How To Choose The Right College? - Fake College & Counselling Scam - Rohit Gupta | FO269 Raj Shamani
टॉप यूनिवर्सिटी और एक बेकार यूनिवर्सिटी. में क्या-क्या डिफरेंस है मेजॉरिटी ऑफ द. टॉप 100 आर नॉन फंडेड बाय प्राइवेट. प्लेयर्स फैकल्टीज बड़ा डिफरेंस है. इंफ्रास्ट्रक्चर तीसरा डिफरेंस होगा और. कितना आसान होता है एक यूनिवर्सिटी खोलना. पैसा एंड पावर और सीट भी तो देनी पड़ेगी. किसी मिनिस्टर को सीट क्या है उसमें. हिस्सा देना पड़ेगा पब्लिक कैसे बेवकूफ हो. ना है जो बेस्ट है उनको चुनो अगर आपको. नहीं मिलते तो मत जाओ फिर जिंदगी खराब है. एक गलत कंसल्टेंट क्या खराब कर सकता है. पूरी जिंदगी खराब कर सकता हैयर बच्चे ना. कंसल्टेंट को सोचते हैं कि ये भगवान है वो. कहीं भी आपको जाके छोड़ा जाएंगे अपना. कमीशन बना लेंगे और कु साद जाता है इन.
सारी यूनिवर्सिटीज के अंदर जो एक्चुअली. में रियल स्टेट कंपनीज है क्यों बोल रहे. हो रियल स्टेट कंपनी है वहां पे ना. कंपटीशन ऐसे चलता है कि मेरे पास 25000. बच्चों का हॉस्टल है च उनसे पूछा जाए कि. फैकल्टी इनके अगेंस्ट कितनी है उसका जवाब. नहीं होता उन्हें अप्रूव्स कैसे मिलते हैं. इसमें ना स्टेट ही इवॉल्व हो जाता है. स्टेट में ही पैसा घूम जाता है और स्टेट. में बन जाती है ये यूनिवर्सिटीज मतलब लोग. करप्ट सिस्टम हो जाता है हमारे देश में. प्राइवेट यूनिवर्सिटीज करीबन 650 है उसमें. से मैं आपको बताऊं 500 आर ओंड बाय बिग. बिजनेस हाउसेस या फिर पॉलिटिशियन मेडिकल. कॉलेज के ना अप्रूवल के लिए डेड बॉडीज. चाहिए होती है अब ये लाना बड़ा मुश्किल. होता है तो आपको पता है ये पूरे ऑल ओवर.
इंडिया ना ट्रेवल होती है इधर से. उधर मैंने कभी नहीं सुना पहली बार सुन रहा. हूं हमारा पॉडकास्ट जितने भी लोग देखते. हैं उनमें से. उतने ही बेहतर और बड़े गेस्ट हम लेके आ.
पाते हैं सो प्लीज सब्सक्राइब बिफोर यू. स्टार्ट द शो आज भी कई स्टूडेंट्स कंफ्यूज. होते हैं कॉलेज में सिलेक्शन के टाइम पे. कौन से फैक्टर्स कंसीडर करने चाहिए और कौन. से कॉलेजेस में उनका सिलेक्शन होने के. चांसेस सबसे ज्यादा है ये सारी बातें हमने. आज के पॉडकास्ट प करी है विथ द कोफाउंडर. एंड सीईओ ऑफ कॉलेज विद्या रोहित गुप्ता. हमने उनसे डिस्कस किया है कि कौन से. स्कैम्स होते हैं इन मेडिकल इंजीनियरिंग. एंड अदर कॉलेजेस 75 % के नीचे जिनके.
परसेंटेज आते हैं उन बच्चों को कौन से. एग्जाम्स और कौन से ऑप्शंस ऑप्ट करने. चाहिए अपनी लाइफ में अप स्किल करने के लिए. क्या डिफरेंस है बिटवीन अ टॉप कॉलेज एंड अ. बिलो एवरेज कॉलेज और फ्रेशर्स कैसे अपना. सीवी स्ट्रांग कर सकते हैं ऐसे कई सारे. इनसाइटफुल टॉपिक्स फॉर करियर एंड फॉर एवरी. स्टूडेंट हमने आज के पॉडकास्ट में डिस्कस. किया है सो ये एपिसोड एंड तक देखना एंड. आगे बढ़ने से पहले राजुमानी क्लिप्स एंड. राजुमानी शॉर्ट्स को जरूर सब्सक्राइब कर. लीजिए क्योंकि वहां पर हम इस बड़े एपिसोड.
की छोटी-छोटी क्लिप्स डालते हैं ताकि आपको. कम समय में बेहतर वैल्यू मिले एंड इस पूरे. एपिसोड का ऑडियो एक्सपीरियंस spotify.com. [संगीत]. तो मुझे लगा मैंने पता नहीं क्या पहाड़.
तोड़ लिया मैंने शायद अपने फैमिली में. सबसे ज्यादा परसेंटेज लाया था उस समय तो. क्योंकि पापा गवर्नमेंट सर्वेंट थे तो. ज्यादा पढ़ाई पे हमारी ध्यान देते नहीं थे. वो और हम खुद भी नहीं देते थे तो 72 पर आए. तो मुझे लगा अब तो दिल्ली में बढ़िया. नॉर्थ कैंपस का कॉलेज मिल जाएगा तो बढ़िया. हो जाएगा तो मेरा नंबर आया लास्ट कट ऑफ. में थर्ड कट ऑफ में क्योंकि दिल्ली में उस. समय कट ऑफ निकलती थी तो मुझे सबसे रद्दी. कॉलेज मिला जाने का मन भी नहीं करता था तो. कॉलेज में देशबंधु कॉलेज मिला मुझे अच्छा. गवर्नमेंट कॉलेज है इसलिए नाम ले रहा हूं. हां तो देशबंधु कॉलेज मिला मुझे और उसमें.
कोर्स भी मिला मुझे बीए जो कि मैंने. कॉमर्स ली थी और मुझे बीकॉम चाहिए था. रद्दी कॉलेज क्यों बोला आपने क्या था उस. कॉलेज में ऐसा कुछ भी नहीं था कुछ भी नहीं. था मतलब नो इंफ्रास्ट्रक्चर कोई. इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था फैकल्टीज का आना. जाना था नहीं था क्लासेस होती नहीं होती. थी किसी को कोई लेना देना नहीं था मतलब. क्या होता है यार ये अच्छे कॉलेजेस ना. क्रीम बच्चे ले लेते हैं और हम जैसे. बच्चों की ना किसी को परवाह ही नहीं है. सोसाइटी को मतलब मतलब कोई परवाह नहीं है. कि जो ये 70 पर वाले हैं 60 पर वाले इनका. क्या होगा इनको सबसे लास्ट स्टार्टर में. रख देंगे कैटेगरी में रख देंगे और ये कुछ.
कर पाएंगे तो ठीक है अपने आप में नहीं कर. पाएंगे तो भी ठीक है तो ये सिस्टम बड़ा. खराब लगा था मुझे उस समय कि यार हमारे लिए. क्या है हम हम 72 पर लाए हैं और बड़ी. मेहनत करी हमने हां 10थ में 52 लाए थे 11थ. में 62 लाए 12थ में 72 लाए तब भी हमको कोई. पूछ नहीं रहा यार भै ये बड़ा खराब 72 उस. टाइम पे तो ऐसा लगता भाई जंक जीत लिया. बहुत बड़ा 2003 की बात है मैंने ल यार 60. पर से ऊपर लाने है बस कैसे भी करके फर्स्ट. डिवीजन लाना है तो पर ठीक है कोई वैल्यू. हुई नहीं तो मन भी नहीं करता था ठीक है. आता जाना लगता रहा बीच में थर्ड ईयर के. आसपास मैंने एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी.
जॉइन कर ली हम वहां पे मुझे स्पोर्ट्स. स्पंस परशिप बेसनी होती थी कंपनीज में जो. भी स्पोर्ट्स के इवेंट होते थे उसके अंदर. उनके बैनर्स और पोस्टर ये सब बेचना होता. था तो वो दो-तीन साल वो बेचे 2008 में. मैंने अपने भाई को जॉइन किया हमने प्लान. किया एक वोकेशनल ट्रेनिंग कंपनी बनाते हैं. ओके जहां पे हम लोग 12थ पास के 12थ पास जो. बच्चे होते हैं और लोअर मिडिल क्लास इनकम. ग्रुप में जो होते हैं उनको बेसिक. अकाउंटिंग सिखाएंगे और उनकी जॉब लगवाए तो. हम दोनों ने एक ब्रांच खोली और धीरे-धीरे. करके उसकी 80 ब्रांचेस खोल दी.
वोकेशनल ट्रेनिंग वोकेशनल ट्रेनिंग. इंस्टिट्यूट की नॉर्थ इंडिया में हम. बॉम्बे बेस्ड इन्वेस्टर 2009 में आए और 5. करोड़ की फंडिंग कर दी उस कंपनी में तब ना. ये भी नहीं पता था कि पांच के आगे कितने. जीरो लगते हैं तो ₹ करोड़ बनता है हवा में. हो गए दोनों हम लोग 2009 में कि यार ₹. करोड़ हमारे बैंक में है पापा गवर्नमेंट. सर्वेंट है फर्स्ट फर्स्ट जनरेशन. एंटरप्रेन्योर हैं दोनों तो अच्छा उसमें. से एक इन्वेस्टर था भी उसने बोला था कि. देखो तुम लोगों को जब फंडिंग मिलती है ना. तो तुम लोग हवा में हो जाते हो अब तुम कुछ. भी खर्चा करोगे ऐसा मत करना पर वो. इन्वेस्टर बोलता है फिर इस पैसे का करोगे.
क्या हम खर्चा तो करना ही है हमने कंपनी. ओन सेंटर्स दिल्ली इंदौर जयपुर चंडीगढ़. शिमला अ पानीपत इन सब जगह कंपनी ओन सेंटर. डाल दिए फाइव स्टार एकदम बट सेंटर में. क्या होता था क्लासेस होती थी क्लासेस. होती थी ट्रेनिंग रूम होते थे थ्योरी रूम. होता था और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग रू एक. सेंटर में कितने बच्चे होते थे एक सेंटर. में करीबन 160 200 बच्चों के आसपास की. स्ट्रेंथ होती थी और एक बच्चे की कितनी. फीस होती थी 36000 होती थी उस समय जो कि. तीज करके वो तो कोचिंग सेंटर टाइप हो जाता. था ये जहां पर लोग ट्रेनिंग करते थे रियल.
लाइफ प्लेसमेंट के लिए हां ऑन द जॉब. ट्रेनिंग हम लोग लवाते थे इनको हां मतलब. डे वन से ही तुम्हें टैली सिखाना स्टार्ट. कर देंगे कि यहां से फिर दो-तीन महीने. कितने टाइम का कोर्स होता था 12 महीने का. कोर्स होता था तो 12 महीने तुम अकाउंट. सीखो और सीधे जाके तुम्हारी जॉब लगवा. देंगे सीधे जाके जॉब लगवा देंगे ओके 80 तो. हमने फ्रेंचाइजी सेंटर खोले थे और छह. कंपनियों ने सेंटर खोल दिए फ्रेंचाइजी. कैसे बेचते थे फ्रेंचाइजी फ्रेंचाइजर होते. थे इन्वेस्टर्स के फाइव स्टार होटल्स में. एग्जिबिशन सेंटर्स में जाते थे न्यूज़पेपर. ऐड देते थे उस समय डिजिटल तो था नहीं तो. न्यूज़पेपर ऐड देते थे कि अपना काम शुरू. करो अपना बिजनेस शुरू करो बिजनेस.
