Black Tiger: The Spy India Forgot| Real Dhurandhar or Forgotten Hero? Ravindra Kaushik| Shubhankar
एक हिंदू ब्राह्मण परिवार का लड़का. रविंद्र कौशिक नबी अहमद शाकिर बन गया।. उसकी पाकिस्तान में एक परिवार थी, एक. बच्चा था, एक पत्नी है और अब वो जासूस. बनकर पकड़ा गया।. वो नवी अहमद को नहीं जानते। हम रविंद्र. कौशिक को ही जानते हैं।. रविंद्र कौशिक के बारे में नई पीढ़ी कैसे. जान गई? ब्लैक टाइगर। वो हिंदुस्तान के. पहले रेजिडेंट एजेंट थे। [संगीत]. 80 का खत है उनका लिखा हुआ कि मुझे ब्लैक.
टाइगर का कोड नेम मुझे दिया था हुकूमत ने।. आपकी आंखों में आंसू देख रहा हूं।. बस उसकी तड़पन याद आती है तो [हंसी]. मुझे वो 26 साल नहीं लगते। मुझे आज भी वो. दिन वही लगते हैं।. मैंने इतने सालों से रोशनी नहीं देखी।. सीने में जो सांस उठती बैठती है उसी से. लगता है मैं जिंदा हूं। बाकी जिंदगी का. कोई निशाना बाकी नहीं है। ऐसे खत अगर पढ़े. मां पढ़े, बहन पढ़े उस पे क्या गुजरेगी?
रविंद्र जी जो पाकिस्तान गए 21 साल तो. भारत में रहे। 21 साल तक की वहां जन्म. हिस्ट्री कैसे बनाई गई पाकिस्तान में? किसी बच्चे की आइडेंटिटी को उठाया गया।. कोई अगर बच्चा छोटी उम्र के अंदर किसी. फॉरेन लैंड के अंदर अगर एक्सपायर हो जाए. तो उसकी फैमिली से मिलके उसकी आइडेंटिटी. को परचेस कर लेते हैं। उसमें आदमी को फिट. कर देते हैं। और इनका एक खानदानी रिकॉर्ड. होगा पाकिस्तान में। फिर कैसे पकड़े गए. रविंद्र कौशिक जी? यहां सर एक छोटी सी. कांस्परेसी है। इन्होंने एक लेटर में लिखा. है कि मेरे को धोखा दिया गया है। कोई. कैप्टन डोगरी है। उन्होंने मुझे धोखे से.
फसवाया। जिससे इनायत को भारत से भेजा गया।. इसने फोटो कैसे देखी? उन्होंने दिखाई. डोगरी जी ने। कभी किसी ने कहा आपसे कि अब. आगे बढ़ जाइए। यही जीवन आगे बचे हैं। कभी. रॉ या किसी एजेंसी ने डायरेक्टली नहीं. लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर. नहीं।. कोई आर्थिक मदद? नहीं।. कोई केस मदद? नहीं।. कोई मिलने आया सांत्वना के तौर पर? नहीं।. उनकी एक पेंशन आती थी मेरी नानी मां को।. और पेंशन आती थी ₹500 महीना। टोकन ऑफ.
रेस्पेक्ट के तौर पर? एकनॉलेज किया। उस. आदमी को एक्नॉलेज करते हैं हम। आप लोग जब. जाते होंगे सरकारों से मिलने ये सारी. बातें बताने। तो रवैया कैसा था उन लोग का? जब वाजपेयी साहब को मिले तो उन्होंने राहत. मिली लेकिन हुआ कुछ नहीं था।. तो गवर्नमेंट को आखिरी में पता लग गया था. कि वो जिंदा है इस जेल में। लास्ट में. हमें ये सुनने में आया कि वो जैसे. एक्सचेंज होते हैं जासूस उनके बदले में ये. लोग 10 आदमी मांगते थे। इंडियन गवर्नमेंट. उसके लिए भी राजी हो गई थी। लेकिन सर वो. छोड़ नहीं सकते थे। उसके कारण थे। तो. पाकिस्तानी बनने के लिए क्या-क्या आपको. लगता है? करना पड़ा होगा उन्हें। मतलब ऐसे.
लग रहा है जैसे डेस्टिनी ने सब कुछ पहले. से तय कर रखा था। उर्दू वो ऑलरेडी जानते. थे और एक्टर वो अच्छे थे।. [संगीत]. नो एक थ्योरी आती है कि जब जेल में वो. आखिरी के दिनों में थे भारत सरकार से. बार-बार अपील करते थे कि अगर मैं अमेरिका. में होता तो शायद चीजें अलग होती वहां. सम्मान करते हैं। मुझे निकालो यहां से।. एक्चुअली वो चाहते थे फांसी पे चढ़ जाए. वो। जब कारगिल का वॉर हुआ है उसके बाद. उनका दोबारा इंटेरोगेशन हुआ है। जेल के. अंदर इनको 8 महीने के बाद दोबारा लेके आए. तब इनकी ये गर्दन लटकी हुई थी कंधे के ऊपर. और इनसे चला भी नहीं जा रहा था। मतलब इनको.
टॉर्चर किया गया था।. आपके रिसर्च के हिसाब से उन्होंने. क्या-क्या अचीव किया था? कहूटा जो ऑपरेशन. हुआ है न्यूक्लियर प्लांट जो पाकिस्तान का. है वो रविंद्र कौशिक जी के अलावा कोई. क्रैक नहीं कर सकता क्योंकि वो पोजीशन में. कोई नहीं था उसमें सियाचीन का हमारा कॉनकर. है इसका जो इंटल है मेघदूत ऑपरेशन है. हमारा तो वो लास्ट इनफेशन थी उनके बारे. में किसी पाकिस्तान में कहीं कुछ लिखा. पढ़ा गया मृत्यु के बाद सर ही इज द ओनली. स्पाई उनके करज को पाकिस्तानी भी प्रज़. करते हैं सर ऑफिसर्स ने कन्वर्सेशन में. बोल रखा है कि चाहे यह बंदा हिंदुस्तानी.
था पर हम इसके करेज को सलूट करते हैं. इंटरनेट पे जो उनकी स्टोरी जितनी बताई ाई. जाती है जितनी है अवेलेबल है. वो एक्चुअल उनकी कहानी की 101% भी नहीं है. सर. एक हिंदू परिवार में मैडम अंतिम संस्कार. का बड़ा महत्व होता है. मैंने अपन उनका शरीर भी नहीं दिया. पाकिस्तान मियांवाली जेल के पीछे ही उनको. कहीं दफना दिया गया उन दिनों में हमने. कोशिश की थी फैमिली ने पूरी कि उनकी कम से. कम बॉडी हम ला सके यहां पे तो. पार्लियामेंट अटैक हो गया था इंडिया में. हमारा कम्युनिकेशन बंद हो गया था. पाकिस्तान से. पाकिस्तान में जो उनका बेटा था परिवार था.
उसने कभी कोशिश की आपसे बात करने की जब. हमने खूब सर्च किया उसको तो एक Facebook. अकाउंट मिला उसके अरब के नाम से।. अगर हम ये मान ले कि उनका बच्चा पाकिस्तान. में जिंदा है। उनकी पत्नी पाकिस्तान में. जिंदा है और उनका बच्चा आपसे सवाल पूछे कि. बुआ मेरे पिता के लिए आपके देश ने क्या. किया? या हमें आपने अकेला क्यों छोड़. दिया? कुछ भी नहीं किया। क्या किया? कुछ किया. होता तो बताती मैं आपको।.
दुनिया उन्हें जासूस के नाम से जानती है।. भारत में कोई उन्हें शहीद कहता है। कोई. ब्लैक टाइगर कह कर बुलाता है। कोई. हिंदुस्तान का वो बच्चा मानता है जिसने. हमारी आपकी आजादी के लिए अपना सब कुछ. न्योछावर कर दिया।. लेकिन इस जासूस की कहानी के पीछे भी एक. भाई था, एक बेटा था.
जिसके पीछे एक परिवार था। वो परिवार जिसने. अपना सब कुछ खो दिया उस बेटे के जाने के. बाद। और आज हम उस परिवार से ही बात करेंगे. उस शख्स के बारे में जिसने ना सिर्फ. हिंदुस्तान का मान दुनिया भर में बढ़ाया. बल्कि हिंदुस्तान को कई बड़े ऑपरेशंस में. जताया।. लेकिन जिंदगी की जंग वो मुश्किलों से. हारा। हमारे साथ रविंद्र कौशिक जी या. जिन्हें हम ब्लैक टाइगर के नाम से जानते.
हैं। उनके परिवार से उनकी बहन और उनके. भतीजे. भांजे. भांजे हमारे साथ हैं। प्रणाम आपको।. प्रणाम।. मेरा पहला सवाल आपसे ही है मैम कि कोई. उन्हें जासूस कहता है, कोई ब्लैक टाइगर. कहता है, कोई रविंद्र कौशिक कहता है। एक. पहचान उनकी थी नबी अहमद शाकिर।. आपके लिए वह कौन थे? क्या रिश्ता था? और. इस घटना को जब बीते इतने सारे साल हो गए. हैं। अब आपके लिए उनकी पहचान क्या है?
मेरा भाई चाहे इतने साल हो गए तो भी मेरे. लिए आज वो है। सामने है मेरे। मैं उसको. कभी भुला नहीं पाती।. लोग उसके नाम से कई फिल्में बनाते हैं, कोई कुछ करते हैं। लेकिन मेरे भाई की. एक-एक बात, एक-ए सेकंड की बात मुझे सब याद. है। आप कुछ भी पूछ सकते हैं मुझसे और बचपन. का कुछ भी कैसे बता सकती हूं मैं आपको।. क्या याद है आपको अपने भाई का जिसे हम.
रविंद्र कौशिक या ब्लैक टाइगर कहते हैं।. एक तो मैं यह बताना चाहती हूं जो उसने. किया वो दुनिया के सामने आना चाहिए। मैं. यह चाहती हूं कि जो सच है वो आना चाहिए।. लोग छोटी-छोटी बात लेकर उसके ऊपर फिल्म. बना रहे हैं। वो मुझे तो अच्छा नहीं लगता।. लेकिन जो सत्य है वो सबके सामने आना चाहिए. कि वास्तव में उस बच्चे की कहानी क्या थी? सच क्या था? वो सच अभी तक सामने नहीं आया।.
हम इसीलिए आपको आज आप दोनों को हमने. बुलाया है जिसमें जो टेक्निकल सवाल हैं वो. उनके भांजे से हम पूछेंगे और जो पारिवारिक. सवाल हैं वो हम आपसे पूछेंगे।. रविंद्र कौशिक नबी अहमद शाकिर कैसे बने? ये हम चाहते हैं कि आप थोड़ा बताएं कि. कहां वो बदलाव था, क्या था? क्योंकि. इंटरनेट पर तो बहुत कुछ भरा पड़ा है।. आपका बड़ी बहन होने के नाते जो आपने इतने. सालों में जाना समझा कहां आपको लगा कि. रविंद्र कौशिक नवी बन गए? वो नबी तो इसलिए बन गया क्योंकि वो भारत.
का जासूस बन गया था। इसलिए उसका नाम बदल. दिया गया पाकिस्तान में। उसको नमी नाम दे. दिया गया। रविंद्र कौशिक नाम उसका परिचय. कर दिया गया। लेकिन हम वो नवी अहमद को. नहीं जानते। हम रविंद्र कौशिक को ही जानते. हैं। हिंदुस्तान के अंदर हमारी नवी अहमद. नहीं है। कोई भी अहमियत नहीं रखता। हम. कहते हैं रविंद्र कौशिक के नाम से भारत का. वो एक जासूस था। सबके सामने वही आना. चाहिए। आपको कब का पता लगा वो जासूस है।.
जब. उस उनके 84 में जब उनके एक मुड़ाता एक. पत्र घर में आया था उसे हमें पढ़कर पता. पाकिस्तान ने पकड़े जाने के बाद पता लगा. या उससे पहले आपको पता था।. नहीं नहीं नहीं जब पकड़े जाने के बाद एक. पत्र उसका आया था। उसको पढ़ के वो भी. इनलाइन लेटर एक मुड़ा हुआ बिल्कुल जैसे कई. जगह से घूम के आया हुआ है। उस पत्र को पढ़. के हमें मालूम चला कि वो जासूस था। पापा.
को पता चल गया था लेकिन उन्होंने घर में. बताया नहीं था। उसके बाद पापा भी दुनिया. से चले गए थे। उनका भी कोई पता नहीं चला. था।. रविंद्र के पकड़े जाने कितने सालों बाद. पापा जी की देहांत हुआ? उनका हुआ. 85. में. 85 में. कुछ ही समय में. हां जी तो उन्होंने बताया ही नहीं था. उन्होंने उन्होंने इसलिए नहीं बताया कि.
उनको तो सदमा लग ही गया था कि सारे परिवार. को सदमा लगेगा इस बात का इसलिए उन्होंने. नहीं बताया बस उसके बाद वो चल बसे बेचारे. आप आप लोगों को जब ये आई बात कि वो जासूस. है और पाकिस्तान में पकड़े गए हैं. तब ये था तब मीडिया का समय तो था नहीं जी. आज तो अपन मीडिया में जाके कहीं भी बात कर. सकते हैं और खुलेआम कर सकते तब तो दबदब के. घुटघुट के जीना पड़ा डर डर के कि किसी को. बताएंगे शायद कुछ ना हो जाए होना तो क्या.
था लेकिन बता नहीं पाए किसी को भी किसी को. भी बता नहीं पाए और यह जैसे उसकी चिट्ठी. आई उसको लेके इधर-उधर घूमना और सबसे मिलना. जुलना बस ऐसे भागादौड़ी कर करते रहे क्या. बताया था रविंद्र ने? कहां वो नौकरी करने. जा रहे हैं जब वो पाकिस्तान गए थे? दिल्ली में मैं सर्विस करता हूं। किसी. पंखे की कंपनी में मैं वहां सर्विस करता. हूं और उसके बाद फिर बता दिया कि मैं मुझे.
अबू धाबी भेज दिया। कभी कहीं कह देता था. कभी कहीं रहता। लेकिन सच नहीं बताया उसने. कि मैं जासूस हूं।. मेरे पिताजी को कब पता चला था? वो उनकी डेथ से पहले पता चला था। एक महीना. पहले एक साल पहले पता चला था उनको।. पकड़े जाने के पहले या पकड़े जाने के बाद? अह पकड़ जाने के बाद।. अच्छा सबसे पहले पिताजी को पता था।. हां हां. तो रविंद्र ने जब. हमें नहीं मालूम था। हमें तो एक लेटर से. इनलाइन लेटर था। मुझे आज भी आंखों के आगे. याद है। वो मुड़ा तोड़ा हुआ बाहर पड़ा हुआ. था। वहां से उससे पता चला था।.
क्या था उस लेटर में? उसमें ये लिखा था मैं भारत का जासूस हूं।. मैं पकड़ा गया हूं। मैं पाकिस्तान जेल में. हूं। ये लिखा हुआ था।. बस।. आप मेरे लिए कुछ कर सकते हो तो करो। मतलब. किसी को मिलो दिलो। मेरे मेरे को छुड़ाने. के लिए लेकिन इतना ज्ञान भी नहीं था जी तब. इतना वो भी नहीं था कि किसको जाके करना है. क्या करना है जो भी जैसेजैसे किसी ने. रास्ता बताया वैसेवैसे करते रहे सब लोगों. को मिलते रहे जाके दिल्ली आते रहे मिलते.
रहे लोगों से बात करते रहे. तो जैसे आप तो परिवार में बड़ी बहन हो. आपका रिश्ता उनसे बड़ा घना रहा होगा. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. अब जब आप पीछे मुड़ के देखते हो तो कभी. आपको लगा कि. आप समझ सकते थे कि वो उस तरफ जा रहे हैं. जो आपको पता नहीं चला।. नहीं. जासूसी की दुनिया में या इतना सफाई से सब. था कि. नहीं नहीं नहीं नहीं जाने ही नहीं देते थे. अगर मालूम पड़ जाता तो जाने भी नहीं देता. था. कोई बदलाव बिहेवियर में कहीं कुछ आपने. नोटिस नहीं किया. नहीं बस जब घर आया तीनचार बार आ चुका तब.
वो कोई बाहर आ जाता था भयभीत सा रहता था. थोड़ा सा कौन आया किसको मिलने आया है तब. थोड़ा सा तू ऐसे क्यों करता है और जब आता. था तो बड़े रोब से आता था हाथ में बैग. लेके और ऐसे से जैसे बहुत बड़ा वो होता है. तो हम भी बहुत खुश होते थे उसको भी बहुत. बड़ी जगह जॉब करता हुआ तब ये इतना खुश. खुशी-खुशी हमें मिलने के लिए आता हमें कुछ. नहीं बताता था कभी बताया ही नहीं उसने. कितने साल की उम्र में वो गए थे नौकरी का.
नाम लेकर पाकिस्तान. 20 21 साल की उम्र में. 20 21 साल की उम्र में उसके बाद 32 साल. में शायद वो पकड़े गए थे 21 32 साल में. तो उस बीच में कितनी बार वो भारत आए. चार चार बार तो चार पांच बार आ चुका था थे. और कितने दिन रुकते थे यहां पे? थोड़े दिन नहीं जैसे एक सप्ताह दो सप्ताह. ऐसा ऐसा ही रुकता था बस. उसमें भी मिलनेजुलने वालों से मिलताजुलता. रहता और कुछ ऐसा ही था वो ऐसी नेचर का ही.
था। सबसे मिलनाजुलना था। रिश्तेदार भी. मिलने आते थे। लोग बाग भी मिलने के लिए. आते थे। चहल-पहल रहती थी घर के अंदर। हमें. भी बहुत अच्छा लगता था। लेकिन ये मालूम. नहीं था कि वो जादू है।. कोई बदलाव पुराने रविंद्र में उस रविंद्र. में. जो छुट्टियों में आता था जहां पाकिस्तान. जाने के बाद? नहीं वही शरारतें थी उसकी। वैसे ही बोलना, वैसे ही हंसना, वैसे ही खाना पीना सब कुछ. उसका वैसे ही था। कुछ भी. जैसे पहले उनकी हम तस्वीरें देखते हैं तो.
बड़ा वो थोड़ा विनोद खन्ना जैसे लगते थे. पहले।. हां जी।. बाद में जब पाकिस्तान वो गए तो उनके जो. तब भी तब भी वो इतना सुंदर था।. लेकिन हुलिया थोड़ा बदल गया था। हुलिया. इसलिए उसका रहन-सहन में फर्क तो पड़ता है।. जिस जगह आप रहते हैं उसका रहन-सहन में. फर्क थोड़ा सा पड़ता है। इसलिए थोड़ा सा. हुलिया. तो जब आप लोग को ये पता चला कि एक हिंदू. ब्राह्मण परिवार का लड़का. आपका छोटा भाई रविंद्र कौशिक नबी अहमद. शाकिर बन गया। वो मुसलमान बनकर पाकिस्तान.
में जी रहा था। उसकी पाकिस्तान में एक. परिवार थी। एक बच्चा था। एक पत्नी है जो. शायद अभी भी वहां पर है. और अब वो जासूस बनकर पकड़ा गया। इसके बाद. आपके परिवार में क्या हुआ? इसके बाद देखो जी कुछ कर तो पा नहीं रहे. थे। सिर्फ भागादौड़ी थी कि किसी से जाके. मिलना या किसी मिनिस्टर से मिलना या. अपनी अप्रोच लगाना भी किसी से मिले या कुछ. सिर्फ एक ही था। उसको छुड़ाने के लिए लगे.
हुए थे। कैसे ना कैसे वो छुड़ाया जाए. लेकिन कर नहीं पाए थे कुछ भी. आपकी माताजी ने ज्यादा कोशिश की थी. हां पूरा परिवार ही साथ थे. कैसी-कैसेसी कोशिश की आप लोगों ने. जैसे वाजपेयी जी साहब को मिले. हम. तो उन्होंने राहत भी दी कि आपको थोड़े. दिनों बाद इसको छुड़ा दिया जाएगा और आप. मिला दिया जाएगा लेकिन हुआ कुछ नहीं था. ये अटल जी ने कहा था आपसे. हां जी. कौन-कौन मिलने गया था अटल जी से. मम्मी गए थे मैं गई थी भाई थे.
नहीं।. कितने भाई बहन हो आप? चार थे।. चार थे। अभी कितने. सिर्फ आप बचे हो? या और भी कोई परिवार में है? मौसी. मौसी एक दो बहनें बची हैं यहां पे अभी।. बस भाई गए।. भाई दोनों गए।. अब रविंद्र को लेकर क्या लड़ाई है? अब अब. सबने उससे समझौता कर लिया है उस सच से या. अभी किस बात की लड़ाई है आपकी?
अब मैं ये चाहती हूं कि उसकी शहादत को ओपन. में लाया जाए। सच सबको बताया जाए। जो कुछ. सच था जैसे आज फिर धुरंधर फिल्म बन गई।. धुरंधर टू बन गई। थ्री भी बन जाएगी, फोर. भी बन जाएगी। लेकिन उसमें कोई सच नहीं है।. जैसे गंगानगर में तहलका मच गया। ये फिल्म. आने के बाद फोन आने लगे लोगों के। यह कर. देंगे वो कर देंगे भाई पे फिल्म बनी है यह. बनी है लेकिन मुझे तो अच्छा नहीं लगा. क्योंकि इतनी सी बात से इतनी बड़ी बात.
बनाई गई है वो बात इतनी सी इसलिए कि वो. इतनी बड़ी फिल्म वो असलियत नहीं है फिल्म. की मैं कहती हूं उसकी असली जीवन की जो कथा. है वो सबके सामने लाई जाए फिल्म के जरिए. उसको उसकी शहादत को ऐसे नहीं गवाया जाए. मैं ये चाहती हूं मन से चाहती हूं. वजह से जासूस की दुनिया में जितना हम. जानते हैं कहा जाता है कि जब आप इस पेशे. में जाते हैं तो आपको पता होता है कि अगर. आप पकड़े गए तो आपका देश आपको अपना मानने.
से इंकार कर देगा। इसके बावजूद वो देश. देखो इन बातों का तो अपन को अब मालूम पड़. रहा है कि कोई देश मानने को तैयार नहीं. होता।. हम हालांकि ये सच परिवार के लिए कभी भी. सहज नहीं हो सकता। किसी का बच्चा जाएगा तो. वो कोशिश तो करेंगे कि हमारा बच्चा लौट. आए।. देखो किसी बड़े आदमी का बच्चा जाता है ना. तो जो दुख हमें हो रहा है वह हमें मालूम. है। हमें कहां लगी है? कहां क्या दर्द है. हमारा? शायद बयान नहीं कर पाऊंगी मैं आपके.
सामने।. इतना दर्द है ना हमें।. मैं यह चाहती हूं कि उसकी शहादत को मैं. सबके सामने लाया जाए।. कभी कोशिश की आपने पाकिस्तान जाकर मिलने. की? जा ही नहीं सकते थे। कैसे जाते? कैसे जाते आप? इतना कोई नॉलेज भी नहीं थी उस टाइम पे. बागा तारीफ में कोई भी नॉलेज नहीं थी कि. पाकिस्तान जाके इसको मिलके आए।. ठीक है। आप उनके भांजे हैं।.
जी सर।. आपने आपके बारे में जो हमने पढ़ा समझा. जाना वो ये था कि आपने 13 14 साल उनके. जीवन पर रिसर्च की।. जी जी।. आपकी मुलाकात हुई थी रविंद्र कौशिक जी से? जी सर। मैं दो बारी उनको देख चुका हूं. बचपन में।. क्या उम्र रही होगी आपकी? मैं तकरीबन छह सात साल का था सर। कुछ याद. है या धुंधली याद है? याद है सर याद है। थोड़ा उनका जो चेहरा. मोहरा है मुझे अभी तक वैसा ही वैसा मतलब. विजुअलाइज होता है जब मैं याद करता हूं।. 1982 में वो लास्ट टाइम इंडिया आए थे।.
मेरे छोटे मामा जी की शादी थी। वो शादी. अटेंड करने के लिए स्पेशली आए थे। लेकिन. रुके कुछ ही वक्त थे। उस उस दौरान मैं भी. छोटा था। और. बहुत नॉर्मल उनका बिहेव ऐसा रहता था। कोई. बातचीत से अंदाजा नहीं लगा सकता था कि यह. कोई सीक्रेट सर्विस से जुड़े हुए हैं या. कुछ ऐसा काम कर रहे हैं। नॉर्मल बिहेव. रखते जैसे घर में आके उनके आने से खुशी. बहुत बढ़ती थी घर में। ये मैंने देखा है. कि [नाक से की जाने वाली आवाज़] बहुत जॉली. नेचर के थे। वो शायद ज्यादा हंसते थे।.
शायद वो छुपाने के लिए हंसते होंगे। लेकिन. वो मतलब जॉब क्रैक्स करना और सबको हंसाना. और एक्टर तो वो थे ही। तो छोटे मामा जी की. शादी का भी मुझे याद है कि उन्होंने कार्ड. जो बनाया था वो वो कार्ड उन्होंने एज ए. मतलब जैसे फिल्म का कोई प्रोडक्शन के समय. जो वो मॉनटजेस जैसे वो आते हैं वो नंबरिंग. वैसे उन्होंने लिखा था कि एक फिल्म बनने. जा रही है जिसका एक्टर अपने छोटे भाई का. नाम लिखा एक्टर्स का इंट्रोड्यूसिंग दिस.
