Militant On Brainwashing Youth, Attacking Indian Army, Pakistan & Crossing Border |FO347 Raj Shamani
डीआईजी माथा टेकने आए वहां पर उनका मर्डर. कर दिया टेंपल के अंदर हां फिर उसकी लाश. नहीं उठाने दी कई घंटे. मेन काम क्या था आपका जो भी मंडरा वाला. आर्डर करते थे रेलवे स्टेशन जलाने पोस्ट. ऑफिस भी जलाए हुए थे सरकारी संपत्ति को. नुकसान मंडरा वाले के साथियों ने बस. किडनैप की थी जितने भी हिंदू थे उनको गोली. मार दी. जब पैसे की जरूरत पड़ती थी बैंक लूट लेते.
थे। आपको बहलाया बुसलाया कैसे जाता था? सिखों के साथ सरकार वैसा कर रही है और. पंजाब पुलिस नाखून तक उखाड़ देते थे। चीरा. देके नमक वगैरह डाल देना। फिर उसके बाद जब. आप छूट के आते थे वहां पर वारी जाता था कि. हमारे सिखों के साथ ये कर रही है पुलिस।. ऑपरेशन ब्लू स्टार गया था।. आर्मी को टास्क दिया गया था कि हरमंदर. साहब को भिंडरा वाले से मुक्त करवाना है।.
तो हमें तो यही था भाई जैसे सीआरपी वालों. को जवाब दे दिया हमने इंडियन आर्मी वालों. को भी दे देंगे। पानी वाली टंकी के जब ऊपर. गए वहां से हमने इंडियन आर्मी पर गोली. चलानी शुरू कर दी। बिल्कुल गांव पाकिस्तान. के पास ही था। एक दिन पाकिस्तान का बॉर्डर. क्रॉस कर गया। आपको कब पता चला कि मेरा. ब्रेन वाश किया गया है? जेल में मेरे साथ. एक बुजुर्ग कांग्रेसी थे और काफी कुछ जब. उन्होंने मुझे अच्छी तरह बताया कि ये तो. बात ही एक थी। फिर वहां से आप सोचने लगे. उल्टा हम जैसे तो अपनी जिंदगी बर्बाद कर.
ली। किसी और की ना जो एंटीनेशनल एक्टिविटी. में इनवॉल्व हो रहे हैं। आज उनको रियलिटी. पता चलेगी। इसके पीछे क्या रीजन था? कुछ बहुत ही पावरफुल लोग अपने फायदे के. लिए यूथ को ब्रेन वाश कर रहे हैं टू जॉइ. टेररिस्ट ग्रुप्स एंड उन्हें गुमराह कर. रहे हैं टू डिवाइड इंडिया। एंड वो यह कैसे. कर रहे हैं? इस पे बात करने के लिए हमने. आज के गेस्ट कुलजिंदर ढिल्लो से बात करी. है जो खुद एक टेररिस्ट ग्रुप का पार्ट थे।.
जिनको ब्रेन वाश करके इनसे तरह-तरह की. टेररिस्ट एक्टिविटीज करवाई। एंड ये गोल्डन. टेंपल के अंदर थे ड्यूरिंग दी ऑपरेशन ब्लू. स्टार। जहां यह अंदर से इंडियन आर्मी पर. अटैक कर रहे थे। उसके बाद यह वहां से. भागकर बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान गए। और. जब इंडिया वापस आए तो अरेस्ट हो गए। एंड. अब यह एक एक्टिविस्ट हैं जो बहुत ही. हिम्मत के साथ हर इंडियन सिटीजन को सच. बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे यह. टेररिस्ट ग्रुप्स हमारे आसपास के यंग. लोगों को ब्रेन वॉश करके उनसे गलत काम.
कराते हैं। हमने आज इनकी पूरी जर्नी के. बारे में डिस्कस किया है कि कैसे ये गलत. ग्रुप का पार्ट बने? कैसे इनसे गलत काम. कराया गया? कैसे उनको फंडिंग मिली? ये इन. सब में पाकिस्तान का रोल क्या था? ये. अरेस्ट कैसे हुए? एंड आज इनका माइंडसेट. ऐसा चेंज क्यों हो गया है कि अब यह एक. एक्टिविस्ट बन गए हैं। तो यह एपिसोड बहुत. जरूरी है। प्लीज इसे एंड तक देखना क्योंकि. यह बहुत इंपॉर्टेंट इशू है हमारी कंट्री. के लिए। हमारे आसपास के लोगों को किसी ना.
किसी तरह से गुमराह करके इन टेरर. एक्टिविटीज का पार्ट बनाया जा रहा है। तो. हमें जानना एंड इसके अगेंस्ट में अवेयरनेस. फैलाना बहुत जरूरी है। वाच इट टिल द एंड।. तो सर जो हम आज पडकास्ट बना रहे हैं इसका. मेरा जो इंटेंशन है पडकास्ट बनाने का वो. ये है कि जो हमारे देश का यूथ है हम वो.
किसी भी तरह से आजकल जो ब्रेन वाश किए जा. रहे हैं जो भटक जा रहे हैं वो उनको भटकाया. जा रहा है अलग-अलग तरीकों से तो वो कैसे. ना भटके और कोई भी एक्सट्रीम टीम ग्रुप या. कोई भी ऐसी चीज जो देश के खिलाफ है या. उनकी खुद के करियर के लिए उनके परिवार के. लिए खिलाफ है उस जगह पर ना घुसे और ना. भटके तो उसकी वजह से मैं चाहता हूं कि. आपकी स्टोरी सबके सामने आनी चाहिए और आपका. मैसेज बहुत क्लियर होना चाहिए सबके मेरी. भी यही कोशिश है मैं भी सोच रहा हूं जो हम.
जैसे तो अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली आप किसी. और की ना हो इस वजह से तो ना हो ना कम से. कम जो एंटीनेशनल एक्टिविटी में इनवॉल्व हो. रहे हैं बिना कुछ सोचे समझे आज उनको जब. रियलिटी पता चलेगी कि इसके पीछे क्या रीजन. था तो वो भूल जाएंगे कि इसमें हमारे बीच. में ही आ जाएगा क्योंकि इनको ना बरगलाया. गया बरगलाने का मतलब समझते हो ना आप.
बरगलाना किसी को गया बहलाया गया हम पंजाबी. में बरगलाना बोलते तो कैसे बहलाया सब पे. बात करेंगे आपको कैसे बहलाया आप कैसे. इसमें घुसे मुझे मुझे एकदम शुरू से बताओ. कहां पैदा हुए? बचपन की कहानियां बताओ। एक. कहां पैदा हुए? घर में मम्मी क्या करते. थे? पापा क्या करते थे? ऐसे मेरे फादर जो. थे वो पीएपी पंजाब आर्मड पुलिस में थे।. पंजाब आर्मड पुलिस में। जी हां। हम पुलिस. दो तरह की होती है ना। एक तो डिस्ट्रिक्ट.
पुलिस होती है। एक आर्मड पुलिस होती है।. हर एक स्टेट की अलग होती है। जो पंजाब की. है उसको पीएपी बोलते हैं। पंजाब आर्मड. पुलिस। जो हरियाणा की है उसको एचएपी बोलते. हैं। वो पीएपी में थे। ठीक है? तो बाद में. जब हरियाणा बना हम तो डिवाइड हो गए. मुलाजिम और फादर एचएपी में चले गए हरियाणा. आर्मड पुलिस में। अच्छा तो जब मुझे थोड़ा. सा ज्यादा पड़ता जब मुझे थोड़ा-थोड़ा.
मालूम है तब उनकी पोस्टिंग अंबाला में थी।. हम जब हम घर से पहली बार गांव से शहर में. रहने के लिए आए पिताजी के साथ अंबाला में. ये बात होगी शायद 71 या 72 की उसके बाद. डेपुटेशन पे मेरे फादर चंडीगढ़ पुलिस में. आ गए तो फिर चंडीगढ़ में आपका हां मैं हां. मेरी जो बचपन है तकरीबन स्कूल टाइम मैं. चंडीगढ़ ही रहा हूं जहां तक कि कॉलेज भी.
मैं गया हूं चंडीगढ़ लेकिन वो तो बाद में. मूवमेंट की वजह से मुझे कॉलेज छोड़ना. पड़ा। जब मैं कॉलेज गया तो हमारे कॉलेज. में एक ना. एआई एसएसएफ है ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट. फेडरेशन हम ये तो है तो काफी पुरानी मतलब. स्टूडेंट यूनियन है लेकिन ये ज्यादा. सरगर्म जो हुई है ना ये 1982 के बाद हुई.
है। कब की बनी? इसका कौन पहले प्रेसिडेंट. था वो तो मुझे मालूम नहीं है। लेकिन मैं. 82 में कॉलेज गया। हम जब मैं कॉलेज गया तो. मेरे कॉलेज में इसका यूनिट नहीं था। इसको. बनाने वाले हम ही तीन चार थे। हम. जिन्होंने स्टार्ट की हमारे कॉलेज में। तो. ये स्टूडेंट यूनियन थी जो हमारी ये पूरी. की पूरी पिंडरा वाले की फैन थी। क्यों? जो. इसका प्रेसिडेंट था उसका नाम था भाई अमरीक.
सिंह बट ये यूनियन बना क्यों था? क्योंकि. आपने बोला तब तो कॉलेज में कोई नहीं था।. एआईएसएसएफ की बात कर रहा हूं। हमारे. कॉलेजों में पहले नहीं था। और कॉलेजों में. यूनिवर्सिटीियों में था। अच्छा दूसरे. पंजाब में ना चंडीगढ़ में जहां मैं पढ़ा. हूं ना वहां नहीं। मेरे कॉलेज में ये. स्टार्ट 82 के बाद हुआ है। और क्यों. स्टार्ट किया? आपने बोला आप तीन चार लोग. ही थे जिन्होंने बनाया। तो आपने क्या सोच. के बनाया कि ये होना चाहिए हमारे कॉलेज. में भी। ऐसा है उस टाइम.
तो बस एक चौधर की लड़ाई थी क्योंकि वैसे. तो हम बन नहीं सकते थे ना तो कोई हमारा. प्रेसिडेंट बन सकता था ना कोई कॉलेज का. जनरल सेक्रेटरी बन सकता था और भडरा वाले. का थोड़ा मन में डर था लोगों के हम तो. हमने सोचा कि इसी बहाने प्रेसिडेंट भी. कॉलेज का हमारा बन जाएगा पर फिर आप बता. रहे थे मुझे जो आपके लीडर थे एआईएसएसएफ के. लीडर भाई अमरेक सिंह हां वो कॉलेज के लीडर. थे कि ओवरऑल पूरी वो ओवरऑल इंडिया के थे।.
ओके। उस टाइम दो ही आदमी हमारे पावरफुल. थे। एक भाई अमरी सिंह और एक था उसका नाम. था हरमिंदर सिंह संधू। हम हरमिंदर सिंह. संधू था वो जनरल सेक्रेटरी था ऑल इंडिया. का एआईएसएसएफ के एआईएसएसएफ का। ये दोनों. आदमी भिडरा वाले के काफी क्लोज क्लोज थे।. और आप लोग फैन थे अमरी भाई अमरीक सिंह के।. भाई अमरीक सिंह तो ऐसा हो गया ना हमारे ऑल.
इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन का. प्रेसिडेंट था। हम मेरी चंडीगढ़ में जितने. भी थे ना ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन. के मेंबर जितने भी थे 10 से 20 थे 50 100. जितने भी थे मेरी जान पहचान सबसे ज्यादा. थी भाई अमजी सिंह के। आप उनके फैन क्यों. थे? क्या था उनमें ऐसा कि जो आपको लगता था. कि इनसे मेरे को थोड़ा क्लोज होना है. क्योंकि आपको भी ऐसा था कि मैं एआईएसएसएफ. में बड़ी पोजीशन पर पहुंच जाऊंगा अगर इनसे. क्लोज रहा तो एक कारण तो यही था एक बड़ा.
कारण तो यही था हम हर एक आदमी थोड़ा पावर. चाहता है हम और मैं भी चाहता था कि थोड़ा. मेरा नाम हो जाए. और दूसरा उस टाइम ना एक अकाली जो थे ना. शिरोमणि अकाली दल एक पंजाब की पार्टी है. उसके बारे में शायद आपने सुना होगा पंजाब. में पार्टियों ने दो ने राज किया. या तो शिरोमणि अकाली दल ने राज किया है और. जा कांग्रेस ने किया है। हम.
और जब भी अकाली सरकार से बाहर होते थे ना. ये सरकार के खिलाफ कोई ना कोई मोर्चा लगा. देते थे सरकार गिराने के लिए पंजाब की कि. हमारे हाथ फिर दोबारा कुर्सी आ जाए। हम और. इनकी कुछ मांगे थी।. तब मैं भी उनका समर्थन करता था कि यह शायद. हमारे साथ नाजायज हुआ। उसमें एक मांग थी. कि जो चंडीगढ़ है ये पंजाब को दिया जाना. चाहिए क्योंकि ये पंजाब के लिए ही बना था।.
पंजाब की राजधानी था ये। हम और इसमें. हरियाणा बीच में आ गया। हरियाणा का कोई हक. नहीं है। ये हमें पंजाब को मिलना ही. चाहिए।. एक बड़ी डिमांड मैं एक एग्जांपल दे रहा. हूं। सिर्फ एक की डिमांड तो काफी थी लेकिन. मैं सिर्फ एग्जांपल एक की दे रहा हूं कि. जैसे ये डिमांड थी ये मेरा भी मानना था कि. ये तो गवर्नमेंट धक्का कर रही है। सेंट्रल. गवर्नमेंट जो चंडीगढ़ पंजाब को नहीं दे.
रही। ये आपको भी लगता था इसीलिए आप उनका. समर्थन करते हैं। हां ये तो मैंने एक ही. बात बताई ना काफी बातें थी। हां हां लेकिन. तब में और अब में जो मुझ में फर्क पड़ा है. क्योंकि उस टाइम मैं इतना सोचने वाला नहीं. था सोचता नहीं था। अब मैंने पहले भी बताया. अब अगर मुझसे कोई पूछे चंडीगढ़ पंजाब को. मिलना चाहिए तो मेरा जवाब यही होगा कि. चंडीगढ़ वालों से पूछना चाहिए। हम क्या वो.