अपॉर्चुनिटी तो इंक्वायरी आती थी उनको. समझाते थे और कितने रुपए लेते थे उनसे ₹. लाख की फ्रेंचाइजी फीस लेते थे हम और बाकी. इन्वेस्टमेंट तो उनके सेंटर में ही करवाते. थे और ₹ लाख में उनको हम लोग करीबन ₹ लाख. की स्टार्टअप किट देते थे जिसमें कि बुक्स. होती थी बैनर्स होते थे कैनोपी होती थी. पैंफलेट होते थे ये सब एक और फिर उसके बाद. रॉयल्टी शेयर वगैरह रॉयल्टी शेयर होती थी. व्हिच वाज 8020 80 उसका शेयर होता था 20. हमारा शेयर होता था साल भर के रेवेन्यू का. कि प्रॉफिट का हर महीने के रेवेन्यू का. कलेक्शन का और उस 20 पर में हम क्या देते.
थे हम प्लेसमेंट सपोर्ट देते थे हम. फैकल्टी की ट्रेनिंग देते थे ओके और बुक्स. कंटेंट हम लोग देते थे इन सब की आर एनडी. हम दिल्ली करवाते थे ठीक है तो ये सब हम. लोग 20 पर इसके लिए चार्ज करते थे ठीक है. 2009 में जब फंडिंग हुई फिर 11 पहुंचा 12. पहुंचा 13 पहुंचा वो पैसा खत्म हो गया. 2009 में कितने परसेंट कंपनी दे दी 49 पर. कंपनी दे दी थी हमने अच्छा पा करोड़ पा. करोड़ में ठीक है और 11 12 13 बहुत दबा के. खर्चा किया रेवेन्यू को देखा नहीं क्या. बैंक में आ रहा है बस जाता हुआ दिख रहा था. धीरे-धीरे खत्म होता गया पापा के.
पेंशन फंड से हमने करीबन करीबन ₹ लाख रप. भी ले लिया था पापा से और एक करोड़ रप का. लोन अपने घर पर भी ले लिया था तो अब हम. लोग बैठे हैं करीबन एक करोड़ 60 लाख र के. लोन पे पापा से और 50 लाख 75 लाख के करीबन. वेंडर पेमेंट थी जो कि न्यूज़पेपर एड्स. होती है तो न्यूजपेपर वाले बाद में पैसा. लेते हैं आपसे तो करीबन ढाई करोड़ रुपए. में ये कंपनी लायबिलिटी पे थी अगेन बॉम्बे. से एक कंपनी आई वो बोलती है मुझे नॉर्थ. इंडिया में गवर्नमेंट प्रोजेक्ट बिड करने. हैं तो मुझे कोई ऐसी कंपनी चाहिए जिसका. टर्नओवर 5 करोड़ का हो हम और हमारा था तो.
हमने बोला ये तो यार बहुत अच्छा हो गया. आपको भगवान ने बेचा होगा हमारे पास में पर. वो बोले कि हम आपको सिर्फ लायबिलिटी में. खरीदेंगे हम तो हमने बहुत आपस में बात करी. पापा से डिस्कशन लायबिलिटी पे खरीदेंगे. मतलब जित जितनी लायबिलिटी है उतनी पे. करेंगे और पापा के 60 लाख नहीं देंगे घर. पे एक करोड़ का लोन जो है वो तो दे देंगे. उसके अलावा हम कुछ नहीं देंगे वेंडर वेंडर. पेमेंट करेंगे और एक करोड़ का लोन दे. देंगे बैंक का बाकी कुछ नहीं देंगे तो. पापा ने समझाया कि यार ये ना लर्निंग. कॉस्ट थी तुम्हारी पापा हमारे एकदम ओपन.
हार्टेड थे तो वो बोलते थे ठीक है कोई बात. नहीं यार ये तुमको सीखने के पैसे थे लग गए. हमारे कोई दिक्कत नहीं है तुम लिख लो बाहर. बेज के तो थोड़ा इमोशनल हुआ ड्रामा डामा. हुआ फैमिली में पर फिर हमने ठीक है यार कि. लायबिलिटी में भेज के निकल जाते हैं हम. लोग हम लोग निकल गए दोनों हम लोग दोनों. अलग हो गए भैया दुबई चले गए नमेंट का काम. करने के लिए और मैं यहीं रह गया मैं मैंने. यही सोचा कि क्या करें क्या नहीं करें. फिगर आउट कर रहा था मैं अभी क्या करूं. क्या नहीं करूं तो मुझे एक यूनिवर्सिटी. में काम मिला कि आप आप हमारे लिए. कंसल्टेंट बन जाओ हमारे लिए बच्चे लाना.
शुरू करो हम 2013 में चलता रहा यह 13 14. 15 16 17 चलता रहा 1718 में आके ना अजीब. से अंदर से पेन होने लग गया कि यार यह. बच्चे चाहते भी नहीं है उस यूनिवर्सिटी. में जाना छोटी जगहों से हैं तू बड़े-बड़े. वादे बड़े-बड़े सपने इनको दिखा के लेके जा. रहा है और यह जा भी रहे हैं तुझे कमीशन. मिल रहा है तो मैं खुश नहीं था आई वाज नॉट. हैप्पी विद दैट जॉब बड़ी अंदर से पेन होता. था यार ये अच्छा नहीं कर रहे हैं अच्छा. क्यों अच्छा नहीं कर रहे हैं क्योंकि किसी. को भी किसी भी कॉलेज में भेज रहे किसी को. भी किसी भी कॉलेज में भेज दे रहे हैं अभी. ना मतलब रेगुलर एजुकेशन में ना यही चल रहा.
है ऑल ओवर इंडिया कि जुगाड़ लगाई कहीं भी. किसी को भेज दिया पैसे लिए इससे और बेज. दिया मतलब बच्चे ना कंसल्टेंट को सोचते. हैं कि ये भगवान है वो आता है कि ये हमें. अच्छे कॉलेज में लेके जाएगा और हर जगह ना. कमीशन एजेंट्स हैं वो कहीं भी आपको जाके. छोड़ा जाएंगे अपना कमीशन बना लेंगे और. उसके बाद में आपका पता होता भी नहीं है कि. कहां पे हुआ कहां नहीं हो ये मतलब थोड़ी. सी साइड है डार्क साइड है एजुकेशन. कंसल्टेंट्स की और ये बहुत हो रहा है ये. पूरे इंडिया में हो रहा है ये बहुत हो रहा. है कितना होता हो मतलब कितने परसेंट बच्चे.
ऐसे ही जाते होंगे जो सिर्फ गलत एडवाइस के. चक्कर में इधर उधर चले गए नौ मेट्रो सिटीज. जो है इंडिया की नौ मेट्रो सिटीज वो तो. मेट्रो सिटीज के बच्चे से भर जाती है. जितनी यूनिवर्सिटीज टियर टू टियर थ्री. सिटीज में है यह नहीं. भरती और इनका मेन बच्चा जो आता है जो मेन. इनका कैंपस भरे जाते हैं आज वह भरे जाते. हैं यूपी से बिहार से झारखंड से वेस्ट. बंगाल से इन स्टेट्स में यूनिवर्सिटीज कम. है प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और गवर्मेंट. यूनिवर्सिटीज भी कम है तो यहां से. मेजॉरिटी बच्चा यहां से लाया जाता है और.
और घुसा दिया जाता है इन सारी टू टियर. थ्री टियर यूनिवर्सिटीज के अंदर जो. एक्चुअली में रियल स्टेट कंपनीज है मैं ये. बोल सकता हूं क्यों बोल रहे हो रियल स्टेट. कंपनी वहां पे ना कंपटीशन ऐसे चलता है कि. मेरे पास 25000 बच्चों का हॉस्टल है मेरे. पास 3 हज बच्चों का हॉस्टल है मे पास 500. बच्चों का हॉस्टल है उनसे पूछा जाए कि. फैकल्टी इनके अगेंस्ट कितनी है उसका जवाब. नहीं. होता फैसिलिटी में बाप है फैसिलिटी. स्विमिंग पूल होगा हमारे पास लिपिक साइज. स् लिपिक साइ स्विंग पूल होगा. और 25 बच्चों के लिए ये होगा ार बच्चों के.
लिए वो होगा ट्रैक एंड फील्ड होगा ऑल ऑफ. दैट तो ये यूपी और बिहार झारखंड फैसिलिटी. बेचते हैं ए सोसाइटी सोसाइटी हां तो. फैसिलिटी के देखते देखते बच्चे सारे आ भी. जाते हैं और लग भी जाते हैं. और फैकल्टी और बच्चों का रेशो जो है ना वो. बहुत गड़बड़ है बहुत गड़बड़ है कितना. गड़बड़ यूजीसी कहती है कि करीबन 40 45. बच्चों पे एक ट्रेनर होना चाहिए और यहां. पे करीबन 200 बच्चों पे एक ट्रेनर है तो. 2018 में ना. इंटरनेट पे ये सब चीजें देखते थे हम कि.
प्लेटफॉर्म्स बन रहे हैं इंडिया में बहुत. सारे प्लेटफॉर्म बन रहे हैं स्विगी z. amazonbusiness.in यूनिवर्सिटी जो कि.
अप्रूव्ड है उनको लिस्ट किया और बच्चों को. बोला अब आपको कोई नहीं बताएगा कि कहां. जाना है आप खुद आओ सेलेक्ट करो अपने बेसिस. पर चुनो कि कहां जाना है और फिर सेलेक्ट. करके जाओ अच्छा हमारी कंट्री ऐसी है ना. हमारे पास पॉपुलेशन इतनी है कि ओनली. सोल्यूशन टू सॉल्व द एजुकेशन प्रॉब्लम इज. ऑनलाइन मुझे ऐसा लगता है ओके कि ऑनलाइन. एजुकेशन अब हर जगह पहुंच सकती है क्योंकि. वो अफोर्डेबल है और वो फ्लेक्सिबल है अब. मेरे बहुत सारे क्वेश्चन इसम बिलकुल पहले. कि जो आपने बताया कि रियल एस्टेट कंपनीज. है अप्रूवल कैसे मिलते हैं क्योंकि कोई.
एक्रेडिट या कुछ तो इंडिया के लिए. लाइसेंसेस वगैरह लगते होंगे ना. यूनिवर्सिटी चालू करने के लिए कि कोई भी. स्टार्ट कर सकता है मैं बताता हूं. प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ना इंडिया में एक. ही एक्ट से बनती है जो कि स्टेट पास करता. है सेंट्रल का ना इसमें कोई काम नहीं है. कोई सेंट्रल बॉडी इवॉल्व नहीं है तो स्टेट. लेजिस्लेटर बॉडी में यह पास होती है और. फिर यह बनाई जाती है 30 एकर नॉर्थ इंडिया. में जो नॉर्म्स है वो 30 एकर लैंड चाहिए. तो जिसके पास 30 एकर लैंड है और 2 लाख. स्क्वायर फीट एरिया करने के लिए पैसा है.
