Top Criminal Cases, Corruption In Police, Politician & Lawyer - Tanveer Ahmed Mir |F0229 Raj Shamani
कभी आपने किसी को डिफेंड किया है जो आपको. पता है कि वह गिल्टी है हां बहुत बार मैं. किसी को डिफेंड करने से ही भाग जाऊं तो. फिर मैं वो बैंड पहनने के लायक नहीं हूं. कोई भी ऐसा मिला है जो मोरली और एथिकली. 100% राइट ना ऐसे इंसान नहीं होते ना. कल्प्रिट्स. ना पॉलिटिशन व कहीं नहीं. मिलता एक आईपीएस ऑफिसर ने पब्लिक. प्लेटफॉर्म पे बात करी कि साहब मैं आईपीएस. ऑफिसर तो हूं लेकिन मैं उस कुत्ते की तरह.
हूं जिसका पटा पॉलिटिशियन के हाथ में है. जो पॉलिटिशियन पावर में है पूरा सिस्टम. हिलाने का समाधान रखता है आईपीएस आईएस. ऑफिसर से उसके सामने आईपीएस ऑफिसर क्या है. इंडिया में कोई भी अगर बड़ा एक पावरफुल. इंसान होता है हां उसके अगेंस्ट केस लड़ा. जा रहा है तो उसमें सारे विटनेस को खतरा. हो जाता है जो पावरफुल आदमी है वो सिस्टम. को पेनिट्रेट करता है गवाह भी हटा देता है. और जो गरीब आदमी है वो इंसाफ के लिए तरसता. रहता है अगर क्रिमिनल है या विक्टिम है. सबसे पहले पुलिस केस जाना चाहिए लॉयर के. पास विक्टिम जितनी जल्दी पुलिस प जाएगा.
उतना ही बेहतर केस होगा और अगर मुलजिम है. वो पहले दिन ही वकील पे आए ड यू थिंक कि. जब पुलिस को आप अपना बयान लिखा रहे हो उस. टाइम पे कैन यू रिकॉर्ड इ यस एवरी पुलिस. स्टेशन मस्ट बी अंडर टोटल सीसीटीवी कवरेज. टेबल के नीचे कुछ तो रखेगा भाई और ये होता. है आज भी बत होता जनमन केस पुलिस दर्ज. करने के लिए तैयार ही नहीं पुलिस के लिए. कोई दीनो ईमान नहीं है आप कभी किसी. स्ट्रांग एथिकल पुलिस वाले से नहीं मिले. [संगीत].
अगर आपको हमारे चैनल से थोड़ी सी भी. वैल्यू मिलती है तो प्लीज हमारे चैनल को. सब्सक्राइब कर लीजिए एंड अगर इस पूरे. एपिसोड की छोटी-छोटी क्लिप्स आपको देखनी. है तो राज समानी क्लिप्स एंड राज समानी. शॉर्ट्स को सब्सक्राइब कर लीजिए क्योंकि. वहां पर हम कम समय में कोशिश करते हैं कि. आपको ज्यादा से ज्यादा इंफॉर्मेशन मिले. एंड इस पूरे एपिसोड का ऑडियो एक्सपीरियंस. स्फाई प अवेलेबल है जहां पर आप हमें फॉलो. कर सकते हैं एंजॉय द. शो कभी आपने किसी को डिफेंड किया है जो.
आपको पता है कि वो गिल्टी है हा बहुत बार. आपको पता है कि वो एक हियस क्राइम के लिए. गिल्टी है 100% एंड उसने आपके सामने. कन्फेस कर दि बिल्कुल बिल्कुल तो हाउ ड यू. नेविगेट कि. मैं इस केस में अपने एथिक्स लेके आऊ कि. नहीं लेके आ व्ट इज द केस चूज करने से. पहले कोई तो मोरल कंपास होता होगा या. एथिक्स होते होंगे कि मैं अब तो मुझे. बताया इस आदमी ने बोल दिया कि सर मैंने यह. किया है तो मैं इस.
बचाओ क्यों इसके पीछे क्या लॉजिक रीजन. होता है आपके तरफ सेस्ट पली डन मनी न. देखिए दो चीज. है नंबर एक यह है कि जो डिफेंस का लयर है. ही इज मेड. ट्रेड और उसके ऊपर जो हमारी सोसाइटी है वह. दायित्व देता है डिफेंड. करना कभी-कभी हमें यह सीधे समझ में आता है. कि भ आपने जुर्म किया या नहीं किया कभी. कभी तो मुलजिम ही बोलता.
है तो उन केसों में ऐसे केसों में जो मेरी. जिम्मेदारी है डिफेंड करने की वह और. ज्यादा खड़ा होता है क्यों क्योंकि मेरी. जो डिफेंस की कैपेबिलिटी है या जो मेरे. ऊपर रिस्पांसिबिलिटी है वो डिफेंड करने के. लिए जरूरी है हां बट कभी ऐसा नहीं लगता कि. मैं क्रिमिनल को बचा रहा हूं वो देखिए. उट उस सेंटीमेंट से मैं अगर गया कि साहब. एक आदमी ने क्राइम किया है.
और मैं उसको बचा रहा हूं यह कांसेप्ट. थोड़ा सा जो है कि साहब परसेप्शन बेस्ड है. मेरा काम है अदालत में जो मुकदमा उसके. खिलाफ. आएगा वह देख के उस मुकदमे को तोड़ने की. स्ट्रेटजी. बनानी गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन. करने और उस तरीके से प्रोसीक के लॉयर्स को. अदालत में बीट करना.
मैं इस कंपस से नहीं चलता हूं कि मेरा. क्लाइंट जो है वो गिल्टी है या नहीं है. थिंक अबाउट दिस वे यस ट मैं. कि आपको पता है कि आप अगर अपने मिशन में. सक्सेसफुल हुए हां आपके क्लाइंट ने कुछ. क्राइम किया है हां उसके बाद हां मैं अगर. इसको बचाने में सक्सेसफुल होता हूं हां तो. एक विक्टिम को जस्टिस नहीं मिला बिल्कुल. नहीं सामने वाले का हो सकता है कि लाइफ.
स्कार हो गई हो सकता है कि उसे उसे. जबरदस्ती पनिशमेंट हो गई जो शायद आपके. क्लाइंट को मिलनी चाहिए थी सो यह सब सस. थॉट एथिक्स कभी लगता नहीं है नहीं इसके. अंदर हमारी ट्रेनिंग होती है ट्रेनिंग जो. है जो हमें कानून की पढ़ाई कराई जाती. है और जो हमारी फैकल्टी में या जहां भी आप. पढ़ते हैं जो आपके प्रोफेसर्स जो आपकी. इनग्रेन आइडियो जीी देते हैं वो दो एंगल. पर चलती.
नंबर. वन कि सोसाइटी जो है वह आप पर. रिस्पांसिबिलिटी बिस्टो करती है आप पर. दायित्व देती है कि अगर मुलजिम आप पर आया. आपने उसको जज नहीं करना आपने उसको डिफेंड. करना है इसी तरह प्रोसीक पर दायित्व देती. है कि आपने प्रोसीक करना. है सोसाइटी कभी मेरे को यह नहीं कहता कि. साहब आपने प्रोसीक को खरी है बेचना है या.
इस तरह के अन एथिकल या इलीगल काम कर रहे. हैं लेकिन यह दायित्व पहले देता है कि. डिफेंड करने से आपने पीछे नहीं. हटना इसलिए कई बार और बहुत बार हमें यह. पता रहता है कि साहब जिस क्लाइंट को मैं. डिफेंड कर रहा हूं यह वाकई मुजरिम. है लेकिन उन केसों में और उसको डिफेंड. करना यह मेरी ऑटोमेटिक जिम्मेदारी.
है क्योंकि यह जिम्मेदारी मेरे को मेरी. सोसाइटी मेरा कांस्टिट्यूशन देता है अगर. मैं डिफेंड करने से पीछे हट. गया तो फिर तो आप कभी भी किसी की भी सजा. कराओ क्योंकि सिस्टम ऐसे चलता. है कि साहब जो इंस्टिट्यूशन ऑफ. प्रॉसिक्यूट है जो सरकार केस चलाती. है एक मर्डर हो गया रेप हो गया रबरी हो गई.
मनी लरिंग हो गई यह रिपोर्ट हो गई. कंप्लेनेंट का काम है रिपोर्ट करना और. सरकार का काम है कंप्लेनेंट को और सोसाइटी. को जस्टिस. दिलाना जस्टिस दोनों चीजों में है इंसाफ. सजा करने में भी है इंसाफ क्विटल करने में. भी. है तो प्रोसीक को अपना दायित्व निभाना है. अगर वह अपना दायित्व पूरी तरह निभाए. तो मैं ऐसे मुजरिम को डिफेंड करने में.
शायद असफल हो जाऊं मैं कभी अपने क्लाइंट. को यह नहीं पूछता हूं कि भाई मर्डर किया. या नहीं किया नहीं यह मेरा काम पूछने का. नहीं लेकिन बितर मुझे पता. होता यह हर क्रिमिनल लॉयर को पता होता तो. जब पता होता है तो फिर क्यों सेव करते सेव. करने का मतलब ये देखिए थंक अबाउट दिस रा. आप बोल रहे हो कि आपकी रिस्पांसिबिलिटी ड. थंक ये रिस्पांसिबिलिटी ज्यादा है कि किसी. पर रंग फुल एक्विजिशन है एक्यूजेशंस है तो.
उसे बचाना आपका काम है डिफेंड करना एक. डिफेंस लॉयर का बचाने का मतलब फिर मैंने. आपको ये बात बताई कि साहब हमारी यह. नैतिक. प्रोफेशनल कॉन्स्टिट्यूशन और सोशल. ऑब्लिगेशन है चार तरीकों से हाउ इज इट. सोशल ऑब्लिगेशन टू सेव अ क्रिमिनल आई विल. टेल यू व्हाट फर्स्ट ऑफ ऑल टू डिसाइड वेदर. समबलपुरी किया या नहीं किया.
यह अदालत का ताय हुआ है ट्र यह मेरा नहीं. मैं मेरे क्लाइंट को जज नहीं करूंगा बट. क्लाइंट खुद बता रहा है ना कि क्ला बता. रहा है कोई दिक्कत नहीं तो अब तो जजमेंट. हो गया मतलब क्लाइंट ने बता दिया एकदम. फैक्ट रिपोर्ट कर. दिए कॉन्फिडेंस में बात आ गई अगर. कॉन्फिडेंस में बात आ भी गई फिर भी आपको. उसको डिफेंड करने से पीछे नहीं हटना है. क्यों नहीं हटना मैं मान लिया कि डिफेंड. करते हो मैं ये पूछ रहा हूं कि क्या सोचते.
हो आप क्या मोटिवेट करता है आपको ऐसे केस. लेने में और क्या कौन सी एक लाइन होती. जहां बोलेगे ठीक है चलेगा मेरे को इससे. कोई प्रॉब्लम नहीं है उसमें ये होता कि. साहब. आपसे जुर्म जबरदस्ती हो गया सरकमस्टेंशियल. हो गया या स्पर ऑफ द मूमेंट पे हो. गया कई चीजें होती है दैट इज आल्सो वन कि. अनइंटेंशनल था बहुत इंटेंशनल भी होता है.
मैं आपको इसको एक एक रिवर्स एग्जांपल. बताता. हूं बंबई में 261 कांड हुआ हम आमिर अजमल. असब कसाब जो पाकिस्तान से आया था उसको. सजाए मौत हुआ जब उसकी अपील सुप्रीम कोर्ट. लगी तो सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक बड़े. जो है ऊंचे लेवल के एक सीनियर एडवोकेट को. बोला जिनका नाम है मिस्टर राजू रामचंद्रन. सीनियर. एडवोकेट उनको बोला कि आप इसको डिफेंड.
करेंगे वो तो जो है वीडियो के ऊपर गोलियां. मार रहा था तो क्यों डिफेंड करेंगे. क्योंकि जो हमारा कानून है जो हमारा. संविधान है उसके अंदर जो है राइट टू. डिफेंड जो है द ऑब्लिगेशन टू डिफेंड यह जो. है बड़े हाई लेवल पे है यू कैन नॉट. कन्विसिटी. टू बी डिफेंडेड बादशाही में भी सऊदी अरब. में भी बादशाह किसी की सजा नहीं कर सकता.
जब तक कि उसको अपॉर्चुनिटी ऑफ डिफेंड ना. किया जाए अब अपॉर्चुनिटी टू डिफेंड तो. मुलजिम पर है अगर सारे वकील ही भाग गए तो. फिर उसको जो है इंसाफ कैसे मिलेगा सोसाइटी. का इंसाफ सोसाइटी को इंसाफ तब मिलता है कि. जब एक मुकदमा. चले इन अकॉर्डेंस विद लॉ प्रोसीक अपने. गवाह पेश करे चाहे वह डॉक्यूमेंट्री है. चाहे ओरल काउंट है उसको को एक अदालत में.
साबित करें अदालत में फुल अपॉर्चुनिटी. मिले और मुलजिम भी डिफेंड हो अगर मुलजिम. डिफेंड ही नहीं हुआ तो सोसाइटी को कोई. इंसाफ नहीं मिल सकता ना ना तो नई दिल्ली. में ना मुंबई में ना न्यूयॉर्क में ना. लंदन. में जो आपने बात कही वो मोरल कंपस की है. दिस मोरल कंपस इज कम ओवर बाय अ डिफेंस. लॉयर बाय हिज कूल ऑफ थॉट दैट आई एम बोर्न.
ऑब्लिगेटेड इन टर्म्स ऑफ जो मैं बैंड. पहनता हूं ये वाइट आपने देखा होगा एक वकील. बैंड पहनता है ये केवल एक कागज जो है. कपड़े का स्टार्च क्लॉथ नहीं है ये बैंड. आप पे एक फंडामेंटल रिस्पांसिबिलिटी देता. है दैट यू आर एन ऑफिसर ऑफ द कोर्ट और. ऑफिसर ऑफ कोर्ट के तहत एक जो क्रिमिनल. लॉयर. है उसके ऊपर एक नेचुरल ऑब्लिगेशन है.
कि आपने डिफेंड करना है टू द बेस्ट ऑफ योर. कैपेबिलिटीज बेशक आपको पता है या नहीं पता. वह हमेशा पता होता यू नो कैन आई बी रियली. नेस्ट यस आई अंडरस्टैंड योर पैशन आई एम. अंडरस्टैंडिंग कि आप क्या बोलना चाह रहे. हो बट मेरे अंदर. एक आई डोंट नो एक मेरा मोरल कंपास है या. मैं बहुत छोटा हूं इस बात को समझने के लिए. आई डोंट अंडरस्टैंड क्या है पर मुझे ये. बात समझ नहीं आ रही आई थिंक मेरी नजरों. में मुझे ऐसा लगर कि यह गलत है मतलब कोई.
क्यों जब यह दिख रहा है कि कोई एक. टेररिस्ट हमारे देश में आया बिल्कुल है. देश में आके उसने गोलियां चलाई हमारे इतने. लोग वीडियो प नजर आया हमें सबको पता है कि. वो क्रिमिनल है क्यों हमारी नरे बल कोर्ट. का टाइम भी वेस्ट करना उसका केस लड़ने पे. डायरेक दिख रहा है इट्स क्लियर चिस्ट हटा. दो उसे क्यों उसे एक डिसीजन दे दो जो भी. देना है क्यों एक लॉयर उसका केस लड़ने के. लिए रेडी भी हो हा एंड उसके बाद सालों साल.
केस भी चलेगा क्यों सबका टाइम मनी एफर्ट. रिसोर्सेस वेस्ट करना एंड ऐसे कितने केसेस. है जहां पर मतलब रात में नींद भी कैसे. आएगी यह बात आपका बड़ा वाब बहुत अच्छा. सवाल है नेचुरल सवाल है लेकिन आप इसको इस. एंगल से भी देखना जरूरी. है कि. साहब जो हमारी पूरी कंट्री है जिस तरीके. से हमारा कांस्टिट्यूशन बना हुआ है.
आखिरकार वी आर नॉट नॉर्थ कोरिया हम सऊदी. अरब नहीं है नॉर्थ कोरिया जो फंडामेंटल. राइट है आपका ट इज द राइट टू बी टू बी. डिफेंडेड इन कोर्ट ऑफ लॉ तो अदालत जो है. दो तरीके से मुलजिम को डिफेंड करने का. राइट अप होल्ड करती यह भी बता रहा हूं. क्यों करर अगर कोई वकील उसका केस लड़ने के. लिए तैयार नहीं है तो उसको सरकार के खर्चे. पर वकील दिया जाता है वो इसलिए यह है कि.
हमारी सोसाइटी को एन ब्लॉक कंप्लीट एंड. ब्लॉक कंप्रिहेंसिव जस्टिस आप सोसाइटी को. देखिए कोई भी मर्डर है चाहे एक्ट ऑफ. टेररिज्म है चाहे रेप है चाहे मर्डर है जज. आर नॉट ऑफेंसेस अगेंस्ट द विक्टिम पर से. फेक्चुअली तो विक्टिम है जिसके ऊपर क्राइम. हुआ लेकिन दज आर कंसीडर्ड टू बी द. क्राइम्स अगेंस्ट द. सोसाइटी तो सोसाइटी को आपने इफ सोसाइटी. में इंसाफ यह नहीं हो सकता कि इंदिरा.
गांधी मर्डर केस. हुआ और सतवंत सिंह यंत सिंह को जो है कि. साहब एक आदमी पकड़ा गया दूसरे को उधर ही. स्टन गन से गोलियां मारी गई वो गलत था. आपको उसको अप्र हैंड करना था कानून के. जरिए उस पर मुकदमा चलाना था उसके बाद में. उसको सजाए मौत देनी. थी ट्स हाउ यू सर्व आप सोसाइटी में जस्टिस. कैसे सर्व करेंगे अगर सीधे ही हमने आमी को. गोली मार दी तो फिर तो जो है फिर एनकाउंटर.
राज है जैसे यूपी. में कि आपने अब देखिए जी आज यह सोसाइटी. में डिटर मेंट कैसे लाता है मैं आपको. एग्जांपल बताता हूं आज की डेट में यूपी के. पुलिस ने किसी भी आदमी को सही है गलत है. या उस परे तीन केस है इसको एलिमिनेट करना. है आप उसको चार केसों में इंप्लिकेट कर. लो और उसके बाद में एनकाउंटर कर लो सरकार. भी आपका सपोर्ट कर रहा है तो यह जो.
एनकाउंटर राज है कि इमीडिएट विदाउट अ. ट्रायल जिस देश में जिस सोसाइटी में. ट्रायल नहीं हुआ अपॉर्चुनिटी टू डिफेंड. नहीं हुआ अपॉर्चुनिटी टू द डिफेंड इज नॉट. अ सोलेस अपॉर्चुनिटी इट्स अ मीनिंगफुल. अपॉर्चुनिटी फुल अपॉर्चुनिटी टू डिफेंड का. मतलब है कि साहब अदालत के अंदर केस चला अब. आप तो जो है साहब कसाब टाइप आदमी है. आपको क्या पता है आपको अपना आप कैसे.
डिफेंड करना. है सो द लॉयर्स आर ट्रेन टू डिफेंड दे आर. ऑब्लिगेटेड टू डिफेंड दे आर ऑब्लिगेटेड टू. प्रोसेक एज वेल सोसाइटी को इंसाफ तब. मिलेगा मुल्क को पूरे कौम को जब. कंप्रिहेंसिव ट्रायल हो फुल अपॉर्चुनिटी. हो जुर्म साबित हो उसके बाद में पनिशमेंट. इन्फ्लिक्ट की. जाए फर तो इस तरीके से हमारा संविधान ब. दैट इज व्हाट यू से इज दैट हाउ सो एवर हाई.
यू आर लॉ इज हायर देन यू ये जो हम बात. कहते हैं कानून आप कितने ही ताकतवर है. कानून आपसे ताकतवर है वह कानून कैसे. ताकतवर है क्योंकि समाज जो है उस कानून को. ताकतवर बनाने के लिए अलग-अलग जो. जो शोभे हैं अलग-अलग जगह हैं अलग-अलग लोग. हैं एग्जीक्यूटिव है पुलिस है लॉयर्स हैं. जजेस है उनके ऊपर हम रिस्पांसिबिलिटी देते. हैं.
तभी हम इंसाफ कर पाएंगे तभी सोसाइटी आगे. बढ़ेगी. आपके ऊपर पुलिस के ऊपर कोई रोकथाम थोड़ी. है केस चलाने से आप चलाइए जुर्म को साबित. करिए इसलिए लॉयर जो है वह मोरल कंपास का. शिकार नहीं होता अच्छा मोरल कंपास की कोई. लिमिट नहीं है चार मिनट के लिए एक सिविल. लॉयर है उसको पता है उसका क्लाइंट दूसरी. पार्टी का पैसा खा गया तो वहां मोरल कंपस. का क्या.
करोगे आपको पता है मेरा क्लाइट पैसा क गया. फिर भी तो आप उसका डिफेंड तो कर ही रहे. हो तो अब मोरल कंपस की कोई लिमिट नहीं. होती तो यू फील कि लॉयर्स का कोई मोरल. नहीं होता कोई धर्म ईमान नहीं. होता लॉयर का पूरा धर्म ईमान है उसको जो. बैंड. पहनाया तो उसके गले में एक ऐसा घंटा बांध. लिया के साब आज जो है जो वाई द लॉयरिंग.
कॉल्ड एस नोबल प्रोफेशन बिकॉज यू आर एन. ऑफिसर ऑफ द कोर्ट यू आर एन. इंस्ट्रूमेंटालिटी ऑफ द सोसाइटी फॉर द. सोसाइटी एंड फॉर द बेनिफिट ऑफ द सोसाइटी. बट सम टाइम्स यू डू थिंग्स च टश द सोसाइटी. ट इंपैक्ट द सोसाइटी इन अ पर्टिकुलर. मैनर वो आपका एक कंक्लूजन ऑफ परसेप्शन है. वो आप परसेप्शन सही आपको लग रहा है इस केस.
में इंसाफ नहीं हुआ इस केस में इंसाफ हुआ. ट्स द. ट्रुथ सो वी आर टू परफॉर्म हमें अपनी. ड्यूटी निभानी है मुलजिम को जज नहीं. करना हां आप अपना ओपिनियन जरूर रख सकते. हैं ओपिनियन जस्टिफाइड है मैंने अभी क्या. कहा कि हमारा मुल्क ओपिनियन और छोड़ना. चाहिए आजादी देना चाहिए उसको कटेल ना. करें आ अग्री की आ ल लेट्स लेट्स मूव. फ्रॉम दिस टॉपिक क्योंकि आई विल टेल यू.
क्योंकि आई अग्री कि हर किसी को एक डिफेंड. करने की अपॉर्चुनिटी देनी चाहिए बिल्कुल. 100% भले वो क्रिमिनल हो कल्प्रिट्स. ऑफ ऑल. डिफेंस लॉयर अगर जो है कहीं पर भी कोई गलत.
काम करें तो वह अपने बैंड को जला रहा. है वह आपका अपना मॉरल मेरे पर इजाजत नहीं. है कि साहब मैं किसी गवाह को टेंपर करूं. या उसको पेनिट्रेट करूं मेरे पर जो इजाजत. है और दायित्व है वह डिफेंड करने का है अब. लेकिन लॉयर्स की भी स्ट्रेटजी होती है जो. मेरे पर इजाजत नहीं है कि मैं किसी गवाह. को बोलूं भाई आप गवाही मत दो तो फिर तो. मैं जो है कि साब माय लाइसेंस विल बी.
स्ट्रक डाउन फेर लेकिन यह है कि साहब मैं. किसी को डिफेंड करने से ही भाग जाऊ तो फिर. मैं वह बैंड पहनने के लायक नहीं. हू तो मोरल फाइबर जो आता आपको पता है इसने. जुर्म किया है तो मैं अब जो है उसको बचा. नहीं मैं उसको बचा नहीं रहा हूं मैं अदालत. में खड़ा हूं कि साहब जो प्रोक्यू का. विटनेस आए उसके साथ कुछ सवाल जवाब तो होगा. प्रोसीक ने कोई डॉक्यूमेंट पेश किया बतौर.
एविडेंस अब मान लीजिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट. वही फोटो कॉपी आ. गई तो उसमें मेरी क्या गलती. है उसमें डिफेंस लॉयर तो चुप बैठ गया कि. जब आपने अपना केस खुद ही साबित नहीं किया. तो मैं क्या. करूं आई अंडरस्टैंड योर पॉइंट ऑफ व्यू. एंड लॉयर का धर्म है कि मैं लॉ के लिए जो. जो मेरा कर्तव्य है वो करते जा और ये.
कर्तव्य मेरे को समाज ने दिया उसी समाज ने. मेरे को बैंड पहनाया यस और आप पर हम. दायित्व देते हैं कि आपने. दिफाइड करना है प्रोसीक को भी बैंड पहनाया. आपने प्रोसीक करना है पुलिस पर हिदायत दी. जिम्मेदारी की आपने ऑनेस्टली इन्वेस्टिगेट. करना. है आपने जुर्म जो है एविडेंस न तो टॉप अप. करनी है ना हटानी है जो सच्ची सच्चाई है.
