From Kashmir to Dhurandhar: Inside India's Secret Wars ft. Aditya Raj Kaul | Shubhankar Mishra
इजराइल, ईरान की लड़ाई, पे पैलेस्तीन की. लड़ाई और जो कश्मीर में दंश आपने देखा।. क्या आप कभी रिलेट कर पाए? जब हमारा. एग्जोडस हुआ, इतनी क्लीेंज़िंग हुई हमारे. साथ। उसके बाद पूरे भारतवर्ष में किसी ने. हमारी कहानी नहीं बताई। इवन हिंदू समाज. जिससे हमें बहुत अपेक्षा थी, कुछ करेगा. लेकिन उस वक्त नहीं हुआ।. कश्मीर फाइल्स सिर्फ 5% या 10% है कि. जितना कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ।. हमारे लोग मरे हैं सर। वंदे माता वंदे.
माता. क्या जो त्रासदी कश्मीरी पंडितों ने झेली. जो परिवारों ने झेली जिनकी बहनों के साथ. रेप हुआ. तीन बेटियां हैं बड़ी-बड़ी बेटियां हैं. वो अभी भी लोगों को यकीन दिला रहे हैं कि. ऐसा हुआ था. जानता ही क्या है कश्मीर के बारे में. पंचतंत्र लिखा गया वो कश्मीर हमारा. 1990 को मस्जिदों से वहां पर आवाज निकली. रिव गलि. [संगीत]. या तो आप मिल जाओ या तो यहां से भाग जाओ. या आपको मार दिया जाए।.
धर्म बदलो भागो या मर जाओ।. जो महिलाएं थी उनको बोला गया कि आप यहीं. रुकिए हमारे लिए और आपके जो मर्द है यहां. से निकल जाए।. कश्मीर की पाक जमीन पर. लेकिन उस वक्त हमने सब कुछ खो दिया।. बक्शी नगर करके एक जम्मू में जगह है। लोकल. डोगरा का घर था। उसके पीछे एक तबेला था।. वहां पर तीन महीने तक मेरा परिवार था। और. ये लोग कहते हैं कि झूठ है सब कुछ। लेकिन. फिल्म बनाने वाले भी कहते हैं कि उसमें. तरह के झूठ दिखाए गए हैं। [संगीत]. क्या आपको कहीं लगता है कि कश्मीरी. पंडितों ने वो हार मान ली? अरे डरपोक कौम.
हो आप? अरे भगोड़े किस बात के भगोड़े भाई? अगर तुम्हारी उतनी औकात [संगीत] थी, तुम. आते ना लड़ने के लिए। मनमोहन सिंह भी और. अटल बिहारी वाजपेयी भी यासीन मलिक को. होस्ट करते हैं। यासीन मलिक खुद कहता है. हां।. मैंने इंडियन एयरफोर्स के लोगों को मारा. है। मैंने कश्मीरी पंडितों को मारा है।. आई वाज इन प्रेजेंट फॉर सो मेनी इयर्स।. कि हमारे जो सिख भाई हैं उनके साथ इतनी. बड़ी त्रासदी हुई 84 में।. उसके केसेस अगर आज भी चल सकते हैं 40 साल. के बाद तो कश्मीरी हिंदुओं के के लिए. क्यों नहीं हो सकता? कौन ऐसे लोग थे जो. अलगाववादियों को प्रोत्साहन देते थे? क्या.
ये आईबी के कुछ लोग थे? क्या ये इंडिया की. इंटेलिजेंस के कुछ लोग थे? ऐसा हो सकता. है? पैलेस्तीन से लेकर सिखों तक की बात कर रहा. हूं। उन्हें कम से कम विक्टिम तो मानते. हैं।. क्या मैं उस कश्मीरी मुसलमान यंग लड़के को. कन्विंस करूं जिसने कश्मीरी पंडित देखे ही. नहीं है।. कि कोई भी डॉक्टर या नर्स किसी भी काफिर. का इलाज नहीं करेगा। उसको पिछले 20 साल से. बताया गया है कि यह तो जिहाद है। आपको. लड़ना है। क्या मैं सरकार को कन्विंस करूं. कि भाई हम विक्टिम हैं आतंकवाद के। मेरे. साथ यह हुआ है। मेरे समुदाय के साथ लोगों.
को मारा गया है। हमारे मंदिर तोड़े गए. हैं। हमारे शिवलिंग लेकक्स में बहा दिए गए. हैं पूरी तरीके से। धुरंधर के रिसर्च में. आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही। वह क्या. माइंडसेट होता है कि भारत की सुरक्षा. एजेंसी में शामिल हुआ एक अधिकारी थर्ड. क्लास की जिंदगी पाकिस्तान में जाकर जी. रहा है। इस आशा में कि रोज अपने देश के वो. काम आ जाएगा।. वो नमी अहमद को नहीं जानते। हम रविंद्र. कौशिक को ही जानते हैं।. उसकी तड़पन याद आती है तो ये गलत धारणा. है। 90% से ज्यादा लोग जो ऐसे कोर्ट.
[संगीत] ऑपरेशन में जाते हैं वो. इंटेलिजेंस एजेंसी के लिए काम नहीं करते।. जरूरी नहीं है वो हिंदुस्तानी हो। लाल. किले का हमला होता है। लाल किले पर हम. मौजूद हैं और. बेचारे 10 लोग मारे जाते हैं या 12 लोग. मारे जाते हैं, 30 लोग इंजर्ड होते हैं।. 24 घंटे में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर. एक बॉम्बिंग होती है।. 10 लोग मारे जाते हैं, 30 लोग इंजर्ड होते. हैं। क्या आपको पता था इसके बारे में? दाऊद इब्राहिम जिंदा है या मर गया? देखिए.
दाऊद इब्राहिम जिंदा है मुझे लगता है।. लेकिन मसूद अजर मुझे नहीं लगता कि पूरी. तरीके से जिंदा है। ये बड़ी खबर मैं आपको. दे रहा हूं।. मोदी जी इजराइल जाते हैं, अगले दिन हमला. होता है।. क्या कोई क्रोनोलॉजी हो सकती है? मुझे नहीं लगता कि इंडिया को कुछ. कॉन्फिडेंस में लिया गया होगा। ऐसी कुछ. डिफेंस डील्स कि जो इंडिया और इजराइल के. बीच में हुई मोदी जी की विजिट से पहले।. इजराइल क्या बलूचिस्तान में कोई ऑपरेशन. चला रहा है।. देखिए इसका तो दो ही लोग आपको बता सकते. हैं। या तो मोसाद या अननोन गन मैन।.
क्योंकि [हंसी]. इजराइल और पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक. टाइल्स नहीं है। लेकिन बहुत बार ऐसा देखा. गया है कि इजराइल के रस्ते एयरक्राफ्ट जा. रहा है, जा रहा है, जा रहा है और वो. इस्लामाबाद और लाहौर में लैंड करता है।. टू की रिसर्च के दौरान सबसे शॉकिंग फैक्ट. आपने क्या पढ़ा? हमारे बंदे वहां पे जाते हैं पाकिस्तान. में और करिश्मा कर जाते हैं।. दिल पे रखते [संगीत]. हैं।. आपका फेवरेट कैरेक्टर कौन था? राकेश बेदी।. बच्चा है तू मेरा। योर मटक्स आर वै वाइट।.
[हंसी]. धुरंधर में आपने योगी जी को नहीं दिखाया. इस. मिट्टी में मिला लेंगे।. देखिए शुभांकर क्या आप चाहते हैं कि मैं. नोएडा में नहीं रहूं।. डर सबको लगता है। गला सबका सूखता है।. धुरंधर 3 आ रही है। देखिए. कुछ लोग खबरें कवर करते हैं और कुछ ऐसे. होते हैं जो इतिहास के सबसे अहमियत रखने.
वाले पलों के गवाह बनते हैं। मेरे साथ जो. आज मेहमान हैं उनकी कहानी भी ऐसी ही है।. कश्मीर की सरद हवाओं, पलायन के दर्द और. सरहद की सच्चाई से होकर गुजरती है। चाहे. 2611 की परतें खोलनी हो, आर्टिकल 370 के. बाद की जमीन को समझना हो या फिर ईरान, इजराइल युद्ध को ग्राउंड जीरो पर खड़े. होकर कवर करना हो। यह हर बार वहां करीब. रहे हैं। और अब जब पर्दे पर धुरंधर जैसी. कहानी निकल कर आई है तो उस कहानी के पीछे. भी जो असली रिसर्च है, सच्चाई है वो भी.
इनकी समझ से होकर गुजरी है। इसलिए आज इनके. साथ हम सिर्फ सवाल जवाब नहीं करेंगे बल्कि. उन सच्चाइयों को समझने की कोशिश करेंगे।. उन अनशुए पहलुओं को जानने की कोशिश करेंगे. जो शायद सिर्फ कहानियों में निकल कर नहीं. आते। मेरे साथ मेरे पूर्व सहयोगी आदित्य. राज कौर. नमस्कार शुभांकर। बहुत अच्छा लग रहा है. आपके साथ। एनडीTV में हमारी मुलाकात यूं. नहीं हो पाई यूं बैठकर। लेकिन उसके बाद. आपसे मिलना और आपकी फिल्म का जबरदस्त हिट. हो जाना। आपको मुबारकबाद। बहुत-बहुत.
धन्यवाद। किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसा. होगा। बट हम कॉन्फिडेंट थे कि अच्छी चलेगी. फिल्म। बट इतना सहलाब आ जाना और एक सुनामी. हो जाना और पूरे भारतवर्ष की सबसे बड़ी. फिल्म बनना ये तो एक इतिहास ही है। आदित्य. आदित्य का कॉम्बिनेशन। मैं तो कहूंगा. आदित्य दर का ही कॉम्बिनेशन है। मैं एक. छोटा सा सिपाही हूं। वो मेरे बड़े भाई हैं. और बहुत अच्छा जितना छोटा-मोटा मेरा सहयोग. था वो इस फिल्म का था। बिल्कुल लेकिन. आदित्य दर का जो विज़न था ग्लोबल सिनेमा. इंडियन सिनेमा को ग्लोबल सिनेमा के बट पर.
लाना तो वो बहुत बड़ा एक कंट्रीब्यूशन. पूरे उनके लिए या उनके प्रोडक्शन हाउस के. लिए नहीं पूरे भारतवर्ष के लिए है।. क्योंकि आप भी कश्मीर से आते हैं।. आदित्यधर भी कश्मीर से ही शायद आते हैं।. जी. हां। तो इस पडकास्ट को हमने चार हिस्सों. में बांटा है।. एक हिस्सा हमने कश्मीर रखा है क्योंकि. कश्मीर का जिक्र भी फिल्म में रहा।. आप कश्मीर से हैं। हरिधर कश्मीर से हैं।. आप वॉर कवर करके आए हैं जर्नलिस्ट के तौर. पर। इस फिल्म के रिसर्च में आपकी बहुत. बड़ी भूमिका रही और एक पत्रकार के तौर पर.
भी मैं थोड़ा आपको एक्सप्लोर करना. चाहूंगा।. आप जानते हैं कि हम रिपोर्टर्स जर्नलिस्ट. जो होते हैं बहुत ग्रीडी होते हैं।. ज्यादातर मैं सवाल पूछता हूं। लेकिन अब आप. कटघरे में डालने वाले हैं मुझे। तो मैं. शुरुआत जड़ों से करता हूं कि आप कश्मीरी. पंडित परिवार से हैं।. हम. इजराइल में मैंने आपको ग्राउंड जीरो पर. वॉर कवर करते हुए देखा। अब मेरे ज़हन में. सवाल ये आया कि जब आप इजराइल में वॉर कवर. कर रहे थे तो आपने इजराइल, ईरान की लड़ाई, पैलेस्तीन की लड़ाई और जो कश्मीर में दंश. आपने देखा था।. हम. क्या आप कभी रिलेट कर पाए? क्योंकि कईयों.
को लगता है कि कहानी एक जैसी ही है। सर. जमीन अलग-अलग है।. बिल्कुल सही बात है। आप देखिए हमारे साथ. क्या हुआ। 1990 में मैं करीबन एक साल का. भी पूरी तरीके से नहीं था। जब मैंने पलायन. देखा जब मैंने देखा कि कैसे आतंकवादियों. ने इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूरी तरीके से. कश्मीरी हिंदू समुदाय के लोगों को मारना. चालू किया और उसके बाद जब हमारा एग्जोडस. हुआ वहां से हमको जबरन निकाला गया जिसको. बहुत लोग जेनोसाइड कहते हैं। एथनिक. क्लेंज़िंग हुई हमारे साथ। उसके बाद पूरे. भारतवर्ष में किसी ने हमारी जो है कहानी.
नहीं बताई। अ इवन हिंदू समाज जिससे हमें. बहुत अपेक्षा थी कि कुछ करेगा लेकिन उस. वक्त नहीं हुआ। हां ये भी है कि वहां का. उस समय का जो इकोसिस्टम है मीडिया का जो. था या पॉलिटिशियंस का था, राजनेताओं का था. उन्होंने हमारी बात नहीं की। तो हो सकता. है हिंदू समाज तक बात पहुंची भी नहीं। और. अब जब मैं इजराइल गया या फिर 2015 से मैं. लगातार इजराइल जा रहा हूं, पेलेस्टाइन जा. रहा हूं, मिडिल ईस्ट ट्रेवल कर रहा हूं।. तो जो भी ह्यूमन ट्रेजडीज वहां पर होती. हैं अगर किसी का गर्क होता है तो वो हिंदू.
मुसलमान ईसाई सिख जैन बौद्ध वो कोई भी हो. पहले तो वो इंसान है और जबजब मैं रमल्ला. गया जब जबजब मैं पेलेस्तीन भी गया तो. मैंने देखा कि भारत की ओर बहुत ज्यादा. प्यार वहां पर फिलिस्तीन में भी और इजराइल. में भी रहा है हमेशा से रहा है ये लोगों. को शायद पता नहीं होगा और 2015 की एक घटना. है बाद में शायद हम इसमें डिटेल में बात. करें मैं करीबन 24-25 साल का रहा होऊंगा. उस वक्त और मेरे को बोला गया कि आपको.
प्रणब मुखर्जी जो राष्ट्रपति हैं हमारे. उनके साथ जाना है और मैं बहुत एक्साइटेड. था तो मैं गया और मैं सबसे पहले मैंने. जैसे ही मैं जेरूसलम पहुंचा मैंने एक. फिलिस्तीनी ड्राइवर को पकड़ा और मैं सीधे. रमल्ला चला गया और रमल्ला में मेरा यह था. कि मैं चलो शूट-वूट तो कर लूंगा वॉक थ्रू. कर लूंगा यह कर लूंगा अलग-अलग जगहों पे. लेकिन राष्ट्रपति को इंटरव्यू करने की एक. जो है अह चेष्ठा थी या फिर ये कोशिश थी. लेकिन कोई जानता नहीं, कोई कांटेक्ट नहीं, कुछ नहीं। तो मैं राष्ट्रपति के दरवाजे पर.
पैलेस में खड़ा हो गया आधे घंटे तक एक. घंटे तक और जो वहां पर सिक्योरिटी गार्ड. था उसको बोला कि मुझे राष्ट्रपति का. इंटरव्यू करना है। तो उसने बोला तुम पागल. तो नहीं हो? मतलब रिक्वेस्ट भेजो, चिट्ठी. लिखो, ईमेल लिखो। उसके बाद शायद कुछ हो।. तो मैंने बोला मैं तो किसी को जानता नहीं।. अ और 2015 अलग टाइम था। इतना ज्यादा सोशल. मीडिया और ये सब था भी नहीं। तो. मैंने बोला कि नहीं आप मिलवाइए किसी से।. और उन्होंने बोला कि नहीं ऐसा नहीं हो. सकता। तो मैंने बोला मैं खड़ा रहूंगा। आप.
किसी से तो मिलवाइए। तो उन्होंने बोला तो. मैंने बोला सिक्योरिटी चीफ से मिलाइए।. चलिए सिर्फ सिक्योरिटी चीफ बाहर आए। तो. बोला कहां से हैं? तो मैंने बोला इंडिया. से हूं। बोला इंडिया शाहरुख खान सलमान. खान, अमिताभ बच्चन। बोला मैं तो इंडिया से. पड़ा हुआ हूं। तो मैंने बोला ये तो. जबरदस्त है। तो बोला क्या चाहिए? मैंने. बोला मेरे को इंटरव्यू करना है। प्रणब. मुखर्जी जी यहां आ रहे हैं। पहली विजिट हो. रही है हेड ऑफ स्टेट की इजराइल में भी और. पेलेस्टाइन में भी। कितना ऐतिहासिक है ये।. तो उन्होंने बोला देखो ऐसा तो नहीं होता।. आपको रिक्वेस्ट भेजनी पड़ेगी। पूरा. प्रोसेस होता है। आपको पहले हिंदुस्तान से. भेजना चाहिए था। तो मैंने बोला मेरा लास्ट.
मिरर ट्रिप हुआ है। कुछ पता नहीं था।. कांटेक्ट नहीं था। तो उन्होंने बोला चलिए. आप ईमेल लिखिए। मैं देखता हूं। तो मैंने. ईमेल लिख दिया। मैं चला गया वहां से। अगले. दिन मैं जेरूसलम की पुरानी सड़कों पर घूम. रहा था। वहां पर इंटरव्यूज कर रहा था। शूट. कर रहा था। और अचानक मैंने अपना फोन देखा. तो वहां देखा 15 मिस कॉल तो मैंने वापस. फोन किया तो वहां से बोला आप फोन क्यों. नहीं उठा रहे तो मैंने बोला मैं माफी. चाहता हूं तो बोला हम फिलिस्तीन के. राष्ट्रपति के दफ्तर से बोल रहे हैं वो. आपसे मिलना चाहते हैं तो मैंने बोला अच्छा. तो मैंने बोला कब आऊं मैं बोला आप बताइए.
वो इंटरव्यू देना चाहते हैं आपको तो मैंने. बोला अच्छा तो मैं आ जाता हूं कल 12:00. बजे तो बोला हां आइए आप तो बोला अच्छा. कैमरा का क्या सेटअप रहेगा क्या रहेगा तो. मैंने बोला देखिए मैं तो एक कैमरा लेके. आया हूं वहां से तो उसी पे करना पड़ेगा. बोला नहीं नहीं आप ऐसा क्यों करेंगे? हमारे पास पैलेस्टाइन टीवी है। उसका पूरा. प्रोडक्शन हाउस और ये जो है आपको हेल्प. करेगा। तो मैंने बोला अच्छा तो पूरी मोटी. बात कि छोटा संक्षेप में मैं बताऊं मैं. वहां पहुंचा। वहां पर 50 लोग खड़े हुए. हैं। वो जो आप छतरी वाली गाड़ी बड़ी ओबी. वैन देखते हैं वो वहां पर खड़ी हुई और मैं.
इंटरव्यू करने के लिए पहुंचा और इंटरव्यू. हुआ बहुत अच्छे से और उसके बाद उन्होंने. पूरा हैंडशक किया। मुझे बोला कि मेरे साथ. फोटो खिंचाएंगे आप? तो मैंने बोला यह तो. मेरे लिए ऑनर होगा। फोटो खिंचाया और यह. मैं कहानी आपको इसलिए कह रहा हूं क्योंकि. राष्ट्रपति के मन में मैंने देखा इंडिया. के लिए प्यार पैलेस्टाइन में उसके बाद. मेरी गाड़ी खराब हुई टैक्सी और वो टैक्सी. जो है एक मैकेनिक के पास गई और मैकेनिक ने. मुझे पूछा कि आप कहां से हैं? तो मैंने.
बोला हिंदी हिंदी इंडिया तो मैकेनिक ने. मुझे बोला हां इंदिरा गांधी मोदी तो मैंने. बोला हां बिल्कुल। तो बोला बहुत बहुत. अच्छा है। तो इंडिया का जो सपोर्ट रहा है. और इस बार आपको नेतन याू मिल गए। इस बार. गलती से नेतू इंडिया बोलकर और मोदी बोलकर. मोदी बोलकर मिले उसकी भी बड़ी इंटरेस्टिंग. कहानी है। आप अगर बोलेंगे तो मैं बताऊंगा।. और नेतन याू के मरने की खबर पूरी दुनिया. में जब फैल गई थी।. सिर्फ उतना ही नहीं हुआ। मेरे खिलाफ भी. एफआईआर बोला कि हो गया है। अरेस्ट हो गया.
हूं और यह बोला गया कि मैंने नितिन याू की. लोकेशन जो है रिवील की। हां हां मतलब मैं. सुबह उठा और मैंने देखा कि आदित्य राज कौल. ने नितन याू की लोकेशन ता दी और फिर वो मर. गए और फिर वीडियोस आने लगे कि भाई उनकी. कॉफी में अलग हाथ आ रहा है। एक उंगली. एक्स्ट्रा. हां देखिए हुआ ये कि मैं प्रधानमंत्री. मोदी की ट्रिप के लिए तीन या चार दिन के. लिए इजराइल गया था। कपड़े भी उतने ही पैक. किए थे। दो सूट थे और दो जोड़ी कपड़े थे. और यह था कि मैं शनिवार तक वापस आ जाऊंगा.
भारत। लेकिन हुआ यह कि जब मैं वहां पर. पहुंचा और वापस जब मैं एयरपोर्ट की तरफ कच. की मैंने मैं वनगुरियन एयरपोर्ट पहुंचा. टेलवी में सुबह 8:15 पर और आ जैसे ही मैं. गाड़ी आप बिलीव करिए मैं गाड़ी मैं और. इसमें बैक स्टोरी में मैं बता दूं दफ्तर. ने मुझे बताया कि आप फ्राइडे को वापस आ. जाइए क्योंकि थर्सडे को विजिट खत्म हो रही. है। तो मैंने बोला ठीक है। लेकिन मैंने. सोचा कि सैटरडे को शबात है और शबा जो है. एक जइश फेस्टिवल है जिसमें सब लोग घर पे. रहते हैं। कोई इलेक्ट्रॉनिक किसी चीज पे. हाथ नहीं लगाता, फोन नहीं लगाता, परिवार.
के साथ रहते हैं। यह हर फ्राइडे और सैटरडे. को होता है। और मैंने सोचा जब भी ऐसा कोई. बड़ा हमला होता है या जंग होती है इजराइल. प्रेफर करता है कि सैटरडे को किया जाए. क्योंकि लोग घर पे हैं तो कैजुअल्टीज आपकी. ऑटोमेटिकली कम होंगी। तो मैंने अपने दफ्तर. को बोला कि देखिए फ्राइडे का मत कीजिए।. एयर इंडिया की एक डायरेक्ट फ्लाइट सैटरडे. को है। आप सैटरडे की कीजिए। अब जब मैं. 8:15 पर जैसे ही एयरपोर्ट पहुंचा गाड़ी से. निकला और अचानक से सायरन बजने लगे और मेरा. एक वीडियो भी है वो पहला हुआ एनडीt पे.
वायरल हुआ कि मैं सोच रहा हूं कि ये हो. क्या रहा है तो मैंने अचानक वीडियो ऑन. किया जर्नलिस्ट का थोड़ा सा इंस्टिंक्ट. रहता है और मैं मेरी अटैची है मेरा एक बैग. है और मैं टोपी पहन के ऐसे घूम रहा हूं. कुछ रेडी भी नहीं हूं लाइव के लिए मैंने. वीडियो रिकॉर्ड किया कि देखिए सायरन हो. रहा है हो सकता है कि जंग शुरू हो गई या. कुछ ना कुछ हुआ है और फिर मैं अंदर गया और. उसी वक्त जो है जंग चालू हो गई| अब आपने. आपने नितिन याू की बात की। इसके बाद हुआ. क्या कि मैं लगातार रिपोर्टिंग करता रहा।. अब तो पता लग गया कि देखिए अब रुकना. पड़ेगा। अब जा नहीं सकते। एयर इंडिया की. फ्लाइट जो आ रही थी वो यू टर्न करके वापस. मुंबई चली गई और यह बस स्पष्ट हो गया कि.
ईरान के खिलाफ अमेरिका ने और इजराइल ने एक. जंग छेड़ दी है। पहले बोला प्रीएम. स्ट्राइक है लेकिन जंग शुरू हो गई थी। अब. कुछ दिनों के बाद बेचशमिश करके एक जगह है।. वहां पर बताया गया कि ईरान का एक बहुत. बड़ा हमला हुआ जिसमें करीबन नौ इजराइली. सिविलियंस जो हैं मारे गए। करीबन 30-40 के. आसपास वहां घायल हुए। अब मैं फॉरेन. मिनिस्टर गिदन सार जो इजराइल के हैं उनका. इंटरव्यू कर रहा था जेरूसलम में। अब मैं. अपने लोकल कैमरा पर्सन के साथ वहां से.
वापस आ रहा था। तो लोकल कैमरा पर्सन को. मैंने जनरली पूछा ये बेशमेज जो है कहां पर. है? तो उन्होंने बोला ये पास में 10 मिनट।. तो मैंने बोला देखिए जाना चाहिए बहुत वहां. पर जो है. चीजें क्षतिग्रस्त हुई हैं। घर तबाह हो गए. हैं। लोग मारे गए हैं। तो एक बार जाना. चाहिए कुछ मिनट के लिए वहां से रिपोर्ट. फाइल करते हैं। तो उन्होंने बोला ठीक है. कोई टेंशन नहीं। अब जाते हैं 10 मिनट. लगेंगे। तो जैसे ही वहां पहुंचे मैंने. देखा सिक्योरिटी बहुत लगी हुई है। तो मेरे. कैमरा पर्सन जो एक फीमेल थी उन्होंने मेरे. को बोला देखिए मैं तो 30 साल से रिपोर्ट. कर रही हूं। कभी भी ऐसा अटैक होता है तो. कोई सिक्योरिटी नहीं होती। ये पहली बार.
मैं देख रही हूं। इतनी सिक्योरिटी लगी है।. तो सिक्योरिटी के लिए हम वहां पर रुके।. हमारी चेकिंग हुई। पासपोर्ट देखा गया।. बोला गया क्यों आए हैं आप? कहां से आए. हैं? ये सब करीबन 15-20 मिनट आधा घंटा ये. चला। उसके बाद एंट्री मिली तो देखा पूरा. करीबन 10-15 घर तबाह हो गए हैं। बहुत मतलब. क्षतिग्रस्त हो गया था और मैंने वॉक थ्रू. शुरू किया। वॉक थ्रू माने मैं एक टेलीविज़. की तरह बातचीत कर रहा हूं. और अचानक मैं वॉक थ्रू कर रहा हूं और पीछे. देखा कि नितिन याू है। तो मैंने बोला. देखिए प्रधानमंत्री नितिन याू यहां पर. मुयना कर रहे हैं। देख रहे हैं कि कितनी. हानि हुई है। ये हुई है। अब ये सब हो गया।.
उसके बाद वहां हब्रू मीडिया था। मतलब लोकल. जो इजराइयली प्रेस है वो नितिन याू के साथ. बातचीत उन्होंने शुरू की। मुझे कुछ समझ. नहीं आया। तो आखिरी में मैंने उनसे. रिक्वेस्ट किया कि मैं इंडिया से हूं, इंग्लिश मीडिया से हूं, हिंदी मीडिया से. हूं। आप बात करेंगे। तो उन्होंने शायद. सुना नहीं या मुझे इग्नोर कर दिया। देखिए. सच्चाई की बात तो यह है कि उन्होंने सोचा. नहीं होगा कौन है, क्या है। हालांकि उनके. दफ्तर के लोग मुझे जानते हैं तो उन्होंने. मुझे देखा लेकिन वो चले गए। फिर वो मोयना. करने लगे और फिर गाड़ी की तरफ जैसे ही जा. रहे थे। मैंने फिर से पूछा कि देखिए कल.
रात को ही आपने मोदी जी से बात की है। उस. पर कुछ बोलना चाहेंगे? तो तब उन्होंने. यूटर्न करके वो वीडियो पर वो आए और. उन्होंने कहा देखिए बिल्कुल मैंने मोदी जी. से कल रात को बात की और इजराइल में लोग जो. हैं इंडिया की बहुत तारीफ करते हैं, रिस्पेक्ट करते हैं, प्यार करते हैं और. रीजनल सिचुएशन के बारे में मैंने मोदी जी. से बात की और ये हुआ है लेकिन मैं डिटेल्स. नहीं दूंगा। तो मेरे को तो ग्लोबल. एक्सक्लूसिव बड़ा जबरदस्त चाहे 1 मिनट का. हो मिल गया। तो बहुत अच्छी बात है। मैं. वहां से निकल गया। ये लाइव नहीं था। ये. रिकॉर्डेड था। इसमें भी इंटरेस्टिंग कहानी.
है कि मैं वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था और. मैंने अपना मोबाइल देखा कि ऑफ स्विच ऑफ. रिकॉर्डिंग के बाद तो मतलब रिकॉर्ड ही. नहीं हुआ कुछ तो मैं तो एकदम शॉक में हो. गया कि भाई ग्लोबल एक्सक्लूसिव मिला मुझे. और खत्म हो गया। फिर मैं देखा. मुनिसिपालिटी का एक वर्कर था वहां पर. इजराइल का वो भी सेम वीडियो रिकॉर्ड कर. रहा था। तो मैंने उसको पकड़ा कि वही. वीडियो दिया जाए। तो फिर उसने मुझे वीडियो. दिया और पूरा मेरा जो सीक्वेंस था उसमें. रिकॉर्डेड था। लेकिन कहानी अब शुरू होती. है। करीबन 10 से 15 दिन बाद। मैं नोटिस. करता हूं कि अचानक मुझे ट्रोलिंग हो रही. है बहुत सोशल मीडिया पे। खासकर पाकिस्तानी.
अकाउंट से यहां पर भी एक विशेष पॉलिटिकल. पार्टी है इंडिया में। उनके भी कुछ आईटी. सेल के लोग थे। वो मेरे पीछे पड़ गए। तो. मुझे समझ नहीं आया कि क्या हुआ। ऐसा तो. मैंने कुछ कहा नहीं। तो अचानक से देखा गया. कि Facebook पे एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया. कोई अननोन पेज है। बहुत लाखों के फॉलोअर्स. हैं। उन्होंने ये रिवील किया कि आदित्य. राजकोल आखिरी ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने. नितिन याहू को देखा था। तो उन्होंने. लोकेशन रिवील कर दी लीक कर दी ने अटैक कर.
दिया और ईरान ने अटैक कर दिया और मार दिया. तो उन्होंने कंपेयर किया जैसे कारगिल में. हुआ था एक महिला पत्रकार वहां गई थी वहां. पर भी ऐसे ही हमले हुए बहुत सारे ऐसे. कंपैरिजन में मेरी ट्रोलिंग होने चाले को. तो अब क्या हो गया अब ऐसी सिचुएशन थी राइट. विंग और लेफ्ट विंग इंडिया का दोनों मेरे. पीछे पड़ गया कि भाई आप कैसे कर सकते हैं. आपको शर्म नहीं आती ऐसे आप लाइव. रिपोर्टिंग करते हैं मैं लाइव तो था ही. नहीं मैंने अपना रिकॉर्ड किया 1 घंटे बाद. वहां पर जो है एनडी टीवी पर चला उसके बाद. दो दिन के बाद रिवील करते हैं यही. पाकिस्तानी और फिर तस्लीम न्यूज़ एजेंसी.
जो ईरान की है कि आदित्य राज कॉल को. इजरलीय पुलिस और मोसाद ने अरेस्ट कर लिया. है क्योंकि इन्होंने लीक कर दी थी और. नितिन याहू मारे गए और साथ ही में बोला. गया कि जितने भी वीडियोस नितिन याू के आ. रहे हैं एआई वीडियोस आ रहे हैं. बट एक्चुअली उन्होंने भी सस्पेंस बना के. रखा था चारप दिन तक. बिल्कुल क्योंकि वो कॉन्फिडेंट थे ना. देखिए सस्पेंस तो ठीक है चलता रहा. उनको जरूरत क्या थी मतलब वो रिकॉर्डेड था. नहीं वो आपको पता दुनिया को पता था. बट उन्होंने भी चारप दिन अच्छे से माहौल. बनने दिया कि नेतन याू मर गए। सब कई लोग. खुश हो रहे थे इंडिया में भी बाहर भी कि. देखो ईरान ने बदला ले लिया खामने की मौत.
का। देखिए बहुत बार फायदा भी होता है। वो. इसलिए क्योंकि लोकेशन रिवील नहीं करना. चाहता कोई भी। ये तो पता है कि. प्रधानमंत्री का दफ्तर यहां पर है। घर. यहां पर है। लेकिन वो लोग रिवील नहीं करना. चाहते। बहुत बार वो अंडरग्राउंड से काम. करते हैं। अंडरग्राउंड टनल्स में उनके. दफ्तर हैं। जो कमांड कंट्रोल सेंटर्स हैं।. पूरी तरीके से अंडरग्राउंड है। करीबन 100. मीटर नीचे। तो वहां से सारा काम होता है।. तो अगर ऐसा रूमर फैल रहा है कि मार दिया. गया और ये सब और वो लोग पता है कि ये सब. तो झूठ है तो उनको क्लेरिफाई करने की. जरूरत भी क्या है? नैरेटिव वॉर चल रहा है.
एक तरीके से। बट जंग के बीच में तो ये तो. फायदा ही है कि लोकेशन रिवील नहीं हो रही. कुछ नहीं हो रही। अपना काम आप करते रहो।. लेकिन लेकिन फिर वो मजबूर हुए।. फिर उन्होंने वो कैफे में गए। वहां पर. कॉफी ली। उस पे भी उसमें भी मैं वो कैफे. गया। मुझे लोगों ने बताया कि हां यहां पर. आए थे।. लेकिन उसमें बोला गया कि एआई का वीडियो है. ये है। उन्होंने इंटरनेशनल प्रेस के लिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसके बाद भी बोला. गया कि नहीं ये जो है मारा गया है। ये तो. क्लोन है उनका।. खैर हम कोशिश करते हैं कि आपसे कुछ रिवील. करवा लें। आप क्योंकि ये वॉर आपने पूरी.
कवर की।. जी।. अब मैं वॉर, धुरंधर, कश्मीर सब मिला के चल. रहा हूं। मेरे लिए सब मिक्स वेज हो गया. है। [हंसी]. धुरंधर में एक बड़ा अच्छा डायलॉग है कि. तुम्हें क्या लगा था? इजराइल हमें बताएगा. नहीं। वो बताएगा भी, दिखाएगा भी। अब मैं. इस सवाल से रिलेट करता हूं प्रधानमंत्री. नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा पर।. जी।. मोदी जी इजराइल जाते हैं। इजराइल जाने के. बाद अगले दिन हमला होता है। बहुत सारे लोग. इंडिया में भी एक कड़ियां जोड़ रहे थे कि. क्या कोई क्रोनोलॉजी हो सकती है कि इंडिया. को भी कॉन्फिडेंस में लिया गया। इजराइल जो.
हमारा एक अच्छा दोस्त रहा है और उसके बाद. यह बड़ा अटैक हुआ हो या आपको लगता है कि. आप जैसे अनअवेयर थे। ऐसे ही पीएम भी. अनअवेयर रहे होंगे। कोई कहानी नहीं पता. होगी किसी को या नहीं? इतना बड़ा इत्तेफाक. नहीं होता। देखिए मुझे नहीं लगता कि. इंडिया को कुछ कॉन्फिडेंस में लिया गया. होगा क्योंकि ये बहुत ही एक सेंसिटिव. ऑपरेशन है। मुझे लगता है अमेरिका और. इजराइल इसको साथ में लेकर चल रहे होंगे।. हो सकता है कि उन्होंने आपस में बातचीत की. हो। अमेरिका और इजराइल तो था ही साथ में।. लेकिन इंडिया को ये चीज रिवील करना मुझे.
नहीं लगता कि ऐसा कुछ हुआ हो।. तो क्या इंडिया को इस्तेमाल नहीं हुआ फिर? क्योंकि भारत गया डिस्ट्रैक्शन था। नोबडी. एक्सपेक्टेड. कि अभी तो मोदी जी की यात्रा चल रही थी।. अभी कहां से वॉर हो जाएगा? देखिए इजराइल. के पर्सपेक्टिव से सोचे तो लगता है कि भाई. एक अच्छा डिस्ट्रैक्शन उनको समय मिल गया. काम करने के लिए। लेकिन अगर आप देखें बहुत. समय से अटकलें चल रही थी। हमेशा बोला. जाएगा इस वीकेंड पे हमला होगा। अभी कल हो. सकता है हमला हो। अमेरिका की तरफ से. चेतावनीियां आ रही थी। ईरान की तरफ से. चेतावनीियां आ रही थी। नेतन याू कह रहे थे. कि हां हम जो है एक रिजीम चेंज करेंगे।.
इनफैक्ट ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के लोगों. के लिए ये जंग कर रहे हैं उनको ईरान की. रिजीम से बचाने के लिए और अब स्थिति एकदम. अलग। तो उस वक्त जब विजिट हुई मैं आपको ये. भी बता दूं इसका भी हिस्टोरिकल पर्सेक्टिव. है। 9 साल से प्रधानमंत्री मोदी की विजिट. नहीं हुई थी। पिछली बार आई थिंक 2017 या. 18 के आसपास ये विजिट रही थी। अब नितिन. याू भारत आने वाले थे। लेकिन जैसे ही वो. भारत आने वाले थे उस वक्त लाल किले का. हमला हो गया। तो यहां पर सिक्योरिटी सतर्क. हो गई। और पहले भी आपने देखा कि एक दो बार. इजराइल के जो यहां पर राजदूत हैं या.
