.
कमाती है तो कई बार वो आत्ममुग्ध हो जाती. है कि मैं कमा रही हूं मुझे किसी के एहसास. नहीं आप मानते हैं विमन एंपावरमेंट को इस. नजरिए से भी लोगों ने देखना शुरू कर दिया. है नहीं अगर यह काम कोई नारी कर रही है. उसके मन में भाव आ रहा है तो एकदम गलत है. फिर आप कहां से अपने आप को कंपेयर कर रहे. हो पुरुष से अगर एक पुरुष घर चला रहा है. और आप भी चला रहे हो तो उसमें महानता की. दृष्टि से नहीं आप एक परिवार का हिस्सा हो. अगर आप अब समाज को परिवार को कुछ दे पा. रहे हो फाइनेंशली या या किसी और तरीके से. भी तो यह तो आपके लिए गर्व की बात है अगर.
आप इससे एगोस्टिक हो रहे हैं आपके भीतर. इसको लेकर अभिमान आ रहा है तो एकदम गलत है. आपको अपने परिवार के लिए स्तंभ बनना है. स्ट्रेंथ बनना है वो आपके लिए खुशी की बात. है आपने तिलक लगाया बड़ा खूबसूरत लग रहा. है तिलक क्यों लगाते. हैं. चंदनसर पापना शम आपदा हरिते नित्यम. लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा यह शास्त्री. प्रमाण है तिलक का कि चंदन लगाने से हमारी.
जो अकाल मृत्यु मतलब कभी भी कुछ. एक्सीडेंटली हो जाना व नष्ट होता है हमारे. दुखों का नाश होता है और हमारे पास. लक्ष्मी या भक्ति का निवास होता है दूसरी. बात यह तिलक लगाना यह तिलक होता हैय ठाकुर. जी के चरण होते हैं यानी हमारे माथे पर 24. घंटे भगवान है तो हमको किससे डर हमको किसी. से डरने की जरूरत नहीं क्योंकि हमारे माथे. पर ठाकुर जी बैठे तीसरी चीज अ यह हमारी. पहचान है कि हम भगवान के हैं जैसे एक.
बच्चे की स्कूल की यूनिफॉर्म होती है जैसे. एक आर्मी वाले की अपनी यूनिफॉर्म होती है. यह भक्त की यूनिफॉर्म है कि उसके गले में. तुलसी होगी कंठी होगी माथे पर चंदन होगा. तो इससे क्या होगा कि आपको बहुत सारी. पॉजिटिविटी फील होती है और हमारे पुराने. समय में जब बड़े-बड़े योद्धा लड़ने जाते. थे युद्ध करने के लिए तो ये विजय का. प्रतीक होता था तो यह कहीं ना कहीं हमें. विजय की लेकर के जाता है और हमें भीतर से.
पॉजिटिव रहने के लिए हमेशा तैयार रता और. मस्ति को थोड़ा शांत भी करके रखता शांत. रखता है थोड़ा सा जो आज का टेंपरेचर लोग. का जल्दी बढ़ जाता है उसमें भी चंदन कुछ. हद तक हेल्प करता है ये साइंटिफिक रीजन जो. चंदन का है वो बताया जाता है एक सवाल मेरे. मन में और आता आपने कहा टेंपरेचर थोड़ा. बढ़ जाता है एक नया ट्रेंड निकला है अभार. इंसान जो धर्म की बातें करता है उसने कहा. है कि मैं कट्टर हिंदू हूं यह बीते कुछ. सालों में हम ने खास तौर पर देखा है कि. बहुत प्राउडली कहा जाता है जैसे उदाहरण के.
तौर पर मैं कहता हूं हनुमान जी की छवि. बड़ी सौम्य रही है हम लोग के जहन में बीते. कुछ सालों से हमें रद्र हनुमान जी दिखाई. पड़ने लगे हैं जो गाड़ियों में स्टीकर. लगाए जाते हैं और काफी चर्चाएं होती है तो. ये कट्टर हिंदू यह जरूरी वक्त की मांग. हिसाब से जरूरी है या यह थोड़ा ज्यादा हो. रहा है कैसे देखती हैं सनातनी और कट्टर. हिंत में आपको अंतर क्या नजर आता. है देखिए. सनातन धर्म एक ऐसा धर्म है ना जिसने.
सदियों से एक ही बात कही है कि धर्म की जय. हो अधर्म का नाश हो विश्व का कल्याण हो. हमारी जो सनातन धर्म की भावना वह यह नहीं. कि बस मेरा कल्याण हो जाए हमारा भाव है कि. विश्व का कल्याण हो अगर इसमें कोई व्यक्ति. अपने धर्म के लिए गर्व महसूस कर रहा है कि. मैं सनातनी हूं बहुत अच्छा है लेकिन अगर. आप यह कहते कि सामने वाला गलत है तो मुझे. नहीं लगता कि यह कहना या यह मानना कहीं भी. सही है कट्टर हिंदू होना अच्छी बात है आप.
अपने धर्म को मानिए आप अपने देवताओं को. माने कट्टर हिंदू की परिभाषा क्या. है कट्टर हिंदू की परिभाषा यह है कि आप. अपने धर्म के प्रति अडिग है देखिए हिंसा. में और कट्टर हिंदू में फर्क होता है कुछ. लोग कट्टर हिंदू के नाम पर हिंसा कर रहे. हैं हिंसा करते हैं और वो कहते हैं कि यह. हमको राम जी ने कहा है या ये हमको हनुमान. जी ने सिखाया है लेकिन कहीं भी शास्त्र. आपको प्रमाण नहीं दे जैसे ज मैं नारे.
सुनता हूं जो हिंदू हित की बात करेगा वही. देश पर राज करेगा जी इसमें आप किसी और के. धर्म को नहीं कह रहे हैं आप हिंदू हित की. बात कर रहे हैं लेकिन क्या यह सही है मतलब. ये कट्टरता या सनातन सौम्यता का प्रतीक. रहा है या क्योंकि बारबार हम कहते हैं कि. हमारे ऊपर तमाम अंग्रेजों ने शासन किया. मुगलों ने शासन किया लेकिन हम फिर भी. सरवाइव करें क्योंकि हमारी सौम्यता ही. हमारी पहचान थी और हम हमेशा देर सवेर अपनी. राह पर पकड़ लेते थे जी मैं बिल्कुल मानती. हूं मैं इस बात के बिल्कुल समर्थन में हूं. कि सनातन धर्म सौम्यता का प्रतीक है.
क्योंकि इस इसमें राम जी प्रगट राम जी. सौम्यता का प्रतीक है इस धर्म में महात्मा. बुद्ध प्रगट तो अगर हमारे देव ऐसे हैं. हमारे भगवान ऐसे हैं तो हम कैसे यह बात कह. सकते हैं कि नहीं हम तो जिस चीज को ठान. लेंगे वही होना चाहिए बिल्कुल भी नहीं. हनुमान जी की अगर आप बात करते हैं शंकर जी. की अगर बात करते हैं तो भले शंकर रुद्र. रूप में लेकिन उनके लिए कहा क्या गया. करुणा अवतारम संसार सार तो वो करुणा के.
अवतार है वहां भी करुणा है भोले हैं तो. इसका मतलब अगर वह रौद्र रूप में है तो. कहीं ना कहीं उनका एक पहलू जो है वह यह भी. है कि वह सौम्य है अगर कहीं समय की थोड़ी. मांग होती है कि आपको अपने धर्म को बचाने. के लिए शस्त्र उठाने पड़े तो वह इतिहास. में हुआ है चाहे वोह महाराणा प्रताप हो. शिवाजी हो उन्होंने अपने धर्म के लिए अपने. प्राणों तक का बलिदान करने के लिए तैयार. रहे लेकिन वह सबके लिए नहीं है अगर सोचो.
सभी अस्त्र उठा ले तो समाज का क्या होगा. आख के बदले आनि हो जाए उसकी उसकी एक. महत्वता है कौन हिंसा धर्म के लिए कर सकता. है वह कुछ लोग नियुक्त होते हैं हमारे सर. के ऊपर अब राजा नहीं है तो नेता है वह भी. राजा का कार्य कर रहे हैं उनके पास अधिकार. है संविधान में क्या होना चाहिए नियम क्या. होने चाहिए हम नियम हाथ में नहीं ले सकते. आज के समय में धर्म के नाम पर कुछ लोग को. तोड़ते या संविधान को तोड़ते हैं मैं उसके.
समर्थन में नहीं हूं क्योंकि हमारा धर्म. अहिंसक है यह बात सत्य है लेकिन जहां. आवश्यकता होगी उसके लिए जो अधिकारी लोग. हैं उनको आगे आना चाहिए आपने कहा बौद्ध. धर्म का भी आपने जिक्र किया कि बौद्ध. हमारे मेरे मन में एक सवाल आता है कई बार. यह सवाल चर्चा में आता है कि भारत और. नेपाल से बौद्ध धर्म की शुरुआत होती है जी. और इन्हीं दो देश में भारत में खासतौर पर. बौद्ध धर्म बहुत सीमित रह गया है. शंकराचार्य जी का बहुत होता है जी. शंकराचार्य जी के बारे में जितना मैंने.
थोड़ा बहुत पढ़ा जाना मुझे लगा कि सबको. जानना चाहिए कि कैसे उन्होंने सनातन धर्म. का विकास किया कैसे जब मैं केदारनाथ गया. तो मैंने देखा कि वहां साउथ के पुजारी हैं. आप साउथ जाते हैं तो वहां नॉर्थ इंडिया के. पुजारी मिलते हैं कितनी आप बड़ी भूमिका. उनकी मानती है कि जो यह हमारा धर्म आज. चारों चारों धाम जो हमारे मिल गए हैं आदान. या अयोध्या पाएंगे तो वहां दक्षिण भारत के. लोग आपको दिखते हैं जी कितनी बड़ी भूमिका. मानती है सनातन के प्रचार प्रसार को लेकर. और यह तरीका क्या आप मानती हैं कि बिल्कुल. सही था उस समान के हिसाब से हम सबको उनके. बारे में और पढ़ना चाहिए शंकराचार्य.
बिल्कुल पढ़ना चाहिए बिल्कुल पढ़ना चाहिए. क्योंकि आज के समय में जो अभी हम बात कर. रहे थे ना कि लोग कट्टरता के कारण इसका. कारण यह है कि लोगों ने हमारे जो आदर्श. रहे उनको कभी पढ़ा नहीं महात्मा बुद्ध के. चरित्र को कभी पढ़ा नहीं कबीर को कभी जाना. नहीं आदि गुरु शंकराचार्य जी ने जो भाष्य. लिख बु जी सनातन का हिस्सा है बुद्ध. बिल्कुल सनातन का हिस्सा है भागवत में. लिखा है भगवान के जो 24 अवता है उसमें से. एक अवतार बुद्ध है विष्णु जी के भगवान.
विष्णु के 24 अवतारों में से एक अवतार. भगवान बुद्ध है. लेकिन शास्त्र कहते हैं कि कुछ अवतार जो. कृष्ण के हैं नारायण के हैं वह एक टाइम. पीरियड उस समय जो युग की उस टाइम की. आवश्यकता होती है सिर्फ उतने पीरियड के. लिए जैसे महात्मा बुद्ध उस समय जो कुछ. अद्वैतवाद द्वैतवाद इसमें जो झगड़ा हुआ. उसके लिए महात्मा बुद्ध ने अवतार ग्रहण. किया अब वह फिलॉसफी जो है बुद्ध की वह उस.
टाइम पीरियड के लिए बहुत अच्छी थी क्योंकि. उसी समय के लिए भगवान ने अवतार लिया बुद्ध. रूप में वह हमेशा के लिए नहीं हो सकती ऐसे. हमारे भागवत में कई सारे अवतार हैं जो. किसी किसी समय के लिए लिए जाते हैं तो. महात्मा बुद्ध उस समय आए और उन्होंने. लोगों की भ्रांतियों को खत्म किया लेकिन. कुछ चीजें आज के युग के अनुसार हम शायद ना. माने तो मुझे लगता है ज्यादा अच्छा है. टाइम बदला है युग बदला है और युग के हिसाब. से हमारी जो धर्म के प्रति जो समझ है वह.
भी बदलनी चाहिए जी ठीक है आपके यहां पर. मैं आया गौशाला बड़ी अच्छी लगी मुझे. गौशाला से क्या गौ अस्पताल जी गौ अस्पताल. सही शब्द होगा क्योंकि दर्शको को बता दें. कि यहां पर गौ अस्पताल है गौशाला नहीं. जहां पर वो गाय जो बीमार है वो गाय जो. चोटिल है असहाय हैं बेबस हैं बेसहारा है. या जो अपना ख्याल खुद नहीं रख सकती ना. सिर्फ गाय बल्कि और भी जो जानवर है जैसे. कि आप डॉग्स की बात कर लीजिए जानवर या. चिड़या की बात कर लीजिए कई और बंदर बहुत. सारे जानवर यहां पर हैं यह गौशाला का.
कांसेप्ट आपको कहां से मिला क्योंकि गौ. सेवा हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है. मेरी माता जी भी दो गाय घर में रखती है. उसकी सेवा करती हैं लेकिन ये तीन 400 गाय. जो आप लोगों ने सेवा शुरू की यह थॉट कहां. से आया फिर इसके लेकर मेरे पास बहुत सारे. सवाल है थॉट बस ऐसे शुरू हुआ कि मैं कथा. सात साल के जज से कर रही हूं और जहां भी. जाते थे कथा में तो लोग अपनी गौश ला लेकर. के जाते थे अपने शहर की गौशाला और कई बार.
ऐसा देखने को मिला कि गौशाला में कोई गाय. पड़ी है इलाज नहीं है उनसे पूछो तो वह. कहते कि कोई व्यवस्था नहीं है तो पहले. हमारे मन में भी था कि गौशाला शुरू करेंगे. लेकिन जब वह देखा तो लगा कि नहीं गौशाला. नहीं हमें एक हॉस्पिटल शुरू करना चाहिए. जिससे इलाज जो गायों को ट्रीटमेंट चाहिए व. हम दे सके तो बहुत एक छोटे से संकल्प से. बहुत छोटी सी एक सोच से ये शुरुआत कर दी. पहले हम थोड़ा सा इस चीज को लेक मैं. स्पेशली थोड़ा थी कि बीमार गाय लाएंगे.
कहां से पर जब भी हॉस्पिटल शुरू हुआ नॉलेज. बढ़ी तो देखा कि गायों में तो इतनी सारी. बीमारियां है रोड पर एक्सीडेंट में पड़ी. है पैर टूटे पड़ आप लोग क्य जितना मैंने. बजट पूछा काफी पैसा खर्च होता होगा इसमें. तो कैसे आप लोग इसमें विशेषकर जो भी कथा. से धनराशि आती है वहां आवाहन किया जाता है. लोगों से कि हम एक अस्पताल चला रहे हैं. वहां जो भी लोग दान राशि अपनी देते हैं. उससे इस पूरे अस्पताल का हॉस्पिटल का.
खर्चा चलता है जी तो गौरक्षक मैं भी. प्रधानमंत्री जी को सुन रहा था एक शायद एक. साल पहले का स्टेटमेंट था कि गौरक्षा के. नाम पर कई लोग वो असली गौरक्षक नहीं है तो. हम कैसे पहचाने कि व्यक्ति गौ सेवा कर रहा. है या गाय के नाम पर अपना बिजनेस अपना. एजेंडा चला रहा है ये डिफरेंस कैसे हम पता. करें जी जी देखिए क्या होता है ना कि गौ. सेवा सेवा कोई भी हो यह हम गाय की बात कर. रहे लेकिन बहुत सारे लोग वृद्धों की सेवा. करते हैं नाथों की सेवा करते हैं दो तरीके.
की सोच होती है एक यह सोच होती है कि इससे. हमको कुछ फायदा हो कुछ लाभ हो और ऐसे लोग. हैं दुनिया में है जो शायद सेवा तो कर रहे. हैं लेकिन उनकी कुछ इच्छा होती है मैं. उसको भी गलत नहीं मानती मुझे ऐसा लगता है. कि इस दुनिया में लोग बिजनेस कर रहे हैं. शराब का बिजनेस कर रहे हैं क्यों क्योंकि. उनको पैसा चाहिए और उससे क्या दे रहे हैं. लोग को हानि दे रहे हैं परेशानिया दे रहे. हैं वैसे मैं इस बात के समर्थन में नहीं. हूं कि आप सेवा किसी लालच से करो सवाल जो. मुख्यत मेरे जहन में आ रहा है वो ये आ रहा. है गौसेवा के नाम पर इंसान का कत्ल कर.
देना ये चर्चा बहुत ज्यादा चली इस बीच में. कि शक के आधार पर कत्ल कर दिया गया और ये. एकदम गलत है ये एकदम गलत है क आप हरियाणा. में तो हमने महीनों तक विवाद देखा देखा. बिल्कुल मैं उसका बिल्कुल समर्थन नहीं. करती अगर आप एक गौ सेवक है गौ सेवक कौन. होता है जिसके हृदय में वात्सल्य हो करुणा. हो अगर वही आपके हृदय में नहीं है और आप. बिना किसी सबूत के बिना किसी प्रूफ के आप. जाते और जाकर के किसी इंसान को मार देते. तो आप सेवक कभी नहीं हो सकते अगर आपके. भीतर क्रोश है तो उसके लिए आप सरकार तक.
जाइए बड़े अफसरों तक जाइए उनसे निवेदन. करिए य गलत हुआ है इसको ठीक करिए लेकिन आप. खुद कानून को हाथ में ले लेते और आप मारना. शुरू कर देते यह एकदम गलत आप ऐसा करके कभी. एक सच्चे गौ सेवक नहीं हो सकते आप गौ सेवक. बनना चाहते तो आप गौ की माता की सेवा करिए. और कहीं कोई गाय पर कष्ट कर रहा है तो. प्रशासन के पास जाइए जी ऐसे ही कथावाचक को. लेकर सवाल आता है मन में यूथ के मन में. आता है कि कैसे पहचाने कि यह कथावाचक जो. है यह वाकई में धर्म पर समर्पित है या यह.
जो है यह जैसे बाबाओं में कई बार आता कि. ढोंगी बाबा आ गए या कई सारे बाबा तो यह भी. एक छोटा सा कांसेप्ट आता मन में तो देखिए. या तो वो ढोंगी होगा या बाबा होगा ये. दोनों चीज साथ नहीं हो सकती पहचानने के. लिए हमारे शास्त्र ने संत की महिमा बताई. है संत के जो गुण है वह बताए हैं भागवत. में लिखा है तिति क्व कारु काहा शहिद सर्व. देही नाम अजात सत्र व शांत साधव साधु भूषण. साधु के आभूषण है कि वो जब भी होगा वो.
