BJP’s Cockroach Aryan Maan? | DUSU President | Student Union Election | CJP Protest | JNU vs DU
क्या जलवा होता है दिल्ली विश्वविद्यालय. छात्र संघ के अध्यक्ष का? जो मन चाहो वो करा सकते हो। मुझे लड़का. उठवा लो।. नहीं नहीं। आप यूनिवर्सिटी के दूसरे वाइस. चांसलर होते हैं। और वो ताकत ऐसी होती है. कि जो यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर अपॉइंट. हो के आता है ना उसको भी आप हिला सकते हो।. बच्चों के साथ गलत हो। आपने बोला एक बार. भी।. अरे क्यों नहीं आएंगे? वो भीड़ [संगीत]. में जब उसका सर पकड़ते हो। जब आप किसी भी. कॉलेज में जाते हो तो जो प्रिंसिपल होता. है उसकी कुर्सी हिलने को लग जाती है।. टीचरों की सीट कांपने लगती है।.
ये नहीं सिखाया जाता. हजारों बच्चे आपके साथ घूम रहे होते हैं।. पूरी दिक्कतें बताते हैं कॉलेज की। हम. प्रिंसिपल को बुलाते हैं आओ साथ चलो।. दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में इतनी. गाड़ी, ट्रैक्टर, जेसीबी ये सब कहां से. तंत्र आता है? तो पढ़ने लिखने वाले छात्र. हैं। इतना पैसा कहां से छाप लेते हैं सब? ये कोई इतनी बड़ी बात नहीं है। अगर ये. गाड़ी घोड़े का चुनाव होता तो मैं 100. हेलीकॉप्टर से प्रचार करता हुआ दिखता. आपको। देश का लड़का अगर यह सवाल पूछे आपसे. कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष होने के. बावजूद भी जंतरमंतर पर जो प्रोटेस्ट था. वहां पर आप लोग क्यों नहीं गए? पीसफुल. प्रोटेस्ट के नाम पर पत्थरबाजी हो रही है।.
पीसफुल प्रोटेस्ट के नाम पर गाली गलौज हो. रही है। [संगीत]. क्या? पीसफुल प्रोटेस्ट के नाम पे पेपरों पे. दीवारों पे गाली लिखी जा रही है। इसलिए. हमारा स्टैंड था कि हम वहां पे नहीं. जाएंगे।. तो फिर धर्मेंद्र इस्तीफा क्यों दिया? आप लोग बीजेपी के खिलाफ प्रोटेस्ट किए? हमने सबसे पहला प्रोटेस्ट करा था पूरे. इंडिया में एनटीए के दफ्तर के बाहर।. उन्होंने उसके खिलाफ प्रोटेस्ट किया और. उनको भी लाठी पड़ी लाठी चार्ज नहीं करना. चाहिए था लाठी पुलिस की. कई बार मेरे साथ वालों के इतने फोन टूटे.
तो सर पुलिस कहां मारती है लाठी. कमर में और पैरों में. जेएनयू वाले जब प्रोटेस्ट करते हैं. हम लेते रहेंगे. मेरा नाम उमर खालिद जरूर है लेकिन आई एम. नॉट अ टेरिटरी. बीजेपी की विचारधारा वाले अक्सर ये कहते. हैं देश के टैक्स से पढ़ रहे हो. ₹10 महीने की फीस में वो लोग वहां पे. हॉस्टल में रहते हैं लोगों को मिसगाइड. करते हो देशद्रोही काम करते हो? अगर आप नेशनलिस्ट सोच रखते हो तो आप 100%. स्टूडेंट पॉलिटिक्स [संगीत] में उतरो।. जेएनयू इज वन ऑफ द बेस्ट इंटेलेक्चुअल. यूनिवर्सिटी इन इंडिया बट कुछ ऐसे. इकोसिस्टम [संगीत].
के लोग हैं जो उस सिस्टम को खराब करना. चाहते हैं।. जेएनयू का प्रेसिडेंट ज्यादा चर्चा में. क्यों रहता है? जबकि भीड़ जो है वो आपके. पास ज्यादा होती है दिल्ली यूनिवर्सिटी. वालों के पास। ऐसा नहीं है। आप आज के समय. जे एनयू का अध्यक्ष कौन है और मेरे को. खड़ा करो तो आपको पता चल जाएगा किसकी. पॉपुलैरिटी देश भर में ज्यादा है।. जामिया यूनिवर्सिटी में साल 2006 में. आखिरी छात्र संघ चुनाव हुआ। उसके बाद आज. तक नहीं हुआ।. ये ना इंसाफी नहीं जामिया वालों के साथ।. मेरा तो यही मानना है कि देश भर में जितनी. भी यूनिवर्सिटी है, वहां पे चुनाव होने. चाहिए।. आजकल एक मैसेज चल रहा है कि जेएनयू पर भी. बीजेपी कब्जा करना चाह रही है। आप मानते.
हो ऐसा? पहले जेएनयू में लेफ्ट के जितने. संगठन होते थे वह किसी को भी चुनाव लड़ा. दे तो वह एक तरफा जीत के निकल जाता था। आज. का समय ऐसा है जितने भी सारे लेफ्ट के. संगठन है वो विद्यार्थी परिषद के सामने. एकजुट होकर लड़ते हैं।. क्या-क्या डिमांड आती है अनहोनी कि हमको. यह दे दो हम ये वोट दे देंगे तुमको।. मेरा एक साथी है। उसने मेरे को बोला कि. भैया मैं आपके शक्ति प्रदर्शन में अकेला. 800 बच्चे लेके आ सकता हूं। उसने बोला. भैया मैं ले आया तो मेरे को क्या दोगे? मतलब तू अपने मुंह से तो बोल तेरे को क्या. चाहिए? कह रहा भैया मेरे को थाईलैंड. [संगीत] की ट्रिप चाहिए। जब भेजेगा उनको.
मनोज तिवारी जी थाईलैंड में राम कथा कहते. [हंसी] हैं. बहुत [संगीत] नजदीक है एक जगह थाईलैंड राम. कथा के लिए गए. मैडम को पता है थाईलैंड जाते रहते हैं. [हंसी]. बीजेपी वाला कितना इंटरफेयर करता है. एबीवीपी के चुनाव में. जितने भी हमारे विचारधारा के संगठन है वो. सब हमारी मदद करते हैं. आप लोग बीजेपी वाले ही हो. नहीं जी बिल्कुल भी नहीं. एबीवीपी और बीजेपी में क्या अंतर है मोदी. जी का वाला वीडियो देखा आपने. फ्रेंड्स. थैंक यू फ्रेंड्स. फ्रेंड्स. हेलो फ्रेंड्स. सच बताऊं तो मेरे को घूस बम्स आ गए थे. मतलब मतलब मेरे को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि.
इस तरीके की भी [संगीत] चीज हो सकती है कि. हमारे देश के आदरणीय प्रधानमंत्री जजी से. भी कनेक्ट कर रहे हैं।. इस बार बहुत गाली खाई है मोदी जी ने।. कुछ शरारती बच्चों ने. भद्दी भद्दी गालियां बोली।. उस प्रोटेस्ट ने जजी ने मोदी जी को फोर्स. किया कि वो लाइमलाइट कैमरे से आगे निकल. कर। वो छात्रों से सीधे बात करें।. संघर्षों के साए में इतिहास हमारा पलता. है। जिस और जवानी चलती है उस और जमाना. चलता है।. किसी को डेट कर रहे हो या डर लगता है खाप. पंचायत से? नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं है।. डेट नहीं करता। मैं लड़कियों को अपना फैन.
बनाता हूं।. सबसे वियर्ड रिक्वेस्ट क्या आई? कम से कम 30 से 40 बच्चे आए। उन्होंने आपस. में WhatsApp ग्रुप बना रखा था। तो कहते. भैया हम पेपर में फेल हो रखे हैं। हमको. पेपर में पास करा दो। [हंसी]. एक कुर्सी है दिल्ली में।. कुर्सी जिस पर बैठने वाले को ना गाड़ी. मिलती है, ना बंगला मिलता है, ना पद मिलता.
है और ना कोई वेतन मिलता है।. लेकिन फिर भी उस कुर्सी के लिए हर साल न. जाने क्या-क्या होता है। और यह मैं नहीं. कह रहा हूं। यह दिल्ली हाई कोर्ट को कहना. पड़ा कि भैया लग्जरी गाड़ियां बंद करो, ट्रैक्टर बंद करो, जेसी बंद करो। इनफैक्ट. एक साल तो नतीजों पर रोक लगा दी गई थी कि. जब तक दीवारों से पोस्टर पेंट सफाओगे. नहीं। और यह वो कुर्सी है जहां पर अरुण. जेटली बैठ चुके हैं। अजय माखन बैठे हैं।. अभी दिल्ली के सीएम जो हैं यह भी वहां. बैठकर आई हैं। विपक्ष के नेता अलका लांबा.
भी वहीं से निकल कर आई थी। यह कहते हैं कि. 7 लाख छात्र हैं। 91 कॉलेज है और दुनिया. का सबसे बड़ा छात्र संघ है। और आज उस. कुर्सी पर एक लड़का बैठा है जिसकी उम्र. इतनी भी नहीं है कि वह देश में सांसद का. चुनाव लड़ सके। लेकिन 91 लाख याद करें 7. लाख लड़के उसके नीचे हैं। बहादुरगढ़ के. गांव से आने वाला दादा पहलवान खाप के. मुखिया घर में कुश्ती लड़ते लड़का फुटबॉल. चुना एक बार पर्चा भरा टिकट नहीं मिला नाम. वापस लिया और अगली बार बंपर जीत दिल्ली. विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष आर्यन.
मान. जी स्वागत है. नमस्ते राम राम. इतना कहानी ठीक था. हां. लंबा चौड़ा इंट्रोडक्शन. बहुत अच्छा है. इतनी तो आपकी उम्र नहीं जितना बड़ा. इंट्रोडक्शन हो गया आपका [हंसी]. क्या जलवा होता है दिल्ली विश्वविद्यालय. छात्र संघ के अध्यक्ष का? यह एक फेस्टिवल. की तरह है। हर साल लाखों लोग स्टूडेंट्स. इसमें इंडल्ज होते हैं। और सबसे अच्छी बात. इसमें यह है कि स्टूडेंट्स आपको दिल से.
चुनते हैं। इसमें ऐसा नहीं है कि हम किसी. नेता को वोट देने जा रहे हैं। हम किसी को. वोट देने जा रहे हैं। उसने हमारे पास आके. कैंपेन करा 1% भी नहीं। इसमें स्पष्ट एक. ही बात है कि स्टूडेंट यह सोचता है कि. मेरा बड़ा भाई चुनाव लड़ रहा है। बड़े भाई. के साथ-साथ वो यह भी सोचता है कि मैं ऐसे. इंसान को आगे वोट देने जा रहा हूं जो मेरे. को रिप्रेजेंट करेगा। मेरे को कोई भी. दिक्कत आएगी तो मेरा भाई वहां खड़ा रहेगा।. जैसे युवाओं में होता है कि किसी का भी.
किसी मंत्री से लिंक हो तो सीधा कहता है. अरे भाई मैं तेरा काम करके दिखाता हूं। तो. यहां पर वो डबल है कि कोई भी स्टूडेंट आता. है मेरे से मिल के जाता है तो कहता है कि. रुक मैं तेरा काम कराता हूं।. एक दिन में कितनी मिस कॉल आती है? 1 दिन में इतनी मिस कॉल आती है कि उतने. फोन मैं 10 दिन में भी नहीं उठा सकता अगर. किसी से एक मिनट भी बात करूं तो।. 1 दिन में? हां।. अच्छा हमने ये बड़ा इंटरेस्टिंग पढ़ा. क्योंकि आमतौर पर जब कोई पद संभालते हैं.
आप तो आपको पैसा रुतबा गाड़ी मिलता है।. जी. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का जो. अध्यक्ष है क्या उसे कोई गाड़ी मिली? बंगला मिला, पद मिला, वेतन मिला? कुछ भी नहीं मिला।. फिर इतना जलवा इतना मारपिटाई क्यों है? [गहरी सांस लेने की आवाज़]. विश्व का सबसे बड़ा छात्र संघ का चुनाव. है। और इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि हमको. कुछ नहीं मिलता। बस एक ही चीज मिलती है।. स्टूडेंटों का प्यार, छात्रों का प्यार और. साथ ही साथ हम देश भर में नाम हम दिल्ली.
यूनिवर्सिटी का छात्र संघ का चुनाव. अगर आप किसी भी आम स्टूडेंट से हो किसी भी. यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हो मतलब मैं तो. कह रहा हूं किसी भी यूनिवर्सिटी देश भर. में कोई भी यूनिवर्सिटी हो उसको जरूर पता. होगा कि हां दिल्ली यूनिवर्सिटी में चुनाव. हो रहा है और वहां पर अब की बार अध्यक्ष. की दावेदारी इसने ठोकी और यह चुनाव जीत के. आया। इतना पॉपुलर चुनाव है और साथ ही साथ. जैसे आपने कहा शुभांकर जी कि हमको क्या. मिलता है? हमको कुछ भी नहीं मिलता। पर.
मैंने अबकी बार एक डिमांड रखी थी कि मेरे. को एक हॉस्टल में कमरा चाहिए जहां पे मैं. रह सकूं।. चुनाव खत्म होने के बाद. जी. जब आपके पीरियड खत्म हो जाए।. नहीं नहीं नहीं जैसे ही मैं चुनाव जी।. अच्छा अध्यक्ष बनने के बाद. अध्यक्ष बनने के बाद सिर्फ मैंने मेरी एक. ही मांग थी कि मेरे को एक हॉस्टल में कमरा. चाहिए। अब मैं एक हॉस्टल वाली लाइफ जीना. चाहता हूं और यूनिवर्सिटी के अंदर ही रहना. चाहता हूं।. मिला कमरा? बिल्कुल मिला।. क्या आनंद है हॉस्टल में रह के? बहुत ही अच्छा आनंद है। एक छोटा सा कमरा.
है। उसके अंदर एक बेड है। अटैच टॉयलेट. बाथरूम है। और गेट खोलो तो सामने बड़ा सा. हॉस्टल का गार्डन आ जाता है। मेस वाला आता. है कि चाय बन गई। चाय बन गई। ब्रेकफास्ट. लग गया। आ जाओ आ जाओ आ जाओ। सुबह सारे. सीनियर्स मोस्टली हॉस्टल में तो सीनियर्स. ही रहते हैं। तो सारे पीएचडी स्कॉलर जितने. भी पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं वो सब मेरे. को मेस में मिलते हैं। उनके साथ वार्तालाप. होती है। और सबसे अच्छी बात है. एक्सपीरियंस शेयर होता है। वो लोगों को भी.
खुशी होती है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का. अध्यक्ष आज हमारे साथ चाय पी रहा है।. हमारे साथ बैठा है। अब तो मेरे लिए वहां. रहना बहुत आम हो गया है।. दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष की भी. रैगिंग होती है।. [हंसी]. चुनाव लड़ने से पहले. तो मैंने सुना है कईयों के साथ हुई है बट. आज तक मेरे साथ तो नहीं हुई. और चुनाव जीतने के बाद. चुनाव जीतने के बाद तो बिल्कुल ही नहीं. होती. डरते हैं लोग कॉलेज में फिर. नहीं डरते नहीं है वो तो हर इंसान का एक. तरीका होता है वो अपने आप को किस तरीके से. रिप्रेजेंट कर रहा है बट मेरा इस तरीके का.
रिप्रेजेंटेशन नहीं है मेरा तो ये है कि. स्टूडेंट्स का काम होना चाहिए स्टूडेंट्स. अपना रेगुलर पढ़ाई करते रहे पढ़ाई के. साथ-साथ खेल में भी इंटरेस्ट रखें और अबकी. बार यूनिवर्सिटी में मैंने पहली बार. स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप भी दी। समर. इंटर्नशिप जिसमें कि स्टूडेंट कई बार. परेशान हो जाता। नौकरी नहीं मिली। घर वाले. परेशान करते थे। कॉलेज में भी प्लेसमेंट. सेल लाते थे। पर वो स्टूडेंट्स को सेलेक्ट. नहीं करते थे। मिनिमम टू मिनिमम चारप. स्टूडेंटों को सेलेक्ट करा। बस दैट्स इनफ।. तो मैंने अब की बार कम से कम 450 500 के. करीब बच्चों को इंटर्नशिप दी कि आओ डूसू.
के साथ काम करो। मैं आपके साथ काम करूंगा।. आप मेरे साथ काम करो कि डसू किस तरीके से. काम करता है। किस-किस कॉलेज में क्या. समस्या है, वह मेरे पास लेके आओ। एक. रिसर्च टीम बनाई उसमें एक पॉलिसी एडवाइज़री. के लिए टीम बनाई। एआई टेक्नोलॉजी आज का. जमाना है उसके लिए एक टीम बनाई। साथ ही. साथ सोशल मीडिया एंड आईटी के लिए हमने. स्टूडेंट्स को काफी काफी जगह भेजा।. हम. जहां पे वो एक्सपीरियंस लेके आए।. हम आम चुनावों की जब बात करते हैं देश में. जो होते हैं। मैंने बहुत सारे चुनाव देश. कवर किए हैं।.
हम. तो एक रात पहले का माहौल बड़ा तगड़ा रहता. है।. जी। कहीं लिटिल लिटिल बिक रहा होता है।. कहीं गांधी जी चल रहे होते हैं। धीरे छुपे. दबे उसमें देश का चुनाव में होता है।. छात्र संघ के चुनाव के एक रात पहले क्या. सीन होता है? और ये असली वाला बताना है।. बिल्कुल सच्चाई बताऊंगा। छात्र संघ के. चुनाव से पहले कॉलेजों में और पीजीस में, हॉस्टल्स में चॉकलेट बट रही होती है।. चॉकलेट. जो आप लड़कियों को बांट रहे थे।. नहीं. जिसप लड़की ने कहा भी था।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] ऐसा. नहीं है। तो उसमें तो क्या था कि सब लोग.
पूरी रात एक्टिव होते हैं। जितने भी आपकी. टीम होती है, भाई बंधु होते हैं, वह सब. आर्यन मान बन जाते हैं। सब डसू अध्यक्ष. बनना चाहते हैं।. तो सब अपनी तरफ से पूरा एफर्ट लगाते हैं. कि बच्चों को चॉकलेट जो भी वो मांगे चाहे. वो डोमिनोज का पिज़्ज़ा मांगे, बर्गर मांगे।. एक आम छात्र की यही नीड होती है. कि रात को अच्छे से खाना मिल जाए। तो. तमाम जितनी भी. जो बढ़िया खिलाते उसको वोट। नहीं ऐसा नहीं. है। मतलब उस समय बच्चों की डिमांड इतनी. ज्यादा हो जाती है कि हमारे को फुलफिल. करनी पड़ती है।. जैसे क्या-क्या डिमांड आती है अनहोनी?
अनहोनी डिमांड तो. कि हमको ये दे दो हम ये वोट दे देंगे. तुमको।. मेरा एक साथी है और वो जाकिर हुसैन कॉलेज. में पढ़ता है।. हम. उसने मेरे को बोला कि भैया मैं आपकी आईडी. कार्ड होल्डर मीटिंग होती है कि मतलब आपको. अपनी ताकत दिखानी होती है कि आपके पास. यूनिवर्सिटी के कितने स्टूडेंट्स हैं। आप. कितने स्टूडेंट्स इकट्ठा कर सकते हो। तो. उसने मेरे को बोला कि भैया मैं आपके शक्ति. प्रदर्शन में अकेला 800 बच्चे ले आ सकता. हूं। तो मैंने बोला भाई मेरे को तो नहीं.
लगता तू ऐसा कुछ करेगा। प्लीज चला जा और. मैं भाषण की तैयारी कर रहा था। मेरे को कल. क्या भाषण देना है। मैंने तू प्लीज जा यार. अभी ऐसी बातें मत कर। मूड लाइट नहीं है।. अभी बहुत सीरियस मूड चल रहा है। तो उसने. बोला भैया मैं ले आया तो मेरे को क्या. दोगे? मतलब तू अपने मुंह से तो बोल तेरे. को क्या चाहिए? कह रहा भैया मेरे को. थाईलैंड की ट्रिप चाहिए।. तो वो अगले दिन 800 बच्चे लेके भी आया।. ऐसा नहीं है उसने अपना वादा पूरा नहीं. करा। उसने अपना वादा भी पूरा करा। वो लेके. भी आया। अभी उसकी ट्रिप पेंडिंग है। वो कह. रहा है कि जब. भेजिएगा उनको मनोज तिवारी जी थाईलैंड में.
राम कथा करते हैं। [हंसी]. अरे भाई राम कथा भी होती है थाईलैंड।. बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। तो मैं उसको. हमारे मनोज तिवारी बताए थे।. अच्छा. कि वो थाईलैंड जाते हैं अक्सर।. हां।. राम कथा करने के लिए।. समझ गया जी। मनोज तिवारी जी हमारे चुनाव. में भी बहुत एक्टिव रहते हैं. और प्रचार करने आते हैं। हमारे यहां. पूर्वांचल मिलन समारोह होता है और. पूर्वांचल ने मेरे को बहुत आशीर्वाद दिया. है। मेरी बहुत मदद करी है और इसलिए मैं एक. तरफ़ा वोटों से जीत के आया।. तो ये 91 कॉलेज में खुद जाना होता है.
मांगने के लिए वोट? 91 कॉलेज में बहुत ज्यादा होगा।. नहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी में 91 कॉलेजेस. हैं। बट वोटिंग का अधिकार सिर्फ 52 कॉलेज. को है।. ओके। तो जैसे आपने सुना होगा तमाम. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, बीएचयू, जेएनयू वो. सब पंजाब यूनिवर्सिटी वो सब क्लोज्ड कैंपस. है। पर दिल्ली यूनिवर्सिटी का हर एक कॉलेज. अलग-अलग दिल्ली के कोने में अगर एक कॉलेज. पीजीवी कॉलेज अगर आपका लाजपत नगर में है. तो दूसरा कॉलेज अलीपुर है। तो आने जाने.
