From Atiq Ahmed to Dawood Ibrahim: Reality or Fiction in Dhurandhar? ft. Manoj Rajan Tripathi
अतीक अहमद मरते-मरते आपको राजा बना दिया।. मेन बात यह है कि गुड्डू मुस्लिम. कसारी मसारी ने तो मुझे लगता है कि जैसे. अतीक की बुआ बना दिया है। अतीक के बारे. में अगर बताना है तो मुझे ही बताना है।. पुरंदर में अतीक अहमद को दर्शाया दिल पे. रखम [संगीत] खाते हैं।. हम जानते थे कि बाहुबली है, अपराधी है. लेकिन आतंकवादी थे।. पैसे नीचे दे जाते। हां मुझे।.
अगली बार बात को नहीं भेजा ना। यह सवाल यह. एक फिल्म आने के [संगीत] बाद ही क्यों उठ. रहा है? क्या इसके पहले किसी एंकर को नहीं. पता था? किसी रिपोर्टर को नहीं पता था? क्या किसी आईबी के रडार पे ही नहीं आया. वो? रॉ के नोटिस में ही नहीं आया। किसी. योगी आदित्यनाथ की गवर्नमेंट के किसी. पुलिस अफसर ने ये बात क्यों नहीं बताई? आप. उस पिक्चर को फिक्शनल मानते हैं, रियलिटी. के करीब मानते हैं। इस देश का सबसे बड़ा. बुखार क्या है? तो पाकिस्तान जिसकी टीम को. भी हम लगभग जंग की तरह मार देना चाहते. हैं।.
दाऊद इब्राहिम हिंदुस्तान के कई हमले हो. गए हम पर। हर आदमी जानना चाहता है और. तीसरी चीज हो गई दिल्ली यूपी टेरिटरी. बॉलीवुड में जिसने जीत ली उसकी फिल्म जीत. गई। लेकिन नरेंद्र मोदी जब उसमें आते हैं।. ₹500 और ₹1000 की करेंसी नोट लीगल टेंडर. नहीं रहेंगे।. तो हर मुसीबत का कोई ना कोई तो वो. नॉनफिक्शनल हो जाती है। फिर अंदर में एक. डायलॉग था बेदी साहब कहते हैं कि. जिंदा रखकर तड़पाने में जो मजा है वो. मारने में कहां? आपको लगता है कि ये इंडिया ने करवाया वो.
दाऊद के साथ।. दाऊद इब्राहिम [संगीत] की स्लो पोइजनिंग. मुझे सही लगती है? बिल्कुल लेकिन एक चीज. नहीं सही लगती है। गुड्डू मुस्लिम कहां. है? ये भी तो नहीं रॉ एजेंट बन गया है।. बांग्लादेश और वहां से सऊदिया चला गया। तो. अशरफ ये बताने जा रहा था। मेन बात यह है. कि गुडू मुस्लिम. क्या धुरंधर पिक्चर में योगी आदित्यनाथ के. साथ खेला किया गया है पॉलिटिक्स हम सुनते. हैं अमित शाह वर्सेस योगी का वो पिक्चर. में भी है 100% है योगी आदित्यनाथ तो कभी. चॉइस ही नहीं थे अचानक योगी आदित्यनाथ का. नाम आता है अमित शाह को ये खलने लगा तो.
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ 100 सवा सौ भाजपा. विधायक विधानसभा में अपनी ही सरकार के. खिलाफ हल्ला बोलने लगे. कहां मंत्रियों के काम हो रहे हैं कहां. कहां योगी के मन का टिकट दिया जा रहा है।. कहां स्थाई डीजीपी आ रहा है। कहां मुख्य. सचिव अपने मन का बनने दिया जा रहा है।. दोनों तरफ से चल तो रही है।. अखिलेश यादव के सपनों के बीच में योगी. आदित्यनाथ ज्यादा बड़े फैक्टर होंगे या. बहन कुमारी मायावती। आज मैं इस बात को. दावे से कह सकता हूं कि इस बार इस चुनाव. में सबसे बड़ी वोट कटवा पार्टी अगर कोई.
होगी तो बहुजन समाज पार्टी होगी। अतीक. अहमद के मरने के पीछे असली कारण क्या था? और कौन तीन लौंडो को भेजा था कि जाके गोली. मार।. ब्नोई गैंग से वेपन आया है। जितेंद्र गोगी. वो व्यक्ति था जो बताता कि सुपारी आई कहां. से? इन लड़कों को सिर्फ इतना मालूम था कि. इन पर गोली नहीं चलेगी। तो तीन थ्योरी है।. धुरंधर में एक खरानी ब्रदर्स थे। तो पैसा. आता था नेपाल के थ्रू इंडिया।. नेपाल के थ्रू 11,000 करोड़ का. फ्रीक्वेंसी इंडिया।. मैं वो व्यक्ति हूं देश का पहला जिसने यह. बताया है कि देश में नेपाल के रास्ते कोटा.
और पेशावर में छपवाकर नकली नोट भेजा गया. है 500 का। ऑपरेशन कैसे होता है यह बता. रहा हूं आपको। आपकी किताब आई कसाईवाड़ा. कानपुर की मशहूर तवायफ कौन है. रजीजन भाई. रजीजन भाई 1857 की एकमात्र जासूस थी पेशवा. नाना राव की. ये कहानी सबसे बड़ी बात ये है कर्नल जेम्स. स्मिथ नील की है जिसने हैवलॉक के साथ. मिलके 63 दिनों में लगभग लगभग 60-7 हजार. लोग उसने हिंदुओं को गाय का मांस खिलाया.
फिर फांसी पर चढ़ाया. उसने मुसलमानों को सूअर मुंह में ठूस के. खिलाया और फिर तोपों के आगे बांध दिया।. क्या यह आरोप था? क्योंकि अतीक को निपटाना. था या यह वास्तविकता के नजदीक था? धुरंधर. बहुत शानदार पिक्चर है। यह मैं पहले कह. रहा हूं। 80 सेकंड का डिस्क्लेमर इस कहानी. का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई. लेना देना नहीं है। इसके सारे पात्र. काल्पनिक हैं और दर्शकों को सख्त हिदायत. दी जाती है कि वो अपने विवेक का इस्तेमाल.
करें।. हिंदुस्तान उस दौर से गुजर रहा है जहां पर. सच और सिनेमा के बीच की लकीर जो है वो. इतनी धुंधली हो गई है कि कई बार आंखों. देखे पर भी सवाल होता है कि जो देख रहे. हैं वह सच है या सिनेमा और सिनेमा है तो.
इतना असर क्यों है और असर है तो क्या यह. सच से जुड़ा हुआ है? यह चर्चा हिंदुस्तान. में फिर एक बार है क्योंकि एक पिक्चर आई. है धुरंधर। पिछली बार कराची से चली थी। इस. बार आई है इलाहाबाद में जिसे हम प्रयागराज. कहते हैं। अब हिंदुस्तान में लोग कहते हैं. कि भैया दिल्ली की कुर्सी का रास्ता जो है. वो लखनऊ से गुजरता है। इस पिक्चर में. बताया गया कि लखनऊ कुर्सी का रास्ता जो है. वह इलाहाबाद से गुजर रहा था। तो हमने कहा. कि इलाहाबाद की समझ जिसको सबसे ज्यादा है.
और जिसने पिछली बार कायदे से हमको. इलाहाबाद समझाया था उन्हें पकड़ लेते हैं।. मनोज राजन जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका।. थैंक यू शुभंकर भाई।. आपकी किताब नई किताब आई है कसाईवाड़ा।. हां।. कसाईवाड़ा. की कहानी अपने आप में अद्भुत है। पिछली. किताब एक तो आपकी बड़ी जबरदस्त चली।. बिल्कुल।. हमारे पडकास्ट के बाद हमने सुना कि और चल. गई।. हां।. और अभी धुरंधर के आने के बाद वर्ल्ड. यूनिवर्स में वो 300 400 वर्ल्ड यूनिवर्स.
में बुक के वर्ल्ड यूनिवर्स में 300 नंबर. पे आ गई है। पसारी बसारी फिर से आ गई।. इंडियन रेटिंग में तो फिर ऊपर आ गई है।. फिर वो नंबर एक हो गई है। वो तो अलग बात. है। दुरंगत टू आने के दो दिन बाद से।. हां।. लेकिन हां. वो किताब फिर ऊपर आ गई और कसारी मसारी ने. तो मुझे लगता है कि जैसे अतीक की बुआ बना. दिया है। नानी बना दिया है कि अतीक के. बारे में अगर बताना है तो मुझे ही बताना. है। तो इस तरीके से कसारी मसारी बॉस भगवान. का दिया हुआ बहुत कुछ है कसारी मसारी में।. अब ये नई किताब आई है कसाई बाड़ा।.
मतलब अतीक अहमद मरते-मरते आपको राजा बना. गए।. अतीक अहमद मरतेमरते मुझे हालांकि किताब. पहले भी लिख चुका था। लेकिन मरतेमरते. मुझे यह बता गए कि तुमने अगर कुछ लिखने के. लिए जर्नलिज्म छोड़ा था तो वो जाया नहीं. गया। वो जाया नहीं गया। उसने मुझे एक. मैजिक कारपेट दे दी। उस किताब ने पंख मेरे. दे दिए जो मुझे पूरा देश विदेश सब घुमा. रही है। और हर जगह मैं स्टोरी टेलिंग के. जो शोज़ करने जाता हूं उसमें सबसे बड़ी बात.
दो लोगों की होती है। एक योगी आदित्यनाथ. और एक अतीक अहमद। वो अतीक अहमद को सुनना. चाहते हैं। उसकी ब्रूटिटी, उसका जो कसाईपन है, उसकी जो दरिंदगी है, वो सुनना चाहते हैं। कैसा था अतीक? कैसे. मारा गया? तो मैं इनको जाके बताता हूं कि. अरे ये अतीक अहमद के जो यजीद था, जो रावण. था बात सिर्फ उतने की नहीं है। यह बात इस. बात की भी है. हम. कि आखिर में अतीक अहमद मारा कैसे गया? तो.
52 दिन की कहानी उठाई। उमेश पाल का मर्डर. और उसके बाद 52 दिन और 52वें दिन अतीक का. मर्डर।. तो हम अतीक से शुरू करते हैं। फिर हम कसाई. हां बिलकुल बिलकुल. एक पिक्चर आई धुरंधर आपने देखी धुरंधर. धुरंधर देख ली पहले दिन पहला शो. अब धुरंधर में अतीक अहमद को दर्शाया गया. है। धुरंधर जो पहली बार आई थी वो कराची की. थी। लेकिन अब जब कराची से धुरंधर इलाहाबाद. पहुंची तो हर आदमी के मन में सवाल यह था. कि भैया अतीक इतना बड़ा आदमी थे। हम जानते.
थे कि बाहुबली हैं, अपराधी हैं लेकिन. आतंकवादी थे।. आपने कहीं से मास्क किया होगा। हमने नहीं. किया लेकिन हमने उसका पढ़ाई लिखाई सारी. मीडिया की है।. मीडिया की इंजीनियरिंग की है।. हां।. इंटर्न हुए होंगे।. हां।. फिर डेस्क पे आए होंगे। फिर एंकर हुए. होंगे और आज पडकास्ट कर रहे हैं। आज के इस. पडकास्ट को मतलब पडकास्टर शुभांकर को चौ. करके किनारे कर देते हैं। तो जब पीछे की.
हिस्ट्री में जाएंगे तो ये पाएंगे कि आज. तक में एंकर थे ज़ी में थे। उसके पहले. इंजीनियरिंग करी. टीवी में थे।. टीवी उसके ये सब बहुत चैनल में थे।. ये करते रहे। तो हिस्ट्री आपकी चलती जाएगी. ना पीछे। और जब बहुत रूट में घुसती जाएगी. तो गोंडा मिलेगी जा के। हम्।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. अतीक अहमद अगर आईएसआई का एजेंट था। अतीक. अहमद अगर लश्कर तैयबा से संबंध रिश्ते. रखता था। अतीक अहमद अगर फेक करेंसी जो. कोटा और पेशावर में छप रही थी। अगर उसका.
धंधा करता था और हथियार मंगाता था। तो लेट. 60ज का पैदा हुआ है। 77 में उसने पहला. मर्डर कसारी मसारी में किया है। उसके बाद. चार से पांच बार का विधायक रहा है। एक बार. का सांसद रहा है। एक वोट उसने जाकर जेल से. जाकर यूपीए गवर्नमेंट को दिया है और. मनमोहन सिंह की सरकार बचाई है। उस अतीक ने. 2017 में भी समाजवादी पार्टी यानी शिवपाल. समाजवादी पार्टी के शिवपाल ने तब टिकट.
डिफ्लेक्शन चल रहा था फैमिली में तब फिर. टिकट हासिल किया था. उस अतीक के बारे में यह सवाल कि वो आईएसआई. का एजेंट था या उसके लश्कर तैया संबंध थे. या हथियार थे या नकली नोट था ये एक फिल्म. आने के बाद ही क्यों उठ रहा है क्या इसके. पहले किसी एंकर को नहीं पता था किसी. रिपोर्टर को नहीं पता था क्या किसी आईबी. के रडार पे ही नहीं आया वो? क्या किसी रॉ. के नोटिस में ही नहीं आया? मैं एक छोटा सा.
किस्सा बता दूं क्या? जी।. शबुद्दीन हुआ करते थे।. शबुद्दीन के खिलाफ उस वक्त के एक डीजीपी. हुआ करते थे बिहार के जिनका नाम था डीपी. ओझा।. डीपी ओझा ने एक रिपोर्ट तैयार की शबुद्दीन. के खिलाफ जिसमें बताया गया कि वो आईएसआई. से संपर्क में है। वो पाकिस्तान से संपर्क. में है और हथियार वगैरह वहां से मंगाता. है। राबड़ी देवी की गवर्नमेंट थी। व्हेन. आई से राबड़ी देवी देन लालू। व्हेन आई से.
लालू देन कांग्रेस।. राबड़ी देवी ने वो रिपोर्ट ट्रैश कर दी।. कूड़ेदान में फेंक दी। ऐसी तैसी में गई वो. रिपोर्ट।. और साहब डीपी ओझा साहब डीजीपी पद से हटा. दिए गए। ऐसा. जैसा हमने शबुद्दीन के जीवन पर जब जीवनी. की थी अपने YouTube पर तो उसमें हमने. विस्तार से बताया था।. क्या बात है? क्या बात है? तो वो जो. डीजीपी ने एक रिपोर्ट लिखी थी और एक. मुख्यमंत्री ने उसको ट्रैश कर दिया था।. अतीक के लिए किसी सिपाही ने भी ऐसी.
रिपोर्ट नहीं लिखी। किसी धूमनगंज थाने, किसी चकिया ने, किसी पुलिस ने, किसी. एसटीएफ ने, किसी आईबी ने, किसी रॉ ने भी. नहीं लिखी। जिस दिन अतीक ने धूमनगंज थाने. में. जब उमेश पाल के मर्डर का वेपन रिकवर कराया. है कसारी मसारी के खंडहर से और उसी की रात. उसकी हत्या हुई है उससे पहले जो धूमनगंज. में उसने जो बयान दिया है पूछताछ में तब.
उसने बताया कि हां मैं आईएसआई जैसा बयान. बताता है कि हां आईएसआई से हमारे संपर्क. है लश्कर तैयबा से हैं हथियार भी है नकली. नोट तो फिर भी नहीं है उस उस अह रिपोर्ट. में नकली नोट तो फिर भी नहीं है। तो मेरा. सवाल यह है कि क्या अतीक जिसके ऊपर पौने. 200 मुकदमे हैं? जिसने 50ों की हत्या की. होगी। जिसने एक सिंग विधायक राजू पाल को 5. कि.मी. दौड़ा दौड़ा कर गोली मारी थी।. जिसने अपने टाउनशिप की डिजाइन को ठीक करने.
के लिए मदरसे की जमीन कब्जा करनी चाही और. जब नहीं दी मदरसे ने तो वहां की 12 14 साल. की बच्चियों के साथ उसके गैंग ने गैंगरेप. किए।. वो अतीक वो अतीक जिसने अपनी ही रिश्तेदार. रिश्ते में लगने वाली बहन अलकामा का ऑनर. किलिंग कराई थी क्योंकि एक ब्राह्मण एक. पंडित ड्राइवर के साथ भाग गई थी। वही. [नाक से की जाने वाली आवाज़] अतीक जिसने. मदरसा में मुसलमान को नहीं छोड़ा वैसे. हिंदुओं को नहीं छोड़ा। उस अतीक के बारे.
में कभी किसी को यह पता ही नहीं चला।. जिसने चांद बाबा की छाती में रखकर गोली. मारी थी अपने ही गुरु को उसके बारे में. कभी पता नहीं चला कि वो आईएसआई था। अगर. उसने पूछताछ में 2023 में वो बयान ना दिया. होता तो साहब अगर हम पाकिस्तान रोज एक फोन. मिलाएंगे ना तो हम निर्दोष भले हो लेकिन. रडार पे होंगे व्हाई ही इज कॉलिंग क्रॉस. बॉर्डर. तो इन सब चीजों को देखते हुए हां अतीक ने. कहा लेकिन इस फिल्म के आने के बाद ये. चर्चा क्यों है अभी तक क्यों नहीं पता चली.
किसी योगी आदित्यनाथ की गवर्नमेंट के किसी. पुलिस अफसर ने यह बात क्यों नहीं बताई कि. हमने जिसको. अतीक से लोगों की फटती थी हमने वो किस्सा. सुना है कि 10 11 जज साहब कैती का केस. गया। 10 जज ने मना कर दिया। 11व ने आके. जमानत दे दी।. जमानत दे दी।. तो जिस आदमी से लोगों की इतनी फटती हो।. इतना डर खौफ दहशत उसकी लेकर हो।. क्या वहां पर मतलब ये फर्जी खबर है? क्योंकि एफआईआर में है। चार्जशीट में. प्रूफ नहीं हुआ। ये हम भी जान रहे हैं।. मेरी प्रशांत कुमार जी से बात हो रही थी।.
हमारे जो डीजीपी साहब हैं जिनको भी धुरंधर. में दिखाया।. धुरंधर में दिखाया गया।. वो बेचारे हमसे कहे कि हमसे परमिशन नहीं. लिया गया। हां लेकिन उनका रोल दिखाया गया. है कैसे कुमार साहब हां कुमार साहब यूपी. में सफाई कर रहे हैं. तो वह भी इस बात का जिक्र कर रहे थे कि. एफआईआर में तो है चार्जशीट में तो था कि. अतीक अहमद का कनेक्शन जो है वो पाकिस्तान. से है लेकिन क्या यह आरोप था क्योंकि अतीक. को निपटाना था. या ये वास्तविकता के नजदीक था आपके ही. सवाल का जवाब मैं दे रहा हूं कि 1975 76.
से क्राइम करने वाला अतीक पांच बार. विधानसभा पहुंचा. एक बार संसद पहुंचा।. उसके बाद 2023 में उमेश पाल के मर्डर के. बाद जब मारा गया तभी वह बयान उसका क्यों. आया? उसके अरे भाई मैंने आपसे जो पूछा ना. मास्क क्यों पूछा कह रहे तब पता लगना. चाहिए कि वहां से मासकॉम किया था। वहां से. इंजीनियरिंग की थी। वहां से तो कोई. हिस्ट्री नहीं मिलती। चलिए क्या कोई डीपी.
ओझा उत्तर प्रदेश में पैदा नहीं हुआ? क्या. किसी पुलिस की रिपोर्ट में अतीक आईएसआई का. एजेंट है लश तबा से जुड़ा हुआ यह बात नहीं. आनी चाहिए थी क्या और क्या उसने इकबालिया. बयान दे दिया पूछताछ में बस तभी हमको. मालूम पड़ा और उस पर भी बातचीत तब हो रही. है जब फिल्म में तीन सीन दिखा दिए गए अतीक. के मैं नहीं कह रहा हूं कि वो नहीं था. लेकिन आया क्यों नहीं ट्रेस क्यों नहीं. हुआ पकड़ा क्यों नहीं गया रडार पे क्यों. नहीं आया मैं असली बात यह कर रहा हूं और. बात मान लीजिए आपने कहा कि अतीक से लोगों.
