Uttar Pradesh, Gangster, Bahubali, Crime, Politics & CM Yogi | Mrityunjay Sharma | FO361 Raj Shamani
यूपी की बात करो बहुत ज्यादा बाहुबली. कल्चर 1996 में श्री प्रकाश शुक्ला इन. ब्रॉड डे लाइट वीरेंद्र शाही की हत्या कर. देता है A के 47 से वीरेंद्र शाही के बॉडी. में करीब 100 गोलियां मिली ऑल पॉलिटिशियंस. यूज़ दी पीपल जो भी उनके ओपोनेंट्स होंगे. उसको न्यूट्रलाइज करने के लिए कट्टा कल्चर. है क्या उधर तो कट्टा क्या है विल टेक अ. पाइप ऑफ अ क्रक स्टेयरिंग यूज़ इट टू मेक अ. कट्टा फेवर तो चलते भी नहीं है पर लेकिन. वो दिखाने से ज्यादा काम हो जा रहा है और. कौन सी ऐसी ड्रेडेड स्टोरी सुनी है हमने. एसिड से लहलाना मगरमच्छ को खिलवा देते हैं. जेल में एक बार रेड पड़ती है और रेड में. पता चलता मिलता है कि मुख्तार अंसारी के.
लिए जेल में एक तालाब खुदवाया गया ताकि वह. ताजी मछलियां खा सके। मृत्युंजय शर्मा जो. एक पॉलिटिशियन और एक बेस्ट सेलिंग ऑथर. हैं। इस एपिसोड में हम उनसे जानेंगे यूपी. में गैंगस्टर्स अभी तक कैसे ऑपरेट करते. हैं? इतने सारे पॉलिटिशियंस यूपी से ही. क्यों निकलते हैं? बिनेसेस और इंडस्ट्रीज. यूपी में इन्वेस्ट क्यों नहीं करना चाहते? बट योगी जी का राइज कैसे हुआ? योगी जी के. साथ जो एडवांटेज था वन यंग सिक्स टर्म्स. इन बाय देम। दूसरा यंग फेस होने का फायदा. यह होता है यू विल हैव समबडी जो बहुत लंबे. समय तक कंटिन्यू कर सकता है। थर्ड अगर आप.
कल्चरली देखेंगे ही इज़ इन सिंक विथ. बीजेपीस आईडियोलॉजी सो एस टू से बहुत. राइवलरीज हुई इनफैक्ट योगी आदित्यनाथ पे. हमला हुआ। योगी आदित्यनाथ संसद में रोते. हुए कहते हैं क्या मैं इस सदन का सदस्य. हूं? संसद मेरी रक्षा कर पाएगा या नहीं? और 2002 में फिर वो अपनी खुद की हिंदू. युवा वाहिनी बनाते हैं। डू यू थिंक कि. गवर्नमेंट करवाती है एनकाउंटर्स? लॉ एंड. ऑर्डर में बहुत सिग्निफिकेंट चेंजेस आए और. जितने भी गैंगस्टर्स थे सब के सब जेल गए।. मुक्ता अंसारी जेल गए। अतीक अहमद जेल गए।. विकास दुबे ही गॉट एनकाउंटर्ड। बुलडोजर. जस्टिस ये बताओ कहां से स्टार्ट हुआ?
आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब. कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और. इंसाइटफुल और बेहतर पॉडकास्ट बनाते रह।. एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस. स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है। जहां पर आप हमें. फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो।. लास्ट टाइम आपने हमें पूरे इनसाइट्स दिए. बिहार के बारे में। इस बार इनाइट्स दो.
हमें यूपी के बारे में। उसी के थोड़ा पास. में आ जाते हैं। एंड इट्स अ प्लेजर टू हैव. यू अगेन। इट्स अ प्लेजर टू बी हियर अगेन।. फर्स्ट यूपी की बात करो और अगर आप इंडियन. सिनेमा देखो और कंटेंट देखो और जितनी. न्यूज़ देखो तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि. आप गुंडागर्दी और बाहुबली की बात नहीं. करो। राइट? आपने लास्ट टाइम बिहार के. कॉन्टेक्स्ट में बताया था बट यूपी फ्रॉम. मूवीस वी हैव सीन मोर यहां पे ज्यादा होता. है। होता है ऐसा बहुत ज्यादा बाहुबली. कल्चर है। सो अगर आप कल्चरली देखेंगे तो.
यूपी खास करके जो यूपी का ईस्टर्न पार्ट. है दैट्स कॉल्ड पूर्वांचल। सो पूर्वांचल. और बिहार कल्चरली इज वेरी वेरीरी क्लोज टू. ईच अदर।. इनफैक्ट जो टेरेन पूरा देखेंगे इट्स द. गैंगेटिक प्लेेंस अ जो लैंग्वेज देखेंगे. भोजपुरी बोली जाती है इस तरफ भी पूर्वांचल. में भी तो कम से कम जो पूर्वांचल वाला. रीजन है यूपी का दैट इज वेरी कल्चरली. सिमिलर टू बिहार एंड दैट देन एक्सटेंड्स. टू बाकी चीजों में भी व्हिच इज कल्चर नहीं.
है. सो सो व्हाटएवर यू कॉल इट बट वो वो इतने. क्लोज लिंक्स है कि वो फिर आपको वो बाहुबल. में. उसी प्रकार के पॉलिटिक्स में भी, सोशल. स्ट्रक्चर्स में भी हर चीज में वो दिखता. है आपको। कहां से स्टार्ट हुआ ये? सो. बाहुबली कल्चर आजादी के बाद यू. नो वी फॉर्म्ड गवर्नमेंट्स एट द सेंटर इन. द स्टेट्स। कांग्रेस लीडिंग पार्टी थी हर. जगह. पे। इट हैड वेरी स्टेबल गवर्नमेंट्स. अक्रॉस।.
एंड 1967 वाज़ द ईयर व्हेन सबसे पहली बार. कांग्रेस को झटका लगा और बहुत सारे. स्टेट्स में उसे मेजॉरिटी एक तो नहीं आई. सीट्स। बहुत सारे स्टेट्स में इट वाज़ नॉट. इवन द लीडिंग पार्टी इट वाज़ अ सेकंड. पार्टी जैसे केरला वगैरह में इनफैक्ट इट. कुड नॉट इवन फॉर्म अ गवर्नमेंट। उत्तर. प्रदेश में इट कुड नॉट गेट अ मेजोरिटी।. बिहार में इट कुड नॉट गेट अ मेजोरिटी। दिस. वाज़ द फर्स्ट टाइम दैट गवर्नमेंट्स ऑफ़ अदर. पार्टीज वर फॉर्म्ड इन मेनी ऑफ़ दीज़. स्टेट्स। राइट?
यही वो टाइम था जब आप देखेंगे सो वी वर. वेरी डिवॉइड ऑफ एंप्लॉयमेंट अपॉर्चुनिटीज. बहुत ज्यादा नहीं थी। इंडस्ट्रीज बहुत. कंट्रोलोल्ड थे। लाइसेंस परमिट राज था। तो. जो भी थोड़े से इंटरप्राइजिंग लोग होते थे. उनको वो ढूंढने जब लगते थे अपॉर्चुनिटीज. तो अपॉर्चुनिटीज जनरली किस में दिखती थी? वो दिखती थी गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स में।. वो दिखती थी रेलवे के कॉन्ट्रैक्ट्स में।. वो दिखती थी अगर यूपी की बिहार की बात. करें तो कोयले में दिखती थी। जो भी. मिनरल्स हो बालू में दिखती थी स्क्रैप.
मेटल में दिखती थी जो गवर्नमेंट खरीदती है. जो गवर्नमेंट खरीदती है तो तो इन चीजों. में ही जो थोड़ी बहुत अपॉर्चुनिटीज ही. होती थी नाउ इन चीजों में काम करने के लिए. और अपना धाक जमाने के लिए क्योंकि इतने. सारे प्लेयर्स थे और अपॉर्चुनिटीज इतनी. लिमिटेड थी तो फिर वही हो जाता था कि सब. लोग उसी पे लगे हुए हैं तो आपस में. राइवलरीज होंगी राइवलरीज होंगी तो बाहुबल. स्टार्ट होगा बाहुबल स्टार्ट होगा तो. वायलेंस होगा वायलेंस होगा तो एक का दूसरे. पे आध अधिपत्य होगा और पूर्वांचल में. स्पेसिफिकली आप देखेंगे तो गोरखपुर जो है.
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना होती है. 1950 से एंड दिस इज़ दिस इज द आयरनी कि. इंडिया में अगर आप देखेंगे और उस एरा में. देखेंगे तो ज्यादातर जो बाहुबल की शुरुआत. हुई हम वो यूनिवर्सिटीज से हुई राइट रियली. या सो सबसे पहले एक्सप्लेन करो बताओ सबसे. पहले गोरखपुर में क्या है सो गोरखपुर में. गोरखपुर यूनिवर्सिटी बनी 1957 में स्टार्ट. हुई राइट नाउ जनरली उसमें उस समय क्या. होता था यूनिवर्सिटीज पे कंट्रोल के लिए. बहुत ज्यादा यू नो जितने भी गुट होते थे.
वो अपने कंट्रोल यूनिवर्सिटीज पर करने के. लिए आपस में फाइट करते थे क्योंकि वहां पे. एक बहुत बड़ा स्टूडेंट्स का ग्रुप होता था. युवा होते थे अब उन युवाओं को आप हर तरह. से यूज़ कर सकते हैं पॉलिटिक्स में भीड़. में कुछ भी करने के लिए तो उस पे कंट्रोल. के लिए बहुत ज्यादा फाइट्स होते थे तो. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के जो पहले वाइस. चांसलर थे फाउंडर वाइस चांसलर भी थे. गोरखपुर के डीएम भी थे वो इनफैक्ट उनका. नाम एसएम त्रिपाठी अगर मैं गलत नहीं हूं. तो वो वो थे और उस समय वहां पे क्या हुआ.
कि गोरखपुर यूनिवर्सिटीज पे अधिपत्य के. लिए एक प्रकार से फाइट स्टार्ट हुई। तो. एसएम त्रिपाठी ने एक छात्र नेता उस समय. हुए उनका नाम था हरिशंकर तिवारी हम और. हरिशंकर तिवारी को यूज़ किया उस और एक. पूर्वांचल में बहुत स्पेसिफिक आप देखेंगे. एक जो राइवलरी रही है वो ब्राह्मणस और. ठाकुर के बीच रही है। जितने भी रिसोर्सेज. थे खास करके लैंड देखेंगे आप उस पे जो. सबसे ज्यादा अधिपत्य था तो अपर कास्ट का. था और अपर कास्ट में यूपी में ब्राह्मणस. हैं, राजपूत हैं, कायस हैं। कायस बहुत. छोटे पपुलेशन होते हैं और जनरली वो.
एजुकेशनल एक्टिविटीज में ज्यादा इन्वॉल्वड. होते हैं। तो गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भी. हरिशंकर तिवारी है और वहां पे जो ठाकुर थे. उनके इन्फ्लुएंस को कंट्रोल में रखने के. लिए जो वाइस चांसलर थे उन्होंने हरिशंकर. तिवारी का यूज़ किया एस अ छात्र लीडर एंड. एज अ ब्राह्मण लीडर सो एस टू से। तो. हरिशंकर तिवारी एक तरह से धीरे-धीरे बड़ा. नाम होते गए पूर्वांचल के और यू नो ही ही. स्टार्टेड गेटिंग इनवॉल्वड इन जो हम बात. कर रहे हैं जितने प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट्स. थे गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स रेलवे. कॉन्ट्रैक्ट्स कोयला बालू इन सब की.
चीजों और हरिशंकर तिवारी के अगेंस्ट जो. ठाकुर लॉबी थी उससे एक नाम सामने आता है. वीरेंद्र साही का राइट एक राजपूत थे और. सेम उसी एरिया से गोरखपुर से और दोनों के. बीच फिर ये टसल स्टार्ट हो जाती है इन. रिसोर्सेज पर कंट्रोल का और इस टसल में. फिर बहुत ज्यादा यू नो वायलेंस भी होता है. बहुत ज्यादा दोनों की तरफ से कई बार गैंग. वॉर्स होते और ये टसल करीब-करीब 90ज तक. चलता है। तो सबसे जो आसान तरीका होता है. अपने आप को सेफ करने का वो पॉलिटिक्स में.
एंट्री का होता है। राइट? इन दिस वी हैव. सीन अक्रॉस द कंट्री। इनफैक्ट तो वहां भी. यही हुआ। हरिशंकर तिवारी एमएलए का चुनाव. लड़ते हैं 80 में चुनाव जीत जाते हैं. क्योंकि पॉपुलैरिटी बहुत थी। लोग उन्हें. वोट क्यों करते हैं? अगर वो इतने बाहुबली. टाइप के हैं और हर जगह उनका नाम आ रहा है।. कॉन्ट्रैक्ट्स कॉन्ट्रैक्ट्स ले रहे हैं।. लोगों पे उनका पावर कंट्रोल है। तो. टेक्निकली लोगों को तो रिवोल्ट करना चाहिए. ना कि यार हर जगह ये अपॉर्चुनिटीज भी लेके. जा रहा है। डरा भी हमको रहा है। हर चीज कर.
रहा है। फिर क्यों इसको वोट करें? मल्टीपल. फैक्टर्स हैं। पहला हम जिस एरा की बात कर. रहे हैं उसमें आप देखेंगे स्टेट वर्चुअली. एक तरह से एब्सेंट था। सो अगर किसी को अगर. कोई क्राइम होता है किसी के साथ उसे जाके. पुलिस में एफआईआर करना है। आप ज्यादातर. केसेस में देखेंगे पुलिस एफआईआर तक नहीं. लिखती थी या डांट के उसको भगा देती थी जाओ. तुम यहां से अगर वो बहुत जनरल नॉर्मल. इंसान है अनलेस समबडी इस वेरी. इनफ्लुएंशियल तो एक तरह से स्टेट वास. वर्चुअली एब्सेंट और जो एक हक दिलाना.
चाहिए स्टेट को नॉर्मल या सर्विसेस देना. चाहिए नॉर्मली स्टेट को वो दिलाने में. असमर्थ थी। आप देखेंगे ज्यादातर जो ये. बाहुबली हैं इनको जब आप इनके न्यूज़. रिपोर्ट्स पढ़ेंगे मीडिया रिपोर्ट्स. पढ़ेंगे तो कई बार इनको रॉबिनहुड बोला. जाता है। ज्यादातर को उसका रीजन यही है कि. वो उसकी मदद करते थे तो कोई बीमार है तो. उसको पैसे दे दिए किसी को कुछ करना है तो. कहीं फोन कर दिया तो इस प्रकार के हेल्प. करने से अब क्या होता है पीपल गेट. ओबलाइज्ड ऑफ कोर्स एंड एज अ एज अ लास्ट. रिसोर्ट इनमें से ज्यादातर बाहुबलियों के.
यहां आप देखेंगे उनके यहां घरों पे. दरबारें लगेंगी अब तो बहुत कम दरबारें. लगती थी वहां पर फैसले सुनाए जाते थे उन. फैसलों के खिलाफ आप अपील नहीं कर सकते थे. कहीं और जाके दो वर द फाइनल ऑर्डर्स. यह पहला दूसरा देयर वास अ लॉट ऑफ कास्ट. बेस्ड. एफिलिएशन तो यह और यह मेरे ख्याल से आज भी. हमारी मेंटालिटी में है। जो बाहुबली हमारे. कास्ट के होते हैं खुद के वो हमें हीरो. लगते हैं और दूसरे कास्ट के बाहुबली हमें.
क्रिमिनल लगते हैं। क्यों. ऐसा? इट्स वेरी नेचुरल। क्योंकि सी एज अ. आइडेंटिफायर इंडिया में खास करके जिन. स्टेट्स की हम यूपी की बात कर रहे हैं। अ. एज अ आइडेंटिफायर हम लोग कोई आइडेंटिफायर. चाहते हैं अपने आप को एक ग्रुप में. एसोसिएट करने के लिए। एंड कास्ट वो बहुत. बड़ा आइडेंटिफायर रहा है हमारे लिए। हमेशा. से तो मेरे अपने कास्ट का व्यक्ति दूसरे. कास्ट के व्यक्ति से किसी भी दिन बेहतर. है। यह मैं मान के चलता हूं। चलो कोई बात. नहीं इसी का भला हो जाए। दूसरे वाले का.
क्यों भला हो। हम सो उस कास्ट एलजेंस के. कारण भी वो हीरो बन जाते हैं। राइट? और इस. केस में भी आप देखेंगे वही हुआ व्हिच इज. ब्राह्मणस के लिए हरिशंकर तिवारी हीरो बन. गए और जो ठाकुर थे उनके लिए वीरेंद्र शाह. हीरो बन गए। तो वो सिर्फ फिर दो. व्यक्तियों की अदावत नहीं रह जाती है। वो. दो कास्ट की लड़ाई हुई।. तो फिर यहां से जो तिवारी जी थे इन्होंने. स्टार्ट करा। ये एमएलए बन गए। फिर एंड देन. वीरेंद्र शाही भी एमएलए बन गए। अच्छा. अपने-अपने एरिया से। इनफैक्ट दोनों.
गोरखपुर की एक-एक सीट से एमएलए बन गए।. हरिशंकर तिवारी एक चिल्लू पार नाम की सीट. है गोरखपुर में ही और वीरेंद्र शाह भी. गोरखपुर की एक सीट से एमएलए बनते हैं।. राइवलरी चलती रहती है 80ज में 90ज में भी. 90ज में क्या होता है? एक और नया क्रिमिनल. यू नो सीन में आता है। एंड उसका नाम होता. है श्री प्रकाश शुक्ला। हम श्री प्रकाश. शुक्ला इस कॉल्ड वन ऑफ़ द मोस्ट ड्रेडेड या. बिगेस्ट क्रिमिनल्स टू हैव बीन इन हम ऑन द. सीन ऑफ़ यू। श्री प्रकाश शुक्ला बड़ा.
इंटरेस्टिंग उसकी कहानी है। यू नो ही. स्टार्ट्स. कहा जाता है कि यू नो गोरखपुर से ही था वो. और गोरखपुर से ही एक व्यक्ति राकेश तिवारी. एक दिन उसकी बहन को छेड़ता है और राकेश. तिवारी की वो हत्या कर देता है। और ये. उसकी पहली हत्या होती है और इसके बाद वो. हरिशंकर तिवारी के पास जाता है। वहां भी. कास्ट आ जाता है कि हरिशंकर तिवारी के पास. जाता है कि मुझे बचाइए पुलिस मेरे पीछे. पड़ी हुई है। तो कहा जाता है कि हरिशंकर. तिवारी उसे बैंकॉक भेज देते हैं। राइट? और. कुछ महीनों के लिए वो अंडरग्राउंड रहता.
है। लेकिन फिर वो वापस आता है। और जब वो. वापस आता है तो ऑफ कोर्स नाउ ही इज़ अ यू. नो फॉर्म्ड क्रिमिनल सोर्स टू से। तो. उन्हीं रिसोर्सेज पे सबसे पहले अधिकार के. लिए वो वहां पे लड़ाई लड़ना शुरू करता है।. वीरेंद्र साही से भी शुरू करता है और फिर. हरिशंकर तिवारी से भी शुरू करता है। जिसने. सपोर्ट दिया उसी से ये साइकिल है हम और. उन्हीं रिसोर्सेज पे और धीरे-धीरे जो उसके. क्राइम के एक तरह से ऑडेसिटी होती है वो. बढ़ती जाती है और ये राइवलरीज पीक पे. पहुंचती है करीब 1996 में। 1996 तक.