पंजाब में शामिल होना चाहते हैं? 5% भी लोग नहीं मानेंगे। क्यों? नहीं. मानेंगे। पंजाब में क्या है? डेवलपमेंट हो. रही है कहीं पंजाब. में। कोई डेवलपमेंट नहीं। कोई नई. इंडस्ट्री नहीं लग रही। लोग डरते हैं।. बार-बार खिस्तान का मुद्दा आ जाता है और. जो भी बाहर से इन्वेस्टर है वो इन्वेस्ट. नहीं कर रहा पंजाब में। एक वैसे बॉर्डर. एरिया बॉर्डर स्टेट है। अच्छा कुछ लोग.
बोलते हैं कि बॉर्डर स्टेट के कारण और. बॉर्डर स्टेट तो गुजरात भी है।. हम राजस्थान भी है। गुजरात ने कितनी. तरक्की की है। राजस्थान भी कर रहा है। अब. मैं राजस्थान में रहता हूं। आज भी जयपुर. से आया हूं। हम तो राजस्थान मैंने 84 में. भी देखा था। आज से 40 साल पहले और आज भी. मैं राजस्थान को देख रहा हूं। राजस्थान. पंजाब से ज्यादा तरक्की कर रहा.
है। यह कारण नहीं है कि बॉर्डर स्टेट के. कारण है। इसका रीजन हमारा पहले तो. राजनीतिक ही था जो अकाली दल. था। इन्होंने जो मोर्चा सरकार के खिलाफ. लगवाया था उनमें एक डिमांड तो चंडीगढ़ की. होगी ना। एक डिमांड और थी कि चंडीगढ़ के. इर्दगिर्द जो पंजाबी बोलने वाले इलाके हैं. वो पंजाब में शामिल किए.
जाए। अगर यही डिमांड थी तो इन्होंने पहले. सेंट्रल गवर्नमेंट. से मोर्चा लगा के पंजाबी सूबा सूबा मालूम. है किसको बोलते सूबा स्टेट को बोलते हैं।. सूबा बोलते हैं। पंजाबी सूबा फिर क्यों. बनवाया? पंजाब तो बहुत बड़ा था। हिमाचल भी. पंजाब में था। मालूम है आपको? पूरा हिमाचल. पंजाब में था। शिमला पंजाब में था। दिल्ली.
तक पंजाब लगता था। पूरा हरियाणा पंजाब में. था। पहले अकालियों ने तो उसके तीन टुकड़े. करवाए। और मकसद क्या था अकालियों का? कि. अगर पंजाबी बोलने वाला एरिया एक जगह हो. जाए तो हमेशा ही हमारा आदमी मुख्यमंत्री. बनेगा। आप आपके कॉलेज के लीडर थे। कौन आप? नहीं मैं तो सीआर ही था। अच्छा नहीं. एआईएसएसएफ के कॉलेज लीडर थे आप? नहीं।. नहीं हमारा जो हमारा ग्रुप इतना बड़ा.
नहीं। अच्छा वो जितने थे ना. हमारे पर बाद में पुलिस रेड करना शुरू हो. गई और जो लोकल स्टूडेंट थे वो डर गए। पर. मेन काम क्या था आपका? इस यूनियन का काम. क्या था? आप क्या करते थे? जिसकी वजह से. पुलिस आप पर रेड मारती काम तो जो भी उस. टाइम मंडरा वाला ऑर्डर करते थे तो क्या. करना होता था एक एग्जांपल दो काम कॉलेज. में एंटीनेशनल एक्टिविटी होती थी तकरीबन. तो ऐसे ही एक दिन आर्डर आ गया कि रेलवे. स्टेशन जलाने हैं जलाने हम.
और सभी जगह के रेलवे स्टेशन पंजाब में. छोटे बड़े जलाए गए। इसी तरह एक रात पोस्ट. ऑफिस भी जलाए गए. थे पंजाब के सरकारी संपत्ति को. नुकसान बसें जलाना आम बात सरकारी बसें. रोडवेज की जिसको बोलते हैं ये तो आम बात. थी ये जब आपको आर्डर आते थे तो आप आंख बंद. करके इसको मान के कर क्यों देते थे आंख.
बंद करके ही मानते थे क्यों मानते थे. रेलवे स्टेशन जलाना मेरे शहर का मैं क्यों. जलाऊं तब तब ये सोचनी थी ना तब ये नहीं ना. सोचते थे कि ये हमारे देश का है। तब तो ये. हम सोचते थे हमें सरकार को तंग करना है।. क्यों? मांगे बनवानी है। सरकार को मजबूर. करना है। तो कॉलेज लाइफ में ये सब हुआ और. आप इनके क्लोज होते गए। हां मैं इनके. क्लोज होता गया। फिर आपको फाइनल मूवमेंट. में जोड़ा कैसे गया? खिस्तानी मूवमेंट. में। है ना जब.
चंडीगढ़ पुलिस ने थोड़ी इंक्वायरी की कि. जो चंडीगढ़ में छोटे-मोटे काम होते हैं. छोटे होते हैं या बड़े होते हैं इसके पीछे. कौन मेन आदमी है हम तो उनमें से मेरा नाम. आ गया हम तो मेरे घर में पुलिस का रेड. होना शुरू हो गया तो मैं फिर चंडीगढ़ छोड़. के पक्का ही दरबार साहब चला गया रहने के. लिए तो आपके फादर ने कुछ नहीं बोला. क्योंकि वो भी तो पुलिस थे उन पर उन पर तो.
प्रेशर रहता था गवर्नमेंट का हम कि अपने. लड़के को पेश करो फिर लेकिन मैं उनके काबू. नहीं आया और मैं निकल गया चंडीगढ़ से. रातोंरात निकल गया तब नाइट सर्विस चलती. होती थी पंजाब में नाइट सर्विस बाद में. बंद हुई है हम वो क्यों बंद हुई है नाइट. सर्विस वो भी आपको मैं बता दूंगा क्या. होता था नाइट सर्विस नाइट सर्विस. में एक ना बहुत बड़ा इल्जाम जो खस्तानी है. ना पहले वाले भी और अब भी जो नई पीढ़ी है.
जो. खस्तान मांगती है डिमांड करती है वो बहुत. सारे काम है जो सेंट्रल गवर्नमेंट के. जिम्मे लगाते हैं हम कि ये तो काम. एजेंसियों ने किया है। जी हमारे भिडरा. वाले को बदनाम किया गया है। ये है वो है।. लेकिन कुछ बातें हैं. मैं जहां ऑन द रिकॉर्ड बोलता हूं कि मुझे.
इस बातों में झूठा साबित करके दिखाएं।. पुख्ता सबूत लाएं कि मैं झूठ बोल रहा हूं।. किस बात का? जो भी अब बातें बताने लगा. नाइट सर्विस क्यों बंद हुई? हम नाइट. सर्विस इसलिए बंद हुई। भडरा वाले के. साथियों. ने. जालंधर अमृतसर से जालंधर को जब जाते हैं. ना रास्ते में एक गांव आता है ढिलवा ढिलवा. बोलते हैं उसको रेलवे स्टेशन भी है छोटा.
सा वहां से एक बस किडनैप की थी रात. को और उस बस में से निकाल के जितने भी. हिंदू. थे उनको गोली मार दी गई. थी ये बोलते हैं ना हिंदुओं का कत्लेआम. गवर्नमेंट ने सिखों को बदनाम करने के लिए. किया. लेकिन नहीं यह सच्चाई है और मैं उनके नाम. बताने लगा हूं जिन्होंने यह कत्लेआम किया.
था और ये वो नाम है जो भडरा वाले के जिसको. दाई और बाई बाजू बोला जाता था अब उनके नाम. सुनिए उनका एक का तो नाम. था जनरल लाभ सिंह दूसरे का नाम था सुरिंदर. सिंह सोड सुरिंदर सिंह सोड वो आदमी था जो. इंदिरा जो अपने भिडरावाला का शार्प शूटर. माना जाता. था। सबसे ऊपर उसका नाम लिया जाता था। इन.
दोनों ने वो किया था। दोनों नहीं और भी. है। मैं बताता. हूं। और तीसरे का नाम था सुखदेव सिंह उर्फ. सुखा। उसको सुखा कक्कड़ बोलते थे। कक्कड़. इसलिए कक्कड़ उसके गांव का नाम था।. और अभी डेथ हुई है। साल डेढ़ साल पहले ही. सूखे कक्कड़ की डेथ हुई है। उसकी काफी. इंटरव्यू. लोगों ने ली है। जिसमें वो माना है कि ये. काम हमने किया.
है। और एक था उसी सूखे कक्कड़ का नौकर. गांव में जैसे वह खेती करता था हम और जो. उसका खेती करवाने उसका जो मजदूर था नौकर. था उसका बलजीत सिंह नाम था उसका उसका निक. नेम था तोती हम और एक का नाम था सविंदर. सिंह ये सभी आदमी पांचों आदमी दरबार साहब. से. गए रात को इन्होंने कत्ल किए किए और वापस.
फिर आ गए। पहले थोड़ा सा रिवर्स करके. ऑडियंस के लिए मुझे यह बताओ भिंडरा वाले. कौन थे? उनका थोड़ा सा बैकग्राउंड दो ताकि. हम बेटर तरीके से लोगों को कांटेक्ट दें. क्योंकि कोई अगर ये पहली बार सुन रहा है. हम तो उसके लिए भी उसके कांटेक्ट होना. चाहिए। ऐसा एक ना पंजाब में. डेरावाद बहुत है। डेरे बहुत चलते हैं। कोई. किसी बाबा का डेरा है, कोई किसी का डेरा.
है। जहां जथे चलते हैं। कोई किसी का जथा. है, कोई किसी का जथा है। एक जथा होता था. जिसका नाम था भडरा वाले। हम उनके एक मुखी. थे जिनके गांव का नाम भडर था। हम मुखी के. नाम के आगे भडरा वाले यानी कि उस गांव के. रहने वाले हम और उसके बाद उसको जो मानने. वाले थे वो सभी अपने नाम के पीछे भडरावाला. लगाना शुरू कर दिया।.
वहीं से एक थे गुरबचन सिंह मंडरा वाले. जहां. तक मुझे मालूम है गुरबचन सिंह भडरा वाले. के बाद आ गए करतार सिंह भिडरा वाले हम. जिनके बेटे भाई अमरीक सिंह हमारे मुखी थे. और उनके बाद आ गए संत जनरल सिंह भडरा वाले. हम इनका जो मेन काम था ना वो तो धर्म. प्रचार प्रचार का था हम.
पॉलिटिक्स का नहीं. था। यह लोगों में अपने धर्म का प्रचार ही. करते थे। और पंजाब में इनको जरूरत थी. कांग्रेस को एक ऐसे बाबा की जो थोड़ा गर्म. ख्याली. हो। जो अकालियों का दिमाग ठिकाने लगा सके।. ये अकाली सिर दर्द बने हुए थे कांग्रेस के. लिए। हम जब भी पावर से बाहर होते थे जो.
सरकार के नाक में दम कर देते थे कोई ना. कोई मोर्चा लगा लेते. थे तो ना जाने कैसे भडरा वाले इनकी नजर. में आ गए हम. और. इनको यूज़ किया खिलाफ सरेआम किया ये. रिकॉर्ड. है एमपी का नाम था शायद रगलंदन लाल बाटिया. हम कांग्रेस के एमपी बनते थे वो अमृतसर से. उनके साथ फोटो है कई लोगों के पास अभी भी.
पड़ी है। मड्रा वाले ने ओपन चीप में उसका. प्रचार किया था कांग्रेस. का। उसके बाद एक एसजीपीसी है। शिरोमणी. गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बोलते हैं उसको।. हम जो ऑल इंडिया में गुरुद्वारों का. प्रबंध करती है। उसमें तकरीबन उसके जो. मेंबर है ना वह अकाली ही बनते हैं। हम. और भडरावाला की मदद से कांग्रेस ने 40.
कैंडिडेट उतारे मैदान में। वह सभी हारे. हैं। ये भी एक लोगों के पास प्रूफ है। एक. और मैं लोगों के लिए अब ओपन ही सवाल. छोड़ता हूं कि मेरी बात को कोई झूठा साबित. करके बता दे। मैं मान लूंगा। भंडरा वाला. सरकार का आदमी नहीं था। बडरा वाले के नाम. पर दो असला लाइसेंस जारी हुए।. उसमें एक राइफल थी 315.
बोर वो तो कोई भी ले सकता है हम. एक रिवाल्वर. था जिसका बोर था 38 38 बोर बोलते हैं. उसको वो कोई भी सिविलियन उसका लाइसेंस. नहीं ले सकता वो आता है परवेटेड. बोर 455 बोर हो गया और 38 बोर हो गया।. भंडरा वाले का लाइसेंस 38 बोर का किसने.
बनाया? कैसे बना? अगर वो सरकार का आदमी. नहीं था। तो अभी अपन आते हैं कि. आपने भिंडरा वाले जो थे वो मेन लीड करते. थे। हम और उनको जॉइ उनके साथ थे आपके भाई. अमरीक सिंह। हम उनको ज्वॉइ करने के लिए आप. चंडीगढ़ से बस लेके दरबार साहब आते आता. जाता रहता था अमृतसर गोल्डन टेंपल में आप. पहुंच गए हम है ना हम तो वहां आप चले गए. फिर क्या हुआ वहां जब गए तो आपने क्या.
बोला कि अब मैं आप लोगों के साथ फुल टाइम. काम करने के लिए तैयार हूं क्या था इस बात. का उनको मालूम था कि मैं आता जाता रहता था. ना उनको मालूम था कि चंडीगढ़ पुलिस इसके. पीछे पड़ चुकी है हम तो किसी ने मुझे. ज्यादा सवाल जवाब नहीं किए हैं। बस उनको. मालूम था कि जब इसकी जरूरत पड़ेगी कि. चंडीगढ़ जाएगा जरूर। जब भी इसको बेचेंगे. नहीं चला जाएगा। तो अब जब आप उधर गए दरबार. साहब उधर आपका रूटीन क्या होता था? सुबह.