एंबेसी हैं उन पर हमला करने की कोशिश की. गई है। आई थिंक एक बार 2011-12 में और अभी. कुछ साल पहले भी। तो सिक्योरिटी एक बहुत. बड़ा मसला बन गया उनकी विजिट को लेके। तो. मुझे लगता है इसीलिए मोदी जी की विजिट. वहां पर जो है कराई गई क्योंकि चाहे. स्ट्रेटेजिक कॉरपोरेशन हो चाहे एफडीए हो. मतलब जो बिजनेस डील होती है जो ट्रेड डील. होती है या फिर खासकर इंटेलिजेंस शेयरिंग. और डिफेंस मैकेनिज्म जो है. मैन्युफैक्चरिंग को लेकर उस पर इंडिया और. इजराइल साथ आना चाहते हैं। और इसमें बहुत.
अहम चीज मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब. कारगिल [नाक से की जाने वाली आवाज़] हुआ. तब इजराइल ने हमारा पूरी तरीके से साथ. दिया। जो कारगिल में बहुत सारे एमिनिशन. यूज किए जा रहे थे वो इजराइल की तरफ से आ. रहे थे और यह उस वक्त पब्लिक नॉलेज नहीं. था। यह कई टाइम के बाद सामने आया और अभी. जब गाजा में हमास के खिलाफ हमला चल रहा था. तब यह रिवील हुआ। यह मैंने नहीं बोला। यह. किसी सरकार ने नहीं बोला। एक राजदूत हैं. पुराने इजराइल के इंडिया। उन्होंने बोला. कि जैसे कारगिल में इजराइल ने इंडिया की.
हेल्प की थी। एंड इंडिया फेल्ट ग्रेटट्यूड. टुवर्ड्स इजराइल। उसी तरीके से इंडिया. इजराइल की मदद कर रहा है। एंड वी फील. ग्रेटट्यूड टुवर्ड्स इंडिया। वो क्या मदद. थी, कैसे हो रहा था, क्या हो रहा था यह. पब्लिकली अभी तक किसी को नहीं पता। लेकिन. एक चीज मैं आपको बता सकता हूं जो इजराइल. में मुझे पता चली और वो यह है कि इंडिया. और इजराइल जो है बहुत चीजें पब्लिक नहीं. करता।. लेकिन ऐसी कुछ डिफेंस डील्स मुझे ऐसा लग. रहा है और मुझे टॉप सोर्सेस ने कंफर्म. किया है कि जो इंडिया और इजराइल के बीच.
में हुई है मोदी जी की विजिट से पहले और. वो पब्लिकली अभी तक नोन नहीं है। उसमें एक. चीज ये भी हो सकता है कि जो आयरन डोम है. जिसकी बातचीत बहुत ज्यादा होती है. उसकी मैन्युफैक्चरिंग यहां पर हो और वो. इसलिए भी हो सकता है देखिए आयरन डोम अभी. कहां से आता है? उसका जो मिसाइल और बाकी. चीजें हैं वो अमेरिका से आती हैं। लेकिन. क्या इजराइल ट्रंप पर पूरी तरीके से. विश्वास कर सकता है? क्या ये. ट्रंप पर तो कोई नहीं कर सकता।. ट्रंप पे कोई विश्वास नहीं कर सकता। और. इजराइल और अमेरिका तो पूरी तरीके से आयरन.
ब्रदर्स हैं। नितिन याू तो ट्रंप की तारीफ. करते रहते हैं हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में।. लेकिन अभी जो जंग की स्थिति 40 दिन से चल. रही है। पहले जब 12 दिन का युद्ध हुआ जून. में। उस वक्त ने याू कन्विंस करते रहे. ट्रंप को कि आप युद्ध में जो है आइए और. ईरान को हम ईरान की जो वह कहते हैं रिजीम. है इसको खत्म करेंगे। लेकिन अमेरिका उस. वक्त नहीं आया। उन्होंने बी टू बॉम्बर्स. जो हैं न्यूक्लियर साइट्स पे भेजे एक. मैसेज कन्व करने के लिए लेकिन जंग में कोई. साथ नहीं दिया। फिर उसके बाद सीज फायर हो.
गया। इस बार पिछले एक साल से लगभग नितिन. याू ट्रंप को कन्विंस कर रहे थे कि आप जंग. में आइए। और ट्रंप जो है पूरी तरीके से. ट्रैप हो गए। अब देखिए ना जंग जो 40 दिन. चली उसमें विनविन सिचुएशन इजराइल का हुआ।. उनकी सिक्योरिटी गारंटीज पूरी तरीके से ये. हुई कि अगले 10 साल या पांच साल या 15 साल. ईरान की या फिर उनके जो प्रॉक्सीज की ऐसी. स्थिति नहीं होगी कि 7 अक्टूबर वाला हमला. फिर से किया जाए। वो एक बफर ज़ोन बनाया. उन्होंने गाज़ा में हमास के खिलाफ गाज़ा की. भूमि पर। अब वो सेम बफर ज़ोन लेबनन में वो.
बना रहे हैं लेबनन की भूमि पर। और ईरान को. पूरी तरीके से उन्होंने एक वीक कर दिया. है। ऐसा नहीं है कि ईरान खत्म हो गया। टॉप. लीडरशिप को उड़ा दिया।. टॉप लीडरशिप को उड़ा दिया। उबर ने बहुत. न्यूक्लियर साइड्स पे हमला किया। उनकी जो. मिसाइल लॉन्च पैड्स हैं, ड्रोन. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं उन पे हमला. किया। तो बहुत हानि तो पहुंचाई है। लेकिन. ईरान की भी दाद देनी पड़ेगी कि भाई इतना. बड़ा जो सुपर पावर कहता है उनको अमेरिका. वो कहता है कि ईरान को हमने तबाह कर दिया।. उनके मिसाइल लॉन्चपड खत्म कर दिए। उनकी.
नेवी एयरफोर्स खत्म कर दी। ये ट्रंप. बार-बार कह रहे हैं लेकिन आज भी हमला हो. रहा है। आप देखिए हम जिस दिन ये बात कर. रहे हैं सीज फायर अनाउंस हुआ है और सीज. फायर के बाद भी 12 घंटे से ज्यादा बीत गए. हैं और पूरी तरीके से हमले जारी हैं। यूएई. में 17 मिसाइलें गिरी हैं और इजराइल कह. रहा है कि हां सीज फायर है हम भी समर्थन. करते हैं। लेकिन लेबनन में जो हिजबुल्ला. के खिलाफ हमारा ऑपरेशन है वो जारी रहेगा।. तो ये मानसिकता जो है इजराइल की वो. सिक्योरिटी गारंटी की है। वो जैसे. उन्होंने हमास को लगभग खत्म कर दिया। वो. हिजबुल्ला को भी पूरी तरीके से खत्म करना.
चाहते हैं। वो उनकी टॉप प्रायोरिटी है. क्योंकि वो बॉर्डर पे है। तो वहां पर वो. एक बफर ज़ोन बनाएंगे ताकि अगले 10-15 साल. तक एक तो सिक्योरिटी गारंटी रहे। दूसरा. अगला जो चुनाव है वो नितिन याू जीते।. अब मेरे को यहां पे एक सवाल मेरे ज़हन में. आता है। मैंने कुछ दिनों पहले एक इजराइल. को लेकर स्टोरी की यहूदियों पर. कि 3000 साल की उनकी यात्रा कैसे रही? जीसस क्राइस्ट के पहले से लेकर जीसस. क्राइस्ट के बाद तक। कैसे-कैसे उन्हें. दुनिया भर में मारा गया, पीटा गया हिटलर. के दौर का और अभी तक कहानी।. अब इस सवाल को लेकर मेरे मन में एक सवाल.
क्योंकि आप कश्मीर से हैं तो रिलेट करके. आता है कि इजराइल 80 लाख लोगों की आबादी. वाला देश जिसने दुनिया के खिलाफ जाकर. अरब कंट्रीज के बीच में होकर भी अपनी जमीन. के लिए लड़ाई लड़ी।. हम. दुनिया भर से यहूदी जो है जब भी जंग होती. है वापस लौट जाते हैं इजराइल। वो जाकर. लड़ते हैं। हम. एक कश्मीरी पंडित होने के नाते. क्या आपको कहीं लगता है कि कश्मीरी. पंडितों ने वो हार मान ली? क्योंकि मैं समय वाला वीडियो जो आपने शेयर. भी किया था उसमें था कि अगर दुश्मन बड़ा.
हो तो भागने में भलाई होती है। शहादत देने. में नहीं।. हम. लेकिन मैं इजराइलियों को जब देखता हूं तो. वहां कहानी मुझे अलग दिखती है।. हम. अब वो मरने को तैयार थे। लेकिन जमीन. छोड़ने को तैयार नहीं थे। और शायद इसी वजह. से आज वो इतने खूखार हो गए हैं कि छोटा सा. देश है. लेकिन दुनिया में चाहे जितने बड़े देश हो. पाकिस्तान जैसी परमाणु शक्ति देसी भाषा. में कहूं तो सबकी इजराइल से फटती है. [हंसी] और भारत जैसे देश भी इजराइल की. टेक्नोलॉजी को लेकर आज हम काफी सिक्योर. फील करते हैं।. देखिए आपको इस सवाल के लिए ऐतिहास में.
जाना पड़ेगा और इस संदर्भ में देखना. पड़ेगा कि यह सिर्फ कश्मीर की बात नहीं. है। कई दशकों से वहां प्रायोजित एक. पाकिस्तान स्पोंसर्ड आतंकवाद चल रहा है।. इस्लामित कट्टरपंथी जो हैं हिंदुओं को. मारते आए हैं। सिखों को मारते आए हैं. कश्मीर में। यह 90 से ही शुरू नहीं हुआ।. यह कई दशकों से शुरू हुआ है। इनफैक्ट. कश्मीरी हिंदुओं का आप इतिहास देखेंगे सात. पलायन हुए हैं। पिछले कई सालों से. ओके।. और इसमें आपको देखना पड़ेगा कि ये एक.
सिर्फ कश्मीरी पंडित का सवाल नहीं है।. कश्मीरी पंडितों की पॉपुलेशन कितनी थी? 5. से 10 लाख आज भी मुझे लगता है 5 से 10 लाख. के बीच में ही होगी और बार-बार पाकिस्तान. से आतंकवादी आते हैं वह हमले करते हैं।. कश्मीर के जो कश्मीरी मुस्लिम आतंकवादी थे. चाहे वो यासीन मलिक हो, बिट्टा कराटे हो, जेकेएलएफ के लोग हो, हिजबुल मुजाहदीन के. लोग हो वो प्रायोजित तौर पे जो प्रोमिनेंट. कश्मीरी पंडित हैं चाहे वो जज हो, चाहे वो. लेखक हो, चाहे वो राइट विंग हो या चाहे वो. लेफ्ट विंग हो या सेकुलर हो उन सबको चुन.
चुन के मारा गया। अब कश्मीरी पंडित समुदाय. जो है वो एजुकेशन के लिए जाना जाता है। वो. जाना जाता है विज़डम के लिए, नॉलेज के लिए।. हम हथियार उठाने के लिए नहीं जाने जाते।. और मैं गर्व से यह कहता हूं बार-बार कि. हमने बंदूक नहीं उठाई और हमें बंदूक नहीं. उठानी। हम कलम उठाने वाले लोग हैं, हम. बंदूक नहीं उठाते। लेकिन क्या उस वक्त. हिंदुस्तान जो पूरा था या हिंदू समुदाय जो. पूरा था या उस वक्त की जो पॉलिटिकल.
पार्टीज थी चाहे वो बीजेपी हो चाहे वो. वीपी सिंह हो बाद में कांग्रेस आई या बाकी. मिलीजुली सरकारें बनी उन्होंने कदम क्यों. नहीं उठाए जो फारुख अब्दुल्ला उस वक्त चीफ. मिनिस्टर थे वो दुम बना के पूरा भागे. क्यों गोलफ खेलने लगे लंदन में और कश्मीरी. पंडितों पर क्यों सवाल आता है और पिछले 30. साल से ये प्रोपगेंडा फैलाया गया कि. जगमोहन जो हैं उन्होंने कश्मीरी पंडित को. वहां से भगाया। क्या ऐसा कभी होता है? मुजफ्फरनगर में दंगे हुए। मैं एक महीना. मुजफ्फरनगर में रहा। मुसलमान मारे गए, हिंदू भी मारे गए। अब वहां पर मुसलमानों.
को वहां का जो बीएसपी का एमपी है वो आता. है और कहता है कि यहां से निकल जाओ। एक. महीने दो महीने के लिए बाद में आ जाओगे।. वहां पर 1 लाख की अगर आबादी है। ऐसा कभी. होगा कि 1 लाख लोग वहां से दिल्ली चले. जाएं और बीएसपी के एमपी के कहने पे या. गवर्नर के कहने पे और यह पलायन हो जाए।. ऐसा नहीं होता। यह फियर साइकोसिस होता है. और अगर 95 टू 97% पपुलेशन मुस्लिम है और. पूरी तरीके से चुप है। वहां जो नेबर्स हैं. वो भी सपोर्ट करने के लिए नहीं आ रहे। कुछ. नेबर्स तो ऐसे हैं वो डर के मारे या.
मजबूरन या खुद से आतंकवादियों को कह रहे. हैं हां यहां पर वो छिपा हुआ है। कश्मीरी. पंडित मारो उसको। बहुत ऐसे इंस्टेंसेस. हैं। तो उस वक्त आप कैसे कह सकते हैं कि. कश्मीरी पंडितों को बंदूक उठानी चाहिए? क्या हम एनआरकी हैं? क्या हम डेमोक्रेसी. हैं? वहां पर तो आर्मी का काम है, पुलिस. का काम है, एयरफोर्स का काम है। अब मैं. आपको एक सवाल पूछता हूं। इंडिया. डेमोक्रेसी है। इंडिया में जस्टिस का बहुत. बड़ा नाम होता है। चीफ जस्टिस हो, सुप्रीम. कोर्ट के बाकी लोकल जजेस हो, पुलिस हो, अभी तो एनआईए भी है। आज तक एक भी ऐसा केस.
नहीं है जिसमें कश्मीरी हिंदुओं को मारा. गया हो। आतंकवादियों द्वारा जिसमें. आतंकवादी को कन्विक्शन हुआ हो। यासीन मलिक. के खिलाफ पिछले 35 साल से केस चल रहा है. कि उसने कश्मीरी पंडितों को भी मारा है और. एयरफोर्स के लोगों को भी मारा है। अब मैं. कहता हूं मैं बार-बार इसको कहता हूं. दोहराता हूं इंटरव्यूज पे जब मैं मैं बात. करता हूं कश्मीरी पंडितों को भुला दो।. यासीन मलिक ने चार एयरफोर्स के लोगों को. मारा है और उसमें आज तक कन्विक्शन नहीं. हुआ। और आप कश्मीरी पंडितों पर सवाल उठा.
रहे हैं। कैसे? जिस जो विक्टिम्स हैं. जेनोसाइड के जो विक्टिम्स हैं टेररिज्म के. उसके खिलाफ आप सवाल उठा रहे हैं और मेरे. को भी ट्रोलिंग होती है बहुत सोशल मीडिया. पे अरे डरपोक कौम हो आप अरे भगोड़े किस. बात के भगोड़े भाई अगर तुम्हारी उतनी औकात. थी अगर तुम्हारे पर इतना जज्बा था तुम आते. ना लड़ने के लिए और अगर उस वक्त नहीं आए. आज लड़ो जाओ बंदूक उठाओ आतंकवादियों के. खिलाफ मैं देखता हूं क्या करते हो और मैं.
वहां पर हमने घर तो खोया मेरा घर जला दिया. गया आतंकवादियों द्वारा पूरी तरीके से।. लेकिन उसके बाद भी आज मैं आतंकवादियों के. खिलाफ दो टूक बोलता हूं। टीवी पे भी बोलता. हूं, रिपोर्टिंग पे, इवेंट्स पे भी बोलता. हूं। और मेरे को थ्रेट है। अभी मैं आपके. यहां पॉडकास्ट स्टूडियो में आया। मैं मेरे. पास सिक्योरिटी है बाहर। क्योंकि मेरे को. सेम आतंकवादी हिजूल मुजाहिदीन के, लश्कर-ए-तबा के या बाकी ख़स्तानी आतंकवादी. सब थ्रेट देते हैं। क्योंकि मैं कश्मीरी. हिंदू हूं। क्योंकि मैं आतंकवाद के खिलाफ. बोलता हूं बेबाकी से। और हम पर ही सवाल. उठाया जाता है कि आप क्यों नहीं वहां पर.
आपने क्यों नहीं आवाज उठाई? हम तो आज भी. आवाज उठा रहे हैं। मेरा इस पे एक सवाल. मेरे ज़हन में आ रहा है कि पूरे इंडिया में. पूरे भारत में जब. आर्टिकल 370 हटाया गया तो ये चर्चा थी कि. अब कश्मीर में कोई जाके बस सकता है।. इस देश में ये तो आप मानते हैं कि. सेंटीमेंट हमेशा रहे कि लोग चाहते थे. कश्मीरी पंडितों को उनका हक मिल जाए।. जी।. क्या कदम उठाया वो मैं उस पर सवाल नहीं. उठा रहा। बट इंटेंशन तो मेरे ख्याल से. जितना मैंने लोगों में फील किया है वो. सबके यही थी कि हक मिलना चाहिए।. हम करंट गवर्नमेंट भी बातें करती आई कि हम. उनको हक दिलाएंगे।.
हम्।. फिर जो आपकी यह पीड़ा है, यह शिकायत है कि. एक को भी कन्विक्ट नहीं किया गया।. हम्।. वह सुरक्षा आप नहीं दे पाए।. हम. सिर्फ कहानियों तक हमें सीमित कर दिया. गया। ये क्यों हुआ? क्या इस गवर्नमेंट में. भी इंटेंशन नहीं है? अलग-अलग कारणों से. हुआ। मैं आपको बताऊं शुभांकर कि पहले तो. 15 साल से 20 साल 90 से लेकर एक लेफ्टिस्ट. इकोसिस्टम था जो बिल्कुल डिनाई करता गया. कि नहीं कोई एग्जोटस नहीं हुआ। कश्मीरी. पंडित जो है मिले हुए थे और कोई असली.
कहानी तो कश्मीरी मुसलमानों की है। उनके. साथ इंडिया जो है ज्यादती कर रहा है।. अलगाववादियों को स्पेस दिया गया। कुछ ऐसे. न्यूज़ चैनल हैं जो बार-बार यासीन मलिक का. इंटरव्यू करते थे। आज अलग स्थिति है लेकिन. उस वक्त होता था। कुछ ऐसे पत्रकार थे।. प्रधानमंत्री तक से मुलाकात करवाई गई।. करवाई गई। वहां पर बिरयानी खिलाई गई।. मोहन जी की तस्वीर आज भी वायरल।. मैं मनोमोन सिंह जी की बहुत इज्जत करता. हूं। लेकिन आप देखिए मनमोहन सिंह भी और. अटल बिहारी वाजपेयी भी यासीन मलिक को. होस्ट करते हैं। यासीन मलिक खुद बीबीसी पे. टीम सेबेस्टियन के साथ इंटरव्यू करता है. और कहता है हां मैंने इंडियन एयरफोर्स के. लोगों को मारा है। मैंने कश्मीरी पंडितों.
को मारा है। बिट्टा कराटे मनोज रघुवंशी के. साथ आते हैं न्यूज़ ट्रैक में जो बहुत. पॉपुलर था उन दिनों और कहते हैं कि हां. मुझे याद नहीं कितनों को मारा। हो सकता है. 24 लोगों को मारा हो। उसमें से एक मेरा. बचपन का दोस्त भी था। फिर उसको मनोज. रघुवंशी पूछते हैं कि क्या आपको कोई बोले. कि अपनी मां को मार दिए कॉज के लिए आप मार. दोगे? कहता हां मैं अपनी मां को भी मार. दूंगा। ये है इस्लामी कट्टरपंथी। अब आपने. बिल्कुल सही सवाल पूछा मुझे कि सरकारों ने. क्यों कुछ नहीं किया? अब ये तो सरकारें. बताएंगी क्यों नहीं किया? तो पहले.
कांग्रेस और लेफ्टिस्ट और मिलीजुली. सरकारें आई। उन्होंने पूरी तरीके से कोई. बातचीत नहीं की। कोई कुछ नहीं किया। अब. हमें विश्वास हुआ कि मोदी सरकार आई तो. होगा। तो किया भी आर्टिकल 370 को एब्रोगेट. किया। मेरे से भी पूछे गई मेरी ओपिनियन।. मैं कश्मीर गया। मैंने एक रिपोर्ट भी बनाई. और सरकार को दी कि क्या-क्या कदम होने. चाहिए। और मुझे लगता है कि बिल्कुल. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जी को इसका. क्रेडिट देना चाहिए कि आर्टिकल 370 तो 50. साल पहले ही चला जाना चाहिए था। आज से 60. साल 50 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने.
370 के खिलाफ स्पीच दी थी पार्लियामेंट. में और कहा था कि प्रॉब्लम होगी। आप. इतिहास में अगर इसको नहीं हटाएंगे तो आगे. प्रॉब्लम होगी। तो यह बहुत अच्छा कदम. उठाया। लेकिन इसमें दो चीजें हैं। आर्टिकल. 370 को एक ऐसा एक नैरेटिव बनाया गया कि. इससे आतंकवाद खत्म हो जाएगा। मुझे याद है. उस वक्त कई मुख्यमंत्री थे जो यह बताने. लगे कि अरे ये तो खत्म हो जाएगा, आतंकवाद. खत्म हो जाएगा। आर्टिकल 370 का आतंकवाद से. कोई लेना देना नहीं है। आर्टिकल 370 एक. पॉलिसी डिसीजन था जिसके तहत एक स्पेशल. स्टेटस दिया गया था। जो सेंटर की पॉलिसीज.
थी वो कश्मीर में अप्लाई नहीं हो सकती थी. और वहां का जो लैंड और लॉ एंड ऑर्डर था वो. जम्मू कश्मीर सरकार के अंडर था ना कि एमए. के अंडर तो ये सब कुछ हटाया गया जो सेंटर. की पॉलिसी है वो लाई गई और जो वहां का. पिछड़ा वर्ग था जो मैं आपको कहूं कि दलित. समाज था उनके साथ डिस्क्रिमिनेशन होता था. कि जो वहां पर मुनिसिपालिटी के वर्कर्स. हैं जो झाड़ू लगाते हैं सफाई करते हैं. सफाई कर्मचारी हैं हमारे वो वो कई सालों. पहले पंजाब से आए थे और उनको बताया गया कि. आपके बच्चे अगर यहां पर जेएन के सरकार में.
नौकरी करेंगे तो आपको वही नौकरी करनी. पड़ेगी झाड़ू लगाने वाली। आपको सरकार में. और कोई नौकरी नहीं मिलेगी। यह. डिस्क्रिमिनेशन होता था दलितों के साथ. वहां पर और ये लोग कहते हैं कि. डिस्क्रिमिनेशन नहीं है। और महिलाएं जो. जम्मू कश्मीर की थी उस वक्त तो लद्दाख भी. जम्मू कश्मीर और लद्दाख वो अगर जम्मू. कश्मीर, लद्दाख से बाहर शादी करती हैं तो. कहती है आपका प्रॉपर्टी का कोई हक नहीं. है।. आप अगर तमिलनाडु, कोलकाता, दिल्ली, पंजाब. कहीं भी शादी करें तो आपका प्रॉपर्टी का. कोई हक नहीं है। 70 औरत बाहर की लड़की ला.
सकता है लेकिन औरत बाहर जाएगी तो डि निकाल. दी जाएगी. ये डिस्क्रिमिनेशन था तो ये तो हटना चाहिए. था तो बहुत अच्छा हुआ लेकिन एक मेरी. अपेक्षा थी कि मोदी सरकार जो है या. सुप्रीम कोर्ट या मोदी सरकार और मोदी. सरकार के लिए तो बहुत आसान होता एक कमेटी. का आप गठन करिए और आप बोलिए कि 90 में जो. भी हुआ चाहे वो एथनिक क्लींजिंग था. जेनोसाइड था एग्जोटस था और ये जो. कट्टरपंथी और अलगाववादी जगमोहन की थ्योरी. लाते हैं ये एक बार में आप तय करिए ना आप. एक नोटिस करिए कि यह चार लोग हैं कमेटी.
में फॉर्मर सुप्रीम कोर्ट जज कोई गवर्नर. एटसेट्रा और यह इन्वेस्टिगेट करेगा कि 90. में हुआ क्या उसको आप टर्म दीजिए और जितने. भी विक्टिम्स हैं आप अपील करिए कि जो. बातचीत करने के लिए आए वो सामने आए। इससे. क्या होगा कि इतिहास में यह बताया जाएगा. कि 90 में हुआ क्या? इसका मतलब यह नहीं है. कि इंडिविजुअल आप सारे केसेस खोले। लेकिन. एक कमेटी का गठन बहुत जरूर होना चाहिए। और. मुझे शर्म आती है कि आज सुप्रीम कोर्ट भी. बार-बार जो पिटिशंस कश्मीरी पंडित दायर.
करते हैं उसको रिजेक्ट कर देता है। कहता. है कि नहीं बहुत साल बीत गए हैं। अब इसमें. जाने की जरूरत क्या है? अरे मैं कहता हूं. कि हमारे जो सिख भाई हैं उनके साथ इतनी. बड़ी त्रासदी हुई 84 में उसके केसेस अगर. आज भी चल सकते हैं 40 साल के बाद उन केसेस. में अगर आज भी न्याय जगदीश टाइटलर सज्जन. कुमार के खिलाफ हो सकता है तो कश्मीरी. हिंदुओं के के लिए क्यों नहीं हो सकता? और. हम तो इंडिविजुअल केसेस भी नहीं कह रहे।. हम कह रहे हैं एक कमेटी का गठन कीजिए। तो. यही त्रासदी बार-बार हो रही है। एक आखिरी. बात मैं आपको कहूंगा. कि जैसे इनिशियली हमने देखा कि कांग्रेस.
ने कुछ नहीं किया और बीजेपी भी अब जो है. कश्मीरी पंडितों का कहती है कि नहीं हम. सांत्वना रखते हैं लेकिन कमेटी का गठन. नहीं करती। तो चक्कर क्या है? कांग्रेसियों को लगता है कि कश्मीरी पंडित. बीजेपी को सपोर्ट करते हैं पूरी तरीके से. और बीजेपी को लगता है कि इतिहास में हमेशा. कश्मीरी पंडितों ने कांग्रेस को सपोर्ट. किया है। यह त्रासती है। ओके। मैं कश्मीर. को लेकर पढ़ रहा था। आपने जिक्र किया. पुराने आंदोलनों का। श्यामा प्रसाद. मुखर्जी जी कहानी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी.
जी को पंजाब तक नहीं रोका गया। कश्मीर. जाने दिया गया। उनकी मौत की थ्योरी आज भी. एक थ्योरी है। उनकी माताजी ने उस दौर में. भी सवाल उठाए थे। अभी मैंने रिसेंटली एक. स्टोरी की श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर।. क्योंकि जो बात आप कह रहे हैं आर्टिकल 370. को पहले हटने की। अगर श्यामा प्रसाद. मुखर्जी उस दौर में रह जाते तो शायद वो. बहुत पहले हट जाता।. फिर उनकी रहस्यमय मौत हो जाती है। वो मौत. जिसको लेकर उनकी मां ने सवाल उठाए।. पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ? और बहुत सारे. थ्योरीज थी जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू. ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत तौर पर जांच की. है। सब सही है। लेकिन वो फाइल आगे नहीं दी.
गई। वही विचारधारा के लोग आज सरकार में. हैं। क्या ऐसा कश्मीर में है कि डिस्पाइट. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सचाना हो, कश्मीरी पंडितों को लेकर हो। ये सब वो लोग. हैं जो राइट विंग के आसपास के हैं। जो. करंट गवर्नमेंट है उनकी विचारधारा से मेल. खाते लोग हैं। लेकिन इस सच को वो सामने. आने से कतराते हैं। जहां हुए बलिदान. मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है। ये तो नारा. लगाते हैं बीजेपी आरएसएस हर जगह।. लेकिन बहुत इतिहास में यह देखा जाएगा और.
मैं बार-बार इसको कहता हूं कि कश्मीर में. 90 से लेकर या उससे पहले भी जो जो. गतिविधियां हुई इसमें एक सिक्योरिटी ऑडिट. होना चाहिए। कि कौन ऐसे लोग थे जो. अलगाववादियों को प्रोत्साहन देते थे? कौन. ऐसे लोग थे जो हुरियत या जेकेएलएफ के कुछ. नेता हैं उनको पैसा प्रोवाइड करते थे? उनको लग्जरीज प्रोवाइड करते थे। उनके. खिलाफ जो केसेस हैं कहते थे अरे टेंशन मत. लो हम संभाल लेंगे। क्या ये आईबी के कुछ. लोग थे? क्या ये इंडिया की इंटेलिजेंस के कुछ लोग. थे? जो बार-बार वहां पर करते हैं? नहीं ऐसा.
नहीं हो सकता। ऐसा हुआ है। यह मैं आपके. साथ स्पष्ट रूप से कह सकता हूं और इंडिया. की गवर्नमेंट अगर इन्वेस्टिगेट करना चाहे. करें। मैं नाम नहीं लूंगा क्योंकि डेफमेशन. केस होगा उसके बाद। लेकिन एक हमारे पूर्व. एक इंटेलिजेंस के चीफ रहे हैं जो पूरी. तरीके से अपनी किताब में भी लिखते हैं कि. हुरियत का गठन कैसे हुआ? क्या-क्या चीजें. वहां पर हुई? फारूक अब्दुल्ला के बहुत. अच्छे दोस्त हैं। उसके बाद यासीन मलिक को. कैसे जो है इंटेलिजेंस ने लूप इन किया और. बार-बार इंटेलिजेंस कहता रहा कि यासीन.
मलिक तो हमारे लिए काम करता है। बट यासीन. मलिक डबल एजेंट था। वो पाकिस्तान के लिए. भी काम कर रहा था और पैसे इंडिया से भी ले. रहा था। ये सच्चाई है। तो इंडिया की. इंटेलिजेंस को भी कटघरे में खड़ा करना. पड़ेगा आपको। अभी नहीं। लेकिन 90 से लेकर. करीबन जो है 10 20 साल तक क्या-क्या वहां. पर गतिविधियां हुई, क्या हुआ? और 90 से. पहले भी एक वाक्या है। एक इंटेलिजेंस की. कॉन्फ्रेंस हुई थी वहां पर और जो. इंटेलिजेंस के सारे लोग वहां पर थे बहुत. लोगों का नाम जो है वहां पर लीक हो गया था. कि ये ये इंटेलिजेंस के लोग पूरे भारत से.
वहां पर आए हैं और कश्मीर के जो. इंटेलिजेंस के लोग थे वहां पर डिप्लॉयड. चुन चुन के उनको मारा गया। कौन लोग थे. जिन्होंने उनकी लोकेशन जो है रिवील की? आपको इतिहास में जाना पड़ेगा। किताबें. पढ़नी पड़ेंगी। कुछ इंटेलिजेंस के लोग हैं. जिन्होंने किताब में लिखा है कि कौन ऐसे. लोग थे जिन्होंने नाम रिवील किए। मैंने. अभी एक इंटरव्यू किया रविंद्र कौशिक के. परिवार का।. जी. उनके परिवार ने भी मुझसे एक बात कही कि. रविंद्र कौशिक की मौत इस वजह से हुई थी या.
रविंद्र कौशिक को पकड़ा इसलिए गया था. क्योंकि किसी एक ऑफिसर कोई बड़े ऑफिसर थे. कश्मीर के। उनके कनेक्शन पाकिस्तान से थे।. और वो लोग साथ मिलकर तस्करी करते थे। तो. वो रिपोर्ट चली गई थी। जिसके बाद जो नया. एजेंट गया था जिसको फंसाकर जो पकड़ा गया. था लाहौर में उसको उस एजेंट ने रविंद्र की. फोटो दिखा दी थी देखिए और फिर भेजा गया था. और पाकिस्तान बता दिया गया कि एजेंट आ रहा. है से पकड़ लो तो वो पकड़ा गया उससे. रविंद्र खुलासा हुआ उसको मार दिया गया और. बाद में रविंद्र को कई सालों से तड़पाया.
गया ये उनके परिवार ने जब अपनी पूरी. रिसर्च और बाकी रॉ के अधिकारियों से 20. साल में तपस्या करके जो निकाला यह उनका. वर्जन है जो उन्होंने पॉडकास्ट में जिक्र. भी किया है। देखिए पहले तो मैं आपको कमेंट. करता हूं क्योंकि मुझे नहीं पता था कि. रविंद्र कौशिक का परिवार ऐसे यहां पर है. और बातचीत करने को तैयार होगा। तो आपने. मुझे लगता है कि इतिहास के लिए बहुत अच्छा. एक डॉक्यूमेंट ये किया है कि परिवार क्या. सोचता है और सच्चाई परिवार के वर्ड से ये. नहीं कि इंटेलिजेंस ऑफिसर किताब लिख रहा. है रविंद्र कौशिक पे। परिवार तो सच्चा. बताएगा क्योंकि उन पर आपबीती गुजरी है और.
ऐसा बहुत हुआ है कि ईरान में हो, पाकिस्तान में हो, बाकी जगहों में हो, कुछ. ऐसे राजनेता या राजदूत या बाकी लोग रहे. हैं जिन्होंने नाम रिवील किए हैं। अब किस. चीज के लिए रिवील किए हैं ये तो आपको ऑडिट. करना पड़ेगा एक सिक्योरिटी ऑडिट और देखना. पड़ेगा। क्या उनको कटघरे में क्यों नहीं. खड़ा किया गया? अब मैं आपको दूसरी कहानी. भी एक ह्यूमैनिटेरियन साइट पर बताऊं कि. मैं करीबन 18 साल से पत्रकार हूं। लेकिन. मेरी टीवी रिपोर्टिंग की कुछ पहली एक. असाइनमेंट ऐसी थी कि पाकिस्तान में हमारे.
सर्वजीत सिंह थे उन पर अटैक हुआ कोर्ट. बलवाल कोर्ट लखपत जेल में और मेरे को. बताया गया कि वो सीरियस कंडीशन में है. आईसीयू में है कुछ भी हो सकता है तो उनकी. बहन है आई थिंक दलबीर कौर या दलजीत कौर और. मैं इंडिया गेट के पास एक गवर्नमेंट. अकोमोडेशन में गया वहां पर देखने के लिए. उसी रात जो है सर्वजीत को मारा. मुझे नहीं पता कि सरपजीत जो है एक इनोसेंट. फार्मर थे या स्पाई थे या क्या थे। लेकिन.
ऐसे कई लोग अभी भी पाकिस्तान में हैं जो. पाकिस्तान की जेलों में हैं और उनके लिए. कोई कहानी नहीं लिख रहा। उनके लिए कोई कुछ. नहीं कर रहा। और तभी हमने धुरंधर भी बनाई. कि धुरंधर में हम ऐसे अननोन गन मैन को एक. सैल्यूट कर सकें और जो भारत की जनता है. उनको सैल्यूट कर सके। उनकी कहानी जो है. सामने आई। कुलभूषण यादव की भी सेम कहानी. है। कुलभूषण यादव का परिवार तो चलो लकी है. कि एक बार वो वहां पर जा पाए और ग्लास. चेंबर था बीच में और उनको देख सके और मुझे. नहीं पता कुलभूषण यादव क्या है। लेकिन यह.
तो स्पष्ट है कि कुलभूषण यादव को ईरान से. किडनैप किया गया था और उनको दिखाया जा रहा. है कि भाई वो रॉके हैं एसेट्रा है।. एविडेंस कुछ नहीं है। तो यह तो सच्चाई है. कि कई ऐसे हमारे अननोन ब्रेव आर्ट्स हैं।. कई ऐसी कहानियां हैं जो सामने नहीं आई. हैं। सर रविंद्र कौशिक कहानी में तो उनके. परिवार ने वो चिट्ठियां दिखाई हैं. हम. कि जो रविंद्र जी ने भेजी थी उर्दू में. और सबसे अनफॉर्चुनेट वो बता रहे थे कि यह. दुर्भाग्य था कि जब भी वो दिल्ली जाकर वो. चिट्ठियां दिखाते थे. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. सो उसी दिन रविंद्र की और पिटाई होती थी.
क्योंकि यहां से कोई वो इनफेशन वहां भी. लीक करता था।. हम. ये तो है। देखिए इंटेलिजेंस ऑपरेशन में. अनफॉर्चुनेटली ये होता है कि आप पब्लिकली. या कैसे भी क्लेम नहीं कर सकते कि ये. हमारे लिए। क्लेम तो आगे की बात है। वो कह. रहे हैं जब वो चिट्ठियां यहां दिखाते थे. कि देखिए हमारे पास सबूत है। रविंद्र ने. चिट्ठी भिजवाई है। उर्दू में लिखी हुई है. कि फलाने जेल के फलाने बैरेक में वो है।. हम. और [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे वो. दिखाते थे यहां से इंफॉर्मेशन फिर वहां. पहुंचती थी और फिर उनकी पिटाई होती थी।. अब देखिए उनको जिंदा उनको जिंदा और कहा.
