Underworld Secrets: Dance Bar Mafia, Psycho Killer, Dawood Income | Vivek Agrawal |FO341 Raj Shamani
अंडरवर गैंगस्टर्स में एक चीज़ बहुत. कॉन्स्टेंट है दैट इज़ डांस वार्स। उसकी. क्या हिस्ट्री है? इंडिया का या मुंबई का. जो पहला गैंग वॉर शुरू हुआ है वो सोनिया. बार से ही शुरू हुआ है।. यड़ा गोपाल नाम का एक किलर होता था। डांस. बार में कहीं घुस जाएगा और कोई लड़की पसंद. आ गई तो उठा करके वो अपने कंधे पे लाद. लेगा। हाथ में उसके पिस्टिस्टल रहती थी।. आपने मुंह खोला और गोली मार दी। उसमें वो. इतना पागल था। विवेक अग्रवाल जो एक ऑथर और. क्राइम जर्नलिस्ट हैं। वो हमें बताएंगे. क्राइम रिपोर्ट करने पर कैसी थ्रेट्स.
मिलती है। एक गैंगस्टर से मिलने की. प्रोसेस क्या होती है? दाऊद इब्राहिम आज. भी इंडिया में ऑपरेट कैसे करता है? पॉलिटिक्स और माफिया का क्या रिलेशन है? एंड जब दाऊद को कोई इंटेल नहीं ढूंढ पाई।. उस टाइम पे हमारे आज के गेस्ट के पास दाऊद. की सबसे लेटेस्ट फोटो कैसे आई? इन सबके. बारे में आज के गेस्ट ने हमसे बात करी है।. फिर उस कंकणी को किलिंग मशीन क्यों बुलाया. था? ही इज अ साइकोसेक्स किलर। मैं जब उससे. मिला था मुंबई पुलिस की लॉकअप में। उसने. बोला कि जब मैं किसी को मारता हूं तो मुझे. ऐसा लगता है मैं किसी औरत के साथ सोया। ये.
सारे गैंगस्टर्स ये रिक्रूट कैसे करते. हैं? इनके रिक्रूटर अलग ही होते हैं। तो. वो जेल में बिना किसी कारण के भी चले जाते. हैं। और वहां से वो देखते हैं। अरे क्या. हुआ रे? तू जाता क्यों नहीं बाहर? चल छोड़. छोड़ छोड़ छोड़ मैं करवाता हूं। यह लड़का. पीस हो गया। लेके वो गैंग बॉस के पास गया।. आज सबसे बड़ा गैंगस्टर कौन होगा इंडिया. में? दाऊद इब्राहिम ही. है। जो दो बड़े हत्याकांड हुए हैं इस देश. में वो लॉरेंस बिश्नोई का किया करवाया हुआ. ही नहीं है। दाऊद आज भी एक्टिव है।.
बिल्कुल एक्टिव है। सच्चाई हमसे पूछिए। हम. बताएंगे आपको। हाउ मच डू यू यू यू यू यू. यू यूं दाऊद इब्राहिम कौन करता था? दाऊद. इब्राहिम जब मुंबई में था तो कमाई उसकी. 2000 करोड़ साल की होगी। किसी से डरता था. दाऊद इब्राहिम? दाऊद बहुतों से डरता भी. था। शारजा के बाद दाऊद इब्राहिम का कहीं. फोटो ही नहीं था। आपके पास इतनी लेटेस्ट. फोटो आई. [संगीत]. कैसे? आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को. सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी. तरह से और इंसाइटफुल और बेहतर पडकास्ट.
बनाते रहें। एंड इस पूरे शो का ऑडियो. एक्सपीरियंस स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है।. जहां पे आप हमें फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय. द. शो। एक टाइम तक शारदा के बाद दाऊद अब्राहम. का कहीं फोटो ही नहीं था। आपके पास इतनी. लेटेस्ट फोटो आई कैसे? वो भी कराची की थी. शायद रे। हां, कराची में उनके जो घर है. लिफ्टन एरिया में जिसको कि जहां उनका. बंगला है वो वाइट कलर का मोइन पैलेस के. नाम से पहचाना जाता है। उसके घर के अंदर.
50 मीटर का एक स्विमिंग पूल है। उस. स्विमिंग पूल के सामने वो खड़े हुए हैं।. सफेद रंग का पठानी सूट पहना हुआ है और. काले रंग का कोट पहना हुआ है। वो तस्वीर. है वो। कोई बहुत बड़ा काम नहीं था वो।. लेकिन हां यह है कि उसका. एक सेटबैक यह रहा कि जो एक बहुत बड़ा. सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन था वो मेरा कट गया. उससे। कभी ऐसा हुआ है कि ऐसी बहुत सारी. आपने खतरे वाली चीजें करी उसमें किसी ने. आपको बोला है कि अगर यह पब्लिश कर दिया.
तूने ये चीज बाहर निकाल दी तो बचेगा नहीं. तू। क्राइम की जो न्यूज़ होती है ना उसमें. मोस्टली यह होता है कि आप किसी और व्यक्ति. पे खबर कर रहे हैं। सपोज जैसे छोटा राजन. पे लिख रहे हैं, गबली पे लिख रहे हैं, किसी पे भी लिख रहे हैं। तो आप उनसे कोर्ट. मांगने नहीं जाते हैं। हम ऑन द कॉन्टरी आप. पॉलिटिकल न्यूज़ करते हैं। धार्मिक खबर. करते हैं। कोई कॉरपोरेट के अगेंस्ट करते. हैं तो आप उनसे पहले कोर्ट मांगते हैं कि. भैया अपना पक्ष रखिए। हम लोग पक्ष मांगने. ही नहीं जाते। भैया तुम तो क्रिमिनल हो।. तुमसे क्या पक्ष मांगने जाना है? क्यों. मांगने जाना है? ये क्राइम है। ये. तुम्हारी चीज है। ये हमने छापी है। माफिया.
और टेररिस्ट में डिफरेंस क्या होता है? माफिया और टेररिस्ट में बहुत बेसिक फर्क. ये होता है कि एक आईडियोलॉजी पे काम करता. है और एक आईडियोलॉजी पे काम नहीं करता।. टेररिज्म. आईडियोलॉजिस्टिक ऑर्गेनाइजेशनंस होते हैं. जो एक आईडियोलॉजी को कैटर करते हैं उसके. तहत वो क्राइम करते हैं और माफिया जो है. उसकी आईडियोलॉजी सिर्फ पैसा कमाना और पावर. में रहना है। तो दोनों के बीच का बेसिक.
फर्क ये है। क्रिमिनल दोनों हैं। एक जो है. वो धन कमाने के लिए करता है और एक जो है. अपनी आईडियोलॉजी के तहत सत्ता हासिल करने. या उसको एक्सपैंड करने के लिए करता है।. जैसे ईसिस है या सिममी है या लश्कर तबा है. या और भी तमाम है नक्सलाइट्स हैं। तो ये. ये सारे लोग एक वैचारिक धरातल पे उस. पृष्ठभूमि पे ख बैठे हुए लोग हैं जिनको कि. अपनी उस चीज से लेकर के उस विचारों से. लेकर के और आगे जाकर के और अपनी सत्ता.
हासिल करनी है या उसको इस्टैब्लिश करना. है। क्रिमिनल गैंग्स टॉप पे पहुंच के भी. सत्ता हासिल करने में बहुत ज्यादा. इंटरेस्टेड नहीं होते हैं। उनका काम है. पैसे कमाए खाए भैया मौज करो यानी खाए पियो. और खिसके मतलब यार किसके हम बहुत कम ऐसे. हुए हैं जैसे गोवा का एक चीफ मिनिस्टर हुआ. है जो अपने वक्त का बड़ा नार्को एंड गोल्ड. स्मगलर रहा है और वो वो काफी लंबे समय तक. शायद दो या तीन बार सीएम बना तो अब तो.
उनकी भी शायद डेथ हो चुकी है। हाजी मस्तान. ने भी यह कोशिश की थी कि वो सत्ता हासिल. करें। हाजी मस्तान के ऊपर जो है मेरी. बिल्कुल एक किताब आ रही है जिसमें मैंने. उनका जो यह पॉलिटिकल ड्रीम था वो कैसे. शुरू हुआ और कैसे परवान चढ़ा और कैसे टूटा. उसकी पूरी एक अध्याय मैंने लिखा है उसमें. इसी वजह से आप हाजी मस्तान की बात कर रहे. थे हाजी मस्तान का क्या था पॉलिटिकल ड्रीम. कैसे स्टार्ट हुआ क्या था गिव मी अ समरी.
हाजी मस्तान जो हैं उनका उतार का वक्त था. और दाऊद इब्राहिम के चढ़ाव का वक्त था। और. दाऊद जो है वह बहुत ही ज्यादा एंबिशियस. बहुत क्रूड, बहुत क्रूल और बहुत ही ज्यादा. तेजी से ऊपर आने की तमन्ना और चाह रखने. वाला व्यक्ति था। यंग लड़का था एकदम। और. बहुत ज्यादा एोगेंट था वो। वो किसी को कुछ. नहीं समझता था। उसने हाजी मस्तान और उस.
वक्त के जितने भी तमाम गैंग लीडर्स थे. उनकी सबकी हवा निकाल दी थी अकेले बंदे ने।. हालांकि उसमें उसको भी बहुत खामियाजा. भुगतना पड़ा। अपने बड़े भाई की जान उसकी. गई और उसके बाद में उसने जो ब्लड शेड किया. वह तो कमाल का है। दुनिया उसके बारे में. सब जानती है। उसने ऐसी स्थिति कर दी कि एक. वक्त में जो हाजी मस्तान के लिए रोड सरफेस. ट्रांसपोर्टेशन गोल्ड का करता था वही उसके. सिर पर आकर बैठा। और अगर कोई व्यक्ति आकर.
के शिकायत कर देता था कि अरे आपके लड़के. मुझे तंग कर रहे हैं या आप मुझे परेशान कर. रहे हो मैं हाजी भाई को शिकायत करूंगा।. बोले अच्छा तू हाजी भाई को शिकायत करेगा. ना कोई बात नहीं है। दो मिनट बैठ जरा।. थोड़ी देर बाद में उसी आदमी को अंदर. बुलाता था और खिड़की से बाहर दिखाता था कि. तू जो आदमी को बोल रहा था ना कि जिसकी तू. शिकायत करेगा। वो देख वो मेरे ऑफिस के. दरवाजे के बाहर खड़ा है। उसको बैठाते भी. नहीं थे। उसको बाहर खड़ा रखते थे। इस बात. की शिकायत खुद हादी मस्तान ने किसी.
व्यक्ति से की थी जिसने कि मुझे ये किस्सा. बयान. किया तो वो आदमी तो बेचारा पज़ल हो जाता था. जो दाऊद गैंग के लोग बोलते थे या दाऊद. बोलता था वो उसको मानने पर मजबूर होना. पड़ता था क्योंकि उस वक्त का जो फरिश्ता. था हाजी मस्तान वो उस वक्त वहां पर पानी. भर रहा होता था क्यों क्योंकि डर चुका था. वो दाऊद से बूढ़ा हो चुका था उसकी पूरी. ताकत जा चुकी थी और दाऊद इब्राहिम जो है. वो गुस्सैल था किसी को भी मार देता था।. उसने हमीद को.
मारा। उसके बेटों को मारा और वो सब किया।. दिलीप अजीज थे। उनके बेटे हमीद और एक और. था। उन लोगों को ऐसे मतलब कत्लेआम मचा रखा. था उसने। तो उस वक्त में इसको ये जब लग. गया कि हाजी मस्तान को कि भाई अब ये सब. धंधा समेट करके और पीछे हो जाने का वक्त. है और उसी समय में आपके इमरजेंसी आई।. इमरजेंसी आई और उनको जेल जाना पड़ा। जेल. गए तो उनको लगा कि भैया अब तो कहानी खत्म. हो गई है। बाहर आए तो वो जो है अपना एक.
उन्होंने एनजीओ खोला उसमें लोगों की मदद. करने लग गए। फिर बाद में उनको एक पत्रकार. थे। उन्होंने कहा कि आप तो पॉलिटिक्स में. आ जाओ। कल तक जो लोग आपके आगे पीछे डंडे. ले घूमते थे। कल वो डंडे पीछे रख के और. आपको सलाम बजाएंगे। उन्होंने कहा ये अच्छी. चीज है। तो वो ऑर्गेनाइजेशन जो है उसको. छोड़ के एनजीओ को और उन्होंने फिर दलित. मुस्लिम माइनॉरिटी महासंघ के नाम से एक. पॉलिटिकल पार्टी स्टार्ट की। उसमें. उन्होंने चुनाव भी लड़े। उन चुनाव में ये.
होता था कि दिलीप कुमार साहब भी जाया करते. थे उसमें तकरीर देने के लिए और उसकी. पार्टियों में, जुलूसों में और इन सब. चीजों में और बड़ी फुटफॉल होती थी। खूब. भीड़ जमा होती थी। लेकिन वोट कन्वर्ट नहीं. होता था। उन्होंने जितने लोग खड़े किए थे. चुनाव में उनमें से सिर्फ दो ही लोग जीते. थे और वो दोनों ही पत्रकार थे। उर्दू. रिसालों में काम करने वाले सहाफी थे वही. दो लोग जीते थे। उसके अलावा कोई नहीं। तो. उनकी ये जो मंशा थी कि मैं एक पॉलिटिकल.
पावर बन के खड़ा हो जाऊं। पानी की तरह. पैसा बहाया उन्होंने उसमें और कुछ नहीं. हुआ। लेकिन कुछ नहीं हासिल हुआ। क्योंकि. लोग जो है इस देश की जनता बड़ी समझदार भी. है। वो समझती है कि मतलब यह आदमी क्रिमिनल. रहा है या क्रिमिनल है। तो ये जब सत्ता. में आएगा तो ये हो सकता है कि सत्ता का. मिसयूज़ भी करें। इसलिए उनको करने नहीं. दे। नहीं वो उसको मौका। हाजी मस्तान और. दाऊद का रिलेशन कैसा था? शुरू में तो बहुत. अच्छा था। बाद में खटास आती गई। क्यों. स्टार्टिंग में अच्छा था रिलेशन? क्योंकि. दाऊद इब्राहिम छोटा था। उसको पैसों की.
जरूरत थी। साबिर जो है वो उसको कंट्रोल. में रखता था। साबिर बहुत ही समझदार, बहुत. ही दुनियादार व्यक्ति था। बड़ा भाई था और. उसने वो लोगों के साथ में रिलेशन मेंटेन. करने बनाने के सिलसिले में बहुत बढ़िया. इंसान था। तो दाऊद जो है वो बहुत ही अति. उत्साही, बहुत तुरंत गुस्से में आ जाने. वाला और बिना सोचे समझे रिएक्ट करने वाला. लड़का था। तो दाऊद को जो है साबिर हमेशा. कंट्रोल में रख के चला करता था। जैसे ही. साबिर की मौत होती है दाऊद उंखल हो गया।.
दाऊद ने हर उस आदमी को चुन चुन कर मारा. जिस आदमी ने कभी किसी वक्त में उसको उंगली. दिखा दी हो या तू बोल दिया हो। सब याद रहा. उसको एक-एक को ढूंढो। बिल्कुल एक-एक को. खोज खोज के चुन चुन के उसने मारा और. मरवाया और बहुतों को तो पुलिस से सुपारी. दे के एनकाउंटर में मरवाया।. ये खुला तथ्य है। इसमें कोई छुपाव वाली. बनाओ वाली बात नहीं है। सबको पता है कि. कितने ही पुलिस ऑफिसर्स जो है उसके पैरोल. पे थे और उसके कहने पे एनकाउंटर किया करते.
थे। तो तो वक्त के दाऊद को यह बिल्कुल रास. नहीं आता था। अरे काहे का एरिया बांटने. वाला तू कौन होता है? मैं जहां पर कदम. रखूंगा वो मेरा इलाका है। किसी से डरता था. दाऊद इब्राहिम। दाऊद बहुतों से डरता भी. था। ऐसा नहीं है कि नहीं डरता रहा हो।. जिन्हा बाई खबरी हुआ करती थी। कभी उनकी. बात नहीं काटी उसने। कौन थे यह? क्या था? जिनाबाई खबरी जो है हमारे यहां की एक तरह. से कह सकते हैं एक गॉड मदर के रूप में. उनको इस्टैब्लिश किया जाता है। हालांकि वो. एक इनफट थी बॉम्बे पुलिस की और उनके जो.
खाविंद थे वो पार्टीशन के समय में चले गए. पाकिस्तान। इन्होंने कहा कि तुम भी चलो।. तो उन्होंने कहा नहीं ये मुंबई मेरा शहर. है। वहां पे तो कौन हमें जानता पहचानता. है। मैं तो यहीं रहूंगी। और वो चले गए. बच्चे यहीं इनके पास छोड़ गए। ये अकेली रह. गई बच्चे की जिम्मेदारी कभी दुनिया में. जीवन में बाहर जाकर के कुछ काम नहीं किया. किसी से बोला नहीं पर्दाशी महिला थी तो. इन्होंने बाहर आकर के जब दुनिया देखनी. शुरू की तो यंग थी बहुत सुंदर भी थी और जब.