उठते थे। क्या करते थे आप पूरे दिन? देख. कुछ भी नहीं करते थे। वैसे तो कमरे मिले. हुए थे। कमरे मिले की कब्रों पर तो कब्जा. किया हुआ था। मिलना तो और बात होती है ना।. हम हमने तो कब्जा किया था। जो कमरा किस. जिसको अच्छा लगता है कौन पूछने वाला है? पंजाब जब दरबार साहब से बाहर भडरा वाले की. पावर चलती थी तो अंदर क्यों ना चलती होगी. अंदर जो भी एससीपीसी के मुलाजिम थे कोई चू.
नहीं करता था जिस कमरे को भी हमारा मन. करता था वो कमरा हम रख लेते थे जी कमरा. हमें चाहिए फिर व और सुबह वहां से ही लंगर. हम लंगर तो वो फ्री है किसी के लिए फ्री. है तो जब पैसे की जरूरत पड़ती थी तो हमारे. ही कोई ना कोई साथी कहीं ना कहीं कोई बैंक. लूट लेते थे। बहुत नॉर्मल था ये। आम बात. थी बैंक लूटना तो बैंक से आप लूट के पैसे. ले आते थे। रहना आपका हो गया था फ्री.
क्योंकि अंदर कमरा भी फ्री खाना भी फ्री।. भी फ्री और वैसे भी चढ़ावा बहुत आता था।. भंडरा वाले को लोगों को डायरेक्ट भी आता. था। किसी को कपड़े की जरूरत है। वो भी बना. देते थे। बनवा देते थे। किसी की जरूरत है. और हथियार भी फ्री मिलते थे। हथियार की. जरूरत होती थी। वो भी फ्री मिल जाते थे. अंदर। ओके। तो अब जब आपको उधर बुलाया, आप. रहे उधर जैसे आप खुद ही गए तो ऐसे सारे. लोग कहीं ना कहीं से खुद ही आते हैं। हां, खुद ही आते थे।. वो मेरी तरह ये तो कम थे। आप हैरान हो.
जाओगे। वहां स्मगलर भी रहते. थे। वहां लुटेरे भी रहते. थे। वहां किडनैपर भी रहते थे। तो इन लोगों. अब लोग हैरान हो गए गालियां निकालेंगे ये. बात मेरी सुन के ना इतनी बात सुन के अब. पडकास्ट के नीचे कमेंट में गालियां. निकालेंगे कि ये इल्जाम लगा रहा है लेकिन. मैं प्रूफ देने लगा हूं कैसे आप बोल सकते. हो कि वो लोग सब ऐसे थे कुछ स्मगलर थे जब.
पुलिस उनके पीछे पड़ गई वो भी दरबार साहब. आ गए पक्के ही हम क्योंकि किसी ना किसी का. कोई ना कोई रिश्तेदार भिडरा वाले का चेला. होता था या दोस्त होता था। उसकी सहायता से. उसको कमरा भी मिल जाता था। मैं नाम भी. लूंगा बाद में पडकास्ट में उन लोगों की. एग्जांपल दूंगा कि ये मैं इसकी बात कर रहा. हूं। ये कौन था? स्मगलर नहीं था और कौन. था? कौन? मैंने नाम लिया ना सुरिंदर सिंह.
सोड का हम जिन्होंने हिंदू के कत्लेआम. शुरू की थी। सो का मर्डर हुआ है अटैक से. शायद दो महीने. पहले शायद अप्रैल 84 को हुआ मेरा ख्याल है. महीना तो मुझे अच्छी तरह याद नहीं है. लेकिन अटैक से कुछ देर पहले ही सुरेंद्र. सिंह सो का मर्डर उसके खास दोस्त ने किया. क्यों वो लड़की का कारण बताते हैं अब. देखना ना बात कही कि किधर जाती है उसका.
कत्ल करने वाले का नाम था शंदा छंदा जो था. ना. तब एक ट्रेन चलती थी जो सुबह 6:00 बजे के. करीब अमृतसर लगा देती थी बॉम्बे से चलती. थी ददादर से और. शिंदा अचानक आ. गया अपने कमरे में अपनी जहां उसकी. गर्लफ्रेंड रहती. थी और उसने इन दोनों को देख लिया.
इसीलिए उसका. अपनी गर्लफ्रेंड को और अपने सूडी को तब. उसने कुछ नहीं. बोला बाद में गुस्से में फिर बाद में उसकी. जो गर्लफ्रेंड थी उसने शंदा को बताया कि. इसने तेरे बाद मेरे से जबरदस्ती रिलेशन. स्थापित किए हैं तेरे जाने के. बाद। फिर उसको गुस्सा आया और बाद में कत्ल. करने गया एक दो घंटे बाद। यह जब कत्ल हुआ.
ना शायद यह सुबह का 7:30 या 8 बजे का टाइम. था और वह ट्रेन आती थी 6:00 बजे हम ये तो. हमें भी मालूम है। शायद अब भी वही टाइम. है। पंजाब में बोलते हैं उसको और फिर उसके. बाद उस लड़की के साथ बहुत बुरा हुआ। इतना. बुरा हो ही नहीं सकता। जितना बुरा उसके. साथ. किया। उसको नंगी किया। नंगी करके. इंटेरोगेट किया। सच एक बात तो मैं भूल.
गया। गर्म प्रेस लगाते रहे उसके शरीर पर. प्रेस गर्म करके लगाते. रहे। ये सब उधर हो रहा था। आपके आप थे उस. टाइम पे. जब और ये सब दरबार साहब के अंदर हो रहा. था।. तो उधर और भी तो अच्छे लोग होंगे जिनने. कभी ऑब्जेक्शन नहीं उठाया इस सब कि सब. क्या कर रहे हो इन अंदर क्योंकि धर्म के. कितने महान लोग हैं कितने अच्छे लोग हैं.
जो चाहते थे एक डीआईजी थे उस उस टाइम ना. पंजाब में सबसे. जो बड़ा. ओदा होता था ना पंजाब पुलिस का वो आईजी का. होता था. आईजी के बाद दूसरे नंबर पे कौन आता है. डीआईजी हम एक डीआईजी अटवाल थे शायद एएस. अटवाल था उनका नाम हम. वो माथा टेकने आए.
आप गए कभी हरमंदर साहब हां जब सीढ़ियां. उतर कर नीचे परिक्रमा की तरफ जाते हैं।. परिक्रमा की तरफ जाते हैं ना? हां हां।. वहां पर उनका मर्डर कर दिया।. टेंपल के अंदर हां वहां. पर. और फिर उसकी लाश नहीं उठाने दी कई घंटे. बाद में उस. वक्त शायद वही मुख्यमंत्री थे दरबारा.
सिंह जिनकी सरकार वो टिलवा वाले कत्ल कांड. के बाद गिरी है और क्यों नहीं उठाने दिया. और किसने मरवाया इनको मारने वाले तो अंदर. से ही आए. बाहर से तो आए नहीं और किसने. करवाए जाहिर सी बात है ये तो इतनी कोई. मुश्किल सवाल ही नहीं है अंदर कौन हो सकता. है भंडरा वाले के चेलों के सिवाय और कौन.
हो सकता है रात 8:00 बजे लाश उठाई गई थी. वो भी. डीसी खुद गया था हरमंदर साहब भंडरा वाले. से बात करने के लिए फिर लाश उठाने दी गई. जी. और क्यों क्यों मारा था इनको क्योंकि इनके. इस इस बात का आज तक कोई जवाब नहीं दे सका. कि क्यों मारा गया पर क्या वो पहले से. खिलाफ थे इनके कौन डीआईजी ना वो तो वैसे. ही माथा टेकने आया था सिविल में था कोई. गनमैन नहीं था उनके साथ अकेला था और तो भी.
मार दिया हां किसी को नहीं पता कि दहशत. फैलाने के लिए दहशत फैलाने के लिए हम जहां. तक जा सकते हैं. आपको बहलाया बुसलाया कैसे जाता था वो. स्पीचेस ऐसी क्या होती. यही भी सिखों के साथ ये हो रहा है सिखों. के साथ सरकार वैसा कर रही है वैसा कर रही. है उस टाइम हमारे पास कोई भी जरिया आज तो. इंटरनेट है Google है सब आदमी सर्च कर. लेता है कि कहां हुआ कहां नहीं हुआ तब तो. जो कह दिया वो मान लेते थे हम कि हां होता.
होगा हमारे साथ और उसके बाद ऐसा क्या आपके. अंदर आक्रोश भर देते थे ऐसा क्या गुस्सा. भर देते थे उन स्पीचेस में बोल मिल के कि. आप लोग फिर कुछ ना कुछ एंटीनेशनल करने के. लिए तैयार होते थे। ऐसी कोई लाइन बताओ जो. आपको यादाता जैसे ये तो आपने बता दिया।. जैसे कुछ आदमी पकड़े जाते थे हम. ऑन द स्पॉट जैसे कोई आपका साथी पकड़ा गया।. पकड़ा गया और पुलिस उसको इंटेरोगेट तो. करेगी। हम बाद में जब पता चल गया तो छूट.
गया आदमी। हम् और पंजाब पुलिस इतनी बुरी. तरह इंटेरोगेट आदमी को करती थी कि आदमी. कांप जाता था सुनकर ही ऐसे ऐसे तरीके उनके. पास जैसे क्या नाखून तक उखाड़ देते थे. चीरा देके बीच में नमक वगैरह डाल. देना करंट. लगाना करंट पंजाब पुलिस ने शायद स्टार्ट.
किया है मेरा ख्याल मेरे मुझे खुद लगाया. गया कई बार करंट. एक मेरे नाखून नहीं उखाड़े बस और करंट तो. मुझे कई बार लगाया गया. और चड्डे पाड़ने जैसे दोनों टांगे फैला. देना पूरी ऐसे दीवार के साथ लगा ये भी. मेरे साथ हुआ है फिर एक बोलते हैं उसको. घोटना गोल लकड़ी होती है ये दोनों. ऊपर इधर भी ऊपर आदमी चढ़ जाता है और उसको.
पैरों से चलाते हैं जान निकल जाती है आदमी. की ये मसल टूट जाते हैं। सारे आदमी को. बिल्कुल नंगा करके बिल्कुल और ये बाजू. दोनों पीछे रस्से से बांधकर ऊपर जो पंखे. की हुक होती थी वहां से रस्सा खींच के ऊपर. लटका देते थे। तो ये सब होता था। उल्टा भी. लटका देते थे। हां। ये मेरे साथ तो हो. चुका है। मेरे साथ हुआ है। तो फिर उसके. बाद जब आप छूट के आते थे वहां पर हम तो. फिर क्या आपको एग्जांपल बना के बताया जाता.
था कि ऐसा करती है पुलिस। नहीं हां उसको. दिखाते थे देखो पुलिस ने क्या की जाती. इसके साथ और आक्रोश मारी जाता था कि हमारे. सिखों के साथ ये कर रही है पुलिस और एक. एग्जांपल बड़ी देते थे पिंडरा वाले क्या. एक ना तो दो भाई थे मुझे उनका नाम नहीं. याद शायद यूपी के थे हम. जब इंदिरा गांधी को अरेस्ट किया है ना. उन्होंने एक हवाई जहाज को अगवा किया था.
दोनों भाइयों ने कांग्रेसी थे इंदिरा भक्त. तो जब इंदिरा दोबारा पावर में आई है और. दोनों को एमपी बनाया गया मेंबर. पार्लियामेंट और जब पिंडरा वाले को. गिरफ्तार किया गया इनके लिए भी एक हवाई. जहाज को अगवा किया. गया और उनसे पुलिस बुरी तरह पेश आई वो ये. भी एग्जांपल देते. थे इंदिरा गांधी के रिया भाईचक हुआ करने.
वाले तो एमपी है तो अगर मेरे भाइयों ने. किया हां किया तो वो आतंकवादी हो. गया और ये बात है भी सच्ची ये तो बात सही. है तो फिर ये बोल के भड़काते थे हम पहले. ये बताओ अब ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था. ब्लू स्टार आर्मी कोई भी ऑपरेशन करती है. ना उसका कोई ना कोई कोड नेम होता है हम और. ये जो था गवर्नमेंट का. प्लान कि हरमंदर साहब को भडरा वाले से.
मुक्त करवाना है या उनकी नजर में तो हम. आतंकवादी थे ना आतंकवादियों से उग्रवादी. कह लो आतंकवादी कह लो कुछ भी कह लो या. विंडरा वाले से मुक्त करवाना हम वो एक. आर्मी को एक टास्क दिया गया था जिसका. कोर्ट नेम था ब्लू स्टार मैं मानता हूं कि. इसके पीछे एक. वजह 1 जून फर्स्ट जून जून.
1984 का दिन हो सकता है। क्या हुआ था? एक. जून को क्या हुआ? दोपहर का कोई. 12 12:30 का टाइम रहा होगा। अचानक घोड़ी. चलने की आवाज आई। हम मैं उस टाइम अंदर ही. था। दरबार साहब में था। और उस टाइम मेरे. पास बड़ा हथियार भी कोई नहीं था। राइफल. नहीं थी। उस टाइम छोटे तो थे अलवर वगैरह. थे। बड़ा हथियार नहीं था।. और जिनके पास बड़े हथियार थे. राइफलें वह सीआरपी पर गोली चला रहे थे।.
सीआरपी वाले उन पर चला रहे थे। हम ये गोली. रात 8:00 बजे तक चलती रही। अंदर वाले. लोगों में और सीआरपी बीच में 1 जून. को आठ या नौ लोग अंदर मारे गए।. सीआरपी की गोली. से बाहर सीआरपी वाले कितने मारे गए ये. नहीं. मालूम बताने वाले बताते हैं 80 से ऊपर.
पुलिस वाले सीआरपी वाले कि इन्होंने 10. गुना नुकसान कर दिया सीआरपी वालों का हम. मेरा मानना ये है कि यही कारण शायद रहा. होगा इतना बड़ा डिसीजन लेने का अब पानी. पानी सर से ऊपर गुजर चुका है। अब हाथ से. निकल चुकी है. गेम। तो अब आर्मी को ही लाना पड़ेगा। हम.