में ही डेढ़ से 2 घंटे लग जाते हैं। और. अगर जाम लग जाए थोड़ा तो ढाई 3 घंटे कहीं. नहीं गए। तो ऐसे-से करके आपको 52 कॉलेज. कवर करने होते हैं। टिकट मिलने के बाद. आपके पास मोटा-मोटा चार से पांच दिन होते. हैं। उसके अंदर आपको 52 कॉलेज कवर करने. होते हैं।. हम. तो एक दिन में आप मोटा-मोटा 10 कॉलेज कवर. कर रहे हो।. मैं नियम कायदा कानून पढ़ रहा था कि. दिल्ली यूनिवर्सिटी में जब छात्र संघ. चुनाव होता है. हम. तो लिंगदे कमेटी कहती है ₹5,000 खर्चा. करो।. बिल्कुल।. अब 5000 में तो [हंसी] दिन भर कैब का.
भाड़ा नहीं निकलेगा। मेरे को. और आप लोग तो 1000 गाड़ी ले घूमते हो।. जलवा एकदम मतलब पों प. नहीं जी ऐसा वो तो भाईचारे का बाहुबल है. हां. कि जो भाई अपने भाई को आगे बढ़ाना चाहते. हैं तो वो सब गाड़ी घोड़ा सब कुछ लेके आते. हैं।. फिर भी पांच जिस यूनिवर्सिटी चुनाव में. ₹5000 को दावा किया जाता है कि 5000 खर्चा. होना चाहिए।. वहां कितना करोड़ खर्चा होता है? यह तो मैं आपको ऑन रिकॉर्ड तो कैसे बताऊं.
मतलब मतलब मेरे को भी इस चीज के बारे में. नॉलेज नहीं है हम. क्योंकि इसमें क्या होता है कि जब मेरे को. टिकट मिली मेरी टिकट मिलने के बाद मेरे को. नहीं पता किस कॉलेज में क्या हो रहा है. किस कॉलेज में क्या नहीं हो रहा बट जिस भी. कॉलेज में मैं जाता था जिस भी कॉलेज की. मैं रिपोर्ट लेता था वहां मैं नंबर वन. होता था. हम. वहां पे मेरे जाने से पहले सारी तैयारियां. हो चुकी होती थी मेरे मेरा मेरा हर चीज. प्रीप्लांड होता था वहां जाने से पहले और. मतलब ₹5,000 तो बहुत ही कम है और.
ये आप लोग फिर करते क्यों नहीं क्योंकि. नहीं मैंने अबकी बार इसके लिए जो डसू के. मैंने इंटर्न्स अबकी बार अपने साथ काम. करने में लगाए हैं उनको मैंने बोला है कि. इस रोल को चेंज करो क्योंकि आज के जमाने. के हिसाब से ₹5000 तो सिर्फ आपको एक कॉलेज. से दूसरे कॉलेज में ट्रैवल करने में ही लग. जाएंगे।. आप बॉन्ड ₹1 लाख भरवाते हो. हां जी। और कहते हो 5000 खर्चा करो और. खर्चा सियार में हो रहा है।. नहीं नहीं वो तो उससे उससे तो पिज़्ज़ा खाते. होंगे सब।. नहीं वो तो विद्यार्थी परिषद ने इसके ऊपर. आंदोलन रखा था और वो जो ₹1 लाख का बॉन्ड.
है उसको रद्द करा दिया था। ऐसा कोई भी बात. नहीं है कि आपको ₹1 लाख का बॉन्ड बनना है।. वो रद्द हो चुका है।. ये तय कौन करता है कि एबीवीपी का तरफ से. यह चुनाव लड़ेगा या एनएसयूआई से यह. लड़ेगा। बीजेपी तय करती है।. नहीं जी बिल्कुल भी 1% नहीं।. बीजेपी नहीं करती।. नहीं नहीं।. तो कैसे तय होता है? तो विद्यार्थी परिषद. का विद्यार्थी परिषद के भी जितने भी. दायित्ववान कार्यकर्ता हैं वो सब तय करते. हैं। अ दूसरी पार्टियों का स्ट्रक्चर मेरे. को नहीं पता। यहां पे विद्यार्थी परिषद. में कोई पद नहीं होता। सिर्फ आपको दायित्व. दिया जाता है। दायित्ववान जितने भी हमारे.
सीनियर कार्यकर्ता हैं वो सब डिसाइड करते. हैं कि किसको टिकट देनी है।. बीजेपी वाला कितना इंटरफेयर करता है. एबीवीपी के चुनाव में? वह तो विचारधारा है। अगर हमारी हम संघ के. एक शाखा है। तो हमारी विचारधारा के ऊपर. होता है और जितने भी हमारे विचारधारा के. संगठन हैं वह सब हमारी मदद करते हैं। अपने. लेवल से जो भी जैसे कर सकता है।. आप लोग बीजेपी वाले ही हो।. नहीं जी बिल्कुल भी नहीं। हम तो बीजेपी से. अलग हैं। हमने तो बीजेपी के खिलाफ आंदोलन. भी करे कितने? लेकिन एबीपी वाला जीत के तो बीजेपी में.
जाता है ना फिर वहां से।. वो तो आईडियोलॉजी मैंने आपको वही. उदाहरण है जो कांग्रेस में गया हो। बड़ा. तुरंत जाते ही निकलते।. अ बिल्कुल। एक. दो 1998 में या 1997 के आसपास डूसू के. अध्यक्ष बने थे। हम. वह आज के समय आम आदमी पार्टी में हैं।. आज के समय वह तो बाद में वहां मौका. उसके बाद ही मतलब थोड़े समय बाद ही. उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन कर ली थी।. अच्छा दिल्ली यूनिवर्सिटी में कई सारे. छात्र संघ की विचारधारा वाली पार्टियां. हैं।. हम. एबीवीपी ही क्यों जॉइ किया?
काफी लंबी स्टोरी है। बट मैं आपको कम. शब्दों में बताता हूं।. मैं अपनी माता के साथ जब पार्क में जाता. था तो मैं देखता था कि पार्क के एक तरफ तो. बच्चे खेल रहे होते थे। एक तरफ कुछ लोग. भगवा रंग के झंडे के नीचे प्रार्थना कर. रहे होते थे। तो मैंने अपनी मम्मी से पूछा. कि मम्मा ये क्या है? ये लोग ऐसा क्यों कर. रहे हैं? क्योंकि हमारे स्कूल में भी सुबह. प्रेयर्स होती थी। तो उस माध्यम से मैंने. पूछा कि ये लोग अभी ऐसा क्यों कर रहे हैं?
तो मम्मा ने मेरे को बताया कि यह. आरएसएस है और यह संघ की शाखा चल रही है।. जितनी भी नॉलेज मम्मी पापा को थी उन्होंने. मेरे को बताई। तो वहां से मेरा थोड़ा संघ. से कनेक्ट हुआ। मैं संघ से थोड़ा जुड़ा।. फिर जब मेरा दिल्ली यूनिवर्सिटी में. एडमिशन हुआ तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के. एडमिशन के समय जैसे मैंने आपको बताया कि. जब मैं कॉलेज के अंदर घुस रहा था तो मेरा. एक विद्यार्थी परिषद ने वेलकम फ्रेश का. मेरे को तिलक लगाया। मेरे हाथ में कॉलेज.
का सिलेबस वगैरह सारी चीजें जो बेसिक. इंफॉर्मेशन मेरे को चाहिए थी मेरे को दी. और उसके बाद क्या होता है ना कि एबीवीपी. में जुड़ने के लिए आपको एक प्रॉपर मंच. नहीं चाहिए। जैसे बड़ी-बड़ी पॉलिटिकल. पार्टीज में क्या होता है और अदर स्टूडेंट. ऑर्गेनाइजेशन में क्या होता है कि मंच. लगाया जाता है, भीड़ बुलाई जाती है। जब. आपका. जब आपका उस पार्टी से जुड़ना होता है। बट. विद्यार्थी परिषद में क्या है कि अगर आपका.
किसी भी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता. से नंबर एक्सचेंज हो गया या आप किसी. आंदोलन में चले गए, आंदोलन के साथ-साथ आप. किसी कार्यक्रम में चले गए तो आपका. विद्यार्थी परिसर से जुड़ना हो जाता है।. तो जैसे मेरे विद्यार्थी परिषद में मेरे. को जोड़ा था हमारे प्रांत संगठन मंत्री थे. राम कुमार गुप्ता जी दिल्ली में एक बड़ा. प्रोटेस्ट था तो उस प्रोटेस्ट के लिए वह. हमारे कॉलेज में आए थे तो जो हमारे कॉलेज. के सीनियर थे वह मेरे को साथ ले गए थे कि.
आजा तेरे को एक. सेशन अटेंड करना है मेरे साथ वो अटेंड कर. एक बार सेशन और कुछ चीजों के बारे में. जानकारी ले तो वहां से उन्होंने मेरा नंबर. लिया मैंने उनका नंबर लिया तो वहां से. मेरा मेरा विद्यार्थी परिषद से जुड़ना. हुआ। फिर मेरे को पता चला कि संघ अगर बरगद. का पेड़ है। बरगद के पेड़ की एक टहनी. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है कि वो. संघ की ही एक शाखा है और मेरा वहां से. विद्यार्थी परिषद से जुड़ना हुआ। फिर मेरे.
को समझ आया कि हमारे संघ की विचारधारा का. एक स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन अखिल भारतीय. विद्यार्थी परिषद है।. एबीवीपी और बीजेपी में क्या अंतर है? एवीपी. और कैसे अलग है? हम एबीवीपी एक स्टूडेंट. ऑर्गेनाइजेशन है।. हम. हम साल में 365 दिन 24 घंटे छात्र हितों. के लिए काम करते हैं। साथ ही साथ समाज हित. के लिए भी काम करती है।. हम. और यहां पे कोई ऐसा नहीं है कि अगर इस. स्टेट में इस कॉलेज में किसी भी. यूनिवर्सिटी में इलेक्शन नहीं हो रहे तो.
हम वहां एक्टिव नहीं है। मैं आपको दावे से. कह सकता हूं कि अगर 28 के 28 राज्यों में. हमारा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की हर. एक स्टेट में एक्टिव यूनिट मिलेगी और मैं. आप बेशक सर्वे भी करा रहे हैं ना। मैं. आपको खुले दिल से कह रहा हूं कि आप सर्वे. भी कराओ और ऐसा कोई दूसरा छात्र संगठन आप. मेरे को दिखा दो कि जहां पर जिस कॉलेज में. चुनाव नहीं हो रहे वो वहां पे भी एक्टिव. है।.
सत्ता है, मशीनरी है, ताकत चल रही है।. नहीं नहीं जी ऐसा नहीं है।. कितनी उम्र है आपकी? मैं अभी सिर्फ 23 इयर्स का हूं।. 23 ईयर की हूं।. 204 में आपका टिकट कटा था।. जी। तो जिंदगी में पहले रिश्ते में दिल. में कटा था या पहले टिकट कटा था? 2024 का पल मतलब मेरे लिए बहुत ही एक. इमोशनल ईयर था वो. हम. और. वो एक ऐसा समय था कि. मैंने साल भर बहुत मेहनत करी थी। मेरे पास.
कई हजार मात्रा में स्टूडेंट्स मेरे. सपोर्ट में भी थे। और मैं आपको एक बड़ी. अच्छी बात बताता हूं कि. मेरा शक्ति मेरे ऊपर एक कोर्ट केस चल रहा. था। एक मुकदमा चल रहा था।. कॉलेज के किसी झगड़े का मेरे ऊपर एक. मुकदमा चल रहा था। कॉलेज ने मेरे को. सस्पेंड कर दिया था। तो उसके खिलाफ मैं. कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा था कि वो. सस्पेंशन रद्द करा जाए क्योंकि वो. सस्पेंशन गलत था। तो.
वो पल ऐसा था कि मेरा शक्ति प्रदर्शन था।. हजारों मात्रा में मैं आपको बता नहीं. सकता। रिकॉर्ड था मतलब लोग कहते थे पहले. कि इसने डूसू लड़ा तो इसके शक्ति प्रदर्शन. में इतने लोग आए थे। इसने डसू लड़ा तो. इसके शक्ति प्रदर्शन में इतने लोग आए थे।. पर मैंने एक मन में दावा कर लिया था आर्यन. कुछ भी हो जाए तेरे को ये जितने रिकॉर्ड. होल्डर है ना इनका रिकॉर्ड तोड़ना है।. मैंने हजारों मतलब मेरा मैनेजमेंट इतना. अच्छा था। मैं बहुत माइक्रो मैनेजमेंट रूप.
से काम करता हूं और मैंने हजारों की. संख्या में स्टूडेंट्स को बुलाया। मेरे. शक्ति प्रदर्शन में आए।. आप विश्वास नहीं करोगे कि ऐसा आपने कभी. सुना भी नहीं होगा कि मैं मंच पर बैठा. हूं।. मेरा भाषण अगला ही भाषण मेरा है। उससे. पहले मैं फोन पर बात कर रहा हूं। कोर्ट. केस में क्या रहा? उस टाइम मेरी तारीख भी. चल रही थी कोर्ट में। जज मेरा केस सुन रहा. था और. मेरा दिल सहमा हुआ था कि क्या नतीजा आएगा।. पर जिस हिसाब से मेरे आगे हजारों की.
हजारों छात्र खड़े थे। मैंने फोन काटा. अपना भाषण दिया और वो भाषण ऐसा था। आज भी. वह सोशल मीडिया पे इतना वायरल है। आज भी. लोग मेरे को भेजते हैं कि भैया यह जो साल. था ना ऐसा साल कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी में. दोबारा नहीं आ सकता। और फिर थोड़ी देर बाद. मेरे को पता चला कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का. प्रशासन इतना ढीला था कि वो एफिडेविट भी. फाइल नहीं कर पाया था। तो. इस चक्कर में मैं चुनाव का नॉमिनेशन नहीं.
भर पाया था। तो जिंदगी में जब आप जजी होते. हो. तो हार्ट ब्रेक का जरा हार्ट ब्रेक का पल. जो होता है वो ज्यादा दुखद होता है या. यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़ने के एंड मौके. पर टिकट कट जाए तो वो दुखद होता है. बिल्कुल चुनाव लड़ने का जो दुख है ना. लड़ने का जो दुख है. वो दिल टूटने के दुख से ज्यादा बड़ा है. बहुत बड़ा दुख है वो क्योंकि मैं 2021 से. संघर्ष कर रहा था. हम. और उसके बाद.
रिजल्ट भी तीन महीने बाद आया. जब कोर्ट में. केस चल रहा था क्योंकि रिजल्ट तीन महीने. बाद आया क्योंकि प्रचार इतना ज्यादा कर. दिया था. हम. कि कोर्ट केस फाइल हो गया था सारी. कैंडिडेट्स के ऊपर तो रिजल्ट भी नवंबर में. आया तो जब कोर्ट में केस भी चल रहा था तो. उसमें सारी वीडियोस मेरी ही थी कि मेरे. प्रचार की वीडियोस थी कि कोर्ट भी पूछता. है यह है कौन मतलब जज ने पूछा यह है कौन. और यह यहां पर क्या मौजूद.
तो सामने से एक लॉयर ने जवाब दिया यह अब. की बार का कैंडिडेट भी नहीं है। तो एक पल. के लिए जज भी शॉक हो गया कि इस लेवल का. प्रचार कौन कर सकता है? कोई नहीं जीते आप बाद में।. इसीलिए शायद हाई कोर्ट ने पूछा भी कि. दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में इतनी. गाड़ी, ट्रैक्टर, जेसीबी. ये सब कहां से तंत्र आता है? तो पढ़ने लिखने वाले छात्र हैं। इतना पैसा. कहां से छाप लेते हैं सब? देखो जी मैं खुद युवा हूं। मेरे को खुद इन. चीजों का शौक है और मेरे को यह भी बताया.
कि जितने और तमाम दिल्ली यूनिवर्सिटी में. स्टूडेंट पढ़ने आते हैं उन सबको भी इन. चीजों का शौक होता है। गाड़ी घोड़ी का. सबको शौक होता है उस उम्र में आपको भी. होगा शायद।. हम. तो पर ये कोई इतनी बड़ी बात नहीं है। इससे. ज्यादा बड़ी बात है कि छात्रों का दिल. जीतना कि आप छात्रों के दिल में अपने आप. को फिट कैसे कर रहे हो? अगर यह गाड़ी. घोड़े का चुनाव होता तो मैं 100. हेलीकॉप्टर से प्रचार करता हुआ दिखता. आपको। इतना पैसा आपके पास. नहीं मतलब मेरे भाई बंधु मेरी इतनी मदद.
करते कि वह 100 हेलीकॉप्टर ले आते. अगर लिंडो कमेटी कोई रूल नहीं होता तो. ठीक है मेन कहानी है आप यूनिवर्सिटी के. अध्यक्ष बने. 91 कॉलेज आपके नीचे रहे 7 लाख से ऊपर. छात्र आपके लीडरशिप पे रहे. हम. अब देश का लड़का अगर ये सवाल पूछे आपसे कि. दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष होने के. बावजूद भी जंतरमंतर पर जो प्रोटेस्ट था. हम जहां से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा. हुआ. हम. वहां पर आप लोग क्यों नहीं गए? हम.
मैं इस चीज का जवाब आपको एक. बात समझा के देना चाहता हूं। एक एग्जांपल. से देना चाहता हूं कि 1971. में. विद्यार्थी परिषद ने एक नारा दिया था।. स्टूडेंट्स पावर इज नेशंस पावर। उससे पहले. कई बड़े-बड़े लोग एक नारा देते थे।. स्टूडेंट्स पावर इज न्यूसेंस पावर। पर. विद्यार्थी परिषद ने 1971 में एक नारा. दिया स्टूडेंट्स पावर इज नेशंस पावर।.
और 1975 में अरुण जेटली जी हमारे दिल्ली. यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष थे। उस समय. इमरजेंसी लगी और लोकतंत्र की हत्या करी।. तो अरुण जेटली जी ने विद्यार्थी परिषद उस. समय इतना एक्टिव था। देश भर में आंदोलन कर. रहा था कि इमरजेंसी क्यों लगी और. डेमोक्रेसी की हत्या क्यों हुई? उस समय. मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारे एक हाथ. से तो हम संविधान की लड़ाई लड़ रहे थे पर. हमारे दूसरे हाथ में पत्थर नहीं था। आपने. देखा होगा अभी जो जंतरमंतर पर प्रोटेस्ट.
हुआ सब लोग एक हाथ में संविधान ले तो घूम. रहे हैं पर दूसरे हाथ से पत्थरबाजी भी कर. रहे हैं।. तो फिर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों. दिए? धर्मेंद्र प्रधान ने इसलिए इस्तीफा दिया. कि. छात्रों के साथ गलत हुआ. कि पेपर लीक नहीं होना चाहिए। उसके साथ. विद्यार्थी परिषद का भी स्टैंड है। हमने. सबसे पहला प्रोटेस्ट करा था पूरे इंडिया. में एनटीए के दफ्तर के बाहर।. बीजेपी के खिलाफ. मैंने आपको अभी तो बताया थोड़ी देर पहले. कि विद्यार्थी परिषद बीजेपी से कोई लिंक.
नहीं है।. तो आप लोग बीजेपी के खिलाफ प्रोटेस्ट किए? हां, कई बार करे हैं।. बीजेपी के खिलाफ।. बीजेपी के खिलाफ करे हैं।. एबीवीपी ने।. एबीवीपी ने करे।. कब किया था? मेरे को एग्जैक्ट डेट तो याद नहीं है। पर. एक बार राजस्थान में करा था या। एक बार. कोटा में भी करा था हमने। और अभी हमने करा. एनटीए के खिलाफ और हमारी सबसे पहली मांग. थी कि एनटीए का जो डायरेक्टर है उसको. इस्तीफा देना चाहिए।. वो तो दे दिया उन्होंने।. जी. उनको हटा दिया गया। धर्मेंद्र प्रधान के. इस्तीफे से आप लोग खुश हैं ना खुश हैं? मैं हम मेरा पर्सनली ये मानना है कि. रेजिग्नेशन कोई स्यूशन नहीं होता।.
हम. स्यूशन होता है सिस्टम। आप इस तरीके का. सिस्टम बनाओ कि इस तरीके की चीजें ना हो।. तो सिस्टम जो लाठी मारे बच्चों को वो हम. सिस्टम जो बच्चों को लाठी मारे. मैंने आपको वही तो बताया कि अगर एक हाथ. में आप संविधान ले घूमोगे दूसरे हाथ से. पत्थरबाजी करोगे तो क्या वो सही चीज है? जैसे धर्मेंद्र प्रधान के बारे में पढ़. रहा था मैं वो भी आपके एवीपी से. जी बिल्कुल एवीपी से. तो उन्होंने उड़ीसा में उस दौर में जो. पटनायक साहब की सरकार थी 97 में कांग्रेस. की. उसके खिलाफ प्रोटेस्ट किया था. और उनको भी खूब लाठी पड़ी थी.
और वहीं से वो धीरे-धीरे बने और 30 साल. बाद वो देश के शिक्षा मंत्री बने। जी. अब जो आदमी लाठी खाया. हम. वो जो लाठी चलवाए. हम. अपनी लीडरशिप में ये दिल्ली यूनिवर्सिटी. के प्रेसिडेंट होने के नाते. आप इसे कैसे देखते हो. मेरा पर्सनली ये मानना है जैसे मैंने आपको. अभी बताया कि रेजिग्नेशन इज नॉट द स्यूशन. मैं लाठी की बात कर रहा हूं. लाठी की बात लाठी की बात का मैं ये जवाब. देता हूं कि लाठी चार्ज नहीं करना चाहिए. था. पर पुलिस भी ज मजबूर हुई लाठी चार्ज करने. के लिए जब सामने से पत्थरबाजी होने लगी और.
जब स्टूडेंट्स बिल्कुल संसद भवन के गेट के. बाहर पहुंच गए थे. जैसे आप लोग. अगर वो पीसफुल प्रोटेस्ट होता तो इस तरीके. की चीजें नहीं होती। बट जैसे आप भी. प्रोटेस्ट करते हो जब कभी भी कोई मांग को. लेकर. तो कई बार पुलिस पहले अपनी साइड डंडा. मारती होगी. जी. या ऐसा होता होगा. नहीं नहीं कभी हमारे साथ मेरे को तो मैंने. आज तक कम से कम 30 से 40 प्रोटेस्ट करे. कभी भी पुलिस ने सामने से डंडा नहीं मारा. जब तक हम बैरिकेड क्रॉस करने की कोशिश. नहीं करते मतलब जब भी हम बैरीगेड अ क्रॉस. करने की कोशिश करते हैं जब भी लाठी चार्ज.