हरिशंकर तिवारी वीरेंद्र साही दोनों. एमएलएस्ट थे। माननीय थे बड़े नाम थे। 1996. में श्री प्रकाश शुक्ला लखनऊ में इन ब्रॉड. डे लाइट वीरेंद्र शाही की हत्या कर देता. है। AK-47 से कहा जाता है कि वीरेंद्र. शाही के बॉडी में करीब 100 गोलियां मिली. जब उसका पोस्टमार्टम हुआ। राइट? एंड. पब्लिकली बीच रोड में मारा। यस। एंड दिस. वाज़ वन ऑफ़ द लखनऊ में। लखनऊ में। एंड दिस. वाज़ वन ऑफ़ द बिगेस्ट मर्डर्स ऑडिशियस.
मर्डर्स सो एस टू से राइट।. शिव प्रकाश शुक्ला को पता चलता है कि. वीरेंद्र शाही की कोई गर्लफ्रेंड है लखनऊ. में और कोई कमरा तलाश कर रहे हैं किसी एक. एरिया में और जब यह टिप मिलती है तो वहां. जाता है वीरेंद्र शाही की हत्या कर देता. है और क्यों करता है बिकॉज़ ही वांटेड टू. एस्टैब्लिश ह रूल इन दैट पूर्वांचल एरिया. और वीरेंद्र शाही सबसे बड़ा उसका राइवल था. वहां पे और गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स के. लिए रेलवे कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए यू हैव टू. न्यूट्रलाइज द अदर पर्सन तभी आप वहां. कॉन्ट्रैक्ट्स ले पाएंगे तो बाहुबल और. मतलब मेरा साम्राज्य स्थापित करना है.
1996 में यह होता है। इसके बाद हरिशंकर. तिवारी भी डर जाते हैं जो उनके एंड. इनफैक्ट वेरी इंटरेस्टिंगली हरिशंकर. तिवारी उसके बाद श्री प्रकाश शुक्ला के. परिवार के सदस्यों को साथ लेकर घूमते थे. ताकि अपने परिवार के सदस्यों को अगर वो. देखेगा तो गोलियां नहीं. चलाएगा। तो ये चलता रहता है। इट वाज़ ही. फेमस प्रकाश शुक्ला के बारे में जो Google. पे हर जगह है। इज ही द सेम गाय जो बहुत. बड़े गैंगस्टर थे और पॉलिटिशियंस यूज़ करते. थे दूसरे पॉलिटिशियन को मरवाने के लिए। यस.
यस यस राइट श्री प्रकाश शुक्ला यस ही इज़ द. सेम गाय ऑल पॉलिटिशियंस यूज़ दीज़ पीपल फॉर. जो भी उनके अपोनेंट्स होंगे उसको. न्यूट्रलाइज करने के लिए इनफैक्ट इसी. पॉइंट ऑफ़ टाइम पे 96 वीरेंद्र शाह की. हत्या के बाद श्री प्रकाश शुक्ला को भी. लगा कि अब मुझे पॉलिटिक्स में रिफ्यूज ले. लेना चाहिए। दैट्स द सेफ पार्ट और उनकी. नजर उसी सीट पर पड़ी जिससे हरिशंकर तिवारी. लड़ते थे। चिल्लू पार सीट वो से क्यों नहीं. गए? क्योंकि सीट एक्सक्टली। सो सीट्स पे. डिपेंड करता है किस कास्ट से आप किस जगह.
से हैं। हां उधर वोट नहीं मिलते क्योंकि. उसको हेट करा जाता है वहां ओके और और. थोड़ा सा यूपी भी यू नो नाउ नाउ पूर्वांचल. का ही वास द अनरेनिंग यू नो ही वास द डॉन. बिकॉज़ ही हैड किल्ड वीरेंद्र साई वास अ. बिग नेम देयर एक्चुअली इनफैक्ट 1998 में. 1998 में आपको ध्यान होगा इनफैक्ट बिहार. में एक बहुत बड़ा हत्या होता है बृज. बिहारी प्रसाद का बृज बिहारी प्रसाद लालू. जी के गवर्नमेंट में मंत्री होते हैं बहुत. बड़े नाम होते हैं वो वहां पर आईजीआईएमएस. हॉस्पिटल है पटना में वहां पर एडमिटेड.
होते हैं और एक बहुत पुरानी उनकी रंजिश चल. रही होती है मुन्ना शुक्ला से हम मुन्ना. शुक्ला जो बिहार के डॉन है तो एक बहुत. कोऑर्डिनेटेड एफर्ट के तौर पे बिहार के. मुन्ना शुक्ला सूरज भान और श्री प्रकाश. शुक्ला मिलके बृज बिहारी प्रसाद की हत्या. करते हैं उसी आईजीआईएमएस हॉस्पिटल में जब. वो एडमिट है और ये हत्या भी अगेन बहुत. ज्यादा चर्चित होती है क्योंकि एक सिंग. मिनिस्टर को मारना हॉस्पिटल में पटना में. खुद एंड लालू के एकदम प्रोटीजी को उसमें. भी श्री प्रकाश शुक्ला का नाम आता है। सो.
ऑडसिटी बढ़ती जाती है और ये तब पीक पे. पहुंच जाती है जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री. होते हैं और वो कल्याण सिंह की सुपारी ले. लेता है।. यस तो नाउ ये या उत्तर प्रदेश के. मुख्यमंत्री है कल्याण सिंह और कल्याण. सिंह की सुपारी लेता है। एंड दिस इस. रिपोर्टेड इन अक्रॉस मीडिया कि कल्याण. सिंह की सुपारी ली है श्री विकास शुक्ला. ने। नाउ दिस वास टू मच राइट। तो यूपी. गवर्नमेंट फिर एक एसटीएफ फॉर्म करती है. स्पेशल टास्क फोर्स और उसे एक.
रिस्पांसिबिलिटी दी जाती है कि 6 महीने. में किसी भी हाल में व्यक्ति हमें चाहिए।. राइट? कि जब ये एसटीएफ फॉर्म किया गया तो. सबसे बड़ा जो प्रॉब्लम था उस एसटीएफ के. पास वो ये कि श्री प्रकाश शुक्ला की कोई. फोटो ही नहीं थी इनके पास। सो नोबडी न्यू. व्हाट ही लुक लाइक। सो वो ढूंढेंगे कैसे? हवा चल रहा था। करेक्ट। अब अब वो ढूंढेंगे. कैसे? और वह भी बड़ा स्मार्ट बंदा शशि. प्रकाश शुक्ला। वो क्या करता था? कहीं भी. फोटो नहीं खिंचाता था और एक बार इनफैक्ट. इट इज़ सेड दैट एक फोटो स्टूडियो ओनर को ही. किल्ड क्योंकि उसने उसकी फोटो लेके किसी.
को दे दी थी। तो बहुत कॉग्निजेंट था कि. फोटो नहीं निकलनी चाहिए मेरी कहीं से। नाउ. ये एसटीएफ जब इसके पीछे पड़ती है तो उसे. पता चलता है कि एक बर्थडे पार्टी में गया. था अपने एक दूर के रिलेटिव के यहां। हम. राइट? तो पुलिस को लगता है वहां पे कोई. फोटो तो खिंचाई गई जरूर होगी। राइट? तो. उसके घर पे पहुंचती है उस दूर वाले. रिलेटिव के यहां। अब वो रिलेटिव्स भी डर. जाते हैं कि यार यू नो हम गलत जगह पर फंस. गए हैं। तो बहुत हिचकिचाते हुए बट पुलिस. भी प्रेशर बनाती है। तो फोटो एल्बम निकाला. जाता है और उसमें एक फोटो मिलता है श्री. प्रकाश शुक्ला का। अब डर ये था कि अब वो.
प्लीड करते हैं पुलिस से कि अगर ये फोटो. आप रिलीज़ कर दोगे तो उसे पता चल जाएगा कि. हमारे यहां से फोटो मिली है। एंड दे किल. अस। तो पुलिस ने बोला कि ठीक है हम इसका. कुछ इंतजाम करते हैं। तो पुलिस ने क्या. किया कि उस फोटो का सर निकाला और एक. न्यूज़पेपर में सुनील शेट्टी की फोटो छपी. हुई थी।. सुनील शेट्टी की बॉडी पे और उस समय ये सब. एआई टूल्स वगैरह तो थे नहीं। तो सुनील. शेट्टी की बॉडी ली गई और श्री प्रकाश. शुक्ला का सर लिया गया और फिर इसे साथ. जोड़ के फोटोकॉपी निकाली गई। राइट? और फिर.
इस फोटो को सारे अखबारों में छान दिया।. सर्कुलेट किया गया और कि यू नो वांटेड एंड. सो ऑन और उसी साल सेप्टेंबर में इफ आई एम. करेक्ट। ही इज़ किल्ड इन गाजियाबाद इन अ. पुलिस एनकाउंटर। एंड यू नो दैट्स द एंड ऑफ़. हिम। सो सो द ओनली मिस्टेक आई थिंक ही डड. वाज़ ही क्रॉस पार्टी।. नो सो आई आई आई थिंक ही क्रॉस्ड ह. लिमिट्स। बट कुछ बाहुबल ऐसे भी तो होते. हैं कि जो किलिंग करवाते नहीं है लेकिन.
उनका नाम इतना बड़ा हो जाता है कि ऐसे ही. कोई उनसे पंगे नहीं लेता। मे बी बिकॉज़ ऑफ़. पावर मे बी या तो वो कहीं दिखते हैं या. पैसे की वजह से। नो। सो जब उन्होंने. स्टार्ट किया होगा तब कुछ ना कुछ गया. होगा। दैट्स द डिफरेंस। और बाद में वो. थोड़ा सा यू नो वाइट कॉलर्ड हो गए। फिर. खुद को थोड़ा क्लीन किया। बट कोई बाहुबली. है? इफ ही सेस ही हैज़ नेवर कमिटेड अ. क्राइम आई डोंट थिंक दैट्स पॉसिबल। नो. क्राइम आई एम श्योर। क्राइम एज अ डेड.
क्राइम। ड्रेडेड क्राइम। या मर्डर यू विल. नॉट बी एबल टू एक्सिस्ट। देखिए इट इज मैं. उसको जस्टिफाई नहीं कर रहा हूं। लेकिन अगर. आप उस एरिया में हैं अगर आप बहुत अच्छे. इंसान भी हैं। किल और गेट किल्ड. एक्सक्ट्ली इदर डोंट एंटर द एरिया तो ये. दोनों ने स्टार्ट किया फिर सो यस फिर श्री. प्रकाश शुक्ला ही गॉट न्यूट्रलाइज्ड. वीरेंद्र साही वास डेड सो उस समय फिर. ठाकुर के एक नए लीडर उभरे बृजेश सिंह. बिकॉज़ वीरेंद्र साह वास डेड एंड यू नो दे. वर क्लोज सो बृजेश सिंह वाज़ द न्यू नेम ऑन.
द ठाकुर फैशन या इन पूर्वांचल एरिया और. हरिशंकर तिवारी थोड़ा सा वाइट कॉलर्ड हो गए. थे तब तक यू नो ही बिकॉज़ ही हैड दो-तीन. बार तब तक विधायक हो गए थे। इनफैक्ट वो. सरकारों में मंत्री रहे। हर सरकार में. मंत्री रहे। इनफैक्ट जितनी भी सरकार बनी. चाहे वो कल्याण सिंह जी की गवर्नमेंट हो, चाहे वो मुलायम सिंह जी की गवर्नमेंट हो, मायावती जी की गवर्नमेंट हो, सारे में वो. मिनिस्टर्स कंटीन्यूअसली बनते रहे। और इस. साइड से हरिशंकर तिवारी के साथ एक गैंग. काम करता था। उनके ही संरक्षण में आप बोल.
सकते हैं साथ में एक मकनू गैंग और उसी के. साथ एक व्यक्ति काम करता था मुख्तार. अंसारी। इसका नाम आप लोगों ने सुना होगा।. तिवारी की गैंग में हां सो नॉट एक्सक्टली. उनकी गैंग में बट अफिलिएटेड आप बोल सकते. हैं मुख्तार अंसारी गाजीपुर से ही ही केम. फ्रॉम अगेन पूर्वांचल का डिस्ट्रिक्ट है. गाजीपुर. तो जो पहले अदावत थी हरिशंकर तिवारी और. वीरेंद्र शाही की वो एक्चुअली शिफ्ट हो गई. फिर मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह में 90ज. के एंड तक और पूर्वांचल में जो सबसे बड़े.
गैंग वॉर्स हुए उसके बाद सो कॉल्ड वो आप. देखेंगे मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के. बीच हुए मुख्तार अंसारी फिर लेकिन विधायक. बन जाते हैं। गाजीपुर से ही चुनाव ही. फाइट्स एंड ही बिकम्स अ एमएलए। बृजेश सिंह. को दिखता है कि नाउ मुख्तारकि विधायक बन. चुके हैं तो फिर जो इन्फ्लुएंस है वो. ज्यादा रहेगा। तो विल नॉट बी एबल टू. स्टैंड अप टू हिम इन दैट सेंस क्योंकि एक. गवर्नमेंट का ऑथेंटिक पावर आ जाता है। हम. तो बृजेश सिंह ने क्या किया? बृजेश सिंह. वहां के एक गाजीपुर के ही एक बहुत.
प्रतिष्ठित व्यक्ति थे कृष्णंदन राय। उनको. सपोर्ट करना स्टार्ट किया ताकि इक्शंस में. उन्हें खड़ा करा के जिताया जा सके और 2005. की बात है इफ आई एम करेक्ट मुख्तार अंसारी. का भाई अफजल अंसारी गाजीपुर की एक सीट से. खड़ा करता है और उसी सीट पे कृष्णंदन राय. खड़े होते हैं जो बृजेश सिंह सपोर्ट जिनको. करता है कृष्ण नंदन राय विंस और मुख्तार. अंसारी का भाई हार जाता है और जैसे ही. इलेक्शंस होते हैं उसके जस्ट कुछ ही. महीनों बाद कृष्ण नंदन राय के जीतने के. कुछ ही महीनों बाद कृष्ण राय एक दिन जा.
रहे होते हैं अपने कैवल के साथ और एक गुट. उन्हें घेर लेता है। पूरे कैवल के पर. गोलियां बरसाता है और ऑन द स्पॉट वो मारे. जाते हैं और इसका पूरा इल्जाम आता है. मुख्तार अंसारी पे। इनफैक्ट बाद में एक. ऑडियो रिलीज होता है जिसमें मुख्तार. अंसारी अभय सिंह से बात कर रहे हैं। अभय. सिंह अगेन अनदर एमएलए हैं एंड बाहुबली।. अभय सिंह से बात कर और बोल रहे हैं कि वो. बजरंगी ने घेर लिया है। दोनों तरफ से. गोलियां चल रही हैं। और एंड बहुत. स्पेसिफिक उसने कहा था कि कृष्ण राय को जब.
मारोगे तो उसकी चुटिया काट लेना। कृष्ण. राय वास अ यू नो ही वास अ भूमिहार हम एंड. चुटिया रखते थे। तो चुटिया काट लेना। यू. नो देयर ओन इडसिंक्रेसी. हां एंड वो कॉल पे है कि चुटिया काट लेना।. चुटिया काट लेना। राइट? पर रिकॉर्डेड अ. कॉल। यस। यह कॉल फिर रिलीज हुआ इनफैक्ट।. हत्या कर दी जाती है और मुख्तार अंसारी. अगेन बिकम्स अ बिग नेम इन यू नो पूर्वांचल. इन टर्म्स ऑफ ह ड्रेडेडनेस राइट इनफ. मुख्तार अंसारी फिर बाद में व्हेन ही.
गेट्स कॉट हम एस एन अप्रहेंडेड वो जेल में. होते हैं एक बार रेड पड़ती है और रेड में. पता चलता है कि मुख्तार अंसारी के लिए जेल. में एक तालाब खुदवाया गया ताकि वो ताजी. मछलियां खा. सके। जेल में एक बैडमिंटन कोर्ट बनाया गया. ताकि और वहां पर ऑफिसर्स आते थे और शाम. में बैडमिंटन खेलते थे मुख्तार अंसारी के. साथ।. एक जो वहां पे एसपी होता डीएसपी आई थिंक. वो न्यूज़पेपर हर दिन फ्रेश लेके आता था।. एक जो दरोगा होता था वो कपड़े प्रेस करा. के लाता था। वहां पर दरबार लगते थे जेल.
में ही मुख्तार अंसारी के। सो सच वास द. टेरर ऑफ़ दैट गाय। क्यों था ऐसा टेरर? क्योंकि ये किसी डेड इट। यस। सो एक विधायक. को कृष्णंदन राय को जब मारा गया। सो. इनफैक्ट राजनाथ सिंह वहां पे आए और डीएम. के ऑफिस के सामने वो धरने पे बैठे। राजनाथ. सिंह वाज़ अ नेशनल बीजेपी प्रेसिडेंट देन।. लालकृष्ण आडवाणी उनके घर पे आए तो आप. सोचिए कितनी बड़ी हत्या होगी वो तो जब आप. इतनी बड़ी हत्या करते हैं तो सबके दिलों. में इतना डर समा जाता है आपके लिए कि अगर. इतने बड़े व्यक्ति को ये मार सकता है तो.
हम लोग कौन है हम एंड देन एवरीबडी. स्टार्ट्स डूइंग द लाइन कोई रिवोल्ट नहीं. करता है फिर एंड मुख्तार अंसारी बिकम द यू. नो डेड फिगर सो हैस टू से देर पर अगर वो. एमएलए थे मुख्तार अंसारी तो फिर उन्हें. जेल कैसे हो गई एक्क्टली सो मेनी टाइम्स. एटलीस्ट थैंकफुली लॉ कैचेस अप टू यू नो. कृष्ण नंदन राय केस में एक और केस में. इनफैक्ट ही बहुत प्रेशर आया तो उनको उनको. पकड़ा गया जेल में रखा गया बाद में बहुत. बाद अभी इनफैक्ट योगी गवर्नमेंट में ही.
वास फाइनली इम्लिकेटेड एंड देन ही वास इन. जेल एंड देन ही डाइड ऑफ़ अ हार्ट अटैक सो. यस डिफरेंस एक क्या आता है कि जो. प्रोपोर्शनंस है वेरियस कास्ट का वो अलग. है। सो फॉर एग्जांपल जैसे यूपी में ही आप. देखेंगे तो पूर्वांचल की जैसे हमने बात. करी तो बहुत ज्यादा एक जो राइवलरी एक तरह. से देखने को आई वो अपर कास्ट के बीच ही आ. गई। दैट मे नॉट बी द केस एल्स वेयर इट्स. इट्स अ वेरी रीजनल थिंग। सो एस टू से. फ्रॉम फ्रॉम देयर। इनफैक्ट अगर आपको ध्यान. होगा अह योगी गवर्नमेंट में एक एनकाउंटर.
हुआ जब विकास दुबे का तो एक नैरेटिव तो. आया कि यू नो ही शुड हैव बीन किल्ड बिकॉज़. ही किल्ड पुलिस मैन इन फैक्ट। राइट? एंड. यू नो ही ही डिर्व्ड इट। जो अदर एक बहुत. बड़ा सोशल मीडिया पे नैरेटिव बना वो ये बना. कि ही वास अ ब्राह्मिन एंड ही वास किल्ड. बिकॉज़ ही वाज़ अ ब्राह्मण एंड देयर इज़ अ. ठाकुर चीफ मिनिस्टर। सो इट्स एसेंशियली अ. ब्राह्मण वर्सेस ठाकुर. राइवलरी। दैट्स व्हाट आई एम सेइंग। सो. नैरेटिव्स बनते हैं। वहां पे जो भी यू नो. देयर हैज़ बीन सर्टेन बैकग्राउंड या.
नैरेटिव बना देंगे लोग। राइट? दूसरा जब आप वेस्टर्न यूपी देखेंगे राइट. सो इट इज प्राइमरली डोमिनेटेड बाय अ यू नो. व्हाट आई कॉल्ड द फार्मर पॉलिटिक्स जो. चौधरी चरण सिंह जी का जो वोट बैंक जिसको. आप बोल रहे हैं व्हिच इज जाट्स राइट. गुर्जरर्स यादव्स. राइट एक ऐसा पपुलेशन जो ग्रीन रिवोल्यूशन. से यू नो फायदेमंद हुआ जो जिम्मेदारी. अबोलशन से जिसको थोड़े से फायदे मिले दैट.