दो तारीख को कर्फ्यू लग गया पंजाब में। हम. तीन को भी कर्फ्यू लगा. रहा। और 4 जून को सुबह कोई 4:30 बजे गोली. चलनी शुरू हो गई। आर्मी की। आर्मी की।. पहले तो हम तो सोए थे उस टाइम अपने कमरे. में। हम गोली की आवाज सही जाग खुली है। हम. लेकिन तब यह नहीं पता था कि गोली कहां से. आ रही है। कौन चला रहा है? क्योंकि अंधेरा. था सुबह। हम जब थोड़ा सा दिन निकला तब पता.
चला कि इंडियन आर्मी से हमारी गोली चल रही. है। हम. तो हमें तो यही था भाई जैसे सीआरपी वालों. को जवाब दे दिया। हमने करारा जवाब दिया. है। इंडियन आर्मी वालों को भी दे देंगे।. लेकिन तब तक हथियार अंदर काफी बट चुके थे।. जैसे मैंने बोला ना एक तारीख को मेरे पास. सिर्फ एक रिवाल्वर था। हम बड़ा हथियार कोई. नहीं था। लेकिन दो तारीख को दो जून को और. तीन जून जून को अंदर हथियार बांटें गए हम.
जैसे लोगों को। जैसे मैं पक्का ही अंदर. रहता था। उनको मालूम है कि ये भागने वाला. नहीं। ये तो कहीं जाएगा नहीं। और मुझे भी. एक राइफल दी गई तो कुछ ना मोर्चे पहले ही. बनाए हुए थे पक्के अंदर आपको एक आदमी का. नाम आपने सुना होगा जनरल शबेक सिंह हम. जो. 1971 की जंग में.
लेफ्टिनेंट जनरल था शायद तो इनका क्या रोल. था इधर उनके साथ उनका कोई कोर्ट मार्शल. हुआ था शायद किसी झूठे केस में हम उनको. लगता था भाई मेरे साथ गवर्नमेंट ने धक्का. किया है और वह भी भंडरा वाले के साथ आके. मिल गए थे कि इंडियन आर्मी से मुझे भी. बदला लेना है इंडियन गवर्नमेंट. से उन्होंने मोर्चेबंदी करवा रखी थी अच्छी. अच्छी जगह. क्योंकि आप जनरल रह चुके थे आर्मी के उनको.
तो सभी तरीके इंडियन आर्मी सोल्जर ने यहां. पर ट्रेनिंग दी थी जी और सिखाया था हां तो. जब हम. तीन थे हम. लोग दो से तो मतलब दो तो हम मिलते रहते. हैं और तीसरा जो मेरा साथी था. ना उसको मिले मुझे 30 साल से ज्यादा हो गए. वो उसका मुझे मालूम ही नहीं वो है या नहीं. है जिंदा है या नहीं तो हम जिस भी मोर्चे.
में जाते थे वहां पर आदमी पहले ही फुल थे. जैसे एक मोर्चे में चार आदमी की जगह है हम. वहां सात कैसे फिट होंगे जी मोर्चा मतलब. क्या होता है? मोर्चा उस जगह को बोलते हैं. जो मुकाबला करने के लिए बनाया जाता है।. अभी अगर अच्छा मतलब एक पिट. जैसे एक एरिया बना दिया कि यहां पे हम. छुपे रहेंगे और यहां से काम करेंगे।. बिल्कुल। तो ऐसे आपने कई सारे बना दिए थे।. बने हुए थे। तो सब एक तारीख के बाद दो तीन.
को सब इधर-उधर अपनी-अपनी जगह पे चले गए।. हां।. तो हमें जब कोई जगह नहीं मिली तो हम तीनों. हथियार गले में लटकाए घूम रहे थे। कहां पर. हम जाके मुकाबला करें तो पानी वाली टंकी. के पास गुजर रहे थे हम। हम उस टंकी के ऊपर. मैं पहले भी चढ़ चुका था। वैसे ही शौकशौक. में तीनों ने मन बना लिया यही बड़ी है और. टंकी के जब ऊपर गए और देखा वहां से इंडियन.
आर्मी हमें साफ नजर आ रही है हम क्योंकि. जो पानी वाली टंकी होती है किसी भी. सोसाइटी में बिल्डिंग में सबसे ऊंची होती. ऊपर हाइट पे होती है हां क्योंकि पानी. लास्ट तक ऊपर पहुंच रहा होता. है तो हमने वहां मोर्चा लगा लिया. वहां से हमने इंडियन आर्मी पर गोली चलानी. शुरू कर दी। 9:00 बजे के करीब हम टंकी पर. चढ़े होंगे। सुबह 9:00 बजे। हां। और रात.
अंधेरा होने तक. टंकी पर रहे। रात हम उतर आए थे ऊपर से। वो. रात को हमारा काम ही नहीं था। हमारे पास. वो पुराने हथियार थे। उन पे कौन था? कोई. नाइट विजन वगैरह कोई लगा हुआ था। फिर रात. को हमें पता चलता। इसलिए रात को तो हमारा. काम ही नहीं था। रात को हम नीचे आ गए और. अगले दिन सुबह फिर चढ़ गए हम टंकी पे. वो नहीं देख पा रहे थे आपको वो नहीं देख. पा रहे थे देख भी नहीं सकते थे तो अब आगे.
क्या हुआ उधर 5 जून की सुबह आ गई फिर सुबह. जब हम टंकी पर चढ़ने लगे हैं तो जनरल. सुबेक सिंह हमारे पास. आए अकाल तख्त से पिंडरा वाले के पास वो. पता नहीं चलती घोड़ी में कैसे हमारे पास. पास पहुंच गए और हमें. कहा एक आदमी और एक. घोड़ी हमारे पास जो असला है ये इतना ही.
है। अब बाहर से असला नहीं आएगा क्योंकि. इंडियन आर्मी ने गिरा डाट रखा है। बाहर से. तो कोई असला आएगा नहीं। हम जो है यही है. अपने पास हम फालतू गोली नहीं चलानी और शाम. तक मुकाबला करना है सिर्फ शाम तक बोला. उन्होंने आज शाम तक मुकाबला करना है आज. शाम को पाकिस्तान हमला करेगा इंडिया पे तो. पाकिस्तान कैसे इन्वॉल्व था इसमें ये तो.
हुन राम ही जाने कैसे इन्वॉल्व था लेकिन. जनरल शबीक सिंह का कहना था कि शाम तक. पाकिस्तान हमला कर देगा और जितनी आर्मी है. ये सभी बॉर्डर पर चली जाएगी हमें छोड़. देंगे और हम लोग आजाद हो जाएंगे पूरे. पंजाब में फैल जाएंगे ये इस बात में क्या. सच्चाई है पाकिस्तान ने हमला करना था या. नहीं करना था ये तो हमें मालूम नहीं ये भी. हो सकता है हमें हौसला देने के लिए कह.
दिया हो कि ये बहादुरी से लड़े हां तो ये. दिल ना छोड़. इनको हौसला बना रहे इनका. लेकिन वो हमारा हौसला कोई दो 2:30 बजे तक. ही रहा दोपहर. के दो 2:30 बजे का टाइम होगा जब एक बम. टंकी पर आकर लगा जिस हिस्से में पानी रहता. है सारी टंकी हिलने लगी हिल गई एक.
तरह तो हमें भी पता चल गया कि बम आ गया. टंकी. पर तो हम सीढ़ियां उतरना शुरू शुरू हो गए. नीचे ये तो बाबा हम पर ही आया है हम जब हम. नीचे पहुंच गए ग्राउंड पे तब दूसरा बम आके. लगा टंकी पे जिसने टंकी पर छेद कर दिया और. सारी टंकी का पानी जो है बह गया पानी. दरबार साहब में खत्म हो गया पूरे दरबार.
साहब में बिजली इन्होंने पहले काट दी थी. टेलीफोन भी काट दिए थे और एक पानी पानी की. सप्लाई थी जो चालू थी अब तक वो भी खत्म वो. भी खत्म कर दी आर्मी ने. ईंटें वाला फर्श देखा जो ईंटों वाला फर्श. लगा होता है हम उसमें एक दरार सी बनी रहती. है दोनों ईंट के बीच में हां. वहां पर पानी खड़ा हो गया जो ऊपर पानी बहा. वहां से जैसे जानवर पानी पीता है ना अजीब. से मैंने ऐसे लोगों को पानी पीते देखा है.
क्योंकि टोटियों पर तो पानी खत्म हो गया. प्यास जून का महीना था भूखे भी थे लोग और. प्यासे भी थे और ऐसे नीचे मुंह करके लोगों. को मैंने पानी पीते देखा है जीभ. से। हमारा मोर्चा टूट गया। अब फिर वही बात. होगी जो 4 जून को सुबह हमारे साथ हुई थी।. जिस भी मोर्चे पर जाते थे वहां से पहले से. भी ज्यादा आदमी हो गए थे। हमारी कोई जगह. नहीं बन पा रही थी कहीं.
भी। तो मेरा कमरा था नानक निवास में। मैं. वहीं पर रहता रहूं आखिरी समय तक। उसका. कारण था जो बब्बर खालसा का चीफ था ना उसका. नाम था सुखदेव सिंह बब्बर। हम उसका गांव. और मेरे नाना का गांव बिल्कुल पासपास है।. वो मेरे मामा वगैरह को जानता था। अच्छी. तरह जानता था। और जब. टंकी वाला मोर्चा टूट गया तो मैं वहीं पर. आया अपने कमरे की. तरफ। और जब मैं आया तो क्या देखता हूं?
सुखदेव सिंह बब्बर और उसके आठ 10. साथी दीवार में सेंध लगा रहे थे। सेंध. मालूम है ना सेंध लगाना दीवार में छेद. करना। अच्छा ईंटें निकालना। इतनी ईंटें. निकालना जिससे एक आदमी अंदर से बाहर निकल. सके। भागने की कोशिश कर। हां। तो मैंने ना. इसको मजाक किया सुखदेव सिंह को कि रण में. रण से भाग रहे हो।.
सिंह होकर, सरदार होकर, सिख होकर तुम भाग. रहे. हो। तो सुखदेव सिंह मुझे बोला तेरे पास. टैंक. है। मैं कहा नहीं तोप है? मैं कहा नहीं।. तो जो उसने मुझे बोला मैं वही वर्डिंग बोल. रहा हूं। कहता वो तेरे बाप टैंक लेके आ गए. हैं। आर्मी वाले वो टैंक लेके आ गए। तू. टैंकों का मुकाबला कर सकता है तो तू रह.
इधर नहीं तो चल निकलते हैं बाहर जाएंगे. जिंदा रहेंगे. और अपने हकों के लिए लड़ेंगे हम मैंने कहा. ठीक है तुम्हारी बात मारने को आ गई फिर. निकल चलता हूं और मैं अपनी बंदूक समेत. निकलने लगा वहां से इसने मुझे मेरी बंदूक. पकड़ कर रख दी ये किधर ले जा रहा है मरेगा. तू दूर से नजर आएगी तू बंदूक ले जा रहा है. हम आगे पता नहीं कौन सी गली में आर्मी से.
आमनासामना हो जाए चलो मैं निकल गया ये भी. निकल गए सारे निकल गए हम. लोग पहली गली छोड़ दूसरी तीसरी गली में हम. फिर इकट्ठे हो गए एक मकान में और फिर. सुखदेव सिंह मुझसे पूछता है तेरे पास. हथियार कौन सा. है मैंने बोला यार मेरे से राइफल लेके तो. तूने रख दी है हम तो अब मेरे पास हथियार. कहां से आया कहता अरे बेवकूफ मैंने राइफल.
रखी थी छोटा कोई रिवाल्वर वगैरह तो ले. आता अब तेरा कोई आमनासामना हो जाए तू एक. दो मार के तो मरेगा ऐसा तो तू सीधा गोली. खाएगा तो मैंने बोला जी ये कौन सी बात है. मैं अभी ले आता. हूं और मैं वापस फिर. दोबारा दरबार साहब में चले गया आ गया. लेकिन तब तक दो घंटे बीत चुके थे बीत चुके. थे ये चार पांच 5:00 बजे की बात है। हां।. आर्मी आ गई। उस आर्मी अंदर आ गई। अंदर आ.
गई. थी। आ गई थी। तो मुझे देखकर हैरान हो गए. आर्मी वाले भी कि ये कहां से निकल आया? ये. तो सारा सारी बिल्डिंग खाली थी। हम. तो मेरे हाथ ऊपर करवा दिए। दीवार के साथ. लगवा दिया मुझे। गोली मारने लगे थे। मैं. कहा सारे एक मिनट मुझे बेशक मार देना।. पहले मेरी बात सुनो। वो गुस्से में थे।. वैसे बोला हां क्या? बता क्या आप बताना चाहते हो? मैं कहा जी.
मैं स्टूडेंट. हूं और चंडीगढ़ में पढ़ता हूं। यहां कैसे? मैंने कहा जी मैं माथा टेकने आया। क्या. सबूत है तुम्हारे पास? तू स्टूडेंट है।. मैं कहा जी मेरी जेब में मेरा आई कार्ड. है। चलो हाथ तो मेरे ऊपर थे। मेरी तलाशी. ली गई और पर्स में चंडीगढ़ कॉलेज का आई. कार्ड निकल आया। और मैंने तब तक यह भी बता. दिया कि मेरे फादर चंडीगढ़ पुलिस में. ऑफिसर है। ये वो थोड़ा उनको भी यकीन आ.
गया। उन्होंने मुझे मारा. नहीं। तो उन्होंने उनका जो सीनियर था पता. नहीं क्या रैंक था उसका। उसने बोला कि. इसको वहां ले जाओ जहां. दूसरे बिठाए हुए हैं पकड़ के। तब तक ना. आर्मी वालों को पता चल चुका था कि अंदर. सभी के पास असला नहीं है। जब ये आर्मी. वाले एंटर हुए हैं ना दरबार साहब इनके. सामने जो आया उसको ठोकते चले गए क्योंकि.
इनको मालूम नहीं था ना तब तक कि कौन हां. कौन भडरावाला का साथी है कौन एआईएसएसएफ. कौन बब्बर खालसा इन्होंने तो सोचा भी इधर. से घोड़ी आ रही है सभी हां अंदर आतंकवादी. है शायद तो इनके सामने बच्चा बूढ़ा जो. बुजुर्ग जो भी आया जब अंदर आए हैं ना. इन्होंने जो भी सामने आया उसको गोली मारते. गए आर्मी वाले नाजायज यानी कि काफी लोग. नाजायज मारे गए बेकसूर हम और मारे ही.