होता है वरना नहीं होगा. लाठी खाए पुलिस की. कई बार मेरे साथ वालों के कितने फोन टूटे. जेब में फोन लेके जाते थे फोन टूट गए. सर सर पुलिस कहां मारती है लाठी. कमर में और पैरों में [हंसी]. मतलब पीछे की तरफ बम की तरफ और पैर में. बिल्कुल. कि दिखा ना पाओ. दिखा ना पाओ मतलब. आपको कहां पड़ी थी. मेरे को तो कमर में और मेरे पैर में पड़ी. थी. कई दिन दर्द रहा दो से तीन दिन दर्द रहा. पर वो दर्द नहीं था खुशी हो रही थी. पुलिस की लाठी और पापा के डंडे में क्या. फर्क होता है [हंसी].
पापा तो प्यार करती है इसलिए डंडा मारते. हैं. हां. कि हम लोग सुधर जाएं और पुलिस इसलिए डंडा. मारती है कि हम गलत काम ना करें। [हंसी]. बहुत सारे बच्चों को चोट लगी यहां पे. प्रोटेस्ट आप लोग गए क्यों नहीं? आपके. नीचे 7 लाख बच्चे हैं।. हम. चलो वो बाद की बात है कि वहां पे क्या. हुआ? बहुत सारी चीजें वहां हुई जिससे हम. भी इत्तेफाक नहीं रखते।. बहुत सारी चीजें मंच पर भी हुई, मंच के. नीचे भी।. बट फिर भी फॉर द लार्जर कॉज. देश एक बड़ा हिस्सा सपोर्ट कर रहा था।.
जी. एवीपी क्यों नहीं गया? मेरा इस पे यह मानना है कि विद्यार्थी. परिषद ने सबसे पहले प्रोटेस्ट करा था. एनटीए के खिलाफ। देश में सबसे पहले. प्रोटेस्ट विद्यार्थी परिषद ने करा था और. कोई किसी संगठन ने नहीं करा था। हम्।. और जब हमारे को पता चला वहां पर कई इस. तरीके के लोग भी मन से भाषण दे रहे थे कि. जिन्होंने पहले एंटी नेशनल स्टेटमेंट बोली. हुई है। तो इसलिए हमारा स्टैंड था कि हम.
वहां पे नहीं जाएंगे। क्योंकि वहां पे मंच. ऐसे इस तरीके के लोगों को दिया जाए।. आप लोगों को कोई ऑर्डर भी आया था ऊपर से. कि जो छात्र पढ़ने वाले हैं चाहे वो. दिल्ली यूनिवर्सिटी के हो, जामिया के हो. उन्हें प्रोटेस्ट में नहीं जाना है।. प्रोटेस्ट में जाएंगे तो एक्शन लिया. जाएगा। ऐसा कोई नोटिस इशू. हां ऐसे मैंने कल एक ट्वीट आया था जेएनयू. की तरफ से भी डीयू के वाइस चांसलर की भी. तरफ से आया था कि कि जो भी दिल्ली. यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट है अगर वहां. जाएगा तो उसके ऊपर कुछ ना कुछ कारवाई. होगी। इस तरीके से एक ट्वीट आया था. तो उसके लिए भी मैंने तुरंत एक मेमोरेंडम.
लिख के भेजा कि इस तरीके का ट्वीट नहीं. आना चाहिए।. आप मानते हो कि अगर वाइस चांसलर ये कहे कि. अपना प्रोटेस्ट करें।. हम अगर वाइस चांसलर एक मैसेज करता है कि. आप प्रोटेस्ट ना करें। आप पर एक्शन लिया. जाएगा तो ये जायज होता है नाजायज होता? नहीं बिल्कुल नाजायज है। ऐसा नहीं होना. चाहिए। प्रोटेस्ट करना अधिकार है।. बट जैसे जेएनयू वाले जब प्रोटेस्ट करते. हैं. तो बीजेपी की विचारधारा वाले अक्सर ये. कहते हैं. कि यार तुम पढ़ने लिखने गए हो पैसा लेके. देश के टैक्स से पढ़ रहे हो. हम. नौटंकी का क्या कर रहे हो? सियासत क्यों.
कर रहे हो? वो प्रोटेस्ट को बहुत ही. पॉजिटिवली नहीं देखते। छात्रों की राजनीति. को. इस देश में बहुत बड़ा वर्ग है जो ये कहता. है कि यार छात्र हो पॉलिटिक्स क्यों कर. रहे हो? हम. पॉलिटिक्स राज जीता कहां पर है? कहां पर यह लाइन डिसाइड होती है कि छात्र. पॉलिटिक्स करें. हम. और या पढ़ाई करता रहे।. अगर आप. अपने. देश के लिए और अपनी नेशनलिज्म की सोच के. लिए स्टूडेंट पॉलिटिक्स करें तो बिल्कुल. ठीक है।. मेरा यह मानना है अगर आप नेशनलिस्ट सोच.
रखते हो तो आप 100% स्टूडेंट पॉलिटिक्स. में उतरो।. नेशनलिस्ट सोच क्या होती है? नेशनलिस्ट. सोच कि अपने देश को आगे रखना, अपने देश के. लिए सब कुछ समर्पित कर देना। जब देश के. लिए बात आए तो 1% भी पीछे नहीं हट।. बट देश के लिए तो संसद में काम होगा। उसके. लिए कॉलेज में काम कैसे है? स्टूडेंट पॉलिटिक्स एक ऐसी चीज है कि आप. कम उम्र में. बहुत चीजें एक्सपीरियंस कर सकते हो। बहुत. चीजें सीख सकते हो और अपने देश के लिए. योगदान कर सकते हो।.
जैसे थोड़ा समझाओ हमें। कौन सा प्रोटेस्ट. है जो देश के लिए प्रोटेस्ट है या यह. प्रोटेस्ट करेंगे तो यह ठीक है और यह वाला. प्रोटेस्ट खराब है? कई बार लोग ऐसा भी करते हैं कि आपने. जेएनयू में सुना होगा कि किस तरीके के. नारे लगे थे।. किस तरीके की घटनाएं हुई थी जेएनयू में।. बट उनकी नजर में वो भी सही होते हैं। उनको. भी सपोर्ट करने वाले लोग हैं या वह अपनी. नजर में वो भी सही होते हैं। उनको लगता है. कि वह देश के लिए कर रहे हैं। देश ऐसे ही. चलता है जब आप देश के अंदर से आवाज निकाल. के सरकार को परेशान करते रहो। पर आप गलत.
आवाज निकालोगे तो उसका क्या फायदा. इस नारों को अगर हटा दे बट जेएनयू को. जितना बदनाम किया गया डू यू बिलीव कि उतना. खराब जगह वो है कुछ स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन. ने वहां पे इस तरीके का माहौल इस तरीके का. इकोसिस्टम बना लिया है कि वो जेएनयू को. गलत दिखाना चाहते हैं कि जेएनयू से गलत. मैसेज पहुंचाना चाहते हैं।. हम. पर जेएनयू इज वन ऑफ द बेस्ट इंटेलेक्चुअल. यूनिवर्सिटी इन इंडिया बट कुछ ऐसे. इकोसिस्टम के लोग हैं जो उस सिस्टम को. खराब करना चाहते हैं। सीजेपी के प्रोटेस्ट.
में जेएनयू वाले बहुत थे।. जी।. क्या ये भी रीज़न था कि अखिल भारतीय. विद्यार्थी परिषद वहां नहीं था? ऐसा नहीं है। हर स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन का. हक है कि वो प्रोटेस्ट कर सकते हैं। और. मैंने आपको जैसे बताया कि कुछ लोग वहां. ऐसे थे जो जिन्होंने पहले एंटी नेशनल. स्टेटमेंट दी है। और कुछ तरीके की ऐसी. चीजें भी हुई थी जो नहीं होनी चाहिए।. पीसफुल प्रोटेस्ट के नाम पे पत्थरबाजी हो. रही है। पीसफुल प्रोटेस्ट के नाम पे गाली. गलौज हो रही है। पीसफुल प्रोटेस्ट के नाम. पे पेपरों पे दीवारों पे गाली लिखी जा रही. है। ये चीज तो गलत है ना।.
ठीक है।. इस देश में वोट डालने की उम्र 18 साल है।. जी।. सांसद बनने की उम्र 25 साल है।. जी।. अब आप इस उम्र में 7 लाख लोगों के अध्यक्ष. बन गए।. हम. लेकिन सांसद नहीं बन सकते।. जी।. ये नियम सही है या गलत है? मेरे हिसाब से तो यह नियम ठीक है हम. क्योंकि. संसद में जाना और बड़ा नेतृत्व संभालना. मतलब एक बड़ी बिग पिक्चर को संभालने के.
लिए आपको मैच्योर और एजुकेटेड होना बहुत. जरूरी है। हम. तो इसलिए मेरा मानना है कि 25 साल की जो. उम्र है वो बिल्कुल ठीक है और. 18 से आपको वोटिंग का अधिकार है। तो मेरा. तो ये भी मानना है कि देश भर में जितनी भी. यूनिवर्सिटी है उसमें इलेक्शन होना चाहिए।. जिससे आगे जब स्टूडेंट्स वोट करें तो. यूनिवर्सिटी में अगर वो वोट करेगा तो अपनी. विधानसभा और अपनी लोकसभा में पक्का वोट. करेगा वो। उसको अवेयरनेस हो जाती है। तो. मेरा यह मानना है कि यूनिवर्सिटीज में अगर.
इलेक्शन होंगे तो आपको वोटिंग राइट के. बारे में अपनी वोटिंग राइट के बारे में. पता चलेगा।. कैसे थोड़ा समझाओ? मान लो कि जैसे आप 18. साल के हो, आपकी यूनिवर्सिटी में इलेक्शन. नहीं होते हम. और आपके क्षेत्र में इलेक्शन हो रहे हैं. तो अब आप वोट करने नहीं जाओगे। इग्नोर. करोगे क्यों वोट देने जाना? पर आप खुद. इतने समझदार हो कि एक वोट का महत्व कितना. होता है? एक वोट का एक वोट से आदमी की. हारजीत हो जाती है। अभी तमिलनाडु के. इलेक्शन में भी आपने देखा होगा कि एक. कैंडिडेट एक वोट से हार गया। तो उसी तरीके.
से जब आप अपने कॉलेज में जाओगे, कॉलेज में. पहला वोट दोगे तो आपको अवेयरनेस हो जाएगी।. वोट काेंस क्या होती है? वोट देने से. कितने फायदे होते हैं? तो आप अपनी. विधानसभा, लोकसभा में बेसिकली आप आगे जब. जाओगे तो पक्का वोट दोगे।. हम. तो हमारे देश के लिए अच्छा है। जितने. ज्यादा वोटर्स हमारे को टर्न आउट हो गए. उतना देश के लिए अच्छा है।. आपको लगता है कि ये जो धर्मेंद्र प्रधान. का इस्तीफा हुआ या जो ये पूरा टॉपिक चला. जंतरमंतर पर हम. इसका असर दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में. पड़ेगा? नहीं जी ऐसा नहीं है क्योंकि विद्यार्थी.
परिषद 365 दिन छात्र हितों के लिए काम. करता है।. ये बात बीजेपी को भी लगती थी। घर तक पहुंच. गए थे मोदी जी के संसद तक लड़के. हम. तो मेरा यह मानना है कि दिल्ली. यूनिवर्सिटी में इस चीज का कोई भी प्रभाव. नहीं पड़ेगा। हम्।. और इसलिए नहीं पड़ेगा कि स्टूडेंट यहां पे. पढ़ने के लिए आता है। जब उसका पहला दिन. होता है तो विद्यार्थी परिषद उसका वेलकम. करती है। पहले आपने सुना होगा कि लोग. रैगिंग करते थे फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स. की पर विद्यार्थी परिषद स्टूडेंट्स का.
वेलकम करती है। उनको तिलक लगाती है। उनके. क्लासरूम तक उनको छोड़ के आती है। पहला. दिन जैसे अदिति देवो भव होता है तो हमारी. यह विचारधारा है कि जब कोई भी स्टूडेंट. आएगा तो विद्यार्थी परिषद के लोग आईडी. कार्ड पहन. अतिथि देवो भव. अदिति देवो भव. तो उनको टीका करा जाएगा उनकी क्लासरूम तक. छोड़ा जाएगा एक बहुत पॉजिटिव स्टूडेंट. फ्रेंडली माहौल होता है जब. बट जो लड़का बाहर से आ रहा है जैसे. फ्रेशर लड़का होगा वो तो टीवी देख रहा. होगा मोबाइल देख रहा होगा Instagram पे. आंदोलन आपको लगता है कि इस इंसिडेंट ने.
थोड़ा सा जो आप लोग के लिए क्लियर ट्रैफिक. होता था. उसमें थोड़ी मेहनत बढ़ाई. मेरे को तो नहीं लगता जी. कोई मेहनत बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।. किस मुद्दे पर होता है यह छात्र संघ का. चुनाव? कई मुद्दे होते हैं।. इस बार का क्या मुद्दा हो सकता है? इस बार के विद्यार्थी परिषद के मेनिफेस्टो. में कई मुद्दे थे। जैसे स्टूडेंट सेफ्टी. को लेकर और. स्पोर्ट्स की फैसिलिटी को लेकर. इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर लेकर पोर्टा कैबिन.
को बंद करने कई ऐसे तमाम मुद्दे होते हैं. हम. जिसके ऊपर हम चुनाव लड़ते हैं और आज की. तारीख तक मान लो अगर हमारे 20 मुद्दे थे. तो मैं उसमें से 18 मुद्दे कंप्लीट कर. चुका हूं और अभी दो मुद्दे हैं अभी उन पे. लड़ाई चल रही है।. सबसे बड़ी अचीवमेंट क्या थी आपकी? सबसे. बड़ी अचीवमेंट थी कि दिल्ली यूनिवर्सिटी. में जैसे आप भी अपनी यूनिवर्सिटी में पढ़े. होंगे तो वहां पर हर साल एनुअल स्पोर्ट्स. मीट होता है और वो जो स्पोर्ट्स मीट होता. है वो एक फेस्टिवल की तरह होता है। काफी. अच्छी चीज होती है कि स्टूडेंट्स अपने.
पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी एंगेज. हो जाते हैं।. तो अबकी बार मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में. खेलो डीयू कराया। उसमें हमारे करीबन करीबन. 12 स्पोर्ट्स थी। गर्ल्स बॉयज दोनों उसमें. करीबन 30 से 35,000 स्टूडेंट्स ने पार्ट. लिया। हम. कि 1.5 लाख स्टूडेंट रेगुलर कॉलेज के और. उसमें 30 से 30 से 35000 स्टूडेंटों ने. पार्ट लिया तो कितनी बड़ी बात है और उसमें. सबसे अच्छी बात यह थी कि गर्ल्स का. पार्टिसिपेशन लड़कों से भी ज्यादा था तो.
बड़ी खुशी हुई यह बात जानते हुए और. उससे भी बड़ी अचीवमेंट अगर डूसू के लिए. डसू के जितने भी एलुमिनाई है उनके लिए भी. मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि. हमारा डसू का ऑफिस पोटा कैबिन में था और. आज के समय डसो का ऑफिस चार फ्लोर का हो. चुका है। ग्राउंड फर्स्ट, सेकंड, थर्ड। तो. वह भी हमारे लिए बहुत बड़ी बात थी कि हम. यूनिवर्सिटी से पोटा कैबिन मुक्त होने के. लिए लड़ाई लड़ते थे और हमने चार फ्लोर की.
एक बड़ी बिल्डिंग यूनिवर्सिटी से ग्रांट. कराई और आज के दिन वो बिल्डिंग वर्किंग. में है।. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मैं बार-बार. जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि एनटीए के खिलाफ. प्रोटेस्ट आप लोगों ने किया था। हम. पहला प्रोटेस्ट एनटीए के खिलाफ आप लोगों. ने किया था।. जी. इस साल में. इसी साल शुरुआत को लेकर इंटेक के खिलाफ. प्रोटेस्ट क्यों किया था कि. मेनली जो पेपर का जो सारा स्ट्रक्चर है. जितनी भी पेपर की सिक्योरिटी वगैरह है वो. सब एनटीए देखता है।.
तो हमारा यह मानना था कि जब एनटीए का. डायरेक्टर है उसको क्यों बनाया हुआ है? वो. क्यों उस गद्दी पर बैठा है? इसलिए हमने. उनके रेज़िग्नेशन की मांग करी थी कि जिससे. वहां पे कोई नया डायरेक्टर आए और इस चीज. को ठीक करें। अब मैं जब एनटीए के बारे में. डिटेल जानकारियां पढ़ रहा था तो मुझे पता. लगा केवल 24 आदमी हैं जो वहां पे परमानेंट. काम करते हैं।. हम. बाकी सबको भाड़े पे लेते हैं। ठेके पे. कहते हैं।. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी. आपको लगता है कि वो स्ट्रक्चर ठीक हो. जाएगा क्योंकि परमानेंट एंप्लई एनटीए में.
केवल 24 हैं। जबकि वो नीट का एग्जाम कराते. हैं, जेई करवाते हैं, यूसीटी करवाते हैं, यूजीसी एनईटी कराते हैं और परमानेंट. कर्मचारी सिर्फ 24। 24 आदमी करोड़ों. बच्चों का भविष्य तय करते हैं। डू यू. बिलीव सिस्टम नहीं चेंज हुआ केवल चेहरा. चेंज होने से यह ठीक होगा? इसलिए तो मैंने आपको अभी थोड़ी देर पहले. बताया कि रेिग्नेशन से कुछ नहीं होगा।. हम्म. मेन है सिस्टम में चेंज आना चाहिए।. हम्म।. मैंने एक रिसर्च पढ़ी उस रिसर्च में यह था. कि.
जब भी आप कोई एग्जाम कराते हो तो जो भी. आपके क्वेश्चन सेट करता है जो भी टीचर. आपके क्वेश्चन सेट करता है उसको आप एक घर. में रखो उसको बाहर जाने का मौका ही मत दो. जब वो घर में रहेगा किसी से मिलेगा नहीं. ना वो किसी टेक्नोलॉजी से होगा अपना पेपर. बनाएगा और जिस दिन पेपर हो जिस दिन. स्टूडेंट्स का पेपर हो जाए उन टीचर्स को. रिलीज़ कर दो तो जिससे हमारे देश में. सिक्योरिटी भी बनी रहेगी बट कई बार तो. रस्ते प्रिंटिंग प्रेस वाला करवा लेता है. कई बार गाड़ी वाला करवा करवा लेता है।. कई बार जहां पेपर हो गया वहां सील तुड़वा.
करवा लिए।. बिल्कुल बिल्कुल। तो जितने भी यह बड़े पेपर. होते हैं उन सबको कंप्यूटर पे कराना. चाहिए। और जो मैंने आपको जो घर वाली बात. बताई रिसर्च वाली बात बताई वहां पे भी. आपकी एक प्रॉपर प्रिंटिंग मशीन का सेटअप. होना चाहिए. कि पेपर कहीं बाहर ही ना जाए। वहीं के. वहीं रहे। जिस दिन पेपर हो उसी दिन. आराम से सेंटर पे पहुंच जाए। फुल. सिक्योरिटी में।. तो आप दिल्ली यूनिवर्सिटी के भी अध्यक्ष. हो।. अगला जो नीट [गला साफ़ करने की आवाज़] का. पेपर होगा सीयूटी का, यूजीसी एनईटी का. हम आपको भरोसा है कि उसमें नकल नहीं होगी. या उसमें पेपर लीक नहीं होगा?
बिल्कुल भरोसा है मेरे को।. 24 में भी यही बात धर्मेंद्र जी ने कही. थी। 26 में भी लीक हो गया था। कुर्सी चली. गई।. नहीं नहीं नहीं अबकी बार बिल्कुल ऐसा नहीं. होगा।. क्यों? क्योंकि सिस्टम बनाया जाएगा। जैसे मैंने. अभी पढ़ा हमारे आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने. कहा कि एक हाई कमांड मीटिंग होगी। उसमें. एक प्रॉपर सेटअप बनाया जाएगा और मेरे को. पूरा विश्वास है उस पे तरीके से काम होगा।. आपने मोदी जी का जिक्र किया।. जी।. मोदी जी का वाला वीडियो देखा आपने? बिल्कुल। हेलो फ्रेंड्स. जी जी जी बड़ा इंप्रेसिव वीडियो था और.
बड़ा अच्छा लगा कि हमारे देश के आदरणीय. प्रधानमंत्री जजी से भी कनेक्ट कर रहे. हैं।. बट इस बार बहुत गाली खाई है मोदी जी ने. प्रोटेस्ट में। मैंने मोदी जी की तारीफ. बहुत देखी थी पहले. लेकिन जजी के वो प्रोटेस्ट में बहुत सारी. गालियां पड़ी। डू यू बिलीव उस प्रोटेस्ट. ने जजी ने मोदी जी को फोर्स किया कि वह. लाइमलाइट कैमरे से आगे निकल कर वो छात्रों. से सीधे बात करें और जिसका रिजल्ट दिखा. हेलो फ्रेंड्स और फिर 300 मिलियन प्लस या. 400 मिलियन व्यूअरशिप उस टाइम गई जो मैंने. देखी थी जो हमारे देश के प्रधानमंत्री जी.
हैं आदरणीय. नरेंद्र मोदी जी. जैसे घर में एक दादा जी होते हैं ना. हम. वो उसकी तरह है कि. अपने बेटों को, पोतों को, नाता नाती को. सबको एक समान देखते हैं वह। तो आप खुद सोच. सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री एक. सेल्फी से वीडियो बना रहे स्टूडेंट्स को. कनेक्ट करने के लिए, जेंजीस को कनेक्ट. करने के लिए, अपनी बात रखने के लिए जो.