की क्या हां लोग कांपते थे। पुलिस उसकी. जेब में थी। हां बिल्कुल थी। वो थाने में. फोन मिला के कहता था ए थानेदार जाओ कसारी. मसारी के जंगल में हमन और जग्गा की लाशें. पड़ी हैं। चलो उठा लो जाके उसको और भेजो. पोस्टमार्टम पे। वो अतीक था ना? 13 दिन 13 महीने 5 साल। अटल बिहारी. वाजपेयी की सरकार थी।. 2014 से नरेंद्र मोदी की सरकार है। 2017. से योगी आदित्यनाथ की सरकार है। अगर माना.
कि कांग्रेस ने उसका वोट लिया था। अगर. माना कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस को. समर्थन दे रही थी।. यह सब मानने के बाद भी क्या यह दो. गवर्नमेंट, तीन गवर्नमेंट, चार गवर्नमेंट, पांच गवर्नमेंट जो भारतीय जनता पार्टी की. थी क्योंकि इंटेलिजेंस और रॉ तो सेंट्रल. एजेंसीज है। उनको भी नहीं समझ में आया।. मतलब आपका बात सुन के फिर मेरे मन में और. दर्शक के पॉइंट ऑफ व्यू से आ रहा है कि. क्या अतीक अपराधी था लेकिन आतंकवादी नहीं.
था। आतंकवादी का लेबल बाद में चिपका दिया. गया।. हां। क्योंकि वो उसने उसी दिन बयान दिया. है जिस दिन उमेश पाल के वेपन रिकवर कराए. हैं। उसी दिन का बयान है। उसके पहले ना. आतंकवाद था ना आईएसआई था ना लश्कर तैयबा. था ना नकली नोट थे ना हथियारों की सप्लाई. थी। उसने बताया अशरफ का बयान है. हम. कि ड्रोन से हमको हथियार आए थे और हम लेने. गए थे। बताया उसने. मेरा सवाल मैं ये नहीं कह रहा हूं कि उसने. बयान में नहीं कहा। कहा मेरा सवाल.
पाकिस्तान से संबंध रखना, सूडान से संबंध. रखना, सीरिया से संबंध रखना, हमास से. संबंध रखना, हिजबुल से संबंध रखना ये तो. हो ही नहीं सकता कि एजेंसी के रडार से बच. जाए। कश्मीर से कन्याकुमारी गुजरात से ले. बंगाल तक एक टच्चा सा स्लीपर सेल भी स्कैन. में होता है। और अतीक अहमद तो खून के अंदर. ऊपर कद्दर पहने हुए था। वो कद्दर सोनीलाल. पटेल ने भी पहनाई। वो कद्दर समाजवादी. पार्टी ने भी पहनाई। वह उसकी बीवी को मेयर. का टिकट देके मायावती ने भी पहनाई और.
सोनीलाल पटेल कौन अनुप्रिया पटेल के पापा. पिता तो मतलब अतीक को आतंकवादी का लेबल. इससे लगा दिया गया या लगाना आसान था. क्योंकि वो मुसलमान था और अपराधी था अंतिम. समय पे आखिरी वक्त में. कि जब वो कमजोर हो गया मुसलमान था अपराधी. था बड़ा अपराधी था जो मुसलमान भी था इसलिए. उसका पाकिस्तान कनेक्शन दिखाना जोड़ना. आसान हो गया. आसान हो गया और एक चीज़ लेकिन इंगेजमेंट. फार्मिंग एक चीज होती है. एक इंगेज मेंट फार्मिंग होती है। अतीक. जैसे आप तो इतने समय से हो और मेरे ख्याल.
से आप उस समय स्टूडियो में थे।. हां हां मैंने ही वो खबर पहली बार पढ़ी. थी।. पढ़ी पढ़ी वैसा विजुअल देखा कभी? नहीं।. नहीं देखा। दोनों भाई हथकड़ी में. हम. तीन लड़के मीडिया के भेष में रिपोर्टर के. भेष में और जिगैना से गोली मार रहे हैं 95. लाख की जिगैना से गोली मार रहे हैं. ऑटोमेटिक पुलिस के हाथ होलस्टर तक नहीं जा. रहे हैं वो पुलिस उत्तर प्रदेश की जो अब. तक 3600 से ज्यादा हाफ एनकाउंटर कर चुकी.
है। हाफ एनकाउंटर इसलिए कह रहा हूं. होलस्टर में हाथ डालते पैर में ही गोली. मार देते। नहीं मारी। पकड़ा भी कब? जो. पीछे से पकड़ने वाला दृश्य आप देखते हैं, पकड़ा भी कब? जब उन्होंने सरेंडर कर दिया. अपनी पिस्तल फेंक के। जय श्री राम। जय. श्री राम। यह सीन समझिए पूरा। अतीक का. अपना टेक्सचर समझिए। उसकी बॉडी लैंग्वेज. में साफा पहने, लुंगी पहने, बंडी पहने।. बोलने का अलग तरीका, यह मूछे, एक सेंटेंस. में चार गाली और ऐसा मर्डर। चार पांच बार. का विधायक, एक बार का सांसद। ये जब सब कुछ.
सामने आता है ना तो एक कररेक्टर सामने आता. है कि यार ये बड़ी चर्चा में है।. एब्सोल्यूट सिनेमा. एब्सोल्यूट सिनेमा उससे इंगेजमेंट. फार्मिंग के तीन सीन अतीफ के रख दिए गए वो. भी अतीफ के नाम से। वजह. आप शुरू में जाइए तो आपको प्रोडक्शन हाउस. के डिस्ट्रीब्यूटर्स के मेकर्स के लोगो. देखने के बाद मीडिया पार्टनर, ओटीटी. पार्टनर, सेटेलाइट पार्टनर देन लगभग 80. सेकंड का एक डिस्क्लेमर है। इस कहानी का.
किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना. देना नहीं है। इसके सारे पात्र काल्पनिक. हैं और दर्शकों को सख्त हिदायत दी जाती है. कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल करें। यानी. आप नॉनफिक्शन स्टोरी फिक्शनल स्टोरी दिखा. रहे हो। बीच में आप नॉनफिक्शन भी इस्तेमाल. कर रहे हो।. इसको यहां पर रोकता हूं आपको मैं। इसको. सीधा कोट करता हूं मैं। धुरंधर पिक्चर. मैंने भी देखी। आपने भी देखी, कई लोगों ने. देखी। आपने अतीक अहमद पर किताब भी लिखी. है। अब धुरंधर पिक्चर के शुरू में.
डिस्क्लेमर है कि यह फिक्शनल स्टोरी है।. लेकिन जब आप अंदर देखते हैं तो आपको हर. वक्त एक असली घटना के इर्द-गिर्द कहानी. चलती नजर आती है। जिसमें क्रिएटिव लिबर्टी. भी ली गई है कि कई लोग पहले मर गए थे।. उनको लंबा खींच दिया गया है। उसको. क्रिएटिव लिबर्टी सिनेमा सिनेमेटिक आप एक. कह लीजिए कि एक्सटेंशन ले लिया। बिल्कुल. बिल्कुल। लेकिन अतीक अहमद वाला जो किस्सा. है या धुरंधर फिल्म जो है आपको लगता है कि. ये रियलिटी के आसपास है? हिस्ट्री से थोड़े. सबक लेने चाहिए क्योंकि पल भर को वही. मैंने कहा कि सिनेमा और रियलिटी में लकीर. बड़ी धुंधली हो गई है।.
बिल्कुल हो गई है। दाऊद को लेके खबर आती. है कि जहर दिया गया था बीच में ऐसी खबरें. हमने पढ़ी। कई सारे अननोन लोगों ने मारा. पाकिस्तान में गैंगस्टर्स को। कई सारे और. भी खबरें जो उसमें दिखाई गई है सब है भी. लेकिन फिर फिक्शनल भी है। धुरंधर देखने के. बाद एक पत्रकार के तौर पर एक राइटर के तौर. पर जिसने अतीक अहमद के ऊपर किताब लिखी आप. उस पिक्चर को फिक्शनल मानते हैं, रियलिटी. के करीब मानते हैं। इंस्पिरेशन लेने वाली. है या खाली मजा लेके छोड़ देने वाली है? आप किस टीम का करते हैं? एलएस.
क्रिकेट टीम जो है बहुत सारी टीम हां जो. तो इस देश का सबसे बड़ा बुखार क्या है? क्रिकेट। हां। ठीक है। क्रिकेट में भी 104. वाला बुखार कौन सा है? जब भारत और. पाकिस्तान खेल रहे होते हैं। ये थ्रस्ट. है। अब आइए पाकिस्तान। वो भी ऑपरेशन. सिंदूर के बाद। वो पाकिस्तान हमारे लिए. सबसे बड़ा थ्रस्ट है। सर. सरवर अली क्या नाम है उसका? अशरफ अली।.
पाकिस्तान के छत पर के सर पर तरपाल तब आई. थी जब 70 करोड़ हमने दिए थे ताली तो. पाकिस्तान जिसकी टीम को भी हम लगभग जंग की. तरह मार देना चाहते हैं क्रिकेट टीम को भी. हां वो मतलब उनको. वो मजा है गरियाने में हां गरियाने में. मजा है तो पाकिस्तान पाकिस्तान के बाद. दाऊद इब्राहिम हर आदमी जानना चाहता है. क्या हुआ दाऊद का वैसे ही जैसे ओसामा बिन. लादेन मार तो दिया गया यार यार समुद्र में.
फेंका गया कि अभी जिंदा है थ्योरी है।. देखना चाहता है आदमी। तो दो चीजें हो गई।. पाकिस्तान हो गया, दाऊद इब्राहिम हो गया।. हमने जाके मारा, हमारे एजेंट ने मारा। और. तीसरी चीज हो गई दिल्ली यूपी टेरिटरी।. दिल्ली यूपी टेरिटरी बॉलीवुड में जिसने. जीत ली उसकी फिल्म जीत गई। वो दिल्ली यूपी. टेरिटरी में सबसे मोस्ट पावरफुल करैक्टर. इस समय कौन था? अतीक अहमद। फिर वही बात है. उसका फिगर, उसका डायलक्ट, उसके वेशभूषा.
उसका मर्डर का सीन उन सबको देखते हुए एक. शानदार एक शानदार इंगेजमेंट फॉर्मिंग बहुत. शानदार पिक्चर है। ये मैं पहले कह रहा. हूं।. बहुत शानदार पिक्चर है। उसमें 80 सेकंड का. डिस्क्लेमर. आपको हर चीज से बरी कर देता है। लेकिन अगर. कहीं आ रहा है उसने उस सच्ची स्टोरी को. फिक्शनल कर दिया।. लेकिन नरेंद्र मोदी जब उसमें आते हैं तो. वो नॉनफिक्शनल हो जाती है।. हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. अतीक का मसला आता है।.
लेकिन योगी आदित्यनाथ मिट्टी में मिला. देंगे इस माफिया को। कहां चले गए? कहां. चले गए? गायब हो गए। योगी आदित्यनाथ यहां. भी पॉलिटिक्स हो गई है योगी आदित्यनाथ के. साथ। यहां भी पॉलिटिक्स हो गई है। वो वैसे. भी पीएम फेस बनते जा रहे हैं। उनके साथ. यूं भी पॉलिटिक्स चल रही है। यहां भी. पॉलिटिक्स हो गई कि योगी आदित्यनाथ को. बाहर करो। अजीत डोबाल आएंगे। सान्याल साहब. आएंगे और किसी प्रशांत कुमार यानी कुमार. साहब से कहेंगे कि ये अतीक है। ये आतिफ. है। ये नकली नोट 4 600 करोड़ आने वाला है।. गजब सवाल दिया आपने हमको। सारा सारा मजा.
इकट्ठा है इसमें पूरी। पूरे फलों की एक. शानदार थाली लगी हुई है। एक शानदार टोकरी. बनी हुई है।. क्या धुरंधर पिक्चर में. हां. बहुत हां हां सवाल है ये।. क्या धुरंधर पिक्चर में योगी आदित्यनाथ के. साथ खेला किया गया है? क्योंकि. प्रधानमंत्री को रियल दिखाया गया है।. डोबाल साहब का महिमा मंडन किया गया है।. उत्तर प्रदेश में योगी भी आ सकते थे।. हां।. मिट्टी में मिला दूंगा।. मरा तभी है।. हां। जिसका क्रेडिट यूपी में कई लोग योगी. जी को देते हैं। अतीक के जाने का।.
बिल्कुल ठीक बात है।. लेकिन वहां प्रशांत जी आ गए।. प्रशांत जी आ गए।. ठीक है।. क्या योगी जी का जो पॉलिटिक्स हम सुनते. हैं सेंट्रल वर्सेस यूपी का अमित शाह. वर्सेस योगी का।. बिल्कुल।. वो पिक्चर में भी है।. 100% है। 100% है। योगी आदित्यनाथ तो कभी. चॉइस ही नहीं थे। मनोज सिन्हा को दे दिया. गया था।. हां आपको याद हो गए थे पूजा। बनारस में. मत्थ टेका है। अचानक योगी आदित्यनाथ का. नाम आता है। ढाई साल योगी वन गवर्नमेंट. शानदार चल रही है।. अरे अभी विरोध चलता है। केशव जी आज सीएम. बन जाए केशव जी और केशव जी का पीआरटी बहुत.
तगड़ा है।. वही बता रहा हूं। ढाई साल तक योगी वन. गवर्नमेंट शांति से चलती रही। उसके बाद. हाफ एनकाउंटर एनकाउंटर अतीक वतीक वाला. मसला। बहुत सारे मुस्लिम माफिया गुंडों का. एनकाउंटर हुआ। सब कुछ हुआ। बुलडोज हुई।. गैंगस्टर बदला।. बटोगे तो कटोगे टाइप का मसला चल रहा था. वहां पे और लोग ताली बजा रहे थे। ताली. बजाते बजाते अचानक योगी आदित्यनाथ. नेक्स्ट टू मोदी हो गए।. हम.
पूरे देश में घूमने लगे। बंगाल भी जाएंगे. तो योगी आदित्यनाथ ललकार के आएंगे। गुजरात. भी जाएंगे तो ललकार के आएंगे। हर चुनाव. में योगी आदित्यनाथ ललकार रहे हैं। बात. समझिएगा। लेट मी कंप्लीट।. उस योगी आदित्यनाथ का जब चेहरा पीएम के. तौर पर आया। एक चीज फिर समझा देता हूं।. अटल बिहारी वाजपेई सॉफ्ट लीडरशिप आडवाणी. हार्ड लाइनर जब मोदी आए गुजरात के गोधरा. वाली छवि को लेकर.
आडवाणी सॉफ्ट. आडवाणी सॉफ्ट मोदी हार्ड आज की तारीख में. मोदी सॉफ्ट. मोदी सॉफ्ट योगी हार्ड लाइनर तभी देख. लीजिए कि आज. मोदी सॉफ्ट अमित शाह योगी हार्ड लाइनर. योगी हार्ड लाइनर ठीक है. अमित शाह मोदी. अमित शाह योगी हार्ड लाइनर अब यहां पर. किसको दिक्कत हो रही है अपने उस. इसीलिए नाम ले लिया मैंने।. हां हां मैं मैं ले लेता हूं नाम। उसमें. कोई बात ही नहीं है। अब सबसे ज्यादा. दिक्कत एक आदमी की नेचुरल चॉइस है। जो. बुरे दिनों में साथ रहा, कच्चे पक्के में.
साथ रहा, ऊंचनीच में साथ रहा। जो 376 का. 370 का चेहरा बनता है कश्मीर में। जो किसी. भी मुद्दे का चेहरा बनता है संसद के अंदर. उस अमित शाह को यह खलने लगा के अरे यार तब. योगी वन गवर्नमेंट के आधा कार्यकाल गुजरने. के बाद जब बुलडोजर उठा जब एनकाउंटर्स हुए. तो योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपनी ही सरकार. के खिलाफ 100 सवा सौ भाजपा विधायक.
विधानसभा में अपनी ही सरकार के खिलाफ. हल्ला बोलने लगे। हरीश द्विवेदी जैसा. सांसद अपने ही बस्ती इलाके में धरने पर. बैठ गया। अपने ही कमिश्नर और डीएम के. खिलाफ।. हालत खराब करते चले गए। तमाम खरवार और ना. जाने कितने लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।. ब्राह्मणों ने बैठक कर डाली। सब कुछ सब. कुछ योगी को डिस्टर्ब हो गया। योगी. आदित्यनाथ को एक भी स्थाई डीजीपी नहीं. बनाने दिया गया उत्तर प्रदेश में। उनके मन.
का नहीं स्थाई नहीं बने। अस्थाई डीजीपी वो. अवनीश अवस्थी को मुख्य सचिव बनाना चाहते. थे। लेकिन रिटायरमेंट वाले दिन एक्सटेंशन. देके दुर्गा शंकर मिश्रा को उत्तर प्रदेश. भेज दिया जाता है और दुर्गा शंकर मिश्रा. को दो बार एक्सटेंशन देके मुख्य सचिव बने. रहने काम ही नहीं करने दे रहे हैं। अपने. कोटे के मंत्री हैं बृजेश पाठक, केशव. मौर्या, ए के शर्मा, जयंत. और और बहुत सारे हैं। नितिन अग्रवाल ना. जाने कितने सब अपने कोटे के सारे दे डाले. उनको। मसला कहां से बिगड़ा। जब ए के शर्मा. जो ब्लू वाइट बॉय थे नरेंद्र मोदी के.
गुजरात के आईएस थे उनको भेजा गया योगी वन. गवर्नमेंट में कि इनको डिप्टी सीएम बनाना. है और गृह विभाग देना है। योगी आदित्यनाथ. ने मना कर दिया।. वहां से योगी आदित्यनाथ की मुश्किलें शुरू. होती हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ कहां थे? आखिरकार क्या हुआ उत्तर प्रदेश में? अगर. वही 63 सीटें पिछले चुनाव के बराबर आ गई. होती तो मोदी के एक बगल में चंद्रबाबू.
नायडू और दूसरे बगल में नीतीश कुमार की. बैसाखी नहीं होती।. जैसे यूपी में गड़बड़ हुआ सर।. यूपी में ही तो गड़बड़ हुआ। मैं यूपी की. गड़बड़ी को शुभांकर भाई इसलिए बड़ा कहता. हूं कि यूपी ही भारतीय जनता पार्टी का. इंडक्शन प्रोविंस है। वहीं से बाबरी, वहीं. से राम मंदिर, वहीं से बीजेपी का उदय और. हालत यह कि आप अयोध्या भी हार गए। यूपी भी. हार गए और एक अखिलेश यादव पैदा हो गया।. क्यों? जहां पे संगठन की सरकार भी होती.
है, वहां हम 100 गुना पावर पे होते हैं।. और भगवा तो भाजपा का कलर है। वहां तो. स्वयं भगवा वस्त्रधारी गोरक्षपीठ के महंत. योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री भी हैं। फिर. भी यह हालत हो गई। उसमें एक थ्योरी आई थी. कि दिल्ली कुछ बड़े पत्रकार हैं। उन्होंने. सजेशन दिए थे। इन लोगों को चुनाव लड़ाया. जाए। उनमें से अधिकतर लोग चुनाव हार गए।. दिल्ली ने तय किया था कि यूपी में टिकट. बंटवारे को लेकर जिसमें नाराजगी थी योगी. आदित्यनाथ से। यह सच है।. हां बिल्कुल सच।. वो किसकी हार थी यूपी में? योगी जी की हार.