वो आपने पेश करना है पर ये सब सब में कुछ. ना कुछ कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं तो कुछ. लकूना तो रहता ही है उसके अंदर आदमी का. अपना मोरल फाइबर है और हर कोई अपने मोरल. फाइबर के हिसाब से ट अपनी जिम्मेदारी पे. है अगर आप अपना काम ठीक करेंगे तो बहुत. अच्छी बात य थिंक की कोई भी इंसान जिससे. भी आप मिले हो जी ठीक है अ कोई भी ऐसा.
मिला है जिस जो मोरली और एथिकली 100% राइट. हो ऐसे कोई नहीं मिलता कोई कहीं ना कहीं. कोई को अपने वे में बिल्कुल कहीं ना कहीं. कप बिल्कुल कहीं ना कहीं ऐसे इंसानी नहीं. होते कि जो परफेक्ट ना दैट इज एन इजन ट. नहीं ना ही कभी कोई विक्टिम और ना ही. कोई ना कल्प्रिट्स. ना पॉलिटिशन वो कहीं नहीं मिलता सब.
कॉम्प्रोमाइज था कहीं ना कहीं हर किसी का. कुछ ना कुछ कॉम्प्रोमाइज है तो जो हाई. मोरल स्टैंडर्ड वाले हा इट्स अ मिथ ओ इट्स. अ मिथ हाई मोरल स्टैंडर्ड जो है वो लजरी. कांसेप्ट है क उसकी जो कंसिस्टेंसी है वो. कहीं ना कहीं ब्रेक है चैलेंज हो लेकिन जो. है आपका कुछ प्योर डीएनए तो होता है वो. आपके विल पावर पे है दूसरा आप ये बात समझ. लीजिए कि साहब अगर किसी का राइट टू बी.
डिफेंडेड है तो वो इजरी नहीं हो सकता इट. कांट बी एन एमटी कक. शल उसको भी आपने पूरी तरह जो है रोब तरीके. से सामने रखना है प्रोसीक भी दमदार करनी. है डिफेंस भी दमदार करने. है जज भी तथ्य पर चलने चाहिए थ्योरी पर. नहीं चलने चाहिए जज भी नहीं डरना चाहिए. टेल मी दिस ये पैशन यह मोटिवेशन का सोर्स. पैशन है कि मोनेटाइजेशन ये देखिए साहब जो.
बेसिकली जो लॉयर है खास कर के जो क्रिमिनल. लॉयरिंग करता है उसका प्योर सोल फूड उसका. डीएनए और उसकी ब्लड लाइन जो है वो जो है. जुनून और पैशन पे होती है देयर इज अ फायर. इन हिज. आइज एक अन सेशिएबल फायर यू नो नेवर एंडिंग. फायर इन हिज बेली सो मनी बस साइड आउटकम. होता है मनी इज कोलेट कभी डरे हो केस लेने.
से केस लेने से. मैं जिंदगी में नहीं डरा बिगिनिंग ऑफ द. करियर में भी नहीं नहीं उसकी एक वजह थी. वजह यह थी कि जब मैं फाइनल ईयर एलएलबी में. पढ़ रहा था 1996. में तो मेरी करीबी दोस्त प्रिया दर्शनी. मट्टू उसके साथ एक भयानक हादसा. हुआ और जिस दिन वह हादसा हुआ उस दिन उसने. मेरे साथ साथ लंच किया मीनिंग क्या हुआ.
कैन यू एक्सप्लेन सो प्रिया. दर्शनी के. पीछे एक संतोष सिंह नाम का व्यक्ति जो. हमारे से एक बैच आगे पढ़ता था और उसके. पिता जो है दिल्ली पुलिस में काफी हायर. हाई पोजीशन प थे मेरे ख्याल से शायद. कमिशनर भी नियुक्त होने वाले. थे वो उस लड़की से जबरदस्त ऑब्सेस. था तो वो उसको फॉलो करते रहे हरासर.
रहे कभी-कभी वह गाड़ी चलाकर आती थी वह. गाड़ी पार्क कर ली उसने गाड़ी के पीछे. अपनी मोटरसाइकिल ऐसे लगाई कि जब तक आप. मोटरसाइकिल ना निकले तो गाड़ी नहीं निकल. पाएगी. तो प्रिया जो है. वह हमारे यहां से 1990 91 में माइग्रेशन. हुई तो वो माइग्रेंट कश्मीरी पंडित. कम्युनिटी की थी तो मैं र से आया था हमारी. मेरी पहले उनसे मुलाकात.
नी तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में ही मुलाकात. हुई तो हम दोनों एक स्टेट से ही थे तो. बहुत अच्छी दोस्ती भी हो. गई तो संतोष जो है कि साहब शाम को 4:00. बजे के बाद में उसके फ्लैट में जबरदस्ती. घुस गया और उसके साथ नाजायज रेप किया उसका. गला जो है बिजली की तार से. घोटा उसका मर्डर किया और उसके बाद में एक. हेलमेट लेके उसने उसका पूरा मुंह तोड़.
दिया और उसी दिन उसने मेरे साथ लंच किया. था 121 बजे वह अपनी गाड़ी लेके चली गई और. फैकल्टी ऑफ लॉ कैंपस लॉ सेंटर में हम. दोनों पढ़ते थे मैं अपने हॉस्टल वापस चला. गया अगले दिन जो है टाइम्स ऑफ इंडिया मेरे. हॉस्टल के दरवाजे के नीचे था तो मैंने. बड़ा वुमन मडर्ड इन बसंत कुंज जब नाम देखा.
तो मुं से चीख निकल गई तो मेरे कई दोस्त. आए बोले क्या हुआ मैंने कहा देखिए ऐसे तो. फटाफट एकदम टैक्सी पकड़ के चले गए वसंत. कुंज बड़ा गमगीन माहौल था. वहां तो मेरी दोस्त की डेड बॉडी जो है वो. पोस्टमॉर्टम के लिए गई थी पता चला कि साहब. लोदी रोड क्रिमेटोरियम. में क्रीमेशन होगा वो इमीडिएट वहां चले गए.
मैंने प्रिया की अर्थी को अपना कंधा. दिया तो यह दाया कंधा था मैंने जब देखा तो. उसका मुंह पूरा बैंडेज था तब यह समझ में. नहीं आया कि साहब वैसे शक्ल तो खुली होती. है पर मुझे बड़ा स्ट्रेंज लगा कि यह पूरा. फेस जो है बैंडेज क्यों है छुपाया हुआ. क्यों है र हम लोगों. ने लाश जो है लकड़ पर रखी पूरी फैमिली. बहुत रोने का माहौल था. और इतनी देर.
में मुलजिम जो है संतोष सिंह अरेस्ट हो गए. ही वा अरेस्टेड बाय दिल्ली पुलिस दो चार. दिन के बाद में वह मुकदमा जो है के सीबीआई. को ट्रांसफर हो गया तो कैसे वह अरेस्ट. कैसे हुए इट प्राइम सस्पेक्ट कैसे बने. प्राइम सस्पेक्ट था तो उनके वहां जाने की. वह. मोटरसाइकिल की जो वहां पर वो ट्रेल मिली. तो इमीडिएट केस रजिस्टर होते हुए उसको. दिल्ली पुलिस ने अरेस्ट किया काफी शोर.
मचा तो केस जो है दिल्ली पुलिस से सीबीआई. ट्रांसफर हो गया कुछ दिनों बाद मेरे. हॉस्टल में सीबीआई के एक इन्वेस्टिगेटर आए. इंस्पेक्टर अशोक कुमार. तरियाल बड़ा फ्लैश सा ब्लू सूट उन्होंने. पहना था रेड टाई तो किसी को बोला मैंने. मिस्टर मीर से मिलना है तो उन्होने. बोला रूम नंबर 53 चले जाए तो वो मेरे साथ.
लगभग दो-तीन. दिन काफी टाइम रहे दो-तीन दिन हा तो. लगातार उन्होंने केस की पूरी दलील मेरे से. सुनी और साहब जो है कि भ मैंने पूरा उनको. बताया भा किस तरीके से साल डेढ़ साल से. संतोष जो है भाई प्रिया दर्शनी को तंग. करता था हम तो उसका यह था कि भाई आप मेरे. से शादी कर लो दो बार तो मॉरिस नगर थाने. में फॉर्मल कंप्लेंट भी दे.
दी पुलिस वालों की तरफ से कोई कारवाई नहीं. क्योंकि उसके फादर वास बड़ कनेक्टेड आदमी. थे. जी तो अब इससे ज्यादा क्या. करते तो यह क्रीमेशन विमेन सारा यह बयान. बयान हो गया मैं अपनी एलएलबी पास. करी यूनिवर्सिटी में भी कुछ हंगामा अंगामा. हो. गया खास कोई खास नहीं. तो.
1997 शायद अगस्त की बात है पटियाला मैं. अभी प्रैक्टिस मैंने शुरू नहीं की थी मैं. फर्स्ट ईयर एलएलएम मैं पढ़ रहा था अपने. हॉस्टल में ही र. रहा मेरे पर अदालत पर समन आ गए कोर्ट ने. ऑर्डर भेज दिया कि आना पड़ेगा आना पड़ेगा. और दवाई दे ब तो सीबीआई ने जब मेरे से बात. करी थी और भी भतेरे लोगों से बात करी थी. तो कुछ उनके भी नाम बाम थे तो जैसे ही.
गवाही के समन आए मेरे पर तो इमीडिएट. मेरे पर कुछ लोग आने लगे कि मीर साहब आप. कृपया करके अदालत मत जाए आपके लिए ठीक. नहीं है ओके तो थ्रेट्स आने लगे हां. थ्रेट्स आने लगे क्या थ्रेट्स आने लगे. थ्रेट्स की ये साब की देखिए आप अकेले. कश्मीरी है. या और जो नॉर्थ कैंपस डीयू है इसमें आपको. बिहार के बहुत स्टूडेंट मिले. अब जहां स्टूडेंट कम्युनिटी होती है वहां.
झगड़ा भी होता है तो स्टूडेंट कम्युनिटी. में यह होती है कि साहब अब जो ज्यादा नंबर. में है तो ज्यादा लोग आते हैं तो कभी-कभी. जो है एक आदमी को मारने के लिए 60 70 आदमी. भी पहुंच जाते. हैं तो यूनिवर्सिटी में जो आमतौर पर. स्टूडेंट्स का झगड़ा होता है उसमें एक. बड़ा कॉमन टैक्टिक होता उसको कहते हैं. कंबल. मार आप सर पर कंबल फेंक उसके बाद में दो. चार हकिया. जिसको मारा उसको पता भी नहीं चलेगा कौन.
मार गया और कंप्लेंट भी नहीं हो सकती 50. लोगों में किस पर कर किस पे क्या. करोगे तो इस तरह का जो है माहौल बिल्ड अप. होने लगा लेकिन आहिस्ता आहिस्ता उसमें और. प्रेशर बनने. लगा एक दिन दरवाजे के नीचे कुछ टाइप भी. कोई चीज जो है एक स्लिप मिली उसमें यह था. कि साहब गवाही गवाई दी तो फिर आपके जानो. माल के आप खुद जिम्मेदार है तो अब मैं. वाकई डर गया तो मैं वो लेकर सीबीआई के.
लोदी रोड की मैंने बस पकड़ी तब गाड़ी तो. थी नहीं यूनिवर्सिटी में ही थे तो मैं. इंस्पेक्टर साहब के पास चला गया मैंने कहा. इंस्पेक्टर साहब ऐसा है मेरे पर तो अदालत. से समन आया है और मैं पूरी तरह जो है. गवाही देने का मैं पूरा इंटेंट रखता हूं. पीछे हटने वाला नहीं और मेरे पास ये. थ्रेट्स आ रहे हैं तो आप मेरी कुछ मदद. करें आप तो तो सेंट्रल ब्यूरो ऑफ. इन्वेस्टिगेशन है तो वो साहब मेरे को जो.
है कि साहब लिप सर्विस करें मिस्टर तरियाल. बोले कुछ नहीं गीदड़ बग्गी है तो बस ऐसे. ही है जी आपको कौन हाथ लगा रहा मैं कहा. आपको पता है मैं कहां रहता हूं आप तो मेरे. पास दो दिन आए अपने तो सुबह से शाम तक कम. से कम कुछ नहीं तो 50 कप तो चाय पियो खाना. भी खायो तो हमारे यहां जो है स्टूडेंट्स. में आपस में भाई किसी को मारने के लिए आ. जाओ तो बहुत खतरनाक हो जाता है. अनफॉर्चूनेटली सेंट्रल ब्यूरो ऑफ.
इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से आपको कोई. हेल्प नहीं मिली कोई भी हेल्प नहीं मिली. कुछ भी. नहीं यह भी मुझे नहीं बताया कि मैं क्या. करूं नहीं करूं मैं भा अब मेरा जो. इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर है उसी की. जिम्मेदारी है विटनेस को प्रोटेक्ट करना. इसीलिए हमारे मुल्क में विटनेस प्रोटेक्शन. पे अभी भी हम सबसे ज्यादा कमजोर हैं. क्योंकि उस परे कोई कानून भी नहीं. बना अच्छा सोसाइटी ही दायित्व देती है.
प्रोसीक पर अगर एक मर्डर हो गया घिनौना. रेप हो गया और साहब एक लड़की की हत्या हुई. किसी की भी. हुई तो आपका तो काम है प्रोसीक करना केस. चलाना मुलजिम पे आप क्या केस चलाएंगे जब. आपका गवाही डर गया या आप उसको ना बचा पाए. खैर वापस प्रिया प्रिया दर्शनी पर चलते. हैं तो बड़ा मायूस होकर मैं बस पकड़ के. वापस आ. गया तो अब दो तीन और लोग आ गए जो अगले.
लोगों को भी जानते थे मुझे भी जानते थे. उनमें मेरे एक मित्र भी थे हम तो वो. जबरदस्त पढ़ाई करते थे आईएस अफसर बनने के. लिए. ओके वो आके एक दिन उनकी आंखों में. आंसू बोले साहब माहौल बड़ा खराब हो रहा है. तो आप बिल्कुल अदालत ना. जाए तो मैंने कहा देखिए साहब यह तो बड़ी. गलत बात है आईएएस ऑफिसर ने नहीं वो आईएएस.
की तैयारी कर रहे थे हा लेकिन बड़े अच्छे. संजीदा अच्छे बड़े अच्छे सज्जन व्यक्ति थे. तो जो मुलजिम पार्टी थी उनके साथ भी कुछ. मित्रता थी मेरे साथ भी. थी तो हमारे हॉस्टल में एक डब्बे वाला फोन. होता था जैसे पहले कॉइन डालते थे उसी पर. घर से फोन भी आता था तो मेरे पिताजी जो. है जहां से मैं रहता हूं तो मेरे पिताजी. 255 साल की उम्र में एमएलए थे हम ओके हां.
ही वाज अ वेरी यंग पॉलिटिशियन. 35 की एज में वो कैबिनेट मिनिस्टर थे वो. 15 साल एमएलए रहे 7 साल मिनिस्टर. रहे. तो अक्सर मेरे पिताजी फोन करते थे एक दिन. फोन. आया तो बात हो रही है लोकल लैंग्वेज में. ही बात हो रही है तो बोले आज तब सर्विंग. पॉलिटिशियन थे नहीं तब तो नहीं थे अच्छा. क्योंकि ये तो 90स की बात है तो बाद में. फिर कश्मीर में अच्छे पॉलिटिशियन के लिए.
तो काम ही खत्म हो गया तो बोले आज. तुम्हारी वह आवाज नहीं निकल रही जो. नॉर्मली जिस तरीके से बात करते हो क्या. बात है तो मैंने कहा जी वो जो मेरी दोस्त. थी उसके मर्डर एंड रेप केस में अदालत से. समन आए है तो बोले क्या बात है गवाही के. संबन. है बोले घबरा रहे हो मैं बोला बिल्कुल. नहीं तो मैं बता नहीं चाह रहा था कि डर लग. रहा है डर लग रहा है तो अब इतना डर लग रहा.
मैं हॉस्टल से ही बाहर नहीं निकल. रहा तो मेरे पिताजी जो है वो नेचरली. इंस्टिंक्टिव जो है अभी कु समझ गए तो बोले. एक बात बोले भाई दिल्ली क्या करने गए. थे मैंने बोला जी मैं तो पता नहीं क्या. पूछ रहे मैं अच्छी यूनिवर्सिटी जाना चाहता. था तो हमारे जमाने में या नेशनल लॉ स्कूल. बेंगलोर या दिल्ली यूनिवर्सिटी थी नंबर वन. नंबर टू में यूजुअली ऐसा ही कोई सीन.
था कह रहा यार. बलतकार करेंगे आप गवाही देने से डर. रहे तो वह जब बात मैंने सुनी तो मुझे लगा. कि मुझे लगभग जो है 440 वोल्ट का करंट. मेरे सर पर हिट कर. गया मैंने वो फोन नीचे. रखा और इमीडिएट अपने रूम में मैं गया सोच. विचार करा तो मुझे लगा कि.
साहब अब यह केस में गवाही देना जो. है दिस इज वर्चुअली अ मींस ऑफ एक्जिस्टेंस. फॉर. मी कि अब तो मैं मरने के बाद में भी पीछे. नहीं हटूंगा. तो फिर मेरे एक मित्र. आए तो मैंने कहा जी आपने आप एक खबर भिजवा. दे जो भी करना है कि गवाही देने तो मैं. डंके की चोट प.
जाऊंगा जो करना है कर. लो. हम तो तारीख भी मेरे को याद है 18 सितंबर. 1997 को. मैं सुबह नहा धोके. हम पटियाला हाउस कोर्ट गया मेरे जज जो है. अगर ये आप डिटेल सुनना चाह रहे हैं तो. प्लीज तब के जज जो हैं एक श्रीमान एडिशनल. सेशन जज एस सी मितल थे सीबीआई स्पेशल.
प्रोसीक एक पटियाला हाउस कोर्ट के बड़े. मजे हुए वकील क्रिमिनल लॉयर श्री आर के. कालरा और संतोष सिंह. ने पर हैप्स दिल्ली के सबसे बड़े क्रिमिनल. ट्रायल. लॉयर जिनका नाम है व गुजर गए पंडित आर के. नसीम. साहब नसीम साहब वही वकील है जिन्होंने. जसिका जसिका लाल केस लड़ा. तो बड़े अहम केस उन्होंने लड़े हमने बाद.
में जब वकालत में आए तो उनके खिलाफ भी कई. कई केसों में उनके खिलाफ पेश. हुए मौका भी प्राप्त हुआ उनकी और पूरी. टीम लगभग 10 15 वकीलों की अदालत में मौजूद. थी तो सीबीआई स्पेशल प्रोसीक ने जो बोला. जी आज हमारे पास फला गवाह है तो मैं उस. दिन वह गवाही जो है देने के लिए जब गया. आवाज लगी तो मैं विटनेस बॉक्स में.
गया तो यूजुअली मैं अपनी यूनिवर्सिटी में. विविड डिबेटर था बात करने में पीछे हट रहा. नहीं लेकिन जैसे ही विटनेस बॉक्स में मैं. गया तो मेरी टांगे ही लड़खड़ा नहीं गई आई. ऑलमोस्ट पि माय. पैट्स एकदम डर लगा मेरे को कहा मैं इस तरफ. से जो है केस बहस करता लेकिन मैं विटनेस. में था. साब तो साहब ने इनकरेज किया जज साहब बहुत. अच्छे थे तो उनको नजर आया कि साहब डर रहे.
हा या यूनिवर्सिटी से आया. है इत्तेफाकन तब तक मैं केस को फॉलो भी कर. रहा. था तो पूरी दिल्ली यूनिवर्सिटी से केस में. एक ही गवाह. आया वोह केवल. मेहता जितने भी बाकी लोगों प संबन गए या. जिन लोगों से सीबीआई की बात हुई थी जिनके. बयान लिखे थे. वो साब सब.
बगली एवरी बडी डक एंड रन लाइक अ रट तो. मैंने वह गवाही एस प्रोक्यू विटनेस नंबर. 10 दी गवाही में यह होता है पहले प्रोक्यू. आपको इंट्रोड्यूस करता. है फिर केस के बारे में जितनी आपको नॉलेज. है उसमें सवाल. पूछता और बोलता जी हा जी आपके इसके बारे. में आप क्या बताना चाह रहे. हैं तो मैंने पूरा उसमें जो है भी एकएक. इंसिडेंट का मैंने बयान.
दिया साथ में मुझे यह भी पता था कि मैं इस. केस का एक बड़ा अहम गवाह होने वाला हूं. क्योंकि जो मोटिव था उसको एलिमिनेट करने. का उसका कत्ल करने का उस परे मेरी वाहिद. गवाही. थी क्योंकि जो उसका कंडक्ट था पिछले दो. साल का वो आपने देखा बहुत क्लोज वो मैंने. क्लोज देखा एक दो बार हमारा आपस में. यूनिवर्सिटी में धक्कम धक्का कुछ गाली.
गलोज भी हुई हम कुछ वो बोला कुछ मैं. बोला तो उनका यह था कि भज ये मिस्टर मीर. जो है क्योंकि प्रिया मेरे ही स्टेट से थी. हम यूजुअली ब साथ में चाय पी ली कुछ साथ. भी गए उसको टेबल टेनिस खेलने का बड़ा शौक. था हम और बहुत अच्छा गाना भी बहुत अच्छा. गाती थी वकील भी वो बहुत अच्छी बनती हम. क्योंकि फेयरलेस कैरेक्टर थी हम. हम. तो बिल्कुल उसको नापसंद था 10 लोग आ गए.
बीच में गुंडागर्दी करने यहां से भी दो. चार खड़े हो गए तो कुछ जो है आपस में. झगड़ा बगड़ा कुछ इधर कह लो थोड़ा गाली गलो. च होके हाथापाई इतनी नहीं हुई दांत वात. किसी के नहीं टूटे सो ओबवियसली ही डिसलाइक. मी ओबवियसली आई डिसलाइक हिम हां तो उसमें. क्या दिक्कत है यह तो नेचुरल ह्यूमन. सेंटीमेंट है बट ये सामने वाले वकील ने. क्वेश्चन नहीं किया तो अब उस परे बात आती.
है जब क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू हुआ तो. पंडित आर के नसीम साहब जो हैं वो वैसे ही. दिल्ली के बल्कि मैं यह कहूंगा कि ही वुड. हैव बीन ऑफ हिज टाइम अपने वक्त के वो. हिंदुस्तान के वन ऑफ द बेस्ट क्रॉसिंग. सेमिनार्स होते मैंने देखा उसने तो मेरी. तो आप छोड़िए वो ऑलमोस्ट मेरा डीएनए मैप. कर गया था मैं खाता कहां हूं जाता क हूं. मेरे 10 साल 10वीं में मेरे पे मार्क्स. क्या थे हम फर्स्ट सेमेस्टर में क्या थे.
मेरी सोच क्या है मेरे विचार क्या रहे हैं. मैं क्या डिबेट बोलता हूं हम इस पे सारा. उन्होंने लाइन अप किया था हम उनके पास एक. बहुत अच्छी स्ट्रेटेजी थी स्ट्रेटेजी उनकी. यह थी कि साहब जिसका कत्ल. हुआ वह कश्मीर की रहने. वाली यस कश्मीरी पंडित माइग्रेटेड जो गवाह. है ये कश्मीरी मुसलमान ह. यह आपस में दोस्त भी. हैं तो जो गवा साहब आए.
हैं यह रंजिश और दुश्मनी में. आए तो इनको डिस्क्रेडिट कर लिया. जाए इनकी गवाही रद्द कर ली जाए जो पूरी. लाइन ऑफ क्वेश्चनिंग थी वो इसी को दिखाने. के लिए थी कि किसी ना किसी तरह आपका यह. मोटिव साबित कर दो कि मैं रिवेंज के लिए. मैं तो जो है रिवेंज में आया हूं तो उससे. जो मेरी नेचुरल गवाही है वो जो साब है वो. ओवर शैडो हो जाती वो रूल आउट हो जाती अन.
बायस नहीं. बचेगी ये बहुत अच्छा लफ्ज आपने यूज़ किया. हम क्योंकि जज को वही गवार पसंद आता है जो. बायड ना हो हम जिसकी एक नेचुरल टेस्टिमोनी. हो. हम मैंने ये लाइन ऑफ एक्शन पकड़ा और उसको. मैंने डॉज करना शुरू. किया जितना क्रॉस होता रहा उतना ही नसीम. साहब जो है. नर्वस होने.
लगे यह मुझे नजर में आया उतना उनका मुंह. लाल होने. लगा क्योंकि उनको यह पता था कि अगर यह. लड़का गवाही दे गया तो यह मेरे डिफेंस के. केस को बड़ी लंबी चोट पहुंचाने वाला. है इसलिए जो प्राइमरी टारगेट था थ्रेट. करने का एलिमिनेट करने का वो वहीं से चलकर. आ रहा. था क्योंकि क्या होता है जी हमारे पास. किसी भी डिफेंस लॉयर के पास जब एक क्लाइंट.
जाता है और केस डिस्कस करता है तो वह. हमेशा हमें समझ में आता जी भाई कौन सा इस. केस में गवाह है जो आपके केस के लिए बहुत. खतरनाक. है तो तो हम क्लाइंट को बता देते हैं हम. कि साहब यह जो गवाह है इसकी टेस्टिमोनी. बड़ी वाइटल. है इसको या तो चेंज करो या रुकवा दो या जो. भी जैसे भी आप करना चाह रहे या इसका कोई. ऐसा मैकेनिज्म बताओ कि हम क्रॉस.