वो बनाता है और फिर वो एप्लीकेशन स्टेट. लेजिस्लेटर को देता है स्टेट यूजीसी को. बताता है कि मैं ऐसे ऐसी एक यूनिवर्सिटी. बनाना चाह रहा हूं तो ज्यादातर इसमें ना. स्टेट ही इवॉल्व हो जाता है स्टेट में ही. पैसा घूम जाता है और स्टेट में बन जाती है. ये यूनिवर्सिटीज स्टेट इवॉल्व हो जाता है. मतलब यू थिंक कि मिनिस्टर्स मिनिस्टर्स. पॉलिटिशियन बिजनेसमैन ये सब तोब लोग करप्ट. सिस्टम हो जाता है करप्ट सिस्टम में मैं. आपको बताता हूं हमारे देश में प्राइवेट. यूनिवर्सिटीज करीबन 650 है उसमें से मैं. आपको बताऊं 500 आर ओंड बाय बिग बिजनेस. हाउसेस. या फिर पॉलिटिशियन यह रजिस्टर तो होती है.
चैरिटेबल ट्रस्ट में पर कोई सिंगल. यूनिवर्सिटी ऐसी नहीं है जो फ्री एजुकेशन. दे रही. हो तो फिर इनका पैसा जो आता है इतना. कलेक्ट करते हैं वो सब क्या घूमता रहता है. वो सब घूमता रहता है वो सब घूमता रहता है. तो जो इनको पढ़ाने के लिए कोई परमिशन तो. देता होगा कि नहीं स्टेट ही देती है बस. वही होता है लॉ नहीं यूजीसी एपिक्स बॉडी. है जो आके चेक करती है कि हां कितना एरिया. है आपके पास में कितना स्क्वायर फीट आपने. बिल्ट अप एरिया है कितने फैकल्टीज है आपके. पास में कितने पीएचडी होल्डर्स है आपके. पास में वो सारे अरेंज होते हैं अरेंज.
होते हैं मतलब वो सारे अरेंज होते हैं इधर. से उधर मतलब पीएचडी होल्डर्स को ढूंढा. जाता है उनको अपने ऑन रोल पर दिखाया जाता. है ऑफर लेटर दिए जाते हैं उनको कुछ सैलरी. भी जाती है महीने में और वो वापस भी आ. जाती है घूम घम के तो इस तरह से बनता है. क्या बात कर तो मतलब अगर फॉर एग्जांपल आज. एक यूनिवर्सिटी खोलनी है किसी को 30 एकड़. लैंड है और वो ले लिया आगे करा अब उसको जो. जो क्रेडिबिलिटी चाहिए क्राइटेरिया वो. सारा फ एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया वो सारा. फुलफिल हो जाएगा और बच जाएगी यूनिवर्सिटी.
और उसमें होगा या नहीं होगा वो गारंटी. नहीं है वो गारंटी नहीं है वो क्योंकि. बार-बार चेक करने कोई नहीं आएगा इसको एक. बार चेक आया करेक्ट कर दिया चले ग प चली. गई तो ये अगर आपको पता है तो उनको भी पता. होगा कि ऐसा हो रहा है यार ऐसा तो खैर. हमारे देश में बहुत सारी चीजें ऐसी हो रही. है जो सबको पता है कि हो रही है और गलत हो. रही है पर ठीक है कौन एक्शन ले पर हां ठीक. है गवर्नमेंट अब काफी स्ट्रिक्ट हो रही है. एजुकेशन को लेके बहुत सारे नॉर्म्स ऐसे आ. रहे हैं जहां आज तक नहीं थी हां आज तक. नहीं थी आज तक नहीं थे वो देखो जब जो आपने. बोला कि पता चल रहा है कि चल रहा है तो वो.
पता लग भी रहा है और ठीक भी हो रहा है गट. इट तो ये पीएचडी होल्डर्स को सैलरी दे दी. सबको दिखा दिया एक मैं बड़ा एक मैं एक. मुझे याद आई इस पे मेडिकल कॉलेज में मैं. आपको बताऊं मेडिकल कॉलेज के ना अप्रूवल के. लिए डेड बॉडीज चाहिए होती. हैं मीनिंग मेडिकल कॉलेज अगर आपको पास. कराना है ना तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया. का एक क्राइटेरिया है कि आपको डेड बॉडी. चाहिए होंगी क्योंकि उस वो उसपे वो हो. एक्सपेरिमेंट होंगे ना हम अब ये लाना बड़ा.
मुश्किल होता है तो आपको पता है ये पूरे. ऑल ओवर इंडिया ना ट्रेवल होती है इधर से. उधर जब भी जहां बनाना होता है तो बस आती. है नेक्स्ट डे इंस्पेक्शन होता है मर्चरी. में रखी जाती है फिर उठा के ली जाती है. फिर दूसरी जगह चली जाती है क्या बात कर. रहे हो क्योंकि कहां से लाओगे आप डेट आपके. पास में कैसे आएगी आप स्टार्ट कर रहे हो. फर्स्ट डे आपके पास कैसे आएगी. पढ आती कैसे है जो लेजिटीमेटली स्टार्ट. करता है उनके पास कैसे आती है मतलब सिस्टम. है पूरा आप आप आप उनको रेंट दो लाने का कि. एक दिन आप रखोगे दो दिन रखोगे कब तक.
इंस्पेक्शन होगी आपकी कब तक नहीं होगी तो. इजी है मतलब दिस इज नॉट अ वेरी डिफिकल्ट. टास्क टू डू किसी की भी डेड बॉडी उठा के. ले आ जाएंगे कहीं से भी नहीं उनके पास. होती है उ मतलब खरीदते होंगे मतलब कुछ भी. आग लगा दी जाती होगी और ये ले लेते होंगे. तो ये घुमाते हैं पूरी कंट्री के अंदर. क्या. बात मैंने कभी नहीं सुनाई पहली बार सुन. रहा हूं हर ट्रेड के अपने अपने डार्क साइड. है यार तो ये घूमती रहती है और इसम पास हो. जाता है सबसे ज्यादा जदा कौन सी कौन से.
टाइप की यूनिवर्सिटीज में इजली यह स्कैम. चल रहा है या करप्ट सिस्टम है प्राइवेट. यूनिवर्सिटीज में कोई भी फील्ड हो. इंजीनियरिंग में भीय चल रहा है मैनेजमेंट. में भी य चल रहा है मेडिकल में भीय चल रहा. है सबसे ज्यादा क्या किसम चल रहा है तो भी. मतलब यार तीन तरीके की है सेंट्रल स्टेट. और प्राइवेट तो प्राइवेट में ही चल रहा. हैय प्राइवेट में भी डिपार्टमेंट होते है. ना इंजीनियरिंग है एक मैनेजमेंट है एक यू. फील की यूनिवर्सिटी सारे कोर्सेस दे रही. है सब डिपार्टमेंट है इनके पास में सब. डिपार्टमेंट है इनके पास में कोई ऐसा एक. डिपार्टमेंट नहीं है हां इंजीनियरिंग में. पिछले 10 सालों में ज्यादा हुआ क्योंकि. क्या हुआ भेड़ चाल चल गई सबको इंजीनियर.
बनना है सभी को इंजीनियर बनना है पर ठीक. है बुरा नहीं था डिमांड थी तो सप्लाई हुई. पर सप्लाई थोड़ी ज्यादा हो गई कैलकुलेट. कोई कर नहीं रहा था कि डिमांड कितनी है और. सप्लाई कितनी करनी है ओके तो फिर यह ऐसे. करके इन्होंने कॉलेजस स्टार्ट कर लिए अपने. हिसाब से अप्रूवल मिल गए राइट यू फील दिस. इज रंग दिस वाज वेरी रंग दिस इज वेरी रंग. और ये साल तक ये चलते ही आ रहा था राइट. इसकी वजह से हमारे पास आज जो इतने सारे. लोग जो ग्रेजुएट है उसके बाद भी उनको. नौकरी मिल रही और वन एंप्लॉय बल वो इसकी.
वजह से हो रहा है नहीं यार मैं बताता हूं. हम ना इसको पिछले 10155 साल से घिसे जा. रहे हैं इस बात को कि इतने बीटेक निकल गए. वो एंप्लॉय नहीं थे यूनिवर्सिटी की भी. गलती है यार पर लेने वाले की भी तो गलती. है आपने क्यों चुना उनको आप आपने भी तो. सिलेक्शन की ना उनकी आप भी तो गए बात मान. के उनकी मतलब मेरा कहने का मतलब है कि अगर. ये बीटेक हम लोग हमेशा 1015 साल से एक ही. बात कर रहे हैं कि इंजीनियर इतने एंप्लॉय. बल नहीं है बड़े-बड़े एंप्लॉयर बोल रहे. हैं कि 60 पर इंजीनियर्स यबल नहीं है तो. मैं यहां पे एक एग्जांपल देता हूं कि.
यूपीएससी का जो पासिंग परसेंटेज है वो 0.1. से 0.3 पर है यूपीएससी अगर बच्चा देता है. एग्जाम तो 0.1 से 0 तो बाकी 99 पर जो. बच्चे हैं वो सब बेकार. हैं टैलेंट मतलब अब वही है ना यार कि 100%. गारंटी तो किस कौन देता है आपको अच्छा. एजुकेशन आपको क्या ये गारंटी देती है कि. प्लेसमेंट मैं करवा के दूंगी आपका मैं. बताता हूं कहां से आता है जो आपको चाहिए. होता है ना वही मिलता है आपको क्रीम हमने. बचपन से सीखी थी कि सर्दियां आती है तो.
कोल्ड क्रीम लगाते हैं हम लोग और हमारी जो. स्किन है वो ड्राई नहीं होती है य वाइट थी. तो लोगों ने बोला इसको वाइट है ना वाइट. करने से वाइट हो जाते हो आप तो ठीक है. कंपनीज ने पकड़ लिया इसको बोला कि ठीक है. इसको फे फेर एंड लवली बनाते हैं इसको इससे. लोग गोरे हो जाएंगे तो एजुकेशन ने कभी भी. ऐसा नहीं बोला था कि आपको मैं प्लेसमेंट. 100% प्लेसमेंट दूंगी ये आपने मांगा तो. उन्होंने बोल दिया एज सिंपल एज दैट किसी. ने कभी गारंटी नहीं किया था मतलब इनफैक्ट. एजुकेशन तो ऐसे स्टार्ट हुई थी कि आपको.
सिविलाइज बनाएगी हम आपको मैनर सिखाएगी. आपको कपड़े पहनना सिखाएगी आपको पर्सनालिटी. सिखाएगी आपको लोगों से बात करना सिखाएगी. पर आपने इसको क्या बना दिया कि एजुकेशन. मतलब प्लेसमेंट हम यार एजुकेटेड बहुत सारे. लोग हैं जो अच्छा भी कर रहे हैं बुरा भी. कर रहे हैं मतलब आई मीन बहुत टेररिस्ट. ऑर्गेनाइजेशन है जहां पे पड़े पड़े पढ़े. लिखे लोग हैं इंटेलिजेंट लोग हैं जो. ड्राइव कर रहे हैं उन ऑर्गेनाइजेशन को वो. भी पढ़े लिखे हैं तो हम ऐसे कसे उनकी. प्लेसमेंट देखो कहां हो रही है तो ये मतलब. मेरे मेरे मेरे हिसाब से ना गलत गलत है. बोलना यार और दूसरी चीज एक और बोलता हूं. और जब हम बोलते हैं ना कि मैंने डिग्री ले.