थी या दिल्ली वालों की हार? दिल्ली वालों की हार थी।. ये दिल्ली वालों को पता लग गया।. दिल्ली वालों की हार थी। तभी तो हर छ. महीने में योगी आदित्यनाथ को हटाया जाता. है। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने भी एक काम. किया है। तुम कहते रहो कि यूजीसी। तुम. कहते रहो कि जातिगत जनगणना। यानी अब हमको. पिछड़ों और दलित की राजनीति में आना है।. वरना आना मुश्किल हो जाएगा। 204 की जो. सरकार आई है। लेकिन योगी आदित्यनाथ कहां. बदलते हैं? उनका बुलडोजर तो रहीम नगर पे. चलेगा और पंत नगर पे रुक जाएगा। तुमने बना.
दो अपने कोटे के मंत्री। वो तो चलाएगा तो. एक आईएएस ना एक ब्यूरोक्रेट। तो जो फाइलों. का भंडार गड्ढा बढ़ता जाएगा। वो वो फाइल. उड़ेगी तो तभी जब ब्यूरोक्रेट उसमें. चिड़िया बैठा लेगा। चिड़िया ही नहीं. बैठाने देंगे तो काम ही नहीं होने देंगे. तुम्हारे जाओ बने रहो मंत्री कोई मंत्री. कुछ काम नहीं कर पा रहा है और दिल्ली. दरबार इस बात को देखता है जब कहते हैं. होने नहीं दे रहे हैं काम नहीं होने दे. रहे काम नहीं होने दे रहे वो भी देख रहा. है कितने रो रहे हैं और कितने धो रहे हैं.
उस योगी आदित्यनाथ की दिल्ली और यूपी की. जो लड़ाई चल रही है अमित शाह से सेंट्रल. बनाम यूपी जो चल रहा है. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. उसको इस फिल्म में भी नहीं दिखाया गया यही. वजह है कि उसमें योगी आदित्यनाथ नहीं थे।. अतीक था। अतीक का मर्डर मर्डर की स्टाइल. यह सब कुछ दिखाया गया। योगी आदित्यनाथ. नहीं दिखाया गया। डोभाल साहब को क्रे. श्रेय चला गया पूरा उसका। अति क्या नाम. है? योगी आदित्यनाथ और अमित शाह। सच में.
एक राइवलरी है या विरोधियों के द्वारा. इसको पोप अप किया जाता है कि थोड़ा नीचा. दिखाया जाए, छेड़ा जाए, रोका जाए क्योंकि. दोनों अपनी-अपनी जगह बीजेपी के मजबूत. स्तंभ है। अमित शाह से बेहतर प्रशासक. बीजेपी को नहीं मिला।. जो जो फैसले उनके दौर में बीजेपी की अगर. आईडियोलॉजी का सोचे वो किसी और ने नहीं. कराए।. और योगी से बड़ा चेहरा मुझे नहीं लगता कि. यूपी में बीजेपी के पास कोई रहा। कल्याण. जी एक जमाने में रहे लेकिन वो आधी अधूरी. सरकारें थी।. वो पूर्ण सरकारें नहीं थी। तो मैं उस. सरकार के पॉइंट ऑफ व्यू से योगी आदित्यनाथ.
को लार्जर देन लाइफ बीजेपी का सबसे बड़ा. चेहरा मान रहा हूं।. मान रहे हैं।. तो बीजेपी जो ना योगी के बिना पूर्ण है ना. ही अमित शाह के बिना. और दोनों पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं।. क्या इंडिविजुअल चॉइससेस चलते हुए एक. दूसरे को छोटा करने के लिए बीजेपी को छोटा. कर रहे हैं? आपने पूछा कि क्या वास्तव में इसमें. सच्चाई है कि योगी आदित्यनाथ और अमित शाह. के बीच कोई झंझट है? हां, है तो कहां मंत्रियों के काम हो रहे. हैं? कहां योगी के मन का टिकट दिया जा रहा. है? कहां स्थाई डीजीपी आ रहा है? कहां. मुख्य सचिव अपने मन का बनने दिया जा रहा. है। दोनों तरफ से चल तो रही है। वो पिछड़ा.
दलित की राजनीति अब करना चाहते हैं। लेकिन. योगी आदित्यनाथ का ताजा बयान है। उर्दू. बोलने वाले कठमूल्य होते हैं। बाबरी अब. कहीं नहीं बनने देंगे। बटोगे तो कटोगे।. उनका स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स वही चल रहा है।. वो ध्रुवीकरण वो हिंदुत्ववाद वो भगवा वो. उसको लेकर चल रहे हैं। उनको इससे मतलब. नहीं। देखिए गौर करिए सर।. नरेंद्र मोदी को योगी को मैनेज करने के. लिए का लखनऊ आना पड़ता है और उनके कंधे पर.
वो हाथ रखते हैं। फोटो सेशन होता है और यह. बताया जाता है कि बिटवीन योगी एंड मोदी. बिटवीन यू बिटवीन यूपी एंड दिल्ली सब. चंगासी ऑल इज वेल। यह फोटो सेशन कराना. पड़ता है। लेकिन आपने एक बात कही कि क्या. यह विपक्षी उड़ाते हैं? विपक्ष में तो. राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव बहुत कुछ. कहते रहते हैं। उनके उड़ाने से क्या होता. है? उनके उड़ाने से कुछ नहीं होता है।. विपक्ष को भूल जाइए। यह जो पक्ष है ना.
इसके भीतर विपक्ष बैठा हुआ है। इस पक्ष. में ही विपक्ष है। एक पक्ष चाहता है कि. दिल्ली की चले और जो उसका विपक्ष है वह. चाहता है कि योगी की चले। योगी हटधर्मी भी. हैं। योगी है ना. वो अपने ही तरीके से चल रहे हैं। उनका. अपना ही तरीका है और उन्होंने भी इस. चैलेंज को स्वीकार कर रखा है। तो यह पक्ष. के अंदर बैठा जो विपक्ष है वही सारी चीजें.
करा रहा है। वही 2027 में चुनाव है।. हां है।. योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी. लड़ेगी। क्योंकि मैं हर छ महीने खबर पढ़ता. हूं कि अब की भैया केशव जी बना दिए गए. मुख्यमंत्री। अबकी केशव मौर्या को दे दिया. गया। आपकी केशव मौर्या की अगवाई में केशव. मौर्या जी अमित शाह के करीबी हैं जो. प्रत्यक्ष तौर पर एक पत्रकार या एक जनता. होने के नाते यूपी के मुझे नजर आता है। हम. योगी जी अगवाई में लड़ेंगे। आज तक दो. गवर्नमेंट आ चुकी है। क्या कभी भारतीय. जनता पार्टी की तरफ से यह घोषणा हुई कि.
मुख्यमंत्री का चेहरा योगी आदित्यनाथ है. और हम योगी आदित्यनाथ के चेहरे पे चुनाव. लड़ रहे हैं। दो चुनाव तो हो गए। योगी. आदित्यनाथ को मतलब वो वो तो नहीं बनाया. गया। सीएम का चेहरा बना के तो चुनाव नहीं. लड़ा गया।. पिछला वाला तो योगी जी के नाम पे. नाम पर था। मैं भाजपा की घोषणा की बात कर. रहा हूं।. पहला वाला तो चलिए उनको मिल गया था।. आरएसएस के. दूसरा चुनाव भी नहीं बताया गया कि. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दोबारा. लाने के लिए आप केशव मौर्य से कभी पूछ. लीजिएगा।. हम. वो कहेंगे आप पूछेंगे क्या अगला चुनाव भी. योगी अब तीसरी बार क्या अगला चुनाव योगी.
पार्टी तय करेगी।. पार्टी नहीं पार्टी नहीं करेगी। पार्टी. लड़ेगी।. हां पार्टी लड़ेगी।. पार्टी लड़ेगी।. चेहरा मोदी जी का होगा।. चेहरा मोदी।. चेहरा मोदी जी का होगा। योगी का नाम नहीं. लेंगे। भाई बनता है। केशव मौर्या का बनता. है। केशव मौर्य उस समय अध्यक्ष थे। अरसे. बाद तंपिंग मेजॉरिटी से भाजपा की सरकार. आई। उनको मुख्यमंत्री बनना था। उनको. मुख्यमंत्री बनना था। नहीं बने। किसको कसक. नहीं होगी? हर किसी को कसक होगी। पंचम तल. तब केवल सेक्रेट एनएक्सी हुआ करता था।.
पंचम तल पे कमरे बने। उस कमरे में जो योगी. आदित्यनाथ का कमरा था यानी माफ़ कीजिएगा।. मुख्यमंत्री का कमरा था। उस कमरे में जाकर. केशव मौर्य आ गए। उस कमरे को लेकर झंझट. हुआ। कुर्सी खींचातानी हुई है भाई। किसके. मन में कसक नहीं हो गया? क्या केशव मौर्य. ने कम मेहनत की थी क्या? क्या केशव मौर्या. मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए था? पार्टी. ने क्या किया? एक अलग बात है। केशव मौर्या. के मन में तो आ सकता है ना। मनोज राजेंद्र. त्रिपाठी के मन में आ सकता है कि वो सलीम. जावेद बने। बन सकता है। मैं राइटर हूं।.
मैं सोचूंगा हां मैं सलीम जावेद जैसा बन. जाऊं। बन जाऊंगा तब ना। लेकिन. महत्वाकांक्षा तो मेरी है ना। सपना तो. मेरा है ना। यही वजह है कि वही केशव मौर्य. हमेशा कहते हैं सरकार से बड़ा संगठन है।. योगी आदित्यनाथ सदन के अंदर खड़े होकर. कहते हैं कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं. हो सकता अभी मुक्तेश्वरानंद के लिए। लेकिन. केशव मौर्य कहते हैं भगवान श्री. शंकराचार्य जी से मेरा प्रणाम है। मैं. उनके चरण छू के कहता हूं कि जाएं और स्नान. करें संगम।. बट एक प्रैक्टिकल भी अगर देखा जाए आप यू.
मे लाइक योगी यू मे डिसलाइक योगी। डोंट यू. थिंक कि योगी आदित्यनाथ भी धुरंधर जैसे ही. हैं कि आप पिक्चर देखने जा रहे हो. चाहे गरियाने के लिए चाहे तारीफ करने के. लिए. योगी आदित्यनाथ से बड़ा चेहरा बीजेपी के. पास आज नहीं है जो शायद प्रधानमंत्री मोदी. के बाद देश में सबसे ज्यादा जिनकी डिमांड. है अगर मैं बीजेपी सपोर्टर्स के पॉइंट ऑफ. व्यू से बात. जो शायद प्रैक्टिकली केशव मौर्या जी के. पास विथ ऑल ड्यू रिस्पेक्ट कि उनके पास. कास्ट वोट अपना बहुत ज्यादा है। उन्होंने.
पार्टी के लिए अच्छा काम किया। 2017 के. चुनाव में उनके लीडरशिप में चुनाव लड़ा. गया या अमित शाह जी जिन्होंने बीजेपी के. सारे कोर इश्यूज को सॉल्व कर दिया और. बीजेपी के सबसे बड़े स्तंभ है जिनके बारे. में आता है।. बट पॉपुलैरिटी वाइज. योगी आदित्यनाथ इस फार मोर पॉपुलर।. ये आपको लगता है? बिल्कुल लगता है।. क्योंकि मैं देश भर में ट्रेवल करता हूं. या मैं सोशल मीडिया जब पढ़ता हूं मुझे ये. लगता है।. मैं जितनी भी जगह पूरे देश से लेके दुबई. या जहां भी गया हूं। मैंने जितने भी. स्टोरी टेलिंग के शो किए तो आयोजक इस बात. के लिए जरूर फोन करता है कि सर हम 15 मिनट.
आपसे योगी आदित्यनाथ के बारे में जरूर बात. करेंगे। यानी उसपे बात होनी चाहिए। चाहे. मैं कोलकाता गया हूं, पंजाब गया हूं, महाराष्ट्र गया हूं, गुजरात गया हूं, कश्मीर गया हूं, कहीं भी गया हूं। हर जगह. योगी आदित्यनाथ पे 10 मिनट 15 मिनट सबको. बात करनी है। मैं मानता हूं कि योगी. आदित्यनाथ से बड़ा पॉपुलर चेहरा नहीं है।. लेकिन गौर करिए।. यही भारतीय जनता पार्टी अब योगी आदित्यनाथ. के पैरेलल एक चेहरा तैयार कर रही है।. कौन? हेमंत विश्वा शर्मा।. बट वो नॉर्थ ईस्ट से आते हैं।. ओके ओके।. नॉर्थ ईस्ट की पॉपुलेशन इन कंपैरिजन कम.
है। मैं भी देख रहा हूं कि कहीं सरकार. गिरानी है तो वो असम जा रहे हैं। अब असम. में गेस्ट हाउस में बुलाया जाता है। सारे. फैसले असम से होते हैं।. हेमंता इज़ अगेन अ वेरी पॉपुलर मास लीडर इन. नॉर्थ ईस्ट। मैंने उनका जलवा नॉर्थ ईस्ट. में असम में जब जब वो मुख्यमंत्री नहीं थे. तब भी देखा था कि सर्वानंद सोने वाली. गाड़ी में चार गाड़ी निकलती थी और विश्व. शर्मा निकलते थे लोग कहते थे असली सीएम ये. है 20 गाड़ी निकल रही है जलवा उनका देखा. है मैंने बट अगेन यूपी 80 लोकसभा सीटें. मैं आपसे कह क्या रहा हूं एक चेहरा विद इन. पार्टी तैयार किया जा रहा है.
जवाब देने के लिए किसको योगी आदित्यनाथ को. योगी आदित्यनाथ इस मोर पॉपुलर आपने कहा कि. हेमंत विश्वा शर्मा नॉर्थ ईस्ट के नेता है. मुझे बताइए नरेंद्र मोदी कहां के नेता थे।. गुजरात. गुजरात के थे ना? बट ही वाज़ पॉपुलर इन इंडिया? ना। पर गुजर पॉपुलर इन इंडिया जब राजनाथ. सिंह ने उनको प्रधानमंत्री पद का कर दिया।. हां, पॉपुलर थे।. 2010-11 से. पॉपुलर थे पर फिर भी योगी आदित्यनाथ के. बराबर नहीं थे।. हां। फिर भी योगी आदित्यनाथ के बराबर नहीं. थे। लेकिन उनको गुजरात से उत्तर प्रदेश. आना पड़ा और बनारस को चुनना पड़ा। ठीक है?
अब वहां से हैं वो। अब वो उत्तर प्रदेश के. जनप्रतिनिधि हैं। ओके है। जैसे मुझे मैं. एक छोटी सी घटना बता रहा हूं। 2011 या 12. की बात है। मैं गोंडा में था। हम. और मैं मेरे घर के बगल में एक नाई की. दुकान है।. हम. नाई की दुकान ऑफ कोर्स माउंटेन की है। तो. अब वो कौन से मुसलमान है पता नहीं क्योंकि. पहले तो मुझे सारे मुसलमान एक ही लगते थे।. बाद में शिया सुन्नी और उनके. डिस्क्रिमिनेशन दिखाई पड़ा। पसमंदा. उसमें बीजेपी वाले कुछ रहे तो मुझे उस. मुझे नाम उस उसके नाम को नहीं पता मुझे।. लेकिन मैं एक जनरल स्टेटमेंट दे रहा हूं।.
तो मैं नाई की दुकान पे गया। 2011 या 10. की बात है ये। उस वक्त पॉलिटिकल चर्चाएं. बहुत तेज हो गई थी देश में। हम सब बड़ी. पॉलिटिकल बातें करते थे। 2010 के बाद से. 14 तक हमने खूब देश में सबने पॉलिटिक्स की. बातें की।. तो नाव की दुकानें होती है जहां पर आप. अखबार पढ़ते हैं।. हां।. टीवी पे न्यूज़ देखते हैं, छोटे शहरों में और आप बैठ के गप लड़ाते. हैं। चार, मायावती, अखिलेश, मुलायम लालू. यही चलता था वहां।. बिल्कुल चलता था।. तो उसमें उसने हमसे कहा कि भैया क्या नाम.
है? गुजरात में बहुत काम हुआ है।. हां।. और गुजरात वाले ही अगर पीएम बन जाएंगे तो. मजा आ जाएगा।. हां। तो मैंने कहा तुमको कैसे पता ससुर? कहने भैया हम सुने हैं। हां. तो हमको यह समझ में आ गया। अब जब मैं पीछे. मुड़ के देखता हूं जब प्रशांत किशोर के. इंटरव्यूज देखता हूं कि हमने 2009 से ही. एक मार्केटिंग कैंपेन स्लोली ग्रेजुअली. शुरू कर दिया था।. ठीक बात है।. एक दिमाग पे फीड करना।. ठीक बात है।. और वो फीड असर कर गया था।. एक मुस्लिम लड़के ने मुझसे ये कहा कि. नरेंद्र मोदी को वो देखना चाहता है।.
हम. प्रधानमंत्री के तौर पर. क्यों? उसका लॉजिक था कि भैया गुजरात में. बहुत काम हुआ है।. ये गुजरात मॉडल हमारे दिमाग में डाल दिया. गया था। एंड देन ही वाज़ होल हार्टली. वेलकम। और जब वो आखिरी बार जीते थे गुजरात. में तो वहीं से कैंपेन दिया गया कि अब. अगली बार दिल्ली और फिर वो पूरा दिख गया. जो मुझे आज योगी आदित्यनाथ में दिखता है।. उदाहरण के तौर पर मैं 2019 दिवाली में गया. था।. तो योगी जी की टीम ने हमें बुलाया था. कि आप आइए दिवाली कवर करने के लिए। तो. मुझे ये रियलाइज हुआ कि जब मैं वहां गया. तो एक तो सारे टीवी चैनल्स गए थे हम.
जो नेचुरल दिवाली कवरेज करते हैं।. बिल्कुल. एक कवरेज जो थी वो थी स्पेशली पत्रकारों. को बुलाने की जिसमें पत्रकारों को योगी. आदित्यनाथ जी की टीम ने बुलाया था।. हम. हमारे रहने का, हमारी गाड़ी का हमारे सबका. इंतजाम किया गया था। फिर हमें योगी जी से. मिलवाया भी गया। 2019 की बात कर रहा हूं।. उस वक्त मैं टीवी में काम करता था और मुझे. भेजा गया। और आई रियलाइज कि केरल का भी. पत्रकार आया था।. तमिलनाडु का पत्रकार भी आया था।.
कई ऐसी भाषाओं के पत्रकार आए थे जिनको. हिंदी बोलना नहीं आ रहा था। हम. और जब ऐसे इवेंट्स में पत्रकार आते हैं तो. उनको एक ही टारगेट होता है कि आप आइए आप. कवरेज कीजिए। आपको सारी चीजों का एक्सेस. ज्यादा दिया जाएगा। उन पत्रकारों के. मुकाबले जो भीड़ में खड़े होकर केवल बाइट. ले रहे हैं।. ठीक बात है।. आपको मिलाया जाएगा और फिर जब आप लौट कर. जाते हैं तो आप अपने-अपने क्षेत्र में. जहां भी आप काम करते हैं वहां पर एक. आर्टिकल अखबार लिखेंगे। हम. एंड आई रियलाइज कि जो बात मैं मोदी जी को. लेके सोच रहा था 20101 में. हम. वैसी ही कैंपेनिंग की तैयारियां.
योगी जी के लिए हो रही. की टीम कर रही है. और मुझे उस वक्त योगी जी की टीम और मोदी. जी की टीम में डिफरेंस भी दिख गया था।. हां ठीक बात है।. क्योंकि बातें जो हो रही थी बहुत सारी ऐसी. बातें हो रही थी जो सुनकर मैं शौक था. कि अरे देयर इज़ नो ट्रस्ट. हम. बट आई रियलाइज़ कि इनकी टीम लंबा प्लान कर. रही है।. हां. कि केरल में भी जो बंदा बैठा होगा उसके. दिमाग में भी योगी आदित्यनाथ डाल दिया गया. है।. उन आर्टिकल्स के जरिए। बिल्कुल। तो फिर. यही घूम टहल के कहानियां ये कि क्या ये. स्मार्ट प्लानिंग ओवरपॉपरिटी उन बाकी. लोगों पर भारी नहीं पड़ रही है? बिल्कुल पड़ रही है। बात इस बात की है.