उन्होंने उनको जिंदा रखा गया था। कोई ना. कोई लीक करता था इनफेशन। कोई ना कोई इंसान. था यहां पर अपने सिस्टम में जो नहीं चाहता. था कि वो जिंदा रहे या उनको मार दिया जाए. या उनके साथ ऐसा हो। ऐसी कई कहानियां हैं।. लेकिन एक और कहानी शुभांकर मैं आपको बताता. हूं जिस पे मैंने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई. और मैं बहुत ही टच की मुझे कि पहले ऐसे. इंडियन डिप्लोमेट जिनको फॉरेन टेरिटरी पे. ऑन असाइनमेंट इन द लाइन ऑफ ड्यूटी मारा.
गया। रविंद्र मात्रे रविंद्र मात्रे 1984. में इंडियन डिप्लोमेट थे बर्मिंगम में. असिस्टेंट हाई कमिश्नर थे वहां पर और आई. थिंक इंदिरा गांधी या राजीव गांधी का कोई. विजिट होने वाला था और इंदिरा गांधी उस. वक्त प्रधानमंत्री थी और वहां पर कुछ. जेकेएलएफ के लोगों ने उन्हें अगवा कर दिया. और उनको लगा कि हम अगवा करेंगे तो हमारा. नाम बहुत ज्यादा होगा। उन्होंने जेकेएलएफ. का नाम हटा के केएलएफ अपना नाम रखा और. बोला हम नया संगठन है केएलएफ हमने इनको. अगवा कर दिया है। दो दिन के बाद जो. स्कॉटलैंड यारार्ड है या लंदन पुलिस है या.
बर्मिंगम पुलिस है वहां पर पहुंचने लगी. जहां पर वह थे तो रविंद्र मात्रे को मार. दिया गया पूरी तरीके से और मैंने कई सालों. के बाद अभी 2022 2023 में मैंने डिटेल में. इसको पढ़ा समझा और मैंने सोचा इस पर तो. थोड़ा सा इन्वेस्टिगेट करना चाहिए और मैं. कुछ लोगों से मिला उसमें से एक जो हैं. हाशमी वो इंडिया के पहले हाईजैकर रहे हैं. गंगा एयरक्राफ्ट था 1971 में शायद जो.
हाईजैक हुआ था और उनसे मैं इंटरव्यू कर. रहा था गंगा के बारे में तो अचानक से. रविंद्र मात्रे की बात हुई तो मैंने उनसे. पूछा रविंद्र मात्रे का ऐसा हुआ आप कब थे. कहां थे बोला मैं वहीं था बर्मिंगम में. मैंने बोला अच्छा तो मैंने बोला किसने. किया है ये बोला अमन उल्ला खान ने किया है. मैं बोला अमन खान जेकेएलएफ का फाउंडर बोला. हां तो मैंने बोला ट्रिगर किसने बताया था. तो बोला मसरत करके एक बंदा है उसने ट्रिगर. मैंने बोला मसरत का तो नाम ही कहीं नहीं. है बोला नहीं मैं बता रहा हूं मेरे सामने. सामने सब कुछ हुआ है। तो पहली बार 40 साल.
में मैंने डॉक्यूमेंट्री बनाई और इंडियन. इन्वेस्टिगेशन और इन्वेस्टिगेटर्स के लिए. सामने रखा कि मसरत नाम का एक बंदा है।. उसका फोटोग्राफ अब का और तब का सामने लाया. और बताया कि इसने जो है मारा है और मसरत. आज भी पीओके के कोटली में रह रहा है।. रावलाकोट या कोटली में और आज भी उसको डर. है वो घर से बाहर नहीं निकलता मसरत. क्योंकि उसको लगता है कि इंडिया की एजेंसी. का कोई अननोन मैन है वो हमें मार देगा। बट. त्रासदी तो यह है कि 40 साल बीत गए इस.
वाक्य को। इंडिया का पहला डिप्लोमेट. रविंद्र मात्रे जो मारा जाता है यूके की. धरती पर ना तो यूके की पुलिस इसमें न्याय. दिला पाती है। ना इंडिया की गवर्नमेंट. चाहे वो कांग्रेस की हो बीजेपी की हो। अब. तो वो कोई एक्शन ले सकते हैं। इंडिया यूके. के संबंध कितने क्लोज हैं। बट कोई एक्शन. नहीं लिया गया। मेरा एक सवाल कश्मीर को. लेकर और रहा है। फिर मैं आगे बढूंगा।. कश्मीरी पंडितों को लेकर जो मुझे सबसे. ज्यादा पीड़ा जिस बात की होती है वो यह. होती है कि जो त्रासदी घटी. वो अभी भी लोगों को यकीन दिला रहे हैं कि.
ऐसा हुआ था। कश्मीर फाइल्स जब आई थी तो. मैंने सारी घटनाओं को Google पर YouTube. पर जाकर ओरिजिनल फुटेज देखे और सबके. ओरिजिनल फुटेज हैं जो जो दिखाया गया था।. फिर अभी हाल फिलहाल में एक बड़ी. इन्फ्लुएंसरर हैं। उनका वीडियो वायरल हुआ. और ऐसे बहुत सारे लोग हैं। उस दौर में भी. बड़ा चला था कि ये सब तो फर्जी चीजें हैं।. एक प्रोपेगेंडा बनाया जाता है।. क्या जो त्रासदी कश्मीरी पंडितों ने झेली, जो परिवारों ने झेली, जिनकी बहनों के साथ. रेप हुआ, जिनकी दुकानें जला दी गई, जिनके.
घर छीन लिए गए, जिनको पूरी अपने ही देश. में आज रिफ्यूजी बना के छोड़ दिया गया। यह. अलग बात है कि आप जैसे लोगों ने, आपके. परिवारों ने मेहनत की और अपने बच्चों को. आगे बढ़ा दिया। आज आप लोग सफल हैं।. उनकी कहानी को स्वीकार करने में भी. हिंदुस्तान के एक वर्ग को दिक्कत क्यों. है? देखिए शुभांकर पहले तो मैं आपको कहूं कि. मैं एक कश्मीरी हिंदू समुदाय से आता हूं।. कश्मीरी पंडित समुदाय से आता हूं। 1989. में मेरा जन्म हुआ। जिस दिन मेरा जन्म हुआ. कश्मीर यूनिवर्सिटी में पहला बहुत बड़ा बम.
ब्लास्ट हुआ। और उसी दौरान हमारे जितने भी. प्रोमिनेंट कश्मीरी हिंदू थे चाहे वो. टिकलाल टपलू हो चाहे वो सर्वानंद कोल. प्रेमी हो चाहे वो जस्टिस नीलकंठ गंजू हो. चाहे वो सरला कोल हो चाहे वो लस कोल हो ये. प्रॉमिनेंट लोग थे इनको चुन चुन के. जेकेएलएफ के आतंकवादियों ने मारा क्यों. मारा क्योंकि वो हिंदू थे क्यों मारा. क्योंकि वो इंडिया की बात वहां पर करते थे. क्यों मारा क्योंकि वो इंडिया के. कॉन्स्टिट्यूशन में बिलीव करते थे इंडिया.
को रिप्रेजेंट करते थे और जैसे ही यह. चुनचुन टारगेटेड किलिंग्स हुई अचानक 19. जनवरी 1990 को मस्जिदों से वहां पर आवाज. निकली कि कश्मीरी हिंदू यहां से निकल जाए।. रिव गलि चलिव रिलिव गलिव और चलिव इसका. मतलब क्या है? या तो आप मिल जाओ रिलिव. चलिव या तो यहां से भाग जाओ या गलिव आपको. मार दिया जाएगा। और कश्मीरी हिंदू जो. महिलाएं थी उनको बोला गया कि आप यहीं. रुकिए हमारे लिए और आपके जो मर्द हैं यहां.
से निकल जाए। ऐसे स्लोगंस मस्जिदों से. वहां पर लगे और अचानक 19 जनवरी मेरा. परिवार भी तब निकला। मेरी बस की टिकट उस. समय की मेरे पास अभी मौजूद है। मेरे. पिताजी ने रखी है। और हम विद इन ओवरनाइट. 19 जनवरी को वहां से निकले और जम्मू में. अपनी जिंदगी की शुरुआत की। आज मैं जो हूं. सो हूं। मेरा परिवार जो है सो है पढ़ाई के. बलबूते पे है। लेकिन उस वक्त हमने सब कुछ. खो दिया। अपना इतिहास खो दिया। और हमारा.
परिवार और कश्मीरी हिंदू समुदाय के हजारों. लोग कैंपों में आ गए जम्मू में। मैं बखशी. नगर करके एक जम्मू में जगह है। वहां पर एक. लोकल डोगरा का घर था। उसके पीछे एक तबेला. था। तबेले के साथ एक छोटा सा गैराज था।. वहां पर तीन महीने तक मेरा परिवार रहा है।. एक तबेले के साथ एक गैराज में और यह लोग. कहते हैं कि झूठ है सब कुछ। तो 3 महीने हम. वहां पर रुके और मैं रिस्पेक्ट करता हूं, सैल्यूट करता हूं मेरे मां-बाप को कि उस. वक्त उन्होंने एक कॉल ली कि अगर हम जम्मू.
में रहेंगे तो ठीक नहीं रहेंगे हालात।. हमको दिल्ली जाना पड़ेगा, लड़ना पड़ेगा और. अपने लिए कुछ करना पड़ेगा। तो वो मेरा. परिवार दिल्ली आया। दिल्ली में दिलशाद. गार्डन करके जगह है ईस्ट दिल्ली में। वहां. पर हम रहे उससे पहले शकरपुर में रहे। और. पहला जो घर था हमारा 6 महीने तक वो एक. छोटा सा कमरा था और उसमें कोई खिड़की नहीं. थी। तो दिल्ली की गर्मी में हम एक कमरे. में रहे जहां पर कोई खिड़की नहीं थी। कोई. कोई सुविधा नहीं थी। उसके बाद दिलशाद. गार्डन में तीन साल तक रहे। मेहनत की मेरे. परिवार जो हैं जो मेरे जो फादर हैं वो.
पब्लिशर हैं। तो उन्होंने किताबें जो हैं. उनके बक्से उनकी बोरियां लेके बेचीं नई. सड़क पे अलग-अलग जगह पे लाइब्रेरियों में. और तब जाके जिंदगी की शुरुआत हुई। और. दोनों पीएचडी हैं। मेरी मदर भी जो पीएचडी. हैं वो अपने बलबूते पे उन्होंने सरकार में. नौकरी ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला. केंद्र में और वहां पर 30 साल तक 35 साल. तक काम किया। तो यह कोई सरकार नहीं आई. हमको पैसा देने के लिए। कोई सरकार नहीं आई. कि आप नौकरी ले लो। आपका घर जो है उजड़. गया है। आप हमसे सपोर्ट लीजिए। कुछ ऐसा.
नहीं हुआ। अपने बलबूते पर ये तो मेरी. कहानी है। ऐसी हजारों कहानियां हैं। और. कैंपों में जो जम्मू में रहे आज वो अपने. बलबूते पे सीईओस हैं, एंटरप्रेन्यर्स हैं, दुबई में, अमेरिका में, यूरोप में अलग-अलग. फील्ड्स। आप मीडिया की बात लीजिए। मीडिया. में आज कोई ऐसा चैनल नहीं होगा या अखबार. नहीं होगा जहां एक एडिटर कश्मीरी पंडित. नहीं है। तो यह हमारे साथ हुआ और ये एक. सिस्टमेटिक कैंपेन चली और मैं नाम लेने. में कोई हिचकिचाता नहीं हूं। चाहे वो.
गिलानी हो, चाहे वो वरवरा राव हो, चाहे वो. अरुंधति रॉय हो, चाहे वो संजय काक हो, चाहे वो नंदिनी हक्सर हो, जितने भी ये. बुद्धिजीवी अपने को कहने वाले लोग थे जो. यासीन मलिक को सपोर्ट करते थे, गिलानी को. सपोर्ट करते थे। ये बार-बार संगोष्ठियां. करते थे, एग्बिशन करते थे, सेमिनार करते. थे। जिसमें बार-बार कहते थे कि नहीं नहीं. कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ? ये तो. एलट थे। यह तो इकोनॉमिकली बहुत जबरदस्त.
अपने आप को समझते थे। इनके साथ क्या हुआ? असली त्रासदी तो कश्मीरी मुसलमान के साथ. वहां हुई है। मैं तो कहता हूं आप ट्रेजडी. को कंपेयर क्यों करते हैं? कश्मीरी. मुसलमान के साथ भी उसके साथ हुआ जो. आतंकवाद के के खिलाफ लड़ा। नेशनल. कॉन्फ्रेंस के बहुत लोग हैं। पीडीपी के. बहुत लोग हैं। बाकी ऑर्गेनाइजेशनंस के. बहुत लोग हैं जो इंडियन आर्मी का. जिन्होंने सपोर्ट किया। पुलिस का सपोर्ट. किया और उनको मरना पड़ा।. लेकिन कोई. ऐसा कश्मीरी पंडित नहीं था जिसने बंदूक. उठाई। कोई ऐसा कश्मीरी पंडित नहीं था।.
फ्रस्ट्रेशन बहुत हुई कि भाई करना चाहिए।. लेकिन हमने तब भी कलम का जरिया अपनाया और. मैं अपने घर को मिस करता हूं। मैं बार-बार. आज तक करीबन दो-तीन डजन बार कश्मीर गया. हूं। करीबन 40-50 बार। लेकिन कभी वो घर. देखा आपने जहां पर आपका परिवार था। वो तो. जला दिया। तो मैं वहां पर गया। 2013 में. सबसे पहले गया और. रेनाबारी करके एक जगह है श्रीनगर में डल. लेक के पास ही है ज्यादा दूर नहीं है तो. वहां पर गया वहां पर हमारा एक मंदिर अभी. भी है लेकिन वो मंदिर पूरी तरीके से तोड़.
दिया गया है जो पेड़ था जिसकी हम पूजा. करते थे वो पेड़ तोड़ दिया गया और अब वहां. पर थोड़ी सी मरम्मत हुई है लेकिन आप देखिए. रैनाली एक जगह थी जहां 99% से ज्यादा. पॉपुलेशन कश्मीरी हिंदुओं की थी. हम. और आज जो है वहां पर सिर्फ एक परिवार है. कश्मीरी पंडित वो भी इसलिए क्योंकि मुझे. लगता है उनकी नौकरी वहां पर होगी और 90 तक. करीबन 5 से 6 लाख कम से कम कश्मीरी पंडित. कश्मीर में रहते थे। आज 10 से 20,000 रहते. हैं और उसमें से 90% वो हैं जिनकी सरकारी. नौकरियां हैं। मजबूरन वो वहां रह रहे हैं।.
और कुछ ऐसे हैं जो बुजुर्ग हैं जिनके. बच्चे बाहर हैं लेकिन वो जाना नहीं चाहते. और उनकी फाइनेंसियल कंडीशन उतनी अच्छी. नहीं है तो वो वहां रुके हैं। तो ये. सच्चाई है।. आपके दादा जी पक्षी वैज्ञानिक थे।. मेरे एक्चुअली ग्रेट ग्रैंडफादर जो हैं. मास्टर सब्सचंद कॉल. वो ओननेथोलॉजिस्ट बर्ड वॉचर थे. और एक टिंडल बिस्को स्कूल है बहुत फेमस. कश्मीर में वहां पर कई कई सालों कई दशकों. पहले जग्राफी पढ़ाते थे जब साइंस का उतना. ज्यादा ये भी नहीं था वो मुझे लगता है.
एशिया के पहले ऑर्नथोलॉजिस्ट थे जो सलीम. अली का नाम बहुत ज्यादा है सलीम अली उनके. पास आते थे जो है क्योंकि वो उनको. रिस्पेक्ट करते थे तो उस जमाने में आज से. करीबन 80 साल पहले 70 साल पहले मेरे जो. परदादा थे वो नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी. के मेंबर थे बर्ड वॉचर सोसाइटी के मेंबर. थे न्यूज़ न्यूजीलैंड, लंदन अलग-अलग जगह. से लोग आते थे और जो बिस्को परिवार है. जिन्होंने कश्मीर में बहुत काम किया, स्कूल एस्टैब्लिश किए उनके जो ग्रैंड सन. है वो ऑस्ट्रेलिया में बीबीसी को या कहीं. इंटरव्यू दे रहे थे तो उन्होंने बोला कि. जब मैं छोटा था और वो भी आज 80 90 साल के.
होंगे तो बचपन में कश्मीर में था और मेरा. जो बायोलॉजी की तरफ रुझान हुआ वो मास्टर. शमशाचंद कॉल की तरफ की वजह से हुआ। तो और. मास्टर शमशाचंद कॉल पढ़ाते थे डेनिस्को. के। फारूक अब्दुल्लाह भी उनके स्टूडेंट. रहे हैं। तो बट सच्चाई तो यह है कि. कश्मीरी हिंदू समुदाय का ओवरऑल एक. कंट्रीब्यूशन कश्मीर में टीचिंग को लेकर, एजुकेशन को लेकर, फाइनेंससेस को लेकर, इंजीनियरिंग को लेकर बहुत जबरदस्त रहा है।. लेकिन जैसे ही हमारा पलायन हुआ सब निकल गए.
तो वहां पर एजुकेशन सेक्टर को बहुत बड़ी. हानि हुई। क्योंकि 99% जो टीचर्स थे सब. कश्मीरी पंडित थे। तो आज भी बहुत ऐसे. ग्रुप्स हैं वहां पर WhatsApp ग्रुप्स हैं. एसेट्रा वो रिकलेक्ट करते हैं कि हमारे. कश्मीरी पंडित टीचर कहां हैं? कहीं दूसरे. दुनिया के कोने में हैं। कहीं भारत में. उनका पलायन हो गया। जयपुर में रह रहे हैं।. हैदराबाद में रह रहे हैं, कहीं रह रहे. हैं। तो अब मुझे लगता है कि बहुत कुछ. सरकार ने किया। आतंकवाद के खिलाफ हमने कमर. तोड़ी, यह किया, वो किया। लेकिन मुझे नहीं. लगता कि कश्मीरी पंडित या कश्मीरी हिंदू. वापस फिलहाल कश्मीर जा पाएगा। क्योंकि आज.
भी आतंकवाद है और पहला टारगेट वहां पर. आर्मी और पुलिस के अलावा जो है कश्मीरी. हिंदू है।. इसलिए शायद आने वाले समय में भी आपको. उम्मीद नहीं लगती है।. मुझे नहीं उम्मीद लगती। मैं सरकार की बहुत. सराहना करता हूं कि आपने आर्टिकल 370. हटाया। आपने आतंकवाद के खिलाफ कमर तोड़ी।. आपने अलगाववाद के खिलाफ जिसको जो है पूरा. एक रॉबिनहुड बना दिया था वहां पर। छह गुरा. टाइप यासीन मलिक, गिलानी मीरवाइज और ये. लोग इनका सब कुछ तहसनहस कर दिया। गिलानी. तो खत्म हो गए। यासीन मलिक जेल में है,
जेल में ही मारा जाएगा। मीरवाइज तो वैसे. ही मॉडरेट सेपरेटिस्ट है। उसको खुद की जान. की फिक्र है क्योंकि जो एक्सट्रीमिस्ट है. वो उसके खिलाफ है। उसके बाप को भी मारा. गया था वहां पर 1990 में। तो मीर वाइज. मुझे नहीं लगता कुछ करने की स्थिति में. है। तो पाकिस्तान को भी ये प्रॉब्लम हो. रही है अब कि जो वो लॉ एंड ऑर्डर स्थिति. वहां खराब करना चाहते थे। एक जमाना आपको. याद है स्टोन बेल्टिंग कितनी होती थी।. वहां पर हर जुम्मे में जब नमाज पढ़ी जाती. थी उसके बाद स्टोन बेल्टिंग होती थी।. पुलिस और सीआरपीएफ के कुछ लोग मारे जाते. थे, घायल होते थे हमेशा। लेकिन आज ऐसी. स्थिति है कि थोड़ा सा काम है। आतंकवाद का.
ग्राफ कम हुआ है। अब एक ऐसी जगह ये मैं एज. अ जर्नलिस्ट अब बात कर रहा हूं। नॉट एज अ. कश्मीरी पंडित कि अगर 30 साल से 35 साल से. आप आतंकवाद है और एक आतंकवाद है फिर आर्मी. और पुलिस की बंदूक है। तो लोग वहां पर यही. देख रहे हैं पूरी तरीके से। तो वहां पर आप. समझे कि ओवरनाइट टेररिज्म खत्म हो जाए. नहीं होगा उसमें समय लगेगा। और अब वहां के. मुसलमानों के भी अपने दुख होंगे क्योंकि. जब फौज वहां रही, आतंकवाद वहां रहा तो. उसमें शायद वो गेहूं में घुन की तरह वो भी. पिस गए होंगे।.
क्योंकि फौज को भी अपनी काम करने की शक्ति. दिखानी पड़ती होगी। ज्यादा शक करना पड़ता. होगा क्योंकि वो खुले मिले आतंकवादी निकल. कर आते हैं। फिर आतंकवादियों के अपने अलग. ब्लैकमेलिंग होती होगी।. तो अब उनके मेरे ख्याल से एक अलग तरह का. दुख वहां भी चल रहा होगा।. देखिए बहुत ऐसे साइलेंट मेजॉरिटी है जो. अपने आप को इंडियन मानते हैं कश्मीर में।. लेकिन वो बोल नहीं पाते क्योंकि उनको लगता. है कि बॉस हम पर अगला हमला हो सकता है।. मैं ऐसे ही 2019 में जब आर्टिकल 370 हुआ. उसके कुछ दिन बाद पुलवामा में घूम रहा था.
क्रू में क्रू के आसपास और वहां पर कुछ. ऐसे परिवारों से मैंने बात की। शिया एक. विलेज था और वहां पर एक लॉयर था आई थिंक. 25 30 साल के आसपास का। तो उसने मुझसे. बातचीत की। बहुत अच्छा लगा उसको कि. कश्मीरी पंडित कोई आया है वहां पे। तो. उसने मुझे बोला कि देखिए आप तो यहां से. चले गए लेकिन अगला टारगेट हम है शिया और. मैंने उसका इंटरव्यू किया सब कुछ किया और. मैं टेलीकास्ट करने वाला था तो. भागते-भागते मेरे पास आया बोला एक. रिक्वेस्ट है ये इंटरव्यू मत चलाइएगा. क्योंकि हमला हो सकता है मेरे ऊपर तो यह.
सच्चाई है वहां पर एक पपुलेशन है. सिग्निफिकेंटली जो रेडिकलाइज्ड है। एक. पॉपुलेशन है जो अपने आप को इंडियन मानती. है जो अपनी प्रोस्पेरिटी तरक्की के लिए. काम करना चाहती है लेकिन उन पर दबाव आता. है रेडिकल्स का पाकिस्तान का आपने बहुत. ऐसे लोग देखे हैं ब्यूटी पार्लर्स हों. म्यूजिक बैंड हो सिनेमा थिएटर हो उन पे. फतवा लग जाता था थिएटर जो है कश्मीर में. 30 साल के बाद खुला मैं गया था क्योंकि 90. में वहां पर पूरी तरीके से मैं गया था. इमरान देखा इमरान हाशमी की फिल्म जो थी. मैं वहां गया था पडकास्ट करने के लिए गया.
और इतना अनफॉर्चूनेट था कि उस रात हम. 12:00 बजे लाल चौक पे घूम रहे थे. हां. और वहां से हम लौट के आए तो पहलगाम में. घटना हो गई।. बिल्कुल।. हफ्तों तक हमें नींद नहीं आई क्योंकि हमें. लगा हम भी हो सकते थे। हम रात को बेफिक्र. होकर घूम रहे थे। वो पडकास्ट इमरान हाशमी. का मैंने कैंसिल कर दिया।. क्योंकि मैंने और इमरान ने कश्मीर में लाल. चौक पर बैठकर और डल लेक पर जो बातें की. जब वो पहलगाम हो मुझे लगा ये सारी बातें. तो पूरी बेईमानी थी।. बिल्कुल सही बात है।. इन्हें कोई अस्तित्व नहीं था। जबकि इतने. खुश वहां लोग थे।. देखिए आपने पहलगाम का जिक्र किया। अब मैं.
आपको बताऊं. कि पहलगाम का जो हमला है, कुछ उसमें. पाकिस्तानी आतंकवादी थे, लेकिन उनका साथ. किसने दिया? उनको शह किसने दी? ओवर. ग्राउंड वर्कर्स थे कश्मीरी मुसलमान. लोकल्स थे।. और ये बताने में हमको शर्म क्यों आती है? क्यों वहां पर जो नेता हैं कश्मीरी. मुसलमान जो नेता हैं चाहे वो उमर. अब्दुल्ला हो चीफ मिनिस्टर फारूक. अब्दुल्ला हो महबूबा मुफ्ती हो वो इतना. मजबूर क्यों हो जाते हैं कि जब सीज फायर. होता है ईरान यूएस का वो पाकिस्तान की. वाहवाही करते हैं लेकिन यहां पर जो लोकल्स.
हैं उनके खिलाफ नहीं बोलते आज तक जो. कश्मीरी हिंदू समुदाय के साथ भी आतंकवाद. हुआ है ये सब हुआ है आप हमको छोड़ दीजिए. जो आर्मी के लोग हैं बीएसएफ के लोग हैं. सीआरपीएफ के लोग हैं पुलिस के लोग हैं. वहां उनके खिलाफ वहां प्रदर्शन नहीं होता. कि आप सपोर्ट में वहां पर प्रदर्शन करिए।. आप लाल चौक बंद करिए ना कि हमारे कश्मीरी. मुसलमान जेएन के पुलिस के लोग जो है मारे. गए हैं पिछले 30 साल में आज हम पूरा जितने. भी पॉलिटिकल पार्टीज हैं उनके पीछे खड़ी. रहेंगी। ऐसा कभी हुआ है? कभी नहीं हुआ। आप. कश्मीरी पंडितों को भूल भूल जाइए। आप अपने.
मुसलमानों के लिए जिन्होंने जान दी है. भारत के लिए कश्मीर के लिए। उनके लिए कुछ. कीजिए।. अच्छा फारूक अब्दुल्ला के भी चरित्र में. दो चीजें निकल कर आती हैं। एक तरफ उनको. मैं राम धुन गाते सुनता हूं। भगवान राम के. बारे में बातें करते हैं अच्छी-अच्छी और. दूसरी तरफ जब मैं किस्से कहानियां पढ़ता. हूं उनके बारे में उनके पिताजी के बारे. में या आप जैसे लोगों को सुनता हूं जो. कश्मीर से आते हैं तो बिल्कुल अलग नैरेटिव. निकल कर आता है।. देखिए मैं अपने कश्मीरी मुसलमान दोस्तों. से जब बात करता हूं फारूक अब्दुल्ला के. बारे में वो कहते हैं ये गिरगिट की तरह. है। ये कश्मीर में एक धुन करते हैं। जम्मू.
आते हैं तो रामधुन हो जाती है। दिल्ली आते. हैं तो अलग ही सुर होता है। तो अपने कलर्स. जो हैं पॉलिटिकल कलर्स बदलते हैं। अब कुछ. लोग इसकी सराहना भी करेंगे कि भाई कितने. मैच्योर पॉलिटिशियन हैं। हर जगह उस रंग. में जो है जम जाते हैं। लेकिन सच्चाई तो. यह है कि मैं उनको कभी माफ नहीं कर. पाऊंगा। जो 90 में उन्होंने किया और आज भी. उस चीज के लिए उन्होंने कभी माफी नहीं. मांगी और वो खुद कहते हैं कि भाई मेरे. परदादा या उससे परदादा कश्मीरी हिंदू थे. कॉल थे। लेकिन तब भी वह कश्मीरी हिंदुओं.
की पीड़ा नहीं समझ पाते। और मुझे तो लगता. है कि जिस तरीके से मोदी को कटघरे में. खड़ा किया जाता है गोधरा में फारूक. अब्दुल्ला को क्यों नहीं किया जाता कि तब. कश्मीर में उन्होंने क्या किया और कई साल. पहले अगर वो पाकिस्तान गए या पीओके गए वो. वहां पर जेकेएलएफ के लीडर्स से क्यों मिल. रहे थे ऐसा क्या वहां पर हो रहा था और जब. एग्जोडस हुआ आपने देखी इतनी घटनाएं हो रही. हैं हिंदू समाज के लिए आपने इस्तीफा क्यों. दिया आपने एक्शन क्यों नहीं लिया इवन जो. मुफ्ती मोहम्मद सैयद थे उनकी बेटी किडनैप.
हुई थी। जेकेएलएफ उसमें पूरा इन्वॉल्वड. था। उसमें एक्शन क्यों नहीं हुआ? उसके. आतंकवादी क्यों रिलीज कर दिए गए मजबूरन? तो यह बहुत सारे इतिहास में सवाल हैं जो. फारूक अब्दुल्लाह को देना पड़ेगा। और उमर. अब्दुल्ला बहुत बार नाराज हो जाते हैं जब. मैं उनसे सवाल पूछता हूं। मुझे पसंद नहीं. करते वो। हालांकि मैंने एक दो बार उनका. इंटरव्यू किया है। तो उमर अब्दुल्ला को. बार-बार मैं बोलता हूं कि भैया आप बोलते. हैं कि लॉ एंड ऑर्डर जो जम्मू कश्मीर में. है वो जम्मू कश्मीर की सरकार के पास होना. चाहिए। बल्कि वो कहते हैं जेएन के पुलिस. जो है मेरे अंडर आनी चाहिए। मैंने बोला आप.
यह बताइए पिछले एक साल में आज 2025 26 की. बात करें पहलगाम का हमला हुआ लेकिन उसके. अलावा लॉ एंड ऑर्डर जो सिचुएशन है जो. स्टोन पल्टिंग होती थी यूथ जो है मारा. जाता था एनकाउंटर होते थे वहां पर स्थिति. खराब हो जाती थी ऐसा कुछ हो रहा है ये. क्यों हुआ है ये तब्दीली क्यों हुई है और. आ जाते हैं अब 2010 में जब तफेल मट्टू से. लेकर जितने भी लाल चौक के आसपास लोग रह. रहे थे श्रीनगर में हमले हुए स्टोन. पल्टिंग हुई पेट्स जो मारे गए 110 कश्मीरी.
यूथ उसमें मारे गए। उधर मुख्यमंत्री कौन. था? उमर अब्दुल्लाह। अब मैंने बोला 2010. से 2025 को कंपेयर करिए कि स्थिति क्या. है? आतंकवाद का ग्राफ कम हुआ है कि नहीं? लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन कम हुई है कि नहीं? अलगाववाद की कमर टूटी है कि नहीं? जितने. भी अलगाववादी नेता हैं वो त्यहार में है. कि नहीं? अब आपको लॉ एंड ऑर्डर क्यों. चाहिए? मैं तो बार-बार यह कहता हूं कि. कश्मीर में कोई भी मुख्यमंत्री आए, उमर. आए, वो लेजिमेटली डेमोक्रेसी है इंडिया. में तभी वो मुख्यमंत्री बन रहे हैं। लेकिन.
लॉ एंड ऑर्डर हमेशा एमएचए के पास रहना. चाहिए। जब लॉ एंड ऑर्डर या जेएन के पुलिस. चीफ मिनिस्टर के पास आई स्थिति फिर से. खराब हो जाएगी।. [गहरी सांस लेने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]. क्या भारत इतना कमजोर देश था कि कश्मीर. में 90 के दशक कहानी आप बता रहे हो। फिर. 261 हम देखते हैं। आतंकवादी आए, घर में. घुसे, मारा, पीटा।. कई सारे मरे और हम कुछ नहीं कर पाए।. मेरे को समझ नहीं आता कि यही रॉ तब भी थी।. यह रॉ 90 में भी थी। यही आईबी तब भी थी।.
यही उस दौर में भी थी। केवल इच्छाशक्ति का. खेल है सारा ये।. बिल्कुल पॉलिटिकल विल का खेल है।. और कुछ नहीं।. इच्छा शक्ति. तो जो पुराने लोग थे क्या उन्हें बिल्कुल. परवाह नहीं थी हमारे लोगों की? देखिए परवाह हो भी कुछ कभी-कभी पॉलिटिकल. कंपल्शंस होते हैं आपके। जैसे मैं आपको. एग्जांपल दूंगा। कसाब नाम का एक आतंकवादी. आता है, घुस जाता है, हजारों लोगों को. मारता है, भारतीयों को मारता है, अमेरिकियों को मारता है, अंग्रेजों को. मारता है।. मैं आपको शुभाकर एक कहानी सुनाता हूं।. बहुत ही संक्षेप में. मेरी एक दूर की रिलेटिव हैं। अभी मैं वो.
अमेरिका में रहती है। मैं कुछ दिन पहले. उनके साथ था। 261 से 24 घंटे पहले. हम. आईबी का कंट्रोल रूम दिल्ली में वो बैठी. हुई थी। वो वहां पर एक ऑफिसर थी। और उनको. एक कन्वर्सेशन एक रिकॉर्ड हुई क्योंकि. कश्मीरी में हो रही थी तो उनको बताया गया. कि आप कश्मीरी हैं तो आप इसका तर्जुमन. कीजिए इसका ट्रांसलेशन कीजिए। वो. स्पेसिफिक इंटेलिजेंस दे रहा था कि बंबई. में और वेस्ट कोस्ट में इंडिया में एक. बहुत बड़ा आतंकवादी हमला होने वाला है। और. यह इंटेलिजेंस रिले की गई पॉलिटिकली ओवरऑल.
और एजेंसीज को लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ।. पहला. दूसरा अब जब आतंकवादी हमला हो गया। एक. बहुत बड़ा आतंकवादी हमला हुआ। 300 से. ज्यादा लोग वहां पर जो है घायल हुए। आई. थिंक 160 के आसपास लोग मारे गए। उसके बाद. तो आप एक्शन ले सकते थे। शिव शंकर मेनन. अपनी किताब में लिखते हैं जो उस वक्त. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। उन्होंने. बताया अपनी किताब में कि इंडिया की जो. मिलिट्री है, जो एयरफोर्स है, जो. इंटेलिजेंस है, उन्होंने पॉलिटिकल.
गवर्नमेंट को उस वक्त ऑप्शंस दिए कि मुरीद. के जो लश्कर का हेड क्वार्टर्स है, जिसने. ये आतंकवादी हमला किया, उनके खिलाफ हम. प्रहार कर सकते हैं। हमारे पास पूरी. कैपेसिटी है। इंटेलिजेंस है, एयरफोर्स है, मिसाइल्स हैं, सब कुछ है। लेकिन उस वक्त. की सरकार ने कॉल लिया दैट वी विल नॉट. एक्ट। वी वांट गुड रिलेशंस, गुड नेबरली. रिलेशंस विथ पाकिस्तान। वी कांट डू दैट।. दिस विल पुट अस इनू अ वॉर सिचुएशन। जंग हो. जाएगी पाकिस्तान के साथ। इसलिए हम नहीं. करेंगे।. मैंने चिदंबरम साहब का बयान देखा। क्या. करते हैं हम? जंग लड़ते नहीं जंग लड़ते तो.
लड़ते। अगर आप आतंकवाद के खिलाफ जो है कुछ. कर नहीं पा रहे। आप उसके खिलाफ घुटने टेक. देते हैं तो अगली बार जो प्रहार होगा उससे. बड़ा होगा। और आप उनको प्रोत्साहन दे रहे. हैं। आप उसको लेजिटिमेसी दे रहे हैं कि. हां आप आतंकवादी हमला करो। हम तो अपना. संगोष्ियां करते रहेंगे। हम अपना. पार्टियां करते रहेंगे। हम अपना पॉलिटिकल. जो है एक मायोपिक व्यू से देखेंगे चीजों. को। उस वक्त हमला नहीं हुआ इंडिया की तरफ. से इसलिए उरी हुआ इसलिए पठानकोट हुआ।.
इसलिए नगररोटा हुआ इसलिए दीनानगर हुआ और. इसलिए पुलवामा हुआ और इसलिए पहलगाम हुआ।. अगर उस वक्त हमने एक पैराडाइम शिफ्ट कर. दिया होता और कांग्रेस की सरकार करती।. उनकी वाहवाही होती कि आप एक्शन लीजिए. आतंकवाद के खिलाफ। आज जो है कोई धुरंधर. दूसरी फिल्म बन रही होती कांग्रेस के ऊपर, मनमोहन सिंह के ऊपर, बाकियों के ऊपर कि. आपने अंदर घुस के मारा है। पॉलिटिकल विल. नहीं रहा। हमने जो अभी ऑपरेशन सिंदूर किया. आपको लगता है कि इससे आगे आने वाले सालों. में पाकिस्तान हिमाकत नहीं करेगा। इसमें. दो चीजें हैं। पहली चीज जब पुलवामा के बाद.
हमने एक बालाकोट पे हमला किया। उससे पहले. जब उरी में हुआ हमने सर्जिकल स्ट्राइक. किया। बार-बार ऑपोजिशन के लोग भी आए और. बहुत लोग और भी आए कि एविडेंस नहीं है।. आपने वीडियो नहीं दिखाया। आपने फोटो नहीं. दिखाया, अरे भाई ये फिल्म थोड़ी ना चल रही. है। भाई एक ऑपरेशन चल रहा है और उसमें. होना चाहिए। इस बार क्या हुआ अलग? इस बार. अलग ये हुआ कि जब ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च. हुआ। नौ अलग-अलग आतंकवादी ठिकानों पे हमला. हुआ और उसकी एक रात के बाद जो कमांड. कंट्रोल सेंटर्स थे, एयरफोर्स बेस थे.