सहनशील होगा वो शांत होगा वो उसका कोई. शत्रु आजाद शत्र वशांत लेकिन क्या है ना. समाज आजकल धोखा इसलिए खा रहा है क्योंकि. वो संतों के पास चमत्कार के लिए जा रहा है. अगर सिर्फ चमत्कार के लिए जाएगा तो हमेशा. धोखा खाएगा आप दूसरे संतों को सुनती है. बिल्कुल संतों के कारण जीवन है संते हैं. आप मैं हमारे ब्रज में बहुत अच्छी संत है. मैं बहुत श्रद्धा र पूज्य श्रद्ध श्री. बापू के प्रति मुरारी बापू जी तो उनके.
भावों को और हमारे ब्रज में बहुत संत है. उनको मैं प्रेमानंद बाबा जी महाराज तो ये. सच्चे संत है इनको किसी से कोई आशा नहीं. है कोई भाव नहीं सु बिल्कुल मैं उनका. सम्मान करती हूं क्या नजरिया आपका उनको. लेके वो धर्म का प्रचार कर रहे हैं धर्म. का प्रचार जो भी करता है वह मेरे लिए. प्रणाम के योग्य है मैं उनका पूर्ण हृदय. से सम्मान करती हूं उनके पास सिद्धि है या. जो भी क्योंकि मेरा कभी उनसे वन टू वन.
मिलना नहीं हुआ लेकिन जितना उनके बारे में. सुना है कि वो एक बहुत अच्छे स्वभाव के. धनी है मैं उसका सम्मान करती हूं. चित्रलेखा जी मेरे जहन में एक सवाल आता है. कि राम. राम जय सियाराम सीताराम या फिर जय श्री. राम क्या यह सब एक है या एक होकर भी. अलग-अलग भाव है और अलग-अलग तरीके से इनकी. भावनाए. है देखिए हाथी तो एक ही है पर आग पर पट्टी.
बांध कर के छुओ ग तो किसी को उसका पांव. खंभे बराबर नजर आएगा किसी को उसकी सूर नजर. आएगी. राम तो राम है राम हम सबके आराध्य हमारी. पहचान है और वही जब एक शक्ति के साथ जुड़. जाते हैं तो व सियाराम बन जाते हैं लेकिन. आप किस दृष्टि से राम को देख रहे हो एकम. सद सपरा बहुदा वदंति मतलब सत्य एक ही होता. है लेकिन आप किस एंगल से उसको देखते हो उस.
परे डिपेंड करता है जय श्री राम जी यह जो. एक नया नारा कई लोगों को य लगता है कि यह. सनातनी नहीं है कट्टरवादी नारा है आप. इत्तफाक रखती है लोग कट्टरवादी बना देते. हैं राम सौम्यता का प्रतीक है राम शलता का. प्रतीक है दृढ़ता का प्रतीक है लेकिन कहीं. भी अगर आप पूरे रावण के साथ उनका युद्ध. देख लीजिए कहीं भी राम ने अपने धैर्य को.
नहीं खोया अपनी मर्यादा को नहीं तोड़ा अगर. कोई आज उनके नाम से मर्यादा भंग को यह. कहता है कि मैं जय श्री राम का नारा इसलिए. लगा रहा हूं ताकि मैं अहिंसा को बढ़ावा दे. सकू वो गलत है नहीं यह सामने वाले कहते. हैं आजकल एक आरोप लगना शुरू हुआ है कि जो. लोग जय श्री राम का नारा लगाते हैं वह. कट्टर हिंदूवादी है जबकि गांव देहात में. जो ओरिजिनल नारा है व जय सियाराम या. सीताराम या जो जैसे आप वृंदावन में तो आप. राधे-राधे कहती हैं आप हरिद्वार जाएंगे तो.
बम भोले जी तो ऐसे ही गांव देहात में जय. सियाराम या सीताराम या राम राम वो कहते. हैं कि जो ये जय श्री राम आया है ये थोड़ा. सा वो कट्टर हिंदू वाला जो हिंदुओं को. जगाने आए हैं तो जागने में मुझे नहीं लगता. इसमें कोई दोष है अगर किसी के प्रति जय. श्री राम कहने से अगर किसी की हिंदुत्व. जाग रहा है किसी की सनातनी भावना जाग रही. है तो बहुत अच्छी चीज है कि आप सोए हुए. किसी व्यक्ति को जगा रहे जय श्री राम बोल. कर के यह कोई आरोप लगा रहा है कि जय श्री.
राम बोलना या उससे हिंसा को जोड़ना यह गलत. है तो हिंदुओं को जगाने की जरूरत है. क्योंकि आजकल कैंपेन बहुत चलते हैं कि. हिंदुओं को जगाना. है बिल्कुल. मुझे ऐसा लगता है कि कुछ चीजें जो हिंदू. चलो आप प्रश्न आपका हिंदू है लेकिन कहीं. ना कहीं जो मानव समाज है वह अपने रास्ते. से भटक रहा है सनातनी होकर के भी हमें. पूजा पाठ हमें भगवान का नाम या सत्संग यह.
सब करने में शर्म आती है या फिर यह बताने. में भी शर्म आती है कि हम सनातनी है तो. अगर यह आप कर रहे हो तो इसका मतलब कहीं ना. कहीं आप सोए हुए हो और हमारी परंपरा कहती. है उठो जागो हरि शरण चलो तो जगाने की बहुत. आवश्यकता है आज का युग ऐसा है कि आज नहीं. जागे तो फिर बाद में पछतावा होगा और जब तक. पछतावे तक पहुंचेंगे बहुत सारी चीजें हमसे. छूट चुकी होगी तो जागिए अपने धर्म को. समझिए और कभी भी अपने आप को धार्मिक कहने.
में या सनातनी कहने में शर्माए मत यह आपका. गौरव है कि भगवान ने आपको इस धर्म में. जन्म दिया है आप भारत भूमि में जन्मे तो. जैसे आप प्राउडली कहते आई एम एन इंडियन तो. वैसे प्राउडली कहिए आई एम सनातनी तो उसमें. कभी भी संकोच नहीं और जागना बहुत जरूरी है. जागना जरूरी है मेरे जहन में फिर एक सवाल. और आता है जैसे हम क्रिश्चन को देखते हैं. या हम सिख कम्युनिटी को देखते हैं या हम. मुस्लिम कम्युनिटी को देखते हैं वो अपनी. रिलीजियस प्रैक्टिस बहुत ही प्राउडली करते.
हैं और खुलकर करते हैं हां जी आपकी बात से. मुझे ये लगा कि शायद आपने भी एहसास किया. कि हमारे यहां शायद कई लोग ऐसे हैं जो. शर्माते हैं संकोच करते हैं आपको लगता है. ऐसा आप तो तमाम जगह कथा करती हैं बिल्कुल. और खासकर आज का जो यूथ है उसको थोड़ा सा. आउटडेटेड लगता है कि ये हां ओल्ड फैशन. लगता है कि ये सारी चीजें तो पुराने लोगों. का काम है हम क्यों चंदन लगाएं हम क्यों. अच्छा मंदिर जाएंगे तो मेरा फ्रेंड सर. सर्कल क्या बोलेगा मेरे दोस्त क्या. बोलेंगे लेकिन जब आप और चीजों में ध्यान.
नहीं देते आप हर चीज में जब आपको ड्रिंक. करनी होती है आपको कुछ खाना होता तो आप. क्या कहते हैं अरे ये तो दुनिया है यह तो. कुछ भी बोलेगी मैं क्यों सुनू इसकी माय. लाइफ माय रूल्स तो जब आप वहां अपने आप को. इस तरीके से सोच सकते हैं तो धर्म के लिए. फिर क्यों सोचते हैं कौन क्या सोच रहा है. मैं करूं ना करूं दूसरों की वजह से अगर आप. अपने धर्म से रास्ता भटक रहे हो तो आप. बहुत बड़े लॉस में हो आपको अपने आप को. इतना मजबूत करना चाहिए कि सामने वाला आपसे.
क्वेश्चन भी करे तो आप हक से उसका आंसर दे. सको आपको पता हो हमारे धर्म का लॉजिक पता. हो क्यों मंदिर जा रहे हैं क्यों क्या कर. रहे हैं यह सब लॉजिक आपको पता होना चाहि. मंदिर क्यों जाते हैं हम जब कहते हैं कि. जैसे अयोध्या की बात कर ले हम तो अयोध्या. में मंदिर बन रहा है जी अब बन रहा है अब. तो जनवरी में सब कुछ होने भी वाला है और. बड़ा लंबा इंतजार खत्म हुआ है लेकिन एक ब. कहता है कि यह जिद गलत थी कि मंदिर वहीं. बनाएंगे अयोध्या के तो कड़कड़ में राम है.
ऐसा एक पक्ष कहता है जी कई नेताओं ने भी. कहा कि राजा राम उस जगह नहीं जहां पर. तोड़कर बनाया गया हो तर्क उसका यह है कि. पहले श्री राम का राध्य वहां था उसके बाद. चीजें बदली वापस स्वरूप में ला रहे हैं. अपनी-अपनी बातें हैं लेकिन फिर वही सवाल. मेरे जहन में आता है कि मंदिर जाने की. जरूरत क्या है यह सवाल अगर कोई आपसे पूछे. तो कैसे आप उसे बताओगी क्योंकि थॉट ये भी. है हम आपने कहा कि बस में जा रहे हो याद. कर लो मन में याद कर लिया यहां बैठे याद. कर लिया कड़कड़ में राम है हर जगह राम है.
तो फिर अलग से मंदिर क्यों जाए किसी भी. भगवान. के बहुत सिंपल सा लॉजिक है हवा सब जगह है. कण कण में है लेकिन अगर स्पेशली आपको अपने. गाड़ी के टायर में हवा डालनी हो तो आपको. एक स्थान पर जाना पड़ता है एक जगह पर जाना. पड़ता है तो मंदिर भी वह जगह है जहां 100%. कंफर्म है कि. आपको भगवान तो मिलेंगे ही मिलेंगे लेकिन. आपको भीतर से जिसको आज की भाषा में कहते.
हैं ना पॉजिटिव एक अनुभव वह आपको मंदिर. में जाकर के मिलता है देखिए क्या होता है. जब एक जगह बैठ कर के 10 लोग बुराइयां करते. हैं तो वहां के जो एटम्स है जो एटमॉस्फेयर. है वह नेगेटिव बन जाता है सेम उसके अपोजिट. अगर 10 लोग एक जगह बैठ कर के भगवान की बात. कर रहे हो या भगवान का नाम जोर-जोर से बोल. रहे हो तो वहां के पत्ते पत्ते में पत्थर. पत्थर में एक पॉजिटिव वाइब्रेशन आ जाती है. अगर आप वहां जाओगे तो आप क्या फील करोगे.
एनर्जी फील करोगे आप वाइब्रेशन फील करोगे. तो मंदिर जो है वह एक प्रकार का सकारात्मक. माहौल है वह आप जैसे कोई व्यक्ति बहुत. परेशान हो रोता हुआ हो लेकिन जब वो मंदिर. जाता है और सामने खड़े भगवान को देखता है. हाथ जोड़ता है तो उसको लगता है कोई उसके. साथ खड़ा है क्या आया पॉजिटिव थॉट्स आए. पॉजिटिव विचार आए तो मंदिर ना जाना यह. तर्क देना कि भगवान तो घर में भी है भगवान.
तो कण कण में भी है मुझे लगता है यह. पागलपन है क्योंकि यह जगह आपको बाहर से भी. साइंस भी कहती है साइंस प्रूफ कर चुके है. इस बात को कि एक जगह पर जो व्यक्ति जो. करता है वह वहां के वातावरण में घुल जाता. है तो आज के जो यूथ है जो समझता है कि ये. सब पुराने जमाने का काम है यह ऐसा नहीं है. वहां जाएंगे आप तो अपने विचारों में आप. बदलाव चेंज जी महसूस करेंगे एक सवाल मेरे. जहन में आता है कि सिख.
कम्युनिटी अगर आप देखेंगे तो जो वो लंगर. लगाते हैं हर आदमी सेवा भाव करने आता है. जी मुसलमानों को जब हम नमाज पढ़ते देखते. हैं तो एक बार मस्जिद में प्रवेश कर गए. फिर चाहे आप राजा हो रंक हो जिस तरह के हो. सब बराबर बाते हैं हमारे यहां पर एक. वीआईपी कल्चर है आप वृंदावन बांके बिहारी. मंदिर ले लीजिए जी आप लाइन लगाएंगे साइड. से एक वीआईपी लेन आती है साड से दर्शन हुआ. चले गए और ज्यादातर बड़े मंदिरों में ये. कल्चर है. वीआईपी कल्चर क्या मंदिर में होना चाहिए. क्या भगवान के दर पर भी भक्तों की अलग-अलग.
कैटेगरी होनी चाहिए कुछ एक इंपॉर्टेंट. केसेस हटा दें लेकिन वो जो पैसे देकर. ट्रेंड निकला है कि आप 000 दीजिए 2000. दीजिए पर्ची कटवा लीजिए क्या वह ट्रेंड. सही है नहीं मुझे नहीं लगता कोई भी उस. स्टैंड को सही बताएगा. क्योंकि हर मंदिर लागू हो गया देखिए कुछ. चीजें ऐसी होती है जो हमें पता है गलत है. लेकिन अब उनको शायद बदला नहीं जा सकता और. बदलने के लिए लोग तैयार नहीं है जो वहां. उस पद पर बैठे हैं जो इस चीज को चेंज कर.
सकते हैं शायद उनका अपना कोई हित कह लीजिए. या जो भी कह लीजिए लेकिन ये कहीं से भी. सही नहीं है जैसा आपने कहा कुछ एक कैटेगरी. जरूर ऐसी हो सकती है वो हमारी पुरानी. परंपरा भी है एक राजा आया है तो वो उसके. पद का सम्मान होना अनिवार्य है कोई वृद्ध. महिला है लेकिन पैसा देकर के अगर आप इसको. कैटेगरी इज करते हो कि यह वीआईपी है ये. नॉन वीआईपी है ट्रेंड अगर कहीं से चेंज हो. पाए तो शायद ज्यादा बेहतर होगा बिल्कुल. होगा यह करना चाहिए क्योंकि आप भगवान के.
दरबार पर हम उस कृष्ण को पूज रहे हैं. जिसने सुदामा को खड़े होकर सब छोड़ कर के. गले लगाया वहां कृष्ण ने यह नहीं देखा कि. यह वीआईपी है कि नॉन वीआईपी खुद गए वोट. करके और सुदामा को गले लगाया तो यह चीज. बदलाव होना चाहिए इस बदलाव को मंदिर जो. प्रशासन है या जो उस पद पर बैठे उन लोगों. को जरूर इस पर विचार क्योंकि देखिए अगर. केवल धन का माने की बात है तो उसके रास्ते. और भी बहुत सारे हो सकते हैं और भगवान की. कृपा से कोई भी मंदिर आज भारत का हो तो.
वहां पर शायद मुझे नहीं लगता धन की कोई. कमी होगी क्योंकि लोग श्रद्धावन है दान दे. रहे हैं पैसा दे रहे हैं लेकिन आप उस चीज. का फायदा उठा कर के यह काम नहीं करना. चाहिए तो आपको क्या लगता है य क्यों इस पर. बेहतरी क्यों नहीं हुई क्योंकि लोग बोलने. से डरते हैं अगर कोई जायज सवाल उठाएगा तो. उसे धर्म विरोधी कहा जाए ये सवाल मैं. इसलिए पूछ रहा हूं मैं केदारनाथ गया था जी. और केदारनाथ ने मुझे लड़का दिखाई पड़ा जो. नंगे पांव आया था मैं वहां पर एक चैनल की. तरफ से शूट कर रहा था तो मेरे जहन में.
सवाल है मैं उसके पास गया मैं कहा यार तुम. नंगे पांव कैसे आ सकते हो यहां पे क्या. तुम चार्टर से आए थे हेलीकॉप्टर से या. घोड़ा गाड़ी या पिट्ठू से आए थे उसने कहा. मैं पैदल आया था पूरी यात्रा करके तो. मैंने कहा इतनी ठंड में पैदल यात्रा क्यों. तो उसने कहा सर अगर साधारण मंदिर में. दर्शन करना होता तो गांव वाले मंदिर में. कर लेता जब मैं केदारनाथ आया हूं तो. तपस्या करने आया हूं उस भाव को लेकर आया. हूं तो वो तपस्या हेलीकॉप्टर घोड़ा गाड़ी. या किसी किसी पीठ पर नहीं होगी वो तपस्या. उस त्याग से होगी उस समर्पण से होगी और जब.
भक्ति होगी तो मैं चला आया जी उस भावना ने. मेरे जहन में सवाल पैदा कर दिया और उसके. बाद जब मैं देश के किसी मंदिर में गया. चाहे अलग-अलग तिरुपति जी से लेकर बनारस. में या बांके बिहारी में हर जगह जब मैंने. वीआईपी कल्चर देखा तो मेरे जहन में सवाल आ. कि आसानी तो है लेकिन क्या ये वाकई में. भक्ति है या जो लोग चला रहे हैं इस परंपरा. को वो वाकई में ईश्वर के प्रति उतना. समर्पण है और अगर नहीं है तो फिर इस तरह. बदलाव क्यों नहीं हो हो रहा और कोई बात. क्यों नहीं कर र लोग बात करने से भी डरते. हैं क्योंकि उन पर एक टैग लगा दिया जाएगा.
कि आप धर्म विरोधी जैती प्रधा थी हमारे. हमने उसको बेहतर किया अगर आप अपने धर्म को. रिफॉर्म करते रहेंगे तो आप बेहतर होते. जाएंगे बिल्कुल धर्म में बदलाव समय समय पर. होना चाहिए धर्म कभी भी आपको कट्टरवादी. नहीं सिखाता है यह पक्का कन्फर्म है. जब हजारों साल से जो पूजा चल रही थी इंद्र. की तो एक साथ साल का कृष्ण गया और उसने. कहा कि तुम जो कर रहे हो वो गलत कर रहे हो. तुमको इंद्र की पूजा स्वार्थ वश नहीं करनी.
चाहिए तुम प्रकृति को पूजो तुम गिरिराज जी. को पूजो तो यानी कृष्ण ने बदलाव लेकर के. आए तब उस समय लोगों ने उसको तुरंत स्वीकार. किया कि अगर कृष्ण कह रहा है गिरिराज जी. की पूजा होनी चाहिए तो लोगों ने उसे. स्वीकार किया यानी समय-समय पर बदलाव होना. चाहिए और आपने जो बात कही लोग क्यों डरते. हैं वो मुझे भी नहीं पता लेकिन इसमें अगर. कोई चीज हमारे धर्म को और अच्छा बनाती है. क्योंकि जब कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति भी.