कि भला योगी आदित्यनाथ की टीम ज्यादा बड़ी. है या नरेंद्र मोदी की टीम ज्यादा बड़ी. है? नो डाउट। नरेंद्र मोदी की टीम ज्यादा. बड़ी है। क्या अमित शाह की टीम छोटी है या. नरेंद्र योगी आदित्यनाथ की टीम बड़ी है? एक्चुअली सही बात 24 कैरेट 100% अमित शाह. की टीम बड़ी है। नरेंद्र मोदी हर बात पर. अमित शाह को ही फेस बना के रखते हैं।. इसमें कोई दो राय नहीं है। मैं बात कर रहा. हूं। जनता की डिमांड आ गई थी मोदी को.
लेकर। हम. ठीक। आपने एक किस्सा सुना है। मैं छोटा सा. बताता हूं। एक महिला जो कपड़े बेचती है. हजरतगंज के. जनपद वाले हिस्से. हां वहां वो बैठती थी। मैंने कहा कौन. बनेगा प्रधानमंत्री? उसने कहा मोदी जी. मोदी नहीं मोदी जी एक घटना। दूसरा आजमगढ़. में मेरा एक स्ट्रिंगर था। उसका नाम था. आशुतोष। उसने किसी मुस्लिम लड़की से शादी. की थी। और जब शादी हो गई तो दोनों परिवार. आपस में कोई संबंध नहीं रखते। लगभग 5 साल.
6 साल बाद दोनों परिवारों में मिलन हुआ।. नाना नानी इकट्ठा हुए। तो उन्होंने लड़की. का नाम मैं भूल गया हूं। बिटिया जो थी तो. 3 साल 4 साल की हो चुकी थी। बोले अब पहली. बार नाना-नानी से मिल रही थी। तो बोले. बेटा डांस करके दिखाओ। अब सामने नाना नानी. मुस्लिम है। दादा-दादी जो है वो हिंदू है।. वो बच्ची ड्राइंग रूम की टेबल पर खड़ी हुई. और जिस गाने पर डांस कर रही थी वो गाना. था। अच्छे दिन आने वाले हैं मोदी जी आने.
वाले। वो नाना नानी फिर चले गए। वहां से. एक बात समझ में आ गई थी कि मोदी इज कमिंग. बैक कमिंग बैक नहीं एक्चुअली मोदी इज. कमिंग लाइक अ सुनामी ये बात बिल्कुल सच हो. गई थी आशुतोष जी काफी सीनियर पत्रकार हैं।. उस दौरान वो आम आदमी पार्टी से जुड़े थे।. बनारस में थे। मैं भी एक डेढ़ साल एक डेढ़. महीने के लिए बनारस में था। उन्होंने. मुझसे पूछा कि अरविंद केजरीवाल का चुनाव. कैसा जा रहा है? मैंने कहा हार रहे हैं। बोले कितने हजार.
से? मैंने कहा हजार कई लाख से हारने वाले. हैं।. उस वक्त किसी को यह बात समझ में नहीं आ. रही थी। लेकिन मैंने वह मौका देख लिया था।. असाइनमेंट की जब कॉन कॉल होती थी ब्यूरोस. को तो जब मैं उसमें ज्वाइन करता था तो. मुझसे पूछते थे कितनी सीटें आती है? आ रही. है यूपी में। मैंने शायद 72 या 73 बताई. होंगी। उन लोगों ने जोड़ के दिल्ली से. बताया कि 11 सीटों से 12वीं नहीं आ रही. है। यह मीडिया का एक ट्रेंड सेट था। वही.
हाल अब यह बाहर की बात अंदर पर आ जाइए।. अंदर पार्टी. पार्टी नहीं चाह रही है कि योगी आदित्यनाथ. को फेस बनाया जाए। जैसे मोदी के बाद. शिवराज चौहान का भी नाम बड़ी तेजी से चला. था। लेकिन शिवराज चौहान को आखिरकार किनारे. लगा दिया गया। खेत दे दिए गए, किसान दे. दिए गए। जो तो वो खाओ। ठीक है? ये करो।. योगी आदित्यनाथ हर छ महीने में दिल्ली. बुलाए जा रहे हैं। एक मरमरिंग है कि इस.
बार भी चुनाव होगा। जैसा भी होगा शायद. मुख्यमंत्री ना बनाया जाए इनको। लेकिन यह. हमेशा चलता रहता है। तो अगर यह एडमिंट हो. जाए कि हमको अमित शाह को ही बनाना है तो. फिर योगी आदित्यनाथ को बुलाया जाएगा।. बुलाया जाएगा। और अगर राजनाथ सिंह की. मजबूरी के तहत अध्यक्ष होते हुए मोदी को. मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री पद का चेहरा. बनाना पड़ा तो फिर योगी आदित्यनाथ को कोई. रोक नहीं सकता। फर्क छोटा सा सिर्फ इतना.
है शुभांकर भाई जो आपने धुरंधर फिल्म से. जोड़ के देखा था वो फिल्म जब दिखती है तो. पाकिस्तान के नाम पर कहीं ना कहीं वो. फिल्म हिंदुओं को सिंपैथेसाइज करती है. खासकर क्योंकि अब 14 साल बहुत सालों का. मौका हो चुका है अब मैकुअर मोबिन अलग हो. चुके हैं हिंदुस्तान में मैकुअर मोबिन अलग. हो चुके हैं वो जो ग्रेंजर क्रिएट हो रहा. है उस ग्रेंजर को देखते हुए अब चुनाव.
पिछड़ों और दलित पे होना है 100% लिख के. रख लीजिए। अब हिंदू मुस्लिम चुनाव नहीं. होने जा रहा है। उस कास्ट पॉलिटिक्स पर को. योगी आदित्यनाथ कितने अच्छे से हैंडल कर. पाते हैं इस पर मुझे थोड़ा शक है। क्योंकि. योगी आदित्यनाथ की जो कोठरी है योगी. आदित्यनाथ की जो ब्यूरोक्रेसी है योगी. आदित्यनाथ के जो मंत्री विधायक ये सब है. उस सरकार के वो खुद ही कहते हैं कि ठाकुर. ठाकुरवादी सरकार है। तो अगड़ों की एक जात.
की मोहर लगी हुई है उस सरकार पर। वह बाकी. जिनमें ब्राह्मण भी नाराज होते हैं, कभी. कुर्मी नाराज होते हैं, कभी लोध नाराज. होते हैं। सब अलग-अलग बैठकें कर रहे हैं. अपनी। उस कास्ट पॉलिटिक्स को योगी कैसे. संभालेंगे? इस पर एक सवाल है। अगर ये फिर. चुनाव हिंदू मुस्लिम पे हुआ तो योगी. आदित्यनाथ से बेटर कोई लीडर नहीं है।. लेकिन कास्ट पॉलिटिक्स पे हुआ तो योगी. आदित्यनाथ यहां पे इनको राइटिंग के चार. नंबर कम मिलेंगे।. ओके। डू यू थिंक अखिलेश यादव वापसी कर.
सकते हैं इस चुनाव में 27 वाले? अखिलेश यादव ने इतना तो कर दिया कि 2024. के चुनाव में अखिलेश यादव ने अपने पिता से. ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर दिया और किनारे. कर दिया भारतीय जनता पार्टी को। अयोध्या. भी हरा दी। और अयोध्या जिताया किसको? अवधदेश को। अवधेश मतलब जो भगवान राम का. नाम है अवधेश। अवधेश प्रसाद जी उसको एंबलम. बना लिया। साथ में बैठाते हैं, चिढ़ाते. हैं भारतीय जनता पार्टी को। हां,
अगर पॉलिटिक्स द और पिछड़े की है तो आप. गौर करिए धीमे से बीजेपी ने एक बार फिर. सीटी बजा दी है और मायावती को हल्का सा. ऊपर खड़ा कर दिया है। अब तक मायावती दो. रैली कर चुकी हैं। मायावती बयानबाजी करने. लगी है। मायावती ने ब्राह्मणों को अपनी. तरफ बुलाने की फिर कोशिश शुरू कर दी है।. बट 204 के अगर मैं कॉन्टेक्स्ट में बात. करूं 204 में एक बड़ी थ्योरी जो मेरा अपना. एनालिसिस था जिस वजह से बीजेपी की हार भी. हुई टिकट डिस्ट्रीब्यूशन तो रहा ही होगा.
एक संविधान वाला ही बड़ा फैक्टर था. वो वो लल्लू वो लल्लू सिंह ने जो कहा ना. अबकी बार 400 पार और संविधान बदल देंगे वो. जो आरक्षण का मसला बटा. तो वो एक बहुत बड़ा फैक्टर था और शायद. थोड़ा ओवर कॉन्फिडेंट होना. हां कि हम अयोध्या कैसे हारेंगे बट क्या. 27 चुनाव जो हम जा रहे हैं आपको सेम. सिनेरियो दिख रहे हैं वही गुस्सा वो. संविधान वाली बातें. आप प्लानिंग देख लीजिए आप प्लानिंग समझ. लीजिए. एजेंडे में नहीं था जातिगत जनगणना कौन. लाया बीजेपी एजेंडे में नहीं था बेवजह.
यूजीसी एक बार फिर लाया गया अलग तरीके से. पिछड़ों को उसमें रख के और अगड़ों को मान. लिया फॉर ग्रांटेड है ठीक है क्यों ला रहे. हैं सेंट्रल अगर दूर का देख रही है मोदी. विजनरी हैं दूर का देख रहे हैं अमित शाह. विज़नरी है दूर का देख रहे हैं ये क्यों. छेड़ा जा रहा है जो मूंगफली थी जब तक टूटी. नहीं थी हिंदुत्व थी। जब इसको तोड़ा गया. तो तीन दाने निकले। दलित, पिछड़ा, अगड़ा।. क्यों छेड़ा जा रहा है इसको? दे नोन।.
बदायूं से बीएल वर्मा बनने वाले थे. अध्यक्ष प्रदेश के उत्तर प्रदेश में जो. लोध हैं। लेकिन कल्याण सिंह के बेटे और. उनकी फैमिली ने विरोध कर दिया इस बात का. कि अगर यह करेंगे तो लोध हम साथ नहीं. रखेंगे। लोधो की बैठक भी हुई अलग से।. लिहाजा माना गया कि लोध फिर भी कम है. लेकिन कुर्मी यादव के बाद नंबर दो की जात. है जिसका सबसे ज्यादा वोट 7% करीबन यादव. है 6% कुर्मी है लिहाजा पंकज चौधरी को. अध्यक्ष बनाया गया दो वजहों से एक पंकज.
चौधरी और योगी आदित्यनाथ की पटती नहीं है. दोनों गोरखपुर से हैं। दूसरी बात पिछड़ों. की राजनीति करनी है। लिहाजा पंकज चौधरी को. बना देते हैं। यह सबको समेट लेंगे।. लेकिन मसला चाहे सनातन का हो, अभिमुक्तेश्वरंद का हो, ब्राह्मणों की. मीटिंग का हो, आप देखिए लगातार यह जो तबका. है पूरा यह फॉर ग्रांटेड लिया जा रहा है. और मान के चलना जाएगा कहां? ये जाएंगे. कहां? हमारे ही पास वोट देंगे आके। इसको.
देखते हुए मुझे एक चीज समझ में आती है कि. पार्टी के अंदर दिल्ली वर्सेस यूपी जो चल. रहा है वो. हम. ब्राह्मण, लोध, पिछड़ा, दलित की जो. राजनीति चल रही है वो. यह सारी वो जो कलह है. एक नॉन डिसाइसिव सा मसला चल रहा है कि. कट्टरवाद पे काम करना है, ध्रुवीकरण पे. काम करना है या जातिगत आधार पे काम करना. है। यह सारे सोने की तस्री में चांदी जैसे. मुद्दे सजा के पक्ष ने खुद ही रख दिए हैं।.
पक्ष के अंदर विपक्ष ने खुद ही रख दिए. हैं। अगर अखिलेश यादव ने पीडीए को इंटैक्ट. कर लिया मुसलमान कहीं नहीं जाएगा। यह मैं. पहले बता दूं आपको। किसी मायावती, किसी. ओवैसी किसी के पास नहीं जाना है। अखिलेश. यादव को ही जाएगा मुसलमान का वोट। यादव भी. अखिलेश यादव को जाएगा। अब इस पार्टी की. आपस की कलह. उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े की. राजनीति का शुरू हो जाना। अगर इसने एक पुश. और मार दिया तो अखिलेश यादव गेन कर सकते.
हैं क्योंकि अब उनके पास खोने को है।. पिछले दो चुनाव में हार चुके हैं। कुछ. नहीं है। 2024 का जो प्रदर्शन है वो विराट. कोहली बहुत दिनों बाद फॉर्म में आया है।. अब उस विराट कोहली पर नजर है कि क्या अबकी. इडन गार्डन में भी सेंचुरी मारेगा। तो. माहौल, वहां की पिच, वहां की विल्ड यह समझ. में आ रही है कि लगता है विराट कोहली पिच. पर खड़ा हो सकता है।. अखिलेश यादव के सपनों के बीच में योगी. आदित्यनाथ ज्यादा बड़े फैक्टर होंगे या.
बहन कुमारी मायावती? अ हां। अगर वोटों की ऐसी बात करें तो. मायावती आज मैं इस बात को दावे से कह सकता. हूं कि इस बार इस चुनाव में सबसे बड़ी वोट. कटवा पार्टी अगर कोई होगी तो बहुजन समाज. पार्टी होगी और उसका नुकसान अखिलेश यादव. को ही होगा क्योंकि यही वोट तो सरक के. जाएगा जो बीजेपी से नाराज होगा वो थोड़ा. बहुत इनको जाएगा थोड़ा बहुत बसपा को जाएगा.
लेकिन नुकसान बीजेपी का क्योंकि बीजेपी के. नंबर बहुत वह नंबर कम में जाएंगे। कम में. जा सकते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़]. इसलिए मायावती वाला जो मसला है वह बीच में. ना आए इसकी कोशिश. मायावती जी कम बैक नहीं होगा।. कम बैक. कम बैक मतलब. कम बैक बहुत मुश्किल है।. कम बैक बहुत. बहुत नंबर. विधानसभा में भी 10 20 50 सीट भी नहीं पा. सकती। अब उनके पास अपना जो जाटव वोट है. हां. वह भी काफ़ी कुछ सरक चुका है। दलित वोट की. तो बात ही छोड़ दी है। जाटव वोट भी सरक.
चुका है। हां, आज भी जब मायावती रैली. बुलाती है, तो विदाउट एनी सिस्टम अब तो. सरकार भी नहीं है, सिस्टम भी नहीं है, बाहर भी है। उसको देखते हुए लगता है कि यह. रैली बिना ग्रॉस रूट संगठन के इतनी भीड़. कैसे इकट्ठा कर रही है। मायावती का कमबैक. थोड़ा सा मुश्किल लगता है।. मतलब 202 सीट भी नहीं।. नहीं आ सकती है। 20 22 50 सीटें 25 सीटें. आ सकती हैं। लेकिन ये 20 22 50 सीटें जो. होंगी सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का.
करेंगी तो कटेगी बीजेपी से लेकिन अखिलेश. के खाते में सीट कन्वर्शन करने में अगर यह. मदद नहीं रोड़ा बनती हैं तो नुकसान अखिलेश. का हो जाएगा कि बनाते बनाते बनाते बना तो. एक थोड़ी सी कसर रह जाएगी। जैसे पिछला जो. चुनाव हुआ है पिछला वाला चुनाव उस चुनाव. में तो बहुत सारे आईएएस आईपीएस जाके. अखिलेश यादव को भूखे दे आए थे कि सरकार आ. रही है आपकी क्योंकि सेंट्रल. भी अंदर उनकी जो कलह थी.
22 में जो पिछला 22 वाला चुनाव उसमें ये. कलह थी कि सीटें कम आ जाए तो हम ये कहने. लायक हो जाएंगे कि आइए योगी जी आप सेंट्रल. में आ जाइए सीटें कम नहीं आई तो ये एक. लफड़ा जो आपस में चल रहा है, इसका लाभ. अखिलेश यादव को मिल सकता है। दलित और दलित. और पिछड़े की जो पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. विद इन बीजेपी भी उसका भी फायदा अखिलेश. यादव को हो सकता है। और इसको लेकर मैं कह. सकता हूं कि अखिलेश यादव गेन कर सकते हैं।.
क्योंकि जी किस्मत में भी धनी है ना? अब तक अगर पूरा देखोगे करियर. भाई मुख्यमंत्री नहीं बनना था। बन गए।. वही मतलब एकाएक आए पहली बार में सांसद बन. गए।. सांसद बन गए। फिर अपनी टीम बना ली. और मतलब लंबे समय मेरे ख्याल से 202 साल. सांसद रहे।. फिर जब बीजेपी से नाराज हुए 2004 में तो. वहां सीटें थोड़ी कम हो गई।. कम हो गई। हां हिंदू युवानी के दम पर वो. सारी चीजें करते थे।. फिर राइज हुआ बड़े हुए। 22 में कम करने की. कोशिश की वहां रहा। 24 में. सेंट्रल ने बढ़ाया तो फिर सीट घुस गई तो.
उनकी वैल्यू थोड़ी बढ़ गई।. 27 की बारगेनिंग पावर बढ़ गई। एक्चुअली. बिल्कुल। देखिए है क्या? अग्निपथ देखी. आपने।. हां। रितिक रितिक रोशन वाली मान लीजिए. ज्यादा क्योंकि उसमें एक रऊफ लाला भी है. तो रितिक को लड़ना मारना था कांचा चीना को. लेकिन रऊफ लाला का जूता चाहिए था उसको तो. उसके जूते में पैर डालता है तब ताकत उसके. पास आती है वरना तो 99 का सांप काट लेगा. अब नीचे चले आएंगे सांप सीढ़ी में उस. लिहाज से. जो ताकत. चाहिए वो अमित शाह के पास है।.
वो ताकत योगी जी के पास नहीं है। मैं. विदिन पार्टी की बात कर रहा हूं। योगी. मोदी अमित शाह इनके बीच की बात कर रहा. हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसको. लेकर कहीं योगी आदित्यनाथ कमजोर दिखते हैं. मुझे। बट. वो बंदा है रॉकी भाई केजीएफ वाला। जो अपना. साम्राज्य खुद खुद खड़ा करेगा। खुद सारी. कोलार गोल्ड फील्ड में जाकर कब्जा करेगा।. और यह स्टाइल उस आदमी के अंदर है। तभी.
देखिए। तभी देख लीजिए। वो जिद में खड़े. रहते हैं।. जिद में तो हम अमित शाह भी रहते हैं।. जिद में. अमित शाह का भी अपना स्वैग है। एक स्टाइल. है।. अमित शाह का बिल्कुल स्वैग है।. यू मे लाइक हिम। यू मे डिसलाइक हिम बट ही. हैज़ ह ओन पर्सनालिटी एंड ओन स्टाइल।. बट और मेरे को तो उनके इंटरव्यूज इतने मजे. आते हैं कि हो गया भैया। [हंसी]. बट एक सेकंड मैं सीख देता हूं। अमित शाह. मोदी में जो सबसे कमाल का डिफरेंस मुझे. लगता है। मोदी जी कभी भी सामने नहीं.