ज्यादा बेकसूर गए हैं। कसूरवार तो मेरे. बहुत जिंदा है अभी. तक तो आर्मी को मतलब पता चल चुका था कि. सभी आतंकवादी नहीं है। चलो वहां पर. गिरफ्तार कोई तीन 400 के. करीब बैठाए थे। मुझे भी वहां ले जाकर बैठा. दिया और कोई 8 1 बजे मेरे. सामने अकाली लीडर जो अंदर थे इनको निकालने.
आए उन्हें आर्मी छुड़ा के ले गई हां वो. लीडरों को निकाल के ले गई हमारे सामने. अच्छा और जब उनको लेके गए ना तब उसके बाद. हमें खड़ा कर लिया गया जितने नौजवान थे तू. भी खड़ा हो खड़ा हो ऐसे इशारा करते खड़ा. करते गए सभी. को और दूसरी मंजिल पे ले गए। हम एक कमरे. में बंद कर. दिया। काफी जनों को खड़ा किया। एक कमरे. में कोई 3035 आ गए होंगे। दूसरे कमरे में.
भी इतने मेरे से पहले वाले में भी. इतने तो गिरफ्तार तो मैं हो ही चुका था।. और मैं थका हुआ भी बहुत था क्योंकि दो दिन. हथियार भी चलाया बाजू भी दुखने लगा. था तो मैं ना नीचे जमीन पर लेट गया उस तरफ. से खिड़की थी एक उसके पास लेट गया. थोड़ी-थोड़ी हवा आ रही थी बाहर से और पता.
नहीं कब मेरी आंख लग गई और जब आंख खुली है. ना तो एक धमाके से खुली है एकदम धमाका हुआ. कमरे. में हैंड ग्रेनेड फटा था हमारे कमरे में. बाहर से मतलब उन्होंने फेंक के हैंड. ग्रेनेड फोड़ दिया फोड़ दिया आर्मी वालों. ने कि सबको मार दो. हम और जहां पर हैंड ग्रेनेड फटा वो तो मरे. गए मैं क्योंकि एक साइड पे था और मैं टांग. के ऊपर टांग रखी थी मेरी बाई टांग में तीन.
जगह हैंड ग्रेनेड लगे इसके पीस लगे हुए. हैं मेरे तीन जगह. खून बहने. लगा और मैं बेहोश हो गया। खून बहने के. कारण जा कैसे हो गया मुझे मालूम नहीं. है। और रात के कोई शायद ढाई तीन बजे का. टाइम होगा। जब मेरी आंख खुली है तो मैं. क्या देखता हूं? पंजाब पुलिस के दो जवान।.
एक ने मेरी टांगे पकड़ रखी है। एक ने. दोनों बाजू पकड़ रखे हैं। और मुझे. ट्रक में फेंकने लगे. हैं और मेरी आंख खुल गई और मैं बोला यार. मुझे कहां ले जा रहे. हो? वो बोला अरे जिंदा है ये तू। उन्होंने. मुझे डेड बॉडी समझ के उठाया था। और उस. ट्रक में सभी लाशें फेंकी जा रही थी जो. अंदर मर चुके थे। वो बोले अब इसका क्या.
करें? वो बोला अगर इसको फेंक दिया तो ये. तो सचमुच मर जाएगा। हम इसको बस में बैठा. देते हैं। उन बसों में वह लोग थे जिनको. अंदर चंदा गिरफ्तार किया था। उनमें से. औरतें भी थी, बुजुर्ग भी थे, बच्चे भी थे, सभी थे। हमें आर्मी के कैंप में ले गए। 4. बजे का टाइम जब 4:30 का होगा जब आर्मी के. कैंप में ले गई क्योंकि थोड़ी देर बाद ही. रोशनी होनी शुरू हो गई। वहां पर हमें.
ब्रेकफास्ट दिया गया।. हम किसी के हाथ चाय आई, किसी के हाथ में. पूरी आई, किसी के हाथ में कुछ भी नहीं. आया। और थोड़ी देर बाद उन्होंने बोला कि. जो जख्मी है वो आ जाए पहले और मैं भी जख्म. जख्मी. था। और मुझे उन्होंने आर्मी के डॉक्टर के. पास ले गए जो उनका आर्मी का डॉक्टर था।. वहां पर भी मैंने डॉक्टर को वही. बोला। मैं तो स्टूडेंट हूं। ऐसे चंडीगढ़. पढ़ता हूं। मेडिकल कॉलेज मेडिकल का.
स्टूडेंट हूं। आपकी तरह डॉक्टर बनने वाला. हूं। चलो कुछ उसने एक दो सवाल किए। यकीन आ. गया उसको। ठीक है स्टूडेंट मेडिकल का ही. लगता है। उसने मुझे गुरु तेग बहादुर. हॉस्पिटल रेफर कर दिया। जो सबसे बड़ा. हॉस्पिटल था उस समय अमृतसर का आर्मी वाले. ट्रक में डाल के स्ट्रेच पे डाल के मुझे. हॉस्पिटल ले गए। 6 जून को.
सुबह 8:30 बजे 9 बजे से पहले मैं हॉस्पिटल. 9 बजे तक मैं हॉस्पिटल पहुंच गया। एडमिट. हो गया मैं और जो वार्ड थी ना वो सभी. जख्मियों की थी वो सभी जख्मी वही थे जो. दरबार साहब से आए थे। हम बाहर का कोई आदमी. नहीं था। जो अंदर से आए थे वही थे। तो. मेरा कोई जख्म इतना बड़ा नहीं था। मैं तीन. चार दिन में चलने फिरने के काबिल हो गया।. मेरा ख्याल 9 तारीख 9 जून को मुझे डॉक्टर.
डिस्चार्ज करने लगे थे। तो मैंने डॉक्टर. से रिक्वेस्ट की मुझे डिस्चार्ज ना करो. नहीं तो ये मुझे जाकर गोली मार देंगे। तो. डॉक्टर बोला कितने दिन में रखूंगा तुझे? आखिर तो एक नो एक दिन तो भेजना पड़ेगा।. मैंने कहा आप जितने दिन रख सकते. हो। क्योंकि मैं उस दिन सुन चुका था. नर्सों से कि कर्फ्यू में ढील मिली है दो. घंटे आज।. तब तक कर्फ्यू चल रहा था। हम 2 जून से.
शुरू होके 8 9 जून तक कर्फ्यू ही चल रहा. था। उस दिन दो घंटे की डील मिली थी सुबह. 9:00 बजे से 11:00 बजे. तक। अगले दिन फिर पता चला कि दो घंटे की. डील है। 9:00 बजे से 11:00 बजे तक। और फिर. वहां से मैंने भागने का प्लान बना लिया।. फिर अब भागूंगा यहां से। मेरे साथ दो और. तैयार हो गए। हम दोनों ही मेरे से छोटे थे. हम तीनों ने बना ली स्कीम भागेंगे भागना.
कहां था जो बैरक थी ना लंबी बैरक थी उसके. एंड में बाथरूम था हम और बाथरूम के ऊपर. रोशन दान लगा हुआ था और रोशन दान में जो. शीशा था उसमें वो कील थे जो पहले लगे पहले. कील लगाए जाते थे शीशे को फिट करने के लिए. तो वो हमने देख लिए किल कैसे निकालने. निकाल भी लिए डेली हम बारी-बारी जाते थे. निकालते थे और हां जितने भी कीड़ निकलते.
थे निकाल लेते थे और एक दिन पूरा शीशा. निकाल दिया और कील हाथ से लगा दिए जब. भागना है ना तो हाथ से ही कील निकालेंगे. शीशा नीचे रखेंगे और कूद जाएंगे दूसरी. तरफ जिस दिन भागने का टाइम आया हम तीनों. अंदर चले गए और जो सबसे छोटा था ना पहले. सोचा कि. इसको निकाल हां उसने जब नीचे देखा ना बोला.
जमीन तो बहुत नीची है मेरी तो टांग टूट. जाएगी बाजू टूट जाएगी मैं नहीं. [संगीत]. कूदूंगा उसने हम दोनों को डरा दिया हम. क्योंकि दूसरी तरफ तो हमने देखा ही नहीं. था अभी तक कि कितनी नीची है जमीन हम वापस. आ गए उस टाइम उस दिन चार घंटे की डील थी।. दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम को। हम सुबह. 9:00 बजे भागने वाले थे। लेकिन उसके कारण. हमें कैंसिल करना पड़ा। और वो आके बोला.
तुम दोनों भाग जाओ। मुझे छोड़ जाओ। तुम तो. भाग सकते हो तुम भाग जाओ।. मेरे तो पहले तो हमारा मन नहीं माना। फिर. सोचा चलो ठीक है। तीन से पांच भागते हैं।. हम वो बोलता है मैं तुम्हारे लिए पाठ करता. हूं। पूजा पाठ करता हूं। तुम भाग जाओ। तो. तुम्हारी रक्षा भगवान. करेंगे। तो 3:00 बजे फिर हम दोनों ही. निकाला शीशा और कूद गए दूसरी.
तरफ और सीधा बस स्टैंड आ गए हम. सर। वहां से नजदीक ही है गुरु तेग बहादुर. हॉस्पिटल से बस. स्टैंड। हमने सोचा बस लेंगे और गांव को या. इधर-उधर निकल जाएंगे। हमें ये तो मालूम ही. नहीं था कि सब कुछ ही बंद किया हुआ. गवर्नमेंट ने। कोई ट्रेन नहीं चल रही, कोई. बस नहीं चल रही, कुछ नहीं। कहा बसें तो. बंद है। हम दोनों वहां से चल पड़े। और जो. लड़का मेरे साथ था ना उसका गांव मेरे गांव.
से पहले आता था। हम और वो नहर थी एक नहर. का पुल क्रॉस करके दूसरी तरफ उसका गांव. था। हम और नहर पर आर्मी वाले बैठे थे।. हमने वो पुल क्रॉस करना था। जब आर्मी वाले. देखे तो हम रुक गए। हम यहां तो पकड़े. जाएंगे क्योंकि मैं देख रहा था आर्मी. वालों ने लाइन लगाई है आदमियों की औरतों. की और एक रजिस्टर रखा है वहां पर देखकर.
उनके नाम काट रहे थे या लिख रहे थे और वो. बोला वो मेरा चाचा है वो एरा वगैरह गांव. के जानता ही है अपने गांव को आदमी जानता. ही होता है मैं इनके साथ निकल जाऊंगा. मैंने बोला कि नहीं निकल सकता तू फस जाएगा. इसके आगे एक छोटा पुड़ा है वहां पर आर्मी. नहीं होगी वहां से क्रॉस करते हैं उसने. उसने नहीं. मानी। लग गया वो लाइन में जब मैं दूसरा. पुल क्रॉस किया तो मुझे ना गोली चलने की. आवाज. आई। तब मुझे कुछ नहीं पता अभी क्या हुआ.
क्या नहीं हुआ। ये तो कुछ महीनों के बाद. पता चला कि जो वो मेरा साथी था ना वो उसी. दिन मारा गया।. मारा क्यों गया? उसका कारण ये था उसका नाम. लिस्ट में नहीं था। उसको इसलिए नहीं मारा।. हम कि उसका नाम लिस्ट में नहीं है। उसको. टेंट में बिठा दिया और उसके गांव वाले. लोगों को बोला कि गांव का सरपंच या मुखिया. जो भी है किसी को ले आओ और इसकी कोई गवाही.
दे दे। इसको ले. जाओ। तो वो उसके गांव वाले चले गए। शायद. किसी को ले भी आते। वो छूट भी जाता। तब तक. हमारी वायरलेस आ. गई। मेरे नाम की और उसके नाम की। दोनों की. वायरलेस आ गई कि भाग गए। भाग गए हैं। उस. वो उस टेंट में बैठा था जहां वायरलेस थी।. हां। उसने जब अपना नाम सुना तो टेंट से. निकल कर भाग गया। थोड़ा अंधेरा भी हो रहा.
था।. भाग गया तो पुलिस आर्मी वालों ने रोका. होगा। बताते हैं आवाज लगाई उसको। नहीं. रोका तो गोली मार दी। मार गया। और उस पुल. के दूसरी तरफ मेरे मौसे जी का गांव था।. मैं वहां पर पहुंच गया उनके घर पे हम और. मेरे कपड़े खून वाले थे। खून लगा हुआ था. पेंट पे। वहां पर मैंने कपड़े बदले। दूसरे. धुले हुए कपड़े पहन.
लिए। धोती हमने चादर बोलते हैं। धोती. कुर्ता पहन लिया। किसान बन गया। वहां से 5. 6 किलोमीटर मेरा गांव था। वहां साइकिल. पकड़ा।. और उससे पहले मैं एक नाई के घर गया। हम. उसको बोला मेरे बाल काट दे। क्यों? शक्ल. बदलनी थी। हुलिया चेंज करना था ना अपना।. मैं अपने चाचा के घर आ गया। वो आर्मी में. थे चाचा जी। हम चलो जल्दी-जल्दी में मैंने. उनको बात बताई। वो बोले तू घर मत रुक। अगर.
तेरा एड्रेस पूरा लिखा है ना आर्मी ने तो. आर्मी आती होगी। और वहां से मेरे चाचा ने. अपने एक दोस्त के घर भेज दिया पंज में। हम. वहां से मेरी एक और दूर मासी है। उनके घर. चला गया। कुछ दिन वहां रहा वो मुझे फिर. राजस्थान छोड़ आए क्योंकि मास्टर जी सरपंच. थे गांव के। सरपंच के घर में आना जाना. बहुत रहता है लोगों का।. वो जहां मुझे राजस्थान छोड़ के आए ना. रिश्तेदारी पे वो गांव बिल्कुल पाकिस्तान. बॉर्डर पे था। और तब तक पूरे पंजाब में.
सिखों में खास करके यह बात फैल चुकी थी. संत जनरल सिंह भंडरा वाले जिंदा है और. पाकिस्तान चले गए ये बात मेरे तक भी पहुंच. गई वो तो जिंदा है और पाकिस्तान है हम तो. मेरी तो जैसे भगवान ने सुन ली बिल्कुल. गांव पाकिस्तान के पास ही था बॉर्डर के. दो-ती. किमी तो एक दिन बस.