बिकम वेस्टर्न यूपी के पॉलिटिक्स में आप. उसका बहुत ज्यादा इन्फ्लुएंस देखेंगे सो. आई थिंक इट्स इट्स अ वेरी रीजनल कांसेप्ट. कि कहां पे व्हाट इज द प्रोपोर्शन ऑफ़. पपुलेशन ऑफ़ दीज़ कास्ट्स? व्हाट हैज़ बीन. देयर. हिस्टोरिकल एक बोलते हैं ताकत क्या रही. है। सो फॉर एग्जांपल यूपी आल्सो हैज़ अ. वेरी स्ट्रांग होल्ड इन पॉलिटिक्स बाय द. जाट ऑफ़ कम्युनिटी जिससे मायावती आती थी।. तो वो दलित कम्युनिटी है। बट अगर आप. पॉलिटिकली देखेंगे तो दे आर अ वेरी. स्ट्रांग पॉलिटिकली इन्फ्लुएंशियल. कम्युनिटी। द नंबर उनके नंबर्स अच्छे हैं.
एंड हिस्टोरिकली दे हैव बीन आप बिहार में. देखेंगे तो पासवान का पैसा इनफ्लुएंस. देखेगा दो इट इज अ दलित कम्युनिटी सो इट. आई थिंक इट्स वेरी कॉन्टेक्स्चुअल टू दैट. रीजन नॉट इवन द एंटायर स्टेट गॉट इट ये. कट्टा कल्चर है क्या उधर आज भी पैसे तो है. नहीं सबके पास क्रिमिनल कल्चर ज्यादातर व. आएगा जहां पैसे नहीं होंगे आइडियली राइट. प्रोस्पेरिटी नहीं होगी अब प्रोस्पेरिटी. है नहीं तो गंस तो खरीद सकते नहीं है गंस. आर कॉस्टली तो उसका जो सबसे इज़ियर वे होता. है वो कट्टा होता है या बम होते हैं।.
इनफैक्ट जो क्रूड बम्ब्स होते हैं बहुत. सस्ते होते हैं वो बनाने के लिए। तो और. क्रूड बम्स ज्यादा इफेक्टिव भी क्यों होते. हैं? क्योंकि आवाज बहुत करता है। आवाज कर. लिया, धुआं कर लिया तो लगा कि और आप यू नो. न्यूज़ में भी देखेंगे तो बम मार दिया. वहां पे। वहां पे बम चली। गोली तो एक आध. माल तो सस्ते औजार होते हैं। कट्टा भी. बहुत सस्ता औजार होता है। कितने रुपए का. होता है ऐसे बम? अब मुझे एक्सजेक्टली उसका कितना उसका. कॉस्ट ऑफ प्रोडक्ट बट वै कॉस्टली। सो अगेन.
सो कट्टा क्या है? व्हाट दे वुड जनरली डू. इज दे विल टेक अ पाइप ऑफ अ ट्रक. स्टेयरिंग। हां दे विल यूज़ इट टू मेक अ. कट्टा। राइट? बॉम्ब्स में भी वो नेल्स. व्हील्स डाल के और एक्सप्लोसिव कुछ डाल के. बांध के उसको टाइट। दैट्स अ बॉम्ब फॉर. देम। बट भी ऐसे एक कट्टा अगर कितने व्हाट. इज द कॉस्ट? कितने का आता होगा? तो ₹100. में आ जाएंगे आपके पास कट्टे। ओके। सो. इट्स इट्स दैट कॉस्ट इफेक्टिव। और जो आपने. कहा इनफैक्ट कि वो दिखा के ही आधा काम हो. जा रहा है आपका। पूरा काम हो जा रहा है. क्या? चलाने की थोड़ी जरूरत है। करेक्ट।. कई बार तो चलते भी नहीं है बिकॉज़ दे आर एस. डिफेक्टिव बट लेकिन वो दिखाने से आधा काम.
हो जा रहा है। बट ये आज भी चलता है। मुझे. लगता है चलता तो है लेकिन बहुत हद तक. रिड्यूस हुआ है। अगर आप मुझे कंपेयर करने. को बोलेंगे लेट्स से 80 90 से विजवी आज।. खास करके यूपी में आई थिंक वन थिंग दैट. यूपी हैज़ सीन इन द लास्ट से 8 इयर्स आफ्टर. योगी जी केम टू पार। लॉ एंड ऑर्डर में. बहुत सिग्निफिकेंट चेंजेस आए हैं। राइट? और उसका एक मैनिफेस्टेशन है कि ग्राउंड पे. आपको वो ऊपर से नीचे तक इनफैक्ट जितने. क्रिमिनल्स की हम बात कर रहे हैं जो सबसे. बड़े-बड़े क्रिमिनल्स थे। इनफैक्ट मुख्तार.
अंसारी ही वाज़ इन जेल एंड देन ही डाइड ऑफ़. हार्ट अटैक। अतिक एमएस इज़ डेड। राइट? ही. वाज़ इम्प्लिकेटेड देन ही इज़ डेड। विकास. दुबे वाज़ इनफैक्ट एनकाउंटर्ड और व्हाटएवर।. सो ना सिर्फ बड़े क्रिमिनल। सो व्हेन दैट. हैप्पेंस टू द बिगर नेम्स कोई सोचता नहीं. था कि मुख्तार अंसारी को कोई पकड़ के जेल. में डाल देगा। कोई सोचता नहीं था कि अतीक. अहमद को कोई जेल में डालेगा फिर उसको कोई. गोली मार देगा। सो व्हेन दैट हैप्पेंस टू. बिगर क्रिमिनल्स इट सेंड्स अ मैसेज टू द. स्मॉलर वंस कि यार वो नहीं बचे तो हम क्या.
बचेंगे। तो इनफैक्ट आपने न्यूज़ में बहुत. सारे वो देखे होंगे कि क्रिमिनल्स पुलिस. स्टेशन पे जाके यू नो सरेंडर कर दे रहे. हैं कि जेल में हम सेफ रहेंगे। बाहर रहे. तो एनकाउंटर हो जाएगा। राइट? तो तो एंड वो. वो नीचे भी ड्रिप डाउन करता है कि यार. इसमें पकड़े गए तो ज्यादा थोड़ा हार्ष. होगा। जब आपको लगता है पकड़े जाने पे कुछ. नहीं होगा तो आप करते हैं। जब लगता है. पकड़े जाने पे सजा होगी तो नहीं करते।. इट्स सिंपल एस दैट। तो ऐसा क्या हुआ? यूपी. गवर्नमेंट में अभी जो करंट गवर्नमेंट है. योगी जी की उसमें ये सब होने लगा उससे. पहले आज तक नहीं होता था। व्हाई? क्योंकि.
पहले के भी आई एम श्योर पॉलिटिशियंस तो. परेशान होते होंगे। अगर ये क्रिमिनल्स हैं. एंड वो उनकी ही पार्टी के किसी एमएलए को. मार दिया तो फिर इट्स अ डिफिकल्ट पोजीशन. टू बी यस सो नाउ दिस इज़ अ वै प्रिंसिपल. कॉल आप देखेंगे एंड देन देयर इज़ अ. हिस्ट्री टू इट हिस्ट्री टू पॉलिटिक्स ऑफ़. यूपी 80ज में आप 90ज में जाएंगे तो 90ज. में आप देखेंगे जो स्मॉलर पार्टीज हैं. इनका उदय होता है। मुलायम सिंह यादव जी की. पार्टी समाजवादी पार्टी का उदय होता है।. मायावती जी काशीराम और मायावती जी की. पार्टी जो है बहुजन समाज पार्टी उसका उदय.
होता है। छोटी पार्टियां है और जो. पॉलिटिकल सीन है यूपी में बहुत अनस्टेबल. होता है। बहुत ही ज्यादा अनस्टेबल मतलब. ऐसीऐसी चीज हुई पॉलिटिक्स में आपको लगेगा. मजाक चल रहा है क्या? इस प्रकार की चीजें. यूपी ने देखी है पॉलिटिकली और उसके कारण. टू विन पार दे वुड गो टू एनी एक्सटेंट और. उसी के मैनिफेस्टेशन में दे वुड आल्सो. इंक्लूड बाहुबली टू विन पार। तो जितने भी. हम नाम ले रहे हैं मुख्तार अंसारी, अतीक. अहमद, हरिशंकर तिवारी, बृजेश सिंह सबको. पार्टियों ने टिकट दिया।.
राइट एरिया मैनेज कर लो तुम तो बस उनकी. विनेबिलिटी हाई थी ना और इनफैक्ट एक पॉइंट. ऑफ टाइम पर बोलते हैं कि हरिशंकर तिवारी. पूर्वांचल के 30 एमएलए उनके साथ होते थे. मतलब वो जो बोलेंगे वो 30 एमएलए करेंगे. इरिस्पेक्टिव ऑफ द पार्टीज वीरेंद्र साह. के साथ 10 एमएलए होते थे कि वो बोलेंगे तो. 10 एमएलए इधर रहना है तो इधर रहना है इधर. रहना है तो इधर रहना सो दे हैड दैट. इन्फ्लुएंस मतलब स्टेट के अंदर अपना ही एक. मिना मिनी पूरा सिस्टम चला रहे थे नाउ आप. लेजिटसी दे रहे हैं जब इनको टिकट दे रहे. हैं वो जीत रहे हैं तो लेजिटसी उनके पावर.
को दैट आई थिंक लास्ट सात आठ साल में आप. देखेंगे वो खत्म हुई तो फिर ये तो इनको भी. चाहिए होगा ना इन्होंने क्यों नहीं दिया. इनको भी तो 30 एमएलए चाहिए और वो पावर. चाहिए दैट्स अ वै नाइस क्वेश्चन इनफैक्ट. अगेन दैट्स अ वेरी प्रिंसिपल कॉल आप अभी. आप अगर आप देखेंगे कि 17 में जब बीजेपी. पहली. बार जो फर्स्ट योगी गवर्नमेंट बनी 2017. में तो इट वन अ वेरी क्लियर मैंडेट जब. आपको इतना क्लियर मैंडेट आ जाता है तो एज.
अ गवर्नमेंट आपकी रिस्पांसिबिलिटी हो जाती. है टोन सेट करना। राइट? अब उस 5 साल में. मुझे एक क्लियर मैंडेट मिल गया है। अब उस. 5 साल में मैं ऐसा क्या करूं कि अगली बार. अगर मुझे बिना इस प्रकार के लोगों या. बाहुबलियों के सपोर्ट के या ऐसे. कॉम्प्रोमाइज किए बिना मैं जीत जाऊं। अगर. गवर्नमेंट वो कर पाती है तो इट विल नॉट. हैव टू रिसोर्ट टू दिस। बट इंटरनली तो पता. होता है ना कि किसने कहां पे कितना सिस्टम. बैठा रखा है। पैसे कितने लगा रखे हैं।. कितने कॉन्ट्रैक्ट इसको कितनी रिश्वत खिला. रखी है। कितने लोग इसके लिए खड़े हैं। सो.
करप्शन आई वुड सेपरेट फ्रॉम द क्राइम्स. पार्ट थोड़ा सा। राइट? ब्लेटेंट क्राइम्स. आई वुड से। तो ब्लेटेंट क्राइम्स वाले में. मैं बोल रहा हूं। देयर इज़ अ डिफरेंस। कम. अब वो कम से कम दिखना नहीं चाहेंगे कि मैं. ब्लेटेंट क्रिमिनल हूं। वो जस्टिफाई. करेंगे कि मैं नहीं हूं। वो राइट साइड ऑफ. थिंग्स पे एटलीस्ट दिखना चाहिए। पर जिनकी. आदत बन गई है इतने टाइम से कि क्राइम करते. हैं हमको पावर मिलता है और उसकी वजह से हम. जीत जाते हैं। उन लोगों को बीट करना है तो. आपको कुछ तो करना पड़ेगा ना क्योंकि वो आज.
भी वो करेंगे जब हार रहे होंगे। अभी जीत. रहे हैं तो सब चलो सिस्टम बना के रखो हम. ज्यादा नहीं करेंगे। पर वो थोड़े से अगर. डगमगाएंगे। जैसे अगर इनकी गवर्नमेंट आई. इतने एमएलए आए खड़ा हुआ होगा कोई इस. ग्राउंड लेवल पर दिख गया होगा ना कि वेव. हमारे हाथ से जा रही है। तो उन्होंने. मैनेज करने की कोशिश नहीं करी क्या? फिर से वही कह रहा हूं कि वो ट्राई करेंगे. जितना हद तक पॉसिबल हो क्योंकि देखिए एक. तो क्रिमिनल से पॉलिटिशियन का जो. ट्रांजिशन है वो खुद में डिफिकल्ट है। हम. वंस यू बिकम अ पॉलिटिशियन आप थोड़ा अपने आप.
को वाइड कॉल करने की कोशिश करते हो। अपना. नाम ठीक करने की कोशिश करते हो। यू वांट. टू बी नोन फॉर द राइट रीज़ंस। तो अनलेस. एकदम कुछ एक्सजेंसी नहीं है। आप वापस नहीं. जाना चाहोगे इस लाइफ में। बिकॉज़ आप अब. लेजिटिमाइज हो चुके हो। वो आपको चीजें. लेजिटमाइज हो चुकी है। तो आप एक अच्छे. व्यक्ति के तौर पे दिखना चाह रहे हो। एंड. हेंस आई एम सेइंग इंटरनली थोड़ा बहुत ये. वो हो सकता है जो ब्लेटेंट क्राइम्स मैं. बोल रहा हूं। दिन दहाड़े मर्डर मर्डर हम. उससे वो व्यक्ति दूर भागेगा जितना हद तक.
संभव हो। यस और दूसरे से डरा ही सकता है।. वो चलता है वो अंदर से डराना वो तो दैट्स. अ कल्चर दैट विल ऑलवेज बी देयर। राइट? दैट. विल ऑलवेज बी देयर। दैट कैन नेवर जो. पावरफुल नहीं है एमएलए नहीं है वो डर. जाएगा।. पॉसिबल है। बट द सेकंड पार्ट टू दिस इज. जैसे-जैसे स्टेट एक लेजिटमेट स्टेट होते. जाता है वि मींस कि एडमिनिस्ट्रेशन है, पुलिस है, सब अपने रोल्स प्ले कर रहे हैं।. तो उससे भी बहुत फर्क आता है। तो आज की. डेट में कोई एक व्यक्ति अगर चाहे तो यूपी. में कहीं से मुझे लगता है इलेक्शन के समय.
में पर्चा भर के जनरली लड़ सकता है। वो. पर्चा भर देगा तो मर्डर नहीं हो जाएगा।. पहले होता था। एक्सैक्टली। पहले इलेक्शंस. में खड़े होने के लिए आपको इलेक्शन में. खड़ा हो रहा है मतलब यह बंदा कोई बाहुबली. है। कोई नॉर्मल व्यक्ति पर्चा भर के. इलेक्शन में खड़ा हो जाए। यही अपने आप में. बहुत बड़ी बात होती थी। नो तो जो स्टेट की. लेजिटिमेसी बढ़ रही है तो अगेन प्रोसेससेस. की लेजिटिमेसी है। इतनी विज़िबिलिटी है. चीजों की। तो आप भी बहुत कंस्ट्रेंड हो. जाते हो कि क्या कितना कर सकते हो? एंड. कैसे हुई ये लेजिटिमेसी स्टेट की? 1989.
में। राइट? जो सरकार बनती है राजीव गांधी चुनाव हारते. हैं और केंद्र में और राज्य में यूपी में. दोनों के चुनाव होते हैं एक साथ। केंद्र. में वीपी सिंह की सरकार आती है 1989 में. और उत्तर प्रदेश में जनता दल की सरकार आती. है और उसमें सारी पार्टियां साथ में थी और. मुलायम सिंह पहली बार चीफ मिनिस्टर बनते. हैं। 89 से 91 वो यू नो चीफ मिनिस्टर रहते. हैं क्योंकि फिर केंद्र में भी जनता दल. टूट जाती है। कांग्रेस फिर समर्थन वापस ले. लिए तो मुलायम सिंह भी वहां.
से मुख्यमंत्री से हट जाते हैं। 91 में. फिर से चुनाव होते हैं। 90 में राम मंदिर. आंदोलन ने बहुत तूल पकड़ा हुआ था। आपको. ध्यान होगा और राम मंदिर का केंद्र तो. अयोध्या तो 1991 में राम मंदिर आंदोलन की. बदौलत बीजेपी वापस पावर में आती है।. फर्स्ट टाइम बीजेपी का चीफ मिनिस्टर बनता. है। कल्याण सिंह चीफ मिनिस्टर बनते हैं।. राइट? तो 89 से 91 एक सरकार रही। फिर 19. 92 दिसंबर में बाबरी मस्जिद विध्वंस होता. है। हम तो वो सरकार और बाबरी मस्जिद. विध्वंस के बाद कल्याण सिंह रिजाइन कर.
देते हैं। 93 के अंत में जाके चुनाव. करवाती है। 93 के एंड में जो चुनाव होता. है अगेन बहुत प्रिंसिपली यू नो उस तो. बीजेपी की तरफ से एक जो जनरली नारा आपने. सुना होगा बहुत अक्सर बोला जाता है। तो. उनका नारा रहता है कि रामलला हम आएंगे. मंदिर यहीं बनाएंगे। राइट? और दूसरी तरफ. मुलायम सिंह यादव होते हैं और कांशीराम जो. बहुजन समाज पार्टी के फाउंडर होते हैं और. मायावती उनकी जनरल सेक्रेटरी होती है। तो. कांशीराम और मुलायम सिंह यादव मिलके एक.
कोलेशन बनाते हैं सपा और बसपा का और वो. नारा देते हैं मिले मुलायम कांशीराम हवा. में उड़ गए जय श्री राम। राइट? सो दो वेरी. प्रिंसिपली ऑोजिट यू नो काइंड. ऑफ इलेक्शन में ये टीम्स बनती है।. सरप्राइजिंगली जो रिजल्ट्स आते हैं उसमें. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी यू. नो वो जीत जाती है। मेजॉरिटी लेके आती है।. मुलायम सिंह यादव फिर से चीफ मिनिस्टर. बनते हैं। 93 में 93 में चीफ मिनिस्टर. बनते हैं तो लगता है अब सरकार चलेगी। 95.
में क्या होता है? 95 आतेआते कि यूपी में. पंचायत इलेक्शंस होते हैं। पंचायत. इलेक्शंस में मुलायम सिंह जी की जो पार्टी. होती है समाजवादी पार्टी बहुत अच्छा करती. है। और जो कांशीराम और मायावती जी की. पार्टी होती है बहुजन समाज पार्टी वो. अच्छा नहीं कर पाती। तो इनको लगता है इस. कोिशन सरकार में मुझे तो कुछ बहुत ज्यादा. फायदा हो नहीं रहा है ग्राउंड में। हम और. इसी दौरान कांशीराम जो है उनकी तबीयत भी. थोड़ी खराब हो रही होती है और गुड़गांव. में ही इनफैक्ट राज्यसभा के एक सांसद होते. हैं बीजेपी के विजय मल्होत्रा इफ आई एम.
नॉट नो कुछ नाम मैं शायद कंफ्यूज कर रहा. हूं तो उनके द्वारा वो बीजेपी की लीडरशिप. से मिल रहे होते. हैं। और 31 मई बिकॉज़ द नेक्स्ट डे इज़. वेरी-वेरी क्रूशियल। सो 31 मई इनफैक्ट इट. इज़ रिटेन इन लॉट ऑफ़ बुक्स। 31 मई 1995 को. कांशीराम हॉस्पिटल में होते हैं गुड़गांव. में और मायावती उनसे मिलने जाती है। उनके. मेंटर भी है कांशीराम पार्टी के. प्रेसिडेंट भी सब कुछ है और मायावती. कांशीराम को देख के रोने लगती है उनकी. तबीयत खराब को देख के और कांशीराम बोलते. हैं कि मेरी तबीयत तो अच्छी नहीं है। तुम.