हमारे मंदिर आएगा और वह एक कल्चर देखेगा. तो उसके पास एक मौका है उंगली उठाने का और. ये हमारे कल्चर में है मैं मतलब कई बार. मुझे जैसे मैं मैं जहां से आता हूं वहां. स्वामी नारायण भगवान का जन्म स्थान है जी. तो जब मैं वहां देखता हूं गुजरात से आई. महिलाएं वो सेवा करती हैं लोगों के बर्तन. साफ एक भावना दिखाई पड़ती है फिर कई बार. जब हम जाते हैं तो हम व वीआईपी लाइन अब. सबको परंपरा लग गई है कि तो मुझे जहन में. कई बार सवाल आता है कि कि ये एक गलत. परंपरा की शायद शुरुआत हो गई है जिसको. किसी ना किसी को इनिशिएटिव लेकर इसे ठीक.
करने की जरूरत है बिल्कुल इसके लिए मुझे. लगता है सबसे ज्यादा जो जरूरी है वह जो. मंदिर प्रशासन है उसको समझना चाहिए. क्योंकि वो बदलाव लाएंगे तो बदलाव आएगा. देखिए वहां जो भक्त आ रहे हैं उनको सिस्टम. आप दे रहे हैं आप बता रहे हैं कि ऐसा करने. से वीआईपी ऐसा उनकी कोई गलती नहीं उनका. कोई दोष नहीं है वहां अगर आप इस सिस्टम को. खत्म करेंगे तो आप एक विश्व में में अच्छे. धर्म के रूप में जाने जाएंगे कि जहां. भेदभाव नहीं होता और सबसे बड़ी बात यही.
होती है कि अपने आराध को फॉलो करिए राम जी. को फॉलो करिए आप भगवान शंकर के मंदिर में. हो आप तिरुपति के मंदिर में हो तो उन. लोगों ने जब भेदभाव नहीं किया तो हम कौन. होते हैं भेदभाव करने वाले सही बात है. आपने बीच में ब्रह्मा जी का जिक्र किया था. मेरे जहन में एक सवाल आया बहुत सारी. भ्रांतियां सोशल मीडिया पर चलती रहती हैं. ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं की. जाती देखिए ब्रह्मा जी जो देव है वह वेद. उनसे प्रकट हुआ है ज्ञान के देव है हमारे.
समाज में ऐसे बहुत सारे देवता होते हैं. जिनका अलग-अलग कार्य होता है श्री ब्रह्मा. जी का कार्य सृष्टि का सजन करना है सृष्टि. के सजन के लिए ही श्री ब्रह्मा जी को. प्रकट किया गया है अब उसमें पूजा का मतलब. यह नहीं है कि वह समान्य नहीं है सम्मान. उनका होना आवश्यक है लेकिन अगर बात करें. तीन देवों की हम अगर कंपेयर करें नारायण. ब्रह्मा वि विष्णु महेश तो भगवान नारायण. जो है वो अनेकों अवतार में प्रकट हुए हैं.
इसलिए उनकी महत्वता है भगवान शंकर की भी. पूजा जो की जाती है वह इसलिए की जाती है. क्योंकि शास्त्र कहता है वैष्णवास्त्र. गण माने जाते हैं इसलिए उनकी सेवा होती है. इसलिए उनकी पूजा होती है इसका कोई. पर्टिकुलर. शास्त्रीय लॉजिक नहीं है कि क्यों नहीं की. जाती है लेकिन जहां उनको लेकर जानकारिया. आती है उनकी पुत्री को लेकर एक बहुत ही. कहानी इन कहानियों में कोई सत्यता है या.
लोगों ने केवल भ्रामक फैलाने के लिए गंदगी. फैला दी है नहीं कुछ सत्यता है शास्त्र. में कुछ बातें हैं वह बिल्कुल सत्य है. उनमें कोई भ्रामक नहीं है जैसे पुत्री का. विषय जो होता है उसके विषय को लेकर के. लेकिन हमको इन विषयों पर कभी भी प्रश्न. नहीं उठाना चाहिए कि हमारे शास्त्र कहते. गुरु कहे सो कर गुरु करे सो मत कर हां कुछ. चीजें हमारे इतिहास में कुछ गलत भी हुई है.
ऐसा नहीं कहा जा सकता कि हर चीज सही भी हो. कुछ स्वर्ग देवताओं की ओर से भी हुआ है. लेकिन हमें उस पर फोकस नहीं करना ब्रह्मा. जी की जो बात है उसमें सत्यता है लेकिन. हमें उस पर ना चर्चा करनी चाहिए उससे क्या. होगा उससे हमारे मन में किसी देव के प्रति. अपराध आएगा जो व्यक्ति या जो देव जो करता. है उसका अपना परिणाम है अगर ब्रह्मा जी भी. कोई कार्य कर रहे हैं यहां तक कि हमारे. शास्त्र कहते हैं देवताओं का अपना कार्मिक. अकाउंट है अगर वह गलत करते हैं तो उसके.
बाद व नरक भी जा सकते हैं उनकी भी सीट. चेंज होती है वहां भी रोटेशन होता है. ब्रह्मा जी की गद्दी बदलती है तो वहां. उनके कर्म जो है वह उनके साथ है चाहे व. गलत है चाहे वह सही है लेकिन इस विषय को. हमें ज्यादा उस पर चर्चा इसलिए नहीं करनी. चाहिए क्योंकि उससे आगे आने वाली जो पीढ़ी. है उसके मन में थोड़ी भ्रामक आती है जी. भ्रामक का जिक्र है मुझे मैं आपके बारे. में पढ़ रहा था आपके बारे किसी ने अफ उड़ा. दी बीच में काफी बाद में लोगों ने आर्टिकल. छापे सही जानकारियां गई लेकिन कई लोग मुझे.
लगता है कि यह अच्छा माध्यम भी है आपको. लेकर एक खबर पढ़ी मैंने आपका जब नाम ग. करते हैं आपने कभी सर्च किया अगर तो नाम. मैं आज आपका नाम सर्च कर रहा था मैं आपको. एक छोटी सी जानकारी देता हूं अच्छा सो जब. आपका नाम सर्च करते हैं यह देखिए मैंने एक. स्क्रीनशॉट निकाला तो चित्रलेखा जी लिखते. आता है चार पांच आर्टिकल आते हैं. चित्रलेखा जी कथावाचक जी च देवी चित्रलेखा. कितने बच्चे हैं चित्रलेखा जी का भजन और. एक जो नाम ब बार आता है वो आता है देवी. चित्रलेखा जी की शादी किससे हुई उनके पति. का जीवन परिचय और फिर एक खबर आती है एक.
आर्टिकल की कि किसी मुस्लिम व्यक्ति से. शादी कर ली जो ड्राइवर था क्या सच हम. चाहते हैं आप बताएं लोगों को और कहां से. ये कहानी निकल कर आई कैसे निकल कर आई और. आपको जब पहली बार ये पता लगा सुनाई पड़ा. तो आपका क्या रिएक्शन था इस पर देखिए. लोगों के मुंह को बंद करना यह असंभव है. क्योंकि दुनिया में राम जी भी आए तब भी. लोगों ने उन पर कलंक लगाया हम तो बहुत. संसार के साधारण लोग हैं तो यह शुरुआत हुई. कोविड के टाइम पर मुझे लगता उस समय लोग. फ्री ज्यादा थे तो कुछ ना कुछ कहानियां.
मसाला चाहिए था लव मैरिज थी अरेंज मैरिज. थी यह पारिवारिक रूप से विवाह मेरी शादी. हुई थी मतलब परिचित थे कथा में आते थे. लेकिन पारिवारिक सहयोग और उनकी एग्रीमेंट. से शादी हुई तो अरेंज मैरिज ही कहेंगे. लेकिन यह जो बात शुरू हुई एक कोई एक छोटा. सा मेरा वाक्य था शब्द था सिर्फ इसलिए कि. सबध का सम्मान होना चाहिए लेकिन उसको कुछ. लोगों ने गलत तरीके से प्रस्तुत करते हुए.
और फिर धीरे-धीरे उसमें कहते हैं ना. पेट्रोल डालते हुए आगे चीजों को बढ़ाया तो. उसमें यह बात खबर फैला दी गई कि शादी एक. मुसलमा मुसलिम व्यक्ति से हुई और ये भीम. कहानी थी कि शायद वो ड्राइवर था जिससे. इश्क हो गया जी और बहुत सारी अब देखो नाम. है तो बदनाम तो होंगे ही जब कुछ किया है. तो यह सब मीठा मठा खाते हो कभी-कभी. बुराइयां खट्टा खाने के लिए भी तैयार रहना. चाहिए और मुझे मैंने भी जब पहली बार सुना. तो मुझे भी पहले तो देखा कि भा यह बात.
कहां से कैसे शुरू हुई इससे पहले भी यह. बात तो भी बहुत बाद की थी जब विवाह हुआ तब. भी बहुत सारी बातें लोगों ने कही कि शायद. ढोलक बजाता है या आदि आदि बहुत सारी तो. मैं तैयार थी इस चीज के लिए कि जीवन में. यह सारी चीजें बहुत नॉर्मल है और लोगों का. मुंह तो 50 मुंह तो 50 बातें होती है फिर. उसके लिए किसी ने सलाह दी आप एक काम करिए. आप अपने सोशल मीडिया पर उस व्यक्ति जिससे.
विवाह हुआ है उसका गोत्र उसका नाम उसका. परिवार सब लिख के दिखा दीजिए बट आपको. जानकर हैरानी होगी कि जितने भी आर्टिकल. बाद में आए हैं उसमें सब में उनका गोत्र. लिखा हुआ है अच्छा उनका गोत्र उनके पिताजी. का नाम किस जगह से बिलोंग करते हैं जी तो. फिर वो किया. लेकिन लोग तो लोग है अपनी सोच जो एक बार. बना लेते हैं वो बनाते और मुझे उससे कोई फ. फरक भी नहीं पड़ता है नदी का काम है बहते. रहना उसमें रुकावटें आएंगी और मैं जिस.
क्षेत्र में हूं सेवा के काम में तो यहां. तो बहुत सारे लोग होते हैं विरोध करने. वाले बुराइयां करने वाले अच्छाई वाले भी. बहुत होते हैं प्रशंसा भी बहुत होती है और. निंदा भी बहुत मिलती है और मुझे लगता है. हमें दोनों ही हंस के वैवाहिक जीवन कितना. जरूरी. है खास तौर पर आप जैसे लोगों के लिए जो. कथावाचक है क्योंकि आमतौर पर एक धारणा. होती कि हर व्यक्ति हनुमान जी के जैसा ही. होगा कि पूरा जीवन भगवान को ही समर्पित है. अ वैवाहिक जीवन का सांसारिक जीवन का. आध्यात्मिक जीवन के साथ होना कितना जरूरी.
है देखिए यह आपकी रुचि पर डिपेंड करता है. मैं ना तो यह कहूंगी कि ब्रह्मचर्य अच्छा. है ना यह कहूंगी ग्रस्त अच्छा है दोनों. अपनी जगह में अपनी जगह रखते हैं अपना. स्थान रखते हैं खुश मैं बहुत खुश हूं मैं. इसलिए खुश हूं क्योंकि पहली बात यह है कि. मेरा जो शरीर है वह एक नारी का है तो एक. नारी को एक लड़की को जब समाज में जाना. होता है तो हजार प्र प्रकार के प्रश्न. होते हैं क्वेश्चन होते हैं और जिस फील्ड.
में मैं हूं खासकर धर्म के क्षेत्र में. वहां बहुत. कम मात्रा में लड़कियां या नारियां होती. है तो उसमें अगर मुझे मेरे थोड़ा सा. परिवार का सपोर्ट सहयोग मिलता है इतना. बड़ा काम है उसमें परिवार साथ देने वाला. हो तो बहुत आसान हो जाता है तो मैं बहुत. खुश हूं बस एक चीज हमेशा कहती हूं के आप. भले ग्रस्त में हो भले आप सन्यास वाले हो. भले आप ब्रह्मचारी हो बस यह अवेयरनेस के.
साथ जिए कि आपका जो जीवन है वह केवल. परिवार तक सीमित नहीं है एक परिवार जो. फैमिली है उससे बाहर होता है शादी करने के. तीन फायदे तीन नुकसान क्या. है बड़ा कठिन क्वेश्चन. है शादी करने के तीन फायदे तीन. नुकसान गिनती से तो नहीं पर हा ऐसे बता स. सकती हूं कि जब आप किसी अच्छे व्यक्ति से. आपका शादी विवाह हो जाता है तो आपको एक. सपोर्टिंग हैंड मिल जाता है आपको.
एक ऐसा कंधा मिल जाता है जब आपको कहीं. किसी चीज को बताने की जरूरत होती है वैसे. मेरी लाइफ में ऐसी कोई चीज है नहीं जो. बहुत पर्सनल हो मैंने हमेशा हर चीज को. लोगों के सामने रखा है बट कभी कोई ऐसी चीज. हो गई कि जहां आप लोगों तक अपनी भाव नहीं. व्यक्त कर सकते तो आप उनको जाकर के बता. सकते हैं उनके अपनी और अ हमारे शास्त्र. कहते हैं कि पति-पत्नी जो होते हैं वह.
धर्म पति और धर्म पत्नी होते जो धर्म एक. दूसरे का सहयोग करें मदद करें तो आपके लिए. एक धर्म का सहायक बन जाता है आपका पार्टनर. और वह बहुत जरूरी है कि वह धर में आपकी. मदद करें आपका सहयोग करे तो यह तो कुछ. अच्छाइयां हैं. [संगीत]. अबन मुझे आपको सच बताना है यह नहीं कि. छिपा ले आप नहीं नहीं सच सच ही बताऊंगी जो. कहूंगी सच क्या पता बाद में पतिदेव. पॉडकास्ट देख के व सुधार कर ले नहीं नहीं. बिल्कुल बिल्कुल शायद हो सकता है लेकिन.
नुकसान तब होता है जब आपको समझदार पार्टनर. नहीं मिलता कि आप जा रहे राइट में और वो. जा रहा है लेफ्ट में आप करना चाहते दुनिया. के लिए कुछ और वह चाहता है सिर्फ अपने लिए. कुछ करना तब गाड़ी डगमगा जाती है इसलिए. हमारे पुराने बुजुर्ग लोग कहते हैं कि. विवाह होता है तो बड़ी छानबीन की जाती थी. कि मैच होता है कि नहीं होता है तो विचार. ना मिलना यह थोड़ा सा कभी-कभी मुझे लगता.
है बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है लोगों के. ला तो जैसे मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं जी तो. अपने हस्बैंड को मोटिवेशन वाला थॉट देती. हैं. आप बिल्कुल देती ह रि रिलेशनशिप एडवाइस. देती है वो मानते हैं या नहीं मानते. बिल्कुल देती ह और जहां मुझे लगता है कि. उनको देना चाहिए तो मानती भी हूं ऐसा नहीं. है कोई भी आदमी परफेक्ट नहीं होता है तो. जहां मुझे लगता उनको कुछ बताना चाहिए मैं. बताती हूं जहां मुझे लगता मुझे कुछ बताओ. तो मैं उनसे सीख भी हूं समझती भी हूं और. अच्छी बात थोड़ी सी एक अगर पर्सनल आप पूछ.
रहे हैं तो यह रही कि वो इस क्षेत्र से. यानी कथा लाइन से थोड़ा दूर रहे थे पहले. से ही यानी वो कोई प्रवक्ता नहीं है कोई. मोटिवेशनल स्पीकर नहीं है तो क्या होता है. ना जब एक क्षेत्र में आ जाते हैं तो थोड़ा. सा कंपटीशन लेवल बढ़ जाता है वो होना नहीं. चाहिए क्योंकि वो गलत है जब आप एक दूसरे. का सहयोग करते तब आगे बढ़ते तो उन्होंने. बहुत सपोर्ट किया अच्छा किया कि इस रास्ते. पर कभी भी रुकावट नहीं बने तो कभी लगता है.
कि कोई चीज बतानी है तो मैं जरूर उनको. बताती आपने कंपटीशन का जिक्र किया जब आपका. नाम सर्च करते हैं तो आपके नाम के साथ एक. नाम और निकल कर आता है जी जया किशोरी का. जी कई लोग कहते हैं आप उनकी तरह लगती है. कई लोग कहते हैं वो आपकी तरह लगती है. जानती है आप उन्हें बिल्कुल मैं मिली हूं. कई बार उनके बचपन से उनके घर भी हम गए हैं. क्योंकि उनके पिताजी मेरे पिताजी आपस में. बहुत वार्तालाप बा कंपटीशन है धर्म में. कंपटीशन नहीं हो सकता आप भी कथा करती हैं. वो भी कथा करती हैं कथा में डिमांड भी.
मैटर करती होगी अब तो सोशल मीडिया का दौर. है अब तो जितने कथावाचक वो भी नंबर देखते. हैं कितने नंबर है क्या चीजें आई ये लोगों. ने देखो बना दिया है धर्म में अगर आप. कंपेयर करोगे कंपटीशन करोगे तो यह धर्म की. कहीं ना कहीं बहुत बड़ी हानि है जितने भी. लोग धर्म का प्रचार कर रहे हैं वो सब. हमारे लिए प्रणाम के योग्य है हम सब आपस. में जितने भी धर्म प्रचारक हैं सब आपस में. कनेक्टेड है कोई भी मुझे नहीं लगता कोई. कथावाचक ऐसा हो कि एक दूसरे से जेलेसी. रखता हो इवन हम वृंदावन में जितने भी कथा.
प्रवक्ता है समय-समय पर मिलते र लड़कियों. में नहीं है आप जिस उम्र में आप हैं मुझे. लगता है आप दोनों हम उम्र भी लगभग लगभग. हैं हां लगभग हां तो कभी ऐसा हुआ किसी ने. आपको कहा कि अरे जया जी कैसी हैं आप ऐसा. कभी कुछ हुआ आप साथ बिल्कुल होता है और. मुझे अभी तक दो कहानी मैं उनसे मिली थी तो. उन्होंने भी ये जिक्र किया था उन्होंने. कहा कि मैं एक जगह कथा करने गई थी तो किसी. ने मेरा नाम. लिखने की जगह आपका नाम न्यूजपेपर में लिख. दिया और मेरे साथ भी ऐसा हुआ है मेरे साथ. भी ऐसा हुआ कि कई बार एक जगह तो शायद उनकी.
फोटो कथा में लगा दी गई थी तो यहां मुझे. नहीं लगता हम दोनों जब भी मिलते बहुत. प्रेम से मिलते हैं और कंपटीशन तो बिल्कुल. नहीं तो आपने उनको सलाह नहीं दी शादी. ब्याह. की नहीं सलाह देने वाली मैं कोई नहीं होती. वो उनका अपना पर्सनल चॉइस है कब कहां कैसे. होना है वो व्यक्ति खुद ही निर् करता है. तो मुझे बहुत अच्छा लगता है कि वह समाज के. लिए एक अच्छा कार्य कर रही हैं और ऐसे.