डांटते।. हां।. मैंने जितना भी उनके लोगों से जाना सुना. उनके बारे में वो सामने कभी रूढ़ नहीं होते. हैं। वो अपनी टीम में भी आंखें दिखा देते. होंगे शायद रूढ़ होने के लिए लेकिन सामने. वो आपसे आपके बारे में जानते हैं। हर एक. चीज जानकारी लेते हैं। बहुत पोलाइट रहते. हैं।. हमेशा सामने भी ब्लंट है।. हां।. आपके सामने भी वो वही बात कह देंगे जो. शायद लोग बंद दरवाजों के पीछे कहते हो।. इंटरव्यूज में वो बात कह देंगे। उनको जो. मैसेज देना होगा वो वो अपनी इमेज को लेके. सोचते नहीं है और मुझे लगता है कि ऐसे लोग.
ज्यादा ब्रूटल होते हैं। ऐसे लोग ज्यादा. स्ट्रेट होते हैं और मुझे अभी भी याद है. एक बहुत बड़े जर्नलिस्ट हैं। बहुत बड़े. जर्नलिस्ट हैं। देश के जाने-माने. जर्नलिस्ट हैं।. 2019 में मैं उनके साथ बैठा था और 19 के. चुनाव खत्म हो रहे थे। वो राजनाथ जी के. बहुत करीबी हैं।. और देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से ठीक. बात है।. तो हम लोग बैठे थे और मुझे बहुत मानते थे. वो। तो उन्होंने कहा यार देखो यह फोन आया. है। शायद किसी का फोन आ रहा था राजनाथ जी. किसी का उनको आ रहा होगा तो उन्होंने कहा. कि गृह [नाक से की जाने वाली आवाज़].
मंत्री बनेंगे। मैंने कहा नहीं सर गृह. मंत्री अमित शाह बनेंगे। हां तो मैं तो. बिल्कुल नया-नया बच्चा तीन-चार साल का. मेरा करियर था। वो मुझे सम्मान में बिठाते. थे कि बच्चे जैसा मेरा मिठाई-विठाई खाता. रहेगा। तो मैंने उनसे कहा अमित शाह बनेंगे. गृह मंत्री। उन्होंने कहा नहीं तुम क्या. जानते हो? राजनाथ जी ऐसा थोड़ी ना हट. जाएंगे। मैंने कहा सर मैं राजनाथ जी को. नहीं जानता हूं।. लेकिन अमित शाह के ऊपर एक दो जो विरले. किताबें छपी हैं, मैंने उसको पढ़ा है।. मैंने गुजरात में उनका कार्यकाल पढ़ा है।. और जितना मैंने पढ़ा है, मुझे यह समझ में.
आ गया है कि दुनिया में दो तरह के लोग. होते हैं। एक जो नाम के पीछे भागते हैं, इमेज के पीछे भागते हैं जो चाहते हैं कि. उनके बारे में अच्छी बातें हो। और एक. व्यक्ति होता है जिसे किंग से ज्यादा किंग. मेकर बनना पसंद होता है। जैसे ताकत बड़ी. पसंद होती है। तो मुझे लगता है अमित शाह. जी को ताकत होल्ड करना पसंद है। वो गुजरात. में भी गृह मंत्री थे।. स्टेट चलाया था उन्होंने।. हां। और 5 साल यहां अपने को प्रूफ किया. सेंट्रल में। अब जब वह बकायदा उस. प्रक्रिया से आ रहे हैं जहां पर उन्हें. मंत्री बनना है। सो मुझे लगता है सिर्फ एक. पद है जो उस पर उनकी निगाहें होंगी और वो.
है गृह मंत्रालय।. गृह मंत्रालय।. अब तो मुझे नहीं पता राजनाथ जी क्या. बनेंगे। लेकिन मुझे यह पता है अगर मेरा. सिक्स सेंस सही है तो अमित शाह गृह मंत्री. बनेंगे।. हां बिल्कुल।. एंड एक्सैक्टली इट हैपेंड।. हां।. उसकी वजह थी। सीएए लाना था वो सारी चीजें. लानी थी।. ये अमित शाह के बस का था। यह अमित शाह के. बस का था। यह राजनाथ सिंह के बस का नहीं. था। आप जिन पत्रकार की बात कर रहे थे, तो. मैं उनको वरिष्ठ सब कुछ सुनता जा रहा था, सुनता जा रहा था। लेकिन जैसे ही आपने. मिठाई इनवॉल्व की उसके [हंसी] साथ मैं. उनका नाम लेना नहीं चाहता।.
नहीं बिल्कुल ठीक है। लेकिन जैसे ही आपने. मिठाई इनवॉल्व की तुरंत वो बिल्कुल फ्रेम. में आ गए फिर कि मिठाई कौन कहां से होगी।. [हंसी] तो वो वो बिल्कुल ठीक। आपने उसका. आकलन किया। हां। मतलब वो बहुत बहुत सीनियर. जर्नलिस्ट है और. हां हां ठीक है ठीक है ठीक है. वो काफी सप्ताह गलियारों में उठते बैठे. रहते हैं लेकिन. एक क्योंकि मैं एक जनता के तौर पर सोचा था. मैंने मिश्रा की कहानियां पढ़ी थी सारी. कहानियां किस्से मैंने उनका वो किस्सा. पढ़ा था कि जब वो बनारस में घूम रहे थे. गुजरात से जब निष्काशन था उनका घूम रहे थे. तो उन्होंने देखा कि यार यहां तो सब कुछ.
हमारे फेवर में है। फिर कैसे संगठन बनाया. फिर कैसे लोगों को बुलाया जीतना चाहते तो. बाहरी लोगों को लाना पड़ेगा। सो क्लेरिटी. ऑफ़ थॉट्स बहुत ज्यादा था। और वो ब्लेंटनेस. इंटरव्यूज में आती है। तो ये बहुत सारी. चीजें जब मैं जोड़कर मेरा अपना सिक्स सेंस. जब मैं डेवलप करा था तो ऐसा होता बिल्कुल. बिल्कुल सही है। अगर आप योगी आदित्यनाथ को. को भी कभी वॉच करें तो जैसे वो बाइट दे. रहे थे और डिंगी लाइट कमजोर पड़ गई।. क्या. तो उनका. क्या करते हो यार? उनका.
एनआई एनआई के पत्रकार को उन्होंने कहा. उनका उनका जो असली अंदर का आदमी है वो. तुरंत रिएक्ट कर गया। हां हां वही. उन अफसरानों से पूछिए उन सलाहकारों से. पूछिए उस मंत्रियों से पूछिए उन विधायकों. से पूछिए. कि जब योगी आदित्यनाथ के पास वो जाते हैं. और कोई फालतू की बात करते हैं तो वो एनआई. वाले हो जाते हैं। बट क्या एक शासक को ऐसा. होना चाहिए? इतना रूथलेस खासतौर पर यूपी.
जैसे स्टेट में जहां पर इतना बवाल है. क्योंकि योगी आदित्यनाथ को एक बात जो यूपी. में कई लोग मानते हैं मैं मतलब योगी जी के. प्रशंसक के तौर पर नहीं साउंड करना चाहता।. योगी जी को लेकर दो इमेज यूपी में बहुत. वायरल है क्योंकि मैं खुद यूपी से आता. हूं। एक अ ठाकुरवाद का आरोप. बिल्कुल. कि साल के चार साल वो ठाकुरवाद पर उनको. आरोप लगता है। एक साल वो होता है. हिंदुत्ववादी हो गया। एक ये बहुत कॉमन. परसेप्शन है।. और यह पोस्टिंग को लेकर अक्सर आरोप लगता. है। विपक्ष भी लगाता है और एक कॉमन इंसान. के माइंडसेट में भी डाल दिया गया. साइकोलॉजिकली।.
लेकिन एट द सेम टाइम दूसरा इंसान यह भी. कहता है कि जब से वो आए हैं कानून. व्यवस्था बेहतर हुई है।. हां बिल्कुल हुई है।. आपको अब डर कम लगता है। अपराधी डरता है।. पुलिस प्रशासन का इकबाल जो है थोड़ा बुलंद. हुआ है। और उस कानून व्यवस्था ने उनको. बहुत फायदा दिया है। इवन जो उनको नहीं. पसंद करते हैं।. बिल्कुल ये बिल्कुल सच है।. चाहे वो मुसलमान हो या किसी जात के हो वो. ये कहते हैं कि नहीं भैया योगी के शासन. में ऐसा अच्छा हुआ है। ये पहले मायावती. में भी था।. हां बिल्कुल था।. मायावती के टाइम में।. मायावती का तेवर था।. बट वहां पर थोड़ा एससी एसटी वाला शायद. थोड़ा ज्यादा हो गया था।. सेकंड टर्म में नहीं। जब ब्राह्मण साथ में. था तब यह टर्म नहीं था। तब मायावती.
प्रशासन पे थी। उन्होंने शेखर तिवारी को. नहीं छोड़ा। जिसने इंजीनियर की हत्या कर. दी थी चंदा वसूली में। मित्र सेन द लीजेंड. उसके बेटे को नहीं छोड़ा जो खाद्य. प्रसंस्करण मंत्री था। एक दलित लड़की से. इश्क फरमाया। फिर उसकी हत्या हो गई। उम्र. कैद हुई। अब तो खैर छूट गए।. मायावती ने पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को. नहीं छोड़ा। 28 अपने वो मंत्री थे जिनकी. लोकायुक्त की जांच उन मंत्रियों को नहीं. छोड़ा। 150 आईपीएस पीपीएस को नहीं छोड़ा.
जो पुलिस भर्ती में घोटाला करते पाए गए. थे। उनको नहीं छोड़ा। 112 टिकट अपने बदल. दिए। सब कुछ बड़ी सख्ती थी। लॉ एंड ऑर्डर. बड़ा जबरदस्त था। विकास भी जबरदस्त था।. फिर मायावती खराब। मायावती फिर गायब कैसे. हो गई? एनआरएच प्रदेश की राजनीति. एनआरएचएम नेशनल रूरल हेल्थ मिशन दो सीएमओ. को डे लाइट मारा गया। हमारे गोंडा में. शायद वहां थे कुछ छह और लोग अलग-अलग. संदिग्ध परिस्थितियों में मरे पाए गए। एक.
डिप्टी सीएमओ को जेल में 12 जगह से काट के. मारा गया। जिसको सीबीआई ने कहा कि वो. आत्महत्या है।. लेकिन अभी उनकी पत्नी ने फिर कह दिया कि. आत्महत्या कैसे हो सकती थी? 12 जगह से. आर्टरी काट के फिर वो अपनी बेल्ट निकाल के. कमोड पर बैठ के पीछे ऐसे फांसी लगा ली. उन्होंने। उस एनआरएचएम ने मायावती के. आसपास की केवल ब्यूरोक्रेसी का सुनना बाकी. पर कान लगा लेना 150 आईपीएस पीपीएस को. अपना दुश्मन बना लेना 112 टिकटें काट देना.
28 मंत्रियों की ऐसी तैसी कर देना लेकिन. एनआरएचएम में 10,000 करोड़ की बंदर बांट. और घोटाले के लिए यह सब कुछ हुआ और. मायावती की सरकार वैसे ही जाती रही जैसे. मुलायम सिंह की सरकार जब काम कर रही थी तो. मुलायम सिंह के चलाचली के बेला पे निठारी. मेरठ का कविता कांड हुआ और मदरसा कांड. अतीक वाला इलाहाबाद में हुआ और तब अमिताभ. बच्चन का एक ऐड चलता था। उत्तर प्रदेश में. है दम क्योंकि जुर्म यहां है कम। लोग कहते. थे यह जुर्म कम हो रहा है यहां पे। तब गई.
सरकार मुलायम सिंह की। मायावती एनआरएचएम. में निपट गई। और अखिलेश यादव पर भारी. पड़ा। एक मुजफ्फरनगर का दंगा एक। दूसरा. सबसे बड़ा कारण जो उनकी फैमिली का. डिफ्लेक्शन हुआ वह जो सब अलग हो गए. राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटा दिया गए फैमिली. में तोड़फोड़ हो गई. जो अपने बाप का नहीं हुआ. एंड चुनाव के समय उनके संग. क्योंकि अखिलेश जी ने हमारे पॉडकास्ट में. कहा था कि अगर पिताजी साथ देते तो शायद.
परिस्थिति अलग हो जाती उनके जाने के बाद. मैं कहना नहीं चाहता. हां बिल्कुल वो शानदार काम कर रहे थे वो. आदमी विजनरी था इसमें कोई दौर नहीं. तो मैंने उनसे पूछा अखिलेश जी से मैंने. कहा कि पहली बार हमारे जमाने में लैपटॉप. मिला था मतलब हमारे हमारे लिए बहुत बड़ी. बात थी वो. और कोरोना तब तक नहीं आया था।. हां बिल्कुल सही है।. वो फ्री बीस मतलब अरविंद केजरीवाल ने उस. फ्री बी का मजाक उड़ाया था।. हां मजाक उड़ाया था. कि जन तक पैसा लेके जनता को दे रहे हैं।. बाद में अरविंद केजरीवाल ने बहुत सारे. फ्री बीस दिए बट पहली बार 2012 में अखिलेश. जी ने दिया था तो उसका मजाक उड़ाया था वो. वीडियो कन्या विद्याधन. मैंने अपने पडकास्ट से पूछा था वो सवाल.
केजरीवाल जी से भी।. लेकिन अखिलेश जी से मैंने पूछा मैंने कहा. आपने हाईवे बना दिया। आपने लैपटॉप बांट. दिए टेबलेट बांटे थे। उस दौर में बहुत. बड़ी बात थी। बहुत बड़ी बात थी कि सारे. कॉलेज में सारे बच्चों को प्राइवेट कॉलेज. से मिल रहा था सर. हां हां. उसका स्क्रीन सेवर ही वही था समाजवादी. और काम बोलता है ऐड भी अच्छा लग रहा था. तो फिर आप हार गए क्यों हार गए आपको क्या. लगता है तो उन्होंने कहा कि वो. परिस्थितियां अगर परिवार साथ देता. तो सब हो जाता ठीक तो क्या बीजेपी ये बात. समझ नहीं रही है यहां पे. अब बीजेपी के परिवार में यही है बीजेपी के.
परिवार में यही है लेकिन अभी भी शुभांकर. भाई एक चीज काम कर रही है अभी भी मैकू को. मुबीन से खतरा है। और यह बात दिल की गहराई. में इतनी जबरदस्त पैवस्त हो चुकी है कि सब. कुछ मैकू बनाम मुबीन हो गया है। तो मुबीन. ने अगर लाइन लगा के वोट देना शुरू किया तो. सारा मायू कह ऐ चला चला चला चला चला था. चला था सब बुर्के वाले वोट दे रहे हैं। सब.
टोपी वाले वोट दे रहे हैं। फिर सब हिंदू. लाइन पे लग जाएंगे। बट अगर धुरंधर जैसी. फिल्में हिट जा रही हैं।. धुरंधर ने सबसे जल्दी 1000 करोड़ कमा लिए।. सबसे जल्दी 5700 करोड़ कमा लिए।. बिल्कुल।. इसका मतलब ये भी है कि अब राइट विंग भी. बहुत वोकल हो गया है। मतलब वो लोग होंगे. जो ना माने. बट धरंधर इज़ सेंट्रल टू राइट।. व्हिच इज़ क्लियरली विज़िबल।. ताकत तो आ गई राइट विंग के पास।. तो राइट विंग एक्सप्रेस भी कर रहा है। अब. केरला फाइल्स आ रही है। बंगाल फाइल्स आ. रही है।. एक के बाद एक धुरंधर कश्मीर फाइल्स आ रही.
है। कश्मीर फाइल आ रही है। आर्टिकल 370 आ. गया। हक आ रही है और इन फिल्मों को सपोर्ट. भी मिल रहा है।. मिल रहा है।. दर्शक जा रहा है देखने। वो इनके बारे में. बात कर रहा है। अह हिंदू जो लोग सोशल. मीडिया पर लिख रहे हैं।. क्या ये जो आप बात कर रहे हो यूपी में. योगी आदित्यनाथ वाली पॉलिसी पे ये उनको. सूट नहीं कर रहा है। जो आप कह रहे हो कि. पॉलिटिक्स कास्ट जो दिल्ली सोच रहा है कि. अब मामला कास्ट पे जाएगा।. बट जो योगी सोच रहे हैं कि मामला धर्म पे. अभी हम रहेंगे। उसमें ये आप किधर देख रहे. हो? इसका एनालिसिस कैसे कर रहे हो आप? तो.
फिर मुझे एक चीज बताइए जब यह सब कुछ केरला. स्टोरी कश्मीर फाइल, बंगाल फाइल्स धुरंधर. यह सब चल रही है ना. फिर एक बात कहूंगा एक बार रिपीट कर रहा. हूं। उस पूरे मसले में योगी आदित्यनाथ. धुरंधर से गायब है। एक बात. वो तो आदित्यनाथ चॉइस है ना।. एक मिनट लास्टली लास्टली एक मिनट। मैंने. कहा ना रिपीट करूंगा। पहले ही कह दिया।. दूसरी बात। योगी आदित्यनाथ पर ही एक फिल्म. बनी।. सेंसर ने उसको कितने दिन तक लटकाए रखा? कितनी बार उसको वापस भेजा है। कोर्ट तक.
जाना पड़ा। फिल्म किस पर थी? योगी. आदित्यनाथ पर। आज तक सेंसर ने कभी किसी. बायोपिक पर यह कहा है क्या कि जाइए फला का. नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेके आइए। नो. ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के बाद ही तो कोई. फिल्म बनाता होगा ना। योगी आदित्यनाथ की. फिल्म सेंसर में क्यों लटकी? मैं हर बात. पे आपसे वो बात कहूंगा कि योगी आदित्यनाथ. बहुत बड़े हैं। बहुत बड़ा चेहरा बन गए।. इतना बड़ा हो रहा जितनी ले नहीं था।. [हंसी]. ये एक मसला है कि ट्रेन की जो स्पीड है हम.
वो थोड़ी जैपनीज है।. ठीक है? स्पीड जैपनीज है। बुलेट ट्रेन चल रही है।. बस ये डर लगता है कि कोई रबल स्ट्रिप ना आ. जाए बीच में। तो वो रumble स्ट्रिप पैदा. करने की पूरी कोशिश खुद ही रेलवे. डिपार्टमेंट कर रहा है।. पॉलिटिकल पे लास्ट सवाल पूछ लेता हूं मैं।. हां हां।. योगी अमित शाह पे हम और आप बात कर रहे हैं. कि योगी अमित शाह हु इज नेक्स्ट? हां मोदी. जी आपको लगता है सच में अगले 10 साल जाने. वाले हैं क्योंकि जितना मैं उनको फिट देख.
रहा हूं और अभी भी उनकी पॉपुलैरिटी का जो. लेवल बीजेपी के सारे नेताओं में है. वो शायद इन सबसे कहीं ज्यादा है।. जो पकड़ है वो सबसे ज्यादा है. और अभी भी वो सर्वमान्य बीजेपी के अंदर. नेता है।. हम. तो आपको लगता है कि मोदी जी अगले 10 साल. जाने वाले हैं जो लोग अभी से या पिछले 5. साल से योगी अमित शाह लड़ रहे हैं।. 10 साल का मतलब आप मान रहे हैं कि जो 85. साल के हो जाएंगे तब भी होंगे। हां हमने. मनमोहन जी को देखा है। हम ट्रंप को देख. रहे हैं। हमने जो बाइडन को देखा है। मोदी. जी दी जी शारीरिक तौर पर शायद ज्यादा फिट. अभी हैं।.
और वो अपने को फिट रख भी रहे हैं।. चेहरे पे ग्लो देखिए आप। आपसे ज्यादा. अच्छा चमक उनका चमक रहा है। हमसे. आपसे ज्यादा है। हां भाई मेरा तो फिर भी. डल है।. हमारी तो उम्र में उनका जमीन आसमान का. अंतर है ना भाई। हम अपने से तुलना ही नहीं. कर रहे हैं।. नहीं ठीक है। भगवान करे नरेंद्र मोदी 95. साल।. वो उसी वक्तून खा रहे हैं कि मुरैंग का. पराठा हमको नहीं पता। नहीं नहीं ठीक है. भगवान करे वो 95 साल तक बने रहे भगवान करे. वो 95 साल तक राजनीति. मतलब. वो तो उनके हाथ में नहीं तो जीतने के ऊपर. है. बट मैं चॉइस के तौर बात कर रहा हूं.