स्टूडेंट्स ने स्वीकार करी और उन पर भरोसा. जताया। तो आप सोचो कि कितने अच्छे हैं वह. कि उन्होंने इस तरीके का स्टेप लिया सिर्फ. और सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए, देश के. युवाओं के लिए, आने वाले जेंजीस के लिए।. बट मोदी सरकार की एक हिस्ट्री रही है।. हम. कि मोदी सरकार इस्तीफा नहीं लेती थी।. हम. मोदी सरकार की हिस्ट्री रही कि प्रोटेस्ट. को डिले करके दबाया करती थी।. हम. हमने किसान आंदोलन देखा। आप तो हरियाणा से. आते हैं। 13 महीने तक किसान आंदोलन चला।.
जी।. इस प्रोटेस्ट में ऐसा क्या था कि मोदी जी. खुद आके वीडियो पे आ गए। हम. दोद बार हेलो फ्रेंड्स किया और बड़ा चला. वो काफी ट्रेंड रहा. धर्मेंद्र प्रधान भेटा दिया फॉर द फर्स्ट. टाइम इससे पहले केवल एमजे अकबर का इस्तीफा. हुआ था वो भी मी टू में हुआ था हम. कभी भी जवाबदेही को लेकर नहीं हुआ. क्या लगता है आपको क्या अलग था ये. स्टूडेंट ने जो अपना प्रोटेस्ट किया उसको. लेकर. जैसा मैंने आपको बताया स्टूडेंट्स पावर इज. नेशंस पावर मैं आपको एक शायरी बताना चाहता. हूं संघर्षों के साए में इतिहास हमारा.
फलता है संघर्षों के साए में इतिहास हमारा. फलता है जिस और जवानी चलती है उस और जमाना. चलता है।. तो जब स्टूडेंट्स इकट्ठा हुए अपने फ्यूचर. को लेके कि आगे इस तरीके की कोई भी गलती. ना हो। हम. तो उन्होंने सरकार को एड्रेस करा। सरकार. के कुछ लोग मिलने भी गए. हम. और उनको मोदी जी पे पूरा भरोसा था तो. उन्होंने मोदी जी से कनेक्ट करा। इसलिए वो. रील इतनी वायरल गई कि उनको भरोसा था कि.
हमारे देश के आदरणीय प्रधानमंत्री हमारा. स्टैंड लेंगे और जो भी उनकी आपस में. मीटिंग का डिसीजन आया वो आज स्टूडेंटों ने. स्वीकार किया। आप तो दिल्ली यूनिवर्सिटी. के अध्यक्ष हैं।. जी. जजी भी हैं।. हम. आप आप जिन मोदी जी को दादा जी कहते हैं।. जी. जब पहली बार आपने उनका वीडियो देखा।. हम. हेलो फ्रेंड्स।. हम्म. मित्रों की जगह।. जी जी जी।. क्या ऑनेस्ट रिएक्शन था? सच बताऊं तो मेरे. को गूसबम्स आ गए थे। मतलब मेरे को ऐसी. उम्मीद नहीं थी कि इस तरीके की भी चीज हो.
सकती है। और बहुत ही अच्छा लगा। मतलब दिल. खुश हो गया कि उन्होंने ऐसा फील कराया कि. उनके और हमारे बीच में कोई बैरियर नहीं. है। ही कैन कनेक्ट विद अस एनी टाइम वी. वांट।. हेलो फ्रेंड्स कैसा था? [हंसी]. क्योंकि मैं मित्रों मित्रों हम जानते थे।. जी जी जी. नेवर एक्सपेक्टेड हेलो फ्रेंड्स। हम्म।. तो मैंने आपको ये बताया कि वो स्टूडेंट. उससे कनेक्ट करने का तरीका जानते हैं।. हम.
और वो स्टूडेंट्स अपने जमाने में भी वो. दिल्ली यूनिवर्सिटी के एलुमिनाई रहे हैं।. तो बहुत ही अच्छा कनेक्ट लगा कि जिस तरीके. से उन्होंने हेलो फ्रेंड्स बोला बहुत दिल. खुश हुआ उस जब मैंने वो वीडियो देखी पूरी।. बट ये कितना परसेप्शन चेंज करने वाला था. कि आमतौर पर. देश की टीवी कोई विषय उठाती थी।. हम. इस बार जजी ने मोबाइल से कमाल कर दिया।. बिल्कुल जी। रील तो क्या हम यह मान लें कि. जब आने वाला समय जो है. हम. उसमें देश में क्रांति सड़क से ज्यादा रील.
से आएगी? देखो जी आज के. आज का जमाना सोशल मीडिया पर चल रहा है और. लोग सोशल मीडिया पे ट्रस्ट करते हैं और. जितनी भी न्यूज़ जितना भी एक क्विकनेस है. वो टीवी से ज्यादा सोशल मीडिया पे ज्यादा. चलने लग रहा है और आज के जमाने के युवा. न्यूज़ चैनल कम देखते हैं। टीवी देखने का. कम समय है। बस उनके हाथ में एक फोन होता. है जिससे वो फुल्ली अपडेटेड रहते हैं। तो. आने वाला समय सोशल मीडिया का समय है और इस.
समय अभी चल भी रहा है। आने वाला समय और. बढ़ जाएगा सोशल मीडिया के लिए।. ये अभी जो सोशल मीडिया का दौर है ये डीयू. के चुनाव में कितना इंपैक्ट करता है।. बहुत इंपैक्ट करता है।. मतलब आप अगर ऑन ग्राउंड भी मजबूत हो और. अगर आपका सोशल मीडिया भी मजबूत है। मेरे. को नहीं लगता आपको कोई भी ताकत हरा सकती. है।. और अगर आप ऑन ग्राउंड मजबूत हो लेकिन सोशल. मीडिया पे सामने वाली पार्टी मजबूत है तो. दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव जीत सकती है।. नहीं जीत सकती। इट्स ऑल अबाउट इमोशन।. दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव सिर्फ इमोशन.
और जिसने छात्रों के दिलों में जगह बना ली. उसके लिए है वह चुनाव।. जगह कैसे बनाते हैं ये? नया लड़का आया है।. हम देखो जी मैं अपना खुद का एक्सपीरियंस. बताता हूं। मैं 2021 से दिल्ली. यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हूं। मेरा 2021. में एडमिशन हुआ था। जब से लेकर 2025 तक. स्टूडेंटों के लिए संघर्ष करा। स्टूडेंटों. के लिए लाठी खाई। मुकदमे लिए. और कुछ मुकदमे लगे तो मैं डसू का अध्यक्ष. बन गया। हम. आगे मेरे जीवन में मुकदमे होंगे.
तो मैं विधानसभा का चुनाव लड़ जाऊंगा।. और अगर मेरे पर और मुकदमे हुए. तो मैं सांसद बन जाऊंगा।. मेरे को मुकदमों से डर नहीं लगता।. मुकदमे कोई हमने चोरी थोड़ी ना करी है।. किसी को सताया थोड़ी ना। हम तो लोगों की. आवाज उठा रहे हैं। जो लोग अपनी आवाज उठा. नहीं रहे, जो पीड़ित परिवार है, पीड़ित. स्टूडेंट्स हैं, उनके लिए हम आवाज उठा रहे. हैं। अगर उनके लिए मुकदमे सहने पड़े तो.
क्या बुराई है? मुकदमों से डर नहीं लगता।. लोगों ने सेवा करने का मौका दिया और. मुकदमों का सततक लग गया तो मैं लोकसभा में. भी जा सकता हूं। तो000 पे पहुंचे तो मोदी. जी की जहां पहुंच जाओगे। [हंसी]. बट जैसे आप स्टूडेंट हो. जी. तो पॉलिटिकल करियर ही क्यों सोचा आपने? मतलब जो पढ़ाई कर रहेगे आप उसी में करियर. बनाए क्यों नहीं सोचा? ये क्यों सोचा कि. यहां से निकल के विधायक बनना है।.
अच्छा यहां से निकल के विधायक बनना है।. हां। तो. यही दिमाग में क्यों आया? मतलब पढ़ाई कर. रहे हो आप।. पढ़ाई करके लोग कहते थे ना पहले जमाने में. पढ़ोगे लिखोगे, बनोगे नवाब।. हम. सीधे नेता बनने की क्यों सोचा? क्योंकि. नेता हो इसलिए. नहीं नहीं जी ऐसा नहीं है मतलब मेरा मेरे. दादा जी हम. 17 गांव के प्रधान थे उनको प्रधान का मतलब. यह नहीं होता कि आपको इ करा जाता है आपके. लिए वोट करा जाता है कि 17 गांव के जितने. भी सरपंच हैं बड़े बूढ़े हैं वो एक को. आशीर्वाद देते हैं कि आप 17 गांव की कमान.
अब आप संभालोगे 17 गांव की इज्जत आपकी. इज्जत है तो मेरे दादाजी. खाप पंचायत. खाप पंचायत बिल्कुल तो मेरे दादाजी 17. गांव के प्रधान थे और अब मेरे बड़े पापा. हैं सबसे बड़े पापा। तो मेरे को सबसे. अच्छी बात अपने दाजी के बारे में यह लगती. थी कि पूरा दिन वो सिर्फ और सिर्फ और. सिर्फ समाज सेवा में लगाते थे। उन्होंने. गांव में तीन मंदिर बनाएं। दो बड़े फार्म. हाउस बनाए। हम्।. कि जहां पे.
उस समय का युवा कुश्ती कर सकता है, खेल. सकता है, रनिंग कर सकता है। जिस भी फील्ड. में वह एक्सपर्ट होना चाहता है, वो उस समय. उस फार्म हाउस में जाकर तैयारी कर सकता. है। उन्होंने गांव में चौपाल बनाई।. हम्म। और उस चौपाल में कोई भी किसी भी. समाज का आदमी अपनी बेटी की शादी कर सकता. है। और सबसे अच्छी बात आपको बताऊं कि. जो गांव का बॉर्डर होता है वहां पे वो.
हमेशा पांच से छह मटके डेली पानी का भर के. रख के आते। डेली उस जगह की सफाई कराती थी. कि गांव से कोई अंदर आए। गांव के कोई बाहर. जाए तो वहां पे पानी की सुविधा भी हो। तो. इस लेवल का उनका विज़न था। उन्होंने गांव. में लाइब्रेरी बनाई, स्कूल बनाया कि उनका. इस लेवल का विज़न था कि जो हमारे गांव के. युवा है वो देश में नाम रोशन करें। तो. वहां से मेरे को प्रेरणा मिली और जब से. लेकर मैं अब तक सेवा भाव में लगा हुआ हूं।. आप दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट हो।. सबसे ज्यादा शिकायत बच्चे क्या लेकर आते.
हैं? सबसे ज्यादा जो शिकायतें होती है कि फॉर्म. की डेट निकल जाती है। फिर बच्चे बोलते हैं. भैया मैंने फॉर्म नहीं भरा।. और कई बार एग्जाम रिजल्ट से लेकर परेशानी. होती है। कई बार ऐसी परेशानी होती है कि. बच्चा फेल हो जाए। बोल दो भैया आप तो. यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष हो। आप तो हमको. पास करा सकते हो।. [हंसी]. अभी तो यूनिवर्सिटी में अभी तो. यूनिवर्सिटी में एडमिशन चल रहे हैं।. तो कई मतलब मेरा पूरा फोन तो आज के समय. एडमिशन के प्रोसेस के लिए ही बचता रहता.
है। तो जब मेरी टीम बात करती है तो कई. बातें तो ऐसी आती है जब मेरे को रिसर्च. मिलती है पूरी किसका किस चीज से रिलेटेड. फोन आया। तो उसमें तो यह होता है कई. माता-पिता कहते हैं कि यार यूनिवर्सिटी. में तो अध्यक्ष का कोटा होता है। हमारे. टाइम पे तो होता था भी करा देगा हमारा. एडमिशन।. तो मतलब मेरे लिए बहुत ही कठिन होता है. उनको जवाब देना कि इस तरीके की कोई भी चीज. नहीं होती। सारा प्रोसीजर अब ऑनलाइन है और. ऐसी तमाम चीजों को लेकर काफी प्रॉब्लम्स. आती है कि मतलब किसी का कॉलेज में झगड़ा. हो गया। पुलिस उस पे एफआईआर कर रही है तो.
एफआईआर के लिए फोन कर दो। तो मतलब इस. तरीके की प्रॉब्लम होती है। तो. सबसे वियर्ड रिक्वेस्ट क्या आई? वो थाईलैंड वाले के अलावा? थाईलैंड वाले के अलावा. बच्चों की तरफ से मतलब जो अध्यक्ष बनने के. बाद वो तो अध्यक्ष बनने के पहले थी।. जी जी जी दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष. बनने के बाद सबसे वियर्ड रिक्वेस्ट कौन सी. थी? सबसे वियर्ड रिक्वेस्ट थी जो आज भी मेरे. को याद है कि कम से कम 30 से 40 बच्चे आए।. उन्होंने आपस में WhatsApp ग्रुप बना रखा. था और उन्होंने मेरे को एक जगह बुलाया.
यूनिवर्सिटी में कि भैया यहां पे आके एक. बार हमसे मिलो। हम 30 से 40 बच्चे हम सब. की सेम प्रॉब्लम है। तो मेरे को लगा यार. 30 से 40 बच्चे इकट्ठे हुए कोई प्रॉब्लम. होगी। तो कहते भैया हम पेपर में फेल हो. रखे हैं। हमको पेपर में पास करा दो। आप. टीचर से बात कर लो। हमको पास करा दो, यह. कर दो, वो कर दो। फिर मैंने उनको समझाया. कि इस तरीके की कोई भी चीज नहीं होती। तो. ऐसी बहुत सारी कंप्लेंट है कि. करप्शन है दिल्ली यूनिवर्सिटी में।. नहीं बिल्कुल 1% भी नहीं। ऑनलाइन. स्ट्रक्चर है सब कुछ।. जैसे हमारे एक मित्र हैं।. हम. पीएचडी कर रही थी।.
हम. अब शायद नौकरी निकली होगी।. हम. तो वो गई तो उन्होंने हमको बताया कि. दिल्ली यूनिवर्सिटी में उनसे कहा गया कि. दो तरीका है।. हम. या तो किसी टॉप लीडरशिप बीजेपी से कहलवा. दो।. हम्म. या ₹50 लाख कैश दिला दो।. हम्म।. नौकरी लग जाएगी।. हम्म. बन जाओगी। कोई भी प्रोफेसर. नहीं नहीं बिल्कुल ऐसा नहीं है। 1% भी ऐसा. नहीं है। ये सिर्फ मुंह बनाई बातें हैं. और मेरे को भी यूनिवर्सिटी में रहते इतने. साल हो गए। इस तरीके की कोई भी बात आज तक. ना सुनने में आई और अगर सुनने में आई तो. वो बिल्कुल फर्जी बातें थी। लोग जिनका.
एडमिशन नहीं होता मतलब जिनका टीचर नहीं. प्रोफेसर नहीं लग पाते वो इस तरीके की. बातें करते हैं। जेलसी क्रिएट हो जाती है।. एक अग्रेशन हो जाता है। मेरा कैसे नहीं. लिया। तो आप समझते हो आज के समय किस तरीके. की तमाम. कोई करप्शन नहीं वहां पे। हम्म। ठीक है।. सबसे ज्यादा शिकायत कौन लाते हैं? गरीब घर. के बच्चे, अमीर घर के बच्चे? ऐसा तो नहीं है। हम किसी से पूछते तो नहीं. है कि आप. फिर भी पता लग जाता होगा।. नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं। बिल्कुल सबकी. तमाम यही जो मैंने आपको कंप्लेंट्स बताई. उस तरीके की कंप्लेंट्स रहती है और इस. तरीके की कोई भी बात नहीं होती।. अगर दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रेसिडेंट.
थाने में फोन करे।. हम. तो थाने वाला फोन उठा लेता है एक बार में।. बिल्कुल। तुरंत जो बोलते हो वो करवाई देता. है।. इतना जलवा होता है।. क्या-क्या जलवा होता है? थोड़ा बताओ ना।. साल भर अध्यक्ष रहे हो। हां।. क्या-क्या जलवा होता है दिल्ली. यूनिवर्सिटी के चीफ का. कि आप जो मन चाहो वो करा सकते हो। जैसे. मनचाहो में क्या-क्या लड़का उठवा लो।. नहीं नहीं इस तरीके की तो कोई चीज नहीं. होती।. फिर क्या-क्या कि मतलब जितने भी पुलिस. स्टेशन होते हैं किसी का काम कहीं अटका.
होता है। किसी की कहीं नौकरी में मदद हो. सकती हो तो उसकी नौकरी लगवाने में मदद कर. दी।. कैसे नौकरी मदद? मतलब नौकरी में मदद ऐसी. होती है. ये जो प्रोफेसर अल्लाह बता रहे हैं।. नहीं नहीं नौकरी में मदद ऐसी होती है कि. उसको कोई प्रॉपर गाइड नहीं मिल रहा होता. तो यूनिवर्सिटी से कोई अच्छे टीचर को. कनेक्ट करा के उसको गाइड दिला देते हैं कि. इसको गाइड जेरिक कामों के अलावा दिल्ली. यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट का क्या जलवा. होता है? जनरिक काम तो हम समझ गए।. अब नेता मतलब होता है कि भैया ठीक है. पुलिया बनवा दो, सड़क बनवा दो।. इसके अलावा भी पावर होता है। थोड़ा जलवा. होता है।. तो दिल्ली यूनिवर्सिटी का जो प्रेसिडेंट.
है उसका जलवा क्या होता है? कहां फील आता. है कि यार ये कुर्सी के वैल्यू है। ये है. जलवा।. कि. सबसे बेस्ट जो होता है कि जब आप किसी भी. कॉलेज में जाते हो. तो जो प्रिंसिपल होता है उसकी कुर्सी. हिलने को लग जाती है कि यार यूनिवर्सिटी. का अध्यक्ष आ गया. सारी चीजें कॉलेज की ठीक कर दो जितना. जल्दी हो सके क्योंकि पसीना छूटेगा हमारे. को तो मतलब उसको पहले ही डर सेट हो जाता. है कि. बच्चे से डर रहा है।. हां 100% क्योंकि गलत करेगा तो हर आदमी.
आवाज उठाएगा उसके लिए और हमारा काम ही है. अगर कुछ भी गलत होगा तो हम उसके लिए आवाज. उठाएंगे ही तो जो भी किसी भी कॉलेज का. प्रिंसिपल. प्रिंसिपल होता है उसकी एक तो सीट कांपने. लगती है। टीचरों की सीट कांपने लगती है और. उससे भी कई चीजें ऐसी होती है कि जब हम. किसी भी कॉलेज में जाते हैं राउंड में तो. तमाम. हजारों बच्चे आपके साथ घूम रहे होते हैं।. पूरी दिक्कतें बताते कॉलेज की हम. प्रिंसिपल को बुलाते आओ साथ चलूं। जब वो. बच्चे जब मैं नहीं होता तो खुल के नहीं.
बोल पाते। जब मैं होता हूं तो तो ऐसा लगता. है टीचर बच्चे बन गए हैं। इस तरीके से सर. को समझाते सर ऐसे ऐसे ऐसे-ऐसे आपने ये. वादा करा था ये वादा करा था। पूरा क्यों. नहीं कर पाए आज तक आप? तो इस तरीके की. तमाम चीज़. थानेदार वाली फीलिंग आती है।. बिल्कुल थानेदार।. अच्छा कई आदमी जब यूनिवर्सिटी में घुसते. हो आप तो पैर छूते जाते दिल्ली. यूनिवर्सिटी अध्यक्ष को।. नहीं ऐसा तो नहीं होता।. अरे होता भाई हम भी अपने कॉलेज में थे।. भले इतना बड़ा कॉलेज नहीं था लेकिन. अंदर घुसते तो गुड मॉर्निंग आता था। भैया. नमस्ते। गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। तो. दिल्ली यूनिवर्सिटीज के नीचे 7 लाख लड़के. आपके नीचे हैं। 91 कॉलेज है। कई लड़के पैर.
छूते हैं।. नहीं वो तो रिस्पेक्ट होती है। वही तो पैर. तो कोई नहीं छूता बट एक. भैया नमस्ते।. हां भैया नमस्ते एक तरीके की वैल्यू. रिस्पेक्टेड होती है।. तो उस तरीके का जेस्चर होता है जिसका जिस. तरीके. दिन भर में कितना नमस्ते होता होगा ऐसे. वाला।. कि सामने से आके. नमस्ते ज्यादा तो हाथ तो इतने मिला लेते. हैं कि मेरे को कोई अंदाजा नहीं है कि एक. दिन में हम कितने हाथ मिला लेते हैं।. बेशक चुनाव से पहले हो या चुनाव के बाद. हो। तो कोई अंदाजा नहीं होता कि दिन में. कितने लोग मिलने आते हैं, कितने लोगों से. मिलना हो जाता है। कितने नए लोगों से. बातचीत हो जाती है। कोई अंदाजा नहीं रहता.
इन बातों का तो।. आप लाइब्रेरी साइंस में एमए कर रहे हो।. जी।. कई बार लाइब्रेरी गए साल भर में।. मैं आपको सच्ची बताऊं तो मैंने स्कूल में. बीकॉम ऑनर्स करी है।. हम. और नहीं स्कूल में मैंने प्योर कॉमर्स करी. थी और मैंने हंसराज से बीकॉम ऑनर्स. कंप्लीट करी। फिर मैंने एक साल बुद्धिस्ट. करा। फिर एक साल मैंने अभी मेरा इस साल. लाइब्रेरी साइंस कंप्लीट हो जाएगा और अब. मेरा लॉ फैकल्टी में एडमिशन. लाइब्रेरी साइंस होता क्या है ये? इट्स ऑल अबाउट लाइब्रेरी कि आप लाइब्रेरी.