उन्होंने देखा कि दुनिया इतनी कठोर है. खराब है अब क्या करूं कैसे कमाऊं खाऊं तो. कोशिश करती रही लेकिन जब नहीं काम हुआ तो. उस समय में शराब बंदी थी तो इन्होंने शराब. की तस्करी और वो बेचना शुरू किया फिर बाद. में इनको को पता चला कि नहीं पहले चावल के. ऊपर बैन था तो चावल का काम करना शुरू किया. तो जिना बाई चावल वाली कहलाने लगी। चावल. उस वक्त जो है वो राशन में मिला करता था।. यानी अगर आपके यहां शादी भी है तो शादी के. लिए भी आपको 10 या 12 15 किलो जो है उतना.
ही मिलेगा कि आप 40 से ज्यादा बाराती नहीं. ला सकते या घराती नहीं हो सकते। एक शादी. में इतने लोग होंगे। वो वाला चक्कर हुआ. करता था। तो इन्हने चावल की तस्करी और. ब्लैक मार्केटिंग की। फिर बाद में इनको. लगा कि इसमें इतना पैसा नहीं है। शराब में. बहुत ज्यादा है। तो शराब का काम किया।. शराब का करते-करते इनका बड़ा वाइड नेटवर्क. हो गया। क्रिमिनल्स के साथ रिश्ते हो गए।. हाजी मस्तान से हो गए। करीम लाला से हो. गए। यूसुफ से हो गए और वो लोग सब इनकी. बड़ी इज्जत करते थे। पुलिस वालों से इनके. बड़े अच्छे ताल्लुकात हो गए। ये पुलिस को.
इंफॉर्मेशन देने लगी। पुलिस वालों के काम. करने कराने लगी तो इनका पावर बहुत बढ़. गया। दाऊद इब्राहिम के जो पिता थे. इब्राहिम कासकर साहब वो जिना बाई खबरी को. बड़ा मानते थे और एक तरह से राखीबंद भाई. थे उनके मुंह बोले भाई थे तो उसकी वजह से. ये उनको बुआ बोला करते थे फूफी बोलते थे. और बड़ी उनकी रिस्पेक्ट भी करते थे और. थोड़ा एक हद तक डरते भी थे कि ये नाराज हो. जाएंगी तो अच्छा नहीं होगा बट ह ऑफ. रिस्पेक्ट डरना हुआ ना डर तो डर होता है.
डर तो डर होता है चाहे किसी भी तरीके का. हो बट इनको किसी का खौफ ऐसा कोई ऐसा था. जिसको लगता था कि यह कंपटीशन है या यह. बराबर के समद था समद खान उनका पूरा. कंपटीशन था अमीरजादा आलमजेब जो दोनों पठान. भाई थे वो दोनों उनके लिए फुल कंपटीशन थे. गैंग को तो खत्म कर दिया था ना कि दिया था. लेकिन डरता भी तो था ना ऐसा नहीं था कि वो. मतलब उठा और मार दिया और चल दिया ना उन. लोगों को मारने करने में इसके दांतों से.
पसीने आ गए थे छूट गए थे दाऊद. इब्राहिम के भी ऐसा नहीं है कि आसानी से. मार दिया। और जिन दिलीप अजीज की मैं बात. कर रहा हूं उनका बेटा जो है हमीद और वो. दूसरा उसका नाम अभी मैं बोल रहा हूं। वो. दोनों से तो दाऊद इब्राहिम चार मास दूर. रहता. था। बहुत खतरनाक थे वो दोनों। वो तो वो तो. ऐसे थे कि उनके पास में एक बाइक हुआ करती. थी 550 सीc की। आलम यह था कि वो बाइक जब. जिस रास्ते से गुजरती थी उसके साउंड से. लोगों को पता चल जाता था कि दिलीप भाई के.
लड़के आ रहे हैं। रास्ते खाली हो जाते थे।. डोंगरी के रास्ते खाली होते थे। वो उस वो. दौर था. और उनसे इब्राहिम भी दूर रहता था उनसे।. छोटा राजन को थप्पड़ मारा इसने हमीद. ने। वो किसी से नहीं डरते थे। पागल थे वो. दोनों एकदम सिरफिरे थे।. एक बार तो ये मारने ही पहुंच गया था दाऊद. को तो बच गया वो फॉर्चूनेटली किसी कारण से. दाऊद मान्या सुरवे वगैरह से डरते थे मन्या.
सुरवे को मरवाने के बारे में यह कहा ही. जाता है कि दाऊद इब्राहिम की टिप थी वो और. मन्या सुरवे निश्चित तौर से इस कदर खतरनाक. था और उसने खुलेआम ऐलान कर रखा था कि मैं. मुस्लिम माफिया को खत्म कर दूंगा और वो. उसका सबसे बड़ा कॉम्पिटिट था जितने बड़े. पठान नहीं थे उससे ज्यादा. बड़ा क्योंकि क्योंकि वह इल्यूसिव था।. इसकी दाएं बाएं आसपास उसको हवा तक नहीं. लगती थी कि वह कौन है, कहां है, कैसा. दिखता है, क्या करता है, कहां रहता है,
किससे मिलता है, किन के पास आता जाता है।. उसके पीछे एक. लंबी स्ट्रेटजी के तहत उसको इन्वेस्टिगेट. करवा के, उसके पीछे खबरी लगा के, उसकी. इंफॉर्मेशन निकाल करके पुलिस को दी गई और. उन्होंने जाकर के एनकाउंटर किया। ये कहानी. किस्सा दुनिया बताती है आज भी। हमने भी यह. बातें सुनी हैं। हम मेरा कोई फर्स्ट हैंड. एक्सपीरियंस नहीं है। लेकिन मैं जिन इनफेट. से मिलता हूं, जिन पुलिस ऑफिसर से मिलता. हूं या जिन. अदर ये कहना चाहिए कि गुप्तचरों से या. जासूसों से मिलता हूं। उन लोगों से हमें.
ये खबरें मिलती हैं। एंड अरुण गवली से. डरते थे। नहीं नहीं अरुण गबली वगैरह से. कोई खौफ का नहीं सिलसिला था। अशोक जोशी से. जरूर उसको खौफ था, डर था। इसलिए बाद में. उसने अशोक जोशी को भी मरवाया। उसने दाऊद. ने अपने सामने जिनजिन लोगों से उसको डर हो. सकता था उसने सबको मरवाया बड़ा राजन को. मरवाया हर उस आदमी को मरवाया. उसने किसी को नहीं बख्शा तो जो डरता वो. सभी से देखिए आपको बता देता हूं कि अंडरवर. एक ऐसी जगह है जहां आदमी आपको ऊपर से शेर.
दिखता है अंदर से चूहा होता है चाहे कोई. भी डाउन हो चाहे वर्ल्ड का कोई भी डाउन हो. खतरा है हर जगह अरे हर जगह है ना अपना ही. आदमी एनवायरमेंट निकल जाए अब कोई भी कभी. कभी भी मुंह फोड़ ले। क्यों इतनी. सिक्योरिटी में रहते हैं? क्यों आप छुप. करके रहते हैं? आपको सिस्टम से तो डर है. ही। विरोधी गैंगों से भी डर है। आपके अपने. लोगों से भी डर है। हम क्योंकि आप भी जिन. सीढ़ियों को उलान करके वहां पहुंचे हो या. जिनको काट के आप पहुंचे हो। ऐसा हो सकता.
है ना कि उसी चीज को उसी घटना को या. उन्हीं बातों से सबक लेकर के कोई आपके साथ. गेम कर जाए।. कोई भी ये जो सारे क्रिमिनल्स हैं सारे. डों्स एंड इंक्लूडिंग दाऊद ये लोग फिजिकली. स्ट्रांग थे कुछ कि कोई खान गैंग था अच्छा. बासू दादा थे ऐसा कुछ लोग थे दाऊद नहीं. नहीं नहीं दाऊद वगैरह सब ये सब मेरे आपके. जैसे सामान्य लोग हैं अरुण बस बस लोग थे. और इनके गंस थी इनके पास इनके पास करेज.
था. कलेजा लड़ने का भिड़ने का कत्ल करवा देने. का सिस्टम. से लड़ जाने का और उसमें अपने आप को जेल. अगर चला जाऊं मैं तो भी मेरा कुछ नहीं. बिगड़ेगा। यह चीज मान लेने का वो दमखम उन. लोगों में था। और एक टाइम बाद बहुत सारे. क्रिमिनल्स को डेथ डिनायल सिंड्रोम हो. जाता है ना. कि ऐसे बहुत सारे पुलिस वालों ने भी बताया. है कि जब आप बहुत बड़े-बड़े गैंगस्टर के.
एकदम गन पॉइंट पे भी रखते हो तो भी वो हंस. रहे होते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि. अभी भी मरेंगे नहीं वो। एक तरीके से डेड. डिनायल उनके दिमाग पर चढ़ जाती है। वो तो. इमोर्टल है। कहीं से भी निकल सकते हैं।. इसलिए उनमें कलेजा बढ़ते जाता है। उन्हें. लास्ट मोमेंट तक भी ऐसा नहीं लगता कि वो. मर जाएंगे। उनको लगता है एंड में भी कि. अरे अभी भी हो जाएगा। अभी कोई बचा लेगा।. ये फिल्मी बातें हैं। ऐसा कभी नहीं होता।. बट क्राइम बहुत सारे क्रिमिनल. साइकोलॉजिस्ट बोलते हैं। एक दो लोग होते. हैं ऐसे हजार लोगों में एक करोड़ लोगों. में 1 लाख लोगों में ऐसा एक आध कोई होता. है दीदावर जो डेड डिनाइयल सिंड्रोम वाली.
जो बात आप कह रहे हो उसमें जा पहुंचता है. जैसे एक बंदा था यही आपने जैसे मैं मन्या. सुरवे की बात की मनोहर सुरवे उसमें वो चीज. थी हम कि उखाड़ लो जो उखाड़ सकते हो मारना. है मार दो साले चलेगा लेकिन मैं तो ये. करके कुछ नहीं तो ऐसे लोग होते हैं लेकिन. सब नहीं होते हैं। मुश्किल से. वो01% चांस होता है कि कोई एक मिलेगा ऐसे।. बाकी सब तो डरते ही हैं। हर आदमी डरता है।.
देखिए मृत्यु का डर होता है। परिवार के. हित का डर होता है। आपके आपका इलाका छीन. जाने का डर होता है। आपकी पूरी प्रॉपर्टी. चले जाने का डर होता है। आप दाऊद को क्या. बोलोगे? वाज़ ही अ माफिया और टेररिस्ट? ही. वाज़ अ माफिया एंड ही इज़ अ माफिया? टेररिस्ट नहीं है। नहीं मेरे लिए नहीं है।. क्यों? क्यों? क्योंकि इसीलिए तो भागे हुए. टेररिज्म का उनके ऊपर क्लेम्स हैं। दैट्स. व्हाई ही लॉस्ट। आपने चार्ज लगाया है ना।. प्रूव कहां हुआ है? चार्ज लगे हैं। इट इज नॉट प्रूव्ड येट।.
क्यों आपके लिए माफिया है और टेररिस्ट. नहीं है। भाई आप प्रूव करो ना कि वो. टेररिस्ट है। आपने किसी भी कोर्ट में उसको. एज अ टेररिस्ट सजा नहीं दी है आज तक।. हिंदुस्तान की किसी अदालत में नहीं हुई. है। मैं क्यों मानूं? माफिया है तो माफिया. है। उसके तहत उसको सजाएं हुई. है। तो उसकी आईडियोलॉजी की कोई लड़ाई नहीं. थी। आईडियोलॉजी की लड़ाई नहीं थी। वो तो. मूर्खता में वो फंस गया आईएसआई के जाल. में। आईसाई वालों ने टाइगर मेमन को पटाया. कि भैया 93 का ब्लास्ट करा दो। तो दाऊद.
इब्राहिम को थोड़ी उन्होंने बताया था कि. इतनी इंटेंसिटी का ब्लास्ट होगा। इस लेवल. का होगा। उन्होंने तो कहा है कि भाई कौम. के ऊपर हमला हुआ था। अपनी कौम को इतना. मारा है। लोगों ने कत्लेआम मचाया है। ये. है वो है।. और उसका बदला लेना है। औरकि दाऊद इब्राहिम. को यहां की कुछ महिलाओं ने टूटी हुई. चूड़ियां भेजी थी या चूड़ियों के बक्से. भेजे थे कि तुम ये पहन लो हाथ में।. तुम्हारे सुहाग उजड़ गए और तुम वहां पे. बैठकर के वो कर रहे हो। तुम कौम के.
मुहाफिज नहीं हो। तो उसके मन में भी यह. कहीं एक था कि मुझे बदला लेना चाहिए। उसे. नहीं मालूम था कि ये टेरर एक्ट होगा इस. तरीके का इस लेवल. का। मैं मैंने कई जगह पे ये बात कही है।. लोग मुझे इस चीज के लिए कोसते भी हैं कि. मैं दाऊद का फेवर करता हूं। मैं डिफेंड. नहीं कर रहा हूं। मैं वह सच्चाई बताने की. कोशिश कर रहा हूं जो लोग नहीं मानते या. जानते। सच तो यही है। आप अगर पूरे केस की. क्रोनोलॉजी देखें तो आपकी ही जो चार्जशीट.
है 93 ब्लास्ट की उसमें ही ये चीजें लिखी. हुई हैं कि फलाना. फलाना मेजर था। ब्रिगेडियर था। वो लोग ऐसे. शामिल थे। वहां का एक लोकल तस्कर था। उसने. जाकर के और इन लोगों की आईएसआई से मुलाकात. करवाई टाइगर मेमन की। फिर टाइगर मेमन ने. छोटा शकील से इन लोगों की मुलाकात की।. छोटा शकील ने कहा बिना भाई की जानकारी के. ये काम नहीं हो सकता। उनकी रजामंदी जरूरी.
है। फिर उन्होंने दुबई में इन लोगों की. मीटिंग ऑर्गेनाइज की। मीटिंग ऑर्गेनाइज की. तो दाऊद को बोला गया कि ये साहब करना. चाहते हैं। हम बदला लेना चाहते हैं। उसका. उसने कहा कि लो उसको तो लगा ये दंगा. करेंगे। उसको यह पता ही नहीं था कि ऐसे. ब्लास्ट करेंगे। यहां आकर के कहानी के. दूसरा हिस्सा आ जाता है। दाऊद की जानकारी. के बिना इन लोगों ने पूरा प्लान किया।. इतने सारा आरडीएक्स लेकर के आए पाकिस्तान. से। इतने सारे ग्रेनेड्स लेकर के आए। इतनी. सारी AK-47 56 आई। उनके साथ में थाउजेंड्स.
ऑफ एमुनेशन आया। उसमें से कुछ जो है यहां. पे इस्तेमाल हुआ। कुछ मध्य प्रदेश चला. गया, कुछ गुजरात चला गया। वहां पे आज भी. वो रखा हुआ है छुपा हुआ। कई-कई जगहों पे. सारा बरामद नहीं हुआ है अभी तक।. और वह अभी भी वह चाहे तो रिटाइव करके और. उसका यूटिलाइजेशन कर सकते हैं। आई डोंट. थिंक सो कि आरडीएक्स अब इस्तेमाल हो. पाएगा। लेकिन AK-47 और उसके जो. कार्ट्रीजेस हैं वो अभी भी आराम से. इस्तेमाल हो जाएंगी। वो खराब होने वाली. चीज नहीं.
है। तो वो जो चीज है उसमें मेरा तो डिफेंड. करने का मामला ही नहीं है। मैं तो सिर्फ. हिस्ट्री का वो पक्ष आपको बताने की कोशिश. कर रहा हूं जो हमारी ह्यूमन एनार्की है।. ये उसकी हिस्ट्री का एक पार्ट है जिसका एक. हिस्सा लोगों को पता है। मैं दूसरा पन्ना. पलट करके दिखाने की कोशिश कर रहा हूं।. दैट्स इट। बट हाई कोर्ट ने बोलते थे हां. कि इंडिविजुअल कैपेसिटी पे दाऊद इब्राहिम. इज़ डिक्लेयर्ड टेररिस्ट। अगर हाई कोर्ट ने. बोला है तो हाई कोर्ट की बात को मैं. एंडोर्स करूंगा कि हां वो टेररिस्ट. है। अब यूं तो दाऊद इब्राहिम के टोरावरा.
की पहाड़ियों में जाकर के दो बार. ओसामा बिन लादेन से मिलने का जिक्र भी आता. है। हम. लेकिन वो जिक्र आता है। डू यू थिंक दैट्स. ट्रू? मुझे नहीं पता वो। मैंने भी खबर. लिखी है सूत्रों के हवाले से।. हाउ मच डू यू थिंक दाऊद इब्राहिम ऑन करता. था। जी। कितना पैसे कमाता था दाऊद. इब्राहिम? दाऊद इब्राहिम जब मुंबई में था. तो कमाई उसकी हजार 2000 करोड़ साल की होगी।.
और जब यहां से चले गए उसके बाद में तो. उनकी कमाई बढ़कर के जो है वो मिलियंस ऑफ. डॉलर्स में हो गई। क्योंकि उनका जो ग्रुप. है वो डायरेक्टली फिर ड्रग्स की स्मगलिंग. में जुड़ गया। गोल्ड की स्मगलिंग में बड़े. पैमाने पे आ गए। ब्लड डायमंड की स्मगलिंग. में आ गए। स्मॉल आर्म्स स्मगलिंग में आ. गए। और उसके अलावा उन्होंने लेजिटमेट. बिजनेस जो है पूरे वर्ल्ड वाइड खड़े कर. लिए। लेजिटमेट बिजनेस कौन सी इनकम. स्ट्रीम्स है उसकी? क्या नहीं है उनका?