हीरोइन टू यू प्रोड्यूसर्स में फिर नाना. जी का नाम ऐसे उन्होंने खुद बनाया हैंड. मतलब मेड वो एक कार्ड था उनका वो ऐसे ऐसे. क्रिएटिव रहते थे, हंसाते रहते थे सबको।. तो यही मम्मी से और सबसे जानने को मिला कि. मतलब उसकी नेचर से में भी कभी ऐसे झलक के. आया नहीं सामने कि ये किसी कोई पैथेटिक. लाइफ जी रहे हैं। कोई डबल स्टैंडर्ड लाइफ. जी रहे हैं। कोई किसी और आइडेंटिटी को. कैरी करके कहीं और कुछ ऐसा बड़ा काम कर. रहे हैं। ऐसा आपकी 14 साल की रिसर्च में.
अगर मैं रविंद्र कौशिक जी को समझना चाहूं. तो एक पहला सवाल ये मेरे मन में आता है कि. आपने ये रिसर्च क्यों की? इतना लंबा समय. अपने जीवन का आपने क्यों उधर दिया? उसके एक शब्द पे कि मेरा भांजा मेरे लिए. कुछ करेगा।. ये कहां लिखा गया था? ये एक चिट्ठी उसकी आई थी। उसमें लिखा हुआ. था इसके नाम पे। आई तो परिवार वो रेडियो. स्टेशन पे बोला गया था ना सूरतगढ़ में। तब. उन्होंने कहा था कि शायद उन्होंने वो.
रेडियो स्टेशन से सारी खबर सुन के एक पत्र. लिख के भेजा कि अब मेरा भांजा मेरे लिए ही. कुछ करेगा।. ये एडवोकेट. पढ़ रहा है तो यह मेरे लिए जरूर एक शब्द. पे इसने ये उठाया कदम और मेहनत भी करी है. ऐसी बात नहीं है। लेश मात्र इसमें कोई भी. ऐसी गलत बात नहीं है झूठनी। इसने बहुत. मेहनत की उसके ऊपर।. मैंने आपको बताया ना मैं आपके सामने हूं.
तो आज यही इसकी वजह से नहीं तो ये. चिट्ठियां, ये नाम ये सब कुछ गुम हो जाता।. दब जाता।. ये जो इंटरनेट पे आपको दिख रहा है सब दब. जाता। जैसे धूल जम जाती है ना ऐसे दब. जाता।. खत में लिखा था एक खत के अंदर जिक्र किया. था कि भ हुकूमत से जाकर बात करो। वो. ज्यादा उर्दू का ही इस्तेमाल करते थे। वो. हिंदी भी अगर कुछ खत उनके हिंदी में भी. हैं। बाकी उर्दू भी उनकी बड़ी मतलब एक.
अरबी को टच करने वाली उर्दू वो लिखा करते. थे। उसमें एक उन्होंने खत लिखा कि. अब तुम लोग बड़े हो गए होगे। मतलब मेरे. बड़े भाई भी थे जो चले गए अभी दुनिया से. और हुकूमत से जाके बात करो बेटा। और. हुकूमत से हम लोगों ने देश के लिए जान दी. है। मैं किसी चोरी डकैती में यहां कैद. नहीं रहा हूं। आपको फक्र से जाकर हुकूमत. से बात करनी चाहिए। मैंने देश के लिए बहुत.
बड़े काम किए हैं। आप उनको बोलो कि हम लोग. यहां लावारिसों की तरह तड़प रहे हैं। हमें. कोई संभालने वाला मैं अकेला नहीं हूं।. मेरे साथ और भी बहुत लोग हैं जिन्होंने. देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया है और. यहां पाकिस्तान के अंदर कुछ तो उम्र कैद. के कैदी हैं कुछ सजाए मौत के कैदी भी हैं।. लेकिन हमारी हालत यहां बहुत खराब है। तो. आप सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी. लिखो। उन्होंने ये स्पेशली लिखा और. अपने.
विदेश [गला साफ़ करने की आवाज़]. जो मंत्री हैं उनसे बात करो। प्राइम. मिनिस्टर से बात करो।. यह भी लिखा उन्होंने एक बार कि धरना दो. जाके अगर हुकूमत नहीं सुनती है तो हमारे. नाम लिख के ले जाओ। उन्होंने एक लेटर में. कई लोगों के नाम लिखे रूपलाल. [नाक से की जाने वाली आवाज़] सहरिया और. गोपाल दास और. कुलवंत सिंह सुरम सिंह ऐसे करके उन्होंने. कुछ जासूसों के नाम लिखे जो वहां पर. पाकिस्तान में उस वक्त सजा-ए-मौत की के.
कैदी थे।. तो उन्होंने कहा कि आप इनके भी इनके लिए. भी आप लड़ो आप सबके लिए सबकी आवाज बनो आप. वहां जाकर खत आपके पास है. हां सारे खत मेरे पास पड़े हैं सर. जितने खत घर में आते थे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो वहां से. स्मगल हो के ही आते थे ऐसे डायरेक्ट तो आ. नहीं सकते थे कोई मुलाकाती जेल में गया. किसी के परिवार का कोई जन उनको मिल गया या. किसी गारत के थ्रू उन्होंने भिजवा दिया. इसमें भी उन्होंने बड़े मतलब बहुत बहुत.
इंटेलिजेंटली काम किया उन्होंने कैसे वो. खत हमारे तक पहुंचते थे। हम तो बड़े हैरत. में पढ़ते थे पहले कि खत कैसे आ जाते हैं? उर्दू में लिखे हुए मुड़े तोड़े कई बार. उसके ऊपर स्टैंप लगी होती थी और कई बार. बिना स्टैंप के भी पड़े मिलते थे हमारे को. किसी कागज में मुड़ेत और जब वो निकालते थे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसके ऊपर. उनका पूरा डिटेल लिखा होता था बैरिक नंबर. तक वो लिख के भेजते थे कि मैं इस फलां फला. बैरिक में हूं और फला जेल के अंदर हूं।. मुझे सॉलिटरी कनफाइनमेंट है पाकिस्तान के. अंदर। कैदे तन्हाई वहां कैदे तन्हाई बोलते.
हैं कि वहां मैं कई सालों से कैद रहा हूं. और मेरी हालत बहुत खराब है और मेरे. साथ-साथ मेरे साथी लोगों की भी हालत बहुत. खराब है। आप हुकूमत से जाकर बात करो हमारे. लिए। उन खतों में जो लिखा हुआ था उससे सर. एक थोड़ा मतलब यह लगा कि बेचैनी हो गई. बहुत अंदर कि मैं क्या कर सकता हूं। मैं. मैं तो बहुत छोटा था। मैं क्या कर सकता. हूं इनके लिए? [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो पहली बार. जो मैंने किया वो रेडियो स्टेशन पर एक खत. ले गया। सूरतगढ़ रेडियो स्टेशन हमारे यस.
सर।. ये 99 की बात है सर।. कारगिल के वॉर से थोड़ा पहले की बात है. ये।. उस खत में उन्होंने लिखा था कि. शुक्रवार की रात को मिट्टी की खुशबू के. नाम से एक प्रोग्राम आता है। वह प्रोग्राम. मैं अपने बैरिक में सुनता हूं।. जेल के किसी गारद के पास रेडियो है। जब. ऐसा प्रोग्राम चलता है तो यह वहां से अपने. बैरेक से चिल्लाते थे तो वह रेडियो को.
ऊंचा कर देता था। प्रोग्राम का नाम था. मिट्टी की खुशबू। बोले जब मैं इस. प्रोग्राम को सुनता हूं तो मुझे अपने देश. की अपनी मिट्टी की बहुत याद आती है। हो. सकता है मेरे देश ने मुझे भुला दिया हो. लेकिन मैं अपने देश को नहीं भूला हूं। मैं. चाहता हूं कि मेरे प्राण मेरे देश में ही. निकले। मेरी मिट्टी में निकले जहां मैं. पैदा हुआ हूं।. इस प्रोग्राम के जो ऑर्गेनाइजर हैं, जिन्होंने यह प्रोग्राम रखा है, उनको मैं. दिल से सलाम करता हूं। अगर मेरा यह खत.
बराए रास्ता आपके पास पहुंच जाए, तो आप. इसे रेडियो स्टेशन तक पहुंचा दीजिएगा। और. मेरे नाम से गीत. आशा सिंह मस्तान का गाया हुआ एक गाना है. सर पुराना और जिसको शिवकुमार बटालवी एक. पंजाब के पोएट बड़े नाम ही रहे हैं उनका. एक गाना था जदो मेरी अर्थी उठा के चलन गए. यह पंजाबी गाना था उन्होंने कहा यह गाना. मेरे लिए आप प्ले करवाना और अगर ऊपर वाले.
ने चाहा तो मैं जरूर प्रोग्राम को सुनूंगा. वो खत लेकर मैं सूरतगढ़ रेडियो स्टेशन. गया। ऑर्गेनाइजर थे राजेश चड्डा जी। उनसे. मैं मिला जाकर और पूरा रेडियो स्टेशन वहां. इकट्ठा हो गया। उन्होंने कहा जी ये इनके. लिए हमसे जो बन पड़ेगा हम करेंगे इनके. लिए। तो एक हमने एक फेक इंटरव्यू. ऑर्गेनाइज किया सर वहां पे। अ उस इंटरव्यू. के अंदर हमने एक ऐसी क्वेश्चनरी तैयार की. जिससे हम उनको पाकिस्तान में मैसेज दे.
सकें।. उस इंटरव्यू से ही सर उनको पहली बार पता. लगता है कि उनके फादर का देहांत हो चुका. है और कई साल बीत गए हैं देहांत हुए उनको. नहीं मालूम था और परिवार के हालात क्या. है? मां कितनी बीमार रहती है और भी तमाम. तरह की जो इंफॉर्मेशन मैं उनको दे सकता था. वो इंटरव्यू के थ्रू हमने उनको पहुंचाई।. मेरे सिस्टर आए हुए थे बाहर से तो एक. बहाना मिल गया कि यह बाहर रहती हैं और यह.
रसोतगढ़ रेडियो स्टेशन आई हैं तो हम इनका. एक इंटरव्यू करना चाहते हैं। उस इंटरव्यू. में इंटरव्यूअर ने पूछा हमसे कि आप किसे. याद कर रहे हैं? हमने कहा हमारे मामा है. बहुत दूर रहते हैं और वो आ नहीं पाए हैं. हिंदुस्तान और हम उनको एक कुछ मैसेज भी. देना चाहते हैं। क्या मैसेज देना चाहते. हो? तो उससे बात हम करते चले गए। वो. प्रोग्राम उन्होंने सुना पाकिस्तान के. अंदर। और एक खत आया उनका 8 से 9 महीने के. बाद कि मैंने वह प्रोग्राम सुना है लेकिन.
मैं सुनने के बाद बहुत रोया हूं कि मेरे. फादर इस दुनिया से जा चुके हैं। मैं इतना. बदनसीब बच्चा हूं कि जो मैं अपने फादर को. देख नहीं पाया दुनिया में जाते समय और. मेरी हालत यहां बहुत ज्यादा खराब है।. मैं कई सालों से रोशनी नहीं देख पाया हूं।. मेरे सीने में जो सांस उठती बैठती है, इसी. से पता लगता है कि मैं जिंदा हूं। बाकी. जिंदगी का कोई निशान यहां बाकी नहीं है।.
यह खत उनका आया और मैं बहुत बीमार रहता. हूं। आप हुकूमत से फिर बात कीजिए। हुकूमत. जब मैं फांसी पर चढ़ना चाहता था तब मुझे. चढ़ने नहीं दिया। मेरी हालत बहुत खराब है. और. जो अमूमन वो हर खत में लिखा करते थे कि आप. जाकर बात करो हुकूमत से बात करो हुकूमत से. बात करो तो हमें मेरे छोटे मामा तब थे. दुनिया में उन्होंने बड़ी भागदौड़ करी हम.
ये सोचते थे कि शायद सरकार कुछ करेगी. इसमें सरकार के पास जब जाते थे तो. पाकिस्तान डिनायल मोड पे रहता था कि इस. नाम का कोई आदमी नहीं है हमारे पास तो. हमारे फॉरेन सेक्रेटरी थे एक जेएन दीक्षित. साहब। एक बार वह पाकिस्तान जेलों के दौरे. पर भी गए हैं। वह पाकिस्तान में भी. डिप्लॉयड रहे हैं काफी टाइम। तो वहां पे. भी उनको कुछ कैदियों की लिस्ट पकड़ाई गई. थी। उनमें इनका भी नाम था। लेकिन वो उनकी. रिपोर्ट में ये आता है कि इस नाम का कोई.
भी कैदी यहां नहीं है। रविंद्र कौशिक. एलियस नबी अहमद शाकिर नाम का कोई कैदी. पाकिस्तान में कैद नहीं है। लेकिन जब उनके. लेटर सामने आते थे हमारे तो बकायदा उसमें. पूरा एड्रेस लिखा होता था। हम वो लेटर्स. लेके गवर्नमेंट के पास जाते थे कि ये फला. जेल से आया है। और लेटर की ऑथेंटिसिटी चेक. होती थी। लेटर ऑथेंटिक है। गवर्नमेंट वहां. से फिर उनसे कम्युनिकेशन करती थी। तो वह. उनको जेल से या तो शिफ्ट कर देते थे, उनको. मारते थे और एक खत में तो उन्होंने यह.
लिखा है कि आप बराए मेहरबानी अगर मेरे लिए. कुछ कर नहीं सकते हैं तो यह मुसीबतें मेरे. लिए मत खड़ा कीजिए क्योंकि मैं पहले से ही. इतना बीमार हूं और इस बीमारी में इतनी मार. खाना मेरे से सहन नहीं होता। तो मैं पहले. से एक दोजख की आग में जल रहा हूं पिछले कई. सालों से। तो अब इसका कोई सशन नजर नहीं. आता था सर कि बताएं तो क्या करें इसलिए. मीडिया में हम कभी नहीं उनके जिंदा रहते.
मीडिया में कभी खबर डर के वजह से नहीं दे. पाए कि हम मीडिया में जब कुछ आएगा हालांकि. कई बार वो खतों में लिख दिया करते थे कि. आप जाइए धरना दीजिए बात कीजिए हुकूमत से. आंख में आंख डालकर बात कीजिए हम लोगों ने. देश के लिए काम किया है हम किसी चोरी. डकैती या स्मगलिंग में यहां कैद नहीं हुए. हैं तो आप जाके हुकूमत से बात करो. बात करते हैं तो आप आपको वहां पर टॉर्चर. किया जाता है तो करें क्या? इसलिए इस इस.
कशमकश में सर बहुत साल निकले हैं और 2001. में 21 नवंबर को जब उनकी शहादत हुई है और. उसके बाद फिर हमने फर्स्ट टाइम वहां हमारे. एक राजस्थान में राजस्थान पत्रिका करके एक. न्यूज़पेपर है। उसमें फर्स्ट टाइम फिर एक. न्यूज़ मैं लेकर गया। मंगेश कौशिक जी वहां. एक थे।. जर्नलिस्ट उनसे मैंने बात की तो उन्होंने. एक सीरीज चलाई सर वो सीरीज बहुत हिट रही।. लोगों की डिमांड पर वो रिपीट होती गई.
सालों साल। लोग इंतजार करते थे।. न्यूज़पेपर का सब्सक्रिप्शन बढ़ गया। वो. पहली बार उनकी न्यूज़ जज्बा जांबाज जासूस. का नाम से एक सीरीज उन्होंने चलाई थी।. उसमें कुछ खत भी उनके उन्होंने पब्लिश किए. थे जो हमने थोड़े बहुत खत भी दिए उनके। और. एक जितनी कहानी उस वक्त तक पता थी उतनी. कहानी की उन्होंने एक सीरीज बनाई थी वहां. पर।. ठीक है।. जी। अब. रविंद्र कौशिक भारत के बाकी जासूसों से. अलग कैसे थे?
क्योंकि जासूसों को तो गुमनाम की जिंदगी. रहनी होती है।. जी।. आपको क्या लगता है? रविंद्र कौशिक के बारे. में नई पीढ़ी कैसे जान गई? ब्लैक टाइगर. उनकी कहानियां या आप और आपके परिवार ने. आगे बढ़ाई या यह ऑर्गेनिक ली थी क्योंकि. उन्होंने काम बहुत बड़े किए थे क्योंकि. हमने सुना कई जगह उनको रिकग्नाइज भी किया. गया। आमतौर पर जासूसों को सरकारें मानने. से मना कर देती है।. उनकी सर वो अलग इसलिए थे. कि वो हिंदुस्तान के पहले रेजिडेंट एजेंट.
थे। ये पहला एक्सपेरिमेंट था।. रेजिडेंट एजेंट मतलब जो जाकर वहां घर बसा।. डोमिसाइड होता है वहां जाके रहता है। घर. बसाता है।. एक सोशल नेटवर्क अपना बनाता है।. हिंदुस्तान ने यह पहला एक एक प्रयोग किया. था उनके ऊपर। जासूसों की जो शक्ल है सर आप. देखेंगे तो वो बहुत मामूली शक्ल सूरत के. होते हैं जासूस। अगर मैंने बताया जैसे. भीड़ में अगर वो खो जाए तो आप उनको ढूंढ. नहीं सकते। उनके लिए इजी है काम करना।. इसलिए उनको अंडर कवर कहते हैं। अंडर लेयर.
वो काम करते हैं। इनकी शक्ल सूरत ऐसी नहीं. थी। यह दिखने में काफी हैंडसम थे। तो यह. जासूसों जासूसी के लिए वैसे यह फिट नहीं. थे। लेकिन इनको देखने के बाद जो. ऑफिसर्स थे बड़े उस. किसने हायर किया था हमें? सर उस वक्त तो कोई रॉ के फील्ड ऑफिसर थे. गुरु बच्चन सिंह के नाम से. मिलिट्री इंटेलिजेंस से आए थे रॉ में।. उन्होंने सबसे पहले इनसे कांटेक्ट किया.
था। इनके अपने शहर में गंगानगर में।. कभी मुलाकात हुई आपकी उनसे? नहीं उनसे कभी. मुलाकात नहीं मेरी मम्मी ने उनको देखा हुआ. है। मम्मी ने उनको अभी तक शक्ल भी याद है. कि वह अक्सर घर आया जाया करते थे।. तो मालूम नहीं था ना कि ये इतने बड़े अफसर. है या क्या है कोई पता करने आए हैं क्या. करने मालूम नहीं था।. तो क्या करने आते थे वो फिर? पूछने आते थे।. क्या चीज? एक बार तो मुझे याद है। उन्होंने पूछा. आपका भाई कहीं शादी में आया हुआ है पंजाब.
में। तो मैंने कहा नहीं फिर मैं सोचती थी. यह क्यों पूछने के लिए आते हैं? इतनी समझ नहीं थी बात में कि वो जादसूस है. इसलिए पूछने के लिए आते हैं।. बेसिकली वो चेक करते थे कि घर में कुछ. इसने बता तो नहीं रखा कि ये क्या काम करता. है। वो मनाही थी घर में। इनको क्रॉस. क्वेश्चनिंग भी कई बार कर लेते थे कि. अच्छा तो उसने फिर कह दिया होगा कि वो तो. नहीं आएगा अब। है ना? हां वो तो काफी ऐसा. काम करता है। तो तो इनके निगाह में तो वो. एक नौकरी कर रहे थे दिल्ली में सिंपल तो.
उन्होंने कुछ बातें समझते नहीं थे। वो. क्रॉस चेक करते थे कि यार इसने घर पे कुछ. रिवील तो नहीं कर दिया है। बहुत टाइम तक. ये चेकिंग चलती रही है घर पे। वो कभी-कभी. वो आके घर पे जैसे मेरी नानी मां से भी. पूछ लेते थे कई बार कि तो फिर वो कुछ ऐसे. क्वेश्चन उन एब्सेंस में आते थे जानबूझ के. कि ताकि पता लगे। ये टाइम है उनके. ट्रेनिंग के टाइम का उस वक्त इनिशली उसके. बाद तो वो कभी उन्होंने टच भी नहीं किया. फैमिली को वो इनिशियली जब उन्होंने पिक. किया था उनको तब की बात है ये.
फैमिली में किसी को आईडिया नहीं था उन्हें. कब जासूसी में लिया गया ट्रेनिंग के भेजा. गया किसी को भी पता नहीं चला. नहीं ये तो बाद में मालूम पड़ती है बातें. जब वो अपने कोई पत्र भेजता था उससे पता. चलता था किसी को भी नहीं मालूम किसी को भी. नहीं. कभी रॉ या किसी एजेंसी ने डायरेक्टली नहीं. लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर मदद की आप लोग की. नहीं. कोई आर्थिक मदद. नहीं. कोई केस मदद. नहीं. कोई मिलने आया सांत्वना के तौर पर.
नहीं. मुझे तो आज तक कोई नहीं मिला. कोई भी व्यक्ति कभी कोई जासूसी की दुनिया. से भी नहीं आया. नहीं मुझे तो कोई भी नहीं मिला. इनकी शहादत का जब हमने रखा था 2001 में जब. पता लग गया अ वो सबसे पहले इनकी की शहादत. का समाचार पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स के. अंदर एक ब्रिगेडियर हामिद थे। उनका एक. ईमेल आया था। उस ईमेल में लिखा गया था कि. रविंद्र कौशिक एलियस नबी अहमद शाकिर अब इस.
दुनिया में नहीं रहे। वो पहला खत था जिससे. पता लगा परिवार को कि वो चले गए हैं। कब. पता लगा था कि सर? यह तकरीबन सर उनकी डेथ. के तीन या चार दिन बाद 242 नवंबर को 24. नवंबर के आसपास यह शाम को यह ईमेल आता है. कि नबी अहमद शाकिर उर्फ रविंद्र कौशिक को. हम लोग बचा नहीं सके क्योंकि वो जो. पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स के जो वहां पर है. वो लोग ने टेक अप कर लिया था इस केस को. लास्ट में क्योंकि उनकी हालत बहुत ज्यादा.
खराब थी। उनकी मेडिकल रिपोर्ट बहुत ज्यादा. बहुत पुअर थी। हमने वह मेडिकल रिपोर्ट. यहां पर मिनिस्ट्री में भी दी थी. एक्सटर्नल अफेयर में भी तो उन्होंने एम्स. में भेजी थी उनकी रिपोर्ट तो डॉक्टर्स ने. कहा था कि अरे इसकी बॉडी में तो खून ये. आदमी जिंदा भी है क्या बोले इसकी हालत तो. बहुत खराब है तो यहां से फिर हमने. मेडिसिंस गवर्नमेंट को लिखा तो गवर्नमेंट. ने कुछ मेडिसिंस भिजवाई थी पाकिस्तान. लेकिन वो मेडिसिंस के पहुंचने से पहले वो. शहादत पा चुके थे मतलब पैकेट तो बाद में. पहुंचा है उनके जाने के बाद तो गवर्नमेंट.
को आखिरी में पता लग गया था कि वो जिंदा. है इस जेल में. यस यस यस बिल्कुल सर लास्ट में उन्होंने. जब ये वाजपेयी साहब से मिले हैं तो. वाजपेयी साहब ने ये जरूर कहा था कि हम. कोशिश करेंगे कि उसको हम जल्दी आपके भाई. को हम अपने घर ले आए आपके घर ले आए और तब. हमें यह सुनने में आया कि वो जैसे. एक्सचेंज होते हैं जासूस के दो जासूस इधर. से छूटेंगे दो जासूस उधर से रिलीज होंगे. उनके बदले में ये लोग 10 आदमी मांगते थे. इन्होंने एक लिस्ट दे रखी थी और इंडियन.
गवर्नमेंट उसके लिए भी राजी हो गई थी कि. हम लोग आप इसको छोड़ दो। लेकिन सर वह छोड़. नहीं सकते थे। उसके कारण थे। कारण यह थे. कि वो उनकी आर्मी. का पार्ट रहे हैं। उनकी स्ट्रेटजीस को. समझते हैं। उनको लगता था ये आदमी जब तक. जिंदा है. हिंदुस्तान के काम का है।. ये हमारे स्ट्रेटजीस को समझता है। हमारे. मूवमेंट्स को समझता है। ये. रविंद्र कौशिक जी किस डिपार्टमेंट में थे? फौज में? सिविलियन एज अ सिविलियन क्लर्क वो एडमिट.
हुए थे वहां। और लेटर ऑन उन्होंने इंटरनल. एग्जाम्स दिए वहां पर और वो कमीशन हुए।. कमीशंड के बाद उन्होंने एक बहुत छोटे. स्पैन में उन्होंने मेजर रैंक तक वो गए. हैं। और इसके पीछे भी क्योंकि उन्होंने. पाकिस्तान आर्मी में जो उनकी परफॉर्मेंस. थी वो भी आउटस्टैंडिंग रही है सर।. हम. उस वक्त तो जिया का वहां जियाउलक का रूल. था और जियाउलक भी जैसे अ जो तेजतर्रार.