करती रहे क्योंकि हम सब लोग व्यास जी की. जैसे आपकी शादी को लेकर अफवाह उड़ी थी ऐसे. बीच में उनको लेकर एक अफवा उड़ गई थी. क्योंकि उनसे जान पहचान है जी बाबा. बागेश्वर को लेकर हो गया था और व काफी. परेशान भी थी कि हमने मुलाकात ही नहीं की. कभी और बीच में कहानियां निकल गई अब ये तो. वही वाली बात है ना लोग तो किसी को नहीं. छोड़ते अगर आप थोड़ा भी आगे ब बढ़ते हो तो. कोई ना कोई कहानियां वो अपने आप बना ही. लेते हैं लेकिन ये याद रखना चाहिए कि हर.
चीज सोशल मीडिया की सच नहीं होती लोगों को. भी ट्रस्ट करने से पहले उसकी पूरी सच्चाई. को जानना चाहिए बाबा भागेश्वर से मिली आप. कभी नहीं अभी तक तो नहीं मेरी फोन पे. वार्तालाप हुई है कई बार कार्यक्रम के. विषय को लेकर के पर आमने-सामने कभी ऐसा. मिला नहीं आपकी धारणा क्या क्योंकि जो हमा. एक नई धारणा निकल कर आई कि एक नया लड़का. क्योंकि लड़को उस उम्र में जैसे आज इस. उम्र में आप लोग हैं जी कथावाचक कम है और. एक ऐसा कथावाचक जो बेबाक है जो बिंदास है. कई लोग कहते हैं कि उनके अंदर वह हल्का सा.
भी एक जब आप परिपक्वता जो परिपक्वता शायद. सही शब्द नहीं होगा लेकिन उनके अंदर एक वो. मसखरा पन है कि वो कहते कहते मजाक छिड़. जाते हैं धर्म के साथ-साथ थोड़ा सा आपको. छेड़खानी कर लेते हैं हंसी मजाक कर लेते. हैं कैसे आप देखती क्योंकि कई बार एक. धारणा होती है जैसे आप हैं आप समता नजर. आती है आपके कपड़ों से आपके विचारों से. आपकी बातों को हम कथा सुन रहे थे उनका. अंदाज थोड़ा निराला है सो उस निराले अंदाज.
को आप कैसे देखती हैं देखिए सारी दुनिया. एक सी हो जाएगी तो क्या ही मजा है दुनिया. में कुछ रंग बिरंगा होना चाहिए कुछ सौम्य. कुछ रुद्र ये नवर रस है और सम में ये रस. होने बहुत जरूरी है उनकी अपनी कदा है जहां. तक भी जितना भी मैं ना मैंने उनको टीवी के. या सोशल मीडिया के माध्यम से सुना है. मस्ती में रहते हैं जितना मैंने देखा है. अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं जो बोलना है. बोलते हैं दुनिया से डरते नहीं है और वो. बार-बार कहते हैं मैं हनुमान जी का भक्त.
हूं मैं जो बालाजी बालाजी का भक्त हूं तो. मुझे कहीं किसी से डरने की आवश्यकता नहीं. है तो मैं कोई शायद नहीं होती किसी पर भी. बात करने वाली या प्रश्न उठाने वाली अ मैं. हमेशा मानती हूं कि उन्होंने धर्म के लिए. बहुत अच्छा काम किया हम कई बार सुनते हैं. आपने भी देखा होगा न्यूज में बहुत सारे. लोगों को धर्म से जोड़ रहे हैं कुछ लोग जो. हिंदू धर्म छोड़ कर के चले गए थे उनको. वापस लेकर के आ रहे तो यह अच्छा काम है. इसके लिए समाज को सराहना करनी चाहिए समाज.
उनके लिए कृतज्ञ होना चाहिए बात जो अ कुछ. उनकी सिद्धियों की है उन पर दो आलोचनाएं. आती हैं और दोनों क्योंकि आप भी एक धर्म. गुरु हैं आपसे बेहतर समझ सकता हूं मैं एक. आलोचना होती है कि वो अपने धर्म का प्रचार. करते हैं लेकिन दूसरों पर भी सवाल खड़े कर. देते हैं जी जैसे आपने कहा दूसरे धर्म से. वापस ला रहे हो और वो. एक काम है जिसको मानने वालों का एक बहुत. बड़ा वर्ग है क्योंकि मुझे लगता है आज के. आज के वक्त में उनकी फैन फॉलोइंग बहुत बढ़.
गई है इतनी बढ़ गई है कि वो जिस शहर में. जाते हैं सैलाब उमड़ जाता है और इस बात को. कहने में मुझे भी कोई संकोच नहीं है जी तो. एक तो वोह आता उनके साथ दूसरा उनका जो वोह. परची वाली कहानी है क्योंकि एक और कुछ लोग. आए जिन्होंने कहा कि वो माइंड रीडर वाली. कहानी है कई सारे हमारे चैनल में भी. लड़कियां आई एक सुहानी करके हैं जो माइंड. रीड करती थी कि आपके मन में सवाल क्या है. सो हम ये कैसे समझे कि यह सिद्धि है या यह. माइंड रीडर कहानी है या यह चमत्कार है या. ये जादू है क्या टेक आपका इस पर.
है. देखिए शास्त्र भी कहते रिद्धि सिद्धियां. होती है भगवान गणपति की जो पत्नी है. रिद्धि है एक सिद्धि है तो सिद्धियां होती. है लघिमा गरिमा ये सब होता है ऐसा नहीं कि. नहीं है इसका एक ऋषि महात्माओं के द्वारा. पूर्व काल पहले तो ऐसे होता था ऐसी ऐसी. सिद्धि होती थी आदमी सांस रोक के भी जी. लेता था तो वो भी सिद्धियां होती थी और आज. भी कहीं ना कहीं है जैसा आप बता रहे हैं.
ऐसे और भी बहुत सारे मैंने देखे हैं लोग. इवन गांव में कई बार आते हैं ऐसे कि हम. आपका परिचय बता देंगे कुछ तो होता होगा. क्या होता वो मुझे भी नहीं पता क्योंकि. मैंने कभी उस बारे में ना डीप में गई ना. मैंने कभी स्टडी करी किय क्यों होता है. बहुत सारे ऐसे लोग है आप अभी क्या पहने. हुए हो वो रंग बता देते हैं क्या आसपास. आपके वो बता देते हैं अब वो कैसे बताते. यह नहीं पता लेकिन एक चीज मैं यहां जरूर. ऐड करना चाहूंगी कि आदमी को कभी भी जो.
चाहता है कि मेरा जीवन अच्छा चले भगवत. मार्ग पर चले तो उसको इन सब चीजों से. थोड़ा सा दूर रहना चाहिए अपने कर्म और. भगवान इन दो चीजों पर ज्यादा भरोसा करना. चाहिए मैं हमेशा कहती हूं कि आप जब किसी. व्यक्ति से आशा करते हैं ना कि यह व्यक्ति. आपके दुखों को दूर कर देगा तब आप धोखा. खाते क् कोई आपके दुख दूर नहीं कर सकता इस. दुनिया में कोई भी व्यक्ति अगर आपके दुख.
दूर करने का दावा करता है तो मेरी नजरों. में वह सही नहीं है क्यों देखि आपने धोखा. का जिक्र किया बहुत सारे यूथ आजकल के टाइम. में परेशान है अपने ब्रेकअप से आप. मोटिवेशनल स्पीकर भी है अध्यात्म जुड़ती. है तो इस भावना से कैसे निकले आधी दुनिया. तो इसी में दुखी है कि उनका ब्रेकअप हुआ. बैठा. है यह लगाव वाली जो भावना है कि एक इंसान. से ऊपर नहीं उभर पाना ईश्वर से हो तो समझ. में आती है कि चलो भाई तन मन धन सब कुछ तो. अर्पण इंसान पर जो ये समर्पण है उससे कैसे.
निकले नहीं इंसान पर समर्पण आज आपका है. चलो मैं आप ही से क्वेश्चन करती हूं आज आप. ब्रेकअप से परेशान है आज आप बहुत दुखी है. परेशान है और 10 दिन बाद जाकर के आप फिर. किसी और व्यक्ति के साथ पूरे घुलमिल जाते. हैं और आपको लगता पिछली जिंदगी आप एकदम. भूल गए अब आपको एक नया व्यक्ति मिल गया तो. मुझे नहीं लगता ये लगाव है ये एक शारीर. आकर्षण होता है जो सिर्फ बाहर से अट्रैक्ट. करता है आपको और आप कुछ समय के बाद उससे.
खत्म हो जाने के बाद आप दूसरी जगह शिफ्ट. हो जाते हैं मैं हमेशा कहती हूं कि आजकल. का जो प्रेम है व मुझे नहीं लगता वो प्रेम. है आपने प्यार का जिक्र कहा था प क्यों वो. वो वाला सिस्टम है सुबह आई लव यू शाम को. आई लीव यू यह जो आजकल का जमाना है ये ऐसा. ही बन गया है कुछ भी करने को तैयार है. क्यों क्योंकि सिर्फ बाहर से एक दूसरे को. प्रेम करते वहां एक दूसरे की इवन इमोशंस. की कदर नहीं रिश्ते जो टूटने का सबसे बड़ा. जो ब्रेकअप कह लीजिए कुछ भी कारण कह लीजिए.
एक दूसरे के इमोशंस को नहीं जानते एक. दूसरे के इमोशंस की वैल्यू नहीं है बस. मुझे चाहिए मैं जैसा चाहता हूं वैसा करो. यह रिश्ता नहीं होता यह संबंध नहीं होता. संबंध में आपको दूसरे के इमोशंस को वैल्यू. करना पड़ता है वह करोगे तो शायद आपका जो. रिश्ता है वह थोड़ा लॉन्ग टर्म के टिक. पाएगा नहीं तो फिर अपना अपना सोच करके तो. हर रोज ब्रेकअप होगा और हर रोज जाक दूसरी. जगह शिफ्ट हो जाओगे जीवन में मोह माया की.
बात जो करते हैं बाबा लोग या स्वामी लोग. या कथावाचक कई बार उन पर ये आरोप लगता है. कि वो दुनिया से कहते हैं कि मोह माया. त्याग दो पैसे में कुछ नहीं रखा है और खुद. कथा करते हैं तो 5 लाख 7 लाख 10 लाख 15. लाख तो इसको लेकर आप क्या सोचती क्योंकि. ये कई बार कहा आता है कि बाबा लोग आजकल सब. चार्टर्ड में घूमते. हैं देखो पहली अगर मेरे दृष्टि से देखा. जाए तो जब कोई साधु या बाबा बाबा का ये जो.
लोगों ने शब्द बोल दिया ना बाबा लोग यह. बहुत गलत है साधु का मतलब समझिए संत का. मतलब समझिए साधु इस दुनिया का प्राण है वो. नहीं होंगे तो समाज को एक मिनट लगेगा गलत. रास्ते पर जाने से तो अगर कोई साधु मौज और. मस्ती में रहे अच्छा खाए अच्छा पहने तो. हमको मिर्च क्यों लगती है. अगर यही काम कोई बॉलीवुड स्टार कर रहा है. वह अच्छी जगह खा रहा है अच्छा पहन रहा है.
तो हमको लगता बड़ा स्टाइल ऐसा इसका लाइफ. स्टाइल होनी चाहिए लेकिन जिसने समाज को. राह दिखाई मुझे तो लगता है मैं तो भगवान. से कहूं कि दुनिया की अगर सारी कोई खुशी. है लगजरी है कुछ मिले तो एक साधु को मिलनी. चाहिए इसका लॉजिक यह आता है कि उन साधुओं. को लोगों ने उन साधुओं ने लोगों से कहा कि. मोह माया त्याग दो जी उन्होंने लोगों ने. आश्रम में दान दिया अब उन पर ये आरोप लगते. हैं मैं आरोप आपकी बात का मैं केवल उतरक. दे रहा हूं बाकी मैं आपसे खुद समझना चाहता. हूं देखिए कोई साधु अगर मोह माया की बात.
करता है धन की बात करता. है मैं कहती हूं कि जिस माइक पर यह बातें. बोली जा रही है माइक भी पैसे से ही आया है. जी तो आप यह नहीं कह सकते कि धन जीवन में. जरूरी नहीं है. लेकिन संत यह समझाते हैं कि आपके लिए धर्म. और धन यानी अर्थ इन दोनों की जगह क्या है. जो सच्चा साधु होगा नाना वह हमेशा आपको यह. समझाएगा कि अर्थ पैसा जरूरी है लेकिन. कितना जरूरी है उसका बस लेवल ध्यान रखिए.
क्योंकि नहीं कमाओगे तो खाना कौन देगा. आपको आपको कौन जीवन चलाएगा तो जो सच्चा. साधु होता वो कभी आपको कर्म विमुख होने का. ज्ञान नहीं देगा वो जरूर कहेगा कर्म करो. पैसा कमाओ परिवार के साथ रहो लेकिन किस हद. तक एक होता है पैसे के पीछे बावरा हो जाना. कि बस खा रहे हैं तो पैसा सो रहे तो पैसा. हर चीज में बस इनकम इनकम इनकम चित्रलेखा. जी महीने में कितनी कथा करती है मैं महीने. में लगभग दो से तीन कथा करती हूं एक क मान.
लीजिए कोई दर्शक आपको देख रहा हो सुन रहा. हो उसको आपको सामने से बैठ के सुनना हो. कथा करवानी हो जी कितना पैसा चार्ज करती. है. आप नहीं आप चाहते हैं कि मैं फसू लेकिन. मैं फसू नहीं क्योंकि देखिए कोई भी. कथावाचक मैं हूं मेरे साथ कम से कम 25 लोग. या 30 लोग साथ में जाते हैं और उन सबकी. जीविका कथा से चलती है कथा में मैं जा हूं. तो माइक साउंड टेंट कैमरा यह सब हमारा. अपना जाता है यहां से तो अब वो बिना पैसे.
तो जाएंगे नहीं उनकी और आज की कथा की मांग. हो गई है कि व्यवस्था होनी चाहिए टेंट. होना चाहिए अच्छी बैठने की सोफा होना. चाहिए इसके लिए पैसा लगता है तो उसमें अगर. आप इन टोटल करते हैं भाई टेंट भी मंगाना. माइक भी मंगाना तो मुझे लगता है. कि छ से सात 10 लाख इतना खर्चा आपकी. व्यवस्थाओं में ही आ जाता है और वो कोई. मुझे नहीं लगता कोई प्रवक्ता मैंने हमेशा. कहा अगर मेरी कथा में किसी ने यह बोला हो. कि हमसे देवी चित्रलेखा ने कथा करने का.
इतना पैसा अपना चार्ज लिया तो मुझे आके. बताओ लेकिन हां जो साथ जाते उनकी व्यवस्था. बनानी जरूरी है आप चाहे तो आप डायरेक्ट. उनकी पॉकेट में डाल दीजिए मतलब कान इधर से. पकड़े या उधर से. पकड़े यह आप अपनी मर्जी से सोच सकते हैं. या आपकी अपनी नहीं देखिए आपकी बात बिल्कुल. जायज है क्योंकि आपके साथ एक टीम है दूसरी. चीज आपको लेकर तो मैं इसलिए भी नहीं. कहूंगा क्योंकि आप जो काम कर रही हैं. गौशाला को लेकर खास तौर पर गायों के. अस्पताल को लेकर मैं तो अपने भी दर्शकों. से अपील करूंगा कि आने वाले टाइम में हम.
भी एक कैंपेन चलाए जिसके जरिए जो अपना. योगदान हम दे सकें क्योंकि बहुत ही आप जो. जो बात कह रहे हैं हमारा हमारा खुद का. हॉस्पिटल का जो खर्चा है लगभग. 25 से 30 लाख रप महीना का खर्चा है उसके. लिए भी आज तक हमने किसी को कथा के माध्यम. से चार्ज नहीं किया है हम कथा में जाते. हैं कथा में एक व्यक्ति जाता है व माइक प. बताता है कि हम सेवा कर रहे हैं अगर आपकी. इच्छा है तो वह आप दीजिए वहां से जो धन. राशि आती है वह हमारी होती है हमारी मतलब.
सेवा के लिए होती है उसको हम सेवा में. लगाते हैं लेकिन कथा के लिए प्रॉपर अगर. कोई ये कहे कि चार्ज है तो मुझे नहीं लगता. कथा कोई बिकाऊ है सुखदेव जी ने जब कथा कही. उस दौर में तो एक पेड़ के नीचे बैठ के कह. दी थी पर आज थोड़ा समय बदला है व्यवस्थाएं. बनाना जरूरी हो जाता अन्यथा कथा बिकाऊ. नहीं होती तो आपका एक्सपीरियंस सबसे अच्छा. कहां पर रहा कथा देश दुनिया में करती हैं. मैंने पढ़ा विदेशों में भी कई जगह पर आप. गई तो इस छोटी सी उम्र में आप दुनिया भर. में गई कोई एक एक्सपीरियंस अगर आप शेयर.
करें कोई एक इंटरेस्टिंग कथा या कोई एक. इंटरेस्टिंग वाक्य जो आपको भी याद हो कि. यह यादगार लम्हा था अ वैसे. तो किसी एक कथा को चुनना मेरे लिए मुश्किल. तो होगा लेकिन हां एक्सपीरियंस जो मेरा. बहुत अलग रहा बहुत अद्भुत रहा वो था आज से. कुछ छह सात शायद पाच छ साल पहले यूरोप में. मैंने एक कथा की थी मेरी इच्छा थी कि मैं. सात दिन की कथा जो एक जगह होती है उसकी.
जगह में सात दिन की कथा को सात देशों में. करूं हर रोज एक अलग देश में जाकर के भगवन. नाम प्रचार करूं क्योंकि चैतन्य महाप्रभु. का यह जो हमारे आराध्य है उनका भाव था कि. गली गली में हर शहर में भगवन नाम गूंजना. चाहिए तो वो कथा हमने करी थी आस्था चैनल. पर वो लाइव थी और सात दिन में सा अलग-अलग. कंट्रीज क्योंकि यूरोप में सब कंट्री एक. दूसरे के पास होती है थोड़ा भागदौड़ जरूर. हुई क्योंकि पूरा सिस्टम लेकर के हर रोज.
भागना होता था सुबह फ्लाइट पकड़ो शाम को. जाके कथा करो पर बहुत यूनिक एक्सपीरियंस. वो रहा और उससे बहुत सारे जो विदेश यूरोप. के लोग थे बहुत खुश हुए और श्रोता भी साथ. में जाते थे वहां पर अंगे गोरे भी आते हैं. सुनने गोरे हिंदी नहीं समझते कथा हिंदी. में होती है लेकिन कभी-कभी खासकर वहां के. बच्चों के लिए और गोरो के लिए हम एक. क्वेश्चन आंसर सेशन रखते हैं तो उसमें वो. लोग आते हैं अपनी कुछ जिज्ञासा एं. क्वेश्चंस कुछ पूछते हैं अदर वाइज कथा में.