उनके पास एयरलाइंस हैं। उनके पास में. रेडियो स्टेशन है। उनके पास में टीवी. स्टेशन है। उनके पास में चेन ऑफ शॉप्स है।. ग्रोसरी शॉप्स। उनके पास में वीट फील्ड्स. हैं। उनके पास में कंटेनर यारार्ड हैं।. उनके पास. कंटेनर लाइनर है। उनके पास. क्या बोलते हैं यह जो होते हैं. होटल्स वगैरह तो हैं ही और उसके अलावा तीन.
गोल्ड माइन फील्ड्स में उनके इन्वेस्टमेंट. हैं नॉर्थ अमेरिका में तो नॉर्थ अफ्रीका. में सॉरी और ऐसे बहुत सारी जगह हैं जहां. पे उनके लेजिट. कौन सी है क्या है नेपाल में है ऐसे कम से. कम 101 बिनेसेस हैं। उनका जो पूरा काम. संभालने वाला व्यक्ति था जिसका नाम था. जमीम शाह उर्फ़ जंबो उसको उम इंडियन. इंटेलिजेंस एजेंसीज ने अली बुेश अरुण गवली.
और बबू श्रीवास्तव का जो कंसोर्टियम बना. हुआ था उन लोगों ने मिलकर के और. ठीक इसके सामने राजमहल के सामने उसकी. गाड़ी को एक. yamaha जो 100 एक्स गाड़ी होती थी बाइक. उससे रुकवा करके और उसकी एसयूवी में उसको. गोलियां मार के मार डाला था। उसके बाद में. उनका यह सारा बिजनेस जो है वो खत्म हुआ. था। आज भी डू यू थिंक ही इज़ एक्टिव? ही इज़.
100% एक्टिव। दाऊद आज भी एक्टिव है।. बिल्कुल एक्टिव है। ये सारे बिज़नेसेस. कंट्रोल कर रहे हैं। बिल्कुल कर रहे हैं।. इललीगल लीगल बर्थ। हां बिल्कुल है। तो अब. इललीगल बिनेसेस दाऊद के इंडिया में. कंट्रोल होते हैं। कुछ? छोटा शकील है और. उसका अनीस है। ये लोग मिलकर के करते हैं।. जो भी काम करते हैं। क्या करते होंगे आज. इंडिया में इन यही सब काम गोल्ड की तस्करी. है, दवाओं की तस्करी है, सिगरेट की तस्करी. है, फिर आपके ब्लड डायमंड की स्मगलिंग है, स्मॉल आर्म्स की स्मगलिंग है। आज भी.
इंडिया में स्मगल हो रहा है। बिल्कुल हो. रहा है और बड़े पैमाने पे हो रहा है।. रुकेगा कैसे? जब तक करप्शन है तब तक कुछ. नहीं रुकने वाला।. और एक बात ये बताता हूं आपको। तो एक बात. हमेशा याद रखिए और ये बात मैंने कई फोरम्स. पर कही है कि यदि पुलिस चाहे तो एक मंदिर. के बाहर से एक चप्पल चोरी नहीं हो सकती।. इतना बड़ा गैंग, इतने बड़े-बड़े. कंसर्टियम, गैंग्स के कार्टल्स ये सब बनना. इतना आसान काम नहीं है। यह इसीलिए बनते. होते हैं क्योंकि आप यह होने देते हैं। आप.
इनको बड़ा करते हैं। पहले तो आप इनसे. रिश्वत खाते हैं। इनके केसेस दबाते हैं।. इनके लोगों के केसेस दबाते हैं। जो. गैंगस्टर्स हैं या किलर्स हैं, सुपारी. किलर्स हैं। फिर जब ये लोग इतने बड़े हो. जाते हैं तो फिर आप उनके खिलाफ जाने की. हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।. आज हु डू यू थिंक सबसे बड़ा गैंगस्टर कौन. होगा इंडिया में? ताऊद इब्राहिम ही है और. कोई नहीं है। आज भी वो इंडिया में इतना. फैला हुआ है उसका काम और वो करता है।. बिल्कुल करता है। उसके नाम को सप्रेस करने.
के लिए और यह दिखाने के लिए कि भाई अब एक. हिंदुओं का मुहाफिज आ गया है लॉरेंस. बिश्नोई नाम का। उसको उसके नाम का. इस्तेमाल किया जा रहा है। वरना तो जो दो. बड़े हत्याकांड हुए हैं इस देश में जिस पे. मतलब लॉरेंस बिश्नोई का नाम आता है जिसमें. से एक मुंबई में बांद्रा में हुआ. था। वो लॉरेंस बिश्नोई के लोगों का किया. करवाया हुआ ही नहीं. है। उसकी तो सुपारी उत्तर प्रदेश में गई. थी। उत्तर प्रदेश के लड़कों ने आकर के वो.
किया है। लॉरेंस बिश्नोई क्यों उत्तर. प्रदेश के लड़के इस्तेमाल करेगा? उसके पास. में एक से एक बेहतरीन शूटर जो हैं वो. हरियाणा और पंजाब के हैं। दिल्ली के. हैं। उसको जरूरत नहीं. है। तो ये सुपारी किसी और ने की है। नाम. इसका दिया जा रहा है। क्यों हो रहा है. इनका नाम? क्योंकि हमें दिखाना है कि भैया. दाऊद इब्राहिम का भी कोई बाप आ सकता है इस. देश में। एक एक फेक नैरेटिव जो पहले हमारी.
बात हो रही थी। ये फेक नरेटिव है। क्यों. दिखाना है किसी को? इसलिए दिखाना है. क्योंकि भाई वो मुसलमान वो है. ना क्रिमिनल डॉन उसकी कोई इज्जत अब कोई. वैल्यू नहीं बची हिंदू डॉन है अब जैसे एक. वक्त में वन्या सुर्वे को हिंदू डॉन बताने. की कोशिश की फिर उसके बाद में अरुण गबली. और अमरनायक को बनाने की कोशिश की. सक्सेसफुल नहीं हुआ कौन है इसके पीछे कौन. इसको बड़ा बनाएगा क्यों करेगा कोई बनाने. वाले लोग हैं बना रहे हैं वो चीज चल रही. है थिंग विल बी देयर देयर आर सम.
पॉलिटिशियन देयर आर सम इंटेलिजेंस ऑफिसर्स. दोज़ हु वांटेड टू डू दिस पॉलिटिशियंस और. इंटेलिजेंस ऑफिसर्स चाहते हैं कि एक एक. क्रिमिनल खत्म जो नहीं हुआ है उसका. नैरेटिव खत्म करने के लिए हम एक कोई दूसरा. फॉल्स नैरेटिव नैरेटिव का एक नया क्रिमिनल. बना दें ये हमेशा होता आया है या क्यों भी. हो रहा है होता है ये ये होता है बट क्यों. व्हाई डू यू यू यू यू यू यू यू इट्स हैपन. मैं वो पूछ रहा हूं क्या हो रहा है ये. क्योंकि आपको अपनी आईडियोलॉजी ऊपर लानी है.
अपनी सत्ता बनानी है और उसको बनाए रखना. है। लोगों के मन में एक खौफ पैदा करना है।. देखिए आपको बताता हूं दाऊद इब्राहिम का. खौफ इतने सालों से आज भी तक फिल्म. इंडस्ट्री पे छाया हुआ है। ठीक है? आज भी. आप दाऊद इब्राहिम के नाम से इस फिल्म. इंडस्ट्री में कुछ भी कर करा सकते. हैं। उसके सामने लॉरेंस बिश्नोई का टेरर. क्रिएट करने की कोशिश की गई। सलमान खान. के पनवेल फॉर्म की रेकी करवाई। उसके घर के.
ऊपर गोलियां चलवाई। गोली चलाने वाले कौन. निकले? यूपी के चिंदी चोर जिनकी कोई. वैल्यू नहीं जिनकी कोई वक्त नहीं। 5-5000. में ₹500 में उन लोगों को लेकर के आए।. इनको खार में जो मर्डर केस हुआ बांद्रा. में उस मर्डर केस के आरोपियों को कितना. पैसा मिलना था? ₹-5 लाख पर. हेड। वो लोग तो टिश्यू पेपर हैं। यूज़ एंड. थ्रो। उसकी गैंग के लोग क्यों नहीं यहां. आकर के काम कर रहे हैं? क्योंकि वो लोग. इनवॉल्व ही नहीं है। और जिनको यह चीज करके.
दिखानी है, फिल्म इंडस्ट्री पर कब्जा करना. है, फिल्म इंडस्ट्री के अंदर एक साइकोफियर. क्रिएट करना है, हमारी बात नहीं मानोगे, तो हम तुम्हें मान देंगे। हमारा नरेटिव. सेट करने वाली फिल्में बनाओ, वैसी ही वेब. सीरीज. बनाओ। वो काम चल रहा है असल में। और यही. चीज गलत हो रही है। आप एक स्टेट एक्टर बना. करके या उसके नाम से एक फेक आइडेंटिटी. क्रिएट करके आप उसको बड़ा बनाने की कोशिश. कर रहे हैं। ये वो भस्मासुर है जो आप ही.
के पीछे कुछ दिनों बाद. भागेगा। और आप ही के सिर पे हाथ रख करके. उसी आशीर्वाद का जो है वो इस्तेमाल करके. और आपको भस्म करने की कोशिश करेगा। तब आप. इसको मारोगे। ये सारे गैंगस्टर्स सब. माफियाज छोटे-छोटे लेवल पर स्टार्ट होते. हैं। ये और इतने बड़े-बड़े हो जाते हैं।. इतने बड़े आप नाम ले रहे हो और इतना कहर. हो जाता है। हर जगह हम लोग इनके बारे में. बात करते हैं। ये रिक्रूट कैसे करते हैं? बहुत आसान. है।. कैसे? इस देश में बेरोजगारी कितनी.
है? अस्पतालों में आदमी इलाज के लिए. परेशान हो रहा है। मैं यंग बच्चा हूं।. मेरा बाप बीमार है, मां बीमार है, किसी को. कैंसर है, किसी को कुछ है, पैसे नहीं है।. अरे बेटा क्या प्रॉब्लम है? यह है। इनके. रिक्रूटर घूमते रहते हैं। देखते रहते हैं. परेशानदा लोगों को, तंगहाल लोगों को। यह. काम मेरा कर तुझको पैसे देता हूं। पैसे दे. दिए उसके बाद काम करवा लिया। मुंबई में तो. एक बड़ा नामी सुपारी किलर था। मुझे अभी.
उसका नाम याद नहीं है। गोरेगांव वेस्ट का. ही था वो। उसको एक लड़की से मोहब्बत थी।. उनके परिवार के लोग जो है शादी के लिए. राजी नहीं थे। वो गए एक कॉरपोरेटर के पास. में गोरेगांव वेस्ट के जो कि खुद एक वक्त. में बड़ा अंडरवर का क्रिमिनल था गैंगस्टर. था। उसको कहा कि भाई साहब हमारी ये शादी. नहीं हो पा रही ये वो है। बोले इसकी ऐसी. की तैसी कोई क्या बिगाड़ता है तुम्हारा? मैं देखता हूं आज से मेरा तुम्हारे ऊपर. हाथ है। उसने वहीं पास में अपने घर के उन.
दोनों को कमरा ले रहे रख दे दिया और तुम. यहां पे रहो। फिर उस लड़के को धीरे से जो. है एक नौकरी दिलवाई। अब वो लड़का इतना. प्रीज़्ड है कि एक बार जो है इस कॉरपोरेटर. ने कहा कि जा मेरा यह काम करके आ वो करके. आया। होते उसको एक बार सुपारी दी कि ये. उसको मार के आ। वो मार के आया। एंड ही. बिकम अ वन ऑफ द मोस्ट. डेड सुपारी किलर।. तो ऐसे बहुत सारे तरीके होते हैं जिनसे कि.
इन लोगों को जेलों में रिक्रूटमेंट होती. है और इनके रिक्रूटर अलग ही होते हैं।. जैसे आपके और हमारी कंपनियों में एचआर. हेड्स होते हैं वैसे इनके रिक्रूटमेंट का. काम करने वाले लोग भी होते हैं। तो वो जेल. में बिना किसी कारण के भी चले जाते हैं।. कोई छोटा-मोटा क्राइम किया जेल चले गए और. वो बेल के लिए अप्लाई भी नहीं करेंगे।. वहां छ महीने साल भर दो साल पड़े रहेंगे. बिना बेल के।. देखने के लिए परख नहीं रहे लोग और वहां से.
वह देखते हैं अच्छा साला यह बड़ा धाड़. डकैत है। अरे क्या हुआ रे तू तेरा तो केस. में ऐसा दम नहीं है तू जाता क्यों नहीं. बाहर? बोले भाई पैसा नहीं है मेरे पास।. मेरा वकील नहीं है। मेरा मां-बाप भी हेल्प. नहीं करते। यह वह सब उनके पास भी पैसा. नहीं है। अरे कितना पैसा लगेगा क्या है? चल छोड़ छोड़ छोड़ छोड़ मैं करवाता हूं।. कब है तेरी तारीख? बोले फलानी तारीख। तो. कौन सी कोर्ट में है? साहब चार नंबर में. है। ठीक है। तू जाना चार नंबर में तेरे को. काला कोर्ट मिलेगा। एक काला कोर्ट यानी. वकील। हम्म। वहां पहुंचता है। दो वकील.
पहले से खड़े मिलेंगे।. अरे एक्स व जेड हां साहब फलाने ने भेजा है. तेरा केस हम लड़ेंगे ले वकालतनामा साइन कर. वकालतनामा साइन कर दिया वो उसका केस फ्री. में लड़ रहा है 10 दिन 15 दिन एक महीना दो. महीने में जमानत करवा दी जमानत की रकम भी. उन्होंने जमा कर दी वहां से अंडरवर से. पैसे सारे आ रहे हैं ये वकील लड़ रहे हैं. ये लड़का प्लीज हो गया बाहर आया आते से ही. उसको जो रिक्रूटर का आदमी है वो मिला लेकर. के और गैंग बॉस के पास गया कि सर नया. रंगरूट आ गया हां भाई क्या करता है लड़का.
सर सर गाड़ी बड़ी अच्छी चलाता है। लगा. इसको धंधे पे आज से यह गेट अवे कार. चलाएगा। सर इसने पिछला वाला जो भाई इसने. जो डकैती मारी थी उसमें दो लोग मार दिए. थे। अरे इसको लगा ना अरे इसको क्या तू. हथियार जानता है कौन सा सामान चलाता है? बोले भाई मैं पिस्तल कट्टा ये वो चलाता. हूं। हां इसको दे सामान दे। उसको लगा दिया. धंधे पे। अलग पड़ा वो। कितने लोग हैं ऐसे? मैं तो जितने भी शूटर से मिला हूं या.
क्रिमिनल्स से मिला हूं, मुझे ऑलमोस्ट इसी. तरह की कहानियां सबसे सुनने को. मिली। कईयों से मैं जेल में मिला, कईयों. से पुलिस लॉकअप में मिला, कईयों से मैं. बाहर भी मिला। कुछ रिफॉर्म से मिला. मैं। मैंने हमेशा इन लोगों की बैक. हिस्ट्री मैंने इनका ह्यूमन फेस, इनकी. ह्यूमन लाइफ समझने की कोशिश की कि वहां पे. आखिर क्या थी कमजोरी या गलती जिससे कि यह. लोग अंडरवर्ड में आए। क्राइम तो किया. उन्होंने क्रिमिनल तो वो है बट साइकी क्या. थी फर्स्ट टाइम कैसे आया क्यों आया भाई और.
दूसरी चीज मेरा समाज मेरे शिक्षक मेरे. माता-पिता या उनके रिश्तेदार या कोई लोग. क्यों असफल हुए उसको वहां तक पहुंचाने से. रोकने. में इस आस्पेक्ट पे हम लोग काम नहीं करते. हम हम जो कहानियां लिखते हैं हम जो. किताबें लिखते हैं उसमें हम उनके सिर्फ. क्राइम के बारे में लिखते हैं तो लोगों को. लगता है कि आप उन्हें ग्लमराइज कर रहे हैं. हम बट इट इज इट्स नॉट ट्रू। बट व्हाई डू. यू थिंक कि ग्लैमराइज क्यों किया जाता है. इनको? इनको कोई सारी मूवीज में करते हैं।.
नहीं करते वो वो है ही वैसा। उनका लाइफ का. स्टाइल ही वैसा है। वो उसी तरीके के. ग्लैमराइज लाइफ जीते हैं।. देखिए ग्लैमराइज करना सुनिए ग्लैमराइज. करना मैं किसको बोलूंगा? आपने अच्छी चीज. याद दिलाई। गंगूबाई के ऊपर जो फिल्म बनी. थी वो ग्लैमराइज करना था।. क्यों? क्या गलत था? सभी कुछ गलत था।. गंगूबाई कभी भी डॉन नहीं थी। पहली बात तो. वो एक उसकी छोटी सी मादाम थी ब्रथल की।.
ठीक है? ब्रथल कीपर थी ना। थोड़े से उसने. औरतों लड़कियों के लिए एक लड़ाई की। वो. लड़ाई क्यों की? क्योंकि उस जगह का से. उनको अपदस्त करके उनको हटा करके वहां से. और दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा था। हम तो. चकि वहां पे उनका धंधा चलता था। उस धंधे. को बचाने के लिए उसने लड़ाई लड़ी. थी। औरतों की लड़ाई नहीं थी वो। उन तभी. कुछ औरतों को रिफॉर्म करके उनके लिए कोई. बहुत बड़ा उसने एक संगठन खड़ा करके और उन.