एग्जामिनेशन में इसको नाकारा करते कि इसकी. गवाही की वैल्यू नहीं बचे बिल्कुल. तो उन्होंने स्टार्ट करा वहां से हा हटाना. फिर इस साब जो है तो क्रॉस एग्जामिनेशन. में जितने सवाल और बढ़ते गए उतना उनका केस. कमजोर होता. गया आठ 10 पेश में मेरा पहला जिसको प्रथम. बयान कहते हैं या अंग्रेजी में हम सको. कहते हैं एग्जामिनेशन इन. चीफ क्रॉस जो है वो 13 14 पेजों में बढ़ता.
गया पढ़ता. गया एक दो सवाल उन्होंने बीच में जो है वो. गलत. पूछे अब क्रॉस एग्जामिनेशन में वकील कभी. भी गवाह को ओपन एंडेड क्वेश्चन नहीं. देता तो उस परे तो मैं माइलेज ले लूंगा यस. नो पे हा उसपे यस नो पे तो ठीक है लेकिन. अगर आपने भल अगर ओपन एंडेड पूछ लिया तो. देन आई कैन डू अ लॉट ऑफ फिलिंग इन मैं.
अपनी कहानी बता सकता हा मैं आपके केस को. और बिगाड़ दूंगा वो बिगड़ता कैसे है कि. उसमें जज बाद में यह कहता है कि देखिए. आपके गलत क्रॉस एग्जामिनेशन की वजह से अगर. उसका चीफ इफेक्टिव नहीं है तो आपने क्रॉस. इफेक्टिव करवा. दिया आप इस बात को समझ में आया कि साहब. अगर मेरे पहले बयान में दम नहीं है लेकिन. आपने ऐसे कुछ बेवकूफ टाइप सवाल पूछ लिए कि. आप अपने मुलजिम को बचाने के बदले में उसको.
बिगाड़ गए उसको और फसा गए क्योंकि गवाही. तो दोनों है और जज दोनों देखेगा जहां से. स्ट्रेंथ मिलेगी वहां से उसको पकड़ के फिर. आपके लिख आपके खिलाफ लिखना शुरू. करेगा 141 दिनों पेजों में गवाही खत्म हुई. मैंने गवाई खत्म हुई और मैंने अदालत का. शुक्रिया किया. जो अदालत के बाहर हुआ वो मेरे दिमाग में.
अभी तक छपा हुआ है क्या. हुआ तो ये जो दो केस थे हमारी जो पूरी. हमारी जो क्रिमिनल हिस्ट्री रही है केसों. की दो केस सबसे ज्यादा पहले मीडिया. हाईलाइट जो हुए या जिसमें हम कहते हैं. मीडिया. इंट्रूजन वो जेसिका लाल था और प्रिया. दर्शनी. था इसमें मीडिया का बड़ा इंट्रूजन था. उस परे कुछ स्टिंग ऑपरेशन भी हुए बाकी. चीजें भी ई मीडिया में रिपोर्टिंग जबरदस्त.
थी तो साहब अदालत के बाहर तो जो प्रिया के. फादर थे श्री सीएल मटू वह. रिटायर्ड चीफ इंजीनियर. थे जम्मू कश्मीर से माइग्रेट हो गए. अनफॉर्चूनेटली. यह बाहर. आए तो यह जोर की इन्होंने मेरे को झप्पी. मारी मोटे मोटे आसू इनके गिर. रहे मेरा माथा चूमा यह मेरे पिताजी को.
जानते थे मैं इनको नहीं जानता था तो बोले. मुझे आज यह समझ में आ रहा है कि आज आप. यहां क्यों. आए अब वह आंसू क्यों मोटे मोटे. गिरे वह इसलिए गिरे. राज कि वह कभी अपनी जिंदगी में यह तसव्वुर. नहीं कर सकते. थे वो यह एक्सपेक्ट नहीं करते थे कि उसकी. रेप. मडर्ड फेस डिस्ट्रॉयड बलज लड़की की गवाही.
देने के लिए कश्मीर का कोई आदमी. आएगा जो उसके दिल्ली के दोस्त थे जिनके. साथ वह पार्टी करती थी उनमें से एक भी. आदमी उसकी गवाही देने के लिए नहीं आया फिर. उनकी और मेरी तो मैंने उनको वापस गले. लगाया मैंने कहा मटू साहब आप घबराए मत. इसको हम फांसी पर लटकाए. तो मैं. फिर बितर उस केस को फॉलो करता था इसको.
यहां रोक के मैं वापस आपके सवाल पर आता. हूं कि क्या कभी डर. लगा केस लेते हुए लड़ते हुए कभी डर नहीं. लगा हम क्योंकि मैंने अपनी प्रैक्टिस से. पहले शुरू करने से पहले जो यह गवाही दी. इधर डर उसमें मैंने पूरा अपना डर मार. दिया अब मैंने सोचा इससे ज्यादा क्या हो. सकता है हम यहां तो मैं मौत के मुंह में. से बच.
गया और इत्तेफाकन कोई हमला भी नहीं. हुआ जो लोग वो गा रहे थे एमिसरीज भी आ रहे. थे लेकिन कुछ सोच विचार समझ में आ गया. होगा कि जीी अब मिस्टर मीर पर हाथ डाल. लिया तो और ही हमारे जो है हालात खराब हो. जाएंगे बट किसी ने हाम नहीं किया. कभी उसमें तो फिर कोई हाम तो हुआ नहीं मैं. केस को तो फिर फॉलो कर. गया तो मैं कई बार उस केस को जब मैं केस.
नहीं लड़ रहा था या मेरे पर टाइम था और वह. केस चलता था तो मैं अदालत में बैठता था अब. मेरे बैठने से भी जो है वहां पर बड़ा टेरर. हो जाता. था तो जीपी थरेजा साहब ने वो केस जज. किया उसमें उन्होंने सजा करी इसमें. उन्होंने संतोष सिंह को एक्वेट. किया मुझे बड़ा अफसोस. हुआ छोड़ दिया हां हम सीबीआई ने उसकी अपील. फिर हाई कोर्ट.
करी हाई कोर्ट में मर्डर केस की अपील. हमेशा दो सीनियर जजों पर जाती. है तो अपील की बहस शुरू हुई तब तक मैं फुल. फ्लडेड वकालत में आ गया. था तो अक्सर मेरी मट्टू साहब से मुलाकात. होती थी मेरी खैरियत भी पूछते. थे तो हमारी बेंच लगी जी हमारे बड़े. लेजेंड जज थे नरे बल जस्टिस आर एस सोड़ी. उनकी लीड बेंच थी उसी में अपील शुरू हुई.
नसीम साहब बहस कर रहे हैं सीबीआई के वकील. बहस कर रहे हैं अता उसमें फैसले का दिन. आया फैसले के दिन मैं उसी अदालत में मौजूद. था और फैसला यह हुआ कि क्विटल सेट. साइड संतोष सिंह कनविक्टेड उधर हाथ के हाथ. तब तक वो प्रैक्टिस में भी आ गया था हाथ. के हाथ उसको कड़ी डाल के कस्टडी में ले गए. और साहब आर्गुमेंट ऑन सेंटेंस पर केस लगा.
जब आपने कन्वे करी अब सेंटेंस क्या करेंगे. कितने टाइम तो मर्डर केस में दो ही सजा हो. सकती है या सजाए मौत या आजीवन का. रवास तो सेंटेंस ंग पर आर्गुमेंट. हुई तो फिर मटू साहब मेरे से मिले तो आपस. में हम बात भी कर रहे. थे तो मैं उस केस में कोई वकालत तो कर. नहीं पाता क्यों क मैं तो वैसे ही गवा था. मेरे पर इजाजत भी नहीं थी लेकिन सपोर्ट.
मैं उनको कर रहा था तो जस्टिस सोड़ी ने. संतोष सिंह को सजाए मौत दी जो एक बड़ा रेर. ऑर्डर है फांसी नहीं होती हमारे य नहीं. आमतौर पर सिंगल मर्डर में नहीं होती. रेयरेस्ट ऑफ रेर केस करना पड़ता है तो जब. वो बहस हुई तो उन्होंने कहा देखिए साहब. मैं आपके क्लाइंट को सजाए मौत इसलिए दे. रहा हूं क्योंकि यह एक ऐसा ज ला है इसने. लड़की के साथ एक तो रेप किया फिर गला घोट.
के बिजली की तार से उसका गला गोटा उसके. बाद में भी इसको तरस नहीं आया और हेलमेट. लेकर उसने दाए दाए दाए दाए दे उसका पूरा. मुंह तोड़. दिया तो यह आदमी सजाए मौत देने लायक. है तो कलम लिख के सजाए मौत मिली उसकी अपील. फिर संतोष सिंह ने सुप्रीम कोर्ट करी. और साहब वो फिर जो है डेथ टू लाइफ कन्वर्ट.
हो गया कन्वे वही. रही तो प्रैक्टिस शुरू करने से पहले ही. वकालत शुरू करने से पहले ही मेरी जिंदगी. में य बड़ा अहम टू मल्टस मौका. हुआ तो मुझे यह एक किस्म से आईना एक मिरर. मूमेंट. था तो मेरे लिए दो ऑप्शन थे या तो मैं भाग. जाऊ और या तो मैं डट के गवाही. दू तो अगर मैं वह गवाही नहीं देता तो मेरे.
ख्याल से हर दिन मैं सुबह जब शेव करता तो. शायद आईने पर थूक. लेता रिग्रेट तो कुछ मेरी तरबियत कुछ मेरा. डीएनए कुछ मेरी सरकमस्टेंसस ऐसे हुए उसके. बाद में जब काम शुरू किया कोई भी केस किया. जो भी जैसे भी. आया कई बार जो है बड़े हार्ड क्रिमिनल्स. के केस लड़े ऐसे ऐसे मेरा एक क्लाइंट. जिसने सात मर्डर. किए तीन में मैंने उसको क्विट कराया चार.
उसने खुद सेटल. कि फिर मुझे डर कभी नहीं. लगा तो कुछ मेरी वकालत का कुछ मेरे नजरिए. का जो है प्रिया दर्शनी में गवाही देनी जो. है एक बड़ा अहम पर्सपेक्टिव. रहा अभी भी मैं उसको मानता हूं सो वहां से. डर खत्म हो गया बिल्कुल खत्म हो गया. क्योंकि करियर फॉर्मली स्टार्ट होने से. पहले ही आपने देखा कि फेयरलेस बनने का.
रिवर्ड क्या होता है बिल्कुल वो बात थी. 196 97 की हम आज 2024 है आज भी हमारे देश. में विटनेस प्रोटेक्शन रेजीम पे कोई कानून. नहीं है मैं उसी पे आ रहा था हां मेरा एक. क्वेश्चन उसी पे था. कि इंडिया में जी मैक्सिमम केसेस आए दिन. हम सुनने में आता है हमको हां हां कि जहां. पर कोई भी अगर बड़ा एक पावरफुल इंसान होता.
है हां उसके अगेंस्ट केस लड़ा जा रहा है. जी तो उसमें सारे विटनेस को खतरा हो जाता. है और धीरे-धीरे विटनेस की मिसिंग डेथ. मर्डर होना बहुत न्यूज़ आने लग जाती है. बिल्कुल आती राइट देवज जैसे आसाराम बापू. केस उसी पे मैं आ रहा था तो आसाराम बापू. केस एगजैक्टली राइट अगर आप उसमें देखो तो. उसमें था कि तीन विटनेस की डेथ हो गई पांच. इंजर्ड हो गए एक मिसिंग हो गया एक मिस फिर. पुलिस एजेंसीज जो उसके ऊपर जो सर्च कर रही.
थी जो एक्चुअली ट्राई कर रही थी कि किसी. ना किसी तरह उन्हें कुछ इंफॉर्मेशन मिले. और वो इंटेंसिव इन्वेस्टिगेशन करें उनको. भी थ्रेट्स आने लगे बिल्कुल आने लगे एंड. ये सब ऐसा सिर्फ इस केस में नहीं हुआ बहुत. सारे केसेस में होता है इनफैक्ट इसका एक. लूस डिपिक्शन जो नॉर्मल लोगों को हम जैसे. लोगों को देखने को मिलता है वो बॉलीवुड. मूवीज में देखने को मिलता है हां बिल्कुल. कि जब भी विटनेस प्रोटेक्शन की बात आती है. तो या तो कोई ट्रक से उड़ जाता है कोई. कहीं हो जाता है च इज वेरी आपने देखा होगा.
गवाह आ रहा है ट्रक चढ़ाया चढ़ा दिया उड़ा. दिया उड़ दिया एक्सीडेंट में मारा गया. थ्रेट दे दिया उसे रातों रात रीलोकेट करा. दिया उसको देश छुड़वा दिया बहुत सारे ऐसे. केसेस होते हैं और फिर अगर कभी वह किसी. तरह प्ली करके कोई वकील गवर्नमेंट से या. पुलिस से या कोर्ट से उन्हें प्रोटेक्शन. दिलवा भी दे हां जी तो उन्हें एक ऐसा ऐसा. कांस्टेबल दिया जाता है विथ अ गन मैन जो. मूवीज में तो ऐसा दिखाते हैं कि कुछ काम. का नहीं है मतलब जैसे एक पिक्चर में वो.
बड़ा ही बड़ हु आदमी था एगजैक्टली जॉली. एलएलवी में सो उसमें ऐसे ही दिखाते कि एक. बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड जैसा बहुत. ही पतला सा आदमी कि जिसको आप कोई भी चलते. चलते वो क्या प्रोटेक्ट करेगा वो अपने आप. को प्रोटेक्ट करने की क्षमता नहीं रखता. एगजैक्टली तो ये विटनेस मतलब विटनेस. प्रोटेक्शन के नाम पे तो डर है मतलब कुछ. है बिल्कुल खत्म है मैं आपको इसके दो. एग्जांपल दूंगा मैं आपको एक आपकी बात सेर. ना एक चीज बताऊंगा बहुत ये क्यों मैंने. क्वेश्चन लिखा और क्यों मे को जानना था. इसके बारे में हा मैं एक पार्टी में गया.
था जी जहां पर जजेस लॉयर्स बहुत सारे लोग. थे राइट काफी हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के. लोग थे वेरी इंटरेस्टिंग पीपल राइट एंड. वहां प मैं एक बहुत इनफ्लुएंशल इंसान से. मिला जी एंड मैंने उनसे ये पूछ लिया कि. यार आप डरते नहीं हो क्या इन सब चीजें. करने में मतलब बिकॉज एट द एंड ऑफ द डे. सोचो अगर विटनेस को इतना डर लगता है आप तो. जज साहब हो कि आपको तो आए दिन खतरा होता. होगा कोई आपका बेटा बेटी आपके से खुल्ला. घूम रहे हैं क्या लाइक बिकॉज मूवीज में य.
दिखाते हैं ड़ा दे किडनैप करें हां. बिल्कुल एंड उन्होंने मुझे बात बोली कि वच. वाज वेरी अनऑथेंटिकेटेड. जो कि जिस इंसान ने देखा ना उसके साथ. गुजरी है ना उसने किया है ना उसे फैसला.
सुनाना है लेकिन उसने देख लिया अब उसको. रोज अपने मोरल से कॉम्प्रोमाइज करना है कि. मैं कोर्ट में जाके क्या बताऊं और अगर मैं. बताता हूं तो मेरे साथ क्या होगा नहीं. बताता हूं तो मैं मेरे कॉन्शियस के साथ. कैसे रहूंगा एंड वो इसी के अंदर लाइफ टाइम. करते रहता है क्योंकि उसके हाथ में तो कुछ. नहीं है जजमेंट अगर फॉर में आया तो भी वो. खुद को बोलेगा हो सकता है मेरी वजह से एक. इनोसेंट को जेल हो गई और अगर अगेंस्ट में. आया तो उसने बोला मैंने सही नहीं बोला. होगा इसीलिए वो बच गया तो बोलता विटनेस का.
होना सबसे दर्दनाक बात है उसको सबसे. ज्यादा डरना चाहिए एंड अनफॉर्चूनेटली इस. कंट्री में ज्यादा विटनेस को बचाने के लिए. कोई चीज भी नहीं है तो तुम ये सोचो बेटा. तुम जस्ट तो ठीक है बन जाना कभी बन जाए तो. लेकिन विटनेस बहुत रेर होता है और कभी बन. गए तो तुमको तब पता चलेगा क्या होता है. बहुत परेशानी होती है एंड दैट इज सो डीप. कि कोई एक जज कैसे बता रहा है मुझे ये बात. इमेजिन लाइक आई कांट एक्सपेक्ट मैं सोचता. हूं कि जज तो मुझे एंकरेज करेंगे ऐसी चीज. बट ही वाज टेलिंग मी रियलिटी सोय ये वाकई.
बहुत बहुत बड़ी रियलिटी है दुखदाई भी है. आसाराम का जो केस है उसमें भारत सरकार ने. तो आज तक विटनेस प्रोटेक्शन रेजीम पर कोई. कदम नहीं उठाए ना कोई कानून. बनाया नए कानून में भी इसका कोई खुलासा. नहीं. है हमारे एक बड़े मशहूर जज जो दिल्ली हाई. कोर्ट के चीफ जस्टिस. थे और बड़े.
अहम हाई मोरल. फाइबर अपने जमाने के कैंपस लॉ सेंटर के. टॉपर टॉप इंटेलेक्चुअल इन लीगल लुमिनरी. बहुत अच्छे नरे बल जस्टिस अर्जुन कुमार. सीकरी यह जब सुप्रीम कोर्ट तशरीफ लेकर. गए तो जो आपने अभी आसाराम के केस में जो. अगला गवाह हिट लिस्ट पे था.
हम उसकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक रिट. पिटीशन दाखिल. हुई उसको कहते हैं महेंद्र चावला बना में. हम गवर्नमेंट ऑफ इंडिया तो आमतौर पर उसको. हम लिखते हैं महेंद्र चावला वर्सेस यूनियन. ऑफ इंडिया आम भाषा में महेंद्र चावला बना. में भारत. सरकार इस याचिका को जस्टिस सीकरी की बेंच. में पेश किया गया. वकीलों ने बड़ा अच्छा काम. किया जस्टिस सीकरी ने अपॉर्चुनिटी दोनों.
हाथों से ग्रैब करी और विटनेस प्रोटेक्शन. रेजीम पे जजमेंट के. जरिए डायरेक्टिव दे दिया क्या डायरेक्टिव. यह दिया कि साहब हर इंपोर्टेंट केस. में यह आईओ की जिम्मेदारी है आईओ मने. इन्वेस्टिगेटिंग. ऑफिस कि वो यह देखे कि जो गवा व अदालत में. पेश कर रहा. है उसके साथ थ्रेट परसेप्शन है या नहीं है.
और यदि तो थ्रेट परसेप्शन है तो आईओ के. पास यह पावर है कि वह सरकार से बजट की. एलोकेशन के लिए ग्रांट करें सरकार पैसा. देगी सरकार के खर्चे पर जो गवाह है वह. सीक्रेट लोकेशन पर रखा. जाएगा और उसके साथ 2 आवर्स गन मैन. रहेंगे मैंने अपने करियर में विटनेस.
प्रोटेक्शन रेजीम बेस्ट जो. देखी वह मैंने देखी उन्नाव रेप केस में. अगर आपने नाम सुना हो कुलदीप सिंह सिंगर. जो है आज की डेट में सजा अफता मुलम में. उनकी अपील अभी फमर एमएलए एमएलए बीजेपी. के गांव माकी के वह रहने वाले हैं उनाव. जिला. है वहां से वो कई बार एमएलए वहा का पावर. पॉलिटन उनके केस में एक बड़ी विचित्र.
कहानी. हुई जो उसमें विक्टिम पार्टी. थी वह अपनी छोटी मारुती गाड़ी में वकील. साहब के साथ कहीं जा रहे थे सड़क के इस. तरफ से ट्रक. कूदा और मारुती पर गिर गया वकील साहब भी. गुजर गए दो तीन लोग गुजर गए टीवी पर. हंगामा. हुआ कि पावरफुल पॉलिटिन ने पूरे विक्टिम. के खानदान को खत्म करने की कोशिश. करी जस्टिस रंजन गोगोई उस टाइम पर चीफ.
जस्टिस ऑफ इंडिया थे यह मीडिया का. इन्फ्लुएंस होता तो साहब ये जब ट्रक कूद. गया इतना प्रेशर बना कि जस्टिस गोगोई ने. कुलदीप सिंह सिंगर के जितने भी केस चल रहे. थे इंक्लूडिंग दिस रेप केस जो लखनऊ स्थित. सीबीआई स्पेशल कोर्ट के तहत चल रहे थे सब. दिल्ली ट्रांसफर कर. लिए और नाम जदा करा और जस्टिस डी के शर्मा. जो उस टाइम पर डिस्ट्रिक्ट जज 30 हजारी.
कोर्ट थी कोर्ट को संभाल रहे थे कि आप. मुकदमा चलाएंगे और उनको हिदायत दी कि 40. दिन में मुझे एक मर्डर केस और इस रेप केस. पर फैसला. चाहिए यह बड़ा कम ऑर्डर होता. है क्योंकि अगर मर्डर केस में 60 गवाह है. तो 40 दिन में केस कैसे खत्म करोगे अब इस. रेप में ही लगभग 30 गवा. थे तो लखनऊ से कुछ वकील साहब तशरीफ लेकर.
आए बोले मीर साहब वी वांट यू टू लीड. अस तो बोले आप दोनों केस लड़े मैं पागल. मैं दो केस कहां से लडूंगा मैं कहा आप वो. केस बताओ जो आपको सबसे ज्यादा मुश्किल लग. रहा है वो केस मैं लीड करूंगा हम उन्होने. बोला आप ये रेप केस लड़ो तो आप फॉर लड़े. अगेंस्ट लड़े मैं फॉर लड़ा फॉम फॉर कुलदीप. सिंह सिंगर ओके उनको मैंने डिफेंड किया. यूजुअली मैं डिफेंस लॉयर हूं मैं प्रोसेक.
लॉयर नहीं कभी-कभी कंप्लेनेंट की तरफ से. भी हम लोग पेश होते हैं लेकिन मोस्टली जो. है मैं डिफेंस करता. हूं कुलदीप सिंह सेंर का जो भी केस हो. मैंने. पढ़ा उसमें हर गवाह पे दो गन मैन और. सीक्रेट लोकेशन जो दो गन मैन है उनके. दोनों हाथों में एक 47 तो यह मैंने अपनी. कुछ साल पहले में हम लोगों ने केस. लड़ा केस में सजा.
हुई अपील अभी बहस हो रही. है यह महेंद्र चावला का काम है जी इस पर. भी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कानून बनाया. भारत सरकार ने कुछ नहीं. किया यह अफसोस की बात है सो कंपलीटिंग ट. केस गोइंग बैक टू तो आपने केस लड़ा और. वहां पर आपको लगता है विटनेस प्रोटेक्शन. बहुत स्ट्रंग मिला बहुत स्ट्रंग मिला तो. वहां पर य कि जो आपके क्लाइंट थे उन्होंने. ट्राई किया कि सामने वाले को थ्रेट कर दो. किसी तरह से उस थ्रेट तो जो है इन्हेरेंट.
उसके अंदर जो है लड़की के बापे भी हमला था. तो कैसे विटनेस प्रोटेक्शन स्ट्रंग हुआ. क्योंकि उसने तो हमला किया उस परे अलग केस. था जो बाकी गवाह थे जो उसके लूज एंड्स जो. है भर देते या अगर वो टूट जाते या वह. गवाही नहीं देते तो मुलजिम का केस और. बेहतर हो जाता हर गवाह पर दो गन मैन. सीक्रेट लो आप गवाह को अप्रोच भी नहीं कर. पाएंगे. यदि तो आप करना भी चाहे तो वहां पर जो.
इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर था उन्होंने बहुत. अच्छा जॉब किया बहुत अच्छा करा एक मिस्टर. त्रिपाठी थे सीबीआई के अफसर लखनऊ से तशरीफ. लेकर आए. थे और बहुत अच्छा काम किया उन्होने हर अहम. गवाह को उन्होंने प्रोटेक्शन सीक्रेट. लोकेशन पर. रखवाया और गवाही के साथ 24 घंटे दो. सिक्योरिटी और सिक्योरिटी ऑलमोस्ट. सीआरपीएफ इस तर. स्ट्रंग स्ट्रांग. सिक्योरिटी इस तरह का और उसके लिए उनका.
बजेट री एलोकेशन था उनके जेब से कुछ नहीं. जाना अगर वहां पे कोर्ट और. इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर सीबीआई के जी अगर. वो सही टाइम पर सही टाइप का प्रोटेक्शन. नहीं देते तो आज वो बाहर हो सकते थे नहीं. इसको उस एंगल से नहीं देखा जा सकता जनरली. जब आप एक स्ट्रांग पॉलिटिकल आदमी. बिजनेसमैन. सर हेली इफुल हैवी वेट चाहे वो पैसे का. चाहे वो इन्फ्लुएंस का चाहे वो पॉलिटिशियन.