बिना किसी को बताए मैं पाकिस्तान का. बॉर्डर क्रॉस कर गया। कैसे? पाकिस्तान का. बॉर्डर क्रॉस कर गया। अच्छा ऐसे वहां पे. कुछ बॉर्डर पे उस टाइम कुछ नहीं। ये जो. फेंसिंग हुई है ना तारें वगैरह लगी हुई है. जो आप दिखाते हैं जब वीडियो में देखी होगी. आपने। ये 88 के बाद लगनी शुरू हुई है।. उसके पहले नहीं था। उससे पहले कुछ नहीं. था। दो ना झुग्गियां थी जब पास जाकर मैंने. देखा तो दो चारपाइयां ही थी बाहर तो मैंने.
देखा कि ये मर्द है और एक औरत है गर्मियों. के दिन. थे यही जून अटैक के कोई एक महीने की बाद. की बात. होगी मैंने ना उस मर्द को उठाया मुझे बोला. पारों आया. है तू दूसरी साइड से आया इंडिया से मैं. कहां. पानी पीना है कह मैं कहा पीना है पानी. पिलाया मुझे और फिर.
बोला तू मेरे पास आ गया है ना सुबह. रेंजेंजर वाले आएंगे अपने बीएसएफ वाले. होते हैं ना पाकिस्तान वाले जो उनको रेंजर. वाले बोलते हैं रेंजर जो उनकी बॉर्डर की. फोर्स होती है सुबह रेंजेंजर वाले आएंगे. और मुझे परेशान करेंगे कि तुम्हारे पास. इंडिया से आदमी आया मैं कहा फिर क्या करें. कहता है तुझे भी मालूम नहीं है तूने कहां. जाना रहना है तो रेंजेंजर के पास ही चलते. हैं। चौकी में ले आए और बुजुर्ग भी बैठ गए.
और मुझे भी बिठा दिया। बिठा दिया तो जो. चौकी का इंचार्ज था वो अपनी सीट पर बैठ. गया और मुझे सामने बिठा लिया। हम. कहां से आए हो? क्या नाम है? सारा एड्रेस. वगैरह नोट कर लिया।. उसने क्यों आए हो? यह भी बता दिया कि ऐसा. मेरे संत भंडरा वाले हैं जो वो पाकिस्तान. आए तो मैं उनसे मिलने के लिए.
आया तो उसने कोई मुझ से सवाल जवाब ज्यादा. नहीं किया इनाम सुनने के बाद हां सारा कुछ. सुनने के बाद और ऊपर छत पे सुलाया मुझे. चौकी नीचे नहीं सुलाया चौकी की छत पे. सुलाया और पहरे पर आदमी लगा दिए. भाग ना जाए तब तक उन्हें क्या मालूम था. कौन है जासूस है कैसा है वैसा है चलो. उन्होंने रात ही मेरे आने की सूचना पीछे. दे दी होगी जिसको भी देनी थी हम अगले दिन.
ब्रेकफास्ट करवाया उन्होंने मुझे कोई 11. बजे के करीब जैसे अपनी जिप्सी होती है ना. हम हार्ड टॉप जिप्सी आती है ऐसी गाड़ी थी. कोई हम शायद Toyota की गाड़ी. थी जीप ऊपर हार्ड टॉप लगी. हुई वहां मैं सिविल में आए कोई वर्दी नहीं. थी. उनकी आए तो उन्होंने भी चौकी में मुझसे.
कुछ सवाल किए और मुझे ले लिया साथ बिठा. लिया गाड़ी. में और वहां से मुझे याद है मंडी. मिर्चनाबाद आई थी रास्ते में पहली बार. मिर्चनाबाद. और आगे फिर बहावल नगर पाकिस्तान का शहर. आया। हम वहां पर ले. गए। वहां पर किसी ऑफिसर के सामने मुझे पेश. किया। वहां भी सवाल जवाब.
हुए। तो मैंने उन्हें बता दिया कि मैं. अटैक में ब्लू डायरेक्शन में था। मैं सारा. कुछ बता दिया. उनको। तो उन्होंने ना मुझे एक सरकारी. बिल्डिंग में भेज दिया।. वो बाद में पता चला कि स्कूल. है। जैसे अपने इधर जून जुलाई की छुट्टियां. होती है। उधर भी होती है। पाकिस्तान में. भी सेम इनहीं दिनों में तो सरकारी स्कूल. था। उसमें छुट्टियां थी। तो ऊपर दूसरी.
मंजिल पे एक कमरे में उन्होंने मेरे रहने. का इंतजाम कर दिया। और वहां भी मेरे पहरे. पर सिविल के लगा दिए आदमी। थोड़े दिन बाद. मुझे एक दिन बुला के कह कि तुझे वापस जाना. पड़ेगा। हम मैंने बोला यार नहीं मैं तो. भडरा वाले से मिलके जाऊंगा हम नहीं एक बार. जाना. पड़ेगा मैं बोला क्यों अब तू अपने जैसे ना. दो तीन साथी और लेके आ हम.
मिला देंगे तुझे पिंडरा वाले. से और वो मुझे समझ मतलब पता चल गया कि. क्यों बुलाया उन्होंने वो हमारा एक ग्रुप. नया बनाना चाहते थे पीस के साथी आ जाए एक. नया ग्रुप ग्रुप बना दे इनको असला वगैरह. देंगे तो ये जाकर उधर पंजाब में तबाही. मचाएंगे यहां आतंक मचाएंगे जो भी. है तो मेरा कोई मन तो नहीं कर रहा था. लेकिन मुझे आना ही पड़ा फिर उन्होंने पूछा.
कि जहां से तू क्रॉस किया वहीं पर छोड़े. मैं कहां वहीं पर छोड़ो क्योंकि दूसरी तरफ. मालूम था मुझे मैं कहां जाना है मेरे. रिश्तेदार है उनका कहां घर है सीधा मैंने. पहुंच जाना था. तो उस दिन मुझे उन्होंने दो हथियार. दिए। एक 9 एमएम का पिस्तल हम. और एक देसी 12 बोर का कट्टा कि अपनी. सेफ्टी के लिए लेके जाओ। हां वो बोला ये.
तुम्हारे बीएसएफ वालों के लिए है। हम अगर. बीएसएफ. का तुम्हारे से टाकरा हो जाए आमनासामना तू. अगर एक फायर कर देगा ना उनको पता चल गया. कि तेरे पास 12 बोर है तो वो छुपते. फिरेंगे तो फिर अब वो लेके आप इधर आए हां. फिर मैं आ गया इधर हम और जिन रिश्तेदार के. पास मैं गया. था उनको रात तो नहीं पता चला कि मैं आ गया. हूं सुबह उनको पता चला सुबह उनको कैसे पता.
चला. सुबह बीएसएफ वाले कुत्ते लेके आ गए आपको. ढूंढने के लिए। राजस्थान के जो गांव होते. थे ना बॉर्डर एरिया. के वहां गांव के बाहर एक डिग्गी बनी होती. थी कुआं एक तरह का. जिसमें वो नहर का पानी डालते थे।. उसकी ना हफ्ते बाद वारी आती है या 15 दिन. बाद फसल को पानी मिले चाहे ना मिले लेकिन. वह डिग्गी का भरना बहुत जरूरी है क्योंकि.
वो डिग्गी से सारा गांव पानी पिएगा वहीं. पशु पानी पिएंगे वहीं नहाएंगे उसी पानी से. और कोई साधन नहीं है उधर पानी. का तो मैंने क्या किया जब मैं पाकिस्तान. से आया ना मैं सीधा डिग्गी पर चला. गया मैंने ने ना नई जूती ली थी उधर. पाकिस्तान. से चमड़े. की तो डिग्गी के इर्दगिर्द पानी बिखरा. रहता है तो मैंने सोचा कि खराब हो जाएगी.
ज्योति मैंने हाथ में पकड़ ली और पानी. पिया उसमें ना एक बाल्टी वगैरह लटकी रहती. है हमेशा ही वहां से पानी निकालो और पी. लो मुंह हाथ धोया पानी पिया पांव भी धो. लिए. तो ज्योति हाथ में तो मैं सीधा ही उनके घर. आ गया अपने रिश्तेदारों के। जिस कमरे में. मैं सोता था ना वो कमरा घर से बाहर था। हम.
वहां एक मैं सोता था और एक बुजुर्ग थे. उनके। आके मैं वहां पर सो गया। सुबह. बीएसएफ वाले वो डिग्गी तक आ गए। कुत्ते. लेकर। वो डिग्गी तक पहुंच गए।. पर कुत्ते आगे नहीं चल पड़े। आगे जा नहीं. सके। डिक्की तक की. बस वो बाद में मुझे पता. चला कि वो स्मेल मेरी खत्म हो गई थी उधर.
आके। पानी से जब मैंने मुंह हाथ धोया पांव. धोए और जूती को हाथ में पकड़ लिया तो जो. मेरी पांव की स्मेल थी वो वहां ही खत्म हो. गई।. तो जो मेरे रिश्तेदार मामा जी लगते थे. उन्होंने अपने घर से देख लिया था बीएसएफ. वालों को हम तो फिर आकर मेरी तरफ देखा. उन्होंने कमरे में फिर जब पता चला कि ये आ. गया है और इसके पीछे ही आए हैं बीएसएफ. वाले तो उन्होंने सोचा कि बीएसएफ वाले घर.
की तरफ आए इससे पहले मैं बीएसएफ वालों को. आगे से मिल लेता हूं टरका देता हूं. क्योंकि बीएसएफ वाले उनको जानते थे उनके. खेत साथ ही लगते थे प्रताप सिंह नाम था. मेरे मामा जी. का तो वो बीएसएफ वाले को पूछने लगा मामा. साहब जी कैसे आना हुआ उन्होंने पता रात. कोई आदमी ने बॉर्डर क्रॉस किया आया आपके. गांव में मेरे मामा को जब पता चला कि इसने.
ये किया मामा गुस्से हुआ और वहां से मुझे. एक और रिश्तेदार के पास छोड़ दिया. राजस्थान. में और जिन रिश्ते रिश्तेदारों के पास अब. छोड़ा ना उनका एक रिश्तेदार ब्लैक किया था. हम. उसकी घर में अक्सर बात चलती थी गुरमख सिंह. उसका नाम. था मैंने उसके चर्चे काफी सुन लिए कई. दिनों से तो मैं वेट करने लगा कि कब गुरमख.
सिंह आए और मेरी उसके साथ मुलाकात. हो मैंने पूछा उनको वो कब आता है वो बोला. आ जाए तो आज ही आ जाए नहीं तो 101 दिन बाद. आ जाए हम उसका गांव कुछ ज्यादा नहीं 5 छ. किलोमीटर दूर ही था उधर से वो एक दिन वो आ. गया गुरमख सिंह और मुझे तो उसकी वेट थी और. टाइम मिला तो मैंने उससे बात की बताया कि. मैं ऐसे पाकिस्तान जा चुका.
हूं तो वो. बोला क्या प्रोग्राम है मैंने कहा मैंने. फिर जाना है हम वो बोला भी अगर आज ही मैं. तुझे लेके गया तो ये शक करे करेंगे गुरमख. सिंह अपने काम के लिए ले गया है तो तू. किसी दिन आ जाना ये मेरा नाम है मेरा घर. है एड्रेस है जे है मैं कहा ठीक है तीन. चार दिन बाद मैं गुरमख सिंह के घर चला गया. हम. और बोला गुरमख सिंह कि तू तू इस तारीख को.
आना उस दिन पाकिस्तान से आदमी. आएंगे मैं चला गया जिस दिन मैं गया गुरमख. सिंह के घर रात को तीन आदमी आए पाकिस्तान. से मुसलमान थे उधर के पाकिस्तानी थे वो. गुरमख सिंह स्मगलर था हम ब्लैक करता था. ब्लैकिया होता था हां. तो वो दो दिन रहे गुरख सिंह के घर वो दिन. को नहीं बाहर निकलते थे हम रात को ही.
निकलते थे दिन को उनका अंदर ही खाना पीना. होता था तो मेरी उनसे खूब बातें होती रहती. तीसरे देना मैं भी उनके साथ ही लेकिन. मैंने उनको बोला कि मुझे तुम चौकी में. छोड़. देना तुम सीधे चले जाना दूसरी बार फिर मैं. चौकी में चला गया अब की बार चौकी और थी वो. चौकी नहीं थी जिससे पहला गया ये बॉर्डर और. था हम वहां पर मैंने भी वैसे ही किया. संतरी साहब संतरी साहब कह के आवाज.
लगाई तो वो ऑफिसर का नाम तो मुझे पूरा. नहीं मालूम लेकिन उसको हाजी साहब बोलते थे. बावल नगर वाले को मैंने बोला कि हाजी साहब. को बावल नगर वालों को इनफॉर्म कर दो मैं. आया हम चलो उन्होंने रात रखा मुझे अगले. दिन फिर गाड़ी आई और मुझे ले गई और बोला. भी तुझे बोला था कि किसी को साथ ला तू. लेके क्यों नहीं आया मैंने कहा अभी कोई. तैयार नहीं. होता तो तैयार भी मैं कर लूंगा आप मुझे.
संत जी से मिलवाइए भंडरा वाले से हम बोला. मिलवा देंगे वो. उन्होंने एक बार भी नहीं कहा कि हमारे इधर. इंडिया पाकिस्तान में नहीं. है। उन्होंने भी सस्पेंस बनाए रखा। इसका. इंटरेस्ट बना रहे ये आता रहे और लोगों को. लाता अपनी तरफ। चलो बाद में पार्टी एक ने. कांटेक्ट खुद कर लिया. मुझसे। उनके हथियार वगैरह फिर मेरे जरिए.
उन्होंने भेजने शुरू किए।. तो ऐसे चलता रहा कोई डेढ़ एक साल काम मतलब. पाकिस्तान की किसी वेपन पार्टी ने नहीं. पाकिस्तान की गवर्नमेंट ने इधर एक. खिस्तानी. थी मतलब. जथेबंदी जिसके आदमी के लिए मैं बाद में. काम करता रहा बाद में उसका मैं बाद में. जेल में चला गया मेरे तो मेरे से बाद में.