को किस स्ट्रक्चर से चला रहे हो? मतलब खाली पढ़ने के लिए पढ़ते रहो।. नहीं नहीं ऐसा नहीं है।. यूनिवर्सिटी संघ का अध्यक्ष बनने के लिए।. नहीं नहीं नहीं जी नहीं ऐसा नहीं होता।. मतलब मेरे को बुक्स में बुक्स के बीच में. रहना पसंद है।. तो इसलिए मैंने लाइब्रेरी साइंस चुना और. अब मैं लॉ फैकल्टी की पढ़ाई करूंगा। मेरा. एडमिशन हो गया है। आने वाली 28 तारीख से. मेरी क्लासेस चालू हो जाएगी।. तो फिर चुनाव कैसे लड़ोगे हरियाणा में? कहां पे जी? हरियाणा में चुनाव कैसे लड़ोगे बाद में? बिल्कुल ऐसा होता है कि. पढ़ते रहो, लड़ते रहो।.
हां, पढ़ते भी रहो और लड़ते भी रहो। आपको. दोनों प्रोफेशन साथ में कंप्लीट करने पड़ते. हैं।. अच्छा मान लो जैसे किसी कोर्स में आप पढ़. रहे हो। हम्म।. वहां जो टीचर पढ़ा रहा है, हम. उस पर कितना असर पड़ता है कि लड़का दिल्ली. यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष है।. बहुत ज्यादा पड़ता है। कि जब मैं अपनी. लाइब्रेरी साइंस की क्लास में जाता था तो. पूरी क्लास के साथ-साथ टीचर भी खड़ा हो. जाता था और पूरी क्लास में पता ही नहीं. क्या कॉन्फिडेंस आ जाता था। मेरे को मतलब. आज तक मैंने कईयों से पूछा कि यार तुम मैं. जब आता हूं तुम में जोश क्यों भर जाता है?
कह रहा भैया पता ही नहीं क्या एक एनर्जी. आती है कि आप आते हो तो खड़े होने का मन. कर जाता है।. तुम्हारी इस बात से हमको एक बात समझ में आ. गई कि तुम्हारी अटेंडेंस 75% तो नहीं. होगी।. नहीं देखो जी 75% तो पूरी नहीं हो सकती।. हां पर. तुम भी डिबार्ट हुए? नहीं मेरे डिपार्ट मेरे डिपार्टमेंट में. ऐसा रूल नहीं है।. ऐसा रूल ही नहीं है।. रूल ही नहीं है।. चलो ये तो अच्छी बात है। हमारा टाइम बहुत. था। 74.8 भी हो गई। कहीं पे तो गायब कर. देते हैं।. हां, ऐसा बिल्कुल होता है और यूनिवर्सिटी. में बहुत एक्टिव रूप से चल भी रहा है।. और मेरे डिपार्टमेंट में ऐसा रूल नहीं है।. फिर भी मेरी करीबन-करीबन 50% अटेंडेंस है.
कि जहां मेरा ऑफिस है उसके पीछे ही मेरा. डिपार्टमेंट पढ़ता है। तो मैं जब भी मेरे. को. दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रेजेंट पढ़ता. लिखता फिर है या खाली अपने ऑफिस में रहता. है।. नहीं नहीं बिल्कुल मैं तो मैं तो बिल्कुल. पढ़ता लिखता हूं। अगर मेरे को पढ़ना लिखना. नहीं होता तो मैं लॉ फैकल्टी में. बट दोनों फिर कैसे पॉसिबल है? 52 कॉलेज. आपको टूर करना है। 91 कॉलेज आपके नीचे है।. 7 लाख बच्चे आपके पास है।. अब या तो पढ़ लोगे या नेतागिरी कर लोगे।. नहीं जी नहीं आपके पास शेड्यूल होता है।. अगर आप अपना शेड्यूल ढंग से मैनेज करते. कैसे दिन भर का बताओ आपको क्या हो? मैं सुबह 6:30 बजे उठ जाता हूं।.
और फिर मैं जिम करने जाता हूं और जिम करने. के बाद मैं तुरंत नहा धो के जितना जल्दी. नहा धो के मैं खाना खा के यूनिवर्सिटी. जाता हूं। सबसे पहले मेरी क्लास लगती है. 9:00 बजे। तो 9:00 बजे यूनिवर्सिटी में. स्टूडेंट्स नहीं आते। स्टूडेंट्स करीबन. करीबन 11:00 बजे के आसपास आते हैं। तो मैं. 9:00 से लेकर 11:00 के बीच में अपनी जितनी. भी क्लास होती है वो कंप्लीट कर लेता हूं।. हम. उसके बाद स्टूडेंटों की प्रॉब्लम उसके बाद. कई बार ऐसा होता है कि लंच में थोड़ा फ्री. टाइम मिला तो अपने हॉस्टल चला जाता हूं।.
वहां थोड़ा रेस्ट कर लेता हूं। फिर उसके. बाद कॉलेजेस का रूट होता है। फिर इवनिंग. कॉलेज खुल जाते हैं। इवनिंग कॉलेजेस का. रूट होता है। प्रिंसिपलों से मिलना होता. है। स्टूडेंटों से मिलना होता है। करीबन. हजारों टाइप की समस्या होती है।. हम. फिर रात को मैं घर आता हूं 11:00 बजे। कई. बार घर जाना भी हो जाता है। वरना मैं. हॉस्टल में ही रुकता हूं।. हम. घर मैं 11:00 बजे पहुंचता हूं। तो सबसे. अच्छी बात है कि मतलब मेरे को घर में सबसे. अच्छी बात अब यह लगने लगी कि मम्मी समझने.
लगी कि हां लड़का थक के आया तो मैं अपने. हाथ से खाना खिला देती हूं। मतलब मेरे को. पर्सनली इमोशनली सबसे अच्छी बात यह लगती. है कि जब मैं घर जाता हूं तो मेरी मम्मा. मेरे को अपने हाथ से खाना खिला देती है।. तो बड़ा दिल को सुकून मिलता है। अच्छा. लगता है। और फिर मैं 12:00 बजे के करीब सो. जाता हूं।. मम्मी कभी कहीं कि यार ये सब पॉलिटिक्स. हॉलिटिक्स मत करो यार।. आपको सच बताऊं तो मेरे परिवार ने मेरे को. मना करा था इलेक्शन लड़ने के लिए. और.
2024 के बाद तो बिल्कुल ही मना कर दिया था. कि चुनाव नहीं लड़ना इस तरीके से और मेरे. दोस्त को दोस्तों का भी काफी मनोबल टूट. गया था।. मैं दो से तीन महीने परेशान रहा और कि. क्या करना चाहिए और. 17 फरवरी की बात है।. मैं कुंभ के मेले में गया। कुंभ के मेले. में मेरे को दो भाई मिले इलाहाबाद. यूनिवर्सिटी के। मैंने उनसे काफी देर बात.
करी। वो मेरे को कुंभ के मेले के घाट पर. ले गए। वहां मैंने मां गंगा का आशीर्वाद. लिया।. और उस दिन मैंने प्रण लिया कि मेरे को. दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र संघ का. अध्यक्ष बनना है। चाहे कुछ भी हो जाए और. आप विश्वास नहीं मानोगे कि मां गंगा का. आशीर्वाद एक ऐसा आशीर्वाद है कि उसको कोई. भी शक्ति काट नहीं सकती और आज मैं यहां पे. हूं तो अपने मां गंगा के आशीर्वाद से हूं।.
ईश्वर की भक्ति में क्या शक्ति होती है? मैं तो भगवान से बड़ा किसी को नहीं मानता. और आप विश्वास नहीं करोगे कि लोग यह कहते. थे कि. तेरे बस की चुनाव लड़ना नहीं है तू क्यों. चुनाव लड़ रहा है। मतलब अक्सर हर कैंडिडेट. को ऐसे कहते हैं डीमोटिवेट करते हैं। पर. सबसे अच्छी बात है कि डीमोटिवेशन मेरे लिए. सबसे बड़ी मोटिवेशन है कि कोई मेरे को. डीमोटिवेट करता है तो मेरे को मोटिवेटेड.
महसूस होता है। हम. तो मैं दिन में दो बार मंदिर भी जाता हूं. और भगवान से भी बात करता हूं। राम नाम का. जाप करता हूं। तो मेरे को इतनी शक्ति. मिलती रही राम नाम के जाप करने से, जाप. करने से, जाम करने से जितने मेरे विरोधी. थे, सब शांत हो गए। किसी में हिम्मत भी. नहीं थी बाल भी आका करने की। बाल भी बाका. करने की।. पहले इतनी बड़ी-बड़ी बातें करते थे कि तुम. चुनाव हार जाओगे। कि तुम्हारे पास ग्राउंड. पे कुछ नहीं है। तुमको तो आया हुआ कोई भी.
कई का लड़का हरा देगा। पर मेरे को अपने मै. माइक्रो मैनेजमेंट पे इतना भरोसा था कि. मैंने इतनी ज्यादा रिसर्च इतनी ज्यादा. माइक्रो मैनेजमेंट करा हुआ था कि मेरे को. कोई भी ताकत चुनाव नहीं हरा सकती थी।. ठीक है। दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट. बनने के बाद लड़कियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट. बढ़ जाती है सोशल मीडिया पे।. हां बिल्कुल आती है। कैसे मैसेजेस आते. हैं? सबसे वियर्ड मैसेज क्या है? मैं ये आपको ऑन कैमरा तो कैसे बताऊं पर जो.
भी बताने लायक सबसे वियर्ड मैसेज हूं कि. भैया आप बहुत क्यूट हो भैया आप प्लीज. हमारे कॉलेज में आओ आप आओगे तो आपकी. क्यूटनेस से ही सारी कॉलेज की प्रॉब्लम. खत्म हो जाएगी इस तरीके के काफी मैसेज. मैसेजेस आते हैं भैया बोल के भैया बोल के. आते हैं. तो बढ़ाई मेरे लिए ऑकवर्ड सिचुएशन बन जाती. है कि मैं इस चीज का क्या जवाब दूं. मतलब भैया भैया भी बोल दिया तो फिर ऑनको. नहीं नहीं ऐसा नहीं है।. किसी को डेट कर रहे हो? नहीं जी.
भाई हमारे यहां गैंग्स ऑफ़ वासेपुर एक. पिक्चर आई थी। उसमें एक डायलॉग था कि इतना. बड़ा हो गया तुम्हारा ब्याह नहीं हुआ।. इतना बड़ा हो गया तुम किसी डेट ही नहीं कर. रहे। मेरा ये मानना है कि. डर लगता है खाप पंचायत से।. नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं है। मेरा ये मान. मतलब मेरी खुद की एक फिलॉसफी है. और उसमें ये है कि मैं. किसी भी लड़की को डेट नहीं करता। मैं. लड़कियों को अपना फैन बनाता हूं। तुमने. किसी लड़की को डेट नहीं किया आज तक? नहीं।. एक भी लड़की को. एक भी लड़की को डेट नहीं करा। मेरा एक ही. मानना है कि लड़कियों को अपना फैन बनाओ।.
बस मैंने किसी भी लड़की को डेट नहीं करा. आज तक।. उनको अपना फैन बनाओ।. यू आर 21. 23. 23. या।. एंड यू आर वर्जिन एंड यू हैवेंट डेटेड अ. गर्ल।. हम्म।. तुमने किसी लड़की को डेट नहीं किया आज तक? नहीं करा मैंने आज तक।. ओएम जी।. दिल्ली यूनिवर्सिटी की लड़कियों देखो वैसे. भी इनकी प्रेसिडेंसी खत्म हो रही है। काफी. समय मिल जाएगा उसके बाद डर लगता है कि. प्रेसिडेंसी जाने के बाद समय ही समय होगा.
क्योंकि ताकत लोग लेकर आती है।. हम. लोग आपकी तरफ आते हैं आकर्षित होते हैं।. हम. और भीड़ व्यक्ति पर नहीं आती है। भीड़. कुर्सी पर आती है।. जी. जब तक राज है बल्ले का तब तक ठाट है।. हम. तो आज आप प्रेसिडेंट हो। जो लाखों की भीड़. है।. ये डराता है कि जब कुछ महीने बाद. प्रेसिडेंट नहीं होंगे. और कोई और आएगा. उसके पीछे भीड़ जाएगी. तो वो खालीपन वो समय. नहीं बिल्कुल भी नहीं डराता इस चीज से. क्योंकि मैंने लोगों का भाईचारा कमाया है.
हम. चाहे मैं अध्यक्ष होता या ना होता. हम. फिर भी जितने लोगों को मैंने कमाया है. जितने लोगों के लिए मैंने संघर्ष करा है. वो सब लोग मेरे पीछे होते वो सब लोग मेरी. मदद करने के लिए हमेशा तैयार हैं. हम. और रही बात सेवा का भाव है जिसको सेवा का. भाव होता है, चाहे वह कुर्सी पर हो या ना. हो, वह सेवा ही करता हमेशा चला जाता है।. ठीक है? बच्चों की बड़ी प्रॉब्लम होती है।. एडमिट कार्ड रोक देते हैं अटेंडेंस को. लेकर।.
हम्म।. आप सहमत हो जो ये कॉलेज यूनिवर्सिटीज करते. हैं। अभी यूनिवर्सिटी में 75% का रूल. निकाला था। 75% रूल से तो मैं सहमत नहीं. हूं। बट 33 के अराउंड आपको कंपलसरी होना. चाहिए क्लास रूम में जाना। 33% 33% होना. कंपलसरी होना चाहिए। क्योंकि क्या होता है. कि. हमारे को हर स्टूडेंट के परिवार की. सिचुएशन नहीं पता होती। हर स्टूडेंट के. जीवन में क्या बीत रहा होता है हमें नहीं. पता होता। स्टूडेंट अपने.
घर के लिए भी रोटी कमाने घर के रोटी के. लिए भी. बाहर मेहनत करता है। अपनी एक्स्ट्रा पार्ट. पार्ट टाइम जॉब करता है। कॉलेज के साथ-साथ. जॉब भी करता है। तो एक्स्ट्रा करिकुलर. एक्टिविटी भी करता है। कुछ स्टूडेंट. स्पोर्ट्स में अच्छे होते हैं। कुछ. स्टूडेंट्स तमाम अन्य चीजों में अच्छे. होते हैं। तो मेरा ये मानना है कि 75%. अटेंडेंस का रूल नहीं होना चाहिए। 33 का. तो होना चाहिए कि आप बेसिकली अपनी क्लास. में जाओ। क्लास में क्या पढ़ाई हो रही है? सिलेबस के बारे में नॉलेज हो। हर तरीके की.
बातों में नॉलेज हो। ऐसा ना हो कि आप पेपर. देने जा रहे हो। पेपर से दो-ती दिन पहले. पढ़ रहे हो. हम. और फिर आप. एक और सवाल बच्चे अक्सर कहते हैं कि. रिचेकिंग के नाम पर पैसे ले आते हैं।. हम. आपको रिचेक करवाना हो गलती यूनिवर्सिटी की. हो।. हम. फिर भी आपको पे करना पड़ेगा। इसके लिए. मैंने कई बार लड़ाई लड़ी है और मेरे को. पूरा विश्वास है कि यूनिवर्सिटी के. रिफॉर्म्स में यह चेंज आ जाएगा कि अगर. टीचर की गलती मिली रिचेकिंग में टीचर की. गलती मिली तो उसके पैसे रिफंड कर दिए.
जाएंगे और अगर सच में ही गलती रही तो पैसे. एज इट इज यूनिवर्सिटी के पास रहेंगे।. मुखर्जी नगर हुआ या नॉर्थ कैंपस हुआ। एक. कमरे का क्या भाड़ा होगा आसपास? एक कमरे का अगर आप वन बीएचके लोगे तो. अराउंड 67000 तो आपसे ले ही लेते हैं।. ओके. वन बीएचके की. सस्ता है तो नहीं बट फिर भी पीजी माफिया. रूल चलता है और साथ ही साथ यह भी चलता है. बट क्या होता है कि यूनिवर्सिटी के. अध्यक्ष के ऊपर यूनिवर्सिटी की यूनियन के.
ऊपर होता है वो किस तरीके से स्ट्रक्चर को. ठीक करके रखा हुआ है किस तरीके से उनके. ऊपर एक टाइटनेस बनाई रखी हुई है तो मैंने. अब की बार फुल टाइटनेस पुलिस वालों से. बातचीत करके पीजी के जितने माफिया थे उनसे. बातचीत करके कि भाई यूनिवर्सिटी में जैसे. आपका भी काम है बिल्कुल हम आपके काम की. रिस्पेक्ट करते हो बट एक आप माफिया ट्राइब. का स्ट्रक्चर मत क्रिएट करो कि ₹12,000 से. हम नीचे लेंगे ही नहीं। अपना कहीं और देख. लो। तो उस ट्रैप में स्टूडेंट को मत. फंसाओ। एक फीज़बल रख लो जो आपके लिए भी. प्रॉफिटेबल हो और स्टूडेंट के लिए आसान. हो।.
हॉस्टल में कमरा दिलाने के लड़के फोन करते. हैं।. बिल्कुल अभी कर ही रहे हैं। अभी भी फोन आ. ही रहा होगा हॉस्टल में कमरा दिलाने के. लिए।. पर मैंने अपने कमरे में तीन बेड लगा रखे. हैं। तो मैंने अपने अपने बेड के साथ-साथ. दो बेड पे और स्टूडेंटों को अपने साथ और. रखता हूं। जैसे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का. हम सुनते थे कि कई साल कई बच्चे 15-1 2020. साल से व टिके पड़े थे। जी. दिल्ली यूनिवर्सिटी में यही हाल रहा।. नहीं नहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी में ऐसा कुछ. नहीं है। मतलब जब स्टूडेंट अपनी पढ़ाई. पूरी कर लेता है. हम. तो यूनिवर्सिटी उससे चाबी ले लेती है या.
वो खुद ही अपनी चाबी देके चला जाता है।. दिल्ली यूनिवर्सिटी का कौन सा हॉस्टल है. जहां सबसे ज्यादा डिमांड होती है? यहां कमरा मिल जाए तो थोड़ा जिंदगी बढ़िया. है।. सारे हॉस्टल तो वैसे बराबर ही है बट जुबली. हॉल और गोय हॉल का इतिहास रहा है। वहां से. बड़े-बड़े महान व्यक्ति पढ़ के गए हैं। तो. इसलिए लोगों का सपना होता है कि हम उस. हॉस्टल में रहे। बस इसी वजह से या कोई और. भी वजह है? नहीं सिर्फ इसी वजह से कि हमारा एलुमिनाई. कनेक्ट थोड़ा स्ट्रांग हो जाएगा और वो तो. प्रवोस्ट के ऊपर होता है कि वो अपने.
हॉस्टल को किस रूप में रख रहा है, किस रूप. रेखा में रख रहा है वो तो प्रवोस्ट के ऊपर. भी होता है। बट तमाम जितना मैंने सुना है. इन दो हॉस्टलों की ज्यादा डिमांड रहती है।. दिल्ली यूनिवर्सिटी के किस हॉस्टल में. सबसे अच्छी चाय और खाना मिलता है।. सारे सच बताऊं तो सारे हॉस्टलों में बराबर. में बराबर मिलता है। मैंने सारे हॉस्टलों. की चाय पी है। ऑलमोस्ट बराबर है।. अच्छी होती है पीने लायक? हां बिल्कुल. पीने लायक होती है। ऐसा लगता है मतलब मेरे. को तो घर से अच्छी चाय वहां की लगती है।. मतलब मेरे घर पे इतनी. वैरायटी ऑफ़ फूड नहीं बनता होगा जितना एक. हॉस्टल के मेस में बनता है।. पहली बात लड़के सुनो अपने हॉस्टल की तारीफ. कर रहा है वो। आमतौर पर लोग गाली देते.
हैं।. नहीं नहीं बहुत घटिया खाना होता है भैया।. बाहर खाना पड़ता है।. देखो क्या होता है ना जी उनकी यूनिवर्सिटी. में स्टूडेंट एक्टिविज्म नहीं होगा। हम. इसलिए ऐसी चीज़ हो रही है। एडमिनिस्ट्रेशन. का ज्यादा दबाव है। बट मैंने इस चीज़ पे. पूरी सख्ताई कर रखी है कि अगर हॉस्टल में. खाना मिलेगा तो फर्स्ट क्लास मिलना चाहिए।. क्योंकि आपका हॉस्टल 100 सालों से भी ऊपर. चलता आ रहा है और यूनिवर्सिटी को भी 100. साल पूरे हो चुके हैं। तो इस तरीके की कोई.
भी समस्या ना आए जो हमारी यूनिवर्सिटी का. यूनिवर्सिटी को कॉलर पे दाग लगाएं। हम्म।. आपने कहीं यहां कहा था कि डिप्रेशन शब्द. कम से कम बोलना चाहिए।. हम्म।. क्यों ऐसा कहा था? डिप्रेशन तो आजकल. डिप्रेशन, एंग्जायटी ये युवाओं में बड़े. फेमस टर्म्स हैं।. हम्म।. ये क्यों आपने कहा कि नहीं बोलना चाहिए? देखो जी जब मैं अपना चुनाव लड़ रहा था. हम. तो हमारे मेनिफेस्टो में एक बहुत बड़ी बात. थी कि हम हर स्टूडेंट के लिए एक काउंसलिंग.
मेंटल हेल्थ काउंसलिंग चालू चालू करेंगे।. क्योंकि यूनिवर्सिटी में कुछ केस सुसाइड. के आ चुके थे। तो उसके बाद मैंने दो से. तीन बार मैराथॉन भी कराई और यूनिवर्सिटी. के यूनिवर्सिटी मेंटल. हेल्थ काउंसलर्स भी यूनिवर्सिटी में. एक्टिवेट करे और वो आज के टाइम जाते भी. हैं। तो मेरा यह मानना है कि अगर आप किसी. नेगेटिव शब्द को बार-बार बोलोगे तो आप उस. शब्द को अपने रियल लाइफ में कनेक्ट करना. शुरू कर दोगे। कुछ भी दिक्कत होगी मेरे को.
डिप्रेशन हो रहा है।. मैं बीमार हो गया। मेरे को डिप्रेशन हो. रहा है। मेरे को मार्क्स कमाए, मेरे को. डिप्रेशन हो रहा है। आप खुद समझो कि आप एक. मैनिफेस्टेशन भी कोई चीज होती है कि आप. किसी चीज को बार-बार मैनिफेस्ट करेंगे तो. वो आपकी चीज से आपकी लाइफ से अडप्ट होने. लगेगी।. तो मेरा मानना है इस तरीके के कोई भी. नेगेटिव शब्द नहीं बोलने चाहिए। क्योंकि. आप बार-बार एक चीज को बोलोगे तो आपकी लाइफ. के साथ अडप्ट हो जाएगी।. ठीक है।. दिल्ली यूनिवर्सिटी में लड़कियों की. सुरक्षा पर आपने सीसीटीवी और पिंक बूथ की. बात कही थी।. जी।.