है उसमें इस तरह के दबाव जो है वह लाजमी. है वो कहीं ना कहीं से आते ही आते. हैं चाहे आप उसको ऑर्केस्ट्रेट करें या. नहीं करें बात अलग. है उसके अंदर जो मेरा क्लाइंट है वह तो. जेल में बंद था मेरा केस जो है मेरिट पर. बड़ा स्ट्रांग. था बहुत स्ट्रांग था क्या था मेरा केस जो. उसके अंदर ये था था साहब की जो वो लड़की. थी उसकी कहानी जो है बड़ी अजीबोगरीब.
थी एक तो उसने क्या करा जो कंप्लेनेंट. बिटिया थी उसने एलेज करा कि साहब मेरे साथ. यह जो रेप किया बीजेपी एमएलए कुलदीप सिंह. सेंगर ने जब वह अदालत में आई तो उसने कहा. जी 4 जून 2017. को नेक्स्ट डोर नेबर है शशि. सिंह वह मुझे वहां नौकरी दिलाने के बहाने.
से ले गई जहां पर कुलदीप सिंह सगर ने मेरे. साथ. रे यह बात उसने कभी रिपोर्ट नहीं करी. इमीडिएट. इसके बाद में कोई 111 जून. को यह. लड़की इसने एक नया केस दर्ज किया कोई 1819. में 181 जून को नया केस दर्ज किया उस केस. के मुताबिक इसने कहानी बनाई कि साहब शशि. सिंह और उसकी लड़की ने मेरे को 11 जून.
2017 को रात के 10 बजे फोन करके बुलाया कि. एक गाड़ी तैयार है आपकी कानपुर में नौकरी. लगने वाली है मैं गई और गाड़ी में उनका. लड़का था ड्राइवर था और कोई व्यक्ति था. उन्होंने मेरे साथ गैंग रेप कर. लिया इस केस की जो है रिपोर्ट हुई 1920. में. उसमें लड़की का एग्जामिनेशन हुआ लड़की को. मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जिसको.
हम आमतौर पर कानूनी जुबान में हम कहते हैं. कलम बंद बयान इसको थोड़ा एक्सपेंड में. करता. हूं रेप केस में निर्भया की जजमेंट के बाद. यह अनिवार्य है कि जैसे ही कोई. लड़की रेप को रिपोर्ट करें विदन 48 अवर्स. आपने उनको मजिस्ट्रेट के सामने लेकर जाना. है और उनका 164. सीआरपीसी साइंड स्टेटमेंट रिकॉर्ड कराना.
है ताकि कल को वह. अपने साइंड स्टेटमेंट से. हटाइए तो जज मुलजिम को तो छोड़े तो पहले. आपकी ही सजा. करेगा जब उसने वो बयान भी दिया तब भी उसने. वह चार तारीख के इंसिडेंट का कोई जिक्र ही. नहीं.
किया चार महीने के बाद. में उसने योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी. लिखी अपने अंकल के जरिए जहां पर उसने. बोला कि मेरे साथ जो है उस चिट्ठी में. उसने लिखा जी मेरे साथ कुलदीप सिंह संगर. ने दो बजे दिन के रेप. किया एक जगह उसने मीडिया में इंटरव्यू. दिया जी मेरे साथ रेप 6:00 बजे हो. गया अदालत में उसने बोला जी ठ से ढ़ हो. गया और जब मैंने उस केस के साक्ष्य.
देखे तो मैंने यह पाया कि साहब यह 752 से. 81 तक तो फोन पर बात कर रही. थी तो क्रॉस एग्जामिनेशन बड़ा तगड़ा. हुआ और सीबीआई के केस के हमने जो है जी. उसके हमने छुड़वा. दिए लेकिन केस इतना सेंसिटिव था. कि मैं जो जज साहब से एक्सपेक्ट कर रहा था. वो मेरी एक्सपेक्टेशन पूरी नहीं हुई चलिए.
कोई बात नहीं तो फिर कैसे बड़े केसों में. जर भी डर जाते. हैं तो ऐसे फिर मैं कैसे अगर स्टोरी मैच. नहीं हो रही थी फिर भी जज ने सजा करी हा. तो कैसे करी कुछ तो पाया होगा हा तो. उन्होंने जो लड़की का बयान जो बात थी. टेलीफोन करने की या जो सीडीआर मिला था. उसको नकार. दिया कि मैं यह करने के लिए तैयार नहीं. जबकि उस सीडीआर पर सीबीआई खुद ही रिलाई कर.
रहा. था वो मेरा डॉक्यूमेंट नहीं था आप समझे. बात को ट वाज नॉट अ डॉक्यूमेंट गट बाय मी. इन डिफेंस मैंने वो साक्षी पेश नहीं किए. वो साक्ष्य भी सीबीआई ही पेश कर रहा था बट. कहीं पर कुछ तो प्रूफ हुआ होगा तभी इतना. बड़ा केस. बना अब मैं आपको ऐसे बता दूं कि साहब जो न. वट ग्राउंड उन्होंने मान लिया उने जो. लड़की का बयान है उसी के पे ऊपर सजा कर ली. उसके कुछ तो एविडेंस होना चाहिए उसम देखिए.
ऐसा है कि साब जो मेडिकल एविडेंस था वो. निल था नहीं था कुछ कुछ भी नहीं था उस केस. में लड़की के टूटे फूटे बयान के अलावा कुछ. भी नहीं. है और केस मेरे मुताबिक टोटल झूठा. है कंपलीटली अ फाल्स केस जिसको मैंने. बियोंड रीजनेबल डाउट अदालत में क्रॉस. एग्जामिनेशन के जरिए साबित किया एंड व्हाई. डू यू थिंक सो कि ये बेसलेस केस है.
क्योंकि. देखिए इसका एक मैं आपको एग्जांपल बताता. हूं वेरी सिंपल बिकॉज कोई क्यों झूठ. बोलेगा एक एमएलए के ऊपर कि यार इसने मेरे. साथ ये किया और क्यों फालतू पड़े में एक. प्रॉब्लम लेगा क्योंकि एक वो छोटे से गांव. में उसे पता है कि अगर मैं इतना स्ट्रांग. स्टेप उठाऊंगी तो मेरी लाइफ और हेल बनने. वाली है बेटर तो होगी नहीं मेरे साथ ना.
अच्छा ट्रीटमेंट गांव में होगा मुझे थ्रेट. है मेरे फादर की लाइफ का थ्रेट है मेरे को. मेरी लाइफ का थ्रेट है पता नहीं कितनी. सारी चीजें एंड प्लस उसके बाद इस कार से. जीना जीना लाइफ टाइम की ओके अब सोसाइटी. मुझे एक तरीके से देखेगी राट तो मल्टीपल. चीजें होती है कोई क्यों ऐसे करके और इतना. स्ट्रांग स्टेप लेगा हां तो देयर हैज टू. बी सम रीजन एंड उसके बाद अगर सामने वाले. को जेल हुई भी तो कोई तो जज ने भी कोर्ट. ने भी कुछ एविडेंसेस देखे होंगे सिर्फ ऑन. द बेसिस ऑफ कन्फेशन या ब लड़की के.
स्टेटमेंट खुद एक एविडेंस होती है कन्फेशन. की बात नहीं है दरअसल क्या है जब मैं आप. जब मैं एस अ डिफेंस लॉयर या जो मैंने केस. लड़ा जब मैं यह कहता हूं कि उसमें केस जो. है वह कंपलीटली ूठा था और सिंगर टोटली. बेगुना है उसकी दो. वजह नंबर एक है कि दोनों घरों में खानदानी. दुश्मनी थी. जो लड़की का परिवार. था उन्होंने एक पंचायत के इलेक्शन में कई.
साल पहले सिंगर के भाई पर गोली चलाई. थी ओके वहां केस. चला उसमें उस लड़की के पिता और चाचा और. दूसरे एक ताऊ भी था तीन ब्रदर्स थे वह. तीनों उसमें अटेंप्ट टू मर्डर केस में जो. है प्रोक्यू हुए कौन-कौन लड़की के जो. लड़की का पिता लड़की के दो अंकल चाचा और.
ताऊ समझ लीजिए यूपी. में ऑल थ्री ऑफ देम तीनों जो है दे वर. फेसिंग अ ट्रायल कि उन्होंने कुलदीप सिंह. सेंगर के भाई पे गोली चलाई इलेक्शन के. दौरान गोली चलाई जिसमें अटेंप्ट टू मर्डर. का केस हुआ और यह बहुत पुराना केस था ये. 10 साल पुराना केस था केस चल रहा था उसमें. से उस लड़की का जो एक चाचा है वो. करके जस्टिस से भाग. गया बाद में क्या हुआ साहब जो दो भाई थे.
उनको संदेह का लाभ लेते हुए उनको वहा जज. ने एकट. किया जो यह दूसरा भाई था इसने क्या करा कि. साहब सर्टिफाइड. कॉपी जो निकाली जजमेंट की जो जजमेंट का. रिकॉर्ड था उसको जो है भी अदालत. में पैसे वैसे खर्चे करके घुस लाके उसने. जो है अपना नाम जो है क्यू करके बीच में. ऊपर लिख दिया जो आदेश था कोर्ट का ऑर्डर.
के साहब मैं भी इस केस में क्विट हो चुका. हूं उसकी टेंपरिंग हो गई इंटरपोलेशन कर दी. ओरिजिनल रिकॉर्ड प और जो उसमें उसका वह. चाचा है उसका नाम महेश है महेश सिंह उसमें. यूपी में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कारवाई. चल रही थी केस चल रहा था जैसे मकोका होता. है में या दिल्ली में ऐसे यूपी में. गैंगस्टर एक्ट होता है ओके उसमें उसने.
क्या करा कि जो ओरिजिनल जजमेंट इंटरपोलेटर. उसकी सर्टिफाइड कॉपी निकाली और वहां पर जो. है उसको फाइल करके वहां पर अपना क्विटल ले. लिया अब यह कहानी तो आपको पता नहीं है आम. जनता को भी पता नहीं है दूसरा उसमें सबसे. बड़ा लकूना यह था कि अगर 4 तारीख को शशि. सिंह शशि सिंह इस केस में क्विट हुई शी. वास वो को एक्यूज थी मेरे क्लाइंट के. साथ अगर चा च तारीख को शशि सिंह के बहलने.
के बहलाने उसस काने के ऊपर कुलदीप सिंह. सिंगर ने आपका रेप कर लिया तो 11 तारीख को. उसी शशि सिंह के फोन पर आप रात में 10 बजे. नौकरी करने के बहाने से कैसे पहुंच गए बट. आपको क्या पता कि वह नौकरी करने के बाने. गई थी उधर कि मे बी प्रोस क्यूशन का केस. है एडमिटेड केस है ओके ये लड़की का खुद का. बयान है ये उसका स्टेटमेंट है ये उसका.
स्टेटमेंट है तो जो स्टेटमेंट्स में. जबरदस्त जिसको हम कहते हैं मटेरियल. अनबिलीवर्स. केस में कि कोई भी जज उसकी जो है सजा नहीं. कर सकता था लेकिन कर गए क्यों कर गए कर गए. देर हैज टू बी रीजन रा देर टू बी. देखिए मेरे को जो रीजन लगता है जी कि. उसमें क्या है जी हमारे जो जज लोग भी होते.
हैं कई बहुत बोल्ड होते हैं कहीं बोलते. हैं यार बड़े केस में एक्ट कर लिया तो. मेरे पे ही आफत ना आ. जाए एंड ड य थ कई प्रेशर भी होते हैं. देखिए जी आखिरकार जज भी तो इंसान है भा. यहां सुप्रीम कोर्ट कहता है खुद कहता है. कि मीडिया इंट्रूजन की वजह से जजमेंट. इन्फ्लुएंस हो जाती है तो जब जजमेंट. इन्फ्लुएंस हो गई इसका क्या क्या मतलब है. कि एक जस्टिफाइड केस में जज लर गया क्विट. करने से या जबरदस्ती की.
कन्विंसेस की गलती थी ठीक है हमें केस के. नुआंसेस नहीं पता बिल्कुल हमें नहीं पता. जो आप बता रहे हो हा ठीक है और हमें. एजेक्ट एविडेंसेस भी नहीं पता बट एक. लार्जर मीडिया सेंटीमेंट की वजह से एक. इमोशनल सेंटीमेंट की वजह से और इस कंट्री.
में जिस तरीके से बाकी रेप केसेस हुए हैं. और जिसकी जो पुराना हमारा हिस्ट्री और. ट्रामा रहा है कि बहुत लोग रेप केसेस या. रेप करने के बाद बाहर खुले घूम रहे हैं और. जिस तरीके से ही नियस क्राइम्स होते हैं. हां इन सबका अमलगम मेशन होता है जिसकी वजह. से हमारा एक थॉट प्रोसेस बनाते हैं हमारी. एक सोशल कंडीशनिंग हो गई है परसेप्शन क. परसेप्शन क्रिएट हो गया है परसेप्शन. क्रिएट सोशल कंडीशनिंग की वजह से हमारा एक. परसेप्शन क्रिएट हो गया तो मुझे भी यह. लगता है सबको लार्जर ऑडियंस को यही लगता.
है और मीडिया में भी यही दिखाया कि इसमें. ये सही जेल हुई राइट इन फैक्ट अ काफी लोग. आई नो अराउंड मी वो हैप्पी थे कि फाइनली. इस कंट्री में पावरफुल लोगों को जेल होना. स्टार्ट हो गई राइट कोई पावरफुल एमएलए है. जिसको एक एमएलए मतलब वहां का बाहुबली होता. है एक छोटे से गांव में राइट तो उसके. अगेंस्ट एक नॉर्मल लड़की जीती फाइनली कोई. गलत नहीं कर सकता राइट तो हम सबको ये लगता. है बिल्कुल लगता है और हम सब खुश थे कि ये.
हुआ एंड नाउ यू आर टेलिंग अ डिफरेंट साइड. ऑफ स्टोरी एब्सलूट राइट अब इसके दो रीजंस. हो सकते हैं एक या आप बिल्कुल सही हो या. या ये हो सकता है आप डिफेंस लॉयर हो सो यू. आर ट्राइम टू डिफेंड योर स्टंस करट व्हिच. इज ऑलवेज ऑलवेज देयर राइट हां तो क्यों. ऐसा लगता है कि आपको क्यों लगता है कि. पूरी कंट्री या मैक्सिमम लोग हा एंड. इंक्लूडिंग. जज को आपके अकॉर्डिंग ऐसा क्यों कि हम.
सबको गलत इंफॉर्मेशन और हम वो सब गलत. इंफॉर्मेशन मान के अंदर ही. अंदर एक तरीके से खुश हुए कि यार फाइनली. जस्टिस है बीन स बहुत अच्छा सवाल आपने. किया देखिए क्या है कि साहब जो पब्लिक की. रिएक्शन है यह जस्टिफाइड रिएक्शन. है. क्योंकि नॉर्मली हमारे मुल्क में. फॉर एग्जांपल आसाराम का केस देख. लीजिए गुरमीत राम रहीम हो.
गया पावरफुल आदमी जो है वह हमेशा एक्वेट. हो जाए तो लोगों को लगता है कि. साहब अगर हम जो है एक लोकतंत्र है. डेमोक्रेटिक पॉलिटी है. हमारी यह बितर मान लिया चलो लोग गरीब है. तो अगर हमें मुल्क में इंसाफ भी नहीं मिल. रहा तो हम क्या है हम कुछ भी नहीं तो. इसलिए लोगों की एक रिएक्शन आती. है इन कंपैरिजन क्या है कि साहब अगर आप.
इंग्लैंड में जाए यूनाइटेड स्टेट्स में. जाए वहां पर इन चीजों पर लोगों को यह. परसेप्शन नहीं है क्योंकि वहां इमीडिएट. काम होता है फटाफट जूरी ट्रायल लगती है. फटाफट फैसला होता है 25 साल मुकदमा चलता. नहीं है जब आप जूरी ट्रायल करते हैं तो 12. 1 आदमी तो आम आम आदमी पर लेंगे तो उनको 20. साल आप सिक्वेस्ट्री करेंगे या इ मुकदमा. भी जल्दी.
चलाना तो जो सोशल कंडीशनिंग है व हमारी जो. है अंग्रेजों के समय से ही जो पावरफुल. आदमी है वो सिस्टम को पेनिट्रेट करता. है और कामयाबी से करता है वह बेस्ट लॉयर्स. खड़े करता है दिल खोल के फीस भी देता. है गवा भी हटा देता. है या उनको इन्फ्लुएंस कर. देता और जो गरीब आदमी है वह इंसाफ के लिए. तरसता रहता जो सोसाइटी की रिएक्शन है.
बिल्कुल जस्टिफाइड है लेकिन इसमें दो. एक्सेप्शन है एक तो जज जो है जो उसका काम. है क्योंकि आपके पास तो इंफॉर्मेशन वो. नहीं है कि मैंने क्या केस लड़ा क्योंकि. जो बात मैंने अभी आपको बताई वो तो आपके. नॉलेज डोमेन में नहीं है जज के पास तो. है अब जज क्यों नहीं एक्ट करता या क्यों. जबरदस्ती की सजा करता कि वो भी एक इंसान. है उसके पास भी 15 प्रेशर्स है कभी-कभी. हमारा नीचे का जज सोचता है कि यार यह बड़े.
केस में क्विटल कर. लिया तो पता चला मेरा हाई कोर्ट का ही. एलिवेशन नहीं हो. रहा बहुत सारे प्रेशर्स होते हैं यह इंसान. की कमजोरी है उसके अंदर का डर. है जब तक आप अपने डर को नहीं. मारोगे तो आप जो है फिर निष्पक्ष काम नहीं. कर पाओगे एंड सेकंड एक्सेप्शन क्या था. आपने बोला एक तो ये देखिए एक तो यह हो गया. दूसरा यह है कि.
साहब इसीलिए मैंने कहा कि भा इसमें जज. एक्सेप्शन है एक तो जज एक्सेप्शन और एक. मीडिया एक्सेप्शन देखिए जी मीडिया का. मीडिया एविडेंस भी देखता. है मीडिया को पता रहता है क्या हो रहा. लेकिन मीडिया जो है एक ऐसा नरेट पेडल करता. है जिसमें वो सच्चाई को मार देता है और. इकोनॉमिक बेनिफिट को ट करता. है इसलिए हमारा मीडिया बिगड़ रहा है य.
गोदी मीडिया पहले क्यों नहीं. था अब क्यों. है क्योंकि जो आपको समाज ने जो दायित्व आप. पर दिया जो जिम्मेदारी आप पे दी वो आप. कहां निभा रहे हैं बट यह तो हमेशा से था. ये अभी का नहीं है आप काफी समय से देखो हर. मीडिया एक बैलेंस बना केर चलता है जहां पर. उसे इकोनॉमिक बेनिफिट देना है और कहां पर. वो उनकी एक वैल्यू सिस्टम होता है जहां पर. बोलते हैं यहां तो हम अगेंस्ट ही जाएंगे. राइट कुछ तो अब वो कुछ भी हो सकता है किसी.
के लिए वह फाइनेंस हो सकता है किसी के. लिएल हो सकती हैजी हो सकती है किसी के लिए. उनका जो स्टार एंकर है वो जो बिलीव करता. है वो हो सकता है मल्टीपल रीजन राइट तो सब. यह हमेशा रहता है इट्स लवेज अ बैलेंस की. जहां पर आप कुछ पेड एक्टिविटीज करते हो और. कुछ चीजें जहां पर आप लड़ाई करते हो कि. नहीं हम खड़े रहेंगे और इसका बंस हर फाइव. इयर्स में अप डाउन होता था है कभी पेड. ज्यादा चलता है कभी आइडियो जीी ज्यादा. चलती है वो अप तो ये सालों से चल रहा है.
आई डोंट थिंक अभी क्योंकि सोशल मीडिया की. से बहुत प्रे वेलेंट हो गया इसलिए लोग. स्पेसिफिकली टैग देते हैं बट ये हर हर पा. साल में आप उठा के देख लो कुछ चैनल्स हैं. कुछ चीजें हैं कुछ लोग हैं जो अच्छे करते. हैं और गलत करते हैं और वो हर बार चेंज. होता रहता है इट्स मे बी टुडे मोर देन एवर. क्योंकि अब एक्सेसिबिलिटी ऑफ मीडिया ज. आल्सो इंक्रीजड बट इट हैज ऑलवेज बीन देयर. नाउ कमिंग बैक टू अ योर पॉइंट कि जो आप. बोलो कि जज पे जज भी एक इंसान है जज को.
लगता है कि प्रेशर होता डोंट यू थिंक कि. क्योंकि यही हमें हमारे एक पॉडकास्ट पे. किसी लॉयर ने बोला. था बहुत बार ऐसा होता है कि हाई कोर्ट. में कुछ स्पेशल केसेस बहुत ही इंपॉर्टेंट. लॉयर्स या जजेस को देते. हैं ताकि वो वो केसेस लड़े एंड वहां पर. जहां पर क्लियर दिख रहा है कि कौन. क्रिमिनल है उसे कैसे भी करके डिफेंड करके. बचाए एंड अगर वह ऐसे केसेस में डिफेंड कर.
जाते हैं तो उनका प्रमोशन होता है कि यार. ये ऐसे केसेस में भी बचा के लेके आ गए सो. दे आर प्रोबेबली वाइस दे आर प्रोबेबली. क्लेवर और मे बी दे वो सब देखते हैं लॉ की. नजरों में ऐसे बहुत बार होता है राइट तो. थंक सो की ये थोड़ा बहुत बार आईम जस्ट. आस्किंग डोंट यू थिंक ऐसा होता है कि बहुत. बार ब्राइटेस्ट ऑफ द ब्राइटेस्ट लॉयर्स को. ऐसे केस दिए जाते हैं जहां पर उनको टेस्ट. किया जाता है कि वह लॉ मोरल एथिक्स या जो.
भी चीजें उन सबके साथ कैसे रहते हैं. क्योंकि उनका मे बी एक नई अपॉर्चुनिटी पे. उनको जज किया जाना होता है डू यू थिंक सो. नो आई वुड नॉट सर्ट इफ यू नो मैं इस पे. इतना एग्री तो नहीं कर पाऊंगा क्योंकि. क्योंकि केसेस में क्या होता है जी. जो सरकार की तरफ से हमेशा सरकारी वकील. रहते हैं हम क्योंकि सरकार के पास एक. वकीलों की टीम है. चाहे वह हाई कोर्ट में हो तो वहां. गवर्नमेंट लॉयर्स होते हैं सुप्रीम कोर्ट.
में है तो वहां गवर्नमेंट लॉयर्स एडिशनल. सॉलिसिटर जनरल वगैरह. हो जो प्राइवेट पार्टी. है उसके पास लयर एंगेज करने का अपना एक. चांस. है अब फॉर. एग्जांपल जब ओम प्रकाश. चौटाला उसकी एक टीचर स्कैम में हरियाणा. में एक स्कैम हुआ. रिक्रूटमेंट सीबीआई का केस चल. गया और सीबीआई के केस में पटियाला हाउस.
कोर्ट में वह केस. चला 10 साल की सजा कर ली हमारे एक बड़े. शालीन जज है शायर भी है श्री विनोद कुमार. बड़े सुशील. हसमुख दो ढाई साल उन्होंने केस चलाया तीन. साल 10 साल की उनकी सजा कर ली उसमें को. एक्यूज आईएस ऑफिसर भी था संजीव कुमार 1985. कार्डर का था उसकी भी 10 साल सजा हो. गई अब ओम प्रकाश चौटाला उस परे पैसों की.
कोई तो कमी नहीं जब हाई कोर्ट में उसकी. अपील हुई तो उन्होंने राम जेठ मलानी को. वकील मुकर्रर किया. हम जेठ मिलानी साहब ने करोड़ों में फीस ली. हम जेठ मिलानी साहब जो है वो. बड़े महान कलाकार वकील थे वो बड़ा से बड़ा. केस फ्री करते थे और ऐसा केस आने पे तो. साब कोई लिमिट ही नहीं. थी अनबिलीवर्स.
करी लेकिन मुकदमा नीचे बिगड़. गया तो अपील डिस्मिस. हुई लगभग सवा करोड़ रुपए पेशी के हिसाब से. उसमें फीस ली गई उन्होने खुद मेरे को एक. दिन. बताई एंड वो उसके बाद भी उनको जस्टिस नहीं. दिला पाए कुछ भी नहीं हु 38 पेशिया. उन्होंने. करी एट. 1.25 उसके बावजूद जो है वह अपील डिस्मिस. हुई नरेल जस्टिस सिद्धार्थ मदुल साहब ने.
जो आज की डेट में मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ. जस्टिस सुप्रीम कोर्ट ने उस केस में जब. एसएलपी लगी या जो सुप्रीम कोर्ट की अपील. तो उन्होंने तो फाइल का जो ऊपर धागा. होता वह तक नहीं खोला ऊपर से ही फाइल फेंक. दी क्यों भाई फाइल पढ़ के आए. थे कि हस्तक्षेप नहीं करना है कोई नो नहीं. होगा चौटाला 10 साल अंदर किस बात प जेल. हुई है. करप्शन तो जो आपने बात करी कि जी.
बड़े-बड़े केस कुछ वकीलों को दिए जाते. नहीं जो बड़ा केस है जी वो पार्टी खुद. एंगेज करती है अब जैसे जेठ मिलानी साहब थे. तो उनको कंट्रोवर्शियल केस लेने की बड़ी. खतरनाक चुस्की थी कंट्रोवर्सी का मतलब जेठ. मलानी इंदिरा गांधी मर्डर हो गया तो जेठ. मलानी खुद आते थेय मैं. लूगा राजीव गांधी एसासिनेशन हो गया यह केस. मैं लडूंगा मुझे कोई फीस नहीं चाहिए.