हां एक दो कुछ ऐसे श्रोता गोरे थे जो हर. जगह जाते थे उनको हिंदी नहीं समझ आती थी. बट होता है ना वो बोलते भी थे कि हमें कुछ. फील होता है हो सकता है आप उन्हें क्यूट. लग रहे हो नहीं क्यूट तो नहीं बट उनका. कहना यही था कि हमें लगता है कोई पिछले. जन्म का कुछ आपसे कनेक्शन है कुछ फील होता. है बट मैंने एक चीज नोटिस की जो फॉरेन से. लोग आते हैं वो इंडियन कल्चर को बहुत. रिस्पेक्ट करते हैं वैल्यू करते हैं और. यहां पर वो पूरा शामिल हो जाते हैं हमारे. लोग थोड़ा कतरा लगते हैं ये मैंने एक चीज. नोटिस की है क्योंकि अभी उसकी वैल्यू को.
नहीं समझ रहे उनको लग रहा है कि अभी तो. हमको तो वेस्टर्न कल्चर अपनाना है और उसी. में सुख है उसी में शांति है लेकिन जो ये. फौरन से लोग आते हैं ये उसको ऑलरेडी. एक्सपीरियंस कर चुके हैं और इनको पता है. कि लास्ट में खाली हाथ कुछ मिला नहीं तो. देन वो यहां आकर के हमारे कल्चर को. रिस्पेक्ट करते हैं यहां की वैल्यू करते. हैं तो यह हमें भी करना चाहिए नहीं तो फिर. लास्ट में घूम कर के आएंगे तब हम भी ऐसे. ही खाली लगेगा अरे इतना भागे सबके पीछे और.
कुछ नहीं मिला तो अपने कल्चर की वैल्यू. सबको करनी चाहिए रामचरित मानस की कुछ. चौपाइयों को लेकर काफी विवाद हुआ था बीच. में हां जी जिसमें था ढोल गवार शूद्र पसु. नारी सकल ताड़ना के अधिकारी जी इसका सही. भाव क्या है ताड़ना एक ऐसा शब्द है जो कई. जगह अलग-अलग तरीके से यूज होता है जैसे एक. संस्कृत का शब्द है कनक कनक सोने को भी. बोलते हैं और कनक एक प्रकार का जो नशा.
वाला होता है धतूरा उसे भी कनक बोलते हैं. तो ऐसे बहुत सारे वर्ड है हिंदी में. संस्कृत में जिसका कई सारे मीनिंग्स होते. हैं ताड़ना भी उनमें से एक वर्ड है ताड़. का मतलब पीटना नहीं होता है गोस्वा. गोस्वामी जी ने कहा कि ढोल ढोल को जब. मारना होता है उसको ताड़ना बोलते हैं पशु. पशु को एक जगह से हिल नहीं रहा है तो उसको. हटाने के लिए आप जब उसको धक्का दोगे. मारोगे वहां ताड़ना है नारी के साथ जो.
ताड़ का मतलब वो मारना नहीं है ताड़ का. मतलब उस पर दृष्टि रखना उस पर नजर रखना. उसकी सुरक्षा का ध्यान रखना क्योंकि वह एक. नारी शरीर में है तो वहां गोस्वामी जी ने. ताड़ का मतलब सिर्फ इतना बताया है कि आपको. उस पर दृष्टि रखनी है कहीं भी उसके साथ. कोई गलत ना हो लेकिन लोगों ने उसको मारना. पीटना शुरू कर दिया गोसाई जी कह रहे हैं. नारी को मारना चाहिए ये वही वाली बात है. जानना पहचान और जाके भिड़ गए अपने. शास्त्रों को लेकर के तो इसको पहले जानना. चाहिए बिना जाने आप अपने धर्म ग्रंथों पर.
और ऐसे शब्दों पर कभी भी आरोप लगाने से. पहले उसका पूरा लॉजिक जानिए क्यों लिखा. गोसाई जी ने गोसाई जी इतने बड़े नारी पूजक. हैं वो नारी का या किसी जाति का कभी भी. अपमान नहीं करेंगे तो यहां ताड़ का मतलब. अलग-अलग चीजों के साथ अलग-अलग भाव नॉनवेज. खाना जैसे मैं ब्राह्मण हूं तो कई बार लोग. कहते हैं कि यार धर्म भ्रष्ट हो गया है ये. लड़कों में खासतौर पर हम कॉलेज या स्कूल. में थे कि नहीं नहीं हम नहीं खाएंगे धर्म.
भ्रष्ट होगा क्या नॉनवेज खाने से धर्म. भ्रष्ट होता है या जो सनातनी है उसमें कुछ. गलत होता है या फिर यह एक सिर्फ भोजन का. जरिया है और इसको इससे अधिक नहीं देखा. जाना. चाहिए नॉनवेज खाने से सिर्फ धर्म भ्रष्ट. नहीं होता बल्कि आपकी मानवता भ्रष्ट होती. है यहां धर्म से नॉनवेज का कोई लेना देना. नहीं है लेना देना है कि आप एक इंसान हो. और इंसान का मतलब है कि सबकी मदद करना. सबकी हेल्प करना और आप हेल्प करने की जगह.
आप किसी जीव आप किसी प्राणी को मार रहे हो. तो कहीं ना कहीं आप मानवता का गला घोट रहे. हो आप इंसानियत का गला घोट रहे हो. और कोई व्यक्ति अपनी थाली में क्यों. चाहेगा कि उसकी प्लेट में अ खून हो किसी. का मांस हो बट जैसे कई जगह ऐसी होती है. जहां पर वैसे ही खाने बनते हैं उनका कल्चर. वही होता है जैसे बंगाल में लोग मच्छी. खाते हैं वो कल्चर किसी शास्त्र में नहीं. लिखा वो किसी ने बनाया नहीं है वह तो हमने.
अपने स्वाद के लिए कर लिया और यह कौन सा. कल्चर है कि आप किसी प्राणी का प्राण उसकी. हत्या कर रहे हो यह कल्चर चाहे किसी ने. बनाया भी हो तो एकदम गलत है इसका कोई भी. मानवता से लेना देना नहीं है आप इंसान होक. के अगर किसी को प्राण दे नहीं सकते किसी. को सांस दे नहीं सकते तो सांस लेने का भी. आपको अधिकार नहीं भले आप किसी भी प्रदेश. में रहते हो बुद्धि भगवान ने सबको दी है. तो एक लॉजिक से समझिए ना कि उसमें सांस ले. रहा है आपके पीछे बहुत लोग पढ़ने वाले हैं.
इस बयान के पास बिल्कुल पढ जाइए मैं. बिल्कुल इस चीज के लिए तैयार हूं मैं. नॉनवेज के एकदम सख्त खिलाफ हूं क्योंकि. मैं प्राणियों से प्रेम करती हूं मैं इतना. सेवा कार्य पशुओं के लिए कर रहे हैं हम. लोग कि पशुओं की रक्षा हो पशु हम जो एकदम. मरने को तैयार हैं हम उनको ऑक्सीजन दे दे. करके ग्लूकोज चढ़ा के उनके प्राण बचा रहे. हैं कि यह बच जाए तो मैं तो खुलेआम इस बात. को अपने स्टेज से अपनी व्यासपीठ से बोलती. खाना गलत है गलत है एकदम गलत है क्योंकि.
आप एक बहुत बड़े पाप के अधिकारी बनते हो. अच्छा खाइए जिस चीज में किसी का रक्त ना. हो हत्या ना हो वह खाइए क्योंकि जब आप. किसी को मार रहे हो अगर आप एक मछली को उस. जल से पानी से दूर लेकर के जाते उस समय. उसको जो तड़प होती है वह मरते समय क्या. सोच रही है वही चीज जब आप खाओगे 101 दिन. तक आप उसको अपने फ्रिज में स्टोर करके. रखते हो आपके फ्रिज में क्या रखा है आपके. फ्रिज में रखी है हिंसा डर भय घबराहट अब.
वह आपके भीतर जाएगी तो आप क्या समझते हैं. आप एकदम खुशी खुशी जीवन जी पाएंगे नॉनवेज. वाले फिर ये तर्क देते हैं कि आप भी तो. पेड़ से तोड़ के निकालते हो आपने पूछा. पेड़ को दर्द होता नहीं होता ये एकदम गलत. गलत लॉजिक है उसमें हां उसमें भी एक कहीं. ना कहीं थोड़ा एक जो जीव का कण माना जाता. है वो होता है लेकिन वो बोलते नहीं है वो. सांस इस प्रकार से नहीं ले रहे उनके काटने. से खून नहीं निकलता है तो हां अन्न फल.
सब्जी अगर आप इस लॉजिक के साथ कह रहे हैं. कि उसमें भी प्राण होता हम भी मानते हैं. वो चीज इसीलिए शास्त्रीय परंपरा कहती है. कि आप अन्न भी खाते हो तो उसको पहले भगवान. को अर्पित करो तो उससे कहीं ना कहीं हमारी. जो थोड़ी बहुत भूल है वो कम हो जाएगी और. देखो नेचर ने ना एक साइकल बनाया जी नेचर. के साइकिल को कभी क्रॉस मत करो नेचर ने. बनाया कि हम अन्न नहीं खाएंगे फल नहीं. खाएंगे तो कहां जाएंगे लेकिन नेचर ने ये.
साइकल नहीं बनाए कि आप पशु को खा ली और. फिर लोग क्या तर्क देते कि इनकी पॉपुलेशन. बढ़ जाएगी लेकिन यह कोई लॉजिक नहीं है कल. को आप कहने लगे कि इंसानों की पॉपुलेशन. बढ़ रही है तो उनको मार के खाना शुरू कर. दो अच्छा एक आपने जो बात की बात बिल्कुल. सच्च है लेकिन हमारे कई भगवान ऐसे हैं. जिनको बली चढ़ाई जाती है काली जी को हमने. देखा है तो फिर क्या वो जायज है बिल्कुल. जायज नहीं है. तो क्या वह गलत परंपरा चली आ रही है गलत. परंपरा एक जैसा मैंने कहा कि हर एक युग का.
अलग-अलग धर्म होता है जैसे एक समय पर. राजाओं का शिकार करना धर्म माना जाता था. लेकिन कलयुग में वह धर्म नहीं है अगर एक. समय पर कोई बलि प्रथा और देखो वेद ने जहां. भी बलि का जिक्र किया है ना अगर हम. पढ़ेंगे तो उसमें बलि का मतलब होता है कि. आपको अपनी कमियों का बलिदान देना होता है. लेकिन आपने निर्दोष पशुओं को मारना शुरू. कर दिया आपने बकरे को मारना शुरू कर दिया. और आपको लगता बकरे को मार के आपकी. मनोकामना पूरी हो जाएगी आपको बेटा मिल.
जाएगा लेकिन कैसे किसी जीव को दुख देक आप. खुशी कैसे पा सकते हो यह परंपरा एकदम गलत. है भले वह कोई भी देश कोई भी मंदिर कोई भी. व्यक्ति कर रहा हो मैं इसके एकदम खिलाफ. हूं जीवों की हत्या से आप कभी भी खुश नहीं. हो सकते ये आपने बड़ी बात की और ये मैं. लोगों पर छोड़ता हूं कि इसको लोग कैसे. देखते हैं. करवा चौथ को लेकर आपका थॉट क्या है. क्योंकि एक बड़ी एक्ट्रेस उन्होंने कहा कि. अभी हाल फिलहाल में रत्ना पाठक उनका नाम.
है उन्होंने कहा कि पागल हूं मैं करवा चौथ. मतलब पढ़ी लिखी लड़किया करवा चौथ करती है. ये उनका स्टेटमेंट था और कई लोग ये मानते. हैं कि सिर्फ पुरुषों की लंबी जिंदगी के. लिए क्यों महिलाओं की लंबी जिंदगी के लिए. नहीं यह पुरुष प्रधान समाज ने एक जमाने. में बना ये उसको लेकर तर्क दिया जाता है. कि क्योंकि पहले घर में पुरुषों चलता था. तो पुरुषों की लंबी आयु के लिए महिलाओं की. लंबी आयु के लिए क्यों नहीं तो देखिए मैं. आपको बहुत सच्ची बात बोलूंगी करवा चौथ का. जिक्र हमारे किसी इतिहास में शास्त्र में.
नहीं है कि कोई हमने देखा हो कि माता सीता. जी करवा चौत का व्रत करती हो ये प्रक जहां. तक मेरी नॉलेज है करवा चौथ एक पंजाब हमने. बॉलीवुड की फिल्मों से खूब देखा हां पहले. पंजाब से फेस्टिवल शुरू हुआ और आज इसको. पूरा वर्ल्ड पूरा भारत मनाने लगा और कोई. कर रहा है तो मुझे उसका विरोध नहीं है. क्यों क्योंकि सबकी अपनी-अपनी मान्यता. शायद होना कुछ भी नहीं है लेकिन उसको ऐसा. लगता है कि ऐसे करने से शायद उसके पति की. लंबी आयु हो जाएगी तो ठीक है अगर आपको.
इससे अच्छा लग रहा है तो आप कर सकते हैं. लेकिन कोई नहीं करता है तो वह भी गलत नहीं. है क्योंकि यह कोई शास्त्र जैसे बहुत बहुत. सारी परंपरा हो गई मंगल सूत्र हो गया अब. कोई पहनता है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन. यह कोई शास्त्र में तो ऐसा नहीं लिखा आपसे. कभी किसी ने कहा कि आप सिंदूर नहीं लगाती. या मंगल मुझे बहुत बहुत सारी चीज हमेशा. कहने को मिलती है लेकिन मैं हमेशा कहती. हूं कुछ चीजें जो आवश्यक होती है जैसे. माथे का सिंदूर मैं हमेशा लगाती हूं मांग.
में जो सिंदूर होता है वह भी एक छोटी. मात्रा में मैं हमेशा लगाती हूं भले वो. लोगों को दिखे ना क्योंकि मैं दिखाने के. लिए नहीं लगाती हूं लेकिन कुछ चीज अब जैसे. मंगल सूत्र ये कोई शास्त्रीय परंपरा नहीं. है कहीं भी ऐसा नहीं लिखा कि जब शादी होगी. तो यह बाद में एक परंपरा चली जो निभा रहे. लड़कियां नहीं पहनती है मैं ये अपने इर्द. गिर भी देखा मैंने कई बार अगल-बगल के लोग. तं शक देते हैं कि यार तुम शादीशुदा हो. तुम क्यों नहीं पहनती हो या कैसी तुम औरत. हो कि तुम नहीं पहनती हो तुम्हारा.
मंगलसूत्र कहां गया या सिंदूर कहां गया. तुम्हारा सो क्या एक शादीशुदा महिला के. लिए यह जरूरी है कि वह सिंदूर लगाए दिखाकर. मंगलसूत्र पहने या वो शादी वाली चूड़ियां. क्योंकि जो महिलाएं नहीं पहन रही व कहती. है कि दिखाने जो आपने तर्क दिया साथी ये. कहते हैं कि पुरुष तो नहीं लेक आइडेंटिटी. घूमते ना कि मैं मैरिड हूं नहीं नहीं ऐसा. तो बिल्कुल नहीं है. दिखाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है लेकिन. कुछ चीजें जो परंपरागत है उनको अगर हम. निभा भी लेते तो उसमें कोई परेशानी नहीं.
है क्योंकि वो चॉइस आपके ये आपकी चॉइस है. ये आपकी अपनी चॉइस है कि आप किस तरीके से. रहना चाहते हैं और अगर मेरे लॉजिक की बात. करो तो. मैं वैष्णव परंपरा को फॉलो करती हूं और. मुझे लगता है कि मेरे माथे पर सिंदूर हो. ना हो पर मेरे माथे पर चंदन होना चाहिए. मेरे गले में मंगल सूत्र हो ना हो मेरे. गले में तुलसी की कंठी होनी चाहिए क्योंकि. यह मेरी पहचान ये मेरा असली परिचय है देखो. ये. शादी विवाहित अविवाहित यह ना इस संसार तक.
सीमित है एक मटेरियल लाइफ तक सीमित है और. मुझे जो बचपन से घुट्टी पिलाई गई है ना. संतों के द्वारा या गुरु के द्वारा कह. लीजिए मुझे लगता है मेरा कनेक्शन कृष्ण के. साथ है राधा रानी के साथ है तो अगर मैं. माला पहन रही हूं अगर मेरे माथे पर चंदन. है तो मेरे लिए यह काफी है मैं ना भी. लगाऊं तो भी मेरे लिए काफी है क्योंकि. मेरा रिश्ता साहब ने नहीं कहा कि आप. संग्रह करके उनके उनकी अपेक्षाएं उनकी. उम्मीदें नहीं नहीं ऐसा अभी तक तो हुआ. नहीं इतने सालों में क्योंकि वो जानते हैं.
मेरी उनके दिमाग में मेरे सवाल सुनके सब. बातें जा रही हो अब आप उनको कुछ प्रेरित. कर दे तो अलग बात है बाकी उनको पता है. मुझे सादगी सादा कपड़ा सादा वस्त्र रहना. पसंद है और मुझे लगता है उनको इस चीज से. कोई दिक्कत नहीं है जी हम चाहते हैं एक. भजन भी आप सुना द हमें कोई बहुत सारे भजन. क्योंकि हमने मंच पर आपको सुना हमारे भी. दर्शक डिजर्व करते हैं कि एक भजन छोटा सा. कोई भी कृष्ण जी को लेकर या किसी जो भी. आपकी आपका पसंदीदा भजन हो एक मिनट में हां.
हां जरूर तब तक एक सवाल मैं आपसे पूछ लेता. हूं जी कई सारे मंदिर ऐसे हैं जहां पर. पीरियड्स में लड़कियों को अलाव नहीं किया. जाता है जी आपको लगता है कि यह भी परंपरा. वक्त के साथ बदलनी चाहिए क्योंकि इसको. लेकर काफी लड़ाई भी सुप्रीम कोर्ट में. लड़ी गई कई मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश. वर्जित है कई लोग उसके समर्थन में भी आए. कई लोग खिलाफ भी गए जी क्या टेक है आपका. इस पर कि महिलाओं को कुछ मंदिर है जहां पर. इजाजत नहीं है होनी चाहिए या जो परंपरा. चली आ रही है उसी का पालन करना चाहिए. उसमें हस्तक्षेप जरूरी नहीं है अ सिर्फ.