मुख्यमंत्री अब बनना चाहोगी क्या? तो. मायावती बहुत सरप्राइज हो जाती है। वो. बोलती है नहीं आप मजाक कर रहे हैं। तो. कांशीराम एक लेटर निकालते हैं और दिखाते. हैं मायावती को और वो लेटर होता है बीजेपी. का सपोर्ट का। हम राइट तो दूसरे दिन. मायावती लौटती हैं लखनऊ और लखनऊ में जाती. हैं वहां के गवर्नर के पास मोतीलाल बोरा. वहां के गवर्नर होते हैं। उनके पास जाती. हैं और लेटर्स प्रोड्यूस करती हैं। एक तो. लेटर होता है कि कांशीराम जी ने मुझे.
ऑथराइज किया है पार्टी के बिहाफ पे सारे. डिसीजंस लेने के लिए। दूसरा मैं ये. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के. गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले रही हूं. मुलायम सिंह जी की सरकार से। और तीसरा ये. समर्थन पत्र है बीजेपी का। तो मैं स्टेक. अब कर रही हूं चीफ मिनिस्टरशिप का हम राइट. तो ये मोतीलाल बोरा जी के पास वो पहुंचती. है ये करके फिर वो लखनऊ में ही गेस्ट हाउस. है वहां पहुंचती है अपने पार्टी के सारे. विधायकों के साथ बैठक करने के लिए और इसका. पता चलता है मुलायम सिंह यादव जी को वो. चीफ मिनिस्टर हैं और इसे इसे गेस्ट हाउस.
कांड कहते हैं बहुत 1995 यस सेकंड जून ये. वेरी इग्नोनिमस इनफैक्ट. सो 2 जून को मायावती वहां वहां पे अपने. सारे 67 विधायक होते हैं बसपा के उनके साथ. बैठक कर रही होती है वहां पे और मुलायम. सिंह यादव अपने समर्थकों को भेजते हैं कि. वहां जाओ हम राइट उनको समझाओ डराओ धमकाओ. जो भी है और मुलायम सिंह यादव के करीब 200. समर्थक गेस्ट हाउस पहुंचते हैं उस उन. समर्थकों में अतीक अहमद भी होता.
है राइट और वो वहां पे पहुंचते हैं और. समर्थक मतलब सारे बाहुबली बाहुबली गुंडे. जो भी आप बोल सकते हैं यस तो पहुंचते हैं. वहां. और जैसे ही वहां पहुंचते हैं लोगों को पता. लगता है और वो बाहर से दरवाजा पीटना शुरू. करते हैं और वहां पे हल्लागुल्ला शुरू. होता है। वहां जितने एमएलए होते हैं उनको. मारा पीटा जाता है। मायावती तब तक भाग के. अपने एक दो लोगों के साथ उसी गेस्ट हाउस. के एक स्वीट नंबर वन में जाकर छुप जाती.
हैं। बंद कर लेती है दरवाजा। बसपा के कुछ. पांच विधायकों को उठा के ये लोग गाड़ी में. डाल देते हैं और फिर चीफ मिनिस्टरर्स हाउस. ले जाते हैं। वहां पर उनसे कोरे कागज पर. साइन करवाते हैं कि समर्थन आप हमारी सरकार. को दे रहे हैं। तब तक इधर इनके जितने. समर्थक थे ये मायावती खुद को स्वीट नंबर. वन में बंद कर लेती हैं और दरवाजे पे यू. नो बिस्तर सोफाल मीरा लगा के दरवाजा टेक. देती है कि दरवाजा नहीं तोड़ पाए। बाहर से. लोग दरवाजा पीट रहे हैं। इनफैक्ट कहा जाता. है कि एसएसपी वहां पे बाहर खड़े होकर.
सिगरेट पी रहे थे। राइट? मुलान जी. मुख्यमंत्री थे और फिर लेकिन क्या होता है. कि कुछ पुलिस ऑफिसर्स जो अपराइट होते हैं. वो जो वर्बल ऑर्डर सीएम हाउस से दिए जा. रहे थे उनको मानने से इंकार कर देते हैं. बिकॉज़ वो देखते हैं कि कुछ ज्यादा ही अति. हो रहा है। और फिर इनफैक्ट एक और. ब्रह्मदत्त द्विवेदी इनफैक्ट वो बीजेपी के. विधायक होते हैं और आसपास ही होते हैं तो. हल्ला सुनते तो वहां आते हैं। वो संघ के. भी स्वयंसेवक रहे होते हैं बीजेपी के और. वो देखते हैं कि क्या चल रहा है। तो उनको.
बहुत क्रेडिट दिया जाता है और वो एक लाठी. लेके वहां पे भांझना शुरू करते हैं लोगों. के बीच में जितने हुड़दंगी होते हैं। फिर. कुछ बहुत अपराइड पुलिस ऑफिसर्स होते हैं. जो बीच बचाव करते हैं। उनको फिर तब तक यू. नो ये बात केंद्र तक पहुंच जाती है कि ऐसा. कुछ हो रहा है। वहां के डीएम को एसपी को. सबको भेजा जाता है। आईजी पुलिस आते हैं और. तब फिर समर्थकों पर वहां पे जितने भी इनके. मुलायम जी के समर्थक होते हैं, लाठी चार्ज. होता है। फिर उनको हटाया जाता है। ये रात. तक ये सिलसिला चलता है। फिर बाहर से पुलिस. आवाज देती है मायावती जी को कि आप बाहर.
आइए अब लोग चले गए लेकिन वो इतनी डरी होती. है कि यू नो नहीं आते शी शी इज लाइक फिर. आधी रात को बहुत समझाने बुझाने के बाद शी. कम्स आउट राइट उनको राजभवन भेजा जाता है. कि आप राजभवन जाइए वं सुरक्षित हैं आप. क्योंकि अगर स्टेट गेस्ट हाउस में आप. सुरक्षित नहीं है राज्य के तो फिर राजभवन. ही दूसरा ऑप्शन बचता है राजभवन इज़. गवर्नर्स हाउस गवर्नर्स हाउस राजभवन भेजा. जाता. है कहा जाता है कि इसके बाद इसके के बाद. इनफैक्ट कहा जाता है कि मायावती ने साड़ी. पहनना छोड़ दिया एंड एंड ही शी स्टार्टेड.
वेयरिंग सूट कि इट इज मच सेफर फॉर सच. सिचुएशन इनफैक्ट आई इट इज़ टोल्ड सो दैट. वाज़ मतलब ये एक दिन था जो बहुत ही काला. दिन बोलते हैं यूपी के दूसरे दिन फिर. इनफैक्ट वो चीफ मिनिस्टर की शपथ लेती है।. अच्छा अगले दिन पार्टी टूट जाती नो सो. पार्टी तो उसी रात को टूटनी. थी। हां। सो सो बसपा का समर्थन दिया भाजपा. ने एंड नई सरकार बनती है। मायावती. मुख्यमंत्री बनती है और पहली देश की पहली. दलित महिला मुख्यमंत्री बनती है। इनफैक्ट.
गॉट इट। तो उन्होंने किया बट फिर मायावती. की सरकार के बाद ये चली गई 2012 में। या. 12 में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार. आती है। कैसे? अब इन्होंने तो लॉ एंड. ऑर्डर बेटर किया। हां। इन्होंने लॉ एंड. ऑर्डर बेटर किया। इनकी पॉपुलैरिटी बढ़ी। एक. फर्स्ट दलित फीमेल चीफ मिनिस्टर थी। इनका. नाम भी बहुत ज्यादा था। शी शी ऑलमोस्ट. बिकम अ नेशनल न्यूज़। शी वाज़ नॉट लाइक लोकल. लीडर अ स्टेट लीडर। वो भी था। और प्लस. ओवरऑल स्टेट आप बता रहे हो कि.
ब्यूटीफिकेशन हुआ स्टेट का और लॉ एंड. ऑर्डर भी बेटर हुआ। तो फिर क्यों हटा. दिया? सो अगेन सो शी इनफैक्ट वो देश की. मुझे लगता है अपने पॉइंट ऑफ़ टाइम पे। सबसे. बड़ी दलित लीडर बन गई। यू नो. मायावती। बट व्हाट हैपेंस इज़ बाकी चीजों. में आप देखेंगे। करप्शन में देखेंगे जैसे. मैंने ये इंस्टेंसेस बताए और दूसरा इट इज. आल्सो अबाउट कॉम्बिनेशंस राइट समाजवादी. पार्टी एक स्ट्रांग कॉम्बिनेशन है। क्यों?
क्योंकि उसके पास जो वोट बैंक है बहुत. स्ट्रांग सपोर्टर ग्रुप्स है। एक तो उनका. जो खुद का ग्रुप कास्ट है यादव्स का।. दूसरा मुस्लिम्स का इन फैक्ट दे आर डिवोट. फॉलोवर्स ऑफ मुलायम सिंह यादव। आपको ध्यान. होगा कि मुलायम सिंह 1990 में जब राम. मंदिर आंदोलन चल रहा था और वीएचपी के शिला. पूजन कार्यक्रम के लिए कार सेवक पहुंच रहे. थे अयोध्या में तो वहां पे उन्होंने. गोलियां चलवा दी थी कार सेवकों पे टू सेव. द स्ट्रक्चर राइट तो उस समय से वो आइकॉन.
बन गए थे मुस्लिम्स के लिए इनफैक्ट द. आइकॉन ऑफ़ सेकुलरिज्म सो एस टू से तो वो. कास्ट ग्रुप्स उनके पास हमेशा से बहुत. कैप्टिव था दे वर एबल टू ब्रिंग इन सम अदर. कास्ट ग्रुप्स अखिलेश यादव तब तक आ चुके. थे और पार्टी के हेल्म ऑफ अफेयर्स पे तो. कैंपेन उन्होंने बहुत अच्छा 2012 में. किया। कहा अखिलेश को इनफैक्ट उनको ये. क्रेडिट दिया जाता है कि बहुत अच्छा. कैंपेन चलाया। क्या कैंपेन था? एक. उन्होंने साइकिल यात्रा निकाली पूरे. प्रदेश में। इनफैक्ट एक वो था. टेक्नोलॉजिकल रूप से इनफैक्ट ही स्टडीड. फ्रॉम द ऑस्ट्रेलिया एंड ऑल एटलीस्ट आई.
बिलीव आई आई वांट टू बिलीव दैट यू नो ही. अंडरस्टैंड्स टेक्नोलॉजी एंड ऑफ़ दोज़. स्टफ्स। तो जो पूरा कैंपेन था उस सेंस में. बहुत कनेक्टेड टू द यूथ। राइट? ही फिल्ट. लाइक अ न्यू यंग लीडर टू द स्टेट। अवे. फ्रॉम करेक्ट। सो लोग भी ना देखना चाहते. हैं होप। तो अगर आप बहुत पुराना एक ग्रुप. से ना अभी वो ये सब 80 90 के दशक के लोग. थे तो आप एक नया चेहरा दिखाते हो ना तो. लोगों को भी पसंद आता है। और एक फ्रेश कोई. चेहरा होता है तो उसके साथ कोई बैगेजेस. नहीं होते। हम राइट? तो आई थिंक दैट वर्क.
2012 में समाजवादी पार्टी फिर से जीती।. बहुमत पे आई। अखिलेश यादव ऐसे कोई चीफ. मिनिस्टरियल फेस नहीं थे। लेकिन फिर वो यू. नो सब तरफ से आवाज आने लगी कि अखिलेश यादव. इस द आर्किटेक्ट ऑफ दिस विन। तो मुलायम. सिंह यादव ने बोला कि ठीक है अब पार्टी. आपके हवाले एंड यू नो अखिलेश यादव बिकम द. चीफ मिनिस्टर। अखिलेश यादव और मुलायम सिंह. यादव इनमें क्या हुआ? सो आई थिंक अ जनरेशनल मिसअंडरस्टैंडिंग या. जो भी आप बोले अखिलेश यादव मुख्यमंत्री.
बनते हैं 2012 में। अब मुलायम सिंह यादव. ऑफ कोर्स यू नो उन्हीं के आशीर्वाद से. बनते हैं। व्हाट हैपेंड इज एक कोटरी बन गई. राइट व्हिच इज शिवपाल सिंह यादव, मुलायम. यादव, अमर सिंह एक तरफ हो गए और अखिलेश. यादव अपने दूसरे चाचा के साथ अलग हो गए।. बीच-बीच में कुछ-कुछ हुआ कि जो चीफ. सेक्रेटरी थे वो बहुत क्लोज थे शिवपाल. यादव के। अखिलेश ने उनको हटा दिया। फिर. शिवपाल यादव को उनके मिनिस्टरियल बर्थ से. हटा दिया। उनको एक सिर्फ सोशल वेलफेयर का. मिनिस्टर बना दिया। फिर शिवपाल यादव को.
उन्होंने इनफैक्ट हटा ही दिया। पार्टी से. निष्कासित कर दिया। फिर मुलायम सिंह यादव. ने पब्लिक स्टेटमेंट्स दिए। शिव अखिलेश. यादव ने स्टेटमेंट्स दिए कि मेरा बाप तो. चारपाई पे सोता था। अमर सिंह ने इसको फाइव. स्टार में सोने की आदत लगा दी। इस प्रकार. के स्टेटमेंट्स दिए। दैट लेड टू अ होल. फैमिली ड्रामा। इनफैक्ट ऑल ऑफ इट वाज़ ऑन द. टीवी। अ एंड मतलब फाइनली फिर इट केम टू अ. सीन वेयर यू नो मुलायम सिंह यादव ने अपने. बेटे को हर कुछ वो बोल दिया जो शायद कोई. बाप अपने बेटे को प्राइवेट हो सकता है.
बोलता हो बट इतने पब्लिक लाइफ में तो शायद. ही बोलता हो क्या बोला व्हाट वा नालायक. मतलब अब बेटा नालायक हो जाए तो क्या कर. सकता है बाप एंड ऑल दैट तो इनफैक्ट फिर उन. लोगों ने अलग पार्टी बनाई शिवपाल सिंह. यादव ने अलग पार्टी बनाई मुलायम सिंह यादव. उनके साथ चले गए अखिलेश यादव बिकॉज़. समाजवादी पार्टी पे उन्होंने अपना यू नो. आधिपत्य जमा लिया सारे सांसद विधायक इनके. साथ हो गए अखिलेश यादव के साथ हो गए। तो. दैट वाज़ अ फुल ऑन फैमिली ड्रामा। दिस इज़. आल्सो अ सी व्हाट इज़ आल्सो इंटरेस्टिंग इज़. कि जितने भी समाजवादी नेता आप देखेंगे वो.
बात करते थे यू नो बहुत लिमिटेड मीन्स में. रहने की, जमीन से जुड़े रहने की परिवार के. लिए बहुत ज्यादा नहीं करने के लिए समाज के. लिए करने की। एंड द आयरनी इज कि मुलायम. सिंह जी की पार्टी राइट समाजवादी पार्टी. जब आप देखेंगे उनके परिवार के एक-एक पॉइंट. ऑफ टाइम पे. 2020. लोग इेड रिप्रेजेंटेटिव्स रहे हैं। एक-एक. बार में संसद में लोकसभा में एक साथ पांच. फैमिली मेंबर्स रहे हैं। राइट? छोटी-छोटी.
पार्टियों के नहीं होते। पांच सांसद।. राइट? सो दैट्स द आयरनी कि इतने सारे लोग. एवरीबॉडी इन ह फैमिली। तो मुझे नहीं लगता. कि इंडिया में और कोई भी ऐसी फैमिली है. जिसके इतने सारे मेंबर्स एट वन पॉइंट ऑफ. टाइम हैज़ बीन द मेंबर्स ऑफ लोकसभा यूपी. लेजिसलेटिव असेंबली पंचायत समितिज लोकल. लेवल बोर्ड्स हर जगह हर जगह मतलब कोई भी. उनके परिवार में मन कर गया अगर नेता बनने. का तो बन जाता था। मतलब इट्स क्लियर। दैट.
रिजल्टेड इन ऑल ऑफ़ दिस। बीजेपी एक्चुअली. गॉट एन एडवांटेज बिकॉज़ ऑफ़ दिस फैमिली. डिस्प्यूट? दैट्स वन। दैट्स वन ऑफ़ कोर्स।. सेकंड आई थिंक बट योगी जी का राइज़ कैसे. हुआ? करेक्ट। सो सेकंड आई थिंक सो 14 के. बाद एक जो माहौल बनना स्टार्ट हुआ पूरे. देश में इंक्लूडिंग यूपी व्हिच वाज़ यू नो. न्यू गवर्नमेंट हैज़ कम इन व्हिच इज़ वैरी. डिसाइसिव। अह व्हिच हैज़ इट्स कल्चरल इथ्स.
इन द वेरी राइट प्लेस। राइट? एंड व्हेन यू. से कल्चरल इथ्स यू नो इट इज़ नॉट जस्ट. हिंदुत्व बट अ प्राइड इन आवर कल्चरल लेगसी. एस वेल राइट. तो दैट स्टार्ट वो आप देखेंगे कि पूरा देश. में ना वो एक माहौल बनने लगा एंड उत्तर. प्रदेश उससे अछूता नहीं रह सकता था. क्योंकि उत्तर प्रदेश तो इनफैक्ट सेंटर था. उसका तो बीजेपी के जो तीन सबसे बड़े. मुद्दे रहे अगर आप 90 से देखेंगे उसमें. पहला रहा है राम मंदिर आंदोलन. दूसरा यूनिफार्म सिविल कोड एंड तीसरा 370. जम्मू एंड कश्मीर का हटाना देन द बीजेपी.
आल्सो इमर्ज एस अ वेरी स्ट्रांग इलेक्शन. मशीनरी मुझे लगता. है 14 में आप देखेंगे अमित शाह राष्ट्रीय. अध्यक्ष बने भाजपा के राइट और 17 का जो. यूपी इलेक्शंस था वो भाजपा ने एक तरह से. ऐसे लड़ा कि वो कॉन्फिडेंस दिखने लगा कि. नाउ वी कैन विन द स्टेट राइट अखिलेश यादव. 2012 में जब आए तो उन्होंने अपनी तरफ से. कम से कम पब्लिकली बहुत सारे क्रिमिनल से. डिसोसिएट करने की कोशिश करी बट प्रॉब्लम. था कि समाजवादी पार्टी एज अ पार्टी अगर आप.
देखेंगे तो हिस्टोरिकली जितने भी. क्रिमिनल्स अभी तक हम लोगों ने डिस्कस. किया है ऑल ऑफ़ देम करीब-करीब समाजवादी. पार्टी में एक पॉइंट ऑफ़ टाइम पे रहे ही. रहे हैं। ऑल ऑफ़ देम राइट तो इतना जल्दी. डिसोसिएट करना भी पॉसिबल नहीं है। तो एंड. इनफैक्ट वेरी जनरली आप यूपी में किसी से. भी बात करेंगे तो आप वो बोलेंगे कि. समाजवादी पार्टी का राज रहता है तो. गुंडागर्दी तो होती है। वो क्लियर है।. राइट? बहुत ज्यादा इनफैक्ट ऑथेंटिक न्यूज़. पीसेस आए जिसमें आए कि एक बहुत स्ट्रांग. कास्ट बायस भी था। अखिलेश यादव का।.