पाकिस्तान के पीएफ के उन पे हमला हुआ।. वीडियो कैसे आए? पाकिस्तानी लोग वीडियो. बनाने लगे और दिखाने लगे कि भई यह हो रहा. है। हिंदुस्तान को वीडियो दिखाने की जरूरत. नहीं पड़ी। कोई जहमत नहीं हुई। अब आते हैं. सबसे बड़े सवाल पे। क्या पाकिस्तान इससे. बदल जाएगा? क्या पाकिस्तान पे जो ऑपरेशन. सिंदूर इतना बड़ा हमने हमला किया उनकी. बेइज्जती हुई, एम्बरेसमेंट हुई इससे कुछ. बदलेगा? इससे कुछ नहीं बदलेगा। [हंसी]. क्यों?
क्यों? वो इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के आप. हजार सोल्जर्स को मारो। पाकिस्तान के आप. हजार आतंकवादियों को मारो। अगले दिन. 20,000 नए खड़े हुए।. हमारा एक राक्षस था रक्तबीज। [हंसी] जितना. खून खून गिरता था उतने और जिंदा होते थे।. आप पहलगाव से पहले आसिम मुनीर के स्पीच. सुनिए। जब वो अपने एक सर्कल में अपने. सोल्जर से बात कर रहा है और ये हाफिज है।. ये कह रहा है कि हिंदुस्तान जो है हिंदू. मुल्क है। हमने जिहाद लड़ना है उसके.
खिलाफ। ये तो अपने सोल्जर्स को बोला। उसके. बाद एक ओवरसीज पाकिस्तान की कॉन्फ्रेंस. थी। उसमें भी सेम चीज दोहराई कि ये तो. हिंदू मुल्क है। हमें इनसे जिहाद लड़ना. है। तो यह मानसिकता है आसिम मुनीर की। तो. आपको लगता है कि वो बदलेगा? लेकिन इसका. मतलब ये नहीं है कि हम चुप बैठ जाएं। हम. देखते रहे पहलगाम होता है। लाल किले पे. हमला होता है तो हम कोई कदम नहीं उठाएंगे।. मेरा इस पे भी एक काउंटर क्वेश्चन है कि. आपने आसिम मुनीर की मानसिकता की बात की।. हमारे इंडिया में पाकिस्तान को लेकर ऐसी. मानसिकता नहीं रही है।. हम. मतलब मुझे अभी भी याद है हम छोटे थे। मुझे.
शाहिद अफरीदी की बैटिंग अच्छी लगती थी।. इंजमाम की बैटिंग मैंने भी एंजॉय की है।. अख्तर का ग्रेस या नुसरत साहब पे गाने. एंजॉय किए मैंने। आतिफ असलम आतिफ असलम. हमारी पीढ़ी में सबसे बड़ा रॉकस्टार था. वो। सबने गाने अनलिमिटेड सुने हैं।. हमारी उतनी हेट्रेट पाकिस्तान से नहीं रही. है। उनके यहां क्या होता है कि इस प्रकार. की मानसिकता उनकी हो गई है।. देखिए बहुत बड़ी उनकी सिविलियन पापुलेशन. है जो इंडिया से मोहब्बत करती है, प्यार. करती है। धुरंधर जब रिलीज हुई ना दूसरा. पार्ट एक खालिद वहां के पत्रकार हैं जो.
मेरे साथ बातचीत करते रहते हैं। जंग ग्रुप. में हैं। सीनियर पत्रकार हैं। तो उन्होंने. मुझे एक वीडियो भेजा कि वो अपने लिविंग. रूम में बैठे हैं। टीवी चल रहा है और यह. 19 तारीख का है। जिस दिन फिल्म रिलीज हुई. थी ऑफिशियली और वो धुरंधर देख रहे हैं. अपनी टीवी पे। तो मैंने बोला भाई ये कैसे? बोला सॉरी यार ये पायरेसी वाला ये है तो. यहां तो धूम मची हुई है। मैंने बोला कैसे. भाई? बोला नहीं चल रहा है जो हमारा. पायरेसी मार्केट है हर जगह धुरंधर चल रही. है। और पाकिस्तानी लोग धुरंधर को. अप्रिशिएट कर रहे हैं। ये मैंने कभी सोचा. नहीं था। यहां पर हमारे कोई बुद्धिजीवी. हैं जिनको धुरंधर से प्रॉब्लम है। कुछ तो. इतना भी कह रहे हैं अरे मुसलमानों के.
खिलाफ है। ये है वो है।. नहीं नहीं जिस रात मैं गया था मुझे अच्छे. से याद है। मेरे अगल-बगल हम रात को 11. 11:30 का सो गए जी. पांच लड़कियां हिजाब वाली थी. जी. नई बच्चियां कॉलेज की होंगी अब या तो. उन्होंने इसलिए पहन लिया होगा पहचान ना. पाए रात को [हंसी] या हो सकता है कल्चरली. उन्होंने अपना पहना हो. तो जो अनलिमिटेड पॉपकॉर्न कंपटीशन चल रहा. था क्योंकि वहां पे था कि आप जितनी बार. चाहे उतनी बार भरवा सकते हैं. चार घंटे बैठ रहे हैं तो. और चार तो हमारी टीम में सब बदमाश लड़के. मेरा ऑफिस पूरा ले गया था मैं तो ये बदमाश.
लड़के हर 10 मिनट में पॉपकॉर्न भरवाने. पहुंच जाए [हंसी]. उधर से वो पहुंच ही रहे हैं. तो मुझे लगा था शुरू में मेरे भी मानसिकता. थी कि शायद धुरंदर अंदर जो है वो सिर्फ. हिंदू लोग दिख रहे हैं। राइट विंग वाले. दिख रहे हैं या जो बिल्कुल प्रो मुस्लिम्स. नहीं होंगे। बट वहां जाकर मुझे लगा नहीं. यह भी उतना ही एंजॉय कर रहे हैं। और मेरे. बहुत सारे लेफ्टिस्ट दोस्त हैं जिन्होंने. मुझे कॉल किया शुभांकर चलोगे धरंधर देखने।. नहीं आप देखिए ऐसा ऐसा जोक है मैं बिल्कुल. मतलब इसमें मानता नहीं हूं। लेकिन ये जोक. चल रहा है कि यूएई और जितना भी मिडिल ईस्ट.
था इन्होंने धुरंदर बैन कर दी और खत्म कर. दी बंद कर दी। और जब दुरेंद्र दूसरी आई तब. यूएई और सारा मिडिल ईस्ट बंद हो गया। ये. जोक चल रहा है पूरी तरीके से। मैं. सांत्वना [हंसी] रखता हूं। मेरा कोई भी. गलत समझ गया। ये जोक चल रहा है।. जिसने मीम बनाया मीम चल रहा है ये। लेकिन. सबसे बड़ी बात तो ये कि जो रिस्पांस आया. मैं बार-बार उन लोगों को कहता हूं जो. धरिंदर को क्रिटिसाइज करते हैं। बिना. देखे। बिना फिल्म देखे उसको क्रिटिसाइज कर. रहे हैं। कि आप लोगों का पल समझिए। आप. देखिए यूएस में यूरोप में बैठा पाकिस्तानी.
भी जो है वो वहां पर जा रहा है और देख रहा. है। मेरी एक कजिन सिस्टर रहती हैं कोलराडो. में अमेरिका में वो अपनी करीबन 75 80. वर्षीय मां के साथ वहां पर फिल्म देखने गई. और उन्होंने बोला कि देखिए यहां पर जो. अमेरिका का कल्चर है यूजुअली यहां सलमान. खान, शाहरुख खान, आमिर खान इनकी फिल्में. चलती हैं और वो भी कितना एक हफ्ता चलेंगी।. उसमें लोग आएंगे अच्छा खासा और सिनेमा हॉल. में 30-40 या 20 लोगों से ज्यादा नहीं. होते। बोला धुरंधर फिल्म दो हफ्ते से यहां. पर चल रही है पूरी तरीके से और सिनेमा हॉल.
फुल है। सिर्फ वीकेंड्स पे नहीं वीक डेज. पे भी। तो जो वहां पर लोकल अमेरिकन सिनेमा. हॉल वाले हैं वो एकदम आश्चर्यचकित हैं और. बोल रहे हैं कि इसको तो हमें और बढ़ाना. पड़ेगा।. आपका रोल क्या था धरंधर में? मेरा बहुत. छोटा सा रोल था कि जितना भी रिसर्च है. इसको लेकर जो जो असली वाक्य हुए हैं उनको. देखना उनको जांचना उनको परखना. मेरे साथ एक और मेरे मित्र थे दिव्या एस. जो इसको देख रहे थे और शूट में भी बहुत. जिनको आपने डिस्क्लोज नहीं किया है. जिनको मैंने डिस्क्लोज नहीं किया मैं तो.
यही कहूंगा. वैसे आपकी पत्नी का नाम भी दिव्या है।. मेरी पत्नी का नाम दिव्या कोचर है. और ये दिव्या है। दिव्या नहीं है। एस और. कुछ ऐसे स्ट्रेटेजिक और सिक्योरिटी के. कारण हैं जो बातचीत नहीं कर सकते वो लेकिन. मैं यह कहूंगा शुभांकर कि जितना अहम रोल. अननोन गनमैन का है पाकिस्तान में उतना ही. अहम रोल उनका है और उनकी जो है उनके खिलाफ. कुछ ना हो कुछ ऐसा चीज ना हो इसलिए उनको. रखा हुआ है। आगे उनसे बातचीत करेंगे।. लेकिन मैं आपको कह दूं कि जितना भी इसका. रिसर्च हुआ उस पर हमने बहुत ही चीजें.
जांछी परखी और बहुत चीजें हमने रियल लाइफ. लोगों से बातचीत की. जो इसमें इन्वॉल्व थे बहुत सारे ऑपरेशंस. में और छोटा सा वाक्य अगर आप बोले तो मैं. आपको सुनाऊं कि 2022 में मैंने एक मीडिया. संस्था ज्वाइन किया था जहां आप मेरे कलीग. थे और वहां पे मैं पहला या दूसरा दिन ही. था बैठा हुआ था तो मुझे किसी का सोर्स का. फोन आया और बोला कि पाकिस्तान में एक. जाहिद अखुंद करके है कराची में वो मारा.
गया है और यह कारपेंटर है। तो मैंने बोला. कारपेंटर मारा गया तो आप मुझे क्यों बता. रहे हैं? बोला नहीं नहीं आप इसको. इन्वेस्टिगेट कीजिए आपके लिए बहुत. इंटरेस्टिंग रहेगा।. हम. तो मैंने बोला ठीक है देखा जाए। तो मैं. पता करने लगा जाहिद अखून या वहां पर क्या. हमला हुआ है? मीडिया ये वो एक मुझे छोटी. सी मीडिया क्लिपिंग आई थिंक जिओ टीवी या. कहीं मिली कि किसी लोग किसी बंदे को मारा. गया है। इतना छोटा सा एक न्यूज़ क्लिपिंग. था। अब मैंने पाकिस्तान में जो पत्रकार. मित्र हैं उनसे बातचीत की। तो उन्होंने. पता किया। उन्होंने बोला हां हुआ तो है. लेकिन इसमें मीडिया रिपोर्टिंग नहीं हो. रही। तो मैंने बोला क्यों? बोला कि नहीं.
हमें बताया गया है कि इसको रिपोर्ट नहीं. करना है। तो मैंने बोला यार थोड़ा पता करो. कौन है क्या है? तो उन्होंने पता किया।. उन्होंने बोला ये जाहिद अकुन तो है लेकिन. इसका दूसरा नाम है ज़ूर मिस्त्री। IC814 IC. 814 का जो यंगेस्ट किडनैपर था वो ज़हूर. मिस्त्री था। और उसको मार दिया था अननोन. गनमैन ने। दो लोग बाइक पे आते हैं उसको. मारते हैं उसका फोटो लेते हैं जो फोटो. मेरे पास आता है और वो स्टोरी मैं करता. हूं कि अननोन गन मैन पाकिस्तान में क्या. कर रहा है इस पे मैंने डॉक्यूमेंट्री बनाई.
देखी ये डॉक्यूमेंट्री आदित्य ने देखी और. आदित्य से मैं उरी के टाइम से ही संपर्क. में था मैंने आर्मी से उनकी बातचीत कराई. थी उरी के समय तो उन्होंने बोला बॉस ये तो. जबरदस्त है इस पे तो फिल्म बननी चाहिए वो. ऑलरेडी उसके उनके दिमाग में एक स्पाई. थ्रिलर था कि पाकिस्तान को लेके बनाना. पड़ेगा. और उन्हीं दिनों से ये रूमर्स अब चालू हो. हो गए थे कि कुछ तो अननोन गनमैन है। अब ये. अफगान हैं, बलोच है, पाकिस्तानी है, इंडियन है, बांग्लादेशी है। कौन है? किसी. को नहीं पता।. अब मेरे पास आपके लिए बहुत सारे सख्त सवाल. हैं। [हंसी] सवाल इसलिए हैं क्योंकि जो नए.
बच्चे धुरंधर देख कर आ रहे हैं. वो किताब की जगह धुरंधर से हिस्ट्री के. लेसन ले रहे हैं। [हंसी] वो बहुत खुश हैं।. मतलब मैं भी देख के आया। मैं बहुत खुश था।. मेरे ज़हन में बचपन से सवाल था आपने दाऊद. इब्राहिम को क्यों नहीं मारा? पिक्चर में. कहा गया कि भाई हर बार मारना जरूरी थोड़ी. ना होता है।. जो रोज मारने में मजा है. बिल्कुल सही बात. वो एक बार में कहा है।. सही बात है।. तो अब मैं प्रैक्टिकल सवाल पूछता हूं. क्योंकि फिल्म में तो डिस्क्लेमर दिखा. दिया आपने। लंबा चौड़ा डिस्क्लेमर जिसमें. आपने कहा इसका वास्तविकता से कोई लेना. देना नहीं है।. लेकिन मोदी जी का फुटेज फर्स्ट इसलिए.
लगाया था। [हंसी]. मुझे क्यों लग रहा है कि अब मैं जो है. आईबी या रॉ के इंट्रोगेशन रूम में बैठा. हूं। मेरी क्वेश्चनिंग कर रहे हैं।. सिंपल-सिंपल सवाल है। तो जो नया बच्चा. आपको सुन रहा हो उसे आप क्या बताओगे? धुरंधर फैक्ट के लिए देखो या मजा लेने के. लिए केवल देखो।. आप एंटरटेन होने के लिए देखिए। सबसे पहले. फिल्में तो एंटरटेन होने के लिए होती हैं. और कोई डॉक्यूमेंट्री तो है नहीं। अगर. आपको डॉक्यूमेंट्री देखनी है आप NDTV. देखिए। आप मेरा जो है शो देखिए। आप मेरी. न्यूज़ कवरेज देखिए। आप मेरा Instagram. फॉलो कीजिए। Twitter फॉलो कीजिए। और उसमें. देखिए कि मैं क्या न्यूज़ रिपोर्ट्स करता.
हूं। तो ये डॉक्यूमेंट्री. हमारे कहावत कहते हैं सांप भी मर गया।. लाठी भी नहीं टूटी।. बिल्कुल सही बात है। [हंसी] बिल्कुल सही. बात है। स्ट्रैटेजिक है कोई तो होगा ना।. तो लेकिन मैं इसमें कहूंगा कि ये जो सच के. ऊपर आधारित फिल्म है. और जब सच के ऊपर आधारित फिल्म होती है. उसको डायरेक्टर का पेरोगेटिव रहता है कि. वो सिनेमैटिक लेंथ से कैसे उसको मैग्निफाई. करें। तो इसमें अलग-अलग वाक्य हैं। अब. इसमें सबसे बड़ा क्रिटिसिज्म आप सवाल ना. पूछिए। मैं ही आपको बता देता हूं कि भाई. क्या आप मोदी के ऊपर फिल्म बना रहे हैं? क्या आप बीजेपी सरकार के ऊपर फिल्म बना.
रहे हैं? आपने डीममनेटाइजेशन में तो आपने. दिखाया नहीं कि कितनी त्रासदी हुई? भाई. शुभांकर मैं भी लाइन में खड़ा हुआ था। मैं. भी मतलब देख रहा था कि भाई क्या होगा पैसे. चले जाएंगे। मैं खान मार्केट में खाना खा. रहा था उस दिन और मुझे अर्नभ गोस्वामी का. फोन आया कि भाई कुछ तो होने वाला है। ये. थ्री चीफ जो हैं मिलिट्री के वो मिल रहे. हैं मोदी से। तो कोई सर्जिकल स्ट्राइक तो. नहीं होगी। कुछ होने वाला है। तो हमें लगा. कुछ होगा। तो मैं जल्दी से खान मार्केट. छोड़ के प्रधानमंत्री कार्यालय घर पे चला. गया। एलकेएम में और वहां खड़ा हुआ। मैं.
सिर्फ अकेला पत्रकार था वहां पर और कोई. नहीं। और अचानक से 8:00 बजे जो है. डीमोनेटाइजेशन का अनाउंसमेंट हुआ और सबसे. पहले मैंने अपना वॉलेट देखा थैंकफुली वहां. करेंसी नहीं थी लेकिन 6 महीने के बाद जब. वो अवधि खत्म हो गई कि आप नोट दे सकते हैं. और यह नहीं हो सकता अचानक 5 से ₹100 मेरे. किसी अलमारी [गला साफ़ करने की आवाज़] से. निकले और मैं सोचता रहा कि अब ये 10,000. का क्या होगा? अब तो वो एक मोमेंटो बन गया. है। लेकिन हां लोगों ने सफर किया। बिल्कुल. आप क्रिटिसाइज़ कर सकते हैं सरकार को।.
मैकेनिज्म्स हैं, डेमोक्रेसी है। आप सोशल. मीडिया पे लिखिए। आप कोर्ट जाइए। आप. अलग-अलग चीज़ करिए। लेकिन यह एक डायरेक्टर. का पेोगेशन नहीं। मैं वो पॉइंट पे जा ही. नहीं रहा। मेरी सिर्फ जिज्ञासा है क्योंकि. आप रिसर्च वाले पार्ट पर थे कि कितना. क्लोज हम गए जो मैं बिलीव कर सकूं। कई. चीजें मेरे लिए भी शॉकिंग थी।. जैसे उसमें नोटबंदी का जिक्र आपने किया।. अब नोटबंदी में जिन दो भाइयों की कहानी. आपने दिखाई जो ऊपर से गिर पड़ा।. वो घटना एक्सैक्टली हुई थी। मैंने उसके. ऊपर स्टोरी की वो बंदा ऊपर से वैसे ही.
गिरा था।. वो डीमोनेटाइजेशन के कुछ ही टाइम बाद। कुछ. ही टाइम के बाद. हम. इन कहानियों के रिसर्च में इस इस घटना में. रियलिटी थी या आपने जो एक कहते हैं कि कुछ. इशारा मिला तुक्को तुको में उसको जोड़ के. निकाल दिया।. नहीं नहीं ऐसा नहीं होता। बहुत गंभीर रूप. से जो है इस पे इन्वेस्टिगेट हुआ।. आदित्य दर की जो सिनेैटिक टीम थी उन्होंने. अलग रिसर्च की और हम लोगों ने मैंने और. दिव्या ने अलग रिसर्च की और बहुत बार ऐसे. क्वेश्चंस आते थे जैसे 261 का हमला हुआ. लेकिन जैसे पार्लियामेंट का हमला हुआ भाई.
कैसे हुआ? उसमें सीक्वेंस क्या थी? उस. वक्त की जो रिपोर्टज थी क्योंकि बहुत कम. चैनल थे उस वक्त तो कैसे रिपोटाज हुई? क्या हुई? अलग-अलग वाक्यों को रकाउंट कैसे. हम किए जाए? अब मेरा जो ज्यादातर. प्रोगेटिव था वो आतंकवाद को लेकर था। वो. काउंटर टेररिज्म को लेकर था कि क्या हुआ. और इंडिया का रिस्पांस इसमें. बट ये नोटबंदी वाला सच्चा किस्सा था।. कितने पैसे आने वाले थे? इसी वजह से ऐसा. हुआ।. देखिए कितने पैसे आने वाले थे? क्या नंबर. पे मैं नहीं. मैं नंबर पे मैं भी नहीं जा रहा।. लेकिन क्या एक बड़ा अमाउंट आने वाला था. जिसको रोकने के लिए फैसला लिया गया? अतीक. अहमद की कहानी भी सच्ची है।.
लेकिन कहानी कैसे सच्ची? मैंने अभी अतीक. को लेकर जिन्होंने किताब लिख सारी मसारी. वो अभी मेरे पास आ चुके हैं। यूपी के. डीजीपी साहब जिनको आपने दिखाया है वो मेरे. बड़े अच्छे मित्र हैं। वो बड़े नाराज हो. रहे थे कि यार उन्होंने मुझसे बात ही नहीं. की।. बिना मुझसे बात किए मेरा कैरेक्टर जो है. दिखा दिया। चलो बाद में फेमस हो गया तो. कोई बात नहीं [हंसी] है।. बट उनमें से जितना मैंने इंसाइडल समझने की. कोशिश की वो कह रहे हैं कि अतीक आखिरी. दिनों में अतीक ने माना था कि उसके आईएसआई. से लिंक थे। जो उसकी एफआईआर में दर्ज है. जो प्रूफ भी नहीं हुए अभी तक. जिक्र है.
अतीक बदमाश था अपराधी था लेकिन पाकिस्तान. से जुड़ा था ये वो कहते हैं कि हमारे लिए. भी नया था. देखिए बिल्कुल नया नहीं था उनका खुद का. कन्फेशन है कि आईएसआई के आखि लश्कर का. एकदम आखरी दिनों. देखिए आखिरी दिनों में हो या पहले हो था. तो एक तथ्य तो है ओपन डॉक्यूमेंटेशन वहां. पर यूपी पुलिस का और बाकियों का है। अब. इसमें आप इन्वेस्टिगेट कीजिए अगर कुछ. लोगों को इससे प्रॉब्लम है और लगता है कि. भाई गलत तथ्य दिखाए. अतीक कोई महान आदमी नहीं थे। अतीक के हज़ार. कांड है जो मैं जानता हूं।. उन्होंने भी बात कही लेकिन ये कहा कि उसको.
आतंकवादी दिखाना थोड़ा इजी था। वो प्रूफ. नहीं हुआ था। एफआईआर में केवल दर्ज हुआ. था।. देखिए आतंकवादी नहीं दिखा रहे। लेकिन. कडुइएट तो है। आप कश्मीर के संदर्भ में. देखिए मैं आपको एग्जांपल देता हूं।. 17 में जब एनआई की बहुत बड़ी रेड हुई. तो सिर्फ आतंकवादियों को नहीं पकड़ा गया।. जो कडुइट्स थे जो एक वाइट कॉलर टेररिस्ट. थे जिसमें आप बिजनेसमैन हो सकते हैं. जिसमें आप अध्यापक हो सकते हैं जिसमें आप. शॉपकीपर हो सकते हैं कुछ भी हो सकते हैं. लेकिन आप एक मिडिलमैन थे पैसे इधर-उधर. करने के लिए या हथियार इधर-उधर करने के.
लिए वो लोग आज भी तैयार में हैं। आज 2026. है। तो अतीक अहमद भी चाहे वो ड्रग्स हो, चाहे वो सप्लाई ऑफ आर्म्स हो, चाहे वो. आईएसआई के साथ लिंक हो। ये है ऐसे बहुत. सारे ओजीडब्ल्यूस हैं ओवर ग्राउंड वर्कर्स. ऑल अक्रॉस इंडिया जो इसमें इन्वॉल्व रहे. हैं। अब आपको नहीं अगर ऐसे कुछ लोगों को. इससे तकलीफ है तो आप फिल्म बनाइए। हमारा. जो बॉलीवुड है. ये तो आपने वो यूटबर वाली बात कह दी।. नहीं नहीं वो जो नहीं स्पष्ट. नहीं एक यूटबर ने कहा था ना कि पठान से. दिक्कत तुम भी अपनी फिल्म बना लो।.
बिल्कुल सही बात है। देखिए हम पर ये होता. था। हम पर ये सवाल उठते थे और बॉलीवुड पे. सवाल उठते थे कि अभी तक एक लेफ्टिस्ट. इकोसिस्टम है और जब मैं क्रिटिसाइज करता. था मुझे याद है कई गुजरात के ऊपर कश्मीर. के ऊपर फिल्में बनी और मैं उन पे लेटर टू. द एडिटर लिखता था या फिर डायरेक्टर्स को. ईमेल लिखता था वो वहां से मुझे जवाब देते. थे अरे यार आपके पास तो बहुत अच्छा ये है. आपके पास तो जानकारी है आप फिल्म बनाइए तो. आज मैं उनको कहता हूं कि लेफ्टिस्ट इकोस. सिस्टम इतना स्ट्रांग है तो आप फिल्म. क्यों नहीं बनाते हैं. ठीक है मैं उनको हटाता हूं मैंने धरंधर वन.
पर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद आपने. मुझे एक मैसेज किया. हम. मैंने बनाया था मेजर मोहित शर्मा. हम. क्योंकि मुझे प्रथम दृश्य लग रहा था कि. धुरंधर की कहानी जो है जसकीरत उस टाइम. जसकीरत इतना ओपन नहीं हुआ था हमजा की. कहानी जो है वो मेजर मोहित शर्मा पर कहानी. है. उसे लोगों ने बहुत पसंद भी किया वीडियो. खूब वायरल भी मेरा हुआ फिर आपने मुझे. मैसेज किया कि ये मेजर मोहित शर्मा पर. नहीं है. हम. कहीं-कहीं तो टुकड़े-टुकड़ों में उठाया. होगा आपने कई सारे किरदारों को. जी. हमजा बनाते वक्त कितने इंडिया के जो ऐसे. लोग थे वो आपके ज़हन में थे जैसे मुझे मेजर.
मोहित शर्मा ज़हन में लग रहे थे थोड़े. रविंद्र कौशिक भी मुझे दिखाई पड़ रहे थे।. जी।. आप लोगों ने जब इसकी रिसर्च की तो कितने. भारतीय जांबाजों को मिलाकर ये हमजा बनाया? देखिए पहले तो मैं बता दूं क्योंकि मैंने. आपको मैसेज भी किया था कि मेजर मोहित. शर्मा पे ये फिल्म बिल्कुल नहीं है।. दूर-दूर तक नहीं है। लेकिन मैं समझ सकता. हूं कि जो जिस तरीके के लंबे बाल थे, दाढ़ी थी, कैरेक्टर था वो लग रहा था वो भी. गए थे। मेजर मोहित शर्मा है। लेकिन परिवार. के साथ मेरी सांत्वना मेजर मोहित शर्मा को. मेरा सैल्यूट। मैंने आर्मी के ऊपर पिछले. 18 साल से रिपोर्ट किया है। खासकर कश्मीर. से। तो मेजर मोहित शर्मा नॉर्थ कश्मीर में.
कुफारा के पास वहां पर जो है अपना काम कर. रहे थे भारत के लिए और बहुत अच्छा सटीक. काम किया। मुझे लगता है कि इस पे फिल्म भी. आनी चाहिए कि मेजर मोहित शर्मा ने कितना. शानदार भारत के लिए अपना सैक्रिफाइस. कुर्बानी दी है। लेकिन वो कश्मीर में काम. कर रहे ऐसे लोग आज भी जो मुझे क्रिटिसाइज़. कर रहे हैं NDTV डिबेट पे अभी एक महिला आई. थी एक्ट्रेस मुंबई से और कह रही थी अरे ये. तो मुझे मेजर मोहित शर्मा में इस साल से. इस साल मेजर मोहित शर्मा पाकिस्तान में थे. और आपने तो अलग ही ये दिखाया मैंने बोला. मैडम इंडियन आर्मी पाकिस्तान में काम नहीं. करती ये आपको बेसिक चीजें तो पता होनी.
चाहिए आप क्रिटिसाइज कीजिए धुरंदर को. आदित्य को मुझे गालियां दीजिए दैट्स ओके. बट तथ्य तो आपके पास होना चाहिए. तो इंटेलिजेंस एजेंसीज काम करती हैं कोर्ट. ऑपरेशन होता है और जितने भी हमारे एंबेस. और हाई कमिशन है किसी भी देश का। उधर. दो-तीन लोग ऐसे होते हैं जो इंटेलिजेंस के. ऑफिसर्स होते हैं, डिप्लोमेटिक कवर पे काम. करते हैं। ये ओपन सीक्रेट है। हर जगह ऐसा. होता है। तो आपने जो ये सवाल पूछा कि कौन. आपके जहन में था तो एक नहीं था।. वैसे कई ऐसे लोग थे।.
मैंने इसीलिए ऐसी कहानी है।. मैंने इसीलिए पहले ही कहा क्योंकि मैं वो. 27 सवाल पूछ ही नहीं रहा हूं कि भाई किसी. एक आदमी को बनाया है। मुझे पता है कि हमजा. में 10-12 लोग हैं।. तो एक तो मैंने कहा कि मुझे रविंद्र कौशिक. भी दिखाई पड़े। मेजर मोहन शर्मा थोड़ा. दिखाई पड़े कि वो भी ऐसे गए थे। एक ऑपरेशन. को अंजाम दिया था और कोई ऐसे नाम थे ताकि. उनकी कहानियां हम कम से कम पढ़ सके. जिन्होंने अपना योगदान दिया हो। आने वाली. पीढ़ी पढ़ सके। हम जैसे लोग उन पर वीडियोस. बना सके ताकि कम से कम पता हो कि इन इनको. हमें शुक्रिया अदा करना चाहिए। देखिए. खासतौर पर वो जो अब जीवित नहीं है।. बिल्कुल सही बात है। चक्कर तो यह है कि.
धुरंधर बनाई ही इसलिए कि जो नाम नहीं पता. तो इसलिए एक ऐसा नाम बनाया जाए कि हम उसको. सैल्यूट करें। क्योंकि ऐसी कहानियां तो. क्लासिफाइड है। पूरी तरीके से बाहर नहीं. आई। अब एक कहानी रविंद्र कौशिक की या फिर. सरपजीत की या कुलभूषण यादव की जिनको मैं. स्पाई नहीं मानता। मैं बस नाम बता रहा हूं. कि उनका पाकिस्तान से आया है। यह सामने. आया है। लेकिन ज्यादातर जो ऑपरेशंस होते. हैं, यह कोवर्ट रहते हैं, यह क्लासिफाइड.
रहते हैं और कई दशकों तक सामने नहीं आते।. तो, हमने भी जो जो चीजें हमें पता चली, रियल लाइफ कैरेक्टर्स थे और जो इनसाइड. इंडियन इंटेलिजेंस मैं आपको स्पष्ट रूप से. बताऊं इनसाइड इंडियन इंटेलिजेंस जो लोग. हैं उनसे मेरी बातचीत हुई। उन्होंने. रीइक्ट करके बताया कि क्या-क्या होता है।. और इसमें एक और चीज मैं बताऊं कि कई बार. ऐसा होता है कि एक इंटेलिजेंस ऑफिसर ने. किसी को वहां भेजा अब वो जिसको भेजा वो. जरूरी नहीं है कि इसमें तो जसरत इंडिया से. गया है। वो कहीं और से भी जा सकता है और.
वहां पर रहता है। और धीरे-धीरे वो एक गैंग. में रहता है। उसको ग्रूम करता है। उसकी. जरूरत वहां अभी नहीं है। लेकिन उसको. प्लांट किया हुआ है। और 20 साल बाद 15 साल. बाद जो उसकी जरूरत आ सकती है। तो ऐसे बहुत. ऑपरेशंस रहे हैं। तो मेरा यह कहना है. क्योंकि नाम तो मैं रिवील नहीं कर सकता।. इट्स अ कोवेट ऑपरेशन इट्स कंप्लीटली. क्लासिफाइड बट तुरंदर जो है एक अननोन गन. मैन जो इंडिया के जांबाज रहे हो जिन्होंने. इंडिया के लिए काम किया हो पाकिस्तान में।.
उनके लिए एक सैल्यूट है। उनके लिए एक. मेमोयर है और उनके लिए एक ऐसी कहानी है जो. भारतवर्ष को जोड़े और हमें हम प्राउड हो. कि आर्मी के ऊपर, पुलिस के ऊपर, पैरामिलिट्री के ऊपर तो हम कहानियां देखते. हैं। लेकिन ऐसे भी कुछ लोग हैं जिनको पता. है कि हम अपनी जान न्योछावर करने वाले. हैं। अपने परिवार को बुलाने वाले हैं।. लेकिन भारत हमारे लिए सबसे ज्यादा. ये माइंडसेट समझाओ आप क्योंकि मैं रविंद्र. कौशिक के परिवार से भी समझना चाह रहा था।.
जैसे आपने कहा कि ऐसे लोग हैं जो. पाकिस्तान गए वहां किसी गैंग में शामिल हो. गए। कोई नौकरी करने लगे छोटी-मोटी और 20. साल तक चुपचाप काम कर रहे हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. वो क्या माइंडसेट होता है कि भारत की. सुरक्षा एजेंसी में शामिल हुआ एक अधिकारी. एक थर्ड क्लास की जिंदगी पाकिस्तान में. जाकर जी रहा है। इस आशा में कि रोज अपने. देश के वो काम आ जाएगा। और यह जानते हुए. कि अगर इस बीच वो पकड़ा गया तो ना उसका. देश उससे पूछेगा ना उसके परिवार को कुछ. मिलेगा। रविंद्र कौशिक शायद भारत के. इकलौते व्यक्ति हैं। जिनके परिवार को उनके.
मरणोपरांत ₹500 महीना पेंशन उनकी माताजी. को मिलती थी। केवल ₹500. वो खुश इस बात से थे कि ये ₹500. इस्टैब्लिश कर रहे थे कि लड़का हमारा. हिंदुस्तान का था। पैसे तो नहीं थे उसमें. 500 बाकी को तो वो भी नसीब नहीं हुआ।. देखिए शुभांकर ये गलत धारणा है कि. इंटेलिजेंस एजेंसी में काम करने वाला. व्यक्ति ही पाकिस्तान जा रहा है या किसी. दो दूसरे देश का बंदा किसी दूसरे देश जा. रहा है जो इंटेलिजेंस एजेंसी में काम कर. रहा हो। मेरा ये मानना है जसरा जैसा भी हो. सकता है।. 90% से ज्यादा लोग जो ऐसे कोर्ट ऑपरेशन.
में जाते हैं वो इंटेलिजेंस एजेंसी के लिए. काम नहीं करते। मतलब आप काम तो कर रहे हैं. लेकिन ही इज़ नॉट एन इंसाइडर ऑफ़ दैट. इंटेलिजेंस एजेंसी। केयरफुली उस आदमी को. देखा गया है। उसकी मानसिकता देखी गई है।. उसकी कैपेबिलिटी देखी गई है। और फिर जाके. जो है अंजाम दिया गया है। जैसे मैं. बार-बार कह रहा हूं। जरूरी नहीं है वो. हिंदुस्तानी हो। यह भी हो सकता है कि कोई. दूसरा हो। और एक एग्जांपल देके मैं इसको. छोडूंगा। लाल किले का हमला होता है। हम. बेचारे 10 लोग मारे जाते हैं या 12 लोग.
मारे जाते हैं। 30 लोग इंजर्ड होते हैं।. बहुत ही दर्दनाक। उसके अगले दिन. 24 घंटे में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर. एक बॉम्बिंग होती है। 10 लोग मारे जाते. हैं। 30 लोग इंजर्ड होते हैं। क्या आपको. पता था इसके बारे में? सुना था मैंने।. ऐसी कई घटनाएं मैं सुनता रहता हूं जो. हमारे यहां होती है। इसके एक दो दिन में. वहां भी आती है। तो बताया गया कि अफगान थे. और अफगान ने किया था और बलचिस्तान और पूरे.
खैबर पख्तूमा में तो आप देख ही रहे हैं. क्या हो रहा है। अब आसिम मुनीर या शहबाज. शरीफ या बिलावल भुट्टो या पाकिस्तान नहीं. दिखाएगा आपको। पाकिस्तान की मीडिया नहीं. दिखाएगा। हम. लेकिन जो कश्मीर में 30 साल से हो रहा था. वह आज बलचिस्तान और खैबर पल्तूनवा में हो. रहा है। हर दिन फ्रंटियर कोर पाकिस्तान. आर्मी पंजाबी पाकिस्तानी आर्मी के जो. ऑफिसर्स हैं वो बार-बार मारे जा रहे हैं।. उनके साथ पिछले खासकर तीन से चार साल में. जो हुआ है वो वो बयां नहीं कर सकते। इसलिए.
आसिम मुनीर प्रेशर में थे। इसलिए आसिम. मुनीर ने पहलगाम की घटना करी। अगर आप. पहलगाम की घटना से पहले पाकिस्तान में एक. पोल कराते कि कितना कॉन्फिडेंस था लोगों. को पाकिस्तान आर्मी में यामुनियम में तो. 30% या 20% ही लोग थे जो सपोर्ट कर रहे थे. इमरान खान की जो पूरी तरीके से वाहवाही हो. रही थी ये हो रहा था पहलगाम की घटना घटती. है और इमीडिएटली 85 टू 90% जो पॉपुलेशन है. पूरा आसिम मुनीर के पीछे खड़ी हुई है। तो. यह एक स्ट्रेटजी है पाकिस्तान आर्मी की.