पब्लिक की तरफ से ना मुलजिम की तरफ से ओके. क्योंकि चैलेंज तो उसमें मुलजिम को ही. निकालने का है हर्षद मेहता हर्षद मेहता. पार्लियामेंट. अटैक पार्लियामेंट अटैक में वो वो जो है. साहब वकील मुकर्रर थे ही डिफेंडेड. प्रोफेसर एसए आर. गिलानी वो एक एक्यूज थे उसमें. तो जो दिल्ली हाई कोर्ट में अपील हुई चार. महीने बहस हुई और क्यों करते थे ऐसा क्यों.
क्योंकि उनको जो है कि साहब जो बड़ा केस. कंट्रोवर्शियल केस उसमें उनको मुलजिम को. डिफेंड करने में एक जबरदस्त सोल. सेटिस्फेक्शन मिलती. थी यह खुद उन्होने मेरे को एक बात पॉइंट. ब्लैक. क्वेश्चन आपको लगता है कि इस कंट्री में. इंडिया में जिसके पास पावर इन्फ्लुएंस और. पैसा है व किसी भी केस से बच सकता है बितर. बच सकता है जरूरी नहीं लेकिन ये है चांसेस.
है कि बच सकता है चांसेस काफी हाई है. कंपेरटिवली टू सम बडी जिसके पास पावर पैसा. और वो कम है हां बड़े आराम से गलत काम. करके भी बच सकते हैं बिल्कुल एंड क्यों बच. सकते हैं इज इट कि उनके पास मींस होता है. चीजें इन्फ्लुएंस करने का कि उनके पास. पैसे होते हैं टू हायर लॉयर्स लाइक यू एंड. वेरी स्ट्रांग लॉयर. कि वो हर चीज टैंपर कर सकते हैं कि वो. सिस्टम को करप्ट कर सकते हैं क्या होता है. सबसे ज्यादा इन्फ्लुएंस उसमें यह होता है.
साहब कि जो हमारा प्रोसीक मैकेनिज्म. है क्योंकि प्रोसीक कौन करेगा प्रोसीक किस. बेसिस पर करेगा इन्वेस्टिगेशन. इन्वेस्टिगेशन कौन करेगी इन्वेस्टिगेटिंग. अथॉरिटी व कौन है पुलिस सीबीआई ईडी डीआरआई. वो जबरदस्त परम एबल होते हैं इन्फ्लुएंस. के लिए परबल मतलब उनके य पेनिट्रेशन होती.
है मतलब व काम वही से होता और वो इलस. देखिए अगर ओम प्रकाश चौटाला इतनी करोड़ों. में फीस दे गया जेठ मिलानी को फिर भी केस. आर. गया फिर भी तो केस आर गया तो हमेशा तो यह. बात नहीं. चलेगी लेकिन मान लीजिए कि जिस तरीके से. जसिका लाल केस. हुआ कि जो गई बैलेस्टिक ने गोली चेंज कर. ली अब बैलेस्टिक रिपोर्ट. गया तो अब प्रोक्यू क्या करेगा तो जो आपने.
बात कही बहुत अच्छी. कही देखिए बेस्ट ऑफ द लॉयर्स तो कोर्ट में. केस के चिथड़े उड़ाएंगे बहुत अच्छा क्रॉस. एग्जामिनेशन करेंगे अच्छी डिफेंस. रखेंगे और अच्छा क्रॉस एग्जामिन करेंगे. मुकदमे की स्ट्रेटजी अच्छी बनाएंगे लेकिन. अगर जो पावरफुल आदमी है वो. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी को इन्फ्लुएंस कर. गया तो हमेशा जीतेगा तो इन्वेस्टिगेटिंग.
एजेंसीज इंडिया में बहुत इफ बहुत ही इलस. है आज भी अभी भी और अब. ज्यादा ज्यादा. ज्यादा अब जो इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज में. करप्शन जो है वह घटने के बदले में बढ़. गई क्योंकि सबको पता है कि यह इनफ्लुएंशल. पार्टी तो इससे मिल सकता है तो बिल्कुल. मिल सकता. 100% एंड इज इट मतलब कैसे होता है करप्शन.
इज इट जस्ट मनी एब्सलूट दैट इज द मेन. मोटिव जस्ट मनी कि पावर रैंक्स आई डोंट नो. बहुत सारी चीजें हैं प्राइमरी एलरमेंट तो. है जी मेरे लिए क्या कर रहे हो मुझे कितना. पैसा मिला. हां एंड इज इट मैंने अनिल देशमुख ये जो. अनिल देशमुख यहीं का था होम मिनिस्टर वो. बंद हुआ हम उसका वकील भी बंद हुआ हम वो 9. साल का वकील है उसके साथ सीबीआई का आईओ भी.
बंद हो. गया सीबीआई ने अपना ही आईओ करप्शन में बंद. किया मैंने वकील की बेल कराई दिल्ली. में तो जब सीबीआई का आईओ जब सीबीआई का आईओ. खुद जो है रिश्वत खाने के इल्जाम में फस. गया तो आप केस क्या इन्वेस्टिगेट करेंगे. जब बस्ट ने गोली. बदलाई एग्जामिनर ने अंडर गारमेंट बदला. लिया खून मुर्गी का डाल दिया या किसी और.
का डाल. दिया तो अल्टीमेटली क्या है पैसा वहां काम. इन्फ्लुएंस भी काम आता. है तो यह सब तो लेकिन फर्स्ट 48 70 आ में. ही हो जाना हो जाता इसके बाद में भी होता. है अच्छा वहां प भी सब हो जाता है उसमें. क्या होता है जो पुलिस केस बना रही होती. तो केस डायरी पर तो उसका कमांड है यानी कि. वो केस क्या बना रहे हैं उसका पावर टोटल. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी पे. है कल को एक गवाह उसने बुलाया उसने पांच.
चीजें कही हम तीन जबरदस्त इनकल्पेटरी है. या इंप्लिकेट कर रहे उन्होने लिखी. नहीं और कहीं फसाना है तो गवाह ने बोला ही. नहीं वो खुद ही लिख. गया तो दोनों तरफ की गेम है हम इस पे आपको. एक एग्जांपल बताता हूं प्लीज सोहराबुद्दीन. शेख एनकाउंटर केस बंद कौन हुआ अभी का होम. मिनिस्टर मुलजिम कौन. थे सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर में मुलजिम.
कौन थे सायन. पांडियन आईपीएस ऑफिसर डीजी. वनजारा 6 सा साल कस्टडी में रहे क्विटल हो. गया किस बेसिस प हर गवाह हॉस्टाइल्स. में पहले बयान दिया था उससे पलट गए. कंप्रोमाइज कहां हुआ कंप्रोमाइज यह हुआ कि. साहब केस तो बनाएंगे लेकिन उसको ऐसा.
बनाएंगे कि क्विटल आपका होना ही है वह. कैसे. हुआ छोटे-छोटे केस में अभी जो मैंने आपको. पहले बात बताई कि जहां आपको लगता है कि. गवाह जो है इंपॉर्टेंट है उसको बांधने के. लिए उसका कलम बंद बयान लिखा जाता है उसमें. कलम बंद बयान गवाहों के लिखे ही नहीं. अब अगर गवाह का कलम बंद बयान होता और गवाह.
अदालत तशरीफ लेकर आता टगर में खड़ा हो. जाता और अगर वह हॉस्टाइल्स. की बीवी भी यह बोलती कि गवाह अगर अपने. बयान से पलट गए तो सांगेन पांडियन तो. छूटेगा पर तेरी सजा होगी तो हर गवा. हॉस्टाइल्स. निकल. गया तो कहीं इन्फ्लुएंस इस तरीके से चलता. यही केसेस तो एग्जांपल्स है हमारे सामने ड. यू थिंक की यह पूरा जो करप्शन या.
इन्फ्लुएंस होता है जो इन्वेस्टिगेटिंग. एजेंसी होती है उसके टॉप मैनेजमेंट से. होता है कि बॉटम से होता है टॉप से होता. है यह डिपेंड करता है कि आपकी परम एबिलिटी. आपकी पेनिट्रेशन कहां है तो जो उस टाइम पर. जो लीड कर रहा होगा जो चीफ होगा हा उससे. अगर आपने एक तरीके की सेटिंग कर ली और उसे. इन्फ्लुएंस कर लिया तो नीचे के जितने 15. 20 ऑफिसर्स है सब देव टू फल इन लाइन कोई. ऐसा नहीं निकलता कि नहीं मैं नहीं करूंगा. होता होता बट देन उसके भी तरीके होते हैं.
उसके भी तरीके होते हैं हटाओ किसी और. ब्रांच में फेंको इस केस से हटा हा. बिल्कुल हटाइए एंड ये सारा यू थिंक. मैक्सिमम ये सब जो इन्फ्लुएंस का. नेगोशिएशन होता है ये लॉयर्स करते हैं कि. ये डायरेक्ट पार्टी टू पार्टी ये पार्टी. करती है लॉयर्स का हस्तक्षेप नहीं होता बट. लेट्स से कि एक एक्स कोई जिसने किसी ने. क्राइम किया है एक्स पार्टी है उसने. क्राइम किया अब उसे तो यह पता नहीं होगा.
कि इस क्राइम से मैं निकलू कैसे तो ये. तरीके तो मे भी या तो एक पावर ब्रोकर होगा. बीच में वो बताएगा या लॉयर बताएगा या लॉयर. एक पावर ब्रोकर से मिला देगा जो कराएगा. कुछ तो होता होगा दो चीज है जो पार्टी ऐसे. केसों में फंसती है उसको खुद भी पता होता. है कि साहब मैंने निकलना कैसे. है और कुछ तो हम लोग ही बताते हैं. येने रोज देखा होगा तो इसके से यू वुड हैव. एन आईडिया कि ये केस कहां पर किस तरीके से.
कहां पर कॉम्प्रोमाइज होता है तो देन. प्रोबेबली यू विल गेट इट आउट यस. अल्टीमेटली जो है जी चार पांच या छह. क्रुशल एविडेंसेस होते हैं अगर वो. एविडेंस टूट गए बिखर गए तो तो फिर तो. रास्ता तो साफ हो. गया और साहब अगर तो एविडेंस आ. गए तो आपका काम बढ़ता है क्योंकि एक लेवल. ही होती है देखिए साहब जो क्रॉस एग्जामिन. लॉयर है मैं जो गवाह से सवाल. पूछूंगा तो मैं कोई जो है जेठ मलानी भी हर.
केस में सबसे बड़ा हिंदुस्तान में फौजदारी. वकी वकील होने के बावजूद हर केस थोड़ी. निकाल पाए हो. ट्रू सो लॉयर की भी एक लिमिटेशन होती है. अब जो विटनेस जो है दृढ़ संकल्प लेकर आ. गया कि मैं तो जो है जी जो मैंने देखा वो. तो बोल के रहूंगा हम. तो उसको मैं भी कुछ नहीं कर पाता. हूं तो वैसे आदमी को तो जो है कि भा जो.
इनफ्लुएंशल आदमी है ओनली ही कैन टेक केयर. आसाराम के केस में तीन गवाह मर कैसे गए. पहले व इन्फ्लुएंस हो गए उन्होंने बोला. नहीं हम तो करेंगे तो फिर गोली खा. ले तो वो पार्टी डायरेक्ट करते वहां पर. बीच में लॉयर इवॉल्व उसमें कोई लॉयर. इवॉल्वमेंट नहीं कई जगह अगर कोई करता भी. होगा तो अपने अपने दायित्व अपनी मर्जी पर. कोई अगर क्रिमिनल है या विक्टिम है जी.
उसके साथ कुछ भी होता है ठीक है इट कैन बी. एस सिंपल एस की किसी ने किसी का मर्डर. किया या किसी के साथ कुछ गलत हुआ ओके रेप. हुआ एक्सीडेंट हुआ कुछ हुआ सबसे पहले. उन्हें डायरेक्ट उसी टाइम यह करने के बाद. या कुछ भी होने के बाद पहले पुलिस के पास. जाना चाहिए लॉयर के पास जाना चाहिए ऐसा जी. अगर तो विक्टिम है. तो विक्टिम जितनी जल्दी पुलिस में जाएगा. लॉयर के पास. नहीं उतना ही बेहतर केस होगा क्योंकि एक.
नेचुरल अकाउंट. आएगा कि अभी हुआ हाथ के हाथ में ट्रामा. में आपके पास आया इस पर आपको एक एग्जांपल. बताता हूं आपको बड़ा अच्छा. लगेगा जो यह हमारा तहलका वाला केस था रेप. केस गोवा. में क्या था केस यह जो. जो तहलका मैगजीन चलाते उसके ऊपर केस था कि. साहब रोबो नीरो आया था और वह कॉन्फ्रेंस.
हो रही. थी तो उसके केस. में जो लड़की के साथ उसने क्या करा एस पर. द एलिगेशन की लिफ्ट में लड़की को ले. गया और जो है कि जी उसके अंडर गारमेंट. उसने स्कर्ट पहनी थी उसका अंडर गारमेंट. उतारा और उसके सा जिसको इंग्लिश में कहते. कनिलिंगस यानी रेप बाय यूजिंग योर टंग पस.
निर्भया में जो रेप है वह फिंगर पर भी. होगा पनायल इंसर्ट पर भी होगा और साहब. आपकी वजाइनल ओफिस को अगर कोई जो है कि जीी. जबान भी लगा जाए उस पर भी होगाओ तरुण. तेजपाल की मैं बात कर रहा हूं. ओके तो तेजपाल के केस में लड़की ने यह. बयान. दिया मीडिया में पाल के साथ जो है. गोस्वामी गोस्वामी उसके सर पर चढ़. गया उसकी चीत फाड़ गए ने सब गलत किया.
अल्टीमेटली क्विटल हुआ क्यों आपको पता है. क्विटल किस बेस पर हुआ क्विटल में जिस जज. ने क्विट किया उसने कहा जब हमने लड़की का. बयान जांचा तो हमने देखा कि शुरू से. उसको बयान लिखने में भी वकीलों की सहायता. थी सो लॉयर्स डॉक्टर्ड इवन द कंप्लेंट. हम वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट मेरे पास तेजपाल.
आया कि आप मेरा मुकदमा लड़े मैंने उससे. एटॉमिक फीस मांगी. हम एटॉमिक मतलब बहुत ज्यादा मैंने एक फी. स्ट्रक्चर कोट किया हो वो देने के लिए. तैयार नहीं था. हम दो चार बार बात हुई मेरे साथ मेरा एक. कॉलीग भी था वही फ कन्वे कर रहा था फिर. दूसरा उसका केस लगातार. था तो लगातार जो है कि वही रहना था वो मैं.
करने उतना समय नहीं था कि इसकी बातचीत. जरूर हुई थी तो इसलिए जब विक्टिम आएगा. विक्टिम वकील के पास ना जाए सीधे पुलिस. में नेचुरल बयान दे और अगर मुलजिम है वह. पहले दिन ही वकील पर. आए कि उसने अगर उससे क्राइम हो गया या कर. दिया है तो सबसे पहले वो वकील के पास जाना. बिल्कुल. एंड विक्टिम है तो अगर मेरे साथ कुछ. क्राइम हुआ किसी ने मेरे ऊपर कुछ क्राइम. किया तो मुझे सबसे पहले पुलिस केस जाना.
बिल्कुल जाना चाहिए देन मे बी अगर किसी. बहुत इनफ्लुएंशल इंसान ने किया हां तो मैं. पुलिस प जाऊंगा तो बहुत बार तो ऐसा होगा. पुलिस या तो कंप्लेंट लिखती नहीं है या. लूजली लिखे गी या मुझे कैसे पता कि यह. पुलिस ऑफिसर जो यहां बैठा हुआ है वो. कंप्रोमाइज नहीं है बहुत सारे पुलिस ऑफिसर. जो बहुत अच्छे हैं जो बचाएंगे बट कुछ. होंगे जो कॉम्प्रोमाइज होंगे जैसे आपने. बताया हा बिल्कुल. इस टाइम पर मैं कैसे करूंगा कुछ देखिए जो. आपका जो कोर केस है जो कोर केस है आपका.
जिस केस के बेसिस पर अल्टीमेटली कन्विसिटी. दिखा. रहा फिर जो लॉयर का काम है कि भी लॉयर. विक्टिम को स्टेटमेंट में इन्फ्लुएंस ना.
करे लेकिन लीगल सपोर्ट मैकेनिज्म. दे ड यू थिंक कि जब पुलिस को अपना बयान. लिखा रहे हो उस टाइम प कैन यू रिकॉर्ड इट. वेल यू आर राइटिंग द स्टेटमेंट नहीं पुलिस. इ राइटिंग मैं गया पुलिस के पास मैंने. बोला कि आप लिखो कैन कैन आई रिकॉर्ड इट ऑन. वीडियो पहले वो कानून में नहीं था अब आया. है अलाउड है अभी यस सो मैं खुद पर्सनल. कैपेसिटी पे कर सकता बल्कि आप पुलिस.
स्टेशन पे जो है कि साहब सुप्रीम कोर्ट की. जजमेंट है वीरेंद्र सैनी करके उसमें. उन्होंने कहा है कि भाई थाने में जो भी. होगा जैसे भी होगा तो आपने एक ऑर्डर लिए. लिखा है कि एवरी पुलिस स्टेशन मस्ट बी. अंडर टोटल सीसीटीवी. कवरेज इसके दो वजह है हम कि अगर आपने. मुलजिम पकड़ लिया पता चला उसके कपड़े उतार. के उसको दपा तप मारा मार रहे जबरदस्ती का.
मुकदमा बना रहे ताकि यह खत्म हो जाए दूसरा. आपके यहां भी तो ट्रांसपेरेंसी आए और आज. बोल रहे हो जी कंप्लेंट बाद में पहले मेरे. टेबल के नीचे कुछ तो रखेगा. भाई और यह होता है आज भी बहुत होता. है जनमन केस पुलिस दर्ज करने के लिए तैयार. ही. नहीं पैसे दो अब पुलिस के लिए कोई दीनो. ईमान नहीं. है मैं आपको अभी जो है दिल्ली थैलियम केस. मर्डर केस में ऐसा पुलिस का हादसा बनाऊंगा.
कि आपकी रूह बड़क जाएगी प्लीज. ल दो साल पहले मेरे पास एक विक्टिम आया. यूजुअली मैं डिफेंस. लयर यह जो महाशय. आए यह इंदरपुरी इलाके के रहने वाले हैं. बिजनेसमैन है इनका नाम है देवेंद्र मोहन. शर्मा इन्होंने सन 2000 नौ में अपनी बड़ी. बिटिया. दिव्या बड़ी. खूबसूरत यंग गर्ल वेरी.
प्रिटी उसकी शादी ग्रेटर कैलाश दिल्ली में. आपने सुना होगा वहां पर एक अच्छे अमीर घर. में 800 गज की कोठी होगी वहां पर एक वरुण. अरोरा नाम के लड़के से इसकी शादी कर. ली वरुण अरोरा अपने घर में इकलौता लड़का. है इसका फादर है चंदर लाल इसकी मदर है. जिया. कई साल शादी को हो. गए तो दिव्या जो है साब कंसीव नहीं कर पाई. शी वा नॉट एबल टू गिव बर्थ टू अ.
चाइल्ड 20161. में यह ग्रेटर कैलाश में क्लिनिक है. लाफेम गायनेकोलॉजी क्लिनिक है आईवीएफ. स्पेशलिटी है वहां पर एक लेडी डॉक्टर है. डॉक्टर इंदिरा गणेशन उनसे मुलाकात हुई. उन्होंने कहा कि साहब आईवीएफ के मैकेनिज्म. से आ. आन आईवीएफ का मैकेनिज्म अडॉप्ट हुआ दिव्या. गव बर्थ टू टन बॉय एंड.
गर्ल सा बच्चे बच्चे हो. गए छोटे से बच्चे. हैं अब यह ग्रेटर कैलाश के घर में दिव्या. है दो बच्चे हैं वरुण है इसका फादर है मदर. इन लॉ है एक डोमेस्टिक हेल्प भी है 2020. का जब लॉकडाउन हो गया. तो चंद्र लाल अरोरा जो है गुजर. गए 2009 की शादी है 2020 हो गया दो तीन.
महीने के बाद में लड़की नेचरली कंसीव कर. गई फादर इन लॉ गुजर ग गुजर. ग कंसीव करा तो कंसीव करने के बाद में फिर. वही लेडी डॉक्टर के पास गए लेडी डॉक्टर ने. एग्जामिनेशन करके पाया कि साहब देर इ. समथिंग रंग ओके शी एडवाइज फॉर. अशन यह घर आई इसने मदर इन लॉ को बोला अपने. हस्बैंड को बोला कि साहब लेडी डॉक्टर कह. रही है कि कुछ प्रॉब्लम.
है अबॉर्शन कर हा तो अबॉर्शन करने की जो. है डायरेक्शन दी है एडवाइस करी है और मुझे. लगता है मेरे को करना चाहिए दोनों वरुण. अरोड़ा और उसकी मां जो है उसके सर पर कूद. गए कि खबरदार जो है बच्चा आपने गिराया. बोले जी क्यों बोले आपको समझ में नहीं आता. कि यह जो चंदर लाल अरोरा है यह आपकी कोक. से दोबारा जन्म ले रहा. है रिइनकारनेशन थ्योरी.
पागलपन तो साहब घर में झगड़ा हो. गया कुछ टाइम के बाद में लेडी गई इसने. अर्ट. करा तब से जो इसका हस्बैंड. है यह टोटल जो है. खूंखार पागलपन का शिकार चढ़ गया चढ़ गया. तो इसने बोला तेरे को तो मार के जाऊंगा और. तुम्हारा पूरा खानदान मार के. जाऊंगा ओके हा ओपन थ्रेट ओपन.
थट इसका कोई ससुराल में भी ज्यादा जाना. नहीं है दे आर एट लग रेड्स दिव्या की छोटी. बहन है. प्रियंका वह लंडन में अकाउंट्स की कोई. पढ़ाई कर रही है अपने पिताजी ने भेजा. है एक दिन यह वरुण अरोड़ा ने डार्क नेट. में. जाके कोई मरकरी जहर बहर ऑर्डर कर लिया वो. इसके हाथ नहीं. चढ़ा दिसंबर जनवरी में जो दिसंबर 20 का और.
जनवरी 21 का महीना है उसमें इसने खुराफात. करी क्या इसका जो फादर इन लॉ का बड़ा भाई. था वो होमियोपैथिक कंपनी चला रहा था. मेडिसिन. कंपनी तो इसने फाइनली सेटल किया रिसर्च. रिसर्च करके कि मैं थैलियम सल्फेट जर. के सारे इनलॉज को मार के जाऊंगा जैसे. हार्ट अटैक आता है क्या लियम सल्फेट एक. ऐसा जहर है जो आपके खाने में डले आपके समझ.
में ही नहीं ना उसकी कोई स्मेल है और साहब. ना वो नजर आता है ना वो आम ब्लड टेस्ट में. नजर आता है यजली आपने अखबारों में पढ़ा. होगा कि जो रशिया का प्रेसिडेंट है. पुटिनटिपटुचिरा. अब यह थैलियम सल्फेट आपको बाजार में नहीं. मिल सकती यह कंपनी टू कंपनी ऑफर में मिल. जाता. है सो इसने क्या करा कि जो यह अपने ससुर.
के भाई की कंपनी है इसको नकली कागज बना के. पंचकुला में एक कंपनी पे ऑर्डर दे दिया और. 25 ग्राम लियम सल्फेट मंगा लिया जो किसी. तरीके से प्राप्त कर लिया गुड़गांव में कि. मैं कंपनी यूज के लिए ले रहा हूं कुछ कर. तो कंपनी टू कंपनी यूसेज पे आफ्टर. फैब्रिकेटिंग द डॉक्युमेंट्स. वो पंचकुला की कंपनी को भी समझ में नहीं. आया कि हमारे साथ कोई खेल हो रहा है यू. कांट गो टू केमिस्ट शॉप एंड बाय थैलियम.
सल्फेट सरदर्द की दवा. तोड़ी इसकी मिसेस 31 जनवरी 2021 को माइके. गई इंदरपुरी दोनों बच्चे लेके मेड लेके. बासा फिलेट फिश मंगाई अपने घर पर बनाई उस. परे थैलियम डाला टिफिन बफिन बंद किया और. ससुराल. गया वहां पर इसने सबको बोला जी मैं बड़े. से बड़े लगाव से आपके लिए फिश बना के. लेया तो ससुराल वाले भी हैरान हो गए कि. यार ये तो यहां आता ही नहीं था उ भी नया.
प्यार उमड़ पड़ा कैसे आ गया तो इसने अपने. फादर इन लॉ को भी खिलाया मदर इन लॉ को भी. खिलाया बीवी को भी खिलाया बेड को भी. खिलाया बच्चे तो दूध पी रहे हैं इन्होंने. कहा आप भी खाइए बोले नहीं मैंने कोई. लाफ्टर चेंज लिया था तो मेरे जबड़े में. दर्द. है तो इसने खाया. नहीं जो इसकी सिस्टर ल साली है. प्रियंका वो कहीं बाहर लंच करने गई थी. उसका शाम को 7:00 बजे तक इंतजार करा नहीं.