महिला है इसलिए प्रवेश नहीं है तो वह गलत. है क्योंकि भगवान ने कभी भी इसका भेदभाव. नहीं किया है कि नारी मु मुझ तक नहीं. पहुंच सकती है अगर बात करते हैं आपकी. स्त्री का जो मासिक धर्म होता है भागवत जी. में एक प्रसंग है और बहुत सारी दुनिया. जानती है द्रौपदी द्रौपदी को जब हरी सभा. में लाया गया था तो व रजस्वला थी मतलब. मासिक धर्म में थी और उस समय कृष्ण ने आकर. के उनकी मदद की थी साड़ी बढ़ाई चीर बढ़ाया.
तो यानी कि आप किसी भी मासिक धर्म में हो. सोच असोट सूतक कोई अवस्ता हो भगवान से. जुड़ने और भगवान के दर्शन करने से आपको. कोई चीज विरोध नहीं कर सकती अगर आपका भाव. सच्चा है तो लेकिन अगर मंदिर की कुछ. मर्यादा कुछ लोगों ने बनाई है ऋषि. महात्माओं ने बनाई है कि आप इस समय वहां. ना जाएं तो उसमें ज्यादा तर्क भी नहीं. करना चाहिए बट क्या सोच हो सकते हो किसके. पीछे उनकी अ सोच मेरे ख्याल से जो मुझे.
लगता है पहले के जमाने में इतनी सारी. सुविधाएं नहीं थी लड़कियों के पास कि उनको. आराम नहीं मिलता था थोड़ा सा रेस्ट रेस्ट. मोड पर लाने के लिए उनको तीन दिन ऐसा दे. दिया जाता है रसोई से अलग खाने से अलग. किसी भी प्रकार की धार्मिक चीज से अलग आप. अपने आराम से रहो और यह आपका तीन दिन का. रेस्ट मोड है आप आराम से अपने जीवन को जी. जिए लेकिन उसको फिर बदलते बदलते बहुत. क्रिटिकल वैसे ही जैसे सेव वाटर को थर्सडे.
के दिन बाल मत धोए कई सारे लोग लॉजिक देते. हैं या बिल्ली को मत मारिए सोने की बिल्ली. देना पड़ेगा तो उन्होंने धर्म को वि लॉजिक. को धर्म से जोड़ दिया ताकि उस बीच में वो. सेफ्टी रहे देखो धर्म और अंधविश्वास के. बीच ना एक बहुत पतली सी लाइन है बाल बराबर. लोग उसको कई बार समझ नहीं पाते मैं इन इन. सब चीजों में ना कभी विश्वास करती हूं कि. भाई छक हो गई बिल्ली आ गई यह नाखून नहीं. काटना क्योंकि यह शास्त्र में नहीं लिखा. मेरे लिए सबसे जरूरी है स्क्रिप्चर अगर.
उसमें लिखा है तो आप तुरंत मान लीजिए अदर. वाइज इन चीजों को मानने से थोड़ा सा पहले. इस पर स्टडी करिए अच्छा कई सारे और जैसे. हम लोग मंदिर जाते हैं तो कहा जाता है कि. चमड़े की बेल्ट उतार दीजिए या पर्स उतार. दीजिए लेकिन फिर कई लोग सवाल उठाते हैं कि. जो ढोलक होता है तबला होता है उसमें भी. कुछ उनके एलिमेंट्स होते हैं जी तो वो. भगवान तक इजाजत है बाकी इजाजत नहीं है ये. कैसे है िक कुछ चीजें देखो कभी-कभी ऐसी. होती है ना बिना लॉजिक के भी हमें माननी. पड़ती है जैसे आपने इसका बोला एक और चीज.
है शंख शंख जो है वह एक प्रकार से एक. प्राणी के शरीर से निकाला जाता है जल से. निकाला जाता है तो कहीं ना कहीं वह एक. प्रकार की बोन ही कह लीजिए लेकिन कुछ. चीजें हमारी परंपरा में ऐसी आ गई है कि हम. उन पर कभी-कभी प्रश्न नहीं उठाते हैं और. नहीं उठाना भी चाहिए जैसे कई बार मैं कहती. हूं कि आप स्कूल जाते हैं तो आप टीचर से. यह तर्क नहीं करते कि ए बी सीडी सी के बाद.
डी ही क्यों आता है एफ क्यों नहीं आता वो. एक परंपरा बन गई है तो हमें उसको मानना. चाहिए और ये भी एक प्रकार की मुझे लगता है. परंपरा चली आ रही है तो उस पर ज्यादा तर्क. करने की बजाय हमको उसको फॉलो करना चाहिए. उसको मानना चाहिए ठीक है अभी दीपावली थी. हर साल दीपावली आती है तो बहुत सारे. एक्टिविस्ट जाग जाते हैं जी एनिमल लवर जाग. जाते हैं. अब मेरे दो सवाल इस पर है पहला सवाल तो यह. है कि क्या पटाखे जलाना सही है क्योंकि जो. पटाखों के विरोधी हैं उनका तरक होता है कि.
जब भगवान राम आए थे तब बारू तो था ही नहीं. तो दिए जलाए गए थे रोशनी की गई थी दूसरा. जो पटाखों का समर्थक वाला दल है वही कहता. है कि भाई आपका सारा ज्ञान इसी वक्त क्यों. निकल आता है अपनी शादी में तो नहीं सोचते. हो आप नया साल आएगा नहीं सोचते हो क्रिसमस. मनाने में नहीं सोचते हो जन्मदिन में नहीं. सोचते हो इंडिया मैच जीत जाती है तब नहीं. सोचते हो बॉलीवुड की फिल्म तो नहीं सोचते. हो तो दोनों को लेकर क्या क्योंकि दोनों. अपनी जद पर ड़ हर साल ये कहानी आती है. सुप्रीम कोर्ट से आदेश आता है उसका फिर. उल्लंघन होता है और एक आरोप बीते कुछ समय.
से ट्रेंड भी चलने लगा है कि हिंदुओं के. फेस्टिवल में एक्टिविज्म बढ़ जाता है होली. आएगी तो उसे वाटर कैंपेन चल जाएगा आप. मानती है ऐसा कुछ है या हिंदू ज्यादा जग. गया. है नहीं इसमें दोनों बात सच है पहली बात. तो यह पर्यावरण एनवायरमेंट का हम सबको. ध्यान रखना चाहिए मैं खुद अपने आप को. मानती हूं कि मैं प्रकृति से बहुत प्रेम. करती हूं और हमें पटाखे क्रैकर्स यह सब ये. सब चीजों से बचना चाहिए क्योंकि हमारी.
प्रकृति को नुकसान देयक है और जो चीज. नुकसान दे रही है हमें ही नुकसान दे रही. है क्योंकि जैसे ही आता है क्रैकर्स जलते. हैं पोल्यूशन बढ़ जाता है फिर हम ही लोग. हाय हाय करते हैं कि दिल्ली में ऐसा हो. रहा है वैसा हो रहा है लेकिन पटाखों के. समर्थक कहते हैं कि शुभंकर जी आप जहां. इंटरव्यू ले रहे थे वहां जो एसी लगा था वो. भी तो नुकसान कर रहा है नहीं नहीं ये ये. तर्क देने वाले जी तर्क का कभी अंत नहीं. होता तर्क देने वाले हमेशा कोई कोई लॉजिक. लेकर के तैयार होते हैं लेकिन बात इतनी हद.
तक सच है कि अगर आप पटाखों का विरोध करते. हो तो नॉट जस्ट दिवाली अगर हम कहते हैं कि. पोल्यूशन होगा पशुओं को नुकसान देगा आपको. एक बहुत सिंपल सी बात मैं कहीं ऐसी. पॉडकास्ट दे रही थी तो मुझसे यह क्वेश्चन. पूछा गया तो मैंने उसमें कहा कि पशु को जो. चीज नुकसान देती है वो चीज गलत है दिवाली. पर ये नहीं करना चाहिए होली पर पानी. बिल्कुल वेस्ट नहीं करना चाहिए ईद पर. पशुओं को मारना नहीं चाहिए आप यकीन नहीं. मानोगे वह जो मेरी ईद वाली क्लिप थी उसको.
कट कर दिया गया मैंने जब उसको देखा तो. उसमें वह वर्ड नहीं था तब मुझे यह चीज. रियलाइफ से रिफ्रेम करता हूं और बहुत. स्पष्टता से चाहूंगा इस पर क्योंकि ये. बहुत इंपोर्टेंट सवाल है क्या आप भी यह. मानती हैं कि हिंदुओं के त्यौहारों पर. एक्टिविज्म या जरूरत से ज्यादा ज्ञान.
बुद्धिजीवी वर्ग का आता है अ क्योंकि वो. कूल लगता है ऐसा जो आरोप लगाते हैं उनका. कहना है कि चाहे करवा चौथ हो चाहे होली का. अवसर हो या फिर आपकी दीपावली हो कुछ भी. फेस्टिवल आएगा तो कुछ लोग आ जाएंगे जबकि. आप बाकी लोगों को त्यौहार विश करते हैं तो. आप कायदे से सिर्फ त्यौहार उनको. शुभकामनाएं मुबारकबाद या मेरी क्रम जो भी. आप अलग-अलग धर्म के अलग-अलग किसी वि धर्म. की बात नहीं कर रहा हूं मैं लेकिन जब. हिंदुओं की बात आती है तो सबका ज्ञान निकल. आता है हर व्यक्ति ज्ञानी बन जाते है ये. आप इत्तेफाक रखती हैं या हिंदू जरूरत से.
ज्यादा जग गया है या एक वर्ग ज्यादा जगा. हुआ है नहीं कुछ हद तक तो कुछ हद तक मुझे. आई थिंक मैं कह सकती हूं 50 पर में सहमत. हूं कि जब कोई हिंदू त्यौहार आता है तब. व्यक्ति ज्यादा इस बात को बोलता है अ कोई. दूसरे वर्ग भी आकर के बोलना शुरू कर देते. हैं उस विषय को लेकर के चीजों को लेकर के. 50 प्र मैं सहमत हूं लेकिन मैं इसके भी. साथ सहमत हूं दीवाली में पटाखे जलने चाहिए.
नहीं होली में पानी वेस्ट होता है अ होली. में पानी वेस्ट नहीं होता अगर आप उसको एक. लिमिट में एक तरीके से उपयोग करते हो आप. रंगों से खेलिए आप गुला हमारे ब्रज में. आइए आपको ऐसी होली खिलाएंगे जहां रंगों. गुलाल फूल है पुष्प है यह चीज नहीं है. होली वाला मैटर मुझे भी आज तक कोई समझ. नहीं आया. लेकिन पटाखों से कहीं ना कहीं प्रकृति को. नुकसान होता है मैं उससे सहमत हूं वो कोई.
भी त्यौहार हो चाहे शादी हो चाहे आपका. होली हो दिवाली हो किसी की बॉलीवुड फिल्म. चली हो क्रिकेट मेंच जीता हो अगर आप उस. समय कर रहे हैं कम करिए और कोई भी चीज. आपकी शादी में कैसे हुआ था हरि नाम. संकीर्तन हुआ था ना कोई पटाके थे ना. बॉलीवुड गाने थे बहुत सारे वैष्णव आए. उन्होंने मृदंग लेकर के नाम गाया तो देखो. आप ना समाज को किसी भी तरीके से उदाहरण दे. सकते हो हमने मेरा जो शादी हुई उसको हमने.
इसी अस्पताल के प्रांगण में किया था और जो. लोग कहते हैं कि भाई लाखों करोड़ों रुपया. लोग खर्च करते तो आपने गौ माता की भंडारा. करके उनकी पार्टी भी कराई कि आप भोजन करिए. आप तो उदाहरण आपको पेश करना होता है जहां. जो चीज गलत है उसको स्वीकार करने में. क्यों शर्म करते हैं हमको अगर लग रहा है. कि इससे कई प्रकृति को नुकसान है तो मत. करिए ठीक है मेरे कुछ कुछ आखरी के सवाल. बचे हैं लव जिहाद का बड़ा जिक्र होता है. आप तो खुद अप्रत्यक्ष तौर पर उसका शिकार.
हो गई एक अफवाह को लेकर आप पाती ऐसी कोई. चीज होती है क्योंकि हरियाणा में बहुत. चर्चा ऐसी होती है हरियाणा में जहां आप. रहती हैं और एक महिला होने के नाते या इस. पर आपकी क्या सोच है होता है ये ये कहीं. ना कहीं ग्राउंड लेवल पर आज के टाइम में. थोड़ा सिस्टम ज्यादा बढ़ गया है और कुछ. लोग इस पर स्पेस अ स्पेशली लगे हुए जानबूझ. कर के कि कहीं ना कहीं लड़कियों को दूसरे. धर्म में लेकर के जाना है कुछ लोग इस.
प्रकार के काम में जुटे हुए हैं जो कि गलत. है मैं जो इसका शिकार लड़कियां होती है. उनसे भी यही कहूंगी कि देखो आपको जिस धर्म. में भगवान ने अगर आप मुस्लिम धर्म में. जन्म लिए हो तो आप उसको फॉलो करिए भगवान. ने अगर आपको कहीं भेजा है तो किसी कारण से. भेजा होगा अगर आप हिंदू धर्म में जन्म. लेती हैं तो थोड़ा सा समझदारी से चलिए आप. जाकर के आज कहीं फस जाती है और कल को बहुत. सारे गलत उदाहरण देखने को मिलते हैं गलत. व्यवहार कर दिया मार दिया तो उससे बहुत. दुख पहुंचता है और इससे लड़कियों को.
कन्याओं को सावधान रहना चाहि मैं चार नाम. लूंगा मैं उनको आपके जहन में जो भी. स्मृतियां हो या जो भी ख्याल आता हो उन. बताइएगा राजीव दीक्षित जी के बारे में. आजकल बड़ी चर्चाएं फिर से शुरू हो गई उनके. बारे में उनके वीडियोस बहुत वायरल होते. हैं व इस दुनिया में नहीं है. जी बहुत सारी कंस्पिरेशन थ्योरी आती है. बहुत सारी चीजें आती हैं आप उनको कैसे याद. कर करती हैं इनका क्या सोच है मैं उनसे. मिली हूं कई बार पतंजलि योग पीठ में मेरा. बहुत आना जाना रहा था उनसे मिलना जुलना. रहा था देखिए हर एक की फिलॉसफी अलग-अलग है.
मेरी फिलॉसफी भक्ति की है उनकी फिलोसोफी. कहीं ना कहीं समाज को लेकर थी और कुछ जगह. पर उनके विचार शायद मेरे विचार से मैच. नहीं करते क्योंकि उनका साधन पथ अलग है. मैं ये नहीं कहूंगी वो गलत है या मैं गलत. हूं ये अपने अपने साधन फिलॉसफी की बात है. तो मैंने अपने भक्ति धर्म को निर्वहन किया. कुछ बातों से मैं उनके सहमत हूं और कुछ. बातें जो शायद मुझे लगता है भक्ति विरोधी. है मैं उनसे सहमत नहीं भी हूं बात सिर्फ.
इतनी है कि इंसान वह देशभक्त थे राष्ट्र. भक्त थे उन्होंने राष्ट्र के लिए बहुत. सारा अच्छी ज्ञान भी दिया है और उसका बस. मुझे सम्मान है एक सवाल और ऐसे जहन में. आया कि जो कई सारे व्यक्ति राष्ट्र को. समर्पित रहे वो बड़े अल्पायु रहे हैं. स्वामी विवेकानंद जी जी शंकराचार्य जी या. राजीव दीक्षित जी की हम बात कर रहे थे. बहुत ही अल्पा आयु में चले गए तो ये. इत्तफाक है क्योंकि राजीव दीक्षित बारे. में तो कहा जाता है कि बहुत सारी थ्योरी. है कि कई लोग को टकने लगे थे वो शायद इस.
वजह से तो अच्छे लोगों को भगवान जल्दी. क्यों बुला लेते हैं क्योंकि वो कुछ समय. के लिए अच्छे काम के लिए उनको भेजते हैं. और जब उनका काम पूरा हो जाता है तो भगवान. कहते हैं अब तू वापस आ जा क्योंकि तुझे जो. कंट्रीब्यूट करना था तू ऑलरेडी कर चुका है. और वोह आते ही समाज को महात्मा बुद्ध कुछ. समय के लिए आए ज्ञान देकर के चले गए. क्योंकि वो इस दु दुनिया के लिए शायद बने. नहीं होते हैं वह सिर्फ एक शिक्षा देने आए. हैं और उसके बाद भगवान के धाम जाना है. उनको और देखो मुझे लगता है बात यह नहीं है.
कि आयु कितनी थी बात यह कि कर्म क्या किया. कई व्यक्ति ऐसे दो चार साल में ही कुछ ऐसा. कर जाते कि वो सदा के लिए अमर हो जाते तो. आयु से फर्क नहीं पड़ता उनके कर्म. उन्होंने अच्छे किए इसलिए वो अमर है यही. से कर्म से आ शंकराचार्य जी आपको क्या. लगता है कि आज सनातन धर्म जो इतना बड़ा. वटवृक्ष बन गया है कितनी मह भूमिका आप. उनकी मानती हैं क्योंकि जब हम चारों धाम. को देखते हैं या चारों धाम को लेकर उस दौर. में वो विजन होना कि केदारनाथ में साउथ का. मंदिर होगा अयोध्या में वहां का मंदिर.
होगा साउथ में नॉर्थ का होगा और आपको जीवन. में यात्रा करनी है ताकि कल्चरल एक्सचेंज. शुरू हो जाए तो वह जो दूर दृष्टि थी आप. कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका मानती क्योंकि. जितना हमने थोड़ा बहुत पढ़ा समझा जाना उस. वक्त हिंदू धर्म से कई लोगों का मुंह भंग. हो रहा था आपस में लड़ाई झगड़े बहुत बढ़. गए थे और सबको यूनाइट कर देना और उस कम. उम्र में ऐसा मैसेज कर देना जिस पर शायद. उस पथ पर आज भी हम और आप चल रहे हैं जी. बिल्कुल मैं शंकराचार्य भगवान की अपनी कथा.
में भी बहुत सारी चर्चा करती हूं उनके. वाक्यों की चर्चा करती हूं उन्होंने सचमुच. एक ऐतिहासिक कार्य किया है उस समय के. हिसाब से जैसे मैंने कहा हर युग में ना. समय के हिसाब से भगवान हो या भगवान के. महापुरुष हो उनका अवतार होता है तो मुझे. लगता उनका अवतार ही इसलिए हुआ था कि वो. हमारे धर्म को पुनः स्प ना करें और. उन्होंने किया आज भी इतनी बड़ी देन उनकी. हमारे समाज को दी हुई है लेकिन लोग जानते. नहीं है आज का युद्ध आप पूछो शंकराचार्य. भगवान कौन थे तो शायद वो बता भी ना पाए.