हमेशा से रही है कि जब भी पीस होता है जब. भी इंटरनली उनको कॉन्फ्लिक्ट लगता है कि. भाई हमारे खिलाफ एक मुहिम छिड़ गई है।. क्योंकि आपको आई थिंक पिछले साल था या. पिछले से पिछले साल मई की 9 मई की घटना. याद होगी जब पूरे इमरान खान के सपोर्टर. पाकिस्तान आर्मी के घरों में उनके दफ्तरों. में इंटेलिजेंस के हर जगह त्रासदी मचा दी।. पूरे वहां पर लोगों के आर्मी के घर जला. दिए। लाहौर कोर कमांडर के वहां से तो वो. क्या बोलते हैं चिकन हेनवन सब कुछ निकाल. दिया रेफ्रिजरेटर निकाल दिया पीकॉक वहां.
से निकाल दिए तो बहुत ज्यादा एंबरेसमेंट. उनको हुई तो उससे ध्यान भटकाने के लिए. इमरान खान से ध्यान भटकाने के लिए. बूचिस्तान खैबर पतून में क्या हो रहा है. उससे ध्यान भटकाने के लिए वो कश्मीर में. आतंकवादी हमला करते हैं और पूरा इंटरनेशनल. जो है फोकस वहां हो जाता है और अमेरिका आज. भी समझ नहीं रहा क्योंकि हम सीज फायर की. बात कर रहे थे अभी अमेरिका को बेवकूफ. पाकिस्तान बार-बार बना चुका है। चाहे वो. वॉर ऑन टेरर पूरी तरीके से 20 साल से चलता.
रहा या खासकर अफगानिस्तान में जो दोहा पीस. स्टक्स हुए उसमें पाकिस्तान मध्यस्था कर. रहा था और बार-बार अमेरिका को कर रहा था।. कोई बात नहीं आपका एग्जिट होगा। एग्जिट. प्लान किया जाएगा ट्रंप के पहले टर्म में. और कुछ नहीं होगा। और आप देखिए 15 अगस्त. 2021 को जब अमेरिका वहां से निकला मजबूरन. और तालिबान ने जबरन कब्जा कर दिया तब कैसे. वहां की जो एयरफोर्स थी अमेरिका की वहां. से निकल रही थी और लोग अटके हुए थे पूरी. तरीके से उस पे ऐसी एंबरेसमेंट कभी आपने. देखी है अमेरिका की इससे पहले वियतनाम में.
हुआ था लेकिन जो विजुअल हामिद करजाई. एयरपोर्ट काबुल से आए वो कभी नहीं वो मुझे. आज भी विश्व. तो ऊपर चले गए थे ऊपर से गिर गए थे. ऊपर से गिर गए थे और कट टू 2026 आज. अमेरिका कहता है कि ईरान के खिलाफ हमारी. इतनी बड़ी जीत हुई है। हमने उनकी नेवी, एयरफोर्स सबको तबाह कर दिया है। लेकिन वो. यह नहीं कहते कि आज भी ईरान मिसाइल दाग. रहा है उनके खिलाफ। आज भी क्योंकि. इनिशियली उन्होंने क्या कहा था कि ईरान के. लोग भी मदद करेंगे। उनकी खुद की. डेमोक्रेटिक सरकार के लिए रिजीम को हटा.
दिया जाएगा। लेकिन आज एक आयतुल्लाह को मार. के एक नए आया ने सरकार अपनी बनाई। वही लोग. सरकार में हैं। वही राष्ट्रपति है। वही. फॉरेन मिनिस्टर है। और वही जो इस्लामी. धारणा है उनकी सुप्रीम कमांडर की वही चल. रहा है।. जो उनका कुछ नहीं बदला. वीक हुआ था वो और स्ट्रेंथ हो गया उनका कि. मुझे तो लग रहा है कि अमेरिका. डिप्लोमेटिकली और ग्लोबल जो अपने ऑर्डर. में जितना वीक आज है उतना वीक कभी नहीं. रहा है।. क्या खाड़ी देशों में अमेरिका की ताकत.
खत्म हो गई? मुझे लगता युद्ध के बाद. मुझे नहीं लगता खत्म हो गई। लेकिन इसमें. दो चीज़ तय हैं। एक तो इंडिया के तरफ. लोग कदम बढ़ाएंगे।. वो क्यों? क्योंकि एक तरफ चीन है, एक तरफ रूस है और. एक तरफ अमेरिका है।. चीन और रूस के तहत तो लोगों में ऑलरेडी ये. भावना थी कि इनको ट्रस्ट नहीं कर सकते। अब. अमेरिका की तरफ भी सेम भावना हो गई है।. क्योंकि अभी जो पूरा ये जंग चला इन्होंने. अपने नेटो अलायंस को कॉन्फिडेंस में नहीं. रखा। जो रशिया यूक्रेन की तरफ भी वो. बार-बार कहते रहे कि जो है पीस होगा,
शांति वार्ता होगी। मैं जो है जंग को. रुकवा दूंगा, यह करूंगा, वो करूंगा, कुछ. नहीं कर पाए। एक साल से ज्यादा हो चुका. है। वो अपनी दूसरी टर्म में है। तो सच्चाई. तो यह है कि बाकी जो डेमोक्रेटिक कंट्रीज. हैं वो इंडिया की तरफ अब देख रही हैं। वो. देख रही हैं कि कैसे डेमोक्रेसी जो है. इंडिया आगे बढ़ा रहा है। इंडिया के साथ. ट्रेड किया जाए। इंडिया के साथ. टेक्नोलॉजिकल रिलेशनशिप किया जाए। डिफेंस. मैन्युफैक्चरिंग जो है इंडिया के साथ की. जाए। क्योंकि ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा. सकता। और आखिर में ये होगा कि जितनी भी ये.
मिडिल ईस्ट की कंट्रीज हैं जिस पे ईरान का. आक्रमण हुआ ये मिलिट्री और इंटेलिजेंस और. अपना जो पूरा स्ट्रेटेजिक टाइज हैं ये. अमेरिका और इजराइल से अपना इक्विपमेंट अब. लेंगी तो उनके लिए भी विनविन सिचुएशन है।. बट इंडिया के लिए मुझे लगता है कि ओवरऑल. इट इज़ अ विनविन सिचुएशन। क्योंकि एक आखिरी. एग्जांपल मैं आपको देता हूं। अमेरिका का. कितना प्रेशर इंडिया पर रहा कि रूस का तेल. आप खत्म कर दीजिए। आपको नहीं लेना है।. बिल्कुल नहीं लेना है। और तभी मैं ट्रेड. डील करूंगा। तो इंडिया ने धीरे-धीरे 40%. जो था वो 20% हो गया और बोला कि धीरे-धीरे.
सिस्टेटिक मैनर में खत्म हो जाएगा। जैसे. ही जंग होती है अमेरिका कहता है प्लीज आप. अमेरिका जो है रूस का तेल लीजिए क्योंकि. ग्लोबल ऑयल प्राइसेस जो है ये स्टेबलाइज. करने हैं और इंडिया ही एकमात्र देश है जो. ये कर सकता है।. इस लड़ाई से रूस का ही फायदा हुआ।. रूस का हुआ फायदा। आप देखिए ना रूस को. प्रेशर डाल रहा था अमेरिका कि सेंशंस लगा. देंगे। हम अलास्का समिट के बाद भी उस पर. प्रेशर डाला कि अगर आप यह नहीं करेंगे तो. आपके ऊपर जो है एक्शन लिया जाएगा। रूस को. फर्क नहीं पड़ रहा। बल्कि व्लादमीर जो.
जेलस्की है उनकी ट्रंप के साथ लड़ाई हुई।. आपने देखा कि कैसे वाइट हाउस में पहली बार. ऐसा कुछ हुआ। हास्यास्पद था जो भी कुछ. हुआ। तो ट्रंप इस प्लैंक पे सरकार में आए. कि रूस यूक्रेन की जंग वो खत्म कर देंगे।. मोदी जी का होता है ना मोदी जी की आप. क्रिटिसाइज करते हैं कि उन्होंने जंग. रुकवा दी पापा और ये सब बोला जाता है। बट. सच्चाई तो यह है क्योंकि मैंने यूक्रेन का. युद्ध बहुत क्लोजली कवर किया। जब वहां. खारखीव में इंडियंस वहां फंसे हुए थे।. इंडिया ने यूक्रेन से बात की, इंडिया ने.
रूस से बात की और क्योंकि हमारे दोनों. देशों से संबंध अच्छे हैं। तो तब वहां पर. हुआ। जंग रुकवाई गई। अब मैं ये नहीं कहता. कि सिर्फ मोदी जी के उससे हुआ। बाकी. पॉलिटिकल लीडर्स ने ग्लोबली प्रेशर भी. डाला होगा। बाकियों ने भी बात की होगी।. लेकिन हमारे हिंदुस्तानी वहां फंसे थे।. इंडियन डिप्लोमेट्स वहां काम कर रहे थे कि. उनको निकाला जाए। तो जंग उस 6 घंटे के लिए. या 9 घंटे के लिए रुकी थी और ऐसी सच्चाई. है हुआ था। वहां पर एक इंडियन जो है मारा. भी गया था अनफॉर्चूनेटली। तो ऐसा हुआ है।. अब इंडिया का जो स्टांस है दिस इज नॉट एन.
एरा ऑफ़ वॉर। सॉलशंस कैन नॉट बी फाउंड इन द. बैटल फील्ड। ये सिर्फ बीजेपी का तो नहीं. है। आप इतिहास देखिए। हमारा जो नॉन एलाइंड. है मूवमेंट या नॉन अलाइंड हमारा अप्रोच. है। ये तो कांग्रेस के दशक से रहा है। तो. अभी क्रिटिसिज्म क्यों? अभी क्यों बोला. जाता है कि अरे पाकिस्तान ने मध्यस्था की. तो इंडिया के लिए कितना बड़ा ये फेलियर. है। इंडियन डिप्लोमेसी फेल हो गई है।. वो जो ड्राफ्टेड ट्वीट डाला था शहबाज ने।. हां नहीं ड्राफ्ट तो [हंसी] वो मैंने भी. नोटिस किया। मैंने वो ट्वीट किया वो वायरल. हो गया कि आप देखिए. [नाक से की जाने वाली आवाज़] कितना. त्रासदी है। अमेरिका का पपेट तो पाकिस्तान.
था ही हमेशा। आसिम मुनीर भी है। लेकिन वो. डालता है कि ड्राफ्ट फॉर पाकिस्तान पीएम. और उसके बाद ट्वीट हो जाता है।. इन लोग को देख के उम्मीद में याद आता है. मुझे कौन है ये लोग? पपेट है, कठपुतली है।. मतलब इतना इतनी लापरवाही हो सकती है कि. प्राइम मिनिस्टर के अकाउंट से एक पोस्ट जा. रहा है। अब दिमाग तो है नहीं, पढ़ाई हुई. नहीं है। जिहाद पढ़ाया जाता है इनको और. इनका एक बहुत ही इंटरेस्टिंग चीज है।. पाकिस्तान का जो इतिहास है ना वो 1947 से. शुरू होता है। उससे पहले वो इतिहास पढ़ाते. ही नहीं है। पाकिस्तान के स्कूलों में. क्या पढ़ाते हैं? उनको जिहाद पढ़ाते हैं।. मतलब ऑल सीरियस। आपके दोस्त बहुत सारे.
होंगे। मेरे मित्र हैं। मैं हालांकि इतना. उनसे पूछा नहीं हिस्ट्री के बारे में। बट. आपके हिसाब से पाकिस्तान का माइंडसेट क्या. है? क्या उनकी हिस्ट्री है? नहीं हिसाब से नहीं मैं लोगों से बात करता. हूं। मेरे बहुत मित्र हैं पाकिस्तान में।. मैंने बहुतों की जो जेन्युइन लोग हैं. बेचारे यहां आते थे कई साल पहले। वो उनके. लिए वीजा में मदद की है कि आप आए। बहुतों. को नहीं मिला वीजा। क्या कर सकते हैं।. लेकिन सच्चाई तो ये है और मैं सीरियस नोट. पे कह रहा हूं कि उनकी जो हिस्ट्री है वो. 1947 से पढ़ाई जाती है। उनको बोला जाता है. कि हमको आजादी मिली। इस्लामी मुल्क जो है. जिन्ना का बहुत बड़ा योगदान था। ये था वो.
था। लेकिन उनको ये नहीं बोलता कि 1947 से. पहले भारत क्या था? भारतवर्ष क्या था? वेद. क्या थे? पुराण क्या थे? उससे पहले जो. सिविलाइजेशन थी इंडस वैली सिविलाइजेशन थी. या बहुत कुछ था जो हमारे महाभारत रामायण. या बाकी चीजें हैं उनको कुछ. तो उनको क्या लगता है उनके बाप दादा कौन. थे. कुछ नहीं उनको बोलते हैं अल्लाह अचानक से. वो पेड़ से 1947 में गिरे और 1947 से. पाकिस्तान जो है एकदम. तो उनकी हिस्ट्री में भगत सिंह सरदार पटेल. नेहरू गांधी. भगत सिंह का थोड़ा सा जिक्र है क्योंकि वो. पंजाब से आते हैं लेकिन उसके अलावा कोई.
नहीं गांधी वांदी से कोई वास्ता नहीं. नेहरू अरे सरदार पटेल खत्म कुछ नहीं. गुजरात है दूर रखो उनको| तो उनका का जो अब. जो इतिहास आगे बढ़ाया जाएगा वो मुझे लगता. है हाफिज सईद से लेकर सैयद सलााउद्दीन और. मसूद अज़र तक ही सीमित रह जाएगा क्योंकि. यही कट्टरपंथी विचारधारा है। आज जैसे सीज. फायर हुआ तो मेरे को ट्रोल किया जा रहा. है। पाकिस्तानी पूरी तरीके से ट्रोल कर. रहे हैं। अरे शर्मा आ गई देखो पाकिस्तान. का कितना ग्लोबल स्टैंडिंग है। इतना. जबरदस्त हम कर रहा है। अरे कौन सा ग्लोबल. स्टैंडिंग? आपके लोग मर रहे हैं। खाने को. ब्रेड नहीं है। तेल की जो कीमतें हैं डबल.
ट्रिपल हो गई हैं। लेकिन आप अपनी. अर्थव्यवस्था संभाल नहीं पा रहे। मतलब. स्कूल बंद कर रखा है, दफ्तर बंद कर रखा है. उनके पीएसएल में मैचेस में मार्केट खाली. है। मतलब पूरा मुल्क कंगाली पे चला गया. है।. देखिए पाकिस्तान की यही तो है।. अर्थव्यवस्था तो खत्म है। सिक्योरिटी नाइट. मेयर है पूरी तरीके से। लेकिन आसिम मुनीर. या पाकिस्तान आर्मी या जो भी वहां पर फौजी. आता है उनके लिए एकमात्र वेपन ये रहता है. कि उनकी जो फॉरेन पॉलिसी है वो भारत के. खिलाफ एक आतंकवाद करने में जुटी है और तभी. एक पाकिस्तान आर्मी एक फैक्ट्री इंडस्ट्री.
की तरह काम करता है और ये इसके पास तो. दस्तावेज हैं। पहले बाजवा थे अभी आसिम. मुनीर हैं। उससे पहले राहिल शरीफ थे कोई. दूसरा था। हमेशा जब ये रिटायर होते हैं. अच्छा बाज अननोन गनमैन वाला जो बाथरूम में. गिरने की खबर आई थी। वो मुझे लगता है वो. एग्जाजरेशन है। ऐसा कुछ नहीं है। अब चक्कर. यह हो गया ना कि अननोन गन मैन इतना. सक्सेसफुल है कि वहां पर कोई भी खाना खाते. हुए गिर जाता है, फिसल जाता है तो कहते. हैं अननोन गन ममैन ने किया है। तो इतना. नहीं है। डर बना रहे, डर का माहौल बना. रहे।. दाऊद इब्राहिम जिंदा है या मर गया है।.
देखिए दाऊद इब्राहिम जिंदा है। मुझे लगता. है।. लेकिन मसूद अज़र मुझे नहीं लगता कि पूरी. तरीके से जिंदा है। ये बड़ी खबर मैं आपको. दे रहा हूं।. 2020 के बाद से गायब है। देखिए मैं बहुत. सालों से मसूद अज़र को बहुत केयरफुली. ऑब्ज़र्व कर रहा हूं। क्योंकि मसूद अज़र. अपने आप को जर्नलिस्ट कहता है पत्रकार और. वो हर हफ्ते एक कॉलम लिखता था अल कलाम. वीकली करके उनका एक मैगज़ीन आता था और उनका. एक स्पोक्सपर्स है सैफुल्लाह तो वो छ सात. मिनट का ऑडियो बनाता था जो मसूद अज़र. आर्टिकल लिखता था वो बंद हो गया पिछले कई. तो ये जो हमने हमला किया था 14 परिवार के.
लोग मारे गए थे 14 करोड़ शबाज शरीफ ने दिए. थे उससे पहले ही मसूद अज़र का कोई ठिकाना. नहीं है अभी मसूद अज़र का जो है भाई मारा. गया मारा क्या गया मतलब उसकी डेथ हुई. हार्ट अटैक हुआ जो भी हुआ बावलपुर में. उसका जो है क्रिमेशन हुआ वहां पर भी मसूजर. नहीं था तो है कहां. ये मैं सवाल पूछ रहा हूं मुझे नहीं पता. मैं मतलब वहां पर पाकिस्तान में मौजूद. नहीं हूं होता तो आपको बताता लेकिन आपने. दाऊद पे सवाल पूछा. तो दाऊद पे मैं आपको ये बताना चाहूंगा कि. हमारी जो इन्वेस्टिगेशन रही या हमारा जो.
रिसर्च रहा उसमें पता चला कि दाऊद जो हैं. ऑब्वियसली फिल्म इंडस्ट्री में टच में थे।. फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के कई वीडियो. हैं जिसमें बताया गया है कि वो उनसे मिलते. थे। आई थिंक डोंगरी में या कहीं पर मुंबई. में उनका रहना सहना था। फिर वो दुबई में. रहे। दुबई के रास्ते पाकिस्तान गए हैं। तो. पाकिस्तान में वाइट हाउस करके है सऊदी. मॉस्क के आसपास क्लिफ्टन कराची में। वहां. पर इनका एक मकान है। हाउस नंबर 37 स्ट्रीट. 30 फेज फाइव डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी. कराची। यहां पर इनका मकान है। नूराबाद.
में एक बंगला है। कराची में ये एक हिली. एरिया है वहां पर। और 617 सीपी बेरार. सोसाइटी ब्लॉक 78 कराची। तो यह चार इनके. मकान हैं जो कराची में हैं। इसके अलावा. वाइट हाउस अलवसल रोड जुमेरा दुबई यहां पर. भी इनका दुबई में ठिकाना रहा है। कई बार. वहां पर गए हैं। शादियां अटेंड की हैं।. शादी की है। बहुत चीजें की हैं दुबई में।. तो मेरा यह मानना है या जितना मैंने सुना. है मैं आपको बताऊं कि 2023 में कोई घटना. घटती है और उसके बाद उनको एक मेडिकली बहुत.
ज्यादा प्रॉब्लम हो जाती है और वह ऑलमोस्ट. बेड रिडन हो जाते हैं और तब से वह अंदर ही. रहे हैं। और इससे पहले क्या हुआ जो मैं. आपको बताऊं 2017-1 की घटना होगी। मैं एक. टीवी चैनल में काम करता था। हमारे. पाकिस्तान में रिपोर्टर था जिसको मैंने. हायर किया था। तो दाऊद के घर मैंने. पाकिस्तान में रिपोर्टर भेजा कराची में।. आई थिंक वो क्लिफ्टन या डीएचए ही था और. वहां पर उसने भी वो एक यंग रिपोर्टर था और. उसने वीडियो बनाया पूरे उसका और हमने. इमीडिएटली उस चैनल पे चला दिया और क्या.
जबरदस्त चला कि भाई दाऊद के घर सबसे पहले. बाहर से हम पहुंचे। आईएसआई ने शाम को उसको. उठा दिया और आईएसआई ने उठाया 24 घंटे तक. उसकी जो है खातेदारी की और बोला कि मुझे. पता है तू अकेला रहता है यहां कराची में. और तेरी मां कहां रहती है यह भी पता है तो. तुझे जिंदा रहना है तो खबरदार. उसके बाद बेचारा वो नौकरी छोड़ दिया और. गायब हो गया तो ये कहानी है दाऊद की और. मुझे लगता है कि बहुत ऐसी अटकलें भी लगी. कि उनका कुछ पता नहीं कुछ हुआ था फिर. गैंगन हो गया टांग में फिर वो बेड रिडन हो.
गए और मेरे को एक यह भी वाकया याद है एक. चैनल था। उसके एक रिपोर्टर ने कहीं से. नंबर मिला होगा उनको तो फोन किया क्लिफ्टन. में। कोई महिला ने आई थिंक उनकी वाइफ थी, बेटी थी। कौन था? उसने फोन उठाया और पूछा. कि अरे दाऊद भाई हैं। तो उन्होंने बोला. हां और उसके बाद कुछ पूछा तो फोन काट. दिया। तो यह आपको बस एविडेंस रहा कि दाऊद. भाई हैं और दाऊद भाई अभी भी जिंदा है. लेकिन वो स्थिति नहीं है मुझे लगता है जो. उस वक्त थी उस वक्त एक अलग ओरा था और जिस. तरीके से कराची के गैंग्स की हम बात करते.
हैं रहमान डकैत से लेकर अरशद पप्पू. एटसेट्रा वैसे ही बंबई में गैंग्स थे. अलग-अलग जो उनका अलग ही रोल था फिर मुंबई. की पुलिस ने हम दाऊद को मार क्यों नहीं. पाए. मुझे लगता है एजेंडा में नहीं रहा होगा जो. पॉलिटिकल विल भी है और इंटेलिजेंस भी है. उन्होंने कॉल लिया होगा क्योंकि हमेशा हम. इजराइल तो है इजराइल जो है पब्लिकली आती. है और कहती है 7 अक्टूबर के बाद कि अगले. एक साल में मूसाद शबेत या जितनी भी. एजेंसियां हैं वो प्रण ले रही हैं कि. हिजबुल्ला हो हमस होती हो या ईरान हो.
जितने भी आका हैं जिन्होंने 7 अक्टूबर में. भूमिका निभाई हम उनको मार डालेंगे. पब्लिकली ये अनाउंस करती है मीडिया में. आता है जेरूसलम पोस्ट में अलग-अलग जगह ये. हमेशा से करते हैं वो और एक साल में पूरी. तरीके से हिजबुल्ला को लेबनन में हमास को. गाजा में हमास को ही तेहरान में और ईरान. को भी पूरी तरीके से खत्म. देव डन बिफोर आल्सो वो जो उनका ओलंपिक. वाला. ओलंपिक का हुआ इवन होलोकस्ट के जो लोग थे. जो होलोकस्ट में इन्वॉल्व थे जिन्होंने. यहूदियों को मारा उनको टॉर्चर किया उनको.
अर्जेंटीना से किडनैप करके आए और यहां पर. उनको सजा हुई और आज पहली बार सजा-ए मौत को. जो है लीगल सेंशन दिया गया है क्योंकि अब. इजराइल का जो 7 अक्टूबर का हुआ हॉस्टेज. क्राइसिस हुआ उनको हजारों आतंकवादियों को. छोड़ना पड़ा तो अब उन्होंने रियलाइज किया. कि भ हम कैसे छोड़ सकते हैं क्योंकि. क्योंकि जिसको हम छोड़ रहे हैं वो फिर से. हमास पैदा करेगा। तो अब उन्होंने सबसे. पहले एक कंसेंसस से लॉ लाया है मारने का, फांसी देने का। तो जितने भी हमास के लोग. हैं अभी धीरे-धीरे उनको फांसी देंगे।.
इजराइल की कौम में आप तो इतनी बार गए हो।. आदित्य इजराइल की कौम में ऐसा क्या है कि. इतनी छोटी कौम होने के बावजूद दुनिया की. नाक में दम कर रखा है उन्होंने। देखिए जब. मजबूरी होती है ना मजबूरी में आपको चीजें. करनी पड़ती हैं। अब मैं अपने आप को या. अपने समुदाय को इजराइलियों के साथ कंपेयर. नहीं कर रहा। यहूदियों के साथ नहीं. क्योंकि ट्रेजडीज कंपेयर नहीं होती और. यहूदियों के साथ जो हुआ बहुत बड़ा लेवल पर. हुआ। उसको हम बिल्कुल किसी चीज के साथ. कंपेयर नहीं कर सकते। लेकिन जो कश्मीरी. हिंदू समुदाय है जब हमको कैंपों में रहना.
पड़ा जम्मू में। जब हम सब कुछ खो दिया।. हमारे घर चले गए, मंदिर चले गए। हमारा जो. इतिहास था पूरी तरीके से मिट गया। हमें यह. एहसास हो गया कि कश्मीर हम वापस नहीं जा. सकते। अब हम आगे क्या करेंगे? हमने पढ़ाई. की। हमने एजुकेशन का सहारा लिया। हमने जब. सरकार के पास गए उस वक्त हमारे जो शिवसेना. के बाला साहब ठाकरे थे या एजुकेशन. मिनिस्ट्री में एक एम के काऊ थे उनके पास. गए। हमने बोला हमें पैसा नहीं चाहिए। हमें. घर नहीं चाहिए। आप हमें सीटें दीजिए। ओवर. एंड अबव रिजर्वेशन नहीं। ओवर एंड अबव अपने.
मेरिट पे। आप हमें सीटें दीजिए। हमें. इंजीनियरिंग करनी है। हमें पढ़ाई करनी है. विश्वविद्यालय में। अपने बलबूते पर कुछ. बनना है और हम बने तो यही चीज है इजराइल. में जब मैंने बातचीत की लोगों से मिला एक. अलग लेवल का जज्बा है। इजराइल में एक चीज. है जब जंग होती है अपनी सोव सोवनिटी पे. इंटेग्रिटी पे जब सवाल होता है तो सब. एकजुट हो जाते हैं।. नार लपेट जो अपोजिशन लीडर हैं वो नेतन याू. को पूरी तरीके से जो है क्रिटिसाइज. करेंगे। उनकी खाल उतार देंगे पूरी तरीके.
से। लेकिन जब जंग होती है तब जो है उनके. साथ खड़े रहेंगे। जब मोदी जी गए थे ना मैं. पार्लियामेंट में मौजूद था उसको कनेसिट. कहते हैं इजराइल में जेरूसलम में है तो एक. बहुत बड़ी पॉलिटिकल कंट्रोवर्सी हुई थी कि. यार लपे जो लीडर ऑफ अपोजिशन है उन्होंने. बोला था मोदी पार्लियामेंट आएंगे हम. बॉयकॉट करेंगे तो यहां पर भी कांग्रेस ने. सवाल उठा लिया भाई देखो आपकी तो खिल्ली. उड़ रही है बॉयकॉट कर रहा है अपोजिशन. लेकिन फिर उन्होंने बोला कि नहीं मोदी को. बॉयकॉट नहीं करेंगे हम नितिन याू को और. पार्लियामेंट के जो स्पीकर हैं अमीर उनको. बॉयकॉट करेंगे तो हुआ यह कि जैसे ही इवेंट.
शुरू हुआ तो वॉकआउट हुआ कोई वहां पर जितने. भी अपोजिशन थे चले गए। फिर नेतन याू ने. अपनी स्पीच दी, स्पीकर ने अपनी स्पीच दी. और जैसे मोदी जी को बुलाया गया अपोजिशन. वापस आया और उन्होंने उसका समर्थन दिया और. अपोजिशन के लीडर यार लपिड ने खुद स्पीच दी. मोदी की तारीफ की। तो यह चीज जज्बा अलग. है। और एक और चीज इजराइल जो है ऑलमोस्ट. डेजर्ट है। उनके पास पानी नहीं है। लेकिन. पानी के लेकर उन्होंने ऐसा इनोवेशन किया. है। एग्रीकल्चर को लेकर उनको ऐसा इनोवेशन.
किया है कि आज इंडिया उनसे कह रहा है कि. ये जो ड्रिप इरीगेशन है ये आप हमें बताएं. कि ये टेक्नोलॉजी कैसे चलती है? आप. पेनड्राइव यूज़ करते हैं कई सालों से।. उसका इजाद कहां से हुआ है? इजराइल से हुआ. है। तो जब मजबूरी होती है ना तब मजबूरी. में आपको करना पड़ता है।. मेरे यहां राजेश पवार आए थे कुछ समय पहले।. जी. तो राजेश ने कहा यार शुभांकर मैं तीन. देशों में डिटेन हुआ हूं। [हंसी]. यूक्रेन में, ईरान में, इजराइल में।. तो उन्होंने डिफरेंस बताया। उन्होंने कहा. जब मैं यूक्रेन में था तो यूक्रेन के लोग. पैसा देकर भाग रहे थे यूक्रेन से।.
जब मैं इजराइल गया तो मैंने देखा लोग. दुनिया भर के फ्लाइट करके वापस आ रहे थे. और वापस भी नहीं। जो यहूदी बाहर के देश. में रह रहे हैं, बाहर के नेशनल हैं, वह एक. चीज होती है, उनका एक कस्टम है जिसको कहते. हैं अलाया। अलाया लेके वह वापस आते हैं और. खासकर जब जंग होती है तब कहते हैं हम. वापिस आएंगे। आपकी इकॉनमी में हम साथ. देंगे और आपकी आर्मी भी ज्वाइन करेंगे। तो. ये इंडिया से भी जो बहुत सारे यहूदी खासकर. महाराष्ट्र में खासकर आई थिंक मिजोरम में. और केरल में बहुत यहूदी हैं। तो वो लोग.
वापस गए हैं वहां पर सेटल होने के लिए।. वहां पर ऐसे परिवार हैं जो कई दशकों से. यहां पर रह रहे थे लेकिन वापस गए हैं और. अब इजराइल में रह रहे हैं। तो यह जो जज्बा. है वो वहां पर ही है और आप देखिए ना. ज्योग्राफिकली भी इजराइल कैसे कटघरे में. है। इस्लामी देश पूरी तरीके से वहां पर है. और खासकर ईरान तो बार-बार कहता है कि. फ्रॉम द रिवर टू द सी पैलेस्टाइन विल बी. फ्री। फिर कहते हैं कि भाई यहूदियों को हम. पूरी तरीके से मिटा देंगे। पूरा इजराइल जो. है ऑक्यूपाइड पेस्टाइन है। यहां पर इनको.
लेने का कोई हक नहीं है। लेकिन इंडिया का. हिस्टोरिकली जो पर्सपेक्टिव रहा है वो. बार-बार ये रहा है कि हमारा स्ट्रेटेजिक. टाइ इजराइल के साथ है। डिफेंस टाइ है।. लेकिन हम टू स्टेट स्यूशन में बिलीव करते. हैं। हम कहते हैं कि इजराइल और पैलेस्तीन. साथ-साथ नेबर्स की तरह रहने चाहिए। और. इससे किसी को तकलीफ नहीं है। मैंने इजराइल. के कई राजदूतों का इंटरव्यू किया है।. फिलिस्तीन के कई राजदूतों का किया है।. फॉरेनस्टर्स का किया है। और मैं बार-बार. उनको पूछता हूं क्या आपको तकलीफ नहीं. होती? इंडिया ये बार-बार कहता है टू स्टेट.
सॉल्यूशन। आप तो कहते हैं नहीं फिलिस्तीन. कुछ है ही नहीं। फिलिस्तीन कहता है इजराइल. कुछ है नहीं। बोला नहीं नहीं हम इंडिया का. समझते हैं पक्ष। लेकिन हम इंडिया के साथ. अच्छे जो हैं, जो है रिश्ते रखें।. ये तो गोविंदा वाले फिल्म का हो गया कि. हाथ इधर है। लेकिन दिल आपकी तरफ है।. बिल्कुल। लेकिन, आप देखिए ना जब हमला भी. हुआ 7 अक्टूबर का, उसके बाद इजराइल ने. हमला जो है पूरी तरीके से गाज़ा में किया।. पहला ऐसा देश कौन था जिसने 7 अक्टूबर कंडम. किया आतंकवादी हमला, इंडिया। पहला ऐसा कौन. सा देश था जिसने फिलिस्तीन में लोगों के.
लिए मदद भेजी इजिप्ट के रास्ते? इंडिया।. तो ये. तो फिर इजराइली क्यों सपोर्ट करते हैं. इंडिया को? क्योंकि एक बड़ा परसेप्शन है. कि ग्लोबल पॉलिटिक्स में अगर इंडिया कोई. ट्रू फ्रेंड है तो वो इजराइल है। हमने ये. इंडिया पाकिस्तान वॉर में भी देखा कोई देश. हमारे साथ स्टैंड लेने को तैयार नहीं था।. पाकिस्तान की तरफ से चार दोस्त आए।. हमारे साथ कोई नहीं आया। हमें टेक्नोलॉजी. का सपोर्ट. हम्म. इजराइल देता है। इनफैक्ट राजेश पवार ने ही. हमारे इंटरव्यू में बताया कि फ्रांस से. हमने राफेल खरीदे।. लेकिन अंदर टेक्नोलॉजी नहीं बताई इन्होंने.
अपग्रेड करने के लिए। इजराइल हमें आयरन. डोम दे रहा है जिससे हम इस्तेमाल कर सकते. हैं और भविष्य में अगर हमारे कोई हमला. करेगा तो हम मजबूत रहेंगे। हमारी इॉनमी पे. इतना असर नहीं आएगा क्योंकि उससे $4 में. ही हम इंटरसेप्ट कर लेंगे।. तो ये क्यों है कि इजराइल हमारा सच्चा. दोस्त है। जबकि हम इजराइल के खिलाफ स्टैंड. भी ले लेते हैं। इजराइल के खिलाफ बयान दे. देते हैं। हम पैलेस्टाइन से भी उतने अच्छे. रिश्ते रहे। हिस्ट्री भी हमारी पेलेस्टाइन. की तरफ इशारा करती है। देखिए शुभांकर आप. यह देखिए इजराइल की सिचुएशन क्या है. ज्योग्राफिकली और पॉलिटिकली और इंडिया की. सिचुएशन क्या है ज्योग्राफिकली और.
पॉलिटिकली हमारे साथ बांग्लादेश है. पाकिस्तान है अफगानिस्तान है. उनके साथ आसपास इजिप्ट है पेलेस्टाइन है. जॉर्डन है और बाकी देश आसपास सीरिया है ये. है तो वो पूरी तरीके से चपेट में है. इस्लामी कट्टरपंथी आतंकवाद उनके खिलाफ. प्रहार कर रहा है पूरी तरीके से इस्लामी. कट्टरपंथी आतंकवाद इंडिया के खिलाफ कर रहा. है। सो जो सबसे बड़ा ये इजराइल के लोग भी. मुझे पूछते हैं। बहुत लोगों ने मुझे पूछा. वहां के बुद्धिजीवी कि यार हमें समझ नहीं.
आता ये इंडिया के लोग इतना सोशल मीडिया पे. हर जगह सपोर्ट क्यों करते हैं? तो मैंने. लगता है इसमें दो चीजें हैं। एक है. सर्वाइवल इंस्टिंक्ट। इजराइलियों का जो. सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है जबरदस्त है। मुझे. लगता है इंडियंस का भी जो सर्वाइवल. इंस्टिंक्ट है जबरदस्त है। आतंकवादी हमला. होगा। मुंबई में 2611 हुआ। अगले दिन काम. कर रहे थे। डब्बे वाले हर जगह काम कर रहे. थे। ट्रेनें चल रही थी। सब कुछ नॉर्मल चल. रहा था। दूसरा यह जो आतंकवादी हमला होता. है जिस पर बीतती है वही समझ पाता है कि.
क्या हो रहा है। 2611 में भी इजराइली. यहूदियों को मारा गया कबाबार्ड हाउस में. साजिद मीर मेजर इकबाल लखवी वहां से फोन पर. कह रहे थे ये काफिर है इनको मारो।. तो जो विक्टिम हैं टेररिज्म के वही समझ. सकते हैं। तो मुझे लगता है इंडिया और. इजराइल का सबसे बड़ा कनेक्शन यह है कि. इस्लामिस्ट टेररिज्म दोनों ने भुगता है और. दोनों इसके खिलाफ जो है एकजुट काम करना. चाहते हैं। लेकिन खासियत तो यह है कि. जितनी भी मेजर चीजें इनके बीच में होती. हैं ये पब्लिकली अनाउंस नहीं करते। मैं.
आपको कह रहा हूं बार-बार। बहुत चीजें ऐसी. चल रही हैं। कोई बड़ी बात नहीं है कि आयरन. डोम ऑलरेडी हो यहां पर। इज़राइल क्या. बलूचिस्तान में कोई ऑपरेशन चला रहा है? मेरे पास एक थ्योरी आई थी कि ईरान और. पाकिस्तान दोनों को परेशान करने के लिए. इजराइल ने बलूचिस्तान में खूब पैसा दिया. है और आफ्टर ईरान उनका अगला टारगेट. पाकिस्तान है। क्योंकि वो जानते हैं. मुस्लिम वर्ल्ड में न्यूक्लियर पावर. पाकिस्तान के पास है जो देर सवेेर परेशान. करेगा उनको। तो उस लॉन्गर प्रोसीजर का ये.
जो हिस्सा है वो बलूचिस्तान के जरिए टैकल. करना चाहते हैं।. देखिए इसका तो दो ही लोग आपको बता सकते. हैं। या तो मोसाद या अननोन गन मैन। अभी. [हंसी]. वही लोग हैं बता सकते हैं।. बट ये थ्योरी हो सकती है।. देखिए मैं एक चीज आपको बता सकता हूं. क्योंकि आप आपकी फिल्म में तो पूरा बलूच. ही बलूच है। आपने बलूचों पे अच्छी खासी. रिसर्च की होगी। आपके बलूच तो काफी हथियार. पा रहे थे।. यहूदी भी हैं।. हां एक सी [हंसी]. यहूदी भी है। हां। और फिर लेकिन मैं आपको. बताऊं कि इजराइल और पाकिस्तान के. डिप्लोमेटिक टाइस नहीं है। है ना? लेकिन. बहुत बार ऐसा देखा गया है कि इजराइल के.