ली तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने यह. डिग्री डिग्री नहीं ली है मैंने प्लेसमेंट. ली है मुझसे प्लेसमेंट का वादा किया गया. था और मुझे अब वो प्लेसमेंट नहीं द जा रही. क्योंकि ये सारी जो रियल स्टेट कंपनीज है. जिनको आप यूनिवर्सिटीज बोलते हैं ये. गारंटी कर रही ये गारंटी कर रही है ये. बोलती है कि आओ हम तुम्हे 100% मिी इनसे. गारंटी आपने मांगी ये 90 से पहले 90 से. पहले मतलब 90 2000 से पहले कहीं वर्ड नहीं. आता था गारंटी आई मीन किसी भी प्रोडक्ट. में नहीं आता दुनिया में गारंटी किस. प्रोडक्ट में आता है दुनिया में गारंटी. टीवी में आता है फ्रिज में आता है कपड़े.
में आता है रंग नहीं निकलेगा किसमें आता. है गारंटी या मैं तो एज अ कंज्यूमर मैं. मांगूंगा सर हर चीज मांगूंगा मैं 50 चीज. मांगूंगा आप जो मुझे प्रॉमिस कर रहे हो वो. तो आपको देना पड़ेगा ये वही है ना कि आपने. मांगा है नहीं तो ये तो सोचना चाहिए ना. कॉलेजस को ट्स व्ट आई एम से मैं य तो बोल. रहा हूं कि कहां पर आई डोंट थिंक कि टॉप 1. पर कॉलेज जो दुनिया के हैं वो बोलते हैं. कि 100% गारंटी है नहीं बोलते फिर तो भी. तो लोग जाते हैं उधर यही चलाया ना यही. चलाया सबने इनफैक्ट आईआईटी आईम्स नहीं. बोलते इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सलेंस जो है. हमारे देश में वो नहीं बोलते प्लेस नहीं.
बोलते प्लेसमेंट फिर तो फिर जिन्होंने. बोला उन्हें डिलीवर करना चाहिए डिलीवर अब. वही है वही है कि हम चूज भी कर रहे हैं ना. उनमें जा भी तो रहे हैं फिर हम लोग ये पता. होते हुए अब आप ये बात देखो कि 15 साल से. यह पता है कि इन कॉलेजेस में जाके बीटेक. करके जॉब नहीं लगती है पर फिर भी वो भरे. जा रहे हैं क्यों भरते हैं क्यों लगता है. पब्लिक है पब्लिक को यहां पे इजी है. बेवकूफ बनाना बहुत इजी है सबसे इजी है. यहां पे तो पब्लिक कैसे बेवकूफ ना बने हम. सबको बहुत इजी है ये पता करना कि बेस्ट. क्या है जब हम बात करते हैं आईआईटी आईआईएम.
और फ्यू मोर प्राइवेट कॉलेजेस हमें अब पता. है हमारे देश में कुछ ऐसी बॉडीज भी है जो. अब इन यूनिवर्सिटीज को रैंकिंग भी देने. लगी है एक एनआईआरएफ है व्हिच इज नेशनल. इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क जो टॉप. 10000 यूनिवर्सिटी टॉप 100 यूनिवर्सिटी. निकालती है नक है नेशनल असेसमेंट काउंसिल. जो कि रेटिंग देती है आप जो बेस्ट है उनको. चुनो अगर आपको नहीं मिलते तो मत जाओ फिर. तो दूसरे तरीके की एजुकेशन लो ऑनलाइन लो. साथ में काम करो ऑन द जॉब ट्रेनिंग लो और. फिर तैयार हो स यू फील कि जो 100.
यूनिवर्सिटीज है उनके अलावा किसी में किसी. को जाना नहीं चाहिए नहीं जाना चाहिए यार. लाइफ खराब है जिंदगी खराब है बाकी सब. बेकार है बाकी सब बेकार है अच्छा कमाल की. बात यूनिवर्सिटी डिसोल्व होने का एक्ट ही. नहीं है हमारे देश में एक बार बन गई ना तो. डिसोल्व नहीं हो. सकती क्या आप गल करना है इसको बाद में बट. अभी गवर्नमेंट ने बंद करी थी ना फेक. यूनिवर्सिटीज वो तो यूनिवर्सिटी ही नहीं. थी ना अगर बन गई तो डिसोल्यूशन का एक्ट. नहीं है क्यों बना ही नहीं है वो पेपर में.
ही नहीं है आज तक कोई बंद नहीं हुई आप. हिस्ट्री देखना पिछले 75 सालों में एक य. कॉलेज तो बहुत सारे बंद होंगे हजारों बंद. हुए होंगे ये जो बीटेक अभी एमटेक बीटेक और. एमबीए कॉलेज स्टार्ट हुए पर यूनिवर्सिटी. एक भी बंद नहीं हुई बट गवर्नमेंट का कोई. तो रूल होगा ना कि यह यूनिवर्सिटी यह. प्रॉमिस करती थी तो वो चीजों पर नहीं खड़ी. हुई तो बंद करो बंद नहीं करो वो. यूनिवर्सिटी कुछ कुछ ऐसी यूनिवर्सिटी है. जिनमें गवर्नमेंट ने अपने बोर्ड सीट बिठा. दी है कुछ कुछ है बंद नहीं हो पर बंद नहीं. हो सकती बंद करने का एक्ट ही नहीं. है एक बार खोल दी तो लाइफ टाम एक बार खोल.
दी तो लाइफ टाइम और कितना आसान होता है. यूनिवर्सिटी खोलना बस पैसा चाहिए पैसा. पावर पैसा पावर दो पैसा एंड पावर मतलब और. सीट भी तो देनी पड़ेगी किसी मिनिस्टर को. पॉलिटिशियन हा सीट क्या उसमें उसमें. हिस्सा देना. पड़ेगा मैक्सिमम पॉलिटिशियन मैक्सिमम पॉलि. तमिलनाडु आप आपको पता नहीं होगा तमिलनाडु. में 60 पर ऑफ यूनिवर्सिटीज आर ओन बाय. पॉलिटिशियन. [संगीत]. 60 और हाईएस्ट यूनिवर्सिटीज किसी स्टेट. में है इंडिया में तो वो तमिलनाडु में है. और वो सब पॉलिटिन 60 पर 70 पर पॉलिटिन की.
है टेल मी आज के जमाने में आपको लगता है. डिग्री लेना या कॉलेज में पढ़ाई करना. जरूरी भी. है मुझे लगता है कि कॉलेज में पढ़ाई करना. जरूरी नहीं है पर आपका जो दूसरा सवाल है. कि डिग्री लेना वो जरूरी है या वो बेसिक. एजुकेशन है मतलब जब हम बोलते हैं ना कि आज. एंप्लॉयर है एंप्लॉयर है एंपलॉयर्स को एक. टेक के अलावा बाकी किसी भी दूसरी जॉब में. ना पहली चीज वो देखते हैं कि यार क्या. पढ़ा है इसने ब ये चेंज नहीं हो रहा आई. वाज रीडिंग 2023 का है कि सिर्फ 62 पर.
एंप्लॉय ही भी अब मांगते हैं पहले ऑलमोस्ट. 100% मांगते थे मैं मैं ऑर्गेनाइज एंप्लॉय. की बात कर रहा हूं राइट एमएसएमई वगैरह की. बात नहीं कर रहा तो ऑर्गेनाइज एंप्लॉय में. पहले 100% के आसपास मांगते थे 90 के आ. मांगते थे अभी पडेम के बाद धीरे-धीरे. बढ़ते गया एंड 2022 और 2023 का डेटा है कि. सिर्फ 62 मानते है एक जॉब्स में हो सकता. है ना मांग ओवरऑल 62 ही एंप्लॉयर जो. मांगते धीरे-धीरे और वो कम हो रहा तो आने. वाले साल में तो शायद कोई डिग्री पूछेगा.
भी नहीं मैं मैं बताता हूं एक इसको एक. एग्जांपल के साथ देता हूं कुछ कंपनीज ना. अपने रिएजुकेशन सेंटर्स ओपन करती है हम. बड़ी-बड़ी कंपनीज है इंडिया में ब स जो. हायर करके फिर उनको खुद पढ़ाती है खुद. पढ़ाती है एक साल की एजुकेशन देती है 6. महीने से 18 महीने होता है सबके को पर वो. भी कंपनीज ना 12थ पास को नहीं लेके जाती. यार क्योंकि एक मैच्योरिटी लेवल भी आता है. आपके पास साथ में मतलब मैं बात इसको. डिग्री तक लेकर जा रहा हूं कि जब हम. डिग्री की बात करते हैं अगर डिग्री नहीं. है तो फिर आपकी क्या उम्र है और आपकी क्या.
क्वालिफिकेशन है 12थ पास अच्छा अब अगर 12थ. के बाद में डिग्री नहीं करी तो क्या किया. बट किस क्या स्किल्स हो तो उसको डिग्री की. जरूरत क्या है एग्जांपल आज आपको कौन से. पोजीशन के लिए हायर करना है गिव मी एन. एग्जांपल. मुझे वीडियो एडिटर के लिए हार करना वीडियो. एडिटर के लिए हायर करना उसके बाद कौन सी. डिग्री हो क्या फर्क पड़ता है ओके वो अगर. कॉलेज से वो स्कूल से निकला 12थ पास हुआ. और उसके बाद उसने भाई ने एक साल ऑनलाइन.
youtube1 दो कोर्सेस देख के अपने बढ़िया. सीख लिया उसने और साथ में एडिटिंग करता. रहा खुद ही लोगों की इधर उधर से वीडियोस. उठा लिए क्लिप्स उठा लीय पॉडकास्ट में से. कुछ उठा लिया बना लिया साल भर में उसने. अपना बढ़िया पोर्टफोलियो बना दिया आप कैसा. आए एक साल बाद कि देखो सर मैंने साल भर. में ये किया है मैं ऐसी तरीके से एडिट कर. सकता हूं हायर कर लो मुझे आप थोड़ी पूछोगे. उससे कि भाई तेरी डिग्री क्या है मैंने लि. मैं तो ये अपना खुद का एग्जांपल बताता हूं. कि मैंने भी लिया मेरा आज का काम काम तो. उससे पूरा हो रहा है पर क्या मेरा जिंदगी.
भर काम उससे पूरा होता रहेगा नो बट. क्योंकि मुझे फिर उसके बाद उसे और स्किल्स. ट्रेन करना है वो वैसे भी कॉलेज नहीं. सिखाता मैं डिग्री वाला भी हायर कर लू तो. इधर आने के बाद मुझे लीडर तो वैसे भी. बनाना पड़ेगा उसको मुझे लगता है देखो यार. कि सिर्फ सिर्फ और सिर्फ जब हम बात करते. हैं कि स्किल्स की मेरा काम तो पूरा हो. जाता है पर मैं व जो बाकी चीजें डिग्री के. साथ आती है जैसे क्या मैनर्स आते हैं. सिविलाइजेशन आती है लोगों से बात करने का. तरीका आता है और यही हम डिफरेंस दे हम.