ऑफिसर्स होते थे उनको बिना मैंने रिसर्च. में मेरे सामने आया है कि बिना एसीआर देखे. ही कईयों को प्रमोट कर दिया करते थे वो. उनकी वैसी रिपोर्ट्स देख लेते थे क्योंकि. उनके पास रिपोर्ट्स के बड़ी वो बंचेस पड़े. रहते थे कभी रिपोर्ट्स चेक नहीं करते थे. तो मुझे लगा कि क्योंकि जो स्पैन देखें. उनका तो स्पैन में मेजर आदमी जो बनता है. आठ एक साल की सर्विस में बनता है जाके 8 9. साल के. मेजर बने थे या मेजर के बराबर पद पर कहीं. थे. मेजर मेजर मेजर ही वाज मेजर मेजर नबी अहमद.
शाकिर. जब उनको पकड़ा गया 1983 में वो जस्ट. प्रमोट हुए ही हुए थे. पाकिस्तान आर्मी के अंदर 1983 सिक्स्थ ऑफ. सितंबर को जब वो पकड़े गए तो उस वक्त वो. मेजर थे पाकिस्तान आर्मी में. अकाउंट डिपार्टमेंट में नहीं थे वो. नहीं नहीं नहीं डिपार्टमेंट वो छोड़ चुके. थे इंटरनल एग्जाम देने के बाद. ओके क्योंकि जो सोशल मीडिया पे खबरें हैं. वो शायद है कि वो अकाउंट डिपार्टमेंट में. थे. हां वहीं से शुरुआत की थी उन्होंने हम.
पहला जो उन्होंने आर्मी को जो वहां आर्मी. में जो एडमिट हुए वहां तो वो थ्रू दैट. क्लेरिकल डिपार्टमेंट उसका कोई वहां. एग्जामिनेशन था वहां पे एग्जामिनेशन. उन्होंने लॉ फाइनल ईयर में ही दे दिया था. वो जब कराची यूनिवर्सिटी से लॉ कर रहे थे. तो आपकी जानकारी के हिसाब से क्योंकि आपने. 14 साल रिसर्च किया मैं आपसे इंसाइडल. कहानियां पूछ लेता हूं क्योंकि बाकी तो. इंटरनेट पर जो है उस पर कितना भरोसा करें. पता नहीं. हां जी. रविंद्र कौशिक जी जो बाद में नबी अहमद बने. वो हिंदुस्तान से कब पाकिस्तान गए और.
पाकिस्तान की यात्रा आपकी रिसर्च में क्या. निकल कर आई? सर वो पाकिस्तान पहली बार 1972 में गए।. बहुत पहले यानी. बहुत पहले मतलब वो तकरीबन 20 साल के थे जब. पाकिस्तान वो गए हैं।. और. किस टाइम रॉ ने उन्हें अप्रोच किया होगा. आपके हिसाब से? सर रॉ ने उनको अप्रोच किया 72 में।. ये 20 साल के आसपास।. हां। जब ये हमारा 71 का वार जब ओवर हुआ है.
और पाकिस्तान डिप्रेशन में था बहुत और. पाकिस्तान में कुछ प्लानिंग्स हो रही थी. कन्वेंशनल वार को छोड़ के वो कुछ इंटरनल. प्लानिंग्स में थे कि इंडिया को कैसे मतलब. कन्वेंशनल वार के अलावा कैसे डिस्टर्ब. किया जा सकता है इनको तो कुछ प्लानिंग्स. थी जो रॉ को भी ऐसी इंफॉर्मेशनेशंस मिली. थी तो नए रिक्रूटमेंट्स चल रहे थे रॉ के. अंदर कि कुछ ऐसे लड़कों को देखा जाए. जिनमें कि काम करने का का जज्बा हो नौकरी. से ऊपर उठ के क्योंकि देशभक्ति तो सर. नौकरी में तो होती नहीं है। उसके लिए तो.
थोड़ी बाउंड्री क्रॉस करनी पड़ती है। तो. ऐसे लड़कों की बड़ी जरूरत थी कि जो जिनमें. जज्बा हो देशभक्ति का। ये देशभक्ति की. स्किट्स वगैरह लिखा करते थे। थिएटर करते. थे। आर्टिस्ट थे और जब किसी किरदार को. पकड़ लेते थे तो इतना जबरदस्त पकड़ लेते. थे कि जैसे कि वो किरदार ही उनमें मर्ज हो. गया हो। जैसे कि बॉडी तो इनकी है लेकिन. रूह उस किरदार की घुस गई अंदर। तो इस तरह. से एकदम से मेकओवर कर लेते थे अपना। और.
स्किट्स जो लिखा करते थे मेरे पास डायरी. है उनकी और उस डायरी के अंदर उन्होंने. काफी कुछ कितने ही पन्ने में पलट लूं सब. देशभक्ति का लिखा हुआ है। अपने शेर लिखते. एक शेर मैं कहना चाहूंगा उनका उनकी डायरी. में लिखा हुआ है कि गैर मौत है जिंदगी का. अंजाम और मरने के कई रास्ते मरकर भी वो. जिंदा है जो मर गए वतन के वास्ते ये उनकी. एक डायरी के अंदर नीचे वो जहां खुद लिखते.
थे वहां स्वलिखित कर देते थे वो स्वलिखित. करके लगाते थे. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] तो ये. ऐसा जज्बा था उनके अंदर गहरा और बहुत छोटी. उम्र थी इतनी समझ भी नहीं थी जब रॉ ने. अप्रोच किया उनको पहली बार कि आपको जो तुम. ये एक्ट कर रहे हो क्या तुम्हें ऐसा मौका. मिले तुम. रियल जिंदगी में भी कुछ देश के लिए कर. सकते हो क्या तो उन्होंने कहा हां मैं कर. सकता हूं अगर मुझे मौका मिले और मैं तो. आर्मी में जाना चाहता हूं पापा जी ने कहा.
मुझे आर्मी जॉइ करनी है तो मैं तो आर्मी. के लिए तैयारी कर रहा हूं जाने के लिए अब. रॉ एजेंसी के बारे में लोग 90ज तक नहीं. समझते थे सर इंडिया में कहीं आपको देखने. को नहीं मिलेगा कहीं हमारे पेपर्स में. कहीं रॉ का नाम आ रहा हो। ये तो अब बहुत. ज्यादा हो गया है। सोशल मीडिया जब से. एक्टिव हुआ है। तो उस वक्त तो बिल्कुल. अंदाजा नहीं था कि कोई ऐसी एजेंसी है।. अच्छा कहने वालों ने भी यह कहा कि तुम्हें. कुछ नहीं करना। जो तुम एक्ट करते हो ना. तुम्हें एक्ट ही करना है। तो और ज्यादा. कंफ्यूज हो गए। कि यार ऐसा क्या काम है?
आर्मी तो नहीं मुझे एक्ट करना है तो यह यह. कैसे इससे कैसे देश सेवा होगी और कैसे देश. सेवा को मैं कर पाऊंगा एक्टिंग के थ्रू वो. तो समझ धीरे-धीरे जब उन्होंने. 72 में इनको पकड़ा 73 में अल्टीमेटली इनको. डिप्लॉय किया पाकिस्तान में पहले ही इनको. अबू धाबी भेजा था पाकिस्तान जाने से पहले. इनको एक इस्लामिक कंट्री में एक ट्रायल के. लिए भेजा था और अबू धाबी और ईरान में रहे. हैं ईरान में एक बार यह पकड़े भी गए थे.
पकड़े गए थे मतलब ईरान में एक्चुअली किसी. जो इंफॉर्मेशन इंडिया के पास थी और. नया-नया तब ये अबू धाबी और ये जो अभी. जिसको यूएई कहते हैं नया-नया बना था 71 के. अंदर ये सारे इमिट्स जो इकट्ठे हुए थे तो. अबू धाबी उस वक्त ये दुबई अबू धाबी बड़े. लिबरल थे अपने लॉस को लेके तो उस वक्त. बहुत लोग पाकिस्तान इंडियंस वहां दुबई. जाकर और अपने मोस्टली तो स्मगलर्स ही सर. वहां इकट्ठे होते थे.
तो इंडियन गवर्नमेंट को कुछ ऐसा अंदाजा. लगा था कि कुछ ये लोग नेक्सेस का इस्तेमाल. करके. इंडिया के अंदर कुछ. इंटरनल डिस्टरबेंस पैदा करना चाहते हैं।. मतलब कुछ जिसको पाकिस्तान में जैसे खानाज. जंगी वगैरह बोलते हैं। ऐसा कुछ क्रिएट. करना चाहते हैं इंडिया के अंदर और उसका. स्टेशन इन्होंने अभी इनिशियली बाहर किया. है। प्लानिंग सारी वहां से हो गई। क्योंकि. 71 वार के अंदर सर आपने अगर हम सब पढ़ते. हैं 71 वार के बारे में तो 71 का जो वार.
था उसको अगर हम लोग कॉनकर इंडिया ने किया. है तो उसके पीछे सर रीजन बढ़ा ये था कि वो. एक एक कॉल इंटरसेप्ट हो गई थी इस्लामाबाद. से ढाका की गई थी कॉल कि भ हम लोग इंडिया. के एयर बेसिस पे अटैक करेंगे फर्स्ट ऑफ. दिसंबर को 1971 को जबकि अटैक थर्ड ऑफ. दिसंबर को हुआ था दो दिन लेट हुआ था लेकिन. अटैक हुआ था। इंफॉर्मेशन इतनी पक्की थी रॉ. के पास।. तो पाकिस्तान को यह था कि हमारी. इंफॉर्मेशन हमारे यहां पर कंट्री से लीक.
हो जाती हैं। 71 का वार सिर्फ वो कॉल. इंटरसेप्ट होने की वजह से सर मैं समझता. हूं कि हम लोग जीत पाए क्योंकि हमारे पास. प्रायर इनफेशन थी। हमने अपनी तैयारी कर. रखी थी। चाहे अनमने ढंग से की थी लेकिन कर. ली थी हमने तैयारी। क्योंकि इतना पक्का. नहीं था कि इंफॉर्मेशन पक्की हो सकती है।. लेकिन थर्ड ऑफ दिसंबर को जैसे इन्होंने. वहां से अटैक चालू किया तो हम लोग तैयार. थे पहले से।. 16th ऑफ दिसंबर तक तो हम जीत चुके थे।. तो ये पकड़े कैसे गए ईरान में फिर? ईरान में सर ये.
किसी दूसरे एजेंट की गलती से ये अबू धाबी. से अबू धाबी में इन्होंने कुछ नेक्सेसिस. क्रैक किया था कि वहां जॉब मिल किसी कंपनी. में जॉब लगे। अबू धाबी जाके उसका भी. रिकॉर्ड है और एक दो खत भी इनके अबू धाबी. से घर पे आए हुए हैं। उसके अबू धाबी के वो. पोस्टल से स्टैंप लगा हुआ अबू धाबी का तो. वहां से ये ईरान उसी नेक्सेस का पीछा करते. हुए ईरान तक पहुंचे ये। ईरान में एक जगह.
है मशहद करके। मशहद में ये अरेस्ट हुए हैं. जाके। और इनको दो से तीन दिन वहां मारा. है। लेकिन ईरान के साथ हमारी ट्रीटी है।. तब इंदिरा गांधी जी की कैबिनेट में कुछ. लोग होते थे पीएन हक्कसर वगैरह ऐसे इन. लोगों के इन्वॉल्वमेंट से इनको छुड़वाया. गया वहां से और बाद में जो लेटर ऑन जब मैं. अनऑफिशियली. कुछ लोगों से मिला धर साहब से मिला जब धर. साहब गंगानगर आए। धर साहब कौन? मलोई. कृष्णधर ये रॉ के जॉइंट डायरेक्टर रहे.
हैं। जिन्होंने. मामा जी पर एक किताब लिखी है मिशन टू. पाकिस्तान। तो उन्होंने अनऑफिशियली मुझे. बताया भी था कि वहां भी एक एजेंट की ही. गलती थी। रविंद्र ने अपनी जिंदगी में कोई. गलती नहीं की। फ्लोलेस काम किया 10 साल तक. पाकिस्तान के अंदर। तो वहां भी पहली बार. भी जब ये गैब हुए हैं ईरान के अंदर तब. किसी एजेंट की गलती से वहां पकड़े गए। फिर. वहां से छुड़वाया सरकार ने।. सरकार ने छुड़वाया। ये.
हिंदुस्तान आए।. हिंदुस्तान आए और मेरी मम्मी ने इस बात को. कंफर्म किया कि मम्मी ने कहा कि मैं उनका. रूम घर में ऊपर होता था। तो मम्मी कह रही. है वो शर्ट चेंज जब उसने शर्ट अपनी चेंज. कर रहा था तो मम्मी ने उनके बैक में काफी. निशान देखे। नील जैसे पड़े होते हैं ना. ब्लू कलर के।. ये घटना आपको याद है मैम? हां जी।. क्या हुआ था? वो जैसे किसी को मारने के. ऊपर लाइनें ही लाइनें बनी होती है ना तो. वैसे मैंने कहा ये क्या हुआ कि मेरे चोट. लगी मैंने कहा ये चोट तो नहीं लगी हुई तो.
ऐसे लगता है किसी ने जैसे हंटर से या किसी. चीज से मारा हो ये ये निशान उस चीज के लग. रहे हैं. वो मेरे को अभी तक उसके निशान याद है. तो जैसे मान लीजिए हमारे परिवार में कोई. होता है और बाहर जा रहा है तो हम लोग. पूछते हैं कहां जा रहे हो. आपका भाई 20 साल की उम्र में दुबई गया. ईरान गया पकड़ा गया मारा गया. हां आ चला गया. वापस आया. तो यह परिवार में लोग पूछते नहीं थे कहां. जा रहे हो पिटाई. हां कह देता था कभी दिल्ली बता कभी अबू. धाबी कभी दुबई बता देता था कभी कहीं बता.
देता था जैसे कोई जैसे एक दो सूट ले आया. ये मैं दुबई से लेके आया हूं तो अब क्या. मालूम इतनी नॉलेज नहीं थी जी जो आज की. सरकार है या आज का मीडिया है ऐसा होता तो. क्या अब तक कफ की बात तो चल जाती तब नहीं. था. नहीं तो परिवार में जैसे कम उम्र का लड़का. इतना बाहर चला गया. हम तो पूछा या बताया नहीं गया कि. नहीं यह वो कह देता था ना मेरी जॉब अच्छी. लगी हुई है यह बता देता था बस हम उसको सच.
मानते थे. शक तो होने दे रहा एक्टर जी वाज अ वेरी. गुड एक्टर वो शायद वहां नहीं जाते अगर तो. वो मुंबई चले जाते जैसे लखनऊ के अंदर जब. उनको पिक किया है रॉ ने लखनऊ में यूथ. फेस्टिवल का एक कंपटीशन हुआ था. पढ़ाई कहां कहां हुई है राजस्थान राजस्थान. में ही हुई है. डीएवी स्कूल राजस्थान के अंदर और एसडी. कॉलेज राजस्थान में ये पढ़े हैं। लखनऊ में. जब ये कंपटीशन हुआ है वहां इन्होंने मोनो.
एक्ट किया है एक। उस मोनो एक्ट के अंदर. इन्होंने सर अपनी जिंदगी की कहानी को पहले. से ही प्ले कर दिया। इन्होंने मोनो एक्ट. ये किया वहां पे कि एक चाइना के साथ हमारा. 62 में वॉर हुआ था। तो हमारा एक इंडियन. सोल्जर को चाइना ने पकड़ लिया है और उसको. टॉर्चर कर रहे हैं कि भाई तू यह बता. कहां-कहां तुम्हारा डिप्लॉयमेंट है आर्मी. का। वो बताता नहीं है और वो टॉर्चर को. सहता जाता है और सहता जाता है और मर जाता. है। शहीद हो जाता है। यह एक्ट उन्होंने. लखनऊ में प्ले किया।.
रॉ के ऑफिसर वहां बैठे थे। ये गुरु वचन. सिंह नहीं थे। कोई मिस्टर टंडन थे।. उन्होंने इनको पूछा कि यार यह जो तुम एक्ट. करते हो तुम्हें फर्स्ट प्राइज भी मिला है. यहां पे।. तो अगर तुम्हें ऐसा मौका मिले देश के लिए. तो तुम कर लोगे। तो इन्होंने कहा कि हां. अगर ऐसा कोई मौका मिलता तो मैं करूंगा और. मैं तो आर्मी की तैयारी कर रहा हूं। मैंने. आपको बताया था एक वहां राइटर थे मोहन. कुमार लखनऊ से जो इंडस्ट्री में काम करते. रहे उस वक्त उन्होंने इनको ऑफर किया कि. यार तू दिखने में अच्छा है और उस वक्त.
विनोद खन्ना नया इंडस्ट्री में आए ही थे।. इनकी शक्ल और सूरत बड़ी रिेंबल करती थी. विनोद खन्ना से कि अगर तू बॉम्बे आ जाए तो. तू मेरे से एड्रेस ले जा और लेकिन ये. घबराते थे सर क्योंकि नाना जी हमारे बड़े. सख्त खिलाफ थे। ये एक्टिंग नाचना गाना. इनके बहुत ज्यादा खिलाफ थे और ये जितने. थिएटर के काम इन्होंने किए हैं गंगानगर. में सब छुप कर किए हैं। और उसमें भी ये. होता था सर ये छुप के कर तो आते थे लेकिन. सुबह न्यूज़पेपर में नाम आ जाता था।. तो नाना जी बोलते थे तो फिर नानी बहाने.
लगाती थी। नहीं नहीं अपना बच्चा नहीं है. कोई और है रविंद्र एक ही थोड़ी है दुनिया. में वो कहते थे मुझे पता है ये यही है इसी. को मिला है मैं जानता हूं ये छुप के क्या. करता है तो उनसे बहुत डरते थे तो फिल्म का. जब ऑफर हुआ इनको. इनको अंदर से पता था कि मैं वहां तो नहीं. जा पाऊंगा जाने की इच्छा थी लेकिन मैं जा. नहीं पाऊंगा क्योंकि पापा जी बहुत सख्त. हैं और फिर जो दूसरा ऑप्शन था उस पे. इन्होंने कंटिन्यू थॉट दिया और उन्होंने. एक पोस्ट बॉक्स नंबर 56 दिया था कि जब भी.
तुम्हारी सलाह बन जाए, तुम्हें लग जाए. दिमाग से कि तुम देश के लिए काम कर सकते. हो तो तुम्हें एक रास्ता बताएंगे।. ये सारी इंफॉर्मेशन जो आपको रविंद्र कौशिक. जी को लेकर मिली ये कहां-कहां से मिली? सर पहला सॉस तो मेरे पास उनके जितने भी खत. उनके वहां से आए उस खतों में उन्होंने. बहुत कुछ लिखा हुआ है। अपना थोड़ा-थोड़ा. जिंदगी के बारे में भी बता रखा है।. [गहरी सांस लेने की आवाज़] दूसरा मैंने. जितने जासूस उन्होंने अपने अलग-अलग खतों.
में लिखे थे। जितनों को मैं मिल सका. जितनों को मैं ढूंढ पाया।. अलग-अलग खतों जासूस मतलब उन्होंने जिक्र. किया था नामों का।. हां जी। उन्होंने का अपने खतों में लिखा. था। वो लिख के तीन चार खत उनके ऐसे जिसमें. उन्होंने बाकी जासूसों के नाम भी लिख के. भेजे हैं कि मेरे साथ-साथ ये लोग भी यहां. सजा-ए मौत के कैदी हैं।. इन्होंने भी मेरी तरह ही देश के लिए काम. किया है।. तो उनके ये ये नाम हैं। तो रूपलाल सहरिया. जैसे हुए गोपाल दास जी हुए करामत राही. मैंने आपको बताया। कुलवंत सिंह हुए सूरम.
सिंह हुए। ऐसे कई नाम उन्होंने लिख के. भेजे थे। तो वो नाम को पिक करने के बाद. मैं कोई जर्नलिस्ट से मिला। किसी से जैसे. मैंने आपको बताया कि करामत राही तक. पहुंचने में किसी एक जर्नलिस्ट ने मेरी. मदद की थी। उनसे मिलने के बाद वहां की. कहानी का पता लगा कि ये लोग पाकिस्तान में. कैसे ऑपरेट करते थे। कैसे काम करते थे। तो. जैसा अभी पोट्रे किया जाता है जासूसों को. उन वैसा तो नहीं है सर। लाइफ उससे जासूसों.
की बहुत अलग है। सर. आपने देखे धुरंधर? जी मैंने थोड़ी देखी है ज्यादा देख मैंने. देखी नहीं मुझे थोड़ा वो लगा कि वो. रेलेवेंट नहीं है जासूसों की जिंदगी से. मैच नहीं करती सर वो इतनी ज्यादा. क्या अंतर रहा धुरंधर जैसी फिल्म में जो. दिखाया गया और जो रविंद्र कौशिक जी को. लेकर आपने रिसर्च की उसमें. सर पहली बात तो जासूस कभी भी सरफेस पे आके. किसी कॉम्बैट में इन्वॉल्व नहीं होता किसी. कॉन्फ्लिक्ट में इनवॉल्व नहीं होता सरफेस. पे क्योंकि अगर आप सरफेस पे आकर.
फाइट करते हो या किसी कॉम्बैट में. इन्वॉल्व होते हो तो आप निगाह में आ जाओगे. और निगाह में आने के बाद आपका पास्ट कभी. भी चेक हो सकता है कि आप कौन हो। जासूस एक. लेयर अंडर कवर है सर वो एक कवर के नीचे. काम करता है। वो लेयर के नीचे काम करता. है। और वो किसी की निगाह में नहीं आना. चाहता।. और. दूसरा सर इनका. बड़ा ये था मुझे यह लगा थोड़ा सा कि थोड़ा.
शायद होमवर्क भी शायद उतना इंटेंस किया. नहीं गया है इसके ऊपर क्योंकि जो लैंग्वेज. की जो डिक्शन है वो भी बहुत अलग है और जो. जासूसों की जिंदगी है वो तो बहुत अलग है. सर. यस सर थोड़ा समझाएं अगर आप तो. जासूस सर एक्चुअली. इनको एक फाल्स आइडेंटिटी को कैरी करना. पड़ता सर और अगर यह रेजिडेंट एजेंट है तो. इनको वहां पे डोमिसाइड होके अपना एक फाल्स. आइडेंटिटी के को लेके लेके और उसके जरिए.
इनको वहां पे एक सोशल नेटवर्क बनाना पड़ता. है और धीरे-धीरे ये बहुत बहुत स्पेसिफिक. सर्किल में ही रहते हैं। बहुत ज्यादा अपने. आप को सोशल वहां इन्वॉल्व नहीं करते हैं।. रविंद्र कौशिक जी के केस में ऐसा था. क्योंकि यूनिवर्सिटी में चले गए थे और और. क्योंकि यह पहला एक एक्सपेरिमेंट था. इंडियन गवर्नमेंट का तो एक पाथ पहले से. डिसाइड नहीं था कि रेजिडेंट रेजिडेंट कैसे. एक्ट करेगा तो इन्होंने तो बहुत खुल के. काम करा है वहां पे ये वहां थिएटर भी करते. रहे हैं कराची यूनिवर्सिटी में मुझे पता.
लगा कि थिएटरवेटर भी करा है इन्होंने वहां. पे अमूमन जासूस बहुत अंडर कवर रहेगा और. उनकी लैंग्वेज मैंने आपको बताया कि ये अगर. अगर इनको कुछ इंफॉर्मेशन कुछ Intel. पहुंचानी है कंट्री तक तो ये मॉर्स कोड के. थ्रू अपनी Intel पहुंचाते हैं। या पहले एक. सफर होता था सफर जैसे वो टाइपिंग एक मशीन. होती है जो लोअर फ्रीक्वेंसी जिसको रेडियो. फ्रीक्वेंसी बोलते हैं। लोअर फ्रीक्वेंसी. के थ्रू ये लोग मैसेजेस यहां भेजा करते. थे। लेकिन सफर में भी मोरस्क कोड ही.
इस्तेमाल होती थी ताकि वो डिकोड नहीं हो. जाए यहां पे। यहां अपने यहां जैसे वो. मैंने आपको बताया जो कॉल इंटरसेप्ट हुई है. इस्लामाबाद से वो भी यहां डिकोड हुई है. हिंदुस्तान के अंदर। सर आरोनी ये है कि. जासूस. कभी भी. एक ऐसा लगता है कि वो किसी नाम के लिए तो. गया नहीं है क्योंकि उसको तो पता है कहीं. ना कहीं जासूस को अब तो पता है इनिशियली. हो सकता है रविंद्र कौशिक जी के टाइम में. बहुत से लोगों को नहीं पता होगा कि हमें. डिसऑन कर दिया जाएगा. हम.
इनको तो यही कह के भेजा था कि जासूसों को. मारा नहीं जाता इनके खत में लिखा हुआ है. कि पापा जी आप फिक्र ना करें ऐसा कोई. कानून नहीं है दुनिया में कि जासूसों को. मार दिया जाए तो आप वो फिक्र तो निकाल दें. आप अपने दिमाग से कि मुझे यहां मारा. जाएगा।. बट रविंद्र जी जो पाकिस्तान गए. हम. 21 साल तक भारत में रहे।. हां जी. तो 21 साल तक की वहां जन्म हिस्ट्री कैसे. बनाई गई पाकिस्तान में? सर एक फाल्स जो आइडेंटिटी को कैरी किया ना.