लोगों को बचाने की कोशिश की हो। उनको. प्रॉस्टिट्यूशन से निकाल करके उसने समाज. का हिस्सा बनाने की कोशिश की हो वो सब. नहीं किया था। उसने वो जो लड़ाई लड़ी थी. और वो जाकर के जो नेहरू जी से मिली थी तो. वो सिर्फ इसलिए थी कि हमको यहां से उजाड़ा. ना जाए।. तो उसमें कौन सा महान काम हुआ? वो तो कोई. बहुत बड़ी चीज नहीं हुई। वैश्याओं को. वैश्याम बनाए रखने का ही उसने काम किया. ना। मैं उसको ग्लमराइज करना मानता हूं। और. फिल्म में जिस तरीके से दिखाया चुनाव होता.
है और उस चुनाव में उसने ये किया वो किया. और वो चुनाव जीत गई। ऐसा तो कभी होता ही. नहीं था जो फिल्म में दिखाया. है कि तमाम औरतें जाकर के और बड़े. लोकतांत्रिक तरीके से अपना डॉन चुन रहे. हैं। कहीं नहीं होता। दौन हमेशा काबिज. होता है। जैसे राज्य में सत्ताएं जो है वह. हथियाई जाती हैं। जहांगीर ने उसको मारा या. औरंगजेब ने उसको मारा, अपने भाई को मारा. या बाप को मारा और कब्जा किया। हमारे.
हिंदू जो राजा सो कॉल्ड कहे जाते हैं. उन्होंने भी ये कत्लेआम मचाए हैं। अपने. परिवारों में रनिवासों में और इसमें बड़े. ये सब कत्ल कत्लेआम हुए। तो वो काबिज होता. है इंसान।. यह यह जो चीज है यह अंडरवर में चलती है तो. और उनकी लाइफ स्टाइल आप देखेंगे ना तो आप. बोलेंगे कि अरे यार ये तो वाकई बड़ा कमाल. है। अब हाजी मस्तान की लाइफ स्टाइल आप. देखिए क्या थी? बड़ा. शानदार पूरा सफेद शर्ट, पैंट, जूते, घड़ी.
का पट्टा, चश्मे का फ्रेम हर चीज सफेद. होती थी। हिंदुस्तान में सफेद रंग के. कपड़े पहनने का जो असल फैशन आया है, खासतौर से क्राइम वर्ल्ड में उसका. क्रेडिट सिर्फ हाजी मस्तान को जाता है।. लेकिन जब वो फिल्म इंडस्ट्री में आया और. जब वो ये सब काम करने कराने लगा उसने. बेहतरीन ब्लैक कलर के सूट बनवाए अपने लिए।. आप उसकी तस्वीरें देखिए। वो कामदेव का. अवतार दिखता है उसमें। लड़कियां औरतें मरी.
जाती थी उसके. ऊपर। समझे आप? और मुस्लिम नहीं हिंदू और. लड़कियां भी उसके ऊपर मरी जाती थी। कितनी. उसकी दोस्त थी।. मेरी जो यह किताब है मस्तान उसमें हमने. पूरा का पूरा वो सारे जिक्र किए हैं इन. चीजों के और वो कोई भी पढ़ेगा तो ताच में. आ जाएगा। हमने तो तस्वीरें तक छापी है उन. लड़कियों की जिनसे उसके रिश्ते. रहे। सोना और उसकी उम्र के बीच में कितना. फासला. था? सोना ने ऐसे ही थोड़ी शादी कर ली.
उससे। इट्स मूविंग ऑन।. एक चीज बहुत कास्टेंट है अंडरवर. गैंगस्टर्स माफिया आज के क्रिमिनल्स में. और सारे जो बैड एक्टर्स हैं दैट. इज बार डांस. बार्स क्यों है वो एक ही अड्डा क्यों है. जहां से कास्टेंट उसकी क्या हिस्ट्री है. डांस बार जो है उसका इतिहास करीब-करीब. 40-50 साल पुराना है हम सोनिया बार नाम का.
एक बार था जहां से यह कहानी शुरू हुई. नरिमन पॉइंट. से वो जो उसके पार्टनर्स थे उसमें से एक. को लगा कि अरे यार बार में अच्छी इनकम. वगैरह नहीं हो रही है तो क्या करें तो. उन्होंने कहा कि लड़कियों को वेटस रखते. हैं। जब लड़कियों को वेटस रखने लगे तो. ग्लैमर आ गया तो लोग वहां ज्यादा आने. लगे। फिर उसको लगा कि यार बिजनेस और भी. बढ़ सकता है। कुछ और करते हैं। तो फिर.
उसने ऑर्केस्ट्रा डाला। ऑर्केस्ट्रा के. कारण भीड़ और बढ़ चली। फिर उसे एक दिन लगा. कि यार और भी कुछ करते हैं। तो उसने. डांसर्स जो है उनको हायर किया और डांस. करवाने लगा। और जब उसका बिजनेस अच्छा चला. तो वो बूम आ गया मार्केट में और उसके देखा. जो है पूरे मुंबई में जगह-जगह जगह-जगह बार. वालों ने डांस बार बनाने शुरू कर दिए।. मोस्टली उस समय जो है लाइव ऑर्केस्ट्रा. प्लस डांसर्स होती थी। फिर बाद में.
धीरे-धीरे ऐसा वक्त आया कि उन्होंने कहा. कि और लाइव ऑर्केस्ट्रा रखने की जरूरत. नहीं है। ये लड़कियां तो कुछ भी ठुमके. लगाएं, कुछ भी छातियां हिलाएं, लोगों को. तो मजा आता है। इसको फिल्मी गानों पर. चलाओ। तो गानों के ऊपर वो नाचने लगी और यह. काम शुरू हो गया। इस तरीके से ये काम हुआ।. अब क्योंकि लड़कियां हैं तो पैसा है। पैसा. है तो ताकत है। ताकत है और वहां पर छुपने. के लिए अड्डे हैं और इन लड़कियों का. ग्लैमर है। इनको इस्तेमाल करने इनको उपभोग.
करने की एक जो मानसिकता है वो है मानव. जाति में पुरुषों में। इसके कारण जो है. अंडरवर उन लोगों के पास जाने पहुंचने और. लगा।. इंडिया का या मुंबई का जो अंडरवर की लड़ाई. शुरू हुई है जो पहला गैंग वॉर शुरू हुआ है. वो सोनिया वार से ही शुरू हुआ है। किन के. बीच में? पठानों यानी अमीरजादा आलम दाऊद. गैंग के बीच में। क्यों? क्योंकि एक लड़की. को जिसके ऊपर यह पैसा लुटाया करते थे पठान.
उसी पे दाऊद ने पैसे लुटाने शुरू किए। और. दोनों उसको अपनी तरफ बुलाने के चक्कर में. ज्यादा पैसे लुटाते थे और जब किसी के पास. पैसा नहीं रह जाता था या वह उठ जाता था तो. उसको दूसरा चिढ़ाता था कि इतनी औकात थी. क्या अरे ऐसे ही है वैसी है वो सब और वो. जो लड़की को लेकर के टों्ट बाजियां थी वो. कालांतर में जाकर के हर दरीचे और हर. दरवाजे और हर गली में खून खराबे पे आकर के.
खत्म. हुई ये कहानी है पर ये तो किसी भी लड़की. को कभी भी कहीं से भी लेके आ सकते थे. क्योंकि इनका इतना डर था या पैसे थे या. खौफ था तो क्यों डांस बाज में जा के ये सब. क्यों करना डांस बार में सामने है ना. भाई ठीक है आपको मुर्गा खाना है ना आप. कहां जाएंगे आप नियरेस्ट होटल में चले. जाएंगे नियरेस्ट बुचर के यहां जाएंगे ला. भाई दो मुर्गे काट दे घर ले जाके पकवा. लेंगे आप जंगल जाएंगे नहीं ना मारने के.
लिए तो होटल में लड़की मौजूद है। मैं. क्यों 10 जगह पे मुंह मारता घूमूं और. खोजूं। यहां है ना ये ले पैसा। आ मेरी. गोदी में बैठ। वहां पे लड़ाईयां क्यों. मतलब लड़ाईयां तो वो तो मूछ की लड़ाई है. भाई। अच्छा ईगो ईगो की लड़ाई है। मूछ की. लड़ाई है वो। कि पब्लिकली मेरी बेइज्जती. हो गई। मैं इतना बड़ा डॉन। पब्लिकली नहीं. भी हुई तो साले तूने ऐसा कैसे कर दिया? हां पब्लिक ही ना मतलब चार लोगों के सामने. हो गई। मतलब पब्लिकली हो गई बेइज्जती और.
क्या? इसका तो पर इसके पीछे हिस्ट्री क्या. आज भी चलता है ये सब डांसबाज है आज भी. डांस बाज खूब है आज अच्छे से चल रहे हैं. गजगजा के चल रहे हैं लीगल है इललीगल है. इललीगल है ना हां अवैध है क्योंकि डांस. कराना और डांस के ऊपर पैसे उड़ाना ये सब. इललीगल है ना इंडिया में बिल्कुल नहीं. इंडिया में नहीं है सब जगह महाराष्ट्र में. बैन हुआ है पूरी तरीके से और लेकिन उसमें. सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के बाद में कुछ. उसमें छूट दी गई है कि ये किया जा सकता है. ये नहीं किया जा सकता है तो डांस वार्स के.
लिए जो रूल्स एंड रेगुलेशन लेड डाउन किए. हैं। उसके तहत कोई भी डांस बार नहीं चल. सकता है। उसमें कहा गया है कि इतना ऊंचा. पेडस्टल होना चाहिए। इतनी बड़ी जगह होनी. चाहिए। उसके चारों तरफ बैरिकेडिंग होनी. चाहिए। कोई भी आदमी अंदर नहीं जा सकता। एट. अ टाइम फ्लोर के ऊपर दो से ज्यादा. लड़कियां नाच नहीं सकती। 11:00 बजे के बाद. लड़कियां नहीं रह सकती। ना डांसर नहीं हो. सकती। 11:00 बजे के बाद में वेटर्स जो है. नहीं रह सकती। ऐसे बहुत सारे वो हैं। आप. पैसे नहीं उड़ा सकते। पैसे उसको दे नहीं. सकते। पहले जो है गारलैंड बना करते थे.
पैसों के हार वो भी आप दे नहीं सकते तो वो. वो चीजें जो जैसे दुबई में है वैसा सिस्टम. अब इंडिया में बॉम्बे में भी शुरू हो गया. कि गुलाब मिलते हैं तो एक गुलाब ₹1000 का. है तो आप जितने गुलाब उस लड़की को दोगे वो. बाद में कैश उसका कन्वर्ट हो जाएगा और. किसी लड़की को आपको ₹2000 देने हैं या. ₹000 देने हैं तो उसके एक टियारा जिसको कि. मुकुट बोलते हैं वैसा वो मिलता है तो वो. उस लड़की लड़की को पहना देगा तो उसको.
₹5,000 मिल गए। वो टीआर बाद में उस पे जमा. करेगी काउंटर पे और उसके बदले में उसको. बाहर का जो कट होता है परसेंटेज वो 20 30. 40 50% जो होता है वो काट करके बाकी पैसा. उस लड़की को मिल जाता है। वो लेके घर जाती. है। ये सारा सिस्टम अब अपने आप ही शुरू हो. गया है मुंबई में। पर ये लीगल है ऐसे डांस. चला। नहीं भाई सारा इललीगल है वो। और आज. भी चल रहे हैं। बहुत सारे होंगे। काफी है।. यहां से लेकर के रायगढ़ तक खूब है। सबको. सब पता है। ये कोई पर्टिकुलर कम्युनिटी.
होती है क्या कि डांसर्स वहीं से आते हैं. या लोग यहीं से आते हैं या जो करने वाले. हैं वो कंट्रोल कोई एक ही लोग करते हैं।. ऐसे कुछ होता है। डांस बार मोस्टली जो. चलाते हैं वो एक स्पेसिफिक कम्युनिटी के. हैं जो कि दक्षिण भारत के हैं। ठीक है? वो. डांस बार चलाते हैं, कंट्रोल पूरा करते. हैं। क्योंकि पूरे मुंबई का अमूमन कहिए कि. जो रेस्टोरेंट बिजनेस है उसके ऊपर उसी. कम्युनिटी का कब्जा है। ऑलमोस्ट मतलब 60. 70% कह लीजिए और उतनी ही मात्रा में जो.
लड़कियां हैं वह बुंदेलखंड. बघेलखंड मध्य प्रदेश का जो इलाका है और. आपके उत्तर प्रदेश में आगरा और मथुरा उस. इलाके में पाई जाने वाली एक जनजाति है. उसकी लड़कियां होती हैं। उनका भी तादाद. करीब-करीब 70 फीसदी लड़कियां वही हैं जो. कि ये काम करती हैं। वो एक खास जनजाति है. जो 800 सालों से उनकी बेटियां जो हैं यही.
धंधा करती हैं और डांस का. नृत्य और. वहां पे बेटे बाप और भाई अपने ही घर की. कुंवारी बेटी बहन से के दलाल के रूप में. काम करते हैं और उनसे धंधा करवाते हैं।. ये ऐसी कम्युनिटीज हैं। हां आज भी हां. बिल्कुल है। ऐसी एक कम्युनिटी मध्य प्रदेश. के आपके मालवा सेक्टर में भी पाई जाती है।. रतलाम जावरा मंदसौर इलाके में नीमच साइड.
हां नीमच भी उसमें शामिल हो जाता है। वो. वो पूरा जो अपना निमाड़ का बेल्ट है निमाड़. वहां पर वो भी एक कम्युनिटी पाई जाती है. और ये हाईवे नंबर 36 जो है उसके दोनों तरफ. तो इनका बड़ा सेटलमेंट है। हर आपको आधा 1. किलोमीटर पे 500000 मीटर के ऊपर इनके 10. 15-15 घरों के सेटलमेंट मिलेंगे। वहां पे. जहां भी दो चार छह ट्रक खड़े हुए हैं और. छोटे-छोटे घर बने हुए हैं। ये मान के चलिए.
कि ये इस कम्युनिटी का इलाका है जहां पर. कि वो ट्रक चलाने वाला जो बंदा है वो. हल्का होने गया है। वो लड़की के साथ समय. बिताने गया है। एंड ये उन्हीं के घर वाले. बेचते हैं। हां ये वो उनके परिवार लेकिन. वहां पे एक नियम है कि लड़की जब तक. कुंवारी रहेगी तब तक प्रॉस्टिट्यूशन. करेगी। जिस दिन उसकी शादी हो जाएगी वो. प्रॉस्टिट्यूशन करना छोड़ देगी और जो. प्रॉस्टिट्यूशन करने वाली लड़कियां हैं. उनकी देखभाल करना उनके खानेपीने का इंतजाम.
करना उनके कपड़े लत्तों का उनके मेकअप का. उनकी वेल बीइंग का सारा काम जो है फिर ये. विवाहित महिलाएं करती हैं। वो घर की कमाने. वाली स्त्री होती है। लड़की होती है।. इसलिए उसका ध्यान उसका सब चीजें जो हैं एक. कमाने वाले पुरुष के जैसा किया जाता है।. वहां पर पुरुषों को बहुत वो नहीं है।. हालांकि पुरुष वहां के सब इस कम्युनिटी के. कामचोर और तंबाकू खाने पीने वाले दारू. पीने वाले और इस तरह के ही लोग होते हैं।. वो सिर्फ हां वो खाना पीना और वक्त खराब. करना जुआ खेलना समय खराब करना यही सब.
चीजों में कालांतर में कभी ऐसा हुआ करता. था 8000 साल पहले जब ये. कृषक कम्युनिटी हुआ करती थी। कृषक समाज. होता था। लेकिन जो बाद में धीरे-धीरे इस. चीज में आ गया। जिस कमेटी की मैं बात कर. रहा हूं उनका इतिहास ताजमहल से जुड़ा हुआ. है। ताजमहल जो है जब उसका निर्माण हो रहा. था तो वहां के मजदूर जो है वो बहुत आपस. में लड़ा करते थे। शराब पिया करते थे और. बहुत उत्पात मचाया करते थे। क्योंकि उनके. पास में मनोरंजन का कोई साधन नहीं होता.
था। उनके पास में अपना सेक्सुअल. फ्रस्ट्रेशन निकालने का कोई साधन नहीं. होता था। तो ये जो कम्युनिटी है इनके. लोगों को. बुंदेलखंड के इलाके से उठा के बघेलखंड के. इलाके से उठा के और वहां पे जो ताजमहल के. आसपास के 22 गांव थे उनके बीच-बीच में छह. गांव के अंदर इनको बसाया गया और उन छह. गांव में जैसे एक गांव है तो उस आसपास के. चार छह गांव जो हैं उनके जो लेबर्स होते. थे वो वहां आते थे और वो लड़कियां जो हैं.
वहां पर रात में नाचा करती थी और जब वो. नाचती थी तो वो एक खास किस्म का नृत्य जो. है उसका फॉर्म तैयार हो गया और उस फॉर्म. को बाद में जो है राई नृत्य कहा जाने लग. गया। राई राई और राई नृत्य जो है उस. कहलाने के पीछे एक कहानी यह कही जाती है. कि उस वक्त मैदान में वो नाचा करती थी और. जिस जगह वो नाचती थी उसको वो लोग अखाड़ा. बोलते हैं। हम किती करने वाली जगह को. अखाड़ा कहते हैं। लेकिन यहां पर वो लोग.