कोई ऐसी घटना दिल्ली यूनिवर्सिटी की. लड़कियों को लेकर जो आपको हिला गई अंदर. तक? कि मैं तो तमाम ऐसी बातें सुनता था कि. यूनिवर्सिटी की लड़कियां हम. यूनिवर्सिटी में घूम नहीं सकती थी रात के. 8:00 बजे के बाद. हम. तो लोग आते थे बाइक से छेड़ के जाते थे. गाड़ियों में से छेड़ के जाते थे तो इस. तरीके की काफी बहुत बड़ी घटनाएं होने लगी. थी एक लड़की तो दो-तीन दिन के लिए गायब भी. हो गई थी तो उस दिन उस दिन से मतलब मेरे. को दिल में कनेक्ट हुआ कि इस तरीके की.
समस्या यूनिवर्सिटी में नहीं होनी चाहिए. मैं जैसे ही डसो का अध्यक्ष बना मैंने 2. से 3 दिन के अंदर दिल्ली सरकार से 2 से 3. महीने के अंदर दिल्ली सरकार से बात करी कि. मेरे को यूनिवर्सिटी में पिंक बूथ बनाकर. दो मेरे को नहीं पता और अगर आपसे नहीं. बनता तो हम आपको बना कर देते हैं। दूसरी. बात कि यूनिवर्सिटी. 100% टॉप क्लास कैमरा के अंदर चलनी चाहिए।. ऐसा नहीं होना चाहिए कि यूनिवर्सिटी में.
कैमरा ही नहीं है। आप सोचो देश की सबसे. बड़ी यूनिवर्सिटी वहां पर कोई भी घटना हो. जाए तो पूरे देश में मैसेज जाता है।. तो मैंने पूरी यूनिवर्सिटी में 1000 प्लस. कैमरा लगाए। ऐसा नहीं है कि नॉर्थ नॉर्थ. कैंपस में साउथ कैंपस में भी हर कॉलेज के. बाहर आज के समय कैमरा है। और पिंक बूथ भी. दो बन चुके हैं। तो आज के समय जो पहले एक. ट्रेंड चलता था कि यार मत जाओ वहां पे लोग. छेड़ने लगेंगे। ऐसी वैसे वो सब ट्रेंड बंद. हो गया।. लुसू का बजट कितना है? दूसों का बजट अबकी. बार तो हमको ₹35 लाख ही मिला था। हम.
कम लगा. कम है।. कितना होना चाहिए आपके हिसाब से? मेरे हिसाब से वन सीआर के आसपास तो 200 का. बजट होना चाहिए।. कम से कम।. कम से कम।. आप डेढ़ करोड़ चुनाव लड़ो तो कम से कम 1. करोड़ तो मिलना चाहिए। नहीं हम तो चुनाव. तो एक अलग प्रक्रिया है बट यूनिवर्सिटी. में नई-नई चीजें करने के लिए कुछ नए-नए. इनोवेशंस लाने के लिए आपको फंड की. रिक्वायरमेंट होती है।. जैसे लड़का लोग पूछेगा जो नहीं लड़ता होगा. चुनाव या नॉर्मल लड़का होगा. हम्म. कि डुसू अध्यक्ष को ₹ मिलता है.
हम्म सच्चाई है. तो फिर आदमी इतना पैसा खर्चा करके चुनाव. क्यों लड़ रहा है? ताकत के लिए. ताकत के लिए. ताकत कैसी होती है? ताकत क्या होती है? आप. तो हो दूसरे अध्यक्ष क्या ताकत का एहसास. होता है? देखो ताकत का मजा अलग ही होता. है।. जैसे क्या मजा है आपका? डसू अध्यक्ष आप हो. तो इसका क्या मजा है? तो बहुत ही खुशी होती है कि आप इतने लाखों. स्टूडेंट को रिप्रेजेंट कर रहे हो। देश भर. में आपका नाम है।. और वो ताकत ऐसी होती है कि जो यूनिवर्सिटी. का वाइस चांसलर अपॉइंट हो के आता है ना.
उसको भी आप हिला सकते हो। आप यूनिवर्सिटी. के दूसरे वाइस चांसलर होते हो।. यूनिवर्सिटी में कुछ भी हो रहा होता है तो. आपकी नॉलेज में होता है। साथ ही साथ देश. से आपको लोग मिलने आते हैं। देश भर से लोग. आपको कनेक्ट करते हैं। और पहले तो ऐसा. होता था कि कोई भी यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष. चुन के आता था। यूनिवर्सिटी में जब भी. पैनल आता तो वो सेंटर के टॉप लीडर्स से. मिलते थे।. तो मेरे को तो.
कुछ जब मेरे सीनियर्स लोग चुनाव लड़ा रहे. थे तो उनकी आज भी एक बात मेरे को याद है।. अबे आर्यन अगर अध्यक्ष बन गया ना. तो होम मिनिस्टर से मिलने जाएगा।. प्रधानमंत्री मोदी जी से तेरी बात होगी।. तो इस तरीके की बातें मतलब आप जब किसी. इतने बड़े. मिले अमित शाह मोदी से? नहीं अभी तक तो. नहीं मिला बट मेरे को पूरा विश्वास है मैं. आगे जरूर मिलूंगा।. ज्यादा पसंद कौन है दिल्ली यूनिवर्सिटी के.
अध्यक्ष को? मोदी जी या अमित शाह. दोनों. एक नाम लेना होता है। रोहित शर्मा विराट. कोहली में एक फेवरेट होता है। सलमान खान. शाहरुख खान में एक फेवरेट होता है।. नहीं जी ऐसा नहीं है।. दोनों दोनों पसंद है। एक जिससे हम अपनी. पर्सनालिटी ज्यादा रिलेट कर पाते हैं।. अगर देखा जाए. तो. सच बोलूं तो मेरे को दोनों ही. अरे भाई दोनों. दोनों का दोनों का तरीका आप मेरी बात. समझो। दोनों का. बीजेपी का ही विंग है आपका या एबीवीपी. नहीं जी ऐसा नहीं है आप. चलो आरएसएस से जोड़ लेते हैं आरएसएस भी.
बीजेपी का ही हो गया. सब घूम टेटल के एक ही लोग कहा इधर से. पकड़ो उधर से पकड़ो. तो आपके अपने लोगों में छांटने कह रहे हैं. तो इसलिए हम कह रहे हैं तो इसका मतलब. दोनों पसंद है हम ये जान रहे हैं कि आपको. दोनों पसंद है. दोनों में से कौन ज्यादा करीब नजर आते हैं. आपको अपनी पर्सनालिटी के हिसाब से या थॉट. प्रोसेस के हिसाब से क्योंकि दोनों अलग. लोग हैं. दो बहुत अलग लोग हैं सिमिलर होते तो मैं. ना फंसाता. देखो मेरे को हमारे माननीय. गृह मंत्री. गृह मंत्री जी ज्यादा पसंद है।. अमित शाह में क्या पसंद है? देखो जी जब से हमारा देश का.
कॉन्स्टिट्यूशन. बना है जब से लेकर अब तक. हम. मेरे को नहीं लगता कि हमारे देश को इससे. बेहतर होम मिनिस्टर मिलेगा।. क्यों लगता है ऐसा? मैं आपको एक बात बोलना चाहता हूं। मैं. आपसे पूछना चाहता हूं. हम. कि आपसे अमित शाह जी से पहले जितने भी होम. मिनिस्टर है क्या आपको उन सबका नाम याद. है? सरदार पटेल हमको याद है ज्यादा बड़े. और उसके बाद. उसके बाद बीच में आए सुशील कुमार शिंद जी. थे कई लोग और भी आए बट अमित शाह का नाम. ठीक था जलवा ज्यादा बड़ा हुआ तो.
लालकृष्ण आडवाणी. हम. वो गृह मंत्री थे या तुम्हारी पार्टी के. थे. बिल्कुल तो मैं आपको वही कहना चाहता हूं. कि हमारे देश के आदरणीय अमित शाह जी जो. होम मिनिस्टर हैं वो एक मां का रूप हमारे. वो एक मां के रूप में काम करते हैं. कि घर में जब एक मां होती है। वह अपने. पूरे घर को सुरक्षित रखती है। वह दिल से. नरम भी होती है और स्ट्रिक्ट भी होती है. कि सही के साथ सही होना चाहिए, गलत के साथ.
गलत होना चाहिए। जैसा कि आप देख सकते हो. कि देश में इतनी सारी प्रॉब्लम्स थी धारा. 370।. लोग यह कहते थे अगर धारा 370 हटेगी तो. विश्व युद्ध हो जाएगा। मेरे को एक बात का. जवाब दो कि धारा 370 हटी भी और पत्ता तक. नहीं हिला। लोगों ने बड़े-बड़े दावे करे. थे। यह हो जाएगा, वो हो जाएगा। आप खुद. बताओ शुभांकर जी।. धारा 370 हटी तो पत्ता भी इधर-इधर नहीं.
हुआ।. ठीक है। अमित शाह, अमित शाह की प्रशासनिक. क्षमता पर कोई डाउट नहीं कर रहा। उन्होंने. कई सारी चीजें की है बोल्ड फैसले जिसका. इंपैक्ट बीजेपी को भी फायदा हुआ। बीजेपी. का मत सोचो आप। हम. आप यह सोचो हमारे देश को कितना फायदा हुआ।. ठीक है। उन्होंने कई बड़े फैसले लिए। नो. डाउट अबाउट।. वो एक मां का एक मां के रूप की तरह है. हमारे देश के लिए।. हम. कि कोई भी घटना होगी तो कुछ भी हो। अगर.
आपको भी जीवन में कोई परेशानी होगी ना तो. आप अपनी मां से जाकर जरूर बात करोगे। मां. खुद ही महसूस कर लेती है कि हां मेरे बेटे. पे ये दिक्कत चल रही है।. लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी अध्यक्ष से अभी. मां की मुलाकात नहीं हुई। नहीं जी अभी तक. नहीं हुई. मिलने का मन है. बहुत ज्यादा. अमित शाह से ज्यादा मन है या मोदी जी से. दोनों से. एक ही ऑप्शन एक मिलता. नहीं नहीं जी नहीं. पहले. दोनों से मिलने का बहुत मन है. चलो मान लो. क्योंकि मैंने क्योंकि मैंने पहले ऐसा. देखा है. कि जो भी यूनिव यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष. चुन के आता था.
वो दोनों से मिलता था. हम. और बड़ी आइकॉनिक पिक्चर होती थी. कि. दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र संघ का. अध्यक्ष और उसकी पूरी यूनियन. प्रधानमंत्री मोदी जी से और अमित शाह जी. से मिल मिले और मेरे हिसाब से बड़ी अच्छी. बात है। उससे युवाओं को प्रेरणा मिलती है।. हम. आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने हमारे देश इतने. विशाल देश को छोटा सा कर दिया है। आप पूछो. कैसी. कि हमारा देश में अगर पहले किसी भी इंसान.
को दूसरे स्टेट में जाना होता था या कहीं. पर भी जाना होता तो कम से कम 4 से 5 दिन. में उसका काम पूरा होता था। वो काम आदरणीय. मोदी जी ने. दो से 3 घंटे में काम कैसे बदल गया। मैं. आपको बताता हूं कि देश में 90 नए एयरपोर्ट. खुल गए। जब बचपन में गांव में हम मैं छत. पर सोता था तो गांव के बच्चे ऊपर से. एयरप्लेन को जाते हुए देखते थे तो बड़ा.
अच्छा लगता था। अब वही आम नागरिक जो काम 4. से 5 दिन में करता था वह काम. दो से 3 घंटे में पूरा कर देता है। आपने. कभी सोचा था भारत देश में बुलेट ट्रेन. चलेगी? आपने कभी सोचा था भारत देश में. हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी? एक बात और हमारे. होम मिनिस्टर साहब आदरणीय अमित शाह जी ने.
एक प्रण लिया था कि वह देश में से. नक्सलवाद बिल्कुल खत्म कर देंगे। नक्सलवाद. हमारे देश के लिए एक कैंसर की बीमारी है।. कैंसर की बीमारी की तरह है कि वह हमारे. देश को अंदर से ही खत्म कर रही थी।. 2024 में. माननीय अमित शाह जी ने प्रण लिया कि वह. देश में से नक्सलवाद खत्म कर देंगे।. 2026 में.
उन्होंने हमारे देश से नक्सलवाद को. बिल्कुल खत्म कर दिया। कुछ नक्सलिनियों ने. अपने आप ही हथियार छोड़ दिए।. वरना. जिसको जिस तरीके से जवाब चाहिए था उसको उस. तरीके से जवाब देकर नक्सलवाद को भारत से. खत्म कराया।. और मेरा यह मानना है. कि स्टूडेंट्स को स्टूडेंट पॉलिटिक्स में. जरूर आना चाहिए हम।. जिससे उनको लाइफ में बहुत कुछ सीखने को.
मिलता है और साथ ही साथ देश के लिए आवाज. उठाने को का भी मौका मिलता है।. ठीक है।. चलो एक और यहां फंस गए। आप नहीं बता रहे. हो। एक और ऑप्शन देते हैं। हो सकता है. इसमें आप बता दो।. जी।. खट्टर साहब या सैनी साहब. देखो दोनों का एक अलग जरिया है काम करने. का।. मनोहर लाल खट्टर जी जब हरियाणा के सीएम. बने थे हम. उससे पहले हरियाणा में मुश्किल से एक दो. सीट आती थी भाजपा सरकार की. हम. बड़े-बड़े लोग सीएम रहे थे हरियाणा में जब.
मोदी जी लोकसभा का चुनाव जीते. हम. और हमारे देश के प्रधानमंत्री बने तो अगली. जिम्मेवारी हरियाणा की थी।. हरियाणा में भाजपा की सरकार आई और मनोहर. लाल खट्टर जी ने बहुत अच्छे से सरकार चलाई. कि पहले आपने खुद सुना होगा कि हरियाणा के. जितने भी पुराने सीएम रहे हैं तो उनकी देश. विदेश में कोठियां होती थी। आप खुद बताओ. आपने ऐसा सुना नहीं सुना।. हम हम. कि नौकरियों के मामले में कितनी धांधली.
होती थी। घर का ही आदमी नौकरी लगता था। आम. आदमियों को तो छोड़ो। ऐसा होता तो नहीं. होता था। आप खुद बताओ। मैं आपसे पूछना. चाहता. इतना डिटेल नहीं पढ़ा हरियाणा को मैंने।. मैं यूपी से आता हूं तो बहुत यह सुना है. मैंने कि जलवा था पैसा खूब छपा था. हां. कोठी. ऐसा आपने सुना था. पर खट्टर जी के समय में ऐसा कुछ भी नहीं. था. खट्टर जी हटाए भी तो गए. खट्टर जी की सुनो तो खट्टर जी के समय में. ऐसा कुछ भी नहीं था. किसी भी आम घर के नागरिक के घर पे एक. चिट्ठी चली जाती थी कि आपका बेटा नौकरी लग. चुका है.
फिर हटाए क्यों गए. उनको सेंटर में मौका दिया गया. किसान नाराज सेंटर फिर वही बात उनको बड़ी. जिम्मेदारी दी सेंटर की। गुड़ खाकर. गुलगुले से परहेज नहीं करते।. नहीं नहीं जी उनको बड़ी जिम्मेदारी दी गई. सेंटर में। मैं सैनी जी के बारे में बताना. चाहता हूं. कि उनके चेहरे पर हमेशा कमल खिला रहता है।. उनसे ज्यादा एक्टिव सीएम. किसी भी राज्य में नहीं है।. चलो ये बोल के आपको टिकट मिल जाए।. नहीं नहीं जी नहीं। सुनो तो मेरी बात।. हमारे माननीय होम मिनिस्टर साहब ने ये बात.
बोली थी कि सैनी जी हमको इतने इतना ज्यादा. काम देते हमको समझ ही नहीं आता वो इतना. काम कैसे पूरा कर देते हैं और पूरा करके. भी दिखाते हैं।. ठीक है? हरियाणा में नशा प्रॉब्लम हो गया. है. क्योंकि पंजाब में तो बड़ी बातें होती है।. पंजाब में नशा बहुत ज्यादा हो गया है और. बड़े सीरियस को लेके लोग हैं। पंजाब से. सट्टा हरियाणा है। कल्चर सेम है। काफी. लड़के जो मिले मुझसे वो मुझसे कहते हैं कि. नशा एक बड़ा इशू है। आपको लगता है युवाओं. में नशा और पंजाब हरियाणा में नशा ये बड़ा. फैक्टर है।.
देखो जी पंजाब की सिचुएशन तो नहीं पता. हम. बट हरियाणा में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।. हम्।. हरियाणा के युवा खेल में बहुत बिलीव करते. हैं।. हम्. और आज के समय तो हरियाणा में हरियाणा में. एक नया टाइप का चेंज आया है कि स्टूडेंट्स. बहुत पढ़े लिखे हो रहे हैं।. हम. यूपीएससी क्लियर करते हैं, बड़े-बड़े पेपर. क्लियर कर लेते हैं। तो अब एक ट्रेंड चेंज. आ गया हरियाणा में। और मेरा यह मानना है. कि आने वाले समय में हरियाणा नंबर वन. स्टेट हो जाएगी हमारे भारत की।. हरियाणा सारे खिलाड़ी क्यों निकलते हैं?
जैसे आप खुद फुटबॉल खेलते थे।. हम्म।. तो खिलाड़ियों और हरियाणा क्या कनेक्शन. है? जैसे आपने मेरे से सवाल पूछा कि हरियाणा. से ही क्यों इतने खिलाड़ी निकलते हैं? तो. मेरा यह मानना है प्योर खाना है वहां पे।. दूध दही का खाना नंबर वन हरियाणा इस तरीके. की राइमिंग चलती है वहां पे और पूरा पूरा. दिन माता-पिता खेत में मेहनत करते हैं. सिर्फ और सिर्फ कि उनका बेटा देश के लिए. मेडल लेके आए और बहुत ही अच्छा लगता है कि.
मेरे दादाजी खुद पहलवान रहे। उन्होंने. मेरे बड़े पापा मेरे पापा को भी पहलवानी. कराई और उन्होंने हमको भी स्पोर्ट्स में. डाला।. स्पोर्ट्स में डालने से एक किसी भी. स्टूडेंट के लाइफ में काफी चेंजेस आ जाते. हैं कि वो एक एक्टिव रहता है। वो गलत. चीजों के ट्रैक में नहीं जाता।. आप भी तो स्पोर्ट्स कोटा से शायद।. बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल।. क्या नेशनल खेले थे आप? नहीं मैंने फिफ्थ क्लास से मैं फुटबॉल खेल. रहा हूं।. हम. और नाइंथ में मैंने इंडिया को रिप्रेजेंट.
करा था ऑस्ट्रेलिया में। जैसे आपने चकदे. इंडिया मूवी देखी होगी। हम. तो चक इंडिया मूवी में आपने यह देखा होगा. जब भी नेशनल एंथम बजता है और जब तिरंगा. ऊपर लहरा रहा होता है और जब कोई भी उसे. देखता है तो एक घूसम्स आ जाते हैं। मन में. गर्व की गर्व महसूस होता है कि हम भारत के. नागरिक हैं। और मैंने भी ऐसी चीज महसूस. करी. कि मेरी जर्सी के पीछे इंडिया लिखा हुआ. था। 11 नंबर की जर्सी थी। मेरे सामने. तिरंगा लहरा रहा है और मैं ग्राउंड में. खड़ा होकर नेशनल एंथम गा रहा हूं। तो बहुत.
ही गर्व का महसूस पल था। उसके बाद मैंने. 10थ में नेशनल खेला, 11th में नेशनल खेला।. उसके माध्यम से मेरा दिल्ली यूनिवर्सिटी. में स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन हो गया था।. ठीक है। दादा जी आपके खाप के अध्यक्ष रहे. हैं।. जी।. 17 गांव के प्रधान।. 17 गांव के प्रधान दादा जी जिसे हम खाप. कहते हैं। अब खाप का नाम जैसे आता है. दिमाग में एक तस्वीर आने लगती है।. जो हमने मीडिया के जरिए सुनी है।. उलजुलूल फैसलों की।. जी।. अजीबोगरीब बातें।. जी।. आप ख्वाब के मुखिया के पोते हैं।. कोई चीज बताइए जो ख्वाब को लेकर गलत. परसेप्शन लोगों के ज़हन में हो। कि लोग ऐसे.
सोचते हैं कि खाप में कोई भी डिसीजन आता. है तो वो फेवरेबल होता है या फेवरिज्म में. होता है। किसी भी मतलब कि गांव से गांव. कनेक्ट होता है तो उसके फेवर में डिसीजन. दे देते हैं। पर मेरे हिसाब से ऐसा मानना. नहीं है। जब खाप पंचायत होती है जब पंचायत. में कोई भी डिसीजन आता है तो वो 100%. जो भी सही होता है उसी के ही फेवर में. डिसीजन आता है। गलत के फेवर में कभी. कई सारे खास तौर पर लड़के लड़कियों के. मामले में.
बिल्कुल बिल्कुल पंचायत के ऐसे-से फैसले. आते हैं सुनकर आदमी को लगता है यार क्या. लॉजिक है. जिसने रेप किया उससे शादी करा दो. नहीं या. लड़कियों को लेकर खासतौर पर खाप पंचायतों. के फैसले शादियों में खासतौर पर एक्स्ट्रा. अफेयर्स के तौर पर. तो देश के कानून से थोड़े अलग कानून के. फैसले आते हैं। अब आप क्योंकि एजेंसी. पीढ़ी से हो आप दिल्ली भी रहे। इतने सारे. कॉलेजेस में आप गए होंगे देखा होगा।. आपको ज्यादा एक्सपोज़र मिला होगा वहां के. मुकाबले।. इतना एक्सपोज़र लेने के बाद जब आप पीछे खाप. को देखते हो। हम्।. लड़के लड़कियों के कॉन्टेक्स्ट में। उनके.