इनफैक्ट एक दो डाटा है कि जिसमें जो पुलिस. ऑफिसर्स की भर्ती हुई और जो थानों में. एसएचओस बनाए गए ऑलमोस्ट 6070% ऑफ़ देम व. फ्रॉम अखिलेश यादव्स ओन कास्ट। राइट? तो. वो भी एक नैरेटिव बना कि सिर्फ अपने कास्ट. का यू नो प्रोग्रेस चाहते हैं। प्रोग्रेस. चाहते हैं। तो जो नॉन यादव ओबीसीस थे वो. भी थोड़ा ग्रेविटेट किए बीजेपी की तरह।. कंबाइंड विद अ नेशनल नैरेटिव जो इलेक्शन. लड़ा गया और 2017 में बीजेपी फुल मेजॉरिटी.
के साथ आ जाती है। बट विदाउट द चीफ. मिनिस्टर फेस हम दैट्स व्हाट माय क्वेश्चन. वास या सो इट द बीजेपी वन इट लार्जली ऑन. नरेंद्र मोदी जी फेस इनफैक्ट हां तो उस. टाइम वो वेव चल रही थी पूरे कंट्री में हर. इलेक्शन वास गेटिंग वन बिकॉज़ ऑफ़ द नेशनल. वेव करेक्ट राइट बट उस वेव में हाउ कम या. सो दिस इज़ वन पर्सन हु वो ऑब्वियसली बहुत. सालों से वो पॉलिटिक्स में रहे हैं। बट. वेरी लोकल फेस.
नोबडी नेशनल लेवल पर किसी ने उनका नाम. नहीं सुना था। नेशनल लेवल पे उनके कोई. एसोसिएशन स्ट्रांग नहीं थे एंड ही इज़ यंग. तो एकदम से इतने यंग को कोई पार्टी के. पुराने एक्सपीरियंस नेता को भी नहीं. बनाया। कुछ नहीं किया। लाइक व्हाट वास दिस. कॉल? सो नो थोड़ा सा सो देयर वर मल्टीपल. कंटेंडर्स ऑफ कोर्स उसमें एंड एंड द काइंड. ऑफ इनेशन दैट यू नो आई हैव आल्सो रेड. अक्रॉस योगी आदित्यनाथ ऑफ कोर्स एक. कंटेंडर थे मनोज सिन्हा जी एक कंटेंडर थे.
केशव प्रसाद मौर्या एक कंटेंडर थे उस समय. वो प्रदेश अध्यक्ष थे भाजपा के वहां पे. इनफैक्ट जो अभी डिपुटी चीफ मिनिस्टर हैं।. अ आई थिंक योगी जी के साथ जो एडवांटेज था. वन यंग आप बोल सकते हैं लेकिन इन. एक्सपीरियंस नहीं बोल सकते क्योंकि ही वाज़. अ सिक्स टाइम टर्म्स एमपी बाय देम। तो कोई. बंदा छह बार एमपी रह गया हो, एक जगह से. लगातार जीता हो, इलेक्शन हारा नहीं हो, तो. अपने आप में दिस इज अ टेस्टिमनी टू द. फैक्ट पॉपुलैरिटी की जहां तक हम बात करते. हैं। तो पहला मुझे वो लगता है। दूसरा एक.
यंग फेस होने का फायदा ये होता है कि यू. विल हैव समबडी जो बहुत लंबे समय तक. कंटिन्यू कर सकता है। राइट? यू आर. बिल्डिंग फॉर द फ्यूचर। ऐसा कोई व्यक्ति. नहीं है कि एक टर्म के बाद इसको तो रिटायर. करना पड़ेगा। राइट? यू आर बिल्डिंग फॉर द. फ्यूचर। थर्ड अ. अगर आप कल्चरली देखेंगे तो ही इज इन सिंक. वि बीजेपीस आईडियोलॉजी सो एस टू से वो एक. मठ के महंत हैं। गोरखपुर मठ के महंत सो ही. इस एन एस्थेटिक यू नो अब सब कुछ छोड़ दिया.
उन्होंने त्याग दिया है। इंडिया में आज भी. जनता बहुत ज्यादा अप्रिशिएट करती है किसी. ऐसे व्यक्ति को जो अपना सब कुछ त्याग कर. यू नो समाज सेवा कर रहा हो या लोगों की. सेवा कर रहा हो। तो क्योंकि एक जनरल. नैरेटिव ये बनता है ना कि ये किसके लिए. चोरी करेगा? चुराएगा भी तो किसके लिए? कोई. परिवार तक नहीं है। इनफैक्ट बाद में जब ये. आया जब वो चीफ मिनिस्टर्स बने और बहुत. सारे रिपोर्टर्स उनके फैमिली मेंबर्स के. पास गए पता करने की कोशिश की क्या. बैकग्राउंड है। तो वो बहुत फिर हाईलाइट.
हुआ जिसमें पता चला कि उनके जितने भी भाई. बहन हैं सब इतने छोटे-छोटे कामों में. कहीं-कहीं इन्वॉल्व्ड हैं। कि मतलब नॉट. इवन एक्सपेक्टेड कि सीएम का कोई भाई-बहन. ये कर रहा होगा। करेक्ट। सो दैट वस आई. थिंक एंड इन द हाईसाइड कम से कम मतलब जैसे. भी हुआ इट इज़ अ वंडरफुल चॉइस दैट वास मेड. राइट एंड नाउ एवरीबडी थिंक्स कि यार दे. कुड नॉट हैव गॉटन अ बेटर चीफ मिनिस्टर दैट. इज ट्रू ही इज़ प्रीटी गुड एक्चुअली. एटलीस्ट जितना जो बाहर से देखने को मिलता.
है न्यूज़ आती है सुनने को मिलता है एंड द. वे ही स्पीक्स द विज़न ही स्पीक्स अबाउट. हाउ अह डिसाइसिवनेस उन्होंने जो जो दिखाई. है फ्रॉम द ऑप्टिक्स पॉइंट ऑफ व्यू लुक्स. वैरी वैरी वैरी गुड एंड इन बोथ वेज़ सी अह. किसी भी प्रदेश देश अब जब डेवलप करने की. बात करते हैं ना तो इट हैज़ टू पार्ट्स। एक. तो इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट जो आप. बोलते हैं बट दैट इज डेवॉइड ऑफ़ एनी. फीलिंग्स। राइट? सो द सेकंड पार्ट ऑफ़. डेवलपमेंट इज़ डेवलपमेंट वेयर पीपल फील गुड. अबाउट देमसेल्व्स। दैट इज़ ऑल स्पेशली आप.
किसी जब नेशन स्टेट की बात करते हो। व्हाट. इज़ अ नेशन स्टेट? नेशन स्टेट ये थोड़ी होता. है कि इतना बड़ा ज्योग्राफिकल एरिया तो एक. नेशन स्टेट है। देयर हैज़ टू बी समथिंग. एल्स जो उनको बाइंड करे। स्पिरिट लेगसी. है, स्पिरिट है, कल्चरल लेगसी है। यूपी. में आप देखेंगे अभी वो बहुत अच्छे से. दोनों साइड से काम हो रहा है। अयोध्या में. ठीक है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्डिक्ट दिया।. लेकिन जिस तरीके से उसके बाद उसे बनाया. गया जिस सीरियसनेस के साथ प्राण. प्रतिष्ठान हुआ। आज अयोध्या में जितने.
टूरिस्ट्स आते हैं जितने अच्छे से वो. एरिया डेवलप हो रहा है एज अ टूरिस्ट. स्पॉट। उसमें आपको गवर्नमेंट को अप्रिशिएट. करना पड़ेगा। आप बनारस देख लीजिए जो काशी. विश्वनाथ कॉरिडोर है। कोई इस पर बात भी. नहीं करता था। राइट? हां मंदिर है ना क्या. फर्क पड़ता है और क्या करना है वहां? क्या. जरूरत है? लोग हैं वहां पे अपना चल रहा. है। उसको सिर्फ ब्यूटीफाई नहीं करना। पूरे. काशी विश्वनाथ को घाट से कनेक्ट कर देना।. यू नो आज जो वहां के फुटफॉल्स है मल्टीपल. टाइम्स आर इट यूज्ड. टू। आप वेस्ट में भी देख लीजिए। आप मथुरा.
देख लीजिए। अब जितने भी रिलीजियस प्लेसेस. है एंड ऑल ऑफ दिस एक तो इससे है कि दैट. कनेक्टेडनेस वो भी बढ़ता है। दूसरा देयर इज़. अ ह्यूज इकोनमिक आस्पेक्ट ऑफ़ दिस एज वेल।. राइट? इन सारे जगहों पे। सो अयोध्या नोबडी. कुड हैव थॉट कि अयोध्या में एक फंक्शनिंग. एयरपोर्ट होगा जहां इतने मतलब फ्लाइट्स. उतरते रहेंगे। राइट? अयोध्या में जब राम. मंदिर नहीं भी बना था। तो जैसे ही योगी जी. की सरकार बनी उन्होंने वहां पर दीपोत्सव. शुरू किया सरयू नदी के किनारे। आज वो. दीपोत्सव आपको ध्यान होगा हर बार दिवाली. पे कितना हाईलाइट होता है कि हर बार.
रोगिनीज वर्ल्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स. बन रहा है। एंड यू नो इट्स इट्स अ कल्चरल. थिंग ट्रू तो इससे बहुत ज्यादा आपको फर्क. दिखेगा यू नो वि प्रीवियस गवर्नमेंट्स एंड. अभी का गवर्नमेंट दूसरे साइड पे आप. देखेंगे इंफ्रास्ट्रक्चरली आल्सो आप. देखेंगे आज यूपी के हाईवेज के सब लोग बात. करते हैं। सो उस पे भी काम चल रहा है।. इनफैक्ट इन्वेस्टमेंट्स में जो अभी. इन्वेस्टमेंट समिट रिसेंटली हुए हैं यूपी. में सबसे बड़े आज तक इन्वेस्टमेंट समिट्स. हुए हैं। बहुत सारी अभी न्यू कंपनीज़ दे आर. सेइंग विल इन्वेस्ट इन द यूपी। सो आई थिंक.
सम वंडरफुल जॉब देयर। लेट्स गो डीपर इन. दिस। यस इन्वेस्टर्स सबमिट पैसा लग रहा. है। बहुत लोग डरते हैं बाय द वे पैसे. लगाने से। एंड वी विल कम टू दैट। राइट? बट. बिफोर दैट आपने बात करी कि वो गोरखपुर से. छह बार एमपी बने। और हमने कन्वर्सेशन. हमारी स्टार्ट करी थी गोरखपुर से।. यस यस राइट तो गोरखपुर में जन्म हुआ था. बाहुबलियों का राइट उधर बहुत सारे बाहुबली. थे तिवारी जी थे ठाकुर फैस्टेट से लोग थे.
एंड दिस दिस होल थिंग वास बिकमिंग अ बिग. थिंग वहां पर इतने बड़े बाहुबलियों को. हराकर हाउ डिड योगी जी. बिकम दी फेस सो अब देखेंगे गोरखपुर में. बाहुबलियों के अलावा जो गोरखपुर का मठ है. उसका भी बहुत इन्फ्लुएंस है उस जगह पे।. बहुत इन्फ्लुएंस है। इनफैक्ट जो योगी. आदित्यनाथ के गुरु थे अवैद्यनाथ वो भी. वहां से एमपी थे गोरखपुर से उसके पहले। तो.
अगर वैसे आप प्लेयर्स के तौर पे देखेंगे. तो अपार्ट फ्रॉम फैशंस मठ का अपना एक बहुत. बड़ा इन्फ्लुएंस उस एरिया में। दूसरा. इन्फ्लुएंस के अलावा. रिस्पेक्ट। द मोमेंट एक तो है कि आप. गैंगस्टर हैं। तो आपका डर हो सकता है. रेस्पेक्ट नहीं आएगा ना। मटका इन्फ्लुएंस. रिस्पेक्ट से ज्यादा आता है।. राइट? क्योंकि इट इज लेड बाय समबडी जो एक. मतलब साधु. हैं। तो उधर उन गैंगस्टर्स के बीच में एक.
ये लोग क्यों बनते जा रहे थे? क्यों. रिस्पेक्ट थी? क्यों लोग इनसे डरते नहीं. थे? और क्यों गैंगस्टर्स ने इन्हें बनने. दिया? क्योंकि गैंगस्टर्स तो चाहेंगे कि. अपने ही सारे लोग हो। कोई भी हो। मेरा शहर. बहुत है तो मैं क्यों क्यों नहीं जाने. दूं? बिल्कुल। और बहुत राइवलरीज हुई।. इनफैक्ट अगर आप जाएंगे तो उसमें मुख्तार. अंसारी ने इनफैक्ट एक बार योगी आदित्यनाथ. पे हमला हुआ कब? क्या जब वो एमपी थे? टेल. मी दिस सो उनप हमला हुआ। इनफैक्ट आपको. ध्यान होगा योगी आदित्यनाथ का एक संसद में.
बहुत फेमस भाषण है जिसमें वो रो रहे हैं।. और रोते हुए कहते हैं कि मुझे बता दिया. जाए कि मैं संसद का सदस्य हूं या नहीं।. क्या संसद मेरी रक्षा कर पाएगा या नहीं।. एंड ही इस क्राइंग इन दैट वीडियो।. ही वास एट दैट स्टेज आल्सो। फिर उन्होंने. 2002 में अपनी खुद की क्या क्यों अटैक. हुआ? व्हाट वास से? बेसिक राइवलरी ऑफ ऑफ. कंट्रोलिंग दैट रीजन। और 2002 में फिर वो. अपनी खुद की हिंदू युवा वाहिनी बनाते हैं. योगी आदित्यनाथ। क्योंकि उन्हें समझ में.
आता है कि सिर्फ और सिर्फ धर्म से शायद. इसे नहीं जीता जा सकता। बल की भी जरूरत. पड़ेगी। हिंदू हिंदू वाहिनी बताते हैं।. उनको चैलेंज करते हैं और वहां टिके रहते. हैं ऐसे क्षेत्र में और इसीलिए आपको वो. दोनों देना होगा। मतलब दोनों क्रेडिट देना. होगा कि ना सिर्फ धर्म बल के क्षेत्र में. भी उन्होंने उनका सामना किया और जब वो. सरकार में आए आप देखिए तो सबसे पहले. उन्हें समझ में आया कि इनको न्यूट्रलाइज. करना जरूरी है इन जैसे लोगों को और जितने. भी गैंगस्टर्स थे करीब-करीब सब के सब जेल.
गए। मुख्तार अंसारी जेल गए। अतीक अहमद जेल. गया यू नो विकास दुबे ही गॉट एनकाउंटर्ड. ऑन ऑफ देम सो मेनी ऑफ़ देम डू यू थिंक कि. गवर्नमेंट करवाती है एनकाउंटर्स. दैट्स अ कंटेंशियस इशू नो बट आई थिंक ओके. कई बार हमें अच्छा लगता है सुनने में कि. यार ये तो इतना बड़ा क्रिमिनल है ही. डिर्व्ड इट बट हम ये नहीं देखते हैं कि कई. बार वो फिर एक्सटेंड होते ना वो कब वो थिन. लाइन ब्लर हो जाती है वो समझ में नहीं आता. है तो इसीलिए एक्स्ट्रा जुडिशियल मीन्स.
अगर एक बार दो बार तीन बार हम उसको. अप्रिशिएट करने लगेंगे जस्टिफाई करने. लगेंगे अगर वो नॉर्म बन जाता है तो फिर वो. स्टेट के लिए करेक्ट तो नो. थरेटिकली आई डोंट थिंक एनी सीरियस. पॉलिटिशियन कोई भी थरेटिकली उसको सपोर्ट. करेगा पर ये तो जैसे बात करते हैं. कि जेल में चले जाओ नहीं तो एनकाउंटर हो. जाएगा ऑल ऑफ दी जब हर जगह आता है एंड पीपल. पब्लिक लाइक्स इट बाय द वे पब्लिक का. सपोर्ट काफी मिला व्हिच इज वैरी.
लाइक आज तक ऐसा देखने को मिला नहीं था. क्योंकि आज तक जब भी कोई ऐसी चीजें होती. थी तो ह्यूमन राइट्स और बहुत सारे ऐसे. मुद्दों के ऊपर बात होती थी जहां पे. पब्लिक सेंटीमेंट वाज़ नेगेटिव कि ये क्या. गुंडागर्दी कर रहे हो आप। व्हाई आर पीपल. लाइकिंग दिस? कि सारे क्रिमिनल्स का मरना. और कोइंसिडेंटली. वो सबकी सस्िशियस डेथ होना हैज़ बिकम अ. नॉर्म हैज़ बिकम बैक टू बैक एक. कोइंसिडेंटली सब होते जा रहा है। एंड.
लोगों को मजा आ रहा है इसमें। सी दिस इज़. बाय द वेरी रोंग स्टेट टू बी इन।. सी बहुत सारी ये जो क्रिमिनल्स हम डिस्कस. कर रहे हैं इनका आतंक लोगों ने देखा है।. जैसे अतीक अहमद की अगर आप बात करेंगे तो. एक ऐसा व्यक्ति इलाहाबाद में. जिसका 2011-12 की केस है। वो जेल में था. और इनफैक्ट उसे चुनाव लड़ना था। और उसने. बेल की अर्जी डाली इलाहाबाद सो हाईकोर्ट. का बेंच इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश में.
है। यू नो लखनऊ में नहीं है। लखनऊ में. उसका बेंच बैठता है। बट हाई कोर्ट इज़ इन अ. इलाहाबाद प्रयागराज नाउ।. सो इलाहाबाद हाई कोर्ट के 10 जजेस ने खुद. को रिक्यूज कर दिया उसका केस सुनने से।. क्यों? डर के मारे और क्यों उनकी फैमिली. को दिक्कत? यस। अगर वो एक दो केस सुनेंगे. बहुत ऑब्वियस है। बेल रिजेक्ट ही करेंगे. इस तरह इस प्रकार के व्यक्ति का। बेल. रिजेक्ट करेंगे तो उनको पता नहीं है क्या? तो आप सोचिए एक ऐसा व्यक्ति हाई कोर्ट के.
1010 जज अगर उसका केस सुनने से इंकार कर. रहे हैं तो उस व्यक्ति का क्या आतंक रहा. होगा? उस व्यक्ति ने 2005 में बसपा से. सांसद चुने जाते हैं राजूपाल और अतीक अहमद. के भाई के अगेंस्ट वो लड़ते. हैं। राजूपाल विधायक बनते हैं सॉरी। और. विधायक बनते हैं और विधायक बनने के कुछ. दिनों के बाद उनकी हत्या कर दी जाती. है। तो एक ऐसा व्यक्ति जो एमएलए को मार दे. जो हाई कोर्ट को डरा दे तो वो व्यक्ति अगर.
न्यूट्रलाइज होगा अगर वो व्यक्ति किसी भी. प्रकार से हटता है तो आम जनता को तो खुशी. होगा आम जनता को क्या लेना देना है कि. स्टेट है कि जुडिशियल है कि एक्स्ट्रा. जुडिशियल है हाउ डस इट मैटर टू देम एंड. दैट्स द सेंटीमेंट व्हिच गेट्स ए कोड तो. पीपल लाइक दैट हर अति के अंत को लोग तो. पसंद करते हैं बट हां एज अ स्टेट्समैन यू. कैन नॉट देन से और एज अ पॉलिटिशियन एज अ. लीडर यू कैन नॉट से कि दिस इज द राइट वे. एंड यूपी में एक बहुत. ही बहुत चर्चित या कंट्रोवर्शियल.
पॉलिटिशियन है राजा भैया। हैव यू हर्ड ऑफ़. हिम? या राइट? क्यों उनके बारे में इतनी. बात होती है? एंड व्हाई ही सो ओपन अबाउट. अगर हम बाहुबल की बात कर रहे हैं और चीजों. की बातें कर रहे हैं। करेक्ट। अगेन ही. कम्स फ्रॉम द ईस्टर्न पार्ट ऑफ़ द यूपी।. राइट? ब्रॉडली ईस्टर्न पार्ट ऑफ़ द यूपी।. प्रतापगढ़। राइट? अ अगेन वन ऑफ द वेस्टेजेस. ऑफ ही कम्स फ्रॉम अ वेरी रॉयल फैमिली राइट. बाहुबल है ज्यादातर इन केसेस में क्या.