उसको अखाड़ा कहते हैं। तो उसमें एक. मृदंगिया होता है जो मृदंग बजाता है। एक. लड़की जो है वो नाचती है। उसमें नियम ये. होता था कि लड़कियां जो है पूरे कपड़े. पहनती थी नीचे से ऊपर तक। इवन उनके जो. अंदर पांव भी जो होते थे वो भी सलवार जो. है टाइट सलवार पहनी हुई होती थी और उनकी. जो चुनरी होती थी वो वक्ष स्थल से भी नीचे. तक आती थी और वो जब नाचती थी और जो फिरन. करती थी जब चकरियां लेती थी उस वक्त में. कभी-कभी थोड़ा सा उसका चेहरा दिख जाता था.
बस उतने में ही लोगों को मजा आ जाता था और. ये जब नाचती थी तो उस समय में दो मशालची. जो है मशाल लेकर के लड़की के आगे-आगे. घूमते थे। सिक्योरिटी सिक्योरिटी नहीं. ताकि उसकी रोशनी में लोगों को नाच देखने. का मौका मिले। और वो जो मशाल होती थी वो. मशाल में जो बना करती थी वो राई के तेल से. और राई की जो खली होती थी वो डाल के बना. करती थी। इसलिए वो नाच राई नाच के रूप में.
कहलाने लगा। दूसरी एक उसके बारे में ये. कहानी कही जाती है कि ये जो राई नृत्य है. वोकि नृत्य जो है वो घूम करके किया जा. जाता है उसके कारण उसका नाम जो है वो राई. पड़ गया इसके ऊपर मैंने एक पूरी की पूरी. किताब लिखी है अगले जन्म बेड़नी ना कीजो. तो ये जो लड़कियां जो नृत्य करती थी या. प्रॉस्टिट्यूशन करती थी जो वो होती थी. उनको बेड़नी कहा जाता था और जो काम छोड़. देती थी जो शादीशुदा हो जाती थी फिर वो.
बेड़नी नहीं कहाती थी। तो यह जो कम्युनिटी. है अब उसके अंदर काफी चेंजेस आ रहे हैं।. उन लोगों ने बहुत सारा मतलब जो है अपनी. जिंदगी में चेंजेस कर ली है। कुछ लोग जो. है अच्छे जॉब में चले गए हैं। कुछ. लड़कियां जो है अच्छे कामों में चली गई. हैं। नौकरियां कर रही हैं। बिजनेस कर रहे. हैं लोग। खेती किसानी भी कर रहे हैं लोग।. लेकिन जो प्राचीन परंपरा है उसके तहत भी. काम चल रहा है। ये आज तक क्यों चल रहा है? आज क्या माइंडसेट होता होगा लोगों का? उस. जमाने में तो मे बी या तो काम नहीं होता.
होगा या फोर्स होता होगा आसपास के लोगों. को फोर्सफुली कुछ करते किसी ना किसी रीजन. से उस जमाने में चालू हो गए जो इतने सालों. पहले हो गए चालू आज क्यों करते हैं दुनिया. का सबसे पुराना और सबसे बड़ा प्रोफेशन. आपको मालूम है क्या है. प्रॉस्टिट्यूशन सबसे. पुराना और आप इसी एक धंधे को कभी खत्म. नहीं कर सकते कहीं से. यूएसए ने भी बैन किया था। लेकिन उसका. कितना नेगेटिव इंपैक्ट उनकी इकोनमी पे आया.
था। सोशल लाइफ पे आया था। वो देखने के बाद. में उन्होंने वो बैन हटाया। हमारे भी देश. में ऑफिशियली बैन है प्रॉस्टिट्यूशन। हम. लेकिन उसको बंद करवाने में हमारा सिस्टम. रुचि नहीं रखता। उसका रीजन यह है कि जो. सेक्सुअल हंगर है उसको वेंट आउट करने के. लिए उस डिमांड को पूरा करने के लिए इनका. होना जरूरी है समाज में। यह माना जाता है।. तो इसलिए उनको छूट दी जाती है कि वह लोग. अपना चुपचाप करते रह। लड़ाई झगड़ा ना.
करें। कोई दंगा फसाद ना करें। बस अपना काम. करें। क्योंकि यदि जो माइग्रेटेड लेबर है, माइग्रेटेड वर्कर्स हैं या कोई और लोग. हैं, सेलर्स. हैं वो लोग अगर उनकी सेक्सुअल हंगर पूरी. नहीं होगी तो वो समाज में आती जाती हर. लड़की हर स्त्री के ऊपर हाथ डालेंगे।. तो उससे बचाने के लिए यह. व्यवस्था एक तरह से आंख मूंद करके जारी. रखी जाती.
है। इसको रोका नहीं. जाता। तो वो तब भी चल रही थी। वो आज भी चल. रही है और अगले हजार 2000 साल या जब तक. पृथ्वी के ऊपर मानव है तब तक ये व्यवस्था. जारी रहेगी। बट सी जिसकी इच्छा हो रही है. खुद करना है इसमें एंटर करना है। दैट्स. देयर चॉइस। मां-बाप कैसे बेचते हैं? वो. कैसे करते हैं वो तो क्योंकि उनकी ब्लड. स्ट्रीम में उनके डीएनए में शामिल हो गया।. उनके माइंडसेट में वो शामिल है ना। ऐसे तो. उन्हें गलत लगता ही नहीं। तो उनको वो गलत.
लगता ही नहीं. है। अब मैं कितनी ही ऐसी लड़कियों से मिला. हूं या कितनी महिलाओं से मिला हूं जो अपनी. बेटियों को करवाती हैं वो काम। उनको दर्द. नहीं होता। हालांकि मैं ऐसी भी स्त्रियों. से मिला हूं जिन्होंने अपनी बेटियों को इस. धंधे में उतरने ही नहीं दिया। उन्होंने. जान भी दी है लेकिन अपनी बेटियों एक तो. महिला से मैं मिला था उज्जैन की थी। उसने. पैदा होते से ही अपनी बेटी को चारप साल तक. तो अपने साथ रखा लेकिन उसके बाद में उसको. हॉस्टल में रख के पढ़ाया सारी. जिंदगी। उसको पता ही नहीं चलने दिया कि.
मैं वैश्या हूं। एक बंदा जो उसके साथ में. था उसने किसी कारण से नाराज होकर के उस. लड़की को उसकी मां की सच्चाई बता दी। बेटी. पर क्या गुजरा होगा आप समझ सकते हैं।. लेकिन जब बेटी को यह महसूस हुआ कि मेरी. मां ने मेरे लिए कितना बड़ा सैक्रिफाइस. किया है तब उस बेटी के मन में कितना गर्व. आया होगा आप यह सोच सकते हैं। और जब मैंने. उन दोनों से मुलाकात की थी और मुझको जब यह. कहानी पता चली थी तो वो कहानी लिखते वक्त.
मेरे मन में क्या भाव आया होगा यह आप सोच. सकते हैं। गैंगस्टर्स की हिस्ट्री में. अंडरवर की हिस्ट्री में कौन से ऐसे अड्डे. थे? कौन से ऐसे बार्स थे जो बहुत रेलेवेंट. थे? जो सारे गैंगस्टर्स और सारे अंडरवर के. लोगों के अड्डे रह चुके हैं। सब मेन बार्स. थे जहां पे सब ये सारी चीजें होती थी। अ. सबसे ज्यादा फेमस कौन से सबसे ज्यादा फेमस. तो मुंबई का जो है टोपास बार. था जिसमें एक वक्त में करीब करीब 700 800. लड़कियां होती थी और एट अ टाइम फ्लोर पे.
200 250 लड़कियां हुआ करती थी। वेरियस. फ्लोर्स पे तीन फ्लोर्स के तीन मंजिल पे. उनका बार चलता था और हर रूम में जो है एट. अ टाइम 10-10 20 लड़कियां होती थी और हर. एक एक दो-द घंटे में लड़कियां पाली बदलती. थी मतलब इस फ्लोर पे नाचने वाली लड़की. जाएगी अपने कपड़े वपड़े जो पसीने में भीग. गए हैं वो जाके बदलती है और फिर दूसरे. किसी फ्लोर पे चले जाती है वहां नाचती है. और अगर कोई दूर यानी कि कोई मुर्गा बकरा. उनके पकड़ में आ गया है उसी फ्लोर पे जो.
उन पे अच्छा पैसा लुटा रहा है तो वापस उसी. फ्लोर पे आती थी कपड़े बदल करके और ज्यादा. सेक्सीी कपड़े पहन करके आ जाती थी और फिर. उसके बाद में उनके साथ वो करती थी और. उसमें अमूमन मुंबई के जितने भी अच्छे डांस. बार हुआ करते थे उसमें दो तरह के रूम्स. होते थे एक कॉमन लोगों के लिए होता था और. एक स्पेशल होता था और एक तीसरा और क्लास. होता था दैट इज प्राइवेट तो प्राइवेट जो. रूम्स होते थे वो छोटे साइज के होते थे. उसमें एक दो ही सोफा लगे होते थे उसमें एक.
दो या चार लोगों के बैठने का अरेंजमेंट. होता और वहां पे उनकी पसंद की लड़की आकर. के डांस करेगी 2 घंटा 4 घंटा 6 घंटा जितना. भी है वहीं उनको ड्रिंक सर्व होंगे और वो. सब होंगे और वहीं पे वो लोग अपना करु करके. और आगे के पीछे के जो भी रास्ते हैं उससे. निकल जाया करते थे। स्पेशल वाली जगह पे. स्पेशल लड़कियां होती थी। नॉर्मल वाली जगह. पे नॉर्मल लड़कियां होती थी। तो वो. लड़कियों का भी अपना एक क्लास होता था और. वो उसके हिसाब से ही वहां डांस करती थी।. मोस्टली जो अंडरवर के लोग होते थे वो अपना.
स्पेशल क्लास में या प्राइवेट उसमें. मुजरों में जाकर के बैठा करते थे। अपना. शाम में रंगीन करते थे। रातें रंगीन करनी. है। रातें रंगीन करते थे। लड़कियों को साथ. ले जाना है लेकर के भी जाया करते थे। बार. मालिक की तो औकात हिम्मत नहीं होती थी कि. रोक ले उनको। तो उनके साथ जाया करती थी।. एक यहां पे यड़ा गोपाल नाम का. एक किलर होता था। गैंगस्टर होता था। पूरा. हमारे वेस्टर्न सबब्स में ऑपरेट करता था. वो। वो साला इतना पागल और बदकार आदमी था.
कि जब उसको बियर पीनी है या कुछ भी उसके. दिमाग में आ जाए तो किसी भी डांस बार में. कहीं घुस जाएगा और वहां से दो-तीन बोतल जो. भी है वो ले लेगा। उसके साथ वाले भी उठा. लेंगे और कोई लड़की पसंद आ गई तो उठा करके. अपने कंधे पर लाद लेगा और लेकर के और निकल. जाएगा। हाथ में उसके पिस्टिस्टल रहती थी. और सबको मालूम था कि ये साला ये यड़ा गोपाल. है पागल आदमी है। उससे कोई भी वो नहीं. करता था क्योंकि आपने मुंह खोला और गोली. मार दी उसने। वो इतना पागल था और वो.
जातेजाते अंदर बाहर में या आते हुए वो. गल्ला जो होता था कैश बॉक्स उसमें हाथ. डालेगा। जितना कैश है वो निकाल करके जेब. में ठूंस लेगा। जेब में नहीं ठूंसेगा तो. वहां पर बाहर में ले जाकर के ऐसे उड़ा. देगा। फेंक देगा। बाहर का ही पैसा। बाहर. का ही पैसा वो सबको बोलेगा लूट लो और बार. का मालिक बेचारा चुप खड़ा हो के मैनेजर. चुप देखेगा हिम्मत नहीं है कि उसको रोक दे. बोल दे तो लड़कियों की सिक्योरिटीज नहीं. होती काहे की सिक्योरिटी है ऐसी चीज में.
वो है लोग उसके साथ में वहां पे बाउंसर. खड़े होते हैं हथियार वाले भी खड़े होते. हैं अब येड़ा गोपाल से कौन उलझेगा बट. यूजुअली ऐसा होता है ना मूवीज में दिखाते. हैं कि जो बार जिनका होता है वो खुद भी. बहुत बड़े गैंगस्टर्स होते हैं या खुद. किसी गैंगस्टर के अंडर में होते हैं खोता. रहे येड़ा गोपाल को फर्क नहीं पड़ता तभी. वो यड़ा गोपाल है। यड़ा का मतलब पागल। ठीक. है ना? यहां मुंबई के स्लैंक्स में तो. उसको फर्क नहीं पड़ता। सोनिया बार एंड. टोपाज़ दीज़ वेर द टू वो है बहुत सारे और.
रहे हैं। मुंबई नहीं यहीं पे लड़ाईयां होती. थी। यहीं पे दाऊद धनिया ऑल ऑफ़ दीज़ पीपल वर. एक्टिंग। काका बार था मलाड में पेनसुला. बार था। एक उधर दादर की तरफ। मैं तो आपको. नाम गिनाऊंगा तो शायद आपका पूरा एक. पडकास्ट बनेगा तीन घंटे का उसमें और वहां. के किस्से सुनाऊंगा तो। मैं तो इस इस. सब्जेक्ट के ऊपर मैंने तो तीन किताबें लिख. मारी। बॉम्बे बार है, बारबंदी है, बारबंदगी है। तीन-तीन मेरी किताबें हैं।. इसी विषय पे हैं। और वो पूरा दुनिया पूरा.
वर्ल्ड एक्सपोज किया है मैंने उसके अंदर।. तो एक बार उस पे भी बैठेंगे। एनी टाइम यू. आर मोस्ट वेलकम। आप मिले हो किसी क्रिमिनल. से? बहुतों से मिला। अरुण गबली से मैं कई. बार मिला। उनके घर जाकर के। क्या. एक्सपीरियंस होता है? कैसे मिलते हो? क्या. होता है? सिक्योरिटी कैसी होती है? मिलते. कैसे हो? तो मीटिंग्स कैसे अरेंज होती है? कैसे होता है? ये तो देखिए क्या होता है. ना कि आपके रिलेशनशिप पे पहली बात तो. डिपेंड करती है। अभी अ कोई ना कोई एक. जरिया बनता है और उनके थ्रू हम इन लोगों. तक पहुंच पाते हैं। तो जैसे अरुण गवली तक.
अगर मुझे पहुंचना है तो मुझे मालूम है कि. एक्स पर्सन जो है मुझे वहां पहुंचाएगा। तो. अरुण गवली का एक बहुत ही. खास जो कहना चाहिए कि व्यक्ति था और उससे. उम्र में बड़े थे वो उसको चाचा बोला करता. था काका बोलता था और वो मुझे बहुत पसंद. करते थे उसके दो कारण थे एक तो मैं बहुत. ही अप्रट सीधा बोलने वाला व्यक्ति रहा. हमेशा से उस उम्र में भी वैसे ही था और. दूसरा ये था कि उनको बहुत अच्छे मतलब इसके.
चरस गांजे का बड़ा शौक था तो मैं बाज दफा. जो है उनके लिए जब जब भी मिलना होता था या. कभी भी ऐसे रास्ते चलते भी तो मैं दगड़ी. चाल की तरफ से अगर निकलता विकलता था तो. उनके लिए चरस गांजा ले जाया करता था उस. समय में 10 20 में गोली मिल जाती थी हम. बहुत सस्ती होती थी. और मतलब वो उनको ऐसी दे देता था तो वो. बोलते थे कि यार तुझे इतना अच्छा माल किधर. से मिलता है मैं बोलता था कि ये अब पूछ के. क्या करोगे आपको मिल रहा है मजे करो और.
बड़ा खुश होते थे कभी मिलना है तो उनको. बोल दिया फोन करके कि काका मुझे आज मिलना. है तो बोले हां आजा आजा बेटा मैं तेरे को. मिलवा देता हूं चले जाते थे मिलते थे अब. उसमें यह होता था कि जब दगड़ी चाल का जो. आज दरवाजा खुला रहता है मेन गेट वो तब. खुला नहीं होता था उसमें बहुत बड़ा स्टील. का गेट है उसमें एक छोटा दरवाजा होता है. जैसे कि आप फिल्मों में जेल का दरवाजा. खुलते हुए देखते हैं हीरो अंदर जाता है. बाहर आता है टाइप का सा वैसा तो आप उससे. अंदर जाते हैं सिर झुका करके बाकायदा तो.
वहां जाते से ही आपकी पहली तलाशी होगी पता. किया जाएगा कौन हो क्या हो तो आप काका के. साथ हैं तो आपको कोई बहुत ज्यादा रोकेगा. बोदर नहीं होगा लेकिन फिर भी जामा तलाशी. होगी। दूसरी जो है वह मंदिर के पहले एक. दरवाजा था अंदर एक शिव मंदिर है उसके पहले. वो बंद रहता था। उसको खुलवाया जाता था।. फिर वहां आपको एक बार चेक करते थे। फिर. उसके बाद में जो बिल्डिंग है उस बिल्डिंग. का दरवाजा बंद रहता था। वह खुलता था। फिर. आप ऊपर जा सकते थे। तो ऊपर जाने के पहले.