उन्होंने वो भी पाकिस्तान में कोई. एक किसी बच्चे की आइडेंटिटी को उठाया गया. था। यह तरीका सर यह इनका काम करने का. तरीका इसको बोलते हैं जैसे रशिया में तो. इसको इललीगल्स बोलते हैं। यह क्या करते. हैं सर कि यह तरीका है कि कोई अगर बच्चा. छोटी उम्र के अंदर किसी फॉरेन लैंड के. अंदर अगर एक्सपायर हो जाए तो उसकी फैमिली. से मिलके उसकी आइडेंटिटी को.
परचेस कर लेते हैं या कोई सेटलमेंट कर. लेते हैं उसके साथ। फिर वह आइडेंटिटी को. अपने पास रखते हैं। उसमें आदमी को फिट कर. देते हैं इन फ्यूचर कि भाई यह तेरा नाम. है। तू यहां का रहने वाला है। तेरे अब्बा. का नाम यह है। तेरी अम्मा का नाम यह है।. तेरा यह बैकग्राउंड है। तुझे जाके यहां. फिट होना है।. उस राशन कार्ड के अंदर एक फाल्स नाम उनका. पहले से चलता रहता है। बस खाली आदमी फिट.
करना होता है जाके।. तो इनकी भी आइडेंटिटी ऐसी उठाई गई थी।. उसका पहले बैकग्राउंड था आइडेंटिटी का।. इसीलिए इतने बड़े काम. कोई व्यक्ति होगा जो नबी अहमद के नाम से. पाकिस्तान का बच्चा मर गया होगा।. जी. किसी विदेशी सरजमी पर।. जी जी. उसको उठाया वो इनको दिया। इन्होंने उसकी. जिंदगी जी पूरी और. मतलब इनके भी पाकिस्तान में कोई माता-पिता. होंगे।. हां जी। हां जी। हां जी। हां जी।.
ओके. बिल्कुल कोई घर होगा जो पुश्तैनी घर होगा. घर होगा पुश्तैनी घर होगा और इनका एक. खानदानी रिकॉर्ड होगा पाकिस्तान में जितना. भी वहां रिकॉर्ड बनते थे कुछ वहां पे भी. हमारी तरह जैसे मैंने पता किया कराची के. अंदर कुछ पहले 65 तक तो ये था कि वहां पर. बच्चा पैदा होने के बाद रिकॉर्ड रखा जाता. था।. इसीलिए इनके अरेस्ट होने के बाद सर 2 साल. का जो टाइम रहा है इंटेरोगेशन का बहुत. लंबा पीरियड है।.
अमूमन जासूसों को इतनी लंबी टॉर्चर से. क्यों गुजारेंगे? पहले तो इनकी जो रियलिटी. थी वो क्रैक नहीं हुई बहुत टाइम तक।. हम. इन्होंने तो बताया नहीं। एकेडमिक रिकॉर्ड. था इनका। पता कैसे करोगे आप? कैसे पता. लगेगा? मोमडन है। सुन्नत की हुई है। पत्नी. भी है वहां पे पाकिस्तान में। बकायदा. निकाह किया पाकिस्तान के अंदर। आपके किसी. सरकारी डिपार्टमेंट में वो जॉब कर रहे. हैं। आर्मी के पार्ट हैं तो आपके पास शक.
करने की गुंजाइश कहां है? ये आदमी को. पकड़े कैसे? अगर इनकी वो जो मैंने आपको. बताया कि वो अगर मोर्स कोड में लिखे हुए. कुछ नहीं मिलते इनके. एविडेंसेस वहां कलेक्ट नहीं होते। तो मुझे. नहीं लगता कि उनको तो बहुत मशक्कत करनी. पड़ती है। मारा उन्होंने इसलिए इतना लंबा. कि कि. क्रैक कर दें इसको कि पता कर लें कि यार. ये अपना पूरा डिटेल खोल दे। इन्होंने तो. नहीं खोला। उनको जो पता लगा लगा इनका तो. एडमिशन कहीं पे भी नहीं है वहां पे।.
उन्होंने अपनी तरफ से सारा पता किया सारा।. मैं ये प्रोसेस चाहता हूं। यहां से. पाकिस्तान गए।. पाकिस्तान जाकर फिर क्या किया? यहां से पाकिस्तान गए सर। वो पुरानी. आइडेंटिटी को पहले डिस्ट्रॉय कर दिया। सर. अबू धाबी में जो इनको दी थी ना पहचान वो. दूसरी थी।. हम्म।. उसको डेमोलिश किया उस पहचान को। नई पहचान. उठाई। उससे पाकिस्तान भेजा इनको।. पाकिस्तान भेजने के बाद मेरी रिसर्च में. भी ये सामने आया कि इनके ऊपर कुछ वहां.
पाकिस्तान में अटैक भी हुआ था। पाकिस्तान. के अंदर एक इलाका है लांडीकोटल। खैबर. पख्तून के पास एक इलाका है। वहां पर इनके. ऊपर एक अटैक भी हुआ था। इनिशियली। किसने. करवाया था. सर? यह एक्चुअली. रॉ के कुछ एसेट्स वहां उधर भी होते हैं. हमारे लिए जो लोग काम करते हैं और मोल. उनको कहते हैं जो उनका आदमी हो पर हमारे. लिए काम करने लग जाए। तो ऐसे कुछ हमने.
हमारे वहां नेटवर्क इस्टैब्लिश थे। तो जो. अबू धाबी में ये जो करके आए थे उसका. इंपैक्ट पाकिस्तान में पड़ा था थोड़ा. बुरा। तो इन इनकी जान के भी पीछे थे. पाकिस्तान में घुसते ही। तो इनके ऊपर एक. बड़ा अटैक भी हुआ पाकिस्तान में। उसके बाद. इनको एकदम से वहां से जैसे वाइप आउट कर. देते हैं किसी को वहां से कर दिया। फिर ये. कराची कराची वाला जो ये टेल है ये शुरू.
होता है। ये 73 के आसपास।. पहले खबर पख्तून खवा के पास गए थे।. हां। वहां कुछ. आपको मैं थोड़ा बता दूं क्योंकि. बांग्लादेश का जो हमारा. पूरा मिशन था वो जब ओवर हुआ है हमारा उसके. बाद हम लोग बलूचिस्तान के लिए भी लड़ रहे. थे और यह बड़ी आरोनी है। आज मैं आपको बता. रहा हूं कि बांग्लादेश की आजादी के लगभग.
साल डेढ़ साल के अंदर-अंदर बलूचिस्तान भी. आजाद था।. उसके अंदर हमारी एजेंसी. बहुत. स्ट्रांग लेवल पर काम कर चुकी थी। रविंद्र. कौशिक जी जैसे बहुत सारे एजेंट उस वक्त. अफगानिस्तान, ईरान के बॉर्डर इलाकों में, पाकिस्तान के. इलाकों में, कोएटा वगैरह जो ब्लोच इलाका. है पूरा यहां हमारे एजेंट बहुत इनवॉल्व थे. उस वक्त। और हम लोग पूरी तैयारी के साथ. थे। इसमें ज्यादा हाथ तो केजीबी का था।.
रशियन एजेंसी का हाथ था। 19 अ 73 के अंदर. सर अगर आप ऑन रिकॉर्ड देखें तो ब्लूच भी. रिवोल्ट करके अपना मुल्क अलग लेने को. तैयार बैठे थे। लेकिन नाइंथ ऑफ फब 1973 को. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. ब्लूचों का एक लीडर था।. उसने पूरी प्लानिंग को लीक कर दिया।. पाकिस्तान में उसने.
भुट्टो को यह बताया कि भ बहुत बड़ी. प्लानिंग हो चुकी है। अगर आज रात आप निकाल. दोगे तो दो या तीन दिन में बलूचिस्तान. आपसे अलग हो जाएगा। उसने बलूचिस्तान की. गवर्नरशिप मांगी इंफॉर्मेशन देने के बदले।. उसने इंफॉर्मेशन दी। फिर पाकिस्तान के. अंदर पहली बार किसी एंबेसी के ऊपर ओवरनाइट. इन्होंने वो किया है छापा मारा है. पाकिस्तान आर्मी ने पाकिस्तान पुलिस ने भी.
साथ में मिलके और ईरान एंबेसी से काफी. वेपन्स मिले थे नाइंथ ऑफ फब को जो पूरे. बलूची. जो ये थे गदर के लिए तैयार बैठे थे वहां. पे तो उस वक्त सर ये चल रहा था जितने भी. यहां से एजेंट जाते थे उनको कहीं ना कहीं. ब्लूच रिवोल्यूशन जो वहां चल रहा था या जो. ब्लोच गदर वहां चल रहा था उसके अंदर हमारे. लोग भी कहीं ना कहीं सपोर्ट करते थे सर. उसी दौरान. क्योंकि ये पहले किसी मिशन को ओवर करके.
पहुंचे हुए थे तो कुछ इनकी एनिमिटी खड़ी. हो गई थी वहां पे तो उनको पता था ये आदमी. जो पाकिस्तान भेजा गया है अभी लंबे काम के. लिए तो इसी ने नुकसान पहुंचाया हमें में. वहां पे अबू धाबी के अंदर कुछ इन्ह इनकी. इंटल थी सर जो इंडियन गवर्नमेंट को. इन्होंने दी है. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तो इन्होंने करवाया जब इनके काफी और वो. चोट सर इनके मतलब लगभग बहुत सालों तक एक.
खत में इनका जिक्र है कि अभी भी मुझे वो. उस वक्त की मार याद आती है ठंड के दिनों. में मतलब इनके पांव और कंधे दुखते थे कई. बार वो इतना बुरी तरह से ब्रूट. अबू धाबी वाली. नहीं सर वो जो लांडीकोटल में मैं जो बता. रहा हूं पाकिस्तान. बलचिस्तान हमारे खैबर खान. हां उसके बाद फिर इनको एकदम से इनका ट्रैक. चेंज किया और ये कराची आए कराची आके. इन्होंने अपना जो एकेडमिक रिकॉर्ड था वो. क्रिएट करके और ये आर्मी सॉरी पाकिस्तान.
वो कराची यूनिवर्सिटी में लॉ करने. इनके मां-बाप कहां गए वो रिश्तेदार कहां. गए जिनके जरिए आए थे. जो पाकिस्तान के अंदर से जो इनको बताया. गया था उनमें इनका अम्मा तो थी नहीं शुरू. से. हम्म. एक अब्बा थे और अब्बा भी इनके जाने के 76. के आसपास जब भी जब इनका निकाह वगैरह होता. है उससे पहले पहले अब्बा का भी इंतकाल. वहां हो गया था। एक चाचा था वो कहीं बाहर. काम करता था मोरक्को वगैरह कोई ऐसी जगह पर.
काम कर रहा था।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. और बाकी खानदान का कोई ज्यादा लंबा चौड़ा. रिकॉर्ड था नहीं।. तो इस इसी को लेके इन्होंने और एक एकेडमिक. रिकॉर्ड बना रखा था सियालकोट का कॉलेज से. पहले का और यूनिवर्सिटी में इन्होंने. एडमिशन लिया पे. मतलब इनका स्कूल का रिकॉर्ड भी वहां था 12. तक का।. हां जी। हां जी। वो इन्होंने बना रखा था. पूरा और उसके बाद इन्होंने जब यूनिवर्सिटी.
में एडमिशन लिया कराची यूनिवर्सिटी के. अंदर और सर आप देखोगे तो मैं अब तो शायद. उन्होंने बैन कर दिया मैंने कई बार कोशिश. यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पे इनका नाम था. उसमें. अपने जो होता है जो अलमाटर होते हैं ना. उनके उसमें अकेला नाम ये था हिंदू. काफी साल तक रहा यूनिवर्सिटी की वेबसाइट. पे. हिंदू नाम क्यों वहां तो नबी अहमद डार के. नाम से. नहीं नहीं रविंद्र कौशिक ही लिख रखा. उन्होंने वेबसाइट पे अब तो रिवील हो गया. था ना बाद में.
कराची यूनिवर्सिटी में. यस यस वेबसाइट पे था. क्या पढ़ाई की इन्होंने कराची यूनिवर्सिटी. से. लॉ किया था सर. कितने साल. ये लगभग तीन साल का कोर्स है वहां पे. ओके फिर वहां से निकल कर. वहां से निकल के इन्होंने आर्मी वो फाइनल. ईयर के अंदर इन्होंने आर्मी का एग्जाम. दिया था वो आर्मी एग्जाम देने के साथ-साथ. ही इन्होंने लॉ कंप्लीट की थी. कैसे पकड़े गए रविंद्र कौशिक जी. सर पकड़े 83 में यहां से एक. स्पाई यहां से गया था इनायत मसीह करके.
पाकिस्तान और इनका मिशन एक ओवर हो चुका था. एक इनको बहुत इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन. इंडिया भिजवानी थी. सियाचीन के बारे में थी इंफॉर्मेशन लास्ट. इनकी जो Intel है वो सियाचीन के बारे में. थी. Intel को कलेक्ट करने के लिए जब कुछ. दस्तावेज थे यह इनायत मसीह पाकिस्तान जब. पहुंचता है तो लाहौर में यह अरेस्ट हो गया. इसको मारा गया इनायत मसीह को और इससे पूछा.
तो इसने इनायत मसीह ने यह बताया कि मैं. जिस शख्स से यहां मिलने आया हूं उसका नाम. तो मैं जानता नहीं क्या काम करता है यह भी. नहीं जानता लेकिन मैंने उसकी शक्ल दिल्ली. में देखी है। यहां सर एक छोटी सी कांसरेसी. है कि मतलब इन्होंने एक लेटर में लिखा है. कि मेरे को धोखा दिया गया है और कोई. कैप्टन डोगरी हैं। उन्होंने मुझे धोखे से. फंसवाया है।. रविंद्र कौशिक जी ने. अपने एक लेटर में लिखा है. जो आपको आपके पास वो लेटर है.
यस यस. कि मुझे कैप्टन. पाकिस्तान ने भारत किसी भारतीय ने फंसवाया. उनको. यस कैप्टन डोगरी. एलगेशन आप बता. यस यस सर कि कैप्टन डोगरी ने मेरे साथ. धोखा किया है और इनायत मसीही जो है उसकी. इंफॉर्मेशन ऑलरेडी उनके पास थी कि ये आदमी. आएगा और उसको गैब कर लिया इन्होंने।. क्या वो लेटर भिजवा सकते हैं आप हमें? हां बिल्कुल। ताकि हम मेंशन कर दें कि वह. लेटर जो आप कह रहे हैं. वो दावा ऑफिशियल है।. जी जी. जी बिलकुल लिखा सर.
ओके सर जिस वजह से उनको इतना लंबा एक. पैथेटिक लाइफ वो उन्होंने जी इतना कष्ट. उन्होंने सहे इतने इतने तशद्दुद उन्होंने. झेले पाकिस्तान के अंदर. तो हम तो कुछ भी छुपा के नहीं रखना चाहते।. जो सच है यही. यही यही इंसाफ होगा उनके साथ। उनकी रूह के. साथ यही. किसने फंसाया? क्यों फसाया कोई उन्हें. सर कुछ इंफॉर्मेशनेशंस इनकी यहां आई थी. इंडिया में जो उनको पसंद नहीं आई उसमें. शायद कुछ कुछ कारवाईयां भी हुई थी इंडिया.
के अंदर। ये कुछ इंटल ऐसे बहुत सीरियस. लेवल के इंटल थे इनके पास जो इंडिया को आए. और उसी में कुछ उनकी दुश्मनाई खड़ी हो गई. और उन्होंने पीछा किया और पता लगा कि ये. इंफॉर्मेशनेशंस कौन कौन दे रहा है यहां. पे। इतने मतलब हाई लेवल के जो सीक्रेट. इंफॉर्मेशनेशंस हैं इंडिया कैसे पहुंच रही. हैं और जब ये उन्होंने पता किया और इनकी. फोटो तक एक्सेस मिल गया उनको तो फोटो. एक्सेस हो गई तो वहां से फिर सारा.
रास्ता खुल गया इनका आगे का. तो ये जासूस जो यहां से वहां गया था. हां जी. इसको फोटो क्यों दिखाई गई आम तौर पर फोटो. दिखाई नहीं आती. नहीं दिखाई जाती इशारे तय होते हैं सर. इशारों से ही मिला जाता है. फिर इससे फोटो कैसे मिल गई. नहीं डिपार्टमेंट से लिया ना उसने उसने. अपना जो भी यूज़ किया मतलब. नहीं जिस को भारत से भेजा गया. हां जी. इसने फोटो कैसे देख ली. उन्होंने दिखाई डोगरी जी ने उन्होंने कहा. कि यह आदमी तू जिससे मिलने जा रहा है तुझे.
पता है कि उसकी क्या पहचान है कौन है वो. तो उन्होंने कहा मेरा तय है उससे मिलना. टाइम तय है मेरा और यह वहां नहीं मिलते. सारे ये ऑफिस के बाहर है सारा यह जितना. इंसिडेंट है तब उन्होंने कहा कि मैं उसकी. फोटो दिखाता हूं तेरे को। यह आदमी तेरे को. मिलेगा। पाकिस्तान देख ले। समझ ले इसको. ढंग से देख ले। फोटो देख ली उसने। वो. अरेस्ट हुआ पाकिस्तान में जाके। उसने मार. खाते हुए यही बोला कि मैं साहब मुझे मत.
मारो। पंजाबी में बोला मेनु ना मारो। और. मैं जिससे मिलने आया हूं। उसकी शक्ल मैं. जानता हूं। वो मेरे से जिन्ना बाग में. मिलने आएगा। मैं शक्ल देख के पहचान लूंगा. कि यह आदमी है। वह यहां क्या करता है, किस. नाम से रहता है, मुझे कुछ नहीं पता। जी।. मुझे इशारा तय है। मुझे अपना इशारा देना. है और उसको भी अपना इशारा देना है। इससे. हमारी मुलाकात तय हो जाएगी और यह मैं आपको. बता सकता हूं। तो उसने वही किया। फिर. क्या इशारा था? कैसे? इशारा सर इनका यह तय.
था कि ये जैसे ही जिन्ना बाग में ये आएंगे. और ये अपना 12 13 कदम लेने के बाद जिन्ना. बाग के अंदर एक रुमाल निकालेंगे रुमाल से. अपना चेहरे को साफ करेंगे राइट हैंड से. रुमाल को नीचे गिराएंगे फिर लेफ्ट हैंड से. उठा के अपनी जेब में रख लेंगे ये पूरा. इशारा था यही इशारा उसको दोहराना है सामने. वाले को जब वो ये इशारा दोहरा देगा तो ये. दोनों की मुलाकात हो जाएगी यह. यह तरीका था सर मुलाकात का तो वह उसने तो.
फोटो क्योंकि उसने फोटो देख रखी थी। इशारे. तक तो पहुंचने की जरूरत नहीं थी। तो उसने. क्योंकि वो पहले पकड़ा गया था। उसको. टॉर्चर भी किया गया था। पूरी रात वो मार. खा के आया था। और उसने देखते ही उसने. बताया कि साहब यही आदमी अंदर है। और फिर. इशारा आ गया सामने से चल के। तो अगर ये. चाहते तो शायद दो दिन पहले अरेस्ट कर लेते. सर उनको और लेकिन जैसे ही ये इन्होंने. जाके उनसे पूछताछ की. [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो उन्होंने. अपना आई कार्ड दिखाया तो आई कार्ड.
उन्होंने देखा तो पाकिस्तान आर्मी का आई. कार्ड था और. आप यह देखिए सर कि पाकिस्तान में उस वक्त. आर्मी का रूल था और पुलिस वाले की तो इतनी. हिम्मत नहीं थी कि आर्मी पर जल्दी से हाथ. डाल दे आर्मी ऑफिसर के ऊपर तो उसने. सैल्यूट दिया. इनायत को ले जाके उस रात पूरी रात उसको. पीटा है और उसको बोला है कि भाई तू. मरवाएगा हमारे को यार यह जिसको तू बता रहा. है तू मिलने है तो हमारा आर्मी ऑफिसर है. वो कहता है जी मैं नहीं जानता ये आर्मी.
ऑफिसर कैसे है आदमी यही है मैं आपको कह. रहा हूं आप मेरी जान बखश दो मुझे मत मारो. मेरी मेरी जान छोड़ दो आदमी यही है मैं. आपसे फिर कह रहा हूं क्योंकि मैं इसकी. शक्ल नहीं भूला हूं मुझे इसकी फोटो दिखाई. गई है दिल्ली में सिक्स्थ ऑफ सितंबर को. इन्होंने वो 48 आवर्स का एक गैप होता है।. एक बार अगर आपका अटेमप फेल हो जाए तो 48. आवर्स के बाद जब उन्होंने दोबारा रिपीट. किया उसको उस उस दिन तो उनका पूरा इंतजाम. था और फिर यही सिर्फी पार्क मिलना पार्क.
में मिलना सेम उसी ट्रैक पे पहली बार जब. इनको रोका था तो इन्होंने पूछा था कि क्या. बात है? तो उन्होंने कहा कि क्योंकि जो. जिन्नाबाग का जो इलाका है पाकिस्तान के. अंदर इसके आसपास हाई कोर्ट वगैरह भी है. वहां के पंजाब हाई कोर्ट वगैरह और और भी. कई. मतलब अच्छे पोस्ट वाले लोग वहां रहते हैं. जैसे तो उन्होंने कहा था कि कुछ शाम को. एंटीसोशल एलिमेंट बाग में आ जाते हैं तो. हमें इंफॉर्मेशन है तो हम चेकिंग चल रही. है बाग के अंदर तो इनको पहली बार यह लगा.
कि यार कि हो सकता है इनायत इसी वजह से. नहीं मिला हो आज ये जो तफ्तीश चल रही है. बाग के अंदर निकल गया होगा। उसको लगा होगा. यार कि मेरे से पूछताछ नहीं हो जाए। तो अब. सेकंड अटेम्प्ट एक दिन छोड़ के एक दिन के. बाद करेंगे।. इनिशियली जो इनका रिकॉर्ड चेक हुआ. पाकिस्तान के अंदर प्राइम एफएसआई तो उनको. नहीं समझ में आया। उनको लगा कि यार ये. कैसे पॉसिबल है? इनिशियली जो थॉट उनका बना. जो रिसर्च का उनका अपना जो तफ्तीश शुरू. हुई उनको ये लगा कि यह कोई पाकिस्तान.
आर्मी का ऑफिसर है जो उधर एजेंसी के हाथों. बिक गया है।. इंडियन है।. हिंदू है। यह तो वो खाबो ख्याल में भी. नहीं था उनके कि ऐसा हो सकता है हमारे. साथ। इसीलिए सर इनके अरेस्ट के बाद प्रेस. पे भी बैन कर दिया गया था। न्यूज़ इनकी. बाहर नहीं आई। इनकी वाइफ को नजरबंद कर. दिया था पाकिस्तान में।. तो आप लोग कब जैसे वो आखिरी बार जब आए. होंगे या सवाल मेरा आपसे है। कितने समय तक. गैप रहा जिसके बाद उनके पकड़े जाने की खबर.
आई? जैसे रविंद्र जी घर आते रहते होंगे चिट्ठी. आती रहती होगी फिर जब पकड़े गए होंगे उसके. उसके पहले कितने साल पहले कितने महीने. पहले आए थे कितना लंबा गैप हुआ. 80 8. 82 में छोटे माम शादी में लास्ट. लास्ट सब आए थे 82 में उसके बाद. लेटर आया इनका 83 में. नहीं. 84 85.
85 में लेटर. 85 में पकड़े 83 में मतलब एक साल के बाद. एक साल के बाद. तो एक साल बाद. 82 लास्ट सर इनका एक 20th नवंबर का दिल्ली. का एक लेटर है लिखा हुआ मेरे पास 20th. नवंबर दिल्ली से लिखा हुआ लेटर है. उसमें मम्मी के लिए भी लिखा हुआ है कि. पहली बार मेरे कदम बहुत भारी हुए हैं घर. से निकलते समय और बहुत अनजाना सा डर लग. रहा है मुझे ना जाने क्यों ऐसा लग रहा है. लेकिन जब तक आपको एक खत मिलेगा मैं आपसे.
हजारों किलोमीटर दूर जा चुका हऊंगा यह उस. खत में लिखा हुआ है। वो लास्ट खत उनका. दिल्ली से ये 82 का है। नवंबर का खत है सर. ये और सितंबर 83 में ये अरेस्ट हो जाते. हैं। मतलब 8 9 महीने पहले ये इंडिया में. थे लास्ट इनायत का क्या हुआ? इनायत सर. चौथे दिन वो वहां मारा गया। रात को आधी. रात को उसने दम तोड़ दिया। इतना टॉर्चर. किया उसको सियालकोट के इंटेरोगेशन सेंटर. में। गोरा जेल है सियालकोट के अंदर। एक. गोरा जेल बोलते हैं सर उसको। मोस्टली जो.
हमारे स्पाइस हैं जिनको सिक्योरिटी. प्रिजनस हम लोग बोलते हैं इनको वहीं ले. जाया जाता है सियालकोट में ही वहीं एक. टॉर्चर सेंटर बना रखा है इन्होंने अलग से. वहीं इनसे पूछताछ होती है तो बता दे लेकिन. तीसरे चौथे दिन रात को जब उसको मार पड़. रही थी इधर इनके ऊपर भी तफ्तीश शुरू हो गई. थी तो उसने दम तोड़ दिया था अपना. हां उसको भी फंसाया गया था हां एक तरह से. उसको भी यूज़ ही किया एज ए टूल. और यह सब दिल्ली में किसी ने करवाया।.