क्या आपको लग रहा है कि 29 में 29 29 में. मुझे नहीं लगता कि मोदी होंगे आपको लगता. है कि मोदी के अलावा कोई चेहरा आएगा. हां बिल्कुल आएगा और ये तो ये तो पार्टी. पॉलिटिक्स है। ये तो भविष्य की योजना बना. के चलना पड़ता है। यह तो किसी ने 3 साल. किसी को तीन बार किसी को मुख्यमंत्री. बनाया होगा तो कुछ सोच के बनाया होगा। कुछ. आगे की पॉलिटिक्स होगी कुछ क्या क्या आगे. के लिए कुछ रखेंगे नहीं क्या शुभांकर ने. एक पॉडकास्ट शुरू किया वो जिस फॉर्मेट में. रील काटते हैं जिस फॉर्मेट में चौप करते.
हैं पूरे पॉडकास्ट को क्या वो वहीं खड़े. हुए हैं क्या वो सेट बदल दिया सेट बदल. दिया आपने एआई का सेटअप बदल दिया होगा. आपने और अलग तरीके से रीले बनाना शुरू की. हो कुछ ना कुछ अलग कर रहे होंगे आप वो. इतनी बड़ी पार्टी है जिसने देश को एक अलग. मुकाम पर खड़ा कर दिया है देश की जनता को. अलग मुकाम पर खड़ा कर दिया है क्या वह दूर. का नहीं सोच रहे हो? बट जैसे धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा. ये लोग यह मानते हैं कि यह जब आदमी इतना. बड़ा हो जाता है कि वह गेम से बड़ा हो. गया।. हां. तब वो अपना फैसला खुद कर लेता है तो कर.
लेंगे फैसला। इसीलिए कह रहा हूं मैं। मैं. यह नहीं कह रहा हूं कि भाजपा हटा देगी।. लेकिन भाजपा ने राहुल गांधी से एक साल. छोटे अखिलेश यादव से 1 साल बड़े योगी. आदित्यनाथ को कहीं ना कहीं विज़न में तो. रखा होगा। अगर चाह लेंगे तो उनको भी. वसुंधरा बना देंगे, शिवराज बना देंगे।. नहीं बन जाएगा? कोशिश तो बनाने की है ही. है। लेकिन. मतलब मैं अभी भी डाइजेस्ट नहीं कर पा रहा. हूं। आप यह कह रहे हो कि मोदी जी 2029 के. चुनाव में बीजेपी का चेहरा नहीं होंगे।. मैं उनकी करंट फिटनेस करंट पॉपुलैरिटी. कॉन्टेक्स्ट में पूछ रहा हूं।. बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। बिल्कुल सही.
कह रहे हैं कि उनकी करंट फिटनेस और करंट. पॉलिटिक्स की बात पर आप बात कर रहे हैं।. लेकिन क्या किसी योगी आदित्यनाथ, किसी. अमित शाह या किसी लेट से हेमंत विश्वा. शर्मा की ऐज को लेके कोई प्लानिंग नहीं. होगी कि नेक्स्ट ये होगी। लेकिन इस देश. में अटल जी को हमने एकदम बुढ़ापे तक देखा।. हां। अटल जी 2004 में जब रिटायर हुए हां. काफी बुजुर्ग हो चुके थे. लेकिन पॉपुलैरिटी थी. बिल्कुल थी. मोदी जी तो आज एक्टिव भी हैं. हां बिल्कुल एक्टिव मैं चुनाव जीतने की. बात नहीं कर रहा हूं मैं समझ जनता के हाथ. में समझ गया. बट चेहरे के तौर पर जाना अगर आज अगर आज.
केशव मौर्य यूपी में कह रहे हैं कि मोदी. जी के नाम पे जीत रहे हैं या लड़ रहे हैं. तो क्या 29 में किसी की इतनी हिम्मत होगी. कि वो मोदी जी को चैलेंज करेगा चाहे वो. आरएसएस हो या बीजेपी के अंदर कि साहब अब. आपका समय हो गया आपका एक क्राइटेरिया था. 75 नाउ थैंक यू सो मच अब नाउ वी आर लुकिंग. फॉरवर्ड अगर बीजेपी की सरकार फिर आती है. तो नया चेहरा होगा। एक बात दूसरी बात. नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट अभी नहीं अगले. 50 60 साल तक मांगा जाता रहेगा। जैसे अटल.
बिहारी के नाम पे आज भी. मोदी जी मार्गदर्शक मंडल में चले जाएंगे।. मार्गदर्शक मंडल में चले जाएंगे। कहीं बैठ. जाएंगे एक राष्ट्रपति हो जाएंगे। नहीं हो. सकते हैं क्या? आई डोंट थिंक सो मैं फिर ये जैसे बड़े. पत्रकार से मैं डिसएग्री हुआ था। मेरा. अपना सिक्स सेंस या मेरा अपना जो एनालिसिस. नरेंद्र मोदी जी को लेकर है. वो यह है कि वो जब तक इतने स्वस्थ होंगे. कि वो दफ्तर जा सकते हैं।. हां. तब तक वो एक्टिव पॉलिटिक्स में प्रत्यक्ष. अप्रत्यक्ष तौर पर एक्टिवली इन्वॉल्व. रहेंगे। मेरा अभी भी ये मानना है मुझे ऐसा.
लगता है कि हो सकता है शायद इस जीवन काल. में उनको मैं राष्ट्रपति के तौर पर भी देख. लूं।. हां हां ठीक है।. आई वोंट बी सरप्राइज्ड। हां हां ठीक है कि. वो प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया बन जाते हैं देर. सवेेर एक स्टेट्समैन वाली और शायद पहली. बार हम भारत के एक राष्ट्रपति को बहुत. ताकतवर भी देख लें।. हां ठीक बात है। मैं ये भी इमेजिन कर सकता. हूं उनको लेके क्योंकि जैसे मैंने कहा. अमित शाह जी बिना पावर के. हां. और मोदी जी. बिना प्रधानमंत्री पद के. बिना कुर्सी के उन एक्टिविटीज के. हां. जिनमें वो इन्वॉल्वड हैं।.
रुकेंगे नहीं।. क्योंकि उनकी लाइफ का मकसद शायद वही बचा।. परिवार अगर नहीं आपके आगे पीछे आप 24 * 7. एक्टिव पॉलिटिक्स में और आप फिट हैं। हाउ. कैन यू डिसाइड कि अब मैं कल से काम नहीं. करूंगा।. तो मुझे यह बताइए मुझे लगता है मतलब ये. मेरा एनालिसिस है। समय पर छोड़ते हैं।. तो मुझे ये बताइए कि फिर धोनी ज्यादा. बेहतर था कि जिसने बहुत ही यंग एज में. विराट कोहली पे दांव लगा दिया था और. ज्यादा अच्छे तरीके से काम किया। समझा. दिया।. अगर मोदी जी सिर्फ अपने ही बारे में लेके. चलेंगे कि मैं ही ज्यादा एक्टिव पॉलिटिक्स. देयर इज़ अ डिफरेंस। मैं बता रहा हूं. क्यों? शायद महेंद्र सिंह धोनी भी. कैप्टेंसी ना छोड़ते।.
अगर धोनी. 2009 में, 2010 में, 2012 में, 2014 में, 2015 में या 2017 में शायद विराट आ गए थे।. 15 तक अगर वो लगातार इंडिया के जो ICC. टूर्नामेंट थे वहां हारते रहा। महेंद्र. सिंह धोनी बहुत सारे टूर्नामेंट एज अ. कैप्टन हार चुके थे। वो ग्रेट थे, सेमीफाइनल जाकर हार जा रहे थे। विराट. कोहली ग्रेटेस्ट थे। लेकिन टूर्नामेंट. नहीं जीता पा रहे थे। इसलिए बदला गया।. रोहित ने जिताया। इसलिए रोहित के बारे में.
लंबा सोचा गया। एक खेल लास्ट में हुआ. गंभीर वाला जिसमें उनको वनडे से हटाया गया. जिसको लेकर अभी भी चल रहा है। एंड आई वोंट. बी सरप्राइज अगर 27 में रोहित भी बना दिए. जाए दोबारा।. क्योंकि अब समीकरण फिर बदले हैं इस बीच. में। सो आई वोंट बी सरप्राइज़्ड। बट मोदी. मैंने फिर कहा विनिंग फैक्टर पे वो एक. चुनाव हारेंगे वो गायब हो जाएंगे। मुझे. भरोसा है कि थैंक यू सो मच। आडवाणी जी चले. गए। अटल जी चले गए। प्रमोद महाजन का दौर. देखा मैंने। बट विनिंग अगर आप जा रहे हो. और आप कुर्सी पर बने हुए हो और आप जो. फैसले ले रहे हो आई डोंट थिंक विनिंग कर. जीतते हुए नरेंद्र मोदी को हम रेस्ट करते.
हुए देखेंगे. तो इसको इस पर छोड़ते हैं कि रामगोपाल. वर्मा इस समय सरकार फोर बनाने जा रहे हैं. हम. फाइनल हो चुका है सरकार बनाई अमिताभ बच्चन. सरकार वन बनाई अभिषेक बच्चन सरकार टू थ्री. बनाई अभिषेक बच्चन गायब. हम. लेकिन अमिताभ बच्चन है. और फोर में तो अभिषेक हो ही नहीं सकते. सरकार रहेगी. हम. सरकार फोर बनेगी तो इसको इसी पे छोड़ देते. हैं कि वो वो सरकार फोर में भी होंगे तो. फिर अमित शाह के लिए और योगी आदित्यनाथ के. लिए आगे का समय बहुत मुश्किल हो जाएगा। वो. कभी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे।.
तो एक चर्चा ये खत्म होनी चाहिए।. बट क्यों योगी आदित्य ऐज फैक्टर है।. हां हां तो अब तो अगले 10 साल और जीते दो. 10 साल और. 29 तो मैं मान के चल रहा हूं। आई डोंट सी. कि 29 में मोदी जा रहे हैं। उसके बाद आई. डोंट नो सेहत का क्या असर होता है। कितनी. आपकी पॉपुलैरिटी होती है। क्या घटनाक्रम. होता है। 19 के चुनाव में एक बार मुझे. लगने लगा था शायद वो हार जाएंगे। हां हां।. 19 के चुनाव में मुझे लगता था कि शायद. राहुल गांधी कमबैक कर लेंगे। एक टाइम पे. बहुत स्ट्रांग सिनेरियो बन रहे थे जब. दिल्ली के सीए एनआरसी आंदोलन हम कवर करते. थे। सो मुझे लगता था लेकिन फिर. परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई।.
बदल गई बदल गई।. यूपी में 24 में हमने देखा लेकिन उसके बाद. जो चुनाव हो रहे हैं वहां बीजेपी कमबैक कर. रही है। अवधदेश जी का बेटा हारा।. हमने वो भी देखा।. बिल्कुल ठीक।. सो पॉलिटिक्स में क्या चेंज हो पता नहीं. मुझे। बट करंट सिनेरियो पे 29 चुनाव. जीते हारे पता नहीं। मोदी के चेहरे पे। आई. बिलीव ये मेरा अपना इंट्यूशन है उनको. समझते हुए कि उनके चेहरे पर ही जाएगा।. ठीक। चलिए, चलिए। [हंसी] ठीक है। अह. गुड्डू मुस्लिम कहां है? अह पिछली बार आपसे बात हुई थी मेरी।. धुरंधर में भी गुड्डू मुस्लिम आए कि मेन.
बात ये है गुड्डू मुस्लिम।. गुड्डू. गुड्डू मुस्लिम कहां है? ये भी तो नहीं रॉ. एजेंट बन गया है।. ऐसा है कि पौने दो साल हो गया मेरी किताब. का सारी बस सारी आए हुए।. चार महीने पहले मैंने किताब कंप्लीट कर. ली। उसमें लास्ट लाइन ही कहा है। कहां है. गुड्डू? कहां हो गुड्डू? बांग्लादेश यहीं पर किताब खत्म होती है।. चार महीने बाद वह किताब छपी. फिर मार्केट में आई। फिर नंबर वन चली गई. देश में और बुक यूनिवर्स में नंबर वन हो.
गई। [गहरी सांस लेने की आवाज़]. अभी छ महीने पहले गुड्डू मुस्लिम की. लोकेशन जो मिली है वो बांग्लादेश में था. और वहां से सऊदिया चला गया। ये गुड्डू. मुस्लिम। यानी मेरी इंफॉर्मेशन मेरी किताब. लिखने से पहले छपने के बाद और अभी छ महीने. पहले तक बांग्लादेश ही था गुड्डू मुस्लिम. जो अब सऊदी चला गया है।. मेन बात ये क्या है इसको डिकोड कर देते. हैं। मेन बात यह है कि गुड्डू मुस्लिम. अतीक अशरफ कुछ वकील ये लोग बैठे हैं।.
कि मेरे ख्याल से यह मसला है अह नैनी जेल. का या थाने में वकील मिलने आए उस दौरान।. वहां पे अतीक और अशरफ ने यह प्लानिंग की. कि उमेश पाल हत्याकांड जो पूरा है वो. गुड्डू मुस्लिम पर डाल देते हैं।. ठीक है? उनको यह इनपुट मिल रहा था कि. गुड्डू मुस्लिम अब खबरें दे रहा है।.
देखिए एक बात को हमेशा डॉट जोड़िएगा कि. गुड्डू मुस्लिम सिर्फ अतीक का एंप्लई नहीं. था। वो और भी कई गैंग्स का एक्सपीरियंस. होल्डर था। ठीक है? उस गैंग के लोग भी. अतीक की उस हत्या में शामिल है। तो गुड्डू. मुस्लिम पर थोपने की पूरी तैयारी हो गई और. फाइनल हो गया। कई वकील भी जेल गए अतीक के।. वहां पर गुड्डू मुस्लिम को यह इंफॉर्मेशन.
दी गई कि अतीक तुम्हारे ऊपर उमेश पाल सारा. खोलने जा रहा है। अब तुम समझ लो तुमको. क्या करना है। तो गुड्डू मुस्लिम ने कहा. ठीक है भाई जो कहेंगे हम तैयार हैं। तो. गुड्डू मुस्लिम सारे डॉट जोड़ते चले गए।. उमेश पाल मर्डर केस में जुड़े जितने लोग. थे चाहे वह उनका बेटा हो अतीक का चाहे कोई. भी हो सब खत्म होते चले गए गुड्डू मुस्लिम. को उसके बदले वो कोई वादा माफ गवाह नहीं. बना. हम.
वो उसको एक पैसेज दे दिया गया जाओ. चले जाओ. काटो. तो अशरफ ये बताने जा रहा था कि मेन बात यह. है कि गुड्डू मुस्लिम ने ही उमेश पाल की. हत्या की और उसकी पूरी प्लानिंग बनाई ये. डालना था गुड्डू मुस्लिम पर और इसी से. बचते हुए ही तो गुड्डू मुस्लिम आज तक बचा. हुआ है। वो मेन बात ये थी। समझ गए आप मेरी. पूरी बात? अतीक अहमद को मरवाया किसने था? अतीक अहमद को मैं धुरंधर पिक्चर देख के.
आया। मैं आपकी किताब पढ़ चुका हूं। कसारी. मसारी।. मैं यूपी की पॉलिटिक्स को फॉलो करता हूं।. अतीक अहमद को तीन लौंडे मार दिए। जिगाना. पिस्टल से जो उनकी औकात के बाहर की पिस्टल. हम. अब मेरे ज़हन में अभी भी सवाल यह आज भी. गूंजता है कि अतीक अहमद काहे मारे गए थे? वह मारे गए थे क्योंकि वह भारत में कोई. साजिश रच रहे थे। जैसा उन्होंने मरने के. पहले पुलिस और अपने इकबालिया बयानों में. कहा कि उनके संपर्क आईएसआई से थे या वो. आईएसआई वाली बात फर्जी घुसेड़ दी गई थी.
क्योंकि वो मुसलमान थे. और अपराधी को आतंकवादी साबित करना उस. मुसलमान हो तो थोड़ा आसान भी होता है।. या जो मरवाए थे और कहा गया था सदन में कि. मिट्टी में मिला देंगे। उस चक्कर में वो. ठोके गए. या बिजनेसमैन या दुश्मनी जो बढ़ाए थे वो. लोग डर के मारे कि भैया हमारा खुलासा कर. देगा तो हम फंस जाएंगे। उसके चक्कर में वो. मारे गए। अतीक अहमद के मरने के पीछे असली. कारण क्या था और कौन तीन लौंडो को भेजा था. कि जाके गोली मार दो। देखिए.
मैं चीजें बता देता हूं आपको। एक बात कि. यह पश्चिम यूपी जितना है दिल्ली एनसीआर. इसमें जो कंप्यूटर इसमें जो स्क्रैप है. इसमें जमीन का जो धंधा है यह अरबों में. है।. इसमें हमेशा गैंग वॉर रही।. तो ब्नोई गैंग से वेपन आया है इरफान. खुरजेवाला के थ्रू। ठीक है? जितेंद्र गोगी यानी लॉरेंस का आदमी और.
टिल्लू तेजपुरिया यानी एंटी लॉरेंस उसको. मारना था। वह तारीख पर पहुंचा नहीं और. जितेंद्र गोगी जो इस एक लड़के के संपर्क. में था वो रोहणी कोर्ट में वकीलों के भेश. में हत्यारे और उसको मार के चले गए। बाद. में टिल्लू तिजपुरिया को तिहाड़ में मारा. गया वीडियो देखा।. बहुत भयंकर. भयंकर। वहां से ये पिस्तल आती है। राठी. भाटी गैंग जिसमें राठी ने मुन्ना बजरंगी. को मारा. और तीन तीन पिस्टल उसमें काम आती है। एक.
नाले में चली गई। एक बदल के बाहर चली गई।. एक राठी के हाथ में रह गई। यहां से यह. एग्जीक्यूशन है। यह एग्ज़क्यूशन की कड़ी. जितेंद्र गोगी पर टूट जाती है। क्योंकि. जितेंद्र गोगी वो व्यक्ति था जो बताता है. कि सुपारी आई कहां से? क्योंकि इन लड़कों. को भी नहीं मालूम था सुपारी कहां से आई. थी। इन लड़कों को सिर्फ इतना मालूम था कि. इन पर गोली नहीं चलेगी। तो तीन थ्योरी है।. बहुत सारे वाइट कॉलर्ड लोग विद इन. गवर्नमेंट। आज की गवर्नमेंट यूपी की बात. कर रहा हूं। विद इन गवर्नमेंट आउट ऑफ द.
गवर्नमेंट वो लोग हैं जिनका हजारों करोड़. रुपया अतीक के साथ लगा हुआ था। आप अतीक के. मर्डर वाले दिन पर ध्यान मत दीजिए। आप. अतीक के मर्डर के तीन दिन पहले उस रेड पर. ध्यान दीजिए जो इनकम टैक्स और ईडी ने डाली. थी। ईडी ने हां ईडी ने डाली थी वहां पे।. इलाहाबाद सारे कंप्यूटर डेस्क सब वहां से. ले जाया गया। ठीक है? तीन थ्योरी है। एक. अतीक उनके लिए लायबिलिटी हो चुका था उमेश. पाल के मर्डर के बाद। तो वो हजारों करोड़.