आई जब वो आई उसको ज्यादा. खिलाया और साब बीवी को उठा के जी के. वापस पाच छ दिन में वह प्रियंका जो है वह. बीमार हो गई उसके हाथ पैर नंब होने लगे तो. मिस्टर शर्मा उनको साथ में कोई क्लिनिक. अपोलो क्लिनिक लेकर गए उनके डॉक्टरों के. समझ में ही नहीं. रहा बीएल के कपूर अस्पताल बड़ा मशहूर है. हमारे यहां दिल्ली में वहां ले गए वहा. डॉक्टर न्यूरो सर्जन वर्जन न्यूरोलॉजिस्ट. ने कुछ समझ में नहीं आया 10 155 दिन में.
साली मर. गई तो अब कोई रिपोर्ट भी नहीं हुआ तो. डॉक्टरों ने क्या करा जी बीएल के कपूर के. शर्मा जी वो द संस्कार हो गए हां जी हो गए. तो उन्होंने रिपोर्ट पर लिखा जी इसको. रेबीज था कि जब उने कुत्ते ने काटा नहीं. और फिर उन्होंने लिखा जी भाई. परप्पन गुलियन बरे कोई बिमारी होती है. हमने रिसर्च में सर्च करी उससे इतना आदमी.
मरता. नहीं इतनी देर में वरुण अरोड़ा क्या कर. रहा जीय देख रहा बीवी मर ही नहीं रही इसने. एक और डोसेज मंगाई यह घर पर फिर. एडमिनिस्टर कर. रहा अचानक इसकी बीवी की हालत बड़ी खराब हो. गई तो अदम हालत में उसको बैक सीट पर फेंक. के इंदरपुरी ले गया वहां ससुर जो है उसने. देख इसको क्या हुआ बोले ये गंगाराम ले जाओ. अब जैसे ही गंगाराम हो गए तो मदर इन लॉ की. भी हालत बड़ी खराब हो गई गंगाराम मत. गंगाराम अस्पताल जो हमारा सर गंगाराम. हॉस्पिटल बा लेकर गए वहां पर एक रिटायर्ड.
मिलिटरी के डॉक्टर थे जी रिटायर्ड. ब्रिगेडियर डॉक्टर. कटोच जब फादर इन लॉ भी मिस्टर शर्मा भी. दाखिल हो गए इनकी वाइफ भी दाखिल हो गई यह. दिव्या भी दाखिल हो गई तो इनको लगा भा को. जबरदस्त गड़बड़ है तो इन्होंने कहा जी. हमारी लड़की भी ऐसे बड़े सस्पिशंस में मर. गई तो उसने बोला कि मुझे लगता है कि आपको. किसी ने खतरनाक जहर दिया है फिर यह सोच के.
टिपिकल इसका टेस्ट हुआ वह पॉजिटिव. निकला और उसकी मात्रा हजारों में निकली तो. जो उसकी बीवी थी उसमें थैलियम सल्फेट 8000. से ज्यादा था बीवी पर 4500 था कुस पे उसपे. नौ था तो दो दिन में वो दिव्या भी मर गई. और उसकी मां भी मर. गई तो साहब इमीडिएट कुछ एंटीडोट दिया तो. ये शर्मा जी बच गए ही इज द ओनली मैन.
सरवाइव लेकिन बात हुई कि पुलिस क्या करती. है इमीडिएट ब्रिगेडियर कटोच ने पुलिस. स्टेशन इंदरपुरी में खबर दी वहां पर केस. रजिस्टर हुआ सारी अब दे वर एबल टू ट्रेस. बैक कि फला दिन वो 31 जनवरी को मछली लेकर. आया था तो मेरी बेटी प उसी के बाद में वो. बिटिया प्रियंका जो है बहुत खतरनाक बीमार. हो गई गुजर गई पुलिस ने पकड़. लि अब पुलिस ने इसको पकड़ा उने उसको बोला.
हम तेरे को तो 15 दिन रिमांड लेंगे और. इतना मारेंगे कि तेरी चमड़ी उधेड़ देंगे. नाउ द बारगन स्टार्टस तो उन्होंने बोला कि. साहब कि जी मेरे घर पर चलो मेरे पास बहुत. बाल पड़ा हुआ वो सब आप ले जाओ मगर मेरे को. मारना नहीं तो पुलिस वालों ने बोला तेरे. पर थैलियम है बो चलो इंदरपुरी से ग्रेटर. कैलाश ले गए ग्रेटर कैलाश में उससे पैसे. वैसे जो भी लेने थे सीधे समझ में आता सब.
ले गए और उसको बोला लियम पी. ले हम तेरे को इमीडिएट अस्पताल ले जाएंगे. एम्स में तू दाखिल हो जाएगा पुलिस कस्टडी. से बच. जाएगा तो यह भी ुद लियम का. गया मुलजिम अरेस्ट होने के बाद में थिलियम. कैसे खा गया इसकी गुहार मैंने दिल्ली हाई. कोर्ट. लगाई तो यह 15 दिन इड कर. गया पुलिस का भी काम हो गया और व भी बच.
गया मेरे पास केस तब आया यह शर्मा जी मेरे. पास बड़े रोते. रोते इनके आंसू जो है नदिया की तरह बह रहे. कि मीर साहब मेरे को इंसाफ चाहिए मेरा. पूरा खानदान वाइप आउट हुआ है मैं कहा. बिल्कुल आपके लिए मैं काम करूंगा इमीडिएट. जब चार सीट पेश हुई तो उसमें जो हमारी. मैजिस्ट्रेट जज साहब थे वो इस मुकदमे को. ट्रिपल मर्डर मानने के लिए तैयार नहीं हम. क्योंकि पहले जो प्रियंका मर गई उसका.
पोस्टमॉर्टम नहीं हम तो कहती है भाई. मिस्टर मीर मैं इसको डबल मर्डर मानूंगी. मैंने कहा नहीं ट्रिपल ये ट्रिपल मर्डर है. दो अटेंप्ट टू मर्डर है और फाइव काउंट्स. ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ पॉइजन सब्सटेंस है. हम उसने मेरी याचिका खारिज करी मैंने. दिल्ली हाई कोर्ट पिटीशन लगाई वो जस्टिस. नरेल जस्टिस योगेश खन्ना साहब. हमारी नीचे कचेहरी से बड़े प्रोफिशिएंट. क्रिमिनल लॉ के बड़े माहिर उनके सामने. मैंने जब केस का खुलासा गया तो प्रोसीक भी.
हिल. गया तो मैंने कहा बोले यार मिस्टर मीर. क्या किया जाए मैं कहा ज साहब आप एम्स के. डायरेक्टर को हिदायत दे कि एक आला बड़े. डॉक्टरों की टीम गंगाराम की टीम और साहब. यह जो बीएल के कपूर है इनका एक पूरा बोर्ड. जो है 15 डॉक्टरों का बनाया जाए वो इस पर. जो है ओपिनियन दे कि क्या वह प्रियंका भी. जहर देकर मरी थी या.
नहीं यह बोर्ड बना रिपोर्ट अफर मेे आया अब. वह मुलजिम तिहार जेल में बंद है उस पर तीन. कतल के केस दो अटेंप्ट और फाइव काउंट्स ऑफ. 328 हम उसको कहते हैं पुराने कानून के. मुताबिक अब तो नया आने वाला है ट इज. एडमिनिस्टरिंग पॉइजन और स्टूपफाइंग. सब्सटेंस ये केस च. चल रहा है तो अभी चल रहा है यह मैंने आपको. बात बताई कि पुलिस एक ऐसी चीज है मैंने जज.
साहब को कहा मैंने कहा जज साहब यह आदमी. वरुण अरोरा इंदरपुरी थाने में अरेस्ट होने. के बाद में लियम कैसे कंज्यूम कर. गया अगर यह मर गया होता तो यहां एसएचओ जो. है वो मुलजिम के कट गरे में खड़ा होता तो. आप बा बाकी तो यू कैन रीड विदन ला तो जज. साहब ने वो सब पुलिस पुलिस बुलाए उनकी. चमड़ी. उतारी लेकिन फर्क तो कोई पड़ता.
नहीं तो यह ऐसा केस है कि साहब ग्रेटर. कैलाश में रहने वाले साउथ दिल्ली पॉश एक. तो रिइनकारनेशन थ्योरी पर अपना पूरा इनलॉज. को मार गया पुलिस ने उसको भी बोला तो. पुलिस को जहां पैसा बनाने की अपॉर्चुनिटी. आती है जिंदगी में नहीं छोड़ते. यह मेरा 26 साल का तजुर्बा. है वरुण अरोड़ा जो है अगर थोड़ा और जहर खा. गया होता तो पुलिस ही अंदर.
होती उधर भी. उन्होंने पैसा बनाने से पीछे नहीं. हटे पर ये फिर उसके बाद उन परे केस नहीं. चला पुलिस केस. चलेगा वो तो अपनी कोई ना कोई थ्योरी पेल. गए मैंने जो अदालत के सामने बहस रखी. साहब यह जो आदमी पहले 15 दिन तो रिमांड. में भी नहीं गया तो यह फैसिलिटेट किया गया. है कुछ चीजें साफ नजर आती है उसमें आपको.
शायद बहुत ज्यादा एविडेंस ना नजर आए लेकिन. वह सीधे समझ में आता कि हो क्या रहा यू. थिंक की मेजॉरिटी ऐसे होते हैं देखिए बड़े. केसों में तो यह थ्योरी बड़ी लगती है और. कई केसों पर जो है कि साहब एक हमारे यहां. दिल्ली में एक दिन था फेक किडनी. ट्रांसप्लांट डॉक्टर. हम तो उसको पुलिस ने पकड़ा हम उसने कहा. मेरे को छोड़ो 25 लाख रप लियो पुलिस ने.
कहा ला दे तो भाग गया बाद में फिर पकड़ा. गया तो पुलिस भी पकड़ी गई तो हमारा जो. सिस्टम है वो अभी भी जो पुलिसिंग है जिनको. जुर्म साबित करना है हम अगर वही अमिनेबल. टू करप्शन है इन्फ्लुएंस है. तो वकील पर क्या दोष. दे जो सोसाइटी ने आप पर दायित्व. दिया जो जिम्मेदारी दी वह आप निभाने के.
लिए तैयार कहां है ऐसी कौन सी कंट्री है. जहा मोस्ट क्रिमिनल्स. सिटीजनशिप ले लेते हैं और निकल जाते. हैं च कंट्री कैरेबियन आइलैंड पनामा. साइप्रस साइप्रस साइप्रस. ओके ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड तो यहां पर. क्या होता है यह है हम एंटीगुआ बार बडवा. हम उसकी सिटीजनशिप ले ली तो वो एक्स्ट्रा. डाइट नहीं करने. देगा और वो क्यों लेने देते हैं सिटीजनशिप.
पैसा दो कितनी कितने पैसे में ऐसी. सिटीजनशिप मिलती है कहीं पर जो है 20 70. लाख कहीं पे 50 लाख 50 लाख रप में एक नई. कंट्री की आपको सिटीजनशिप मिल जाती मिल. जाएगी और फिर कहीं पर 5 करोड़ कहीं पर. ज्यादा और और वो कहीं पर तो आप बैंक में. ही पैसा डाल दोलो बहुत है सिटीजनशिप मिल. गई एंड वो क अब चोसी को आप एडक्ट करने के. लिए गए तो थोड़ी. आया तो आज की डेट में क्या आप उसको.
एक्स्राइटर पाए नहीं करा के दिखा दो तो यह. कंट्री एक्सपेड इट करने नहीं देती क्योंकि. बोलती है कोई तुम कुछ भी करो तु दुनिया. में तो जो मैं नहीं एक्सलाइट करने. देता अब कई जगहों से तो आदमी एडक्ट भी हो. जाता है जैसे. यूएई यूएई से जब आपके बादशाह से रिश्ते. अच्छे हैं हम तो आप किसी को भी उठा लो 31.
जनवरी 2019. को भारत सरकार ने. परप्पन. इंडिया दुबई से दो आदमी एडक्ट. करें मतलब उठा लिए वहां से जहाज गया उठा. के लेके आ. गए क्योंकि इंडिया और यूआई गवर्नमेंट. फ्रें बहुत अच्छी दोस्ती. है जैसे अगस्टाइन स्कैम में क्रिस्टिन. माइकल जेम्स जो है उसकी एक्सशन हुई.
बाकायदा एक्सशन का केस लगाया गया तब अदालत. ने बोला एक्ड यूएई से हां तो बंदे को जो. है फ्लाइट में लाया यहां पकड़ के उसी केस. में एक था राजीव. सक्सेना तो अचानक उसको उठा के लेके आ गए. उसने तीन चार आदमी अरेस्ट करके दी अगस्ता. वेस्टलैंड स्कैम तो यूएई से फ्रेंडशिप है. यूएई इज नॉट फॉर क्रिमिनल नहीं यूई यूएई. क्रिमिनल के लिए सऊदी अरब क्रिमिनल के लिए. नहीं सो ऐसी कौन सी कंट्रीज है जो बहुत.
सारे क्रिमिनल्स के लिए लंडन लंडन ओ यस आप. लंदन जाइए आपको वहां का जो लीगल सिस्टम है. वह ऐसा बिल्ट अप है कि साहब आपकी हेकड़ी. निकल जाएगी आप एक्सट नहीं कर. पाएंगे इसीलिए आपने देखा होगा मोस्टली. फूजिटिव्स जो है जो हिंदुस्तान से भाग गया. सीधे लंडन बागता है बिकॉज वन ऑफ द बिगेस्ट. थिंग आई वाज रीडिंग एट दैट टाइम की यूके. का एक लॉ है वेर अगर आप किसी तरह से यूके.
में यह प्रूफ कर देते हो कि आपका जो. ट्रायल होगा आपकी कंट्री में किसी भी. कंट्री में वो पॉलिटिकल मीन से इन्फ्लुएंस. है बिल्कुल तो आपको यूके कभी भी एक्सपेड. नहीं करेगा क्योंकि उन्हें लगेगा कि. अनफेयर ट्रायल होगा इसकी वजह से यूके. बोलेगा यही चलाओ हां. जी बिल्कुल एंड दैट इज वन ऑफ द बिगेस्ट. रीजन और यह प्रूफ करना काफी इजी होता है. किसी भी अच्छे लॉयर के लिए कि भाई वहां पर. तो मो जो वहां के बेसिकली जो वहां के फिर. वकील है जिनको वहां के सारे कानून की.
मालूमात है उनकी इसमें ट्रिमेंडस. एक्सपर्टीज है वो एक मोशन पर दूसरा मोशन. लगाते. हैं जो यहां से जाएगा सरकारी बाबू जाएगा व. यहां से टीम लेकर जाता है वह भी वहां वकील. एंगेज करता है टैक्स पेयर ही उसकी फीस. देता है लेकिन जो वहां के लोग हैं वो वो. अपने फील्ड में बड़े मजे हुए कलाकार है और. जो आदमी यहां से भागता है वो कम से कम. यहां से दोढा हजार करोड़ रुपए तो लेकर. भागेगा तभी तो वह अफोर्ड कर.
पाएगा सो टेल मी हां कि कुछ लोग होते हैं. जो यहां पे क्राइम कर देते हैं जी उसके. बाद वो फिर बाहर क्यों नहीं चले जाते. रातों. रात वो क्यों यहां पे अगर उनको पता है वो. यहां पे सिस्टम इन्फ्लुएंस करने की कोशिश. करते हैं सब चीजें करते हैं व्हाई नॉट दे. गो आउट वो देखिए जो बाहर भागता है जी वो. या तो मोस्टली इकोनॉमिक ऑफेंडर होगा वो भी. बड़े लेवल का जैसे एक सिंपल एग्जांपल देता.
हूं एक बहुत बड़ा अ बहुत यह बहुत कॉमन है. इंडिया में कि आपने कार से एक्सीडेंट कर. दिया किसी का एंड अब वो इंटेंशनल था. अनइंटेंशनल था आपको नहीं पता आप उधर से. भागते हो एंड देन उसके बाद आपके ऊपर केस. चलता है सो बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार से. लेके इन्फ्लुएंस बिजनेस इंडिया के नाम. सबसे बड़े बिजनेस ओनर्स से लेके हर कोई या. नंदा का केस समझ लो सलमान खान का केस समझ. लो हर किसी. का अलग-अलग केसेस में लोग इवॉल्वड है राइट.
अभी रिसेंटली पोशे पुणे वाला के हु पुणे. वाला जो केस हु या हमारा दिल्ली का. बीएमडब्लू नंदा हो गया बहुत सारे केसेस. हुए इन सब में कन्वे नहीं हुआ कुछ नहीं. हुआ क्योंकि जो हमारा एक्सीडेंट का केस. होता है जी वो बेसिकली जो है उसमें क्विटल. लेना इतनी बड़ी बात नहीं होती ओके तो और. इन तरह का आदमी जो है साब जो है देखिए. हिंदुस्तान छोड़ के तो वही जाएगा जिसको. लगेगा जी अब नाउ देयर इज नथिंग लेफ्ट फॉर. मी हेयर बट ऐसे केसेस प डू यू थिंक कि.
क्लाइंट को बाहर जाना चाहिए नहीं जाना. चाहिए अगर चले गए लोग नहीं नहीं जरूरत. नहीं है ये एक्सीडेंट एक्सीडेंट वाला केस. तो हम वैसे ही यहां निपटा देते हैं कोई. दिक्कत नहीं है तो जब 100% एक इंसान ने. एक्सीडेंट कर दिया हां तो भी वो इतनी. आसानी से क्यों बच जाता है क्योंकि जो. उसकी इन्वेस्टिगेशन होती है वही जो है. सारा कांड तो वही होता है सब फ्लो हो जाता. है हां तो ऐसे में व डू यू थिंक हाउ कितना.
टाइम एक इंसान को जेल में रहना पड़ता है. वो तो डिपेंड करता है कि साहब देखिए जो है. कि भा जेल में जो अगर किसी ने मर्डर भी कर. लिया तो उसकी बेल 10 दिन में भी हो सकती. है दो साल में भी हो सकती है एंड डू यू. थिंक की अनइंटेंशनल जो एक्सीडेंट्स है हां. जो लोग करते हैं अनइंटेंशनल होता उसमें तो. उसमें तो अरेस्ट भी नहीं होता बेल आउट उधर. ही हो जाता है क्यों. अभी तो इसमें हुआ इस केस में तो थोड़ा. टाइम के लिए देखिए जो एक्सीडेंट है भा एक. एक्सीडेंट हो गया वी कॉल दैट एज एन ऑफेंस.
अंडर 304a दैट इज डेथ बाय नेगलिजेंस लेकिन. सपोज करके भी आपने शराब पी रखी है और आप. गाड़ी चला रहे हैं जैसे फाइटर जहाज चला. रहे हो उसमें जो ऑफेंस लगता है वो डेथ बाय. नेगलिजेंस का नहीं लगता उसमें लगता है. कल्पेबल होमसाइड का मतलब दैट इज 304. मतलब कल्पेबल होमसाइड यह है कि साहब आपके. पास बंदूक है और बाहर हुजूम है आपने गोली. मार दी आपको एक आदमी को मारने की मंशा.
नहीं है लेकिन आपको यह पता है कि सबब जब. आप क्राउड में गोली चलाएंगे कोई तो म तो. कोई तो मरेगा ही तो जो यह कल्पेबल होमसाइड. होता यह तीन तरीका होता वन इज फर्स्ट. डिग्री ट इज मर्डर सेकंड डिग्री इज कॉल्ड. ए मैन स्लटर या कल्पेबल होमसाइड नॉट. अमाउंटिंग टू मर्डर थर्ड इज डेथ बाय. नेगलिजेंस तो अगर उसमें जैसे ही कोई यह. बड़ा फिल्म स्टार विल्म स्टार शराब बराब. पी के जो है फुटपाथ प चढ़ गया तो उसमें.
वकीलों की हिकमत अमली होती है कि किसी. तरीके से यह केस 304 ए में ही रहे इससे. आगे ना बढ़े मतलब ज डेथ बाय नेगलिजेंस और. डेथ बाय नेगलिजेंस प कितनी दो साल की जट्ट. ू यर्स एंड प्रोट्रैक्टेड ट्रायल फिर दैट. इ एनेबल टू सेटलमेंट आल्सो सो व्हाई डू यू. थिंक कि पुणे वाला केस इतना बड़ा बना. क्योंकि अगर दैट द इंफॉर्मेशन इज कि वो. बहुत बड़े बिजनेस फैमिली का बेटा है राइट.
तो वो तो ये नेगोशिएशन करा के सेटलमेंट. करा सकते थे तो क्योंकि उसके अंदर जो. ऑफेंस लगाई है वो 304a की नहीं. है वो 304 की है ट इज कल्पेबल होमसाइड नॉट. अमाउंटिंग टू मर्डर कि मैं पी के तेज चला. के फिर निकल हां या आप जो है कि साब गाड़ी. इतनी तेज चला रहे हैं कि आपने पांच छ. आदमियों को टक्कर मार दी उसमें पुलिस जो. है फिर ऑफेंस को एस्केलेट करता.
है और उसको फिर कंपाउंड करना बड़ा मुश्किल. है उसको कश करना वो रजामंदी से हाई कोर्ट. जो है उसकी कोसिंग एक्सेप्ट नहीं. करेगा ओके जो 304 है डे कितने साल की जेल. होती है अप टू 10. यर्स इवन फॉर किड जो माइनर था माइनर है तो. फिर अगर तो 16 साल से ज्यादा है तो नए. जुविनाइल एक्ट के तहत ही विल बी ट्राइड एस. मेजर एंड ड यू थिंक य केस डिफरेंट होता.
अगर वह मेजर होता और ड्रंक नहीं होता तो. अगर मेजर होता तो केवल 304 में ऑफेंस आती. अनलेस अटिल यह एविडेंस ना आए के साब बिजी. स्ट्रीट में व 180 की स्पीड पर गाड़ी चला. रहा. था बट 180 की स्पीड क्या बिना खाली रोड पर. ना लाजमी है नहीं नहीं वो तो आप पे तो. ट्रैफिक रेगुलेशन है कहीं पर 40 है कहीं. पर 60 है तो कोई हाईवे पे चला रहा है जैसे. बिकॉज व्हाई आई एम आस्किंग दिस कि ना.
मैंने एक बहुत इंटरेस्टिंग एक आर्टिकल. पढ़ा हां एंड ये ऐसे मुझे चलते चलते से. मतलब दिख गया. राइट ट्रक वाले अपनी धुन में चला रहे होते. हैं और वो पता नहीं गांव में कितने लोगों. को कितनी जगह रोज उड़ाते हुए जाते हैं हम. वो डेथ बाय नेगलिजेंस ही होता है या राइट.
कई बार रिपोर्ट होता है कई बार रिपोर्ट. नहीं भी होता है रिपोर्ट भी होता है तो. ट्रांसपोर्ट जो मेजर माफिया कंपनीज हैं वो. छुड़वा देती है उन्हें रातो रात रात कोई. फर्क नहीं पड़ता राइट ट्रक ओवर स्पीड कर. रही होती है बिल्कुल ट्रक ड्राइवर कभी-कभी. लैक ऑफ स्लीप पे होता है ओवरवर्क्ड होता. है क्योंकि इसलिए अल्कोहल या थोड़ा सा. ड्रंकर होता है तो उस पे इतना स्ट्रांग. केस नहीं लगता जितना किसी जैसे किसी अगर. वो इंसान है और वो इन्फ्लुएंस था तो उसपे.
ज्यादा केस वो हाईलाइट हो जाता है उसपे. मीडिया वाले कौवे की तरह गिर जाते हैं हम. एकदम उसकी जो है जो उसकी रील भी चलने लगती. है क्लिपिंग दुआ धार चल रही है तो जितना. लो प्रोफाइल रहेगा उतना केस को दबाना इजी. है हाई प्रोफाइल में प्रोफाइल में तो फिर. जो है कि साहब ब अगर हॉट कंटेस्ट हो जाता. है अगर केस टू केस देखो अगर ये सेम इंसान. अगर.
ये मतलब हाईवे पे होता एंड वहां पे हाईवे. पे 120 पे किसी को उड़ा देता बिल्कुल तो. 304 ए का ही ऑफेंस आता डेथ बाय नेगलिजेंस. दो साल की जे दो साल की और बेल थाने में. ही एंड अगर यह हाईवे की लिमिट ही 100 है. हां एंड उसपे किसी की डेथ होती हां तो तो. भी दो साल की जेल नहीं तो भी वो नेगलिजेंस. माना जाएगा क्यों क्योंकि बिक अगर मान लो. इंडिया में ना हां हाईवे है हाईवे में. रास्ते में बीच में लोग जा रहे होते हैं. बिना किसी डिवाइड वो मैं बताता हूं आपको.
देखिए या तो वो हमारी किसकी गलती हो देखिए. साहब ऐसा है या तो वो हमारी हाईवे जो है. वो इतनी प्रोटेक्टेड हो नहीं है यू नो द. रियलिटी यस तो हाईवे पे भी जो है कि साहब. जो आदमी है अब कोई आदमी जो है साड को लेकर. घूम रहा है तो उने ट्रक के नीचे आना ही. आना है पॉट यह है कि साहब जो नेगलिजेंस है. यह कभी कंट्रीब्यूटरी होती है जहां पर. आपको नेगलिजेंस मिलेगी पोरली ऑन द साइड ऑफ.