हां मतलब उनके खत तो यही कहते हैं सर. रविंद्र कौशिक जी क्योंकि वहां जो आता है. वो होता है कि अपनी गलती से पकड़ा गया था. वो जो अखबारों में हमने पढ़ा या बाकी. जगहों पर पढ़ा रविंद्र जी की कहानी में. कि वो गलती से फंस गए इनायत मसीह. हां. नहीं नहीं गलती से नहीं पकड़े गए थे सर. गलती से. यही था ना. वो एक नौसखिया थे और बहुत पहला पहला ही. उनका शायद ये अटेमप्ट था. पहला ही था. पहला टाइम था और वो जैसे.
ऐसे प्रायर इन होती है इस तरह से वो. अरेस्ट हुए थे जाते ही वहां पे. लाहौर के अंदर. लाहौर में. ओके जिस वक्त ये रविंद्र जी पकड़े गए. जिनको नबी वहां कह रहे थे इनके परिवार में. कौन-कौन था वहां पे? अ इनकी वाइफ थी. [नाक से की जाने वाली आवाज़] और वाइफ के. अब्बा तो पहले जा चुके थे और. इनका बच्चा इनका बच्चा जो इनके अरेस्ट. होने के तीन से चार महीने के बाद उसका.
जन्म हुआ है। और पकड़े जाते समय तो इनकी. वाइफ ही थी अकेली। ये वाइफ के साथ ही रहते. थे ये।. एक बच्चा।. हां। एक बच्चा बाद में हुआ है सर। अरेस्ट. के बाद हुआ है बच्चा। एक ही बच्चा है मतलब. इनका. एक ही बच्चा है सर लड़का है वो भी इंटरनेट. पे लड़की लिखा हुआ है कहीं बहुत जगह आता. है. लड़की नहीं है हां लड़का है सर. इंटरनेट पे लड़की लिख कर आता है. हां लड़की लिखा हुआ है मैंने भी अभी. लड़का है सर. शादी कैसे की थी लव मैरिज या अरेंज मैरिज.
लव मैरिज थी जी प्योर लव मैरिज थी. उसमें कोई प्लानिंग नहीं थी उनको वहां लव. हुआ था और गवर्नमेंट से उन्होंने परमिशन. मांगी थी निकाह निकाह करने की तो यह एक. तरह से अच्छा था कि मतलब हमारा कोई एजेंट. है वह अगर वहां निकाह कर लेता है तो. अल्टीमेटली उसका गोल तो वही है वहां. फैमिली बसाना वहां मतलब एक तरह से सोशली. इनवॉल्व होना मर्ज होना तो उससे वो मकसद. भी पूरा हो रहा था।. कितने साल शादी को हुए थे वहां पे?
तकरीबन सर इनकी शादी रही है 7 लगभग 5 साल।. पांच साल शादी सर्वाइव किया आपने।. यस।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. इस बारे में आपको कब पता लगा कि उनकी शादी. वहां हो गई है? वो तो बाद में मालूम पड़ा जी बाद में।. तो ये इनफेशन आप लोग तो आती कैसे थी बाद. में? जैसे आज तो सोशल मीडिया का दौर है।. आपको कैसे पता लगा पहली बार कि उनका शादी. हो गई। वहां पे उनका एक बच्चा है।. वो जो अपने वहां से खत भेजता था अपने छुपा.
छुपा के। उसमें लिख के भेजा हुआ था।. बट ये खत आते कैसे थे? क्योंकि वो तो. जासूसी में पकड़े गए थे।. सर खत मतलब मतलब ऐसा तो नहीं वो खत उन्हीं. के थे या कंफर्म है आप? हां जी हां जी बिल्कुल उन्हीं के कैसे. सर इसका एक तो बड़ा एग्जांपल यह है कि जब. जैसे यहां से हमने कुछ. थोड़ी बहुत भी कारवाई की जैसे तो वहां से.
उस उसका एक रिवर्ट आता था उस खत का कि इस. तरह से आपने कारवाई की और उसमें कुछ ना. कुछ वो हमें समझाने की कोशिश करते थे सीधा. कुछ भी नहीं लिखा हुआ खत के अंदर सर यह. लिखते थे कि वहां जाकर उससे मिल लेना अब. यह आपको इंटरप्रेट करना पड़ता कि वहां. जाके किससे मिलना है और जासूसों के फैमिली. के बारे में भी लिख के भेजते थे और यह भी. बताते थे कि यह तरीका है हुकूमत से इस इस. तरह जाके बात करो। आप यह बताओ कि मैं फला. फला जेल के अंदर हूं। मैं अपना पता लिख के.
भेज रहा हूं आपको और मियां वाली का. उन्होंने बैरेक नंबर थ्री लिख के भेजा हुआ. है अपने हाथ से कि मैं तीन नंबर बैरेक. मुझे इन्होंने दे रखा है जो कि एक तरह से. सॉलिटरी बैरेक [गला साफ़ करने की आवाज़]. है वहां पे। तो आपको लगता है वो खत. उन्होंने लिखे होंगे या किसी भारत के. जासूस ने जो पाकिस्तान में होगा उसने लिखे. होंगे? नहीं उन्हीं के लिखे हुए हैं सर। खत उनके. लिखे हुए हैं क्योंकि इनिशियली उनके जो. उर्दू में आए हुए खत हैं और जो यहां उनकी. जो डायरीज है उर्दू में उर्दू में भी वो. यहां लिखते रहे हैं काफी कुछ और जो हिंदी.
है वो पूरा मतलब उनकी कैलग्राफी मैच हो. रही है पूरी।. तो एक पाकिस्तानी बनने के लिए क्या-क्या. आपको लगता है करना पड़ा होगा उन्हें।. सर. जैसा आपकी बातें सुनकर मैं सुन रहा हूं कि. उन्होंने उर्दू बहुत अच्छी सीख ली थी।. जुबान साफ हो गई थी। उर्दू सीखा था।. हां उर्दू तो सर एक्चुअली क्योंकि मेरे. नाना को उर्दू आती थी।. शौक से सीखा था।. तो उन्होंने शौक से सीख ली थी उर्दू। मतलब. ऐसे लग रहा है जैसे डेस्टिनी ने सब कुछ. पहले से तय कर रखा था। उर्दू वो ऑलरेडी. जानते थे।. पहले से. पहले से जानते थे सर उर्दू। तो और एक्टर.
वो अच्छे थे। और उर्दू जानते थे तो एक. मतलब एक परफेक्ट आदमी था वह एक रेजिडेंट. एजेंट बनने के लिए एक परफेक्ट थे बिल्कुल. वो तो नाना की वजह से उर्दू आती थी उनको. बहुत अच्छी आती थी बाद में उन्होंने उर्दू. के रसाला बोलते हैं उर्दू में उर्दू के. रसाले वो बहुत पढ़ते थे मतलब उधर भी जब. पाकिस्तान में भी रहे हैं जितना उनको मौका. मिला है तो वो अपनी उर्दू को बहुत पॉलिश. किया करते थे उनके लेटर्स अगर आप देखोगे. सर उसमें जो उर्दू का लेवल है वो बहुत.
मतलब एक इंटेलेक्चुअल जो उर्दू का स्कॉलर. र होगा वो ही ऐसा ले इतनी. शानदार उर्दू लिख सकता है।. एक थ्योरी आती है कि जब जेल में वो आखिरी. के दिनों में थे तो बहुत परेशान थे वो और. भारत सरकार से बार-बार अपील करते थे जो. हमने खबरों में पढ़ा आर्टिकल्स आते हैं कि. वो मदद मांगते रहे कि अगर मैं अमेरिका में. होता तो शायद चीजें अलग होती वहां सम्मान. करते हैं। मुझे सम्मान नहीं दिया गया।. मुझे निकालो यहां से। क्या आखिरी लम्हे वो.
टूटे थे? जी। आखिरी एक्चुअली एक्चुअली वो चाहते थे. फांसी पर चढ़ जाए वो। उनका एक खत है सर. देशवासियों के नाम एक खत उन्होंने खुला खत. लिखा हुआ है जो मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया को. हमने दिया था और उसमें यह पब्लिश भी हुआ. था खत काफी टाइम पहले की बात है उसमें. उन्होंने लिखा था कि. मैं यहां पर सजा-ए-मौत का कैदी था जो मेरी. तब्दील करके उम्र कैद में तब्दील कर दिया. गया है और मैं वतन पर शहीद होना चाहता हूं.
और मैं शहीद होने के लिए ही पैदा हुआ हूं. तो मेरी फांसी की सजा सजा को रोज-रोज़. आगे नहीं बढ़वाया जाए और वो सजा सर फिर. उनकी पोस्टपोंड करते चले गए। फिर वो उम्र. कैद में तब्दील हो गई। फिर वो जो उनको. मारा जाता था वहां से बैरेक्स से निकाल के. और मेरे ख्याल से सर यह पहला ही केस होगा. कि जब कारगिल का वॉर हुआ है उसके बाद उनका. दोबारा इंटेरोगेशन हुआ है। 18 साल की कैद. के बाद उनको दोबारा ले गए हैं जेल से.
निकाल के। करामत राही ने मुझे बताया कि एक. दिन सुबह-सुबह 3:30 बजे उनको बैरेक से. निकाल के और ले जाते हुए देखा। फिर इनको. तकरीबन ये 7 आठ महीने तक इनका कोई रिकॉर्ड. नहीं था कहीं पे भी। फिर दोबारा मियांवाली. जेल के अंदर इनको आठ महीने के बाद दोबारा. ले आए। तब इनकी ये गर्दन लटकी हुई थी कंधे. के ऊपर और इनसे चला भी नहीं जा रहा था।. मतलब इनको टॉर्चर किया गया था और उसके बाद. ये ज्यादा जिए नहीं। मतलब उसके बाद साल. साल साल से ज्यादा नहीं उन्होंने निकाला.
नहीं वहां पे पाकिस्तान में तो वो जो. बेचैनी थी अंदर उस बेचैनी में और जो इनके. अचीवमेंट थे इन्होंने यह लिखा था कि अगर. ऐसा काम मैंने अमेरिका के लिए किया होता. जैसे अचीवमेंट मैंने पाकिस्तान में ली. यहां के तो वो तीन दिन के अंदर-अंदर मुझे. यहां से छुड़वा के ले जाते वो दोनों ही. मलाल भी था उसमें कि देश ने मतलब मेरी सुध. नहीं ली डिसोन ऑन कर दिया और और फिर दूसरा.
मेरी जो अपील है कि मुझे फांसी पे चढ़. जाने दो उसको आप क्यों एक्सटेंड करवाते हो. रोजरो मैं आपकी आंखों में आंसू देख रहा. हूं. वो मैंने इनिशियली भी हम बात नहीं करते थे. इनके लिए तो ये वो थोड़ा ट्रोमा में चले. जाते हैं।.
[नाक से की जाने वाली आवाज़]. मैं पानी. [हंसी]. एक्चुअली क्या सर उनके खत पढ़े नहीं जा. सकते मैं आपको भी दूंगा भेजूंगा अब पढ़ने.
वो. तो फिल्म भी नहीं देख पाई उसमें [हंसी] भी. रोने लग गए थे मैंने कहा एक बार देख तो लो. तो जैसे ही आता है पहले भी ऐसे हुआ था तो. मतलब तब तो गिर ही गए थे पछाड़ खा के. अटैचमेंट बहुत ज्यादा था सर बच्चे की तरह. इनके रहे है वो. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. मतलब बहुत तड़प-तड़प के गए हैं सर वो. जिंदगी में. बस उसकी तड़पन याद आती है तो. [नाक से की जाने वाली आवाज़].
[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. [हंसी]. और इसीलिए भी हमारी यह भी एक सर ये अपील. भी थी कि क्योंकि उनके अचीवमेंट्स. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. हैं जो मेरी रिसर्च में जो सामने आए हैं. और वह. हम यह भी चाहते हैं कि मतलब कि कोई. मिसगाइड करके लोग ऐसे बायोग्राफी के नाम. से. आता हूं उससे पहले एक बार मैं आपसे बात कर. लेता हूं।.
आप आगे नहीं बढ़ पाए रविंद्र से अभी तक. ऐसा लगता है मुझे।. कभी किसी ने कहा आपसे कि. अब आगे बढ़ जाइए। यही जीवन आगे बचे हैं।. कौन कहेगा? आप बताइए कौन कहेगा ऐसी आंखें?
उनकी डेथ 2001 में जब हुई है सर तब वे तो. अनकॉन्शियस हो गए थे।. 25 26 साल हो गए रविंद्र कौशिक जी को गए।. आज भी उनकी बातें सुनकर आप. मुझे वो 26 साल नहीं लगते। मुझे आज भी वो. दिन वही लगते हैं। [हंसी]. भाई चला गया। सब चले गए। मां-बाप चले गए।. एक बहन है बस।. [नाक से की जाने वाली आवाज़].
मैंने आपको [नाक से की जाने वाली आवाज़]. बताया ना इसकी सारी कहानी दब के रह जाती।. अगर ये नहीं उसको उठाता तो [हंसी]. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. कभी सरकारों पे गुस्सा नहीं आया आपको? मैं ये तो सोचती हूं शायद उस टाइम मोदी. सरकार होती तो जरूर कुछ करती। मुझे ऐसा. लगता है।. कई बारी कह देते हैं कि अगर हमने देखा.
जैसे स्टैंड लिया इन दिनों में गवर्नमेंट. ने जब हमारा वो अभिनंदन का स्टैंड लिया. था। इतना स्ट्रांगली स्टैंड लेने वाले सर. ऐसे आदमी के लिए कोई खड़ा होता तो सर बात. ही कुछ और होती।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. और जैसे उन्होंने कई खतों में उम्मीद भी. जताई है कि मैं एक दिन जरूर आऊंगा। अपनी. सर जमीन पे जरूर पांव रखूंगा।. और. लास्ट के दिनों में तो वह यह कहने लगे थे. कि मैं चाहता हूं कि. मेरा बच्चा मेरे देश में ही जन्म ले और वो.
फाल्स आइडेंटिटी को नहीं देखे जब वो पैदा. हो। असल दुनिया उसके सामने हो। असल लोग. उसके सामने हो।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तो इसलिए सर ज्यादा हम लोग मीडिया में कभी. गए नहीं। इसका कारण यह भी है आप आपके यहां. आए हैं तो 2013 में इन्होंने. दिया उसके बीच में काफी जैसे लोकल भी. अप्रोच होती है तो मुझे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] पता था. ज्यादा कह नहीं पाते हैं फिर क्या वो.
आपकी माताजी का अंतिम समय कैसा था. रविंद्र के जाने के बाद. दुखी थे बेचारे. बस दरवाजे को देख के कहते रहते थे मेरा. बेटा आएगा मेरा बेटा आएगा. लेकिन वो कभी भी नहीं आया. उनकी एक आदत थी सर मैंने देखा है मतलब. बड़ी अजीब सी थी मेरी नानी मां की आदत वो. कोयले से ना यू लाइन दीवारों पे.
कहते हैं ना लाइनें खींच देते थे आएगा कि. नहीं आएगा आएगा कि नहीं आएगा क्रॉस कर. किस पे खत्म होती थी फिर वो उस पे बैठ के. सोचती रहती थी कई कई देर बाद एक्चुअली सर. ये एक्चुअली उनके जो लेटर्स ने ना वो. ज्यादा टोमेटाइज किया बाद में उनके जो. लेटर्स आए ना सर वो मतलब मतलब पढ़े नहीं. जा सकते। ऐसे. कितने खत आए होंगे? [गला साफ़ करने की आवाज़]. तकरीबन है सर 25 के करीब खत हैं।. कितने साल जेल में थे वो? वो तकरीबन 18 साल रहे हैं सर।. 18 साल से खत 18 साल.
सारे खत उर्दू में।. हां। कुछ उर्दू में है। इनिशियली और फिर. उन्होंने इधर भी हमें इंफॉर्मेशन दी थी कि. भ मैं आपको खत मेरे उर्दू में ही मिलेंगे. ज्यादा।. और फिर बीच में वो जब हिंदी में भी एक दो. खत आए उनके और इंग्लिश में भी आए लास्ट के. खत हैं जो उनके इंग्लिश में भी है लिखे. हुए. तो ये अलग-अलग भाषाओं में खत क्यों. [नाक से की जाने वाली आवाज़][गहरी सांस लेने की आवाज़]. सर मुझे लगा कि क्योंकि इनिशियली तो जब वो.
उनको कैदे तन्हाई में नहीं भेज रखा था जब. तक उनके बारे में वो यहां इंडिया जब खत. लिखते थे तो वो हिंदी में लिख रहे थे उस. वक्त तक तो फिर जब उनको इनिशियली खत उनका. जो पहला खत आता है वो कोर्ट लखपत जेल से. आता है लाहौर से उसके बाद दूसरा खत उनका. आया सियालकोट जेल से फिर मुल्तान जेल से. आया फिर साहवाल जेल से आया साहवाल जेल तक. उनके फिर खत उर्दू में ही आने चालू हो गए. थे वो भी बहुत.
टाइम बाद आता था सर एक पीरियड तो ऐसा. बीतता है लगभग पांच से छ साल का जब कोई खत. किताबत कुछ नहीं था कोई राब्ता नहीं था. उनसे वो छ साल तो मतलब कई बार तो ऐसे लगा. घर वालों को कि वो नहीं है। यहां पे. गवर्नमेंट से भी कोशिश की आप उनका पता कर. दो। यह उसी वक्त की बात है जो मैंने आपको. बताया कि भ उनका कहीं रिकॉर्ड नहीं मिला. था किसी जेल में। फिर उनका अचानक एक खत. फिर से आता है कि मैं फला फला जेल में हूं. और बहुत. [नाक से की जाने वाली आवाज़] पेन में हूं.
और. आप जो है कोशिश मेरे लिए कोशिश कीजिए।. आपको जैसे अगर यह खत ऊपर वाले के रहमोकरम. से अगर आपको यह खत मिल जाता है तो फिर आप. हुकूमत से जाकर बात. आपको क्या लगता है कैसे खत पहुंचते होंगे. भारत तक. सर मुझे ये लगता है कि जैसे अमूमन हम यहां. पे भी देखते हैं कि जेल में मुलाकाती. वगैरह आते हैं दूसरे लोगों के भी और. कैदियों के भी मुलाकाती होते हैं उनको वो. पकड़ाया जा सकता है कि दूसरे कैदियों पर. तो इतनी पाबंदी नहीं है जैसे कोई जेल जेल. गारद इनवॉल्व हो जाए कोई कोई आदमी आपकी.
सपोर्ट कर दे आपकी हालात को देख के तरस खा. ले कि. और उसमें भी वो इतनी इंफॉर्मेशन ही लिखते. थे कि मैं यहां ठीक हूं। कुछ-कुछ बातें. बीच में घुमा घुमा के लिखने की कोशिश करते. थे। जिनको समझ समझने में थोड़ा दो-तीन बार. पढ़ना पड़ेगा खत को कि वो क्या लिखना चाह. रहे हैं इसके अंदर। तुम्हें बहुत कोशिश कर. करके खतों को पढ़ा है मैंने।. फिर भी पाकिस्तान क्योंकि गैर मुल्क है. और वहां कोई मदद करे तो वो गद्दार होगा. अपने मुल्क का।. हां बिल्कुल। लेकिन मुझे लगता है कुछ. लोगों में शायद वहां पर. [नाक से की जाने वाली आवाज़].
मर्सी दिखाई होगी उनके ऊपर। कुछ लोगों ने. तभी ये खत हिंदुस्तान तक पहुंचे लेकिन और. कोई जरिया तो नहीं था सर. क्या हो सकता है रॉ के थ्रू आए हो. रो को भी उन्होंने दिल्ली भी उन्होंने खत. लिखे हैं सर कुछ खत दिल्ली भी लिखे हैं और. वो खत हमारे तक तो नहीं मिले एजेंसी ने. हमारे को दिए नहीं कभी खत और करामत ने भी. कुछ खत मुझे दिए हैं सर. करामत कौन. करामत राही एक जासूस है सर और इसी ने जो.
है. पाकिस्तान की जो कहानी है जो. करामत पाकिस्तान के जासूस है।. पाकिस्तान के भारत के जासूस थे सर लेकिन. वो पाकिस्तानी था एक्चुअली वो लेकिन उसने. भारत में आकर मतलब. अभी वो पाकिस्तान रहते हैं कहां रहते हैं? नहीं नहीं अभी तो चले गए हैं दुनिया से।. अच्छा।. 2018 में वो एक्सपायर हो गए गुरदासपुर के. अंदर।. इंडिया के अंदर। तो उन्होंने मियांवाली. जेल के अंदर दो से तीन साल रविंद्र कौशिक. जी के साथ बिताए हैं उन्होंने।.
जेल के अंदर. जेल के अंदर सर और उसी में. वो भी पकड़े गए थे।. हां जी वो भी पकड़े गए थे। उनको पाकिस्तान. में कहते हैं रविंद्र जी ने ही रिक्रूट. किया था उनको पाकिस्तान के। उन्होंने. बताया मेरे को. कि वो पंजाबी फिल्मों में वहां राइटर थे।. वहां लिखा करते थे और ये वहां थिएटर किया. करते थे। उन दिनों की मुलाकात थी ये हम. और वहीं से वो मुलाकात को उन्होंने अपने. हिसाब से डेवलप करके उसको अपना एसेट बना. लिया [नाक से की जाने वाली आवाज़] करामत. राही को। फिर दोबारा इनकी मुलाकात होती है. जब ये जेल में मिलते हैं मियावाली जेल के.
अंदर और 2000 की ईद पे इनकी मुलाकात हुई. है जिसमें दो से तीन दिन का टाइम इनको. मिला बात करने का। उसमें काफी कुछ. उन्होंने बताया अपने पुरानी जिंदगी के. बारे में भी बताया। तो करामत से आप कैसे. मिले? करामत से मैं 2013 में एपिक चैनल ने एक. एपिसोड शूट किया था दृश्य उनकी एक सीरीज. है. हम. वो जयपुर आए थे और उस वक्त मैंने एक. जर्नलिस्ट ने मुझे मिलवाया. उनको आजाद कर दिया था पाकिस्तान ने बाद. में. हां जी हां जी वो आ गए थे एक्सचेंज हो के.
आ गए थे एक्सचेंज होते जासूस जैसे एक के. बदले एक छोड़ा जाता है. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. उस एक्सचेंज में वो आ गए थे इंडिया. ओके. हां जी. तो क्या बताया उन्होंने आपको. उन्होंने उधर की पूरी कहानी उन्होंने बताई. जितनी ने उनको रविंद्र कौशिक जी ने बताई. थी कि भ मैं ऐसे-से करके हिंदुस्तान में. रहा और ऐसे आया और मैं मेरा निकाह ऐसे हुआ. और मेरा बच्चा है पाकिस्तान के अंदर और. इस तरह मैंने इतने इतने काम जो है मेरे.
मुल्क के लिए किए हैं। मैंने अपने देश के. लिए ये ये काम किए हैं। और उनकी हालत बहुत. खराब थी। तो करामत ने कहा कि मुझे उनकी. हालत देखकर यह लग रहा था कि मतलब इनमें अब. ज्यादा जान बची नहीं है। तो. अब उन्होंने कहा कि ज्यादा उनका. डेमोलाइराइजेशन कहां हुआ है सर कि जब. मुशर्रफ साहब ने एक इंडिया में विजिट की. थी। हमने आगरा में एक समिट हुई थी सर। हम. उस वक्त पाकिस्तान की जेलों में यह बहुत.
चल गया था कि शायद यहां से बहुत सारे कैदी. छोड़े जाएंगे और रविंद्र कौशिक जी को बहुत. उम्मीद थी उसमें छूटने की और बहुत उम्मीद. से वो वहां थे कि मेरे को लेकिन वो समिट. फेल हो गई सर इस कंसर्न में फेल हो गई कि. कोई कैदी वहां छोड़े नहीं गए ना पाकिस्तान. के हमने छोड़े ना पाकिस्तान वालों ने. हमारे छोड़े. उसके बाद वो डिमोरालाइज हो गए। फिर ये. 2000 की ईद जब आती है तब उन्होंने यह बात. उनको बताई थी कि यार मैं जो है मुझे लगता.
नहीं है कि मेरा ज्यादा टाइम है अभी इस. दुनिया में।. वहां मैंने सुना कई बीमारियों से भी गिर. सकते थे वो।. हां जी। हां जी। टीबी हो गया था और. सांस की. सांस की भी चेस्ट में भी सांस भारी आता था. और. जो खून है उनकी बॉडी में बहुत कम बचा था।. हमने यहां रिपोर्ट दिखाई है।. चलना भी मुश्किल था। बेड़ियां बंधी हुई थी. पैरों में भी गले में। हां।. अब यह नहीं पता सर यह तो मतलब.
कैद एक कैद तो है ही यहां पर। और दूसरी. कैद उनके ये बेड़ियों वगैरह की कैद क्यों. थी ये समझ नहीं आया। ये सब कहां देखा. आपने? एक फोटो एक उनकी फोटो है मेरे पास. जो करामत राही वहां से लेके उनके गले में. ऐसे रोड ब्लैक एंड वाइट फोटो है। जैसे जेल. के रजिस्टर से करामत राही ने वो फोटो ली. है। तो वो छुपा के लाया था ब्लैंकेट में।. उस फोटो को डाल के लाया था। ब्लैंकेट के. जो कॉर्नर होता है उसके अंदर फोटो को उसने. डाल के दोबारा से उसको सिल के जब वह वहां.