रास्ते एयरक्राफ्ट जा रहा है जा रहा है जा. रहा है और वो इस्लामाबाद और लाहौर में. लैंड करता है। कई बार ऐसा देखा गया कि. पाकिस्तान से कुछ लोग हैं वो दुबई के. रास्ते यूएई के रास्ते इजराइल गए। कई ऐसे. लोग हैं तो जर्नलिस्ट पिक्चर में भी देखा. लोग हैं।. ऐसा हो रहा है।. वो पिक्चर में वो जो आपने ये लगाया था. शबाज शरीफ का। [हंसी]. अब ओवर्टली और कोवर्टली क्या चीजें हो रही. है ये मैं आपको नहीं कह सकता। हम्म।. लेकिन एक चीज तो तय है कि इजराइल की. पाकिस्तान को लेकर जो नीति है वो बहुत.
बदली है और ये मैं खुद मैंने देखा है। आज. से करीबन 10-12 साल पहले. एक इजराइल के राजदूत दिल्ली में थे। मैं. उनका इंटरव्यू कर रहा था और मैंने. पाकिस्तान पे एक सवाल पूछा टेररिज्म को. लेकर। वो नाराज हो गए। वो खड़े हो गए और. ऑलमोस्ट वॉकआउट कर दिया। तो मैंने बोला. क्या हुआ? बोला नहीं नहीं मुझे पाकिस्तान. पे बात नहीं करनी। आप पाकिस्तान पे क्यों. पूछ रहे हैं? इंडिया इजराइल पे पूछिए।. एकदम नाराज हो गए। और आज रूए नज़ार है जो. इजराइल के राजदूत यहां है। तो अचानक मैं. इंटरव्यू कर रहा था। मैं गाज़ा पे कर रहा. था, ईरान पे कर रहा था। मेरा पाकिस्तान पे.
कोई इंटेंशन नहीं था। तो मैंने अचानक पूछा. एक पाकिस्तान पे आखिरी सवाल। और देखो ये. ज्ञात नहीं था कि वो ऐसा जवाब देंगे। तो. मैंने बोला देखिए इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन. फोर्स बन रही है गाज़ा के लिए। ट्रंप ने एक. बोर्ड ऑफ पीस भी बनाया है और उसमें. पाकिस्तान को न्योता दिया है कि पाकिस्तान. के आसिम मुनीर गाज़ा में अपनी फौज भेजें।. आपका क्या मानना है? तो इजराइल के राजदूत. ने बोला हम बिल्कुल यह अलव नहीं करेंगे कि. पाकिस्तान की आर्मी गाजा आए। बिल्कुल ऐसा. नहीं होगा। तो मैं दो मिनट के लिए हक्का. बक्का रह गया कि इजराइल हमारी चलो.
मानसिकता है कि वो आतंकवाद के खिलाफ. रहेगा, पाकिस्तान के खिलाफ रहेगा। लेकिन. पब्लिकली वो पाकिस्तान पे कभी कमेंट नहीं. करता। आप देख लीजिए पिछले 15 साल, 20 साल, 30 साल। तो पहली बार रूबी नज़ार ने मेरे. इंटरव्यू में बोला कि हम बिल्कुल ये. एक्सेप्ट नहीं करेंगे। और फिर बातचीत भी. हुई है। इंटरनली बहुत चीजें शेयर होती. हैं। मुझे लगता है कि मोसाद जो है या वहां. की जो इंटेलिजेंस है इंडिया के साथ शेयर. करती होगी चीजें पाकिस्तान के बारे में।. आप देखिए ना जब से 7 अक्टूबर का हमला हुआ. 2023 में एक चीज आपने नोटिस की होगी कि. हमास के लोग बार-बार पाकिस्तान जा रहे.
हैं। बार-बार वहां पर हमले हो रहे हैं. इंडिया में। लेकिन हमास के लोग जो है वहां. पर जा रहे हैं। सिर्फ कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और खैबर पतूना नहीं वो पीओके. भी जा रहे हैं। इनफैक्ट मैं आपको बताऊं. पहलगाम की घटना जब घटी उसके करीबन एक या. [हंसी] दो महीने पहले हमास के लोग पीओके. में थे लश्कर और जैश के साथ पब्लिक इवेंट. किया। इसके पोस्टर हैं। इसके वीडियो हैं. और साथ में बोला कि हम जिहाद लड़ेंगे। ये. क्या कहलाता है कि कुछ तो कोलैबोरेशन है. आसपास। वो कोई रेलेवेंस जो है इंटरनेशनल. टेरा ग्रुप्स आपस में कर रहे हैं। और एक.
इजराइल के एक बहुत बड़े सिक्योरिटी के. अधिकारी हैं। वो दिल्ली दौरे पे आए थे. डोवाल साहब से मिलने के लिए।. वो मुझे डिनर पे मिले. हम. और मेरी बातचीत हुई और ये मुझे लगता है. फरवरी या मार्च की घटना है 2025 की। और. उन्होंने मुझे बोला कि आदित्य बी वेरी. केयरफुल। तो मैंने बोला क्या हुआ? बोला नो. इंडिया नीड्स टू बी वेरी केयरफुल। इंडिया. को बहुत सावधान रहना पड़ेगा। तो मैंने. बोला क्या? बोला आने वाले हफ्तों में कुछ. बड़ा होने वाला है।. बोला क्या होने वाला है? बोला मुझे नहीं. पता बट कुछ तो होने वाला है। एक महीना हुआ.
और पहलगाम की घटना हुई और ऑपरेशन सिंदूर. हुआ और उसके बाद अगस्त के महीने में मैं. जेरूसलम गया। मुझे नितिन याू ने बुलाया एक. मीटिंग के लिए। मेरे साथ 10 और भारतीय. पत्रकार थे। मैंने नितिन याू से पूछा कि. क्या इजरली हथियार ऑपरेशन सिंदूर में. इस्तेमाल हुए थे? तो नितिन याू ने मुझे. बोला देखिए इसके बारे में तो मैं कुछ नहीं. कह सकता लेकिन मैं एक चीज जरूर कहूंगा कि. इंडिया को जितने भी हथियार हमने आज तक दिए.
हैं वो ऑपरेशन सिंदूर में बहुत कामयाब हुए. हैं।. तो ये है इंडिया और इजराइल की कहानी। आपने. पहले भी देखा कि जब. बालाकोट होता है, स्पाइस बम गिराए जाते. हैं बालाकोट में। वो कहां से आए? वो. इजराइल से आए। तो इजराइल और इंडिया का जो. डिफेंस कोपरेशन है या सिक्योरिटी. मैकेनिज्म है वो जितना हमें दिख रहा है. उससे हजार गुना ज्यादा है। हमारे राफेल. गिरे थे देखिए मुझे नहीं लगता क्योंकि. राजेश ने भी क्लेम किया ये बात बीइंग अ.
जर्नलिस्ट उन्होंने क्लेम किया कि दो-तीन. उनके पास कहीं उड़तीउती खबरें आई थी या. फोटो आई थी। हालांकि ऐसे किस कोई. सार्वजनिक वीडियोस नहीं आए। जैसे. पाकिस्तान में जितना हमने ठोका था वो सब. वीडियोस में दिख रहा था।. देखिए मुझे लगता है कि हम आजकल के युग में. चीजें छिपा नहीं सकते।. हम. सोशल मीडिया इतना एक्टिव है और लोग हर जगह. कैमरा लेकर चले रहे हैं। तो अगर हमें कुछ. छिपाना होता या दिखाना नहीं होता तो मुझे.
लगता है चीजें तो बाहर आती कहीं ना कहीं. सोशल मीडिया पे।. हम्म।. तो हमारे यहां भी तो पाकिस्तान परस्त बहुत. सारे हैं।. बहुत ऐसे लोग हैं। तो मुझे ऐसा लगता है कि. ऐसा बताया गया था कि तीन एयरक्राफ्ट थे और. दो ड्रोंस थे जो गिराए गए लेकिन तथ्य. सामने नहीं आए। अब मैं नहीं कर रहा कि. गिराए गए या नहीं गिराए गए। क्योंकि मेरे. पास तथ्य नहीं है। अगर तथ्य होंगे तो मैं. बोलूंगा। ऐसा बताया गया था कि राफेल था या. एक आई थिंक मिराज 2000 था और एक मेक था।. ये गिराए गए थे और दो ड्रोन थे। लेकिन जब. तक तथ्य नहीं आएंगे जब तक बताया नहीं. जाएगा जब फ्रांस ने भी खुद बोला कि हमको.
पता नहीं है या ऐसा कुछ नहीं हुआ है। तो. जब तक ऐसा नहीं आएगा तो तब तक तो. प्रोपगेंडा माना जाएगा। तो मुझे लगता है. लेकिन अगर गिराए भी गए हो 2 मिनट के लिए. मान लिया जाए।. तो वो हमले के लिए ही तो है। वो गिरने के. लिए ही तो है। मतलब वो नेशनल म्यूजियम जो. इंडिया का है उसमें दिखाने के लिए तो है. नहीं। आप देखिए ना ट्रंप क्या करता रहा? एक साइकोलॉजिकल गेम खेलता रहा इंडिया से।. 70 से अधिक बार उसने बार-बार प्रेस. कॉन्फ्रेंस में बोला कि मैंने सिक्स वार. कराया इंडिया पाकिस्तान के बीच में। उसको. कोई हिस्ट्री नहीं पता। इंडिया पाकिस्तान.
में क्या युद्ध है, क्या आतंकवाद हो रहा. है? उससे कोई मतलब नहीं। वो कह रहा है. मैंने सिक्स वार करा है। मैंने न्यूक्लियर. वॉर जो है बचाया है। और उसके बाद वो एक. लाइन बार-बार कहता था छह जेट गिरा दिए. हैं। जो वो देश का नाम नहीं बोलता था। वो. कहता था छह गेट जेट गिरे हैं। फिर कहता था. सात जेट गिरे हैं। अब उसका लेटेस्ट था 12. 13 जेट आज तक गिरे हैं। अब मुझे एक सवाल. का जवाब दीजिए शुभांकर। 40 दिन जो है. युद्ध चला. हम. अमेरिका के बीच में और ईरान के बीच में. कितने अमेरिका के जो है फाइटर जेट गिरे?
कितने रडार जो है उनके तबाह हुए।. कितने एवक्स जो हैं या जितने भी उनके. एयरफोर्स का साजो सामान है वो गिरा। मैं. एस एन इंडियन सैल्यूट करता हूं कि जैसा. उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन अपने कर्नल के. लिए एयरमैन के लिए किया कोई देश ऐसा नहीं. कर पाता करता भी तो शायद सफल नहीं होता. लेकिन जिस तरीके का उन्होंने वो रेस्क्यू. किया अद्भुत मैं एज अ मिलिट्री टू. मिलिट्री एज अ समबडी हु कवर्स मिलिट्री वै. क्लोजली आई सल्यूट दैट लेकिन ट्रंप का ये. बार-बार इंडिया को प्रेशर टैक्टिक्स करना.
कि भाई मैं ट्रेड डील तभी करूंगा अगर आप. मुझे नोबेल प्राइज देंगे ये करेंगे ये तो. मतलब ये बचकानी हरकतें हो हो गई। मुझे. नहीं लगता कि इन इंटरनेशनल डिप्लोमेसी. ईरान ने अमेरिका के दांत तो खट्टे किए. हैं।. किए हैं? बिल्कुल किए हैं।. जबरदस्त किए हैं।. क्योंकि अगर आप इस धमकी पर आ गए कि आज रात. सब मिटा दूंगा मैं। इसका मतलब आप बहुत. डेस्पेरेट थे कि वॉर रुक जाए। बहुत नुकसान. होगा।. देखिए ईरान भी जो शिया लोग हैं ना वो. फाइटिंग कौम है।. पर्शियन कौम. परर्शियन कौम जो है वो फाइटिंग कौम है।. उनकी सिविलाइजेशन है। आप ऐसे नहीं कर सकते. कि भाई मैं दो मिनट में सिविलाइजेशन खत्म.
कर दूंगा। और ये जो ट्रंप का ट्वीट भी आया. था कि आज रात जो है सिविलाइजेशन खत्म हो. जाएगी ये हो जाएगी। यह बकवास था। यह एक. नैरेटिव सेट कर रहे थे क्योंकि उनको पता. था कि उनके पास ऑप्शन ज्यादा नहीं है।. उनको एक सीजफायर करना पड़ेगा। डेस्परेट थे. ट्रंप। मतलब उनके पास कोई ऐसा सशन नहीं. था। तो इसलिए उन्होंने एक सिचुएशन बनाई. नैरेटिव और लोगों लगे। अरे न्यूक्लियर वॉर. होगा। अरे सिविलाइजेशन खत्म हो जाएगी।. क्या अमेरिका न्यूक्लियर वेपन करेगा? हिरशिमा नागासाकी के विजुअल्स लोगों के. याद में आ गए कि ऐसा हो सकता है। तो.
इमीडिएटली 12 घंटे बाद उन्होंने बोला अब. सीसपायर हो गया। भाई खत्म हो गया। ऐसा कुछ. नहीं होगा। तो मुझे नहीं लगता. आपको लगता है कि यह वॉर सीज फायर में. जाएगी।. देखिए सीज फायर तो चल ही रहा है अभी लेकिन. नहीं 14 दिन का सीज फायर है।. 14 दिन का सी. क्या 14 दिन टिकेगा और क्या उसके बाद वॉर. रुकेगी? मुझे नहीं लगता कि ऐसा कोई बहुत बड़ा. कंसेंस हो सकता है। क्योंकि आप डिमांड्स. देखिए।. हम. ईरान कहता है कि सबसे पहले आप गारंटी. दीजिए कि आप आगे कभी हमला नहीं करेंगे. हमारे ऊपर।. ईरान कहता है कि जितना भी आपने आज तक हमें.
डिस्ट्रॉय किया है इसके लिए कंपनसेशन. दीजिए हमें। और ईरान कहता है कि स्ट्रेट. ऑफ ऑलमोस्ट जो है आज से हमारा वहां पर. ईरान का डोमिनेंस रहेगा और ओमान के साथ. मिलके हम वहां पर एक जो है दुगना लगान. लेंगे आपसे। वहां पर आपको टोल टैक्स देना. पड़ेगा। 2 मिलियन टोल टैक्स देना पड़ेगा. हर शिप को। और जितने भी शिप आए अमेरिका. आए, यूरोप आए, इंडिया आए, जितने भी आए. उनको देना पड़ेगा और ओमान और ईरान आपस में. वो बांटेगा। क्या अमेरिका क्या इजराइल कभी.
यह मानेगा? और दूसरी तौर पर अमेरिका और. इजराइल कहते हैं कि आप गारंटी दीजिए ईरान. कि आज आगे आप कभी न्यूक्लियर जो है. यूरेनियम में एनरचमेंट नहीं करेंगे। कुछ. नहीं होगा। आप गारंटी दीजिए। आपका जो. बैलस्टिक मिसाइल का पूरा प्रोग्राम है. इसको पूरी तरीके से खत्म करना पड़ेगा।. तहसनहस करना पड़ेगा। क्या ईरान कभी ये. मानेगा? क्या उनको अपनी सिक्योरिटी का ये जिक्र. नहीं करना। अब ये आप कह सकते हैं कि. पब्लिक पोश्चरिंग कुछ और होती है और. डिप्लोमेटिक चीजें अलग होती है। जब आप. बातचीत की मेज पे आते हैं तब चीजें सीरियस.
हो जाती है, अलग हो जाती हैं। तो उसमें. कुछ चेंजेस हो सकती हैं। लेकिन पहले तो. मैं पाकिस्तान को कैपेबल नहीं समझता कि वो. ऐसा कोई सीरियस डायलॉग या कंसेंस ला सकते. हैं। और उसके बाद भी जो. सीरियसनेस हमने उस ड्राफ्ट ट्वीट के बाद. तो मेरा [हंसी] मैंने कहा यार क्या ही. शरीफ. शबाज शरीफ एक आमिर खान की मूवी आई थी गजनी. जी. उसमें एक्टिंग सुनील ग्रोवर ने एक्टिंग की. थी. हाय तो मुझे वो शबाज शरीफ ही लग रहे थे कि. मतलब आप इतनी ऐसी एक्टिंग मत करो कि आप.
पकड़ जाओ। देखिए एक्टिंग में मुझे एक. वाक्या याद आया। अगर आपके पास समय हो तो. मैं आपको बताऊं कि आई थिंक 370 हुआ था तो. मुझे किसी एक पत्रकार ने कांटेक्ट किया. WhatsApp पे। बोला मैं लंदन से हूं।. टेलीग्राफ में हूं और मैं उस वक्त कश्मीर. में था तो इंटरनेट मिल नहीं रहा था। तो. मैंने उसको बोला यार इंटरनेट नहीं है। मैं. बात नहीं कर सकता। तो बातचीत नहीं हुई।. उसके बाद गलवान की घटना घटती है। तो गलवान. की घटना के अगले दिन उसने मुझे कांटेक्ट. किया WhatsApp पे कॉल किया और थोड़ा मैं. एक्सीडेंट जो था वो पंजाबी टाइप था। बोला.
मैं कुछ तो नाम बोला और बोला मैं लंदन से. हूं। हमारी मुलाकात हुई है कई साल पहले।. हम प्रेस क्लब में मिले हैं। लेकिन बातचीत. नहीं हुई तो बड़ा अच्छा लग रहा है आपसे. बात करके। तो मैं यह गलवान के बारे में. पूछना चाह रहा था क्या हो रहा है? इंडियन. आर्मी क्या ट्रूप मूवमेंट कर रही है वहां. पर? माउंटेन डिवीजन भेजा जा रहा है। कब. भेजा जाएगा? वहां पर कहां पर होगी. डिप्लॉयमेंट? कुछ चीजें आप मेरे को बता. रहे हैं। तो मैंने बोला मुझे पहले तो. मैंने बात की। फिर मुझे लगा कुछ गड़बड़. है। तो मैंने उसको सिंपल बोला। मैंने बोला. देखो यार आपको भी पता है ये मोदी सरकार. कैसी है। कुछ नहीं बताती। कुछ बस प्रेस. रिलीज इशू करती है। कुछ ये नहीं बताते।.
कुछ चीज लीक ही नहीं होती। तो बोला चलो. ठीक है आप कुछ पता कर लो। अगर कुछ पता. चलेगा मैं कल फिर से फोन करूंगा। मैंने. इमीडिएटली आईबी को और डिफेंस इंटेलिजेंस. एजेंसी को फोन किया और यह नंबर दिया। तो. मैंने बोला कुछ शक हो रहा है कुछ गड़बड़. है। क्योंकि मैंने साउथ एशिया ब्यूरो चीफ. को फोन किया टेलीग्राफ के। और बोला ये नाम. का बंदा काम करता है। बोला नहीं ऐसा तो. कोई नहीं है। तो मुझे लगा कुछ तो गड़बड़. है भाई। तो मुझे आईबी और इन ने बोला कि. अगली बार कॉल आए तो आप रिकॉर्ड कीजिएगा।. तो मैंने बोला ठीक है। तो अगली बार कॉल. आया तो बोला सेम बातचीत हुई क्या हो रहा.
है? कैसा हो रहा है? तो मैंने यार कुछ. नहीं बता रहे। मैंने बड़ी कोशिश की। मोदी. सरकार कुछ बता ही नहीं रही। क्या हो रहा. है? कैसे जो पब्लिकली अवेलेबल है वही हो. रहा है। तो मैंने ये रिकॉर्ड कर लिया।. रिकॉर्ड करके मैंने दिया। फिर मेरे को. बताया गया कि ये आईएसआई का बंदा है कराची. से। जो ये जर्नलिस्ट को और यह खासकर आर्मी. के लोगों को फोन करता है। क्या करता है? अगर कोई मेजर है तो वो उसके कर्नल की. एक्टिंग करेगा। ऑलराइट अभिजीत आई एम योर. कर्नल स्पीकिंग। गिव मी दोज़ फाइल्स. इमीडिएटली सेंड इट टू मी ऑन WhatsApp इन 5.
मिनट्स सेंड इट टू मी ऑन WhatsApp ताकि. चीजें लीक हो ये हो। अभी तक नहीं हुआ है।. लेकिन वो बोला कि खासकर वो आर्मी के लोगों. को पूरे कश्मीर में पंजाब में फोन करता. रहा है चीजें निकालने के लिए। और पहली बार. है कि ये जर्नलिस्ट को फोन कर रहा है। तो. उन्होंने वो नंबर और वो आवाज को मैच किया. और बोला ये कराची से आ रहा है। तो मैंने. बोला नंबर ये तो इंडियन नंबर है। बोला ये. नंबर क्या हुआ है? पाकिस्तान हाई कमीशन. में कोई इंटेलिजेंस का बंदा काम करता था।. उसने कहीं चांदनी चौक से या कहीं से ये. नंबर लिया है। और इस पे नंबर सेल सर्विस. से तो नहीं चल रही। बट WhatsApp चल रहा.
है।. हां। हां एक बार WhatsApp लॉग इन कर लीजिए. तो कहीं भी जाइए चलता रहता है।. चलता रहेगा और उसके बाद मैंने अगले एक साल. तक दो साल तक कई ऐसे पत्रकारों को देखा कि. उनके पास भी ये कॉल आए तो देखिए क्या. साजिश होती है।. हमारे तो कई पत्रकार हैं भी जो मुझे याद. है एक दो को तो हमने बैंड बजाई थी ऑपरेशन. सिंदूर में उन्होंने छाप दिया था कि तीन. राफेल गिर गए हमारे. हां. बहुत मिसइफार्मेशन हुआ था। इनफैक्ट वो रात. एक रात थी जिसमें पूरे इंडियन मीडिया ने. खासकर टीवी चैनलों ने. बहुत शर्मनाक हरकत की। अरे, मुझे लगता है।. कराची पोर्ट पर जो कब्ज़ा किया था?
मतलब कराची पोर्ट पे हमला कर दिया, कब्ज़ा. कर दिया। आसिम मुनीर को अरेस्ट करा दिया।. पाकिस्तान का जो है पूरा कब्ज़ा कर दिया।. क्या बेवकूफी वाली बातें हैं। मतलब आप. फैक्ट चेक तो करिए। ऐसा हुआ कि कुछ लोगों. ने ट्वीट कर दिया।. तो वो ऑटोमेटिकली ट्वीट को कॉपी करके. उन्होंने चला दिया।. तो जो नहीं जानते क्योंकि मैं असाइनमेंट. से बड़े क्लोजली काम किया मैंने।. दो सोर्सर्सेस होते हैं खबर आने के। एक आप. जैसे रिपोर्टर्स रहते हैं. जैसे वॉर के टाइम में मैं आपको शिव को. अच्छे से फॉलो करता हूं कि ये दोस्त. क्योंकि मुझे वीडियोस बहुत सारे बनाए थे।. सो मुझे पता था यहां से आ रही इनफेशन तो.
सही आ रही होगी।. असाइनमेंट की मजबूरी अलग होती है। उसे 24. घंटा काम करना तो वो हैशटग सर्च करते हैं।. बिल्कुल. और वॉर के टाइम में सबसे ज्यादा. मिसफार्मेशन होती है।. और जो आता है सीधे. और जो आता है उसको सीधे मतलब. यूक्रेन वॉर में तो 6:00 बजे शुरू होती थी. वॉर. हम. मैं जिस टीवी चैनल पे था और रात को 12:00. बजे तक चलती थी। तो 6:00 बजे क्यों की में. बम गिरने लगते थे. और हमारे राजेश पवार जुड़े वो कह रहे भाई. मैं आराम से ब्रश करके निकलना यही टेलीवि. में हुआ मेरे साथ मैं एक महीना टेलीवि में. रहा और मुझे बार-बार बोलते रहे अरे ये.
वीडियो आया है वहां तो तबाही मच गई है ये. हो गया मैंने बोला भाई कुछ नहीं है मेरे. पीछे हां सायरन बज रहे हैं मिसाइलें आ रही. हैं अगर जैसे 100 मिसाइलें आ रही है तो. दो-तीन तो नीचे गिर रही है इंपैक्ट हो रहा. है लेकिन ऐसा नहीं कि मिसाइल आके नीचे गिर. रही है उसके फ्रेगमेंट्स गिर रहे हैं उसकी. डेब्यूज गिर रही हैं तो जहां-जहां होता था. मैं जाके वहां से रिपोर्ट करता था लेकिन. बहुत सारे एआई वीडियोस हर जगह कि बहुत. तबाही मच गई है। यह हो गया, वो हो गया। तो. अब चक्कर क्या है कि आजकल के युग में जंगे. तो हो रही हैं लेकिन असली जंग नैरेटिव. वॉरफेयर भी है। तो इसलिए एआई वीडियोस का.
इस्तेमाल हो रहा है। और ये हमारे लिए भी. बहुत प्रॉब्लम होने वाली है इसकी। क्योंकि. एआई में फैक्ट चेकिंग आप कितना जल्दी. करें? क्या रियल टाइम में आप कर पाएंगे? ये बहुत बड़ा सवाल है।. फैक्ट चेकिंग छोड़ो। मैं एनडीt में नौकरी. कर रहा था। मतलब मैं मानता हूं मीडिया. वाले थोड़े समझदार होते हैं।. हम. एक दिन पीसीआर ने मुझे कॉल किया। मैं अपना. शो कर रहा था कचहरी। तो उसने मुझसे कहा कि. सर ये आजकल आप क्या वीडियो बना रहे हो? आपने वीडियो बना दिया कि ईरान ने उसको मार. दिया है, यह कर दिया, वो कर दिया। मैंने. कहा भाई मैंने कब बनाया? तो मुझे रियलाइज हुआ कि तीन चार ऐसे पेजेस. थे YouTube के जो दिन भर ऐसे वीडियोस बना.
रहे थे।. और वो डीप फेक वीडियोस मीडिया में काम. करने वाला बंदा यकीन कर रहा था जो पीसीआर. को मैं इंटेलिजेंट मानता हूं। जो पीसीआर. चीफ होता है। तो अगर वह नहीं पकड़ पा रहा. कि यह ओरिजिनल नहीं एआई वीडियो है डी फेक. है। तो आई एम श्योर लोग जो हैं ग्राउंड पे. वह तो यकीन मानते होंगे। आप पीसीआर चीफ को. छोड़ दीजिए। आप पत्रकार को छोड़ दीजिए।. मैं एक स्टेप आगे जाता हूं। अभी जब लाल. किले पे हमला हुआ उसके बाद एक इटालियन. पत्रकार है। उनका मैंने इंटरव्यू किया।. उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद और बालाकोट के ऊपर. एक किताब लिखी थी। अब मैं जब उनका.
इंटरव्यू कर रहा था। वो टेलीकास्ट हुआ। सब. कुछ गया। इसके करीबन एक महीने दो महीने. बाद मेरे को इंडियन आर्मी के कुछ मेरे. मित्र वीडियो भेजते हैं कि भाई तुमसे. उम्मीद नहीं थी यह तुमने क्यों किया? तो. मैंने बोला क्या हुआ भाई? बोला ये वीडियो. देखो शर्म आनी चाहिए तुम्हें। तो मैंने. देखा उसमें मेरी ही आवाज का डीप फेक बना. हुआ है उस इंटरव्यू का। और मैं कह रहा हूं. उस डीप फेक में एआई जनरेटेड वीडियो ये. पाकिस्तान के किसी महारथी आईएसआई वाले ने. बनाया था कि इंडियन आर्मी में रिबेलियन हो.
गया है और इंडियन आर्मी के जो मुस्लिम जो. सोल्जर्स हैं वो रिबेल कर रहे हैं. एटसेट्रा कर रहे हैं। ये है तो मैंने बोला. भाई ये तो मेरी आवाज नहीं है। तुम समझ. नहीं पा रहे। बोला यार मुझे तो एकदम रियल. लगा।. मेरे को. एक का मेरे को याद आया अफगानिस्तान में. गया था।. मैं पहला जर्नलिस्ट था जो अफगानिस्तान गया. था तालिबान रिजीम आने के बाद। देखा मैंने. और. अनस हकानी के साथ तो. हां धागे लगा रहे थे।. हां तो अनस हकानी जी पता नहीं कैसे वो. हमारे क्रिकेट की दुनिया के फैन निकले।. मुझे नहीं पता मतलब मुझे जाकर पता लगा वो.
कौन है। मुझे नसीब साहब बुलाए थे जो. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सीईओ हैं।. तो वो मुझे वहां तक ले गए थे और बड़ा. अच्छा मेरा अनुभव रहा क्योंकि वो एक अलग. दुनिया है। मैं हमेशा कहता हूं पैसों से. आप इजराइल जा सकते हो, अमेरिका जा सकते. हो, इंग्लैंड जा सकते हो। आप अफगानिस्तान. अफगानिस्तान और ईरान भी मुझे. हां अफगानिस्तान ईरान आप सिर्फ पैसों से. नहीं आ सकते. आपको जुगाड़ चाहिए तो मैं जुगाड़ से गया. था. तो आर सकारी ने मुझसे पूछा भी कि आप अच्छे. वीडियो बनाते मेरे को लगा अच्छा गड़बड़. होती तो नहीं क्या नहीं मेरा होता बट अभी. मेरे को अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के.
सीईओ का मैसेज आया. कि यार शुभांकर ये आपने क्या वीडियो बनाया. हमारे ऊपर. गलत बात. अब कैसे मतलब यार ये मैं देखा वो एआई. वीडियो था [हंसी] मैंने कहा यार नसीब भाई. या सो आई थिंक ये आने आने वाले टाइम में. तो वॉरफेयर को तो और बहुत गंदा करने वाला. है।. अभी ही कर रहा है ऑलरेडी। अभी मुझे लगता. है कि एआई मैं बहुत सारे लेक्चर्स देने. जाता हूं आर्मी, पैरामिलिट्री एंड सिक के. साथ। तो मैं बार-बार कहता हूं कि हमारा. नैरेटिव वॉर, हमारा साइबर वॉरफेयर, हमारा. साइकोलॉजिकल वॉरफेयर हमें पहले से प्रीएम.
करके तैयारी करनी पड़ेगी। हम वेट नहीं कर. सकते कि हमारा जो एनिमी है क्या करेगा? उसके बाद हम रिएक्शन करेंगे। इसमें हम. मारे जाते हैं।. चलो मैं इस पे एक सीरियस सवाल करता हूं. आपसे। ऑपरेशन सिंदूर में हमने पाकिस्तान. को ठोका। हम्म।. लेकिन क्या नैरेटिव वॉरफेयर में, इनफार्मेशन वॉरफेयर में, फेक प्रोपेगेंडा. में हम उनसे पीछे रह गए थे? मुझे नहीं लगता। मैं इसलिए ये कह रहा हूं. क्योंकि मैं इसका कंपैरिजन करता हूं. बालाकोट के टाइम से और उसका कंपैरिजन करता. हूं सर्जिकल स्ट्राइक के टाइम से।. सबूत।. उस वक्त सबूत नहीं था।.
उस वक्त कौवा था। उस वक्त इंटरनेशनल. मीडिया उनके साथ थी, सब कुछ था। इस बार. सबूत भी था, इस बार हमारे पास एज भी था।. और हमने जिस तरीके से पाकिस्तान में घुस. के उनको ठोका वो आज तक नहीं हुआ। और हमने. खुद देखा मैं एक हफ्ते तक सोया नहीं हूं।. मैंने एक हफ्ते तक दिन रात मेहनत की है।. मैं पूरा वो कर रहा था। मेरे करीबन 5 लाख. फॉलोवर्स बढ़ गए सोशल मीडिया पे उससे। वो. अलग बात है। लेकिन काम किया, मेहनत की तब. हुआ। और मैं आपको इसका भी किस्सा सुनाता. हूं। बार-बार कहा जा रहा था कि पहलगाम की.
घटना घटी। अब हमला होगा। अब हमला होगा और. मेरी ऐसी मतलब रिचुअल है कि मैं 1 2:00. बजे रात को सोता हूं। क्योंकि अब चक्कर. क्या है? मैं फॉरेन पॉलिसी और नेशनल. सिक्योरिटी कवर करता हूं। ट्रंप भाई साहब. जब से आए हैं तब रात को ही होता है। रात. को ही होता है, सुबह होता है तो नींद तो. एकदम खत्म। आज मैं आपको कह रहा हूं अभी. क्या बज रहा है? रात के 10:30 बज रहे हैं।. हम कर रहे हैं ये। मैं ऑफिस सुबह 4:30 बजे. गया था. और 4:30 5:00 बजे से बुलेटिन स्पेशली. हमारा ल्च हुआ और तब से हम ट्रंप का पूरा. कर रहे थे और अब मैं आपका पॉडकास्ट करने.
के लिए आया हूं। तो बात तो ये कि 1 2 बजे. आई थिंक वो 6 और 7 की रात थी मई की पिछले. साल। मैं बैठा हुआ था। दिव्या मेरे साथ थी. और मैं वो देखती रहती है कि अरे यार कब से. हो गए तुम मोबाइल पर लगे हुए हो। तो मैंने. कहा नहीं यार कुछ हो सकता है इसलिए मैं. देख रहा हूं। मेरा यह है कि मैं साइलेंटली. हर जगह ऑब्जर्व करता हूं। मैं बहुत सारे. पीओके के WhatsApp ग्रुप्स हैं उसमें हूं।. अब उसमें ज्यादातर उर्दू में बात होती है. तो समझ नहीं आता। कभी कुछ जरूरी होता है. मैं ट्रांसलेट कर लेता हूं। तो उसमें. अचानक वीडियो आने लगे और उसमें बॉम्बिंग. के वीडियोस थे। अचानक बोल रहा था कि कोई. इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड है पीओके में कोटली.
में। वहां हमला हो गया। कुछ हो गया। मुझे. लगा कुछ गड़बड़ा है और यह एग्जैक्टली 1:10. या ऐसा कुछ हुआ होगा।. तो मैंने इमीडिएटली मतलब मैं टीवी 9 में. था तो मैंने दो हमारे एडिटर्स थे आई थिंक. पारतोष और कार्तिक उनको फोन किया। बोला कि. भाई जागो मोहन प्यारे कुछ होने वाला है हो. गया हमला। तो पारतोष तो इमीडिएटली ये हो. गए। उन्होंने इमीडिएटली अपना बुलेटिन जो. है जारी कर दिया। और बहुत मुझे लगता है. टीवी ने आई थिंक वन ऑफ़ द फर्स्ट चैनल्स था. जिन्होंने ब्रेक किया है।.
हां, दे आर वॉर एक्सपर्ट्स वॉर. एक्सपर्ट्स। तो उसके बाद क्या हुआ? मुझे तो आज तक नौकरी इसी बात के लिए मिली. थी कि यूक्रेन वॉर चला। आप मैं आया यूपी. इलेक्शन कर करके. तो सीधे मुझे भेजा गया कि आप जाइए डिबेट. कीजिए।. तो फिर किसी ने कहा अरे अभी पहला दिन है।. अरे नहीं नहीं ये तो दो साल से कर रहे हैं. यहीं पे। नहीं ये खासियत है। टीवी चैनलों. में पहले बाम बिच्छू चलता था। उसके बाद. एंटरटेनमेंट चलता था। ये सब चलता था। फिर. पॉलिटिक्स सिर्फ चलता था। लेकिन अब जो है. फॉरेन पॉलिसी चलती है तो ये तो अद्भुत है।. हिंदी चैनल भी फॉरेन पॉलिसी करते हैं और. लोग टीवी बहुत जबरदस्त करता है।. बहुत करते हैं। तो अब ये घटना घटी 1 और.
1:30 बजे के बीच में। मैंने इमीडिएटली. Twitter पे ब्रेक किया कि मुझे लग रहा है. भाई काम हो गया है। जय माता दी। और उसके. बाद जैसे ही यह हुआ फिर हमको पता है क्या. हुआ। फिर इंडियन आर्मी का ट्वीट आ गया था. 2:00 बजे के आसपास और एक मतलब ना एक सटीक. उन्होंने प्रहार किया था। वीडियो रिलीज. किया था। यह सब हुआ। अगले दिन प्रेस. कॉन्फ्रेंस हुई। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में. बैठा हुआ था और अचानक बोला गया कि हमारा. हमला जो है 1:02 या 3 मिनट पे शुरू हुआ और. 1:28 पे खत्म हो गया।.
हम. मेरा ट्वीट आपको पता है कितने बजे का था? 1:29 का।. तो आई एम नॉट क्लेमिंग कि मैं पहला. पत्रकार था। मुझे सब पता था। मैंने कर. दिया, ये कर दिया। बट संयोग की बात है।. मतलब एज अ वॉर कॉरेस्पोंडेंट और एस समबडी. हु इस ट्रैकिंग सिचुएशन वेरी क्लोजली।. मेरे लिए मतलब बहुत अच्छा एक्साइटिंग चीज. है कि भाई आई वास ऑब्जर्विंग इट सो. क्लोजली मेरे को कोई रिवील नहीं कर रहा था. लीक नहीं कर रहा था कि अब होगा ये होगा. लेकिन द कोऑर्डिनेशन वास सो स्ट्रांग सो. एंड आई थिंक जो हमारा ऑपरेशन रहा जो. वीडियोस वहां से आए वाज़ अनपरेलल्ड अब.