फैसले सही लगते हैं? अह देखो जी, क्या होता है कि कई बार यह. बातें हमको नहीं बताई जाती कि कई बार. फैमिलीज़ भी आपस में कॉम्प्रोमाइज कर लेती. हैं। इसलिए खाप को ऐसे नतीजे देने पड़ते. हैं कि क्या होता है कि वो खाप में ही. मंजूर कर लेते हैं कि हमारे को कोई. परेशानी नहीं है। तो जभी खाप पंचायत इस. तरीके के डिसीजन देती है। वरना कभी भी ऐसे. डिसीजन नहीं आते। मैंने तो कभी भी नहीं. ऐसा सुना कि खाप पंचायत गलत डिसीजन दे रही. है।. ओके मतलब बहुत सारे के साथ लव स्पेशली लव.
मैरिजेस में. जहां पर फैमिली खिलाफ है।. हम. अब देश का कानून कहता है अगर आप एडल्ट हैं. तो आप अपना हिस्सा देख लीजिए।. हम. परिवार थोड़ा खिलाफ बैठा है।. जी. उसमें ख्वाब ने कोई फैसला दे दिया।. हम. तो ये लव मैरिजेस वाले केसेस आपको सही. लगते हैं ख्वाब के या देश के देश को. संविधान से चलना चाहिए। आपकी जरूरत थी।. देखो जी दोनों का नजरिया अलग-अलग है. हम. और दोनों के नजरिए पे जाएंगे तो बहुत ही. अलग-अलग तरीके की बातें होने लगेगी।. हम. पर मेरा ये मानना है जहां पे फैमिली. परिवार और जो कपल है वो जहां पर खुश है.
उसको उस तरीके से आगे लाइफ में बढ़ना. चाहिए।. चाहे किसी कास्ट रिलीजन शादी कर ले।. बिल्कुल जी।. ठीक है।. मोदी सरकार की आप बहुत तारीफ कर रहे थे।. हमको लगा कुछ टफ इशज़ भी उठा लेते हैं।. जी।. नोटबंदी के टाइम में आप 14 साल के रह गए।. न 10थ में. बिल्कुल।. क्या माहौल था उस वक्त ये कुछ याद है? [गहरी सांस लेने की आवाज़] बिल्कुल जी याद. है कि लोग. ऐसे कह रहे थे कि पूरे देश को बूढ़े बूढ़े. बूढ़े लोगों को लाइनों में लगा दिया है।.
हम. और पता नहीं नोटबंदी क्यों कराई। इस तरीके. की बड़ी-बड़ी बुरी-बुरी बातें सुनने को. मिलती थी। हम. बट शुभांकर जी मेरे को एक जवाब दो। हम. जो देश पाकिस्तान जैसा देश जो किराए पे. चलता है. हम. चाइना और यूएसए उसको किराए पे चलाते हैं. हम. पाकिस्तान में नकली नोटों की इतनी बड़ी. खेप बन गई थी इतने नकली नोट बन गए थे कि. वो इंडिया ट्रांसफर करने वाले.
ये तो आपने धुरंधर में देखा होगा. नहीं धुरंधर में भी देखा है जी पर मैंने. जितनी भी रिसर्च करी है जितना भी मैंने. पढ़ा है ऑनलाइन ऑनलाइन के साथ-साथ जितनी. भी मैंने रिसर्च करी है तो यह बात. हां मतलब मतलब ऑलमोस्ट ये बात सच है।. कुछ लोग थे वहां से जो पाकिस्तान से भेजते. हैं नकली नोट।. हां।. लेकिन देखिए आप धुरंधर में होंगे।. नहीं धुरंधर में भी देखा है पर उससे पहले. भी मैंने कई जगह ऐसी बातें सुनी है। तो जब. मैंने धुरंधर मूवी देखी तो उससे भी काफी. कनेक्ट हो गए थे। तो उसके बाद मैंने. प्रॉपर प्रॉपर रिसर्च करी इस चीज के बारे. में।. लेकिन धुरंधर से हिस्ट्री नहीं पढ़नी देश. को।. हां ये बात तो सच है।.
बहुत सारे लोग सब कुछ यकीन मान लिए कि. सारा सही है।. वो तो जी अब तो उसके बारे में तो मैं क्या. बताऊं। वो तो मूवी है। वो तो लोगों का. जरिया उसको सच माने या उसको एंटरटेनमेंट. के माध्यम से माने। बट मैंने उसके बाद. रिसर्च करी तो आप एक खुद बताओ कि जो देश. किराए पे चल रहा है पाकिस्तान जैसा देश. किराए पे चल रहा है वो अगर हमारे देश में. हम. नकली नोट भेज दें और हमारे देश में बॉम्ब. ब्लास्ट वगैरह कराएं तो उससे हमारे. हिंदुस्तान को कितना बड़ा नुकसान है।. बट उससे कुछ बदला क्या? मतलब आतंकवाद भी.
जिंदा रहा। उस टाइम गरीब लोग लाइन में भी. लगे। नोटबंदी के टाइम में करप्शन इतना था।. बैंक वाले पीछे से पैसा भी दे रहे थे।. मेरे को आप एक एक चीज का जवाब दो. कि अगर हमारे भारत में. कई तरीके की समस्या आ जाती बड़े-बड़े बम. ब्लास्ट हो जाते। बड़ी-बड़ी तकलीफें आ. जाती. तो जितने ये बूढ़े माता-पिता है ये क्या. हॉस्पिटल की लाइन में नहीं खड़े होते? पर अगर ये 15 दिन बैंक की लाइन में खड़े. हो गए तो क्या बुराई है? देशभक्ति।. नुकसान से नुकसान से ज्यादा अच्छा तो यह.
है कि वो नुकसान होने से पहले चीजों को. बचा लें। देशभक्ति में आप कह रहे हो कर. बिल्कुल जी. जैसे ई20 में करवा रहे हैं तेल भरवा रहे. हैं. क्या जी. जैसे तेल भरवा रहे हैं ई20 वाला. देखो जी. देशभक्ति के लिए. उसके बारे में मेरे को अभी इतनी नॉलेज. नहीं है उसके बारे में मैंने अभी इतनी. रिसर्च. चलो राम मंदिर पे बात कर लेते हैं. जी. राम मंदिर बीजेपी की. हम. जड़ का टॉपिक है।. जी. आई एम श्योर आपकी भी आस्था का विषय रहा. होगा और सबके लिए है।. बीजेपी की बात मत करो। सबके देश के लिए. देश के लिए. राम मंदिर मेरी भी आस्था का केंद्र है। तो.
मुझे कोई संकोच नहीं है।. मैं तो वहीं का रहने वाला हूं। राम मंदिर. सब कुछ मेरा रहा। बहुत खुशी हुई मुझे।. राम मंदिर में चोरी होने की खबर जब आपने. पढ़ी. हम. दिल में तकलीफ हुई यार कि यार 500 साल. इंतजार किए. मंदिर बन जाए हम. और 5 साल में बेईमानी शुरू हो गई।. देखो जी. और जिस विचारधारा से आप आते हो. हां. आरएसएस की. उसी विचारधारा के चंपत राय वहां थे। हम. जिनकी लीडरशिप में नीचे सब लूटे खाए।. बहुत सारे लोगों ने आरएसएस पे भी सवाल.
उठाया कि यार. आरएसएस की विचारधारा वाले लूटखसूट कर रहे. थे और कई लोगों को शौक लगा कि यार जिन. लोगों ने संघर्ष किया उन्होंने ही लूट. लिया। आपको कैसा लगा? देखो जी जो आप राम मंदिर के अंदर चोरी की. बात कर रहे हो. उसके ऊपर बड़े-बड़े फैसले लिए हैं. हम. और वो फैसले ठीक भी हैं।. हम. जो आप चंपत राय जी का नाम ले रहे हो।. उन्होंने अपना रेिग्नेशन भी दे दिया है।. हम. तो ठीक है। मेरे को पूरा विश्वास है कि.
हमारे देश की सरकार उस पर ठीक डिसीजन लेगी. और लेबल लिए हैं। हम. पर मेरे को आप एक बात बताओ हमारे देश को. विदेश में राम नाम से जाना जाता था।. हमारे देश को यह कहा जाता है ये तो प्रभु. श्री राम का देश है।. हम. उसमें 500 साल राम मंदिर की लड़ाई चली।. हम मैं बिल्कुल मानता हूं कि सुप्रीम. कोर्ट ने फैसला दिया। हम. सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर का फैसला. दिया। पर आप खुद बताइए सुप्रीम कोर्ट के.
कई ऐसे फैसले हैं. हम. जो आज भी लोग उस पर अमल नहीं करते।. हम. तो हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा और. बड़े-बड़े लोग कहते थे कि देश में भूकंप आ. जाएगा। ऐसे हो जाएगा, वैसे हो जाएगा। मैं. कहना चाहता हूं कुछ भी नहीं हुआ। राम. मंदिर वहीं खुला जहां राम मंदिर को खुलना. था। और मैं आपको एक खुद का भी एक. एक्सपीरियंस बताता हूं कि मैं 2023 में. मेरा एक अयोध्या का दोस्त था। मैं उसने.
मेरे को राम मंदिर बुलाया था। उस टाइम पर. राम राम मंदिर की कंस्ट्रक्शन चल रही थी. और जब मैं. राम जी के दर्शन करने गया तो आप विश्वास. नहीं करोगे। एक छोटे से टेंट में. राम जी को रखा हुआ था। दिल को पीड़ा लगी।. उस दिन दिल को पीड़ा पहुंची कि यह क्या हो. रहा है? बहुत दुख हुआ कि हमारे 500 साल से जिस चीज. के लिए. लड़ाई चल रही थी कि राम मंदिर राम मंदिर.
बना उनको एक छोटे से टेंट में रखा गया।. जब चोरी हो गई बड़ा मंदिर बनने के बाद तब. तो उसके ऊपर सरकार ने बिल्कुल कड़े सख्त. डिसीजन लिए और मेरे को पूरा विश्वास है कि. उसमें जो जो आरोपी होंगे उनको पकड़ा. जाएगा।. और चंपत जी तो आप ही लोग के विचारधारा से. थे। आप बीजेपी से चलो दूर घुवाते हो अपने. आपको। आरएसएस तो आप ही का है। हम. तो फिर उनके आदमी का इन्वॉल्वमेंट उन पे. सख्त कारवाई करी होगी। मेरे को पूरा. विश्वास है।. हट चुके अपना पद छोड़ चुके हैं।. बिल्कुल. लेकिन पद छोड़ने से क्या वो दाग हट गया? देखो जी क्या होता है कि कुछ लोग गलत.
चीजें करते हैं. हम. और उसके ऊपर संगठन सही फैसले लेते हैं और. संगठन ने सही फैसला लिया।. ठीक है। चलिए आपकी मजबूरियां हैं। जामिया. और दिल्ली यूनिवर्सिटी. हम. क्या अंतर है इन दोनों में? यहां एक कल्चर में हम. उठने बैठने में सोच में देखो जी सोच में. हो सकता है बट मेरे हिसाब से जितने भी. एजुकेशनल इंस्टट्यूट में इंस्टट्यूट होते. हैं उनमें इस तरीके का कोई भी डिफरेंस. नहीं होता।.
स्टूडेंट्स का एक ही मोटिव होता है पढ़ाई. और वो बिल्कुल वहां पे ठीक तरीके से करते. हैं।. हम. जामिया यूनिवर्सिटी में साल 2006 में. आखिरी छात्र संघ चुनाव हुआ था।. जी. उसके बाद आज तक नहीं हुआ। 20 साल बीत गए।. हम. 2011 से मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लटका. 15 साल से।. जी. मतलब जो बच्चा जामिया में बैठा है. हम. उनमें से कुछ बच्चे शायद पैदा पैदा हुए. होंगे दो चार साल के रहे होंगे।. बिल्कुल जी।. आप 7 लाख बच्चों के अध्यक्ष हैं।. हम. ये नाइंसाफी रही जामिया वालों के साथ।.
नहीं मेरा तो यही मानना है कि देश भर में. जितनी भी यूनिवर्सिटी है वहां पे चुनाव. होने चाहिए। हम. और बड़े-बड़े. लीडर्स यह कहते थे अगर चुनाव होंगे तो. युवाओं को मौका मिल जाएगा हमारी सीट से. चुनाव लड़ने के लिए। पर ये गलत बात है।. उनको यह सोचना चाहिए कि अगर छात्र संघ. चुनाव होंगे तो युवा आपकी आपको आगे बढ़ाने. में मदद करेंगे। युवा आपकी गद्दी नहीं. छीनेंगे। युवा आपको आगे बढ़ाने में मदद. करेंगे। जब आपके साथ युवाओं की टीम होगी, देश के जेजियों की टीम होगी तो मेरे को तो.
नहीं लगता कोई भी ताकत आपको चुनाव हरा. सकती है।. जेएनयू का प्रेसिडेंट ज्यादा चर्चा में. क्यों रहता है? जबकि भीड़ जो है वो आपके. पास ज्यादा होती है दिल्ली यूनिवर्सिटी. वालों के पास।. इस चीज का सवाल तो आज तक मैं भी खुद नहीं. समझ पाया कि जेएनयू का जो अध्यक्ष होता है. वो डीयू से ज्यादा बड़ा होता है या चर्चित. होता है और मेरा यह मानना है कि ऐसा नहीं. है। लोग ऐसा सोचते हैं। अभी मेरे को तीन. से चार साल के अंदर जेएनयू का अध्यक्ष कोई. भी बनाओ मेरे को तो उसका शायद नाम भी ना.
पता हो। इधर तो जब से बीजेपी वालों ने. वहां पर हाईजैक किया तब से बातें नहीं. उसके पहले देखिए कन्हैया कुमार थे. और जितने भी. और कौन था एक नाम बताओ कन्हैया के अलावा. कोई. अभी देखो तुम्हारी सीजेपी वाली नेहा वहीं. से निकल रही है. और बताओ. और लोग होंगे मैंने फॉलो इतना नहीं किया. जेएनयू को लेकिन ये रहा कि जेएनयू के लोग. चर्चा में आते रहे और शबुद्दीन के जमाने. से भी शबुद्दीन के जमाने में शबुद्दीन पर. जिन पर आरोप लगा था वो भी जेएनयू से शायद. चंद्रशेखर उनका नाम था. हम. ऐसे बहुत सारे लोग आते रहे तो जेएनयू के. प्रेसिडेंट के पास ज्यादा कैमरे क्यों गए.
देखो जी दिल्ली यूनिवर्सिटी. और सारे बच्चे वहां के चाहे वो जितने. बच्चे हो उमर खालिद था वो भी निकला था और. एक बाद में कश्मीर में लड़की थी वो आपके. यहां चली आई अब थोड़ा प्रो बीजेपी हो गई. है कई और लोग का भी नाम निकलता रहता है. वहां से. देखो जी क्या होता है दिल्ली यूनिवर्सिटी. में जितने भी ऑफिस बियरर होते हैं उनकी. नेशनलिज्म की सोच होती है और जेएनयू में. जैसे मैंने आपको बताया कुछ इकोसिस्टम के. ऐसे लोग होते हैं. वो एंटी नेशनल. सब एंटीनेशनल जेएनयू में. नहीं नहीं सब कहां कह रहा हूं हम.
कुछ ऐसे संगठन है जो एंटी नेशनल स्लोगंस. वहां पे लगाते हैं।. एक तो आपने सुना होगा कि भारत को भारत का. चिकन नेक जो है उस पे कब्जा लो तो नॉर्थ. ईस्ट अलग हो जाएगा। क्या ये ठीक बात है? शजील इमाम. तो आप ये बताओ ठीक बात है। इस तरीके की. बात कोई शोभा देती है कि कोई आदमी ऐसी. बातें. सवाल अलग था मेरा। सवाल था कि जेएनयू का. जो प्रेसिडेंट है. वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट से. ज्यादा फेमस क्यों होता है? इतना ज्या. सारा कैमरे उसके पास क्यों आते हैं?
मेरे को तो नहीं लगता ऐसा कुछ है।. ओके।. आप आज के समय जेएनयू का अध्यक्ष कौन है? और मेरे को खड़ा करो. तो आपको पता चल जाएगा किसकी पॉपुलैरिटी. देश भर में ज्यादा है।. हम. आजकल एक मैसेज चल रहा है कि जेएनयू पर भी. बीजेपी कब्जा करना चाह रही है। आप मानते. हो ऐसा? नहीं जी ऐसा नहीं है कि वाइस चांसलर्स के. जरिए जो नए टीचर्स आ रहे हैं एडमिशंस में. या प्रमोशन में. हम उनका रोल ज्यादा बढ़ाया जा रहा है।.
नहीं जी मेरे को एक बात बताओ आप. पहले जेएनयू में लेफ्ट के जितने संगठन. होते थे वो किसी को भी चुनाव लड़ा दें तो. वह एक तरफ़ा जीत के निकल जाता था। पर आज. का समय ऐसा है जितने भी सारे लेफ्ट के. संगठन है वह विद्यार्थी परिषद के सामने. एकजुट होकर लड़ते हैं। जब कहीं 100 150 का. डिफरेंस रह जाता है। मैं उनको चैलेंज करता. हूं आपके माध्यम से कि उनको एक बार बोलिए. अलग-अलग होकर चुनाव लड़े तो दिन रात का.
अंतर दिखा देंगे।. कि पहले जेएनयू के चुनाव में आप किसी को. भी लेफ्ट के संगठन से उतारते थे. हम. तो वो वन साइडेड जीत के निकल जाता था। हम. पर आज के समय चीजें बदल चुकी है। वह सब. एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं। जब जाके कहीं. वह 100 150 वोटों से जीत पाते हैं।. जेएनयू के स्टूडेंट्स की विचारधारा बदल गई. है। जेएनयू में जितने भी स्टूडेंट्स हैं. वो समझ गए हैं कि जितने भी ये लेफ्ट के. संगठन हैं ये सिर्फ हमारे को पागल बनाते. हैं। हमारे को ब्रेन वॉश करते हैं और.
ब्रेन वाश करके हमारा यूज़ करते हैं।. चलिए अगर साहब आप सोचते हैं। आपसे पहले जो. डसू के अध्यक्ष थे. हम. पांच छह लोग कोई भी जो आपके ज़हन में आ रहे. हो। जी उनमें से कौन बड़ा आदमी बना? कोई. बड़ा नेता बना? आपके जस्ट पहले जो पांच छह. रहे होंगे।. देखिए. कोई सांसद बना, मंत्री बना। अभी तो कईयों. की सांसद बनने की उम्र भी नहीं हुई होगी।. अरे जो पांच सात पीछे पांच सात कह रहा हूं. दिमाग में याद कर लीजिए।. हां तो अच्छा मैं तो अगर मैं 2025 में बना. मैं तो 2020 की भी बात करूं। जब भी तीन दो.
ही बार चुनाव हुए उन दो बारों में से शायद. उनकी उम्र भी नहीं हुई है।. चलो हम 10 ले लेते हैं। आखिरी आखिरी डसू. का कौन सा प्रेसिडेंट था. जिसने पॉलिटिक्स में कुछ झंडे गाड़े हैं? अ. लास्ट अभी जो हमारी करंट दिल्ली की सीएम. है. हम. वो डसू की अध्यक्ष रही है।. हम. कब थी ये? 1998 1996. अल्का लांबा जब एनएसयूआई से लड़ रही थी।. जी जी जी. ये काफी फेमस कहानी हुई जी जी. दिल्ली यूनिवर्सिटी में उस टाइम दो लोग. चुनाव लड़े थे आमने सामने. हम. और वही बाद में निकल कर आए।.
जी. तो ये तो बड़ा उम्मीद देता होगा तुम लोग. को।. बिल्कुल जी. कि जी हमारे भी अच्छे दिन आ जाएंगे।. वो तो एक टाइम पीरियड होता है हम. राजनीति में राजनीति में समय होता है. हम. और किस्मत भी होती है भाग्य भी होता है. कि जब आपके भाग्य में वो चीज लिखी होती है. तो आपको जरूर मिलती है संघर्ष करना हमारे. हाथ. जो पुराने प्रेसिडेंट थे जब वो निकले. होंगे प्रेसिडेंसी से उन्हें बीजेपी से. कॉल आता है. नहीं जी उनकी मर्जी होती है और जैसे मैं.
विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता हूं तो. विद्यार्थी परिषद के हाथ में होता कि मेरे. को आगे किस लाइन में किस ट्रैक में आगे. भेजना है।. अगर सितंबर में एबीवीपी जीती. हम. तो उसमें कितना क्रेडिट आपका होगा और अगर. हारी. हम. तो कितनी जिम्मेदारी अपने ऊपर लोगे? देखो जी क्रेडिट और जिम्मेवारी की यहां. बात नहीं होती या हम कार्यकर्ता के रूप. में साल भर मेहनत करते. और अगर आप पिछले 10 साल का भी रिकॉर्ड उठा. लोगे तो तमाम विद्यार्थी परिषद ने क्लीन.
स्वीप ही करे होंगे। मुश्किल से एक दो बार. ऐसी. तो मैं तो इसलिए पूछ रहा हूं ना कि अगर. जीते तो कितना क्रेडिट आपका और रहा हारे. तो कितना इल्जाम आपका क्योंकि यह रील तो. तब तक तो पुरानी हो जाएगी।. नहीं नहीं मेरे को पूरा विश्वास है. विद्यार्थी परिषद अब की बार क्लीन स्वीप. करेगी जैसे हर वर्ष करती आती है इस बार भी. क्लीन स्वीप करेगी।. सबसे बड़ा झूठ जो एक छात्र नेता बोलता है।. क्या बोलना पड़ता है? हम. सबसे बड़ा झूठ. जो एक छात्र नेता को बोलना पड़ता है।. देखो जी मैंने तो आज तक कोई झूठ नहीं.
बोला। हम. औरों का पता नहीं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट के तौर. पर. नहीं झूठ. सबसे बड़ा झूठ क्या बोला. झूठ तो बोलने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती. हम. जो हम जिस चीज के कैपेबल है जो हम काम कर. सकते हैं वो हम काम करके दिखा देते हैं. कोई ऐसा काम है जो नहीं कर पाए किसी का रह. गया मन में किसी ने कहा करने का मन भी था. हम. कोशिश भी की लेकिन नहीं हो पाया. कई ऐसी चीजें होती है कि जैसे. स्टूडेंट का माइग्रेशन कराना होता है बट.