से उसको रिलीज किया पाकिस्तान से तो सामान. इनके पास नहीं होता। थोड़ा बहुत जो. बैगवगैग है उठा लेते हैं अपना तो वो कंबल. उन्होंने लिया उसमें वो फोटो थी उनकी।. करामत को यह अंदाजा था कि जिस तरह के. इन्होंने काम किए हैं इस आदमी को एक ना एक. दिन हिंदुस्तान में पहचान मिलेगी। तो. लास्ट जो उनके लास्ट टाइम का जो फोटो है. उस उम्मीद से वो लेके. भारत आया और फिर उसने वो फोटो मुझे दी है।.
करामत साहब जब आपसे मिले वो स्वस्थ थे।. नहीं सर वो भी बुरी तरह से टूटे हुए थे।. उनके पांव के जख्म अभी भी हरे ही थे और. उनसे चला नहीं जाता था और उनको भी बहुत. मारा गया वहां पे और बहुत परेशान थे जब वो. मिले और और. मैंने पूछा था कि मामा की हालत भी ऐसी थी. क्या जैसे आपसे चला वगैरह नहीं था। वो. कहते मेरे से भी बदतर थी। मैं तो फिर भी. चल के यहां तक आया हूं। जयपुर तक चल के.
आया हूं इस प्रोग्राम के लिए। वो तो 10 20. कदम भी नहीं चल सकते थे। ऐसी हालत हो गई. थी उनकी।. अगर आपको भारत के नई पीढ़ी को बताना हो कि. रविंद्र कौशिक जी की क्या अचीवमेंट थी? हां जी।. तो कौन-कौन से मिशन क्योंकि बहुत सारी. थ्योरीज आती हैं। बहुत सारी बातें आती. हैं। इंटरनेट पर सब कुछ मिक्स है।. जी।. आपके रिसर्च के हिसाब से उन्होंने. क्या-क्या अचीव किया था? सर मैं.
आप पहली बात तो जो हमारा जो जासूस है. हम. वो पाकिस्तान में किस पोजीशन पे डेप्लॉयड. है। उससे इंफॉर्मेशन का अंदाजा लगाया जाता. है कि उसके पास कितनी वाइटल कितनी. इंपॉर्टेंट इनेशंस होंगी उसके पास। यह. पाकिस्तान आर्मी के पार्ट थे। आर्मी में. सारी स्ट्रेटजीस आईएसआई आर्मी आर्मी आर्मी. और आईएसआई दोनों मिलकर काम कर रहे हैं. पाकिस्तान में। जो भी प्लानिंग्स बन रही. हैं तो आर्मी में डिस्कस होती है। उसको.
एग्जीक्यूट कौन करेगा? आर्मी करेगी आईएसआई. करेगी उनकी। तो इतनी वाइटल इंफॉर्मेशन. इन्होंने इंडिया को दी। मैं आज यहां बताना. चाहता हूं सर कि कहूटा जो ऑपरेशन हुआ है. वह रविंद्र कौशिक जी के अलावा कोई क्रैक. नहीं कर सकता क्योंकि वो पोजीशन में कोई. नहीं था उसमें. कहटा मतलब जो न्यूक्लियर. न्यूक्लियर प्लांट जो पाकिस्तान का है. जहां पर ये पता लगा था कि उनके साइंटिस्ट. के बाल के जरिए हमने. जी जी जी उतनी ही वो स्टोरी नहीं है सर. हम. कहूटा एक्चुअली पाकिस्तान में जब कहूटा.
सिलेक्ट हुआ कि वहां ये लैब बनाई जाएगी. डॉक्टर अब्दुल कदीर जो पाकिस्तान के. न्यूक्लियर साइंटिस्ट थे उन्होंने वो. इन्वॉल्व हुए थे इसको बनाने के लिए। तो. इनिशियली इसमें पाकिस्तान आर्मी की. इंजीनियरिंग यूनिट इन्वॉल्व हुई थी। जिस. वजह से कौशी जी के पास इनफेशन थी क्योंकि. इंजीनियरिंग यूनिट जो जाके कोवर्टली वहां. पे कुछ ना कुछ वहां पे कंस्ट्रक्शन के काम. में इन्वॉल्व हो गई थी। कटा के अंदर वहां.
से इनको इंटल मिला। इन्होंने गवर्नमेंट के. साथ शेयर किया कि ऐसा लगता है कि कुछ ऐसा. यहां पर कंस्ट्रक्शन हो रहा है काटा में. और. इसके बाद दो-तीन इंटेलिन के बैक टू बैक आए. हैं इसके ऊपर वो जो हेयर का बाल को मिलने. की कहानी है वो वो ठीक है सर कहानी. बिल्कुल ठीक है बाल मिला था उसके अंदर बाल. के अंदर वो जो अपने उसके पार्टिकल्स. यहां मिले थे और बाद में वो उस स्टोरी.
स्टोरी तो. यूरेनियम मिला था।. हां यूरेनियम स्टोरी तो नोन है सर। उसके. बाद वो जो. लेकिन उस स्टोरी में कई और जासूस तीनों. क्रेडिट जाता है।. हम. रविंद्र जी का नाम नहीं आता है।. हम. जैसे जो कोहोटा वाली स्टोरी है. उसमें कई और जा क्योंकि उस उस विषय के ऊपर. बहुत सारी फिल्में बनी है।. उस विषय पे बहुत फिल्में बनी है। सर. हां एक्चुअली सर ये तो मतलब आप अंदाजा. लगाओ कि अ इतनी वाइटल इनेशन क्योंकि. काहूटा का जो प्लांट है वो रिवील हो नहीं.
सकता था क्योंकि वो उनका मतलब सारा फोकस. क्योंकि पाकिस्तान तब से नहीं लगा हुआ सर।. पाकिस्तान लगा हुआ है 71 के बाद से. एटॉमिक बम को बनाने के लिए जिसको इसने. डिक्लेअर किया था इस्लामिक बम है ये पहला. इस्लामिक बम के नाम से इसको इन्होंने. अनाउंस किया था कि हम पहला इस्लामिक बम. बनाएंगे।. ये इसी ऑपरेशन के ऊपर इनके सारा. कंसंट्रेशन था 71 से लेकर और 76 तक जब तक. ये लैब बनती है काटा वाली। इतना कोवेट.
ऑपरेशन था इनका जब तक कोई आदमी अंदर नहीं. है सिस्टम के सिस्टम का पार्ट नहीं है वह. जब वह बन रही है लैब उसमें कोई यूरेनियम. कोई एनरच तब तब तक होना शुरू नहीं हुआ था. सर इन्होंने तो बाद में जाके बहुत लेटर ऑन. जाके एक्सप्लोजंस किए हैं जाके ये रविंद्र. कौशिक ही थे जिनकी वजह से ये बार-बार ये. इनफॉर्म करते थे इंडियन गवर्नमेंट को कि. ये लोग करीब पहुंच गए हैं इनके जो है वहां.
पे यूरेनियम में एनरिच करने का जो एक नई. टेक्निक लेके आए थे जिपी टेक्निक. पाकिस्तान वाले तो यह इन्होंने यहां शुरू. किया है। मैंने अंदर एक आदमी क्रैक कर. लिया है जो पूरा ब्लूप्रिंट देने को तैयार. है। क्योंकि सर इसमें जो इंटरनेशनल एजेंसी. है आईएई जिसको हम बोलते हैं इंटरनेशनल. एटॉमिक एनर्जी एजेंसी उसका पूरा सर्विलेंस. रहता है। तो ये कहते तो ये हैं कि बिजली. बनाने के लिए [नाक से की जाने वाली आवाज़]. इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन के लिए हम यूनियन. लेके जा रहे हैं। लेकिन वह दोनों का. प्रोसेस लगभग एक जैसा ही है। कहीं थोड़ा.
सा अलग हो जाता जाके एटॉमिक बम बनाने के. लिए। तो यह इंफॉर्मेशन जब इंडिया आती थी. यह शेयर करते थे और फिर उन्होंने कहा कि. इसका पूरा ब्लूप्रिंट चाहिए हमारे को।. ब्लूप्रिंट की भी बात हो गई वहां पे. पाकिस्तान के अंदर। पैसा मांगा गया। वो. पैसा तब वो हमारे यहां क्योंकि मोरारजी. साहब आ गए थे। वो रॉ से उनको प्रॉब्लम थी।. चिढ़ते थे क्योंकि इमरजेंसी के टाइम पर रॉ. ने उनको लगता था कि उन्होंने अलग वेल नोन.
स्टोरी है। यस यस. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तो उन्होंने बजट भी कम कर दिया था तो. उन्होंने पैसा देने से इंकार कर दिया।. तो वो इंफॉर्मेशन मिलने के बावजूद हम लोग. कटा रिसर्च लैबोरेटरी का कुछ नहीं कर पाए।. अल्टीमेटली तो वो रनिंग में ही रही। कटा. बात इतनी सी तो है कि हमें हमें पता लग. गया था। लेकिन हुआ क्या उससे पता लगने से? अल्टीमेटली उसका क्या रिजल्ट निकले? कुछ. भी नहीं है रिजल्ट। तो. यहां से फोन चला गया था जलक के पास।. हां फोन चला गया था। और उस वक्त.
पाकिस्तान आर्मी आईएसआई ने ऑपरेशन रेड. स्निज किया था।. रेड स्निच का मतलब यह था कि जितने भी. आपको शक भी है अगर किसी पे उसको भी उठा. लो।. इतनी वाइटल इंफॉर्मेशन जो मैं आपको. बार-बार कह रहा हूं कि वो नहीं पता लगता. सर। आम एजेंट को सिर्फ इतना ही काम होता. है कि. इस्लामाबाद से इतनी दूर एयरबेस है। उसकी.
ये इतने माइल पे पड़ता है ये और जो आर्मी. की मूवमेंट्स है वो यह है। ये इतना ही. एजेंट का काम है सर। अगर कहीं कोविडली कुछ. बन रहा है कुछ कंस्ट्रक्ट हो रहा है जिसके. ऊपर पूरे कंट्री ने जोर लगा रखा है कि वो. रिवील ना हो। वो जब तक आप सिस्टम के पार्ट. नहीं हो आपके पास कैसे आएगी वो इंफॉर्मेशन. कि ऐसी कोई लैबोरेटरी बन रही है वहां. जो धर साहब ने किताब लिखी है रविंद्र. कौशिक जी पे. हां जी. उसमें किताब के अंदर अचीवमेंट्स में. क्या-क्या लिखा उन्होंने. सर एक्चुअली उन्होंने बहुत ज्यादा फिक्शन. कर दिया उसको जब मैंने अपनी रिसर्च की.
मुझे 13 14 साल हो गए और जब मैंने वो. स्टोरी को मैच किया उसके साथ तो सर. उन्होंने बहुत फिक्शन कर रखा है. उन्होंने बहुत फ्लेम वॉइड बना दिया उसको. कररेक्टर को और फिल्म बंड में क्या-क्या. बना है? मतलब कि वो बड़े-बड़े काम कर रहा है. पाकिस्तान जाकर और जैसे कि मैंने आपको. बताया बॉलीवुड में जैसे पोट्रे कर देते. हैं हम लोग थोड़ा एग्जागेट करके ऐसे ही. उन्होंने उस कररेक्टर को बनाया है। जबकि.
मैं मैं हैरान हूं कि वो खुद उनको पता था. कि सिस्टम कैसे काम करता है।. हम. और. उन्होंने करैक्टर को जैसे लिखा है कि. गवर्नमेंट उसकी बहुत मतलब खातिरदारी करती. थी। उसको मतलब हर तरह हर तरफ जाने की छूट. थी। पासेस मिले हुए थे उसको कहीं भी एंटर. करने के किसी भी सेंसिटिव एरिया में। एक. तरह से उसको फील होता था कि वो स्पेशल है।. तभी वो ऐसे इतने इतने बड़े-बड़े काम में. क्योंकि असल में तो ऐसा नहीं था सर। असल. में तो इनका जज्बा रविंद्र कौशिक जी का. जज्बा.
देश के लिए [नाक से की जाने वाली आवाज़]. और इनका एक्टिंग स्किल इन दोनों का जो. कॉम्बिनेशन ये जो कॉम्बिनेशन हुआ इसको. यूज़ किया गया।. उसमें भी मैं जज्बा को ऊपर रखूंगा। कोई. किताब है रविंद्र कौशिक जी के ऊपर जिस. थोड़े ऑथेंटिक हो. सर जो किताब अभी मैं जैसे मैंने. बायोग्राफी लिखी है और अभी इसको मतलब. पब्लिश हो गई. नहीं पब्लिश नहीं है सर बिकॉज़ उसके ऊपर ही. हम लोग जो उनकी फिल्म है जो आएगी वो उसी. बुक पे बेस्ड होकर आएगी तो उसकी कोई कॉपी.
उससे पहले सिर्फ इसलिए कि वो कंटेंट जो है. फिल्म में हम लोग यूज कर सकें क्योंकि. इंटरनेट पे जो उनकी स्टोरी जितनी बताई. जाती है जितनी है अवेलेबल है. हम. वो एक्चुअल उनकी कहानी की 101% भी नहीं है. सर. सलमान खान की फिल्म जो आई थी एक था टाइगर. हां जी. उस टाइम बड़े रमर्स उड़े थे कि. वो शायद रविंद्र कौशिक जी के जीवन से ही. इंस्पायर हुई थी हालांकि फिल्म में तो ऐसा. कुछ नहीं था. कुछ नहीं था. जी जी एक्चुअली सर मैं. क्योंकि उसमें टाइगर का जो टाइटल उन्होंने.
इस्तेमाल किया इंडियन किसी स्पाई को ये. टाइटल नहीं मिला है। ये अपने ही खत में. उन्होंने लिख के भेजा था और खत बहुत. पुराना उनका 70 80 का खत है उनका लिखा हुआ. कि मुझे ब्लैक टाइगर का कोड नेम मुझे दिया. था हुकूमत ने तो वो टाइगर का टाइटल जब हुआ. और स्पाई दो चीजें मैच हुई तो वहां से. मुझे लगा कि ये उन्हीं की कहानी है। फिर.
वो एक लव अफेयर उनका दिखाया गया है।. कैटरीना सलमान का जो ट्रैक है. जो पाकिस्तान. जो पाकिस्तान एक्चुअल में इनका अफेयर. पाकिस्तान में जो हुआ था उस अफेयर को. उन्होंने फिर पूरा शिफ्ट कर दिया उस कहानी. को पूरा मतलब पाकिस्तान से बाहर ले गए. इसलिए वो रिेंबलस खत्म हो गई पूरी एक था. टाइगर की ये था सर पर उसमें भी स्पाई का. थोड़ा एक्सग्रेट करके ही उन्होंने देखा दो. स्पाई की जिंदगी में थ्रिल है सर करेज है. थ्रिल है लेकिन वो अलग किस्म का है सर. एलिमिनेट तो स्पाई को करना पड़ता है किसी.
मौके पर आकर. पर वो बचता है शूट आउट करने से उसे बचेगा।. एलिमिनेशन के उसके पास और बहुत रास्ते. हैं। बॉटलिन नाम एक पोइजन है। सिगरेट पे. लगा के टूथपेस्ट पे देके भी वो एलिमिनेट. कर देते हैं। बहुत सारे केसेस हैं ऐसे। तो. इनकी स्टडी बहुत डीप होती है कि अगर आपको. टारगेट को एलिमिनेट करना पड़ा तो बजाय शोर. के कि आप उसको शूट करो। उसको.
उसका मर्डर करो आप। उसको साइलेंटली किल. किया जा सकता है। साइलेंटली किल हुए हैं. सारे हिस्ट्री में। जितने भी एजेंसीज काम. कर रहे हैं Mi6 ले लो, केजीबी ले लो सब. साइलेंटली किल करते हैं। रॉ ने भी किया. है।. मैंने सुना उसके बाद भी शायद एक बार सलमान. खान से मीटिंग आप लोग की हुई थी।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. हां जी सर। ये एक्चुअली. जब ये फिल्म का स्क्रिप्ट उनके पास थी और. रिसर्च मेरा कंप्लीट नहीं था सर उस वक्त।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] तो. जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ दैट कि रिसर्च कंप्लीट हो. जाए। और वो तब वो शूट पर चले गए थे। टाइगर.
3 का शूट उनको अभी पेंडिंग था। तो वो. रिसर्च और का टाइम बहुत मेरा लें्थी था. सर। वो चाहिए था मुझे क्योंकि मैं चाहता. था कि कहानी पूरी और जैसे-जैसे मुझे कहानी. समझ में आ रही थी और दिख रही थी तो मुझे. लग रहा था कहानी तो लार्जर देन लाइफ है।. बहुत बड़ी कहानी है। इसमें कुछ भी. फिक्शनलाइज करने की जरूरत ही नहीं है।. अपने आप कहानी में इतना कुछ है। तो मुझे. लगा कि इसको समय मिलना चाहिए और सच बाहर. आना चाहिए। जैसा भी है वो। और वो समय का. मैच नहीं हुआ सर इसलिए उन्होंने ड्रॉप आउट. कर दिया। हम लोग बाहर आ गए उस कहानी से।.
[नाक से की जाने वाली आवाज़]. सरजीत की भी कहानी आई थी जो बहुत. जी. दुखद रही। राइट सर इसमें एक थोड़ा सा फर्क. है। मैं जितने भी जासूस देश के लिए काम कर. रहे हैं सर. और जो छूट के वहां से आते हैं. उनकी आप अगर सिचुएशन देखो आपसे देखा भी. नहीं जाएगा सर। इतनी बुरी हालत में होते. हैं वो। [नाक से की जाने वाली आवाज़]. क्योंकि शरीर उनका साथ छोड़ देता है। तो.
उन एक अलग उनके लिए पेन है दिल में और. उनके लिए एक एक मतलब अह एक रिस्पेक्ट है. उनके लिए सभी जासूसों के लिए। क्योंकि वो. किसी नाम के लिए भी नहीं कर रहे। उनको तो. ना मटेडम मिलेगा. हम. ना।. लेकिन सर इसमें इसलिए मैं थोड़ा अलग करता. हूं बाकी जासूसों से रविंद्र कौशिक जी को. हम. कि ये कभी डिनायल वैसे मोड़ पर नहीं रहे. कि मैं गलती से पाकिस्तान आ गया था।. नहीं इन्होंने बहुत. स्ट्रेट फॉरवर्ड एडमिट किया था कि मैं.
अपने देश के लिए आया हूं। मैंने अपने देश. के लिए काम कर दिया। मैंने जो करना था कर. दिया। अब आप आपके हाथ में जो है आप अब आप. कीजिए।. इस लेवल का जो करिश्ता यहां से वो दूसरों. से अलग होते हैं। क्योंकि एक डिनायल करना. यार मैं गलती से पाकिस्तान चला गया था।. मैं तो गलती से एक बॉर्डर क्रॉस हो गया और. मुझे जासूस बना दिया गया। मैं जासूस था. नहीं। इन्होंने तो कभी नहीं कहा। ये कभी. डिनाई नहीं किया। इन्होंने तो एडमिट किया. है।. क्या हुदा के अलावा क्या-क्या अचीवमेंट्स. थी?
सर. जो सियाचीन का हमारा कॉनकरर है. इसका जो इंटल है वो लास्ट इंटल था इनका. रविंद्र कौशिक जी का ये 83 में अरेस्ट. होते हैं 84 में हम लोग कंकर करते हैं. लेकिन इंफॉर्मेशन ये बहुत पहले पास ऑन कर. चुके थे और आप यह देखिए कि जो मेघदूत. ऑपरेशन है हमारा जब हमने इसको किया है तो. हमारे पास पूरे ड्रेसेस भी नहीं थे.
क्योंकि इंफॉर्मेशन को यहां रिसीव होने. में बहुत टाइम लग गया उसकी ट्रेवलिंग में. तब इन्होंने ओवरनाइट प्लानिंग करके हमारी. भारतीय फौज ने और उसको कॉनकर किया जब तक. पाकिस्तानी क्योंकि इनकी इंफॉर्मेशन ये थी. कि ये लोग सर्दियां खत्म होने के बाद अगली. सर्दी खत्म होते ही ये लोग यहां से रवाना. होंगे। तो सर्दियां तो ओवर हो चुकी थी।. बैसाखी के दिन हमने कॉनकर किया है वहां. पे। हम.
तो वो लास्ट इंफॉर्मेशन थी और वो. स्ट्रेटेजिकली आज भी देश के लिए मेरे. ख्याल से मेरे सबसे बड़ी सौगात है मेरे. सियाचीन। आज पाकिस्तान और चाइना अगर आपस. में नहीं मिल पा रहा है वहां पे तो बीच. में क्योंकि वो सियाचीन की जो हिल है जिस. पे हिंदुस्तान का तिरंगा लहरा रहा है वो. बहुत बड़ी बात है सर।. जो मैंने सियाचिन पढ़ा वो ये था कि शायद. इंग्लैंड ने किसी कंपनी. जी. में भारत के जासूसों ने बता दिया था। जी. जी जी जी एक्चुअली क्या था सर ये जैसे कोई. ड्रेसेस वगैरह बनती हैं या कोई ड्रेसेस के. ऑर्डर्स पाकिस्तान कहीं भी देता है तो.
इनका एक प्रोसेस है सर वहां से जैसे. डिपार्टमेंटली ये चलता है सारा क्योंकि. इनका कनेक्शन पुराना था डिपार्टमेंट से और. क्योंकि इनिशियली पाकिस्तान में हुआ ऐसा. था सर कोई ट्रूप पाकिस्तान के अंदर आया था. उसने वहां पर जर्मनी का कोई ट्रूप था उसने. ट्रैवलिंग करने की वहां पर या. जो माउंटेनिंग वगैरह करते हैं लोग। इसका. परमिशन पाकिस्तान से मांगा था। जबकि उनका. तो था नहीं वो। तो यहां से यह क्लिक होता.
है सर कि यार यह इन ये परमिशन पाकिस्तान. से क्यों मांगी जा रही है? फिर वो जो. ड्रेसेस थे उनके वो क्योंकि वो. डिपार्टमेंट इनवॉल्व था सिविलियन वाला. जहां से ये इन्होंने अपना ट्रेवलिंग शुरू. किया पाकिस्तान के अंदर। वहां इनके जिसज. डिपार्टमेंट में रहते थे अपने सोर्सेस तो. बनाते जाते थे। ये यही काम है जासूस का. अपना नेटवर्क सेट करके रखना। वहां से इनको. इंफॉर्मेशन क्रैक होती है। कुछ पाकिस्तान. ने हाई एल्टीट्यूड के ड्रेसेस का आर्डर. बाहर दिया है। इतने हाई एल्टीट्यूड पे.
इनको कोई कॉम्बैट करना है। वो कौन सी. पोस्ट हो सकती है? तो एक इतना इंटेलिजेंट. जासूस तो दो मिनट में पहचान जाता है। ऐसी. हाइट पे कितनी पोस्टें हैं जिनको ये. कंकरुर करने के लिए तैयारी कर रहे हैं।. एक खबर मैम यह भी आई थी कि जेल से कुछ. उन्होंने मंगवाया भी था। पगड़ी कंबल ऐसा. कुछ सच है ये? हां जी। हां. वो इसलिए मंगवाया था हम. कि वहां जो जेलर था ना उसके बच्चों को ये. ट्यूशन देता था।.
वहां. पाकिस्तान. तो हां [गहरी सांस लेने की आवाज़]. ऐसे पढ़ा शौक से पढ़ा देता होगा या वो. जेलर को इस पे दया आती होगी। उसको शायद. दया आती थी इसके ऊपर। तो फिर उसने कहा कि. इनको भेंट देने के लिए मेरे को कुछ पगड़ी. वगैरह और हां पगड़ी थी बस और तो मुझे कुछ. याद नहीं है। पगड़ियां उसने मंगवाई थी. इनके लिए।. वो इनिशियल डेज है सर जब ये इनका जब. सेंटेंस हुआ हुआ है सियालकोट जेल के अंदर।. ये कोर्ट लखपत से आया हुआ लेटर है एक.
उनका।. कोर्ट लखपत लाहौर के अंदर है।. और लाहौर में इनका अरेस्टमेंट हुआ था।. अरेस्ट हुए हैं जब लाहौर के अंदर ये तो. इनिशियली. जब तक कि यह चीज क्रैक नहीं हुई कि इनके. लेटर कैसे जा रहे हैं बाहर तो वहां पर. अमूमन कैदियों को बाकी कैदियों का भी यही. हाल है वहां पे वहां के जो जेल स्टाफ है. वो कुछ ना कुछ मंगवाता रहता है। मैंने. बाकी जासूसों से भी सुना है कि वो खुद बैठ. के लेटर लिखवाते थे कि यह लिख एक चद्दर. लिख दे, एक लोई लिख दे। जैसे यहां.
लुधियाना में अपने बनते हैं। यह लिख दे, यह लिख दे। वो खुद कह के लिखवाते थे। तो. इनिशियली इनसे भी ऐसे काम करवाए गए हैं तो. लिखवा के कि भ ये और भेजे हैं मतलब मेरे. छोटे मामा जी ने वहां पर सामान भेजा है. लेकिन वो इनिशियली. शायद एक या दो खतों में ही उनका आया था. उसके बाद ये सब. जाते कैसे थे सामान पाकिस्तान. हमने यहां से कूरियर कराया सीधा एड्रेस. दिया बकायदा उन्होंने जेल का वो जेल ही. जाते थे उस एड्रेस पे.