होता है अगर आप देखेंगे तो इलेक्शन. विनेबिलिटी इनकी बहुत हाई होती है राइट दो. तीन रीजंस है अगर कोई एक वहां के बहुत. प्रतिष्ठित फैमिली का मेंबर है तो एक तो. वो फैमिली के एलिजंस के तौर पे लोग वोट. देते आते हैं कि यार हम इंदिरा गांधी को. वोट देते थे तो आज राहुल गांधी को वोट. देंगे और उनके जो अगले बच्चे हैं वो भी वो. एक इंडिया में मेंटालिटी है कि हम उसको. वोट देते आ रहे हैं तो उसी को वोट देंगे।. एक तो फैमिली एलिजंस है। प्लस मोमेंट अगर. आप इतने प्रतिष्ठित परिवार से या संपन्न. परिवार से आते हैं तो रिसोर्सेज का. कंट्रोल आपका बहुत हाई होता है वहां के.
रिसोर्सेज का। तो पहले जमीनें होंगी आपके. पास। फिर जब ये सब बिज़नेसेस आने लगे, गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स आने लगे तो उसमें. आपका बहुत बड़ा स्टेक रहेगा। तो एक तरह से. रिसोर्सेज पर भी आप ही का कंट्रोल रहेगा. ज्यादातर। तो जब रिसोर्सेज पे आप ही का. कंट्रोल है, एक जनरल एलिजेंस है पब्लिक का. आपके अगेंस्ट आपके साथ और और रिसोर्सेज. कंट्रोल है तो इसका मतलब है कि आपने. सर्टेन बाहुबल एग्जीक्यूट किया ही है। वो. बहुत ऑब्वियस है। वो बहुत ऑब्वियस है कि. आपके लोग होंगे जो यू नो बिकॉज़ कोई ना कोई. दूसरे पक्ष से यू नो कभी कुछ करेगा ही तो.
आप रिटालिएट करेंगे। वो सब होगा ही होगा।. तो मेरे ख्याल से ही इज़ वन ऑफ़ दोज़. कंटिन्यूइंग पीपल। बट आल्सो यू सी द. ट्रांजिशन वि इज आप कोई भी ऐसा ब्लेटेंट. विज़िबल क्राइम नहीं देखेंगे। तो मगरमच्छ. को खिला देते हैं। व्हाट इज दैट कहानी? सो. दिस इज दिस इज समथिंग दैट आई हैव आल्सो. रेड एंड हर्ड इन द 1990 ऐसा कुछ होता था।. लेकिन आज के दिन में अगेन आई एम नॉट वैरी. श्योर। बट वही मैं बोल रहा हूं कि आज के. दिन में ये संभव नहीं होगा। अगर चाहे भी.
तो नहीं कर सकते। और कर करेंगे तो इतना. मीडिया लाइमा लाइट इतना स्क्रूटनी आ जाएगा. कि फिर वो पॉलिटिकली सर्वाइव नहीं कर. पाएंगे। डू यू फील कि बहुत सारे. पॉलिटिशियंस ऐसे रूमर्स या कहानी को पलने. भी देते हैं और खुद ही फैला देते हैं ताकि. उनका बरकरार रहे भाई ये करवा देते हैं।. करेक्ट ज्यादातर इनफैक्ट. अगेन उस समय पे और किसी एक ऐसे एरा में या. किसी एक ऐसे रीजन में जहां आपको रेन करने. के लिए डर की जरूरत हो। तो आप बिल्कुल ही.
करेंगे। और इनफैक्ट इसीलिए आप देखेंगे कि. जो मारने के तरीके भी होते थे वो बहुत. दुर्दांत होते थे। तो अगर आप देखेंगे कि. श्री प्रकाश शुक्ला ने जब वीरेंद्र साह को. मारा तो 100 गोलियां दागी उसके शरीर में. हां एक से भी मर एंड उसकी आदत थी कि वो. AK-47 का पूरा मैगजीन दाग दे रहा. था तो यार मर तो पांच गोली में भी कोई. सकता है एक में भी मर सकता है मार सकता एक. में भी मर सकता है सर पे मार दो तो 100. गोलियां दागने की क्या जरूरत है दैट्स दी. ये या एसिड से नहलाना शाहबुद्दीन ने के. लोगों ने एसिड से नहलाया वहां पे चंदा.
बाबू के बेटे को सिवान में क्यों नहलाया. डर होना चाहिए उस चीज का कि एसिड से नहला. बना दिया। नॉर्मली मार दिया चाकू से या एक. बंदूक से तो डर नहीं आएगा ना। सो इनफैक्ट. यस तो इसीलिए मगरमच्छ से खिलवा दिया। वो. तरीका है ना या अब हुआ कि नहीं ये नहीं. पता लेकिन सब डर गया कि भाई तो मगरमच्छ को. खिलवा देते हैं। तो आधे लोग तो ऐसे ही. आसपास नहीं भटकेंगे।. दूसरी स्टेट में बैठे हुए दूसरे लोग भी डर. जाते हैं। नॉट जस्ट। यस यस यस।. और कौन सी ऐसी ड्रेडेड स्टोरी सुनी है. हमने जो जिसको किलिंग ड्रेडेड तरीके से.
करी है किसी ने ऐसे बाहुबल दिखाने के लिए? बहुत सारे ऐसे स्टोरीज हैं आप अतीक अहमद. की इनफैक्ट हम लोग बात कर रहे थे अतीक. अहमद यू. नो 1990 से उसने शुरू किया अतीक अहमद जब. पकड़ा गया उसके ऊपर करीब 100 से ऊपर. क्रिमिनल केसेस थे 100 तो आज तक पकड़ाया. क्यों नहीं था 100 से ऊपर ही वास वि. गवर्नमेंट ना 90 में उसने सबसे पहले चुनाव. लड़ा इंडिपेंडेंट जीत. गया ही फोट अगेंस्ट अ पर्सन कॉल्ड चांद. बाबा जिसने उसको यू नो उसके पहले क्राइम.
के बाद सेव किया था वैरी ऑब्वियस ऐसे नहीं. चलता है। पहले वो गुरु को ही पकड़ते हैं. फिर उसी को हराते हैं। तो 90 में उसने. सबसे पहले चुनाव लड़ा जीत गया। साइकिल हां. फिर उसने 89 में चुनाव लड़ा जीत गया। फिर. 91 में चुनाव लड़ा जीत गया। फिर 93 में. चुनाव लड़ा जीत गया। फिर उसको समाजवादी. पार्टी ने अपने पार्टी में डाल लिया।. बार-बार चुनाव जीत रहा है तो हमारे साथ. रहे। तो समाजवादी पार्टी का मेंबर हो गया।. समाजवादी का पार्टी का मेंबर हुआ। फिर. एमएलए बना। 2004 में वो फूलपुर लोकसभा सीट. से लड़ा। समाजवादी पार्टी के टिकट पे।.
फूलपुर लोकसभा सीट जो इलाहाबाद का पार्ट. है लार्जली। फूलपुर लोकसभा सीट से. जवाहरलाल नेहरू लड़ते थे।. कौन जीता वो? जीता। उस सीट से वीपी सिंह. लड़े सोचिए। ऐसी सीट जो प्राइम मिनिस्टर. सीट है। उस सीट से अतीक अहमद चुनाव लड़ता. है और जीतता है। 2004 में और उसके बाद. 2007 में मायावती की सरकार बन जाती है।. क्योंकि 2005 में वो राजूपाल की उसने. हत्या करवा दी थी। राजूपाल बीएसपी से.
विधायक बना था। अब साथ में मायावती की. सरकार बनी तो उसने अतीक अहमद को जेल में. डलवाया। हम 2008 में आपको याद होगा. न्यूक्लियर डील हुआ था इंडिया यूएस का. इंडिया यूएस इंडो यूएस न्यूक्लियर डील और. उस समय मनमोहन सिंह जी की गवर्नमेंट थी और. और पार्लियामेंट में सिर्फ वोटिंग होनी थी. क्योंकि बहुत कंटेंशियस इशू था।. कम्युनिस्ट पार्टीज ने सपोर्ट करने से. इंकार कर दिया था उस डील को। राइट? तो. उसमें एक-एक वोट जुगाड़ कर रही थी यूपी की. सरकार कि वह डील किस तरह से पास। तो. समाजवादी पार्टी भी साथ में थी यू नो. यूपीए के इस मुद्दे पे तो समाजवादी पार्टी.
ने विप जारी किया और अतीत जेल में था उसे. जेल से लोकसभा लाया गया इंडोयकस नक्लिए. डील पे वोट करने के लिए सोचिए एंड द आयरनी. बट अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी ने विप. जारी किया था कि सपोर्ट में वोट करना है. उसने अगेंस्ट में वोट किया. जेल से निकाला वेस्ट हो गया करेक्ट. लुक एट द आयरडी राइट सो एंड दिस इज ही वुड.
से आई वोटेड फॉर द इंडस इंडो यूएस. न्यूक्लियर डील व्हेन आई वास इन द जेल हम. राइट उसके बाद फिर वो निकलता है तब तक. थोड़ी उसकी यू नो ताकत कमजोर हो जाती है. फिर वो दो तीन इलेक्शंस लड़ता है हार जाता. है लेकिन उसके बाद भी इनफैक्ट इनफैक्ट. 20087 के ही आसपास सात के आसपास यस एक. बहुत बड़ा केस होता है एक मदरसे में. गैंगरेप होता है मदरसे के कुछ लोगों ने. गैंगरेप करते हैं. और उन लोगों को बचाने के लिए अतीक अहमद. सामने आ जाता है। एंड दिस इज वेरी.
पब्लिकली हाईलाइटेड। तो समाजवादी पार्टी. को उसको पार्टी से निकालना पड़ता है।. राइट? इनफैक्ट उसके बाद वो चुनाव हारता. रहता है। मुझे लगता है 2009 10 के आसपास. भी 2009 वाले लोकसभा इलेक्शंस में चुनाव. हारता है। 12 वाले में चुनाव हारता है।. 2017 में फिर इनफैक्ट इलाहाबाद में क्या. होता है? एक इंस्टट्यूट है सैम हिगिंग. बॉटम्स इंस्टट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर ऐसे करके. इलाहाबाद में। वहां पर कुछ बच्चे एग्जाम. में चोरी करते पकड़े जाते हैं। हम चोरी. करते पकड़े जाते हैं तो इंस्टट्यूट एक्शन. लेता है। उनको डिमार करता है। तो ये महाशय.
पहुंच जाते हैं उन बच्चों के सपोर्ट. में और वो पूरा वीडियो पे कैप्चर्ड है. क्योंकि वो सीसीटीवी कैमरास थे। पूरा. पहुंच रहा है और वहां के लोगों को धमका के. फिर पीट रहा. है। कि इन बच्चों को कैसे निकाला। एंड ये. सारी स्टोरीज हैं, ये सारी चीजें होती है।. इसी की वजह से ना बिजनेस करने में लोग. डरते हैं यूपी में।. इनफैक्ट यस. और आप देखेंगे. कि 2017 के बाद भी सी पीपल हैव अ मेमोरी.
और खासकर बिजनेसमैन ना वो बहुत सेफ प्ले. करना चाहते हैं। हम उनको इससे कोई मतलब. नहीं है कि किसकी सरकार है, क्या. पॉलिटिक्स है वो। दे वांट टू बी उनको लगता. है कि मैं यहां इन्वेस्ट करूंगा तो मुझे. रिटर्न्स ढंग से आ जाएंगे। अगले मेरे 30. 40 50 साल सही रहेंगे। सही रहेंगे। तो. उनको ये कॉन्फिडेंस चाहिए होता है कि यहां. पे जो बेसिक लॉ एंड ऑर्डर, ब्यूरोक्रेटिक. प्रोसेस हम ये सब ठीक रहेगा। मतलब वो कोई. एक्स्ट्रा फेवर भी नहीं मांग रहे लेकिन वो.
बोल रहे हैं कि कोई आके मुझे परेशान तो. नहीं करेगा ना कि मैं यहां फैक्ट्री लगाया. तो कल 10 लोग आ गए कि चलो ₹1 करोड़ दो. मुझे। वो होता ही है ना? होता ही है।. दैट्स व्हाट आई एम सेइंग। तो इसीलिए. मेमोरी रहती है। तो इवन इफ आप ना जैसे 17. के बाद आपने कोशिश किया बहुत सारे. माफियाओं को अंदर डाला। लॉ एंड ऑर्डर पे. बहुत बात हो रही है। प्राइवेट सेक्टर विल. स्टिल वेट एंड सी। वो देखता रहेगा। बोलेगा. नहीं अभी इनफ नहीं है। अभी तो दो ही साल. हुआ। अभी तो तीन ही साल। हु नोज़ फिर से आ. गए वो लोग। तो वो ना इतना कॉशियस होगा. प्राइवेट सेक्टर कि वो 5 साल वेट करेगा,
सात साल वेट करेगा। जब उसको एक्सट्रीम. कॉन्फिडेंस आ जाएगा कि नाउ अब ये स्टेट. ऐसे एक स्टेज पे पहुंच चुका है जहां से. वापस नहीं जाएगा उसी ज़ोन में। तब जाके वो. इन्वेस्ट करना स्टार्ट करेंगे। तो इसीलिए. इन्वेस्टमेंट बहुत टफ है लाना। एंड. इनफैक्ट इसमें आप देखेंगे कि जब और मैं. पढ़ रहा था इस पे कि यूपी में इन्वेस्टर. समिट हुआ तो इन्वेस्टर समिट्स में जनरली. क्या होते हैं कि कंपनीज़ को आप बुलाते हैं. कंपनीज़ आ जाते हैं कटसी में। एमओयू साइन. हो जाते हैं। सब बोलते हैं हम यहां. फैक्ट्री लगाएंगे। हम 100 करोड़ लगा देंगे,
300 करोड़ लगा देंगे। तो ऐसे कमिटमेंट्स. बहुत सारे हो जाते हैं। ज्यादातर केसेस. में आप देखेंगे वो कमिटमेंट्स फ्लक्टिफाई. नहीं होते। कुछ नहीं होता उसका। बस बात. करके चले जाते हैं। चले जाते हैं। तो पता. चला 400 करोड़ का कमिटमेंट हुआ। फाइनली 400. करोड़ भी नहीं लगा। हम राइट समथिंग दैट द. योगी गवर्नमेंट डड वेरी वेल इज मैं पढ़. रहा था. उन्होंने इन्वेस्टर समिट के बाद जितने भी. कमिटमेंट्स हुए उसको ट्रैक करने के लिए एक. टीम. बनाई राइट इनफैक्ट उनके एक मिनिस्टर है.
सिद्धार्थनाथ सिंह जो फॉरेन जितने भी. इन्वेस्टर्स थे उनको फॉरेन भेजा. सिद्धार्थनाथ सिंह को वहां जाके बात करने. के लिए कि आपने वहां पे कमिटमेंट किया था. कोई इशू आ रहा है कोई हर्डल्स है लेट्स. सॉल्व इट और यहां पर जितने भी इन्वेस्टर्स. थे एक टीम बनाई जो उनसे बात कर सके, ट्रैक. कर सके कि आपने ये इंटेंट शो किया था।. कहां पर सपोर्ट कर सकते हैं? क्या दिक्कत. आ रही है। तो कोई कॉर्पोरेट अगर इस प्रकार. से सामने से इतना प्रोएक्टिव मेजर दिखेगा. तो उसको भी इंटरेस्ट आएगा ना। पर अब जैसे. किसी इन्वेस्टर ने एज अ बिज़नेस पर्सन उसे.
लगा दिए पैसे। लगा दिए कि चलो यह वाली. गवर्नमेंट बहुत बढ़िया है। अब उसे डर है 5. साल बाद अगर गवर्नमेंट चेंज हो गई। तो जो. दूसरी गवर्नमेंट है इज एक्स वजी नोन फॉर. कि वो गुंडों के साथ काम करती है कभी ना. कभी टिकट दे चुकी है तो मैं तो क्यों. लगाऊंगा कभी आई कंप्लीटली अग्री टू योर. पॉइंट एंड हेंस आई एम सेइंग प्राइवेट. सेक्टर बहुत कॉशियस होगा तो योगी जी के. आते ऐसा नहीं है कि साल दो साल में सबने. फैक्ट्रीज लगा दी है वहां पे बिल्कुल नहीं. अभी भी दे आर ट्राइंग वेरी हार्ड अभी भी. दे आर ट्राइंग वेरी हार्ड इट विल टेक अ.
फ्यू मोर इयर्स इट इट्स अ नोन फैक्ट वो 10. साल 15 साल वेट करेंगे. कि इनफैक्ट उनको ये कॉन्फिडेंस आ जाना. चाहिए कि अब ये स्टेट ऐसे लेवल पर पहुंच. चुका है जहां सरकार बदल भी जाती है कोई तो. फर्क नहीं पड़ेगा वो कॉन्फिडेंस उनको. चाहिए लेट्स से महाराष्ट्र और गुजरात. एक्सक्ट्ली अभी महाराष्ट्र जनरली बोल रहे. हैं गुजरात में सरकार बदल भी जाए जो. इंडस्ट्रीज का माहौल है वो नहीं बदलेगा हम. तो उनको फर्क नहीं पड़ता है ना.
ट्रू एंड तो अभी वहां पे इन सब में तो. बहुत दिक्कत है तो ये डू यू थिंक ये. ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी एंड ऑल ऑफ़ दैट इज. जस्ट सपना ही है अभी। नॉट एट ऑल। कौन सी. एमएसी ने बहुत पैसे लगाए अगर या कौन. बिलियर्स बने यूपी से? सी अगेन व्हाट इज. नॉटेंट इज कि बिलेनियर्स या बड़े. इंडस्ट्रीज ही सिर्फ कितने हैं। अगर आप. लोकल लेवल पे ना इकॉनमीज़ को बेटर कर पाते. हो। सो फॉर एग्जांपल आप देखोगे एक. इनिशिएटिव है कॉल्ड वन डिस्ट्रिक्ट वन. प्रोडक्ट ओडीओपी। ओडीओपी का क्या कांसेप्ट.
है? कि हर डिस्ट्रिक्ट को एक स्पेसिफिक. कोई ऐसा प्रोडक्ट हो जिसमें वो स्पेशलाइज. करे जो वहां का कोर बन जाए और जिसको फिर. हम एक्सपोर्ट लेवल तक पहुंचा सकें। तो इफ. यू आर एबल टू मेक ईच ऑफ योर डिस्ट्रिक्ट्स. यूपी में जैसे 75 डिस्ट्रिक्ट है। 75. डिस्ट्रिक्ट के एक-एक प्रोडक्ट इस लेवल पे. पहुंच जाए कि दे आर नोन फॉर एन. इंडिविजुअल। एंड दैट इज़ देन सोल्ड टू. एव्री अदर पार्ट इन द कंट्री एंड इवन.
एक्सपोर्टेड। यू डोंट नीड बिलनियर्स। नो. होंगे यू नो बिकॉज़ देयर इज़ अ सेइंग. इन एफएमसीजी स्पेसिफिकली कि अगर आपका यूपी. में मार्केट स्ट्रांग हो गया तो आप बहुत. बड़ा आपका टर्नओवर हो जाएगा।. एफएमसीजीपुलेशन बहुत बड़ा है। बहुत लंबी. बात जब पॉपुलेशन इतनी ज्यादा है उस. मार्केट के ऊपर जिसका कंट्रोल होता है. उसके पैसे सबसे ज्यादा होते हैं और उधर से. इतना पैसा आता है देन यू कैन कंट्रोल. टिपिकली आप कंट्री में पैसा डाल के आपका. डिस्ट्रीब्यूशन बना सकते हो। राइट? फिर. उसके बाद ऐसा बोलते हैं कि यूपी की. पॉलिटिक्स जिसने खेल ली वो सेंटर चले.