डिफरेंस बात करते हैं कि एक के पास डिग्री. है एक को हम बोलते थे पढ़ा लिखा हम जब. पहले बोलते थे हम लोग डिग्री है तो पढ़ा. लिखा है और एक है जो पढ़ा लिखा नहीं है जो. पढ़ा लिखा नहीं है दोनों में डिफरेंस क्या. है अब स्किल्स एक चीज आ गई स्किल्स कि. दोनों ने स्किल्स ले ली और हम बोल रहे हैं. कि अब दोनों को बराबर कर दो तो वो डिफरेंस. तो रहेगा यार ठीक है आपका काम बन रहा है. उसका काम उसका भी काम बन रहा है आपका भी. काम बरहा डिफरेंस तो रहेगा यार जैसे मैं. एमबीए कॉलेज गया था छोड़ दिया मैंने तोरे. पास डिग्री नहीं है नहीं मैं कह रहा हूं. मैं मतलब एग्जांपल दे रहा हूं मैं बीबीए.
की भी डिग्री नहीं पर मैं कह रहा हूं हर. हर बच्चा राज बन जाए ये गारंटी नहीं है. मैं मैं उसकी बात ही नहीं कर रहा हूं मैं. बोल रहा हूं कि क्यों डिग्री नहीं है. इसलिए नहीं मुझे भी डर था कि मेरे को कभी. आगे मैं फ्यूचर में बढ़ पाऊंगा नहीं बढ़. पाऊंगा ये सारी चीजें थी इसकी वजह से ही. मैंने कॉलेज जॉइन किया था राइट बट कॉलेज. जवाइन करते से एक डेढ़ साल बाद मेरे कॉलेज. साल भर मैं गया बहुत अच्छा था मुझे मजा भी. आया बहुत सारी चीजें सीखी भी ग्रेट स्टफ. बट उसके साथ मुझे पता चल गया कि बाहर. दूसरी चीजें जो है मैं ज्यादा सीख लूंगा. जो कॉलेज में नहीं सिखाते हैं तो.
प्रोबेबली मेरी लाइफ ज्यादा बेटर हो जाएगी. और मैं वो चीजें सीखने लगा यार एक इसम. मुझे एक सवाल आता. है यह जो होटल मैनेजमेंट होता है यह क्यों. बीबीए इन होटल मैनेजमेंट होता है यह क्यों. नहीं बोलते कि सिर्फ आप खाना बनाना सीख के. आ जाओ 12थ करके और हम आपको ले लेंगे एक और. बोलता हूं इंडियन आर्म फोर्सेस है जब ये. रिक्रूटमेंट करती. है एसएससी एग्जाम के बाद में ये क्यों. उसको डिग्री करवाती है खुद अपने खर्चे पे. बीटेक भी करवाती है बीबीए भी करवाती है.
बीसीए भी करवाती है तो मैं इसको काउंटर कर. रहा हूं कि यार हम लोग जब बार-बार बोल रहे. हैं कि डिग्री की जरूरत नहीं है तो फिर ये. क्यों करवा रहे हैं देखो कुछ इंडस्ट कुछ. जगह हैं जहां पे बहुत ज लेकि लॉयर बहुत. जरूरी है डॉक्टर बहुत जरूरी है राइट कुछ. स्पेसिफिक जगह टेक्निकल कोर्सेस वहां पे. तो जरूरी है राइट खाना बनाना भी एक बहुत. लाइक होटल मैनेज एट हॉस्पिटैलिटी भी बहुत. टेक्निकली है बहुत रेयर लोगों को खुद से. याद आता है या तो उनको सीखना पड़ता है. किसी के अंडर में जाके बहुत टाइम तक अपना. एक्चुअली रगड़ना पड़ता है जिसको बोलते हैं. पूरी मेहनत करनी पड़ती है ऑन द जॉब.
ट्रेनिंग या उनको कॉलेज वाले जाके सीखना. पड़ेगा राइट तो टेक्निकल नॉलेज में ये सब. सीखना पड़ेगा पर जो चीजें टेक्निकल नहीं. है वैसे भी तुम्ह ऑन द जॉब ही करना पड़ेगा. मैं इसको इसको इस तरह बोलता हूं यार कि. अगर डिग्री नहीं तो फिर वोकेशनल जरूरी है. हां पूरी करो पर पढ़ाई वोकेशन भी डिग्री. मतलब एजुकेशन जरूरी है डिग्री जरूरी नहीं. ट्स व्ट इवन आईम सेइंग कि जो भी चीज में. आप जा रहे हो वहां पढ़ना जरूरी है और वही. चीज के बारे में पढ़ना और घुसना जरूरी है. डिग्री जरूरी है क्या मैं ये पूछ रहा हूं. मैं बिल्कुल अभी भी बोलूंगा कि डिग्री. बहुत जरूरी है यार इसलिए नहीं कि मैं मैं.
बैक कर रहा हूं इसको मेरी कोई यूनिवर्सिटी. है मेरी कोई यूनिवर्सिटी नहीं है पर मैं. फिर भी बोलता हूं कि यार ये बेसिक है यह. बेसिक है आप बिल्कुल कोडिंग सीखो साथ में. आप बिल्कुल वीडियो एडिटिंग सीखो साथ में. पर आज हो सकता है जॉब मिल जाएगी पर ये. लाइफ लॉन्ग शायद ना चले यार बिना डिग्री. पर जो टॉप टॉप कॉलेजेस में नहीं गए उन्हें. तो डिग्री थोड़ी जरूरी है अच्छा अब बताओ. अगर अगर कभी चांस मिल गया बाहर जाने का. इंडिया से बाहर जाने का वो तो रेटिंग की. डिग्री प देंगे यार क्या करेंगे रेटिंग आप. आपकी जो क्रेडिट रेटिंग होगी वही डिग्री.
पर. देंगे मीनिंग समझ के बाद बाहर नहीं जा. सकता नहीं 12 के बाद में जॉब अगर करने. जाओगे तो वो आपकी मिनिमम क्वालिफिकेशन. चाहेंगे कि 12थ के बाद क्या है मतलब हमारा. सिस्टम है 10 प् मुझे पता नहीं है यू कन. टेल मी मोर 10 प् प् 3 तो आपके क्रेडिट. मैच नहीं होंगे मतलब इंडिया में तो अप अपन. कर लेंगे अपने को कोई दिक्कत नहीं अपन कर. लेंगे अपन क्योंकि अ लोग मान भी रहे तो कर. लेंगे पर बाहर जाने का रूट बंद हो जाएगा. आपका इट इ वन ऑफ द एक चीज बता रहा हूं तो. ये बताओ ना ऐसे ये पता ही नहीं है मुझे कि. से बाहर लोग जाके काम नहीं कर सकते अगर. उनके पास कॉलेज की डिग्री नहीं नहीं कर.
पाएंगे जैसे इंडिया में भी कई सारी जॉब्स. है जिस परे आज भी लिखा हुआ आता है कि. एलिजिबिलिटी इतनी चाहिए हमको बहुत सारी. जॉब्स आप बता रहे हो कि जिसपे नहीं चाहिए. पर बहुत सारी जॉब्स है जिसमें आज भी चाहिए. कि ये डिग्री करी हो और मुझे लगता है कि. बच्चों को आगे बिना हम जो बोले जा रहे हैं. कि डिग्री जरूरी नहीं नहीं बोलना चाहिए या. बेसिक एजुकेशन है सिस्टम ऐसा बनाया है. करते हैं पूरा करवाते हैं इनसे साथ में और. भी जो चाहिए इनको वोकेशनल बनाते हैं हर. आदमी ब्लू कॉलर या वाइट कॉलर के लिए नहीं. बनाए हर एक आदमी स्टार्टअप नहीं करेगा हर. एक आदमी.
अ इंजीनियर नहीं बनेगा हर आदमी सीए नहीं. बनेगा हमें हर लेवल के लोग हर हर लेवल के. लोग चाहिए सोसाइटी में चलाने को तो हमें. डिग्री वाले भी चाहिए नॉन डिग्री भी चाहिए. देखो कहीं ना कहीं हम बात सेम कर रहे हैं. बट वर्ड्स दूसरे बोल रहे हैं हो सकता है. राइट क्योंकि मैं भी बोल रहा हूं पढ़ना. जरूरी है आई हैव सीन रिपर कशंस. कंसीक्वेंसेस देखे मैंने जो नहीं पढ़ते. हैं बहुत प्रॉब्लम्स होती है राइट पढ़ाई. जरूरी है पढ़ाई लेकिन डिग्री लेने के लिए. करना है नॉट जरूरी पढ़ाई इसलिए करनी चाहिए.
कि आप और बेटर बनो आपको जिस जगह में या तो. इंटरेस्ट है जहां से पैसे बन सकते हैं वो. वो चीज करने स्किल तो पढ़ाई स्किल्स के. लिए जरूरी है पढ़ाई आगे बढ़ने के लिए. जरूरी है पढ़ाई इसलिए जरूरी नहीं है कि. यार मेरे को एक मेरे घर में बीबीए की. डिग्री लगानी है हां मतलब डिग्री को ना. एक्चुअली कमोडिटी बना दी ग ना हां मतलब जो. जिस तरीके का अभी जो होड बन गई है ना. डिग्री चाहिए डिग्री चाहिए डिग्री चाहिए. क्या करेंगे डिग्री का नहीं डिग्री बिकी. है एक्चुअली डिग्री ब एकली मतलब कोई भी. बेच रहा है कहीं प भी बेच रहा है तो क्या. करेंगे इस डिग्री का जब आता ही नहीं है.
कुछ करना माइंडसेट चेंज करना पड़ेगा. डिग्री चाहिए क्यों जैसे प दैट इज अ बेटर. क्वेश्चन जैसे पीछे माइंडसेट चेंज हो गया. था कि डिग्री चाहिए प्लेसमेंट के लिए हम. डिग्री चाहिए नौकरी के लिए डिग्री चाहिए. शादी के लिए डिग्री चाहिए नौकरी डिग्री. चाहिए शादी के लिए डिग्री चाहिए नौकरी के. लिए डिग्री चाहिए अपने बच्चों को बताने के. लिए कि आपने क्या किया था हम पर डिग्री. चाहिए एक्चुअली इंडिपेंडेंट होने के लिए. और आपका पॉइंट सही है राइट जिन लोगों को. क्लेरिटी नहीं जिनको पता ही नहीं जिनके. आसपास ना मेंटरशिप है ना उनको यह पता. आसपास उन्होंने कोई एग्जांपल नहीं देखा वो. एक छोटे से गांव में शहर में बैठे हुए हैं.
उनको पता नहीं करना क्या है लाइफ में आगे. र ट यर रटू टियर थ तो प्रोबेबली देन उनको. वो एक मेंटर फिगर ढूंढने के लिए या ओवरऑल. तैयार होने के लिए अच्छे कॉलेज चले जाना. चाहिए कि मेरे जो कजिन है अभी छोटे वो लोग. बात कर रहे हैं कि कॉलेज में जाना है क्या. करना है राइट मेरा फर्स्ट क्वेश्चन उनसे. यही होता है कि आपको पता है वो करना क्या. है तो वो बोलते नहीं अगर नहीं पता है तो. फिर आप कॉलेज चले जाओ बिकॉज देन वो तीन. साल चार साल में कॉलेज आपको अच्छे कॉलेज. अगर आप जाओगे तो अच्छा कॉलेज आपको बहुत.
सारी चीजें सिखा देगा आपको 101 तरीके से. एक बेहतर इंसान बना देगा आपको कुछ. क्लेरिटी दे देगा और मे बी आपके आसपास एकद. प्रोफेसर आपको इंस्पायर कर जाएगा तो आपको. लगा ये प्रोफेसर का सब्जेक्ट अच्छा है इसी. फील्ड में कुछ अपने को आगे करना है सो देन. प्रोबेबली वी विल डू इट सो. दैट्ची इसके बाद आई है जब मैंने एक्चुअली. बहुत सारे लोगों के साथ बहुत वर्ल्ड के. टॉप एक्सपर्ट्स और अचीवर्स के साथ के बात. करिए तब से मेरी ये सोच बनी आई कैन बी रंग.