जो एड्रेस दिया जाता था उसी पे जाते थे. एक एक दो तीन बार गए हैं वो उसके बाद नहीं. गए ये. हां एक कहीं जिक्र ये भी था कि उनके शायद. दांत टूट गए थे शरीर कमजोर हो गया था. अच्छा ये. नहीं दांत नहीं टूटे सर कभी भी नहीं. [गला साफ़ करने की आवाज़]. लास्ट में तो ये गर्दन ये ये. सर वही तस्वीर आई जेल से जो. हां उनका वही है सर. दांत वगैरह का और कोई तस्वीर कभी नहीं. मिली. नहीं उसके बाद कोई तस्वीर नहीं मिली सर. आफ्टर डेथ.
नहीं सर नहीं आफ्टर डेथ कोई तस्वीर. कैसे पता लगा कि उनकी मृत्यु हो. सर पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स के एक ऑफिसर. थे ब्रिगेडर हमीद. हम. उनका एक ईमेल आया था कि क्योंकि वो लास्ट. टाइम में वो लोग इनवॉल्व हो गए थे जब इन. इनकी बहुत ज्यादा सेहत खराब हो गई थी और. मतलब. एक दवाइयां वगैरह भी इन्ह इनको वहां मयसर. नहीं थी वहां पे पाकिस्तान के अंदर तब वो.
ह्यूमन राइट्स वाले इस केस में इन्वॉल्व. हुए थे. तो पाकिस्तान में ह्यूमन राइट है।. हां मतलब है सर. नाम के लिए होगा लेकिन है। और हमारे केस. में उन्होंने ये कहा था कि भ जो आप. दवाइयों वगैरह के लिए कहते हैं कि इसके. लिए भी उन्होंने वो जो लास्का जो उनका. हेल्थ का रिपोर्ट आया ना हमारा एक लेटर है. उनका उसमें हेल्थ रिपोर्ट लिखा हुआ है।. उसमें उनका भी कुछ रोल है उसको यहां. भिजवाने में। हालांकि वो दवाइयां तो वहां.
भी मिल सकती थी लेकिन वो लेटर यहां आया तो. हमने गवर्नमेंट को वो लेटर दिया तो यहां. से [नाक से की जाने वाली आवाज़] दवाइयों. का एक पैकेट बन के पूरा मियांवाली सेंटर. जेल के नाम से रवाना हुआ लेकिन रवाना होने. जब तक वो रिसीव करते उससे पहले तो वो जा. चुके थे।. एक हिंदू परिवार में मैडम अंतिम संस्कार. का बड़ा महत्व होता है।. हां यही मैं कहना चाहती थी।. उन्होंने उनका शरीर भी नहीं दिया।.
उसमें दो चीजें थी सर। एक तो पार्लियामेंट. अटैक हो गया था इंडिया में।. हम. आपको ध्यान होगा हमारे सारे जो एंबेसडर्स. थे, जो काउंसलेट्स थे वो वापस इंडिया आ गए. थे। हमारा कम्युनिकेशन बंद हो गया था. पाकिस्तान से।. उन दिनों में हमने कोशिश की थी फैमिली ने. पूरी कि उनकी कम से कम बॉडी हम ला सके. यहां पे।. हम. जो [नाक से की जाने वाली आवाज़]. मैं एक मतलब उनकी समझ लो कि लास्ट जो उनकी. इच्छा थी जो अंतिम इच्छा यही थी कि मैं.
अपने देश में ही हूं उनको उनके लास्ट जो. राइट्स हैं उनके देश में ही हूं। अपने. अपनी मिट्टी में हूं और ये हमारी भी इच्छा. थी लेकिन वो हमारा वहां से कम्युनिकेशन. खत्म था पाकिस्तान से।. हम. इसलिए वही कहते हैं पाकिस्तान मियांवाली. जेल के पीछे ही उनको कहीं दफना दिया गया।. मुस्लिम उससे. आखिरी लम्हों में उनका लुक भी पूरा. मुस्लिम जैसा ही था।. बिल्कुल मुस्लिम जैसा था सर। हां।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तो पाकिस्तान में आखिरी दिनों में वो. मुसलमान बन के रहते। मुसलमान नहीं.
मुझे ऐसा लगता है सर मेरी मेरा अपना. इंटरप्रिटेशन है ये क्योंकि वो इतनी मार. खा चुके थे उनके इन चीजों से भरे हुए हैं।. और अब उनमें जान थी नहीं बिल्कुल भी जान. नहीं थी। तो मुझे ऐसा लगता है कि उनको लगा. होगा जितनी सांसे उनकी बची है कि रोज. निकाल के मुझे पीटा जाए और नाजायज पीटा. जाए। इसका कोई मतलब नहीं है। तो मुझे ऐसा. लगता है कि वो उनकी ड्रेस और उनके ड्रेसअप. से कोई चिड़ ना खाए उनको देख के एकदम से।.
उनको एक बार तो यह लगे यार कि हमारे ही. बीच का आदमी है ये। तो इसलिए मुझे लगता है. कि उन्होंने थोड़ा गेटअप जो अपना था वो. वैसा ही रखा लास्ट डेज के अंदर जैसे मेरे. पास मैंने आपको बताया है। उससे तो यही. लगता है।. लेकिन वो अपने खतों में लिखते थे। ऊपर ओम. नमः शिवाय। उनके लिखे हुए हैं खत। वो भी. वहीं से आए हुए हैं। उनके बारे में किसी. पाकिस्तान में कहीं कुछ लिखा पढ़ा गया. मृत्यु के बाद? सर ही इज द ओनली स्पाई. कि उनके करेज को पाकिस्तानी भी प्रेज़ करते.
हैं। सर ये बहुत बड़ी बात है। मैंने. पाकिस्तान आर्मी का ऑफिशियल पेज उसके. मैंने वो शॉट्स भी ले रखे हैं सारे।. ऑफिसर्स ने कन्वर्सेशन में बोल रखा है कि. चाहे यह बंदा हिंदुस्तानी था पर हम इसके. करेज को सैलूट करते हैं। काम तो अपने. मुल्क के लिए कर रहा था। हम भी अपने मुल्क. के लिए काम करते हैं। लेकिन जिस लेवल का. इसमें करेज था काम करने का उसको हम. सैल्यूट करते हैं। और. आप इंटरनेट पर सर्च करोगे तो पाकिस्तान. में इनके ऊपर पडकास्ट हुए हैं सर।.
पॉजिटिवली कुछ नेगेटिव नहीं है और बड़े. पॉपुलर हुए हैं। पाकिस्तानियों ने किए हैं. पॉडकास्ट।. आपको लगता है मैम कि जो वीरताई कहानियां. सुनते हो आप यह गौरवान्वित करती हैं। कई. बार लगता है कि यार रोक लिया होता उसे. बचपन में. समझ पाते तो. कैसे होता जब मालूम ही नहीं पड़ा इस. रास्ते का अपुन को तो कैसे रोकते अपुन.
उसको. अपने आप से तो बातें करतेगे ना आप. अपने आप से तो करते हैं. कभी लगता है कुछ सोचा होता गहराई से नोटिस. किया होता. कभी भी कोई ऐसी जॉब के लिए या कोई किसी के. लिए कहता उसी टाइम ही मैं तो कह देती इस. सर्विस में किसी में को किसी को मत भेजो।. लेकिन मुझे तो वो चोट लगी हुई है ना। मैं. तो इसलिए कहती हूं कि कोई मत भेजो अपने. बच्चों को ऐसे। कई बार मैं यह सोचती हूं. कि इतने इतने बड़े लोग हैं, इतने बड़े कोई.
भी अपने बच्चों को इस इस जॉब में नहीं. भेजता ना। सिर्फ अपन लोगों के ही बच्चे गए. हुए हैं। और इतने इतने बड़े मंत्री हैं, देश के हैं। कोई किसी का बच्चा जाता है. कभी? कभी नहीं जाता।. अपना बच्चा गया हुआ है।. फैमिली को भी उतनाउतना ही भुगतना पड़ता है. सर जितना जितना जिसमें जितना जितना. रविंद्र कौशिक का उसका उतना उतना पेन तो. है ही सर सब में वो थोड़ा-थोड़ा तो है ही. थोड़ा बहन में थोड़ा होगा जिंदा उतना तो. वो मर गया ना हिस्सा बहन का भी.
तो ये तो ट्रोमेटाइज हो गए फैमिली भी उसके. बाद कहां जो उन खतों को पढ़ लेगा कि मैं. मैंने इतने सालों से रोशनी नहीं देखी सीने. में जो सांस उठती बैठती है उसी से लगता है. मैं जिंदा हूं बाकी जिंदगी जिंदगी का कोई. निशाना बाकी नहीं है। ऐसे खत अगर पढ़े. पढ़े और मां पढ़े बहन पढ़े तो उस पे क्या. गुजरेगी? मरने वाला एक दिन मर जाता है। उसको दफना. दिया जाता है या उसका संस्कार हो जाता है।. वो हर रोज मरता था। हर रोज मरता था वो।.
एक दिन नहीं मरा। वो हर रोज।. शहादत बहुत लंबी है सर ये। मतलब एक दिन की. शहादत नहीं है। ये तो 18 साल वो आदमी रोज. मरते मरते मरते मरते मरा है। पूरा रोज. थोड़ा-थोड़ा मरा है। यह एक. इतनी लंबी शहादत है यह। मतलब वो. एग्जीक्यूट जाके 2001 में हुई है। लेकिन. मरना तो तब से शुरू हो गए थे जब उनको दो. साल टॉर्चर किया है सियालकोट के अंदर। दो. साल लगातार मारा है उनको। फिर बैरेक्स से. निकाल के मारते रहे हैं।.
एक बार तो वो करामत ने बताया कि उनके. फ्रैक्चर हो गया था। कोई बिना उसके वो. प्लास्टर के उनके वो वैसे ही उनकी वो टांग. वहां उसमें पड़े रहे।. फ्रैक्चर उसको लेके पड़े रहे।. ऐसा. ऐसी जिंदगी तो मतलब मौत से भी बदतर है। ये. तो. जहन्नुम और क्या वो तो उन्होंने तो यहीं. देख लिया सारा जहन्नुम और जहन्नुम क्या. होगा। मैं उनके जब वो लेटर पढ़ता था सर.
मैं मैं आपको बता रहा हूं। मैं एक और मेरे. अंदर नहीं जाता था। वो सामने वो विजुअलाइज. होता था लेटर कि यार कि जब वो पढ़ते इतने. साल हो गए मैंने ये सब कुछ नहीं देखा है. और मैं बहुत यहां पर दोजक की आग में जल. रहा हूं तो वो. [नाक से की जाने वाली आवाज़] इससे लगता था. यार हम लोग यहां आजादी में बैठ के सब खा. रहे हैं और जो ये सभी के लिए मैसेज है सर. जो हमारे जो लोग हैं हमारे जो यहां के ऐसे. बच्चे हैं जो देश के लिए यूं चले जाते हैं.
सर और बिना किसी नाम के उनको तो यह भी. नहीं है कि कभी वो चले गए इस दुनिया से तो. उनको मटेडम मिलेगा।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. स्पाई के पास तो वो राइट्स भी नहीं है सर।. स्पाई के पास इससे बड़ी शहादत क्या होगी. जिसके पीछे उसको यह भी उम्मीद नहीं है कि. उसको कभी कोई शहीद भी बुलाएगा।. कम से कम फौज ख्याल तो रखती है।. फौज ख्याल तो रखती है कि शहीद का दर्जा तो. मिलता है। उसको तो वो भी नहीं मिला।. वो किस उम्मीद में. इसका मतलब यह है सर कि देशभक्ति का इससे.
बड़ा एग्जांपल क्या होगा कि देश के लिए ही. सब कुछ लुटा देना अपनी अपनी पहचान को देश. के लिए खो देना अपनी जिंदगी को दांव पे. लगा देना. इससे बड़ी मुझे तो शादी और स्पाइस को सर. वो मिलना चाहिए और रविंद्र कौशिक इसीलिए. सर हमने फिर अभी कोशिश कर रहे हैं हम लोग. उनके खतों के हिसाब से उन्होंने कहा मदद. करना हमने हमने फिर एक ट्रस्ट बना लिया. रविंद्र कौशिक जी के नाम से। रविंद्र. कौशिक ट्रस्ट करके बनाया कि हम जो स्पाइस.
हैं जिनकी फैमिली पीछे जिनसे हमने जाके. देखा कि गरीबी की हालत में बहुत गरीबी की. हालत में हैं। काम करने के लायक वो रहे. नहीं क्योंकि इतनी मार खा के आए हैं उधर. से उनके लिए कौन. [नाक से की जाने वाली आवाज़] करेगा? तो. उनकी रूह को कहीं यह लगे कि हम कुछ कर रहे. हैं ऐसे लोगों के लिए जिनके लिए उन्होंने. बार-बार खत में लिखा कि मैं ही अकेला नहीं. हूं। बहुत लोग हैं जो देश के लिए हम लोग. नीम के पत्थर की तरह हैं जो नीचे लग जाते. हैं जिनका कोई भी कोई ऊपर कभी. उनका कोई निशान नहीं रहता ऊपर आपकी आंखों.
में बार-बार आंसू आ जा रहे हैं।. आज सबसे बड़ी तकलीफ क्या है आपकी आज? [नाक से की जाने वाली आवाज़]. आज क्या चल रहा है आपके दिल में? [नाक से की जाने वाली आवाज़]. मैं यह कहती हूं मेरे भाई को एक शहादत का. दर्जा मिलना चाहिए हिंदुस्तान के अंदर।. शहादत का दर्जा था। ये उन्होंने भी खतों. में लिखा है कि मुझे शहीद तो जरूर पुकार।.
क्या मैं गलत कह रही हूं कि मुझे शहीद तो. पुकारा जाए। [नाक से की जाने वाली आवाज़]. ये तो उनकी अंतिम इच्छा मान लो या क्या. पता कभी देश में ऐसा वक्त आ जाए।. किसी राष्ट्रवादी सरकार के समय में भी आ. सकता है कि यह लोग जो देश के लिए जाते हैं. अपना सब कुछ लुटाकर और कहीं वापस भी नहीं. लौट पाते वहां से इनको हम. [नाक से की जाने वाली आवाज़] शहीद तो कह. सके इतना तो कह सके इतना फर्ज अदा कर दें. कि ये शहीद है कभी मोदी जी से मिलने की.
कोशिश की आपने. इस मांग को लेकर. कि जिस व्यक्ति के बारे में. विदेशों में लोग कहते हैं कि दुनिया के. बड़े सिपाही में से देख रहे हैं।. उनको शहीद का दर्जा मिले।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. कुछ कहना चाहोगे आप सरकार से, मोदी जी से? हां जी कहना चाहती हूं मैं तो। मैं तो. सरकार से यही कहना चाहती हूं कि इनको. शहादत का दर्जा दिया जाए।.
जब तक मैं जिंदा यह देख के तो मरूं ना कि. मेरे भाई को शहादत का दर्जा दिया गया है।. तो अगर मोदी जी तक आपको कोई मैसेज. पहुंचाना क्या कहोगे उनसे आप? मैं यही हाथ जोड़ के प्रार्थना करती हूं. कि मेरे भाई को शहादत का दर्जा दिया जाए।. मैं बार-बार प्रणाम करके यही बात कहती. हूं।. उनको शहीद शहीद का दर्जा मिले।. शहीद का दर्जा दिया जाए। का कोई नाम तो हो.
ना। हम इतना [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तड़प रहे हैं।. अभी इंटरनेट पे बहुत सारा असर उनके लिए. आता है तो मैं तो स्क्रोल कर रहा इनको. नहीं [नाक से की जाने वाली आवाज़] करने. देता स्क्रॉल सब चीजें।. [गहरी सांस लेने की आवाज़] वो उस चीज से. चिपके रहना भी इनकी सेहत के लिए भी ठीक. नहीं है।. नहीं लेकिन मैं चाहता हूं कि दुनिया ये. देखे कि जब हम धुरंधर जैसे कि स्पाई फिल्म. देखते हैं और उसके पीछे स्पाई की कहानी. देखकर तालियां बजाते हैं। तो ऐसे स्पाइक.
के परिवार के दर्द को भी देखना चाहिए कि. किस दर्द [नाक से की जाने वाली आवाज़] से. परिवार गुजरता है।. जी बिल्कुल. क्योंकि ये वो हिस्सा है जो शायद फिल्मों. में नहीं दिखाया जाता।. नहीं दिखाया जाता।. पिता की मृत्यु हो गई। मां इंतजार करते. हुए चली गई। एक भाई संघर्ष करते चला गया।. जी।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. एक बहन है जो आज 40 साल बाद भी आंसू में.
आसूली बैठी है।. जी 40 साल से ऊपर का वक्त हो गया।. बिल्कुल हो गया सर। उनको गए हुए 25 साल हो. गए इस दुनिया से।. नहीं भारत आए हुए तो लगभग 44 साल हो गए।. हां, भारत आए हुए।. भारत आए।. पकड़े गए लगभग 40 साल से ऊपर। यानी परिवार. ने 40 साल से नहीं देखा।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. नहीं देखा।. बिल्कुल सही है सर।. नहीं देखा 40 साल बहुत लंबा वक्त होता है।. हमारी उम्र नहीं है।.
हां जी।. पाकिस्तान में जो उनका बेटा था या परिवार. था। उसने कभी कोशिश की आपसे बात करने की? नहीं सर उन उसका उसने अपनी तरफ से तो. कोशिश की होगी क्योंकि उसको पता था कि. उसके खानदान के लोग भारत में है घर. [नाक से की जाने वाली आवाज़] में। और. उनको उसने जब इंटरनेट थोड़ा अवेलेबल हो. गया जब लोगों को आम लोगों एक्सेस में आ.
गया इंटरनेट तो इतने तो वो तो बहुत. मुफ्लिसी में वहां उसकी जिंदगी कटी हो गई. और फिर उसने कुछ प्रयास किए हैं इधर-उधर. से एक मेल. मेरे छोटे मामा जो नहीं रहे दुनिया में एक. [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेल उनको आया. था हमें लगा यह मेल फेक है क्योंकि आउट ऑफ. नोवेयर एक मेल अचानक आ गया कि मैं यहां. यहां हूं और हम लोग बहुत मुसीबत में हैं।. मैं और मेरी अम्मा और.
हम लोग आना चाहते हैं। देश अपने वापस आना. चाहते हैं। मतलब मेरे अब्बा के मुल्क आना. चाहते हैं हम लोग क्योंकि हम लोग यहां पर. अपनी जो ट्रू उनकी आइडेंटिटी है उसको कैरी. नहीं कर पा रहे हैं और सोशली बॉयकट भी हो. गया था उनका इनके अरेस्टमेंट के बाद। तो. ऐसी जिंदगी से उनका था एक कोशिश थी उनकी. कि वो भारत आ जाए। लेकिन ऐसे डायरेक्ट. हमारा कभी कांटेक्ट हो नहीं पाया सर उससे. कभी. कभी कोई तस्वीर एक इंटरनेट पे जब हमने खूब.
सर्च किया उसको तो एक हमें Facebook. अकाउंट मिला उसके अरिफ. [नाक से की जाने वाली आवाज़] के नाम से और. उस Facebook अकाउंट के अंदर उनकी वो. तस्वीर आई। वो उस तस्वीर से ऐसे मैच हो. गया कि करामत राही जब पाकिस्तान से जब आता. है तो अपने झोले में वो रविंद्र. [नाक से की जाने वाली आवाज़] कौशिक जी के. पास एक तस्वीर थी इसकी आरिफ की वो लेके. आया था। था वो तस्वीर भी मेरे पास है। वो. तस्वीर और वह तस्वीर जो Facebook पे जो. उसके एक अब तो अकाउंट बंद है काफी टाइम से.
वो मैच हुई तो हमें पता लगा कि यह हरीब का. ही अकाउंट है और लेकिन उस पे कभी कोई. कम्युनिकेशन किसी ने किया नहीं हमारे से. बच्चे बच्चे के तस्वीर थी जब. वहां बच्चा हां हरीब जब तकरीबन. छोटे सी. हां तकरीबन है आठ 10 11 साल का बच्चा होगा. ऐसी तस्वीर है वो एक. पाकिस्तान सरकार ने क्या किया था उनकी. पत्नी के साथ क्योंकि मैंने सुना उन्होंने. भी काफी प्रोटेस्ट किया था शायद. जी जी जी. सरकार के खिलाफ. जी जी जब वो अरेस्ट हुए तो ये वो हंगर.
स्ट्राइक पे बैठ गई थी पाकिस्तान के अंदर. उन्होंने कहा कि ये आप लोगों की गलती से. अंदर आया है. और ये मेरा शौहर है मैंने इसे एक. पाकिस्तानी समझ के. शादी की है मेरी गलती नहीं है ये कि आज ये. पाकिस्तान में है पाकिस्तान का वाशिंदा. बना है तो ये आप लोगों की गलती है तो मेरा. शोहर आप इसको रिलीज करो लेकिन उनको नजरबंद. कर दिया गया था पाकिस्तान में और प्रेस पर. बैन कर दिया था पाकिस्तान में। यह न्यूज़.
स्प्रेड आउट नहीं हुई पाकिस्तान के अंदर. कि कोई आर्मी ऑफिसर वहां पर अरेस्ट हो. गया।. आपको लगता है दोनों जिंदा होंगे? ऐसा लगता है सर उम्मीद है कि वो जिंदा है. कहीं दुनिया में।. दोनों. हां जी। हमने इसलिए ट्रेस नहीं किया उनको. कि ट्रेस करना भी उनके लिए डेंजरस था. क्योंकि उनको हम ढूंढेंगे तो हमसे पहले तो. वो ढूंढ लेंगे उनको जिनको ढूंढना नहीं. चाहिए। रविंद्र कौशिक जी की डेथ के बाद. कभी. ढूंढने की कोशिश उनको नहीं हमने नहीं की. सर. क्यों आपके परिवार का बच्चा था. कोशिश क्योंकि हमें ये खतरा था कि हम अगर.
इसको ट्रेस करेंगे कहीं ना कहीं क्योंकि. उनको दुख दिया जाएगा. हां उनको कहीं ना कहीं. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ट्रेस हो. सकते हैं वो हमारी ट्रेसिंग से वो ट्रेस. में आ सकते हैं कहीं और हमसे कनेक्शन जब. इस्टैब्लिश मान लीजिए वो कहीं रह भी रहे. हो लेकिन किसी को पता नहीं होगा ना इतना. टाइम गुजरने के बाद कि इनका पुराना पुराना. कनेक्शन ये रहा हुआ है। हम कांटेक्ट. करेंगे तो एक कनेक्शन स्टेब्लिश होगा कि. इनको क्यों ये फैमिली अप्रोच करती है इन. बच्चों को? इस बच्चे को या इसकी मदद को तो. वो जब रिलेशनस्टैब्लिश होगा कनेक्शन.
इस्टेब्लिश होगा तो उनकी जान को खतरा है. तो. मैंने सुना एक बीच में न्यूज़ आई थी शायद. उसकी डेथ हो गई बच्चे की. हां जी ये हमें अनऑफिशियली किसी ने बताया. जयपुर में मुझे बताया था किसी ने. रॉक की तरफ से या. नहीं कोई आईबी से रिलेटेड आदमी थे. उन्होंने मुझे बताया कि आपके मामा के जो. पाकिस्तान में बच्चा था वो एक्सपायर हो. गया. कैसे एक्सपायर हुआ. मैंने पूछा कैसे बोले कि कुछ बीमारी से. एक्सपायर हुए क्या बीमारी थी बोले वो नहीं. पता लेकिन एक्सपायर हो गया पाकिस्तान में. ठीक है सर।. पत्नी अकेले जिंदा है।. हां पत्नी अकेले जिंदा है।.
फिर वो Facebook अकाउंट मैंने 2015-16 तक. एक्टिव रहा सर अकाउंट वो तो मुझे लगता है. वो 12 13 में मुझे बताया 12 में एक्सपायर. हो गया और 15-16 तक अकाउंट एक्टिव कैसे रह. सकता है उसका। उस पे कोई जवाब नहीं देता. था अकाउंट पे। लेकिन कोई ना कोई उसको. हैंडल कर रहा था अकाउंट को। मुझे लगता है. वो कहीं से छुप के या तो कर रहा होगा या. होगा कहीं जिंदा। उम्मीद है सर ये तो. हमारी सिर्फ एक हो सकता है. अंदाजा है हमारा. ट्रैपिंग करने के लिए भी रखा किसी ने. हां हो सकता है कि कोई इसको कांटेक्ट. करेगा तो ट्रैप कर लेंगे कुछ भी हो सकता.
है सर इसलिए उनकी जिंदगी के लिए हमने उनको. नहीं छेड़ा कभी कि वो तो चले गए और वो भी. जाते हुए कुछ खतों में उन्होंने लिखा था. अपने कि आप हुकूमत से कह के कोशिश करना कि. मेरे बीवी और बच्चे को आप यहां से ले जा. सकूं। आप कोशिश करना आप उनसे कहना कि वह. यहां मुसीबत में है। हालांकि दुख की कोई. तुलना नहीं होती लेकिन उनकी पत्नी का भी. एक बहुत बड़ा दुख रहा होगा।. बिल्कुल रहा होगा सर।. वो तो अपनी तरफ से बिल्कुल अनजान थी।.