जाएगा। इंडिया की पॉलिटिक्स खेल ली। हर. चीज में इनका नाम आता है। बट वहां पे. ग्रोथ प्रोग्रेस कुछ ऐसा दिखा नहीं कि कोई. इंडिविजुअल ने थ्राइव किया है या. इंडिविजुअल बहुत सारे लोगों ने थ्राइव. किया है। एट अ टॉप 1% आई एम श्योर कि बहुत. सारे लोग हैं जिन्होंने थ्राइव किया होगा।. बट टॉप 1% पीपल या टॉप 0.1% लोग वहां से. नहीं आए। सो द प्रॉब्लम. इज टू थ्राइव एज अ इंडस्ट्रियलिस्ट इट इज. नॉट ओनली द इंडिविजुअल व्हिच मैटर्स बट.
आल्सो द एंटायर इकोसिस्टम। तो अगर आपको. बड़ा बनना सो फॉर एग्जांपल लेट्स से आप. बोलोगे कि मुझे टेक में बहुत बड़ा बनना. है। तो आपको सिलिकॉन वैली ही जाना पड़ेगा।. तो आप नहीं बोल सकते कि बॉम्बे से कौन. बड़ा बना? फॉर एग्जांपल अगर आपको लेट्स से. फॉर एग्जांपल समबडी नीड्स टू गेट इंटू और. गेट बिगर इन द ऑटोमोबाल इंडस्ट्री तो. चेन्नई जाएगा मानेसर जाएगा यू नो जो अभी. पुणे जाएगा जो उसके हब्स हैं राइट सो फॉर. एनी इंडस्ट्री टू बिकम बिगर एंड बिगर. बिकॉज़ इट आल्सो थ्राइव्स ऑन जैसे मैं अगर.
कोई इंडस्ट्री लगा रहा हूं और उसको उतना. बड़ा बना रहा हूं तो उसके लिए टैलेंट भी. चाहिए मुझे आसपास का टैलेंट चाहिए आसपास. का सपोर्ट चाहिए वो पूरा क्लस्टर होना. चाहिए करेक्ट एक्सक्टली सो हेंस क्या होता. है कि इन स्टेट्स में जिसमें इंड. इंडस्ट्रियलाइजेशन बहुत पुअर है अभी तक कम. से कम अभी तक तो उन स्टेट्स में अगर कोई. थ्राइव भी करना चाह रहा है और निकला भी है. तो वो बाहर जाके थ्राइव किया होगा आपको. दिखेगा एंड हेंस वी स्पीक अबाउट द ब्रेन. ड्रेन क्योंकि वहां पे वी डू नॉट हैव द. इकोसिस्टम फॉर दी पीपल्स टू फ्लोरिश वो. छोटा-मोटा कर रहा होगा जैसे ही अगर बड़ा भी. बनना होगा तो किसी दूसरे शहर किसी दूसरे.
कंट्री चला गया होगा राइट सो समबडी कैन. थ्राइव इन नोएडा बिकॉज़ नोएडा पे अब वो है. इंफ्रास्ट्रक्चर वो इकोसिस्टम है लेकिन. शायद यूपी के अदर एरियाज में अभी वो नहीं. है हम कहां है? कुछ भी नहीं। इज दैट द. रीज़न कि यूपी से माइग्रेशन सबसे ज्यादा. है। यूपी के लोग हर स्टेट में ऑफकोर्स सब. एंड दैट वहां पे यूपी में ओपोरर्चुनिटीज. नहीं है। दैट्स द बिगेस्ट प्रॉब्लम और आज. भी नहीं है। सबसे बड़ा प्रॉब्लम है। इतनी. बड़ी पपुलेशन है। 23 करोड़ पपुलेशन है।. अगर नेचुरली आपके पास इंडस्ट्रीज नहीं है।.
सर्विसेस सेक्टर ऑलमोस्ट नॉन एक्सिस्टेंट. रहेगा। तो एग्रीकल्चर पे कितना डिपेंडेंस. हो सकता है? और एग्रीकल्चर में ज्यादातर. आज की डेट में अगर आप देखेंगे तो डिसगाइस. अनइंप्लॉयमेंट होता है कि वो वो खेत में. चाहिए दो लोग और वहां पे छह लोग काम कर. रहे हैं झूठ-मूठ का क्योंकि बस है तो काम. कर रहे हैं। राइट? तो पिछले 7 आठ साल में. कुछ नहीं हुआ फिर अगेन 7 आठ साल में कभी. कोई देश कोई प्रदेश अ यू नो जीरो से हीरो. नहीं बन सकता है। कुछ तो होना चाहिए। हो. रहा है। हो रहा है। एंड हेंस आई एम सेइंग. जैसे मैं छोटे-छोटे इनिशिएटिव बता रहा.
हूं। ओडीबीओपी मैंने एक बताया जितने भी. कल्चरल सेक्टर्स की इकॉनमी ग्रोथ है आप वो. देख लीजिए। एक्सप्रेसवेज़। सो. इंफ्रास्ट्रक्चर इज़ वेरी वेरीेंट। अगर आप. किसी भी इंडस्ट्री को बुलाते हैं तो सबसे. पहले आपको दिखाना होगा कि मेरा बेसिक. इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेस में है। सो मेरे. पास रोड्स है, मेरे पास इलेक्ट्रिसिटी है, मेरे पास पानी है, मेरे पास मैन पावर है, स्किल्स है, ये है मेरे पास प्लेस में।. यूपी इज़ बिल्डिंग दैट। सो, इट विल टेक अ. फ्यू इयर्स फॉर दैट टू फ्रक्टिफाई। ओके।. बट यूपी एक चीज़ है, बड़ा फेमस है। दैट इज़. हमारे कंट्री के सबसे ज्यादा प्राइम. मिनिस्टर्स यूपी से हैं। राइट? या सो वेयर.
एज इंडस्ट्रियलिस्ट या वो बिलियर्स नहीं. रहे या टॉप इंडस्ट्री के बहुत ज्यादा अगर. आप देखो रिसर्चरर्स नोबल लॉरियर्स ये सब. वहां पे नहीं रहे. लेकिन ये काफी स्ट्रांग है कि वहां पे. सारे प्राइम मिनिस्टर्स रहे बहुत सारे. लाइक जवाहरलाल नेहरू वहां से अटल बिहारी. वाजपेयी वहां से हैं वीपी सिंह वहां से थे. चरण सिंह जिन जी की बात कर रहा था वो वहां. से है बंच ऑफ पीपल फ्रॉम यूपी.
व्हाई ऐसा क्या है कि यूपी वाले इंदिरा. गांधी जी वहां से आए हैं. या ओके सो यूपी आप देखेंगे तो व्हेन इट. वास फॉर्म्ड एस यूपी पहले उसे बोला जाता. था यूनाइटेड प्रोव प्रोविंसेस ऑफ आगरा एंड. अवध राइट तो फिर वो फेमस हो गया यूनाइटेड. प्रोविंसेस अंग्रेजों के समय बिफोर. इंडिपेंडेंस यूपी यूपी बोला जाने लगा फिर. हम लोग उसको जब आजाद हुए तो हमने उसे. उत्तर प्रदेश बनाया यूनाइटेड प्रोविंसेस. को एरिया वाइज आप देखेंगे एंड पपुलेशन. वाइज आप देखेंगे. सो पपुलेशन वाइज राइट नाउ इट स्टैंड्स एट.
अराउंड 23 करोड़ राइट एंड जो हमारा सिस्टम. है प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन का. कॉन्स्टिट्यूशन में उसके हिसाब से सबसे. ज्यादा सीट्स हमारे यूपी से आए राइट सो. इनफैक्ट जब उत्तराखंड साथ में था तो 85. सीट सो लाइक वन फिफ्थ ऑफ़ द सीट्स ऑफ़ द. कंट्री कम फ्रॉम वन सिक्स्थ वन सिक्स्थ कम. फ्रॉम दैट स्टेट सो बहुत ऑब्वियस हो जाता. है कि जिसने यूपी जीत लिया तो 1/6 काम तो. ऐसे ही हो गया हमारा भाई दूसरा दूसरा यूपी. हैड आल्सो प्लेड अ वेरीेंट रोल। आप पूरे.
फ्रीडम स्ट्रगल के दौरान भी देखेंगे। तो. लॉट ऑफ़ दीज़ लीडर्स केम फ्रॉम दैट प्लेस।. सो मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू की. फैमिली इलाहाबाद से आई। गोविंद वल्लभ पंत. थे। मदन मोहन मालवीय थे जिन्होंने बीएचयू. के फिर बाद में स्थापना की। तो बहुत से. ऐसे पुरुषोत्तम दास टंडन थे। बहुत से ऐसे. लीडर्स आपको दिखेंगे फ्रीडम स्ट्रांग में. हु केम फ्रॉम दैट एरिया। राइट? सो एक वो. सिग्निफिकेंस भी था। बीएचयू का बहुत. ज्यादा स्ट्रांग। वो भी सिग्निफिकेंस था।. अ जब हम लोग ना आजादी के बाद हां हुआ ये. कि बिकॉज़ ऑफ इट्स.
पपुलेशन सबसे ज्यादा सीट्स उसके पास आई. प्लस जवाहरलाल नेहरू पहले प्रधानमंत्री. बने यू नो इंसिडेंटली कम्स फ्रॉम दैट. प्लेस उनकी बेटी प्रधानमंत्री बनी इंदिरा. गांधी शी यू नो केम फ्रॉम दैट प्लेस और वो. पॉलिटिकल सिग्निफिकेंस कंटिन्यूड रहा राइट. बिकॉज़ ऑफ़ दैट इममेंस सो एस टू से नंबर ऑफ़. सीज़ एंड पावर एंड सो ऑन और इस कारण से. हमें लगता है फिर चाहे चौधरी चौधरी चरण. सिंह को देख लीजिए या वीपी सिंह को देख. लीजिए यू नो जितने भी है वाजपेयी जी उसके.
बाद हुए तो वो सिग्निफिकेंस हमेशा से बना. रहा और अभी भी इनफैक्ट राइट. यू अंडरस्टैंड दैट विदाउट विनिंग यूपी टू. फॉर्म अ गवर्नमेंट एट द सेंटर इज़ ऑलमोस्ट. इंपॉसिबल डू यू थिंक दैट सिग्निफाई दैट मे. बी द नेक्स्ट पीएम इज़ गोना बी. फ्रॉम दैट व्हिच ऑफ़ अ कंजेक्चर इट वुड बी. सो व्हाट डू यू थिंक योगी जी बनेंगे. नेक्स्ट. पीएम ये गेस करना बड़ा मुश्किल है टू बी. ऑनेस्ट इफ यू आस्क मी विल ही बी अ गुड पी.
आई विल से यस टुडे बेस्ड ऑन व्हाटएवर. सिनेरियो इज अ लॉट ऑफ पीपल सो टू पॉइंट एट. वन पर्सन वुड बी डिफिकल्ट योगी जी. सर्टेनली हैज़ अ वैरी स्ट्रांग पॉपुलैरिटी. राइट नाउ हाउ आई सी इट एज अ इलेक्शंस. क्योंकि आई एम आल्सो इन्वॉल्व्ड पॉलिटिकली. एंड यू नो आई एम अ पार्ट ऑफ़ इलेक्शन. मैनेजमेंट कमिटीज़ इलेक्शंस में आप देखेंगे. उनके सभाओं की बहुत ज्यादा डिमांड होती. सो एव्री कैंडिडेट वुड से कि यार योगी जी. की एक सभा दिला दो हमें जीत जाएंगे। मतलब.
सो योगी जी टू कैंपेन इन देयर ओन सीट्स. राइट सो दे यूपी की इन एनी स्टेट एनी. स्टेट आई नॉट टॉकिंग अबाउट यू नो दैट्स. व्हाट आई सेइंग आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट. यूपी हमारे झारखंड में चुनाव थे तो सारे. विधायकों की यही थी सारे कैंडिडेट्स कि. यार हमारे यहां एक योगी जी की सभा करवा. दो राइट सो प्रधानमंत्री के तो फिक्स थे. कि उनके वो छह सभाएं होनी है तो द प्लेसेस. वे वर फिक्स्ड तो उसको बहुत ज्यादा. इन्फ्लुएंस कर नहीं सकते थे ये लोग तो. उनका था कि यार सेकंड मुझे योगी जी केक. दिला दो.
सो दैट वास अ ह्यूज डिमांड महाराष्ट्र में. यू नो व्हेन वी वन द. इलेक्शंस बिफोर दैट देयर वाज़ ह्यूज डिमांड. ऑफ़ ह यू नो सभास इन ऑलमोस्ट ऑल प्लेसेस इन. महाराष्ट्र। सो दैट एंड दैट्स व्हाट आई एम. सेइंग। सो द पॉपुलर पॉपुलैरिटी हैज़. ट्रांसेंडेड उत्तर प्रदेश। अभी वो उससे. बाहर भी बहुत ज्यादा पॉपुलैरिटी है। ओके।. एक यूपी में कहानी चलती है बुलडोजर. जस्टिस। डू यू लाइक दैट?
पहले है क्या बुलडोजर जस्टिस ये बताओ कहां. से स्टार्ट हुआ? सो कुछ केसेस. में सो व्हाट हैपेंस जनरली प्रोसीजरली मैं. बता रहा हूं पहले प्रोसीजरली क्या होता है. कई बार लेट्स से किसी केस में कोई. इंप्लिकेट होता है एक सर्टेन क्रिमिनल. राइट वो क्रिमिनल फरार होता है तो उसको हम. फिर कोर्ट से परमिशन लेते हैं उसको कहते. हैं कुरकी. जब्ती सिंस वो फरार है तो हम उसका. प्रॉपर्टी जब्त कर रहे हैं राइट सो दैट वी.
आर एबल टू यू नो ब्रिंग हिम बैक कैच हिम. एंड सो ऑन. सो प्रोसीजरली ये है। तो यूपी में आप. देखेंगे कि 17 के बाद से ये फ्रेज बहुत. चलन में आया। चलन में इसलिए आया क्योंकि. ऐसे बहुत सारे केस में ऐसी काफी कुरकी. जप्त हुई। राइट? जब कुरकी जब्ती आप करते. हैं तो यू आल्सो रियलाइज कि बहुत सारे जो. स्ट्रक्चर्स होते हैं इललीगल होते हैं। हम. राइट? तो उन केसेस में यूपी में इन. स्ट्रक्चर्स को तोड़ा गया। अब जनरली. कंटेंशन ये होगा कि ये स्ट्रक्चर को तोड़ा.
क्यों जा रहा है? लीगली आप देखेंगे दे आर. राइट। हम बिकॉज़ दोज़ स्ट्रक्चर आर इललीगल।. सो तोड़ा जाना था। बटकि वो व्यक्ति किसी. क्राइम में या सामने नहीं आ रहा था। उस पे. ऐसा कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं हुआ। ऐसा कोई. हल्ला नहीं हुआ। पता नहीं चल रहा था। तो. दैट स्ट्रक्चर दैट होम दैट एवरीथिंग. रिमेंस। राइट? बट जब वो सामने आ गया बंदा. जब किसी क्राइम में फंस गया तो साथ ही साथ. ये भी दिख गया कि इसका घर या इसकी. प्रॉपर्टी इललीगल है। इस जमीन पे कब्जा. इललीगल है। इनफैक्ट तो उसको फिर हटाया. गया, तोड़ा गया या जमीन पे कब्जा वापस लिया.
गया। तो इसको बुलडोजर जस्टिस कहा गया। यस।. इनफैक्ट काफी पॉपुलर भी हुआ। कई जगह मैंने. सभाओं में देखा है कि जहां योगी जी जाते. हैं वहां पहले से समर्थक ना 10 बुलडोजर. ऐसे लाइन में लगा के खड़ा कर देते हैं कि. स्वागत कर रहे हैं योगी जी का। म बुलडोजर. बाबा बुलाते हैं। करेक्ट। यस। डू यू थिंक. ये ऐसा इमेज, ऐसी ऐसे स्टेसेस एंड ऐसे. वर्ड्स होने चाहिए किसी चीफ मिनिस्टर के. सो अगेन कंट्री की डेमोक्रेसी के लिए गलत.
है कि सही है? नहीं थोड़े कॉन्टेक्स्ट में. देखना होगा। दैट्स व्हाट आई एम सेइंग। तो. अगर बिना प्रोसीजर के सो फॉर एग्जांपल एक. व्यक्ति कोई माइनर क्राइम में पकड़ा गया. है। विदाउट एन अ प्रोसीजर मैं उसका. प्रॉपर्टी डिस्ट्रॉय कर रहा हूं तो गलत. होगा। जहां एक क्रिमिनल पकड़ा जा रहा है।. क्रिमिनल या तो फरार है कुरकी ज्ती के. दौरान या फिर बाकी इन्वेस्टिगेशंस के. दौरान उसकी प्रॉपर्टी में अगर वो निकल कर. आता है कि अवैध है ये कब्जा किया गया है.
अगर उसको आप डिस्ट्रॉय कर रहे हैं विद अ. प्रोसीजर अगेन आई एम सेइंग तो आई डोंट. थिंक इट्स स्ट्रांग अगेन द वे यू आर. ट्रीटिंग दी क्रिमिनल्स यू आल्सो हैव टू. अंडरस्टैंड कि आप जिनसे डील कर रहे हो ये. डेड क्रिमिनल्स हैं।. राइट? तो सरफेस पर आपको यह लगे कि क्राइम. किया लेकिन यू नो घर भी उसने उसी क्राइम. से बनाया है। डू यू थिंक ऐसे जो ऐसे. कन्विक्शन के साथ स्ट्रांग लीडर्स होते. हैं जिनको जो सुनते नहीं है ज्यादा एंड दे.
आर लाइक जो राइट है वो राइट है जो रोंग है. वो रोंग है। एंड आई एम गना स्टिक बाय इट।. मुझे फर्क नहीं पड़ता हाउ पीपल सी इट। ऐसे. डिसाइसिव लीडर्स होने चाहिए।. होने चाहिए क्योंकि एट द टॉप आल्सो यस।. क्योंकि आल्सो आप कैसे सोशियोपॉलिटिकल. एनवायरमेंट में ऑपरेट कर रहे हो ये भी. आपको देखना पड़ेगा। इन कुछ स्टेट्स में. आपको मोर दन टफ बनना पड़ता है। रीज़न बीइंग. कि नहीं बनोगे तो यू विल बी एलिमिनेटेड और. सबड्यूड वो फिर वही होगा कि जो 90 के दशक.
में या समाजवादी पार्टी के दशक में हुआ. है। व्हिच इज अगर क्रिमिनल्स अगर आप हावी. नहीं होंगे क्रिमिनल्स पे तो क्रिमिनल्स. आप पे हावी हो जाएंगे। इट विल बी वन वे और. द अदर। दोनों कोई एक्सिस्ट नहीं करेंगे।. डू यू थिंक समाजवादी पार्टी का फ्यूचर है. यूपी में? प्रिंसिपल अपोजिशन पार्टी है। अभी अखिलेश. यादव यंग हैं। मुझे लगता है अगर इनफैक्ट. पिछले टर्म में उन्होंने ब्रेक अवे करने. की कोशिश करी थी वो जो एक वो माफियाओं और. उस प्रकार का इमेज था उन सबके साथ अगर वो. शेड ऑफ कर देते हैं। दूसरा थोड़ा सा कास्ट.
पॉलिटिक्स से आगे बढ़ते हैं। इनफैक्ट. पिछला उनका जो टर्म था उसमें बहुत. एलिगेशंस उन पे लगे। कि स्पेसिफिक अपने. कास्ट के लोगों को पोस्टिंग्स में, अपॉइंटमेंट्स में वो बहुत मैसिव लेवल्स. पे। इनफैक्ट डाटा है, न्यूज़पेपर्स में. रिपोर्ट्स पब्लिश्ड है। उससे थोड़ा बाहर. निकलते हैं। तो आई थिंक दे हैव अ फ्यूचर।. बट बी आज डू यू फील दिस दिस इलेक्शन द. नेक्स्ट व्हिच हैज़ व्हिच इज़ गोइंग टू कम. दे आर फील प्रिंसिपल अपोजिशन सो मेन. कंटेंडर बीजेपी के अगेंस्ट में देखे 27. इलेक्शंस में भी तो दे विल बी यस। दे विल.