आपको नीचे ही एक बैठक होती थी। उस बैठक. में आपको बैठा दिया जाता था। और वहां पर. थोड़ी देर आपको एक कूलिंग पीरियड दिया. जाता था। वहां पर आपको सीसीटीवी से उनके. एक दो लोग जो है वॉच करते थे। ऑब्जर्व. करते थे कि यह बंदा कर क्या रहा है? रेस्टलेस है नहीं है क्या है क्या नहीं. है। फिर उसके बाद 5 10 मिनट 15 मिनट आधा. घंटा एक घंटे बाद में ऊपर बुलाओ आएगा। ऊपर. जाने के पहले जो सीढ़ियां हैं वहां पे. दरवाजा बंद होता था। वहां पे फिर चेक होता. था। ऊपर पहुंचने के बाद में अंदर दरवाजे.
फिर से एक तालाब लगा हुआ है। फिर वो. खुलेगा फिर आप अंदर जाएंगे। तो ऐसे पांच. छह दरवाजे होते थे। सेम इसी तरह की चीजें. जो हैं वो हुसैन वस्त्रा के यहां भी थी जो. कि अपने वक्त का एक गैंगस्टर ही था। लेकिन. बाद में वो अच्छा बड़ा ये बना था। क्या. बोलते हैं? पुलिस इनफॉर्मर बन गया था।. उसके यहां भी सेम इसी तरह की प्रोसेस हुआ. करती थी।. तो उनके यहां आप जाएंगे तो फिर उसके बाद. में वहां पहुंचने के बाद में सब चीजें. नॉर्मल है। पसीना गुलाब है। वहां पे फिर.
आप बैठे हैं बात कर रहे हैं। बड़े. इत्मीनान से सब चर्चा होगी। क्या है क्या. नहीं है? चाय कॉफी पूछेंगे। खाने का वक्त. है तो आपसे खाना पूछेंगे। पूरी मेहमान. नवाजी पूरी खातिरदारी करेंगे वो लोग और आप. इंकार करेंगे तो हो सकता है कि वो थोड़ा. सा नाराज भी हो कि अरे क्या आप आते हैं? हमारे यहां कुछ खाते पीते नहीं है। आप. बोलेंगे कि नहीं नहीं मैं तो खा पी करके. निकला हूं। अब तो पेट में जगह नहीं है तो. पर चाय तो पीनी पड़ेगी टाइप का हो जाता. है। आपको अगर मन है पीजिए नहीं मन है मत. पीजिए जो भी है एक फिर वो रिलेशन मेंटेन.
कर सकते हैं आप तो कीजिए बढ़ता है तो. बढ़ाइए नहीं बढ़ता है वो सामने से नहीं. बढ़ाना चाहते हैं वो अलग मुद्दा है अगर वो. चीज हो जाती है और आपको लगता है कि इस. रिलेशन से मुझे आगे मेरी न्यूज़ करने में. फायदा होगा तो आप उसको आगे कंटिन्यू करते. हैं नहीं तो नहीं करते हैं। कितने लोग. होते हैं नीचे से लेके ऊपर आप जब अरुण. गवली तक मिले पांच छह तो आपकी चेकिंग हुई. एट कितने लोगों ने एट अ टाइम राज मेरा. ख्याल है कि उनके यहां पर उस जमाने में जब. अंडरवर पीक पर. था. 90ज तक कह लीजिए.
या 2002 या फाइव तक तब तक जो है उनके यहां. पर एट अ टाइम अंदर जाने वाने तक 100 से. 150 लोग हुआ करते थे और अमूमन असलाह धारी. होते थे लेकिन ऊपर असला नहीं रखा जाता था।. सब असल अंदर होते थे। हथियार अंदर होते. थे। सामने लेकर के कोई जैसा फिल्मों में. दिखाते हैं कि ऐसे बड़ी-बड़ी बंदूक है, पिस्तल है वो लेकर ऐसा कुछ नहीं होता है।. अंडरवर अंडरवर्ड की तरह से ऑपरेट करता है।. हर चीज दबी छुपी होती है। आंखों की और हर.
तरह की शर्म और वो मेंटेन की जाती है।. छुपाना छुपना वो सब। क्योंकि इन बेचारे. फिल्मी लेखकों को तो क्या पता है कि. अंडरवर्ड क्या होता है। वह तो कभी गए ही. नहीं ना किसी डॉन से मिलने या और जब किसी. को बुलाया है उनसे मिले हैं तो वो तो अपना. भोकाल बना के मिलते हैं। तो उनको तो लगता. है ये सच है। अरे सच्चाई हमसे पूछिए हम. बताएंगे आपको। वो सच नहीं है जो दिखता है।. और वो सारा सच नहीं है जो दिखता है। कुछ. ही सच होता है उसमें से। हम आप बात कर रहे.
हो ड्रेडेड लोगों की।. आपसे बात करते-करते पहले इससे जब हम. रिसर्च कर रहे थे हमें फिरोज कोकर्णी के. बारे में पता चला। तो फिरोज कोकणी को. किलिंग मशीन क्यों बुला जाता है? मैं जब. उससे मिला था मुंबई पुलिस की लॉकअप में. क्राइम ब्रांच के उसको बोर से अरेस्ट करके. लाए थे। उसके बाद में एक इंटरव्यू करने का. मुझे मौका मिल गया था। तो मैंने उससे पूछा. था कि इनको मार करके तुम्हें लोगों को. क्या मिलता है? बोले भाई मैं नहीं मारेगा. तो कोई और.
मारेगा। मैंने कहा अगर आप डिनाई कर दोगे. तो जरूरी नहीं है कि ना वो मरेगा। हम बोले. भाई यह धंधा है इसमें इंकार नहीं कर सकते. मना नहीं कर सकते अगर मैं मना करूंगा तो. पहले मैं. मरूंगा और दूसरा चीज मैं अगर यह काम नहीं. करेगा तो मैं खाएगा क्या मुझे तो यही करना. आता है मैंने कहा अरे कोई बकरा या मुर्गा. थोड़ी है कि तूने मार दिया और खा लिया. उसको इंसान का बच्चा है यार उसकी भी कोई. बोले वो वो लोग समझेंगे मुझको तो भाई से.
आर्डर आया मुझको पैसा मिलेगा मैं काम. करूंगा यही मेरा जॉब है यह मेरा काम. मुझे बड़ा अचरज होता था कि मतलब यह आदमी. ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन बातचीत करते. करते मुझे एक ऐसी चीज निकल कर के आई जिसने. कि मतलब मेरे होश फाख्ता कर. दिए। उसने बोला कि जब मैं किसी को मारता. हूं तो मुझे ऐसा लगता है मैं किसी औरत के. साथ सोया है। सेक्स किया या मैं इतना मजा.
आता है। हां। और तब मुझे फॉरेंसिक. साइकोलॉजी की उस टर्म के बारे में खटाक से. याद आया कि द पर्सन हु किल समवन फॉर अ. सेक्सुअल प्लेजर इज कॉल्ड साइको सेक्स. किलर एंड ही इज अ साइकोसेक्स किलर हु इज. जस्ट सिंग नेक्स्ट टू. मी मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।. मैंने कहा चलो भाई कल की तो लीड मिल गई. इससे बढ़िया। पर वो खैर डीसीपी क्राइम जो. थे उन्होंने मुझे कहा कि नहीं विवेक ये.
चीज मत छापना वरना यह खुद को. साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर का शिकार बता करके. और जेल से असाम चला जाएगा और फिर वहां से. किसी दो चार को मारमूर करके भाग जाएगा।. फिर उसको पकड़ना मुश्किल हो जाएगा।. तो समाज की बेहतरी के लिए और कानून. व्यवस्था जो है उसका सम्मान करते हुए हमने. वो खबर रोक ली थी। तो वह जिस तरीके से काम. करता था और मैंने उनसे ऑफिसर से यह कहा था. कि यह असाइलम में जाए ना जाए थोड़े दिन. में यह आपके दो चार छह मार करके यूं भी.
भागने ही वाला है और हुआ भी वैसा ही वो एक. दिन उस इसके नाम से बहाने से बीमार होने. के आर्थर रोड जेल से जो है वहां पहुंचा जे. अस्पताल और उसकी पूरी प्लानिंग की हुई थी. एक बकर आया उसको लेने के लिए उसने पिस्तल. से दोनों जो उसके साथ एस्कॉट्स थे गार्ड. उनको गोली मारी बकर के साथ बैठ के भाग. निकला उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला. और उसके बाद में आखिरी खबर जो है चारप साल.
पहले हमारे पास ये आई थी कि उसको दाऊद ने. कराची बुला लिया और फिर बाद में वहीं पर. उसका पोटला हो गया यानी कि उसका मर्डर हो. गया. आज ये सब इतना आसान नहीं है ना आसान तो आज. भी है क्या कि दो लोग बाइक पे आएंगे पुलिस. को मार देंगे निकल जाएंगे बच जाएंगे कहां. नहीं होता यह. हर जगह होता है। पुलिस को थोड़ी मार सकता।. अरे सबको सब मारते हैं भाई। पुलिस-लिस. वाले मैं आपको एक चीज बताता हूं। ये.
दुनिया का उसूल है पूरे वर्ल्ड में ये चीज. चलता है कि जब पहली गोली चलती है ना और. जिसकी तरफ चलती है वो और उसके सारे लोगों. की फट के गले में आ जाती है।. मतलब मतलब हवा गुल हो जाती है उनकी। कि. अगर सामने से मेरी तरफ गोली आई तो हम सब. हां और वो सब पहले भागते हैं। पुलिस वालों. को हथियार छोड़ के भागते हुए देखा है. मैंने। ऐसा मत बोलिए। 2611 में हमारा एक. बड़ा ही बेहतरीन इंस्पेक्टर जीआरपी का वो.
पुलिस वालों की मूर्खता के कारण ही मारा. गया। वो तब तक ऑफ ड्यूटी हो चुका था।. लेकिन जब कसाब और उसका साथी जो है वीटी पे. अटैक कर रहे थे। उसको जब यह समझ में आया. तो दो कास्टेबल्स को उसने कहा कि तुम लोग. यहां खड़े होकर के अपनी राइफल से उसकी तरफ. गोली चलाते रहना शिंद ने और ये लोग. गोलियां चलाना छोड़ के पट्ठे राइफल ले. लेकर भाग निकले और ये जब तक अपनी पिस्तल. कोच से लेकर के आया तब तक ये लोग उस जगह.
पे आ गए थे जहां से इसको उन पर अटैक करना. था और इन्होंने इसको छेद दिया हमला कर. दिया तो मतलब कितने ही ऐसे किस्से हैं. जो पहली गोली चलाता है अमूमन जीतता वही. है। बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जिनको वो. ट्रेनिंग होती है और उस ट्रेनिंग के कारण. वो लोग इनको मार गिराते हैं क्रिमिनल्स. को। जैसे एसएफ. हां मतलब हमारी जैसे एफ1 है फोर्स वन है।.
उनके ऑफिसर्स को अच्छी ट्रेनिंग दी जा रही. है। हमारे एसएफ स्पेशल फोर्सेस ऑलमोस्ट. सबको स्पेशल फर्सेस तो स्पेशल फोर्सेस है. ना भाई। दे आर बैंड ऑफ किलर्स। उनको तो. ट्रेंड किया है ना क्योंकि उनको तो. दुश्मनों को मारना है और किसी भी स्थिति. में मारना है। वो तो मतलब वो लोग हैं. जिनको कि. मैं पृथ्वी के ऊपर खुदा कह दूं तो कम. है। पांचप दिनों तक एक ही जगह पे खड़े रह. के अपनी स्नाइपर से टकटकी लगा के देखते.
रहना, वहीं पे खाना, वहीं पे अपने नेचुरल. कॉल्स क्लियर करना और वो सब वो पूरा करते. हैं वो लोग। और उसके बाद में वो लोग वो. एक्टिविटी करते हैं जिसके लिए उन्हें भेजा. है और जब तक काम पूरा नहीं तब तक हिलना. नहीं ये उनका मूल मंत्र होता है। तो वो जो. काम है वो अलग है। आप एसएफ को और अंडरवर. के या पुलिस वालों को उनसे कंपेयर कर ही. नहीं सकता। कर नहीं रहा हूं। मैं कंपेयर. में बता रहा हूं कि वो लोग होते हैं कि.
जहां पे उनको कोई गोलीवली से फर्क नहीं. पड़ता। नहीं नहीं आर्मी के लोगों को भी. नहीं पड़ता। अरे यार किसी की भी गोली चले. ये तो फोड़ के आएंगे ही आएंगे। हां. क्योंकि आर्मी के बंदे को इतनी ट्रेनिंग. मिलती है। वो डेली ट्रेनिंग में होता है।. वो डेली मतलब जो है या हफ्ते में उन लोगों. की अपनी प्रैक्टिस होती है। शूटिंग. प्रैक्टिस चलती हैं। मुझे मालूम है ना कि. वो शूटिंग प्रैक्टिससेस कैसे होती हैं। एक. वक्त रहा है मैंने भी एक-एक दिन के अंदर. पूरा-पूरा एक बॉक्स जो है वो. 7.62 एसएलआर से मैंने फायरिंग की हुई है।.
एक दिन में एक बॉक्स जिसमें सात बेंडोलियर. होते हैं। आप सोच सकते हैं कि हमारे. शोल्डर जो है यहां से फट जाते थे। उससे. खून आ जाता था पहले या दूसरे दिन ही। तो. हम पैडिंग करके और प्रैक्टिस करते थे। तो. मुझे पता है कि उन लोगों की ट्रेनिंग. कितनी सख्त और कितनी बेहतरीन होती. है। हथियार और आदमी दोनों दो जिस्म एक जान. हो जाते हैं। फिर वहां तो वो आदमी आगे.
बढ़कर के गोली मारने का मादा रखता है। आके. सामने पत्थर पे गोली लगी है। लेकिन खड़ा. हो के साला फिर भी ठोकेगा। वो होता है. जवान। वो होता है एसएफ ऑफिसर। इन लोगों को. तो बेचारों को साल में या दो साल में एक. बार पांच राउंड चलवाते हैं।. क्या मतलब यह पुलिस वाला बेचारा हथियार. चलाएगा? मुश्किल यह है ना? तो पुलिस. वर्सेस माफिया में पुलिस कहीं स्टैंड नहीं. करती। जितना किया है जो किया है वो जो बैच.
ऑफ 83 जो कहा जाता है और जिसने मतलब ये. किलिंग्स की है ये सब वो सब हैं। वो सारी. की सारी तो फेक एनकाउंटर्स हैं। मुश्किल. से उसमें चार या छह ऐसे एनकाउंटर हैं. जिनको कि मैं ओरिजिनल एनकाउंटर गिन पाता. हूं। बाकी तो सब फेक रहे हैं। फेक मतलब के. फेक मतलब पकड़ के लाए और. मारा। कितने केस हैं? कितने केसेस के ऊपर. गलत लोगों को तो नहीं मारा ना? भाई सही को. मारा। लेकिन है तो फेक ही ना। बहादुरी तो. नहीं है ना उसमें? क्या बहादुरी नहीं है?
क्यों नहीं है? ये तो लोग लाए पकड़ के. लेके आए। स्ट्रेटजी से और स्ट्रेटजी. स्ट्रेटजी से पकड़ के लाना। स्ट्रेटजी से. पकड़ के लाना। मारना बंधे हुए आदमी को. मारना बहादुरी नहीं है। जो गलत आदमी है जो. गलत काम कर रहा है जो लाखों लोगों को. बर्बाद कर रहा है उसको मारना क्यों नहीं. है? वो बहादुरी नहीं है। वो काम है। हां. तो काम क्या ना काम है वो बहादुरी नहीं. है। बहादुरी देखिए मैं आपको लुधला लाड नाम. की एक इंस्पेक्टर थी सब इंस्पेक्टर।. उन्होंने एक एनकाउंटर किया था। वो रियल.
टाइम था। वो बहादुरी थी। सड़क पे दौड़. करके उसका पीछा करके गोली मारी। बट अगर आप. स्मार्टनेस से पकड़ के मार सकते हो तो. क्यों वो स्मार्टनेस नहीं है भाई जोश में. होश क्यों खोना जब स्मार्टनेस से आप इज्जत. से वो स्मार्टनेस नहीं है राज मेरी बात. समझने की कोशिश कीजिए वो या तो गैंगस्टर्स. के लिए आप काम कर रहे हो सुपारी लेकर के. दूसरे गैंग के लोगों को मार रहे हो जो. एलिगेशंस हमेशा से लगते आए हैं हमारे फेक. एनकाउंटर करने वाले सो कॉल्ड एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट के ऊपर या फिर आपने अपनी ही.
सनक के लिए किया है कि मुझे नंबर बढ़ाने. हैं आप भी एक साइको किलर से कम नहीं हूं।. आप सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हो। सिर्फ. मैं मैं उसको बहादुरी नहीं मानता। मैं. बहादुरी तब मानता जब आप उन उनका पीछा करके. जिस तरीके से इसको मारा था. आपके मुन्ना शुक्ला को एसटीएफ ने। वो. बहादुरी थी।. सामने गाड़ी में है। उसके सामने उसके पास. में AK 576 जो है वह भरी हुई है। उसके पास.