नहीं नहीं नहीं नहीं बिल्कुल सही है मतलब. मेरी प्रॉब्लम आती है टियर टू टियर थ्री. सिटी से सही जगह पहुंच रहे हो आप कि जहां. एक्चुअली बताने वाला कोई नहीं है तो. उन्हें फिर अच्छे कॉलेज उनको एक कॉलेज. ढूंढ लेना चाहिए अब प्रॉब्लम वही है कि वो. अफोर्डेबल भी नहीं कर स अफोर्डेबल भी नहीं. है उनके पास में हम तो उनके पास सॉल्यूशन. क्या है अब तो आप बताओ क्या सलूशन है अब. मुझे अब मैं ये बोलता हूं कि हमारे जो देश. में जो टॉप आईआईटी आईआईएम एनआईटी की हम. बात करते हैं अब इन्होंने स्टार्ट किया है. ऑनलाइन एजुकेशन हम अब स्टार्ट किया. इन्होंने अभी पिछले दो साल से इन्हीं की. फैकल्टी उन बच्चों को पढ़ाए गी जो रिमोट.
एरियाज में बैठते हैं थ्रू टेक्नोलॉजी. ऑनलाइन जो कि पहले पॉसिबल नहीं था इनकी. फीसस भी रेगुलर की इतनी भारी-भारी फीसस है. जहां पे ये बच्चे पहुंच भी नहीं सकते इनका. अफोर्डेबल भी नहीं है पर आज ये. इंस्टीट्यूट आपको छोटे सी जगह पर बैठा के. ऑनलाइन अपनी फैकल्टी से पढ़ाई करवाएंगे यह. चेंज है ऑनलाइन का अच्छा और सबसे बेस्ट. बात जो हमारे देश की गवर्नमेंट ने किया है. इसपे कि जो टॉप य टॉप क्रीम जिनको हम. यूनिवर्सिटीज बोलते हैं सिर्फ उन्हीं को. अलाव किया ऑनलाइन एजुकेशन देने के लिए हर. किसी को अलाव नहीं किया 1150 यूनिवर्सिटीज.
है हमारी सिर्फ 80 यूनिवर्सिटीज को अलाव. किया है ऑनलाइन एजुकेशन की ऑनलाइन एजुकेशन. देने के लिए तो ये जो हम बात कर रहे थे उन. यूनिवर्सिटीज की रियल एस्टेट एजेंट की. उनमें से कोई यूनिवर्सिटीज को ऑनलाइन. अप्रूवल नहीं मिली है. क्यों पढ़ाते नहीं आ उनको क्योंकि ढंग से. नहीं पढ़ा नहीं उन्होंने अच्छा कर दिया कि. ना क्वालिटी जो देता है उसी को देंगे हम. लोग ऑनलाइन क्योंकि अग ऑनलाइन भी हमने. सबको दे दिया तो फिर तो फिर सब कचरा हो. जाएगा तो ऑनलाइन उन्होने दिया सिर्फ क्रीम. को जो टॉप यूनिवर्सिटी बट ऑनलाइन तो आज. कोई पढ़ा सकता है आप पढ़ा सकते हो अगर आप.
यूनिवर्सिटी की बात कर रहा हूं मैं. अप्रूव्ड यूनिवर्सिटीज ऑनलाइन जो पढ़ाती. है मतलब आई मीन पढ़ा तो कोई भी सकता है प. पूरी दुनिया पढ़ रही है सारे अटेक्स पढ़ा. रहे हैं पर यूनिवर्सिटी जो अलाउड करी गई. है वो ऑनलाइन जो क्वालिटी देती है उन्हें. ही अलाउ किया गया है ड यू थिंक ट्स द. फ्यूचर ट्स द फ्यूचर दैट कैन ओनली सेव अस. मतलब इतनी बड़ी मैन फोर्स जो है उसको. स्किल्ड करना है उसको तैयार करना है उसको. छोटी जगह से उठा के बड़ी जगह पे लाना है. मैं बताता हूं यार आज ना एक ड्राइवर भी जो. ड्राइवर जो ड्राइवर बना हुआ है वो भी. चाहता है कि ना मैं डिग्री ले लू तो थोड़े.
से ऊपर आ जाऊंगा या एक या फूड डिलीवरी जो. कर रहा है वो भी सोचता है कि यार कि मैं. एक लेवल ऊपर आने के लिए मैं क्या स्किल्स. है मेरे पास में मैं मैं स्कूटर चला के. छोड़ के आ रहा हूं ये मुझे ऊपर आने के लिए. क्या करना होगा अच्छा अब यार वो ना कोई. बड़ा टेक्निशियन भी नहीं बन सकता क्योंकि. उसकी पीछे की पढ़ाई इतनी बड़ी नहीं है पर. वो सोचता है मैं बीए करके ना कम से कम. कंपनी में जाके बोलूंगा सर मैंने बीए कर. ली है मेरा आप जॉब रोल बड़ा कर दो तो. करेगी यार उसको मतलब इवॉल्व करेगी ना उसको. यही चीज इवॉल्व करेगी डू यू थिंक अभी भी. कंपनीज में बहुत सारी कंपनी में आप ज्यादा.
रियलिटी के पास में हो और इतने सारे. बच्चों से मिलते हो अभी भी कंपनीज मांगती. है डिग्रीज कि एक डिग्री वाला बच्चा और एक. नॉन डिग्री वाला बच्चा है तो डू यू थिंक. कि डिग्री वाले बच्चे को आसानी से फुट इन. द डोर मिल जाता है बिल्कुल मिल जाता है एक. एज तो लेके आता है वो एक अपना काम तो पूरा. करके आया है वो मतलब एक बच्चा जो ड्रॉप. आउट हो गया जिसने पढ़ाई पूरी नहीं करी और. एक बच्चा जिसने अपना अपना तीन साल लगाए. डिग्री लाने में तो मैं सोचता हूं तो है. मतलब हम उस टेक्निकल साइड को छोड़ दें. जहां पे हम वीडियो ग्राफिक एडिटर इन सबको.
छोड़ रहे हैं इन सबको छोड़ दिया हमने मतलब. इनके अलावा इनके अलावा बेसिक जॉब क्या है. सेल्स की सेल्स की बेसिक जॉब है तो हम. वहां देखते हैं या कि इसने बेसिक अपनी. बेसिक काम इसने पूरा किया नहीं किया नहीं. किया इसने पढ़ाई छोड़ दी तो फिर मुझे लगता. है यह नॉन सीरियस है यार इसने सीरियसली. नहीं पढ़ाई करी यार य क्यों मैं इसको लाऊ. यार चलो इसको एक एक और साइड से बात करते. हैं इसको कि जब हम बात करते हैं कि हम लोग. प्रोफेशनल वर्ल्ड में हमें डिग्री नहीं. चाहिए हमें स्किल चाहिए तो इसको बोलते हैं.
एजुकेटेड और अनएजुकेटेड या स्किल्ड या. अनस्किल्ड हर देश का क्रिमिनल रिकॉर्ड यह. कहता है कि जो जैसा आपने कहा जो अनप्लड है. अनएजुकेटेड है फ्रस्ट्रेटेड है वो शिकार. किन चीजों का होता है वो खराब चीजों का. शिकार होता है मतलब वो खराब गलत जगह चले. आता है तो मैं वहां से नॉन सीरियस पर. पहुंच रहा हूं कि जो डिग्री नहीं करके आया. ना वो मेरे को लगता है कि वो नॉन सीरियस. है उसने अपना काम पूरा नहीं किया मुझे ना. ऐसे पर्सनली ऐसा लगता है जो हम बात कर रहे. थे एजुकेशन सिस्टम प मुझे पर्सनली ऐसा. लगता है. कि इंडियन एजुकेशन सिस्टम है ना यह जो.
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और यह जो पूरा. करप्ट सिस्टम है ना इनकी वजह से बहुत नाम. खराब हो गया और मुझे एक और चीज लगती है. कंट्री में ना आज पर्सनल ये मेरा. ऑब्जर्वेशन है टीचर्स ना बहुत बाप है वो. सिस्टम में रह रहे के इधर उधर खराब हो गए. हम मैं इतने टीचर से मिला हू जो टियर टू. टियर थ्री कॉलेजेस में भी है उनसे बात. करने के बाद मैं फ्लाइट साइट में जब भी. कभी मिलता हूं या किसे बाद उनसे बात करने. लगता है ये मेरा टीचर क्यों नहीं था लाइक. दैट काइंड ऑफ कन्वर्सेशन इतना नॉलेज है. लोगों में इतनी सारी चीजें उनको पढ़ाना भी.
है बट उनसे एक छोटे कॉलेज में छोटे स्कूल. में 25 काम दूसरे इतने करा देते हैं कि. बेचारे पढ़ाने का काम नहीं मिलता है वो. कॉलेज में जाके हां यार चलो आगे बढ़ जाओ. ये बिल्कुल सही कह रहे हो आप कि टियर थ्री. में ज्यादा टैलेंटेड टीचर्स हैं जितने की. टियर वन में है और वो बहुत एंपैथेटिक भी. है वो चाहते भी है कि उनके बच्चे आगे बढ़े. बढ़े बिल्कुल क्योंकि वो ना अपनी जॉब वो. टीचर्स हैं वो अपनी जॉब ना पैसे के लिए. नहीं कर रहे वो एक्चुअली वो वो गुरु गुरु. जी हैं वो यस जो कम मिलते हैं उन्हें अलाउ.
नहीं कर रहे हमारा सिस्टम कि वो अच्छे से. पढ़ाए और आगे बढ़े और हमारी कंट्री में. बहुत सारे एक्सपर्ट्स आ गए हैं बहुत सारे. लोग हैं बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको मे. बी अच्छी पढ़ाई मिली या जिनको अच्छी नहीं. पढ़ाई मिली और उन्होंने लाइफ में बहुत. उखाड़ लिया और बड़ी लेवल में पहुंच गए अब. वो पढ़ाना चाहते हैं हम बहुत लोग हैं ऐसे. जो कर रहे हैं और वही जाके कॉलेज में बंद. रहे सो आई फील टीचर्स आर नाइस सम वेयर और. ये टॉप 100 यूनिवर्स टॉप 80 यूनिवर्सिटीज. जो हैं वो हायर भी फिर ऐसे ही लोगों को. करती है पढ़ाने के लिए हां वो तो उनके तो. क्राइटेरिया लग तभी वो उस लेवल पे हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस में है वो लोग.
सो इन ऑल द कन्वर्सेशन वाज कि पढ़ाई करना. जरूरी है पढ़ाई करना बहुत जरूरी है अब वो. डिग्री के लिए करना जरूरी है कि नहीं. जरूरी है वो अलग बात है बस पढ़ना जरूरी है. तुम लाइफ में कहीं आगे बढ़ जाओ आगे बढ़ जा. पहले के जमाने में तो होता भी था ऐसा ना. राइट उनके लिए न्यूज़पेपर वाज अ डेली. पढ़ाई कि दुनिया में क्या चल रहा है वो. लोग पढ़ते थे सही बात है क् कोई क्यों. पढ़ता है आज भी न्यूज़पेपर कोई क्यों. पढ़ता है कोई फोर्स थोड़ी डालता है पर आप. चार लोगों से मिलोगे आप कुछ टॉपिक पे तो. बात करोगे तो हमारे पास कुछ कॉमन टॉपिक तो.