कौन क्योंकि पढ़ा नहीं कभी स्कूल में. पढ़ाया नहीं हमें और हिस्ट्री की सारी. चीजें पढ़ा दी जाती लेकिन भगवान. शंकराचार्य ने इस विश्व को क्या दिया वो. नहीं पढ़े तो लैक ऑफ नॉलेज है अगर मेरी. बात करें तो भगवान शंकराचार्य जी की देन. है कि आज हमारा धर्म जो है वो कहीं ना. कहीं स्थापित है एक जगह स्था और आपने उनका. नाम लिया है बाकी कोई भी महापुरुष इस. दुनिया में आया जिसने धर्म का प्रचार किया. उन सबकी हम पर बहुत बड़ी मेहरबानी है नहीं.
तो आज हम कहां होते हम भी नहीं जानते नहीं. तो आप ये मानती है कि स्कूलों की पाठ जो. पढ़ाई लिखाई है उसमें थोड़े चेंजेज होने. चाहिए क्योंकि कई बार कई लोग ये आरोप. लगाते हैं कि हमें यह पता है कि बाबर का. बेटा हुमायूं हुमायूं का बेटा आपका आ गया. जहांगीर जहांगीर का बेटा अकबर अकबर का. शाहजहां शाहजहां से औरंगजेब या दारा शिको. नीचे तक हमें पूरी पीढ़ी याद है हम जैसा. आपने कहा शंकराचार्य जी को नहीं जानते हैं. जबक इतनी बड़ी भूमिका है अलग-अलग मठों की. स्थापना करना हो या बहुत सारी चीजें या.
ऐसे बहुत सारे और भी शायद लोग होंगे जिनके. बारे में हमें भी नॉलेज नहीं होगी नहीं. पता है होनी चाहिए अगर ये मैं तो हर बार. कहती हूं कि हमारी एजुकेशन सिस्टम में. बदलाव आना चाहिए और इसमें धर्म का झंडा. लेकर अब नहीं खड़े हो जाना चाहिए तर्क. देने के लिए आर्गू करने के लिए कि हिंदू. धर्म ही क्यों अरे हमारा भारत में जन्म. हुआ है अगर भगवा भवान शंकराचार्य भारत में. आए और भारत के बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो कौन. पढ़ेगा अगर हां यह बात हम कहते यूएस में. अमेरिका में कि एजुकेशन सिस्टम में भगवान. शंकराचार्य को पढ़ाया जाए तो शायद आप.
प्रश्न उठा सकते थे कि हम क्यों पढ़े. लेकिन हमारा जन्म भारत में हुआ अगर हम राम. की बात करें कृष्ण की बात करें महात्मा. बुद्ध की शंकराचार्य की बात करें तो यह. हमारा हक है यह हमारा अधिकार है यहां के. बच्चों का अधिकार है कि वह जाने इनके बारे. में तो एजुकेशन सिस्टम खासकर जो इंग्लिश. मीडियम जो एजुकेशन सिस्टम चल रहा है इसमें. धर्म की नॉलेज देना बहुत जरूरी है नहीं. दोगे तो रिजल्ट उसका आज देखने को मिल रहा.
है नहीं नहीं हिंदू की बात नहीं कर रही. मैं एक मानवता की बात कर रही हूं मैं. हमेशा कहती हूं कि आप किसी भी धर्म के हो. हिंदू केवल धर्म नहीं है हिंदू जीवन जीने. की कला है सनातन जीवन जीने की कला है अगर. आप किसी भी धर्म के हो क्या भगवत गीता. केवल हिंदुओं के लिए भगवत गीता कृष्ण ने. इस लॉजिक के साथ सुनाई है अर्जुन को कि. इसको कोई भी धर्म सुने तो उसको अपने जीवन. जीने के लिए हेल्प मिलेगी बिजनेसमैन. पढ़ेगा तो बिजनेस में हेल्प मिलेगी तो आप.
इसको केवल धर्म से मत जोड़ दीजिए कोई भी. चीज है कट्टरवादी के साथ मत जोड़ दीजिए. शिक्षा एजुकेशन सिस्टम में धर्म की नॉलेज. मिलनी चाहिए तभी बच्चों का भविष सी धर्मों. की या हिंदू धर्म की इंडिया में सबसे पहले. हिंदू धर्म की क्यों क्योंकि हिंदू धर्म. में यहां जो नहीं नहीं बहुसंख्यक की बात. नहीं जैसा मैंने कहा इस देश में जिसका. जन्म हुआ है इस देश में अगर राम की बात. करना गुनाह है तो मुझे नहीं लगता कि यह.
कोई अच्छी बात है राम जी अयोध्या के लिए. लड़ते रहे लोग लड़ते रहे कि अयोध्या में. राम जी का मंदिर बनना चाहिए क्यों नहीं. बनना चाहिए अगर मेरा जन्म मेरे गांव में. हुआ है तो ऑटोमेटिक वहां मेरा घर होगा अब. मुझे इसके लिए लॉजिक नहीं देना कोई कोई. प्रमाण नहीं देना कि मेरा जन्म यहां हुआ. है लेकिन हमने उसको भी एक आक्रोश का. मुद्दा बना दिया हमने वहां पर भी तोड़फोड़. कभी कुछ कभी कुछ शुरू कर दिया तो मुझे. लगता है कि इसमें हिंदू यह दूसरे धर्म.
इनका मायने नहीं रखता है भारत देश में. जन्म लेकर के भारत में जो भी हुआ वह जानना. चाहिए आप आप ही ने कहा कि अगर हम अकबर के. बारे में जान सकते तो हम स्वामी हरिदास जी. के बारे में क्यों नहीं जान सकते जो अकबर. उनको गुरु समान मानता था कौन बच्चा जानता. होगा स्वामी हरिदास के बारे में वृंदावन. धाम में तान सेन उनके साथ आता था तो यह. चीजें हमें जब तक नहीं बताएंगे बच्चों को. तो होगा क्या वो वो प्राउड नहीं फील. करेंगे अपने धर्म के ऊपर अभी उनको प्राउड.
इसलिए फील नहीं होता क्योंकि नॉलेज ही. नहीं है कि हमारे धर्म में यह होता था राम. जी का जन्म कहां हुआ. था सारी दुनिया इस बात को प्रमाणित करने. में लगी रही. बाकी शास्त्र प्रमाण है कि भगवान श्री राम. भारतवर्ष की भूमि पर अयोध्या की धरती पर. सरयु नदी के तट पर श्री राम लला प्रकट भए. और सारी दुनिया जानती है लेकिन वहां भी हम. अपने लॉजिक हम खुश नसीब है कि हम वहां पर. उसके पड़ोस में पैदा हुए उसी सरयो घाट के.
बगल में लेकिन जो सवाल उठाते हैं पूछते. हैं कि लोग जो सवाल उठाते हैं क्योंकि मैं. आपसे लॉजिक लेना चाहता हूं क्योंकि आप. कथावाचक है आपका लॉजिक जो है वो दूर तक. जाएगा आपके पास आप रोज इस इसम प्रोफेशन. में मास्टर है मैं सवाल पूछने में मेरे. शायद थोड़ा जज होगा आपको जवाब देने में वो. सवाल ये पूछते हैं कि हमें यह पता रहा कि. भगवान राम जन्म कहां हुआ लेकिन जब आप. पूछते हैं कब हुआ तो कहते हैं त्रेता में. हुआ अब त्रेता में कब हुआ इसके बारे में. लोग खामोश आते हैं ये दूसरा वर्ग आता है.
जी तो आप जानती हैं भगवान राम का जन्म कब. हुआ था नहीं देखिए अब एग्जैक्ट कोई ईयर या. जैसे हम भगवान श्री कृष्ण के बारे में बात. करते हैं तो उनके बारे में बताते हैं तिथि. बताते हैं वार बताते हैं तो ऐसे भगवान. श्री कृष्ण का किस तिथि में जन्म हुआ वो. गोसाई जी ने लिखा है कि तिथि मधुमास. पुनीता शुक्ल पक्ष अभिजित हरि प्रीता मध्य. दिवस अति सीत न घमा पावन काल लोक विश्राम. चैत्र का महीना नवमी तिथि थी मध्यान का.
समय था दोपहरी का समय था पावन काल लोक. विश्राम मतलब मानते हैं ना दोपहर का समय. थोड़ा विश्राम का समय होता है तो राम जी. ने मध्यान का समय चुना क्योंकि राम जी खुद. मध्यस्थ है एक्सट्रीम नहीं है किसी भी चीज. में तो ना सुबह ना शाम ना बहुत गर्मी ना. सर्दी तो उन्होंने नौमी तिथि को यह चुना. गया और उनकी जो लेखनी है बाबा तुलसीदास जी. की उसमें भी वर्णन आता है जोग लगन गृह वार. तिथि सकल भए अनुकूल मतलब दुनिया की जितनी.
भी ग्रह हैं अच्छी तिथियां है वो सब. इकट्ठी हुई और तब राम जी का जन्म हुआ 22. तारीख वो तारीख है जब प्राण प्रतिष्ठा. होगी जनवरी में शायद अगर मैं गलत नहीं ह. तो 22 जनवरी प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है. बचपन से आपने भी सुना होगा मंदिर वहीं. बनाएंगे कई लोग मजाक बड़ा तारीख नहीं. बताएंगे अब तारीख आ गई तारीख आ गई जी. चित्रलेखा जी. जाएंगे या आप कभी गई है रामलाला के दर्शन. करने मैं बिल्कुल गई हूं मैं और शायद मुझे. याद है आखरी बार राम मंदिर का निर्णय आने.
से लास्ट जो दीपावली थी जी उस दीपावली पर. एक जी न्यूज का कार्यक्रम था उसमें यही. प्रस्ताव चल रहा था कि राम मंदिर बनना. चाहिए वो दीपावली का समय था तो उसी. कार्यक्रम में मुझे बुलाना हुआ और उससे. शायद 15-20 दिन बाद ही यह निर्णय आ गया. तो मुझे बहुत खुशी हुई कि चलो एक गिलहरी. जैसे जाती है उसे लगता है कि मेरे कारण. सेतु बन गया तो उससे पूर्व में गई और उसके. बाद भी अभी भी कई बार जाना दर्शन कि अंदर.
जाके रामलला के जो टेंट में रामलला थे जी. मैंने किए थे और उस समय देख कर के हृदय. बहुत दुखी भी हुआ था क्योंकि मैंने पहली. बार दर्शन किए कि इस परिस्थिति में राम जी. को प्रूफ देना पड़ रहा है कि मैं अयोध्या. का हूं और उनकी जो थोड़ी स्थिति जिस तरीके. से है व वो मुझे लगा कहीं ना कहीं गलत है. पर कुछ समय बाद वो निर्णय आयाती कोर्ट के. आदेश से उन्हें कपड़े बदले आते थे अगर. कपड़े ही बदलना हो तो आपको इजाजत लेनी. पड़ती थी कि राजा राम में कपड़े जो हैं अब.
वो सरकारी आदेश आएगा अच्छा तो बदले जाएंगे. नहीं आएगा तो फिर वो रहेंगे या एक समय. सीमा के बाद बदले जाएंगे तभी तो देखो मुझे. लगता है कि जब राम जी के मंदिर का निर्णय. आया मुझे याद है आपको भी याद होगा पूरे. देश ने खुशिया मनाई इवन हम कह जरूर रहे थे. कि भाई एक वर्ग लड़ रहा है नहीं होना. चाहिए लेकिन वहां से भी कोई विरोधाभास. नहीं हुआ क्योंकि ये राम जी की भूमि है. यहां पर सबको स्वागत करना चा बच्चा बच्चा. नाचा कि राम जी के मंदिर का जो निर्णय है. वह पास हुआ मुझे लगता है 22 जनवरी को जब.
यह राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है. अ हर व्यक्ति को दीपावली मनानी चाहिए. खुशियां मनानी चाहिए क्योंकि हमारे आराध्य. मंदिर में स सम्मान विराजित होने वाले. हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है अयोध्या. में राजा राम का मंदिर बन रहा है भव्य. मंदिर बन रहा है. खबरें आपकी मथुरा से भी आती है जहां पर. जन्मस्थान है जिस जगह पर जन्मस्थान है उस. जन्मस्थान के साथ ही जितनी मेरी आपकी दूरी. है शायद इतनी ही दूरी उस मस्जिद और भगवान.
के जन्म स्थान को लेकर. है आपको लगता है कि जो वहां से भी एक. शुरुआत या बात निकली है वह जायज है या. सरकार फेवर में है एक जगह मौका मिल गया. फैसला आ गया है तो उम्मीदें बढ़ गई है. क्या सोचती हैं आपकी मथुरा में भी वो होना. चाहिए जो अयोध्या में हुआ या यह सोच नहीं. सही है क्योंकि आरएसएस ने कहा या बाकी के. लोग थे कि हमारी सोच कई साधु संतों ने भी. कहा कि हमारी वोह सोच सिर्फ राम मंदिर तक. को लेकर थी वो आंदोलन राम मंदिर तक को.
लेकर था लेकिन आप क्योंकि श्याम जी के. इलाके से हैं आपकी भी अपनी महत्वाकांक्षा. होंगी आपके मन में क्या. है देखिए वैसे. तो मैं बहुत ज्यादा कट्टरवादी ता मैंने. कहा मैं उसमें विश्वास नहीं रखती हूं. लेकिन वृंदावन हुआ मथुरा हुआ अयोध्या हुआ. यह हम हमारे भगवान के जन्म स्थान है और. यहां किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या. विरोधाभास स्वीकार हमें नहीं करना चाहिए. क्योंकि वह हमारे आराध्य की धरती है कई.
बार ऐसा होता है कई बार मुद्दे उठते हैं. क्योंकि जैसा आपने कहा दूरी बिल्कुल नहीं. है तो उसके कारण कभी-कभी आपसी विरोध. बढ़ावा हो जाता है तो मुझे लगता है कि. मथुरा जन्मभूमि जो मुद्दा सरकार या संत. महापुरुष जो यहां ब्रजधाम के वो उठा रहे. हैं तो उसमें कोई गलत नहीं है मैं भी उसके. समर्थन में हूं क्यों क्योंकि वहां भगवान. की अपनी जन्मभूमि है और बात देखो सारी बात.
अटक कर के यहां आ जाती है. कि हमारे मंदिरों को तोड़ा गया उनको तोड़. कर के वहां जो थे ऑलरेडी उस भूमि को छीना. गया तो कहीं ना कहीं अन्याय हुआ था उस. अन्याय को समय पर अगर हम सुधारते हैं और. हम चाहते हैं कि जो अन्याय एक इतिहास में. हुआ था वह ना हो तो मुझे नहीं लगता वह गलत. है अ इसी में एक सवाल और जोड़ता हूं मैं. कि धर्म बड़ा या कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ.
इंडिया अलग नहीं है दोनों अलग नहीं है. धर्म से शिक्षा लेकर के कॉन्स्टिट्यूशन. बनता है और भारत का तो विशेषकर भारत का जो. संविधान है वह कहीं भी आप पढ़ लो कुछ भी. धर्म विरोधी नहीं होगा उसमें हमें इस को. अलग-अलग नहीं करना है कि धर्म अलग है. संविधान अलग है हां संविधान की वजह से हम. जिंदा है धर्म की वजह से हम जिंदा है. विरोध है ही नहीं दोनों में ये सवाल मैंने.
इसलिए पूछा क्योंकि हमारे कानून के हिसाब. से प्लेसेस ऑफ वशिप एक्ट बनाया गया था. जिसमें था कि 1947 के पहले जो जिस जगह जिस. स्थिति में था धार्मिक स्थान उसे वैसे रखा. जाएगा लेकिन 90 के दशक में एक नारा निकला. जिसको अप्रत्यक्ष तौर पर आपने भी कहा कि. अयोध्या तो झांकी है काशी मथुरा बाकी है. यह नारा चला और हमारी भावनाए भी है. क्योंकि तीनों बहुत महत्त्वपूर्ण भगवान. हमारे उसके हैं और वहां पर अयोध्या में तो. फिर भी कहते हैं कि आस्था ज्यादा थी काशी. और मथुरा में तो प्रत्यक्ष नजर आता है यह.
बात मेरे तमाम जो मुस्लिम स्कलर टीवी. डिबेट करते थे वो भी कहते थे कि अगर हमने. स्वच्छा से दे दिया तो शायद ये टॉपिक खत्म. हो जाता बनारस का मामला कोर्ट में चल ही. रहा है ज्ञानवापी का या जो शिवलिंग या. फवारा का एक विषय निकला काफी विवाद भी उस. पर हुआ तो जो दूसरा वर्ग है वो कहता है. प्लेसेस ऑफ वशिप एक्ट के साथ नहीं होना. चाहिए लेकिन यहां पर हमारी आस्था आती है. और यह तर्क आता है कि भाई यहां नहीं होगा. हिंदुस्तान में तो फिर कहां होगा वैसे भी. हिंदुओं के देश एक ही दो है नेपाल एक. जमाने में था और बहुसंख्यक हम यहां पर है.
बाकी कहीं इतने बहुसंख्यक नहीं है तो आपका. इस पर क्या थॉट है कि यह विवाद का विषय है. कि तनाव पैदा होगा अयोध्या में तो नहीं. हुआ लेकिन बनारस में हमने दे काफी भीड़. हुई या यहां पर भी हुआ. या धर्म मतलब मैं आपका इस पॉइंट ऑफ व्यू. जानना चाहता विवाद का विषय नहीं संवाद का. विषय है मेरी नजर से कई चीजें संवाद से भी. हल हो सकती है और आज क्या है इस बात को. कहने में हमें कोई आपत्ति नहीं कि फिलहाल.
वर्तमान में जो सरकार है वह कहीं ना कहीं. हिंदुत्व के बारे में सोचती है और यह बहुत. स्वागत के योग्य है तो अगर उस वर्तमान समय. में आपकी इच्छा क्या है मथुरा में क्या. होना चाहिए मेरी इच्छा यही है जो पूरे. भारतवर्ष की इच्छा है सनातनी की इच्छा है. कि जो मांग पूरा सनातन धर्म उठ आपने तो. योगी जी वाली बात कह दी योगी जी का मैं एक. इंटरव्यू देख रहा था हम गए थे कवर दीपावली. कवर करने के लिए जी तो उन्होंने कहा कि. लोग कहते थे कि मंदिर बन रहा है कि नहीं. बनेगा लोग कहते थे बनेगा नहीं अब उन्होंने.
पूछा बन रहा है नहीं बन रहा है बोले ये भी. बन रहा है और जो आपके दिल में है वो वो भी. बनेगा नहीं नहीं हमें इसका स्वागत करना. चाहिए मैं मैंने कहा ना विवाद करके नहीं. संवाद करके आपस में वार्तालाप करके जहां. जिसको देखिए मैं यह नहीं कहती अगर कोई. दूसरे धर्म की मस्जिद है उसको तोड़ दो. क्योंकि वो भी एक धर्म का स्थान है जहां. उनकी अपनी भूमि है जहां उनकी आवश्यकता है. मोहम्मद हुए पैगंबर हुए जो भी उनके धर्म.