में और भी असला है। उसको गाड़ी में दौड़ा. करके इन लोगों ने घेर करके मारा।. यूपी एसटीएफ ने। यूपी एसटीएफ फॉर्म ही. उसको मारने के लिए की गई थी।. उनकी कहानी, उनका किस्सा आप पढ़ेंगे, सुनेंगे तो आप बोलेंगे कि इसको बहादुरी. कहते. हैं। और जो उन लोगों ने पेन लिया उसको. खोजने के लिए तब तो मोबाइल बिल्कुल नए-नए. आए थे। पूरे उत्तर प्रदेश में गिन चुन के. एक दो सिटीज के अंदर मोबाइल नेटवर्क मिलते.
थे। और वो मोबाइल यूज़ करता था। उसको लगता. था कि मुझे ट्रैक नहीं कर सकते। इनको पता. चल गया था कि मोबाइल के जरिए हम ट्रैक कर. सकते हैं। और उसका पीछा करते थे ये। और. जिस जगह जाता था वहां पहुंच जाते थे। उसको. बहुत बाद में समझ में आया कि मोबाइल से. मुझे पीछा किया जा रहा है। अब आपकी रिसर्च. में एक और चीज के बारे में बात करते हो वो. है हाईवे माफिया। अच्छा क्या होता है. हाईवे. माफिया? मैं पहली बार सुना है ये वर्ड।. लोगों को पता ही नहीं है कि हाईवे माफिया. क्या होता है।.
हम हाईवेज पे रोजाना ट्रेवल करते हैं। हम. कभी किसी क्राइम में नहीं फंसते। हां. लेकिन हां कुछ इलाके हैं जहां पर लोग. हाईवे क्राइम्स में फंसते हैं। जैसे उत्तर. प्रदेश में एक पर्टिकुलर इलाका है वहां पर. एक्सेल गैंग काम करता है। कौन सा इलाका. है? अ मैं अभी ठीक से याद नहीं कर पा रहा. हूं। मैं याद आएगा तो बीच में बताता हूं।. तो वह एक या दो पर्टिकुलर हाईवेज़ हैं।. उन्हीं के ऊपर वह लोग ऑपरेट करते हैं।. उनकी मॉडल सॉफ्टी यह है कि वह रात के समय.
में किसी ऐसी जगह पे पेड़ों के पीछे या. छोटे टीलेवी होते हैं उनके पीछे छुप के. खड़े रहते हैं। और जैसे ही तेज रफ्तार कार. आती है उसके ऊपर कारों के जो एक्सेल होते. हैं वो फेंक करके विंड शील्ड पे मारते हैं. फ्रंट विंड शील्ड पे। क्या मारते हैं? एक्सेल। एक्सेल क्या होता है? एक्सेल एक. पुरजा होता है लोहे का। पाना जैसा। पाना. नहीं होता है। वो आपकी मोटर और इसके बीच. में रहता है और वो आपकी उसको मूव करने का. काम करता है। दैट इज कॉल्ड एक्सेल।. उसमें दते बने हुए होते हैं। ओके? और बहुत.
वजनी होता है और वो उसका सबसे मजबूत पार्ट. होता है और सबसे वजनदार पार्ट होता है।. हालांकि उस साइज में छोटे बड़े होते हैं।. तो वो करीब इतना बड़ा एक्सेल उसका होता. है। ऐसे 1 1/2 फुट का। ये ऐसा दिखाओ।. हां। इस तरीके से होता है। ओके। यह कार. एक्सेल ही है। अब यह जो कार एक्सेल है अगर. आप फेंक करके मारेंगे किसी पे तो वो विंड. शील्ड को तुरंत चकना शुरू कर देगा और अगर. शटर प्रूफ है तो पूरी शटर हो के और कार के.
बाहर दिखना बंद हो जाएगा। तो आपको कार. मजबूरी में रोकनी पड़ती है। यह पूरा का. पूरा गैंग उसी समय चार्ज करता है। सारे. लोगों को अपने कंट्रोल में करता है। उनके. सारे पैसे जेवर ये वो सब मोबाइल फोन ये सब. लूट लेता. है। उसके गैंग के लोग इतने ब्रूटल भी हैं. कि कई बार उन्होंने सारे के सारे परिवार. को मर्डर भी किया है। कई बार यह हुआ है कि. छोटी बच्ची 7 आठ साल की उसको परिवार के. सामने उन्होंने रेप भी किया. है। ये तो लेकिन हाईवे रॉबरी का एक छोटा.
सा उदाहरण है। लेकिन ये गैंग जो है इसको. मैं पूरा माफिया नहीं बोलूंगा। हाईवे. माफिया में तीन गैंग है ये। एक है कबूतर. गैंग जो झाबुआ, अलीराजपुर और उसके आसपास. के आदिवासियों का है। क्योंकि वो कबूतर. गैंग इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो लोग एक. दूसरे से कम्युनिकेट करने के लिए कबूतर. जिस तरीके से गुटुरगु करता है वैसे वो. बोलते हैं और एक दूसरे से कम्युनिकेट करते. हैं कबूतर की बोली में। उसकी आवाज में. इसलिए इनको कबूतर गैंग बोलते हैं। दूसरा.
एक गैंग है जो कि एक पर्टिकुलर कम्युनिटी. का है जो देवास, मंदसौर और उसके आसपास के. इलाकों में पाई जाती है और वो कम्युनिटी. जो है वो बड़ी ट्रेडेड कम्युनिटी है और वो. रोड रॉबरीज करने में मास्टर है। क्या नाम. है उनका? नाम आप यूज ना करें तो अच्छा होगा क्योंकि. वह. डीनोटिफाइड ग्रुप है और उसका इस्तेमाल. करने से हो सकता है कि वो कंटेंट ऑफ कोर्ट. या उसका सिलसिला बन जाए। इसलिए आप उसका. नाम इस्तेमाल देवास के साइड में देवास और.
उसके आसपास की कम्युनिटी है ये। मैं जहां. जानबूझ के जहां पे आपको आगे प्रॉब्लम आ. सकती है वो नाम नहीं ले रहा हूं। तो वो एक. कम्युनिटी है। और तीसरी एक गैंग है दैट इज. कॉल्ड सरदार गैंग। यह पंजाब के सिखों की. गैंग है और यह. खिस्तान का जो बब्बर खालसा और केएलएफ है. खाली लिबरेशन फोर्स उसके टेररिस्ट की गैंग. है ये। इसका काम है हाईवेज के ऊपर ये.
तीनों ही गैंग जो है ये एक ही मॉडल ऑपरडी. में काम करती हैं। हाईवे पे चलने वाले जो. हाई वैल्यू हाई नेटवर्थ ट्रक्स होते हैं. टैंकर्स होते हैं उनको लूटते हैं ये लोग।. उनका जो माल है यह मार्केट में 30 से लेकर. 50सदी कम कीमत के ऊपर बेच देते हैं. रिसीवर्स को। रिसीवर्स उनको हैंड कैश देते. हैं और उसके बाद रिसीवर वो जो माल है वो. आगे 5 10% 20% के प्रॉफिट पे बेच देते. हैं। और फिर वो इस तरीके से काम इन लोगों. का चलता है। और पहले तो ये लोग सिर्फ ट्रक.
में से माल लूट करके बेचते थे। आजकल ये. लोग पूरा का पूरा ट्रक भी बेच देते हैं।. माल अलग को बेचते हैं। ट्रक किसी और को. बेच देते हैं। ट्रक डिस्मेंटल हो करके. उसका पुरजा पुर्जा फिर जो है वो बिक जाता. है। तो आपका 30 लाख, 50 लाख, 20 लाख, 22. लाख का जो ट्रक होता है वो 10, 12, 15 लाख. उसकी भी कीमत वसूल हो जाती है। तो वो भी. होता है। ये जो है करीब-करीब 90,000 करोड़. के आसपास 80,900 करोड़ साल का टर्नओवर इस. हाईवे माफिया का है। ये तीन गैंग्स का.
मिलाकर. के इतना बड़ा इन लोगों का काम है। अब आप. बोलेंगे कि इतना पैसा कहां से आएगा? क्यों. आएगा? आईटीसी की जो सिगरेट्स का एक ट्रक होता है. उसकी वैल्यू करीब-करीब 8.5 करोड़ से लेकर. के ₹25 करोड़ तक की होती है। एक ट्रक लूट. लेने के बाद में 25 करोड़ का ट्रक जो है. उसकी मार्केट वैल्यू ₹25 करोड़ है। और. जैसे ही वह मार्केट में पहुंचता है ₹25.
करोड़ के सामने 12-15 करोड़ इनको मिल जाते. हैं कैश।. डिब्बा जो होता है यानी रिसीवर वो उसको. ऊपर अपने एक करोड़ रख के और थोक वालों को. दे देता है। थोक वाले उसके ऊपर 10 5% का. फायदा ले के रिटेलर्स को दे देते हैं और. ये पूरा काम एक हफ्ते में 5 दिन तीन दिन. में हो जाता है। तो ये जो सिगरेट निकली है. ये सिगरेट छोटे-छोटे पान की दुकानों पे. बिक जाती. है। मोबाइल फ़ आपका वन ऑफ़ द बेस्ट क्वालिटी.
जो फ़स हैं वह से लेकर के और छोटी लेवल तक. के फोन जो हैं वो आज सस्ते से सस्ता फोन. 2000 का है। ₹8000 का है और महंगे फोन जो. है दोाई लाख तक के हैं। अगर एक ट्रक. iPhone का 20 फीट कंटेनर लूटा जाता है तो. वह करीब-करीब 20 से 25 करोड़ का होता है. और मार्केट में वह तुरंत बिकता है।. ऐसे ट्रक्स लूटे जाते हैं, डाई लूटी जाती.
है, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स लूटे जाते हैं।. मेडिसिन जो होती है फार्मासटिकल यूज़ के. लिए जो 10- 5000 किलो से लेकर के 5 ₹1 लाख. किलो तक की होती है वो लूटी जाती है और. मार्केट में बेची जाती है। ये सारा काम जो. है ये तीनों गैंग मिलके करते हैं अलग-अलग. अपने-अपने इतिहास में। और ये इनमें से जो. ये खिस्तान गैंग जो जिसकी मैं बात कर रहा. हूं जिसके ऊपर हमने पूरी की पूरी ये किताब. लिखी हुई है हाईवे माफिया के नाम से ही इस.
किताब में हमने पूरा ये गैंग के मॉडल. ऑपरेंडी उनके काम करने के तरीके उनके. पास्ट जो ऑपरेशंस हैं वो और उनके. फोटोग्राफ्स तक हमने छापे हैं। मेरे पास. में करीब-करीब इस गैंग्स के 450 से ज्यादा. फोटोग्राफ्स हैं जो कि मैंने 17 18 साल. के हां रिसर्च में कलेक्ट किए हैं। उसमें. से हमने कुछ ही छापे हैं।. तो यह पूरी किताब जो है एक तरह से एक. बाइबल और एक गीता है हमारे एजेंसीज के.
लिए। अगर वो किताब हर डेस्क पे मौजूद हो. हर थाने की तो उनको पता रहेगा कि हां भैया. ये कांड ऐसे होता है। ये लोग इसमें. इन्वॉल्व हैं। अच्छा ये चेहरे इसमें. इन्वॉल्व हैं। तो इन इन लोगों को हमने. एक्सपोज किया उस किताब के जरिए और मैंने. पूरी की पूरी ये जो इन्वेस्टिगेशन की है. एक बहुत ही अच्छे इन्वेस्टिगेटर हैं राकेश. धानी उनके साथ मिलके की है। वो मेरे उस. किताब में को ऑथर हैं। कोराइटर हैं। तो यह. जो हाईवे माफिया है इन्होंने बहुत सारे.
हमारे जो ड्राइवर और क्लीनर्स हैं इन. लोगों के मर्डर भी किए हैं। कई बार. ड्राइवर क्लीनर्स को ये लोग ले जा के सीधे. जंगल में या कहीं पे उतारते नहीं है बल्कि. उनका मर्डर करके और उनको फेंक देते हैं. डेड बॉडीज। उनके सारे कपड़े-वपड़े ये वो. सब स्ट्रिप कर लेते हैं, निकाल लेते हैं. उनके जूते, चप्पल हर चीज और अगर कोई सिख. है तो उसकी पगड़ी वगड़ी भी उतार लेते हैं. और उनको जंगल में ऐसी जगह ले जा के फेंकते. हैं कि उनकी डेड बॉडी भी ना मिले या. पहाड़ों से नीचे तराई में फेंक देते हैं।. ऐसा बहुत हुआ है।.
तो जब अगर आपको यह पता है और यह इतना बड़ा. फैक्ट है तो पुलिस क्यों नहीं पकड़ लेती. है? पुलिस कोशिश करती है पकड़ने की लेकिन. यह लोग बहुत तेजी से अपनी जगह बदलते हैं, इलाके बदलते हैं।. अब मुंबई में पर अगर आईटीc जैसी कंपनी है. iPhone जैसी Apple जैसी कंपनी है इनकी. चीजें अगर चुराई जा रही है इनके ड्रग्स 20. 25 करोड़ के चुराए जा रहे हैं तो ये तो. रातोंरात सिस्टम हिला देंगी नहीं हिलाते. हैं क्यों उसका कारण ये है रेपुटेशन डैमेज. नॉट. रेपुटेशन उनका कंसाइनमेंट ये है क्या.
बोलते हैं इंश्यर्ड. है उनका एक आदमी जाता है पुलिस थाने में. सर मेरा माल चोरी हो गया ये पकड़िए ₹5000. मेरी शिकायत लिख दीजिए एफआईआर बना दीजिए. एफआईआर की कॉपी लेते हैं, लेकर के जाते. हैं। इंश्योरेंस क्लेम करते हैं। अपने घर. जाते हैं। बेचारा एक आदमी दो आदमी जान से. गया उनको परवाह नहीं। उन्होंने तो अपना. क्लेम सेटल कर लिया। एजेंसियां भी आराम से. क्लेम दे देती हैं। बहुत कम ऐसी एजेंसीज. हैं जो कि इनके पीछे लगती हैं या बहुत कम. लोग हैं जो एजेंसीज ये इनके पीछे लगते.
हैं। तो इंश्योरेंस कंपनी को ₹25 करोड़ हर. थोड़े दिन में देना पड़ रहा है। वो नहीं. इसके पीछे उनको फर्क नहीं पड़ता ना। साल. का अगर ₹00 करोड़ का बिजनेस मिल रहा है और. उससे अगर उनको ₹1000 करोड़ देना पड़ा तो. 49000 करोड़ की प्रॉफिट हुई। सारा जो आपका. खेल है ये इंश्योरेंस का इंश्योरेंस का वो. यही है। तो वो 1000 करोड़ बांटते हैं आराम. से। पर किसी को कोई मतलब नहीं है इससे।. किसी को मतलब नहीं है। ना पुलिस वाले को. भी नहीं है। किसी को नहीं है। बहुत ही कम. ऐसे लोग होते हैं। एक रोडवेज कंपनी का.
मालिक था। उसका एक ट्रक चोरी हो गया था।. उसने बोला कि जितने का माल चोरी गया है और. जितने की मेरी तकलीफ हुई है वो सब एक तरफ. रह. गई। इसको पकड़वाओ।. मेरी इज्जत का सवाल है। उसने पानी की तरह. पैसा बहाया और उन लोगों को पकड़वाया और. उनको प्रोसक्यूट करवाया। ऐसे लोग बिरले. होते हैं। बहुत कम होते हैं। हमने उसकी. कहानी भी दास्तान नहीं छापी है। बट वो एक. ऐसा तैसे हजारों लोग लगेंगे। हर आदमी. करेगा तो फिर वो क्राइम ही नहीं होगा ना।. फिर तो पुलिस के पीछे पड़े। उन्होंने.
प्राइवेट डिटेक्टिव को हायर किया। उनके. जरिए वो पीछे पड़ के और उन्होंने काम किया. वो। मैं दूसरे की बात नहीं करूंगा। राकेश. दानी ने वो चीज क्रैक करके. दी तो पुलिस को कोई फर्क नहीं पड़ रहा. इतने उनको क्या फर्क पड़ता है सामने वाला. आदमी तो आके प्रेस नहीं कर रहा है ना आपको. प्रेशर नहीं कर रहा है कि भैया मेरा ये. कंसाइनमेंट आप बरामद करवा के दो उसको तो. एफआईआर से मतलब था लिया दिया गया जब कंपनी. को फर्क नहीं पड़ रहा तो फिर किसको फर्क.
पड़ेगा बट वो जो लोगों की जान जा रही है. दो-तीन लोगों की हर बार हर ट्रक के साथ वो. गरीब परिवार. है ठीक ठीक है? वह गए थाने कि साहब हमारा. आदमी नहीं मिल रहा है। जाओ पता करो किसी. औरत के साथ भाग गया होगा। जाओ पता करो. कहीं एक्सीडेंट में मर गया होगा। वो बोलकर. हमारी तो जो पुलिस है वो इनसेंसिटिव पुलिस. है. ना। प्रॉब्लम यह है इंसान की जान की कीमत. नहीं है। इंसान के पैसों की उनके लिए कीमत. नहीं है। एक आदमी जब ₹ लाख, 5 लाख, ₹1 लाख.
दे के और पुलिस डिपार्टमेंट में नौकरी. करने आएगा तो वह अपनी सीड मनी से प्रॉफिट. कमाने आता है। जनता की सेवा करने थोड़ी. आता. है। तो यहां पे कौन उनकी सुध लेगा? कितने. केस हुए होंगे? बहुत रेयरली लोग आते हैं।. एक नवी मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर थे. पाटिल। उन्होंने नाको चने चबवा दिए इन. लोगों को। हालत ऐसी कर दी। दो गैंग्स के. ऊपर उन्होंने मकोका लगा दिया था। उसके बाद.