द ड्राइवर फॉर एग्जांपल अगर वो इन बरेटेड. कंडीशन में है उसने अल्कोहल कंज्यूम किया. है एक्सेसिव स्पीड पे है तो फिर उस परे. केस चलाना जरूरी है अल्टीमेटली वो भी एक. क्रिमिनल ऑफेंस है पर अगर वो नहीं है इस. वाड़ा मास्किंग तो किसकी गलती होती है किस. चीज की अगर एक ड्राइवर है हाईवे प है एंड. 120 हाईवे की स्पीड लिमिट है एंड वो 120. पर चला रहा है एंड सामने से कोई डिवाइडर. से कूद के आदमी आ गया ऐसे ही किसी के. साथ उस एक्सीडेंट और एक्सीडेंट में डेथ.
हुई उसम यह है कि साब उस एक्सीडेंट को देख. लिया जाएगा और उसमें पुलिस अगर यह बोलेगी. कि साहब इसमें विक्टिम की गलती है क्योंकि. यह मान लीजिए कि भाई ही वास 20. ओवर बट द कॉज ऑफ द एक्सीडेंट इ नॉट ट ही. वास ओवर 20 अगर बीच में आप दौड़ के आ गए. तो गलती तो आपकी. है तो हमारे हाईवेज हां इसमें कोई ऑफेंस. नहीं लगता लेकिन पुलिस कभी भी क्या करती.
है कि साहब अगर कोई मर गया केस तो दर्ज. होना ही है हम केस दर्ज होने का मतलब है. इधर से भी पैसा उधर से भी. पैसा तो फैक्ट्स एंड लॉ पे नहीं चलता इट. जस्ट इ जस्ट मी मा के चीज उसी पे आ रही है. कि देखिए पुलिस के लिए ही यू नो स्लर्प्स. हिज टंग. द मोमेंट अ कंप्लेंट कम्स टू पुलिस स्टेशन. बट यू हैव नेवर आप इतना ज्यादा बोल रहे हो. तो आप कभी किसी स्ट्रांग एथिकल पुलिस वाले.
से नहीं मिले. हार्डली हार्डली आई हैव एंड सिंस हाउ लॉग. यू हैव बीन प्रैक्टिसिंग 26 इयर्स ऑफ. सीरियस क्राइम एंड 26 इयर्स ऑफ सीरियस. क्राइम अक्रॉस इंडिया फ्रॉम लो प्रोफाइल. टू हाई प्रोफाइल यू आर टेलिंग मी यू हैव. नॉट इवन मेट वन पर्सन मे बी अ फ्यू सी आई. कैन नॉट सर्टेनली मैं पूरा किसी का. डायग्नोसिस तो नहीं कर सकता लेकिन मैंने. एक चीज कुछ मैंने नोटिसेबल ऑफिसर्स देखे.
जिनका काम मेरे को बड़ा अच्छा लगा फॉर. एग्जांपल उनाव रेप केस में जो आईओ मिस्टर. त्रिपाठी थे मुझे उनका काम बड़ा जेनन. लगा उन्होंने क्या करा कि जितनी भी. एविडेंस उनके हाथ लगी सारी अदालत के. रिकॉर्ड पर फेंक दी सो ही डिड नॉट कंसील. एनी एविडेंस उसने कोई एविडेंस कंसील नहीं. की उन्होने कोई भी मीन से किसी को ना तो. उसने एक्ट करने की कोशिश नहीं करी कहीं से. तो उसने लड़की का केस.
बिगाड़ा ना उसने जबरदस्ती मुकदमा जो है. सिंगर पर लगाया उसने जैसे केस हुआ सारे. तथ्य सारे साक्ष्य कलेक्ट किए और अदालत के. रिकॉर्ड पर इस तरह का इन्वेस्टिगेटर हमें. बड़ा जेनन लगता. है हमारे इन्वेस्टिगेशन सिस्टम में एक. बहुत बड़ा दूसरा लैप्स है. जो यूएस और इंग्लैंड में नहीं है वह यह है. कि हमारा इन्वेस्टिगेटर जब केस बनाता है. तो हमेशा केस को इनकल्पेटरी रखने की कोशिश.
करता है मने के साब मुलजिम के खिलाफ केस. बनाओ बनाओ बनाओ अगर पूरी इन्वेस्टिगेशन. में उसके पास कोई ऐसी एविडेंस भी हाथ लग. गई जो मुलजिम के फेवर में है तो वह कभी. अदालत पर नहीं. रखता वोह वहां का वहां पर पुलिस दायित्व. है उसको हम कहते हैं फेयर डिस्क्लोजर ऑफ. एविडेंस यहां नहीं होता य नहीं होता यहां. पर उसमें अभी सुप्रीम कोर्ट के अभी जब से.
आजादी है तब से हम लड़ाई कर रहे हैं वी. नॉट बीन एबल टू सेटल इट इंग्लैंड में. कानून है कि जो भी एविडेंस आपके हाथ. लगी सबसे पहले जब आप किसी पर रेप का केस. चलाएंगे जितनी भी आपकी एक्सकल पेटरी. एविडेंस है वह पहले आप मुलजिम को देंगे. इनकल्पेटरी बाद में. देंगे जो आपको मुकदमे में फसाते है वह बाद. में देंगे जो निकालती है वह पहले देंगे.
हमारे यहां जो आपको निकालती है वह तो नीचे. ही दबा लेता. है एंड यहां पे अगर मैं एक पुलिस ऑफिसर. हूं मेरे पास 10 एविडेंस मेरे पास है मैं. सिर्फ छह प्रेजेंट करूं और चार रख लू अपने. पास बिल्कुल और कोई मेरे ऊपर कोई मुकदमा. नहीं चलेगा कुछ नहीं कोई आप प आंच नहीं. आती बेच दूं बर आज जो मर्जी कर लो या रख. भी दूं या फेवर में ले लू लो कुछ भी ले लो. आप पे कोई जो है वो क्या है कि वो सिस्टम. वह तभी हम कर पाएंगे जब हम अपने राइट्स को.
और एस्केलेट करेंगे उसके लिए जरूरी है कि. साहब पुलिस स्टेट हमारी जो है अभी हमारा. मुल्क और पुलिस स्टेट नहीं बनना चाहिए. जितना पुलिस पर आप पावर देंगे उतना ही. आर्बिट्रेरी नेस और बनती है ड यू थिंक. पुलिस शुड हैव लेस पावर पुलिस शु हैव लेस. पावर च दे कैन मिसयूज पुलिस शुड हैव ल द. पावर टू प्रोक्यू बट प्रोसेक.
साइंटिफिकली प्रोसेक विदाउट थर्ड डिग्री. प्रोसेक. ऑब्जेक्टिवली प्रोसेक विदाउट फेयर एंड. फेवर प्रोक्यू. जननली डोंट ड्रॉप द प्रोसेक बिकॉज ऑन हउ. इन कैश यर डंग गेटिंग लोकेटेड लाइक अ डॉग. विद फोर इंचे 4 फुट लंबी आपकी जबान हो. गई दोनों तरफ से क्योंकि आपने वर्दी पहनने.
का दायित्व लिया मैंने तो नहीं. लिया आपने जो है यूनिवर्सिटी मेहनत करी. मैं आईपीएस ऑफिसर. बनूंगा शेर भी आपने कंधे पर बिटवा लिया. उसके बाद में क्या काम कर रहे हो वह आप. जानते हैं हां लेकिन यह है कि साहब उस. सिस्टम. में कई सारे लोग भी होंगे कोई कोई जनन भी. होगा जो आपके लिए काम करने के लिए तैयार. है लेकिन जो है हां ऐसे लोगों की कमी नहीं. है इंटेंट इज देयर कहीं मजबूरी है कहीं.
प्रेशर है कहीं कुछ और चीज है मैंने जितने. भी केसेस देखे हैं जी उसमें देर आर जेनन. इन्वेस्टिगेटर्स. आल्सो चारों आदमी सेम नहीं है लेकिन किसी. भी देखिए आखिरकार एक आईपीएस ऑफिसर ने एक. पब्लिक प्लेटफॉर्म पर बात करी. कि साहब मैं आईपीएस ऑफिसर तो हूं लेकिन. मैं उस कुत्ते की तरह हूं जिसका पटा. पॉलिटिशियन के हाथ में है ये पब्लिकली.
बोला है आमिर खान के प्रोग्राम में बोला. आईपीएस ऑफिसर व किसको पता नहीं हर किसी को. पता तो कहीं ना कहीं तो आपने जो है कि. साहब अगर सिस्टम एक ब्रेक करना है तो. पुलिस को आपको नेता से आजाद कराना है. जितना नेता उसमें घुसेगा उतना ही पुलिस. में इलस. आएगा अब पुलिस में एलरमेंट तो कई चीज है. या मनी एक बहुत बड़ी एलरमेंट होती है. पोजीशन प्रमोशन मल्प थ सारी अमेंट राइट जो.
मेन है देख जी कहीं कुछ हो गया तो ऐसा. नहीं है कि साब द पुलिस विल बी वर्किंग. ओनली टू बरी द केस ऑफ द. विक्टिम बट वेर देर इ. पेनिट्रेशन देन समथिंग इ बाउंड टू हैपन हु. ड यू थिंक अभी कंट्री में टॉप थ्री क. लॉयर्स कौन. होंगे देखिए क्रिमिनल लॉयर्स जो है वो. क्रिमिनल लॉयर्स बेसिकली जब आप कहते हैं.
तो या कौन से लॉयर्स होंगे जो डिफेंस. लॉयर्स होंगे लेट जस्ट पुट इट दैट वे. देखिए जी क्रिमिनल लॉयर तो बेस्ट लॉयर वो. होता है जो एक बहुत अच्छा ट्रायल लॉयर हो. जो अच्छा ट्रायल लॉयर है वही अच्छी अपील. बहस करता है वही आगे मुकदमे को बेस्ट. डिफेंड कर सकता है तो हमारे यहां लॉयर्स. की एक कैटेगरी होती है एक होते है जी. सुप्रीम कोर्ट में जो लॉयर्स है वो सीनियर. काउंसल है उनके पास कोई भी केस ले जाओ तो. वो उसको बहस बहस करने में सक्षम होते.
हैं लेकिन अगर जैसे कि साहब. आपको जो है कि साहब कहीं. बड़ा मर्डर हो गया मान. लीजिए बहुत बड़े पॉलिटिकल फंक्शन का मर्डर. हो गया और उसका मुलजिम का डिफेंड करना है. देर यू नीड वेरी गुड ट्राल लॉयर्स वो आपको. क्या है जी अपने स्टेट में. आइडेंटिफिकेशन.
है जैसे जैसे कि साहब अगर आप सुप्रीम. कोर्ट में ले. तो जो टॉप आर्गू काउंसिल्स है जो किसी भी. मुकदमे को अच्छा कर ले पेश कर लें तो. उसमें डॉक्टर सिं भी के लेवल का लॉयर नहीं. है डॉक्टर अभिषेक मनु सिं भी हां ही इज अ. टॉप गन लॉयर और स्पेसिफिकली फिर जो निचले.
से केस खड़े होने होते हैं उसमें क्या है. जी आपकी जैसे दिल्ली में है तो देयर आर सम. वेरी गुड ट्रायल लॉयर्स देर. हम जो नीचे से आपका केस बड़ा अच्छा खड़ा. करके देते हैं फिर आगे वही बहस कर ले या. फिर साल्वे कर ले या फिर तो वो टीम जो है. कंपाइल होती है हम. जैसे सिंडे साहब है वेरी गुड ट्रायल लयर. तो नीचे में अगर मडर. जैसे यह जो इंदिरानी मैं इंदिरानी पीटर.
मुखर्जी का दो तीन बार पेश हुआ था जो उनका. ट्रायल लयर वेरी गुड ट्राल यर तो वह जरूरी. नहीं है कि वो सिं साहब के लेवल के जो है. के साब जो है वो परसेप्शन हो बट इन देर. फीड वेरी गुड एंड दे आर द पीपल हु मेक द. केस जैसे जो जॉनी डेप का के. जीी उसने किसी सुप्रीम कोर्ट के लॉयर को. वाशिंगटन से नहीं ले. आया जो उसकी लॉयर थी कैमला वेस्टस उस 36.
साल 37 साल की. लड़की उसने बड़ा अच्छा क्रॉस एग्जामिनेशन. किया सो यू नीड स्पेसिफिक हर्से फर. स्पेसिफिक तो क्यों कुछ लॉयर्स बड़े बड़े. लॉयर से भी जीत जाते हैं जैसे आसराम बापू. के केस में आ स द मूवी र कि एक वो वहां के. लोकल लॉयर थे उन्होंने इंडिया के. बड़े-बड़े लॉयर्स से व आई थिंक जेट मिलानी. सर ने भी उ गए थे कई वकील गए थे. उसम आई थिंक सुब्रमण्य स्वामी भी वहां पर.
गए थे बहुत सारे लोगों ने वो केस आसराम. बापू के फेवर में लड़ने की कोशिश करी बट. अल्टीमेटली जो लॉयर लोकल थे वो जीत गए तो. क्यों होता है ऐसा कि कुछ लॉयर्स बड़े से. बड़े लॉयर्स प भी हावी पड़ जाते हैं उसकी. एक वजह होती है जो वकील नीचे से केस लड़. के आता है उसके पास वह पूरा केस उसके जो. है खून में गड़ा हुआ होता है इट ऑफस. कफ उसको केस पर ऐसी पकड़ होती है कि अगला.
आदमी अगर जो है 400 बार भी पड़ जाए तो. उसकी पकड़ नहीं. पाएगा सो दैट इज वई इन जो क्रिमिनल लॉ में. किसी भी क्लाइंट की जो मैं आमतौर पर कहता. हूं कि साहब किसी भी आदमी पर क्रिमिनल केस. हो जाए उसको सिर्फ ही ओनली है टू सेवियर. उसको बचाने वाले केवल दो आद में नंबर वन. साक्षात भगवान इफ यू आर. बिलीवर यू बेग फॉर फॉरगिव और व्ट.
एवर नंबर टू इज योर ट्रायल. लयर जो मुकदमा नीचे पहली अदालत में वकील. आपका लड़ेगा वह वर्चुअली आपकी तकदीर लिखता. एक डिफेंस लॉयर या क्रिमिनल लॉयर टॉप लेवल. पर इंडिया में वो कितने पैसे कमाते होंगे. पर मंथ. हाउ मच डू यू थिंक अ लॉयर वुड बी. मेकिंग हाउ मच इज पॉसिबल टू मेक इन दिस. फील्ड बिकॉज एक लार्जर सेंटीमेंट है कि. नॉर्मल लॉयर्स जो बेस लेवल से स्टार्ट.
करें तो कुछ भी नहीं कमाते हां राइट देन. कॉर्पोरेट लॉयर्स मेक सम मनी जो मर्जस. एक्विजिशन पे काम करते आईबी के साथ जो काम. सेट पैरामीटर्स होती है कॉपरेट बिलिंग. होती है आली बिलिंग होती है टाइम प बिलिंग. पैरामीटर होता है कि जितनी बड़ी फर्म उनकी. है जितना बड़ा नाम है जितने अच्छे मर्ज. एकशन करें उतने परसेंट पे वो कमाते हैं. राइट. बट विद डिफेंस एंड क्रिमिनल लॉयर्स करेक्ट. दिस इज इट्स अ ग्रे एरिया इंसान देख के. फीस मांग सकते हैं बिल्कुल और वैसे ही. करते होंगे मैक्सिमम लोग राट मतलब यू वड.
नॉट हैव स्टैंडर्ड फी स्ट्रक्चर कि ये. मेरा कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर है देख लो ऐसे. करूंगा अर्ली करू नहीं आपका केस इतना. कॉम्प्लिकेटेड है आप इतना दे सकते हो तो. इतना दे दो बिल्कुल सो हाउ मच ड यू थिंक. वुड बी टॉप % क्रिमिनल लॉयर्स अगर कंट्री. में होंगे या डिफेंस लॉयर्स होंगे जो वो. जो 20 2 30 100 लॉयज होंगे वो कितना कमाते. होंगे दिन के 30 लाख दिन के 50 लाख फॉर.
365. डेज वेल टेक आउट द. संज अब जो मर्जी जहां जैसे कर लो देखिए. क्या है जी बिलिंग बिलिंग स्टैंडर्ड्स जो. है जो कई लॉयर्स है दे हैव अपीयरेंस. बेसस सेकंड इज कि भाई अगर कोई ट्रायल करना. है तो उसमें तो जो है अभी जो क्लाइंट है. जो उसकी पेइंग कैपेसिटी है और उसके बेस. उसके बेसिस पे सो इट दैट इज ऑलवेज बिटवीन.
द लॉयर एंड द क्लाइंट बट यू थिंक की अ गुड. डिफेंस लॉयर करेक्ट कैन मेक 50 100 क्रॉस. और 200 क्रॉस अ. ईयर. वेल इफ नॉट दैट बट से एट लीस्ट अबाउट 50. पर ऑफ दैट इट्स नॉट दैट डिफिकल्ट सो 25 टू. 50 क्रॉस 30 करो 30 करोड़ यर 40 करोड़ अ. यर इज नॉट इज इज वेरी मीडियन इ मीडियन यस. अ टॉप वन वुड बी मेकिंग 100 ओ यस व्हाई.
नॉट. इजली इजली उसमें कोई दिक्कत नहीं है बिकॉज. व्हेन इट. कम्स देन यू कैन सम टाइम्स वी इवन आस्क. रिडिक. फी जो अपने. को ये तो बड़ी बदतमीजी की फीस मांग ली एंड. कुछ लोग हां बोल देते होंगे ठीक है आप. मुझे तो आप वहां तो आप वहां पर ये है कि. भा इफ यू आर देयर देन आई एम. गुड वो एक इतना भरोसा.
होता और फिर आपका अपना भी है यू नो इट्स. अप टू यू कभी आपने किसी नोक्स फीस मांगी. है एंड सम बडी है सेड. नो यस वाला मत. बताओ टेल मी एन नोक्स फीस य कोटेड सम लाक. जस्ट गिव मी एन एगम मे बी अर्ली स्टेज ऑफ. र करियर टुडे नो नॉट अर्ली स्टेज बट यस सम. टाइम्स यू नो आई वुड आस्क अ फी ऑफ यू नो अ. रिटेंशन अमाउंट इन अ मैटर व्हिच इज मोर. देन अ सीआर ओके वहां क्लाइंट कभी मना भी.
करता है कि हर सेटिंग का सर मेरे को करोड़. रुपए देना नहीं एक रिटेंशन अमाउंट दो. रिटेंशन मतलब मीन साइनिंग अमाउंट ओके कि. मैं आपके आ रहा हूं उसी लिए मेरे को करोड़. रुपए दे आप मेरे पास आ रहे हैं और मेरे को. साइन कर रहे हैं तो उसी चीज का एक कर उसके. मैं जो है अी आपके आपसे जो है मोटी फीस. मांगू. वही वही आप स्ट्रेट अप पहले एक दो करोड़. उसके बाद हर सेटिंग का फिर जो है फिर. यरिंग का होगा या एडवाइजरी का होगा एक. स्ट्रक्चर कर लेते हैं बट जो है एक आपको.
इंपोर्टेंट लॉयर अगर रिटेन कर रहा है मान. लीजिए साहब अगर आप बोले कि साहब मैं तो एक. बहुत बड़े सुप्रीम कोर्ट के लॉयर को रिटेन. करूंगा तो शायद आपको उसका रिटेंशन अमाउंट. ही 5 करोड़ से अब देना. पड़े नहीं तो बात भी ना. करे बट देन अगर हाई प्रोफाइल केस है तो. दैट पर्सन विल कम विद दैट काइंड ऑफ. कनेक्शन एंड एक्सपीरियंस तो मे बी आपका जो. केस 5 साल चलना था दो साल में खत्म करवा. दे व वो भी हो सकता है वो केस खत्म कराने.
के लिए क्या है जी सारा जो जिम्मेदारी है. वह एक क्रिमिनल ट्रायल में प्रोसन प आता. है जैसे ईडी का हम देखते हैं ईडी के आज की. डेट में हिंदुस्तान में पूरे मुल्क में 78. हज केस है 10 केस उनके ट्रायल पर नहीं. है जितने भी ईडी के मैं केस कर रहा हूं एक. में भी ट्रायल नहीं है सिर्फ लोग अरेस्ट. है और अरेस्ट के ऊपर सुप्रीम कोर्ट तक जो. है लड़ाई है और वह छोड़ नहीं रहे डी चाहे.
छोड़े ना छोड़े लेकिन देखिए कोई भी. प्रोसीक एजेंसी या कोई भी कानून आप. सोसाइटी में मनी लरिंग में सोसाइटी को. इंसाफ तभी दे पाएंगे जब आप मनी लरिंग में. किसी को. स्कम का पहला अरेस्ट 2014 में हुआ आज क्या. है 24 अभी तक उसके अंदर इन्वेस्टिगेशन ही. हो रही तो जिसको अरेस्ट करते हैं मनी.
लरिंग केस में वो अंदर ही रहता है अब जो. पिछले दो साल प जो जजमेंट आई उसमें जो. कानून की व्याख्या हुई उसमें उसकी बेल. होनी बड़ी मुश्किल है पहले बेल होती. थी लेकिन जो है कि साहब आदमी को अरेस्ट. करके परमानेंटली अंदर रखना यह समाज के के. हित में नहीं है समाज के हित में है कि. साहब अगर किसी ने जुर्म किया तो साल डेढ़. साल में उसको वाइंड अप करके या उसकी सजा. करो या उसको एक्वेट.
करो हम लोग की प्रॉब्लम यह क्या जैसे. हमारी जो फेडरल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी है. चाहे वो सीबीआई है चाहे वो ईडी है डीआरआई. है कस्टम्स है इनमें एक बिमारी है के साहब. एक पॉइंट को प्रूव करने के लिए छह गवाह. लगा दे. तो आपके जो गवाहों की लिस्ट है वह 450 हो. गई हमारे जज जो हमारी चाहे काला गड़ा.
कोर्ट है या दिल्ली में राउज एवेन्यू. कोर्ट है या जो कलकाते की बंसल कोर्ट है. वहां पर जो हमारा ट्रायल जज है उसके पास. दिन में 20 मुकदमे एविडेंस के. हैं अगर एक गवाह चालू हो गया तो 19 एडजर्न. होते. तो नतीजा है कि आपका केस 20 साल चलता है. कभी-कभी 25 साल भी चलता है और 20 साल में. जो एक्यूज वो जेल में रहे नहीं उसकी बेल. भी हो जाती है लेकिन 20 साल वो मुकदमा.
भुगता है उसकी चमड़ी उतरती है तो हमारा. सिस्टम वहां फेल हो गया फेल इसलिए हुआ कि. हमारा जो इंफ्रास्ट्रक्चर है जो गवर्नमेंट. है वह लीगल इंफ्रास्ट्रक्चर में लीस्ट. फंडिंग देता. है जैसे हमें जज और नहीं चाहिए अदालत और. चाहिए इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर चाहिए मैं एक. स्टेट पढ़ रहा था कि इंडिया में सबसे पुअर. रेशो है जजेस टू ऑडियंस जस्टस टू सिटीजन.
का बिल्कुल 21 जजेस ओवर 1 मिलियन ऑडियंस 1. मिलियन सिटीजंस यस 21 जजेस ओवर 1 मिलियन. सिटीजंस देखिए आप क्या रेशो है एंड चाइना. में ये बहुत अच्छा है 300 जजेस ओवर मिलियन. यूएस में 270 ओवर अ मिलियन कर तो ये काफी. दूसरी कंट्रीज मतलब 10 10 गुना हमसे. ज्यादा उनके जजे से कपेड टू उनके एक. सिस्टम में और हमारे सिस्टम में फर्क है. हमारे यहां प भी पहले जूरी ट्रायल होता था. तो जूरी जब इनकॉरपोरेट होती है न्यूयॉर्क.
में टेक्सस में साउथ कैरोलिना में वो जूरी. जो है घर नहीं जा सकती जब तक डिसीजन नहीं. देती जब तक डिज तो आपको मुकदमा फटाफट. चलाना है हमारे यहां इन्वेस्टिगेशन में. क्या होता है कि साहब आपने मुकदमा बंद कर. दर्ज कर लिया आदमी बंद कर. दिया पाच महीने में उसकी जमानत हो गई आपने. एक मेन चार्जशीट दे दी फिर आप बोलते हैं. कि सर अभी तो हम जो है इन्वेस्टिगेशन कर. ही रहे हैं अब खत्म कब हो रहा हमें पता ही. नहीं तो इन्वेस्टिगेशन करने में ही पाच.
पाच साल लगते. हैं और इन्वेस्टिगेशन आप कंप्लीट करेंगे. तभी तो फिर मुलजिम पर जो है केस चलाएंगे. अगर आपने जहां मुकदमे में आपको 25 गवाह. चाहिए एक्चुअल गवाह आपने लिस्ट कर लिए. 125 तो 125 गवाह कब आएंगे कब क्रॉस. होगा बहुत लंबा तो ये लंबा रहता है तो.