में ज्यादा तो मुझे नहीं पता पर जो भी रहे. वहां उस स्थान पर उनका सम्मान होना यह कोई. गलत नहीं है लेकिन जहां हमारा जड़ है जहां. हम जानते हैं कि मथुरा कृष्ण से बनी है. अयोध्या राम से बनी वहां हमको लड़ के कर. साथ नहीं रह. सकते साथ रहने में मैंने जैसा कहा ना. कभी-कभी विवाद आ जाता है आपसी मतभेद इतने. ज्यादा बढ़ जाते हैं वो वाला सिस्टम आपने. सुना ही होगा तेरा माय कछ कि मेरा माय कछा.
वो नहीं होना चाहिए और जब वहां एक धारा. बहेगी तो मुझे लगता वो विवाद खत्म हो. जाएगा संविधान जो है कांस्टिट्यूशन जो है. उसमें धर्म अपना थोड़ा सा सहयोग देक के जो. आपने कहा एक्ट को वहां संशोधन भी हो सकता. है थोड़ा बदलाव हो सकता है लोगों की भावना. मतलब आपकी इच्छा है कि पूरा मिल जाना. चाहिए जी ठीक. है कलयुग का अंत कब होगा और कलयुग को लेकर. जो कहानी सुनाई पड़ती है कि भगवान अवतार.
लेंगे कलकी भगवान अवतार लेंगे तो कलयुग. में कौन सा साल चल रहा है क्या वाकई में. अंत होगा क्या भगवान आएंगे क्योंकि इसके. नाम पर फिल्में भी देख ली हमने वेब सीरीज. भी देख ली कलक के नाम पर भगवान आएंगे और. कलयुग अपने चरम पर कब पहुंचेगा कितने टाइम. बचा हुआ. है भागवत में लिखा हुआ है एट डेट समय विद. प्रूफ लिखा हुआ है कि 432000 कलयुग की. टोटल आयु है टोटल एज है तो 5000 साल उसमें. बीत गए क्योंकि कृष्ण आए कृष्ण के जाति.
कलयुग शुरू हो गया और अभी कलयुग चल रहा है. तो 5000 साल उसको बस हुए हैं जी तो अभी. बहुत लंबा समय बाकी है 432000 साल में से. बच 5000 साल बीते हुए हुए हैं तो इसका. मतलब अभी बहुत लंबा टाइम बाकी है बात रही. कल की अवतार की बिल्कुल कल की अवतार होगा. इलाहाबाद में होगा संबलपुर गांव में होगा. उसकी तिथि उसका स्थान सब कुछ भागवत में. लिखा हुआ और भागवत की कोई बात झूठी नहीं. है कोई यह नहीं कह सकता कि भाई हवा में. बनाई हुई बातें हैं अगर हमारे ग्रंथों में.
लिखी है तो इसका मतलब वह होने वाली है. क्योंकि भागवत कृष्ण के जन्म से पहले लिख. व्यास जी ने लिख दी थी क्या-क्या होने. वाला है वो सब बता दिया था तो कलयुग में. कल्की अवतार होगा लेकिन उसमें बहुत समय है. भागवत में लिखा कि आगे आने वाले जो बत्ती. हज साल है इसमें कलयुग बढ़ेगा अभी नहीं. बढ़ा है अभी लोग सोच रहे कलयुग बढ़ेगा यह. तो कलयुग अभी बढ़ा नहीं है शुरुआत है. 32000 साल में ऐसा कलयुग आएगा कि जैसे.
जंगल राज नहीं होता कि जिसका लाठी उसी का. राज चलेगा वही कलयुग में होने वाला है. क्योंकि यहां जिसका बल होगा जिसके पास बल. अधिक होगा वह राजा बनेगा और इतना भी लिखा. है कि ऐसा जंगल राज आएगा कि लोग आपस में. एक दूसरे को मार मार करके अपने आप को आगे. बढ़ाएंगे तो भागवत की यह सब बातें कहीं ना. कहीं देखने को भी मिल रही है आज और आगे भी. होने वाली ठीक है अब तीन नाम मैं और लूंगा. उसके बाद हम इस इंटरव्यू को समाप्त करेंगे.
इनको लेकर आपकी सोच क्या है बाबा राम रहीम. से मिली है आप नहीं क्या सोच है आपकी उनको. लेके मैं कभी मिली नहीं हूं और. ज्यादा उनकी क्या धारणा है साधन पद्धति है. वो भी मैं नहीं जानती बस कभी कभार उनको. टीवी के या सोशल मीडिया के माध्यम से एकाद. क्लिप देखी है जैसा मैंने कहा मैं भक्ति. मार्ग का संवाहन करती हूं और भक्ति मार्ग. में जिस प्रकार का उनका पहनावा है या.
व्यवहार है या विचार है वह कहीं से मैच. नहीं खाता है क्योंकि जब हम एक साधु संत. नाम लेते हैं तो हम चाहते हैं कि उसकी. वाणी में विनम्रता हो उसके पहनावे उसके. खाने में विनम्रता हो तो जितना थोड़ा बहुत. मैंने देखा या जाना है लोगों से सुना है. वह मुझे नहीं लगता है कि एक साधु की. कैटेगरी में होना चाहिए तो ज्यादा तो कुछ. नहीं बोल सकती बट जितना सुना है मुझे संत. की कैटेगरी वाला वह सिस्टम नहीं लगता. आसाराम बापू या आसाराम क्योंकि अब कई.
लोगों ने बापू कहने पर भी तराज करते हैं. आपकी क्या सोच उनको लेकर क्योंकि उनका तो. आचरण या पहनावा कई लोगों के घरों में आज. भी मैं देखता हूं कि उनकी तस्वीर रखी हुई. है जी ये देखो क्या होता है ना हमारी. श्रद्धा बहुत महत्व रखती है ऐसे बहुत सारे. लोग हैं आज भी मुझे बोलते हैं कि आप बापू. के बारे में बोलिए अपने मंच से बोलिए. स्टेज से बोलिए मैं बापू. का जैसा मैंने कहा मैं उनकी वेशभूषा का. सम्मान करती हूं क्योंकि वो एक सं आराम है.
आसाराम बापू. है मैं तो आसाराम बापू ही कहूंगी मेरा. अधिकार नहीं है किसी भी व्यक्ति को ऐसे. बोलने का. लेकिन क्या कर्म हुआ क्या किया. वो उनके कर्म उनके साथ है मैं उसके ना तो. समर्थन में हूं ना विरोध में हूं वो उनके. विचार और उसके लिए जस्टिस है जस्टिस ने जो. भी निर्णय लिया है चाहे वह गलत है तो गलत. और सही है तो सही सिर्फ इतना कहूंगी कि एक.
साधु का वेश था उनका है अभी भी तो मैं. उसको प्रणाम आपको लगता है कि उ सनातन को. धक्का लगा क्योंकि उनकी फैन फॉलोइंग बहुत. मैसिव थी जी बिल्कुल लगा बिल्कुल इससे. कहीं ना कहीं लोगों की श्रद्धा में भी एक. बहुत बड़ी ठेस पहुंची लोग अभी भी कोई बात. होती है तो बड़ी जल्दी से प्रश्न उठा देते. हैं उंगली उठा देते कि सब साधु ऐसे लेकिन. मैं लोगों से कहना चाहती हूं देखो ऐसा. नहीं होता है हर एक क्षेत्र में अच्छे लोग. बुरे लोग अच्छाई बुराई य सब चलती रहती है.
पर आप उससे पूरे एक संत समाज को साथ में. नहीं ले सकते आपको य समझना होगा कि अच्छाई. बुराई हर जगह होती है संत समाज में भी कुछ. बुराई है अगर वो आपको दिख भी गई है तो. पूरे संत समाज को नहीं बोलने का हमें. अधिकार है चित्रलेखा जी 24 घंटे कथावाचक. रहती है वो एक नर्मल जिंदगी में भी आती है. कथावाचक मैं हूं 24 घंटे मेरा जीवन 24. घंटे कथावाचक है नहीं बहुत कम जहां मुझे. लगता है जैसे आपने कोई चीज मुझे ओ माय गॉड.
देखी वो भी इसलिए क्योंकि आप जैसे लोग आकर. के बार-बार पूछते थे कि दूध चढ़ाए कि ना. चढ़ाए तो मुझे लगा देखना चाहिए या कोई ऐसी. बहुत कोई मैसेज देने वाली फिल्म है. शिवलिंग परू चढ़ाना चाहिए बिल्कुल चढ़ाना. चाहिए क्यों यह आपका अपना अधिकार. कभी हम दूसरी चीजों में जाकर के पैसा जो. शराब में वेस्ट कर रहे हैं तब तो प्रश्न. नहीं उठाते आप इतना कर सकते मैं उसके. समर्थन में हूं कि आप जो दूध चढ़ा रहे हैं.
उसको बाद में जाकर के वेस्ट होने की जगह. आप उसको दान में कहीं कोई गरीब हो झुग्गी. झोपड़ी हो वहां जाकर के आप बांट दीजिए. बाकी शिवलिंग पर दूध क्यों ना चढ़ाए अगर. देखो हम अपने लिए खर्च करें तो अच्छा. लेकिन जब भगवान की बात आती है हम बिहारी. जी में अपने ठाकुर जी को छ पन भोग लगाते. ये हमारा मन है यह भाव है हम चाहते हैं कि. हम जो अच्छा खाए उससे अच्छा हमारा भगवान. खाए हम जो पहने उससे अच्छे हमारे ठाकुर जी. पहने तो उसमें कोई विरोध नहीं है पर आपको. दूध अगर वेस्टेज लगता आप जाकर के उसको.
गरीब में बांट गाने सुनती है आप. फिल्मी अ मैं संगीत में बहुत रुचि रखती. हूं बॉलीवुड म्यूजिक की बात कर रहा हूं. बॉलीवुड में जहां कोई लाइट और क्लासिकल. कुछ चीजें होती है मैं वो सुनती हूं तड़क. भड़कते नहीं सुन सकती. अरिजीत सिंह शन्ना. मेरेया नहीं ऐसे मतलब रेगुलर बेसिस पर. नहीं ऐसे तो कभी ना कभी कान में आ ही जाता. है मैं जो क्लासिकल से थोड़े जुड़े हुए.
मैं उनको ज्यादा सुनती हूं और मैं बहुत. सारे संगीतकारों से मिलती भी रहती हूं और. कुछ ना कुछ उनके साथ कार्य भी करती रहती. हूं जहां अच्छा संगीत होता है तो उसको. सुनना मुझे अच्छा लगता है तो कथावाचक के. अलावा आपके जीवन में फिर क्या होता है कभी. ब्रेक लेती है आप लाक एक महीने में दो. महीने में में कि ठीक है मैंने चार महीना. ईश्वर को समर्पित किया अब शादी भी हो गई. है घूम आते हैं या पति दे फोर्स करते हैं. कि यार थोड़ा समय इधर भी दो शादी भी की है. वो भी एक जीवन का हिस्सा.
है नहीं देखो यह ब्रेक वाला चीज पता है हम. कब सोचते जब हमको यह लगता हम काम कर रहे. हैं अब काम से ब्रेक चाहिए कथा मेरा काम. नहीं है यह मेरा प्रोफेशन नहीं है मुझे. लगता है य मेरा जीवन है अगर थोड़ी देर के. लिए मुझे यह सोचने को कोई कह दे कि तुम. कथा अपनी लाइफ से हटा दो जीवन से हटा दो. तो मुझे लग त कुछ भी नहीं बचा भाई साहब. नहीं कहते कि थोड़ी जिम्मेदारी हमारी तरफ. भी है ठीक है 80 पर उधर दिया 20 तो देके. जाओ नहीं उसके लिए देखो हम या आपने पहले. से शादी के पहले करवा लिया था कि नहीं. नहीं नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है लेकिन.
भगवान की कृपा से बहुत सारी बातें डाल के. जा रहा हूं उनके मन में मैं पॉडकास्ट के. जरिए पर मुझे लगता नहीं कि मुझ मुझ पर या. उन पर इस बात का कोई असर होने वाला है हम. कथाओं के माध्यम से मैं यह नहीं कहती कि. मैं पूरी तरीके से सब चीजों से मुक्त हूं. कभी मन में इच्छाएं आ भी जाती इंसान है. लेकिन जैसे कथाओं में हम बहुत सारी जगह. जाते हैं तो भगवान की कृपा से विदेशों में. बहुत कथाएं होती है तो वहां अपने आप कथा. के साथ साथ घूमने का मौका आपने बताया आप.
यूरोप गई थी सात दिन अलग-अलग देशों में गई. शादी के पहले गई थी बाद में गई. थी शादी के बाद एक तरीके से हनीमून ट्रिप. भी हो. गई मुझे सोचना पड़ रहा है कि पहले गई थी. बाद में गई थी लेकिन ऐसा कई बार होता है. कि जैसे हम विदेश में कथा करने आपने कथा. कर दी कथा का एक समय होगा दिन में होगी. शाम को होगी दोपहर में होगी सुबह होगी जो. भी होगी उसके अलावा बाकी टाइम आप क्या. करते थे फिर विदेशों में विदेशों में हा. विदेशों में कोई खासकर विदेश में भारत में.
तो ऐसा मौका मिलता नहीं कहीं आने का जाने. का विदेश में अगर जा रहे हैं और वहां कोई. अच्छी जगह है घूमने की तो वहां जो कथा. कराते हैं वो लेकर के जाते हैं कि चलिए. अच्छी जगह वहां घूम कर के आते हैं तो वहां. हम कभी-कभी जाते हैं लेकिन मुझे वो भी. ज्यादा पसंद नहीं है मुझे क्या है मेरा. टाइम टेबल मेरा रूटीन एक फिक्स है मुझे. पढ़ना बहुत पसंद है मुझे लगता है अगर मैं. घूमने जाऊंगी क्या पढ़ तो टाइम वेस्ट हो. जाएगा पढ़ने में मेरे दो दो एक तो सबसे.
बड़ी बात हमारे ग्रंथ इतने भरे हुए हैं. खासकर मैं जिस संप्रदाय से बिलोंग करती. हूं उसमें हजारों ग्रंथ है उनके पढ़ना. उनके नॉलेज गेन करना वो और कुछ आजकल जो. समाज में कुछ चीजें लिखी जाती हैं जो आज. के यूथ शायद उनको सुनके ज्यादा धर्म से. जुड़ेंगे तो वोह कुछ-कुछ चीजें भी कुछ. किसी की बुक हुई अच्छी तो वो पढ़ना पसंद. करती हूं खासकर मैं अपने शास्त्र का. अध्ययन करती.
बढ़ाना शुरू किया और आधे घंटे आपके भी. जाया हो. गए नहीं मैं मैंने कहा ना मैं ऐसा नहीं कि. मैं हर चीज से मुक्त हूं लेकिन एक चीज को. मैंने थोड़ा सा डिसिप्लिन में बना रखा है.
मुझे पता है कि अगर यह टाइम मुझे पढ़ना है. तो पढ़ना है इस टाइम अगर मेरे पास थोड़ा. सा समय है तो मैं अपना फोन चला सकती हूं. देख सकती हूं क्या चल रहा है क्या दुनिया. में थोड़ा बहुत हो रहा है लेकिन ऐसा नहीं. है कि मैं 24 घंटे सिर्फ उसी को चलाने में. बिजी हूं और सुबह उठते ही वो चलाया और. उठते ही मैसेज किया तो उन सब चीजों से. कहीं ना कहीं मैंने अपने आप को बचा रखा है. चलिए आपने हमें काफी समय दिया हमारी टीम. के लोग भी मुझे काफी देर से घूर रहे. हैं कि इजाजत नहीं मिलेगी अच्छा लगा आपसे.
बात करके जाते जाते कोई मैसेज अगर आप देना. चाहे हमारे दर्शकों को अपनी गौशाला को. लेकर खास तौर पर क्योंकि मैं उससे खुद. प्रभावित हुआ हूं तो आप दे सकती है हमारे. माध्यम. से एक ही मैसेज है मेरा. कि हमारा जो ह्यूमन जो लाइफ है मानव जो. जीवन है वह भगवान ने शायद इसलिए दी है. क्योंकि हमको कुछ ना कुछ समाज के लिए करना. चाहिए वही हमें हमेशा के लिए एक अच्छा. इंसान या अमर बनाता है और उसके लिए मैं.
चाहती हूं कि लोग जो प्राणी बोल नहीं सकते. उनसे प्यार करें गौ माता हमारे धर्म की. नीव है उनसे प्रेम करें आप उनकी सेवा करें. टाइम निकाल कर के गौशाला जाए वहां गाय की. सेवा अपने हाथों से करें यंग जनरेशन अगर छ. दिन. पार्टी कर रही है तो एक दिन जाकर के. गौशाला में गाय के साथ भी टाइम दीजिए. पशुओं के साथ कोई भी पशु है अगर आप कुत्ते. से प्रेम कर सकते हैं अगर आप बिल्ली से तो. आप गाय से भी कर सकते हैं तो सबसे प्रेम.
करें क्योंकि यही मानवता का सबसे बड़ा जो. मैसेज है वो आप समाज को दे सकते हैं और वो. आपका गाना रह गया था जो हमने आपसे भजन की. फरमाइश की थी जी. मैं एक क्योंकि मैं राधा रानी को बहुत भाव. से मानती हूं तो राधा रानी का ही एक छोटा. सा भाव है है. राधे. राधे. श्यामल. प्यारी. तारो.
जीवन. नैया. द्वारे. ठाड़े दीन. भिखारी. तार जीवन. नैया. तारो जीवन. नैया. राधे. राधे राह दे.
मुझको. साचा जीवन. पाऊ कब बरसेगी. कृपा. तुम्हारी. तारो जीवन कनहैया. द्वारे. ठाड़े दीन. भिखारी. तारो जीवन.
नैया. तारो. जीवन. नैया बहुत बहुत शुक्रिया बहुत-बहुत. धन्यवाद आप आए और यहां कुछ चर्चा करने का. हमको ये मौका मिला आग रहा कि मैं यहां आया. आपसे मुलाकात हुई काफी समय हमने लिया और. आशा करते हैं कि दर्शक भी आपको उतना ही. पसंद करेंगे बाकी कोई सवाल आपके हो तो आप. कमेंट सेक्शन में जरूर लिखिए ताकि कभी. हमारी अगली मुलाकात हो तो उसका बहाना मिल.
सके और उन सवालों को अगली बार के लिए हम. तैयार कर सकें नमस्कार राधे राधे.