और यह सारा राज खुलने के चक्कर में उन. सारी चीजों को निपटा दिया गया। दूसरा. मिट्टी में मिला दूंगा। और तीसरा. विपक्ष ने इन पार्ट अतीक के पार्टनर्स के. साथ मिलकर यह सारा खेल इसलिए कराया ताकि. योगी आदित्यनाथ ब्लॉटेड हो जाए। लेकिन. पुलिस का जो एक्शन है उस दौरान. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसको देखकर. लगता है कि कहीं ना कहीं सिस्टम यूज़ हो.
गया है। या तो सिस्टम यूज़ किया गया है या. सिस्टम को यूज़ करके ही वो कराया गया है।. ये है कुल मिला के बस। तीनों थ्योरी में. सबसे प्रबल थ्योरी कौन सी लगती है? सबसे प्रबल थ्योरी सिस्टम को यूज़ करने का. है।. नंबर दो वाली. हम. सबसे ज्यादा. जो पिक्चर में दिखाया गया है। मतलब. कांसेप्ट हटा दें।. नहीं नहीं अच्छा उसको आपने नंबर दो कर. दिया क्या? सिस्टम इन्वॉल्व्ड था। ये कह. रहा हूं।. सिस्टम तो सरकार से ही होता है ना? हां हां तो वो सिस्टम मतलब इस सरकार भी. शामिल भी था और इस्तेमाल भी.
वही मतलब कि. सब नहीं थे। सब नहीं थे। इस कमरे में बैठे. हो सकता है केवल शुभांकर इन्वॉल्व हो। हां. हो सकता है. मनोज इन्वॉल्व ना हो और मनोज को ये मालूम. ही ना हो कि. हो सकता है लेकिन बयान जब आया. सदन में कि मिट्टी मिला देंगे. मिट्टी में मिला देंगे. तो हम और आप एक्सपेक्ट तो कर रहे थे कुछ. होगा. तो इसका मतलब वहीं से घूम के गया. वहीं से घूम के गया जैसा पिक्चर में भी. दिखाया गया भले योगी जी को नहीं दिखाया. हां जैसे पिक्चर में दिखाया गया बस बस बस. बस सेम तरीका वही है. इस अंदाज में. इसीलिए पुलिस वालों ने गोली नहीं मारी. गोली नहीं मारी कहां मारी हॉल स्टार पे.
हाथ नहीं डाला गोली मारना तो बात. और इसीलिए तीनों लौंडे का अता पता नहीं आज. के टाइम में. नहीं जेल में है. हां मतलब अब अब तो नॉर्मल हो गया ना. वो वो तो उनको लौंडो को मालूम ही नहीं है. करना क्या था उन लौंडो को तो कैमरा दिया. गया माइक दिया गया रेकी कराई गई पुराने. छोटे-मोटे इतिहास थे जज्बा बड़ा था पैसा. दे दिया 10 साल में छूट जाओगे अरे छूट. जाएंगे या ये किसी दिन जेल में मार दिए. जाएंगे कभी भागते वक्त गोली मर जाएगी जब. न्यायिक अभिरक्षा में अतीक मार दिए गए. जुडिशियल कस्टडी में मार दिए गए तो इनका. क्या होगा क्या मालूम अतीक का इतना ताकत.
था जितना दिखाए हैं धुरंधर में कि जेल के. अंदर से भी सारा सिस्टम चला रहा था।. हां बिल्कुल चला सकता था क्योंकि जेल से. वो फेस टाइम से लेके WhatsApp पर जो भी. बात करता था. उन बातों की भी ट्रैपिंग थी। ट्रैपिंग थी. हम. वो बातें बहुत सारी रिकॉर्डिंग मैंने सुनी. है और अतीक जेल से ऑपरेट करता था। अगर. नहीं ऑपरेट किया होता तो शाहिस्ता को. इनवॉल्व नहीं करता। बरेली जेल में अशरफ के. पास भेजता नहीं और शाहिस्ता इसकी. मास्टरमाइंड ना बनती कि सारे लोगों को.
इकट्ठा करना, पैसा इकट्ठा करना, वेपन. मंगाना, रेकी कराना और उमेश पाल को मरवा. देना।. अतीक की बीवी शाहिस्ता कहां है? अतीक की. बीवी शाहिस्ता को आप मान के चलिए विकास. दुबे के पूरे मामले में जो खुशी दुबे है. वो है।. खुशी दुबे विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद. विकास दुबे के गैंग के एनकाउंटर. खुशी दुबे कहे। रिचा दुबे कहे नहीं गए।. रिचा दुबे तो पत्नी है। हां।. मैं खुशी दुबे की बात। क्यों? रिचा दुबे. जेल गई क्या? खुशी दुबे गई ना?
खुशी दुबे मैं उदाहरण बता रहा हूं कि. शाहिस्ता खुशी दुबे बन गई है।. वही मैं जानना चाह रहा हूं कि क्यों? रिचा दुबे क्यों नहीं? खुशी दुबे क्यों. गई? वही बता रहा हूं। खुशी दुबे इसलिए कि जब. इस पूरे मामले में खुशी दुबे को जेल भेजा. गया तो सरकार के गले की फांस हो गया।. कि यार खुशी दुबे का बहुत रोल नहीं था और. यार एक नई नवेली दुल्हन नई ब्याहता थी. उसको हमने जेल भेज दिया महिला वाला एंगल. भी शामिल हो गया तो अंदर खाने में इस बात. पर बड़ी चर्चा हुई ब्यूरोक्रेसी में.
मुख्यमंत्री कार्यालय में इस पर बहुत. चर्चा हुई कि खुशी दुबे के केस को केस को. कितना पुश किया जाए तो धीमे-धीमे ये हुआ. कि खुशी दुबे के मामले में बोलना नहीं है. ज्यादा तो बोला नहीं गया फिर धीरे-धीरे यह. तय हुआ कि कोर्ट में थोड़ी सी पैर पैरवी. को माइल्ड कर देते हैं। डाइल्यूट कर देते. हैं। माइल्ड किया गया। डाइल्यूट किया गया।. खुशी दुबे छूट गई। फांस भी निकल गई। बात. भी नहीं हुई। यही काम शाहस्ता के साथ है।. बट शाहिस्ता को तो मास्टरमाइंड माना।. मास्टरमाइंड मान लिया ना। थी तो महिला.
भाई सारे. शूटर मर गए।. बहुत बड़ा सर का पहाड़ था। अतीक और अशरफ. मर गए।. बच्ची मर गया।. बेटा चला गया। बची शाहिस्ता दो लड़के. हां दो लड़के तो शाहिस्ता के लिए तो बड़ी. सीधी सी बात है मैं आपको हॉर्सेस माउथ की. बात बता रहा हूं. के शाहिस्ता की लोकेशन जहां भी दिखाई दे.
वहां से पुलिस की दो गाड़ी सायरन बजा के. निकाल देनी है टा टा टा टा करती हुई. क्योंकि जहां पे उसकी टाय टाय सुनाई दी वह. लोकेशन बदल देगी तो उसके पकड़ने से ज्यादा. अच्छा उसको भागने दो. उसको भागने दो। भागते भागते हाप के चली. जाएगी किसी दिन वो मर के।. शाहिस्ता लापता नहीं है। जाहिर सी बात है. यूपी पुलिस को पता नहीं होगा। शाहिस्ता. कहां है? सब पता है। तो ये तो ये तो बेवकूफी वाली. बात है कि हम कहें कि हमको पता नहीं है।.
गुड्डू को पैसे दिया गया है। शाहिस्ता को. छोड़ दिया गया।. सीधी सी बात है।. काम निपट गया है। धुरंधर में खानी ब्रदर्स. थे जिनको दिखाया गया कि नोटबंदी अगले दिन. वो टपक गए।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. कई सारे चीजें ऐसी जो बड़ा रियलिटी करीब. है। सत्य घटना है। तो पैसा आता था नेपाल. के थ्रू इंडिया 100% मिर्जा दिलशाद बेग. परवेज डांडा दो लोगों के जरिए आता था. पैसा। मैं आपको बता रहा हूं। मैं. हिंदुस्तान टाइम्स में था तब. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऑपरेशन कैसे. होता है ये बता रहा हूं आपको क्योंकि मैं.
उसका रिपोर्टर रहा हूं।. 500 [गला साफ़ करने की आवाज़] का नोट आता. था तब 1000 का नहीं आता था।. उस वक्त क्या हुआ कि रिजर्व बैंक का एक. सीक्रेट कॉन्फिडेंशियल मूवमेंट उसका लेटर. मेरे हाथ लग गया। उसमें. [नाक से की जाने वाली आवाज़] लिखा था कि. कोटा और पेशावर. दो जगह नकली नोट 500 के छापे जा रहे थे।. वो नोट ऐसे थे कि नोट पर इधर गांधी जी बने. होते थे और वाटर मार्क को अगर आप देखेंगे.
उसमें अशोक की लाट थी। नोट असली था। लेकिन. यह वाला नोट पाकिस्तान ने छाप दिया था। वो. सब खनानी ही थे। एकदम ओरिजिनल। हां. ओरिजिनल। अरे कुछ एक आधे सिक्योरिटी मार्क. अगल-बगल. कुछ आधा एक आधा। तो रिजर्व बैंक ने तय. किया. रॉ और आईबी के उस पर कि. [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम क्या. करेंगे? यह जो गांधी जी यहां बने हैं और. वाटरम्क पर जो अशोक बने हुए हैं, अशोक की. लाट बनी है। इस अशोक की लाट को हटाते हैं।.
यहां भी गांधी जी, वाटरमार्क में भी गांधी. जी हम एक नई सीरीज लाते हैं। तो जिस 500. के असली नोट में अशोक की लाट भी बनी होगी, वो भी हम रख लेंगे। यह सीक्रेट ऑपरेशन. शुरू किया गया। मैं वो व्यक्ति हूं देश का. पहला जिसने यह बताया है कि देश में नेपाल. के रास्ते कोटा और पेशावर में छाप का. छपवाकर. नकली नोट भेजा गया है 500 का। आई वास द.
फर्स्ट रिपोर्टर। पहले पन्ने पर लीड छपी. थी पूरी खबर मेरी बाय लाइन के साथ। तो. कैसे लेते थे कि मान लीजिए आप एसबीआई में. हैं। मान लीजिए आप बैंक ऑफ बड़ौदा में. हैं। तो आपने 500 का नोट दिया जिसमें इधर. गांधी जी इधर अशोक की लाट है। वो नोट वो. रख लेंगे। आपको गांधीजी और वाटरमार्क में. भी गांधी जी वाला नोट दे देंगे। धीमे-धीमे. यह पैसा जाता कहां है? ब्रांच से करेंसी. चेस्ट में। करेंसी हर बैंक की करेंसी. चेस्ट होती है। जहां सारा पैसा होता है, ब्रांचेस को बांटते हैं वो। यह करेंसी. चेस्ट से पैसा कहां जाता है? रिजर्व बैंक.
के पास। तो रिजर्व बैंक ने नई सीरीज जारी. करके पुरानी सीरीज को काटा, चिथड़ा किया, जला दिया। एक बार पहली बार भारत का जो. नकली नोट आ रहा था पाकिस्तान से छप के. उसको ऐसे बदला गया। फिर यह खानी ब्रदर्स. ने 1000 का नोट भी छापा। 500 का नोट भी. छापा। नेपाल के रास्ते मिर्जा दिलशाद बेग. जो एक ऑपरेशन में मारा गया। परवेज टांडा. भी ऑपरेशन में मारा गया। यह बिल्कुल सच. है। और खनानी वैसे ही बिल्डिंग से गिरा।.
उसकी बिल्डिंग थी। उसमें कुछ ऑफिसिसेस भी. थे। वो बिल्डिंग में गया। कार खड़ी की।. ऊपर गया। ऊपर कुछ सामान था। वो सब. देखतेदेखते गया और ऊपर से गिर गया। अब. इसमें से फिल्म देखें तो हमजा गायब है. लेकिन खनानी नीचे है। खनानी. [गला साफ़ करने की आवाज़] नीचे है। तो. माना उसको पाकिस्तान की पुलिस ने भी उसको. यही माना था कि उसने आत्महत्या की है। तो. खनानी वाला प्रकरण तो बिल्कुल सही है।. और कौन सा प्रकरण सही लगता है आपको? दाऊद इब्राहिम वाला। दाऊद इब्राहिम की. स्लो पोइजनिंग मुझे सही लगती है। बिल्कुल.
क्योंकि इस बारे में बहुत सारे इंटेलिजेंस. कन्वर्सेशन हुए हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. लेकिन एक चीज नहीं सही लगती है कि दाऊद ही. सब चला रहा है। कि आतंकवादी भी भेज दो, नोट भी भेज दो। आईएसआई क्या कर रही है. हमको बताओ। ये सब कर दो। सब दाऊद चला रहा. है।. धुरंधर में एक डायलॉग था कि रणवीर सिंह. कहता है कि मैं दाऊद को मार नहीं पाया।. हां। तो फिर बेदी साहब कहते हैं कि जो मजा. तड़पा के रोज मारने में है वो एक बार. मारने में थोड़ी ना है। तो जो हम स्लो.
पोइजन वाली खबर पढ़ते हैं लगातार बीते कई. सालों से आपको लगता है कि ये इंडिया ने. करवाया होगा दाऊद के साथ 100% करवाया. होगा। दाऊद जब तक जिंदा है तब तक मजा है. कुछ चीजों का।. कुछ चीजों के जिंदा रहने में मजा है। जैसे. आपको क्या लगता है लादेन मर गया? मतलब मेरे दिमाग दो थ्योरी कहते हैं। मुझे. लगता है कि अमेरिका ने उसको समुद्र में. नहीं फेंका है। कहीं रखा हुआ है।. मुझे भी लगता है. क्योंकि जब तक यह शक जिंदा रहता है ना एक. मजा रहता है। देश को ऑपरेशंस में बहुत.
सारी मदद मिलती है इससे। कभी-कभी कुछ. चीजें देश हित में की जाती है।. दाऊद को जिंदा रख के इंडिया क्या मिलेगा? दाऊद को जिंदा रखने पे दाऊद के कनेक्शंस. और इंडिया में उसकी गतिविधियां पता चलती. रहेंगी हमेशा से।. तो दाऊद तो पाकिस्तान में बैठा है।. तो दाऊद ही तो ट्रैप होगा ना। दाऊद को एक. बार में मार के करना क्या है? दाऊद को. जिंदा रखिए। दाऊद के जरिए आपको आईएसआई की. एक्टिविटी पता लगती है। दाऊद के जरिए आपको. लश्कर तयबा की भी और ये सारी दूसरा कौन सा.
संगठन है? इन सब की मिलती है। तो दाऊद. ट्रैप में होगा, ट्रेस में होगा, रडार पे. होगा। तो दाऊद के जिंदा रखने से. दाऊद को अगर मार दे तो बढ़िया मैसेज नहीं. आएगा कि 93 बम ब्लास्ट के आरोपी को हमने. टपका दिया।. तो क्या आपको लगता है कि इंडिया नहीं मार. सकता था? क्या दाऊद को नहीं मार सकता था? मार सकता. था।. हां मतलब मुझे लगता है कैसे मार सकता? भाई. जावेद मियादाद के से उसकी शादी करा दी. अपने बच्चे की तो क्या इंडिया ने कभी वहां. पे क्या उनकी इंडिया के एजेंट नहीं है. इंडिया के वो एजेंट है जो कौथा वाला.
न्यूक्लियर प्लांट ट्रेस कर लिए थे और एक. दाऊद को ट्रेस नहीं कर पाएंगे. मुरारजी ने उसमें कांड कर दिया था. हां मुरार जी ने कांड किया था बिल्कुल के. एन काऊ थे उस समय मुरारजी को लगता था कि. इंदिरा गांधी ने रॉ बनाई इसलिए. कि उनका काम कर. उन्हीं की जासूसी की जाए कांग्रेसियों की. जासूसी की जाए. निशाने ने पाकिस्तान एकमात्र ऐसा है जो. मोरारजी देसाई को। तो मेरे मन में एक सवाल. आता है कि मोरारजी देसाई को जो जनरल. जियाउल हक ने निशाने पाकिस्तान दिया था वो. इसीलिए दिया था क्योंकि उन्होंने जियाउल.
हक से कह दिया था कि हमें पता है तुम वहां. पे क्या कर रहे हो न्यूक्लियर में और फिर. उसने सारे रॉक एजेंट्स मरवा दिए थे। ऐसा. है या यह भी उस समय का प्रोपेगेंडा था. क्योंकि इंदिरा गांधी जी बाद में लौट आई. और वो उस दौर में इकलौते व्यक्ति थे जो. जनता दल के थे प्रधानमंत्री बने तो बाद. में उनको बदनाम करने के लिए डाल दिया गया. कि नहीं बदनाम वाली बात ही नहीं बदनाम. वाली बात नहीं है. सच है. बिल्कुल सच है ऐसा है हम लोग काफी छोटे. होते थे जब मुरार जी प्रधानमंत्री बने. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनके बारे.
में एक बात बहुत फेमस थी कि वो. स्वमूत्रपान करते हैं।. कहां अपना पेशाब पीते थे? अपना पेशाब पीते थे और बहुत लोग पीते थे।. वो एक [नाक से की जाने वाली आवाज़] पैती. मानी जाती है। जियाउल हक मोरारजी देसाई से. यह पूरी विधा सीख रहे थे। स्वम मूत्रपान. की।. पेशाब पीने की।. पेशाब पीने की। उनको पेशाब पीना नहीं था।. मोरारजी की उस आदत को बूस्ट करना था। उनको. यह बताना था कि तुम बढ़िया काम बताते हो. यार। दोस्ती गाटनी थी जियाउल हक को।. धीमे-धीमे अपना दोस्त बनाना था। उस दोस्ती.
में के एन काव जब 50 लाख या ₹60 लाख का एक. प्रस्ताव ले गए और कौथा बताया किसने था? केजीबी ने बताया था। और प्लानिंग तो ये थी. ना. इजराइल ने शायद. इजराइल ने। इजराइल इजराइल मुसाद मुसाद. मुसाद सॉरी सॉरी सॉरी मुसाद मुसाद ने. बताया और ये पूरी प्लानिंग थी कि कौथा पर. अटैक कर दिया जाएगा। ठीक है? सीआईए को. नाराजगी इस बात की थी कि उस दौरान मतलब ये. बाकायदा सीआईए के रिटायर्ड लोगों ने यह.
बात कही है कि इंडिया जो है वो रशा के साथ. सोता है। यह नाराजगी सीआईए को थी।. यह वाली बात मुरार जी से लीक हुई कि अरे. देखिए हमारे यहां आए थे तो मैंने मना कर. दिया। वो वैसे भी रॉ को पसंद नहीं करते थे. मुरार जी और के एन काऊ मतलब उस जमाने के. के एन काऊ और आज के अजीत डोवाल ऐसे समझ. लीजिए। तो के एन काऊ बहुत डायनेमिक आदमी. थे। रॉ के पहले हेड चीफ थे वो। तो. उन्होंने जब यह बात लीक हुई तो 300 350.
एजेंट्स पकड़ पकड़ के पूरे पाकिस्तान में. मारे गए और कौथा को डिस्मेंटल कर दिया. गया।. इस पूरी. झंझट के बाद मोरार जी को निशाने पाक दिया. गया। इसमें एक चीज सबसे बेहतरीन मालूम है. आपको क्या है? धुरंधर टू धुरंधर वन देखी. आपने धुरंधर वन में जब अर्जुन रामपाल यानी. मेजर इकबाल का इंट्रोडक्शन सीन है तो एक.
आदमी पर हजारों हुक लगे हुए हैं। ठीक है. ना? और वो कह रहा है कि ब्लीड इंडिया फ्रॉम. थाउजेंड कट्स। यह मेजर इकबाल का डायलॉग. नहीं है।. जियाउल हक. ये जियाउल हक का था कि ब्लीड इंडिया फ्रॉम. थाउजेंड कट्स। और वो कैसे किए उसने कश्मीर. में मुजाहदीन. नीचे साउथ की तरफ लिट्टे पंजाब में. खास्तान और नॉर्थ ईस्ट में बोडो.