थोड़ा सा दुख दाइ है बट ट्स अ फैक्ट या. ट्स अ फैक्ट विच हर्ट्स अस आल्सो हमें भी. इसमें तकलीफ होती है आई वुड. रदर हैव अ. क्लाइंट एक्विटेड इन थ्री मंथ्स देखिए. उन्नाव रेप केस में जब सुप्रीम कोर्ट का. आदेश आया. कि 3540 दिन में दो मुकदमे खत्म करके दो. तो दिए या नहीं दिए बिल्कुल दिए तो कैसे. हुआ र देर इज अ बिल देर इज अ वे हां व जज.
साहब ने क्या करा जी हमारे साथ जज शर्मा. साहब ने नाउ जस्टिस शर्मा इन दिल्ली हाई. कोर्ट मैं पहले दिन गया बोले मीर साहब यार. इसमें सुप्रीम कोर्ट से हिदायत है तो आपसे. मेरे को फुल कोऑपरेशन चाहिए मैं क कॉपरेशन. है तो मैं रिक्वेस्ट कर रहा हूं संडे को. अदालत मैं क बिल्कुल हम आप संडे में आएंगे. तो मैं नहीं आऊंगा क्या हम कह रहा यार बीच. में ईद दिवाली होली जो छुट्टी गांधी जयंती. उसमें भी कोर्ट मैं बिल्कुल हम रात में 2.
बजे तक कोर्ट मैं बिल्कुल. जब तक गवाह खत्म नहीं होगा आप और मैं. अदालत में ही रहेंगे तो हमने 111 12 ब बजे. तक क्रॉस एग्जामिनेशन. किया और जो दायत वो सुप्रीम कोर्ट ने. माननीय अदालत पे दिया उसको पूरा निभाया सो. इन हाई प्रोफाइल इफ यू हैव टू पुट. इन द यरार की ओके किसको जान जानना या. किससे दोस्ती करना सबसे सबसे ज्यादा.
बेनिफिशियल होता है पॉलिटिशियन बिजनेसमैन. कि ब्यूरोक्रेट्स कि आईस आईपीएस ऑफिसर्स. ये जो आप बता रहे हैं यह किसके संदर्भ में. है एक वकील के संदर्भ में है नो एक. क्लाइंट के संदर्भ में कि जहां पे जो. इंसान नॉर्मल है एक सिटीजन है अगर उसको. आगे बढ़ना है लाइफ में या बचना है सारी. चीजों से या कभी कुछ भी क्योंकि अगर वो. कुछ करता है और खुदाना खस्ता उसके हो जाता. है तो कौन ज्यादा चांसेस है बचा सकता है. उसे जो पॉलिटिशियन पावर में है वो आपकी.
टॉप बिलिंग टिकट. है क्योंकि वो जो है पूरा सिस्टम हिलाने. का जो है समाधान रखता है आईपीएस आईएस. ऑफिसर से भी ऊपर ओ उसके सामने आईपीएस. ऑफिसर क्या है जो इन्वेस्टिगेटिंग तो वही. है वही रखेगा जो ऊपर से ऑर्डर आएगा. वाईपीएस चेंज कर सकता ना वो उसको हाथ भी. नहीं लगा पाएगा सो यू फील कि अगर आप एक. स्टेट के चीफ मिनिस्टर से फ्रेंड हो तो. इट्स वन ऑफ द मोस्ट इंपोर्टेंट या आप. नेशनल लेवल प अगर आप कैबिनेट से फ्रेंडशिप.
है तो बिल्कुल. क्योंकि जो हमारा सिस्टम चलता है उसमें यह. अभी भी एक बहुत बड़ा फैक्टर. है हालांकि इससे सोसाइटी जिदो जहद कर रही. है ब आज भी होता है रियलिटीज की होता है. रियलिटी तो है ही. ए हा मच हाउ मच पावर डू यू थिंक एक लोकल. एमएलए या लोकल एमपी होल्ड करता है लोकल. एमएलए जो है जी जो अपनी कंसीट एंसी में है.
वहां पर अच्छा खासा पावर रखता है एंड एमपी. और मेंबर पार्लियामेंट उतना ही पावर रखता. है जितना आगे उसका कोई काम करने वाला है. मतलब फॉर एग्जांपल आप एक लोकसभा क्षेत्र. से एक एमपी है आपने कोई काम कराना है तो. अगर आप वो काम मिनिस्टर के लेवल पर कहने. से होगा तभी होगा आपके कहने से नहीं होगा. तो एमपी के जदा पावर नहीं होता एमएलए के. तो भी उसके उसका पावर होता है उसका एक.
नीचे कनेक्ट होता उसकी जो है कि भी. इंटरेक्शन बड़ी जबरदस्त होती है उसकी. कंसीट में वो उसकी कंसी में वो बहुत बड़ा. शेर. है लोकसभा वाला नहीं लोकसभा वाला जो है. अगर इंपोर्टेंट है और साब फिर उसका ऊपर. कोई कनेक्ट है तो उसने ऊपर से कोई काम. करवा लिया मिनिस्ट्री लेवल प उसकी. फ्रेंडशिप होनी हा बिल्कुल तो वहां से. आदेश निकलेंगे तो कुछ भी होगा मैं आपको एक. एग्जांपल बताता हूं जो दिल्ली एक्साइज.
स्कैम है जिसमें अरविंद केजरीवाल बन इस. पूरे स्कैम में आई एम द फर्स्ट लॉयर टू बी. एंगेज एंड. ब्लॉक्ड मैं इसमें एंगेज हुआ जब सीबीआई की. एफआईआर भी. नहीं किसके मैं एक क्लाइंट के लिए हु एक. क्लाइंट के लिए मैं हुआ लेकिन इस केस में. आप देखेंगे एक बहुत बड़ी चीज सामने नजर आ. रही इसमें क्या हुआ कि साहब मुलजिम में से. ही कुछ आदमी जो है वह गवाह बन गए हम तो.
उनको पार्डन किसने दिया वो पार्डन जो है. के साहब केज चलो जी आपको छोड़ देते हैं आप. बाकी लोगों के खिलाफ गवाही. दो कल मैंने एक टर प ऐसा ट्वीट भी किया. क्योंकि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल. की जो बेल हुई और उसकी जो हाई कोर्ट में. उसको चुनौती हुई उसमें उन्होंने एक बात. कही कि साहब आर्ट ऑफ इन्वेस्टिगेशन इज टू. गिव अ लॉलीपॉप टू अ.
पर्सन सो दैट ही मेक सम स्टेटमेंट अगेंस्ट. अनदर. एक्यूज मैंने यह लिखा कि साहब आर्ट ऑफ. इन्वेस्टिगेशन इज नॉट टू गिव अ. लॉलीपॉप इन्वेस्टिगेशन की जिम्मेदारी या. जो उसका हुनर है वह एक मुलजिम को लली पॉप. देने का नहीं है कि दूसरे मुलजिम के खिलाफ. आप बयान दो लेकिन आपने आर्कियोलॉजिस्ट की. तरह काम करना है लेयर्स ऑफ एविडेंस आपने. ब्रश करने है सच्चाई की खोज में और जब.
सच्चाई आपको मिले तब आप अपना कंक्लूजन ड्र. करें अभी हमारी प्रॉब्लम जो सबसे बड़ी है. खासकर फेडरल लॉ इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी. जैसे सीबीआई ईडी वगैरह हो गए यहां पर. कंक्लूजन पहले तय होता. है यहां पर. कंक्लूजन पहले तय होता है और उसके. इर्दगिर्द एविडेंस बनाई जाती. है आपने पहले ही तय कर दिया कि आपने. कंक्लूजन लास्ट में ड्र करना था आपने पहले.
कंक्लूजन तय कर लिया इसके इर्दगिर्द आप जो. है अब एक स्वेटर की तरह आप एविडेंस बनाते. हो और जब आप इस तरह की हिमाकत करते हैं या. इस तरह का अप्रोच लेते हैं तो अनिवार्य. आपका केस बिखर जाता है बिकॉज एनी गुड. डिफेंस लॉयर विल फाइंड दो चार चिंक सी. मैंने आपके केस में निकालने देखिए हम केस. कोई भी आदमी बेल पे केस नहीं जीतता हारता. हम केस का जीतने का मतलब है कि जिस दिन आप.
कोयले घोटाले में दिल्ली एक्साइज कैम में. जिस दिन आप मुकदमा. कन्विसिटी. मिनिस्टर को अंदर रख लिया या डेप्युटी को. रख लिया यह सब जो है बेमान है अल्टीमेटली. आप सोसाइटी को क्या बेनिफिट देंगे यू गेट. द बेनिफ सोसाइटी गेट्स अ बेनिफिट बाय अ.
गुड. कन्विसिटी. ने जुर्म किया आप जुर्म को साबित करें तभी. तो समाज को इंसाफ देंगे अगर आपकी. कन्विसिटी को. जो समाज है यह दायित्व नहीं देता है कि. साहब आप अरेस्ट करें और अरेस्ट के ऊपर जो. है मुर्गी की तरह बैठ. जाए और कुंडली मार ले आपका दायित्व है कि.
साहब अगर किसी ने मनी लरिंग करी तो छ. महीने में उसकी सजा करके दिखाओ चलो साल. में करके दिखाओ आप पर 8000 मुकदमे ट्रायल. आपके टोटल आपके पास आज तक केवल 24 ट्रायल. है 24 ट्रायल्स. एट द बेस्ट आई वाज रीडिंग अ स्ट रिसेंटली. क्योंकि मैं एक सीबीआई के साथ सीबीआई चीफ. के साथ मैंने पॉडकास्ट बनाया था एंड उसी. के टाइम प मैं ट देख रहा था कि सीबीआई एंड.
ईडी के इंडिया में कन्वे रेट लेस सिंगल. डिजिट. में ईडी का तो हो ही नहीं सकता क्योंकि. ईडी तो मुकदमा ही नहीं चला रहा ईडी के. किसी केस में तो गवाही शुरू हुई नहीं है. परसेंटेज वाइज इट्स इन सिंगल डिजिट दैट इज. बिकॉज. व्ट एम आई टेलिंग यू मैं आपको क्या बता. रहा हूं जो ऊपर से ऑर्डर आया ऑर्डर ये आया. कि मुकदमा. चलाओ आदमी को बंद करो पर मुकदमा मत चलाना.
क्योंकि आदमी अंदर चाहिए बस कि आदमी अंदर. चाहिए क्योंकि अगर आपने मुकदमा चला लिया. जो डिफेंस के लॉयर है वह तुम्हारे कपड़े. फाड़ देंगे और मुकदमा आपका खत्म हो जाएगा. क्यों क्योंकि उनके पास अच्छे लॉय नहीं है. क्या नहीं क्योंकि उनके पास केस ट्रंप टप. है. और कहीं ना कहीं वो बिखर जाएंगे तो यू. थिंक आप किसको डिफेंड कर रहे हो इसमें मैं. इसमें जो है एक कंपनी है और उसका. डायरेक्टर है अमनदीप सिंह ढल ब्रिंको. सेल्स वन ऑफ द इंडिया लार्जेस्ट.
इंपोर्टर्स ऑफ फॉरेन अल्कोहल मेरा क्लाइंट. बंद है ओके और इंतिहा उसके ऊपर कुछ केस. नहीं और उनका केस क्या है कि वह केजरीवाल. गवर्नमेंट से मिलके यह करते हैं केस. इन्होंने बनाया है कंस्पिरेशन का जिसमें प. पॉलिटिशियन थे आम आदमी पार्टी के और साहब. जो है ये साउथ इंडिया जो हैदराबाद के लोग. हैं के कविता रेड्डी जो बंद है शी आल्सो. कम्स फ्रॉम पॉलिटिकल फैमिली और कुछ बिजनेस. मैगनेट थे जैसे श्री और बंदो फार्मा जो.
शरत रे अब शरत रेड्डी जो है वह पहले इस. केस में किंग पिन था आज वह मुलजिम. पहले मुलजिम था आज गवाह है और 100 करोड़. इलेक्टोरल बंड ले लिए कुछ पहले कुछ बाद. में. तो कुछ पहले कुछ बाद में तो जो मेन ब्राइब. गिवर है ल्ली एक्साइज क कैम में ईडी के. मुताबिक जो मेन ब्राइब गिवर है वह अब गवाह.
है तो आप क्या इंसाफ करा रहे. हैं तो समाज को इसलिए जो है जो ये कई बार. क्योंकि ये ऑन गोइंग केस है इस परे मैं. ज्यादा बात नहीं करता लेकिन जो मैं फॉलो. कर क्योंकि मैं खुद इसके अंदर बहस कर रहा. हूं बट डू यू थिंक इन दिस केस. डेंट हुआ है आप गवर्नमेंट को अरविंद. केजरीवाल को देखि जो आदमी अरेस्ट रेस्ट. करा तो कुछ ना कुछ डेंट तो होता ही है. पॉलिटिकली आपको इमेज वाइज तो कुछ ना कुछ.
डेंट हो गया अगर आप ऑटो रिक्षा पर भी. जाएंगे लार्जर सेंटीमेंट ऑफ पब्लिक. सिंपैथी का है कि अग्रेशन का है नहीं. देखिए जो दिल्ली के अंदर है उसमें जो. केजरीवाल की जो अगर आप प्योर पॉलिटिक्स की. बात करें तो उसका जो जनरल इंप्रेशन है कि. इसने दिल्ली के लिए अच्छा काम किया ट इ. देर हा वो तो है कई लोग यह भी कहते हैं. नहीं कुछ ना कुछ तो शराब कांड में हुआ ही. है बंद है पर ड य थिंक अगेन हील कम वई नॉट.
मे बी ल मे बी आ बट आई कैन टेल यू ट. सेंटीमेंट की लोग मानते हैं कि हा उसने. दिल्ली के लिए अच्छा काम किया बिल्कुल जो. केस है वो कुछ भी नहीं. है हवा में केस है तो निकल जाएंगे वहां से. केस तो चला लो केस चला की हिम्मत कहां है. आपको सो टेल मी डू यू थिंक की अ लॉट ऑफ. गवर्नमेंट जो फॉम होती है वो यह जो. सेंट्रल एजेंसी है लाइक ईडी एंड सीबीआई इन.
सबका पावर को बहुत मिस यूस करती है पहले. इतना नहीं था ली अब जबरदस्त है रिलीस पहले. जो है तो इमरजेंसी वगैरह हो जाती थी वो. इमरजेंसी तो एक बड़ा अलग सा एक एग्जांपल. था लेकिन जो अगर आप देखेंगे जी भा 80 का. जो दशक था 90 का जो दशक था उसमें जो लॉ. इंफोर्समेंट एजेंसीज पे पॉलिटिकल. इफिल्टर की नहीं.
थी क्योंकि आज आप पहली बार देख रहे हैं कि. जी दो तीन चीफ मिनिस्टर अंदर दो. तीन जो है कि डेप्युटी चीफ मिनिस्टर अंदर. और यह आपको मैं बात बता देता हूं कि जो. शराब का काम है ऑल ओवर इंडिया व शुरू से. उसके अंदर कुछ ना कुछ चीजें जो है वह. पॉलिटिशियन के लिए होती होती है द अल्कोहल. इंडस्ट्री इज ऑलवेज देयर टू प्रोवाइड सम.
फंडिंग टू पॉलिटिकल पार्टी टू द पॉलिटिकल. पार्टी यह कई जगह जैसे मैंने खुद देखा है. अगर 00 रप निकल गए तो रप तो पॉलिटिशन के. होते ही होते अब वो कैसे पहुंचे ऐसे. पहुंचे वो उनकी बात. हैट इज द रियलिटी. क्वेश्चन फॉर यू यस. कि कौन सी ऐसी लाइन है जो आप नहीं क्रॉस. करोगे टू डिफेंड योर.
क्लाइंट देखिए मैं हा देर इज अ लाइन अगर. मेरे को क्लाइंट यह बोले कि मिस्टर मीर आप. जो है कि साहब एक गवाह से बात कर लो इनको. ट्रेन कर लो यह गवाह हॉस्टाइल्स. यह मैं नहीं. करता टाइम ब्रिंग नहीं. करोगे यह मैं नहीं. करूंगा मैं अपने क्लाइंट को जरूर यह. बताऊंगा कि साहब आपके केस में यह पांच छ.
गवाह जो है यह अहमियत रखते हैं इन टर्म्स. ऑफ कि इनके पुलिस के क्या बयान है दे वेरी. इंपोर्टेंट. विटनेसेस तो इनकी तैयारी हमें और जबरदस्त. करनी. पड़ेगी जो मेरे लिए जो काम है आई विल नॉट. डू एनी एक्ट च इ. ब्रीच ऑफ माय. कोड कि मेरे को अपना काम कैसे करना है मैं. कभी भी अपने क्लाइंट के लिए कोई. पेनिट्रेशन नहीं करूंगा मैं जिंदगी.
में शुरू से आज तक कभी पुलिस थाने नहीं. गया मेरे पास कई क्लाइंट आते हैं कि सर. हमारी पुलिस की प्रॉब्लम है आप हमें साथ आ. जाए आपकी फीस मिल जाएगी मैं मैंने जाता. क्यों उसकी वजह है जो हम सिस्टम है इन. कांट डिस्टिंक्शन टू इंग्लैंड अमेरिका. फ्रांस जर्मनी सिंगापुर कोलपुर न्यूजीलैंड. ऑस्ट्रेलिया हमारे यहां पुलिस थाने में. वकील की कोई इजाजत नहीं है यूनाइटेड.
स्टेट्स में पुलिस आपके क्लाइंट को बुलाए. तो वकील की गैर हाजिरी में बयान नहीं लिख. सकते पूछताछ भी नहीं कर सकते हां तो वहां. का जो कानून है वो लयर को एनेबल करता है. दैट हिज क्लाइंट उसके क्लाइंट से वहां की. पुलिस तभी पूछताछ कर पाएगी जब वकील सामने. है या वो वेव. करें हमारे यहां का सिस्टम वकील को थाने. जाने की कोई इजाजत ही नहीं देता तो अगर आप.
चले भी गए तो थानेदार बोलेगा बाहर बैठो. बेशक चाय पी लो लेकिन मुलजिम से मैं खुद. बात करूंगा बट जो अगर मुजरिम है हा वो. पुलिस को जो भी अपना स्टेटमेंट देगा वो तो. एडमिस बल ही नहीं है कोर्ट में अगर तू. अरेस्टेड है. अगर अगर वह कस्टडी में है तो जो भी पुलिस. ने बयान लिखा वोह इन एडमिस बल है यह हमारे. य बहुत अच्छा कानून है मतलब हा मतलब.
अरेस्टेड का अरेस्टेड के बाद में आपने एक. मुलजिम को अरेस्ट कर लिया बाद में पुलिस. ने कोई बयान ले लिया जिसको कन्फेशनल. स्टेटमेंट मान लो व एडमिस बलट इ न. एडमिस लॉयरिंग की बात यह है कई बार कहते. हैं कि सर वो थाने वहां पर जो है बत डरा. रहा वो डरा रहा साथ आ जा मैं मैं नहीं. जाता मेरा द मेरा दायित्व अदालत का अगर. मुझे कानून इजाजत. दे जैसे न्यूयॉर्क में दे रहा है कि कोई.
भी पुलिस वाला मेरे क्लाइंट को मेरी गैज. हाजरी में क्वेश्चन नहीं कर सकता जैसे. वहां पर यह होता है कि साहब पुलिस सवाल. पूछती है मैं कहता हूं डोंट आंसर तो. क्लाइंट आंसर नहीं करेगा उसको कहते हैं. फिफ्थ अमेंडमेंट राइट राइट ऑफ साइलेंस. इंडिया में नहीं हैय इंडिया में भी है. तो इसलिए हमारे पास भी राइट ऑफ साइलेंस है. लेकिन यहां पुलिस बुलिस पकड़ के राइट ऑफ. साइलेंस बांधता बेस्ड ऑन योर. एक्सपीरियंस पैसा ज्यादा पावरफुल है कि.
कनेक्शंस और पावर ज्यादा पावरफुल है. पोजिशन लेट ये सिचुएशनल डिपेंड करता. है कि साहब कहां कौन सी चीज ज्यादा चलेगी. तो दोनों होना चाहिए हां और जो कनेक्शन भी. है उसका भी कहीं ना कहीं कोई इकोनॉमिक. इंटरेस्ट फसा हुआ. या कोई और इंटरेस्ट है आज नहीं तो कल मैं. पैसा तो होना ही चाहिए ट्स अ. फंडामेंटल जो आदमी से आपका कनेक्शन है वो.
कनेक्शन कोई रुवा नहीं थड़ी हैट इ आल्सो. मटेरियल इट इ नट स्पिरिचुअल. कनेक्शन यदि तो आप उस कनेक्शन पर बेस्ड है. या कोई काम करना फ्रिप कुछ फर्क नहीं. पड़ती लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी में तो कु. नहीं सिर्फ. पैसा जी भयार आई स्क्रैच यर बैक यू हैव टू. स्क्रैच इट मोर सोसाइटी को अल्टीमेटली.
दोही आदमी जो है इंसाफ दिलाएंगे जी पहला. काला कोट दूसरा काला. कोट इसीलिए मैंने कहा कि अगर मैं विक्टिम. का वकील. हूं तो आपकी जो इं जो मुझे यह समझ में. आएगा कि पुलिस केस कहां कर रहा आपको नहीं. समझ में. आ अगर मैं डिफेंस लॉयर हूं वहां पर भी. मुझे समझ में. आएगा तो एक विक्टिम की लड़ाई जो है वही. वकील बहुत अच्छी लड़ लेता है मुलजिम की तो.
लड़ ही लेता है विक्टिम की भी लड़ विक्टिम. की भी बहुत अच्छी लड़ लेता है आपने लास्ट. क्वेश्चन है. नेली बट समरा इन वन लाइन यू कैन टेल. मी अगर आपको आपके सारे केसेस सराइज करना. हो जितने जीते हो जितने तो भी ठीक है ल. योर विनस ल योर लॉसेस ल द केसेस जो आपने. देखे हैं पढ़े हैं समझे अपने फ्रेंड्स के. देखे अगर समरा करके बताना है कि एक कॉमन.
मिस्टेक कौन सी देखी जिसके से लोग केस हार. जाते हैं लॉयर्स कहां केस हारते हैं या. क्लाइंट कहां हारते. है वो पोरली जो है जी लैक ऑफ प्रॉपर. प्रिपरेशन जो है कि साब. डिसीजन है कि आप जो लॉयर भी एंगेज करा वो. अपने ही केस में कितना इवॉल्वड है हम सो. जस प्रिपरेशन इट कैन मेक अ ब्रेक केस ट्स.
सी इफ यू वर्चुअली ब्रीद अ केस देन यू विल. बी वर्चुअली ड्रीमिंग अबाउट द केस एंड देन. यू विल हा कभी कभी जो है कोई केस आपको. वर्चुअली जो है 24 घंटे जीना पड़ता है य. टू गेट द पल्स ऑफ द यस यू हैव टू गेट अंडर. द स्किन और कोई फर्क नहीं पड़ता उसमें. विक्टिम कौन है और कपट कौन है कुछ नहीं. आपको अपना दायित्व निभाना है आई ू परफॉर्म. माय. ड्यूटी एंड देन लीव इट टू द डेस्टिनी ऑफ द. क्लांट बिकॉज.
अल्टीमेटली जस्टिस इ टू बी सर्ड बाय कोट. ऑफ. लॉ ओनली ऑन द बेसिस ऑफ एविडेंस प्रोड्यूस. बिफर कोट ऑफ ल द एविडेंस है टू बी टेंबल. एंड. क्रेडिबल एविडेंस कैन नॉट बी बेस्ड ऑन. परसेप्शन इ. स्पेकल मिसबिलीफ. लुसने. इमेजिनेशन एंड ऑल योर गेम ऑफ थ्योरी. वर्क्स जस्ट इन दिस वन लाइन एविडेंस च इस.
प्रोड्यूस्ड इन फ्रंट ऑफ द को च है टू बी. टंबल एंड क्रेडिबल माय वर्क एस डिफेंस लयर. इ टू स्मश द क्रेडिबिलिटी. इफ आई रिमूव द क्रेडिबिलिटी और. इंट्रोड्यूस इवन ऑफ. डाउट जस्ट थैंक यू सो मच फॉर डूइंग दिस. रियली एंजॉयड द होल कन्वर्सेशन ऑनेस्टली. मोर देन मोर देन एंजॉय थ एंजॉय द रॉन्ग. वर्ड आई थिंक आई एम अनिश ऑन लॉट ऑफ थिंग्स.
मेरे लिए काफी सरप्राइजिंग एंड शॉकिंग. बहुत सारी चीजें जो मुझे कंप्रिहेंड करने. में बहुत टाइम लगेगा आज थैंक यू सो मचन. थैंक यू इ वा प्लेजर यस व्हाई नॉट थैंक यू. थैंक यू सो मच ये एपिसोड एंड तक देखने के. लिए प्लीज हमें कमेंट्स में बताओ कि ऐसे. और कौन से गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो. हमारे पॉडकास्ट पे ताकि हम आपके लिए. उन्हें चेज करके लेके आए और उनसे वैल्यू. ले जो आपकी लाइफ में बहुत हेल्पफुल होगी. प्लीज लेट अस नो इन द कमेंट्स एंड यह.
एपिसोड एंड करने से पहले हमें सब्सक्राइब. करना मत भूलना आल्सो किसी एक इंसान के साथ. जरूर शेयर करना जिसकी लाइफ में इससे एक. पॉजिटिव चेंज आएगा उसे कुछ नया सीखने को. मिलेगा आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम. ब. [संगीत].