इसमें आप जितना भी सवाल पूछो कि नैरेटिव. वॉर फेलियर है ये है। हां हमें लेसंस लर्न. करने हैं। हमें सीखना है। अभी भी मुझे. लगता है हम लोग स्ट्रांग नहीं है। अभी भी. मुझे लगता है कि जितने भी हमारे मंत्रालय. हैं ना होम मिनिस्ट्री, एक्सटर्नल अफेयर्स. मिनिस्ट्री, पीएमओ उसमें आपस में. कम्युनिकेशन का प्रॉब्लम रहता है जब. इवेंचुअलिटी हो जाती है, बम ब्लास्ट हो. जाता है। तो हमें नहीं पता कैसे रिएक्ट. करना है। आप देखिए हमें सीखना पड़ेगा जो. यूएस की सेंट्रल कमांड है, जो आईडीएफ है. या इवन ईरान है उनका कैसा प्रोपेगेंडा अभी.
रहा है पिछले 40 दिन से। हमें दोनों साइड. से सीखना पड़ेगा। रियल टाइम में दिन में. वो 50 ट्वीट्स, 50 वीडियोस, 50 आधी चीजें. उसमें गलत भी हो सकती हैं। वो डाल रहा है।. और मुझे याद है जब बालाकोट का हमला हुआ. मैं साउथ ब्लॉक के बाहर खड़ा हुआ था. डिफेंस मिनिस्ट्री के कि भाई कुछ तो पता. चले। अभिनंदन को वहां पर पकड़ लिया था। सब. कुछ हो गया था। बड़गांव में घटना घट गई. थी। मैं खड़ा हूं। कुछ तो बताओ। मैं. एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री फोन कर रहा. हूं। मैं डिफेंस मिनिस्ट्री फोन कर रहा.
हूं। मैं जेएन के पुलिस फोन कर रहा हूं।. मैं होम मिनिस्ट्री फोन कर रहा हूं। कोई. कुछ बता ही नहीं रहा।. और वहां अमित मेरे कौवे दिखा रहे थे।. हां। और इस बार भी एक चीज क्या हुई? जब. ड्रोंस आने लगे वहां से टर्किश ड्रोंस तो. यहां पर पहली बार क्या हुआ? मैं एक मैं. नाम नहीं लूंगा। मैं सीनियर पुलिस ऑफिसर. के साथ फोन में था और अचानक से पीछे से बम. धमाकों की आवाज आई और वो चिल्लाने लगा. फियर अंडर अटैक। फियर अंडर अटैक। मैंने. बोला क्या हुआ भाई बताओ? तो बोला कि अरे. अरे अटैक हो गया कुछ हो गया। तो मैंने. बोला अच्छा प्लीज टेक केयर बाद में बात. करते हैं। फिर पता चला कि भाई टर्किश.
ड्रोंस आए थे पहली बार और क्योंकि आर्मी. पुलिस को पता नहीं था क्या करना है तो. AK-47 लेके हर जगह धंधा धुंधन फायरिंग चल. रही थी। हर जगह ये हुआ। यह पंजाब में हुआ।. जम्मू कश्मीर में तो खासकर हुआ। बाकी. जगहों में हुआ। बट यह साइकोलॉजिकल वारफेयर. था कि उसमें एमिनेशन नहीं है। हम ड्रोन. भेज रहे हैं कि कभी भी कुछ भी हो सकता है।. और यह ट्रकिश ड्रोन कितना? ₹1000 का ₹2000. का ₹5000 का है और यह करके उन्होंने एकदम. एंड मोमेंट तक इवन सीज फायर हो चुका था।. उसके बाद भी ये लोग ड्रोन भेज रहे हैं।. अभी भी बीच-बीच में घटना घटती है कि बलून.
आता है, ड्रोन आता है। ये साइकोलॉजिकल. वॉारफेयर है।. ओके। एंड सेगमेंट में हम आ गए हैं।. धुरंधर 2 की रिसर्च के दौरान सबसे शॉकिंग. फैक्ट आपने क्या पढ़ा ज्यादा? देखिए अगर आप चाहते हैं कि धुरंधर तीन आए. तो ये मैं आपके पॉडकास्ट में तो रिवील. नहीं करूंगा। नहीं ऑनेस्टली ऐसे कोई प्लान. नहीं है धरेंद्र थ्री का बट मुझे लगता है. कि बहुत सारी ऐसी चीजें बट स्टिल समथिंग. जो आपको सरप्राइज कर गया गुस्सा दे गया. पढ़ते वक्त रिसर्च करते वक्त कि ये कि जूर. मिस्त्री एक कहानी है लेकिन इसके अलावा भी.
कई कहानियां हैं जो अभी तक सामने नहीं आई. हैं और हमारे ऐसे खुद के लोग हैं. जो वहां पर गए और वापस आए और मुझे लगता है. कि कई ऐसी कहानियां है जो आगे भी बताई. जाएंगी बहुत मतलब क्या मैं आपको एग्जांपल. दूं क्योंकि मुझे मुझे भी देखना है। मुझे. घर जाना है। मुझे कोई अरेस्ट ना कर ले।. केस ना कर दे मेरे खिलाफ। अ. हमारे बंदे वहां पर जाते हैं पाकिस्तान. में और करिश्मा कर जाते हैं। अब छोटा सा. मैं आपको उदाहरण देता हूं। मुझे अभी याद. आया कि 261 का आपने जिक्र किया। कश्मीर.
में एक आतंकवादी को पकड़ा जाता है लश्कर. का। यह 2611 के बहुत पहले की बात है और. वहां के जो आईजी हैं वह देख रहे हैं ओवरऑल. उसका इंटेरोगेशन चल रहा है लेकिन वो एकदम. कट्टर बनती है वो मान नहीं रहा ब्रेक नहीं. हो रहा फाइनली उसको 6 महीने के बाद ब्रेक. किया जाता है उसको बोलता है तू हमारे लिए. काम करेगा तो उसको छ से सात सिम कार्ड दिए. जाते हैं और बोला जाता है कि आप जाओ लश्कर. के लिए काम करो और उनको यह सिम कार्ड दे.
दो कि भाई यह किसी एक इंडियन कंपनी के हैं. आई थिंक Airtel का या किसी का है और कभी. इस्तेमाल करना हो कर सकते हैं। उन सारे. सिम कार्ड्स को ट्रैक पर लगाया गया और आई. थिंक एक साल बाद या 2 साल के बाद जब 2611. के लिए आतंकवादी आए वो वो सिम कार्ड लेके. वहां पहुंचे और यह कश्मीर के एक आईजी थे. जिन्होंने प्लांट किया था और जब सारी. कॉन्वर्सेशंस ट्रैक हो रही थी वो सैडफोन. पर सब नहीं हो रहा था वो उन नंबरों पर. ट्रैक हो रहा था लखवी और जितने भी यह सारे.
हैं उस पे कर रहे थे और तब जाके यह. एविडेंस इंडिया के पास सामने आया कि कैसे. साजिद मीर मेजर इकबाल लकवी ये फोन पे बात. कर रहे थे। ऑर्डर्स दे रहे थे पाकिस्तान. से। वरना तो यह जैसे मैंने पहना है ऐसा. पहन के सारे आतंकवादी आए थे। वो कहना चाह. रहे थे कि भाई ये तो हिंदू टेरर है। ये एक. धारणा बनाना चाह रहे थे। एक कवर था। उस. समय तो चल भी रहा था ये। उस समय चल रहा. था। कुछ ऐसे हमारे लीडर थे वो किताबें. रिलीज कर रहे थे इसको लेकर। तो मुझे नहीं. लगता कि ऐसी कैसी मानसिकता है। मुझे लगता.
है जब भी आतंकवादी हमला होता है। जब भी. देश पर प्रहार होता है। सबको एकजुट होना. चाहिए। यह तो बेसिक है। किसी भी देश में. ऐसा होना चाहिए। बट हमारे में मुझे नहीं. लगता कि क्या त्रासदी है कि यह नहीं. बोलेगा तो दूसरा बोलेगा। दूसरा नहीं. बोलेगा तो तीसरा बोलेगा। अनफॉर्चूनेट है।. आई होप दिस चेंजेस।. दो-तीन पीढ़ियों के पैसे तो आ गए होंगे. धरंदर की स्क्रिप्ट के बाद।. नहीं नहीं मेरा नहीं आया। मैं स्क्रिप्ट. राइटर नहीं था। फिर भी बहुत ही नहीं बहुत. ही मिनिमम अमाउंट है जो आप सुनेंगे तो. एकदम शौक हो जाएंगे। बट मैं पैसों के लिए.
नहीं गया था ऑनेस्टली। मैं हमेशा से चाहता. था कि अननोन गनमैन की जो कहानी है क्योंकि. तभी मैंने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई। मैं अगर. डॉक्यूमेंट्री नहीं बनाता तो हो सकता है. यह फिल्म भी ना आती या फिल्म आती तो किसी. दूसरे लहजे से आती। बट आई एम हैप्पी कि. ऐसा हो रहा है। आई रियली वांट कि ऐसे जो. अननोन हमारी स्टोरीज हैं रविंद्र मात्रे. का मैंने जिक्र किया या कुलभूषण का किया. या सर्वजीत का किया तो मेरा तो मन विचलित. होता है। जैसे सरपजीत की कहानी बहुत. दर्दनाक है।. अरे मैं कहानी से याद आया। ये मेरा पर्सनल.
रिक्वेस्ट आपसे है। ये आप आदित्य थर तक. जरूर पहुंचाइएगा।. जी. रविंद्र कौशिक के परिवार ने किताब लिखी. है।. हम. उसको पब्लिश नहीं किया है। उनके भतीजे हैं. जिनके नाम रविंद्र जी ने अपना एक लेटर. लिखा था. कि ये कहानी मेरी आगे ले जाएगा और. उन्होंने 15 16 साल दिए हैं उस कहानी को. निकाल कर जिसमें कई रॉ के अधिकारी उनके घर. गए। सारे लेटर्स हैं।. रविंद्र जी के बारे में सोशल मीडिया में. 90% जानकारी फेक है।. हम. उनकी कोई बेटी नहीं थी।. उनका एक बेटा था। हम्।. शायद अब इस दुनिया में नहीं है।.
उन्होंने पूरी कहानी बनाकर रखी है।. हम. और वह उसे एक फिल्म के तौर पर लाना चाहते. हैं।. कई सारे डायरेक्टर्स के नाम उन्होंने. बताए। मुझे हमेशा मैं जितने नाम उन्होंने. बताए ना जाने क्यों मेरे ज़हन में आया कि. ये शायद उस किरदार को न्याय नहीं कर. पाएंगे। क्योंकि धुरंधर देखने के बाद मेरे. लिए वो सिनेमा और था।. हम. मैंने एनिमल देखी थी। मुझे लगता था इससे. बड़ा कुछ नहीं हो सकता।. दिस इज़ पीक इंडियन सिनेमा। बाहुबली और. सालार और फिर एनिमल ये पीक मेले हम. धुरंधर देखने के बाद सब छोटे लग रहे थे।.
नहीं नहीं अच्छा कि आपने यह बताया मुझे. मैं अब तो यह आदित्य का कॉल होगा वह कैसे. आगे लेंगे क्या लेंगे क्योंकि अभी. क्योंकि कॉपीराइट उन्हीं के पास है।. अभी मैं बताऊं ये तो बहुत ही स्पेशल है।. ये मतलब ये आना चाहिए। मैं पर्सनली एफर्ट. लगाऊंगा कि आदित्य तक भी पहुंचे और आगे. फिल्म भी बने। लेकिन अभी ऐसा भरमार हो गई. है। स्क्रिप्ट राइटर्स से लेकर, डायरेक्टर. से लेकर बाकी एक्टर्स मुझे इतना मैसेज कर. रहे हैं कि भाई आदित्य दर से मिलवा दो।. कुछ कर दो। किसी अब मैं उनको बोल रहा हूं. कि भाई मैं फिल्म इंडस्ट्री का नहीं हूं।. मैं पत्रकार हूं। मेरा इस छोटा सा एक रोल.
था और वापस अपनी पत्रकार के किरदार में आ. गया हूं। बट मुझे लगता है कि रविंद्र. कौशिक की एक कहानी है जो पूरी तरीके से. सामने नहीं आई है। आनी चाहिए। वो कहानी. बहुत बड़ी है।. आनी चाहिए।. वो कहानी बहुत बड़ी है क्योंकि वो मेजर. रैंक तक ऑलमोस्ट पहुंच गए थे।. और उस कहानी में सबसे बड़ी बात वो गद्दारी. मुझे लगी जो कश्मीर से किसी ऑफिसर ने की. थी। जिसको रविंद्र ने एक्सपोज किया था।. रविंद्र अपनी गलतियों से थे। और मुझे ये. पता नहीं था कि रविंद्र का वो पहला ऑपरेशन. नहीं था। रविंद्र उससे पहले ईरान भेजे गए. हम. यस. रविंद्र ईरान ने पकड़े भी गए थे.
वहां मारे पीटे गए थे. फिर वहां से वह आए थे. और फिर बाद में वह पाकिस्तान डिप्लॉय हुए. बताइए. ये तो होना चाहिए बड़े पर्दे पर आना चाहिए. इनफैक्ट रविंद्र आखिरी बार शायद 1982 में. इंडिया भी आए थे. हम. अपने परिवार में शादी में. हम. वो पॉडकास्ट मेरे लिए बड़ा स्पेशल था उनकी. बहन का उनका और ओसबम था और वो पूरी कहानी. बड़े पर्दे पर मुझे लगता है सबसे कोई. न्याय कर सकता है. हम. तो आदित्य ही कर सकते मैं मेरा और कोई. लालच नहीं है। मेरा सिर्फ इतना लालच है कि.
रविंद्र कौशिक कहानी जाया नहीं होनी चाहिए. या. क्योंकि कॉपीराइट की उसे हर कोई बना नहीं. पाएगा और वह कहानी मैं टुकड़ों-टुकड़ों. में देखिए थोड़ी सी टाइगर में देख ली. थोड़ी सी एक. सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म आई थी मजनू. मजनू. उसमें दमिशन मजनू थोड़ी उसमें देख ली. थोड़ा सा हमने धुरंधर में देख ली. बट वो पूरी कहानी. रविंद्र कौशिक पे. रविंद्र कौशिक पे. होनी चाहिए. हां और उस उसमें तो एक्टर भी विक्की कौशल. रणवीर सिंह रणवीर कपूर जैसा कोई हो. हां. अबब्सोल्यूट सिनेमा सो मुझे लगता है वो.
आदितधर क्या कमाल एक गाने बना है भाई मतलब. वो पिक्चर देखकर अभी मधुर भंडारकर आए थे. मैंने मधुर भंडारकर ने आधे घंटे पिक्चर. में बात की अच्छा [हंसी]. अमेजिंग ही वास सो लाइक मतलब आप हर चीज़ से. बात कर सकते हैं।. लेकिन मैं एक चीज़ कहूंगा कुछ लोगों को यह. पसंद नहीं आएगा। जब धुरंधर पहली बार आई. इंडस्ट्री पूरी तरीके से शांत थी।. इंडस्ट्री में एक वर्ग है बहुत बड़ा वर्ग. है। जो नहीं चाहता था कि आदित्य दर. सक्सेसफुल हो। या चाहता था कि चलो भाई. फिल्म आ गई तो छोड़ दिया जाए। मेरे कई.
प्रोड्यूसर दोस्त हैं। क्योंकि मेरे पास. बहुत बार आता है कि आप इसमें मदद करिए, वो. करिए, यह करिए। तो एक प्रोड्यूसर दोस्त है. मैं बैठा हुआ था कहीं पर दिल्ली में तो. उन्होंने मुझे बोला ये आई थिंक 24 घंटे. बाद हुआ था तुरंदर के तो उन्होंने मुझे. देखो कितना बेवकूफ है लगभग 300 करोड़ लगा. दिए कुछ सोचा नहीं इसने कि यस ऐसा मार्केट. नहीं है अब थोड़ी ना लोग जा रहे हैं फिल्म. देखने के लिए मुझे तो लगता है 100 150. करोड़ भी बना लेगा तो बहुत बड़ी बात होगी. ऐसा लोगों ने बोला बहुत बड़े प्रोड्यूसर. ने और एक हफ्ता हुआ अगले फ्राइडे उसने. मुझे मैसेज किया कि अरे यार यह तो सुनामी.
आ गई है ऐसा तो पहले कभी देखा ही नहीं गया. यह मैं धुरंधर वन की बात कर रहा हूं और अब. धुरंदर 2 के बाद आप देखिए क्या हो गया है।. 17 करोड़ 1700 करोड़ तो हो चुका है। 2000. शायद हो जाए तो आज तक ऐसा और ये बॉक्स. ऑफिस की बात नहीं है। बॉक्स ऑफिस पे तो ये. टॉप हो गई है। इंडिया में टॉप हो गई है।. ग्लोबली टॉप हो जाएगी अभी। बट आई थिंक ये. एक फिल्म मेकिंग को लेकर एक बहुत बड़ा एक. कंट्रीब्यूशन है। आदित्य ने ये मानसिकता. तोड़ दी कि लोग नहीं जाएंगे। आप इंडिया.
इंडिया में अच्छा सिनेमा बनाएंगे तो लोग. बिल्कुल जाएंगे सिनेमा।. हेडशॉट क्यों नहीं जाएंगे? मधुर भंडारकर एंड वी हैड अ कन्वर्सेशन।. तो फिल्म मेकिंग एक जबरदस्त कि आप उसके. लिए बनाओ तो कि फोर्स करो मुझ जैसों को।. मैं ओटीटी पिक्चर देखता हूं। आप कोई. पिक्चर बनाओगे मैं मैं तो प्रमोशन करता. हूं। मैं ओटीटी देखता हूं।. यस।. आपने मजबूर किया कि मैं जा के दो बार देख. के आ रहा हूं।. आप देखिए स्टोरी, गाने, एक्टिंग, सिनेमेटोग्राफी, डांस हर चीज और एकदम जबरदस्त रहेगी। बिना.
सेक्स बिना व्गैरिटी के [हंसी]. जो एकदम वो क्या कहते हैं मसाला है एक. इंडियन एक टिपिकल वो बन गया था कि भाई. सेक्स थोड़ा सा दिखाना है एक वो आइटम. सॉन्ग होना चाहिए बाकी चीजें होनी चाहिए. वो सब कुछ भी नहीं. कोई व्गारिटी नहीं. मतलब महिलाओं को लेकर जो चरित्र दिखाए गए. वो बड़े स्ट्रांग दिखाए गए. देखिए कुछ लोगों ने क्रिटिसाइज भी किया कि. अरे महिलाएं नहीं है पूरे कैरेक्टर्स जो. हैं इसमें मर्द ही मर्द है अरे यार. आतंकवाद के ऊपर फिल्म बन रही है तो हम. कैसे जबरदस्ती महिलाएं दिखाएं ये कुछ. लोगों का ना टिपिकल है कि अरे नहीं. पाकिस्तान के ऊपर एक तो मुस्लिम के खिलाफ.
हो गई। अरे महिलाएं नहीं है तो भाई यह. फेमिनिस्ट सामने आ गए कि भाई महिलाओं के. खिलाफ है। ऐसा कुछ भी नहीं है। आप इसको एज. अ फिल्म देखिए। आप उसकी सिनेमेटोग्राफी. देखिए। आप स्टोरी लाइन देखिए। और ये जो. हजारों करोड़ों लोग देख रहे हैं इंडिया. में या बाहर ये बेवकूफ तो है नहीं।. आपका फेवरेट कैरेक्टर कौन था? धुरंधर राकेश बेदी।. बच्चा है तू मेरा। बच्चा है तू मेरा। योर. बटक्स आर वैरी वाइट। [हंसी]. मैं उनसे मिला भी। उनके साथ एक छोटा सा. उन्होंने मेरा वो वीडियो रिकॉर्ड किया। तो. अभी उनका प्ले था दिल्ली में तो उनके साथ.
बैठा हुआ था कई देर तक तो ये जो बटक्स आर. वै वाइट ये उनका खुद का है इंप्रोवाइज. किया गया है उन्होंने उनको बोला कि भाई तू. थोड़ा सा ये थाईलैंड में शूट हो रहा था तो. उन्होंने बोला आदित्य को कि भाई यहां पर. ना तू पोंड रख उसमें पता रख मेरे पास ये. दिमाग में ये आईडिया आया मैं ये करूंगा तो. राकेश बेदी को तो मैंने उनको खुद बोला. मैंने बोला आपको मैं फॉलो कर रहा हूं जब. श्रीमान श्रीमती आया था तब आप दिलरुबा. अंकल थे उसमें उससे पहले चश्मे बद्दूर बट. यह ट्रेजडी भी है हमारे इंडस्ट्री की कि.
इतना बड़ा वर्सटाइल एक्टर कितना जबरदस्त. कॉमेडियन रहा है अपने बचपन से और अब जाके. उसको फेम वो मिल रहा है जो मिलना चाहिए था. बट आई थिंक वो तो मैक्सिमम लो साइज फिल्म. में हुआ है. हुआ बिल्कुल हुआ है जैसमीन खन्ना. जैसमीन सैंडल सबसे बड़ा गाना इस पिक्चर. में अक्षय खन्ना सबसे बड़ा इसमें रणवीर. सिंह करियर का पीक इस फिल्म में. आप बेदी साहब इस फिल्म में आप कोई भी. कैरेक्टर उठा लो. बिल्कुल. इवन अर्जुन रामपाल कैरेक्टर जो था वो बहुत. जबरदस्त कैरेक्टर था. और ये क्यों हुआ है क्योंकि इंडस्ट्री में. चीजें टाइप कास्ट हो गई हैं कि यही.
एक्टर्स हैं जो रहेंगे। इसी तरीके का आप. चीजें करेंगे। अगर राकेश भी हैं तो आप एक. ही टाइप का कैरेक्टर आपका कॉमेडियन है। एक. हिट हो गया आप वही करोगे। आपके साथ देखा. नहीं जाएगा कि आपके इसमें लुक में क्या. कैरेक्टर हो सकता है। तो आदित्य के पास ये. विज़न था। उसने राकेश जी को बोला कि बॉस आप. ही यह कर सकते हो और कोई नहीं कर सकता। तो. ये है और मुझे लगता है कि आदित्य ने. ग्लोबल सिनेमा की बार-बार मैं बात कर रहा. हूं। लेकिन इंडस्ट्री में भी एक नई ऊर्जा. दे दी है। आप देखिए कितने यंगस्टर्स अब.
इंस्पायर होंगे कि वी विल एक्सपेरिमेंट वी. विल डू समथिंग न्यू। वो डरेंगे नहीं। अब. ऐसी फिल्में बहुत ज्यादा आने वाली है. शायद। मुझे लगता है अगले एक साल में. क्योंकि मेरे बहुत सारे जानकार हैं फिल्म. वाले जिनकी फिल्में पॉज हो गई हैं। [हंसी]. देखिए आपने तो बोला कि बहुत आएंगी। मुझे. ऐसा लग रहा है कि बहुतों ने बोला कि जो. स्पाई वर्स है, स्पाई थ्रिलर्स हैं वो. शायद ना आए कुछ टाइम तक। हां. क्योंकि धुरंधर का जो झटका है भूकंप आया. है उसको झेल रहे हैं अभी लोग तो सोच रहे. हैं कि भाई यह न्यू सिनेमा जो इंडस्ट्री. में अब आया है इसको कैसे बनाया जाए तो.
फिल्में पोस्टपोंड हो गई कितनी फिल्में. रोक दी गई हालांकि एक चीज मुझे बड़ी. शॉकिंग लगी कि आपके एक बड़े फेमस एक्टर है. मैं नाम नहीं लूंगा अ जिनका करियर बहुत. बड़ा आ गया जिन्होंने पैसे भी लगाए थे. उनके परिवार से कोई फोटो वीडियो शेयर. एप्रिसिएशन नहीं आया. अच्छा बड़े एक्टर हैं [हंसी]. नहीं मैं ये कहूंगा उनकी जो आई थिंक वाइफ. है जो बहुत बड़ी एक्ट्रेस हैं. जब धुरंधर वन का ये मैं अपना आंखों देखा. बता रहा हूं कि जब मैं दुरेंद्र वन का.
कास्ट एंड क्रू का प्रीव्यू था मैं वहां. बैठा हुआ था ये रिलीज के एक दिन पहले हुआ. था या उसी दिन हुआ था 5 दिसंबर के आसपास. उससे पहले दो दिन पहले और वो जिसका आप. जिक्र कर रहे हैं वो मेरे साथ बैठे हुए थे. मतलब मेरे साथ मतलब मेरे पीछे बैठे हुए थे. तो ऐसा कुछ नहीं है होता क्या है कि कई. बार ऐसी अटकलें लग जाती हैं कि अरे नहीं. बट आमतौर पर सोशल मीडिया एप्रिसिएशन होता. है. कि किसी की फिल्म आती है तो आसपास के लोग. जो है वह एप्रिशिएट करते हैं कि आपकी. अच्छी फिल्म आई है। यह देखना चाहिए।. मुझे लगता है मुझे नहीं लगता मैं उनका.
पहला कई साल पहले जेएनयू में एक वाकया हुआ. था। वो मैंने भी अप्रिशिएट नहीं किया था।. आई थिंक बहुत ऐसा हो जाता है ना इंडस्ट्री. के लोग भी जज्बात में बह जाते हैं कि भ ये. ट्रेंड में चल रहा है तो कूल है। बहुत कूल. है। मैं भी करूंगा। मैं भी करूंगी। बट आई. विल नॉट यू नो से कि उन्होंने डेलीबेटली. ऐसा किया हो या कुछ हो। मुझे लगता है कि. बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो लेट भी रिएक्ट. करते हैं। तो आप आप यह कह रहे हो कि. उन्होंने धुरंधर देखी थी आपके साथ. देखी और बहुत तारीफ की बहुत ताली भी बजाई. जबरदस्त मतलब 40-50 लोग ही थे उस वक्त. धरंधर वन की बात.
धुरंदर वन की बात कर रहा हूं वहां पर थी. मौजूद थी दोनों बैठे हुए थे. टॉप कलाकार और बहुत. बट आई एम वेरी हैप्पी फॉर दैट एक्टर. क्योंकि क्या कमाल की एक्टिंग की है. नहीं बिल्कुल कमाल की एक्टिंग. मतलब लार्जेस्ट देन लाइफ सिनेमा मैं उस. इंसान ने मुझे ऑक कर दी कई लोगों ने. आदित्य धर ने इन लोगों ने सबको बड़ी अपनी. पर्सनल सक्सेस जैसी लग रही है फिल्म वो. बिल्कुल आप देखिए सबसे बड़ा तो मैं आदित्य. का फैन यह हूं कि मेरी ऑलमोस्ट डेली एक. बार या दो बार उनसे बात हो जाती है. WhatsApp पे या जैसे भी तो वो आज तक एक. इंटरव्यू नहीं दिए। वो आज तक कोई स्टूडियो.
विजिट नहीं किए। दो कोई इवेंट नहीं किए।. तो लेट मी से दिस टू यू। आदित्य धर ने. मुझे धुरंधर वन के बाद प्रॉमिस किया था कि. मुझे पॉडकास्ट चाहिए।. मैं भी लेट मी आल्सो से दिस। आदित्य धर ने. मुझे प्रॉमिस किया था कि धरंदर 2 के बाद. वो आएंगे और हमें एनडीt पे इंडिया।. ये मुझे उन्होंने प्रॉमिस किया था। आई हैव. दैट मैसेज जब उन्होंने मुझसे कहा था कि. अभी धरंदर 2 की एडिटिंग चल रही है और जब. खत्म हो जाएगा तो वो इंटरव्यू करेंगे।. नहीं आई थिंक डेलीबेटली उन्होंने ही है ही. चोजन टू स्टे अवे फ्रॉम दिस नॉइज़ आई. रेस्पेक्ट दैट. हां इवन आई. और बहुत सारे ऐसे होते हैं लोग जो. एंड आई एम वैरी हैप्पी फॉर हिम कि जो.
सिनेमा उन्होंने दिया चाहे वो उरी का था. यहां था और उनकी जब मैं कहानी और पीछे भी. पढ़ता हूं. कि उन्हीं कुछ फिल्मों की स्क्रिप्ट दूसरे. लोगों ने उठाई और उसको आप एक फिल्म बना के. रख दी। सो मुझे यह भी लगता है कि मेहनत. करने वालों को ऊपर वाला इनाम देता है।. नहीं बिल्कुल होता है। मेहनत करने वालों. की हार नहीं होती। और आदित्य का ऐसा रुझान. है मुझे लगता है आदित्य वांट्स हिज. क्राफ्ट टू स्पीक। तो उन्होंने जो उनका. काम था वो कर दिया। अब वर्ड ऑफ़ माउथ से. चीजें चल रही हैं। उनको कोई कह नहीं रहा. पीआर वाला कि भाई आप चुप रहो। आप यहां छिप. के बैठो तो ज्यादा चलेगा। ऐसा कुछ नहीं.
है। वो खुद नहीं चाहते। बॉलीवुड सिनेमा. वर्सेस आर धर।. नहीं उरी के बाद आपने देखा कि वो सामने. आए। उन्होंने इंटरव्यूज दिया। इस बार उनको. लगा कि नहीं देना चाहिए। लेट माय क्राफ्ट. स्पीक और लोग इतना अगर पसंद कर रहे हैं. आपको क्यों इंटरव्यू देने की जरूरत है. आपका क्राफ्ट बात कर रहा है आगे जब फिल्म. उतर जाएगी जब थोड़ा सा रिलैक्स हो जाएगा. तब जाके बात करेंगे मैं भी जाऊंगा आप भी. जाएंगे [हंसी]. बट आई एम हैप्पी फॉर हिम आई एम हैप्पी फॉर. हिम और आई डोंट नो मतलब मैंने कहा ना कि. आप लोगों ने भले ही फिक्शन लगाया लेकिन.
लोगों ने उससे प्राउड मोमेंट भी लिए. आपका फेवरेट गाना कौन सा था बहुत सारे. गाने हैं आई थिंक. धुरंधर वन में ज्यादा गाने छे टू में ये. तो बड़ा कॉम्प्लिकेटेड कोई सवाल पूछ लिया।. अब पहले मैं बताऊं जब धुरंधर 2 आई मुझे. लगा कि देखो यार धुरंधर वन के गाने इतने. ज्यादा बन गए हैं। ये धुरंधर 2 का लग नहीं. रहा खेल है। फिर लगा धुरंधर 2 का तो और. ज्यादा गाना जो है बहुत जबरदस्त है। मुझे. लगता है जो फिर से गाना है अरिजीत का और. जो जैसमीन सैंडल्स का गाना है और वि. जैस्मीन सैंडल विस सतेंद्र सर।.
सतेंद्र सरताज बिल्कुल। सतेंद्र का तो वो. बहुत टाइम से फैन रहे हैं जबरदस्त। तो ये. दो गाने जो हैं. एंड इवन दैट सॉन्ग दिल पे जख्म खाते हैं।. हां खान साहब का।. हां हां ये अब देखो दो से तीन कर दिया. आपने। तो ये जो तीन [हंसी] गाने हैं ये. जबरदस्त हैं और लोगों को मतलब छू गए बुरी. तरीके से।. बट आई विल स्टिल गो वि धर वन। आई थिंक. उसमें गाने ज्यादा बेहतर। बहुत सारे गाने. और थे। अर्जित का ग जो सॉन्ग था लव सॉन्ग. साहब आउटस्टैंडिंग। मैं अभी भी सुनता हूं।. मैं आपको बताऊं एक चीज जो मेरे दिल को छू. गई पूरी तरीके से जो लास्ट के पांच मिनट.
है फिल्म के तुरंत 2 के. सर उसमें. मेरे को रणवीर सिंह ना उस आखिरी के 5 मिनट. में हिंदुस्तान में बहुत सारे कलाकार है. बट उसने जो अपना रेस्पेक्ट गेन किया मतलब. मैं तीन चार चीजें मेरे फ्लैशबैक में एक. सीन आपको याद होगा ट्रेन में चढ़ता है. और वो लिम करता है. हम. वो मेरे को फील हो रहा था कि एक जासूस. वहां से लौटा वो लिम कर रहा है और फिर जब. वो घर जाता है अपने वो जो सरदार वाला सीन. है. सो वो जब जस्कीरत था वो जस्कीरत लग रहा था. हम. वो जो फोटो थी. हम. वो फौजी का बेटा लग रहा था.
रियल लग रहा था. और जब हमजा जाता है शुरू में हम. ना तो कार वहां की तलाश है. तो मेरे को हमजा लग रहा था।. उसमें मैं और खुश हुआ। मेरा अपना क्या. बोलते हैं वेस्टेड इंटरेस्ट है कि जब वो. कैरेक्टर आ रहा था और वो बस में चढ़ रहा. था तब मेरा नाम फ्लैश होता है। [हंसी]. रिसर्च कंसलटेंट आदित्य राज कौर दिव्याएस. इस बार नहीं हुआ इस बार वो सीन चल रहा था. उसका। बट आई थिंक लास्ट के जो 5 मिनट हैं. वो दिल को छू जाते हैं। अब देखिए आदित्य. अगर आप सोचें वो एज अ टिपिकल बॉलीवुड. फिल्म इसको हैप्पी एंडिंग दे सकते थे कि.
भाई जाबाज ये है उसने सब खत्म कर दिया और. वो जीत गया। वो उसको मार सकते थे कि भाई. ट्रेजडी हो गई खत्म हो गया। वो कुछ और. एंडिंग दे सकते थे। बट सच अ यू नो वो. मजबूर करते हैं व्यूअर को सोचने में कि अब. क्या हुआ होगा। वो परिवार के पास आता है. लेकिन तब भी वापस चला जाता है।. फिर लोग सोचते हैं क्या धुरंध आएगी? क्या. इसके बाद वो कोई और ऑपरेशन करेगा? या जब. राकेश बेदी उसको छोड़ते हैं और फ्लाइट से. एक आध लोग उतरते हैं क्या कोई और भी उतरा.
था? और वो रुक गया था राकेश बेदी के साथ. और फिर कुछ हुआ। ये मैं कह रहा हूं मतलब. लोग ऐसी अटकलें लगा रहे हैं।. बैड या [हंसी]. तो ऐसा है और जो एक बंदा हमजा के साथ वहां. पर रहता है।. वो तो वहीं पर गैंग में काम कर रहा है अभी. भी। हालांकि इसमें एक एक बाकी तो आप लोगों. ने पीक डिटेलिंग 10 आउट ऑफ 10 की है। हर. जगह 10 आउट ऑफ़ 10 गलतियां निकालेंगे।. एक गलती केवल मैंने पकड़ी थी।. अगर इसका एक्सप्लेनेशन मिल जाए।. बताइए।. वो जो उसका दोस्त होता है जो पाकिस्तान.
में रुक गया है।. वो किसी दूसरे गैंग में काम कर रहा होगा।. दूसरे गैंग में जो काम करता है शुरू में।. उसका जब इंट्रोडक्शन होता है तो. इंट्रोडक्शन क्यों कराया गया? क्योंकि. लास्ट में तो आपने दिखाया दोनों की. ट्रेनिंग साथ में हुई थी।. और वहां तो तीनों इंडियन इंडियन इंडियन. थे।. हम्म।. जिस होटल में तीनों मिलते हैं कि हम जाए. इससे मिलो। ये उस गैंग में शामिल हो गया. है।. हम्म पप्पू के गैंग में।. तो, वह इंट्रोडक्शन क्यों हुआ? क्योंकि. बाद में दिखाया आपने कि सारे साथी में तो. ट्रेनिंग किया था इन्होंने। एक साथ पानी. में अंडर वाटर ट्रेनिंग थी।. यह आप आदित्य दर से पूछिएगा। सिनेटैटिक. लेंस पे एक आई थिंक ये वाली इस पर थोड़ा सा.
ध्यान शायद।. नहीं आई थिंक इसमें गैंग्स को लेकर भी. बहुत टेक्निक बहुत सारी होती हैं।. नो आपको फर्स्ट सीन याद है कि जब वो होटल. मिलते हैं। रात को आता है शटर गिरा के कि. ये पप्पू गैंग में पहले शामिल हो चुका है।. और फिर लास्ट में आपने दिखाया कि ये साथ. में ही ट्रेनिंग कर रहे थे। लड़ते झगड़ते. अंडर वाटर।. सो वहां से क्वेश्चन आया कि अगर साथ में. ट्रेनिंग की थी देन व्हाई इंट्रोडक्शन? क्योंकि तीनों तो रॉ वाले थे। तीनों थे. लेकिन होता क्या है कि बहुत बार आपको नहीं. पता। हो सकता है कि जो शॉप वाला था.
कोरोगेरा उसको नहीं पता था कि क्या हो रहा. है या उसको लगता है कि कोई लोग हमें ट्रैक. कर रहे होंगे। तो इसमें बहुत चीजें होती. हैं जो माइंड में रखनी पड़ती है।. बाकी तो एब्सोल्यूट डिटेलिंग बंदूक पे हाथ. कहां रखा है। इतने मीम बन गए हैं। इतने. मीम बन गए हैं [हंसी] कि इंतहा हो गई है।. और जूसर वो दे रहे हैं। गौरव केरा जब शादी. हो रही है। नहीं बहुत आई थिंक आदित्य ने. बहुत ही डिटेल में इसको रिसर्च किया है और. ऐसे चीजें देखी हैं जो लोगों को नोटिस भी. करेंगे उनकी पीक डिटेलिंग की तारीफ हो रही. है और क्या चाहिए और मुझे लगता है आदित्य. ने इस जो पूरा एक ये जोनर है इसमें महारत.