होगा कि यार वो ऐसा हो रहा है ऐसा हो रहा. है ऐसा कोई फोर्स नहीं कर रहा आपको ओके. टेल मी एक अच्छे कॉलेज में और एक बुरे. कॉलेज में क्या डिफरेंस होता है फैकल्टी. का डिफरेंस होता है नहीं जैसे लोग अगर जो. देख रहे हैं आज जितने भी लोग देख रहे हैं. अब उनके पास अपन एक्चुअली इजी बनाते हैं. उनके लिए ठीक ठीक है 70 पर से 75 पर से कम. जिसके भी आए 75 से ऊपर वाले तो अच्छे. कॉलेजेस में चले जाएंगे 75 से कम जिसके आए. अब उसके लगे पड़े हैं अकॉर्डिंग टू यू इन. दिस कंट्री हम अब उनके पा ऑप्शन नहीं है. कि मैं टॉप 80 यूनिवर्सिटीज में जाऊ तो.
उनके ऑप्शन क्याक है उनके पास ऑप्शन है. अकी ऑनलाइन डिग्री सेलेक्ट करें इन टॉप. कॉलेजेस से यूनिवर्सिटी से और साथ में कोई. ना कोई वोकेशनल ट्रेनिंग कोर्सेस जो उनको. लगता है जिसमें उनका पैशन है चा वो कोडिंग. में है चाहे वो खेलने में है चाहे वो. भागने में है जो भी उनका पैशन है वो पूरा. करें चाहे वो बॉडी बिल्डिंग में है पर एक. अच्छे कॉलेज की ऑनलाइन फैकल्टी से मिलना. लोगों से मिलना ऑनलाइन यह जरूर करें छोड़े. ना 12थ के बाद में अगर अच्छा कॉलेज ना. मिले ना तो हताश ना हो जाए कि यार अब मेरी. लाइफ से सब खत्म हो गया अब मेरे पास कुछ.
नहीं है यार नहीं तेरे पास चांस है अभी भी. तू भी आईटी की डिग्री ले सकता है तू भी. आईएम की डिग्री ले सकता है तू भी देश के. और बहुत अच्छे-अच्छे जो कॉलेजेस है उनकी. डिग्री ले सकता है अभी अपने आप को पचड़ा. मत समझ कि सब तेरे लाइफ के ऑप्शन खत्म हो. गए है तेरे पास ऑप्शन तू छोटे गांव से है. छोटी जगह से कोई दिक्कत नहीं है तू भी. बड़ी जगह पर पहुंच जाएगा पर पेशेंस रख. एडमिशन ले और साथ में जो काम करना है तेरे. को कर ओके एंड अगर मैं तो भी कंफ्यूज हूं. मुझे नहीं पता कि क्या करना है क्या नहीं. करना है तो क्या मैं छोटे कॉलेज में जाऊ.
नहीं यार नहीं बिल्कुल मत जाऊ हेल्प करो. मेरी और देश की उनको बंद कराने. में रियली इतनी खराब हालत कुछ नहीं मिलेगा. उनसे कुछ नहीं मिलने वाला व थोड़ा भी. गाइडेंस वगर कुछ कुछ नहीं है यार बहुत. बहुत हालत खराब है उनकी टॉप यूनिवर्सिटी. और एक बेकार यूनिवर्सिटी में क्या क्या. डिफरेंसेस होते है टॉप 80 में ऐसा क्या है. जो यह दूसरे जो प्राइवेट रियल स्टेट लोग. से कंपनी चला रहे हैं टॉप 80 एक तो ना. प्राइवेट फंडेड नहीं है या मैं बोलूंगा कि. बहुत ही माइनर यूनिवर्सिटीज है बहुत ही कम.
यूनिवर्सिटीज हैं जो कि प्राइवेट फंडेड है. और फिर भी अच्छी टॉप 80 में आती है. जैसे जैसे अमृता विश्वविद्या विद्यापीठ है. केरला मणिपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन माहे. माहे फोर्थ एनआईआरएफ रैंक है हमारे देश. में पहली तीन रैंक आईटी के पास है और. फोर्थ रैंक माहे के पास है विच इज. प्राइवेट अगेन सिक्स्थ इज अमृता. विश्वविद्या बीटम और एमटी फॉर दैट सेंस तो. है कुछ प्राइवेट प्लेयर्स हमारे पास में. जो उस टॉप 80 में आते हैं तो पहला डिफरेंस.
तो यह है कि मेजॉरिटी ऑफ द टॉप 100 आर नॉन. फंडेड बाय प्राइवेट प्लेयर्स अ फैकल्टीज. दूसरा बड़ा डिफरेंस. है इंफ्रास्ट्रक्चर तीसरा डिफरेंस होगा कि. इनके पास जो अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है और. बाकियों के पास वो नहीं मिलेगा आपको अच्छा. इंफ्रास्ट्रक्चर मतलब मतलब कि सारी सारी. फैसिलिटी उनके कैंपस में मिलेंगी आपको वो. ये तो रियल स्टेट प्लेस भी तो दे देते हैं. वो वो तो खैर बाहर ही है इस इस रेस से. बाहर है अच्छे की रेस है वो अच्छा तो. मेनली फैकल्टीज का डिफरेंस फैकल्टीज का.
बहुत बड़ा डिफरेंस है एक टीचर आपको. सब्जेक्ट से प्यार करा सकता है या नफरत. करा सकता और नफरत करा सकता है ये सही बात. है इनफैक्ट मैं बोलता हूं कि एजुकेशन से. प्यार करवा सकता है या नहीं करा सकता है. ट्रू क्योंकि क्लास फन में तो हमारी एक ही. टीचर होती है जो सारे सब्जेक्ट पढ़ाती है. हमको अगर वहीं से दिक्कत चालू हो जाती है. ना तो फिर वो आखिरी तक वो दिक्कत चलती है. और अगर वो अच्छी हो गई प्यार हो गया ना. सब्जेक्ट से सबसे पढ़ाई से तो वो आगे तक. चलता है तो फिर जो अच्छी यूनिवर्सिटीज. उसमें से कौन सा कोर्स करना चाहिए ये कैसे. पता चले लोग हाउ ड हाउ डू पीपल गेट गेट टू.
नो डिसाइड कैसे करें सबसे बड़ा क्वेश्चन. तो यही होता है पहले तो हमारे ना हमें. टीचर्स बता देते थे फिर हमारे मां-बाप बता. देते फिर थर्ड हमारे दोस्त जहां बोलते थे. हम वहीं चले जाते थे अब ना कई सारे. साइकोमेट्रिक टेस्ट भी आ गए ऑनलाइन जो. करीबन एक घंटे के होंगे आप उनमें वो सारे. सवाल दो जनली बैठो वो आपसे सब कुछ पूछेगा. और आपको आपके करियर इंटरेस्ट तक ले आएगा. रियली चच आर रियल साइको लेट होते हैं ब. नहीं लेजेट है ये.
लेजिटिमाइज भेज देना मैं आई एम श्यर मतलब. मैं भेज दूंगा आपको तो ये पहले खुद आप. करके देखना कि ये साइकोमेट्रिक टेस्ट है. क्या मतलब दीज आर डेवलप बाय वेरी गुड पीपल. ड यू थिंक करियर प्लानिंग 12थ के बाद. जरूरी है बहुत जरूरी है क्यों 12थ के बाद. मैं इसमें ना अपना एग्जांपल शेयर करता हूं. मैं बोर्डिंग स्कूल में था देहरादून.
में मैं 10थ के बाद ना 11थ क्लास में. पीसीएम में जाके बैठ गया किसी से बात नहीं. कर क्योंकि बोर्डिंग स्कूल था कोई पीटीएम. टीएम तो हुही नहीं थी मैं छुट्टियों के. बाद वापस गया और मैं फिजिक्स केमिस्ट्री. मैथ्स में जाके बैठ गया मुझे इंजीनियरिंग. से प्यार था मुझे कंप्यूटर से प्यार. था तो मेरे डैड ने इधर से फोन किया मेरे. पापा ने फोन किया मेरी प्रिंसिपल को. कि क्या लिया इसने फिर साइंस कॉमर्स. आर्ट्स क्या लिया तो मैंने बोला इसने. इंजीनियरिंग ली है तो पीसीएम लिया तो बो. नहीं आप उसको शिफ्ट करो मैं नेक्स्ट डे.
अपनी क्लास में गया तो मैम बोलती आपका नाम. नहीं है अटेंडेंस नाम कहां चला गया मेरा. तो बोले वो एफ सेक्शन में है जो कॉमर्स का. सेक्शन है ठीक है मैं आ गया यार मैंने. कॉमर्स पढ़ ली पर मैं ये बोलता हूं यार कि. बच्चे की ना ये प्लानिंग होना बहुत जरूरी. है बच्चे के दोस्त बनो उनसे बात करो यार. जैसे मेरे पापा ने ना डिसीजन ले लिया उनको. पता था कि ये लायक नहीं है एक्चुअली उनको. लगता था कि इंजीनियर के लायक नहीं है यार. तो इसलिए उन्होंने मेरे को कॉमर्स में. बिटवा दिया तो ठीक है पर मैं ये बोलता हूं. करियर प्लानिंग बहुत जरूरी है वो 10थ से. स्टार्ट हो जाती है जब जब ये तीन चॉइस आती.
है लाइफ में फर्स्ट टाइम ही चॉइस आती है. साइंस कॉमर्स आर्ट्स इन तीन चॉइस के बीच. में ना आपको जो एक चूज करना है मेरे ख्याल. से ना आगे की लाइफ वो बनाता है आपकी यार. ट्रू ओके बच्चों. को सीवी बनाना भी बहुत सीखना चाहिए राइट. इंपोर्टेंट होता है आप हेल्प करते हो. इसमें कॉलेज करते हैं बिल्कुल पोस्ट पोस्ट. कंप्लीशन ऑफ देर डिग्रीज क्योंकि ऑनलाइन. जिसने भी एजुकेशन किया उसकी एक सबसे बड़ी. प्रॉब्लम ये रह जाएगी कि वो ओवरऑल डेवलप. नहीं कर पाएगा अपने आप को वो कॉलेज नहीं.
जा पाता है तो कॉलेज नहीं जा पाता है तो. उसको सोशल स्किल्स में कहीं ना कहीं लैक व. कर लेगा सोशल स्किल्स के साथ-साथ वो जो. थोड़ी स्मार्टनेस आती है ना स्ट्रीट. स्मार्टनेस आती है वो सब में लैक करेगा तो. इसलिए मेन ट्रेनिंग उस इंसान की इस. स्ट्रीट स्मार्टनेस में थोड़ी लेट स्टार्ट. होगी वो जॉब में अच्छी जॉब में स्टार्ट. होगी राइट ऐसा कभी भी नहीं कि वो पीछे रह. जाएगा वो हो जाएगा जॉब में एक साल में वो. पूरा बराबर कर लेगा सबका ये पूरी कोशिश. करनी पड़ेगी कि उसकी इंटर्नशिप हो ऑनलाइन. वाले की ना इंटर्नशिप बहुत जरूरी है मतलब. उसको जब वो एक डेढ़ साल पड़ रहा है दो साल. पढ रहा है तब उसको तो वो बाहर निकल जाए.