से महाराष्ट्र का यह वाला जो पोर्शन है. रायगढ़ तक का उसमें उन लोगों ने आना ही. बंद कर दिया और आज तक नहीं आ रहे हैं।. 101 साल हो गए आते ही नहीं डर के मारे कि. साला मतलब वो नज़र बन गई है अब तो अपने को. अब मोका मकोका में आपको दो पांच साल तो. जमानत नहीं मिलती लग गई. बत्ती हो गया पटिया उलाल अब करते रहो. मजीरे बजाते रहो जेल में बैठ के. अंडरवर्ल्ड किससे डरता सबसे खूंखार पुलिस.
ऑफिसर कौन था जिसने सबको डरा रखा था यार. इसमें कोई नहीं खूंखार हुंखार था हां अपने. वक्त में जैसे ये थे अह क्या नाम है उनका. वाईसी पवार वो कुंकार थे क्या था उनमें. ऐसा वाईसी पवार तो मतलब एकदम ही वास अ बुल. डॉग उनको ये लेकर के आए थे क्या नाम है. अपने जो उस वक्त कमिश्नर थे तो उन्होंने. कहा था जूलियस एफ रिबेरो उन्होंने कहा था. कि मुझे यह अंडरवर ये गैंगस्टर नहीं चाहिए. अपने एरिया में मुंबई में.
प्लेनेंट तो उन्होंने रिसर्च किया उस चीज. के बारे में कि यह क्राइम कैसे पनपता है? उनको समझ में आया कि अच्छा कच्ची दारू जो. है यह इनकी फाइनशियल बैकबोन है। उन्होंने. कच्ची दारू को खत्म करना शुरू किया। फिर. उसके बाद में इन्होंने उन लोगों के ऊपर वो. किया। उन्होंने रात में सोते हुए वरद. राजजन मुदलियार को अरेस्ट करवा कर के. बनियान में और लुंगी में पूरे रास्ते में. परेड करवाते हुए थाने लेकर के गए।.
और उस चीज से वह इतना आहत हुआ कि वह छोड़. के फ्लाई करके सीधा मद्रास गया। मरने दम. तक वहीं. रहा। उसके बाद में वो आदमी जब मर गया तो. उसकी लास्ट विश थी कि मेरी जो अंतिम. यात्रा हो वो मुंबई की सड़कों पर निकले और. मैं यहां पे जलाया जाऊं। अंतिम संस्कार. हो। वो पूरा करने के लिए हाजी मस्तान जो. है एयर इंडिया की चार्टर्ड फ्लाइट लेकर के. मद्रास गया। वहां से उसका शव उसमें लेकर. के आया और उसके बाद में उसने यहां पर उसका.
अंतिम संस्कार किया। वो इतनी बड़ी. बेइज्जती वो कभी जीवन में भूल नहीं पाया, झेल पाया और वो चला गया वहां. से। वो खौफ था। बाद के तो ये लोग सब इनको. तो मैं खौफ वाला कोई मानता नहीं किसी को. भी। दो चार छह अफसर उस जमाने में जो हुए. हैं आपके इनका खौफ. था। क्या नाम है? इसहाक बागवान का भी कुछ हद तक खौफ रहा है।.
देन. फिर इन इनसे भी राकेश मारिया से भी काफी. डरा करते थे लोग। लेकिन ये सब जो ये. एनकाउंटर क्लास है मैं उसको तो खौफ पैदा. करने वाला किसी को नहीं मानता। आज आपको. क्या लगता है इंडिया की सबसे बड़ी जो. स्टोरी है वो क्या है जिसके ऊपर लोग ध्यान. ही नहीं दे रहे? इन टर्म्स ऑफ ऑर्गेनाइज. क्राइम तो जो सबसे बड़ा क्राइम है वह तो. यह है कि आपके देश का जो पैसा है वो किस.
तरीके से चूसा जा रहा है थ्रू साइबर. क्राइम।. बहुत बड़े पैमाने पर सम कंट्रीज स्टेट. एक्टर्स जो हैं वह ऑपरेटिव हैं। जैसे. एग्जांपल अब एग्जांपल के लिए मैं बताता. हूं आपको कॉस्मोस. बैंक साइबर हस्ट बहुत बड़ा कांड है. वो। उसमें समवेयर अराउंड 100 करोड़ प्लस. पैसा जो है तीन दिन के वफे में बैंक से.
सफन ऑफ हो गया। हमारे भाई लोग सोते ही. रहे। उनको पता ही नहीं चला। और जब यह चीज. पता चली तब तक वो पैसा नॉर्थ कोरिया के जो. स्टेट एक्टर्स थे उन लोगों ने इधरउधर घुमा. करके और वो खा गए। बाद में हम एक्टिव हुए।. उसमें से कुछ 40-50 करोड़ हम रिकवरी कर. पाए। बाकी नहीं कर पाए। फ्रीज कर पाए।. ऐसा बहुत सारी चीजें चल रही हैं। दूसरी जो. है हमारे देश के ही लोगों को बच्चों को.
बहला फुसला करके और कंबोडिया, बैंकॉक, थाईलैंड ऐसे तीन चार वियतनाम वगैरह देश. हैं वहां पर ले जाया जा रहा है और वहां पर. उनको रख के उनको साइबर स्लेव बना करके और. उनसे हमारे ही देश के लोगों से ठगी करवाई. जा रही है। वहां पर बड़ी-बड़ी फैसिलिटीज. बन गई हैं। कॉल सेंटर्स बने हुए हैं।. जिसमें इन लड़ लड़कियों को रखा जाता है।. वहां पे उनसे बिल्कुल स्लेव्स जैसा. गुलामों जैसा बर्ताव होता है। और वो लोग. हमारे यहां के लोगों को कॉल करके किसी ना.
किसी तरीके से लूर करके और उनसे पैसे. वसूलते हैं। एक बहुत बड़ा फैक्टर चल रहा. है, क्राइम चल रहा है जो है आपके लोन. एप्लीकेशनेशंस। मैक्सिमम लोन एप्लीकेशन ऐप. जो चल रहे हैं वो सारे के सारे चाइना के. हैं। लोगों को बहुत इजीली वो लोन देते. हैं। लेकिन बाद में वो जो आप पूरा लोन. चुका दें उसके बाद भी वो आपसे पीछे पड़े. रहते हैं और आपसे पैसा वसूलते हैं। और. उसके बाद में कई लोगों ने उन लोन एप्स के. कारण सुसाइड किया है देश में।.
इनके ऊपर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। और जो. सबसे बड़ी चीज जो हमारे पूरे देश में यह. दिखाई दे रहा है ना आपको फलानी रमी उसमें. आइए फलाना क्रिकेट वाली ऐप में आइए उसमें. आपको टीम बनाइए जो जीतेगी तो आपको इतने. लाख इतने करोड़ मिलेंगे। मेरी Ferari कार. आप जीत सकते हो। मेरा ये सबसे बड़ा आई वॉश. है। इसके ऊपर पहले फुर्सत में पहले दिन. रोक लगाने की जरूरत है। अरे भाई जब आप. बोलते हैं कि फलाने ऐप में आप किसी तरह का.
जुआ सट्टा नहीं कराते हैं। राइट? ये गेम. ऑफ इंटेलिजेंस है। आप बोलते हो रमी गेम ऑफ. स्किल है। तो आप उसके अंदर मैं जिस दिन. अकाउंट बनाऊंगा उस दिन अकाउंट बनाते से ही. मुझे 1 लाख, 5 लाख, 10 लाख या 3 लाख या. 500 या 25,000 पॉइंट्स फ्री क्यों दे रहे. हैं? इसलिए दे रहे हैं क्योंकि मैं आकर के वह.
पॉइंट्स खर्च करूं जो कि करेंसी है जो नोट. है जो आपको बाद में पैसे से खरीदना पड़ते. हैं पॉइंट्स और बाद में जब आप वो पॉइंट्स. एक्स्ट्रा जीत लेते हो तो वो पॉइंट्स आपको. करेंसी के रूप में वापस भी मिलते हैं। तो. ये तो सट्टा और जुआई है ना।. सुप्रीम कोर्ट में कुछ कंपनियों ने जाकर. के और इस चीज को गेम ऑफ स्किल के रूप में. वो करवा लिया और उसके अंडर बिनत ये लोग. पूरा का पूरा क्रिकेट का सट्टा, विंबलडन. का सट्टा और तमाम तरह के सट्टे खिलवा रहे. हैं। कितने लोग हैं मैं मतलब ऐसे लोगों को.
जानता हूं जिन्होंने इसके कारण उनके घर. परिवार बर्बाद हो गए। उन लोगों ने. आत्महत्याएं की हैं लोगों. ने। केसेस लगे हुए हैं लोगों के खिलाफ।. लेकिन उनके ऊपर कोई काम नहीं हो रहा।. क्यों नहीं हो रहा? इसलिए नहीं हो रहा. क्योंकि हमारे सिस्टम को उससे कोई मतलब. नहीं. है। पॉलिटिशियन है उनको चुनाव जीतना है।. पुलिस वाले हैं उनको करप्शन करना है।. आईआरएस, आईपीएस, आईजीएस हैं। उन लोगों को. कोई मतलब नहीं है आम जनता से। उनकी. नौकरियां चल रही है। समाज चल रहा है।.
पत्रकार हैं। ऐसी स्टोरीज नहीं कर सकते. क्योंकि उनके जो टॉप एडिटोरियल लीडर्स हैं. वो नहीं चाहते कि ऐसी स्टोरीज. [संगीत]. हो। मेरे जैसा आदमी चाहता है कि मैं इसके. ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री बना लूं। मेरे पास. पैसा नहीं है। मैं डॉक्यूमेंट्री बना. लूं और वो लोग बेचारे संकट में है। वो लोग. मारे जा रहे हैं। फंसे हुए हैं। बहुत बड़ा. ये कम से कम साल का 7 आठ लाख 10 लाख करोड़. का काम है। स्कैम है। क्राइम है ये. फाइनेंसियल क्राइम। इसकी तरफ किसी का.
ध्यान नहीं है। तो जब इतना बड़ा क्राइम है. तो लीगल कैसे है? लीगल ऐसे है. कि उन्होंने सिस्टम को यानी सुप्रीम कोर्ट. को वो पक्ष दिखाया जो वो दिखाना चाहते थे।. उनके सामने जो है खड़े होकर के पक्ष. दिखाने वाला दूसरा सिक्के का दूसरा पहलू. दिखाने वाला व्यक्ति नहीं था। वो एक्स. पार्टी ऑर्डर है एक तरह से। और क्यों नहीं. है सामने? कोई तो होगा। उसको फर्क पड़ता. होगा देश में। मुझे पड़ता है लेकिन मेरे. पास में वो ताकत नहीं है ना फाइनेंसियल।.
बट पब्लिक प्रोसकटर्स तो होते हैं उनको।. पब्लिक प्रोसकटर्स क्या होते हैं? पब्लिक. प्रोसीक्यूटर्स को आप थोड़े से पैसे. दीजिए। वो वैसे ही झुक जाते हैं।. बट ऐसे केसेस हुए हैं हमारे देश में जहां. पे बहुत बड़ी-बड़ी फोर्सेस हैं। उनके. सामने पब्लिक प्रोसकटर्स खड़े हुए हैं और. उन्होंने हराया है उन्हें। हां तो वहां पे. हराया यहां नहीं हराया। यही प्रॉब्लम है. ना कि भई हर केस में पब्लिक प्रोसकटर वैसा. ही हो जो लड़े और जीते. ना। अब अगर सपोज मुझे वो केस करना पड़े।. मुझे सुप्रीम कोर्ट अगर एक बार जाना पड़. जाए मेरा कम से कम ₹25,000 का खर्च.
होगा। अगर एक महीने में चार पेशियां पड़. गई तो मुझे तो लाख रुपए खर्च आ गया। मैं. कैसे वो केस फाइट. करूं? इतने बरसों से यह डिमांड हो रही है. कि सुप्रीम कोर्ट की चार अलग-अलग और बेंच. बनाई जाएं। आज तक नहीं बनाई जा रही. है। एक ईस्टर्न बेंच, एक वेस्टर्न बेंच, एक नॉर्थन बेंच, एक सदर्न बेंच ऐसे करके चार बेंचेस. अलग-अलग बना दी जाए ताकि हर आदमी को.
सुप्रीम कोर्ट तक ना भागना पड़े दिल्ली. तक। ऐसे बना दी जाएगी तो इन्फ्लुएंस हो. जाएगी ना स्टेट गवर्नमेंट से। कैसे? ऐसे. नहीं होता। नो। अगर वेस्टर्न ज़ोन वाइज ज़ोन. के पावर्स के थ्रू सुप्रीम कोर्ट से वो. चलेगा। वहां का जो. कंसर्टियम है या कंसर्टियम नहीं बोलते हैं. उसको क्या बोलते हैं वो जो वहां का सिस्टम. है वहां से वो तय होगा कौन सा व्यक्ति. यहां पे जज बनेगा वो वो तय करता है. महाराष्ट्र का आदमी महाराष्ट्र में ही जज.
बहुत कम रहता है उसको कहीं आसाम में कहीं. मेघालय में कहीं चेरापूंजी में पता नहीं. कहां-कहां भेजा जाता है। क्यों? ताकि वो. इन्फ्लुएंस नहीं हो वहां के लोकल उनसे या. जुडिशरी से क्योंकि आप यहीं पे वकील थे और. यहीं अगर आप जज बन गए तो आपके तो वो सारे. लोग कंड्यूट हैं एक तरह से तो आपको हम. यहां नहीं रहने देंगे। हम आपको भेज देंगे. इलाहाबाद। हम आपको भेज देंगे लखनऊ। हम. आपको भेज देंगे गुवाहाटी। हम आपको भेज. देंगे देहरादून। तो वो वही चीज यहां भी.
होगी। साउथ का आदमी वेस्ट में होगा। वेस्ट. का आदमी नॉर्थ में होगा। नॉर्थ का आदमी. ईस्ट में होगा। तो कैसे मतलब इन्फ्लुएंस. होंगे और क्या आज इन्फ्लुएंस नहीं है? अरे. भाई लेकिन जनता की भी तो चीजों के बारे. में सोचना पड़ेगा. ना। मैं आप अगर यदि इसको डीसेंट्रलाइज कर. देते हैं सुप्रीम कोर्ट को उसका सबसे बड़ा. फायदा ये होगा कि दिल्ली के ऊपर जो. ट्रैफिक का और वहां पे लोगों का लोड है.
इतना ज्यादा आने जाने का वो आपका घट के. 10% 20% तो कम होगा।. और सुप्रीम कोर्ट पर डायरेक्ट जो केसेस का. बर्डन है वह केस का बर्डन कम होगा। अरे. भाई जिस हाई कोर्ट की बिल्डिंग में मुंबई. हाई कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट की बिल्डिंग. में जो हाई कोर्ट चल रही है उसी में आप. चार कमरे छह कमरे दे के सुप्रीम कोर्ट. क्यों नहीं चला. सकते? आठ जज या छह जज यहां क्यों नहीं दे. सकते? ताकि पूरे वेस्टर्न इंडिया का जो.
मामला है वो पूरा का पूरा यहां चले।. तो कितना फर्क पड़ेगा उससे बहुत कमाल का. फर्क. पड़ेगा। जुडिशियल रिफॉर्म सबसे पहले यह. शुरू होना चाहिए। नीचे से नहीं ऊपर से. होना चाहिए। बट थैंक यू सो मच टूर ऑफ माय. वास प्लेजर नोइंग थिंग्स जो मैं कभी सोच. भी नहीं सकता था। मुझे पता भी नहीं था कि. आप कौन से कौन सी कहानियां और कैसे-कैसे. कहां-कहां से डॉट्स कनेक्ट होते हैं और. क्या-क्या एक्टिव है अभी। एंड हाईवे.
माफिया वास. मैंने कभी नहीं सुना था। एंड इट्स इट्स. इनसेन। प्लस उसके बाद जो स्टार्टिंग में. आपने आपके जितने थॉट्स वेल प्रेजेंट करे. अबाउट व्हाट्स गोइंग ऑन इन द कंट्री रियली. कमेंडेबल। थैंक यू सो मच फॉर डूइंग दिस. सर। प्लेजर हैविंग यू। प्लेजर ऑफ़ माइंड।. ऑल प्लेज़र ऑफ़ माइंड। थैंक यू सो फॉर। थैंक. यू सो मच फॉर हैविंग मी हियर। यार ये बहुत. ज्यादा है। इतनी तो पी ना जाए। जर्नलिज्म. में लगती होगी ऐसे दिन भर। नहीं नहीं मुझे.
नहीं लगती। हां मतलब आपके पास समय कहां है. कि खाएं पिए कुछ करें दिन तो चलते होंगे. दुनिया नहीं बिल्कुल नहीं शुरू से. प्रैक्टिस में रखा ये. कि वन कॉफी इन अ डे दो चीज कोई और थी थ्री. सिगरेट्स था एंड नो गर्ल्स तो तो वो एकदम. फिक्स वन टू थ्री का रूल्स हां उसी कारण. जिंदा है आज थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग दिस. पॉडकास्ट टिल दी एंड अब आपको तीन चीजें. करनी है सबसे पहले इस चैनल को सब्सक्राइब. कर लो नंबर टू कमेंट्स में हमें बताओ कि.
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[संगीत].