बी। याह। एंड यू स्टिल फील और जीतेगा कौन? आई वै स्ट्रांग फील एंड वांट फॉर बीजेपी. एंड द योगी गवर्नमेंट टू विन। याह। गॉट. इट। ओके लेट्स टॉक अबाउट डीलिमिटेशन।. क्या होता है ये? डीलिमिटेशन इज़ हिंदी में परिसीमन बोलते. हैं। हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में आर्टिकल 81. है। वो बेसिकली बात करता है प्रोपोर्शनल. रिप्रेजेंटेशन पे। व्हाट इट मींस इज़ कि.
हमारे डेमोक्रेसी में हर किसी के वोट का. वैल्यू सेम होना चाहिए। तो वो तो ठीक है. जब हम वोट डालने जा रहे हैं तो हमारा वोट. एक काउंट हो रहा है। लेकिन जो हमें. रिप्रेजेंटेटिव्स रिप्रेजेंट कर रहे हैं. हमारे एमपीस लेट्स से लोकसभा में तो उनका. भी वैल्यू सेम होना चाहिए। तो वैल्यू सेम. कब होगा? जब वो इक्वल नंबर ऑफ लोगों को. करीब-करीब रिप्रेजेंट करें। राइट? तो. शुरुआत में जब सबसे पहले कॉन्स्टिट्यूएंसी. बनी फर्स्ट इलेक्शंस के लिए तो उसी हिसाब. से बनी कि जो कॉन्स्टिट्यूएंसी का पपुलेशन. होगा वो सेम रहेगा अक्रॉस द नेशन.
मोटा-मोटी।. एक आर्टिकल 82 डाला गया कि हर 10 साल में. सेंसस होगा और सेंसस के बेसिस पे क्योंकि. पॉपुलेशन बढ़ेंगे बढ़ेंगी तो सेंसस के बेसिस. पे फिर ये जो कॉन्स्टिट्यूएंसी होगी उनको. चेंज किया जाएगा उनके नंबर्स बढ़ाए घटाए. जाएंगे उनका जो बाउंड्रीज है उसको रीड. किया जाएगा तो दिस इज़ डीलिमिटेशन तो हर 10. साल के बाद सेंस के बाद वो डीलिमिटेशन. होता और यू नो कुछ सीट्स कहीं-कहीं बढ़े और. जो कॉन्स्टिट्यूएंसी है उसके एरियाज भी वो. चेंज होते गए इंदिरा गांधी ने 1976 में 42.
कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट लेके आई व्हिच. इज इन इटसेल्फ कॉल्ड अ मिनी. कॉन्स्टिट्यूशन क्योंकि इतना बदल दिया. उन्होंने कॉन्स्टिट्यूशन उसमें कि यू नो. तो उसमें एक अमेंडमेंट ये था तो उन्होंने. क्या किया कि डीलिमिटेशन को 25 साल के लिए. फ्रीज कर दिया नाउ डीलिमिटेशन इज ड्यू इन. 2026 2026 में अब ड्यू है अब बड़ा कंटेंशन. ये है कि 1971 से ये चेंज नहीं हुई है जो. सीट्स हैं राइट और अगर आप पपुलेशन वाइज. देखेंगे सो अभी जैसे लोकसभा में हमारे पास.
543 सीट्स हैं. यूपी की हम लोग बात कर रहे हैं 80 सीट्स. हैं। अब प्रॉब्लम कहां पर आ रही है? तो. पपुलेशन वाइज देखेंगे। आज उत्तर प्रदेश का. एक एमपी वहां के करीब-करीब 30 लाख लोगों. को ऑन एवरेज रिप्रेजेंट करता है। एक एमपी. कॉन्स्टिट्यूएंसी में 30 लाख की पॉपुलेशन. है। तमिलनाडु में आज एक एमपी वहां के एक. कॉन्स्टिट्यूएंसी के 18 लाख लोगों को ही. रिप्रेजेंट करता है। राइट? सो देयर इज़ अ. डिफरेंस दोनों में। राइट? तो डीलिमिटेशन. के हिसाब से अब इसको फिर से सीट्स को.
रिअरेंज करना पड़ेगा ताकि रिप्रेजेंटेशन. सेम हो एमपीस का। राइट? अब इसमें प्रॉब्लम. कहां है? प्रॉब्लम है कि अगर 2026 में हम. करते हैं और अभी सेंसस होने वाला है मोस्ट. प्रोबेब्ली 2025 में। 2025 के डाटा के. हिसाब से। एंड देयर इज़ अ पेपर व्हिच. एक्स्ट्रापुलेट्स 2011 का सेंसस का डाटा. और उसके हिसाब से पपुलेशन एक्स्ट्रापुलेट. करके देखते हैं कि कितनी सीट्स होंगी कहां. पे। तो उत्तर प्रदेश के आज के डेट में अगर. पॉपुलेशन के हिसाब से सीट की जाए तो जो 80.
सीट्स हैं 91 वो हो जाएंगी 139. 91 होगी ना 11 सीट्स प्रोजेक्टेड है ना ये. नहीं जो 80 सीट्स है 139 हो जाएगी राइट. बिहार की 40 सीट्स जो है हम वो हो जाएगी. 79 ऑलमोस्ट. डबल राइट केरला की जितनी सीट्स हैं इट विल. रिमेन कांस्टेंट. ओ सो द प्रॉब्लम इज नाउ सदर्न स्टेट्स ये.
बोलते हैं कि यार आप तो हमें डी. डीइेंटिवाइज कर रहे हो कि हमने पॉपुलेशन. कंट्रोल मेजर्स लगाए तो हमें तो नुकसान हो. रहा है कि हमारे. रिप्रेजेंटेटिव्स कास्टेंट रह गए और उनके. इतने ज्यादा बढ़ जाएंगे। सो अब यह बहुत. बड़ा कंटेंशन है कि हाउ डू. वी डू दिस. डीलिमिटेशन कि जिससे यू नो ये कंटेंशन इन. सदर्न स्टेट्स ऑलरेडी इसके लिए यू नो. डिबेट स्टार्ट हो गए हैं और तो आपके पास. दो तरीके हैं। या तो आप थोड़े उनके सीट्स.
घटाओ और इधर थोड़े सीट्स बढ़ाओ या तो उनके. सीट्स कांस्टेंट रहने दो और इधर पूरापूरी. बढ़ने दो। दोनों केसेस में दे आर गोइंग टू. लूज़ आउट। हम व्हिच इज सैड पार्ट राइट? ओके क्योंकि क्योंकि अगर आप अभी जीडीपी. कंट्रीब्यूशन देखो 2/3 जीडीपी. कंट्रीब्यूशन कम फ्रॉम सदर्न स्टेट्स. पेनसुलर स्टेट तो जब कंट्री का. जीडीपी कंट्रीब्यूशन वहां से आता है. कंट्री की मैक्सिमम इनकम वहां से आ रही है.
आउटपुट वहां से आ रहा है रेट पे जिस. पेनिनसुलर रीजन अपना जो बढ़ रहा है दैट्स. फास्टेस्ट इन द वर्ल्ड मतलब चाइना भी इतनी. तेजी से ग्रो नहीं करता जितनी तेजी से वो. पर्टिकुलर फेस ग्रो करता है राइट. कोई पूरी दुनिया में उतना ज्यादा आउटपुट. पर पर्सन निकाल नहीं रहे हैं एट दिस पॉइंट. विद एट दिस पॉइंट जिस रेट में वो लोग बढ़. रहे हैं। तो जब जिनका कंट्रीब्यूशन सबसे. ज्यादा है जो आपकी कंट्री का टेक्निकली. टैक्स दे रहे हैं, पैसे दे रहे हैं ताकि. आपकी कंट्री और तेजी से बढ़े उन लोगों का.
हिस्सा ही निकाल दे रहे हो। उन लोगों की. वॉइस रिप्रेजेंटेशन ही खत्म कर दे रहे हो।. ओके? सो द अदर पार्ट ऑफ द आर्गुमेंट. इज कि अगर आप सदर्न स्टेट्स देखेंगे तो. सदर्न स्टेट्स का ग्रोथ भी देखेंगे. लार्जली व्हिच हैज़ कम आफ्टर लिबरलाइजेशन. 91 के बाद अगर थोड़ा हिस्टोरिकल बेसिस उसका. देखेंगे तो नॉर्दर्न स्टेट्स कंटेस्ट कर. सकते हैं खास करके ईस्टर्न स्टेट्स कि. साउथ में जितना भी ग्रोथ हुआ सो फॉर. एग्जांपल जितने भी इंडस्ट्रीज लगे उसका जो.
मिनरल्स आया वो ईस्टर्न स्टेट से ईस्टर्न. स्टेट से क्यों है? क्योंकि जो हमारी. फर्स्ट गवर्नमेंट थी उसकी फ्रेट. इक्वलाइजेशन पॉलिसी थी कि कहीं भी जो. मिनरल्स होगा सेम प्राइस में अवेलेबल. होगा। तो झारखंड से कोल, आयरन ओरा आके. चेन्नई में प्लांट में इनफैक्ट वहां से. स्टील आया और चेन्नई के प्लांट में यहां. पे ऑटोमोबाइल्स बने। सो दे कैन ऑलवेज. कंटेंड दैट जो भी ग्रोथ हो रहा है साउथ. में देन दे कैन कंटेंड हु इज़ प्रोवाइडिंग. द मैन पावर फॉर दैट ग्रोथ। राइट? दे कैन.
कंटेंड दैट। सो एसेंशियली सेइंग कि हां आप. लोगों ने ग्रो किया है बट यू आर ग्रोइंग. एस अ पार्ट ऑफ द नेशन। यू आर नॉट ग्रोइंग. कि हम लोग कोई स्टैंड अलोन है नहीं। तो. अलग-अलग हम लोग कभी नहीं बात कर सकते हैं. कि देयर आर अ लॉट ऑफ़ इंटरडिपेंडेंसी। सो. फॉर एग्जांपल लेट्स से मुंबई की हम बात. करते हैं। मुंबई में इनफैक्ट याद होगा. आपको 2008 में बहुत एंटी हिंदी हार्टलैंड. सेंटीमेंट चला था। जो राज ठाकरे हैं. उन्होंने यू नो बहुत सारे वहां से.
कैंडिडेट्स उधर के आए थे। मारपीट हुई थी।. मजदूरों के साथ हुई थी। एंड उसके बाद इतना. बड़ा एग्जोडस हुआ था खास करके ब्लू कॉलर. वर्कर्स का मुंबई से इनफैक्ट अदर सिटीज से. इट इज गेस्ट कि पुणे से करीब 25000 लोग. वापस चले गए थे नासिक से करीब 15000 लोग. वापस चले गए थे और अगले कुछ महीनों में इट. फेस्ड अ लॉस ऑफ ऑलमोस्ट 500 से 700 करोड़. तो दी आर्गुमेंट कैन बी दैट वेज़ आल्सो कि. आप बोल तो रहे हैं कि ठीक है आप बहुत ग्रो. कर रहे हैं लेकिन हमारा भी हिस्सा है उस. ग्रोथ में और उसको हम रिप्रेजेंटेशन से.
क्यों लिंक करें क्योंकि हमारा हमारा. कॉन्स्टिट्यूशन बोल रहा है कि सबका. रिप्रेजेंटेशन सेम होना चाहिए। एक पर्सन. एक वोट होना चाहिए। तो मेरा एमपी 30 लाख. को क्यों रिप्रेजेंट करेगा? आपका 18 लाख. को क्यों करेगा? आई एम जस्ट पुटिंग बोथ. साइड्स ऑफ़ द। सो इट डस नॉट हैव अ वेरी वन. आंसर कि ये राइट आंसर है। इट इज़ अ. कंटेंशियस इशू एंड हेंस 2026 में जो. डीलिमिटेशन है दैट्स दैट्स गोइंग टू बी अ. वेरी कंटेंशियस इशू। इट्स गोना बी अ वेरी. वेरी कंट्रोवर्शियल वेरी टॉक्ड अबाउट होगा.
26 में कि पुश कर दे।. सो इसमें इनफैक्ट एक तो नेशनल लेवल है. प्लस स्टेट्स के लेवल पे भी होना है। तो. जितने एमएलए तो तो कॉन्स्टिट्यूशन आल्सो. सेस कि जो एमएलए रिप्रेजेंट कर रहे हैं. जिस पपुलेशन को वो भी सिमिलर होना चाहिए. अक्रॉस ऑल एमएलए कॉन्स्टिट्यूएंसी इन द. कंट्रीज सीट्स अप एंड डाउन ओनली करेक्ट तो. उसमें भी आप देखेंगे कि कई स्टेट्स में. एमएलए की सीट्स पढ़ेंगे किसी में कम किसी. में ज्यादा उसमें भी बहुत सारे चेंजेस. आएंगे। फिर ये जब होगा तो बहुत सारे सीट्स. के रिस्ट्रीब्यूशन होंगे। इट्स गोइंग टू.
बी अ सो आई डोंट आई एम नॉट श्योर अगेन वी. विल हैव टू वेट टू सी कि क्या होता है और. कैसे होता है। सी अभी ना एक अराउंड द. वर्ल्ड एक चीज चलती है कैपिटलिस्ट. वर्ल्ड्स में ज्यादा हो रहा है ये मिडिल. क्लास किलिंग्स बोलते हैं इसे। ओके तो जो. इंडिया के साथ भी हो रही है। ओके मिडिल. क्लास. क्वीजिंग कि आप जो जीरो से ₹ लाख कमाते. हैं उन लोगों पे आप दबा के खर्चा करते हो।. टॉप 1% जो लोग हैं जो एक डेढ़ करोड़ के. ऊपर कमाते हैं उनसे आप एलट बेनिफिट्स लेते.
हो। आपके जो 640 करोड़ में 40 करोड़ हैं. जो वो मिडिल क्लास लोग हैं जो 5 लाख से. आपका 1 करोड़ के बीच में इनकम कमाते हैं।. एंड उनका कंट्रीब्यूशन इज़ अपवर्ड दो 70%. इन द टैक्स सिस्टम। तो कंट्री का जो पैसे. आते हैं वो यह लोग लाते हैं। एंड दिस इज़. मेजॉरिटी राइट नाउ। अगर आप स्टेट वाइज़. देखो तो यह सदर्न स्टेट से आता है।. तो इन लोगों को वैसे इन पे कोई ध्यान नहीं. देता क्योंकि क्या है? हमारे वोट तो आते.
हैं 66 60 करोड़ लोगों से। ये जो थोड़े 4प. करोड़ लोग हैं इनसे क्या फर्क पड़ता है. हमें? दैट इज़ देयर। बट टैक्स इनसे दबा के. आता है। तो इनसे और टैक्स खींचते जाओ।. क्योंकि इनसे टैक्स जब अगर आप लेते जाओगे. तो यही आपको कंट्री में और पैसा देगा।. पैसा देगा वो पैसा आप जो बाकी अंडर 5 लाख. वाले हैं जो आपके 60 करोड़ लोग हैं उन पे. खर्चा करो क्योंकि वहां पे आपको वोट्स. मिलते हैं। तो दिस विल बिकम अ वेरी बैड. सिचुएशन कि आप सदर्न स्टेट्स जो कमा के दे.
रही है हमसे उनसे सिर्फ लेते जा रहे हो. उनकी और लगाते जा रहे हो और खर्चा कर रहे. हो दूसरी जगह पे जहां पे सिर्फ आबादी बढ़. रही है और कुछ नहीं बढ़ रहा है। एज अ. कंट्री वी आर गोना बी हेडेड टुवर्ड्स अ. वेरी टेरेबल स्टेट जस्ट फ्रॉम अ वेरी. कैपिटल पॉइंट ऑफ व्यू आई एम टॉकिंग अबाउट. नो सो फंड्स में बहुत फर्क नहीं आएगा. क्योंकि जो डिवोल्यूशन ऑफ़ फंड्स है वो. फाइनेंस कमीशन से गाइडेड है वो अभी जो है. फ्री बीस बटेंगे ना ज्यादा फ्री बीस सी. फंड्स उतने ही रहेंगे अगेन दोनों को लिंक. नहीं करते फंड्स उतने ही रहेंगे तो ऐसा.
नहीं कि फ्रीज बढ़ पाएंगे उतने ही में. मैनेज करना पड़ेगा लेकिन अगर सीट ज्यादा है. तो आज बिहार को फॉर एग्जांपल अगर 1 करोड़. देते हैं तो कल कल 5 करोड़ देने लगेंगे।. दैट्स दैट्स व्हाट आई पॉइंटिंग आउट। वो. नहीं होगा। क्यों? क्योंकि नहीं होगा ना।. क्यों? क्योंकि जो टैक्स डवोल्यूशन होता. है सेंटर से स्टेट्स को फाइनेंस कमीशन. उसको रेकमेंड करती है हर बार। तो उसके जो. फैक्टर्स हैं उसमें इनफैक्ट लास्ट टाइम. पपुलेशन ग्रोथ को हम लोग नेगेटिव मानते. हैं। राइट? तो उसमें जो फैक्टर्स हैं. उसमें मल्टीट्यूड ऑफ़ फैक्टर्स हैं। उसमें.
ये फीचर नहीं करता है कि आपका पपुलेशन. कितना ज्यादा है सेंट्रल असिस्टेंस के. लिए। तो वो डिफरेंट रहेगा। परफेक्ट। वैसे. इट्स सम्स अप ऑल माय क्वेश्चन। थैंक यू सो. मच फॉर। थैंक यू। आंसरिंग ऑल द क्वेश्चन।. मजा आया बात करके। सेम हियर। गुड डिस्कशन. ऑलवेज। माय माई फर्स्ट मैट्रिक जेनुइनली. इज मुझे लगता है कि हर इंसान अपनी लाइफ. चेंज कर सकता है। दैट्स अ कोर बिलीफ। कि. कोई भी कहीं से भी स्टार्ट करा है। डजंट. मैटर आपने कुछ भी किया है। एंड सेकंड. मैट्रिक इज कि अगर हमारे साथ कोई जुड़ा.
हुआ है तो हम उनमें से कितने लोगों की. टर्न अराउंड कर सकते हैं? लाइक एंड दैट्स. व्हाई दिस एंटरप्रेन्योरल बग इज कि अच्छा. किसी ने अगर हमारे साथ ₹10,000 में ₹1,000. में ज्वाइन किया था। कैन वी टेक दैट पर्सन. टू 2 लाख, 5 लाख, 10 लाख, 20 लाख, 50 लाख. अ मंथ? दैट्स अ मैट्रिक। थैंक यू सो मच ये. एपिसोड एंड तक देखने के लिए। अब आपको तीन. चीजें करनी है। सबसे पहले इस चैनल को. सब्सक्राइब कर लो क्योंकि जितना आप. सब्सक्राइब करोगे उतने ही बेहतर और. वैलुएबल गेस्ट हम ला पाएंगे आपके लिए।. नंबर टू मुझे कमेंट्स में बताओ इस एपिसोड.
में आपको क्या अच्छा लगा और क्या गंदा लगा. ताकि हम वो मिस्टेक्स रिपीट ना कर पाए।. एंड कौन से ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना. चाहते हो वापस हमारे पॉडकास्ट पे ताकि हम. उन्हें लेके आए और आपको ज्यादा से ज्यादा. वैल्यू दे पाए। एंड नंबर थ्री यह एपिसोड. किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना. क्योंकि वन कॉन्वर्सेशन कैन चेंज समवनस. लाइफ। आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम। अनंटिल. देन कीप फिगिंग अप।. [संगीत].