अनजान थी सर।. प्यार किया पिता कह रहे हैं शादी।. उनका तो कोई कसूर नहीं था।. वो तो अपने मुल्क में थी।. अगर अगर सर कसूर होता तो उनको केस में. इन्वॉल्व करते।. यहीं से समझ आता है कि उनको पता था. इनोसेंट है।. लेकिन उन्होंने भी जीवन में अपनी अलग सजा. भोगी होगी। सजा भोगी है सर बिल्कुल होगी. कि. अपने मुल्क में गद्दार कहलाए होंगे अपने. ही मुल्क में संपत्ति से अवर्जित हुए. होंगे अपने ही मुल्क में अपने बेटे को. लेके भटके होंगे. समाज की लानत में लानत झेली होगी. जी बिल्कुल बिल्कुल.
कितने परिवारों को नुकसान हुआ. कितने परिवारों को एक शहादत अकेली शायद. मैं कह रहा हूं सर वो जितना जितना रविंद्र. कौशिक जिसजिस में था उन सभी ने दुख झेला. है. हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. आप लोग जब जाते होंगे सरकारों से मिलने ये. सारी बातें बताने तो रवैया कैसा था उन लोग. का? वो आप लोग को सम्मान देते थे।. हां अच्छा रवैया अच्छा रहता था। जैसे किसी. से आप बात करने वो हमेशा रवैया अच्छा ही. रहेगा।. हम. बाद में क्या होना है वो तो होता कुछ भी.
नहीं था।. लेकिन सम्मान रखते थे आप।. हां जी। हां जी। हां जी। बिल्कुल।. कोई आर्थिक तंगी आप लोग को रही रविंद्र के. जाने के बाद? नहीं सर।. ऐसे. ऐसे नहीं। हम लोग अपना काम कर रहे हैं।. उनकी एक पेंशन आती थी मेरी नानी मां को।. और. रविंद्र जी की. हां जी एक पेंशन टाइप उनकी ये उनके जिंदा. रहने तक आती रही है. सरकार की तरफ से. सरकार की तरफ से. और. वो तो मानते ही नहीं थे कि उनके सिपाही. हैं। हां पेंशन देते थे सर उनको और पेंशन. सर आती थी ₹500 महीना.
ये नहीं पता कौन कौन सी सरकार ये भेजते थे. कि वो भेजते थे. लेकिन उनके अकाउंट में आता था ₹500. सिर्फ ₹500. तो एडमिशन तो है सर एक्चुअली तो जसवंत. सिंह जी का ईमेल है जिनमें उन्होंने जो. इनके रविंद्र जी की शहादत की उन्होंने. कंफर्मेशन दी है। हमारे फॉरेन मिनिस्टर थे. जसवंत सिंह जी।.
अमित के बाद उनका मेल आया कंफर्मेशन के. लिए कि हम उसे बचा नहीं पाए। हमने कोशिश. की है और इस दुख की घड़ी में भारत सरकार. आपके साथ है। ऐसा करके उन्होंने एक मेल. किया था।. ये कब से आपको लोगों को पेंशन आ रही थी? ये उनके जाने के बाद ये 2001 में जब वो. चले गए हैं ना उसके बाद पांच छ साल. इन्होंने कुछ ऐसे ₹100 करके उनको देना. शुरू किया। ₹500 महीना करके कुछ आता रहा।. डेथ के बाद. डेथ के बाद जब तक जिंदा रही है मेरी नानी. मां 2008 तक. कभी किसी से पूछा नहीं कि ₹500 क्यों दे.
रहे हो? पूछ किससे पूछते सर ये. भेज कौन रहा था? डिपार्टमेंट [नाक से की जाने वाली आवाज़]. भेजता होगा।. डिपार्टमेंट भेजता होगा।. आप लोग उस 500 कैसे देख रहे थे? सर. सोना ही हुआ था और तो क्या ₹00. टोकन ऑफ रिस्पेक्ट के तौर पर. कि टोकन ऑफ कंसीडरेशन के तौर पर सर कि. कंसीडर किया उनको कि वो हमारा आदमी था. हमारे लिए काम कर रहा था कहीं.
देश के लिए काम कर रहा था इससे ये भी तो. एस्टैब्लिश होता है सर. वही मैं पूछ रहा हूं क्योंकि. इट्स नॉट ओनली अबाउट मनी. यस नॉट ओनली अबाउट मनी. इट्स अबाउट कि हमने एकनॉलेज किया कि. एकनॉलेज किया उस आदमी को एकनॉलेज करते हैं. हम. हम और यह गवर्नमेंट कॉरेस्पोंडेंस से भी. एकनॉलेजमेंट आता है सर उनका और. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. यही. हमारा था कि भ उनकी जो अंतिम इच्छा है वो. जरूर पूरी हो।.
इस कहानी में मतलब ऐसे अनगिनत परिवार. होंगे। आप आप सामने आ गए। हमारी आपसे. बातचीत हो जा रही है। आपके दर्द को लोग. सुन ले रहे हैं।. जी. रविंद्र जी क्योंकि वहां शादी किए थे।. उनकी स्टोरी बड़ी ग्लमराइज भी बाद में कर. दी गई। दुखद बड़ी दुखद कहानी है। लेकिन. उसको फिल्मों में लाया गया। कहानियों में. लाया गया।. बट ऐसे कितने अनगिनत जासूस होंगे? बहुत होंगे सर।. तो क्या लगता है आपको कि ये क्या मोटिवेट. करता है उनको कि वो सारे जासूस कहानी.
जानते हुए भी यूं ही निकल जाते हैं मतवाले. बनके।. जी सर। एक्चुअली मुझे लगता था कि रविंद्र. कौशिक जी के टाइम में क्योंकि आपके पास. कुछ एग्जांपल नहीं था क्योंकि पहले कोई. ट्रैक नहीं था जासूसों का।. हम. अगर रविंद्र कौशिक जी 2001 में होते. हम. तो उनके पास कुछ ट्रैक रिकॉर्ड होता. सर्वजीत का होता और जासूसों का होता कि. जासूस जासूसों के साथ पकड़े जाने के बाद. ट्रीटमेंट क्या होता है?
हम्।. इनिशियल डेज में वह किसी के पास हिस्ट्री. नहीं थी। कोई ट्रैक नहीं था। ट्रैक. रिकॉर्ड नहीं था कि पकड़े जाने के बाद. होगा। एक उनको संतावना थी। एक उनको ये. बताया गया था कि यार जासूसों को मारा नहीं. जाता। एक्सचेंज होता है। आप एज ए. सिक्योरिटी प्रिजनर वहां रहोगे और आपका. एक्सचेंज किया जाएगा एक दिन। आप घबराओ मत।. ज्यादा से ज्यादा यह होगा आपके साथ।. और इसको और देशभक्ति का जज्बा तो सर मेरे. को लगता है कि बिना जज्बे के जासूसी का.
काम तो नहीं हो सकता। आप आर्मी ज्वाइन कर. लोगे। जासूस कैसे बन जाओगे? किसी एनिमी. लैंड पर जाकर आपको अंडर कवर रह के फाल्स. आइडेंटिटी को कैरी करते हुए आपको काम करना. है। मिशन क्रैक करने हैं। यह तो देशभक्ति. के बिना नहीं हो सकते। पैसा भी कितना दे. दोगे आप? कोई पैसे के लिए क्यों जाएगा? और. उसको पता है कि पकड़े जाने के बाद पहली. पकड़े जाने के बाद पहला तो वो डिसऑन हो. जाएगा।. कंट्री उससे पल्ला झाड़ लेगी।.
फिर उसको वह नर्क झेलना पड़ेगा। उसको वह. दोजक की आग में जलना पड़ेगा जिसका उसने. कभी ख्याल भी नहीं किया है। तो इसके लिए. कौन तैयार होगा सर? कोई देशभक्त जिसको ये. लगता है कि. पता भी होगा शायद कि क्योंकि जासूसों. [नाक से की जाने वाली आवाज़] का पता होगा. ना कि पकड़े गए तो क्या-क्या हो सकता है।. हां।. हमारे यहां भी शायद पता नहीं या दुनिया भर. में जितने यहां जासूस पकड़े जाते होंगे।. हां जी।. क्योंकि जासूसों का काम तो बड़ा खतरनाक. होता है।. बहुत खतरनाक है। यस। वो ह्यूमन Intel सारी.
कहानी पलट अभी हमने ईरान ईरान में देखा. शायद कोई जासूसी था जिसने जानकारी दी. बिल्कुल बिल्कुल सर बहुत साइलेंटली काम. करना इसीलिए मैंने आपको बताया जैसे. फिल्मों में कुछ एक्सक्रेट हम लोग कर देते. हैं. कि वो आके. फ्रंट में आके फाइट कर रहा है वो सब थोड़ा. ठीक है नहीं तो फिल्म बनेगी कैसे. लेकिन सर जैसे करोड़ों आंखों से छुपा के. आपको काम करना है। आप एक एनिमी लैंड पे.
हो। करोड़ों-करोड़ों आंखें आपके लगी हुई. हैं। जब आप चल रहे हो कहीं रास्ते पे जाते. हो। लोग भी देख रहे हैं आपको। लेकिन आपको. बिल्कुल बिहेवियर वैसा रखना है। पर मेरे. को लगता है सर इसके लिए मेरा अपना. ऑब्जरवेशन है कि एक अच्छा एक्टर होना बहुत. जरूरी है।. जब मैं इस कहानी को ऐसे भी मैं देखता हूं. कि कई बार लोग एक्टर को कह देते हैं एक. एक्टर देश के लिए क्या कर सकता है।. रविंद्र कौशिक की कहानी ये बताती है कि एक. एक्टर देश के लिए यह कर सकता है।. लेकिन उनकी कला ही बात है उनकी। यस यस. दुश्मन बन गई।. इट्स एक्चुअली इट्स अ जर्नी ऑफ़ एन एक्टर।.
एक थिएटर एक्टर की जर्नी है। उनकी पूरी. कहानी कि कैसे उसने अपनी इस अदाकारी का. अपनी एक्टिंग स्किल का यूज़ देश की सेवा के. लिए किया। देश को उसने एक ऐसी एग्जांपलरी. स्टोरी उसने स्टैंड कर दी जो कि मतलब पता. नहीं कितने सालों तक ये बच्चों को. इंस्पायर करती रहेगी उनकी कहानी। मैम. आखिरी सवाल मेरा आपसे है।. मैं जब न्यूज़ में डोबाल को देखती हूं ना. हम. तो शायद सभी देखते हैं लेकिन उसको देखते.
ही मुझे मेरा भाई हमेशा याद आता है।. उनकी एक स्टोरी है ना वो पाकिस्तान रहे. हुए हैं।. कई बार न्यूज़ में उनका चलाया जाता है।. चलाया जाता है। ये ऐसे. रूप बदल के रहे भिखारी बन के रहे। ये तो. मुझे अपना भाई जरूर याद आता।. सर रविंद्र जी के दौर के बाद ही हो गए. होंगे। उसी दौर नहीं उसी टेन्योर में थे. सर आसपास थे उसके. एक्चुअली सर क्या है कि जैसे हमारा.
एक्चुअली जासूसी का जो मेन पूरा जो सिस्टम. है वो जो नीचे ग्राउंड लेवल पे स्पाई खड़ा. है उस पे ही है सारा खड़ा है। वो नीम है. नीचे Intel तो वो लाता है अपनी जान पे खेल. के। उसके बाद तो उसका हैंडलर है। हैंडलर. के बाद ऊपर जो पूरा जो आपका जो पूरा डेस्क. को जो लोग संभालते हैं जो ऑफिसर्स हैं. उनकी हैरार्की है पूरी। लेकिन नीचे जो काम. कर रहा है जिसको खतरा है अपनी जिंदगी का.
कहीं भी अपने आप को डाली दे रहा है किसी. खतरे में। वो सिर्फ इसलिए कि उसको एक एक. न्यूज़ मिल जाए जो उसके कंट्री के काम आ. जाएगी।. किसी भी देश की जो जो स्ट्रेटजी बनती है, जो सिक्योरिटी पॉलिसीज बनती हैं उसमें. इनके इंटल काम करते हैं सर। तो वो तो बहुत. इंपॉर्टेंट काम कर रहा है नीचे लेकिन उसको. कोई रिकॉग्निशन नहीं है उसके पास. जॉब प्रोफाइल भी है ना. हां सर वो तो ट्रेंड है लेकिन हम करना. चाहे तो हम क्यों नहीं सम्मान दे सकते. रविंद्र कौशिक जी को मिला है और थैंक यू. फॉर दैट कि गवर्नमेंट ने भारतीय जनता.
पार्टी की सरकार थी वहां कर्नाटका में. उन्होंने [नाक से की जाने वाली आवाज़]. हमारे बिना प्रयास के सर हमारा कोई प्रयास. नहीं है उसमें वहां के जो लोकल एमएलए हैं. अभय पाटिल करके कोई हैं बेलगावी साउथ के. एमएलए भी हैं शायद उन्होंने ने अपना मतलब. डिस्क्रीशन पे उन्होंने यह देखा कि इस. आदमी का सैक्रिफाइस कितना बड़ा है देश के. लिए और उन्होंने सीएम साहब से बात की होगी. तो वो ई लाइब्रेरी जो बेलागावी में बनी है. उनके नाम से और ये बहुत बड़ा एग्जांपल सेट.
हुआ स्पाइस के लिए मेरे ख्याल से यह भी एक. अच्छी बात है सर अगर देश के लिए कुछ आने. वाली पीढ़ियां अगर काम करें तो कम से कम. इतना ख्याल तो रहे कि अगर काम बहुत अच्छा. होगा बड़ा होगा शहादत चाहे आपकी. रिकॉग्नाइज नहीं हो लेकिन लोग आपको. रिकॉग्न कर लेंगे सर इस लेवल पे और. धीरे-धीरे सर मुझे लगता है ये ये कबूलियत. भी आ ही जाएगी देश के अंदर कि गए तो देश. के लिए हैं ये लोग। मैम मेरा आखिरी सवाल. आपसे है कि अगर हम ये मान ले कि उनका. बच्चा पाकिस्तान में जिंदा है। उनकी पत्नी. पाकिस्तान में जिंदा है और उनका बच्चा.
आपसे सवाल पूछे कि. बुआ मेरे. पिता के लिए आपके देश ने क्या किया? आप. लोगों ने क्या किया? यह हमें आपने अकेला क्यों छोड़ दिया? कुछ भी नहीं।. कुछ भी नहीं किया। क्या किया है? यह बताइए. आप।. कुछ किया होता तो बताती मैं आपको। ये किया.
उस बच्चे के लिए ये किया या भाई के लिए ये. कर पाए।. कुछ भी नहीं।. वही तो मैं आपको कह रही हूं। यह सरकार. होती तो शायद कुछ होता क्योंकि देखते ही. हैं अपन तब कुछ भी नहीं कर पाए।. उस समय को कोसते हैं कि कुछ नहीं कर पाए।.
जैसे अंधा ढूंढता है ना किसी किसी जगह को. वो अंधे थे। जगह नहीं मिली कोई भी। आज आज. अपन सब देख रहे हैं। मीडिया भी सतर्क है।. अपनी गवर्नमेंट भी सतर्क है। तो अपन सोचते. हैं ना कि वह होता तो आज ये गवर्नमेंट. छुड़ा लाती उसको।. उम्मीद तो है ना आज भी वो नहीं है तो क्या. वो. लेकिन उसका नाम तो हो ना।. [नाक से की जाने वाली आवाज़].
देश के दिलों में उनका नाम है। मुझे लगता. है भारत की जो नई पीढ़ी है वो रविंद्र. कौशिक जी को सलाम करती है। मैंने रविंद्र. जी पर जब भी कोई वीडियो बनाया मैं तो आप. लोग को जानता भी नहीं था।. उस सम्मान से बनाया कि आने वाली पीढ़ियों. को उनके बारे में और जाना चाहिए।. जी. जितनी लिमिटेड इन हमारे पास थी।. जी जी. इस पॉडकास्ट को करने का मकसद भी हमारा यही. था कि वो एक ट्रिब्यूट हम उनको दे सकें।.
जी जी. याद रखते हुए कि जब हम और आप खुशी से जी. रहे हैं तो कोई था जिसने सब कुछ बलिदान कर. दिया। जी. जिसके अपनों ने बलिदान कर दिया हिंदुस्तान. से ले पाकिस्तान तक. जी. जो आज भी शायद उस बलिदान में जी रहे हैं. हिंदुस्तान में भी पाकिस्तान में भी. यस. यस. और वो जो अब इस दुनिया में नहीं है. उसको वो सम्मान मिले. इस कहानी को और बड़े पर्दे पर ले जाने की.
कोशिश है आपकी. जी सर मैं उनकी बायोग्राफी मैंने लिखी है. और उनकी बायोग्राफी के ऊपर अभी जैसे. स्क्रिप्ट का काम अभी शुरू हो जाएगा और हम. लोगों की कोशिश है कि जल्दी इसको हम लोग. किसी ने कांटेक्ट किया आपसे।. जी पहले अनुराग बासू उनके साथ मेरा. कांटेक्ट था लेकिन अभी क्योंकि वो बिजी. हैं तो मैं अभी करण जौहर सर से मिलके आया. था। उन्होंने कांटेक्ट किया था अपनी तरफ. से तो मैं लास्ट टू लास्ट मंथ उनसे मिलके.
आया हूं। उनकी टीम से भी मेरी बात चल रही. है और. अभी यह दो-तीन जगह मेरी बात चल रही है और. उम्मीद है कि सर यह बहुत जल्दी हम लोग. इसको बना लेंगे। पर ये एक मकसद ये भी था. सर हमारा कि कोई मिसइफेशंस. उनके बारे में जो उनकी बायोग्राफी अनाउंस. करके कुछ लोग लिखे दे रहे हैं ऐसे ही वो. भी ठीक नहीं है। ज्यादती है उनकी शहादत के. साथ। उनकी असच्ची कहानी. मुझे लगता है कि वो उसका थोड़ा वेट करना.
चाहिए बायोपिक का और वो जरूर बनेगी और. बाहर आएगी वो फिल्म तो एक जासूसी की. दुनिया को एक अलग अंदाज में लोग देखेंगे. उस की जासूस एक्चुअली अपने देश के लिए. कितने बड़े काम कर जाता है वो सिर्फ एक. जज़्बे की खातिर उसमें देशभक्ति का जज्बा. हालांकि ये सवाल मेरा बहुत बेईमानी है. अगला जो पूछने वाला हूं आखिरी सवाल. क्योंकि इस देश में हर आदमी पहले गलत. सोचता है फिर सही सोचता है. हम्म हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. ये जो फिल्म आप बना रहे हैं इसका मकसद. रविंद्र जी की कहानी को दूर-दूर तक.
पहुंचाना है या शायद जब ये कहानी का जिक्र. आप इस पॉडकास्ट में भी करें तो हो सकता है. कुछ लोग आ जाए जो कहें कि उनके नाम के. जरिए एक आर्थिक स्थिति बेहतर करना।. नहीं सर एक्चुअली मैं आपको बता देना चाहता. हूं कि हमारी पूरी फैमिली का अ. भारत सरकार से भी कभी कोई मॉनिटरी गेन के. लिए हमने कभी कोई एक सिंगल एफर्ट भी नहीं. किया कभी। मैंने इसलिए लिखा कि ये सवाल. बेईमानी है।. लेकिन फिर भी क्योंकि इस देश में सवाल.
उठाने वालों की कमी नहीं है। वो शहादत पे. भी सवाल उठा देते हैं।. हमने बहुत बार देखा है। [हंसी]. इसीलिए मैं चाहता हूं कि इस बात को आप. रखेंगे तो सवाल उठने के पहले शायद मैं ही. अपराधी बनकर वो सवाल अपने ऊपर झेल लूंगा. और भविष्य में कोई हिमाकत ना कर पाए।. जी और सर जो मेरा पहला कॉन्ट्रैक्ट हुआ था. डायरेक्टर के साथ हमने विदाउट एनी मॉनिटरी. गेन साइन ऑफ किया था। नहीं वो आपके परिवार. का बनता है लेकिन. हां और ऐसा नहीं अब सर इतना ही है क्योंकि. उनकी उनकी कहानी को थोड़ा-थोड़ा लेकर कुछ.
फिल्में बन गई मिशन मजनू बन गई या रॉ बन. गई तो हम चाहते हैं कि जो एक्चुअल कहानी. है जो मदर स्टोरी है इन सारी एसपीज की. जितनी स्टोरीज हिंदुस्तान में बनी है उसकी. मदद स्टोरी है ये बाहर आनी चाहिए और पूरी. सच्चाई के साथ आनी चाहिए क्यों नहीं सच. बाहर आया सर. उसमें क्या डर क्या है सच सच के बाहर आने. में तो कोई डर नहीं होना चाहिए तो इसीलिए. सर इतना लंबा समय लगा क्योंकि कोई. इंफॉर्मेशन मेरे पास सीधी थी नहीं. क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स हैं मिलते नहीं.
डायरेक्ट तो धीरे-धीरे अक्षर अक्षर उसको. जोड़कर लफ्ज़ लफज़ उसका पढ़कर उसके पीछे. लगकर उसको इतने लंबे समय में लिखा गया तो. जितना उसको. उसके प्रोसेस में समय लगा है उसको लिखने. में समय लगा है उतने अच्छे ढंग से वो. पोट्रे होकर दुनिया के सामने आ जाए और एक. वो वह कहानी जो अलग-अलग टुकड़ों में कई. जगह वह अह पोट्रे हुई है। वह एक एक सच्चाई. के साथ एक जगह पोट्रे हो जाए। एक एक. बायोपिक उनको एक श्रद्धांजलि होगी। मेरे.
हिसाब. मुझे भी लगता है कि. जैसी कहानी वैसी आ जाए। तमाशे के तौर पर. बताएं।. हां तमाशे के तौर पे नहीं आए।. हां बिल्कुल।. इतना अभी सुनिश्चित कीजिएगा कि जब पहली. बार फुल ब्रिजेड कहानी आए. तो कौन बना रहा है वो देख के बनाए। जी. और क्या जा रहा है वो देख कर जाए. देख कर जाए. कहानी आए तमाशा मत आए. ना तमाशा. जी जी बिल्कुल बिल्कुल. यही है इसलिए सर वक्त लगा है. क्योंकि फिल्मों का असर समाज पर होता है. असर होता है सर. और जब वो पहली बार बड़े पर्दे पर आए तो उस.
नायक के तौर पर ही आए. जी. जिसने भारत का मान बढ़ाया और फिर गुमनामी. के साए में जाकर अपना बाकी जीवन खपाया।. जी सर जी. पूरे देश की तरफ से. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. हमारी तरफ से उनको नमन, आपके परिवार को. नमन, उस सर्वोच्च बलिदान के लिए जो. रविंद्र जी ने देश को दिया है।. आपने बहुत किया।. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर। और क्योंकि. हमारी फैमिली कभी मीडिया में ऐसे आई नहीं.
कभी और [नाक से की जाने वाली आवाज़] 2013. में बस एपिक चैनल का मैंने आपको बताया और. यह बहुत सोच समझ के जब हमने आपके जो. पडकास्ट [नाक से की जाने वाली आवाज़] आपने. क्योंकि हमारे बिना अप्रोच के भी आपने. उनके ऊपर दो पडकास्ट ऑलरेडी आपने अपना. प्रोग्राम दो किए हैं उनके ऊपर तो आपका यह. उनके प्रति जो सम्मान रहा है जो प्रेम भी. रहा है सम्मान भी रहा है उनके प्रति इसको. देख के हमने यह डिसाइड किया था कि हमको हम. आपको जरूर अप्रोच करेंगे और एक सच जो आना.
ही चाहिए वक्त से और बायोपिक तो आएगी उनकी. अब आगे लेकिन उससे पहले पडकास्ट में काफी. कुछ हम लोग क्लियर कर दें कि उनकी असल. कहानी है क्या? मुझे उम्मीद है कि. बहुत-बहुत आशीर्वाद देती हूं मैं आपको।. बहुत-बहुत आशीर्वाद।. मैं आपसे मिलना भी चाहती थी, आपको देखना. भी चाहती थी।. मुझे उम्मीद है कि नई पीढ़ी में यह कहानी. फिल्म से पहले हमारे जरिए भी जाएगी और. बाकी बड़े पर्दे में जब वो गहराई से आएगी. एक-एक बारीकियां उसमें आएंगी.
जी. तो शायद उसका असर और व्यापक तौर पर होगा।. जी जी बहुत कुछ कहने का सर उनकी कहानी में. मैंने आपको बताया इंटरनेट पे जितना है वो. 10 से 15% भी नहीं है। बहुत कुछ है उनकी. कहानी में कहने को। एक पर्सनल लाइफ है।. उनकी एक प्रोफेशनल लाइफ है। एक अचीवमेंट्स. हैं उनके काफी कुछ है उसमें।. उम्मीद करते हैं कि सम्मान जिसके वो हकदार. हैं, जिसका परिवार हकदार है, वो आपको मिले और सही जगह तक ये आवाज. पहुंचे। उस पे थोड़ा सा अंश हमारा भी हो।.
मुझे उम्मीद है कि शायद सरकार भी इस बारे. में सोचे कि [नाक से की जाने वाली आवाज़]. जासूसों के दुनिया के नियम कायदों के बीच. में भी क्या हम कर सकते हैं जो इतने बड़े. बलिदान को एक सम्मान हो।. जी. प्रणाम।.