कॉलेज के प्रिंसिपल मना कर देते हैं कि. उनके पास ऑलरेडी सीट खाली नहीं होती कि. स्टूडेंट का माइग्रेशन हो जाए। तो तमाम. माइग्रेशन के समय ही काफी ऐसी दिक्कतें. आती है कि स्टूडेंट को एक कॉलेज से जाकर. दूसरे कॉलेज में माइग्रेट होना पड़ता है।. तो उस समय प्रिंसिपल इंकार कर देते हैं तो. उस समय थोड़ा बुरा लगता है कि कुछ. स्टूडेंट ने कहा वो पूरा नहीं हो पाया।. हम. नॉर्थ कैंपस या साउथ कैंपस? अ साउथ कैंपस।. क्यों? क्योंकि साउथ कैंपस के स्टूडेंट्स. का जीने का अलग जरिया है और वहां पर इतनी.
तमाम फैसिलिटीज भी नहीं है जितनी नॉर्थ. कैंपस में बट स्टिल स्टूडेंट उन बिना. फैसिलिटीज के भी खुले दिल से वहां पे जीते. हैं।. जैसा क्या थोड़ा बताओ जिंदगी के बारे में. क्या जीते हैं? मतलब क्या होता है कि नॉर्थ कैंपस में. आपके डिपार्टमेंट भी वहीं लगते हैं। आपके. कॉलेजेस भी वहीं लगते हैं। तो तमाम वही. सर्कल वहीं दोस्तों का सर्कल वही रोटेट. होता रहता है। बट साउथ कैंपस में जब जाते. हैं तो नए-नए लोगों से मिलना होता है।. नए-नए लोगों से बातचीत होती है। तो बड़ा. दिल खुश होता है।. और.
नॉर्थ कैंपस में मेरे को इतने वर्ष हो गए. रहते-रहते। मेरा कॉलेज भी नॉर्थ कैंपस में. ही था। तो थोड़ा ऐसा होता है कि जब आप एक. जगह से दूसरी जगह जाते हो तो थोड़ा ज्यादा. अच्छा मन लगता है।. आपने फुटबॉल कोटे पे एडमिशन लिया, कुश्ती. आपके खानदान में है।. तो फुटबॉल या कुश्ती? देखो जी पर्सनली मेरे को पसंद तो कुश्ती. है क्योंकि मतलब मेरे जब मैं अपने पापा को. करते हुए देखता हूं। आज भी मेरे पापा. पहलवानी करते हैं। तो बड़ा खुश बड़ा अच्छा. लगता है और कई बार मैं भी उनके साथ करता. हूं। तो बड़ा दिल खुश होता है। बट फुटबॉल.
बाय प्रोफेशन में अच्छा था। तो इसलिए. मैंने फुटबॉल फॉलो करा। कोई हरियाणवी का. एक शब्द जो दिल्ली वालों को समझ में नहीं. आता।. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. आज के समय तो सारे ही शब्द समझ आ जाते. हैं। बट. एक बड़ा कंफ्यूजिंग शब्द है. कि. हम्बे जैसे आप मेरे से कुछ भी पूछो कि कल. तुम स्कूल गए थे? आप पूछो एक बार कल तुम स्कूल गए थे? हमंबे.
तो इसका आपको जवाब मिला कि हां या ना हां. नहीं इसका नाम भी हो सकता है हमंबे मैं. स्कूल क्यों जाऊंगा तो मतलब एक हमंबे एक. ऐसा वर्ड है कि कई बार लोगों के बीच में. कंफ्यूजन पैदा हो जाता है. इसका मतलब क्या होता है कि हमंबे का मतलब. होता है एक्सप्रेशन होता है कि सिचुएशन के. हिसाब से इंसान एक्सप्रेशन देता है और उस. एक्सप्रेशन को कोई सामने वाला समझ जाए तो. वर्ड समझ जाता है ये क्या कहना चाह रहा है. तो इसका कोई मतलब ही नहीं है मतलब ही नहीं. है या ना हां या ना दोनों मिक्सचर है वो.
तो सिचुएशन के हिसाब से कोई बोले तो समझ. सकता है।. कमाल है यार। [हंसी]. इस बार डूसू को चुनाव जीतोगे तुम्हारे. ईवीपी वाले? बिल्कुल।. अब हमको लगा हम भी बोलोगे।. कोई बच्चा अगर मान लो तुम्हें देख रहा हो. दिल्ली यूनिवर्सिटी का. हम. सीना ठोक कर कौन सा तीन काम गिना सकते हो. उसे जो तुम्हारी वजह से सिर्फ हुआ।. हम. मैं. सीना ठोक कर ये कहना चाहता हूं कि लोग. बड़े-बड़े दावे करते थे अपने चुनाव में।. बड़ी-बड़ी पार्टियां दावे करती थी कि हम.
यूनिवर्सिटी को सिक्योर कर देंगे, ऐसे कर. देंगे। पर आज तक दिल्ली यूनिवर्सिटी में. कैमरा नहीं थे। थे तो सिर्फ. एडमिनिस्ट्रेशन रूम वगैरह में थे। कॉलेजेस. के अंदर थे पर कॉलेजेस के बाहर कैमरा नहीं. थे।. मैंने पूरी दिल्ली यूनिवर्सिटी में कैमरा. लगवाए। हम. साथ ही साथ दूसरा काम जैसे मैंने आपको. बताया कि खेलो डीओ कि आने वाले 2030 में. इंडिया में कॉमनव्थ है. हम. और 2036 में शायद इंडिया में ओलंपिक्स भी. आ जाए.
तो उसकी सोच उसकी भावनाओं को रखते रखते. मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में खेलो और. डीयू कराया कि यूनिवर्सिटी में क्या होता. था कि तमाम खिलाड़ी जब मेडल जीत के आ जाता. था. तो उसका ग्रैंड वेलकम करा जाता था उसको. वाहवाह करी जाती थी बट उससे पहले उसके. स्ट्रगल में कोई भी सपोर्ट नहीं करता था. उसे। बट अबकी बार मैंने प्राइस मनी भी. रखा। उनको प्रॉपर फैसिलिटीज में. यूनिवर्सिटी में इंडोर स्टेडियम में. कंपटीशन कराया। तो स्टूडेंट्स के लिए काफी. अच्छा था। और जैसे मैंने मैराथों्स भी. कराई मेंटल हेल्थ को लेकर और मैंने अबकी.
बार डूसू इंटर्नशिप खोली जो आज तक कभी भी. यूनिवर्सिटी में नहीं थी। मैंने इतने. ज्यादा स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप दी।. तो स्टूडेंट्स बहुत खुश है अबकी बार। और. सबसे अच्छी बात आपको बताऊं कि पहले लोग. क्लबिंग करने जाते थे, फेस्टो में जाते. थे। अबकी बार मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी. में भजन क्लबिंग कराई 9 दिन लगातार. कि आज आपने भी देखा होगा कि जब किसी भी. युवा का जन्मदिन होता है तो अब पार्टियां. नहीं करता। वो मंदिर जाता है। तो उसी.
ट्रेंड को देखतेदेखते अबकी बार मैंने. दिल्ली में. हम. दिल्ली यूनिवर्सिटी में भजन क्लबिंग कराई. और काफी हजारों बच्चे आए। उसमें काफी. बच्चों ने एंजॉय भी करा और अब आप देख रहे. होंगे बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज भी अपने. बर्थडे के दिन बड़ी सेलिब्रेशन के दिन भजन. क्लबिंग करा रहे हैं। हम. तो इस तरीके के कुछ इनोवेटिव आइडियाज मैं. यूनिवर्सिटी में लेके आया जिससे स्टूडेंट. कल्चर से भी कनेक्ट हो और स्पोर्ट से भी. कनेक्ट हो। अपनी लाइफ में प्लेसमेंट से भी. कनेक्टेड रहे। उनको एक्सपीरियंस मिले.
इंटर्नशिप के माध्यम से और रही बात सेफ्टी. की वो तो मेरे लिए यूनिवर्सिटी में फर्स्ट. प्रायोरिटी है कि सेफ्टी के साथ कोई नो. कॉम्प्रोमाइज।. लास्ट सेगमेंट है मैं एक नेता का नाम. लूंगा। आपके मन में जो भी आता है बोल सकते. हो। चाहे वन वर्ड या वन लाइन।. इससे ऊपर नहीं बोलना है।. ठीक है।. नरेंद्र मोदी दादाजी राहुल गांधी फेक. स्ट्रगलर।. ओके। इंटरेस्टिंग अमित शाह. बब्बर शेर अरविंद केजरीवाल।.
जस्ट अ सोशल मीडिया पर्सन राघव चड्डा. इंटेलेक्चुअल पर्सन [हंसी]. रेखा गुप्ता वंडरफुल सीएम. ओके नायाब सिंह सैनी मोस्ट एक्टिव पर्सन. हुड्डा साहब. ओल्ड. ओके मोदी जी की सरकार रहेगी जाएगी अगली.
बार. बिल्कुल रहेगी. किसान आपके हरियाणा के फिर आ गए बॉर्डर पे. हम. हरियाणा के किसान फिर बॉर्डर पे आ गए. नहीं जी मैं तो अभी अपने घर से जब आया. यहां पे तो ऐसा तो बॉर्डर पे मेरे को कुछ. नहीं दिखा. आपको लगता है हरियाणा किसान खुश है सरकार. से. बिल्कुल खुश है जभी तो तीसरी बार हरियाणा. में भाजपा की सरकार आई. क्योंकि आपके अग्निवीर भी बहुत प्रोटेस्ट. कर रहे थे पहले काफी नाराज थे। अभी तो.
नहीं आ रहे मामले ऐसे लेकिन. हम. अग्निवीर भी हरियाणा में एक बड़ा बड़ा. मसला था।. जी. तो मेरे को एक बात बताओ कि जब परेशानी. होती तो भाजपा सरकार को क्यों जीताती. तीसरी बार? लोग कह रहे हैं कि उन्होंने अपने को हरा. लिया था कांग्रेस ने।. नहीं जी ऐसा नहीं है। उन्होंने पूरे अपने. अंतरतंत्र. कांग्रेस ने अंदर-अंदर अपने लोगों को. कटवाया, हरवाया टिकट कटवाया।. नहीं जी ऐसा कुछ भी नहीं है। वो अपने फुल. फ्लेज रूप से चुनाव लड़े थे. और उनको पूरा कॉन्फिडेंस था कि वो चुनाव. जीतेंगे। बट आपको पता है कि. संघ का जो मैनेजमेंट है और संघ का जो एक.
काम करने का तरीका है वो नेशनलिज्म की सोच. है और. हरियाणा के वोटर्स ने भाजपा सरकार को. तीसरी बार विजय बनाया। दिल्ली यूनिवर्सिटी. के चुनाव के बाद अब हरियाणा चुनाव. विधानसभा बिल्कुल जी अगर मेरे हरियाणा के. मेरे आदरणीय बड़े बूढ़े मेरे भाई मेरी. माता बहने मेरे को मौका देगी तो मैं. बिल्कुल वहां से विधानसभा की तैयारी. करूंगा क्या कैसे टिकट मिलता है संघर्ष.
करके जैसे डसू का टिकट कैसे मिला था. प्रेजेंसी का. मैंने विश्वास नहीं करोगे तो 5 साल संघर्ष. करा और विद्यार्थी परिषद में जितने भी. हमारे दायित्ववान कार्यकर्ता होते हैं वो. वो संघर्ष को भी देखते हैं और यह भी देखते. हैं कि उनको संगठन की कितनी सोच है। क्या. वो इस जिम्मेवारी को निभा पाएंगे। तो उस. माध्यम से आपको टिकट मिलती है और. सबसे बड़ी बात यह है विद्यार्थी परिषद में. कि अन्य संगठनों में कोई भी नया कैंडिडेट.
आता है एक महीना दो महीना पहले आए वो पैसे. खिलाए उसको टिकट मिल जाती है। जैसे अबकी. बार का जो एनएसयूआई का पैनल था उसमें. जो मेरे सामने अध्यक्ष की कैंडिडेट थी वो. एक महीना पहले आई हां यह बड़ा चर्चित था. कि जो लड़का था अगर उसको मिला होता तो. शायद कंपटीशन थोड़ा अलग होता। किसी एक का. टिकट कटा था एनएसयूआई से।. हां एक और छात्रा की टिकट कटी थी तो उसके. बाद जो वाइस प्रेसिडेंट था उन्होंने थोड़ा.
अच्छा चुनाव लड़ा इसलिए वो जीत गए।. आई थिंक वाइस प्रेसिडेंट क्या नाम है उसका. वाइस प्रेसिडेंट का? राहुल।. हां। उनके बारे में शायद चल रहा था। अगर. वो प्रेसिडेंसी चुनाव लड़ते तो शायद कुछ. हो सकता था।. नहीं जी हम तो पूरा कॉन्फिडेंस थे। अभी तो. हम 16000 वोटों से जीते तो मेरे को लगता. है अगर वो लड़ते तो 20,000 वोटों से. जीतते।. कोई इस बात में कोई संदेह नहीं है।. ओके। दिल्ली यूनिवर्सिटी से आप हो लेकिन. देश में और भी यूनिवर्सिटी है। जैसे. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू. यूनिवर्सिटी।. ये यूनिवर्सिटीज कैसी है? और यहां जाना.
रहा क्योंकि हमने इनके बड़े रंगबाजी. किस्से सुने हैं।. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के थोड़े रंग के. बारे में बताओ। आप तो गए भी होंगे।. इलाहाबाद दोस्त भी होंगे। कुछ इलाहाबाद का. रंग बताओ क्योंकि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से. बहुत लोग निकले हैं देश दुनिया में राज. करने वाले। देखो जी जब मैं प्रयागराज गया. था मैं काफी परेशान था उस समय जैसे मैंने. आपको बताया तो उसके बाद जब मैं अबाद. यूनिवर्सिटी में गया तो मेरे दोस्त जो. मेरे को प्रयागराज में मिले थे वो मेरे को. आठ नंबर कमरे में ले गए जहां पर भगत सिंह. जी भी रहे थे और उन्होंने मेरे को कई.
तरीके की चीजें समझाई उस समय और उन चीजों. को मैंने अपने यूनिवर्सिटी के चुनाव में. अमल भी करा और वो फार्मूला सक्सेसफुल भी. रहा और उससे तकरीबन जितने भी इलाहाबाद के. ये स्टूडेंट्स हैं। यूनिवर्सिटी के. स्टूडेंट्स हैं जो डीयू में पढ़ रहे हैं।. इलाहाबाद के जितने भी लोग हैं मतलब एक. डीयू में भी एक अबाद यूनिवर्सिटी का एक. चैनल चलता है।. उन सब ने मेरी एक तरफा हो के मदद करी।. तो मतलब बड़ी ही दिल को खुशी मिली कि मैं. जिस भी यूनिवर्सिटी में गया वहां के लोग.
मेरे चुनाव में मदद करने आए। वहां के. लोगों ने मेरे को यहां पे जो स्टूडेंट्स. थे उनसे कनेक्ट करा। कम से कम 100010. लोगों की एक मीटिंग भी कराई थी मेरी। बहुत. बड़ी बात होती है हज़ार 12000 लोगों की एक. मीटिंग कराना और. इलाहाबाद रंगबाजों का शहर है भाई. बिल्कुल. क्या जलवा होता है इन दोनों शहर का इन दो. शहर के बारे में स्पेशली बात कर रहा हूं. मैं. देखो जी मैं. कल्चरल डिफरेंस जब आप शहर में घुसते होगे. तो शहर की भी तो एक वाइब होती होगी ना. मतलब एक बाहुबल महसूस होने लगता है. कहां ज्यादा महसूस होता है इलाहाबाद या.
बनारस दोनों जगह बराबर ही महसूस होता है. सच बताऊं तो. मतलब दोनों का कल्चर भी ऑलमोस्ट सेम है. दोनों का तरीका भी चुनाव लड़ने का जो. मैंने पुरानी बातें सुनी सुनी वही तरीके. भी चुनाव लड़ने के एक तरीके से सेम ही थे. और. और रंगबाज ज्यादा कहां मिले? रंगबाद ज्यादा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में. मेरे को मिले।. कहानियां ज्यादा कहां मिली? बीएचयू की कहानियां ज्यादा मिली।. बट. मेरा यह मानना है कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी. बीएचयू में दोबारा से चुनाव चालू कर देने. चाहिए। लिंडो कमेटी के माध्यम से.
हम. और जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी में चुनाव. होते हैं। उसी तरीके से अदर यूनिवर्सिटीज. में भी चुनाव होने चाहिए। हमारे को नए-नए. युवा राजनीति में आते हुए दिखेंगे और मेरा. मानना है कि युवाओं को राजनीति में आने की. बहुत जरूरत है कि आने वाला समय युवाओं का. है और देश को विकसित भारत बनाने में सबसे. बड़ा योगदान युवाओं को ही करना पड़ेगा।. तो इस साल जब चुनाव होगा तो आप लोग भी. वीडियो बनाओगे। हेलो फ्रेंड्स।. बिल्कुल जी बिल्कुल बनाएंगे। हमने तो अपना. चुनाव भी सोशल मीडिया के माध्यम से लड़ा.
है। सोशल मीडिया का यूज़ करा है। तो. बिल्कुल हम सोशल मीडिया की भी मदद लेंगे. और ग्राउंड पे तो हमको संघर्ष करना ही है।. चलिए आपको शुभकामनाएं हो सकता है इसी. बहाने मोदी जी शाह साहब आपके दिल की. तमन्ना पूरी कर दें।. जी। क्या ख्वाहिशें रह गई हैं. यहां से अध्यक्ष पद से निकलने के बाद कि. मेरी बस कुछ ही समय बहुत कम है कि आपको. मोटा-मोटा करीबन करीबन 9 महीने का ही. टेन्योर होता है तो उन 9 महीने में आप कुछ.
चीजें कंप्लीट नहीं कर पाते पर कुछ चीजों. की शुरुआत कर जाते हो तो मेरे को पूरा. विश्वास है कि आने वाले कोई भी डसू का. अध्यक्ष होगा तो यूनिवर्सिटी को बहुत ही. बेहतर रूप में चलाएगा और बेहतर रूप के. साथ-साथ वो दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी का. पूरे विश्व में नाम रोशन करेगा।. ठीक बात। टूसू अध्यक्ष से जो लोग हटते हैं. हम. कुछ उनके लिए बेनिफिट्स होते हैं।. अ बेनिफिट्स तो क्या होते हैं जी कि देश. भर में नाम हो जाता है। देश भर के लोग.
आपको जानने को जानते हैं। और कुछ कनेक्शंस. बन जाते हैं कि कुछ आपका पर्सनल काम भी हो. या परिवार का कोई भी काम हो तो वो भी. थोड़ा जल्दी. तो आपके मोबाइल में सबसे बड़ा नेता कौन. जुड़ा? देखो जी. कांटेक्ट में वो वाला नहीं कि हम जानते. हैं भैया का नंबर सेव है वो वाला जिसको. फोन कर सकते हो. मैं अपने दोनों हरियाणा के मनोहर लाल. खट्टर जी को भी फोन कर सकता हूं सैनी जी. को भी कभी भी फोन कर सकता हूं क्योंकि. उन्होंने जैसे ही मेरे को टिकट मिली थी.
दोनों ने मेरे को बड़ा भरपूर आशीर्वाद. दिया था और जैसे ही मैं चुनाव जीत के आया. उन्होंने मेरे को मिलने के लिए बुलाया तो. कम से कम मेरे को 5 मिनट तक गले लगा के. रखा और आज तक एक बात याद है। उन्होंने. मेरे कान में बोला कि तूने हरियाणा का नाम. दिल्ली यूनिवर्सिटी में रोशन करा है। मतलब. बड़ा प्रेरणा मिलती है।. आपसे पहले कोई कब हेड था दिल्ली. यूनिवर्सिटी का हरियाणा से? अ. 2019 में और 2012 में।. एवीपी से?
जी।. अरे वाह।. एक बार एनएसयूआई से दे वरना एवीपी से 2019. में। ठीक है। बढ़िया है।. चलिए बढ़िया है। शुभकामनाएं आपको आपके. माता-पिता को, आपके दादाजी को, हरियाणा. वालों को। देखते हैं बाकी कहानी आपके हाथ. रहती है। लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी का. प्रेसिडेंट बनके क्या एक जीवन का सबक सीखा. आपने? इंसान के तौर पर ये जाते-जाते बता. दो।. मेरा यह मानना है कि. इंसान को मेहनत जरूर करनी चाहिए। कभी भी. डीमोटिवेट होकर पीछे नहीं होना चाहिए। और.
मैं पर्सनली यह कहता हूं कि डीमोटिवेशन को. मोटिवेशन समझो तो आपके जीवन में बहुत. बदलाव आएंगे और कभी भी संघर्ष करते हुए. हार मत मानो और क्योंकि संघर्ष करने वाले. मेहनत करने वाले की कभी हार नहीं होती और. रही बात भगवान पर भरोसा रखो और मेरे को. नहीं लगता कोई भी ऐसी ताकत है आपको जीवन. में आगे बढ़ने से रोकेगी। हमको हरियाणा के. बारे में थोड़ा बताओ यार। हरियाणा से आप. आते हो, क्या यूनिक है? जिस जगह से आप आते.
हो, हर जगह की एक खासियत होती है।. मैं हरियाणा के उस मिट्टी से आता हूं जहां. पर श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को धर्म और. अधर्म के लिए उपदेश दिया था जिसमें धर्म. की जीत हुई थी।. हरियाणा कुरुक्षेत्र. महाभारत।. जी. सियासत।. जी।. महाभारत से क्या सीखा? महाभारत से मैंने. यह सीखा. कि हमेशा धर्म की जीत होगी। बस आप धर्म के.
लिए लड़ाई लड़ते रहो। कभी भी गलत चीज का. सपोर्ट मत करो।. चलिए हमारी शुभकामनाएं आपको।. जी।.