क्योंकि एक डेढ़ साल वो बड़ा आइसोलेटेड. एरिया में रह रहा है कोने में रह रहा है. एक रूम में रह रहा है अब उसको बाहर निकलना. बहुत जरूरी है क्योंकि अगर वो रूम में ही. रहा तो खराब हो जाएगा रूम में रहा तो खराब. हो जाएगा तो कई ऑनलाइन यूनिवर्सिटी जो. अच्छी है वो बच्चे को बुलाती भी है ऑन देर. एनुअल फंक्शन ऑन देर फेस्टिवल न देर. स्पोर्ट्स इवेंट कि तुम भी आओ तुमको ऐसा. ना लगे कि ऑनलाइन वाले हो तो तुम दूर हो ओ. नाइस तो बुलाते हैं ये लोग ओके सोट वो. उसका टेक केयर कर रहे हैं टेक केर करते. हैं ओके एंड. ओके हम लोग सीवी की बात कर रहे थे आप बताओ. सीवी क्यों इंपॉर्टेंट है मुझे लगता है कि.
आपकी ना कुंडली है और एंप्लॉयर पंडित होता. है हम वही देख के वो हमसे सवाल करता है. जैसे पंडित नहीं देखता पंडित बोलता है. कुंडली लाओ अपनी तब बात करूंगा मैं आपसे. कुंडली नहीं लाए तो तुम घर जाओ फिर मैं. क्या मम्मी से पूछ केका पैदा हुए थे फिर. मैं तुम्हारी कुंडली बनाता हूं तो. एंप्लॉयर मेरे ख्याल से ना एंप्लॉयर देखता. है कि यार कहां से है मां-बाप ने क्या. किया है तूने क्या-क्या पढ़ाई करी है. अचीवमेंट्स क्या-क्या है क्या-क्या नहीं. है उस बेसिस पे ना वो सबसे आपसे बात करने. से पहले ना की एक इमेज बना लेते हैं अपने. दिमाग में हम मतलब मैं भी जब भी इंटरव्यू. लेता हूं तो मैं सबसे पहले एक सीवी मंगाता.
हूं और उसकी एक इमेज बना लेता हूं कि कहां. से है हां बेसिक सब कर लेते हैं तो मुझे. लगता है कि सीवी बहुत इंपोर्टेंट है बट. सीवी में ज्यादा लोग बत्ती देते हैं देना. वो वो दो मिनट में एंप्लॉयर लिका लेता है. कैसे यार आप जब सवाल करोगे जवाब करोगे ना. तो वो दो मिनट के अंदर निकल जाएगी कि ये. सही बोल रहा है नहीं सही बोल रहा है आप. एजुकेशन से स्टार्ट करो अब मैं बताऊं कई. लोगों को ना अपने 10थ के मार्क्स मार्क्स. याद नहीं है तो अच्छा सीवी क्या होता है. अच्छे सीवी में पढ़ाई के अलावा ना को करिक. एक्टिविटीज जिसको को नहीं बोलते थे हम लोग. हम कि अचीवमेंट्स स्कूल में और क्या-क्या. किए हैं स्पोर्ट्स खेला है नहीं खेला है.
स्पोर्ट्स नहीं खेला तो भी अच्छा नहीं है. और स्कूल में क्या-क्या अदर एक्टिविटीज. में इसने पार्ट पार्टिसिपेशन किया है एंड. आखिरी की डिग्री कहां से करी है और साथ. में क्या कोर्स कुछ किया है कि नहीं किया. है तो आई वुड से अच्छा सीवी होता है सीवीए. में गलतियां क्या करते हैं लोग जो झूठ. लिखते हैं यार जो झूठ लिखते हैं जैसे क्या. लिखते हैं कभी आप पकड़े हो किसी को यही जो. मार्क्स के 10 12थ के मार्क्स की बात है. और कोई भी कंपटीशन का अचीवमेंट डाल देंगे. मैथ्स का ओलंपियाड जीता था मैंने ये वो सब.
मतलब एक्चुअली पता क्या है पता क्या. दिक्कत क्या होती है वो ना बड़ा बनाना. चाहते हैं उसको हम क्योंकि जब कुछ लिखने. को नहीं होता ना तो फिर बनाने प डालना. पड़ता है उसमें कि यार ये भी डाल दूं ये. भी डाल दूं ये भी डाल दूं और वही गलतियां. शुरू हो जाती है कि मैंने ये ये भी किया. है मैंने वो भी किया है वो भी किया अब आप. उसके लिए दो सवाल पूछ लो उसके अंदर के तो. सामने आ जाता है क्योंकि ये प्रॉब्लम आती. है कि जब ना स्टार्टिंग करते हैं हम लोग. सीवी में लिखने के कुछ नहीं होता हमारे. पास या 10थ करिए 12थ करिए ग्रज कर कहानी. खत्म रखना है रखो नहीं तो. भेजो पर यही होता है कि यार जितना लंबा.
सीवी होगा ना दो तीन चार पाच पेज का होगा. ना सी उतना इंपैक्ट होगा पर नहीं ऐसा यार. छोटा बना उल्टा होता है उल्टा होता है. छोटा बनाओ क्रिस बनाओ एक पेज का बना के. खत्म करो एक पेज का ही होना चाहिए होना भी. नहीं चाहिए ओके हमने सीवी की बात कर ली. मुझे एक लास्ट बात करनी है लास्ट बात है. उसपे फेक. कंसल्टेंट तो फेक कंसल्टेंट आप अपनी. स्टोरी बता आ रहे थे कि यूजुअली बहुत सारे. कंसल्टेंट फर्जी करते हैं पैसे लेने के.
चक्कर में काम खत्म कर देते हैं राइट क्या. होता है फेक कंसल्टेंट्स को कैसे. आइडेंटिफिकेशन. नहीं करेंगे कि तू यहां चले जा वो आपको. समझेंगे और आपको ये बताएंगे कि तुझे यह. करना चाहिए अब जाके देख ढूंढ ले. मैं एक एग्जांपल देता हूं आपको कि जब हम. लोग डॉक्टर के पास जाएंगे ना वो बोलेंगे.
सर दर्द है अब सर दर्द की कोई भी दवा खाली. हो और एक बोलेगा यही दवा खाई हो वो. प्रिस्क्रिप्शन खराब खराब आएगा समझ रहे. मेरी बात आप मैं क्या बोलना चाह रहा हूं. तो जो स्पेसिफिक स्पेसर बोले कि इसी कॉलेज. में जाना इसी कॉलेज में जाना है वहां मत. जाना यार ओके. एंड एक गलत कंसल्टेंट क्या खराब कर सकता. है पूरी जिंदगी खराब कर सकता है आपकी यार. पूरी की पूरी जिंदगी खराब कर सकता है आपको. गलत कॉलेज में गलत यूनिवर्सिटी में भेज के. ना पूरी लाइफ खराब कर देगा आपकी क्योंकि य.
ये दिल से निकलती है किसी के लिए और ये यह. बड़ी इसको मैं कैसे बोलू यह ना बड़ी. रिस्पांसिबल जॉब है यार ये बड़ी. रिस्पांसिबल जॉब है टुवर्ड्स. ह्यूमन ह्यूमैनिटी के लिए कि जैसे डॉक्टर. है ना वो आपको सही दवाई देके ठीक कर सकता. है या वो गलत दवाई देके ना आपको खत्म कर. सकता है तो ये करियर में भी है यार तो ये. बहुत जरूरी है कि कोई आपसे पूछे ना तो एक. बार उसकी शकल मतलब आंखों में आके डाल के. बोलना कि यार तू ये कर ले और अपने आप से. पूछ लेना कि यार तू सही बोल रहा है इसको 3.
साल बाद ये भी यही रहेगा तू भी यही रहेगा. अच्छा नहीं होगा अगर इसका करियर खराब हो. गया तो ट्रू ये बहुत जरूरी है एंड कॉलेज. विद्या कैसे हेल्प करता है इन बच्चों की. कॉलेज विद्या अगेन एक वेबसाइट है जो कि. सारी ऑनलाइन यूनिवर्सिटीज को उनके अप्रूवल. चेक करके लिस्ट करता है और स्टूडेंट्स को. बोलता है आप आओ खुद अपनी अपनी यूनिवर्सिटी. को चुनो अपने रिव्यूज के हिसाब से अपने. फैकल्टीज के हिसाब से अपने बजट के हिसाब. से अपनी लोकेशन के हिसाब से खुद चुनो हम. नहीं आपको बताएंगे कहां जाना है बहुत बार. बच्चों को नहीं पता होता ना क्या चाहिए.
हां उसके लिए हम हेल्प करते हैं उसके लिए. हम हेल्प करते हैं तो गाइडेंस भी करते तो. आप कभी ऐसा नहीं बोलते हो कि स्पेसिफिक. यूनिवर्सिटी में जा और इधर जा नहीं फिर. वही बात ही खराब हो गई फिर तो फिर तो. काउंसलिंग ही खराब हो गई कॉलेज विद्या ही. नहीं करता है हम नहीं करते हम इनफैक्ट. एलुमना से कनेक्ट करवा देते हैं जो बच्चे. पढ़ रहे हैं उनसे बोल देते हैं कि आपको 10. यूनिवर्सिटी से बात करनी है 10. यूनिवर्सिटी के बच्चों से बात कर लो वो. बता देंगे आपको क्योंकि उससे बेहतर कोई. नहीं बता सकता आपको या एंड यूनिवर्सिटीज. के अलावा जो टेक प्लेटफॉर्म्स है जो. ऑनलाइन कोर्सेस दे रहे हैं उनसे कनेक्ट.
कराते हो आप हां जी. हां वो सही है वो आपको अच्छे लगते हैं. अगेन कि वो जो पढ़ाते हैं उनके जो बच्चे. पढ़ रहे हैं उनसे बात करा दो अच्छा तो यू. आर लाइक एन एग्रीगेटर एग्रीगेटर. [संगीत]. amazononline.in करते जो बच्चे पढ़ रहे. हैं वही जाके रिव्यूज देते हैं और उसी के. बेसिस पे रैंकिंग तैयार होती है परफेक्ट.
एनी क्लोजर थॉट्स कि जो ये एपिसोड देख रहा. है और अगर वो 12 से जस्ट निकला है तो उसके. लिए आप क्या एक मैसेज देना चाहोगे क्लोजर. है कि पढ़ाई मत छोड़ना पढ़ाई करते रहना. अच्छा कॉलेज ना मिले तो ऑनलाइन एजुकेशन है. पर पढ़ाई मत. छोड़ना टस ट्स ट्रू आई आई वुड अग्री विद. दैट मैं भी उसी बात प अग्री करता हूं कि. पढ़ाई मत छोड़ना पढ़ाई मत छोड़ परफेक्ट. थैंक यू सो मच थैंक यू थैंक यू सो मच ये. एपिसोड एंड तक देखने के लिए अगर हमने आपको.
वैल्यू दी है तो इस चैनल को प्लीज. सब्सक्राइब कर लीजिए एंड यह एपिसोड किसी. एक इंसान के साथ शेयर करो जिसको इससे आगे. बढ़ने में मदद होगी या उसको एक लाइफ का. नया नजरिया देखने को मिलेगा बिकॉज वन. कन्वर्सेशन इज इनफ टू चेंज समवनस लाइफ आई. विल सी यू नेक्स्ट टाइम. [संगीत]. ब.
[संगीत].