सबको फंड करके सबको वेपन सप्लाई करके उसका. जो स्लोगन था जो टाइटल था जो टैगलाइन थी. कि ब्लीड इंडिया फ्रॉम थाउजेंड कट वो. जियाउल हक कर रहा था और मुरारजी देसाई को. ये मालूम ही नहीं था कि वो क्या ब्लंडर कर. चुके हैं।. तो बात बिल्कुल सच है। यह किसी ने थोप. नहीं दी है। ये किसी ने थोपी नहीं है। कुछ. लोग इंद्र कुमार गुजराल को कहते हैं ऐसा. पर यह मुरारजी के समय में हुआ है। यह. मुरारजी के समय में मुरारजी से हुआ है।. आपकी किताब आई कसाईवाड़ा।.
हां।. एक [नाक से की जाने वाली आवाज़] महिला. हमें नजर आ रही है।. हां।. भगवा झंडा नजर आ रहा है। हरा झंडा नजर आ. रहा है। क्या कहानी है इसकी? जरा बताएंगे. हमें थोड़ा सा।. देखिए ऐसा है।. कानपुर की मशहूर तवायफ. अजीजान बाई। [गला साफ़ करने की आवाज़]. कौन है अजीजान बाई? अजीजन बाई. अजीजन बाई।. अजीजन बाई बेसिकली हिंदू थी। उसका नाम. अंजुला था। मध्य प्रदेश से उसको 12 13 साल. की उम्र में अंग्रेज उठा लाए और अंग्रेज. उस समय हिंदुस्तानी लड़कियों को उठा ले. जाते थे। उसके संग जो दरिंदगी करनी थी.
सबकी। उसके बाद कानपुर के एक कोटे में. बैठाल दिया उसको और वो अंजुला से अजीजन. बाई बन गई। उमराव जान ने उसको नृत्य. सिखाया। तहजीब सिखाई। लेकिन अजीजन बाई. तवाइयफ होने से हैवानियत होने के बाद टूटी. नहीं। उसने तवाइयफों को इकट्ठा किया और. तवाइयफों की एक सेना बनाई जिसका नाम रखा. मस्तानी टोली। उस मस्तानी टोली ने. अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा। लेकिन यह.
सब की सब लड़ाका कम जासूस थी। और अजीजन. भाई 1857 की एकमात्र जासूस थी पेशवा नाना. राव की जो बाजीराव जो जाजीराव मस्तानी. वाले बाजीराव उनके वंशज थे। यह कहानी उस. अजीजन बाई के अलावा सबसे बड़ी बात यह है. कर्नल जेम्स स्मिथ नील की है जिसने हैवलॉक. के साथ मिलके. सेना के साथ मिलके 63 दिनों में लगभग लगभग.
60-7000 लोग मार डाले थे। कर्नल जेम्स. स्मिथ नील ने पौने घंटे में 9500 लोगों को. मारा था।. बाप रे। उसने हिंदुओं को गाय का मांस. खिलाया। फिर फांसी पर चढ़ाया। उसने. मुसलमानों को सूअर मुंह में ठूंस के. खिलाया और फिर तोपों के आगे बांध दिया।. उसका शौक था कि अगर प्रेग्नेंट औरत उसको. दिख गई। तो जिस एनफील्ड को लेके मंगल. पांडे ने हल्ला बोला था उस एनफील्ड की.
गोली बर्बाद नहीं करता था वो। वो उसके आगे. लगी हुई जो संगीन थी वो पेट में डाल देता. था। और कहता था बुलेट आर प्रिशियस। ऑलवेज. एक तीर से दो निशाने मारो। एक प्रेग्नेंट. को मारोगे तो दो लोग मरेंगे। यह था कर्नल. जेम्स स्मिथ नील। हमारी बात सीधी तौर पर. यह है कि लोग पूछते हैं अतीक ज्यादा बड़ा. बदमाश था या मुख्तार बहुत बड़ा बदमाश था. या कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का जो. नरसंहार था वो बहुत बड़ी घटना थी या.
जलियांवाला बाग बहुत बड़ी घटना थी।. जलिरियांवाला बाग बहुत बड़ा नरसंहार था या. भोपाल गैस त्रासदी बहुत बड़ी थी। मैं वो. बताना चाहता हूं कि ये एक ऐसी त्रासदी है. जिसमें 63 दिन में 60 हजार 70 हजार लोग. मरे। लेकिन वो माफिया जो सबसे बड़ा माफिया. था वो हमारी कब्रों में आज भी लेटा है। आज. भी हैवलॉक रोड है। आज भी हडसन जिसने. बहादुर शाह जफर के दोनों बेटों की गर्दन. काट के किले पर लटका दी थी। उसकी कब्र.
लामार्ड में है। लखनऊ. जी। हेवलॉक रोड भी लखनऊ में है। डलहौजी आज. भी है। लसडाउन आज भी है। लैंडोर आज भी है।. हम इन पर ध्यान क्यों नहीं देते? नील की. एक मूर्ति चेन्नई के चौराहे पे लगी थी।. नील की वो हैवानियत के यूरोपियन. ऑथर्स ने, हिस्टोरियंस ने, इवन ईस्ट. इंडिया कंपनी ने, इवन विक्टोरिया राज ने. बताया कि ही वाज़ ए पुचर। मेरी लास्ट बात. सुनिएगा।.
उसको गांधी जी ने कहा कि इस मूर्ति के. खिलाफ जिसके लिए किताब कसाई बड़ा है जो. कसाई है उस जेम्स स्मिथ नील की मूर्ति. हटवाएंगे तो हम लोग हैं चौराहे से लेकिन. अहिंसात्मक तरीके से आजादी के बाद बहुत. बाद जेम्स स्मिथ नील की वो मूर्ति चेन्नई. के चौराहे से हटाई गई और अब संग्रहालय में. रखी हुई है। लेकिन जेम्स स्मिथ नील की नील. लाइन आज भी लखनऊ में है। नील गेट आज भी. है। उनका कब्र भी आज भी तो आपको लगता होगा. क्या मैं कह रहा हूं हडसन और नील की कब्र. खोद दो ऐसा करना है तो फिर इस बात पर.
क्यों जश्न मनाया जाता है कि राजा राम जाट. ने अकबर की कब्र खोद के अस्थियां जला दी. थी. लेकिन अकबर रोड हटनी चाहिए अकबर ने 4ज़. हिंदुओं का कत्ल किया था चित्तौड़ में. जाके टीपू सुल्तान जिसकी तलवार और हैदर. अली के बारे में हम पढ़ते थे अब एनसीआरटी. में उसका चैप्टर नहीं क्योंकि वो हिंदुओं. का दमनकारी था ठीक है होगा हटा दिया आपने. हुमायूं रोड का नाम बदलना था बदल दिया. आपने। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करना था।. कर दिया आपने। इनको क्यों नहीं किया आपने?
इन अंग्रेजों की हुकूमत के जो वो दरिंदे. खड़े हुए हैं जिनके नाम पर ये रोड्स हैं, जिनके नाम पर शहर हैं, मोहल्ले हैं, गली. हैं। इनको क्यों नहीं हटाया? जानते हैं. क्यों नहीं हटाया? क्योंकि इसमें वोट नहीं. है। वोट तो अकबर में है। वोट तो हुमायूं. में है। वोट तो औरंगजेब में है। वोट तो. टीपू सुल्तान में है। जब तक इस्लाम. और हिंदू लड़ता रहेगा तब तक वोट है। तो. मेरा मानना यह है कि पाकिस्तान के सैकड़ों.
लोगों के मरते देखकर ताली बजाने वाले हम. कम [नाक से की जाने वाली आवाज़] से कम यह. किस्सा याद कर लें कि हिंदुस्तान के. मुसलमान और हिंदू एक थे। तब यह भारत बना. है। उस भारत की कहानी और उस सबसे बड़े. विलेन के बारे में जो आप पूछते हैं ना. अतीक ज्यादा बड़ा था या मुख्तार। अरे इन. सबसे बड़ा था वो जेम्स स्मिथ नील। इसीलिए. उसमें हरा झंडा जो है वो मुसलमानियत का है. जो बहादुर शाह जफर का झंडा था और जो भगवा. झंडा है वो पेशवा नाना राव का था। और हमने.
यह बताने की कोशिश की है कि पेशवा का भगवा. और बहादुर शाह जफर का हरा झंडा ये दोनों. एक साथ लड़े तब भारत बना था। आज भारत. हिंदू मुसलमान करा रहा है।. मेरे ज़हन में एक सवाल आ रहा है। यह आखिरी. सवाल है।. हमने औरंगजेब के किस्से सुने।. हां।. हमने टीपू सुल्तान के किस्से सुने।. मौजूदा दौर में हम अतीक मुख्तार शबुद्दीन. या और जो श्री प्रकाश शुक्ला और भी जितने.
अपराधी होंगे।. बहुत बहुत. जात धर्म से परे अलग-अलग उन सब की. हैवानियत के किस्से सुने।. [गला साफ़ करने की आवाज़]. हिंदू मुसलमान आतंकवादी हमारे यहां देश. में घोटसे किस्से सुनाए जाते हैं। हमारे. यहां पर सबने अपनी-अपनी आइडियोलॉजी चुन ली. है। जिस किताब को मैंने अपने हाथ में. पकड़ा है। इस किताब में आपने बताया कि इस. आदमी ने 60 हजार लोगों को मार दिया। 63. दिनों में. प्रेग्नेंट महिला को मार।. तीन लोगों ने मिल बिल्कुल ठीक है।.
इस जेम्स स्मिथ नील के बारे में ना भारत. के मुसलमान ना भारत के हिंदू क्यों नहीं. बात करते? इसीलिए बात नहीं करेंगे क्योंकि अब हिंदू. मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं। फिर भी 60. 63000 आदमी अकबर का 400 का आज तक केस चलता. है।. हां. कि अकबर ने. 400 मतलब. 400 मरवा दिए थे।. अ उनसे महाराणा प्रताप से लड़ते हुए 400. हिंदुओं को ये सब कर दिया था। चित्तौड़. में जा के मार दिए थे। टीपू सुल्तान. औरंगजेब का चलता है।.
औरंगजेब का चलता है।. इस जेम्स स्मिथ नील का क्यों नहीं चलता? इस जेम्स स्मिथ नील का इसलिए नहीं चलता कि. अब आजादी मिल चुकी है। पाकिस्तान अलग हो. चुका है।. इतिहास पे तो कहीं दर्ज होना चाहिए था।. इतिहास में कोई लाएगा ना खोज के। मनोज. राजेंद्र त्रिपाठी ने अतीक को खोजा।. अतीक मारा गया। मनोज राजेंद्र त्रिपाठी ने. अतीक पे किताब नहीं लिखी। कैसे मारा गया? इस पर किताब लिख डाली। अतीक की राक्षसी भी. दिखा दी। अतीक अतीक की हैवानत भी दिखा दी।. मैं दिखाना चाहता था कि अब तुम यह बात. क्यों नहीं कर रहे हो?
तुम सबको मिलके जेम्स स्मिथ नील ने मारा. था। तुम्हारी गर्भवती बहू बेटियों को मारा. था। आज तुमको आराम इसलिए है कि तुम एक देश. में हो। एक देश तुम्हें मिल चुका है। वो. जिसने छीना था वो आज भी छाती ताने खड़ा. हुआ है। तुम्हारे ही शहरों में अपने ही. नामों पर। लेकिन तुम उसके बारे में कुछ. आप तो लखनऊ में रहते हैं। योगी जी को काहे. नहीं बताएं कि भैया ये सब हटवाइए ला. मार्टिनर से।. मैं योगी जी को यह बताऊं तो क्यों बताऊं.
मेरे हाथ में मेरा लिखना है और मैंने यह. कहानी किसी 1857 के गदर पर नहीं लिखी है।. मैंने यह बताने की कोशिश की है कि हिंदू. और मुसलमानों का सबसे बड़ा कातिल वो. अंग्रेज था। वो अंग्रेज था जिसने सबको. मिलकर काटा। जिसने औरतों की इज्जत लूटी।. जिसने 13 साल, 12 साल, 11 साल की बच्चियां. नहीं छोड़ी। वो थे यह अंग्रेज। इन. अंग्रेजों को जिस दिन याद रखोगे उस दिन. भगवा और हरे में भूल जाओगे। जलेबी इमरती.
का नाम लेना बंद कर दोगे। ग्रीन एप्पल और. ऑरेंज में फर्क करना बंद कर दोगे। रंगों. की राजनीति नहीं होगी। कोई दीपिका अगर. सैफरॉन कलर की बिकनी पहन के आ जाएगी तो उस. पे बहुत बड़े बवाल नहीं होने चाहिए। रंग. भी अगर इस्लाम और हिंदु हिंदूज्म में बट. जाएंगे तो होगा क्या? हमको एक बार फिर. पीछे जाना चाहिए। और हमको इन कहानियों को. सुन के कोई नानी तो बताएगी कहानी। अब तो. नानियां ही नहीं ऐसी तो नानी बन के कहानी. बता रहे हैं कि भैया ऐसा हुआ था तुम्हारे. साथ। मैं तो चाहता हूं वो मैंने मैकू और.
मुबीन की जो बात कर रहा हूं। मैं चाहता. हूं मैकू और मुबीन साथ रहे। मैकू और मुबीन. साथ रहेंगे तो हम पाकिस्तान नहीं बनेंगे।. हम आपस में लड़ गए तो गृह युद्ध में नहीं. फसेंगे क्या? आज पूरी दुनिया लड़ रही है. आपस में। क्या हम नहीं लड़ जाएंगे? कल को. कोई शुभांकर पर इसलिए हमला कर देगा कि. शुभांकर रहे। और कल को शुभांकर किसी शमीम. पर हमला इसलिए कर दें क्योंकि वो शमीम है।. अरे यह तो देखो आके कि डिवाइड एंड रूल का. फार्मूला जो छोड़ गए थे तुमको मारकर काटकर. सूअर खिलाकर गाय खिलाकर तुम्हारी गर्भवती.
महिलाओं के मस्कट घुसेड़ कर जिन्होंने. मारा था। आओ और उनके बारे में पढ़ो। उनके. बारे में समझो और फिर एक बार अपनी बुद्धि. को सहलाओ कि तुम जो सोच रहे हो वो सही सोच. रहे हो। एक अजीजन अंजुला से अजीजन बन गई।. कुबूल था उसको लेकिन उस अजीजन ने लड़ाई. लड़ डाली अंग्रेजों से। किस लिए? मनोज. राजेंद्र त्रिपाठी के लिए। कि जब मनोज राज. त्रिपाठी आजाद होंगे तो किसी मुबीन अहमद.
को मारेंगे भटक के और कहेंगे कि यह देश. मनोज राजन त्रिपाठी का है। मुबीन का नहीं. है। तो जो मुबीन और मनोज जीता कर लाए हैं. इस देश को जिन्होंने सांस दी है क्योंकि. अजीदन ने अपनी अपना तो इश्क छोड़ दिया।. अपना इश्क छोड़ दिया। उन्स है, अकीदत है, इश्क है, मोहब्बत है। गजल है उमर खयाम की।. इसमें मिर्जा गालिब है, इसमें मालकोंस है, राग भीम पलासी है, सब है। लेकिन इसमें खून.
ही खून है। और किसी कश्मीर से ज्यादा है, किसी भोपाल गैस से ज्यादा है, किसी अकबर. से ज्यादा है। किसी से भी ज्यादा। मैं इस. किताब को पढ़ता हूं एक बार सुकून से और. फिर इस किताब पर मुझे लगता है कि मैं. दर्शकों से भी कहूंगा कि मनोज जी की किताब. है कसाई बाड़ा जबरदस्त यहां पर आपको. पोस्टर दिख रहा होगा इस हरे और भगवे झंडे. के बीच में हिंदुस्तान असली हिंदुस्तानी. कहानी है। तो मैं इसको पढ़ना शुरू करता. हूं। आप भी इसको पढ़िए और इस पडकास्ट के.
अंत में अपना फीडबैक दीजिएगा और फिर एक. रोज बैठते हैं इस किताब पे। बिलकुल बैठते. हैं।. जब आपका अगला दिल्ली दौरा होता है जब भी. तब तक मुझे लगता है काफी दर्शक भी पढ़. चुके होंगे।. और फिर उनके सवालों को मिलाकर हमारे. सवालों को मिलाकर एक नए सिरे से एक. इंटरव्यू केवल किताब पे रखते हैं।. बिल्कुल रखते हैं।. बिल्कुल तब तक कुछ और बताना चाहे आप अतीक. या यूपी के बारे में जाते-जाते।. पता चले कब्बू? अतीक काहे मारे गए?
अह कोई किताब लिखेगा कोई सरकार से? मेरे. पास पार्ट टू लिखने का ऑफर है।. लेकिन अभी पार्ट टू मैं किसी और पे रिसर्च. कर रहा हूं। उसको आप अच्छी तरीके से जानते. हैं।. उस पर रिसर्च कर रहा हूं। मेरा रिसर्च जरा. तय हो जाए। दवाई दवा दवाई दोनों काम आती. है।. दवा और दवाई दोनों काम आती है। तो. इशारोंइशारों में खेलने की भी अपनी राय. है।. हां इसको देख लेते हैं।. और उस पर भी किताब एक लिखनी है। लेकिन. अतीक दौर बदलने की बात है।.
दौर बदलने की बात है। मामले जांच में. होंगे, मामले कोर्ट में होंगे। बहुत सारी. चीजें सामने आएंगी। जब वक्त सामने आएगा तो. बहुत सारी चीजें खुलेंगी भी और मुझे लगता. है खुलनी भी चाहिए क्योंकि इंस्टेंट. जस्टिस नाम की कोई चीज होती नहीं है। कसाब. को भी चार साल ट्रायल पर रखा गया।. ये विकास दुबे की पत्नी हमसे. फांसी फिर दी गई।. विकास दुबे की पत्नी हमसे यही कही थी।. कसाब को भी जिंदा रखे थे। हमारे वाले भी. कुछ दिन रख के फिर लटका देते हैं।. लेकिन ठीक है लोगों को मजा भी आने लगा है।.
अतीक जब पकड़ा गया था और जब अतीक साबरमती. से आ रहा था तो मीडिया की हेडलाइन ही चलती. थी। क्या अतीक की भी गाड़ी पलटेगी? तो. अतीक की गाड़ी पलटेगी ये दर्शकों को. समझाने के लिए कि क्यों कह रहा है मीडिया. ये विकास दुबे का चैप्टर है पूरा उसमें कि. विकास दुबे की गाड़ी पलटी कैसे थी? आप हमारा वो इंटरव्यू देखिएगा। मजा आएगा।. ठीक। ओके।. धन्यवाद सर।. थैंक यू।. मजा आया। आनंद आया। उम्मीद करते हैं कि इस. बार यूपी पॉलिटिक्स पर जो हमने शुरुआत की. है, इसे भविष्य में हम और बढ़ाएंगे।. और आने वाले समय में यूपी पॉलिटिक्स, देश. की पॉलिटिक्स और आपकी किताब सबसे पहले.
जिसको पढ़ने के बाद मैं फीडबैक दूंगा।. बाकी पिछली किताब के लिए फिर नंबर वन होने. के लिए बधाई।. थैंक यू।. उम्मीद करते हैं कि इस पॉडकास्ट बार फिर. इजाफा हो और एक बार फिर कसारी मसारी जो है. कसाईवाड़ा के साथ नंबर एक चली।. हां। कसाईवाड़ा [हंसी] के साथ नंबर। नंबर. एक, नंबर दो मैं आपस में लड़ाई लड़।. आपस में लड़ाई लड़।. कौन सी जो है वो ज्यादा बिकने वाली? ठीक. बात है। ठीक बात है। मतलब धुरंधर वन. ज्यादा हिट है या धुरंधर टू ज्यादा हीट. है? हां इसको [हंसी] देखा जाएगा।.