हासिल कर दी है।. अब्सोलुटली अब्सोल्यूट 370 बारामुल्ला. धुरंधर तो अलग-अलग टाइप की फिल्में हैं।. लेकिन क्या फिल्में हैं? मतलब धुरंधर आप. बार-बार देख सकते हैं। मुझे तो लोगों ने. मैसेज किया है कि सर आठ बार देखी है।. मैंने बोला ऐसा क्या है कि आपने आठ बार. देखी? बोला नहीं अगर आठ घंटे भी हमको. लगातार देखनी पड़ी हम देखेंगे।. सर इतने बड़े डायरेक्टर थे आईए थे ये अभी. फैशन बनाई उन्होंने। कितने सारी फिल्म. बनाई है।. जी. मधुर भंडारकर। मधुर भंडारकर सेड आई हैव.
वाच इट फोर फाइव टाइम्स।. बिल्कुल।. और मैं पैसे देके हर बार जाके देख के आ. रहा हूं। मुझे मजा आ रहा है। [हंसी] वो. प्रीमियर शो भी देखने गए थे।. बिल्कुल। और फिर लखनऊ में देखने गए, यहां. देखने गए और कह रहे हैं कि मैं अलग-अलग. हॉल में जाता हूं। एक बार बड़े हॉल में. फिर एक बार छोटे हॉल में कि देखूं वहां पर. एक्सपीरियंस क्या है? मैं आपको छोटी सी. कहानी बताता हूं संक्षेप में।. मैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] इजराइल. में फंसा हुआ था जब दुरेंद्र 2 रिलीज हुई।. मैंने बड़ी कोशिश की कि मैं आऊं। दिव्या. ने तो टिकटें भी ले ली कि 19 को तुम आओगे. तो हम सीधे टिकटें लेकर देखने जाएंगे। हुआ. नहीं। मैं फंस गया वहां पे। अब मैं वापस.
आया। वापस आके फाइनली मैं ढूंढने लगा. टिकटें। मुझे टिकटें नहीं मिल रही। तो. मैंने बोला अरे यार फ्रस्ट्रेटिंग है मतलब. टिकटें नहीं मिल रही। मैंने आदित्य को. मैसेज किया। मैंने कहा यार मैं टिकटें. ढूंढ रहा हूं। मिल ही नहीं रही। कह रहा. यार भाई मैं अपनी फैमिली के लिए टिकटें. देख रहा हूं। मुझे टिकटें नहीं मिल रही।. कैन यू बिलीव दैट? आदित्य दैट द डायरेक्टर. ऑफ़ द फिल्म वाज़ नॉट गेटिंग टिकट्स फॉर. धुरंदर टू। सो दैट वाज़ द क्रेज़ दैट वाज़. देयर। फाइनली मुझे टिकटें मिली और मैंने. दिव्या को दूसरी बार अपने साथ लिया और. बोला कि नहीं ये फिल्म देखनी है। तो आई. थिंक इट इज़ समथिंग मैजिकल। इट इज इतिहास.
में ऐसा होता है ना कि समय लिखा होता है।. यह समय लिखा हुआ था धुरंधर का और यह. आदित्य दर की तो चलो अलग बात है। उनके. प्रोडक्शन हाउस की अलग बात है। लोकेश की. रणवीर की अलग बात है। लेकिन सिनेमा के लिए. बॉलीवुड के लिए ओवरऑल इंडियन सिनेमा के. लिए ये बहुत बड़ा एक हिस्टोरिकल कस्प है।. और आगे ये सिर्फ आदित्य को ही नहीं पूरे. सिनेमा को हेल्प करेगा।. अच्छा लास्ट क्वेश्चन इस फिल्म के क्योंकि. किरदारों को हमने बड़ा रिलेट किया।.
हम दो किरदार के ऐसे नाम बताओ जिनके लिए. आपको बुरा लगा कि यार इनके साथ तो बड़ा. गलत हो गया। [हंसी] पहले तो मुझे लगता है. कि जो येलीना है उनके साथ बहुत गलत हुआ।. मतलब वैसे भी सोचा जाए इमोशनली भी और. फिल्म में भी क्योंकि उनका कैरेक्टर मुझे. थोड़ा बहुत ऐसा लग रहा था कि यू नो एक. फोर्स कैरेक्टर वहां पर है जो कि एक रियल. लाइफ दिखाना पड़ता है। एक आपको कवर हमेशा. एक Intel opp में रखना पड़ता है। तो वो. कवर एकदम ये था। लेकिन मैंने राकेश बेरी.
से भी पूछा दिव्या ने भी पूछा कि यार आपने. सोचा नहीं कि आपके साथ एक इंडियन. इंटेलिजेंस का ये बंदा आ रहा है और एज अ. फादर आप ओपनली उसको मतलब पहले तो घूमने दे. रहे हो सब कुछ हो रहा है। उसके बाद जब जा. रहा है तब भी आपको फर्क नहीं पड़ रहा।. बोला नहीं ये तो इंटेलिजेंस ऑपरेशन है।. अगर आप उसमें इनवॉल्वड हो तो आपको करना. पड़ता है। तो एक तो यलीना का कैरेक्टर था. और दूसरा एक कैरेक्टर था। आई थिंक मेरे को. उसका नाम नहीं याद आ रहा। जब वो फ्रंट का. सीन आता है जूस का और वो गैंग का एक मेंबर.
आता है अ कुछ ऐसे कुकर्म करने के लिए. रणवीर सिंह के साथ। आई थिंक ही इज़ अ. कश्मीरी फ्रॉम कुपारा बट व्हाट अ कैरेक्टर. मतलब वो बेचारा इनोसेंट बंदा है। लेकिन. आदित्य ने जो कैरेक्टर उसको दिया एकदम कली. मवाली कास्टर उसने खिन पैदा कर दिया।. खिन पैदा कर दिया कि ये क्या कर रहा है।. और पाकिस्तान में क्या-क्या होता है वो भी. सामने आया। अभी आप देखिए एक वीडियो वायरल. हो रहा है एक एलजीबीटी क्यू वहां पर एक आई. थिंक है कह रहे हैं कि 80% पाकिस्तान जो. है गे हैं।.
देखिए ये तो पता नहीं था इसपे थोड़ा. रिसर्च होना चाहिए।. मुझे दो लोग के लिए बुरा लगा। एक उज्जैन. बलोच के लिए. बेचारे को फर्जी निपटा दिया आप लोगों ने।. [हंसी]. पहले दुबई में फंसायां. फिर यहां फंसाया और मैंने सुना असली में. भी वो शायर वो जेल में बंद हुए हैं।. हम्म बहुत टाइम तक।. तो ये वाकई में ऐसा कोई था तो नहीं। कोई. जस्कीरत जिसने फंसा के चलाया उनको। नहीं. नहीं आप इंटरव्यूज देखिए। आप पहले तो असलम. चौधरी के वाइफ का इंटरव्यू देखिए। देखा वो. तो जबरदस्त कह रही है कि अरे क्या फिल्म. है। हम दोनों फैन थे संजय दत्त के और वो. तो हूबहू लग रहे हैं।.
उसके बाद आप उज़ेर बलोच का इंटरव्यू. देखिए। अब उज़र बलोच के गैंग के रहमान. डकैत के गैंग के जो लोग हैं जिन्होंने. लंबे-लंबे इंटरव्यूज देखे हैं वो देखिए।. जो वहां पर गैंग वॉर हुआ उसके वीडियोस हैं. जहां पर वो रिपोर्टिंग कर रहा है। बंदा. भाग रहा है यहां से वहां वो देखिए। तो. इट्स रियलिटी बेस्ड। बहुत जबरदस्त इस पे. यह काम हुआ है। और एक दूसरा रणवीर सिंह का. जो साला बना था. हां।. वो बेचारा फर्जी मर गया।. फर्जी मर गया पूरी तरीके से बेचारा। लेकिन. सबसे बड़ा जो एक बंदा है नबील कबूल करके.
हम. वो पाकिस्तान में एकदम जबरदस्त धुरंधर वन. के बाद हीरो बन गया कि अरे भाई आपके ऊपर. फिल्म। इस बार जब फिल्म आई तो वो बेचारा. एकदम डाउन हो गया कि भाई दिस इज रॉन्ग।. ऐसा कुछ नहीं है। तो उसको पाकिस्तानी जो. खुद पत्थर मारने लगे। उसी को तो लेकर. राकेश विदी ने कहा कि मेरे पिताजी शायद. पाकिस्तान उनकी शक्ल मिलने की बात चल रही. थी। तो उसने कहा लव यू लव यू। तो उन्होंने. कहा कि हो सकता है मेरे पिताजी पाकिस्तान. गए हो कभी। लेकिन मैं एक और चीज आपके. पॉडकास्ट पे आज बोलता हूं कि नबील कबूल पे. तो लोगों ने बड़ा रिसर्च किया कि अरे बड़ा. कैरेक्टर है। क्या यही तो नहीं था। अल्ताफ.
हुसैन है पाकिस्तान के एक नेता जो यूके. में है अभी एमक्यूएम के नेता थे। उन पर. बड़े इल्जाम लगे कि ये रॉ के लिए काम करते. थे। मुझे लगता है झूठे थे। लेकिन उनका. चेहरा उनके वीडियोस लोगों ने नहीं देखे कि. अल्ताफ हुसैन जो कराची के नेता थे अभी. यूके में है और उनकी बेटी भी है तो उनका. और राकेश बेदी का जो मेल खाता है वो क्यों. नहीं देखा नबील कपूर भी हो सकते हैं बट.
अल्ताफ हुसैन भी हो सकते हैं नाइस धुरंधर. 3 आ रही है देखिए वो तो हम दोनों को वेट. करना पड़ेगा आदित्य दर के साथ आप पॉडकास्ट. करेंगे मैं इंटरव्यू करूंगा. और उसके बाद पता चलेगा क्योंकि आदित्य के. ऊपर ही अभी कोई प्लान नहीं है। मुझे नहीं. लगता कि अभी कोई प्लान है। यह भी जो. धुरंधर वन और धरेंद्र टू थी एक ही फिल्म. थी बट रिसर्च इतना ज्यादा हुआ फिल्म का. स्टोरी बोर्ड इतना लंबा बना। फिर शूट इतना. जबरदस्त हुआ और 70-80% शूट थाईलैंड में. हुआ पूरा। उसके बाद पंजाब में, मुंबई में,
दिल्ली में, लुधियाना में अलग-अलग जगह पे. हुआ। तो मैं तो चाहूंगा मेरा पहला मैसेज. मैंने आदित्य को मैसेज किया भाई मैं. धुरंधर देखने जा रहा हूं टू। फिर उसने. मुझे मैसेज किया कि भाई प्लीज बताना कि. फाइनल वर्जन कैसा लगा तेरे को। मैंने उसको. पहला चीज मैसेज किया कि पहले मेरे रोंगटे. खड़े हो गए। आखिरी सीन पर मैं रो रहा था।. लेकिन प्लीज धुरंधर 3 और धुरिंदर 4 प्लीज. बनाना। तो ये तो मेरी पर्सनल रिक्वेस्ट है. कि भाई मैं तो ऑलरेडी कहानियां बटोरने में. जुड़ा हुआ हूं कि ये कहानियां जो मिस हो. गई हैं बतानी चाहिए। बट आई पर्सनली वांट.
दैट दिस शुड एक्चुअली चाहे वो 2 साल बाद. आए या एक साल बाद आए। आई थिंक पीपल वुड लव. टू वाच इट। दे शुड एक्चुअली बिकम अ सीरीज।. आम ब्रांड बन गए अपने कि. अगले दो सीजन तो लोग अपने आप दौड़ के देख. लेंगे।. एक आखिरी क्वेश्चन ऐसे क्योंकि आप आप ये. फिल्म का जो प्रव्यू था उसमें केवल स्टार. कास्ट और फैमिली वाले आए थे।. यामी गौतम ने कहीं कहा यार एक बड़ा रोल तो. होना चाहिए था क्योंकि सेकंड में तो आ गई. वो नर्स बनकर। बट इतनी लार्जर दैन लाइफ. फिल्म में कहीं यामी गौतम ने मिस किया कि. यार मेरे को होना चाहिए था या आदित्य को.
कहा हो इन पर्सनल कन्वर्सेशन आप लोगों के. सामने। देखिए यामी गौतम का तो सबसे बड़ा. रोल है। शी इज द सपोर्ट, शी इज द. इंस्पिरेशन एंड शी इज़ द बैकबोन ऑफ़ आदित्य. दर। तो इससे बड़ा रोल क्या होगा? ये. ऑनेस्टली मैं आपको बता रहा हूं। बट आई एम. पर्सनली अ फैन ऑफ यामी। मैंने तो इनफैक्ट. बहुत लोगों ने मुझे मैसेज भेजे जब हक आई. कि यामी का कैरेक्टर जबरदस्त है। क्या. एक्टिंग की मतलब. इंडियन सिनेमा में आई थिंक वो जो रोल था. ना यामी गौतम ने उसको जिंदा कर दिया। बिना. प्रोपेगेंडा के वो फिल्म इतनी खूबसूरत थी.
कि मजा आ गया। बहुत ही अंडररेटेड एक्ट्रेस. हैं। और यह भी होता है ना अब मैं बॉलीवुड. माफिया बोलूंगा तो लोग मुझे गालियां. देंगे। बोलेंगे अरे नहीं माफिया कहां से. है? ये है वो है। तो एक वो इकोसिस्टम बना. है बॉलीवुड में और ये हर जगह है हमारी. मीडिया में भी। बट आई थिंक अब लोग सम्मान. करते हैं। जैसे यामी के पुराने वीडियोस. आते हैं जिसमें उन्हें साइड किया गया, बॉयकॉट किया गया।. अब लोग वो फील करते हैं और यामी को शायद. उसी वजह से बहुत सपोर्ट करते हैं।. जैसे यामी की फिल्म हक के लिए मैंने. तीन-चार वीडियोस बनाए थे। यामी ने पैसे. नहीं दिए थे मुझे। लेकिन हक क्योंकि आप एक.
अपने आप रिलेटिबिलिटी कर लेते हो. कि ये वो लोग हैं जो बढ़ेंगे तो जैसे. मैंने कहा ना धुरंधर की सक्सेस आपको. पर्सनल सक्सेस लगती है।. ऐसी हक मुझे लगी इमरान और क्या कमाल की. एक्टिंग की दोनों ने। आई थिंक थोड़ा समय. और लगेगा। धीरे-धीरे हो रहा है जो सारा. डिबेट नेपो किड्स को लेकर या इकोसिस्टम को. लेकर ये वो है जो सच्चाई रही है हमेशा से।. आउटसाइडर्स को अलग तरीके से अलग दृष्टिकोण. से देखा जाता था। बट आदित्य दर ने वो मिथ. पूरी तरीके से तोड़ दी। उन्होंने बोला कि. भाई 20 साल तक मैंने स्ट्रगल की है। मैंने. फिल्मों के लिए गाने भी लिखे हैं।.
स्क्रिप्ट भी लिखी है। मैं एडी भी रहा. हूं। मैंने हर काम किया है। और अब अपने. बलबूते पर आसान नहीं रहा। जो बड़े-बड़े. प्रोडक्शन हाउस जो पैसा लगाते हैं, ये सब. करते हैं वो कैसे मान लेंगे? इस फिल्म में. भी आदित्य का पैसा लगा था ना।. आदित्य का लगा था। आपको को प्रोड्यूसर हैं. और Jio हैं उनके साथ। तो आसान नहीं रहता।. बहुत बार आपको इतना ज्यादा बड़े हाई बजट. फिल्म में आप इतने बड़े-बड़े कैरेक्टर्स. ले रहे हैं। इतना ज्यादा पैसा हो रहा है. तो दिल में ये होता है कि भाई चलेगी नहीं. चलेगी। क्या होगा रिस्पांस? बट इसमें आप. देखिए जितना भी लगा मुझे एग्जैक्ट अमाउंट. नहीं। सोशल मीडिया पर एक बड़ी चर्चा चल.
रही थी कि पहले आदित्य दर के पास पैसे. नहीं थे। तब उसने धुरंधर बना दिया। नाउ. इमेजिन अब उसके पास पैसे भी है। उसके पास. कांटेक्ट भी है। अब उसको लोग खबरें भी. देने को तैयार बैठे होंगे कि भाई यहां से. ले ले। या इमेजिन व्हाट ही कैन डू नाउ हम. नहीं यही हमारे मीडिया में भी था कई टाइम. से कि अगर आपके कांटेक्ट हैं अगर आप किसी. ब्यूरोक्रेट को जानते हैं अगर आप कहीं पर. पॉलिटिशियन को जानते हैं तो आपकी इस. मीडिया संस्था में जो बहुत पुराना है.
उसमें नौकरी लग जाएगी ये हो जाएगा वो. हमारे मेरे पुराने संस्थान में आपके करंट. [हंसी] संस्थान में. हां तो बहुत ऐसा था जो बदल गया है. हां हर जगह बहुत चीजें बदल गई है मैंने भी. बहुत स्ट्रगल देखा है मुझे जहां मैं काम. करता हूं अभी वहां से 2008 में बैन कर. दिया था मैं वहां पर जो जो है कश्मीर को. लेकर रेगुलरली आता था बड़े-बड़े शोज़ में।. एक महिला संपादक थी। उन्होंने मुझे पूरी. तरीके से बैन कर दिया। और यह उसी टाइम था. जब रािया टेप्स आया था और राया टेप्स के. दौरान विनोद मेहता को बैन कर दिया था. क्योंकि वो आउटलुक के संपादक थे और.
उन्होंने उस महिला पत्रकार को कवर में डाल. दिया और विनोद मेहता को जो बैन कर सकता है. मैं उस किस खेत की मूली हूं। तो मुझे भी. बैन कर दिया। और किस लिए बैन किया? क्योंकि मैं कश्मीर के ऊपर ओपिनियन रखता. था अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ।. तो बोला नहीं नहीं आपके लिए कोई जगह नहीं. है। आप बड़े कम्युनल हैं। अरे भाई मैं. टेररिज्म का विक्टिम हूं। टेररिज्म के. खिलाफ बोल रहा हूं। मैं कम्युनल बन गया।. मैं राइट विंग बन गया। तो दिस ये तो. त्रासदी है। तो उसमें भी मीडिया में बहुत. चेंजेस आए हैं। आई होप इट इज फॉर द बेटर. कि जितना मैंने स्ट्रगल किया है या जितना.
मैंने आपबीती ये देखी है दो आगे लोगों को. नहीं देखनी पड़े। मैं इसको लास्ट सब करता. हूं कश्मीरी पंडित पे ही।. क्या ये सच है? कश्मीरी पंडित दुनिया के. इकलौते ऐसे विक्टिम है जिन्हें विक्टिम की. निगाहों से लोग देखना भी नहीं चाहते और. जैसे ही अपने दर्द की वो बात करते हैं. उन्हें कम्युनल बना के पेश कर दिया जाता. है। हिंदुस्तान में बहुत सारे लोग हैं. जिनको आपके दर्द से एक घंटा मतलब है। अभी. भी सोशल मीडिया पर उन्हें बताना पड़ता है. ये हुआ था। बाकी जितने लोग हैं चाहे वो. मैं पैलेस्तीन से लेकर सिख सिखों तक की.
बात कर रहा हूं। उन्हें कम से कम विक्टिम. तो मानते हैं वो कि इनके साथ गलत हुआ था।. आप में तो अभी भी लोग स्वीकार करने को. तैयार नहीं। आपसे गलत हुआ था।. देखिए यही तो त्रासदी है। अपार्ट फ्रॉम. हिंदूस जो स्वाभाविक तौर पर आपसे थोड़ा. लगाव रखते होंगे। यही तो त्रासदी है। अब. मुझे समझ नहीं आता मैं किसको कन्विंस. करूं। क्या मैं उस कश्मीरी मुसलमान यंग. लड़के को कन्विंस करूं जिसने कश्मीरी. पंडित देखे ही नहीं है। वो कश्मीरी. पंडितों के साथ रहा ही नहीं है। उसको. पिछले 20 साल से बताया गया है कि ये तो.
जिहाद है। आपको लड़ना है। आपको कश्मीरी. पंडित तो यहां थे ही नहीं। वो तो बाहर ही. हैं। वो तो भगोड़े हैं। क्या मैं सरकार को. कन्विंस करूं कि भाई हम विक्टिम हैं. आतंकवाद के और हमारे लिए न्याय किया जाए।. 30 साल हो गए, 35 साल हो गए। कब तक हमें. जो है इंतजार करना पड़ेगा? या क्या मैं उन. बुद्धिजीवियों के पास जाऊं पूरे भारतवर्ष. में और उनको कहूं कि भाई मेरी आपबीती. सुनो। मैं भी विक्टिम रहा हूं। मैं असली. माइनॉरिटी हूं कश्मीर में। मेरे साथ यह. हुआ है। मेरे समुदाय के साथ लोगों को मारा. गया है। हमारे मंदिर तोड़े गए हैं। हमारे.
शिवलिंग जो है पूरी तरीके से समुंदर में. लेकक्स में बहा दिए गए हैं पूरी तरीके से।. तो मैं किसको कन्विंस करूं? यह तो सच्चाई. है आज कि 35 साल के पलायन के बाद भी आज भी. मुझे कन्विंस करना पड़ रहा है लोगों को कि. यह हुआ था। जब कश्मीर फाइल्स आई तब बोला. गया कि वो प्रोपेगेंडा है। कश्मीर फाइल्स. सिर्फ 5% या 10% है कि जितना कश्मीरी. पंडितों के साथ हुआ। असलियत आएगी तो आपके. रोंगटे खड़े हो जाएंगे। आप सो नहीं पाएंगे. रात को। यह है। अब आप विवेक अग्निहोत्री.
को मान सकते हैं कि भाई वह अच्छे. डायरेक्टर नहीं है। आप कुछ भी बोले लेकिन. उन्होंने कश्मीर फाइल्स बनाई। उन्होंने. दिखाया कि 30 साल तक जो डायरेक्टर नहीं कर. पाए, जो फिल्म इंडस्ट्री नहीं कर पाई वो. असली कहानी उन्होंने बताई है, दर्शाई है. और महीनों तक रिसर्च की है। मेरे पिताजी. भी उनको मदद कर रहे थे। विवेक ने मुझे भी. कांटेक्ट किया कि आप आइए और मतलब मुझे. सपोर्ट कीजिए इसमें। लेकिन मैं नहीं कर. पाया। मैं मीडिया में उस वक्त व्यस्त था. बहुत। मेरे करियर का बहुत इंपॉर्टेंट टाइम. था। तो मैं नहीं कर पाया। लेकिन जितना मैं.
सपोर्ट कर पाया मैंने किया और एक और बात. मैं आगे कहूं उससे पहले शिकारा आई और. शिकारा में एक बहुत क्रिटिसिज्म हुआ फिल्म. का अरे आप लव स्टोरी दिखाएं हैं ये दिखाएं. मैंने शिकारा को भी सपोर्ट किया और शिकारा. के टाइम पे जब मैंने सपोर्ट किया तो पूरा. राइट विंग मेरे खिलाफ हो गया 20-25000. फॉलोअ मेरे कम हो गए 24 घंटे में कि भाई. आप कैसे कर सकते हैं आप देखिए यह दोगला. बंदा है अपनी त्रासदी पे देखो ये पैसे. कमाए होंगे इसने ये विनोद जो है उसको. सपोर्ट कर रहा है मैंने क्यों किया. क्योंकि मैंने ने देखा कि भाई एटलीस्ट 1%.
ही दिखा रहा है, 2% दिखा रहा है। कुछ तो. दिखा रहा है कि कश्मीरी पंडितों के साथ. क्या हुआ। चाहे वो लव स्टोरी के नजरिए से. दिखा रहा है। दिखा तो रहा है। चाहे वो. मंकी बैलेंस कर रहा है, बैलेंस कर रहा है. अपने बॉलीवुड के लिए, अपने इकोसिस्टम के. लिए। कुछ भी उसके पॉलिटिकल कंपल्शंस रहे. होंगे। लेकिन दिखा रहा है इसलिए मैंने. सपोर्ट किया। बट मुझे नहीं पता कि कश्मीर. फाइल्स जैसी फिल्म भी आएगी, और ऐसा लोगों. का सुनामी और सपोर्ट रहेगा और लोगों के. रोंगटे खड़े हो जाएंगे। क्योंकि मुझे याद. है 18 साल में मैं पूरे इंडिया में घुमा. हूं। और जहांजहां मैं जाता था मुझे पूछते. थे आप कहां से मैं बोलता था कश्मीरी पंडित.
कश्मीर से तो बोलते थे अच्छा तो आप कश्मीर. में रहते हैं तो मैंने नहीं आपको नहीं पता. कि हमारा साथ क्या हुआ एग्जोडस हुआ है. हमें मारा गया बोला नहीं हमें तो पता ही. नहीं तो बहुत लोगों को कश्मीर फाइल्स के. बाद पता चला कि कश्मीरी पंडितों के साथ. क्या हुआ है. अभी भी नई पीढ़ी के अगर नए बच्चों से मिलो. कॉलेज वाले. तो उनसे आप पूछो प्रोपेगेंडा फिल्म्स तो. कश्मीर फाइल को टॉप पे लेते हैं हम. उन्हें लगता है जो दिखाया गया वो फेंक था. लेकिन एक चीज है अब अब वो धुरंधर को टॉप. पर रखेंगे [हंसी].
तो वो तो होता रहता है। देखिए इससे अब कोई. यह नहीं है संकोच. पॉलिटिकल भी कवर करते हो पॉलिटिकल मैं दूर. ही रहता हूं भाई साहब मतलब मैंने पॉलिटिकल. कवर किया है। मैंने बीजेपी भी कवर किया. है। आम आदमी पार्टी भी किया है। कांग्रेस. भी किया है। मैंने मोदी जी का इंटरव्यू भी. किया है। तब जब कोई इंटरव्यू नहीं करता था. 2011-12 में। मैंने अरविंद केजरीवाल का. इंटरव्यू किया है। इनफैक्ट अरविंद. केजरीवाल ने 2000 11 या 12 की बात नहीं. हां 2006 की बात है। इंडिया टुडे ने मुझे.
टॉप मैं 16 17 साल का था। टॉप 26 यूथ. आइकंस ऑफ इंडिया जो उनका सर्वे वो सब होता. है। उसमें मेरे को उपाधि दी थी वो। तो. एक-एक फेमस पर्सनालिटी को वो इंटरव्यू. करते हैं।. अरविंद केजरीवाल का इंटरव्यू देखना चाहिए।. मैं देखूंगा जरूर देखूंगा। मैंने कुछ आई. थिंक देखे भी हैं। तो अरविंद केजरीवाल से. पूछा गया मेरे बारे में कि भाई आप आदित्य. के बारे में क्या सोचते हैं? तो अरविंद. केजरीवाल ने उस वक्त बताया कि भाई ये. इंडियन यूथ के ऐसे प्रतीक हैं जो इनजस्टिस. जो है बर्दाश्त नहीं कर सकते। वो इसलिए. हुआ क्योंकि प्रियदर्शनी मट्टू को लेकर. मैंने एक बहुत बड़ी कैंपेन चलाई थी 2006.
में। वो मेरा असली क्लेम टू फेम था।. दुरंदर नहीं एनडीt टाइम्स नाउ रिपब्लिक. नहीं बल्कि 2006 में मैं जब 16 साल का था. तब मैंने प्रियदर्शनी मट्टू को लेकर जिसका. रेप हुआ था मर्डर हुआ था एक पूरे इंडिया. में कैंपेन चलाई थी यह वही दौर था जब. जैसिका लाल का भी केस आया था उस पे भी. प्रदर्शन चल रहे थे और संतोष कुमार सिंह. जिसने वो रेप और मर्डर किया वो बरी हो गया. था लोअर के कोर्ट ने कहा था कि भाई वी नो. दैट ही इज़ द पर्सन हु हैज़ कमिटेड द क्राइम. बट देयर इज़ नो एविडेंस तो इसको हम छोड़.
देते हैं। फिर 2006 में मैं उनके पेरेंट्स. से विक्टिम के पेरेंट्स से संपर्क में. आया। मैंने इंटरव्यू देखा उनका इंडियन. एक्सप्रेस में और सीएनएन में और तब मेरे. को मन विचलित हुआ 16 साल की उम्र में और. मैंने एक पिटीशन जारी की और यह वो दौर है. जब ऑर्कट नहीं था, Instagram नहीं था, Facebook नहीं था, सोशल मीडिया था ही. नहीं। तो मैंने एक पिटीशन ऑनलाइन.com है।. उस पे पिटीशन जारी किया लिखा ने मुझे. कांटेक्ट किया और बोला कि आप उस पे स्टोरी. करेंगे। निधि राजदान ने मार्च 2006 में. मेरे ऊपर स्टोरी की और वो स्टोरी हेडलाइन.
चली टॉप इफ अ 16 ईयर ओल्ड कैन सी दैट. इनजस्टिस हैज़ बीन डन व्हाई कांट द इंडियन. जुडिशरी सीबीआई एंड इंडियन गवर्नमेंट और. तब जाके हमने बहुत बड़ा एक प्रदर्शन. ऑर्गेनाइज किया डेली हियरिंग पे 10 साल के. बाद इस केस को लगाया गया और दिल्ली. हाईकोर्ट ने संतोष कुमार सिंह के खिलाफ. फांसी की सजा दी जो बंदा 10 साल से फ्री. घूम रहा था फिर सुप्रीम कोर्ट ने उसको. कम्यूट करके के लाइव सेंटेंस कर दिया। अभी. फिर से वो मामला इतने सालों के बाद उजागर.
हुआ है क्योंकि सेंटेंस रिव्यु बोर्ड जो. है उन्होंने उसका रिजेक्ट कर दिया है कि. उसको छोड़ना चाहिए। बट पुलिस कह रही है, तहार जेल कह रही है उसको छोड़ देना चाहिए. गुड बिहेवियर के तहत। और अब त्रासदी यह है. कि परिवार में कोई बचा नहीं है। उनकी. माताजी की मृत्यु हो गई है, पिताजी की. मृत्यु हो गई है, सिस्टर की मृत्यु हो गई. है। एक भाई बचा है कनाडा में और उसका. वीडियो हियरिंग अब हुई और यही त्रासदी है।. आप केसेस पे रिसर्च करिए। प्रियदर्शनी. मट्टू नीलम कटारा का जो नितीश कटारा का. केस था कल मैं नीलम कटारा से मिला और. उन्होंने मुझे बोला कि सुप्रीम कोर्ट ने.
जो मेन अक्यूज़ था उसको छोड़ दिया वरी कर. दिया है। अभी देखिए ना पब्लिक मेमोरी. कितनी शॉर्ट है कि बुला देते हैं कि ये. एक्यूज़्ड है। आप देखिए ना एक जमाने में. जैसिका लाल प्रियदर्शनी मट्टू नितीश कटारा. केस कितने जबरदस्त थे। पूरे इंडिया उनके. साथ खड़ा हुआ था कि न्याय होना चाहिए। और. आप सब भूल गए।. हालांकि ये सवाल मैंने इसलिए पूछा था हम. क्योंकि मेरा एक पॉलिटिकल व्यक्ति आए थे।. अब मैं इसी सवाल पे फिर पॉडकास्ट खत्म कर. दूंगा।. हम [गहरी सांस लेने की आवाज़]. उन्होंने कहा भैया देखो पॉलिटिक्स हर जगह. है। धुरंधर में भी एक पॉलिटिक्स खेली गई.
है महिनता से। हमने कहा क्या खेली गई? उन्होंने कहा अतीक अहमद दिखाया. मोदी दिखाया लेकिन योगी नहीं दिखाया बाबू।. [हंसी] योगी जहां दिखाना था वहां पर. डीएसपी साहब को दिखा दिया। डीजीपी साहब को. डीजीपी साहब को जो बताता है कि दिल्ली और. लखनऊ के बीच जो दूरी सोशल मीडिया पे चलती. है वो वाकई में सही चलती है।. नहीं ये तो चलो उनका आंकलन हो गया। मुझे. नहीं लगता कि ऐसा डेलीबेट कोई मुंह रहा. होगा और. क्योंकि दिखाने को दिखा सकते थे योगी जी. ने जो कहा था मिट्टी में मिला देंगे.
[हंसी]. जिसके बाद एक्चुअली में वो सारे घटनाक्रम. अतीक वाले हुए और बाद में क्योंकि यूपी का. आदमी मानता है योगी जी को क्रेडिट गया।. मुझे ऐसा लगता है कि विकास दुबे. अतीक अंसारी अतीक अहमद और अतीत अहमद इन पे. फिल्म बननी चाहिए एक अलग. कि मिट्टी में मिला देंगे क्या हुआ और ये. है भी एक आखिरी में मैं कहूंगा देखिए आप. जो भी सवाल करते हैं उस पे कहानी है तो. बताना पड़ेगा कि वेस्टर्न यूपी जो है और. खासकर जो गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर आप. आज से 15 से 20 साल या 25 साल पीछे चले.
जाइए। इसमें कितना क्राइम होता था? मतलब. एक लड़की जो है वो 7:00 बजे के बाद या. 6:00 बजे के बाद अकेली नहीं घूम सकती थी. बाहर। या गाड़ी भी अगर आप चला रहे हैं ना. बाइक पे कोई आएगा या रास्ते में कोई पेड़. होगा आपको अगवा करके ले जाएगा या आपकी. गाड़ी ले जाएगा या आपका मर्डर कर देगा।. बहुत जबरदस्त क्राइम होता था। अब आप योगी. का क्रिटिसाइज कर सकते हैं कि भाई यूपी. पुलिस जो है या नोएडा पुलिस, गाजिया पुलिस. यह किसी को पकड़ती है तो उनकी टांग में. गोली क्यों लगती है? यह ऐसा हर हर जगह. कैसे होता है? लेकिन सच्चाई तो यह है कि.
अगर आपको क्राइम की या गैंगस्टर्स की या. आतंकवाद की कमर तोड़नी है तो देयर हैस टू. बी अ वेरी स्ट्रांग अप्रोच। देयर हैज़ टू. बी अ कंसिस्टेंट अप्रोच। तो वही हो रहा. है। अब बहुत चीजें आप क्रिटिसाइज कर सकते. हैं कि ह्यूमन राइट्स वायलेशन है। ये है. वो है। लेकिन जब वो सब तो बाद की बात है।. आत आत आत आत आत आत आत आत आत आतंकवादी. पॉलिटिकल लोगों से कर लेंगे। धुरंधर में. आपने योगी जी को नहीं दिखाई। ये हमसे कई. लोगों ने कहा कि वहां डीजीपी साहब क्यों आ. गए? इसलिए तो नहीं क्योंकि दिल्ली वालों. से बनती नहीं उनकी। देखिए शुभांकर क्या आप. चाहते हैं कि मैं नोएडा में नहीं रहूं।. [हंसी]. मैं यूपी में रह रहा हूं। माफ़ कीजिए भाई।.
यूपी यूपी पुलिस बाहर है।. अरे ये तो आदित्य जी को लेके सवाल था।. दूसरे [हंसी] वाले नहीं बिल्कुल। अगले. मुझे लगता है कि बहुत सारे फिल्म मेकर्स. हैं। यहां पर फिल्म सिटी बनाने की भी. प्रक्रिया चल रही है यूपी में। और बहुत. सारे लोगों के साथ योगी जी मिलते रहते. हैं। तो आगे बनेगी फिल्म। हम. हम समझ गए। डर सबको लगता है। गला सबका. सूखता है। नहीं नहीं मेरे को कोई डर नहीं. है। मैंने बेबाकी से पॉलिटिशंस के खिलाफ. बोला है। हर पॉलिटिशियन के खिलाफ और. ज्यादा डिफेमेशन केसेस जो हैं वो बीजेपी. से भी रहे हैं मेरे खिलाफ, कांग्रेस से भी. रहे हैं और पीडीपी से भी रहे हैं। अरेस्ट.
वारंट भी रहे हैं। तो उसके बारे में अगली. बार चर्चा होगी। बट बहुत अच्छा लगा आपके. साथ बातचीत करने में।. सही में एंड आई होप कि दुनिया शांति में. जाए। हमारे आपके जीवन काल में थर्ड वर्ल्ड. वॉर ना हो।. जी।. न्यूक्लियर अटैक ना हो। आपको लगता है कि. हमारे आपके जीवन काल में थर्ड वर्ल्ड वॉर. नहीं होगा। देखिए जो हो रहा है वो थर्ड. वर्ल्ड वॉर ही है।. नहीं न्यूक्लियर अटैक के पॉइंट ऑफ व्यू से. न्यूक्लियर अटैक नहीं होगा। मुझे नहीं. लगता वो कोई एकदम ही संकी हो गया तो वो कर. देगा आसिम मुनि टाइप लेकिन मुझे लगता है. कि ऐसा कुछ नहीं होगा। हां जंगे होती.
रहेंगी। क्लैशेस होते रहेंगे। टेरर अटैक्स. होते रहेंगे जिससे हमें जूझना है और जो. देश जो हैं एकदम एकजुट होकर खड़े हो सकते. हैं उसके खिलाफ। तो वो रहेंगे तो बट मुझे. नहीं लगता कि ऐसा इतना बड़ा कोई थर्ड. वर्ल्ड होगा।. चलिए थैंक यू सो मच। लवली टॉकिंग टू। थैंक. यू शुभंकर गॉड ब्लेस यू. [संगीत].