उसका मुकाबला राजस्थान में ही हुआ है बाद. में मेरी जगह उन्होंने और आदमी ढूंढ लिया. है क्योंकि मैं तो जेल में चला गया हम तो. डेढ़ साल तक आप ये करते रहे। हां फिर जेल. में कैसे करता रहा और स्मगलिंग भी बीच में. गुरमख सिंह के लिए स्मगलिंग भी करता रहा।. क्या स्मगलिंग और. उनके एक तो चर्च आती थी। हम फिर पकड़े. कैसे गए आप? पकड़ा ऐसे. गया जिस दिन हमने आना होता था ना उस दिन. गुरमख सिंह वहां जीप लेकर पहुंच जाता था।.
उस रात क्या हुआ? हमसे पहले कोई एक. पार्टी मालूम नहीं कौन थी. वो उनकी गोली चल गई बीएसएफ के साथ हम. और गुरमख सिंह को ये लगा कि हम उधर से आ. रहे हैं. और राजस्थान में ऐसा है जब टीब्बे होते. हैं ना टब्बा हम. घोड़ी इस तरफ चलती है तो लगता ऐसा है आवाज.
दूसरी तरफ से आ रही है तो गुरमख सिंह को. लगा कि हम गोली चलाते हुए वापस पाकिस्तान. भाग गए हैं। हम वो जीप ले आया। जीप ले आया. इधर तो जब हम वहां पहुंचे तो जीप है ही. नहीं। तो हम कैसे जाते ना आ गए ना तब फोन. भी नहीं थे। कुछ भी नहीं थे। फंसने वाला. पूरा काम था। उधर बीएसएफ ने पीछा करना. शुरू कर देना था थोड़ी देर बाद।. तो फिर मैं थोड़ा बहुत जानता था। मेरे साथ.
दो पंजाब के थे। उनको मालूम नहीं था इतना. लेकिन मैं राजस्थान रहते डेढ़ साल हो गया. था मुझे मैंने मुझे थोड़ी बहुत ही नॉलेज. थी कि जहां जीपें किराए पर मिल जाती हैं. तो मैंने एक जीप किराए पर ढूंढी रात ही. उसको बोला कि हमारा एक मरीज है उसको. गंगानगर ले जाना है। यह भी याद है कि ₹300. किराया तय किया उसके. साथ वो आ गया।.
लेकिन जब उसने देखा यह तो और ही मरीज है. हम तो उसने इंकार कर दिया मैं नहीं जाऊंगा. मैंने सोचा अब तो तुझे ले जाएंगे हम जाएगा. कैसे. नहीं तो मैं जीप चलाने लग. गया तो दो मेरे साथी वो पीछे बैठ गए जीप. वाले को आ गए गन पॉइंट पे बैठा दिया बैठा. रहे चुप करके हमने यही सोचा था कि गुरमख. सिंह के पास ही जाएंगे वहां से दूसरी जीप. ले लेंगे और इसको छोड़ देंगे।.
हम जब गुरख सिंह के पास. पहुंचे। हालांकि गुरख सिंह के घर नहीं. लेके गए. उसको। गुरमख सिंह का घर रोड से. कोई आधा किलोमीटर एक साइड पे था। वहां से. पैदल गए जीप रोड पर खड़ी करके और लेकिन. गुरख सिंह ने गलती की। वो हमारे साथ आ. गया।. और बाद में गुरख बोला जीप तो तुम ले ही आए. हो। इसी जीप को पंजाब ले.
जाओ और इस ड्राइवर को गोली मार देना. रास्ते. में। तो ड्राइवर तो रोने लग. गया। मुझे गोली मत. मारो। मैंने उसको बहुत हौसला दिया नहीं. मारते तुझे लेकिन वो डर गया। हम तो मेरे. साथी भी दोनों हां ठीक है तैयार हो गए भाई. जीप यही पंजाब जाएगी इसको रास्ते में. निपटा देंगे वहां से 2025 किलोमीटर चलने.
के बाद मेरे साथी बोले इसका काम तमाम. करो तो जीप यही चलेगी जाएगी पंजाब तो. मैंने बोला तुझे तुम्हें मालूम नहीं है इस. इलाके का मैं इसका काम तमाम करता हूं तुम. दोनों जीप के पास रुको मैं इसको निपटा के. आता हूं हम. वह मेरे पांव पकड़ रहा है, लिट रहा है. जमीन पर। मुझे मत मारो। तो मैंने उसके कान. में धीरे से एक दो बार कहा कि चल तेरी जान. बखश लूंगा मैं। अगर ये दोनों गए तो तुझे.
मार देंगे।. शायद उसको फिर भी यकीन नहीं आया। चलो मैं. धक्के से उसको ले गया। काफी दूर ले गया।. ले गया तो मैं कहा इसी जगह बैठे रहना और. सुबह तक हिलाना. नहीं। तो मैं दो गोली चलाऊंगा। मेरे पर. मैं कहा तेरे पर नहीं चलाता दो गोली. चलाऊंगा उनको आवाज सुनाई दे जाएगी तू सुबह. तक हिलना नहीं सुबह चले. जाना चलो मैंने दो गोलियां जमीन पर ही दाग.
दी और आ गया मुझे दोनों पूछने लगे मार. दिया मैंने कहा मार दिया कहांहां मारी. मैंने एक सिर में मारी और एक छाती में. मारी फिर तो नहीं बचेगा मैंने कहा नहीं. बचेगा तो जीप लेके हम पंजाब आ. गए उस जीप वाले ने गुरमुख सिंह की आवाज. पहचान ली। हम इसीलिए गुरमख सिंह ने कहा कि. इसको मार देना। क्योंकि गुरख सिंह ने हमें. तो नहीं बताया कि ये जीप वाले को मैं. जानता हूं या ये मुझे जानता है। क्योंकि.
उसकी आंखें भी बंधी हुई थी। हां। हाथ भी. आवाज से समझिए। आवाज से वो पहचान गया. गुरुख सिंह। सुबह वो किसी तरह पुलिस चौकी. पहुंचा। वहां पुलिस को उसने बताया और. गुरमख सिंह को उठा लिया घर से। गुरमख सिंह. ने फिर मेरे वो रिश्तेदार जहां से मुझे. लेके आया था जहां पर मिला था मुझे उनको. उन्होंने फिर मेरे वो मामा जी को जो उनको. छोड़ के गए थे। मेरे को 30 से ज्यादा.
रिश्तेदार राजस्थान पुलिस ने उठा लिए। चलो. हम पंजाब पहुंच गए और मेरा एक साथी तीनों. में से उसका नाम तरसेम था। तरसेम. बोला तुम दोनों ठीक-ठाक हो घर से गुजारा. होता है तुम ऐसा करो ये जीप मुझे दे दो. मैं इसको किराए पे चलाऊंगा हम मैंने कहा. रख ले जी तू रख ले तो उस उसको ना तरसेम. सिंह को चलानी नहीं आती थी जीप ना क्लच. प्लेट उसने थोड़ी उड़ा दी थी तो वो तरन.
तारण एक वर्कशॉप. में लगा दी उसकी क्लच प्लेट डालने. को तब राजस्थान पुलिस मेरे गांव पहुंच गई।. हम पंजाब हां पहुंच गई तो मेरे पिताजी को. भी ले गए।. ले गए. तो गंगानगर जिले पदमपुर तहसील वहां से. एमएलए थी इकबाल कौर बीजेपी की हम उनसे कोई. रिशेदारी थी मेरे रिश्तेदारों की.
आगे तो वहां उनसे पहुंच की तो सारे. रिश्तेदार छूट गए लेकिन वो इकबाल कौर ने. ये कहा कि उस लड़के को पेश कर. दो मैं कोई नाजायज केस नहीं बनने दूंगा. ंगी पंजाब पुलिस को भी नहीं देंगे कुछ. नहीं. करेंगे तो मुझे फिर थोड़े दिनों बाद वहां. जाकर पेश कर दिया जब पेश कर दिया तो पूछते. भी दूसरे दोनों बताओ कौन है तेरे साथ जीप.
कहां है मैंने कहा जीप तो ऐसा तरसेम सिंह. था वो ले गया पता नहीं कहां ले गया तो वो. दोनों कहां है मैंने कहा वो तो मुझे दरबार. साहब मिला करते थे मैं कभी उनके गांव नहीं. गया तो गांव का तो पता होगा तो मैंने ने. दो बड़े-बड़े गांव के नाम ले दिए। एक. पट्टी है मेरे एिए में बहुत तहसील है वो।. बोल दिया एक पट्टी का है, एक बठिंडे का. है। ऐसा बोल दिया पकड़ ना पाए। हम. तो बोले जीप तो मैंने सोचा जीप तो वहां से.
तरसेम ले गया होगा। मैंने बताया उसकी क्लच. पे लाइट खराब हो गई थी। तो वर्कशॉप लगा. दी। तो बोले जीप बरामद करवा दी। जब जीप. बरामद करवाने आया ना मैं तो तरसेम सिंह. वहां पर बैठा था तो वह पकड़ा गया पकड़. लिया ड्राइवर ने पहचान लिया कहता जी एक. चाहिए और तरसे सिंह ने ये सोचा मेरे बारे. में कि ये सारा कुछ बक गया इसने मेरा भी. बता दिया है जीप की तरफ भी ले आया तो इसने.
तीसरे का भी बता दिया तरसेम सिंह को जब. लटकाया उधर ही पुलिस ने तो बोला तीसरा कह. जी घर पे ही है उसको तीसरे को भी घर से. पकड़वा दिया अब पुलिस ने सोचा जीप भी. बरामद हो गई हाथ भी हो गई हथियार बरामद. करने वो बोले जिनके हथियार थे वो ले गए. पुरुस वाले बोले वो तो ले गए जिनके हथियार. थे लेकिन तुम्हारे पास भी एक हथियार था ना. जो इसके कान पे लगाया था वो कहां है वो.
तरसेम सिंह बोला कि तू मेरे पर छोड़ दे तू. क्या इसके पास. है वो हथियार इंपोर्टेड था बढ़िया था तो. तो हम चाहते नहीं थे कि पुलिस को दे वो. हथियार जर्मन मेड था हम. तो उसने तरसेम सिंह ने उस तीसरे का नाम ले. दिया कि ज्ञानी के पास है हथियार तो.
ज्ञानी को घर से पकड़ लिया तो पुलिस वाले. बोले कि अब हथियार भी इसको बोलो दे दे तो. वो ना उसको बार-बार इशारे कर रहा है. ज्ञानी हथियार दे दे ऐसे करके ज्ञानी वो. हथियार दे दे। वो ज्ञानी समझ नहीं रहा. बात। जब उसने तीसरी बार कहा ना ज्ञानी वो. हथियार दे दे ऐसे करके तो उसके दिमाग में. आ गया कि ये साइज बता रहा है। एक ना छोटा. सा पिस्टल था वो दे दो।.
ज्ञानी के पास। ज्ञानी बोला दे तो देता. हूं लेकिन ये इसका है तरसेम का। ज्ञानी ने. दीवार में से ईंट निकाली। ईंट के पीछे वो. पड़ा था। तो पुलिस पूरी खुश हो गई कि जे. तो बहुत बड़ा केस हमने हल कर लिया इललीगल. वेपन सारा कुछ ही पकड़ा गया तो अखबार में. बड़े चर्चे हो गए पुलिस की वाहवाह हो गई. हम. तो हम पर केस डालकर हमें जेल में डाल दिया.
गया स्मगलिंग का और जब ऐसा केस होता है ना. एक हमारा हम पर केस दर्ज हो गया किडनैपिंग. का क्योंकि ड्राइवर की किडनैपिंग हुई. थी। एक केस स्ट्रगलिंग केस नहीं लगा।. स्ट्रगलिंग का तो पकड़ा नहीं ना गया कुछ।. हम पकड़ा नहीं ना गया। किडनैपिंग का हो. गया। एक हो गया जीप. को क्या बोलते उसको? जीप चुरा ली। चुरानी. और चीज होती है। डकैती विद डेडली वेपन।.
डकैती बन गई। डकैती विद डेडली वेपन। 392. होती है। 392 लागी। एक उसकी किडनैपिंग की. लग गई।. तो उस ड्राइवर ने जो केस रजिस्टर्ड कराया. था उसने अनपछते कह के लिखवाया था कि मैं. उनको पहचान सकता हूं मेरे सामने आने पर।. तो 15 दिन. में जज जेल में आता है और पहचान करवाता.
है। अगर वो पहचान ले तो ठीक है। अब मेरे. इधर एक निशान है। जिसके कोई निशान होता है. ना तो वो जज जो है वो निशान कवर करवा देता. है। मेरे इधर एक कागज का स्टीकर लगा दिया।. मेरे साथ मेरे मिलते जुलते 810 आदमी खड़े. कर दिए। उनके भी निशान लगा दिए सभी की आंख. के नीचे पुलिस ने बताया ना हो कि उसकी आंख. के नीचे निशान है लेकिन वो ड्राइवर तो.
पहचानता था हमें दो तीन दिन तो हमारे साथ. रहा पर पुलिस को जज को नहीं ना बताया. पुलिस ने कि हमने ड्राइवर को दिखा दिया है. अब ड्राइवर ने क्या किया कि उन दोनों को. तो पहचान. लिया और मुझे पहचान कर भी नहीं पहचाना. क्योंकि आपने उसकी जान बचाई थी. बिल्कुल तो वह केस कमजोर हो गया, वीक हो. गया। उस केस में चलो एक बार तो हमें सजा. हुई लेकिन बाद में वो केस बरी हो गया। तब.
तक क्या हुआ इधर जो भी केस थे पंजाब के जो. भी आदमी गिरफ्तार हुए थे ब्लू स्टार एक्शन. में इन सबको आम मुआफी दे दी गई. थी। इनकी पांच साल सजा पूरी हो गई।. ये आ गए. 89 शायद 89 मार्च या फरवरी में इन सबको. रिहा कर दिया.
गया तो पिछले जो भी मेरे थे उनके साथ ही. थे केस वो सब माफ हो गए हां हो गए तो बस. एक यही रह गया था राजस्थान. वाला इसकी कुछ मैं मतलब सजा काट के आया. हूं फिर कितने टाइम थे छ साल के करीब सजा. काफी हुई थी सजा कई केस चला पड़े ना. स्मगलिंग का तो नहीं चला बॉर्डर क्रॉसिंग. का चल गया किडनैपिंग किडनैपिंग बॉर्डर. क्रॉसिंग और उसका एक आ गया बीएसएफ के साथ.
मुकाबला. 307 तो इसकी वजह से छ साल अंदर सजा तो. काफी हुई थी सजा तो इतनी हुई थी कम से कम. 15 साल बाद ना आता मैं आपने एक लाइन बोली. है हां कि पंजाब को डिस्ट्रॉय करने के. पीछे पाकिस्तान का हाथ बिल्कुल। हां। ऐसा. क्यों बोला? आपको मालूम ही है 1971 में. क्या. हुआ? 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश.
अलग करवा दिया इंडिया ने। तो पाकिस्तान. शुरू से ही चाहता था कि हम भी ऐसा कुछ. करें कि पंजाब को अलग कर दें इंडिया से।. इंडिया के टुकड़े कर दे. लोग। यही कारण था वो। हथियारों बेशक. हथियार वो फ्री नहीं देता था। देता तो. मोड़ ही था. लेकिन आओ भक्त तो करता था ना उसको उनको. पनाह तो देता था ना जैसे सिख हैं सारे हम.
उनमें से कुछ ही लोग हैं जो खिस्तान. मूवमेंट को सपोर्ट करते हैं और बाकी लोग. नहीं करते हैं। नहीं करते। इन दोनों में. डिफरेंस क्या है? क्यों? कुछ लोग बहक जाते. हैं और उधर वैसे करते हैं और कुछ लोग नहीं. करते। उसका कारण यही है। एक तो जो मेरे. जैसे बच गए हैं. ना किसी तरह से कोई सजा नहीं काटी। कुछ. नहीं हुआ। कोई जर्मन पहुंच गया, कोई यूएसए.
पहुंच गया, कोई इंग्लैंड पहुंच गया। तो. उन्होंने क्या किया कि खस्तान के नाम पर. लाखों नहीं करोड़ों डॉलर इकट्ठे कर लिए. उधर से लोगों से। कि आप हमें पैसे दो। हम. पंजाब में वो खस्तान की मूवमेंट फिर. चलाएंगे। एक तो वो लोग जो पैसा इकट्ठा कर. रहे हैं जैसा यूएसए में है क्या नाम उसका. गुण गुणवंत पन्नू गुणवंत कुछ ऐसा पन्नू है. पन्नू करके जो है खस्तानी.
है वो भी चंडीगढ़ मेरे साथ ही पढ़ा. है मेरे कॉलेज मेरे मेरे टाइम पे पढ़ा. मेरे कॉलेज में नहीं पढ़ा शायद वकालत करके. गया चंडीगढ़ से वो भी ला करके गया यूएसए. में ऐसे बहुत से लोग हैं। अच्छा एक बात और. बताऊं जैसे मैंने सजा काटी है या किसी के. घर का कोई आदमी पुलिस ने मार. दिया या कोई पुलिस.
मुलाजिम किसी आतंकवादी ने मार दिया है। इन. परिवारों से आपको एक भी आदमी नहीं मिलेगा. जो खस्तान को अब भी सपोर्ट करता हो।. मतलब जिनको थोड़ा बहुत भी सेक लगा है ना. चाहे पुलिस की तरफ से लगा हो चाहे आतंकवाद. की तरफ से लगा हो वो तो खिस्तान का नाम ही. नहीं लेते हम. जिस जिन्होंने कुछ नहीं देखा वही खिस्तान.
का नाम लेते हैं अब मैंने कुछ बातें बताई. है ये रिकॉर्ड है इतिहास है. अब बात चली थी भिंडरा वाले से शुरू हुई. थी। भडरा वाले को भी यूज़ किया गया। भंडरा. वाला एक धार्मिक लीडर. था। धर्म प्रचार में रहता तो आज भी उसका. बहुत नाम. होता। शायद पंजाब में सबसे पावरफुल आज भी.
भिंडरा वाला ही होता। अगर वो धर्म प्रचार. में. रहता। उसको सियासत का कुछ भी पता नहीं था।. पॉलिटिक्स का बिल्कुल नहीं। एबीसी नहीं. जानता था। वो इनके धक्के चढ़. गया पॉलिटिक्स. के। अब उसको यूज़ किया. गया। अब लोग पूछते हैं कि अगर वो सरकार का. आदमी. था तो सरकार ने उसको खत्म क्यों किया? हम.
ये तो बड़ी-बड़ी मिसालें। आप ओसामा बिन. लादेन की मिसाल ले ले। भ किसी टाइम उसको. यूएसए ने ही खड़ा किया था। पीछे उसके. यूएसए ही था। तो उसको खत्म भी तो यूएसए ने. किया ना बाद में कोई भी सरकार है जब तक वो. आदमी उसके काम का रहता है उससे काम लेती. है जब उनके काम का नहीं रहता उसको खत्म कर. दिया जाता है तो भंडरा वाले के साथ अभी. यही हुआ तो आपको कब पता चला कि मेरा ब्रेन. वाश किया गया है या मैं गलत रास्ते पर चल.
रहा था क्योंकि आप तो जब तक जेल गए तब तक. आप तो भिंडरा वाले के उनके ही सपोर्टर थे।. उनको ही ढूंढ रहे थे और उन्हीं के रास्ते. पर चल रहे थे। ऐसा एक तो राजस्थान ना जेल. में मेरे साथ एक बुजुर्ग कांग्रेसी थे। हम. किसी केस में आए हुए हम. और वो ज्ञानी जैल सिंह के काफी नजदीक थे. और काफी कुछ जब उन्होंने मुझे अच्छी तरह.
बताया कि ये तो बात ही एक थी। फिर एक और. एक ना जथेबंदी है दल. खालसा वो भी एक हवाई जहाज अगवा करके लेके. गए थे दल खालसा. वाले जिस दिन दल खालसा जथेबंदी बनी है वो. भी खस्तानी. थे उसका भी रिकॉर्ड है लोगों के. पास चंडीगढ़ सेक्टर बाय होटल.
अरोमा में उसकी पहली पहली मीटिंग. हुई। वहां से वह जथेबंदी नहीं आई। और उसका. बिल जो दिया वो ज्ञानी जय सिंह ने. दिया। जो भी उन्होंने उस दिन खाया पिया जो. भी होटल का बिल बना वो भी ज्ञानी जय सिंह।. इनके पीछे जो थी सी सियासत कांग्रेस थी।. पीछे कारण बड़ा था अकालियों को डाउन करना. और कांग्रेस को ऊपर लेके आना। लेकिन दोनों.
में से कामयाब कोई भी नहीं हो सका। ना कभी. कांग्रेसी कामयाब हो सकी ना अकाली।. तो आपको ये पता चला जेल के अंदर जब आपके. हां जेल के अंदर मतलब काफी कुछ पता चला।. फिर वहां से आप सोचने लगे उल्टा। हम फिर. एक एक वो कांग्रेसी ही था। तो हमारे सिखों. के मन में बहुत देर तक कांग्रेस के खिलाफ. बहुत गुस्सा रहा कि कांग्रेस सरकार ने.
दरबार साहब पर हमला किया। हम. अच्छा एक और भी सवाल है कि अगर सरकार. चाहती अकाल तख्त तो ढ डेरी कर दिया था। हम. तो दरबार साहब कैसे बच गया? गोल्डन टप. कैसे बच गया? जो सरकार चाहती तो वह भी हटा. देते। हटा सकते थे ना। उन्होंने कहां. टारगेट किया? जहां भंडरा वाला था उस जगह. को टारगेट किया। और ये लोगों के अभी भी.
ब्रेन में डाल रहे हैं कि नहीं हमारी. शक्ति का प्रतीक है अकाल तख्त सिखों की।. इसलिए वहां अटैक हुआ। वहां अटैक इसलिए. नहीं हुआ कि वह अकाल तखत है। वहां अटैक. इसलिए हुआ क्योंकि वहां मंडरा वाला था।. तो वड्रा वाले को खत्म करना था सरकार ने. और आज अब जैसे यह आपको पता चला तो ऐसे. अंदर जो लोग हैं आज तो इंटरनेट है आज इतनी. चीजें हैं तो फिर उन्हें नहीं पता चलता एक.
होते हैं ना भगत एक अंधभक्त होते हैं जो. अंधभगत है ना उनके आप सामने भी रख दो ना. बिल्कुल जैसे ये टेबल पड़ा है इसका कलर. ग्रे है बता दो आप ग्रे है वो बोले ग्रे. नहीं ग्रीन है क्योंकि क्योंकि उनके दिमाग. में बिठा दिया गया है। अभी ये ग्रीन ही. है। इसको ग्रेक बोलते हैं। है ग्रीन तो. कैसे आज कैसे बैठाया जा रहा है? आज किस. लिए लोग ज्वाइन करते हैं? वही बिठाया. सिखों के साथ ऐसा हुआ है। पुलिस ने ऐसा.
किया हुआ है। बच्चे तक मार दिए। तो आपको. क्या लगता है? अब अब क्या तरीका है? चीज. मसले को सॉल्व करने का? इसका देखो एक ही. तरीका है बच्चों को ना. थोड़ा रिसर्च करना चाहिए, स्टडी देखनी. चाहिए। किसी के कहने पर मत आओ। अगर कोई. तुम्हें कहता है ना हमने खिस्तान बनाना है. या कैसे भी है। उसके पीछे पहले तलाशना. शुरू करो। खस्तान का वर्ड आया कहां.
से? हमारे 10 गुरु साहिबान हुए. हैं। पहले नौ गुरु थे। उन्होंने तो प्रचार. धर्म प्रचार का ही काम किया ना। दव गुरु. साहब ने आकर फौज बनाई है जो अब नंग सिंह. है चाहे कैसे हैं ये उन्होंने आकर किया ना. मुगलों के खिलाफ आवाज उठाई है बंदा सिंह. बहादुर को बनाया पंजाब भेजा लेकिन किसी भी.
गुरु साहब ने ये नहीं कहा कभी भी कि हम. खस्तान बनाएंगे सिखों का एक अलग देश. बनाएंगे ये नहीं कहा तो अब मुझे लास्ट. क्वेश्चन है आपके. कि कोई भी इंसान जो ब्रेन वाश किया गया है. या जिसको बहकाया गया है या जो सोच रहा है. कि मैं जॉइ करूं या नहीं जॉइ करूं या. ऑलरेडी वो उस तरफ बहक गया है उस इंसान के. लिए आपका क्या मैसेज है जो यूथ आज का देख.
रहा है आपको उसके लिए क्या मैसेज है आपने. स्टार्ट करी थी कि आपने बोला कि मैंने तो. मेरी जिंदगी खराब कर ली मैं नहीं चाहता कि. कोई और करे तो जो इंसान आपको लग रहा है कि. वो अपनी जिंदगी खराब कर सकता है किसी भी. तरीके से। या. तो इसमें जुड़ के यहां से सपोर्ट करके या. खुद से एक नया आईडिया बना के या खुद से एक. तरीके का यूनियन बना के या कहीं और किसी. चीज पे जुड़ के या दूसरी कंट्री का सपोर्ट. लेके उसके लिए क्या मैसेज है? देखिए इनके.
कुछ अब तो बिल्कुल आसान हमारे टाइम में तो. हमें जैसा बताया जाता था हम वैसे ही मान. लेते थे।. लेकिन अब तो हर एक चीज सामने है। हर एक हर. एक के सामने है। हर एक की पकड़ में है। आप. रिसर्च करो। आप देखो तो सही कि सिखों के. साथ कहां पर धक्का हुआ है। तो मेन आपका. मैसेज है कि हर किसी को सवाल पूछने चाहिए।.
खुद से और उसकी तह तक जाना चाहिए। तह तक. जा जब तक जाएंगे। कुछ भी बिलीव करने से. पहले। हां।. किसी की भी बातों में ना आए ना अपनी. रिसर्च करें क्योंकि आज कल हर एक के हाथ. में इंटरनेट है। थैंक यू सो मच सारे. सवालों का जवाब देने के लिए और थैंक यू सो. मच इतना टाइम बताने के लिए और बिना किसी. के भी बारे में बिना सोचे बिना डरे आपने. सारी चीजें बताई नहीं ये तो हकीकत है चाहे.
कोई भी कहीं भी सर्च कर ले ये तो सच ही है. तो सच ही निकलेगा। नहीं बट थैंक यू लोगों. की हेल्प करने के लिए क्योंकि ऐसे जब आप. लोग बाहर आते हो तभी बहुत सारे यूथ को यह. देखने को मिलता है कि क्या गलत हो सकता है. या क्या हमारे पहले हमारे बड़ों के साथ. गलत हुआ है तो हमें किस जगह पे या किस राह. पे नहीं जाना चाहिए बिल्कुल मेरा. गांव वैसे बड़ा मशहूर गांव है उसका नाम तो. पंजवाड़ है हम तो उसका.
तो बहुत दुनिया तक चर्चा उस गांव का क्यों. चर्चा. एक ना मूवमेंट चली थी पंजाब में। उसका नाम. था. केसीएफ खस्त कमांडो. फोर्स। उसका जो पहला चीफ था वो मेरे गांव. का था। थैंक यू ये एपिसोड एंड तक देखने के. लिए। हमें प्लीज कमेंट करके बताओ कि और. ऐसे कौन से गेस्ट थे जो आप देखना चाहते. हो? कौन से ऐसे इश्यूज हैं जो आपको लगता.
है उन पर कोई बात नहीं कर रहा है एंड उन. पर इंसाइट्स और अवेयरनेस हर इंडियन को. होना चाहिए। प्लीज लेट अस नो क्योंकि. जितना आप हमें बताएंगे उतने ही बेहतर. तरीके के गेस्ट हम ला पाएंगे एंड उतने ही. ज्यादा इनसाइट्स एंड वैल्यू हम प्रोवाइड. कर पाएंगे आप सबके लिए। आई विल सी यू. नेक्स्ट टाइम अनटिल देन कीप फिगरिंग आउट।. एंड यह चैनल को सब्सक्राइब कर लो। आल्सो. यह एपिसोड किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर. करना जिसकी लाइफ में इसको देखकर एक.
पॉजिटिव चेंज आएगा।. [संगीत].
